Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Apr 26 - गीता 7:21 का रहस्य: श्रद्धा और विश्वास से परे, अस्तित्व का सत्य। ध्यान: To Do Nothing!
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- 0:18गीता के सातवें जय का इ कसवां श्लोक यो, जो जाम जाम तनु भगतः
- 0:33श्रद्धार चितम एक क्षति बहुत गहरे में जाना होगा।
- 0:46अगर तुम रहस्यत्मक वरन सुनना चाहते हो तो सबसे पहले एक बात
- 1:00समझना क्या तुमने कभी सूरज के ऊपर श्रद्धा की है?
- 1:16गुलाब के फूल पर कभी तुमने विश्वास किया?
- 1:28तुम कहोगे नहीं सूरज के ऊपर ना श्रद्धाग्रही होती है ना विश्वास
- 1:37करना। यही बेसिक प्वाइंट है।
- 1:43इस रुख भगवान कृष्ण कहते हैं, अगर तुम श्रद्धा और विश्वास के पचड़े
- 1:55में पड़ा। रहा।
- 2:01तो तुम असली नकली भगवानों के पचड़े में पड़ा रहेगा योजो जाम
- 2:08जाम तन भगतः श्रद्धार चितम ए क्षति शांत हो के सुना अरे बात
- 2:19को? जिसे हम देख लेते हैं अपनी आँखों
- 2:27से उसे क्या नाम लोगे श्रद्धा बहोगे।
- 2:40यह विश्वास कहो, क्या नहीं उसे तुम कोई भी नाम नहीं दोगे, मैं
- 2:52तुम से पूछता हूँ थोड़ा गहरे में जाके सोचना इतना साधारण प्रश्न
- 3:00नहीं है। मैं तुमसे पूछता हूँ कि तुम हो
- 3:10बड़ा कठिन हो, तुम अपने आप के होने पर श्रद्धा करते हो या
- 3:20विश्वास करते हो? तो तुम दुविधा में पड़ जाओगे
- 3:31एग्जिस्टेंशियल चीजों पर विश्वास नहीं हुआ करता नक्षत्रता हुई करती
- 3:37है एग्जिस्टेंशियल चीजों को सिर्फ निहारा जाता है।
- 3:43फिलॉसोफिकल चीज़ है ये तुम अब जाग रहे हो मुझे सुन रहे हो, तुम कह
- 3:59सकते हो कि हाँ, मैं सुन रहा हूँ। बाबा बोल रहे हैं तुम कह सकते हो
- 4:10इसके ऊपर न तुम्हे श्रद्धा है, न तुम्हे विश्वास है, सुन रहे हो बस
- 4:17तो ये क्या है? यह सत्य है।
- 4:23ना इसके ऊपर तुम्हें श्रद्धा है ना इसके ऊपर तुम्हें विश्वास है
- 4:28तुम मुझे सुन रहे हो इस वक्त तो यह सत्य है दिन में तुम जागते हो
- 4:38रात को तुम सो जाओगे। प्रत्येक व्यक्ति सुबह उठकर कहता
- 4:45है कि मैं रात को सो गया था। वैज्ञानिक का आज तक ये पता नहीं
- 4:54लगा सके के वास्तव में व्यक्ति सो गया था।
- 5:03या कहीं और गया था? जो चीजें विज्ञान नहीं खोज पाया
- 5:20वो चीजें धर्म में, हमारे विषयों ने, मुनियों ने।
- 5:30अनादिनादि काल से खोजें भला थोड़ा सा विचार करना हल्के से ज्यादा
- 5:46विचार करोगे तो पागल हो जाओगे रात को तुम सोए 6 घंटे 7 घंटे तुम
- 5:56कहाँ थे? थे भी के नहीं थे।
- 6:05अब यह प्रश्न तुम्हें चक्र से कर दिया तुम भागोगे, मैं तुमसे पूछता
- 6:17हूँ क्या रात को तुम जब सो गए थे? सब वास्तव में सो गए थे या कहीं
- 6:24चले गए थे या तुम थे भी के नहीं थे?
- 6:36आइए हम गहरे रहस्य में चलते हैं। इन बातों का और गहराई में अगर कभी
- 6:50गया तो शायद धीरे धीरे जैसे एक एक सीढ़ी हमने कवर करके आज मैं ये
- 6:58बातें आपके सामने बोल रहा हूँ। बहुत कम लोगों के पल्ले पड़ेगी
- 7:07मेरी बात मैं जानता हूँ और बहुत कम लोग कहेंगे।
- 7:17ये खोपड़ी टूटी जाती है, समझ नहीं आती।
- 7:26सूरज है इसको प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।
- 7:31सूरज है इसको श्रद्धा की आवश्यकता नहीं है, इसको विश्वास की
- 7:38आवश्यकता नहीं है। आइए अब थोड़ा समय टर्न ले लो।
- 7:49तुलसी दास कहते हैं श्रद्धा, विश्वास, रोपणो या व्यायाम बिना
- 7:54ना पक्षम न श्रद्धा हो, न विश्वास हो।
- 8:03जब दोनों चीजों का अभाव हो जाए तो वह दिखता है शब्दों की अपनी
- 8:14सुधरता है और तुम शब्दों को पकड़ने के।
- 8:22अभ्यस्त हो चूके हो तुम शक्ति को शब्दों में पकड़ना चाहते हो पकड़
- 8:30रही है बातें मुझे बताइए ज़रा श्रद्धा किस पर करोगे जो कभी देखा
- 8:48है? विश्वास किस पर करोगे?
- 8:55जो देखा ही नहीं उस पर क्या श्रद्धा करोगे और क्या विश्वास
- 8:59करोगे वो कुछ भी हो सकता है। खैर पुत्र, अगर हम ज्यादा
- 9:15रहस्यत्मक वर्णन में जाएंगे, तो तुम चीजों को खो दोगे, तुम समझ
- 9:30नहीं पाओगे। असल में कोई व्यक्ति कितना बड़ा
- 9:37वैज्ञानिक हो, ऋषि हो, मनी हो, वह कभी भी परमात्मा के बारे में कुछ
- 9:46भी नहीं जान पाया और तुम्हें जानकर बड़ी हैरानी होगी।
- 9:53इतने ग्रंथ, इतने पौधे, इतनी किताबें, इतनी कहानियों, इतने
- 9:58उदाहरण परमात्मा के बारे में दिए गए हैं, फिर भी उसका वर्णन नहीं
- 10:08हो सकता। क्यों?
- 10:14क्योंकि तुम वर्णन करना चाहते हो शब्दों में और वह शब्दों में
- 10:22वर्णन होता है पहले कदम पर तुम चूक जाते हो।
- 10:33जब तुम कहते हो बाबा रहस्य आत्म के ढंग से समझाने की चिष्टक तो
- 10:40मैं हूँ अब तुमसे मैं कहूँ क्या? सत्य के नाम पर जो मैंने निहारा,
- 11:00मैंने बोल तो दिया वो एनलाइटनमेंट वीडियो में लेकिन सत्य बात ये है
- 11:11कि मैं बोल नहीं पाया। और सत्यभात ये भी है कभी कोई बोल
- 11:17नहीं पाया, कभी कोई बोल नहीं। पाएगा लाखों?
- 11:26ही पंडित करोड़ों हिस्सा नहीं, खुदा की बातें तो खुदा ही।
- 11:35संसार को समझने की चेष्टा करना, संसार के रंग ढंग समझने की चेष्टा
- 11:43करना, लेकिन परमात्मा को समझने की चेष्टा कभी मत करना।
- 11:59सत्य का वर्णन नहीं हुआ करता, सत्य का दर्शन हुआ करता है।
- 12:10जैसे सूर्य को तुम देखोगे तो क्या वर्णन करोगे बताओ शब्दों में
- 12:19वर्णन करोगे। और शब्दों में वह वरन होता है,
- 12:25तुम कहोगे रोशनाई थी, तुम कहोगे उसमें थोड़ी थोड़ी गर्मी भी थी।
- 12:34तुम कहोगे उसकी तरफ ज्यादा देर देखा नहीं जाता।
- 12:39यह कोई परिभाषा तो है ही नहीं। यो जो जाम जाम तनु भक्ता शरद्धार
- 12:57चेतन एक क्षते। श्रद्धा पुरो के जोजो भक्त मुझे
- 13:07जीस, जीस रूप में प्रतिष्ठित कर लेता है तस्य तस्य अजलाम
- 13:20श्रद्धाम। ताम है वृद्धा में उस उस देवता
- 13:30में उसकी श्रद्धा को भक्त की श्रद्धा को मैं बढ़ाता ही चला
- 13:37जाता। हूँ।
- 13:51वैज्ञानिक कहते हैं, साइकोलॉजिस्ट कहते हैं और आजकल कुछ तथाकथित
- 13:59धार्मिक रूप भी कहना शुरू हो गए। सुबह उठकर तुम कहो मेरे से कुछ
- 14:08नहीं। व्यक्ति कोई है ही नहीं।
- 14:11ठीक है, तुम 15 दिनों में तुम पाओगे के मेरे से ज्यादा खुश नसीब
- 14:25व्यक्ति कोई। मेरे पास लोग आ जाते हैं, मैं
- 14:33कहता हूँ 15 दिन के बाद तुम पागल हो जाओगे, जो तुमसे ऐसी बात कहे
- 14:43उससे पलटा के पूछना। कि तुम्हें कितनी देर हो गई सुबह
- 14:50उठते तुम ये सोचते हो कि मेरे से ज्यादा खुशहाल व्यक्ति कोई है
- 14:56नहीं? नो टाइम बताएगा 10 साल हो गए, 20
- 15:05साल हो गए, 30 साल हो गए, 5 साल हो गए।
- 15:09और तुम सुखी हो नहीं वही क्रॉस आता है, वही काम आता है।
- 15:28वही चीजों को जोड़ने का प्रयास होता है, वही झूठ बोला जाता है और
- 15:44सुखी होने की निशानी ये है कि तुम झूठ नहीं बोलोगे।
- 15:52जो व्यक्ति सुखी हो गया उसको झूठ बोलने की आवश्यकता ही नहीं रहती।
- 16:02इसलिए जितनी झूठ बोलते हैं, राजनीतिक लोग बोलते।
- 16:06हैं। क्यों?
- 16:09क्योंकि उन्हें एक भ्रम हो गया कि शक्ति के भीतर सुख है, बस बिल्कुल
- 16:22बी के वालों की तरह बी के वालों को भी ये सब हो गया कि अगर हम
- 16:28दोहराते रहेंगे। तो हम सुखी भर जाएंगे हमारे से
- 16:34सुखी संसार में कोई नहीं होगा। तो मैंने कहा ये बताओ फिर सबसे
- 16:41ज्यादा सुखी कौन होगा? तुमसे ज्यादा सुखी कोई नहीं ठीक।
- 16:50तुमने मान लिया कि मेरे से ज्यादा सुखी इस धरती पे कोई है नहीं और
- 16:56सामने वाले ने भी मान लिया कि मेरे से ज्यादा सुखी कोई इस धरती
- 17:00पे है नहीं तो दोनों में से कौन ज्यादा सुखी तुम्हारी खोपड़ी
- 17:07तड़तड़ करने लगी? वह सामने वाला कम सुखी है या तुम
- 17:13ज्यादा सुखी हो? क्योंकि दोनों ने मान रखा है कि
- 17:21मेरे से ज्यादा सुखी, खुशहाल व्यक्ति खुशनसीब व्यक्ति इस धरती
- 17:27को कोई दूसरा इन। और सभी इसी बात को सोचेंगे तो
- 17:34सबसे ज्यादा क्वेश्चन से तुम्हारे पास से इस बात का जवाब नहीं है।
- 17:45इसका जवाब मैं देता हूँ। सुखी कोई है ही नहीं, खुशनसीब कोई
- 17:55है? जीस दिन खुशनसीब हो जाओगे उस दिन
- 18:03पहले तो ये पांच बेकार समाप्त होंगे।
- 18:09पंछी पांवई दर का मान, काम ग्रोथ, लोह मोह अहंकार।
- 18:26तुम कहते हो सबसे ज्यादा सुखी क्या सुख के निशान क्रोध हुआ करता
- 18:37है भाग्यशाली होने के निशान कामग्रस्त होना है।
- 18:45लो भी होना है मोह अगस्त को होना है अहंकार ही होना है नहीं जीस
- 19:00दिन तुम सच में सुखी हो गए। और मैं तुम्हें एक बात और बताता
- 19:07हूँ। प्रत्येक संत जहाँ पहुंचता है उन
- 19:17दोनों के सुख में बराबरी नहीं की जा सकती।
- 19:20तोला नहीं जा सकता क्योंकि प्रत्येक संत।
- 19:24बराबर का समानांतर सुखी होता है उतना ही सुख बीर नहीं पाया, उतना
- 19:32ही सुख ना नहीं पाया, उतना ही सुख मीरा नहीं पाया, उतना ही सुख कृषि
- 19:40नहीं पाया। उतना ही पलटू ने उतना ही दादू ने
- 19:47कोई किसी से ज्यादा सुखी नहीं है, तो यह शब्द प्रयोग करने की
- 19:53आवश्यकता सिर्फ मूर्खों को होती है।
- 19:56मेरे से ज्यादा सुखी भाग्यशाली व्यक्ति कोई नहीं।
- 20:01तो फिर तुमसे कम कौन है बताओ शब्दों की बातें हैं, दुकानदारों
- 20:13की बातें हैं, तुम्हें उलझाना चाहती हैं और तुम उलझा दिए हो तुम
- 20:21बुरी तरह से मकड़ी के जाले में फंस गए हो?
- 20:27इतने गहरे जालों में तुम फंस गए हो तुम अगर वैज्ञानिक हो और अगर
- 20:36मेडिकल में तुमने। अपने दिमाग को देखा है तो तुम
- 20:44पाओगे ऐसा गहरा जंजार ऐसी जबरदस्त उलझन इंटरमीगल्ड आपस में गुत्थी
- 20:56हुई बस तुम्हारी जिंदगी ऐसी ही है।
- 21:05इसमें ज़रा भी प्रेम की छलक लें। करीब एक महीना पहला एक
- 21:23ब्रह्मकुमारी मेरे पास फ़ोन आया, बाबा फिर याद करें।
- 21:31मैंने कहा क्या फरियाद करें उस पर?
- 21:35पिता परमात्मा से और ब्रॉडकास्ट करें ब्राह्मण से?
- 21:43कि सारी दुनिया शांत हो जाएगी, सारी दुनिया शांत हो जाएगी।
- 21:49मैंने कहा फिर कहा हूँ सारी दुनिया शांत हो जाएगी।
- 21:56मैंने कहा बच्ची तो उस सतल पर कौन जाएगा?
- 22:05इस तल पर बैठे बैठे तुम कितनी ही गुहार लगा लो, उस गुहार के अंदर
- 22:14संकल्प नहीं होगा। संकल्प को गहरा करने के लिए तल
- 22:21बदलना होता है। खोपड़ी के तल में संकल्प नहीं
- 22:25होता। याददाश्त होती है सिर्फ समृद्धि
- 22:28होती है। स्मृति यानी जड़ स्मृति, मृत
- 22:33स्मृति, उसमें संकल्प की चेतना नहीं होती।
- 22:40और संकल्प तो परम चेतन है तुम खोपड़ी में बैठे बैठे तुम्हारी
- 22:49अरदास हो तुम्हारी फरियाद हो तुम खोपड़ी में बैठे बैठे करते हो,
- 22:56इसलिए तो वो लगती नहीं। क्योंकि उसके पीछे इंटेंसिटी नहीं
- 23:03होते, उसके पीछे शब्द होते हैं संकल्प की शक्ति।
- 23:18चीरतना नहीं लगी होती। मैंने कहा बच्ची जिसने तुम्हें
- 23:31समझाया है वो चले गए ना उनको संकल्प करने आता था ना तुमको
- 23:39संकल्प करने आता था। न तुम्हारी दादियों को संकल्प
- 23:44करना आता है। संकल्प किसी विशेष तल पर जाया
- 23:51करता है जैसे तुम मैं जो बोल रहा हूँ अगर ये माईक मेरे पास न हो,
- 24:00माईक को वहाँ दूर रख लो। एक किलोमीटर में तो क्या ये मेरी
- 24:05आवाज खेंच पायेगा? इस माइक को अगर एक किलोमीटर दूर
- 24:12रख दे और मैं बोलूं तो क्या ये माइक मेरी आवाज खेंच लेगा?
- 24:18नहीं खेंच? क्या करना होगा?
- 24:27यहाँ से उठ के माइक के पास जाना होगा या माइक को यहाँ लाना होगा।
- 24:33माइक के करीब आके बोलना होगा, फिर वह आवाज आपको सुनाई पड़ेगी।
- 24:44अन्य तनी सुनाई पड़ी ब्राह्मण को सुनाना चाहती हूँ तो या तो
- 24:50ब्राह्मण के उस तल में चले जाओ जहाँ ब्राह्मण का ओरिजिनल बिंदु
- 25:00विद्यमान है। या उसे अपने पास बुला लो, इतनी
- 25:08शक्ति तुम में नहीं है, सारी दुनिया लगी है सुबह से शाम तक
- 25:19सबसे ज्यादा भाग्यशाली वृक्ति में हूँ धरती का।
- 25:30तुम भाग्यशाली तो नहीं होते तुम्हे?
- 25:34उबासी जरूर आनी शुरू हो जाती है सोने का मन होता है यह संकल्प हो
- 25:49तुम्हारा तुम्हे निद्रा में तो ले जा सकता है योग निद्रा में नहीं।
- 25:57तो ऐसा पागलपन मत करना। अगर इते से काम हो जाता तो फिर
- 26:07बच्चे इतनी मेहनत करने की जरूरत क्या आए?
- 26:10एस कर रहा कोई? कोई पीएचडी कर रहा, कोई मास्टर
- 26:17डिग्री कर रहा। सुबह से शाम तक बच्चे बोधियाँ
- 26:21बांध लेते हैं, फिर कहीं जाकर पढ़ाई होती है।
- 26:28तुम्हारा तो फॉर्मूला ही। बस सुबह उठकर सुबह सुबह
- 26:34ब्रह्ममूर्त में इन बीके वालों ने कहीं की ईंट कहीं का रुढ़ा
- 26:45भानुमती ने कुनबा जोड़ा ब्रह्ममूर्त की शब्द कहीं से उठा
- 26:52लिया। कि सुबह सुबह जैसे ही उठो पहला
- 26:55शब्द ये होना चाहिए तुम्हारा इस संसार में मेरे से ज्यादा सुखी
- 27:00कोई है नहीं तो क्या हो जाओगे? तुम करके देखो ये तो आज़मानी की
- 27:12बात है भाई। यह कोई पांच नाम तो है ही नहीं,
- 27:21ये तो आज मन की बात है और आजकल तो होड़ चल पड़ी है।
- 27:28कोई कोई तो कह नहीं रखा है कि बस 5 दिन ही कर लो।
- 27:36पागलों की कोई कमी नहीं संसार में यो यो जाम यम तनु भगतः श्राद्धार
- 27:46के तम इक्षिति श्रद्धाभाव से जो जो व्यक्ति।
- 27:55जिसमें भी अपनी श्रद्धा को उड़ील देता है।
- 28:04तुम जो होना चाहते हो उसकी इच्छा प्रगट करो ब्राह्मण के आज है
- 28:16ब्राह्मण कहाँ है? कोई आसमान में भ्रमण नहीं बैठा।
- 28:23बिन नामे नाहीं को ठो इस नाम को ही भ्रमण कहते जेता किता तेता नाम
- 28:32हेस प्रेसेंट और व्यास। ज्यादा चिल्लाने की जरूरत नहीं
- 28:38होती। यह मस्जिद के ऊपर जाके बांग देने
- 28:45जैसी बात नहीं है। ईशा भस्मितम सर्वमम जत वह इस
- 29:00संसार के कण कण में विद्यमान है और जीस दिन तुम देखोगे उस दिन
- 29:12पाओगे के हर कण परमात्मा है। परमात्मा तक पहुंचने के लिए किसी
- 29:23रास्ते की यात्रा की आवश्यकता नहीं होती।
- 29:27हर कण परमात्मा है ही इस प्रेसेंट ओवर हिज़ ओमनी प्रेसिडेंट।
- 29:34इसका मतलब ये है। यो यो झमझम श्राद्धार तनु भक्त्या
- 29:44श्रृद्धार चितम इश्ति तुम जो होना चाहते हो, ब्राह्मण तुम्हें वही
- 29:51बना देता है, एक बात को ध्यान में रख लेना नकली नकली।
- 30:01आज तुम्हारे के भ्रम तोड़ दूँ, असली असली नहीं है, क्योंकि सोचने
- 30:14से असली होने का संबंध नहीं। सोचे सोच न होई ये सोचे लखवा
- 30:28सोचना बहुत दूर तलक रह जाता है अस्तित्व के शब्द कह रहे हैं
- 30:36थोड़ी सन्नाटे में सुनना। थोड़े एकांत में सुनना जहाँ
- 30:41कोलाहल न हो, जहाँ शोर न हो क्योंकि मौन से पर मून से आती हुई
- 30:48बात को पर मून में ही सुना जा सकेगा अन्यथा तुम समझ नहीं पाओगे
- 30:55सर के ऊपर से गुजर जाएगा। ब्रम्हंड तुम्हारी सहायता करता है
- 31:03तुम जो होना चाहते हो ब्रम्हंड तुम्हारी सहायता करता है।
- 31:14अंग्रेजी में कहावत थी उसका अर्थ लगभग यही था गॉड हेल्प्स दोज़ हू
- 31:22हेल्प्ड देमसेल्व्स जो अपनी सहायता खुद करता है, परमात्मा
- 31:29उसकी सहायता करता है। तुम जो बनना चाहते हो व्हाटएवर इट
- 31:41इस ब्राह्मण तुम्हे वैसे ही बना देगा तुम डाकू होना चाहते हो
- 31:51ब्राह्मण तुम डाकू बनाते हो? ऐसे ही डाकू बना करते हैं।
- 32:01तुम चोर बनना चाहते हो? भ्रमंडट में चोर बना देगा, तुम
- 32:06राजा होना चाहते हो प्रमंडत में राजा बना देगा, लेकिन संकल्प से
- 32:14शुरुआत होगी। संकल्प इस नॉट दी लास्ट स्टेप
- 32:24तुम्हारे संकल्प करना आखिरी कदम नहीं पहला कदम है।
- 32:34पहले तो तुम्हें निर्णय करना होगा कि तुमने होना क्या है?
- 32:39तुम्हें संसार की चीजों में दिलचस्पी है या तुम्हें उस भीतरी
- 32:45रहस्यमय दिलचस्पी है? मैं तुम्हें एक बात बताऊँ?
- 32:55तुम आज तक फैसला ही नहीं कर पाए कि तुम्हें संसार चाहिए, क्या
- 33:02आनंद चाहिए? इसलिए गड़बड़चौथ है ये सारा।
- 33:11तुम शिनछे की स्थिति में हो, इसलिए भगवान कृष्ण अर्जुन को कहता
- 33:18है कि अर्जुन मेरी बात को गोर से सुन तू शिनछे में मत रह, तू शिनछे
- 33:32से बाहर निकल? और मज़े की बात है कि तुम्हें तो
- 33:39ये भी नहीं पता। तुम्हें संसार की वस्तुएं चाहिए
- 33:47या परमात्मा को? वह अंदरूनी रस चाहिए।
- 33:52तुम्हें पता है तुम एक ऐसा फैसला भी नहीं कर सकते तो चलना तो बहुत
- 34:02दूर की बात है, पहले फैसला लोगे, फैसला लेने के बाद तुम फर्स्ट
- 34:09स्टेप उठाओगे। फिर धीरे धीरे धीरे धीरे तुम्हारी
- 34:14यात्रा शुरू होगी और ये ब्राह्मण तुम्हें वैसा ही बनाता चला जायेगा
- 34:27अगर तुम चोर लुटेरे डाकू बनना चाहते हो।
- 34:37तो लोगों से कुछ भी उधारी लेओ, मुकर जाओ।
- 34:42यहाँ से शुरुआत हुई धीरे धीरे धीरे धीरे कतल करने वाला यकसां
- 34:52एकदम से एकत्र नहीं करता आप जेल में बंद लोग?
- 34:58भी मेरे पास आ जाते हैं जब पैरोल पे होते हैं।
- 35:04वो कहते हैं, बाबा हम एकदम से छः कतल नहीं किया है।
- 35:11पहले तो किसी को सुईज हो देते थे तो भी दर्द होता था।
- 35:17पहले तो मुर्गे काटते हुए भी दर्द होता था।
- 35:22वो कलमा पढ़ने का मतलब ही ये था कि थोड़ी सी छुरी मार के तो देखो
- 35:31अगर उस थोड़ी सी छुरी में ही तुम्हें दर्द हो गया तो बस छोड़
- 35:35देना। अगर तुम्हें थोड़ी सी छुरी लगा के
- 35:42कलमा पढ़ने में नहीं दर्द हुआ तो अगला कलमा पढ़ लेना, छः कलमा पढ़
- 35:47लेना। तुम मेरे पास आ जाते हैं।
- 35:58अपराधी लोग बाबा मैं जन्मजात अपराधी नहीं था, कातर नहीं था।
- 36:08तुम्हारे इस संसार ने ही हमें कतल करना सिखाया।
- 36:15तो अगर तुम बहुत बड़े डाकू बनना चाहते हो, राजनीतिक हो जाओ, उससे
- 36:21बड़ा डाकू कोई नहीं होता और वह कभी नहीं मानेगा कि मैं डाकू वह
- 36:30अकेला डाकू नहीं होगा, वह चोर भी होगा।
- 36:37वह हत्यारा हुए होगा। उसको तो क्या क्या उपाधियाँ दी
- 36:43जाएं क्या क्या न जाए? हमने सितम आपकी खाते क्या क्या ना
- 37:05सहे हमने सितम। आपकी खातिर ये जान भी जाएगी सनम,
- 37:22आपकी खातिर ये जान भी। जाएगी सनम आपकी खातिर तो मुझे
- 37:40कहते हैं बाबा हम एक दम से सात छः कतलें की हैं, धीरे धीरे हमारा
- 37:47जिगरा बढ़ता जाता है। सबसे पहले तो झूठ बोलना सीखते हैं
- 37:54और झूठ भी माँ बाप से बोलना सीखते हैं क्योंकि सबसे पहली कराज माँ
- 38:00बाप के पास लगती है। 677 तक तो बच्चा माँ बाप के पास
- 38:04ही होता है। अगर तुम चोरी करके घर पे आ गए और
- 38:10माँ बाप ने तुम्हें कुछ नहीं कहा तो समझ लेना कि माँ बाप तुम्हें
- 38:15अपराधी बनने की हिमायत कर रहे हैं और अगर उन्होंने तुम्हें
- 38:24प्रताड़ित कर दिया। और कान पकड़ के तुम्हारे उस आदमी
- 38:28के पास ले गए कि इसको वापस करो चीज़ और कहो कि मैं चोरी करके ले
- 38:34गया। पहली पहली क्लास तुम्हारे घर से
- 38:39शुरू होती है, माँ बाप सबसे बड़े अध्यापक होते हैं।
- 38:49आज तू ऐसी माई ऐसे बाप मैंने देखे बच्चा गुनाह करके आ जाता है, माँ
- 38:57उसको कुछ क्षिड़ में बैठा लेती है।
- 39:01बालों 30 साल का ही गुनाह हो गया नहीं नहीं, ये तू कर ही नहीं
- 39:06सकता। ऐसी ऐसी अपराध शुरुआत होती है झूठ
- 39:17बोलने से फिर धीरे धीरे तुम चोरी करोगे, पहले घर वालों की करोगे,
- 39:24फिर हिस्सेदारों की करोगे फिर अपने दोस्तों की जेब काटोगे।
- 39:33फिर अगला कदम होगा। कहीं दूसरे के घर में दूसरे की
- 39:37जेब काटो एक दम से जकसन माँ के गर्भ से आया हुआ बच्चा अपराध होता
- 39:45है। बड़ा निर्दोष होता है बच्चा।
- 39:50इसलिए तो कहा हिस्सा मशीन ओनली दे विल एंटर इन माइ गॉड्स किंगडम विल
- 39:58बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाइल्ड बच्चा मासूमियत की प्रति मूर्ति
- 40:05है। उसमें कोई छल फरेब नहीं होता।
- 40:09जो सीखता है बच्चा यही सीखता है और सबसे पहली पाठशाला उसका अपना
- 40:14ही घर होता है। घर में सीखता है माँ बाप उसको
- 40:21हामी भरते हैं। ठीक है, ठीक है, कर।
- 40:28जो अच्छे माँ बाप होते हैं उन्हें पता होता है कि आज ये दूसरों की
- 40:35चोरी करके आए, कल को अपने गहने लेके भागेगा तो वे वहीं रोक देते
- 40:45हैं उसको। तुम जो बनना चाहते हो, ब्राह्मण
- 40:53तुम्हें वही बना देगा, लेकिन सांसारिक रूप से।
- 41:07मैं ऐसी दास्तां सुना रहा हूँ तुम्हें जो शायद तुमने पहले कभी
- 41:12नहीं सुना होगा भ्रमंड से तुम परमात्मा को नहीं मांग सकता, हाँ,
- 41:25तुम गीत गुण गुना सकते हो। मैं तुझसे तुम्हें मांगना चाहता
- 41:34हूँ नहीं, तुम मुझसे उसको नहीं मांग सकता, उसको मांगा नहीं जा
- 41:41सकता। संसार की चीजें मांग सकते हो।
- 41:48तो भ्रमंड से तुम कभी भी परमात्मा को मत मांगना, क्योंकि परमात्मा
- 41:59तो तुम खुद ही हो, खुद से खुद को क्या मांगोगे?
- 42:10हमेशा दूसरी चीज़ मांगी जाती है और पदार्थ दूसरा है परमात्मा तुम
- 42:17खुद हो इसलिए रेश्यो ने कहा अहम् ब्रहमास्त्र दूसरा।
- 42:27पदार्थ, मान सम्मान दूसरा है ये गद्दियाँ, ये सोना, हीरे, जोहरा
- 42:39ये तख्त उदास ये लॉकर्स के भीतर रखे हुए हैं।
- 42:46बेशकीमती गहने, लार, हीरे ये दूसरे हैं परमात्मा से ब्राह्मण
- 42:56से तुम इनको मांग सकते हो एक बात को यहाँ पर गोश्त से सम।
- 43:10यो यो यम यम तनु भक्तः जो जो जीस जीस स्वभाव से श्रद्धापूर्वक।
- 43:30मुझ से मांगता है तश्य तश्य अचलाम सद्दाम तामेव विद्याता में वैसे
- 43:45रोज़। रोज़ तुम्हारी श्रद्धा दृढ़ होती
- 43:52जाएगी। आज तुमने जो मांगा, कल जो मांगोगे
- 44:00उसकी फ्रीक्वेन्सी में फर्क पड़ जाएगा।
- 44:08परसों और जोश और लेकिन ध्यान से मैं फिर समझा दूँ।
- 44:17संसार को मांगना पर महात्मा भ्रमण के वश की चीज़ नहीं है।
- 44:25परमात्मा को ब्राह्मण से हिम्मत मांग लेना, क्योंकि ब्राह्मण खोई
- 44:32हुई चीज़ को दे सकता है, तुम्हारा नहीं लौटा सकता ब्राह्मण और खुदा
- 44:41तो तुम खोद रही हो। परमात्मा से खुदाई मत मांग लेना
- 44:52परमात्मा से वस्तुओं को, पदार्थों को गतियों को, मान सम्मान को
- 45:01डिग्रीज़ को। पढ़ाई को सूचनाओं को मांग लेना,
- 45:07आनंद देना, भ्रमण के बस की बात नहीं और मांगना भी मत समय खराब।
- 45:14करोगे जो लोग कहते। हैं।
- 45:26कि मैं संसार का सबसे ज्यादा हूँ खुशनसीब व्यक्ति हूँ मान्य भर से
- 45:38कुछ नहीं होता, पहले तुम्हें संकल्प पैदा करना।
- 45:51और संकल्प पैदा होगा। शीनश्याहीनता में तुम्हें एक
- 46:00टारगेट सेट करना होगा। आखिर तुम बनना क्या चाहते हो?
- 46:06तो मैं तो ये भी नहीं पता बहुत से लोग हैं जो बनना चाहते हैं, गाय
- 46:20बन जाते हैं वास्को के अपराध अब कोई क्या करें?
- 46:27इनको खुद को ही नहीं पता होता कि हमने बनना क्या है?
- 46:35व्यक्ति इतना मुर्ख है, वह खुद से फैसला ही नहीं कर पाता कि हमने
- 46:45बनना क्या है? इसलिए वार न करते हैं कृष्ण
- 46:50अर्जुन को हे अर्जुन तू पहले। कटिबद्ध हो कि तुमने करना क्या
- 47:07है? कभी तू कहता है मैं तो भाग जाऊं
- 47:11जंगलों में जाके तब कर ये मेरे गुरु हैं, यह मेरे पिता में हैं,
- 47:21ये मेरे भाई हैं। मैं इनको कैसे मार सकता हूँ?
- 47:27और तेरे बाजू फड़फड़ाते भी हैं। तू क्षत्रिय तू बातें ऐसी कर रहा
- 47:35है भगोड़ों से। और तेरी शारीरिक व्यवस्था बॉडी
- 47:45लैंगुएज बताती है कि तू क्षत्रिय है, तेरे डोले फड़फड़ा रहे हैं।
- 47:50लड़ने के लिए कृष्ण जैसा समझदार व्यक्ति है, अगर मिले तो वह
- 47:59तुम्हारी बॉडी लैंगुएज को पहचान जाए।
- 48:10कृष्ण कहते हैं कि तुम शिन शे में मत रह दो, चिता मत रह पहले चित एक
- 48:17अगर कि तू चाह तक है, मैं भी तुम्हें कहता हूँ, तुम मुझे रोज़
- 48:25सुनते हो। छह वर्ष होने को आया है।
- 48:28रोज़ बोलता हूँ छः सात तुम सुनते हो बड़े प्यार से सुनते हो पहले
- 48:43अपने मन में ये दृढ़ कर लेना कि आखिर तुम चाहते क्या हो?
- 48:54ऐसा न हो कि तुम ध्यान की उस अवस्था में टू डू नथ्थिंग उस
- 49:04अवस्था में बैठे हुए जाओ सब छोड़ दो नाम जब पाठ पूजा, प्रतिष्ठा,
- 49:11छूट सो प्रचार पूजा। सब छोड़ दो और न कुछ करने में आ
- 49:15जाओ और फिर तुम जंक्चर प्वाइंट पे पहुंचोगे और जंक्चर प्वाइंट के
- 49:22थोड़ा सा आगे निकलते ही बाबा की ये पंक्तियाँ साकार हो जाती है जो
- 49:29मांगू। ठाकुर अपने ते सोई सोई के बे और
- 49:37वहाँ जाकर तुम गड़बड़ा जाओ, क्योंकि वहाँ तुम जो मांगोगे वहाँ
- 49:45मिल जाएगा। कहीं ऐसा न हो घर से तो हम चले थे
- 49:56खुशी की तलाश में आनंद की तलाश में चले हो।
- 50:01घर से उस रस को पीने की जग गई है ज्वाला।
- 50:12और वहाँ पहुँच गए मांग लो पड़ोसी को पड़ोसी को फिर काम गलत हो जाए,
- 50:23पहले श्रेष्ठ उपाय ये है कि पहले तुम फैसला करो।
- 50:29आखिर तुम चाहते क्या हो फिर अपनी यात्रा शुरू करना, अन्यथा
- 50:36तुम्हारा किया धरा सब बेकार हो जायेगा जो जो जाम जाऊ तनु भक्तः
- 50:46श्रद्धार चितम इक्षक्ति। जो जो व्यक्ति जीस जीस भाव में
- 50:52जीस, जीस चीज़ में अपनी शक्ति को निहित करता है लगा देता है तस्य
- 51:04तस्य अचराम श्रीधाम। उसकी श्रद्धा उसी के भीतर मैं दिन
- 51:11ब दिन बढ़ाता रहता हूँ माँ मेव विधधाम में हम रोज़ बढ़ाता हूँ,
- 51:22रोज़ बढ़ाता हूँ और उसको। उसकी मंजिल तक ले जाता हूँ।
- 51:32पहला प्वाइंट मैंने कहा तुम पहले तो सोचो, मुझे रोज़ नहीं सुनने
- 51:45वाले सब्सक्राइबर रोज़ नहीं जुड़ जाते हैं।
- 51:53उनको पता नहीं मैंने 3000 लम्बी लम्बी वीडियो उसमें क्या बोला?
- 52:03तो तुम्हारे लिए ये सर्वश्रेष्ठ आगाज़ है, तुम देखो।
- 52:10तुम इस रास्ते पर आई अगर संसार चाहिए तो ब्राह्मण से वैसी ही
- 52:19प्रार्थना करो, अगर परमात्मा चाहिए तो प्रार्थना करने छोड़ दो,
- 52:28तुम्हारी कोई प्रार्थना? परमात्मा को पानी की खुशी को पाने
- 52:34की आनंद को पाने की रस को पाने की रस को पीने की भ्रमण पूरी नहीं कर
- 52:45सकता। ब्राह्मण सिर्फ तुम्हें
- 52:50ब्राह्मणीय पदार्थ दे सकता है। ब्राह्मण के वश की बात नहीं है,
- 52:55ब्राह्मण के बनाने वाले को तुम्हें सौंप दे, सर्जन हारा नहीं
- 53:00दे सकता, वो सर्जना दे सकता है, थोड़े से गहरे शब्द हैं, सर्जना
- 53:07दे सकता है। क्रिएशन दे सकता है।
- 53:09क्रिएटर नहीं दे सकता वो, वह तो खुद ही क्रिएशन है।
- 53:25तस्य तस्य अचलाम श्रद्धां रोज़ रोज़ तुम मांगोगे उसी चीज़ को।
- 53:37तो 1520 दिन की बात करता हूँ, मैं कहता हूँ अगर 1520 साल में भी
- 53:43तुम्हें वो चीज़ मिल जाए जो तुम चाहते हो तो कम है।
- 53:521520 साल पूछो राजनीतिज्ञों से कि तुम्हें धक्के खाते कितनी देर हो
- 53:58गई। ये बताएंगे 5050 साल के बूढ़े
- 54:077575 साल के बूढ़े अभी राज़ करना चाहते हैं क्यों?
- 54:12क्योंकि अभी तो बने हैं अभी अभी तो आए हो बाहर वन के छाये हो।
- 54:24हवा ज़रा महक तो ले नजर ज़रा बहक तो ले ये श्याम ढल तो ले ज़रा ये
- 54:38श्याम। ढल तो ले ज़रा ये दिल संभल तो ले
- 54:43ज़रा मैं थोड़ी देर जीतो लूँ मैं थोड़ी देर जीतो लूँ नशे के घूँट
- 54:51भी तो लूँ अभी तो कुछ कहानी है अभी तो कुछ सुनानी।
- 55:00अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं अगर 75 साल का एक बूढ़ा अभी
- 55:11कहता है अभी अभी तो आएगा इसका मतलब क्या है?
- 55:18संसार को पाने में बहुत देर लग जाती है और जब तुम भोगना शुरू
- 55:26करते हो तब तुम्हें लोग कहते हैं चलो उठो तुम्हारा स्टेशन आ गया।
- 55:35इसलिए तो कभी राजनीतिकों का मन नहीं करता भूख इतनी सारी जिंदगी
- 55:43गाली दी यहाँ तक पहुंचते पहुंचते दरिया गाढ़ते चढ़ते वह मुश्किल तू
- 55:49यहाँ आया मैं थोड़ी देर जी तो लूँ।
- 55:53नशे के घूंट भी तो लूँ। अभी तो कुछ कहानी अभी तो कुछ सुना
- 56:02नहीं अभी न जाओ छोड़कर ये दिल अभी भरा।
- 56:07नहीं। संसार की चीज़ मांगना पर महात्मा
- 56:16कभी भूल से भी मत मांगना ये मैंने भ्रम तो तोड़ा अक्सर मंत्रों में,
- 56:28मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों में। तुम परमात्मा को मांगते हो, यही
- 56:40चूक हो जाती है। इसलिए इस बड़ी चूक को ठीक करने के
- 56:45लिए आज मैं बोला मैं चीजों को सवारता चला जाता हूँ।
- 56:52कोई टूटी फूटी चीज़ हो, उसको पाज लगाता चला जाता हूँ, ये धंधा है
- 57:02मेरा कोई बिगड़ तिगड़ गयी हो प्रथा उसको सुधार देता हूँ।
- 57:14तुमने परमात्मा को, मंदिरों में, मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों में,
- 57:19चर्चों में जाकर परमात्मा को मांगना सूख दिया, जबकि परमात्मा
- 57:25तो तुम्हारे हृदय के भीतर। वह मंदिर में मिलेगा।
- 57:37मैंने कल भी कहा था चीजें वही मिला करती हैं जहाँ होती हैं
- 57:44चीजें वही मिला करती हैं। हाँ लिख लो उसको रिकॉर्ड कर।
- 57:49हृदय के बेतरी अंत स्थल में लिख लो, चीजें वहाँ मिला करती हैं
- 57:55जहाँ हुआ करती हैं तो जीस परमात्मा को तुम ढूंढ रहे हो।
- 58:02वो तो तुम्हारे हृदय के भीतर है। उसको मंदिरों में, मस्ज़िदों में
- 58:08बाहर संसार में जाकर मांगने की चेष्टा मत करो।
- 58:13हिमालय की गुफाओं में, वनों में, कंधाओं में ऊंची ऊंची पर्वतों की
- 58:20रोगियों में उसको खंगाला मत वहाँ वो है नहीं मिलेगा नहीं।
- 58:28इसने बुलेषण कहा मंदिर चाह दे मस्जिद चाह दे बुले शाह ये कहता
- 58:34है पर के सीधा दिल न टाइम इससे दिल पीछे दिल पर रहता।
- 58:47दिल में थी बसी मेरे तस्वीर यार जब चराकर तन झुकाई देख रही है अगर
- 58:54भीतर था तो देख लिया ना, अगर भीतर ना होता तो मंदिरों में कहाँ
- 59:00देखने जाते। मंदिरों में तो मूर्तियां हैं।
- 59:05मंत्र में तो पथरीली मूर्तियां हैं, जो पहाड़ों को काट के बनाईं।
- 59:14तस्य तस्य अचलाम श्रद्धाम तामे वृद्धा में हम उसकी श्रद्धा को
- 59:20धीरे धीरे में अचल करता रहता है। मैं डोलती नहीं।
- 59:27नए नए तो तुम डोल जाते हो तो भगवान कृष्ण कहते हैं कि धीरे
- 59:34धीरे पहला स्टेप, दूसरा तीसरा, चौथा रोज़ जो तुम मांगोगे संसार
- 59:41की चीज़ को। उस में श्रद्धा को मैं घनी भूत
- 59:48करता जाऊंगा रोज़ लेकिन परमात्मा को भ्रमंड से मत मांग लेना
- 59:57परमात्मा भ्रमंड के। बस की चीज़ नहीं है, परमात्मा
- 1:00:05नहीं दे सकेगा। ब्राह्मण तुम्हें उसकी घूँट से
- 1:00:10सरब हो तो तुम्हें अपने ही भीतर जा के रोना पड़ेगा।
- 1:00:15वह रास्ता अलग है। इसलिए मेरे पास बहुत से व्यक्ति आ
- 1:00:22जाते हैं, जिनकी भीतर की प्रगाढ़ कमना कुछ और होती है और वो
- 1:00:30संसारित होती है। लेकिन वो प्रकटीकरण करते हैं कि
- 1:00:37हम भगवान परमात्मा नहीं उन्होंने परमात्मा को चाहा ही नहीं।
- 1:00:45कभी उन्होंने चाहा होगा कुछ और और तुम्हारे।
- 1:00:58मार्गदर्शकों ने आज धार्मिकता का जनाजा निकाल दिया है।
- 1:01:07अन्नकूट बना दिया है, अन्नकूट सब कुछ बेचवाएं।
- 1:01:13कहते हैं यहीं से संसार मिल जाएगा, यहीं से भगवान मिल जाएगा।
- 1:01:17चलो अन्नकूट से कभी भगवान नहीं मिलता, भगवान तो शुद्ध शुद्ध
- 1:01:23मिलता है। अन्नकूट में तो स्वाद होते हैं
- 1:01:27बांटी बांटी में वो संसार में मिलते हैं।
- 1:01:35तुमने पूछा, पुत्र कि सातवें अध्याय का इक्कीसवां शुल्क इसको
- 1:01:46रहस्यत्मक ढंग से बताने का कष्ट कहा।
- 1:01:53यो जो जाम जाऊ तनु भक्त श्रद्धयार चित्तम ई क्षति श्रद्धा भावश्य
- 1:02:04बिल्कुल सीरियसली? जीस चीज़ को तुम चाहते हो और उसके
- 1:02:13संसार में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं।
- 1:02:20वह तुम्हें सब कुछ मुहैया करवा सकता है।
- 1:02:27तुम मांगने वाले बनो। उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
- 1:02:37तस्य तस्य अचलाम श्रद्धाम तामे वेददा में हम अर्थ करने वालों में
- 1:02:51इसका अर्थ देवी देवताओं पे कर दिया।
- 1:02:54कोई बात नहीं। कहीं तो समझना ही पड़ेगा तुम्हें
- 1:03:04व्हाइट स्पेक्ट्रम में वस्त स्केल में अगर इसको समझाया जाए, तुम जो
- 1:03:10भी कुछ पाना चाहते हो सच सच जो पाना चाहते हो।
- 1:03:18पहले पड़ताल करो कि तुम अक्सर पाना क्या चाहते हो और फिर उसी की
- 1:03:26तरफ यह बहुत कीमियां हैं जो कृष्ण भगवान ने बताई।
- 1:03:31तुम्हें असल में तुम पाना कुछ और चाहते हो शक्ति तुम कहीं और लगा
- 1:03:37रहे हो। नहीं मिलेगा, तुम्हें तुम जा रहे
- 1:03:46हो। लाहौर तुमने सोचा था कि बॉम्बे
- 1:03:50पहुंचा हूँ, रास्ता चुन लिया तुमने लाहौर जाने का, कराची चुन
- 1:03:56जाने का। जाना था तुमने बॉम्बे इसीलिए
- 1:04:06कृष्ण कहते हैं, सबसे पहले तुम जानो, हेल्प करो, तुम्हें चाहिए
- 1:04:13कि परमात्मा चाहिए या परमात्मा द्वारा सिरज्य तक रचना चाहिए।
- 1:04:19संघ रचना चाहिए। पहला फैसला करो, फिर पहला स्टेप
- 1:04:25उठाओ तुम तो आंधी दूर चलकर फैसला करते हो मैं चला किस लिए था,
- 1:04:35तुम्हें तो पता ही नहीं था। बेहोशी बेहोशी में तुम चल पड़ते
- 1:04:42हो और वह बेहोशी में चलना तो सपने में चलने के समान होता है, उसका
- 1:04:47कोई परिणाम नहीं होता। तस से तस से अचलन और श्रद्धान
- 1:05:01तुम्हें समझाने के लिए बना दिया। अर्थ तुम्हारे मार्गदर्शकों, तुम
- 1:05:10शंकर को चाहते हो तुम हनुमान को चाहते हो तुम दुर्गा पार्वती को
- 1:05:14चाहते हो तुम लक्ष्मी विष्णु को चाहते हो जो भी चाहते हो पहले
- 1:05:22फैसला करो। फिर उस तरफ चल प्रो और तुम जीस
- 1:05:31तरफ चल पड़ोगे परमात्मा उसी तरफ तुम्हारी श्रद्धा को बुलाते चला
- 1:05:37जायेगा। ये बहुत गहरा इसका अर्थ है अर्थ
- 1:05:48है के ब्रम्हंड से इस सारे ब्राह्मण से पदार्थ मांगना, आनंद
- 1:05:59देना इस ब्राह्मण की। कैपेसिटी से परे यह भ्रमण तुम्हे
- 1:06:06आनंद नहीं दे सकेगा। इसलिए आनंदी से मांग मत लेना आनंद
- 1:06:12तो बड़ी सुलभ वस्तु है, जो तुमने दुर्लभ बना दी है।
- 1:06:19रब्बदा की कोण हो? पोतरो पुटना से एधर ना भगवान का
- 1:06:27भी कोई पाना होता है। उद्र से उखाड़ो और व्रती को इधर
- 1:06:32लगा दो हृदय के भीतर दिल के आईने में थी तस्वीरें यार।
- 1:06:39दिल में दिल के आईने में थी। तस्वीरें यार जब ज़रा गर्दन चुकाई
- 1:06:44थी, वह तो कोई मुश्किल काम नहीं है, बात तो ये है कि तुम्हें
- 1:06:53फुर्सत नहीं मिलती। अपने भीतर जाने की तुम्हे फुर्सत
- 1:06:59नहीं मिलती तुम राम राम भी करते हो तो माला भी फिरते रहते हो तो
- 1:07:08रामू को कहते रहो अरे दूध निकल गया, अरे ये ग्राहक आ गया इसको घी
- 1:07:16तोड़ दे। राम राम भी करते रहते हैं माला तू
- 1:07:24कर मैं फिर जीव फिर मोखमा, मनीराम चहु देश फिर यह तो सुमरण ना?
- 1:07:40पहली बात संसार मिलेगा ब्रम्हंड से इस चीज़ को भूल जाओ कि
- 1:07:49ब्रम्हंड में परमात्मा देते हैं ये बहुत लोगों में क्योंकि जो
- 1:07:57धार्मिक आज बने हुए हैं। केंद्र वो पदार्थों के बहाने से
- 1:08:09तुम्हें परमात्मा के नाम पे ठग लेते हैं, परमात्मा संकल्प के
- 1:08:17द्वारा नहीं मिलता। पदार्थ संकल्प से मिल जाता है।
- 1:08:28कोई डिग्री लेनी है, कोई सूचनाएं लेनी है, कोई परीक्षा पास करनी
- 1:08:35है, कोई इंटरव्यू लगानी है, कोई सिफारिश लगानी है, ये मेहनत से
- 1:08:42मिल जाएगा। यह संसार है, लेकिन अगर परमात्मा
- 1:08:49चाहते हो तो वहाँ मेहनत नहीं काम करेगी, वहाँ काम करेगा।
- 1:08:53ठहरना और समय पहले की बात है पुरानी मेरा के शिष्य।
- 1:08:59बंद हो गया। जेल से बाहर आया तो मेरे पास।
- 1:09:01मुझे कहने लगा, बाबा। मैं तो यहाँ भी पीटा और जेल के
- 1:09:10भीतर। भी पीटा, मैंने क्यों क्या बात हो
- 1:09:14गयी? जैसे जेल के भीतर गया यहाँ।
- 1:09:18बाहर तो इन्होंने पीटा मुझे। क्या किया है तुने मैंने बता दिया
- 1:09:23कि ये ये कुछ चोरी किया है इसका टेप रिकॉटर चोरी किया है इसका
- 1:09:28मोबाइल चोरी कर लिया इसका वो चोरी कर लिया इसका वो चोरी कर लिया
- 1:09:34इसका धन चुरा लिया इसका वो। तो यहाँ पीटा फिर मुझे जेल हो गई
- 1:09:43जेल हो। गई तो वहाँ भी पीटा।
- 1:09:47मैंने कहा वहाँ क्यों पीटा तो वहाँ उन्होंने पूछा।
- 1:09:51यहाँ किस लिए आए हो? क्या करके आए हो यहाँ?
- 1:09:57वो कहता है कि मैं कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं किया।
- 1:10:00हूँ। मैंने थोड़ी सी चोरी की थी, बस
- 1:10:05थोड़ी सी चोरी की थी तो फिर उन्होंने पीटा हरामखोर।
- 1:10:09अरे, 510 कतल। करके आता।
- 1:10:14इधर भी पीटा और फिर तो उधर। भी पीटा अब बड़े।
- 1:10:17बड़े बदमाश रहते हैं भीतर बाहर छोटे बदमाश जेल में बड़े बदमाश और
- 1:10:28दिल्ली की। राजगद्दियाँ पे सबसे बड़े बदमाश।
- 1:10:32अन्यथा छोटे बदमाशों को ठीक कैसे कर पाएगा?
- 1:10:38बड़े बदमाश होंगे तो छोटे बदमाशों।
- 1:10:42को ठीक कर पाए। कहता बाबा मैं तो इधर भी पीटा,
- 1:10:46मैं तो उधर भी पीटा तो ऐसा काम मत कर ले।
- 1:10:52पहले जीवन। की दिशा को तय करो सारा संसार आज
- 1:11:03इस गलती। पर है और मैं तुम्हें आज बहुत
- 1:11:10पहले बताया। कि प्रत्येक व्यक्ति ढूंढता है
- 1:11:14आनंद और प्रत्येक व्यक्ति को। गुमराह कर कर देते हैं।
- 1:11:20उनके मार्गदर्शक राह गलत बता देते हैं।
- 1:11:31कोई हाथ में कन्ना बत्ती कुर कान में करके हाथ।
- 1:11:34में शब्द पुखरा दे रही है ना? बताना मत किसी को।
- 1:11:45तो सब जगह पीटते हैं, यहाँ भी पीटते हैं वहाँ।
- 1:11:48भी पीटेंगे क्या तुम्हें मूर्ख बना रहे हैं?
- 1:11:56ये। कहते हैं मर के हम आएँगे तुम्हारी
- 1:11:57ऊँगली पकड़ेंगे। सच कंठ ले।
- 1:11:59जाएंगे। सच कंठ कभी मर के नहीं मिला करता
- 1:12:02सच कंठ मिलता है जीते जी मर कर तो जड़ता मिला करती है जड़ हो जाते
- 1:12:11हो तुम। फिर तो एक।
- 1:12:15तरह से तुम ऋषि हो जाते हो तुम्हारे।
- 1:12:18कोई हमारे तो कोई बात नहीं, तुम्हें कोई गाली निकाल दे तो कोई
- 1:12:23बात नहीं। एक तरह के तुम बुद्ध बन जाते हो,
- 1:12:26तुम्हारे ऊपर कोई थूक दे तो कोई बुरा नहीं मानते।
- 1:12:32यहाँ तक कि तुम्हें तो उठा के आग। में फेंक देते हैं तो।
- 1:12:35भी तुम बुरा नहीं मानते। ऐसे समान भाव वाले योगी हो जाते
- 1:12:42हो तुम मर। कर तो तुम जड़ हो जाते हो।
- 1:12:52पहली बात मैंने तुम्हें सबसे। पहले शब्द बताया।
- 1:13:00यही गलती खा लेते हैं लोग प्रत्येक।
- 1:13:06दुनिया का प्रति मनुष्य। आनंद की तलाश में निकला है।
- 1:13:16कोई ऐसा बंदा नहीं, कोई ऐसा स्त्री।
- 1:13:22पुरुष नहीं जीसको आनंद की। तलाश है?
- 1:13:28और मज़े की बात है। ये गुरु किसी व्यक्ति।
- 1:13:34को। वो थैंक रहने।
- 1:13:38नहीं देते ये दिशा बदल। ही देते हैं।
- 1:13:43कोई बंदा ऐसा नहीं जो सही। राह पे चल रहा हो।
- 1:13:47प्रयास कर रहे हैं। और वहाँ जाने के लिए।
- 1:13:51अप्रयाश की आवश्यकता होती है। प्रयास रहित त नथिंग टू टू बस
- 1:14:04जस्ट तुम। सो गए थे रात को।
- 1:14:07कुछ भी न किया था तुम अपने अंदर लुढ़क गए ऐसे ही दिन में जगते
- 1:14:14जगते तुम अपने भीतर लुढ़के जाना है बड़ा आसान सा सूत्र तुम्हें दे
- 1:14:19रहा हूँ करना कुछ नहीं। करने धरने की।
- 1:14:28चीजें सब संसार के लिए। उस आनंद का रस पीने के लिए तो
- 1:14:37करना धरना सब छोड़ना होता है और यही।
- 1:14:45मुश्किल है तुम्हारे लिए। तुम यही छोड़ नहीं।
- 1:14:50पाते। हालांकि तुम्हे बड़ा आसान।
- 1:14:52लगता है ये भी कोई बात है छोड़ तो देंगे हम फिर तो बस पहुँच गए।
- 1:14:59लेकिन कहाँ पहुँच पाते? हो सबसे मुश्किल काम है।
- 1:15:07तुम्हारा। मन तुम्हें टिकने नहीं देता।
- 1:15:112 मिनट भी नहीं बैठोगे। तो हमारा मन कहेगा, अरे।
- 1:15:17फलाव व्यक्ति से एकरार था, उसका ये काम करके आना है उसका।
- 1:15:22ये करके आना है चलो। राम राम तो बाद में कर लेंगे, कोई
- 1:15:26बात नहीं। छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए
- 1:15:38छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए। ये मुनासिब नहीं आदमी के प्यार से
- 1:15:57भी जरूरी कई काम, प्यार सब कुछ। नहीं ज़िन्दगी के छोड़ दे।
- 1:16:13सारी दुनिया। किसी के हमें छोड़ना।
- 1:16:21बहुत मुश्किल लगता है। तुम्हें करना बड़ा आसान लगता है।
- 1:16:30तुम सुबह से शाम। तक काम कर सकते हो?
- 1:16:34लेकिन दो घड़ी है छोड़ नहीं सकते तुम कभी कोई चीज़ तुम्हें घेर
- 1:16:39लेती है, तुम्हारी चिपकाटे इतनी गहरी है।
- 1:16:44कि जब तुम खंगालोगे मुक्त होने के लिए तब तुम पाओगे, अरे इतना
- 1:16:48जिंजाल और ये तुम्हारा ही इकट्ठा किया हुआ है यह इतना जिंजाल।
- 1:16:57तुमने तुम्हारे मन नहीं बांधा। है और सोच समझ के बांधा है।
- 1:17:04इसलिए मैं कहता हूँ अपने बेहतर उतरों यह है।
- 1:17:11बोले शाह बता दोगे तुम्हें? रब्बदा की पणो?
- 1:17:16उतरों पुटना तीर्थर लाना। लेकिन बेहतर जाओगे ना?
- 1:17:21तो ये जो कूड़ा इकट्ठा किया इतने। जन्मों का ये सब तुम्हारे।
- 1:17:25सामने आएगा एक ज़रा भी। नहीं छोड़ पाओगे तुम सब।
- 1:17:31बहुतना पड़ेगा पाई पाई का हिसाब होगा तुम्हारा सबसे मुश्किल है ये
- 1:17:38काम। किस्से रिश्वत मांगेत किसकी जमीन
- 1:17:46किसके नाम कराई थी किसका? कुर्सी नाम किया था किसका?
- 1:17:54इंतेकाल खत्म कराया था। जी तुम्हें तब पता चलेगा थोड़ा
- 1:18:04गहरे उतरो, बस यही तुम्हें नहीं पता लगता कि गहरे कैसे उतरना?
- 1:18:16है क्योंकि जैसे तुम भीतर जाओगे, तुम्हारे सारे रिकॉर्ड भीतर पड़ा।
- 1:18:24और जैसे फाइल। खुल जाती है ना किसी आदमी की
- 1:18:27अपराधिक। फाइल तो उसका मुख पीला पड़।
- 1:18:32जाता है रक्त विहीन क्रांति। मुख पीला पड़।
- 1:18:38जाता है रक्त विहीन क्रांति। तब तुम्हें पता चलता है कि मैंने
- 1:18:48ये ये कुछ किया। हुआ है।
- 1:18:52ऐसे ही। महावीर को महावीर की उपाधि।
- 1:18:56में मिल जाते हैं। बड़ी वीरता का काम है अपने भीतर
- 1:19:02उतर जाना। राम राम तो कोई भी कर सके।
- 1:19:08राम राम तो एक पांच ग्राम की जीव ही तो वेलानी होती है।
- 1:19:19वो तो कोई भी कर सकता। है बेहतर रहना बड़ा मुश्किल।
- 1:19:22है। अगर धरती पर जिंदगी।
- 1:19:26में कोई मुश्किल से। मुश्किल से कठिन से कठिन धमाका वो
- 1:19:32है अपने भीतर उतरना, क्योंकि अपने भीतर उतर के तुम्हें साक्षात्कार
- 1:19:39होगा तुम्हारे सब पुण्य। और तुम्हारे सब बाप तुमने क्या
- 1:19:44कुछ किया था रूबरू होगे तुम तो तुम्हें समझायेगी।
- 1:19:52तुमने जीवन में किया। क्या है फिर तुम?
- 1:19:58स्वीकार करोगे ऐसे तुम स्वीकार? नहीं करते।
- 1:20:06इसलिए नेक उसे करना सबसे मुश्किल है।
- 1:20:14जन्मो। जन्मो से, तुम कर रहे हो।
- 1:20:19दुकानदारी भी चला रहे हो। ऑफिस में जा रहे हो?
- 1:20:23लड़ाई झगड़े भी कर रहे हो, केस भी लड़ रहे हो।
- 1:20:28जन्म। जन्म से तुम कर रहे हो नय करने
- 1:20:31में। तुम जब आओगे तो पता चलेगा मैंने
- 1:20:35कितने व्यक्ति। नाजायज व्यक्ति को परेशान किया।
- 1:20:44ज़रा भीतर उतरो, फिर पता? चलेगा।
- 1:20:47धन्यवाद।