Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 Nov 25 - पाप कहाँ से जन्म लेता है? गहरी आध्यात्मिक व्याख्या! क्यों लोग पाप करते हैं? Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:26बाबा जी प्राण। पाप का।
- 0:39मोल क्या है? जड़ क्या है?
- 0:51कहाँ से उदगम होता है? पाप पाप का।
- 1:03मूल अज्ञान ज्ञान का नाम। और पाप का मूल है।
- 1:22सुखी। जीवेशणा में मैं जी हूँ।
- 1:26सुखी होकर जी हूँ यह बहुत। उदगम है पाप।
- 1:42मांसाहारी करना चाहिए नहीं करना चाहिए।
- 1:48प्रदीप नागोरी। एक बहुत बड़ा उद्देश्य था।
- 2:06बस एक देश और उसमें एक ही शहर। विशाल शहर का एक ही देश था।
- 2:24वहाँ पर सन्यासी ही सन्यासी रहते थे, उन्होंने अपना अलग गांव बसा
- 2:31लिया था। अपने आचरण, अपना धर्म, अपनी
- 2:44पुस्तकें, अपना ही ज्ञान। अपने।
- 2:50ही शिक्षक और अपने ही। विद्यार्थी बाहर।
- 2:54से किसी व्यक्ति को। बहाने न देते वक्त बीतता गया।
- 3:10शहर। के एक कोने में।
- 3:15उन्होंने एक बहुत लम्बा। जुड़ा कब्रिस्तान बना लिया था जो।
- 3:25कोई मर जाता उसे वहाँ पर लिटा देते हैं।
- 3:38और फिर बाहर आ जाते भीतर तक पोड़ियाँ जाती थी।
- 3:44सीढ़ियाँ। और ऊपर से ढका होता।
- 3:47था। एक ढक्कन लगाया हुआ था।
- 3:52कि कुछ आदमी जाते। इतना सा।
- 3:55रास्ता और उस डेड बॉडी? को वहाँ पटक के वापस आ जाते।
- 4:04कोई संस्कार नहीं, कोई क्रियाक्रम नहीं।
- 4:11कोई कर्म कांड नहीं। कोई उसकी।
- 4:14आत्मा की शांति के लिए कोई अनुष्ठान नहीं, बरसों बीत गए,
- 4:26सेलसला जारी रहा। 1 दिन।
- 4:40एक व्यक्ति मृग सभी विक्षुक थे। क्योंकि एक ही धर्म के।
- 4:47लोग। एक ही।
- 4:53धर्म को मानते थे, कोई तनाव न था, कोई जबरन न था।
- 4:59कोई। कटाक्ष न था।
- 5:02एक जैसे शिक्षक और एक जैसे विद्यार्थी सभी चीजें सुव्यवस्थित
- 5:09थीं। शांति थी।
- 5:14कोई किसी से लड़ता झगड़ता। नहीं था एकमुश्त वह अपना काम।
- 5:21करते और। किसी तरह जीवन व्यतीत करते।
- 5:26और सुखी से? 1 दिन।
- 5:33ऐसा आया कि वहाँ एक भिक्षुक मर गया।
- 5:45उन्होंने खोज पड़ताल की। वैद्य को बुलाया प्राण जमाने की
- 5:50बात है। उसने शरीर का परीक्षण किया।
- 5:58और मृत घोषित कर दिया कि यह व्यक्ति मर गया है।
- 6:09सभी ने उठाया कोई व्यवस्था। नहीं।
- 6:16कोई स्नान ध्यान नहीं। कोई करमकांत नहीं, बस मर गया तो
- 6:25इसको श्मशान घाट में फेंक दो। बहुत विशाल शमशान घाट।
- 6:33पृथ्वी के धरती के नीचे। बनाया हुआ है।
- 6:39ऊपर बड़ी सी तय थी। और ऊपर भारी सा पत्थर रखा था इतना
- 6:46भारी पत्थर की वह 1020। व्यक्तियों से हिलेब।
- 6:57उस देश। में सभी लोग शाकाहारी थे।
- 7:03कोई शराब न पीता था, कोई व्यसन न करता था।
- 7:10शुद्ध शाकाहारी लोग। तो फिर सभी ने उसे।
- 7:17उठाया। चलो अंतिम विदाई दे दे।
- 7:24और जाकर उस। शमशान के भीतर सीढ़ियाँ उतरे और
- 7:31वहाँ जाकर रख दिया। अंतिम प्रणाम किया और चले गए।
- 7:45जाते हुए ऊपर का ढक्कन। लगा गए।
- 8:00लेकिन दुर्भाग्य की बात कि वह व्यक्ति मरा नहीं।
- 8:08था अभी प्राण। शेष थे वैद्य से कोई।
- 8:14गलती हो गई थी। नड़ी।
- 8:15वृक्षण के। धीरे धीरे उसको होश आया।
- 8:26साँझ तक उसे होश आया तब तक रात ढलने को।
- 8:31थी। अंधेरा तो सब जगह था।
- 8:39लेकिन अब तो। बाहर भी अँधेरा हो गया।
- 8:42था। उसने।
- 8:45देखा कुछ नजर न आया। अंधेरे में उसने टटोला।
- 8:53प्रथम बार आया था। कुछ न दिखाओ।
- 9:00कुछ कंकाल, कुछ हड्डियों। सभी वो लोग जो मर चूके थे।
- 9:10कोई कुछ बोलता ना था लेकिन वो जिंदा।
- 9:16था। जैसे ही कोई मरता।
- 9:27वैसे ही लोग उसे। उठाते और वहाँ पटक देते हैं।
- 9:36मरने वाला आदमी धीरे धीरे गलता है।
- 9:46अगले दिन उसे भूख लगी। है।
- 9:58भूख लगी, उसने कहा क्या खाऊं? खाने को तो कुछ है नहीं बहुत।
- 10:04सच चिल्लाता शोर किया लेकिन। शोर ऐसा।
- 10:09कि बंद गुफा का शोर। बाहर ज़रा भी नहीं।
- 10:13जाता क्या करें जब। कोई व्यक्ति मरता थोड़ी देर।
- 10:25के लिए। उगाड़ देते।
- 10:26है। वह कुछ बदबू बाहर निकल जाती।
- 10:37और। ऑक्सीजन।
- 10:38वेतर प्रवेश कर जाती वहाँ। एक रिवाज था।
- 10:43कि जो व्यक्ति मरता मान्यता। थी।
- 10:48उसके पास। पानी का एक जार रख देते हैं।
- 10:55एक आध उसका। कपडा रख देते हैं।
- 10:56वस्त्र जिसके साथ उसका मोह। था।
- 11:08तो वह उठा शोर। मचाया, किसी ने ना सुना।
- 11:13आवाज बाहर जाती नहीं थी। कई दिन हो गए।
- 11:23भूख के मारे प्राण निकलने लगे। वहाँ पर पड़ा हुआ।
- 11:28थोड़ा सा पानी पी लेता था। लेकिन पानी से सुधार।
- 11:33शांत नहीं होती। प्यास हो जाती।
- 11:36है। भूख नहीं बढ़ते हैं।
- 11:44पेट में आग लगने लगी है। खाने को कुछ न था।
- 11:56मजबूरी में जब दिन हो जाता तो थोड़ी सी रोशनाई भी कहीं से आती
- 12:04है। तो मजबूरी में उसने किसी लाश।
- 12:12को खाना शुरू कर दिया। मरा हुआ मास जैसे।
- 12:21तैसे उसका पेट भरता गया। लाशें तो बहुत थी।
- 12:28सारा। देश जीतने लोग मरे एक।
- 12:31स्थान पर। कोई आज।
- 12:34मरा, कोई कल मरा था, कोई परसों, कोई नर्सों।
- 12:42लेकिन कभी कभी लोग दो दो। में ये नहीं ना मरते।
- 12:45मृत्यु का क्या पता है? मैं शमशान घाट में जाता।
- 12:53था। मेरी बायोग्राफी में आपने पढ़ा
- 12:57होगा। तो मैं वहाँ के मालिक से पूछता
- 13:04यहाँ कितने लोग? रो जाते हैं।
- 13:07दफन के लिए जलने के। लिए शमशान।
- 13:10था। मुझे बकायदा पंडित जी।
- 13:17कभी कभी तो 1012 लोग आ जाते हैं और कभी कभी दो।
- 13:22दो महीने कोई भी नहीं। आता।
- 13:25ये परमात्मा का खेल है। दो महीने तक।
- 13:36कोई व्यक्ति नहीं मरा। और जब कोई।
- 13:41मरेगा तो ढक्कन उठेगा, ढक्कन उठेगा तो कुछ लोग भीतर।
- 13:48आएँगे कोई नया व्यक्ति मर। गया है।
- 14:00कुछ न मिला तो उसने व्यक्ति मनुष्यों का मास कहना शुरू कर
- 14:04दिया। मरे हुए मनुष्यों का मास।
- 14:09अब किसी तरह पेट। की आग तो भिजानी है।
- 14:18फिर। 1 दिन वक्त बीतता गया।
- 14:231 दिन, कोई उस। शहर में मरा ढक्कन खुला।
- 14:35रोशनई। हुई वह व्यक्ति घूम रहा।
- 14:39था। तो उस मुर्दे।
- 14:42को ले के अंदर आए। देखा वह व्यक्ति घूम रहा।
- 14:45है। वो तो डर है।
- 14:50अरे, तुम? मैं मरा नहीं था, सारी गाथा उसने
- 14:56सुना दी कहीं। चूक हो गई वैद्य जी?
- 15:00से। तो फिर?
- 15:04फिर मैंने मूर्तों का मांस खाया। जल यहाँ रख जाता है जो मर जाता है
- 15:12उसके। सहानी तुम छोटा सा जार पानी का रख
- 15:15देते हो जैसे तैसे जीवन गुज़रा हो।
- 15:31ऐसे कहते हैं। जीव वैष्णु मनुष्य जीना चाहता।
- 15:42है। सुखी होके जीना चाहता है सुख
- 15:52जितना भी मिल जाये कम। लेकिन अगर सुख न मिले।
- 15:59तो जीना चाहता है। दुखी होकर जीना।
- 16:01चाहता। है।
- 16:06ज़रा सोचना तुम जी रहे हो। क्या तुम सुखी हो?
- 16:17आज तलक के मेरे इतिहास। में।
- 16:21एक व्यक्ति। भी ऐसा नहीं आया मेरे पास।
- 16:27खैर, अब। तो मैं कहीं जाता नहीं।
- 16:29बाहर लेकिन पहले तो खूब घुमे। उस घूमते हुए भी मुझे कोई व्यक्ति
- 16:37नहीं मिला। जो कहता मैं सूखी हूँ ज़िन्दगी
- 16:46में एक व्यक्ति मेला जो कहता। मुझे कोई दुख।
- 16:53नहीं, मैं सुखी, मेरा रोमा, रोमा सुखी रोम, रोम।
- 17:00पुलकित। है बड़ा खुश नसीब हूँ, बड़ा
- 17:06आनंदमय हूँ वो मस्ती। की फुहार?
- 17:09हर घड़ी हर पल बहती रहती है। और मैं उसका स्नान करता रहता हूँ,
- 17:20वह व्यक्ति था रत्ना। करे जो आग्रा के पास।
- 17:24रहता था ताजमहल से थोड़ा दूर लेकिन।
- 17:35तब तक मुझे ज्ञान न। हुआ उससे।
- 17:41पहले की बहुत सी बातें। उसके सर के ऊपर से निकल गईं।
- 17:47उसके पास बैठना अच्छा लगता। जैसे फूलों की सुगंध।
- 17:53हो वह मुस्कुराता रहता। उसके चेहरे पर एक लाभन नहीं।
- 17:57रहता। झूमता।
- 18:01रहता मस्ती में आँखें बंद और कभी कभी गाना शुरू कर देता।
- 18:09कोई भजन, कोई गीत। कभी नाचना शुरू कर देता।
- 18:14हूँ। मुझे कभी किसी व्यक्ति ने ये नहीं
- 18:23कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। और मैं सुखी हूँ।
- 18:35व्यक्ति जीना चाहता है, सुखी हो के जीना चाहता।
- 18:40है और किसी तरह सुखी हो। के न जी सके।
- 18:47तो वह दुखी हो के। जीना चाहता है।
- 18:52जीवंत व्यक्तियों की बातें। हैं क्या खाना?
- 18:55चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए मांस खाना चाहिए नहीं खाना।
- 19:02चाहिए यह जीवंत व्यक्तियों की। बकवास है।
- 19:18मैं। कहता हूँ अगर मजबूरी आन पड़े तो
- 19:25तुम मृत लोगों का मांस। भी खा जाओगे जीवन।
- 19:28रहने के लिए। बात जीवेशणा की।
- 19:31है। तुम चाट बनाते हो सुबह उठ के
- 19:37ब्रेकफास्ट। गुनगुना जल पीना।
- 19:42ब्रेकफास्ट के बाद फिर? 3 घंटे कुछ नहीं।
- 19:46फिर लंच, फिर। टी और फिर डिनर रात।
- 19:52को सोते हुए दूध का। ग्लास तुम्हारा अपना अपना।
- 19:57चाट है डाल के चाट। लेकिन मुझे बताना बुद्ध राजा थे
- 20:13राजघराने में जन्मे जो। मांगते मिल जाता सब गायब होगा।
- 20:22चले गए। फिर कहाँ चाट रह गए?
- 20:28शंकर जाते हैं द्वार द्वार कहाँ चाट काम करता है।
- 20:34जिसने जो दे। दिया।
- 20:37वह कर। लिया।
- 20:44अपनी कोई इच्छा नहीं कि। हमें क्या मिलना चाहिए नाश्ता
- 20:57में, लंच में, डिन्नर में? कैसा भोजन होना चाहिए, किन
- 21:05विटामिनों से युक्त होना चाहिए? थोड़ा लंबा चीज़ लोग है और कुछ भी
- 21:12न हो सकेगा और मेरी दूसरी बात को भी गौर फरमा लेना।
- 21:21कहीं गलती से तुम। अमर हो गए गलती शब्द प्रयोगकर्ता।
- 21:28कहीं गलती से कोई वैज्ञानिक। ने।
- 21:33ऐसा तरीका खोज लिया? कि तुम्हारा शरीर न मरा।
- 21:40योटी शूज़ की गजाबट है। इसका प्रभाव है थम गया और तुम अमर
- 21:54हो गए, तुम कभी न मरे तो मेरी बात।
- 22:00नोट। भी रखना, लिख भी लेना।
- 22:03मेरे ये। शब्द रिकॉर्ड में रहेंगे।
- 22:07इन्हें बजाने की चेष्टा। करना अगर कहीं ऐसा हो गया यू विल
- 22:16कमिट सुसाइड। तुम मर जाओगे।
- 22:24पक्का मर जाओगे। अभी तो तुम्हारी तमन्ना।
- 22:30है तुम्हारी तमन्ना तो बहुत होती है तुम्हारी तमन्नाएँ तो आसमान
- 22:38को। छूती।
- 22:39हैं। तुम्हारी तमन्नाएं तो भ्रमंड के।
- 22:43बाहर निकल जाती हैं। और अगर वो सच?
- 22:46हो जाएं जो कि। सच होती हैं किसी से?
- 22:55तुम्हारी तमन्ना की मैं विश्व। सुंदरी से शादी कर रहा हूँ तुम कर
- 22:59भी लेते हो, लेकिन अफ़सोस। तुम्हे आत्महत्या करनी पड़ती,
- 23:08क्या हुआ तुम्हारी तमन्ना? थी।
- 23:14ब्राह्मण ने पूरी कर दी, फिर तुम क्यों मर गए?
- 23:28तुम्हारी अगर सभी तमन्नाएँ या किस्म पूरी।
- 23:30हो जाएं तो तुम्हें नहीं। पता कि तुम मर जाओगे।
- 23:37अभी तो तुम तमन्नाएँ करना जानते हो और अगर ईश्वर ऐसा।
- 23:45विधान बना दे। कि तुम मर न सको चाहते हो, अभी?
- 23:50तो बड़ी लाचारी हो जाएगी। फिर तुम परमात्मा से।
- 23:57प्रार्थना करोगे आज से, बिल्कुल। उलटी है ये प्रभु मृत्यु।
- 24:09मैंने सुना है एक संत। स्वर्ग की कामना करता।
- 24:13था। स्वर्ग भेज दिया गया।
- 24:18तुम जैसी कामना करते हो। वो तुम्हें मिल जाया करता।
- 24:22है। इस भूल चोंक में मत रहना परिश्रम
- 24:26कर के मिलेगा। कर।
- 24:28के दिखाएंगे। ऐसा पागलपन करने की कोई आवश्यकता
- 24:36नहीं बिरारट तुम्हारी प्रत्येक इच्छा को पूरी।
- 24:39करता है उसके घर कोई? कमी नहीं।
- 24:42बस इच्छाएं समझ के करना तो उस संत ने।
- 24:53नए सर एक इच्छा की। कि मुझे सर्ग मिल जाए।
- 24:59और कितने लोग सर्ग नहीं। चाहते?
- 25:05और कहते हैं कि। वे मर के स्वर्ग में चले।
- 25:15जो मांगता मिल जाता कल्पवृक्ष है वहाँ।
- 25:23इन्द्र का सिंहासन है वहाँ। रम्भा, मेनका, उर्वशी और न।
- 25:30जाने कितनी अफसर आए हैं वहाँ। और ये तो शास्त्र पुरुष।
- 25:39ने लिखे इसलिए तुम्हें स्वर्ग में इन्द्र के अतिरिक्त।
- 25:46और कोई पुरुष नहीं मिलेगा। बस तुम्हारी एक।
- 25:48ऑप्शन है सिर्फ इन्द्र। स्त्रियों के लिए एक।
- 25:52ऑप्शन है सिर्फ इन्द्र और अगर कहीं से शास्त्र।
- 25:59स्त्रियों ने निर्मित किए होते। फिर शास्त्र अलग होते।
- 26:05हैं। वो शास्त्र अलग होते हैं।
- 26:13फिर स्त्रियाँ लिखती हमें कृष्ण। चाहते हैं।
- 26:18स्त्रियाँ लिखती हमें नकल चाहिए। स्त्रियाँ लिखती हैं हमें महावीर।
- 26:24चाहिए सुन्दर तन पुरुष लेकिन ये तो पुरुषों के हाथों में।
- 26:32और पुरुष। तो रम्भा मैंनेका कुरवाशी।
- 26:36इन्हीं की कामना। वर्ष बीतते गए शिलाओं के ऊपर।
- 26:46बैठा जो मांगता मिल जाता। बहुत बड़ा सुख है।
- 26:55तुम्हें पता है ना तो? फानों से टकराने का जितना।
- 27:01सुख है। जो मांगोगे वही मिल जाएगा ये
- 27:06मूर्ख बहुत मैं देखता हूँ इन्हें पता।
- 27:11नहीं है। खुद भी पता नहीं है।
- 27:13इनकी खुद की आकांक्षा है कि मैं जो।
- 27:16मांगू, वो मिल जाए भ्रमण। पूरी कर दे।
- 27:22मैं इनको मूर्ख किस लिए कहता हूँ। के इन्हें पता नहीं।
- 27:27जो तुम मांगते हो अगर तुम्हें वो ततक क्षण मिल जाये जो के।
- 27:31मिलता है तुम्हें ज़िन्दगी निराश नजर आयेगी।
- 27:40तुम जल्दी। ही हाथों को खाली हाथों।
- 27:43को जाढ़ोगे। और सोचोगे अब क्या मांगू?
- 27:51सुख सुख और सिर्फ सुख। दुख नहीं होगा।
- 27:58तुम सुखी जीवन चाहते हो? परमात्मा ने तुम्हे सुखी जीवन।
- 28:01दे दिया। जब बैठा रहता अधूरी इच्छाएं पूरी
- 28:08की मैं गुलाब। जामुन खाना चाहता हूँ।
- 28:15मैं चम चम खाना। चाहता हूँ।
- 28:18मैं वो फल खाना। चाहता हूँ मैं वो पीना?
- 28:21चाहता हूँ मैं शराब पीना चाहता हूँ?
- 28:26इसीलिए स्वर्ग की शराब सुराग। रहती है सोम पान।
- 28:37जिससे सुर पीते हैं। देवता पीते हैं, इस्लाम में
- 28:47स्वर्ग में शराब के झरने बैठे हैं, बस सिर्फ़ तुम्हारी कल्पना।
- 28:56और इतनी सी कल्पना। मैं कभी कभी हैरान हो जाता हूँ
- 29:02मनुष्य की इतनी सी। कल्पना है इतनी सी इच्छाएं मनुष्य
- 29:05की? बहुत।
- 29:08थोड़ी है, बहुत गम है। यह तो एक कल्प वृक्ष ही पूरी कर
- 29:12देगा। और बैठो माला, फेरते रहो राधे
- 29:19राधे करते रहो। लेकिन मेरी अगली बात।
- 29:30को ध्यान से सुन लेना। 1 दिन ऐसा आएगा।
- 29:38तुम रात को 12:00 बजे आंख बचा के भागोगे स्वर्ग से।
- 29:44और बिल्कुल साँझी कंद है। नरक की वहाँ प्रवेश कर जाओ, पक्का
- 29:53हँसना। जिससे।
- 29:58जीवन में सुख ही सुख है। दुख का तूफान नहीं।
- 30:10उसमें मज़ा भी नहीं होता, परमात्मा मूर्ख नहीं।
- 30:18तुम एक दर्रा नहीं बना। सकते उसने।
- 30:22पृथ्वी जैसे एस्ट्रॉयड आवारा। घूमने लगा दिया तुम्हारे स्पेस।
- 30:29में। और तुम संसार पे काबिज।
- 30:35होना चाहते हो और। उसने न जाने कितने संसार।
- 30:39व्यर्थ में घूमते हुए बना। दिया ये तमन्ना तुम्हारी क्या
- 30:47होगा? सब कुछ पूरा हो जाएगा और होता है।
- 30:55क्यों बैठ जाते हैं ये? संत।
- 30:57जो ऋषि हो जाता है क्यों वो किसी? भ्रम में नहीं रहता।
- 31:09जिसे तुम त्याग कहते हो। वो त्याग नहीं होता।
- 31:14इतनी भरपूर मात्रा में भोग। लिया है उसे त्याग कहना।
- 31:20उचित नहीं होगा मुँह मुड़। गया है।
- 31:27भोगने से इसे तृप्ति कह। बस नाक मुड़ गया और और नहीं बस
- 31:43और। नहीं, तुम कहते हो गम के ब्याले
- 31:47और संत कहते हैं सुख के। प्याले और नहीं।
- 31:54तुम गमों से घबराते हो। संत।
- 31:59सुख से घबराता। है।
- 32:00नहीं चाहिए कितने साल? और अगर तुम्हें।
- 32:09कह दिया जाए अब बस। तुम्हें यहीं रहना है।
- 32:15तो तुम कान पकड़ लोगे, तुम कहोगे मेरे बाप मुझे निकाल लेना।
- 32:25वो कहेगा कल। जो मांगोगे मैं जा।
- 32:31जहाँ मेनका है। उर्वशी है कितनी देर भागोगे?
- 32:40वहाँ कृष्ण भी क्यों ना हुए? कितनी देर भागोगे?
- 32:52आखिर भोग थका देते हैं हाथों को मैं अपने अनुभव।
- 33:01से कहता हूँ और। भी जनदगानियों के अनुभव हैं मेरे
- 33:06साथ। कि तुम रात को आंधी रात को स्वर्ग
- 33:15को छोड़कर, बिल्कुल। सांझी कंद है दीवार उसमें धीरे से
- 33:22प्रवेश। कर जाओ वो जीवन ही क्या जिसमें
- 33:33दुख की गहराई। न हो तुम देख लेना।
- 33:37ईश्वर करे तुम्हारे जीवन में। ऐसी व्यवस्था आ जाए सुख ही सुख।
- 33:44हो? मेरे जीवन में ऐसा।
- 33:47क्षण आया। मैं तुम्हें ईमानदारी से।
- 33:50कहता हूँ तो मुझे। ख्याल आया इस बात का।
- 33:59जब मैंने परमात्मा की तरफ हाथ उठाया और परमात्मा से मैंने दुख
- 34:08में। कहा।
- 34:11मुझे दुख देते परमात्मा। तुम कहते हो।
- 34:21गम की दुनिया से दिल। भर गया।
- 34:24मैंने कहा सुख। की दुनिया से।
- 34:26दिल भर। गया ढूंढ ले अब कोई घर गया जहाँ
- 34:33दुख मिल। जाए तुम्हारी परिभाषाएं और हैं।
- 34:41क्योंकि हर। तरफ कमियां ही कमियां मेरी।
- 34:45परिभाषाएं कुछ और थी तुम। कहते हो।
- 34:49कुंती ने दुख मांगा, लेकिन ये नहीं देखते कि कब?
- 34:54मांगा। पता।
- 34:59है। कुंती ने।
- 35:03दुख तब मांगा जब वो। परम सुखी हो गई और।
- 35:06सुख से ऊप गई सब। इच्छाएं पूरी हो गई।
- 35:09सब दुश्मन मारे गए उसके धृतराष्ट्र के शो पुत्र।
- 35:15गांधारी के शोपुत्र मर गए। और उसके सभी पुत्र जीवत रहे।
- 35:22और ऐसा व्यक्ति दुख ही। मांगेगा भाई तुम्हे ये गुप्त
- 35:31सूत्र? समझ नहीं आएगा क्यों तुम्हारी
- 35:34ज़िन्दगी के ऊपर से ये लंगर? यह।
- 35:40वक्त तुम्हारे ऊपर कभी आया? नहीं के सुख ही सुख।
- 35:44हो? दुख का एक जर्रा।
- 35:47भी न हो। और जीस जीवन में सुख?
- 35:51ही। सुख होता है मैं कोई।
- 35:53मोटिवेशन स्पे कर ले। ईमानदारी?
- 35:58से कहता हूँ मैं अपना अनुभव मुझे तुमसे कुछ लेना।
- 36:03देना। है मैं अपने हाल में जैसा हूँ
- 36:10मज़े में हूँ। मुझे तुमसे।
- 36:20कुछ भी ना चाहिए मुझे। मेरे हाल पे छोड़ दो।
- 36:34मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो मुझे तुमसे कुछ भी ना चाहिए अगर।
- 36:50तुम्हें मेरा अनुभव ठीक नहीं। लगता?
- 36:54तो चले जाओ यहाँ। से।
- 36:58ये लोग कहते हैं। बाबा?
- 37:00आप बड़े आराम से कह। देते मत सुना करो मुझे।
- 37:05हमने आज तक ऐसा व्यक्ति नहीं। देखा बुलाते तो देखें।
- 37:12भगाते नहीं देते। मेरा दिल अगर कोई दिल।
- 37:21नहीं। उसे मेरे सामने तोड़ दो।
- 37:32उसे। मेरे सामने तो और दो।
- 37:40मुझे तुमसे कुछ भी ना। चाहिए।
- 37:48और तुम तो कहोगे? हमें तो दुनिया से बहुत खुश
- 37:50चाहिए। हमें एकठ चाहिए हमें।
- 37:56फॉलोवर। करोड़ों की संख्या में।
- 37:59चाहिए। हमें संख्या बल चाहिए।
- 38:01हमें धन बल चाहिए हमें। सुख बल चाहिए।
- 38:06हमें बल ही बल चाहिए। हुआ क्या है?
- 38:22क्योंकि तुम सुख की इंतेहा को पार नहीं किया हो।
- 38:30कभी वो दिन आए। जब तुम सुख की सीमा को लांघ जाओ
- 38:38फिर तुम्हारी ये दशा हो जाएगी। जब कुंती की दशा हो।
- 38:42गई तुम उसे मुर्ख समझोगे। तुम इसके।
- 38:46अर्थ के अनर्थ कर। लेते हो लेकिन तुम्हें पता नहीं।
- 38:50जो व्यक्ति। परम सुख में होता है।
- 38:53वह रातों रात अर्ध रात्रि को साथ सटे हुए।
- 38:58नरक के द्वारों के भीतर। प्रवेश कर जाता है।
- 39:05यह फॉर्मूला तुम्हारे लिए। अस्वीकार्य होगा।
- 39:10तुम कहो ऐसा। नहीं होता मत मानो लेकिन मित्र।
- 39:21ऐसा होता है परम सुख। की सीमाओं को लंडकर जैसे।
- 39:33ही तुम निकलोगे। तुम दुख मांगना शुरू कर दोगे।
- 39:38यह अजीब सा सूत्र है। जो तुम्हें किसी ने कभी नहीं
- 39:41दिया। वह व्यक्ति जो बहस करता।
- 39:51था। मांसाहारी करना चाहिए नहीं करना
- 39:54चाहिए जब नौबत आई। भूख की तो मुर्दा के मांस खाने
- 40:00शुरू कर। दी।
- 40:03ये तुम्हारी। खोपड़ी चलती ही वहाँ है जहाँ सारा
- 40:09चार्ट होता। है।
- 40:11बुध के लिए कोई चार्ट। नहीं होता।
- 40:16बुध नहीं कहते मैंने। ब्रेकफास्ट में क्या लेना है, लंच
- 40:19में क्या ठीक है? उसकी तमन्ना कुछ और है।
- 40:25उसकी तमन्ना तुम्हारी तमन्नाओं। से ऊपर हो गई।
- 40:29उसने वो भोग लिया। जो तुम भोगना चाहते हो।
- 40:33उसने वो तख्तों, ताश। लात मार दी।
- 40:37जिनको तुम पाने के लिए प्रश्नशील हो।
- 40:47हाँ मैं भगाता हूँ, तुम कहोगे हमने संत ऐसे तो देखे जो।
- 40:55बुलाती? हैं।
- 40:58भगाते नहीं देखे क्योंकि मुझे बल नहीं चाहिए।
- 41:10मैं खुद बाल हूँ। सर्वश्रेष्ठ बाल हूँ मैं मुझे और
- 41:19बाल की कोई। आवश्यकता नहीं मुझे मेरे हाल।
- 41:23पे छोड़ दो मुझसे भली कौन? ओमनी इम्पोर्टेन्ट से भले ही कोई
- 41:32होता। है क्या?
- 41:37लेकिन तुम्हारी तमन्नाए गलत है। मेरे पास रोज़ कमेंट आते है बाबा
- 41:44तुम्हारे घर क्या कमी? ऐसा कर दो न मेरी।
- 41:56बाई टांगड़ी दुख रही है। इसको ठीक कर दो।
- 42:02मैंने कहा किसी कारण? से ही दुखती होगी।
- 42:06तुमने कुछ ऐसा किया होगा बाई टांगड़ी दुख रही है।
- 42:14तो ये कुछ करना छोड़। दो किस किसकी टांग किस किस का
- 42:21हाथ, किस किस का सिर ठीक? करूँगा।
- 42:26मैं एक अकेला और तुम। आठ हर बात में।
- 42:31और फिर जी वचन तो। वो भी तो मैं हूँ।
- 42:34वो भी मेरे हैं। अच्छा?
- 42:42ये ना होगा। कि तुम पाप।
- 42:44करना छोड़ दो। पाप का फल दुख होता।
- 42:46है। लेकिन तुम पाप करना नहीं।
- 42:51छोड़ो। हम तो ऐसा ही करेंगे।
- 42:56बाबा, तुम ठीक कर? दो।
- 42:59रोज़ कमेंट आते हैं और यहाँ तक कमेंट आते हैं मुझे गाली निकाल।
- 43:03दो। कल बड़ा मजेदार।
- 43:08कमेंट है। कब से पका रही?
- 43:12हूँ मुझे ठीक कर दो। मेरे ही पेट में दर्द है।
- 43:18मैंने कहा तू कुछ। गलत खा लिया होगा नहीं, नहीं, कुछ
- 43:22नहीं गलत। कर।
- 43:25तो फिर कोई कर मैसेज? उगड़ गए होंगे प्रारब्ध?
- 43:32तो वही तो ठीक। करने को कह रही।
- 43:35हूँ तो फिर तुमने पाप। किया है।
- 43:42क्या पाप किया तुमने? ठीक है, मैं करूँ?
- 43:48कौनसी किताब में लिखूं? तो मुझे लास्ट कमेंट आया।
- 43:56मतलब मैं तुझे ब्लॉक करती। हूँ अनसबस्क्राइब पर तुम्हारी का।
- 44:01चटनी लगा के खाना। है।
- 44:10इन्होंने गुरु बनाया। है कुछ और काम।
- 44:15देखूं कैसे, कैसे मांगते? फिर तुम्हारी क्या?
- 44:19चटनी बना के खानी है। लो मैंने हमें सब्सक्राइब कर
- 44:24दिया। तुम दिखाओ कुछ और।
- 44:30करते हो मांगते कुछ और। हो?
- 44:38आटे पांव पकड़ते हो। मेरा दरबार लगा था साईं।
- 44:57या अरदास करनी शुरू कर दे और अरदास में इतना कुछ।
- 45:02कह दिया। माडे।
- 45:05कम्मा तो बचाई माडे सोब तो। बचाई देखी कित्ते?
- 45:09दूर ना जाई मेनू छाड़। के ना जाई मेनू ए भी कराइ।
- 45:14मेनू ओह भी करन। हाँ बोलता रहा भाई वो तो 10 मिनट
- 45:20में बोलता रहा, मेरा भगत और दरबार लड़का था।
- 45:28खूब। बोला बहुत साईं पे साड़ी।
- 45:33फरियाद दे रहता है। और फरियाद के नाम पर इतना।
- 45:40कुछ मांग लिया। मेरे तो सर में दर्द होने लगा,
- 45:45मैंने कहा, रुको। रुको रुक गया।
- 45:55मैंने कहा साईं हूँ। के तेरे बाप का गोला।
- 46:03तुम क्यों हँस रहे हो? साईं हूँ।
- 46:09के तेरे बाप का गोला। तुम इसे अरदास कहते हो।
- 46:22बहुत से प्रश्न आ जाते हैं मेरे। पास बाबा फिर अरदास।
- 46:26ना करें तो और मांगेंगे। कैसे?
- 46:30मुझे आ जाते। हैं।
- 46:31फिर हम किसके आगे? फरियाद करें किसके आगे रोना?
- 46:35रोएं, मैंने कहा तुम पाप करना बंद करो।
- 46:40अपने आगे रोना रो। मेरे आगे क्यों रोते हो?
- 46:45तो फिर गुरु होता। किस लिए है?
- 46:47मैंने कहा तुमने खरीद। लिया है क्या?
- 46:51गुरु होता है तुम्हें तुम्हारा आपा?
- 46:53दिखाने के लिए। और जब एक बार आपा दिख जाए तो सारे
- 47:01दर्द यक्। सा दूर हो जाएंगे।
- 47:06न सिर दर्द रहेगा, न पांव दर्द रहेगा, न पेट दर्द रहेगा, न कान
- 47:11दर्द रहेगा, न हृदय में दर्द होगा, न तकलीफ होगी न आग लगेंगी।
- 47:17न चिन्ताओं की अग्नि जलाएगी। मैं वो सह हूँ।
- 47:22जो तुम्हारे दुखों का यक। साहरण कर लेता हूँ।
- 47:27अलग अलग तुम्हारे दुखों को। नहीं।
- 47:29करता तुम मुझे इसीलिए। गुरु मत बना लेना।
- 47:36कि तुम्हारी कैंसर है ठीक हो जाएगा।
- 47:39तुम्हारी कैंसर नहीं। है यह जान लेना।
- 47:45फार्मूला मेरा। उल्टा है, मानता हूँ।
- 47:49लेकिन एक दम सटीक। है उल्टा है तुम्हारी इच्छाएं।
- 47:56तुम्हारी मान्यताओं तुम्हारी तृष्णाओं तुम्हारी वासनाओं से उलट
- 48:01है। लेकिन सटीक।
- 48:05है। तुम आज कहते हो।
- 48:09पांव में दर्द हो। रहा है।
- 48:11कल कहोगे। फिर यह मन का हिल।
- 48:13गया थोड़ा यह ठीक। कर दो, यह सर्वाइकल है, यह चक्कर
- 48:20सा आ रहा है। यह भी ठीक कर दो।
- 48:24बाबा तो मैं सारा। कुछ भी ठीक कर देता हूँ।
- 48:30थोड़ा आओ दो सब ठीक कर दूंगा। और अलग अलग से नहीं।
- 48:38ठीक करूँगा यह बात ध्यान। और उससे परिवार।
- 48:45मेरे पास आ जाते मेरे। बेटे को गाय का बना दो।
- 48:51मैंने कहा ठीक है, बना दूंगा। और पता चलता है।
- 48:55अगले दिन पकड़े गए। छोटे बच्चों से रेप करते पकड़े
- 49:00गए। लगना चाहिए था पॉक्स को।
- 49:03एक्ट? बाहर फिरते हैं ये लोग और मुझे
- 49:13दोष देते हैं। मेरे बेटे को गायक।
- 49:16नहीं बनाया। मैंने कहा जब ये बदमाश बनना।
- 49:19चाहता है तो मैं गाय क्यों मरूँ? दो दो चीजें थोड़ी।
- 49:26होती हैं। शक्ति एक तरफ लगेंगी या गायकी?
- 49:31में लगेंगी या बदमाशी में? लगेंगी तुम रोज़।
- 49:36पुलिस में 7080। 1000 दे आते हो?
- 49:40या तो वो लगा दो या गाने की अडटाइज़्मन्ट में लगा दो पैसा तो
- 49:47एक तरफ़ ही। लगेगा और वो भी बड़ा होशियार आदमी
- 49:54था घर। वालों से पैसा नहीं लेता।
- 49:57था। इधर उधर से।
- 50:00मांग ले बेचारा हमारा एडिटर। रोहित भी रगड़ा गया।
- 50:08बस इससे। ज्यादा आपको क्या बताऊँ जब।
- 50:15तुम इतने। सुखी हो जाओगे।
- 50:21जब तुम इतने सुखी हो जाओगे तुमने कभी देखा दीपावली के दम तुम
- 50:30कितना? मीठा खा लेते हो, कितना मीठा खा
- 50:35लेते हो? पेट भी भर लेते हो।
- 50:41मन। भी भर जाता है।
- 50:43अलका। जाती है।
- 50:45सांज कोई कहे। कि बस एक ही है।
- 50:48जाम और खा। लो।
- 50:50तुम कहोगे नहीं नहीं अब। तो वोमिटिंग हो जाएगा नहीं खाना
- 50:55है हमने। बड़े समझदार थे हमारे सनातन।
- 50:59के तो अगले दिन खूब नमक, मिर्च सब अन्नकूट मूली।
- 51:06उसमें गाजर, उसमें बैंगन, उसमें हरी मिर्च, उसमें काली मिर्च,
- 51:12उसमें लाल। मिर्च उसमें सब कुछ उसमें।
- 51:14होता है। पालक उसमें धनिया, उसमें सारा
- 51:17कुछु से ही। अन्नकूट कहते हैं।
- 51:22और कढ़ी के बीच में चावल। और पकौड़ा।
- 51:27मीठा तो बहुत खाया, अगले दिन खूब नमक, मिर्च, तला हुआ सब।
- 51:32खा लेते हैं। बैलेंस हो जाता है।
- 51:38समझदारी के लक्षण। तुम दुखी हो।
- 51:45हमारे ऋषियों ने बखूबी। जान लिया, ठीक?
- 51:50बनाई, गलत बनाई कहानियों बना। के तुम्हें जहर दे दिया।
- 51:57क्योंकि वो जानते हैं कि तुम दुखी हो।
- 52:02दुखी हो तो तुम। नाच लोगे, रंग बिखेर लोगे?
- 52:07थोड़ा खुराफात कर दोगे और तुम नाच कूद कर?
- 52:17जश्न मना लोगे इसको जश्न कहते हो? तो ऋषि ने त्यौहार बना।
- 52:25दिये। ऋषि ने प्रथम कोशिश की।
- 52:28कि तुम जान लो। तुम हो कौन?
- 52:32तुम वो हो जैसे दुख नहीं। होता तुम वो हो जो।
- 52:36कटता नहीं, जो गलता नहीं, जो जलता नहीं, जो।
- 52:39सूखता नहीं, जो भीगता नहीं। लेकिन तुम नहीं समझे।
- 52:43तो फिर उन्होंने दूसरा उपाय कर। लिया।
- 52:48चलो थोड़े से दिनों के बाद। मुझे लोग कहने लगे तुम्हारे
- 52:54हिंदुस्तान में छुट्टियाँ बहुत। होती हैं।
- 52:56क्या होता है? मैंने कहा हिंदुस्तान के लोग दुखी
- 52:59बहुत। हैं।
- 53:05और इस दुख को। पता न।
- 53:07लगे भूल जाओ थोड़े। दुख खत्म नहीं होता है।
- 53:14नागिन डांस। करने से कभी दुख दूर।
- 53:17हुआ है और बढ़ जाता। है।
- 53:24बस तुम किसी न किसी। तरह हर चीज़ को।
- 53:26जश्न बना लेना चाहते हो? और।
- 53:29देखो जीस घर में जश्न। ज्यादा मनते हैं।
- 53:35गुस्सा मत करना मेरे बात। को।
- 53:39और। कर भी लोगे तो मेरा।
- 53:40क्या बिगड़ दोगे वो घर? उतना ही ज्यादा दुखी।
- 53:45होता है। आज यहाँ हवन हो रहा है आज यज्ञ हो
- 53:55रहा है, आज ये है आज वो। है।
- 54:01आज सप्तमी है आज अष्टमी। है।
- 54:03आज नवमी है। रोज़ जो तिहार होते।
- 54:05हैं तुम्हारे क्योंकि तुम रोज़ दुखी होते हो।
- 54:15और तुम दुख का बेसिक कारण रिमूव करने में।
- 54:21कोई शक्ति नहीं झोंकता है। तुम शक्ति झोंकते हो, दुख?
- 54:27के विपरीत। जश्न मनाने गए।
- 54:32वह नकली नकली। चलेगा यह पृष्ठ के फूल।
- 54:35है। दुर्गंध आती है तो तुम्हें।
- 54:41बाग। खिलाने होंगे जो पक्के पक्के।
- 54:45से तुम्हें सुगंध दे सके। बगीचे बनाने होंगे।
- 54:53तुम तो प्लास्टिक। के फूल ले।
- 54:54आते हो उनमें न तो। खुशबू होती है, खुशबू भी तुम्हारी
- 55:00होती है। फूल भी तुम्हारे होते हैं।
- 55:05बस तुम्हारा जीवन ऐसा ही। जीवन है।
- 55:10नकली नकली। साकीत्रम फूल भी कीमती कृत्रम।
- 55:14और। इत्र भी कृत्रम सुख।
- 55:20वो है जो भीतर से पैदा होता। है अभी।
- 55:24तो तुम सुखी ही नहीं हुए? दुख?
- 55:27मांगोगे कैसे कभी सोचा। आपने।
- 55:34अभी पड़ाव बड़ा रंबा। है।
- 55:38अभी सुखी ही नहीं हुए। दुख मांगने का जिक्र जुटा।
- 55:44कैसे? पाओगे?
- 55:49दुःख मांगने का जिग्रह प्राणों से पूरी खुशहाल।
- 55:56कुंती कर सकती है कुंती की सब इच्छाएं पूरी?
- 56:00हैं। वह कुंती जो दर दर।
- 56:04भौंकती फिरती थी। वह कुंती जिसने।
- 56:09ना जाने के कितने दुख? देखे हैं।
- 56:12हर तरफ से दुखी थी। और ईश्वर ने उसके सब दुख हरण।
- 56:19कर लिया है। दो माताएं थी कृष्ण।
- 56:23की एक माता। ने शराब दे दिया।
- 56:29माँ गंधारी मैं चला हूँ द्वारिका आशीर्वाद देता।
- 56:38हूँ क्या? नो सपर्श किये हाथ।
- 56:39जोड़ के खड़ा हो। वासुदेव।
- 56:45मुझे एक बात का जवाब। देता।
- 56:47हूँ। पूछो मत अगर तुम चाहते।
- 56:53तो ये युद्ध रुक जाता। या नहीं रुकता अब क्वेश्चन?
- 56:59कैसे कर सकते हैं? कृष्ण को पता है अगर मैं चाहता तो
- 57:08युद्ध। कैसे न रुकता देखिए।
- 57:12यहाँ एक। बात और समझ लेना।
- 57:14ये इन बातों को टिक। मार कर दिया करो।
- 57:16सर कर दे दिया करो। उस तल पर पहुंचा।
- 57:21हुआ व्यक्ति परमात्मा हो जाता। है वह।
- 57:28कुछ भी चाहेगा पूरा हो। जाएगा तुम्हारे लिए बड़ी मुश्किल
- 57:32बात है। तुम तो अगर कोई झूठ भी निकले।
- 57:38मुझे लोग मजाक किया। करते हैं आके।
- 57:41जो? लोगों को मूर्ख बनाती हैं।
- 57:43बाबा मैंने आज एक पोस्ट। डालते हैं वहाँ।
- 57:48पर एक वृक्ष होता है वहाँ हाथ लगाकर आ जाओ इस नक्षत्र में पता
- 57:53है। आज ये नक्षत्र।
- 57:54है और तुम घर। आते ही अरबपति हो जाओगे।
- 58:02मैंने कहा पुत्र लोग द्वारा पति नहीं तुम्हे नर के।
- 58:07जरूर मिल जाएगा लोगों को भटकाने का।
- 58:12वो कैसे बाबा? लोगों को गुमराह करके तालियां।
- 58:17बजाना। खुश हो ना?
- 58:21यह बाप? है बहुत।
- 58:25से लोग मुझे। कह देते हैं हम तो भगवान का नाम
- 58:27प्रचारित करते हैं। मैंने कहा ये भी।
- 58:30बाप है, ये कैसे बाप है, भड़क जाते हैं।
- 58:35ये जो तुम जानते हैं। उसका प्रचार करना पाप है।
- 58:39बस ये परिभाषा समझ लो। जो तुम जानते नहीं जो तुमने अपनी
- 58:47आँखों से देखा नहीं उसका प्रचार। करना पाप है।
- 58:54अब एक्सप्लनेशन तुम करते। रहना हमने तो बोल दिया।
- 59:02जिसने जाना मन हो जाता है। वह बोलता नहीं।
- 59:13उसे बलवाना पड़ता है। तुम बोलते हो निहित कारण कुछ और।
- 59:21होगा। इसी से समझ ले न।
- 59:25सारी बात तुम जीना चाहते हो? और अगर सुखी न जी।
- 59:35पाओ। तो दुखी हो के ही।
- 59:37जी लें कोई? बात नहीं।
- 59:41और दुनिया तुम्हारे पांव। छुए आके तो इतने।
- 59:46बुद्धू हो तुम्हें पता नहीं ये पांव आज है।
- 59:50कल नहीं रहेंगे बस ऐसे। ही मूर्ख आज हमारी संस्कृति।
- 59:57को तबाह करने पर तुले? न जिनको यह।
- 1:00:00पता कि राधा का नाम कैसे उतार जाएगा, तुम्हें खुद अभी तरे नहीं।
- 1:00:13तुमको कैसे दर्जन? यही पाप कहता हूँ, मैं बहुत बोलता
- 1:00:20हूँ क्योंकि मैं चुप हूँ मैं। खामोश हो गया।
- 1:00:29जो व्यक्ति उस स्थल पर पहुंचता है।
- 1:00:32भाई चुप हो जाता है। फिर उसको बुलवाना पड़ता है।
- 1:00:38मैं बोला नहीं मुझे बुलाया गया। बस तुम्हारी आत्मा से ज्यादा आत्म
- 1:00:57अनुसंधान करने। वाला और कुछ भी तत्व।
- 1:01:00बने तुम भलीभाँति जानते हो कि तुम झूठ बोल रहे हो जाना देखा।
- 1:01:10परखा तुम अच्छी तरह जानते हो और ध्यान रखना अगर तुमने गंदगी
- 1:01:19फैलाई, गिरेगी तुम्हारे ऊपर। आसमान में जो चीज़ फैलाई जाती है।
- 1:01:27धरती पे आया करती है। इस बात का ध्यान रखना।
- 1:01:31और धरती? पे तुम खड़े हो।
- 1:01:43जीने की तमन्ना जी वैष्णव। तुम्हारी ये तमन्ना है।
- 1:01:48कि मैं सुखी होके जाऊं। और अगर सुखी।
- 1:01:53होके न जियूँ तो मैं दुखी होके भी जियूँ लेकिन जियूँ।
- 1:02:00यही तुम्हारी तमन्ना है। तुम्हें उस गंतव्य सतर्क पर पहुँच
- 1:02:05रेनीति थी यह। कलिंगिंग का कारण बन जाती है और
- 1:02:14देखो कलिंगिंगनेश। शुभ हैं या अशुभ हैं यह मायने?
- 1:02:18नहीं रखते हैं। चिपकाहटें साधारण गोद।
- 1:02:25से चिपकाई गई या फेविकोल से या एर्नाडाइट से या कोई बड़ी से
- 1:02:31बड़ी। चिपकास।
- 1:02:34इसका कोई मतलब नहीं। बात तो यह है कि तुम।
- 1:02:36चिपके यह चिपकाहट तुमको हर। ट्रेन नहीं।
- 1:02:43देगी और यह तुम्हें बांधे। रखेगा और फिर तुम चलाओगे मैं
- 1:02:49मुक्त होना चाहता हूँ। चिपकाटों को तुम छोड़ नहीं पाते
- 1:02:54चिपकाट तुमने स्वयं पैदा की है डिमांड करते हो मुक्ति की, कैसे
- 1:03:02मिलेंगे तुमने बाज़ तो बड़े गहरे लगा दिए।
- 1:03:10इतने गहरे लगा दिए। कि ये पांच खोलते।
- 1:03:13ही नहीं और। कह सकते हैं बाबा तुम निंदा बहुत
- 1:03:27करते हो, नेका, तुम्हारे अल्फाज़ करते हैं।
- 1:03:36हम अपने घर की सफाई। साल में एक बार तो।
- 1:03:40करते हैं। अगर वो लगे हुए जाले।
- 1:03:45मकड़ी और वो सारी। धूल धमास जो दीवारों से चिपक गई।
- 1:03:51छत से चिपक गई। तुम्हारे पर्दों पर लग गई।
- 1:03:55फर्श पर लग गई। सब कहीं उसका साम्राज्य है।
- 1:04:00अगर वो झाड़ना निंदा है, तो मैं निंदा करता हूँ।
- 1:04:07मैं इन्हें स्वच्छ बनाना। चाहता हूँ क्योंकि।
- 1:04:10ये जमती जमती जमती जमती। आज इसलिए तो तुम्हारी दुर्दशा हो
- 1:04:15गया। तुमने कु संस्कारों?
- 1:04:18को। जमने दिया हटाया और वो भी वेला थी
- 1:04:25जब जीवंत स्त्री को लोभ दिखा के पूजी जाओगी, ज़िन्दगी तो वैसी भी
- 1:04:33नर्क है। दूसरी शादी होने नहीं देंगे।
- 1:04:38तो जल जाओ, बढ़िया सती। कहलाओगे।
- 1:04:43और उसको भांग खिला देते, नशा खिला देते, गांजा पीला देते, मादक।
- 1:04:48द्रव्य दे देते उसको जला। देते हैं।
- 1:04:52ये अच्छे दिन थे क्या? दंड है वो महापुरुष जिन्होंने।
- 1:05:03इन मूड़ताओं को हटाया आज स्त्री इन परपंचों से बाहर।
- 1:05:17आई? लेकिन पुत्रियो अभी तुम बहुत।
- 1:05:23बंधन में हो। मेरी बात को।
- 1:05:27गौर से सुन लेना। नर और नारियों को जन्म देने वाली
- 1:05:37नारी। तुम महान हो।
- 1:05:43तुम अपनी अपने मूल। को पहचान।
- 1:05:50मन तू ज्योत स्वरूप है। अपना मूल पहचान बस।
- 1:05:56तुमने अपने मूल को नहीं। पहचाना?
- 1:06:01तुम आदमी की गुलाम। होकर रह गए।
- 1:06:05और मुक्ति देगा तुम्हें। वो भी आदमी।
- 1:06:07देगा। ये तुम्हारा अधिकार है।
- 1:06:15ये तुम्हारा अधिकार? है।
- 1:06:22तुमने आदमी को जन्म दिया। पुरुष को जन्म दिया तुमने?
- 1:06:29नारी को भी जन्म दिया तुमने? और तुम्हारे लिए नियम।
- 1:06:37पुरुष बनाए, शास्त्र पुरुष बनाए। गलत है।
- 1:06:45ये बात तुम अबला नहीं हो, यह ठीक। कि तुम्हारी सं रचना शारीरिक।
- 1:06:57संरचना थोड़ी कमज़ोर है। लेकिन इतने भी कमजोर नहीं।
- 1:07:02तुम शक्ति स्वरूपा कहलाती हो। तुम्हें उठना ही पड़ेगा।
- 1:07:09तुम्हें झंडा विलंद करना ही। होगा अपनी स्वतंत्रता का।
- 1:07:22और ध्यान रखना पुरुष तुम्हारा गुलाम है पुरुष तुम्हारा गुलाम
- 1:07:35उसको मालिक मत बनने देना। इन अर्थों में कब तुम्हारे?
- 1:07:44लिए इतिहास बनाए, धर्मग्रंथ बनाए या जीवन को जीने के डंका?
- 1:07:55बनाए। तुम अपना जीवन जीने का।
- 1:07:57ढंग खुद खोज लेना। हम प्रसंग पे वापस आये, यद्यपि
- 1:08:06वीडियो बहुत लम्बी हो गयी, मनुष्य जीना चाहता है।
- 1:08:18सुखी। जीना चाहता है और अगर सुख।
- 1:08:22ही ना जिए तो दुखी भी जीना चाहता है।
- 1:08:24लेकिन जीना चाहता है तुमने। कहा, पाप का मूल क्या है?
- 1:08:30पाप का मूल है जी? वैष्णव?
- 1:08:37और जीवेशणा का? टूट जना बड़ा शुभ संकेत है।
- 1:08:41उस। दिन जश्न मनाता है सारा।
- 1:08:44अस्तित्व नाचता है? क्योंकि बड़ी से बड़ी धारणा।
- 1:08:49है। जीवेशणा।
- 1:08:52बड़े से बड़ा पाप का कारण है जीवेशणा।
- 1:08:56तुम्हें पता नहीं। यह भी कोई जीना?
- 1:09:00है दर दर के भिखारी। हो के भी कोई जीना है।
- 1:09:07लाख भेड़िया हैं तुम्हारे दिलो दिमाग।
- 1:09:10पर यह भी कोई जीना है? मैं तुम्हें ये नहीं।
- 1:09:20कहता कि तुम मर जाओ, मैं तुम्हें ये कहता हूँ अपनी बेड़ियों को
- 1:09:25तोड़ दो। ये जो भेड़िया तुम्हारे ऊपर।
- 1:09:35ताकतवर लोगों ने डाल। दी है।
- 1:09:39इनको तोड़ दो गुलाम मत बना। पहले ही से गुलाम हो अपनी वासनाओं
- 1:09:49के। और।
- 1:09:50ये जो तुम्हें स्वतंत्र होने। की कवायद देते हैं।
- 1:09:55यह खुद गुलाम है अपनी बसनाओं। के अपनी बसनाओं से आजाद।
- 1:09:59नहीं। हुए गुलामी को खत्म कर दो तभी
- 1:10:11मुक्त होगे तुम। महावीर को महावीर का खिताब।
- 1:10:16क्यों मिला उन्होंने? ऐसा क्या कर दिया?
- 1:10:20कोई जंग नहीं जीता। पानीपत की लड़ाई नहीं जीती।
- 1:10:26कोई तलवार नहीं। उठाई, फिर भी जीते महावीर।
- 1:10:31महावीर का खिताब मिला। इस अलंकार से।
- 1:10:38विभूषित हुए क्यों हुए, क्या बात थी?
- 1:10:41ऐसा क्या था जो हमारे। ऋषियों ने उन्हें महावीर कह दिया।
- 1:10:48ऐसा वीरता का क्या काम? था।
- 1:10:53अपने विचारों पर विजय प्राप्त करना बड़ी से बड़ी वीरता।
- 1:10:56होती है ये तुम्हारे वैरी जो। दिन भर रात तुम्हारा पीछा।
- 1:11:04करते हैं। काम क्रोध, लोह मोह अन्हकार।
- 1:11:10मद मत सर। इन पर उन्होंने विजय पाली।
- 1:11:17और यहाँ तक? कि।
- 1:11:19जीवेशणा के ऊपर भी उन्होंने। विजय प्राप्त की।
- 1:11:27उनकी कोई इच्छा नहीं रही। मैं जीऊं सुखी होके जीऊं यह तो
- 1:11:34छोड़ो। सुखी होके जीऊं यह छोड़ो।
- 1:11:39उन्होंने जीने की। उमंग ही त्याग दी, भला क्यों
- 1:11:43त्याग दे? तुम जीने की उमंग मत त्याग।
- 1:11:48देना। अदरवाइज़ यू विल।
- 1:11:51कमिट सुसाइड इस स्थिति में। तुम जीने की उमंग मत।
- 1:11:56त्याग देना। क्योंकि तुम अभी अध कच्चे हो।
- 1:12:03उन्होंने कुछ ऐसा किया जो मैंने पहले बताया।
- 1:12:08इतने सुखी हो जाओ के। स्वर्ग से भी रातों रात भागना
- 1:12:14पड़ा है। और नरक से तुम डरो ना नरक के
- 1:12:21द्वार में। चोरी छुपे प्रवेश कर जाओ।
- 1:12:26जिन सिंघासनों को हीरे ज्वरात मोतियों।
- 1:12:29को भरे हुए लोकर्स को तुम चाहते हो।
- 1:12:37पाना वह आंधी रात। को चोरो की तरह उसको।
- 1:12:40छोड़ के भागता है। जीस स्वर्ग को तुम्हारे।
- 1:12:45ऋषि में निपाना चाहते हैं? जब तुम उस स्वर्ग को रातों रात।
- 1:12:52बड़ी ऊब है। स्वर्ग में तुम्हें पता नहीं।
- 1:12:56इसलिए मैं कहता हूँ गलती। से भी स्वर्ग।
- 1:12:58मत मांग लेना। थोड़ी बहुत देर के।
- 1:13:01लिए तू चलेगा। लेकिन अमर होने का वरदान मत मांग
- 1:13:07लेना फिर तुमसे बड़ा दुखी कोई न। होगा।
- 1:13:12फिर जितनी तुम्हारी दयनीय स्थिति होगी, तुम जानते।
- 1:13:16नहीं हो मैं जानकर बोल। रहा हूँ किसी शास्त्र में यह बात?
- 1:13:22नहीं लिखे दिखे। तुम कहते कागज की लेखे।
- 1:13:27और मैं कहता हूँ। जब सुख इतना प्रगाढ़ होता है
- 1:13:31बरसता है। तो कहाँ जीने की इच्छा?
- 1:13:34रहती है। ना सुखी होने की कामना।
- 1:13:42करो। ऊब जाओगे सर से तो दुख के।
- 1:13:47क्षेत्र में प्रवेश कर जाओगे वो भी तुम्हें तृप्त न कर पाएगा।
- 1:13:54एक और क्षेत्र है। सुख और दुख से।
- 1:13:57ऊपर उठ के उसे। आनंद कहते हैं।
- 1:14:02न सुख तृप्ति देता। न दुख तृप्ति देता, आनंद तृप्ति
- 1:14:07देता। और आनंद विषय।
- 1:14:11है। जिसके बिना तृप्ति मिलते लाश।
- 1:14:17तुम चक्रवर्ती सम्राट बन जाओ। लाख तुम दुनिया के मालिक बन जाओ।
- 1:14:23शहंशाहे आलम हो जाओ, तृप्ति। नहीं आती।
- 1:14:29इसलिए कबीर ने कहा जब। आ वह संतो का धन सब धन धोड़ समान।
- 1:14:39जो व्यक्ति आपको पाठ सगाता। है।
- 1:14:48उपनिषद। का?
- 1:14:53अष्टवक्र गीता का गीता। का?
- 1:14:57बात। बताता है जनक की वह।
- 1:15:02व्यक्ति कामना यह करता है। दृढ़ करो, सहायता करो किसकी?
- 1:15:20जो हमने। ये डम डम न बनाया।
- 1:15:28इसकी सहायता करो। इसको वरवान करो उनके।
- 1:15:34चैनलों के ऊपर जगमग जगमग। करता हुआ आर्थिक सहायता करें।
- 1:15:42आर्थिक सहायता करें। क्यों भाई क्या आवश्यकता पड़ती?
- 1:15:49है। मेरे पास लोग आ जाते हैं, बाबा
- 1:15:53बैठने को जगह नहीं है। मैंने कहा तो फिर बना लो।
- 1:16:01तुमने बैठना है। मैं तो यहाँ भी बैठा।
- 1:16:05वहाँ भी। बैठा था, तुम यहाँ घसीट।
- 1:16:09लाइ में यहाँ आ गया। अब तुमने बैठना है इंतजाम कर लो
- 1:16:13अगर बैठना है। नहीं, मैं तो सदा कहता हूँ
- 1:16:18दीक्षा। लो घर।
- 1:16:19जाओ घर से बढ़िया और। कुछ नहीं होता।
- 1:16:25क्यों इकट्ठा करते हो? क्यों जाए?
- 1:16:28ऋषिकेश क्यों जाए हरिद्वार? क्यों जाए?
- 1:16:31गंगोत्री क्यों जाए? यमुनोत्री क्यों जाए चारधाम?
- 1:16:36पागल हुए हो? चार धाम के लोग।
- 1:16:41संतों की तलाश में भड़क। रहे हैं।
- 1:16:44संत नहीं वृद्ध। चार धाम तो यहाँ रहेंगे, कहीं
- 1:16:50नहीं जाएंगे। चार धाम यहीं हैं, यहीं थे यहीं।
- 1:16:54रहेंगे। लेकिन संत नहीं मिलेगा सच्चा।
- 1:17:00संत अगर तुम्हें कहीं मिल जाए वहीं।
- 1:17:04बैठ जाना। उसके आसपास बैठ जाना बस।
- 1:17:11तुम्हारे जीवन का लक्ष्य पूरा। होगा।
- 1:17:16तुम जीना चाहते हो सुखी हो के जीना चाहते हो मैं नहीं।
- 1:17:21कहता कि तुम मर जाओ। मैं कहता हूँ जीवन की।
- 1:17:26इच्छा समाप्त हो जाए। इतना सुखी हो जाओ और होते हो अगर
- 1:17:32न होते होते। तो मैं बोलता भी नहीं।
- 1:17:37इतने सुखी होते हो वहाँ भी ऊब होती।
- 1:17:40है। उस ऊब से फिर ऊपर।
- 1:17:43उठोगे वहाँ आएगा आनंद बस। वहाँ जाके तृप्ति होती है।
- 1:17:49एक ही तल है। जहाँ जाके तृप्ति मिलती है।
- 1:17:58डिट्ठे सभ्यथा नहीं तुध जे। हया उस जैसा कोई।
- 1:18:05भी नहीं डिट्ठे सभ्यथा नहीं। तुध जे हया तेरे जैसा।
- 1:18:12कोई नहीं। वहाँ पहुँच जाओ, जिसके जैसा कोई
- 1:18:16भी नहीं। और वह तुम्हारे भीतर भी।
- 1:18:18है यहाँ सिर्फ़? मेरे भीतर नहीं बस मुझे।
- 1:18:25पता चल गया है। तुम्हारे भीतर भी है और मुझे दुख
- 1:18:29होता। है।
- 1:18:32जब एक तीर्थ चल के मेरे पास आता है, शर्मसार भी होता है।
- 1:18:40आज एक तीर्थ चल के मेरे पास आया। है।
- 1:18:45फर्क क्या है? मैंने जान लिया कि मैं तीर्थ
- 1:18:51इसने। अभी जाना नहीं कि मैं।
- 1:18:53इत्ता सा फैसला इसे। घर बैठ के हल कर।
- 1:18:59लो। यहाँ से सीख जाओ।
- 1:19:01पाथ और। अपने ही भीतर मिलेगा।
- 1:19:06जब भी मिलेगा। और जब मिलेगा, तो फिर?
- 1:19:13तुम्हें तीर्थ यात्राओं पर। भोंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 1:19:18चार धाम बेकार हो। जाएंगे हम सब।
- 1:19:32मानसरोवरू हमसपयो मानसरोवरू। ताल तलैया क्यों डोले?
- 1:19:58मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले? मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले हीरो
- 1:20:17पायो? गांठ गठियायो बार बार वा को क्यों
- 1:20:38खोले? मन मस्त हुआ।
- 1:20:45मस्त हुआ फिर क्यों बोले क्यों बोले, क्यों बोले?
- 1:21:03क्यों बोले, क्यों बोले, मन मस्त आया तो क्यों बोले?
- 1:21:25तेरो साहब है तुझे? माहि तेरो साहब है तुझ।
- 1:21:40माहि। चार धाम फिर क्यों डोल चार धाम,
- 1:21:53फिर क्यों डोल? फिर क्यों बोले मन मस्त?
- 1:22:08हुआ, फिर क्यों बोले धन्यवाद।