Latest / Khushei Ki Duniya / ❤️🔥 Love Written in Flames | Fire, Fate & Love 🔥
Transcript
- 0:00क्या एक इंसान अपने पास्ट को पीछे छोड़ सकता है और क्या भरोसा की?
- 0:05उसका वो पास्ट कभी दोहराएगा नहीं, कभी उसके सामने नहीं आएगा।
- 0:10और क्या हो जब आपका पास्ट आपके सामने हो?
- 0:12पर आप समझ नहीं पाओ। वेल थोड़े से कॅफ्यूज हो गए ना आज
- 0:17तो मैं एक ऐसी कहानी सुनाती हूँ जो थोड़ी अलग है।
- 0:20बट डेफिनिट्ली तुम्हें सुनकर मज़ा जरूर आएगा सो आई गाइज़ थिस इस
- 0:25युअर होस्ट कम दोस्त खुशी एंड आई ऍम बेक विथ अनँद्अर लव स्टोरी एंड
- 0:29अपने कानो में लगा लो दुनिया से थोड़े से दूर हो जाओ, सुनाती हूँ
- 0:33तुम्हें ये वाली कहानी ब्य दी वे। थोड़ी सी बात करनी थी, पर चलो वो
- 0:39एंड में करते है तो वो अपने कानों में लगा लिया ना तो हमारे
- 0:43लिस्टनर्स ने मुझे ये नेम्स दिए थे स्नेहा एंड सत्यम तो हमारी
- 0:46कहानी का किरदार ये नहीं है। ओके सॉरी माइट बी ये किरदार है।
- 0:51चलो तो कहानी शुरू करती हूँ अब मैं।
- 0:56हर रात की तरह इस रात भी स्नेहा को वही सपना आता है।
- 1:00वही सपना जिसमें एक मूर्ति थी, एक आग जैसा कोई रिचुअल हो रहा था और
- 1:05कुछ लोग उसके आसपास थे, वह घेरे में खड़ी थी और आग उसके चारों तरफ
- 1:09थी। पर ये सब उसे क्यों दिखता था?
- 1:13ढोल नगाड़ों की आवाज। लोग कुछ मंत्र जाप कर रहे होते थे
- 1:17और हमेशा इस सपने में जैसे ही कुछ होने वाला होता स्नेहा की आँख खुल
- 1:21जाती। स्नेहा को नहीं पता था कि आखिर ये
- 1:25हो क्यों रहा है? मेरे साथ कोई तो रीसन होगा इसका
- 1:28और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। स्नेहा की रूममेट उससे कहती है
- 1:32फिर से जाग गयी। फिर से वही सपना देखा तुने हाँ
- 1:36यार पता नहीं स्नेहा अपने माथे पर से पसीना हटाती है और कहती है पता
- 1:42नहीं यार हर रात ये सेम सपना क्यों आ रहा है?
- 1:45मुझे डॉक्टर को भी दिखाया, उसे भी समझ नहीं आ रहा की क्या रीसन है
- 1:49इसका और ये अभी क्यों आने लगा है क्या बदला है कुछ टाइम में?
- 1:54मुझे समझ ही नहीं आता है लाइक मैंने हर तरह से सोच लिया भाई कोई
- 1:58तो रीसन होगा इस सपने के आने का, पिछले एक महीने से पक गयी हूँ मैं
- 2:03उसके दोस्त कहती है यार कुछ तो हुआ होगा ना कुछ तो चेंज हुआ होगा
- 2:07तुने कुछ पड़ा होगा तुने कुछ देखा होगा।
- 2:10कोई तो रीसन होगा यार, बेवजह चीज़ एक महीने पहले ही क्यों शुरू
- 2:13होगी? बचपन से आती अगर आती तो तो यानी
- 2:15की कोई रीसन होगा ढूंढ सोच एक महीने में क्या हुआ है यार मुझे
- 2:20नहीं पता यार कुछ भी हुआ हो मैं क्यों इर्रिटेट हो रही हूँ इससे
- 2:24नहीं कुछ तो हो डॉक्टरों की दवाइयाँ तक काम नहीं कर रही नींद
- 2:27की गोलियां ले के सो तू तब भी ये सपना आता है।
- 2:29और तब जाग जाते हो। हे आई डोन्ट नो व्हाय?
- 2:31ऐसा लग रहा हैं जैसे कोई सजा दे रहा हैं मुझे भाई आई ऍम सो डॉन
- 2:35विथ थिस थिंग और वो मूर्ति अरे इतनी गूगल पे सर्च करली भाई गूगल
- 2:39पे हर चीज़ का जवाब हैं तो ये मूर्ति का क्यों नहीं हैं?
- 2:42क्या हैं इस मूर्ति का रीसन तो उसके दोस्त कहते हैं अच्छा स्नेहा
- 2:47एक काम करना। तू बहुत अच्छी स्केच बनाती है ना?
- 2:50एक काम कर वो वाली मूर्ति जो तू सपने में देखती है उसका एक स्केच
- 2:53बना और एक साइड होती है रेड इट करके वहाँ पे हम लोगों से सवाल
- 2:59पूछ सकते हैं तो अगर ब्य चांस किसी ने गलती से वो मूर्ति देखी
- 3:02होगी, तुझे शायद पता चल जाए की क्या क्या रीसन है इसका?
- 3:07स्नेहा को भी ये बात सही लगती है की ऐसे भी कोई साइट है वैसे हाँ
- 3:10यार है नाम की तू एक काम करना जल्दी से तू उसका स्केच बना उधर
- 3:14डाल दे ब्य चांस ही हमें क्या पता बट हो सकता है कुछ हेल्प हो जाए
- 3:19तो स्नेहा यही करती है। वो उस मूर्ति का एक स्केच बनाती
- 3:23है और पर डाल देती है। इस उम्मीद से की कोई तो कही से तो
- 3:27आएगा और बताएगा की हाँ मैंने ये मूर्ति देखी है पर दिन गुजरे
- 3:32हफ्ते गुजरे पर कोई लक नहीं, कोई भी उस मूर्ति को नहीं जानता था।
- 3:38एक रात फिर से जब वापस से स्नेहा इसी सपने के साथ जागती है तो इस
- 3:43बार वो बहुत इर्रिटेटेड थी। यार क्यूँ दिख रही हो तुम मुझे
- 3:46बोलते क्या किया है भाई मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा, आई
- 3:50डोन्ट नो क्यूँ? क्या रीसन है इसका?
- 3:52अरे जो भी है ऐट लिस्ट गीव मी ए साइन और तभी उसके फ़ोन पर एक
- 3:57मैसेज आता है। ये मैसेज की टोन देखते ही।
- 4:01वो अपना फ़ोन उठाती है और देखती है की सुबह के 3:00 बजे थे और
- 4:05किसी रेडिट यूज़र ने कहा था की हाँ मैंने ये मूर्ति देखी है।
- 4:10फाइनली, स्नेहा के पास शायद अब एक रास्ता था तो उसने पूछा उससे की
- 4:16ये मूर्ति कहा की है? कैन यू प्लीज़ टेल मी आई हॅव बीन
- 4:19सीइंग थिस एंड एव्रीथिंग सो। इफ यू कैन हेल्प मी आउट।
- 4:22स्नेहा उस आदमी से थोड़ी बाते करती है और तब वो उसे बताता है कि
- 4:27कुछ वक्त पहले वो और उसके दोस्त एक ट्राइब गांव में गए थे जहाँ
- 4:32जाने पर लोगों ने उसे भगा दिया। उसके दोस्तों को भी पर एक आदमी ने
- 4:37उनकी हेल्प कर दी। उन्हें घूमना था और एक आदमी ने
- 4:41पैसे लेकर उन्हें रात में चुपचाप से वो गांव घूमा दिया।
- 4:44पता नहीं इतना मिस्टीरियस क्या था पर कुछ तो था इसीलिए शायद वो आदमी
- 4:49तुम्हे भी घूमा दे और वहीं घूमते हुए मैंने ये मूर्ति देखी थी।
- 4:53शायद उनकी कोई देवी है ये पता नहीं तो या मैंने देखी है ये
- 4:57मूर्ति। स्नेहा ने कहा, प्लीज़ अगर आप
- 4:59मुझे उस गांव का या उस आदमी का उसके बारे में कुछ बता दे तो बहुत
- 5:03हेल्प होगी। प्लीज़ तो उन्होंने बताया की ठीक
- 5:06है। पूरा एड्रेस दे दिया उस गांव का
- 5:08क्योंकि अगर किसी की हेल्प हो जाए तो क्या है?
- 5:11स्नेहा के पास ऐट लिस्ट। तरीका था।
- 5:14हालांकि वो जगह बहुत दूर थी। उसके घर से कहाँ वो दिल्ली के
- 5:17रहने वाले और कहाँ उस गांव में जाना था जो की हजारों किलोमीटर
- 5:22दूर था उसके घर से बट उसने सोचा कि ठीक है जाएंगे, क्योंकि उसे
- 5:27अपने सवालों के जवाब तो चाहिए थे। इसी सब उधेड़बुन में वो अपनी
- 5:31दोस्त को बाएं बोलती है। ना बैग पैक करती है और एक ट्रैन
- 5:35टिकेट बुक करती है, फाइनल स्टेशन पे जाती है और अपनी ट्रैन में बैठ
- 5:38जाती है। वहाँ बैठने के बाद वो यही सोच रही
- 5:42होती है की क्या होगा रीसन क्या वहाँ जाकर उसे कुछ पता चलेगा या
- 5:47नहीं पता चलेगा? ये क्या होगा?
- 5:49और ये मूर्ति अचानक उसे क्यों दिखने लगी?
- 5:51और वो भी एक ऐसे ट्राइब गांव के जहाँ लोगों का जाना भी अलाउड तक
- 5:54नहीं था। आई मीन व्हाट?
- 5:56अरे दी ऑड्स और क्यों बट? इन सब सवालों में वो इतना उलझ गयी
- 6:01की कब उसके सामने कोई आकर बैठ गया, उसे पता भी नहीं चला, पर फिर
- 6:05जब उसकी निगाह उसकी तरफ गयी। और चलने लगी तो उसने देखा की
- 6:11कितना खूबसूरत था वो नीली आँखें और इतना ऐसी आँखें जिनमें मानो
- 6:19देखती रह गयी। सामने से उसने कहा, आप हमें ऐसे
- 6:24क्यों देख रही है? सॉरी सॉरी सॉरी आई मीन।
- 6:27युअर आईस दे अरे अक्चवली वेरी प्रिटी आई थिंक शुक्रिया कई लोग
- 6:33कहते है इस बात को पर हमें तो हमारी आँखें ऐसे ही लगती है जैसे
- 6:37और सबके है। आपकी आँखें भी सुंदर है, सबकी
- 6:40आँखें सुंदर होती है। नहीं तुम्हारी आँखें बहुत अलग है।
- 6:46लग पा रही है। जैसे होती है ना वो आँखें, चंद
- 6:49में लोग डूब जाते है, कुछ कुछ वैसी आँखें तुम्हारी तो वो भी हँस
- 6:55जाता है है हम स्नेहा बाई दी वे हम सत्यम है अच्छा सत्यम नाइस
- 7:01वैसे कहाँ जा रहे हो तुम, मैं तो एक गांव जा रही हूँ तुम बताओ।
- 7:05हम भी हमारे गांव जा रहे हैं वहाँ पर कुछ काम है हमें अच्छा।
- 7:10नाइस नाइस तो तुम कितनी देर का सफर है तुम्हारा तो उन्हें पता
- 7:15चला कि उनका ऑलमोस्ट बराबर टाइप का सफर था और ये सुनकर स्नेहा
- 7:19बहुत खुश होती है की चलो फाइनली कोई हमरा ही मिल गया जिसके साथ वह
- 7:23बात कर सकती थी। और फिर स्नेहा बताती है, अपने
- 7:26बारे में उससे कुछ यार वैसे बैठे बैठे बोर हो जाएंगे।
- 7:30फ़ोन मुझे चलाना नहीं है, तुम्हारी इंस्टाईड क्या है?
- 7:34वैसे तो सत्यम ने कहा, इंस्टाईड नहीं है हमारी हम फ़ोन वोन कम
- 7:39चलाते है। क्या तुम इंस्टा नहीं चलाते हो
- 7:42यार वाह वाह सब के ज़माने की हो के यार।
- 7:45आज के जमाने में कौन है? ऐसे सही बात है?
- 7:47अगर तुम इंस्टा चलाते ना तो सच में वायरल हो जाते तभी मैं सोचूं
- 7:54सत्यम कहता है आप क्या कह रही है मुझे थोड़ा कम समझ आ रहा है पर
- 7:58मैं थोड़ा कम ही रखता हूँ। इंस्टा।
- 8:01दोस्त चलाते हैं। हमारे कुछ पर हमें इन सब में कुछ
- 8:04खास नहीं पड़ना है। अच्छा ब्य दी वे क्या तुम हिंदी
- 8:07में डिग्री ले रहे हो क्या? नहीं नहीं नहीं तुम्हे क्या लगता
- 8:10है? संस्कृत में डिग्री ले रहे होंगे।
- 8:12आपको कैसे पता तुम सच में संस्कृत की डिग्री ले रहे हो?
- 8:17ओह गॉड। रैंडम गेस्ट था यार तुम्हे देख
- 8:20कर, बट वाओ लाइक व्हाट अरे दी ऑड्स आई मीन वा यार आप हस क्यों
- 8:26रहेंगे? संस्कृत में तो हम हमारी संस्कृति
- 8:29को बढ़ावा ही देंगे। नहीं नहीं, सॉरी।
- 8:31मेरा हंसने का मतलब वो नहीं था। बस तुम्हें देख कर लगा और जब
- 8:36मैंने अपना गेस से ही प्रूफ कर दिया तो लगा की वाह यार तो बस हाँ
- 8:40वैसे डोन्ट वेरी हाँ तुम गुस्सा मत होना।
- 8:42अरे नहीं नहीं हम गुस्सा नहीं हो रहे है।
- 8:44बस ऐसे ही कुछ देर वो ऐसे ही बात करते रहते है।
- 8:47फिर किसी बात पर सत्यम उसे कहता है कि।
- 8:51आप अकेली जा रही है आपके घर वालो ने आपको अकेले जाने दिया लम्बे
- 8:55सफर पर अरे नहीं पेरेंट्स नहीं है, मेरे बाबा थे पर कुछ वक्त
- 9:01पहले उनकी डेथ हो गई और माँ का कोई अता पता नहीं था।
- 9:06शायद जब पैदा हुई थी तभी खत्म हो गई थी तो?
- 9:10एक रूममेट है बहन जैसी उसे बताकर आयी हूँ की कहा जा रही हूँ कितने
- 9:15दिनों के लिए जा रही हूँ ये तो नहीं पता पर हाँ उसे पता है ये सब
- 9:18के बारे में बाकी वो फ़ोन करती रहेंगी।
- 9:19मुझे अच्छा अच्छा सही है तुम्हारी फैम्ली में कौन है?
- 9:24हमारे परिवार? हमारा काफी बड़ा परिवार है, हमारे
- 9:27गांव में ना सब परिवार की तरह ही रहते है।
- 9:29तो हमारा तो ऐसा ही है। हमारे घर वाले भी है, एक छोटी बहन
- 9:34है, फिर हम है, हमारे पापा है, मम्मी भी है तो छोटा सा परिवार है
- 9:39पर पूरा गांव ही एक परिवार है तो हमारे यहाँ सब ऐसे ही रहते है।
- 9:43अरे वाह, अच्छा गांव है तुम्हारा। हम यहाँ शहर के ज़िन्दगी में यार
- 9:47गांव की ज़िन्दगी जब सुनते है लोगों के मुँह से तो लगता है वाह
- 9:50यार कितनी अच्छी लाइफ होगी इन लोगों की पर कभी ऐसा पता है मतलब
- 9:55बस सुना है देखा नहीं है कभी तुम तुम अपने गांव में इन्वैट कर सकते
- 9:59हो ऐसे मुझे नहीं नहीं नहीं आप आप हमारे गांव में नहीं आ सकते
- 10:04क्यों? ऐसे क्यूँ बोला तुमने?
- 10:07नहीं हमारा मतलब है की अभी आप अभी तो आप अपनी जगह पे जा रही है ना
- 10:11कहीं पर तो आप अभी हमारे गांव नहीं आ सकते ना हाँ यार बात तो
- 10:15सही है वैसे मुझे यहाँ जाना तो है अच्छा चलो ठीक है फिर कभी और
- 10:20बुलाना तुम वैसे तुम यहीं रहते हो दिल्ली में।
- 10:24हम हमारी पढ़ाई के लिए ही आए थे। हमारे गांव में से बहुत कम ही लोग
- 10:28बाहर निकलते है। पर हमें भेजा गया किसी काम से तो
- 10:32हाँ हम अब वापस जा रहे है। पढ़ाई भी हो गई है और कुछ काम भी
- 10:37है। अरे वाह सही है यार सही है।
- 10:40ऐसे ही धीरे धीरे कई सारे बाते हुई और कभी कभी ना यार।
- 10:44ऐसा होता है की लोग कहते हैं की अरे हमें प्यार हो गया, हमें ये
- 10:48हो गया, हमें वो हो गया क्या होता है प्यार?
- 10:51हर कहानी में ना मैं एक अलग तरीके से डिस्क्रैब करती हूँ प्यार को
- 10:54पर क्यों करते हो पता है अब कोई एक सिंपल सी चीज़ हो तो उसे
- 10:57डिस्क्रैब किया जा सकता है, लेकिन प्यार इतनी कॉम्प्लिकेटेड चीज़
- 11:01होती है ना? उसे हम डिस्क्राइब नहीं कर सकते,
- 11:03उसे हम महसूस कर सकते है। बस तो स्नेहा कहीं ना कहीं सत्यम
- 11:09के उन आँखों में ऐसा खो गयी कि मानो उसका नाता हो, उसे कोई
- 11:13सीरियसली वो सोच रही थी कि यार ये क्या अजीब इंसान है मतलब मुझसे
- 11:18कितना अलग है? कहा मैं एकदम मॉडर्न सी लड़की और
- 11:21कहा ये एकदम ही यू नो पंडित पुजारी जैसा पर फिर भी इतने
- 11:27अपोज़िट हो कर भी और हम लाइक पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा है।
- 11:31जैसे ही इस दी वन फॉर मी अजीब है पता नहीं।
- 11:36पर कुछ लोगों के लिए ना शायद हमारा दिल गंवारा देता है कि नहीं
- 11:39यार ये ही है, शायद कहते है न वो रेड स्ट्रिंग ऑफ़ इट क्या पता
- 11:44किस्से हमारी वो रेड स्ट्रिंग जुड़ी हो।
- 11:46शायद स्नेहा को लग रहा था कि उसकी रेड स्ट्रिंग कहीं ना कहीं सत्यम
- 11:51से जुड़ी थी, पर उसने सोचा। ये मुझे कभी पसंद नहीं करेगा।
- 11:55इसके लिए तो मैं एक जल्ली लड़की होंगी।
- 11:57अब वैसे भी सही बात है हम कहाँ एक मैच हो पाएंगे?
- 11:59कहाँ है कहाँ मैं वो होता है ना कभी कभी की हम खुद ही खुद को
- 12:04रिजेक्ट कर देते है। सामने वाले से पूछने से भी पहले
- 12:07और कई बार होता तुम्हारे साथ भी हुआ होगा की कोई होता है ना जब
- 12:10हमें बिलकुल ही एक्स्ट्रा आर्डिनरी लगता है।
- 12:13तो हमें लगता है कि यार नहीं यार इसको तो कोई बहुत ही एक्स्ट्रा
- 12:16आर्डिनरी मिलना चाहिए पर कहते है ना की वो तितली को कहाँ दिखते है?
- 12:20अपने पंख पर दुनिया को उसकी खूबसूरती दिखती है तो बस वही वाली
- 12:24बात है। हमें नहीं पता क्या पता हमें भी
- 12:27कुछ एक्स्ट्रा आर्डिनरी हो और सब में होता है तो।
- 12:30अभी स्नेहा को लग रहा था की सत्यम मोस द वन और एकदम ही सुन्दर साफर
- 12:35क्या करें ये वक़्त कभी कभी ये वक़्त न बहुत खराब चीज़ हो जाती
- 12:39है। बिलकुल ये टाइमिंग्स ही मैच नहीं
- 12:41करती है और कभी कभी यही वक़्त होता है जो शायद हमें मिलवा देता
- 12:44है उस इंसान से जिससे मिलना लिखा हो।
- 12:48तो हम कभी कह नहीं सकते है वक़्त पे डिपेंड करता है।
- 12:51पता है पर स्नेहा के पास वक़्त नहीं था।
- 12:54उसे जानना था उस मूर्ति के बारे में जानने के लिए और शायद सत्यम
- 12:58को अपने गाओ। उसके किसी काम से सत्यम उतर जाता
- 13:01है और अगले स्टॉप पर स्नेहा भी उतर जाती है।
- 13:04हालांकि उसके बाद वो गांव जाती है।
- 13:06उस गांव में उस इंसान से मिलती है और वो उसे पैसे देती है।
- 13:11पर वो इंसान पैसे लेने से मना कर रहा था की नहीं नहीं आज हम नहीं
- 13:14घुमाएंगे आपको अब जाइए तो स्नेहा ने कहा पर मैं बहुत दूर से आई हूँ
- 13:18और बहुत ट्रैवेल करके आई हूँ तो प्लीज़ आप ऐसे मत कहिए।
- 13:22उसने बहुत हाथ पैर जोड़े तो संसार ने कहा कि ठीक है आप घूमा सकते
- 13:26है, हम आपको पर अभी नहीं और आज रात तो बिल्कुल भी नहीं।
- 13:29आज रात हमारे गांव में निकलना ही नहीं होना चाहिए आपका कल देखता
- 13:33हूँ मैं स्नेहा कहते क्यों आज कुछ है आपके गांव में?
- 13:37आपके जानने लायक नहीं है मैडम आप हमारे इस घर से मत निकल और लाइट्स
- 13:41भी मत जलाइएगा क्योंकि लोगों को नहीं पता चलना चाहिए की हमारे घर
- 13:46में कोई और है तो प्लीज़ आप इस बात का ध्यान रखियेगा।
- 13:50इतना कहने के बाद स्नेह सोचती है ठीक है जैसा और वो उस कमरे में
- 13:56बंद बैठी रहती है। पर थोड़ी देर बाद वही ढोल नवाड़े
- 14:00इन सब की आवाज आने लगती है और स्नेहा ने कहीं ना कहीं आवाजें
- 14:05सुनी थी अपने सपनों में और उसे समझ जाता है की शायद यही सब था जो
- 14:09उसे दिख रहा था। ऐसा ही गांव था।
- 14:12और वो धीरे धीरे उन सब लोगों का पीछा करती है जिनके साथ ये धूल
- 14:16नगाड़े चलते हुए जा रहे थे। काफी सारे लोग थे, शायद गांव के
- 14:19सारे लोग थे और वो एक जगह जा रहे थे।
- 14:22चुपचाप इन्हीं लोगों में छ लोड़े वो भी चली जाती है और देखती है कि
- 14:27लोग कुछ मंत्र से बोल रहे थे। एक आग का।
- 14:31गोला बना हुआ था पर उसके सपने में वो उस गोले में थी पर यहाँ तो ये
- 14:37तो सत्यम है। सत्यम इस गोले में क्यों खड़ा है?
- 14:43सत्यम का क्या लेना देना इस सबसे इसी को देहरगुन में उसने देखा की
- 14:47वो मूर्ति भी वहाँ थी। यानी की ये वही जगा थी और वही
- 14:50रेचुअल जो अपने सपने में वो देखती हुई आई थी।
- 14:54पर क्यों, क्या और सत्य में यहाँ क्या कर रहा है?
- 14:59होता है ना? कभी कभी हमारे पास सवाल बहुत होते
- 15:01हैं और जवाब बिल्कुल भी नहीं पर अब वो चुपचाप पहले देखती है कि
- 15:05आखिर हो क्या रहा है? तो उस गांव के बूढ़े बड़े लोग थे।
- 15:08वो कुछ मंत्रों का जाप कर रहे थे और सत्यम उस आँख के गोले के बीच
- 15:12में खड़ा था और जब वो कहते है की अब तुम क्रिया शुरू करो।
- 15:19इस क्रिया में पहले तो मैं अग्नि को अपना एक ऐसा सच बताना होगा
- 15:24जहाँ। अग्नि ये मान पाए और समझ पाए की
- 15:27तुम सच हो तुम सच बोल रहे हो और तुम सच्चे हो तभी वो इस गांव का
- 15:32कुछ भला करेंगे और कहते थे की ये जो पर्व था अग्नि साक्षी पर्व इस
- 15:38पर्व में अग्नि जो होती है उनके गांव की रक्षा करती है और गांव का
- 15:42एक परिवार होता है क्नॉइस। जीस परिवार के हर पीढ़ी को ये जो
- 15:47क्रिया है वो करनी होती थी। इस बार शायद सत्यम के परिवार में
- 15:51से उसकी बारी थी, तो सत्यम अपना सबसे गहरा सच बताता है अग्नि को
- 15:58ये परखने के लिए की वो सच्चा था या नहीं और सत्यम कहने लगता है की
- 16:04हम जानते हैं की हम हमारे समुदाय के अलावा कही किसी और लड़के को
- 16:09देखना भी हमारे लिए पाप हैं। पर आज मुझे रेल में एक लड़की मिली
- 16:15थी वो और उसके बाते सुनकर लगा जैसे उससे बहुत पुराना नाता हैं।
- 16:20वो हमारे समुदाय के नहीं थे, इस गांव के नहीं थे पर कहीं ना कहीं
- 16:24हमारे दिल में उनके लिए कुछ कुछ ऐसी बातें जाग गई जो शायद नहीं
- 16:30जागनी चाहिए थी। कुछ ऐसे एहसास जाग गए और शायद अब
- 16:35हम उन्हें काबू में नहीं कर पा रहे हैं।
- 16:37हम जब से रेल से उतरे हैं, यही सोच रहे हैं कि हमने उनसे और
- 16:41थोड़ी देर बात क्यों नहीं की? उनमें कुछ था, कुछ ऐसा जो हमें
- 16:45बांध रहा था। उनसे कुछ ऐसा जो हमें रोक रहा था
- 16:50की हम उनके साथ थोड़ा वक्त और बिताए और वक्त वक्त नहीं था।
- 16:55हमें यहाँ आना पड़ा और अब कहीं ना कहीं हमारा दिल हम वहाँ उसी रेल
- 16:59में उसी लड़की के पास छोड़ आए। और यही हमारा सच है।
- 17:04इतना सुनते ही अग्नि भड़क जाती है और गांव के सभी लोग गुस्से में आ
- 17:08जाते हैं की सत्यम ने ये बहुत गलत किया।
- 17:11उसे किसी और लड़की की तरफ देखना तक नहीं था और वो किसी लड़की से
- 17:15प्यार कर बैठा था, भले ही उसका सच था पर अग्नि भड़क चुकी थी और कोई
- 17:20भी। कोई भी सत्यम के हेल्प नहीं कर
- 17:22रहा था। इतना देखते ही साक्षी ने सबको परे
- 17:25हटाकर और वो खुद कूद गई उस आग में और सत्यम को बचाने के लिए क्योंकि
- 17:30आग के धुएं से सत्यम गिर चुका था और हो चुका था उसको जगाने के लिए।
- 17:35वहाँ बार बार बार बार स्नेहा उसके गालों पर थप्पड़ मार रही थी।
- 17:39जागो सत्यम जागो तुम यहाँ कर क्या रहे हो?
- 17:42ये सपना मुझे क्यों आता है, क्या हो, क्या रहा है?
- 17:45प्लीज़ जागो ये लोग तुम्हारी हेल्प क्यों नहीं कर रहे है और
- 17:48थोड़ी देर में ही अपनी वापस शांत हो जाते है।
- 17:51ये सब देखने के बाद गांव के लोग समझ ही नहीं पाते है की पहली बात
- 17:55तो इस लड़की ने ये रेचुअल खराब कर दी और ये लड़की है कौन और ये
- 17:58हमारे गांव में कर क्या रही है? इस गांव में लोगों का आना मना था
- 18:03और ये बात सब जानते थे पर अब क्या फिर गांव का एक बहुत बूढ़ा आदमी
- 18:08आता है। उसे लेकर आते हैं लोग, क्योंकि
- 18:11किसी को समझ नहीं आ रहा था की जब आग भड़की और फिर अब आग शांत हो गई
- 18:14तो इसका इसका मतलब क्या था? तब वो जो होते हैं।
- 18:19जो भी जिसे वो लेके आते हैं वो कहते हैं कि ये लड़की कौन हैं?
- 18:23सब ने बताया कि हमें भी नहीं पता पर सत्यम दत्त तक जाग चुका था और
- 18:27कहता हैं कि ये वहीं है जिनसे हमें प्यार हो गया था।
- 18:31स्नेहा इतना कहने के बाद ही वो जो बुरे व्यक्ति आए थे, उन्होंने कहा
- 18:36स्नेहा। अपना हाथ दिखाओ।
- 18:39जब स्नेहा ने अपना हाथ दिखाया तो उसने कहा की ये हमारे ही समुदाय
- 18:45की एक लड़की है। इतना सुनते ही स्नेहा वास् लाइक
- 18:48नहीं मैं दिल्ली में पैदा हुई हूँ, दिल्ली में ही पली पड़ी हूँ
- 18:52और मैं मैं तो इस गांव को जानती तक नहीं हूँ।
- 18:55मैं तो यहाँ। मुझे नहीं पता मेरी किस्मत मुझे
- 18:58यहाँ लेकर आयी है, बट मैं नहीं जानती और रही बात इसकी ये ये मेरे
- 19:02पापा ने बचपन में बनवाया था। मेरे हाथ में इस इससे आप आपके
- 19:06गांव का कोई लेना देना नहीं है तो उस आदमी ने कहा कि एक बात बताओ
- 19:12बेटा तुम्हे सपना आ रहा था कोई इस मूर्ति का या इस आंख का?
- 19:17इतना सुनते ही स्नेहा ने कहा, आपको कैसे पता ये बात इसीलिए
- 19:22क्योंकि कभी कभी जो निय्यति होती है उसके खेलने के तरीके अलग होते
- 19:27हैं। हमें कुछ समझाने के तरीके अलग
- 19:30होते हैं। तुम उस परिवार की बेटी हो।
- 19:33जीस परिवार को यही काम करना था। और तुम्हारे पिता तुम्हें लेकर
- 19:37यहाँ से भाग गए, डर गए इन रिचुअल से और इसीलिए सत्यम के परिवार ने
- 19:44सत्यम को कहा। ये काम करने के लिए सत्यम का
- 19:47परिवार एक पीढ़ी तक ये काम कर रहा था, लेकिन जैसे ही तुम 25 साल की
- 19:51हुई। अग्नि साक्षी पर्व के लिए तुम
- 19:53तैयार थी और इसीलिए अग्नि तुम्हे वापस बुला रही थी।
- 19:57माँ तुम्हे वापस बुला रही थी इसीलिए तुम्हे वो सपने आ रहे थे
- 20:01और इसीलिए जब तुम्हारे आने पर अग्नि भड़की तो उसका मतलब ये नहीं
- 20:06था की सत्यम ने कुछ गलत कहा था। इसका मतलब सिर्फ इतना था।
- 20:10की। सत्यम ने जब उस तुम्हारे बारे में
- 20:13बताया तो अग्नि को समझ आ गया की तुम यही थे बस तुम्हे निकालने के
- 20:17लिए अग्नि ने ऐसा रौद्र रूप लिया। अग्नि को समझ आ गया था की तुम भी
- 20:21कही ना कही सत्यम को पसंद करती थी और सत्यम कोई गलत नहीं है।
- 20:25तुम हमारे ही समुदाय के हो। ये सुनते ही स्नेहा की पूरी
- 20:29दुनिया पलट गई थी। क्या मेरे बाबा यहाँ के नहीं हो
- 20:35ही नहीं सकता मेरे बाबा यहाँ क्यूँ आएँगे?
- 20:38तुमने स्मूर्ति को कभी पहले देखा है?
- 20:40नहीं जाओ उस मूर्ति के पास और ये जो चिन्ह है ना इसे उन माँ के पैर
- 20:45से चलाओ फिर देखना जैसे ही स्नेहा ने ये किया।
- 20:50स्नेहा को मानो उसके पापा की कुछ झलकिया दिखने लगी और शायद उस वक्त
- 20:55की जब वो उसे लेकर वहाँ से भागे थे।
- 20:57तब स्नेहा बहुत छोटी थी। स्नेहा को इस लिए सबके बारे में
- 21:00कुछ नहीं पता था। जो कहानियों उसके पापा ने उसे
- 21:02सुनायी वो उसने मान ली। ये अग्नि का जो चिन्ह था उसके हाथ
- 21:07पर वो भी उन्होंने झूट बोल दिया की उन्होंने बनवाया था।
- 21:10उन्होंने बनवाया नहीं था। ये पैदाइश ही उसके हाथ पर था और
- 21:14जैसे ही उसने माँ के चरणों से अपना हाथ लगाया तो उसे सब कुछ दिख
- 21:17गया। वो वो सब कुछ जो उसे जानने के लिए
- 21:20जरूरी था। इस पर्व को पूरा करने के लिए उसके
- 21:24बाद सत्यम वहाँ से हटा और स्नेहा ने वो पर्व पूरा किया।
- 21:28पूरे गांव में अब खुशियां वापस आ गई थी।
- 21:30स्नेहा को भी समझ आया, धीरे धीरे की।
- 21:32हाँ वो भी यहाँ, शायद उसे यहाँ उन माँ ने बुलाया था ना की मूर्ति ने
- 21:38उस आदमी का वहाँ आना ये सब कुछ नियति के तरीके थे।
- 21:42कैसे ना कैसे इसने यहाँ तक अपने बात पहुंचाने के?
- 21:45स्नेह इस पर्व को पूरा करने के बाद सत्यम के साथ वापस दिल्ली चली
- 21:49जाती है और गांव के लोगों को इतना समझ आता है कि शायद स्नेहा के
- 21:54पिता ने जो किया वो सिर्फ अपनी बेटी को एक बढ़िया और एक अच्छा
- 21:59भविष्य देने के लिए किया था क्योंकि यहाँ के लोग सिर्फ अपनी
- 22:02इसी पर्व के पीछे थे। वो कभी भी किसी को बाहर नहीं जाने
- 22:06देते थे पर स्नेहा के साथ साथ आप लोगों को इतना समझ आने लगा कि जब
- 22:10जिसे वापस आना होता है वो वापस आ जाता है।
- 22:14बस यही थी ये कहानी स्नेहा और सत्यम वापस खुश रहने लगे।
- 22:18उन दोनों का जो मकसद था वो पूरा करते।
- 22:21हर साल इस बर्फ़ को पूरा करने जाते और फिर वापस आ जाते 1 दिन।
- 22:25सत्यम ने कहा स्नेहा से स्नेहा जी एक बात बताइए आपको हमसे प्रेम हुआ
- 22:31था या आप पहले बस ऐसे ही थी? सत्यम मुझे नहीं पता।
- 22:37लोग कहते है की जो हमारा जिससे हमारी आत्मा जुड़ी होती है, उससे
- 22:42हमारी आत्मा जुड़ी होती है। हमें वो पता नहीं लगाना होता, वो
- 22:47पता लग जाता है। जब उस दिन तुम अचानक से सामने
- 22:50देखा तुमने तो समझ आया की कोई तो रिश्ता था, तुमसे क्या था, क्यों
- 22:55था ये नहीं पता था। शायद तुम मेरी जगह वो काम कर रहे
- 22:58थे इसी वजह से हमारे बीच एक रिश्ता बना मुझे नहीं पता पर
- 23:02तुम्हें देखने के बाद तुम्हें जाने का मन किया और लगा जैसे
- 23:06सदियों से जानती हूँ, मैं तुम्हें समझ नहीं आया पर हाँ कुछ तो था
- 23:12शायद कुछ बातें हमारी समझ से पर होती है पर होती हमारे लिए है।
- 23:17जो बात मैं नहीं समझ पाई, मेरा दिल नहीं समझ पाया।
- 23:20वो शायद कहीं ना कहीं नियति समझ गई और आखिर में हम दोनों एक साथ
- 23:25और मुझे कुछ नहीं चाहिए। तो बस ऐसी थी कहानी वेल सच बताऊँ
- 23:30ना यार दो तीन चीज़े बात करनी थी मुझे तुमसे ये कहानी ना बेसिक्ली
- 23:34मैंने सोंची थी। तो बड़ी मतलब मैं एक्साइटेड थी की
- 23:37इसको सुनाएंगे, इसको सुनाएंगे बट क्या हो रहा है ना?
- 23:39इसकी खिचड़ी हो गई। खिचड़ी कैसे हो गई?
- 23:41मैं 3 दिन से कोशिश कर रही थी इसे रिकॉर्ड करने की पर मैं कर ही
- 23:44नहीं पा रही थी तो अब मुझे ये था कि मुझे करनी तो है आई ऍम नॉट
- 23:47शुर। इसका नैरेशन कैसा गया?
- 23:49आई ऍम नॉट शुर की आज जो भी है बट इससे पहली वाली को बहुत
- 23:52अप्रीशीएशन मिला। उसके लिए थैंक यू वेरी मच एंड
- 23:55रैंकिंग्स बहुत नीचे जा रही है। आई डोन्ट इवन नो व्हाई और मुझसे
- 23:57तुम लोग आके पूछ रहे हो दीदी, रैंकिंग नीचे जा रही है भाई मुझे
- 24:00क्या पता मैं तो कहानियों डाल लूँ, बढ़िया भी डाल लूँ ऐसी बात
- 24:03नहीं है वो तुम्हारी तरफ से फॉल्ट है मेरा फॉल्ट नहीं है ना तो ऐसा
- 24:07थोड़ा डीमोटिवेशन तो हो गया वेल टु बी ऑनेस्ट, मतलब बहुत थोड़ा
- 24:10नहीं अक्चवली थोड़ा ज्यादा इसीलिए शायद मैं इसको ढंग से नरेट नहीं
- 24:13कर पाया। आई डोन्ट नो बट हाँ थोड़ा सा बुरा
- 24:15लग रहा है की भाई इफ आई ऍम डूइंग एव्रीथिंग राइट फ्रम मैं एंड तो
- 24:17ऐसा क्यों हो रहा है? बट ठीक है, हो रहा है तो हो रहा
- 24:20है और फिर होने से भी बेकार बात ये है की ये वापस क्यों नहीं हो
- 24:24रहा है? सही नाउ आई ऍम डूइंग एव्रीथिंग आई
- 24:26कैन बट ठीक है, जो भी है, ठीक है, उतार चढ़ाव चलते रहते है, बस उतार
- 24:30उतार नहीं चलनी चाहिए जो की मुझे लग रहा है मेरे चल रहा है।
- 24:32तो पेपर खत्म करो भाई वापस आओ भाई ऐसा मत करो ऐसा तो मतलब मत ही
- 24:37करो, दुख हो जाएगा मेरे को और मैं दुखी हो जाता हूँ तो मुझे खुद
- 24:40नहीं पता तो मैं कब क्या कर लू चल मिलती हूँ फिर किसी और कहानी में
- 24:45टेक किरण बाय बाय।