Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Mar 25 - चित्रों की भाषा और लिपियों की भाषा में क्या अंतर है? कल्पवृक्ष सत्य है या असत्य? Puran
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- 0:18श्रीकांत बाबा। आपने ग्रंथ तो पूरा कर।
- 0:32दिया। लगते हाथ कुछ कठिन प्रश्नों।
- 0:40का जवाब भी दे। दीजिए।
- 0:51पहला प्रश्न ये समुद्र मंथन क्या है?
- 0:59शास्त्रों में इसकी बड़ी चर्चा। होती है कृपा।
- 1:12करके इसके रहस्य को खोलने का कष्ट करें।
- 1:31समुद्र मंथन दो प्रकार की भाषाएँ एक।
- 1:45भाषा जिसे हम लिपि। कहते हैं।
- 1:52और एक। भाषा जिसे हम चिन्ह।
- 1:55करते ऋषियों ने चिन्हों। की भाषा को खोजा था।
- 2:09चिन्हों की भाषा मुस्तिकल। है।
- 2:16चिन्हों की भाषा। की उम्र खत्म नहीं होती।
- 2:24लिपियों की भाषा मग्ज। खपाई।
- 2:29है। लिपियां तो बहुत हैं।
- 2:42अब देखिए। उदाहरण के रूप में।
- 2:50ऋषियों की भाषा में। बोलेंगे?
- 2:55तो पानी को हम लिखेंगे। हेच टू ओह हेच टू ओह।
- 3:06सारे विश्व में सारी। धरती पे एक ही।
- 3:11रूप से मान्य है। किसी भी व्यक्ति से कह दो, ऐसे
- 3:15तो। अपनी अपनी लिपि में।
- 3:21वह वरणीत कर देगा। ये रहा पानी।
- 3:25ये है। इसमें कोई गड़बड़ नहीं।
- 3:30कोई झगड़ा नहीं। होता चिन्हों की भाषा।
- 3:35में कोई झगड़ा नहीं होता। इसको हम सिम्बोलिक
- 3:38रेप्रेसेंटेशन्स। कहते थे अब्रीविएशन सिंबल्स।
- 3:46ऋषियों की यही भाषा। थी।
- 3:56ऋषू ने परमात्मा। का नाम रखा ओन।
- 4:05सभी। विदों में शब्द शुरू होता है ओम।
- 4:11किसी भी मंत्र के। आगे।
- 4:13शुरू होता है पहले। परमात्मा को याद।
- 4:15करते हैं। तो उसको चिन्हित किया।
- 4:25गया। ओम उसका नाम नहीं है।
- 4:29मेरे शव से कुछ। लोगों की भावनाओं को ठेस
- 4:34पहुंचेगी। ओम उसका।
- 4:37नाम नहीं ओम एक। चिन्ह है।
- 4:48जैसे एच टू। पानी एनएसीएल नमक सी ओह टी कार्बन
- 4:57डाइऑक्साइड। इस भाषा में कहीं।
- 5:08कोई तकरार? नहीं होती, विषम में कहीं भी।
- 5:17रह जाओ प्यास लगी, आप लिख के दे दो।
- 5:21एस चट्टुओं तो मैं पानी मिल जाएगा।
- 5:28यह एक चित्रों की भाषा। थी चित्रों।
- 5:34की भाषा बड़ी सरल होती है। लिपियों की भाषा बड़ी कठिन।
- 5:46हमारे सारे पुराण चित्रों की भाषा सिंपल सा इसलिए मैं अक्सर कहता
- 5:55हूँ। जैसे जलेबी के भीतर रस है।
- 6:04एक अंग्रेज। यहाँ पर आ गया।
- 6:08शुरू। शुरू में ईस्ट इंडिया कंपनी थी।
- 6:14उसने जलेबी देखी खाई, अच्छी तरह से जलेबी को देखा।
- 6:25तो यहाँ। हिन्दुस्तानी ने पूछा।
- 6:27क्या देख रहे हो? तो मैं ही देख रहा हूँ इसमें कोई।
- 6:40कहाँ से फ्रॉम वेयर? शुगर।
- 6:43एंटर्ड इन दी जलेबी। शुगर कहाँ से।
- 6:48घुसी इस जलेबी। में ये नहीं समझती।
- 6:52सिरिंज से नीडल से प्राणों की भाषा बड़ी वृहत है।
- 7:07लेकिन। धीरे धीरे धीरे धीरे।
- 7:12लिपियों ने ज़ोर पकड़ा। लिपियाँ बढ़ती गईं।
- 7:19भेद बढ़ते गए सभी। ने अपनी लिपियाँ बना लीं
- 7:24लैंग्वेजेज़ जिन्हें कहते हैं भाषाएँ।
- 7:29लेकिन भाषाओं में झगड़ा? है।
- 7:33चिन्हों में कोई। झगड़ा नहीं।
- 7:38ऋषियों ने तो यही भाषा सुनी थी, सरल मन के लिए यही भाषा थी और आज
- 7:44वो उतनी ही। असहज हो गई है।
- 7:46असहज हो गई। है कठिन हो गई है।
- 7:51अब देखिये हम बच्चों। को बड़ा थे।
- 7:57ए एप्पल ए एप्पल के साथ सेब का चित्र बना ये एप्पल होता।
- 8:06है। चित्रों से बच्चा सीख जाता है।
- 8:14बी बॉल ये खेलने वॉलीबॉल है ये खिलौना।
- 8:21है। चित्रों की भाषा।
- 8:27के ऊपर विवाद। नहीं होता।
- 8:32चित्रों की भाषा सभी। स्थानों पर यक्त।
- 8:36सा है एक जैसी। है।
- 8:41पुरातत्व विभाग वाले जब। खोज करते हैं खुदाई।
- 8:46करते हैं। नीचे से कुछ।
- 8:49शिला लेख। निकल आते हैं।
- 8:52पत्थरों के। ऊपर लिखे हुए कुछ लेकिन वो क्या
- 8:56करे वो लैंग्वेजेज, तब वो चलती थी आज।
- 9:04गायब हो गई। आज उन्हें कोई पढ़ने वाला नहीं
- 9:08है। काश हम लिपियों की जगह।
- 9:18चिन्हों की भाषा का इस्तेमाल। करते तो आज मानवता कहीं और होती।
- 9:26लेकिन हमने चिन्हों। की भाषा को बढ़ोतरी।
- 9:29नहीं दी। चिन्हों की भाषा को हम।
- 9:32नकारते चले गए। लिपणियों की भाषा।
- 9:37को हम बढ़ाते चले। गए और सैकड़ों हज़ारों लिपणियां।
- 9:47हजारों की तादाद में लिपियां हैं। लिखी जाती बोली जाती।
- 9:59और। लिपियों में कहीं।
- 10:02कहीं तो ऐसा भी है? एक लिपि में उसका अर्थ सात्विक
- 10:07होता है और एक दूसरी लिपि। में।
- 10:12उसका अर्थ काम सेक होता है। गाली?
- 10:14होती है। डीपियों में तकरार है।
- 10:25चिन्हों में तकरार। साइंटिस्ट बड़े समय का अर्थ।
- 10:33और चाहे हमारे सनातन के हो जिन्हें हम ऋषि।
- 10:36कहते है। चाहे आज के वैज्ञानिक।
- 10:40युग के हो। जिन्हें हम वैज्ञानिक।
- 10:42कहते है, साइंटिस्ट कहते है, रिसर्चर कहते।
- 10:46है बड़े संविदा। उन्होंने अपनी।
- 10:54ही भाषा की बात की। हम अपनी भाषा में कुछ लिखेंगे,
- 11:05लेकिन वो तुम्हारी। भाषा पे यकीन नहीं।
- 11:07करता अपनी भाषा लिखेंगे। मगर लिपियों में लिखा जाए।
- 11:23तो हम लिखेंगे भगवान शंकर पीते हैं भांगा।
- 11:27चरस लेकिन साइंटिस्टों। ने।
- 11:38जो अपनी भाषा ईजाद। की उसमें लिखा एक्यूरेस।
- 11:44सेडाइवा इंडेका। ये मेल और।
- 11:51फीमेल दो जातियाँ होती हैं। मैं बटनी पढ़ता था।
- 12:00तो उसमें हरेक फूल। का?
- 12:04बोटैनिकल नीम होता। था।
- 12:09लिपियों पे ज्यादा विश्वास। नहीं करते वो करते।
- 12:12ही नहीं विश्वास। उनकी अपनी भाषा होती है।
- 12:17आज। भी डॉक्टर्स की अपनी भाषा।
- 12:19है और सब जगह एक है। लेकिन भाषाओं, भाषाओं में अलगअलग।
- 12:34हैं। झगड़े तो ऋषियों।
- 12:39ने कोशिश की। के।
- 12:42परमात्मा को साइंटिफिक ढंग। से।
- 12:46छिन्न नृत्य किया जाए, उन्होंने कर दिया, लेकिन लिपियों ने झगड़े।
- 12:50पैदा कर दिए। ऋषि ने कहा परमात्मा का नाम ओम।
- 13:05बाबा नानक ने कहा एक। ओंकार लेकिन लिपियों ने।
- 13:14लैंग्वेजेस ने भाषाओं ने झगड़े खड़े कर दिए।
- 13:19हैं। आज राम और राधा।
- 13:27अल्लाह और बोर्ड। इनके ऊपर ही झगड़े होते हैं और
- 13:32इनके। ऊपर सियासत हो जाती है मुल्क के
- 13:35राजा। चुने जाते हैं।
- 13:40कोई लिपि अच्छी बोल गया, बस उसको राजा चुन लो।
- 13:45वो सच भूल गया या झूठ भूल गया? इससे कोई मतलब नहीं।
- 13:54वक्त अच्छा बुला रहा। अच्छा और हम तो।
- 14:01शायद आई। हैं।
- 14:04जो अच्छा बोलना जानता है। बस वो ही राज़ करता है मौनी
- 14:12बाबों। को हम कहाँ टिकने?
- 14:13देते हैं। जो सिर्फ काम कर और काम ही कर।
- 14:24और काम ही तो। करना होता है।
- 14:25राजनीतिक गुणों और क्या करना होता है?
- 14:32और जो सिर्फ वो बोले ही बोले। वो काम कब करेगा?
- 14:42लेकिन हम ऐसे शहदाई हैं। हम भाषाओं पर यकीन करते हैं हम
- 14:49भाषाओं के इतने गुलाम हो गए। कि भाषाओं की पकड़।
- 14:55में आ गए। भगवान तक को हमने भाषाओं में बांध
- 14:59दी। तुम्हें शायद पता न होगा।
- 15:07चाइना की भाषा चित्रों की भाषा भी है।
- 15:14चाइनीज भाषा आज। भी चित्रों की भाषा।
- 15:17है और बड़ी प्यारी भाषा है। चाइना की मिट्टी को एक वरदान है।
- 15:36मिट्टी का ही वरदान कौन कहो? जैसे भारत।
- 15:41की मिट्टी को वरदान है के बस। आँख मूँद लो मान लो।
- 15:49मान लो। ये भारत की मृत्यु?
- 15:55को श्रद्धा चाइना की। मिट्टी।
- 16:02अलग तरह की चित्रों की भाषा। ओरिजिनल ऑथेंटिक बदली नहीं जा
- 16:10सकती। इसलिए चाय नहीं इतनी तरक्की करके
- 16:15बहुत से लोग मुझे क्षमा करें। तो ज्यादा चारे का।
- 16:20नहीं करेंगे तो मेरा। चाइना में पैदा हुआ माउस से तुम?
- 16:41कहता। देशवासियों, अगर तुम में समृद्ध
- 16:44हो ना? और देखो, सीधी सी बात यहाँ
- 16:50समृद्धि है। तो शान है।
- 16:55और गरीबी है। तो कोई नहीं।
- 16:57पूछता बहुत पुराने वक्त में वह जान गया था।
- 17:03यद्यपि अभी ओके के। अभी मरा है कुछ 1900 कुछ।
- 17:07में मरा है वो 63 में के 64 में। बड़ा समझदार इंसान।
- 17:28हो? मैं बच्चा ही।
- 17:34था जब उसे देखने। मुझे मेरे एक चाचा ले।
- 17:42गए थे। और वह कोई काम आए थे।
- 17:49मुझे नहीं पता, लेकिन। बाद में पता लगा।
- 17:52कि वह भाखड़ा। बाकड़ा का बांध देखने आए थे।
- 17:57मौत से तो खूंखार। चेहरा चेहरे से ही।
- 18:08लगता था। यह गज़ब का आदमी।
- 18:12है। ना उसने कभी पेस्ट किया।
- 18:15ज़िन्दगी में दांत। उसके पीले।
- 18:21हँसता था। ऐसे लगता था जैसे।
- 18:23शैतान हँसता है, लेकिन दांत तो कैसे भी हो?
- 18:30चल जाएंगे कोई देखता। है।
- 18:36तुम कितनी बार कपड़े। बदलते हो?
- 18:41ज्यादा बार कपड़े। बदलना भीतर के दुख का।
- 18:44देव तक है कैसे? मैंने सुना एक स्त्री।
- 18:52है। बड़े अमीर घराने की वो सात
- 18:54साड़ियाँ रोज़ बदलती हैं। यानी एक साड़ी से सुकून।
- 19:01नहीं आया सीधा से मतलब ये है तुम कुछ भी निकाल लो।
- 19:07एक ड्रेस से सुकून नहीं आया तो छह बदलनी पड़ेगी।
- 19:13यहाँ कुछ और जहाज के ऊपर चढ़ते कुछ।
- 19:16और जहाज के। बीच में कुछ।
- 19:19और। और वहाँ उतरने से।
- 19:22पहले कुछ और उतरने के बाद। कुछ और होटल में कुछ और रिसेप्शन
- 19:26में कुछ और। क्या अर्थ है इसका?
- 19:34अगर एक ही पोशाक। सुकून दे दे।
- 19:38और सच। पूछो तो अगर सुकून आ जाए।
- 19:43तो पोशाकों को कौन? देखता है असली सवाल।
- 19:49सुकून? का है।
- 19:54उस व्यक्ति के भीतर। बड़ा सुकून।
- 19:56था मैं उससे तुंग। एक बड़ी सी चारपाई।
- 20:02रखता था वो रंग। उस पर ही सोता था।
- 20:07शायद पेस्ट। कभी उसने ज़िन्दगी में।
- 20:09कुरली नहीं की। होगी खूंखार खतरनाक लेकिन चीन को
- 20:22बना गया वो। ड्रेसों को क्या आग लगानी होती?
- 20:27है। क्या प्लान है वो?
- 20:34और मज़े की बात अगर वो कहीं जाता। अपना रंग साथ लेके।
- 20:37जाता आप? नहीं समझेंगे इस बात।
- 20:42को। लेकिन वह एक हिसाब से एक ही स्थान
- 20:49पर। रहता।
- 20:51उसी पलंग पर। सोता उसी पलंग पर उसकी रेंजर
- 20:56होती, उसकी तरंगें उसे साथ लेकर जाता और कमाल?
- 21:01की बात है। अब विदेश में जायेगा।
- 21:04तो अपना पलंग लम्बा। चौड़ा पलंग उसके ऊपर सोयेगा हद हो
- 21:12गई। ये भी कैसा?
- 21:16वहा पलंग नहीं। है क्या?
- 21:18लेकिन ये लेके जायेगा साथ में। मैं समझता।
- 21:25हूँ ये ज्यादा साइंटिफिक। माइंड का आदमी था।
- 21:29इसलिए। चाइना को बदल गया।
- 21:34ऐसी बुनियाद? पैदा किए हैं।
- 21:45जो हमारे राजनीतिक नेता नहीं पैदा कर सके।
- 21:54हमारे राजनीतिक नेता तो शांति शांति।
- 21:56करते रहे हैं। जौहरलाल वो चीज़?
- 21:59नहीं बना पाए जो को बना गया। यद्यपि।
- 22:04चाइना हिंदुस्तान के बाद आजाद। हुआ, उसने नब्ज पकड़।
- 22:12ली है रग वो जब रग। हाथ में आ जाती।
- 22:17है जब रग। हाथ में आ जाती।
- 22:25है। तो?
- 22:26बुनियादो की चीख निकल। जाती है।
- 22:30तुमने देखा दुखती रख हाथ रख कोई रग दुख रही है, उसपे हाथ रख दो।
- 22:38चीख निकलेगी। वह आदमी बड़ा बुनियादी।
- 22:45था। और वह बदल गया।
- 22:50तुम्हें शायद नहीं पता। जब वह मरा।
- 22:54मीलो लंबी। कतार सड़क के।
- 22:58बीच में से उसकी। अर्थी या जना जा रहा।
- 23:01था। और लाइन इतनी लंबी के खत्म होने
- 23:11में नहीं आयी। अंतिम दर्शन के लिए।
- 23:20बहुत ही शालीनता से। दोनों तरफ़ लोग।
- 23:25खड़े और बड़े बूढ़े। वृद्धाएं रो रहे थे।
- 23:31क्या बोल रहे थे? चीन ने अपना।
- 23:36पिता खो दिया। यहाँ तो पिता को मार देते।
- 23:47देखो दुश्मन नहीं बिगाड़ सकते कुछ।
- 23:51अपने बिगाड़ देते हैं अपने तो मार्ग।
- 23:53ही देते हैं। वृद्धाएँ।
- 24:00और व्रद्र हो रहे। थे।
- 24:02आँखों में आंसू। चीन का बाप मर गया और वाकई ही मर
- 24:12गया। लेकिन जाते जाते।
- 24:16चीन को बना गया बुनियाद रख गया ऐसी बनाव दर बुनियाद अगर मजबूत
- 24:20हो, वो ढ़ाई से ढहती नहीं, आज चीन।
- 24:25अमेरिका को ललकार। रहा है।
- 24:34राजनीति के अपने ढंग हैं। संतत्व के अपने ढंग हैं।
- 24:43और वो लोग मूड। होते हैं जो राजनीति में संतत्व।
- 24:46ले जाते हैं। या तो राजनीति का।
- 24:52यह संतत्व कर ये दोनों बिल्कुल उलट।
- 24:57बाते है इसे लोग कह। देते है बाबा अब आपने काम खत्म कर
- 25:08लिया, ग्रंथ तो बोल दिया। अब थोड़ा।
- 25:13राजनीति की तरफ़ देश की तरफ़ बिखर?
- 25:18ये नहीं हो सकेगा। मैंने कहा।
- 25:24एक संस्कार जो पड़। गया।
- 25:30बेहद दौड़ना बड़ा मुश्किल है। संत व्यक्ति अगर।
- 25:38राजनीति में आएगा तो वह कमाल नहीं कर सकेगा।
- 25:45क्योंकि राजनीति में 1000। तरह की शैतानियां चलती।
- 25:49जो उठ कफ़र। शतरंज के बिसात बसाए जाते हैं।
- 25:54धोखा दिया जाता है राजनीति अपने आप में एक।
- 25:58नर्क है और संतत्व। अपने आप में एक स्वर्ग है।
- 26:04तो इन दोनों चीजों। को मिलावट देना।
- 26:08और जो व्यक्ति मिलाये। उसका बहिष्कार?
- 26:11करते हैं ना? क्योंकि ये दोनों चीजें एक साथ
- 26:14नहीं चलती। राजनीति राजनीति होती है।
- 26:22धर्म धर्म होता है जो। धर्म को राजनीति में मिलाएगा।
- 26:30वह मुश्किल। में पड़ेगा खुद भी।
- 26:32और देश? को भी मुश्किल।
- 26:34में डटेगा तो बड़ा। समझदार था माओ माओ।
- 26:40से तुमने बुनियाद ही खत्म कर दी। क्या कहा उसने?
- 26:51और सेतुंग ने कहा कि अगर स्मृति चाहते हो, शांति चाहते हो?
- 27:01एक चीज़ को यू विल हैव टू अवार्डिस?
- 27:06तुम्हें खत्म करना होगा। देखो अब क्या चाहते हो?
- 27:12गरीबी चाहते हो, भूखमरी चाहते हो? या भर पेट?
- 27:18आना चाहते हो रोजगार? चाहते हो?
- 27:23देखो, मैं और तुम। कुछ नहीं कर सकता।
- 27:29कौन कर सकता है वो? कर सकते हैं जिनको।
- 27:34हमने अग्रणी चुना। उनके हाथ में अग्रणी।
- 27:40होने का हमने पावर दे। दिया वो कर सकते हैं।
- 27:47अगर तुम कहो एक आदमी बदल। देगा तो तुम और को।
- 27:54एक आदमी। कुछ चुन तो सकते।
- 27:55हैं। जो बदल देगा, लेकिन एक आदमी नहीं
- 28:02बदल सकता। हाँ, संत बदल।
- 28:05देता है एक आदमी को। राजनीति नहीं बदल।
- 28:09सकती एक आदमी उसको तो झुंड लेना पड़ेगा।
- 28:12साथ। जो जीता उसने यही।
- 28:17किया। माओ ने झुंड लिया।
- 28:22माओ ने अपने साथ। बेड इकट्ठी।
- 28:24की उनसे। पूछा कि जो मैं कहूंगा वैसा।
- 28:31करने को तैयार हूँ देश को महान बनाना।
- 28:35है, बिल्कुल बनाना है। समृद्धि चाहिए या गरीबी?
- 28:42भुखमरी चाहिए या भरा? पेट चाहिए कौन?
- 28:46कहता है भुखमरी चाहिए। भरा पेट चाहिए।
- 28:52सुख के साधन चाहिए या ज़मीन पर सो सकोगे।
- 28:56अब संत तो ज़मीन पर सो सकता है। इसीलिए मैं कहता हूँ दोनों चीजों
- 29:00को मिलाव मत देना। संत कौन जो तू तो पावे सुई पली
- 29:09का? तेरा कोई साथ ना?
- 29:17दे तो? तू?
- 29:19खुद से पीठ जोड़। ले बिछुना धरती।
- 29:27को करके अरे आकाश ओढ़ ले। है।
- 29:38कौन सा वो इंसान यहाँ पर? जिसने दुख न झेला चल अकेला चल
- 29:53अकेला। तेरा मेला पीछे छोटा।
- 29:58रागी चल अकेला तेरा। कोई साथ न दे तो तू खुद।
- 30:05से पेट जोड़ ले बिछौना धरती को करके अरे आकाश उठ ले।
- 30:14है कौन सा? वो इंसान यहाँ।
- 30:16पर जिसने दुगना झेला। चल अकेला अकेला चलना होता है।
- 30:27और तुम पाओगे जब तुम अकेले चलोगे तो दृढ़ता से चलोगे तो तुम्हारे
- 30:31साथ। काफिला बन।
- 30:35जाएगा। मैं अकेला ही चला था, जान मेरे
- 30:41मंजिल में कर। लोग साथ आते।
- 30:47गए और कारवां बन जा गया। कार में अपने आप बन जाएगा, तुम
- 30:54चलो। तो उसने बनियात।
- 30:57पकड़ ली। क्या बुनियाद पकड़े?
- 31:07और तुम जानकर हैरान भी हो गए। क्रोधित भी हो गए।
- 31:17क्योंकि मैं जानता हूँ तुम्हारी सन्स का अजीबो गरीब।
- 31:21है। कहता अगर शांति।
- 31:27चाहिए तो छोड़ दे सब कुछ चल जा जंगलों।
- 31:37में पहाड़ों में। कंधराओं में बैठ जाओ कुछ न।
- 31:42कर बेहतर उतर जाओ। यह तो है शांति का मार्ग।
- 31:50और अगर समृद्धि चाहिए तो हाथ। तोड़ के मेहनत कर।
- 31:55और व्यर्थ की बातों। में उलझ मत।
- 32:00व्यर्थ की बातें क्या हैं धर्म? वो कहते हैं धर्म को छोड़ दो।
- 32:14जीस। देश ने धर्म को।
- 32:16अपनाया और देश बर्बाद हो गया। धर्म अगर शांति चाहिए।
- 32:30तो काम करता। है जो ऊब गया है भोग भोग के यही
- 32:41एस्ट्रोकर। कहते हैं तो मैं।
- 32:43समझ नहीं पाया। बुध ऊब गए, भोग भोग के ऊब गए।
- 32:49राजपुत्र थे राजकुमार थे। और उसने पाया।
- 32:56कि संसार के सुखों में लगते हैं सुख।
- 33:01वास्तव में हैं दुख। ऊब आती है।
- 33:04तुम कहते हो तुम कामना करते हो स्वर्ग, लेकिन तुम्हें पता है अगर
- 33:11तुम्हें स्वर्ग सदा। के लिए दे दिया जाए।
- 33:15तुम आँख बचा के खिसकाओगे और बादलोंगे।
- 33:19एक ही शिला। पे बैठे रहना।
- 33:23राधे राधे जापते रहना ये भी कोई ज़िन्दगी?
- 33:26है रस्सी? बांध लो के पेड़।
- 33:29के साथ इससे तो मरेगा। ये कोई हाल है जो चाहता हूँ वो
- 33:38मिल जाता है कल्पवृक्ष। वास हुए।
- 33:46अब सराय बदसूरत नजर। आएंगी।
- 33:52शराब एसिडिटी पैदा। करेगी।
- 33:58अभी तो तुम पे आया नहीं वो बेला? जीस पर आया।
- 34:04उससे पूछो पूछो। जनक से क्यों?
- 34:09अष्टाबक्र के उस कुबे अष्टाबक्र के चरणों।
- 34:12में बैठ गया। आठ जगह से टेड़ा।
- 34:14मेड़ा, अच्छा, भला आदमी राजा। काहे के लिए बैठ?
- 34:21गया, चैन नहीं मिला। ऐसी बहारों।
- 34:35का भी क्या करना? होता है।
- 34:41जो दिल की शांति को जला। उन बहारों से क्या फायदा जिनमें
- 34:52दिल की कली? जल।
- 34:54गई। जख्म फिर से हरा हो गया।
- 35:01है मेरे। दिल कहीं और चल।
- 35:06उन बहारों से क्या फायदा जिनमें दिल की।
- 35:11कली जल गई। शांति मन की शांति जल गई।
- 35:15ज़ख्म फिर से। हरा हो गया।
- 35:19वहीं। अशांति वहीं रातों की।
- 35:22नींद हराम वो ही दिन का चैन खत्म क्या करना है इसी बहारों का तो
- 35:31तुम। भाग खड़े होगे अभी।
- 35:36तो सिर्फ तुम्हारी कल्पना ही हैं। कल्प वृक्ष पास हो।
- 35:42ये कल्पना जो मांगू वो मिल जाए, देखिये अब मैं मजाक नहीं करता,
- 35:50ऐसा मुकाम है। जहाँ तुम जाते हो जो चाहते हो वो
- 35:56मिल जाता है। ये भी एक सिम्बोलिक
- 35:59रिप्रेजेंटेशन। थी।
- 36:00संतों के। ऐसा।
- 36:02मुकाम है जहाँ जो। सोचोगे।
- 36:06मिल जायेगा जैसे तुम। अब।
- 36:09बैठे सड़ रहे हो। वो नहीं मिला, वो नहीं मिला आज वो
- 36:14नहीं। मिला पर महात्मा ने यह।
- 36:16तो कर। दिया वो नहीं किया।
- 36:20वहाँ ऐसा कुछ नहीं होगा। कल्प?
- 36:23वृक्ष के नीचे जो मांगोगे वही मिलेगा और।
- 36:26क्षण मिलेगा और ऐसा मुकाम हमारे भीतर है, लेकिन हम जाते नहीं हैं।
- 36:36जीस स्वर्ग। की हम कल्पना करते हैं वह हमें।
- 36:38मिलता नहीं। और जीस स्वर्ग में वह कल्पवृक्ष।
- 36:43मौजूद है। वहाँ हम जाते हैं।
- 36:46अजीब तो होता है। ना?
- 36:50संत पिट पीट कर चले गए। ऐसा मुकाम है तुम्हारे भीतर जहाँ
- 36:57जो मांगोगे वही मिलेगा। जो मांगू।
- 37:03ठाकुर अपने ते सोई सोई देव। कौन सा है मकांबा?
- 37:17बाबा झूठ बोलते हैं। क्या लेना?
- 37:21झूठ बोल के काहे? झूठ।
- 37:24बोलेंगे इन्हें तो कुछ। भी नहीं चाहिए।
- 37:30फिर ये झूठ क्यों? बोलेंगे इन्हें कुछ नहीं।
- 37:35चाहिए। ये जो बोलेंगे ये सत्य।
- 37:37बोलेंगे है लफ़्ज़? हर्फ भाई हर्फ।
- 37:43ऐसा मुकाम है भीतर और। तुम कल्पना करते हो?
- 37:47बाहर ऐसा स्वर्ग। कहीं है नहीं।
- 37:55बाहर नहीं मिलेगा यही। संत कहते हैं, जीसको ढूंढ रहे हो?
- 38:06जीस कर्प। वृक्ष को जीस, अमर को अमर होना
- 38:10चाहते हो, मेरा नाम अमर हो जाए। तुम अमृता हो सकते हो।
- 38:18लेकिन करें क्या जब तुम्हें रास्ता दिखाने वाले लोग।
- 38:22मूर्ख हों राधे राधे। करने वाले हों इनको खुद ही।
- 38:28स्वर्ग नहीं मिला तुम्हें क्या? खाक दिखायेंगे।
- 38:35स्वर्ग जिसे मिला। वो तुम्हें बता।
- 38:37सकता है रास्ता जिसके। लिए खुद के लिए।
- 38:44स्वर्ग अभियान जाना है, वो तुम्हें क्या बताएगा?
- 38:50ऊंट पटांग बताएगा और वही बता रहे। हैं कोई कहता राम राम कर ले, कोई
- 38:55कहता राधे राधे। कृष्ण कृष्ण कर भीखा।
- 39:05बहुत बड़ा सेठ था। अपने शहर का?
- 39:10सब कुछ था। बुद्ध की तरह।
- 39:15उस पैमाने का नहीं। था।
- 39:17लेकिन प्रचुर मात्रा में था। 1 दिन, एक संत।
- 39:22का चेहरा। बड़ा, शालीन, बड़ा, शांत।
- 39:27उसने खुद का चेहरा देखा। झुर्रियां पड़ी।
- 39:34बिगड़ा तिगड़ा चेहरा उसका। दिन भर रात जलता।
- 39:37रहता। कहीं ये न हो जाए।
- 39:41कहीं वो न हो। जाए हर।
- 39:43घड़ी आग में जलता। रहता संशयों की आग।
- 39:49तुम्हें जला देती है और तुम्हारा मन तुम्हें हमेशा ही संचई में।
- 39:53रखता है इरादे बांधता हूँ सोचता हूँ।
- 40:03छोड़ देता। हूँ इरादे बांधता हूँ।
- 40:09सोचता हूँ छोड़ देता हूँ कहीं। ऐसा न हो जाए।
- 40:15कहीं ऐसा न हो जाए यह शंश्यात्मा विनश्रति।
- 40:20अगर इस। प्रकार की मनोदशा में रहोगे तो
- 40:23तुम्हारा विनाश अवश्यम भावी। है।
- 40:34देखो एक लक्ष्य चुनो, अब ये मेरी बात नोट कर लेना, ये काम की बात
- 40:41है, मैं कोई मजाक नहीं करता। एक लक्ष्य चुन लो।
- 40:53मेरे बहुत से शीशे। हैं, लेकिन कुछ बड़े प्यारे।
- 40:56लगते हैं। क्यों?
- 41:01वो मन से बड़े स्पष्ट हैं। मैं उनसे पूछता।
- 41:03हूँ क्या चाहिए परमात्मा? चाहिए कि पीसा चाहिए?
- 41:10वो कहते नहीं परमात्मा नहीं चाहिए पीसा चाहिए।
- 41:15बड़े शुद्ध। अंतरात्मा के लोग?
- 41:23इन्हें स्पष्ट। निर्देश दिया जा सकता है।
- 41:32कुछ लोग कहते हैं। नहीं पीसा नहीं चाहिए परमात्मा
- 41:36चाहिए। पीसा तो बहुत भोग।
- 41:38लिया नहीं मिला। बुद्ध कह सकते हैं नहीं मिला।
- 41:43जनक कह सकते। हैं, नहीं मिला और जनक सच्चे हैं।
- 41:49बुध भी सच्चे हैं। छोड़ छोड़ के भाग।
- 41:53जाते हैं। पैसे में नहीं।
- 41:58मिला। अब देखिये।
- 42:00कहाँ मिलता है? इनका आचार्य बता देता है।
- 42:08कि इनकी चाहत क्या? है।
- 42:13भरे राज़ को लात मार के भाग जाते हैं नहीं मिला।
- 42:20और तुम क्या हो? यही भगवान कृष्ण कहते हैं, शंख।
- 42:26आत्मा बनशक्ति तुम्हें पता ही नहीं तुम्हें।
- 42:28पिशा चाहिए के भगवान। चाहिए।
- 42:33ऐसे लोग खतरनाक मैंने। कहा, ऐसे लोग मुझे बड़े प्यारे।
- 42:37लगते हैं जो कहते हैं पिशा चाहिए। मैं कह देता हूँ तथास्त।
- 42:45अब पीसा ही मांगना पुत्र पुत्री पीसे से जब तुम रज़ जाओ।
- 42:53तृप्त हो जाओ तब। परमात्मा मग्नम।
- 42:59अच्छा भी लगेगा। ठीक भी है।
- 43:02रास्ता से ही। चुना तुने लेकिन?
- 43:09ऐसे लोगों को क्या करें? चाहिए तो।
- 43:12पीसा कह देते। हैं पर मैं तुम्हें।
- 43:16चाहिए। फिर गुरु भी क्या करें गुरु?
- 43:22परमात्मा की राह बताता। है।
- 43:26उन्हें चाहिए होता है। धन मान सम्मान अच्छे गायक।
- 43:32बनना चाहता है बड़े बड़े गायकों की।
- 43:39पेट तोड़ना चाहते हैं और। कहते हैं, पीसा नहीं।
- 43:44चाहिए क्या ये पीसा? होता है इनको।
- 43:52तो गुरु क्या करे बेचारा? फिर ऐसे लोग।
- 43:56आखिर में गुरु को बदनाम करते हैं, गालियाँ निकालते हैं, क्यों?
- 44:04क्योंकि इनकी खुद की। भावना दुविधा में है।
- 44:09इन्हें पता ही। नहीं क्या चाहिए?
- 44:11ये झूठे हैं, झूठ बोलते हैं। तो क्या होता है आश्रम?
- 44:17का न खुदा ही मिला, न बसाले सनम न।
- 44:22इधर के रहे। न उधर के रहे।
- 44:26कुछ नहीं मिलता, भोंकता ही भरता रहता।
- 44:35बुले शाह ने कहा था राती जगन राती पोकण।
- 44:40इस दरगाह दे कुत्ते। बोले शाह जिन रब थे, चादर तान के
- 44:46सोते। अब जो सारी।
- 44:51रात जागते हैं आसमान। की तरफ कुत्ते की।
- 44:55तरफ मुँह। उठा लेते हैं माँ माँ।
- 44:59ये तुमने देखा है ये सफेद? साड़ियां पर आसमान की तरफ मुँह कर
- 45:04लेते हैं। ओम शांति ओम शांति मैंने कहा यह
- 45:10भगवान को याद कर रही हैं या भगवान को रो।
- 45:14रही हैं। तुम देख न।
- 45:18बिलकुल साफ लगेगा यह। भगवान को रो।
- 45:20रही जैसे मर गया हो। नीचे ठीक कर दे।
- 45:27नीचे सच्चा नीचे। कहते हैं गॉड इस टैट।
- 45:30मर गया है वो? तो रोता।
- 45:33अच्छा भी लगता है। लेकिन ये सफेद साड़ियों वाली है।
- 45:40इन्हें कुछ नहीं मिलेगा। आश्रम चाहे 1000 जगह।
- 45:46पे बना लो, मंगल ग्रह पे बना लो। क्या फर्क पड़ता है?
- 45:53लेकिन देखो पुत्री को शांति नहीं मिलेंगे।
- 45:59ना ओम? के पास जाओगे जहाँ गुजार हो रहा
- 46:02ना शांति। आएगी।
- 46:03हरदम में भटकते। प्रेत प्रेतनिया बन जाओगे।
- 46:12मुझे लोग सुनते हैं। बेचारे क्या करें?
- 46:16मैं इनके दुख को अच्छी तरह। जानता हूँ लोग मुझसे।
- 46:21पूछ लेते हैं, ये आपसे प्रश्न पूछते हैं।
- 46:23इनकी भी। इच्छाएं होती हैं क्या मैं क्या?
- 46:26और ये कोई आसमान से आये होते हैं तुम्हारे बीच में से तो गए होते
- 46:29हैं। यहीं से तो छज्जू।
- 46:34नाथों ने देश? जोड़ा यही जा के सामने मुझे सुनने
- 46:41लग गए। और कोई ऊपर से।
- 46:43ग्रह से उतरे हैं क्या? तो ये प्रश्न नहीं करेंगे और
- 46:50क्या? करेंगे या कमेंट?
- 46:52भी कर देते हैं। कई बार बीच में से टोक।
- 46:54देते हैं। खैर, मैं तो बुरा नहीं बनाता, ऐसा
- 47:04मत कर तू। ये बात अलग है कि अलग से ताड़
- 47:09देता हूँ। सिंबल सिंबल एक भाषा थी, जिसमें
- 47:23किसी प्रकार का। कोई झगड़ा नहीं होता।
- 47:30तो ऋषियों ने बनाया ओम का। नाम परमात्मा ओम है एक ओमकार
- 47:40लेकिन मूड होने नाम रख लिए किसने गॉड किसने अल्लाह?
- 47:49कितने राम राधे हजारों नाम हैं? कहते हैं सभी नाम उसके हैं फिर
- 47:55सभी नाम उसके हैं। तो उसका नाम क्या?
- 47:58है अगर सभी राम। उसके हैं तो उसका।
- 48:04विशिष्ट नाम क्या है? कभी क्या देखते हैं कि नहीं?
- 48:08उसका कोई नाम नहीं है। यही।
- 48:13दुविधा तो तुम्हें मर गई धोबी का कुत्ता न घर का, न घाट का।
- 48:26ऋषियों ने बनाई थी। ये सिम्बोलिक रे प्रेजेंटेशन।
- 48:30सिंबल्स सिंबल बड़े मुस्तिकल होते।
- 48:35हैं। और सिंबल किसी भी जमाने में काम
- 48:40करेंगे, सब बताएं खो जाएंगी। अगर सिंबल्स की भाषा।
- 48:45हमने एजाज। कर ली पक्की पक्की।
- 48:51देखिए, आप जानते होंगे। शायद अगर एक सर्कल डाल दिया जाए।
- 48:57और उसके नीचे प्रश्न का निशान दे दिया जाए तो?
- 48:59उसका मतलब फीमेल। और अगर सर्कल।
- 49:04के ऊपर एक तीर का निशान दे दिया जाए।
- 49:06इसका मतलब मेल। अब ये कभी नष्ट नहीं होगा।
- 49:11कोई शब्दता आ जाये कोई मोहनजोदड़ो हड़प्पा कोई खो जाये, कुछ हो जाये
- 49:18सीधा। लेख पे अगर यही।
- 49:19लिखा होगा तो समझ में आ। जायेगा चाइनीज।
- 49:23भाषा में बहुत से। शब्द ऐसे हैं।
- 49:26जो सिंपल। है।
- 49:29सेब की तस्वीर बना। दोगे?
- 49:31सभ्यता खो। जाए।
- 49:33चाहे रह जाए सेब की भाषा। क्षेत्रों की भाषा वही रहेंगी।
- 49:42वैज्ञानिक होने इसलिए अपनी। ही भाषा का?
- 49:48इजाद किया। इसमें कोई झगड़ा नहीं है।
- 49:56किसी दुर्भाग्यशाली क्षण में। लिपियाँ इजाद हूँ दुर्भाग्यशाली
- 50:03कहता हूँ मैं भाग्यशाली क्षण नहीं हूँ।
- 50:08किसी दुर्भाग्यशाली क्षण। में भाषाएं इजाद हुईं।
- 50:13अन्यथा लिपियाँ बड़ी शानदार। थी।
- 50:16और बड़ी लिपियाँ हमारे। रिशियों ने खोजी थीं भाषाएं तो
- 50:21बेकार हैं। भाषाओं में बड़ी शक्ति लगती है।
- 50:27बड़ी सुंदर है। जैसे अब्रेविएशन्स।
- 50:32होती हैं हमारी। जैसे कि छोटी भाषा होती है।
- 50:47मंत्रीगण बोलते हैं। और उसका कोड लिख।
- 50:53लेते हैं। शॉर्टकट शॉर्टहैंड।
- 50:56जिसे कह देते हैं। शॉर्टहैंड ये भाषा क्या है?
- 51:08चिन्ह की भाषा है। लिपियों की भाषा नहीं, लिपियों की
- 51:14भाषा में सदा ही झगड़े। होते हैं।
- 51:18तुमने लिपियों की भाषा बना ली। है हजारों भाषाएं।
- 51:21बना ली। आज झगड़ा है।
- 51:23तुम जल को नीर। भी कह सकते हो, पानी भी कह सकते
- 51:26हो, वाटर भी कह सकते हो। हिंदी में ही बहुत से शब्द मिल
- 51:31जाएंगे। तुम्हें।
- 51:32पानी लेकिन चिन्हात्मक भाषा में। साइंटिफिक भाषा में सिर्फ।
- 51:41एच टू। ओह।
- 51:43बात खत्म। कोई झगड़ा नहीं अगर ईश्वर के लिए
- 51:48हमने यह भाषा। इस्तेमाल की होती।
- 51:52तो कोई झगड़ा। न होता है।
- 51:58समुद्र मंथन के ऊपर भी आएँगे। पहले आपको।
- 52:02बैस बना दूँ थोड़ा? सा।
- 52:05हाँ थोड़ा सा ही है और। क्या?
- 52:09तुम्हें समझ तो आनी चाहिए, बैस जितनी सुदृढ़ नीम होगी।
- 52:15उतना ही महल शानदार पड़ेगा। तो मुझसे तुमने कहा।
- 52:23धर्म। को।
- 52:25हटा। दो राजनीति से तुम्हारी।
- 52:30श्रद्धा है घर बैठ के कर। जो टाँगड़ पुट करना है।
- 52:35तुमने घर बैठ के करो, आपकी माला जपव दंडवत प्रणाम करो।
- 52:43जैसी श्रद्धा है तुम्हारी। घर बैठ के करो।
- 52:46बाहर मत करो। कोई लाउड।
- 52:49स्मोकर नहीं लगेगा। कुछ।
- 52:53कीर्तन नहीं होगा। कुछ नगर में फेरी नहीं।
- 52:55होगी कोई? 2:00 बजे डेढ़ बजे।
- 52:58दर्शन नहीं होंगे, रातों की नींद खराब नहीं होगी।
- 53:01वहाँ ऐसे पागल नहीं रहते। आपको मैं बताता हूँ।
- 53:05वहाँ। पागलपन पहले से ही।
- 53:07खत्म किया जा। चुका है।
- 53:10यहाँ तो पंचभोतक देह को। दिखाने के लिए लोगों की नींद आराम
- 53:16की जाती है। और फिर कोई।
- 53:20समझदार व्यक्ति ऐतराज करता। है तो उसको बेवकूफ बताते।
- 53:26हैं। नींद परमात्मा की देन है और नींद
- 53:31रात। को ही आती है क्योंकि सांझ ढंगते
- 53:35ही प्रकृति। हमारे भीतर मैलाटोनिन नाम का एक
- 53:40रसायन पैदा करना शुरू कर देती है। हार्मोन सेराटोनिन मैलाटोनिन।
- 53:47अंधकार होते ही इधर सूरत। छिपा उधर मैलाटोनिन सैराटोनिन।
- 53:55का? उत्पादन होना शुरू हो।
- 53:57गया। ये हार्मोन हैं।
- 54:02जो नींद के लिए। जिम्मेदार है ना?
- 54:05हमें नींद आएगी। लेकिन हमारी सभ्यताओं।
- 54:09ने हमारी नींद को। खत्म कर दिया है।
- 54:15सारा अमरीका आज। गोलियां खा।
- 54:18रहा है नींद की। आधा अमरीका तो पक्का।
- 54:22ही है। मेरे भाई बताया करते थे।
- 54:25आधे पेशेंट इन 100 में। नहीं आके आते हैं, नींद नहीं आती
- 54:30डॉक्टर साहब क्या करें? जब तुम प्रकृति की।
- 54:35उल्लंघना करोगे तो नींद आएगी। कैसे?
- 54:42महावीर बड़े समझदार हैं। जैनी बड़े समझदार है।
- 54:47सूर्य ढलने। से पहले खा लो।
- 54:49जो खाना है? और उसके 2 घंटे बाद सो।
- 54:53जाओ। मेलाटोनिन सेराटोनिन अपने चरम।
- 54:57उत्पाद पर होंगे, नींद आएगी, बड़ी सुन्दर नींद आएगी।
- 55:05और सुबह ब्रह्म मुहूर्त में खुद। ही जाग खुल जाएगी।
- 55:08तुम तो ब्रह्म मुहूर्त में जागते हो।
- 55:11रात को 12 एक। बजे सो के ब्रह्म।
- 55:13मुहूर्त में जागते हो। इसलिए अद्ध कचरे।
- 55:19रह जाते हो। वो ज़मानी और।
- 55:24थे। आज ज़माना बदल गया।
- 55:27इसलिए मैं कहता। हूँ मत जागो ब्रह्ममूर्त।
- 55:31में कुछ नहीं होता। तुम पागल मत बनो यह उस वक्त की
- 55:36बात है, खुद ब खुद नींद खुल जाए वो।
- 55:38ब्रह्ममूर्त उस वक्त खुल दी थी नींद।
- 55:47बिजली नहीं थी। दीपक से दीपक बजाया।
- 55:51सो गया ब्रह्ममुहूर्त में अपने आप जाग।
- 55:55खुल गई सात आठ। घंटे की नींद काफी।
- 55:58होती है। तो मैं उससे तो बुनियाद झाड़ दी,
- 56:06मेरी बात को गौर से समझ लेना। हो?
- 56:10सके तो क्रियान्वित करने। का प्रयास करना।
- 56:15धर्म को राजनीति से अलग कर। पहले।
- 56:20एक चुनो अपना आइकॉन। आदर्श।
- 56:25करना क्या है? हमने और नैचुरली हमारे ऋषियों ने
- 56:30सिद्धांत बनाया था। पहले कोई?
- 56:33भगवान भगवान नहीं है। पहले 25 वर्ष।
- 56:39दट। इस टु।
- 56:40अर्न। मसल अर्न करना सूचनाएं, अर्न
- 56:46करने, कलाएं निपुणताएं किस फील्ड में जाने की?
- 56:53इच्छा है उससे संबंधित? विद्यायें।
- 56:58वह विद्यार्थी जीवन होता था। उनमें कुछ शर्तें।
- 57:05थीं। ब्रह्मचर्य वगैरह वगैरह।
- 57:09सत्य अहिंसा, अस्त, ब्रह्मचर्य। तो ये सब।
- 57:15कुछ रख के पूरी। शक्ति को बचा के सब एकत्रित कर
- 57:20कलाओं। को सूचनाओं को इकट्ठा।
- 57:24कर रहा। हूँ।
- 57:28उसके बाद गृहस्थ। लेकिन इन चारों।
- 57:34फिर वाणप्रस्थ और संयस्थ। इन चारों आश्रमों के बीच में
- 57:39लगातार। उस परमात्मा को बोलो मत।
- 57:45जिसका ये सारा सृजन। है।
- 57:49उसको गाहे बगाहे याद कर। बाकी संस्कार बना रहे।
- 57:57क्या हमने जाना किधर? ब्रह्मचर्य।
- 58:01के बाद गृहस्थ और गृहस्थ के बाद वाणप्रस्थ का मदद क्या है?
- 58:07पहले थोड़ा थोड़ा याद करते थे, संसार को ज्यादा याद करते थे, अब
- 58:12आधा आधा। आधा संसार को याद।
- 58:15करना है। आधा वन गमन परमात्मा को याद करना
- 58:20है। फिर 75 के हो गए।
- 58:27चार हिस्सों में डिवाइड कर लो अगर 80 साल की है तो 204060।
- 58:36अस्से आखिरी संयस्त बस चोट छोड़ दो सब।
- 58:43बहुत हो गया। अब जीवन का असर सब।
- 58:49देख लिया। अब ओम शांति है।
- 58:55राधे राधे करना थोड़ा होता है। राधे राधे तो हो जाया करती।
- 59:03है। आखिर में राधे।
- 59:06राधे ही हो जाते। हैं।
- 59:10जीवन में राधे राधे करके क्यों मार?
- 59:13रहे हो दुष्टों तुम्हें शर्म? नहीं आती।
- 59:21ऐसी बेबुनियादी बातें करते। हुए एक बच्चा है, पढ़ाई लिखाई
- 59:27करता है, मेरे पास आ जाते। हैं।
- 59:3019 वर्ष का हूँ बाबा दीक्षा दे दो क्यों अभी पढ़ाई का मौका?
- 59:36है अभी पांव पे? स्टैंड हो जाओ कुछ।
- 59:40कमाने का साधन जीवन कैसे। यापन?
- 59:45करोगे? नहीं, अभी दीक्षा नहीं है मैंने
- 59:57कोई। भेड़ों की भीड़ थोड़ी।
- 59:58ही चमक दी। गिनती मुझे अच्छे नहीं।
- 1:00:03लगते। क्वालिटी।
- 1:00:11तुम्हारे भीतर की तमन्ना। क्या है?
- 1:00:13वो मुक्षा है या धनोपार्जन? है।
- 1:00:21दोनों में से चुनना। होगा और आज।
- 1:00:291% अगर मैं कह। दूँ तो वो ज्यादा है।
- 1:00:32इतने लोग हैं नहीं जिन्होंने अपना आइकॉन चुन।
- 1:00:36लिया। हमने अपने।
- 1:00:38जीवन में करना क्या है? पटक जाते हैं।
- 1:00:47तुम समझते हो कि। हमने चुन लिया।
- 1:00:49है। लेकिन तुम्हें पता नहीं है
- 1:00:51क्योंकि तुम्हारे पास नहीं। है।
- 1:00:56जीस दुनिया पूरी। साइंटिफिक होगी।
- 1:01:00तो माँ बाप। बच्चे को ले के जाएंगे उस
- 1:01:03साइंटिस्ट? के पास जो तय।
- 1:01:05करेगा उसका रुझान की तरह। इसको।
- 1:01:09खिलाड़ी बनाओ, इंजीनियर बनाओ, डॉक्टर बनाओ, रिसर्चर बनाओ या
- 1:01:19राजनीतिक बनाओ, क्या बनाओ वह बताएगा।
- 1:01:25हबल शु जस्ट यू। लेकिन आज।
- 1:01:30इतनी तरक्की हुई नहीं। वक़्त आएगा कभी?
- 1:01:37ऐसा होना चाहिए हमने बहुत। चीजें साइंटिफिकली नहीं अभी।
- 1:01:48शादी तक जीवन का एक। बहुत बड़ा पोर्शन इकट्ठे बिताना
- 1:01:59एक छत के नीचे और हम जानते नहीं कि क्या क्या चीजें बनानी।
- 1:02:08हमारे। ऋषियों ने बनाए एस्ट्रोलॉजिक।
- 1:02:10कल मैं ला लू। लेकिन।
- 1:02:13लहर विज्ञान भूल गए और मुख्य जीतो लहर।
- 1:02:16है। आज वो लहर विज्ञान खो गया।
- 1:02:24मेरे पास यहाँ लोग कहाँ जाती हैं? बाबा शादी करनी है गुण देखो गुण
- 1:02:34तो मिलते। हैं।
- 1:02:35स्टार भी ठीक है। लेकिन शादी ना करो, पुत्र।
- 1:02:40क्यों? क्योंकि लहर।
- 1:02:42विज्ञान नहीं मिलता तुम्हारा। तुम थोड़ी सी देर इकट्ठे रहोगे,
- 1:02:48फिर जूत पटांग हो जाओगे, फिर तुम अदालतों में देखे जाओगे।
- 1:02:54कर लो अगर करना। है तो।
- 1:02:58मैं रोकने वाला कौन? बहुत सी बुनियादी चीजों को हमने
- 1:03:04अभी भी गंवा। रखा है।
- 1:03:06अभी कोई हम बहुत। ज्यादा अडवांस नहीं है।
- 1:03:10अभी हम मूर्ख के मूर्ख हैं। जीस दिन दुनिया अडवांस होगी उस
- 1:03:15दिन हर चीज़। एक्सपर्ट्स से पूछ के की जाएगी।
- 1:03:20तुम्हें पता नहीं। पहले एक्सपर्ट्स थे आज।
- 1:03:26भी तुम्हें हमारे पुराने। जंत्रियों में प्रथम स्त्री पुरुष
- 1:03:33का संभोग उसके वक्त का नक्षत्र मिल जाएगा।
- 1:03:36इस नक्षत्र में प्रथम। संभोग।
- 1:03:40और आज क्या है? वो मैं क्या बोल रहा हूँ उनको तो?
- 1:03:46छोड़ ही दो ना। ये हंस रहे हैं सब।
- 1:03:54इसी मर्ज के मारे हुए। ये हंस रहे हैं।
- 1:04:04समुद्र मंथन एक घंटा। हो गया भाई?
- 1:04:11फिर इसको दो भागों में डिवाइड? कर दे, क्या करे?
- 1:04:16तुम्हारे प्रश्न बड़े ही। लम्बे होते हैं।
- 1:04:20और तुम चाहते हो। बाबा बोलें ऐसी चीजों पे बोलें।
- 1:04:23जीस पे जब भी। कोई बोल नहीं सकूँ।
- 1:04:26और। बोलें भी और बोलें भी ऐसे बोल दे।
- 1:04:29बस। ये कोई पलाना थोड़ी?
- 1:04:32होता है नहीं तुम्हें समझाना होता है और समझाना बड़ा मुश्किल है।
- 1:04:45तो पहले सबसे पहले ये। चुनो, तुम्हें चाहिए क्या?
- 1:04:52इन मूर्खों के पीछे मत रखो। बचपन में ही धार्मिक के झंडे हाथ।
- 1:05:00में पकड़ा दिए जाते। हैं डंडा झंडा।
- 1:05:08पेट मांगता है रोटी? हाथ मांगता है, रोजगार दिमाग
- 1:05:15मांगता है। शिक्षा।
- 1:05:19यह तो नहीं देना। हाथ में डंडा झंडा पकड़ा।
- 1:05:23दो जाओ। मूड हो मूडो के साथ बड़ो ऐसे।
- 1:05:34दुनिया नहीं चलेगी मैं उससे तुम कहने लगा धर्म।
- 1:05:38को। खत्म कर दो धर्म का कोई मतलब
- 1:05:41नहीं। हम पहले समृद्ध हो।
- 1:05:44ले पहले बुद्ध हो ले। पहले प्रोस्परस हो?
- 1:05:50लें। प्रोस्परस।
- 1:05:53हो के फिर बूढ़ जाएंगे प्रोस्पर्टी को छोड़कर।
- 1:05:58जाएंगे तख्तों को लात मार के जाएंगे और तख्तों को लात उसे ही
- 1:06:03मारनी अच्छी। लगती।
- 1:06:05जिसने तख्तों को भोग लिया हो और पाया हो कि विषय।
- 1:06:09है अमृत ने? वह छोड़ पायेगा भीतर।
- 1:06:16से अन्यथा बार बार याद सताएगी मैं।
- 1:06:23फिर से उठ तो। जाओगे?
- 1:06:27लेकिन चोरी छुपे। तबियत वहीं लगी रहेंगी।
- 1:06:34हर कदम पे उन्हें मुड़ के देखा। उनकी महफिल से हम।
- 1:06:50उठ तो आए आंसू चा तो आंसू वराए। मुद्दतें हो?
- 1:07:08गईं मुस्कुराए आंसू, चार तो आंसू। बराई।
- 1:07:26मुद्दतें हो गई मुस्कराई। ज़रा सोचना तुम्हें मुस्कराई
- 1:07:31कितनी देर? ईमानदारी से अपने भीतरी सोच।
- 1:07:36लो मुझे मत बताओ। किसी को अपनी पीड़ा व्यक्त करने
- 1:07:42से अच्छा। आत्मनिरीक्षण करना ज्यादा अच्छा
- 1:07:45होता। है भगवान।
- 1:07:48कृष्ण ने भी कहा। है।
- 1:07:50अमानित्वम दंभित्वम हिंसा शांतिर अर्जुम आचार्य उपासनम स्वछम सीरम
- 1:07:56आत्मविनाग्रह अपने भीतर विनग्रह करो, तुम कितने सुखी हो?
- 1:08:05पसजिले ने भी यही। कहा यम में नियम में नियम में कहा
- 1:08:09सोच, संतोष, तप, स्वाध्याय। स्वाध्याय, स्व।
- 1:08:14अध्ययन तुम कितने। सुखी हो।
- 1:08:17तुम कितने दुखी हो। अपना अध्ययन होना ही।
- 1:08:21चाहिए तुम अपनी बैलेंस शीट कभी। बनाते हैं।
- 1:08:25दुकान की बैलेंस शीट बना। लें पर बस।
- 1:08:30काम खत्म। व्यापार की बैलेंस शीट बनाना इतनी
- 1:08:34ज़रूरी नहीं। होता।
- 1:08:35जितना जीवन की बैलेंस। शीट बनाना क्या खोया?
- 1:08:39क्या पाया इस प्रसंग? को बड़ा बेकट।
- 1:08:47भी है और विराट। भी है और आज।
- 1:08:50तक किसी ने जवाब दिया भी नहीं तो बहुत खोरकर।
- 1:08:53विस्तार से बताना ज्यादा। अच्छा रहेगा, नहीं तो बार।
- 1:08:56बार फिर पूछोगे तुम? मुझे लोग कहते।
- 1:08:59थे बाबा इतनी लम्बी बोल देते हो आप?
- 1:09:02मैंने कहा लम्बी बोल तो देता हूँ, मैं लम्बी फेंकता तो नहीं।
- 1:09:08हसा हो मत भाई? लम्बी बोलता हूँ तुम्हें अच्छी
- 1:09:14तरह से समझा जाए और कमाल की बात। ये है।
- 1:09:17लम्बी बोलता। हूँ समझ तुम्हें फिर?
- 1:09:20भी नहीं आता। फिर भी तुम।
- 1:09:23प्रश्न निकाल। लेते हो अब?
- 1:09:25कितना ग्रंथ बोला मैंने एक प्रश्न और निकला यार वो ठीक।
- 1:09:30था बड़ा अच्छा किया। प्रश्न पूछ के।
- 1:09:34अब बाकी के अगर जो प्रश्न आए मेरे पास वह बेकार है उनका कोई अर्थ?
- 1:09:40नहीं बनता। इसलिए मैं उनका जवाब।
- 1:09:44नहीं दूंगा। क्योंकि ग्रंथ वाकई समाप्त हुआ।
- 1:09:54दूसरा पोर्शन बस। बिल्कुल अगली वीडियो।
- 1:10:02श्री कृष्ण गोविन्द? हरे है पुराण।
- 1:10:11हे नाथ नारायण वह सुदेव पितुमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:10:31हे नाथ नारायण, वासुदेव, राधे, राधे श्याम मिलाले।
- 1:10:52राधे राधे श्याम, मिलाले, गोविंदा, गोपाल हर राधे, राधे
- 1:11:04श्याम, मिलाले, गोविंदा, गोपाल हर।
- 1:11:12मेरी नैय्या पार लगा दे, गोविंदा गोपाल हरे मेरी नैय्या पार लगा
- 1:11:28दे। गोबिंदा गोपाल हरे राधे राधे
- 1:11:36श्याम मिलादे गोबिंदा गोपाल हरे। धन्यवाद।