Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Apr 26 - जपुजी साहिब: 21 होने का अर्थ? साधना में 'साहस' और 'मृत्यु के भय' की क्या भूमिका है?
Transcript
- 0:10कल के प्रवचन से आगे ऐतराहा पति पबड़या चड़िया।
- 0:21होई 21। सुन गला अगास के केटा आई।
- 0:29रीस नानक नदरीपाईह कूड़े कूड़े? ठीस बड़ा दार्शनिक।
- 0:47वो वाच है ये ये बड़ी बड़ी दार्शनिक।
- 0:50है। बाबा?
- 0:54कहते हैं 21। होना है।
- 0:56चरिया हुई 21। यह हमारे आचार्यों ने।
- 1:05अर्थ कर लिए 21 एक परम नहीं समझिये थोड़ा गहरा है, पांच
- 1:25महाभूत तत्व। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि।
- 1:32आकाश? पांच कर्मिद्रियाँ हाथ पांव।
- 1:46वाणी, जननिद्रय और गुदा। पांच और 510 हो गए।
- 1:57पांच ज्ञानेन्द्र, आंख, कान, नाक। जीव त्वचा।
- 2:07रूप र स गंध। स्पर्श और श्रवण ये 15 हो गए
- 2:27बाबा। कहते हैं कि इनके।
- 2:29ऊपर विजय प्राप्त करनी होगी, ज्ञान न होगा।
- 2:37पंचभौतिक तत्वों का यह बना शरीर। मैं नहीं हूँ।
- 2:45पृथ्वी, जलवायु, अग्नि, आकाश। ये मैं नहीं हूँ।
- 2:53और यह कैसे संभव होगा? यह संभव होगा प्रैक्टिकल से हम
- 3:01थ्रोटिकल तो पढ़ लेते हैं। मुझे प्रश्न आ जाते हैं।
- 3:10बाबा जी समेत तो। सारा आ गया।
- 3:14लेकिन अब बेहतर कैसे? जाए।
- 3:16मैंने कहा यही तो प्रैक्टिकल। है।
- 3:21जिन लोगों ने। जूआलजी या बायोलोजी पढ़ी।
- 3:25हो या केमिस्ट्री। पढ़ी हो वो जानते।
- 3:30होंगे। प्रैक्टिकल प्रयोग।
- 3:34कितना जरूरी है ओनली थ्योरी? आईएस नोट सफीशियंट प्रैक्टिकल?
- 3:44आईएस एसेंशियल प्रैक्टिकल जरूरी। अन्यथा तुम जान न पाओगे लबोरेटरी
- 3:58में तुम्हें जाना ही पड़ेगा। तुम्हें डाइसेक्शन भी करनी होगी।
- 4:05जवलुचि में तुम्हें केमिस्ट्री में रसायन विद्या भी सीखनी होगी।
- 4:10किस साल्ट। को किस साल्ट से मिलाया जाए।
- 4:13क्या बनता है वो तो प्रैक्टिकल करना आवश्यक है बिना प्रैक्टिकल
- 4:20के। थ्योरी मात्र सूचनाएं।
- 4:26और अगर तुम मुझे सुनता। ही रहे।
- 4:30सुनते ही रहे। तो उसमें श्रद्धा।
- 4:37इतनी परिपूर्ण। होनी चाहिए कि मेरे।
- 4:41शब्दों के साथ। वह जो चिपक।
- 4:45के रस आया। लिवड़ तिवड़ के रस।
- 4:48आया वह आपके भीतर स्टोर हो जाए। तो आप सिर्फ।
- 4:58शून्य से भी पहुँच। सकते हो?
- 5:03जीस अनंतनाथ को शून्य से। मात्र।
- 5:05शून्य से ही पहुंचा। जा सकता है।
- 5:10अभी कर्म किसी की। अनाथ नाथ।
- 5:13की वीडियो सुन रहा। था।
- 5:19उसने रिकॉर्डिंग की। रिकॉर्डिंग की जो।
- 5:26हम ब्लैक। होल में करते है।
- 5:32रिकॉर्डिंग। की जो हम सूरज के पास रिकॉर्डिंग
- 5:35करते है। लेकिन यह आवाज अस्तित्व की नहीं
- 5:45अनहत्नाथ की। यह आवाज इन्होंने कहीं।
- 5:51बाहरी यंत्र से स्टोर कर ली। अनंतनाथ?
- 6:00भीतर से गूंजता हुआ भीतर से उठता है।
- 6:03ना आपने इसे? जगाया ना आप इसे बंद कर सकते हो
- 6:09इतनी मधुर। ध्वनि इतनी मधुर जंकार।
- 6:14आपके बस की बात। नहीं है पैदा करना।
- 6:18आप जो रिकॉर्ड करोगे वो। वो तो कानों को।
- 6:21खायेगा वो तो शोर है। लेकिन ये मधुर जिंगुर।
- 6:27की सी आवाज़ इतनी प्यारी हो जाएगी।
- 6:32रसीली हो जाएगी। क्या बर्फ़ से ही खिसते चले
- 6:36जाओगे? जहाँ से उसका उद्गम स्त्रोत।
- 6:41है और उद्गम स्त्रोत है उसका परमात्मा।
- 6:51उस मिश्री जैसे मीठे। तत्व में तुम उतर।
- 6:55जाओगे? अगर तुमने इस अनाहत नाग का ये
- 7:00धागा पकड़ लिया। था ये जो आनंदनाथ की।
- 7:07वीडियो प्रकाशित होती है ये। ऑथेंटिक नहीं है।
- 7:15इन्होंने आनंदनाथ। का स्वाधीन चक।
- 7:22अनंतनाथ की प्रथम। पीढ़ी को मैंने डाली।
- 7:25थी। और करीब 1.75।
- 7:28घंटे के थे और उसमें सारी। चीजों को बड़ा विस्तार।
- 7:34करके मैंने समझाया। था।
- 7:42उससे पहले अनंतनाथ की वीडियो थी। लेकिन मात्र कुछ।
- 7:48संक्षेप में थी, पहली बार मैंने इतना ज्यादा प्रसारित करके
- 7:58एक्सप्लेन करके। व्यख्यायित करके का फॉर्मूलेशन
- 8:06आपको बताया कि यही मात्र एक। रास्ता है जिसमें आपको कुछ करना।
- 8:12भी नहीं होता। और जिसमें आप शर्तियां।
- 8:16पहुँच जाओगे। धन्य भागी है वो लोग जिनकी ये नाद
- 8:26शुरू हो। क्रिया योग से इसको जगाया जा।
- 8:33सकता है। इसलिए मैंने।
- 8:42अपने प्रवचन में सबसे। पहले क्रियायोग कर रखा है।
- 8:47कई फायदे हैं क्रियायोग के। आपका ब्लड।
- 8:53ऑक्सीजनेटेड हो जाता है। हीमोग्लोबिन साफ रक्त।
- 9:00को पहुंचा। पाती है।
- 9:03अंग अंग तक और आप। जानते हो खून कितना महत्वपूर्ण है
- 9:09जीवन के लिए? तो पांच महाभूत और पांच।
- 9:24कर्मेन्द्र और पांच ज्ञानेन्द्र। जो 15 हो गया मनबुद्धि चित्त
- 9:35अहिंकार जारी हो गए। 19 हो गया ये मैं नहीं हूँ, ये
- 9:49जानना होगा। फिर।
- 9:52से समझ लो थोड़ा गहरा। प्रश्न है?
- 10:05पांच महाभूत तत्व मैं नहीं हूँ। जिससे ये पिंजड़ा बना।
- 10:10जीस घर में मैं विराजमान हूँ यह पिंजड़ा मैं नहीं।
- 10:16हूँ ये पांच भूत। पृथ्वी जल पानी।
- 10:20पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश। फिर।
- 10:28पांच ज्ञानेन्द्र रूप रशगंध स्पर्श और श्रवण।
- 10:38यह भी मैं नहीं। क्योंकि।
- 10:42देखता मैं हूँ सुनता मैं हूँ स्पर्श मैं करता हूँ अनुभव।
- 10:52मैं करता हूँ। नस का पुटों।
- 10:58में गंध, मैं महसूस। करता हूँ जीव से रसास्वादन मैं
- 11:04करता हूँ तो यानी मैं। इनका साक्षी हूँ रस, रूप, गंध,
- 11:13श्रवण। ये मैं हूँ नहीं कर्मेन्द्रीय मैं
- 11:22नहीं हूँ वो ही हाथ पांव। पांच कर्मेन्द्रीय, पांच
- 11:30ज्ञानेन्द्रिय। पांच पंच महा भूल।
- 11:34ये 15 मैं नहीं। ऐसा जानना होता है।
- 11:39तो बाबा ने कहा। तुमने 21 होना।
- 11:42है। 21 कैसे हो गए 15 हो गए?
- 11:48मन मैं नहीं हूँ बुद्धि मैं नहीं हूँ फिर तो मैं नहीं हूँ।
- 11:52ईगो? अहंकार में नहीं हूँ।
- 11:55चार ये हो गए ये 19 हो गए 19 मैं नहीं हूँ।
- 12:0420 सम आ गया। प्रकृति, नेचर।
- 12:15प्रकृति भी मैं नहीं। हूँ।
- 12:22अब हम आगे। के बीच में नहीं।
- 12:24हैं। मैं 21 मा हूँ ऐत राह पति प
- 12:36वढ़िया। चढ़िया होई 21 इन पोड़ियों के ऊपर
- 12:44चढ़के स्टेप बाई स्टेप। ये।
- 12:4920। मैं नहीं हूँ।
- 12:53इनका संघ साथ छोड़। देना।
- 12:56है यह प्रैक्टिकल। है।
- 13:01मैंने पहले भी। बताया है।
- 13:07पांच ज्ञानेन्द्र, पांच कर्मिन्द्र, पांच पंच महाभूत
- 13:14मनबुद्धि। चित्तोर।
- 13:16अहंकार। ये 19 में नहीं हूँ जिसमे मैं
- 13:20प्रकृति भी नहीं हूँ, प्रकृति को बनाने वाला।
- 13:23हूँ। लव ग्रैविटेशन।
- 13:27मैं नहीं हूँ। यह प्रकृति का एक।
- 13:29अंश जीतने भी सिद्धांत काम कर रहे हैं।
- 13:33प्रकृति में वो मैं नहीं हूँ, मैं इनसे पार हूँ।
- 13:45तो ये 20। मैं नहीं हूँ, बाबा कहते हैं कि।
- 13:5821। हो जाओ।
- 14:02अब इक्कीसवां कौन? है।
- 14:03इक्कीसवां स्वयं परमात्मा। चढ़ ये हो 21।
- 14:13एक अर्थ में तुमने एक ईश कर लिया ठीक लेकिन होगी कैसे?
- 14:20एक ईश तुम कैसे बनोगे? 20।
- 14:24को क्रॉस करना पड़ेगा। 20।
- 14:27मैं नहीं हूँ इनको अनुभव करना होगा, फिर मैं 21 माँ हूँ यह भी
- 14:35अनुभव करना होगा। तो तुमने प्रथम जाना।
- 14:42कि पंच महाभूत मैं नहीं ये पृथ्वी, मैं नहीं वायु नहीं।
- 14:46अग्नि नहीं, आकाश नहीं, जल नहीं, इन पांचों को तुमने हटा दिया।
- 14:56फिर पांच ये ज्ञानेन्द्रिय। मैं नहीं हूँ।
- 15:09जो आँखें रूप का दर्शन करती हैं। यह रूप मैं।
- 15:17नहीं हूँ। जो जीवा रसास्वादन करती।
- 15:22है वो रस, मैं नहीं। वो जीवा भी मैं नहीं।
- 15:28हूँ। वो रस्सी भी मैं नहीं हूँ।
- 15:30वो। आँखें भी मैं नहीं हूँ वो रुक
- 15:32होगी, मैं नहीं हूँ। श्रवण वो कान।
- 15:37भी मैं नहीं हूँ। वो आवाज़।
- 15:40भी मैं नहीं हूँ। स्पर्श या त्वचा भी।
- 15:49मैं नहीं हूँ। और त्वचा के ऊपर जो स्पर्श।
- 15:53का अनुभव होता? वो भी मैं नहीं।
- 15:55हूँ ये नाशिका। पुटें भी मैं नहीं हूँ और।
- 16:00नाशिका पुटों से जो। सुगंध और दुर्गंध का अनुभव।
- 16:05होता है वो भी मैं नहीं हूँ। यह अनुभव से जानना।
- 16:16होगा तुम्हें और अनुभव तुम कैसे करोगे शाक्षित्व में आके?
- 16:23इन सब के साक्षी हो जाओ। तो धीरे धीरे तुम्हें पता चलेगा
- 16:28ये 15 में नहीं है। सोल।
- 16:33में आ गया। मन मन तुम्हारा डोलता है और तुम
- 16:37मन को देखते हो मन तुम्हारा। ठहर?
- 16:41जाता है तो भी। तुम मन को देखते हो तो जीसको तुम
- 16:44देखते हो तुम नहीं हो सोल मन भी तुम नहीं।
- 16:50बुद्धि को सोचते गणित बढ़ाते गुना, तकसीम करते जोड़ तोड़।
- 16:56करते तुम देखते हो? इसलिए बुद्धि भी तुम।
- 16:59नहीं हो। चित चित के ऊपर।
- 17:03कभी तुम उदास होते हो कभी। शोक आता है कभी?
- 17:08खुशी होती हर्ष। आता है।
- 17:10कभी नाचते हो। कभी तुम उदास होते हो।
- 17:22तो चित भी तुम नहीं हो चित के पटल पर।
- 17:25चीजें आती हैं जाती। हैं, निकल जाती हैं वो तुम नहीं।
- 17:31अहंकार। ईगो मूल स्वरूप सब चीजों का।
- 17:37यह अज्ञान भी मैं। नहीं।
- 17:44अब ये 19 हो गए हैं। विस्मयादि प्रकृति लास्ट।
- 17:54ग्रैविटेशन भी मैं नहीं हूँ। वेलोसिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी।
- 18:03भी मैं नहीं हूँ जीतने सिद्धांत हैं प्रकृति की वो मैं नहीं।
- 18:10हूँ विश्व में आगे प्रकृति ये। प्रकृति भी मैं नहीं।
- 18:14हूँ ये सारी चीजें। आपने अनुभव से जानी हैं।
- 18:21बाबा कहते हैं इन बीसों को प्रैक्टिकल के जरिए।
- 18:25तुम देख लो की तुम नहीं। फिर 21 हुआ जा।
- 18:30सकता है। यानी 21।
- 18:34फिर एक ईश हुआ जा। सकता है वह इक्कीसवां वह इन सबका
- 18:42ओब्सर्वर है। इन 20 चीजों का।
- 18:46ओब्सर्वर है वह इक्कीसवां। उसे।
- 18:55काउंटिंग की भाती लोगे तो 21 की। संख्या गिन सकते हो?
- 19:01उसको। प्रजेंस के हिसाब से लोगे?
- 19:03एक्जिस्टेंस के हिसाब से लोगे तो वह एक।
- 19:07ईश भी बन सकता है। एक ओंकार।
- 19:12तुम कौन हो गए? इक्कीसवें हो गए इक्कीसवां।
- 19:16यानी जो के। ऑब्जर्वर है सभी चीजों का एतरह
- 19:23पति पबड़या चड़िए। होई 21।
- 19:31इन। रास्तों पर चलकर परमात्मा के।
- 19:34इन रास्तों पर चलकर। इन बीसों को क्रॉस करके फिर तुम
- 19:41ने। छत पर पहुँच जाना और 21 हो जाना
- 19:4621 हो जाना, वो एक परमात्मा हो जाना।
- 19:52ध्यान रखना। इन बीसों में कोई।
- 19:57रस नहीं है। और उपनिश्चित में लिखा।
- 20:03है रसो वैसा। वह इक्कीसवां।
- 20:08जो है वह रस रूप है। इन विषों में कोई?
- 20:13रस नहीं है, न पृथ्वी में रस है। न जल।
- 20:17में न वायु में। न आकाश में ये।
- 20:25पंच महाभूतों में रस नहीं। न।
- 20:30रस करमुन्द्रियों में है। न रस।
- 20:32ज्ञानिन्द्रियों में है तुम कितना ही मधुर संगीत।
- 20:37सुन लो एक। वक्त आएगा।
- 20:39तुम उकता जाओगे। कितना ही सुंदर।
- 20:46दृश्य का दर्शन कर लो एक वक्त। आएगा कि तुम सुन्दरता।
- 20:50से भी ऊब जाओगे। इनमें।
- 21:04रस नहीं है, बाबा। कहते इनमें रस।
- 21:07नहीं है। बीसो न?
- 21:09प्रकृति में कोई। रस है प्रकृति में शांति।
- 21:15है। कोलहल।
- 21:17भी है प्रकृति में प्रदूषण। भी है।
- 21:22स्वच्छता भी है प्रकृति। को अगर अपने हिसाब से प्रयोग
- 21:29करोगे तो उसका लुत्फ भी। उठाया जा सकता है।
- 21:33और प्रकृति का अगर। दुरूपयोग करोगे तो विनाश भी हो
- 21:37जाता है। अनोखी खोज की गई।
- 21:43इससे हम बिजली। भी पैदा कर।
- 21:45सकते है ठंडी छांव। तले एयर कंडीशन चला के।
- 21:53सर्दी में हीटर चला के हम। टेम्परेचर को अपने अनुकूल ढाल के
- 22:00आराम से बैठ सकते हैं। यह प्रकृति का सदुपयोग है और हम।
- 22:07इसे प्रकृति का विनाश भी कर सकते। हैं।
- 22:13एटम बम बना के। हम रेडीगेशन भी फैला।
- 22:20सकते हैं। और हम इससे आनंद भी उठा सकते हैं।
- 22:26ऊर्जा पैदा करके। तो बाबा कहते।
- 22:31हैं, इन बीसों में कोई आनंद नहीं। पंच भूतों में कोई पंच इंद्रियों
- 22:38में कोई। पंच स्वादो में कोई।
- 22:49चित्त? में कोई रस नहीं, मन में कोई रस।
- 22:52नहीं अहंकार में कोई। रस नहीं, बुद्धि में कोई रस नहीं
- 23:03बुद्धि तो गणित करती रहती है। अहंकार में तुम्हें लगता है रस
- 23:10है, लेकिन बाद में पता चलता है कि जिसे।
- 23:15तुमने रस समझाता। यही दुख का?
- 23:17कारक बन गया। तुम सारी सृष्टि के मालिक हो सकते
- 23:24हो और गर्व कर। सकते हो कि मैं।
- 23:27चक्रवर्ती सम्राट लेकिन बाबा कहते हैं, यह सम्राट होना ही तुम्हारे
- 23:37लिए एक बाधा बन जाएगा रस के लिए। रस तक नहीं पहुँच।
- 23:44पाओगे तुम? तो बीसों में रस नहीं।
- 23:48है तो फिर रस किसमें है? 21 में में रस।
- 23:51है और। इक्कीसवा कौन है?
- 23:55रस वो वैसा वह रस रूप है इक्कीसवां परमात्मा।
- 24:00चढ़ गया हुई 21। उस इक्कीसवें में रस।
- 24:07है। जब वो नहीं मिलता।
- 24:15तो आम व्यक्ति जो। उस मुकाम पे नहीं पहुँचता।
- 24:24सुन गला दरबार के सुन गला आकाश की कीटा आइरेस कीटा शूद्र।
- 24:38प्राणियों को कहते हैं बाबा। जिन्होंने अभी 21 हुए।
- 24:43नीरो। अभी भटक रहे हैं अलग अलग।
- 24:49यूँणियों में निमन योनियों में शुद्र योनियों में भटक रहे।
- 24:52हैं यह जो मानुषी। योनि में भी आ गया और।
- 25:01उसने। पदार्थों का रस तो चखा।
- 25:07उसने दंड तो खूब। इकट्ठा।
- 25:08किया मान मर्यादा भी। खूब इकट्ठी की।
- 25:11गद्दियाँ भी उसने खूब। इकट्ठी की वोकबुलरी भी।
- 25:15सूचनाएं भी उसने बहुत। इकट्ठी की उसने शिष्य भी बहुत।
- 25:19बनाए नामदान भी। देता रहा।
- 25:23लेकिन ध्यान रखना वह। खुद।
- 25:26रस रूप नहीं। हुआ रस हो वैसा।
- 25:31वह रस है, तो अगर रस नहीं। पाया।
- 25:38तो तुम नी रस हो, तुम सह रस तब? हो गया।
- 25:47जब तुम उस रस को पालोगे पी लोगे। और मस्त हो जाओगे वह रस ऐसा कि
- 25:58तुम्हें मदहोशी। के आलम में ले जाता है।
- 26:03बहरास ऐसा। कि जीसको पीकर?
- 26:05तुम मदमस्त हो जाते। हो?
- 26:12अहिंसाफयो मानसरोवर। हमसफायो आ क्यूँ ढोल ताल?
- 26:38तले या। क्यों डोल मन मस्त हुआ वह फिर
- 26:48क्यों? बोल मन मस्त हुआ।
- 26:54हाँ, फिर क्यों बोला? जब तक वो इक्कीसवां।
- 27:01नी मिजदा रसने मिजदा तब तक तुम्हारे कंठ।
- 27:05में वो। रसधार की आवाज़।
- 27:08नहीं आएगी। तुम बोलोगे तो नीरस नीरस सा
- 27:10बोलोगे सुनना कभी। इन सर्वों को इन आचार्यों को इनके
- 27:18पास वोकबुलरी बहुत। है तर्क बहुत है, तार्किक बुद्धि
- 27:23बहुत है। सूचनाएं बहुत है, लेकिन रस विहीन
- 27:28रस नहीं है। और बात तो।
- 27:32हम रस की। तलाश में ही रहते हैं।
- 27:35घर से तो हम चले थे खुशी के तलाश में तुम वस्तु।
- 27:43तय तो उस रस की खोज में ही हो, चाहे कुछ भी।
- 27:46खोज रहे हो गमराह? में खड़े थे, वही साथ हो लिया।
- 27:54तो तुम्हें फिर सूचनाएं मिलती हैं रास्ते में तुम सूचनाएं ले लेते
- 27:58हो? तुम्हें गीता मिलती तुम गीता पढ़
- 28:02लेते हो अष्टावकर मिलता अष्टावकर गीता।
- 28:04पढ़ लेते हो उपनिषद पढ़ लेते हो, वेद, पुराण, कुरान, बाइबल ग्रंथ।
- 28:09सब कुछ पढ़। लेते और ये मात्र।
- 28:11सूचना ही है। बिना अनुभव के बिना अनुभव के
- 28:17ग्रंथ मात्र सूचना ही है। कालाक्षर भैस बराबर इनमे राशनिंग।
- 28:24शब्दों में राश मत। ढूँढना।
- 28:28शब्दों में मेरा शुभ। होता नहीं।
- 28:30होता नहीं तो मिलता। भी नहीं सुन गल्ला आकाश की कीटा
- 28:41आई रेस। जब संत बोलता।
- 28:44है आकाश। की बातें गगन मंडल।
- 28:47की बातें। और वहाँ जाकर।
- 28:51जो उसने रस को पिया था तो जिन्होंने।
- 28:55उस रस का स्वाद कभी चखा नहीं उनको।
- 29:00भी? रीस आ जाती?
- 29:02है कि हम भी कैसे इस रस को पिए तुम्हारे भीतर।
- 29:06भी आती होगी। कोई।
- 29:09प्राणी ऐसा नहीं है। जो सच्चे संत?
- 29:13को सुनकर उसके भीतर रीस न जगे, उस परमात्मा को पाने की इच्छा न जगे,
- 29:21मोमुक्षा न जगे, प्यास न लगे। संत जब बोलता है तो उसकी मीठी।
- 29:32वाणी से तुम्हें भी लगता है कि मैं।
- 29:35भी उस तल पे। पहुँच जाऊं?
- 29:38जीस तल पे जाके। ऐसी।
- 29:41मृदु और मधुर भाषा का उच्चारण प्रकट होता है।
- 29:51सुन गला। आकाश की किट्टा आई रीस किट्टा
- 30:00शब्द शुद्रो के लिए प्रयोग। किया है शुद्र का मतलब?
- 30:05जो अभी उस। ब्राह्मणत्व तक नहीं पहुंचा।
- 30:08इसने जिसने अभी तक पाया। नहीं अहम् ब्रह्मस्मा जो ब्रह्म
- 30:13तक। पहुंचा है वो क्षुद्र जन्म से सभी
- 30:17क्षुद्र होते हैं। बस एक दो मसले होते हैं।
- 30:28एक दो उदाहरण दिए जा सकते। हैं।
- 30:32जो कि जन्मजात ब्राह्मण पैदा हुए। जैसे कृष्ण जैसे राम जन्मजात
- 30:40ब्राह्मण पैदा हुए, वो पिछले जन्म की उनकी उपलब्धि है।
- 30:46कुछ बाकी रह गया। भोगने के लिए।
- 30:50और यहाँ से जब जाना होता है। तो सारा हिसाब किताब प्रकृति को
- 30:56चुकता। करके जाना होता है।
- 30:59यह उसूल है परमात्मा का। अब बुध आएँगे इस धरा पर।
- 31:07हो तो जाएंगे परमात्मा। लेकिन जाना होगा हिसाब देखे।
- 31:14वो हिसाब चुकता होगा। पांच।
- 31:17साल में के 50 साल में पता नहीं। लेकिन।
- 31:23आना पड़ेगा जब तक। तब तक जब तक के।
- 31:27तुमने हिसाब बराबर नहीं। किया वही खाता।
- 31:30बंद नहीं किया। क्लोज़ करके जाना होता है।
- 31:36बैलेंस करके जाना होता। है।
- 31:41यही कर्मों का लेखा। जोखा है।
- 31:47जीसको। बिना खोजे जारवा कहते के कुछ नहीं
- 31:53होता लेना देना। जदा जीवेत, सुखी जीवेत।
- 32:02ऋणम कृतवा गितं। पीवेत भस्मभूतास्य देहस्य।
- 32:08पुनर आगमनम कुतह। जब तक।
- 32:14जियो, सुखी जियो चाहे यारो। दोस्तों से उधारी मांगकर।
- 32:20मुकर जाओ। और ऐसे लोग होते।
- 32:27हैं जो अपने आप। को बेचारा दिखाकर?
- 32:32दूसरों को लूट लेते हैं। और फिर जब।
- 32:40मित्र मांगता। है तो वो अदालतों में घसीट लेते
- 32:46हैं, उनका और खर्चा करवा देते हैं।
- 32:48ऐसे लोग मैं जानता हूँ बोलता ही नहीं, सिर्फ मैं ऐसे लोगों को
- 32:55जानता हूँ। सुन गल्लां आकाश की केटा?
- 33:04आई रेस इन लोगों। के मन में तो।
- 33:10बहुत होता है कि हम भी कैसे। इस अमृत।
- 33:13रूपी स्वाद को चक। लें।
- 33:16कैसे इस अमृत का कांड? करके हम भी मदहोशी के आलम में
- 33:21झूमें, खिलखिलाएं हमारा रोवा रोवा।
- 33:26सुगंधित हो जाए। मन तो बड़ा करता है।
- 33:35लेकिन एक चीज़ तुम्हें। अटका।
- 33:37लेती है क्या? बहुत से लोग मुझे।
- 33:44प्रश्न पूछ लेते हैं। मन तो करता है बाबा।
- 33:50आपको सुनकर मन करता है। कि काश।
- 33:56मैं भी आपके उसकी सतल पर बैठा होता।
- 34:01जहाँ उस अमृत का। फव्वारा बहता है, झरना बहता है।
- 34:09और आप गटा गट उस रस प्याले। को पीते चले जाते हो?
- 34:15जाना। तो हम भी चाहते हैं।
- 34:21लेकिन बाबा ये अडसन। क्या है?
- 34:24क्यों नहीं पहुँच पाते हम? जैसा।
- 34:29आप कहते हो वैसा करते भी हैं। क्रियाएं भी करते हैं।
- 34:33न कुछ करने में बैठ जाते। हैं सब भगवान की।
- 34:38फोटों मंदिरों में दान कर दीं। या पड़ोसियों को दे।
- 34:43दीं। अब कुछ।
- 34:46भी नहीं है, लेकिन। फिर भी हम।
- 34:49उस तल पर। क्यों नहीं पहुंचे अभी?
- 34:52कुछ चपका हटे पाक? में बाहरी।
- 35:00मूर्तियों को हटाने से। सारा काम पूरा नहीं होता, थोड़ा
- 35:05सा हल्का हो जाता है। इन मूर्तियों को तुम कल तक।
- 35:10भगवान समझे बैठे थे आज वह बेकार। हो गए और ये मूर्तियां मात्र।
- 35:19सिम्बोलिक रिप्रेजेंटेशन थी जैसे। हम ब्लैकबोर्ड पर लिख दे, पानी।
- 35:28लेकिन ब्लैकबोर्ड पे लिखा हुआ पानी प्यास नहीं बजाता।
- 35:35ब्लैकबोर्ड पे लिखा हुआ। भोजन तुम्हारी भूख नहीं।
- 35:38मिटाता। ब्लैकबोर्ड पे लिखा हुआ।
- 35:43ऑक्सीजन। तो मैं जिंदा नहीं।
- 35:45रखता। कोरोना में कितने लोग मर गए
- 35:48ऑक्सीजन के बिना? फिर तो ब्लैकबोर्ड पे।
- 35:51ऑक्सीजन। लिख के जीवंत रह।
- 35:54लेते हैं। क्या जरूरत थी ऑक्सीजन के
- 35:59सिलिंडर्स की? लेकिन ब्लैकबोर्ड पे लिखा हुआ कुछ
- 36:05भी। मात्र एक इंगित।
- 36:08होता है इशारा होता है। सत्य।
- 36:13में कुछ नहीं होता। वो बस मात्र एक।
- 36:17अबरिवेशन होता है सिंबल होता। है प्रतीक होता है।
- 36:22प्रतीकात्मक चिन्ह है यह। तो अभी बहुत सी चिपकाटी है।
- 36:32तुम धीरे धीरे इन्हें तोड़ते चले। जाओ मैंने आपसे कहा था।
- 36:41मैं पहले हल्की हथौड़ियाँ। मारूंगा।
- 36:44फिर बड़े हथौड़े। ले लूँगा और फिर आखिर में जब
- 36:48आपका। वो सबसे बड़ा बाधक।
- 36:53जिसे अहंकार कहते। हैं वो तोड़ना होगा तो मैं घणा।
- 36:58उठा लूँगा। क्योंकि रेत हाथ से बोराया जा।
- 37:08सकता है, लेकिन। पत्थर हाथ से बोरा नहीं जाता।
- 37:11उसके ऊपर तो। गाणें चलाने होते हैं।
- 37:18तो तुम पूछते हो बाबा हम? क्यों नहीं पूछते छत?
- 37:21हमारी बहुत। है।
- 37:32आखिर में जाके एक चीज़। तुम्हें बाधा बन जाएगी, तब
- 37:38तुम्हें पता चलेगा सब। छोड़ दिया लेकिन फिर।
- 37:42भी एक चीज़ बाधा बनती। है।
- 37:47जो एक चीज़। स्वामी विवेकानंद, नरेंद्रनाथ
- 37:51जैसे व्यक्तियों को भी बाधा। बन गए अपने आपको।
- 37:56बड़े साहसी समझते थे। वो लेकिन उस।
- 38:01जगह पे जा के। थर्रा गए।
- 38:05वो है मृत्यु का। डर कभी कभी शिष्यों को असली गुरु
- 38:17मिल जाया। करते हैं जैसे नरेंद्र को
- 38:19रामकृष्णा मिल गए। सबसे पूछा करते थे।
- 38:25प्रमात्मा। है और सभी कहते।
- 38:28हाँ हैं। वो दुकानदार थे।
- 38:34वो कहते वो मिल। जायेगा तुमने देखा है हाँ, मैंने
- 38:38देखा है। वो मिल जायेगा।
- 38:43फिर क्या तुम मुझे दिखा सकते हो फिर क्योंकि उन्होंने देखा नहीं?
- 38:50होता। तो बहाना तो कोई।
- 38:53बनाएंगे ना? हाँ।
- 38:55यू विल हॅव टु? गो अंडर।
- 38:57सम प्रोसेसेस तुम्हें कुछ। करना होगा।
- 39:03नाम जप करना होगा स्मरण करना। होगा पाचनम करना होगा।
- 39:10फिर। तुम पहुँच ही जाओगे।
- 39:13यह। मात्र नकली गुरुओं के।
- 39:16प्रपंच हैं व्यापारिक प्रपंच। देखा देखा?
- 39:22उन्होंने कुछ नहीं, लेकिन। ऐसे करते करते एक।
- 39:27दिन। ठकरा हो गया असली गुरश।
- 39:33वही प्रश्न पुराने पूछ। बैठे रामकृष्णा से परमात्मा है।
- 39:42रामकृष्णा काली मंदिर में दक्षिणेश्वर।
- 39:48में। वो कहते हम हैं।
- 39:58इससे पहले। के नरेंद्र नाथ पुश्ते के तुमने
- 40:05देखा? है।
- 40:09रामकृष्णा कहते हाँ। मैंने देखा है तुमने देखना है
- 40:16रामकृष्णा ने मौका नहीं दिया। नरेंद्र को पूछने का रामकृष्णा
- 40:23परम मनुष्य कहते हैं, पुत्र। है।
- 40:28मैंने देखा है तुमने। देखा है नरेंद्र, जिसकी।
- 40:35तलाश में थे जब आप कि आज। मिल गया वो।
- 40:41रामकृष्णा कहते हैं, तुम्हें देखना।
- 40:43है। परमार्थ विवेकानंद कहते हैं,
- 40:50मैंने परमात्मा देखना। है तो फिर आंखें बंद करो और
- 40:55रामकृष्णा ने। अपना हाथ 1000 पे।
- 41:04रख दिया नरेंद्रनाथ के, जो बाद में विवेकानंद हुए।
- 41:15तुम्हें मैं पहले भी बहुत बार बता चुका कि आखिर।
- 41:19में आएगी मृत्यु? बाकी सब।
- 41:24कंपन और मृत्यु। भी ये सब पहले।
- 41:31कथक से। सो जाएंगे, लेकिन।
- 41:33क्योंकि मृत्यु का डर आखिरी डर बहुत।
- 41:36मात्रा में तुम्हारे भीतर विद्यमान।
- 41:40करीब 7080% मृत्यु का व्यय ही है। बेहतर तुम्हारा जितना हमारे शरीर।
- 41:47में। जल की मात्रा जितना।
- 41:50हमारी पृथ्वी पे पानी की मात्रा उतनी ही हमारे भीतर बह की।
- 41:56मात्रा यह। एक एक हम भी।
- 41:58नहीं समझलो तुम। तो बह की मात्रा हमारे भीतर बहुत
- 42:04है। और आखिर में सब तुम पांचों
- 42:12विचारों को भी जीत लो। तुम 20 को जीत लो जो मैंने 20 का
- 42:18अभी। वर्णन किया है।
- 42:20तो इक्कीसवां होते होते। तो मैं मृत्यु के दरवाजे से निकल
- 42:26रहा हूँ। आखिरी दरवाजा मृत्यु का दरवाजा।
- 42:37इसलिए उपनिश्चित में। पिता पुत्र को भेजता है यम के
- 42:50पास। तीन दिनों के लिए।
- 42:54यम के पास जाए। बिना आत्मबोध नहीं।
- 42:57होता पर आत्मबोध नहीं होता। कठोर निषेध में।
- 43:05बाजरशवा नाम के ऋषि। अपने।
- 43:09बूढ़ी गांव को दान दे रहे थे। उन्होंने आज।
- 43:18सर? कुछ दान कर देना था।
- 43:22उसके पास जो भी। था हीरे जवाहरात।
- 43:25बहुमूल्य रत्न सोना जमीन। जायदाद दुधारू पशु।
- 43:34व्यर्थ के पशु सब। दान कर देने से आज उसमें निवृत्त
- 43:40हो जाना था। सभी कुछ दान करके तो बाजस्व ऋषि
- 43:49का पुत्र। नची केता बार बार।
- 43:53पुस्ता पिताजी आप। अपनी सारी संपत्ति।
- 43:57दान कर रहे हो? मैं भी।
- 44:01तो आपकी सम्पत्ति हूँ, मुझे किसको दान करो?
- 44:07बार बार सवाल पूछने के कारण पिता कोपित हो गए।
- 44:17बाजेस्व रक्षित। बोले मैं तुम्हें यमराज।
- 44:23को दान करूँगा। यद्यपि यह।
- 44:28शब्द क्रोध में बोले। गए थे।
- 44:30तथापि, यह सत्य है जब तक तुम मृत्यु के अर्पण नहीं होगे।
- 44:40तब तक तुम अमृत का पान। नहीं कर सकोगे बड़ी।
- 44:43उलटी। बात अमृत का पान करने के लिए
- 44:49मृत्यु। के बीच में से गुजरना।
- 44:51होता है मृत्यु का गेट पहले आता। है उस गेट को क्रॉस करना।
- 44:59होता है। अमृत तक पहुँचने के।
- 45:02लिए। तो बाजेश्वर ऋषि ने कहा नचिकेता
- 45:09मैं तुझे। यमराज को दान करूँगा।
- 45:15वह तो बड़ा खुश। कहानी।
- 45:19लम्बी हो जाएगी बस। यहीं तक मैं आपको।
- 45:22समझाना मरने का डर आपका आखिरी डर इसलिए मैं आपको साहस से सीखाता
- 45:34हूँ। मैं बोलता हूँ।
- 45:40राजनीति पे बोलता हूँ। मैं बोलता हूँ अध्यात्म पे बोलता
- 45:47हूँ। और इन सारी?
- 45:49चीजों के पीछे एक। चीज़ जो तुमने कभी।
- 45:54महसूस की होगी वो। है साहस।
- 46:00मेरे बोल्य में भी मैं तुम्हें साहस सिखाता।
- 46:03हूँ। क्योंकि अंत में सिर्फ।
- 46:07और सिर्फ यह साहस। ही तुम्हें काम आएगा।
- 46:12इस साहस के होते हुए भी तुम अंत में जाकर।
- 46:16डरोगे। पुकारोगे फिर गुरु को फिर।
- 46:23भी आना पड़ता है। किसी सच्च खंड में।
- 46:28ले जाने के लिए नहीं वरना तुम्हें औसला देने के लिए कि तुम कहीं
- 46:34नहीं। मरोगे।
- 46:36तुम इम्मोर्टल हो तुम। कूद जाओ यह खाई।
- 46:45नहीं है। कुंआ नहीं है।
- 46:49इसमें तुम मरोगे नहीं, वर्ण इसमें कूद कर तुम अमर।
- 46:53हो जाओगे यह सरोवर। अमृत का है डरो मत गुरु वह।
- 47:04नहीं जो आपको पाठ पूजा करनी जो आपको दुआ।
- 47:09फिर याद करनी जो। आपको शोप प्रचार।
- 47:13पूजन करना। दान पुण्य करना।
- 47:18सीखाता हो वह गुरु नहीं गुरु तो मात्र।
- 47:23तुम्हें सारी उम्र एक। ही चीज़ सीखाता है जिसकी जरूरत
- 47:28आखिर में पड़ेगी। तुम्हें।
- 47:30जब तुम सारे भ्रमों को तोड़ दोगे। इन लादे हुए पाखंडों को तुम तोड़
- 47:36दोगे तो आखिर में फिर? भी तुम्हें जो जरूरत।
- 47:40होगी वो होगी साहस। की और गुरु वह है जो आपको नाम।
- 47:46जप न दे वरना। साहस दे।
- 47:51नाम? जब से तो तुम।
- 47:52कायर बनता है नाम जब तुम्हें कायर बना देता है साहस।
- 48:03तुम्हें वीर बना देता। है।
- 48:08गुरु सारी उम्र अगर। सच्चा गुरु है तो।
- 48:11तुम्हें साहसी बनाएगा वह। सच्चा गुरु जो तुम्हें।
- 48:17चंद अलफाज़ तुम्हारे कानों में ठूंस दे और तुम्हारी शक्ति को वृथ
- 48:23में बर्बाद करे। वह गुरु बनने के योग्य ही नहीं।
- 48:32जो तुम्हे शब्दों में ना उलझाए जो तुम्हारी शक्ति को पुनरुक्ति।
- 48:37में ना गंवाए। जो तुम्हे।
- 48:40साहस का संचार कर दे वही सच। मायने में गुरु होता।
- 48:46है। क्योंकि गुरु?
- 48:51जानता है कि आखिर। में आहुति देनी होती।
- 48:55है अपनी खुद। की बलि देनी होती।
- 48:59है यहाँ। किसी मैमने की बलि देने से काम?
- 49:03नहीं चलता। वहाँ किसी हवन सामग्री के आहूत
- 49:08करने से? काम नहीं चलता महत्त्व स्वयं।
- 49:15को ही आहूत। करना होता है जैसे क्षमा में
- 49:20परवाह न जल के राख हो जाता। गुरु तुम्हें साहस देगा।
- 49:32और साहस सबसे शानदार पुरस्कार है प्रकृति का तुम्हारे पास।
- 49:39साहस। का फल इतना मीठा होता है और।
- 49:44कायरता का फल इतना कड़वा होता है। तुम्हें अभी मालूम नहीं है।
- 49:53ऐतराह पति पबड़या। चिड़िया हुई 21।
- 49:59सुन कर ला आकाश की केटा आई रेश। तो आपको भी।
- 50:08रेश होती है। कौन?
- 50:11प्राणी ऐसा धरती पर। जो आनंद की तलाश नहीं कर रहा।
- 50:18आनंद। के लिए तो तुम।
- 50:19बलात्कार करते थे। पता है चाहे।
- 50:26उसका अंजाम मृत्यु दंड। ही क्यों न मिले?
- 50:31आनंद के लिए। तुम एपिस्टीन का स्लैंट?
- 50:35पे चले जाते हो। पता है कि इसका परिणाम लोग टांग।
- 50:43देंगे कलम में। आज बच जाएंगे किसी तरह युद्ध लगा
- 50:48के। ईरान के साथ लेकिन।
- 50:51फिर जब फाइल तो। खुलेगी आखिर में?
- 50:58फिर। तेरा क्या होगा रे?
- 51:00बोरया सुंगला आकाश की केटा आई।
- 51:16रीस नानक नदरी पाई। बड़ा सुंदर शब्द है।
- 51:24कूड़ी। कूड़ा ठिस आइए।
- 51:28दूसरे शब्द। को पहले व्यख्यात कर।
- 51:35नानक नदरीप आइए कूड़ी। कूड़ा ठिस।
- 51:41नकली गुरुओं की बातें तो झूठ और गप्पे ही हुआ।
- 51:45करते हैं ये बाबा बोलते। हैं।
- 51:50और आई। तुम देख सकते हो नकली गुरुओं की
- 51:55कतारें। बंधी हुई हैं।
- 52:01उनको शिकार मिल ही जाते। हैं।
- 52:07और वो शिकार। मिलने का कारण है।
- 52:11इन शिकारों को पता नहीं। के।
- 52:14आनंद का? प्रेम प्याला, रस।
- 52:16प्याला जो पी लेता है उसका लक्षण क्या?
- 52:19होता है। जैसे बच्चे को।
- 52:25पता नहीं होता के। शराब पिया हुआ आदमी।
- 52:29उसका लक्षण क्या होता? है।
- 52:32बच्चे को पहले। पहले नहीं पता होता।
- 52:35धीरे धीरे पता लग। जाता है।
- 52:39ऐसे ही जो व्यक्ति को। अभी पता नहीं रस।
- 52:42से पिया हुआ व्यक्ति। जब बोलेंगे, तो तुम्हें मंत्र
- 52:47मुग्ध कर लेगा। तुम्हारा भी मन करेगा कि मैं।
- 52:56भी इस मधोशी। के आलम।
- 53:01में खो जाऊं मैं। भी इस मध का भान कर लूँ।
- 53:08और गुरु तुम्हें पुकारना। है।
- 53:14गुरु तुम्हें आमंत्रित करता। है।
- 53:27सितारों पे ले चलूं आओ हजूर तुमको सितारों पे।
- 53:44ले चलूं। दिल झुम।
- 53:49जा ऐसी बहारों में ले चलूँ आओ हजूर तू।
- 54:08तुम भी चाहते हो। सितारों पर बहारों में खो जाना आज
- 54:18जाल विषय हुआ है। नकली गुरु।
- 54:27जिन्होंने खुद उस रस। का स्वाद नहीं चखा।
- 54:33और तुमको चढ़ाने के लिए निकल। पड़े।
- 54:36उनके बारे में ही। बाबा ये शब्द।
- 54:38कहते हैं, कूड़ी कूड़ा। ठेस?
- 54:43गप्पे? आदमियों की बातें तो झूठी ही हुआ।
- 54:46करते हैं। झूठे आदमियों की बातें तो गप्प ही
- 54:51हुआ। करते हैं।
- 54:54नानक नदरीपाई। बाबा कहते हैं, वह रस का फायदा?
- 55:06उसकी नजर के बिना नहीं। मिलेगा उसकी कृपा के।
- 55:12बिना नहीं मिलेगा। कर्मी आवे कपड़ा यह मनुष्य।
- 55:23का चोला भी उसकी। रहमत के बिना नहीं मिलता नदरी मोख
- 55:28दवार उस। मोक्ष का रस का।
- 55:31आनंद भी। उसकी।
- 55:34कृपा के बिना नहीं मिलता। मुझे लोग।
- 55:36पूछ लेते हैं बाबा? फिर।
- 55:39प्रयास का कोई महत्त्व? नहीं।
- 55:47फिर साधना का कोई महत्त्व? नहीं है।
- 55:50साधना का अपना महत्त्व है। साधना तुम करो।
- 56:00लेकिन कंपैरिजन मत करो। कॉम्पिटिशन मत करो, दुखी मत।
- 56:04हो? के पड़ोसी पहुँच गया।
- 56:08मैं नहीं पहुंचा। तुम अपना कर्तव्य कर्म करो।
- 56:18तुम्हें। प्यास लगी है पानी।
- 56:21ढूंढो। गिलास।
- 56:26में पानी भरो। होगा डक जाओ।
- 56:32उस रस को पीने के लिए जो भी हो सकता है वो तुम्हें।
- 56:37करना होगा। लेकिन बाबा कहते हैं।
- 56:47नानक नज़रे। पाइए।
- 56:53उस रस को पीओगे तो तुम। तब जब उसकी कृपा होगे।
- 56:59और ध्यान रखना वह। कृपा करने में तुम्हारे से
- 57:03बेईमानी नहीं करता। और बड़ा ईमानदार है।
- 57:09इसलिए उसको न्याय कार्य। कहते हैं वह तुम्हारा हक रखेगा।
- 57:18तुम बिला शक उस रास्ते पर अपने। डगर चलते रहो तुम्हारा हक
- 57:27परमात्मा रखता नहीं तुम्हारा हक। तुम्हें मिलेगा जितना तुमने।
- 57:31किया है सत्यनिष्ठ होगा। पूरी ईमानदारी से।
- 57:43उसका फल तुम्हें परमात्मा। देगा ही देगा वह तुम्हारा हक
- 57:47रखना। नानक नदरी पाइए।
- 57:54मिलेगा तो जब उसकी। नजर होगी।
- 57:59यह उसका मसला। है।
- 58:01जैसे भगवान कृष्ण ने। कहा कर्मण्ये वाधिकार से दूसरा
- 58:06कर्म कर। नजर करना काम मेरा।
- 58:14है। माँ।
- 58:15फलीशु कदाचन फल मैंने देना है। नजर मैंने करनी है कर्म तुमने।
- 58:26करना है तू अपना। कर्म कर।
- 58:29मैं अपना फल दूंगा। कर्मण्यवाद का रस्ते?
- 58:35तुम कर्म करते चले जाओ, माँ फलेशु कदाचन।
- 58:41फर मैं। देता रहूंगा मैं कमी।
- 58:44नहीं छोडूंगा तुम्हें। तुम्हारा बनता हक तुम्हें मिलेगा
- 58:55तुम किसी भी रास्ते से चले। तुम्हें तुम्हारा हक मिलेगा और
- 59:03उसको ही बाबा नजर कहते हैं जब तुम योग्य।
- 59:08हो जाते हो तो वृक्ष पर। फल लग ही जाते हैं।
- 59:18और जब तुम जोके। हो जाते हो तो वो फल मीठे हो ही
- 59:23जाया। करता है।
- 59:28मिलेगा उसकी नजर से। लेकिन कर्मण्य वादी का रस्ते है,
- 59:34कर्म तुम्हें करना होगा। ऐसा नहीं है कि कर्म तो तुम ऐसे
- 59:41करते रहो चोरी मक्कारी ठग्गी। बेईमानी कतलोगारत व्यपचार।
- 59:52राजनीति के गंदे खेल तुम। खेलते रहो और मन।
- 1:00:01में तुम ये रखो कि मुझे। परमात्मा भी आके।
- 1:00:04दर्शन कर देगा नहीं। परमात्मा।
- 1:00:10मिलेगा तुम्हारे कर्म के। साहस से साहस।
- 1:00:15के बिना कर्म भी तो नहीं होता है। इसलिए गुरु तुम्हें साहस।
- 1:00:23सिखाएगा वही सही गुरु? नाम स्मरण वगैरह।
- 1:00:30तो गपों गप्पों की झूठे हैं कूड़ी कूड़ा।
- 1:00:36ठेस? गप्पियों की झूठे हैं झूठों की
- 1:00:41गप्पे हैं। वो कुछ भी नाम दे देंगे।
- 1:00:48वो गप्पे है। वो तुम्हें उस अमृत।
- 1:00:51का स्वाद। चखने से कोई।
- 1:00:54काम नहीं आएँगे। वो तुम्हें उस मुकाम।
- 1:00:58पर पहुंचने में कोई। वाहन का काम नहीं।
- 1:01:02करेंगे। तुम।
- 1:01:07प्यासे ही रहोगे अगर। तुमने मार्ग सही नहीं पाया
- 1:01:14मार्गदर्शक। तुम्हें सही नहीं मिला।
- 1:01:17तो अकेली? श्रद्धा काम नहीं करेगी।
- 1:01:23श्रद्धा भी चाहिए। श्रद्धा, विश्वास, रुपनों या?
- 1:01:26ब्याम बिना न पाचेंते। और मार्ग।
- 1:01:31भी चाहिए। अगर तुम अपने प्रयास को गलत दिशा
- 1:01:36में लगा देते हो तो वह। प्रयास फल विहीन हो जाएगा।
- 1:01:41जाना है तुमने बॉम्बे मैं कल भी कह रहा था निकल गए।
- 1:01:45तुम लाहौर। की तरफ कैसे पहुँच।
- 1:01:49पाओगे बॉम्बे क्योंकि दिशा। गलत है, चल रहे हो मशक्कत सही कर
- 1:02:00रहे हो तुम। प्रयास तुम्हारा सही है।
- 1:02:05लेकिन मार्ग तुम्हारा गलत है। फिर क्या करोगे?
- 1:02:09दोनों चीजों का। सहयोग होना चाहिए।
- 1:02:15तुम्हारा प्रयास। भी पूर्ण हो तुम्हारी दिशा भी
- 1:02:18सम्पूर्ण हो। मार्ग भी सम्पूर्ण हो तो तुम
- 1:02:21पहुँच जाओगे। एक न 1 दिन।
- 1:02:26वह रस का ब्याला। तुम्हारे लबों को छू ही लेगा और
- 1:02:31तुम गटा। गट उसको पी ही।
- 1:02:33जाओगे? नानक नदरी पाइए कूड़ी।
- 1:02:37कूड़े ठेस। इन गबोड़ संखीय व्यक्तियों को
- 1:02:44जिन्होंने। खुद ही उस रस।
- 1:02:46को चढ़ाने तुम्हें लाखों। की तादाद में रस।
- 1:02:55बांट रहे हैं। जबकि राम किशन परमहंस एक व्यक्ति
- 1:03:01को। उस रस पिलाने चले थे वो।
- 1:03:05घबरा गया मौत के कारण। और यह जप फेंकते हैं तुम्हें
- 1:03:12साहस। तो देते ही नहीं।
- 1:03:16जप करने वाला। व्यक्ति साहसी नहीं।
- 1:03:19होता जब कुर्बान। होने की वेला आता?
- 1:03:23है तो वह कुर्बान दे। देता है मैं मने।
- 1:03:27की जब कुर्बान। होने का वेला होता।
- 1:03:32है। ऑन दी लास्ट जंक्चर।
- 1:03:40तो वह कुर्बानी दे देता है मेमने की।
- 1:03:43कहता है अल्लाह को प्यारी है कुर्बानी।
- 1:03:48अल्लाह? को प्यारी है कुर्बानी।
- 1:03:51लेकिन मेमने की नहीं तुम्हारे। अहंकार के।
- 1:03:56तुमने शब्द सुंदर सुंदर गढ़ लिए जो तुम्हें फिट बैठे।
- 1:04:01वो तुमने रख लिए जो तुमने अनफिट बैठे वो तुमने छोड़ दिया।