Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Nov 25 - विधवा और संत श्वेत वस्त्र क्यों पहनते हैं? मरने पर बाल क्यों मुंडवा दिए जाते हैं? Satsang by Baba Ji Vijay Vats
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- 0:01शिखानागौर बाबा गुलाब के फूल के आसपास कांटे क्यों होते हैं बेटे
- 0:19सीधे से बाज। भले आदमी को अपनी सुरक्षा के लिए
- 0:24बदमाशों की जरूरत नहीं होती, भले आदमी अपनी सुरक्षा के लिए बदमाशों
- 0:34को तैनात रखते हैं आसपास। बिगडे तेगडा दा होंडा है पीर डंडा
- 0:49बिगडे तेगडा दा होंडा है पीर डंडा तरमदी रक्षानु होंडा तलवार खंडा
- 1:00बिगडे तेगडा न होंडा है पीर डंडा। तरमदी रक्ष्यान होंडा तलवार खंडा
- 1:13बाबा जी विधवा स्त्रियाँ श्वेत वस्त्र क्यों पहनते हैं?
- 1:30और जिसके माता पिता स्वर्ग आरोहण कर जाते हैं वो अपने केस को कटवा
- 1:39देते हैं। बड़ा सुंदर स्वाद है बेटा।
- 1:51विस्वा स्त्रियों रंगदार कपड़े नहीं पहनते।
- 2:05जिसके साथ रंग वाजिब थे, वह चला गया।
- 2:16उनकी जिंदगी से रस और रंग जाता रहा, जिसके दम पर।
- 2:26रंग था वो विदा हो गया। इसलिए जब स्थिर विधवा हो जाती है
- 2:40तो रंगदार वस्त्र नहीं पहनते। रंग चला गया ऐसे ही धर्मों में।
- 2:50श्वेत वस्त्र पहनने का कारण था आज श्वेत वस्त्र तो धारण किए जाते
- 2:57हैं लेकिन उसका कारण है पता नहीं। कारण यह है कि संसार रंग बिरंगा
- 3:08है। और आज से इन्होंने संसार का रंग
- 3:18छोड़ दिया और संसार के रंग बहुरंगी हैं, हरा भी है, पीला भी
- 3:27है, लाल काला भी है, उस छेद में कोई रंग नहीं होता।
- 3:33हालांकि श्वेत में सारे रंग होते हैं, बड़े मज़े की बात है जब आप
- 3:45सात रंगों को इकट्ठा करोगे, तो पाओगे एक रंग बन गया उर्व रंग,
- 3:52श्वेत रंग और जब्य है एक रंग। विभाजित हो जाता है तो बन जाते
- 4:05हैं सात रंग तो विधवा किस जन्म से रंग चला गया?
- 4:22रंग बिरंगी पुषा की? अब वह नहीं पहने गए जिसके बल के
- 4:27ऊपर जिसके दम के ऊपर रंग था वह चला गया।
- 4:33सती प्रथा का भी यही मतलब था। कई बार यथार्थ बातों को
- 4:43कर्मकांडों में ये मूल लोग बांध देते हैं।
- 4:55सती प्रथा का ये मत उछा किसी स्त्री को?
- 5:08किसी मनुष्य से व्यक्ति से प्रेम था, उसके साथ शादी कर ली।
- 5:13वो शादी कोई बनता नहीं था, वो शादी संसार का रंग मानने के लिए
- 5:22थे। और वह जिससे संसार के रंग माने जा
- 5:33सकते थे, वह आज विदा हो गया, इसलिए बाहर से दिखाना कि मेरी
- 5:44ज़िन्दगी से रंग हो गया। तो विधवा श्वेत वस्त्र पहन लेती
- 5:52और जो समर्पित हो जाती धर्म को आज तो नकल है।
- 6:00जैन धर्म में श्वेत तंबरो की परम्परा है।
- 6:05राँगव हो गया। यानी संसार को क्या इनके लिए
- 6:11संसार का रंग ये नहीं मानेंगे? अब उसका रंग मानेंगे जो संसार में
- 6:22छुपा हुआ है। सात रंगों में छुपा हुआ एक रंग
- 6:28श्वेत है। अगर सात रंगों को तुम मिला दोगे
- 6:32तो एक रंग बनेगा। क्या श्वेत यह बड़ी अद्भुत
- 6:45सिम्बोलिक रिप्रेजेंटेशन थी। सात रंगों को छोड़ दो यक रंग ही
- 6:55हो जाओ। इसलिए साधु एक ही रंग के वस्त्र
- 6:59पहनता। गेरुआ अपने अपने धर्मों के रंग
- 7:04बना लिए गए, लेकिन बाकी सभी रंग बेकार।
- 7:11क्योंकि प्रकृति बताती है कि सात रंगों को मिला के एक रंग बनता है
- 7:15श्वेत तो श्वेतांबरो ने बिल्कुल वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया।
- 7:29इसलिए सभी रंगों के कपड़े पहनने बंद कर दिया साधुओं ने।
- 7:37महावीर नग्न हो जाते हैं और महावीर के शिष्य श्वेत वस्त्र
- 7:46पहनते हैं। शिष्य।
- 7:52श्वेत वस्त्र पहनने का मतलब संसार का रंग हो गया, लेकिन यह मात्र
- 8:03दिखावा है। कई अन्य धर्मों में भी श्वेत।
- 8:11रंग के वस्त्र पहने जाते हैं। स्त्रियों के द्वारा जैसे भी कहें
- 8:18इनको इसका मतलब नहीं पता। मतलब यह कि सात रंगों से परे हट
- 8:26गया और मैंने देखे हैं चाट पुकड़े हाथों में।
- 8:32गोलगप्पे खाते हुए मैंने देखे हैं समोसा कीचोड़ी अगर रेहड़ी के ऊपर
- 8:42खड़ के नहीं खाना तो अपने आश्रम में बना लेते हैं, ये कैसा सन्यास
- 8:51हुआ? अगर तुम्हारी इंद्रियाँ अब भी
- 8:57स्वाद लेके तृप्त होती हैं, तो इसका मतलब साथ है कि तुम तुम्हें
- 9:05उस अंतर से तृप्ति का बोध नहीं हुआ जो एक से आती है?
- 9:12एक वस्त्र बाहर से पहन लेना सिर्फ दिखावा है सब रंगों का छूट जाना
- 9:21एक रंग के मिल जाने से यह आंत्रिक घटना है ध्यान से सुनियेगा इन
- 9:28शब्दों को। सब रंगों का छूट जानो और सब रंगों
- 9:37का समाहित हो जाना, एक दूसरे मिल जाना तो बनेगा शौत रंग।
- 9:50तुम भी ऐसे ही हो जब श्वेत रंग बिखर जाता है।
- 9:57जब परमात्मा ने संकल्प किया वह श्वेत था।
- 10:06एको अहम? बहुसा में मैं एक से अनेक भोजन तो
- 10:20यह श्वेत रंग संसार के सात रंगों में विभाजित हो गया इसे ही संसार
- 10:28कहते हैं। इसी लिए एक ही रंग है सात रंगों
- 10:36में। इसका यही मतलब है संसार के कण कण
- 10:41में परमात्मा ही मौजूद है। प्रत्येक रंग में वही रंग मौजूद
- 10:47है। तुम ज़रा मिला के देखो इनको जब
- 11:00किसी का सुहाग उजड़ जाता, वह रंगदार वस्त्र पहनना स्त्रीबद्ध
- 11:10करती थी। इसका अर्थ था उसके जीवन से रंग खो
- 11:18गया और संत भी श्वेत रंग बह लेता है।
- 11:29उसका रंग कुछ हुआ है। उस रंग का मतलब है के इसने सारे
- 11:37संसार के रंगों को चख लिया। और सारे संसार के रंगों को चक कर
- 11:49इंद्रियादेत हो गया। इंद्रियों के रसों को भोंक कर
- 11:55इंद्र हो गया। सारे रंगों को मिलाकर यज्ञ रंग हो
- 12:01गया। और यह करंग होता है श्वेत तुम
- 12:07धर्म के रंगों को चुन नहीं सकते। नैचुरली ये करंग है धर्म का वह
- 12:14श्वेत तुम आर्टिफीसियल रंगों को चुन लेते हो।
- 12:22गेरवा हरा, पीला, लाल, काला नहीं नहीं दीज़ आर नट नेचुरल कलश नेचर
- 12:34का एक ही रंग है। सारे रंगों को मिला दो श्वेत रंग
- 12:40बन जाएगा। इसलिए विधवा श्वेत वस्त्र पहनते
- 12:49थी क्योंकि उस का रंग चालाक है और शांत श्वेत रंग पहनते थे क्योंकि
- 12:57उनके सारे रंग मिलकर श्वेत बन गया।
- 13:00ये दोनों में फर्क था। तुम्हें यक्सा लगे की बात लेकिन
- 13:08यक्सा है नहीं, बड़ा फर्क है एक का रंग उजड़ गया, एक ने रंग को जी
- 13:21लिया। जो स्त्री विधु जो स्त्री सती
- 13:28होती थी उसका रंग छिड़ गया और वो सचमुच प्रेम करती थी उससे और उसके
- 13:40बिना। सभी रंग फीके कभी कोई एक घटना घटी
- 13:47हो गई। बाद में कर्मकांड में तब्दील हो
- 13:49गई। यह ब्राह्मण लोग किसी भी कृत्य को
- 13:57कर्मकांडों में डालने में निपुण है।
- 14:04तो कर्मकांड फिर तानाशाही में बदल जाता हूँ।
- 14:11वह कोई एक स्त्री वृहाह के भीतर तड़पि होगी।
- 14:18और अग्नि में समा गई होगी। चेता के साथ अब जीवन का कोई अर्थ
- 14:22भी न रहा, वो सच्चा प्यार रहा होगा, लेकिन आज उसके बाद दिखा हुआ
- 14:35आगे फोर्से वाली। सती करवाने लगे, तेरा मंत्र बना
- 14:43देंगे यादगार रहेगा कि लोग तुझे पूजेंगे यह लोग था वह जो पहले
- 14:55पहले कोई एक इसरे। जिसने चिता की अग्नि में स्वयं को
- 15:00वसंग कर लिया था, वह वेतर से आंतरिक प्राणों से उत्पन्न हुई
- 15:08क्रिया से लेकिन यह जो तुम कर्मकांड करके सस्तित्व को करवा
- 15:15रहे थे। यह धोखा है इसके भीतर के प्राणों
- 15:22से नहीं आया कि अब जीके भी क्या करना है, जो सहारा था जिसके कारण
- 15:32रंग थे, संसार रंगदार नजर आता था। यह वो प्रिज़्म था जिसके भीतर से
- 15:39लाइट गुजरती और सतरंगी हो जाती। वह चला गया तो फिर अब जी कर भी
- 15:49क्या करें? कोई एक स्त्री सती हुई होगी।
- 15:57बाद में इन पाखंडियों ने इसे नाम के ऊपर तुम्हारा नाम हो जाएगा।
- 16:05तुम्हारी पूजा हो जाएगी, लोग आराधना करेंगे, पुष्प चढ़ाएंगे।
- 16:17फिर कर्म कांडा बना लिया, फिर यह तानाशाही हो गई।
- 16:21जिसका पति मर जाता, उसको घसीट के ले के जाते, मादक द्रव्य खिलाए
- 16:29जाते। भांग, गांजा, अफीम, नशा और
- 16:36जबरदस्ती चिता को ऊपर पटक दिया जाता।
- 16:39यह मानवता नहीं थी। यह एक बलत्कार था।
- 16:47बल पूर्व का किया हुआ कार्य। जो स्त्री अभी जीना चाहती है, आज
- 16:55की स्त्री समझदार हो गई है। घर वाला मर गया, पति मर गया और कर
- 17:03लेते है तो नहीं और सही और नहीं और सही।
- 17:09तो अगर है हरजाई तो अपना भी यही दौर चाहिए।
- 17:16आज की स्त्री में प्रेम नहीं रहा आज अरेन जवेरिज होती है वो वे रखो
- 17:26क्या जब लैला मच। हेर राँझा शेहरी फ़राज़, सोहनी
- 17:32महिवाल। इनके किसे घड़े जाते वो वक्त खो
- 17:37गया वो शिक्षा प्रेम था अगर एक मरेगा तो दूसरा मर जायेगा।
- 17:45और दूसरा अगर जिंदा भी रहेगा तो उसके जीने का कोई अर्थ नहीं होगा।
- 17:49निरर्थक होगा, नीरस होगी उसकी ज़िन्दगी अपनी सुनिए वाल्मीकि की
- 17:56कथा वाल्मीकि के जीवन में तूफान आया।
- 18:09अपनी कुटिया के किनारे खड़े हुए नदिया के किनारे उन्होंने देखा कि
- 18:18किसी शिकारी ने बाण छोड़ा और हंस और हंसनी में से एक मर गया।
- 18:33तुम्हें जानकर बड़ी हैरानी होगी। हंस आज भी भगवान राम की तरह
- 18:41मर्यादित है। तुम जानते हो हंस अपनी जोड़ीदार
- 18:49को खोकर कभी जिंदा नहीं रहता। हंस मर जाए तो हंस ने प्राण
- 18:57त्यागते थे। हंस ने मर जाए तो हंस प्राण
- 18:59त्यागते थे। भगवान राम का यही श्रेष्ठतम
- 19:03मर्यादा थी। शिकारी ने तेर छोड़ा, हंस मार्गा
- 19:17हंसनी ने बिरहाद में तड़प तड़प के जान देते।
- 19:25वाल्मीकि सारे दृश्यों को देख रहे थे।
- 19:33सारे दृश्य के साक्षात साक्षी उनके भीतर से श्राप निकला।
- 19:46जब आप कोई नर अपराध व्यक्ति के ऊपर जुल्म होता देखते हैं तो संत
- 19:53की। यही पहचान है संत हृदय नवनीत
- 19:59समान। उसका हृदय द्रवित हो जाता है और
- 20:05उसका हृदय दुख से गिर जाता है और दुख के उन लम्हों में क्योंकि बाल
- 20:11में की तो। संतत्व को उलझन वाल्मीकि अपने
- 20:21जीवन का अंतिम छोर पा चूके थे, सर्वोच्च शिखर पा चूके थे और
- 20:27ब्रह्म हो चूके थे और ब्रह्मलीन व्यक्ति।
- 20:36के भीतर से जो पुकार उठती है, वह सत्य हो जाती है।
- 20:40ततक्षुः पुकार तो वाल्मिकी ब्रह्मलेन व्यक्ति थे।
- 20:52यह दृश्य उनसे देखा ना क्या सहना क्या कोमल चित्र था उनका संत वह
- 20:58जिसका चित्र कोमल हो जाए बच्चे के समान हो जाए कोमल फूल की पत्तियों
- 21:09के समान। गुलाब की पत्तियों के इस्तेमाल
- 21:11कोमल मखमली यह दृश्य सहन नहीं हुआ।
- 21:18उसकी आत्मा को मन के भीतर से एक वेग उठा शराब खा और उन्होंने उस
- 21:26शिकारी को श्राप दे दिया। माँ निषाद प्रतिष्ठान तुम गमह
- 21:35शास्वतीहि समां यतक्रोचं मिथुना देकं अवधही काममोयितम।
- 21:49हे निषाद तुझे कभी भी चैन सुकून आराम न मिले हे निषाद तुझे कभी भी
- 22:04चैन, सुकून और आराम न मिले और ये सबसे बड़ा शराब?
- 22:14क्योंकि धन छीन जाए, तुम मांग के खा लोगे, बुद्ध स्वयं से ही छोड़
- 22:22देते है। पद छिन जाए तो कोई बात नहीं।
- 22:34तुम फिर से कोशिश कर लो, प्रतिष्ठा हो जाए और थोड़ी
- 22:40मुश्किल हो जाती है लेकिन फिर भी लोग भूल जाते हैं।
- 22:46लेकिन अगर चैन खो जाए तो न तो किसी से मांगा जाता, न बाजार में
- 22:54वनी के दुकान से मिलता, न खेती में उगाया जाता।
- 23:06माँ निषाद प्रतिष्ठापुंगम हे निषाद हे शिकारे तुम्हारा चैन
- 23:20तुम्हारा आरान। खो जाए श्रद्धा के लिए खो जाए
- 23:29प्रतिष्ठान तुमगम ओके तुने प्रेम में मगन निर्दोष क्रोध प्राणियों
- 23:41को वध कर दिया कोई दोष नहीं। इसलिए प्रेमियों को अलग अलग करना
- 23:58सबसे बड़ा पाप माँ निषाद प्रस्थम तुमगम शास्वती ही समाहा।
- 24:12सदा के लिए समाप्त हो जाए बड़ा जबरदस्त है तुम ऐसी छोटी बात
- 24:18समझाओगे वाल्मीकि जैसे ब्रह्मलीन व्यक्ति के अंत से आएगी यह बात
- 24:30जैसे परमात्मा। जैसे समग्र विश्व जैसे समग्र
- 24:40संसार बोल गया हो। एक ही शब्द में मान त्वान
- 24:45प्रतिष्ठान त्वम गम तेरी प्रतिष्ठा।
- 24:52समाप्त हो जाए हे निषाद अश्वती शमह श्रद्धा के लिए समाप्त हो जाए
- 24:59क्योंकि यत् क्रोंच मिथ न दे कं तुने प्रेमा लाभ में मगन दो हँसों
- 25:08को जोड़े को? वे कसूर कोई कसूर भी ना था अवधी
- 25:20कामो मोहितं प्रेम करते हुए जोड़ों को प्रेम पूर्वक व्यवहार
- 25:28करते हुए जोड़ों को। जो निर्दोष थे, जिनका कोई कसूर न
- 25:34था, उनके तू ने मार दिया। हमारा समाज दुखी क्यों है?
- 25:44इसके गहरे में एक कारण बेब है। हमारी आँखें आज बड़ी स्थोल है।
- 25:55ऋषियों की आँखें बड़ी सूक्ष्म हुआ करती थीं।
- 25:59देख लेती थीं प्रेम, सच्चा, झूठा प्रेम झूठा भी होता है।
- 26:09अट्रैक्शन को भी बहुत से लोग प्रेम कहते थे।
- 26:13अट्रैक्शन तुम खींच गए किसी की तरफ किसी का हँसना अच्छा लगा,
- 26:21किसी का बोलना अच्छा लगा? किसी का चलना चाल ढाल अच्छी लगी,
- 26:29किसी के शरीर की फिगर अच्छी लगी और तुम भूल जाते हो उस क्षण में
- 26:37के हँसते हुए दांत घर जाएंगे ये मस्तानी चाल।
- 26:45ढल जाएंगे, सजा के लिए नहीं बनी रहेंगी और तुम उसके कारण उसको
- 26:56प्रेम मान बैठते हो नहीं थिस इस अट्रैक्शन आज नहीं कल समाप्त होने
- 27:03वाली है क्योंकि शरीर पल पल बदलता है, बच्चा है, आज जवान है, कल
- 27:15बूढ़ा होगा, परसों हाथ कांपेंगे वहीं जो बलिष्ठ माने जाते थे।
- 27:23और चौथ उसी देह को उठा के ले जाना पड़ेगा।
- 27:27चार व्यक्तियों के द्वारा हे निषाद तेरी प्रतिष्ठा श्रद्धा के
- 27:39लिए समाप्त हो जाए क्योंकि तुम में प्रेम में संलग्न।
- 27:46क्रोंच के जोड़े को हंस के जोड़े को बे कसूर था, निर्दोष था उसको
- 27:50मार दिया। यह संस्कृत का प्रथम भाग्य है।
- 27:59प्रथम श्लोक संस्कृत का, जो वाल्मीकि के भीतर से उमड़ा।
- 28:08तुलसी एक बात सीखने योग्य है, हृदय में वसा लेने योग्य है।
- 28:15एक प्रश्न आया था संत व्यक्ति को। ध्यान मग्न संत व्यक्ति को कैसे
- 28:27जगाना चाहिए? जगाना ही नहीं चाहिए।
- 28:32तुम्हारा क्या रहता है? कोई भी तुम्हारा काम इतना जरूरी
- 28:37नहीं है जितना संत मग्न जीस तल पर पहुंचा हुआ।
- 28:44यह मुश्किल है इसलिए संत जब मगन होता है उसको झंझोड़ना उसको
- 28:57जगाना, उसको आवाज देना, उसको उठाना घोर पाप है।
- 29:04तुम्हारा क्या ले रहा है? लेकिन व्यक्ति के अहंकार को ठेस
- 29:13लगती है। मेरा ह्रदय जल रहा है, मैं तड़प
- 29:19रहा हूँ और जो आराम से आनंद की मुद्रा में चैन से बैठा है, अपने
- 29:29अपने कर्मों की बात है। अगर कोई तड़पता है, कोई बेचैन है।
- 29:38उसने निषाद जैसा कोई पाप किया होगा और किसी वाल्मीकि।
- 29:47जैसे ब्रह्मलीन व्यक्ति के भीतर से श्राप उमड़ा होगा, पूरी कायनात
- 29:53ने स्थापित कर दिया होगा और कायनात का शापित किया।
- 29:58व्यक्ति कैसे उभरेगा नहीं उभरता। मैंने कहानी सुनाई थी राजा आज के
- 30:13राजा आज ने किसी संत व्यक्ति के कमंडर में गोबर डाल दिया था लीड
- 30:22गधे और आखिर में जितनी लीड थी। और उसे ही खानी पड़ी।
- 30:34संत को कैसे जगाना चाहिए? जगाना ही नहीं चाहिए।
- 30:39पहली बात जो तुम्हें कुछ नहीं कह रहा, हंसों का जोड़ा प्रेमा कर
- 30:47रहा है, तुम्हें क्या तकलीफ है? तो क्यों उसको मार रहा है निषाद
- 30:59और इससे भयंकर पाप कृत्य निषाद से कभी हुआ नहीं, कभी होगा नहीं।
- 31:07प्रेमा अनलाप करता हूँ, अब वो क्रोंच का जोड़ा, हंस का जोड़ा भी
- 31:13छुड गया और हंस ऐसा प्राणी है जोड़े में रहता सदा और एक दूसरे
- 31:21के प्रति इतना सत्यनिष्ठ है। दश्य भगवान राम एक पत्नी व्रत एक
- 31:34पति व्रत अपनी मर्यादा को हंस नहीं खोलता।
- 31:43आत्म स्वाद बहुरंगी हो गया है, जितना सांसारिक आज आदमी है
- 31:55बहुरंगी आज आदमी है, इतना कभी भी नहीं था और मज़े की बात है, तुम
- 31:59इसे कहते हो। क्या कहते हो एसएस का मतलब
- 32:09अंग्रेजी में राख भी होता है। एसएस राख एस राख इस ऐश को करते
- 32:19करते तुम ऐश ही हो जाते? तुम्हारी राख हो जाती है हड्डियों
- 32:31तक नहीं बजते। आज तो 800 डिग्री के इलेक्ट्रिकल
- 32:41शव जलाने वाले आगे हैं 800 डिग्री सेल्सियस।
- 32:49हड्डी नहीं बहकती राख बहकती है सिर्फ राख भी थोड़ी सी मट्ठी भर
- 32:56दे देते है, ले जाओ भाई अपने बंदे को।
- 33:15जब किसी का बाप या माता सिर से चली जाती है तो लोग अपने केस
- 33:22क्यों मंडवा देते हैं? बालों को छत्रछाया के रूप में
- 33:29दिखाया जाता है। जहाँ जहाँ परमात्मा ने तुम्हें
- 33:33बाल दिए हैं, थोड़ा समझना ये साइंटिफिक बात है।
- 33:40ईश्वर तुम्हें बताता है कि यहाँ यहाँ एक डिग्री सेल्सियस कम होना
- 33:46चाहिए। तापमान।
- 33:49यहाँ कुछ ऐसे सेंसिटिव ऑर्गन हैं बालों के बिल्कुल भीतर जहाँ एक
- 33:58डिग्री सेल्सियस कम होना चाहिए। टेम्परेचर इसलिए बाल दिया जैसे
- 34:03खोपड़ी हैं, काँख ही हैं हमारी काँख में आप टेम्परेचर देखोगे, एक
- 34:07डिग्री कम मिलेगा। जीवा में टेम्परेचर डालोगे
- 34:11थर्मामीटर एक डिग्री ज्यादा मिलेगा।
- 34:15काँख में डालोगे? एक डिग्री कम मिलेगा।
- 34:18वहाँ बाल क्यों है? एक डिग्री कम होना चाहिए यहाँ से
- 34:22एक बहुत। जीवंत नाड़ी गुजरती है तो शायद
- 34:41मेरे दृष्टि में साइंस ने खोज लिया हो तो खोज लिया हो तो यह
- 34:49नाड़ी सीधी विभीषा क्रांति में जाती है।
- 34:56इसको शीतलता की आवश्यकता है। शरीर की सारी नाड़ियां जब गुजरती
- 35:11हैं तो जाके वेभीषा ग्रंथि में एकत्रित होती हैं।
- 35:19यह अद्भुत श्रृंखला है, जो विज्ञान में आज तक शायद खोजा
- 35:24नहीं, मुझे लगता है ताजा खोजों के बारे में मुझे बताये, लेकिन लगता
- 35:31है कि अभी खोजा नहीं। चक्कर नहीं खोजे गए।
- 35:38कुंडली नहीं खोजे गए भ्रम भ्रम से सराह ने खोजा कैन्स अभी दिल्ली
- 35:49बहुत दूर है, विज्ञान कहते हैं हमने जीत लिया नहीं, कुछ नहीं
- 35:56जीता। जीतने का पहला स्टेप शुरू होगा
- 36:02जीस दिन तुम बना लोगे, यू विल करी ऐट दी मैटर और वो कभी नहीं आएगा
- 36:09दम पहला स्टेप शुरू होगा। जीतने का पहला स्टेप उस दिन शुरू
- 36:20होगा जीस दिन तुम यू विल क्रिएट दी मैटर जीस दिन तुम मैटर को
- 36:27बनारोगे खोज खोज तो लिया तुमने उस दिन जीतने की।
- 36:37प्रथम में चरण आएगा और वो कभी नहीं आएगा।
- 36:43मैं आज बोले देता हूँ श्रद्धा, श्रद्धा के लिए ये रिकार्डेड
- 36:48रहेगा और तुम देख लेना वो कभी नहीं आएगा देन जब तुम मैटर को बना
- 36:54सको। ट्रांसफर कर सकते हो।
- 36:57इधर से उधर उधर से उधर किसी की चमड़ी उतार के मुर्दे की किसी का
- 37:04गुर्दा, किसी का हार्ट, लिवर वगैरह महत्वपूर्ण अंग ट्रांसफर कर
- 37:11सकते हो, किसी का खून ट्रांसफर कर सकते हो।
- 37:17लेकिन याद रखना तुम मैटर को क्रियेट नहीं कर सकते, तुम एक बाल
- 37:21नाखून नहीं बना सकते, बना नहीं सकते और वो हो तुम्हारा विनिंग।
- 37:34जंक्चर होगा वहाँ से तुम जीतना शुरू करोगे और जो कभी नहीं आएगा
- 37:43जब क्षेत्र छाया हो जाती है, परमात्मा ने इतनी शानदार चीज़
- 37:49बनाई। जहाँ जहाँ बाल दिए वहाँ वहाँ एक
- 37:53डिग्री कम होना चाहिए तापमान इसलिए बाल दिए और तुम मंडल देते
- 37:58हो फिर तुम डॉक्टरों के जाँसों में भरते हो सारे ये हो गया वो हो
- 38:06गया क्योंकि हर चीज़ का। परिणाम घूम फिर के पता नहीं कहाँ
- 38:14जाएगा वह रोग किस चीज़ से कनेक्टेड है, यह तुम्हें पता नहीं
- 38:20होगा। तुम कांक से चार बाल उखाड़ दोगे।
- 38:26और वह कल को कैंसरआइटिस में बदल जाए, तुम्हें कोई पता नहीं है।
- 38:31ऐसा ही होता है इसलिए केसों को सिख धर्म में बचाने की परंपरा
- 38:39चली। बड़ी वैज्ञानिक परंपरा है।
- 38:47तुम देखते हो शोभा किसने सुंदर वस्त्र पहने, किसने मेकअप किया
- 38:55कोन मेकअप करके ज्यादा सुंदर लग रहा है भाई, ये तो मेकअप की
- 39:00सुंदरता है। तुम्हारा लावण्या तो भीतर से
- 39:03पूछता है, मैं विज्ञान को से कहूंगा, तुम्हें पता ही नहीं कि
- 39:13काँख के चार बाल उखाड़ने से तुम्हें कैंसर आइतंस हो सकता है?
- 39:19हम्म। मुख और सिर के बाल उखाड़ने से
- 39:29यथुक परंपरा से कोई छत्रछाया चली गई दिखाने के लिए कि आज से मैं
- 39:38असुरक्षित हुआ। यह बाल मेरी सुरक्षा थी,
- 39:42टेम्परेचर को घटा रही थी। अब यहाँ पर सारा दिमाग के ऊपर
- 39:47सारा सिस्टम यहीं पे है पिचुतरी यहीं पे पाइनिल यहीं पे सारा
- 39:52ब्रेन यहाँ पे जीव विषा ग्रंथि का सभी महत्वपूर्ण यहीं पे है
- 40:02सहस्त्रल यहीं पे। इसलिए यहाँ बड़े केस दिए।
- 40:08भगवान ने बाकी जगहों पर छोटे केस दिए।
- 40:12यहाँ बड़े केस थे। कारण यहाँ बड़े केसों की जरूरत
- 40:16है। सभी महत्वपूर्ण ग्रंथियाँ
- 40:18महत्वपूर्ण और गन्स इसी खोपड़े के भीतर हैं।
- 40:23यही संचालन है यही ड्राइवर है तुम्हारी ज़िन्दगी का, इसलिए किसी
- 40:28किसी के केस देखोगे तो 4455 फुट मिलेंगे।
- 40:31तुम्हें केस पांव तक नीचे गिट्टो तक आएगा।
- 40:39इतने बड़े बड़े केस होते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि यह सुंदर है
- 40:44नहीं, इसका अर्थ ये बीमार है। इसको ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है।
- 40:58जब प्रकृति छीन लेती है और गज्जे हो जाते हैं।
- 41:05प्रकृति गंजा कर दी। उन्हें बिमारी नहीं है।
- 41:09प्रकृति जानती है कि अब इस व्यक्ति को सुरक्षा की आवश्यकता
- 41:13है। प्रकृति ज्यादा समझदार है तुमसे
- 41:23तुम ज्यादा समझदार अपने आप को समझते हो हो नहीं।
- 41:32इसलिए श्री तांब्रव ने कहा कि स्त्री कभी नहीं पहुँच सकती।
- 41:46बाहरी दृष्टांतो से ये समझ भी आता, सिर के बाहर गंजी स्त्री
- 41:51तुमने कभी देखी नहीं? क्योंकि अभी शरीर की महत्वपूर्ण
- 41:59ग्रंथियाँ जो हमारे दिमाग में विद्यमान है उनको सुरक्षा की
- 42:03आवश्यकता है। और सहस्रार यहीं पे है बे,
- 42:06विषाग्रंथि यहीं पे है ब्रह्मद्र यहीं पे है यहीं से दशम द्वार।
- 42:17आमतौर से व्यक्ति गंजा हो जाता है।
- 42:23अब सुरक्षा की आवश्यकता ना रहे। अब जो पाना था पाली है बहुत गहरी
- 42:31बात है। प्रकृति तुमसे ज्यादा बड़ी
- 42:36वैज्ञानिक है, वैज्ञानिक से बड़ी वैज्ञानिक है, वैज्ञानिक की
- 42:41जन्मदात्री है, प्रकृति वैज्ञानिक की माँ है।
- 42:47वैज्ञानिक प्रकृति से सीखते हैं। चीर फाड़ करके यह एक बाहर की
- 43:02दिखावट थी सिर मुंडा लेना, गाड़ी मुझ मुड़ा लेना।
- 43:12कि यह व्यक्ति अनाथ हो गया। इसका अनाथ इसको सहारा देने वाला
- 43:19चला गया। इसलिए इसरो के भी पहले जमाने में
- 43:26पति के जाने के बाद सिर मुड़ दिए जाते थे।
- 43:30वह जो सहारा था रक्षाकवि था वो चला गया।
- 43:36यह एक प्रकार का सिंबल था दिखाने के लिए यह स्त्री विद्ववाया।
- 43:49जैसे श्वेत रंग हो, विधवा स्त्रियां पहनते थे या ऋषिमनी
- 44:03पहनते थे? मैंने पहले समझाया या तो उसने
- 44:14सारे रंग भोग लिए और सारे रंग भोग के बनता है।
- 44:18एक रंग श्वेत। या फिर एक रंग फिर अगर मल्टी फकेट
- 44:25हो तो सात रंगों में विवादित हो जाता है।
- 44:30संसार भोग लिया वह सतरंगी है तो फिर एक रंग में आ जाओ अगर नहीं
- 44:37भोंगा। तो तुम सतरंगी हो जाओ
- 44:52धन्यवाद।