Latest / Baba ji Vijay Vats / 19/4/26 - 36 नंबर की कहानी और अज्ञात शक्ति पर भरोसे का महत्व! कर्मण्येवाधिकारस्ते का विस्तार! Part-1
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- 0:15विद्याचरण बाबा जी आपने समझाया बहुत बढ़िया बावजूद।
- 0:30इसके मैं समझ नहीं पाया। गीता का?
- 0:41वह मूल शब्द जिसके आधार गीता रची गई, उसका अर्थ।
- 0:55मेरे समझ में आया। और कल जब आपने कहा कि।
- 1:02प्रश्न नहीं। आते तो मैंने आज प्रश्न वही किया।
- 1:13कृपया कर हमें समझाने की चेष्टा करें।
- 1:23कर्मन्ने वाधिकार से माँ। फली शुक्लाशन इसका ऐसे।
- 1:31विस्तार। कीजिए के हमारे रोम रोम में इस
- 1:38शब्द की गहन व्याख्या समझ आए। अजमेर से विद्याचरण पुत्र।
- 2:02अगर यह प्रश्न। तुम 1000 बार भी पूछो।
- 2:09तो भी मेरा। उत्तरदायित्व है कि मैं आपको कम
- 2:15से कम कुछ मुख्य प्रश्नों। के जो आपसे।
- 2:21और यह मुख्य प्रश्नों में से मुख्यतम है।
- 2:38बहुत पहले वक्त की बात। है।
- 2:44मैं गौशाला मंदिर जाया करता था वहाँ जाता हुआ।
- 2:56मैंने देखा पंछी बहुत बहुत बड़ा सा वट।
- 3:01वृक्ष। पीपल जामन आम।
- 3:11हरियाली से हरा भरा। एश शानदार मनमोहक शांतवाता पर।
- 3:31जब मैंने देखा कि पंछी। बहुत आते हैं।
- 3:35वह वट। वृक्ष इतना बड़ा था कि उसमें।
- 3:39हजारों पंछी बैठे। होते हैं।
- 3:43उनके घोंसलें भी थे। 100 वर्ष पुराना वटवृक्ष बाबा।
- 3:52गरनारी बाबा ने लगाए। थे।
- 3:57जिसने इस गौशाला की। आधार शिला रखी।
- 4:06वहाँ मुझे बड़ा सुकून। मिलता।
- 4:11और मैं तो खोज के जाता। वह ट्रेन के इंसिडेंट की घटना।
- 4:20मेरे भीतर से जाती। है।
- 4:23कौन था वह? किसका शुक्र?
- 4:30एक अनहोनी। टल गई।
- 4:34किसका धन्यवाद मैं उसकी? खोज में था ये सारी कहानी आपको?
- 4:45पता है, मेरी में भी है। किताब में भी एक छपी है।
- 4:54हिंदी और अंग्रेजी के भीतर भी आज। ये उपलब्ध है।
- 5:00और मैंने स्वयं अपने मुख से बोली, भाई तो मेरे पास।
- 5:10ऐसे टके की तंगी। रहती थी।
- 5:17क्योंकि काम धाम कुछ करता। नहीं था तो मैंने।
- 5:24सोचा कि यह पंछी भूखे मरते हैं। इनके पेट भरने के लिए कुछ दाना
- 5:32चौका रह जाएगा। एक किलो से मैंने शुरू किया और वो
- 5:43भी मैंने उधारी से। शुरू किया इकट्ठे होंगे।
- 5:50जब तो चुका। देंगे, लेकिन मुझे नहीं पता था
- 5:56पैसे आएँगे। कहाँ से?
- 6:01एक छोटी सी घटना ने उस। अज्ञात के प्रति श्रद्धा।
- 6:09जन्म देती थी। श्रद्धा पैदा हुआ।
- 6:12करती है, बनाई नहीं। जाती लेकिन मैंने।
- 6:24देखा एक किलो कम पड़ता है 2345। आठ किलो।
- 6:36जीस दिन मैंने देखा कि आठ। किलो में से।
- 6:39थोड़ा सा चोगा बच गया है, मैं समझ गया कि।
- 6:45अब सभी पक्षियों। ने खा लिया क्योंकि बच गया।
- 6:51और मैं तरह तरह थे। सतनजा।
- 6:55सात तरह। के अनाज ले जाता।
- 7:00किसी को रसगुल्ला बढ़िया। लगता किसी को गुलाब।
- 7:03जामुन किसी को जलेबी, किसी को बर्फी, किसी को मटर, नमकीन।
- 7:08भुजिया बना। ऐसे ही डिशेस?
- 7:18मोरों के लिए मक्खी ले। जाता है।
- 7:22मोर मक्खी बड़ी प्रसन्न हो के। खाता है।
- 7:29और तुम ये समझते हो जब किसी की मन पसंद।
- 7:35वस्तु। खाने को मिल जाए।
- 7:37तो उसके भीतर से एक दोआ निकलती। है वह।
- 7:42दोआगुड़ी कीमती तो मैं सातों प्रकार।
- 7:47के अनाज ले जाया करता हूँ और 1 दिन ऐसा आया।
- 7:56की जोगा बचत अब। मेरे पास पैसा नहीं उस।
- 8:02अज्ञात के सहारे पर यह काम मैंने। शुरू किया और यह।
- 8:11सिर्फ मेरी कल्पना थी। जिसने इतने बड़े इंसिडेंट से बचा
- 8:17दिया, वह धन भी उपलब्ध करवा देगा। उसके घर कोई कमी नहीं।
- 8:26इतना सा विश्वास हो चला और यह श्रद्धा।
- 8:31उसी की कृपा से आयी थी। वह इंसिडेंट ना होता।
- 8:37गाड़ी का? तो मेरे भीतर ये।
- 8:39श्रद्धा ना बनता है। उस घड़ी बुद्धि चारों खाने चित्त
- 8:48हो गई। बुद्धि ने लाख प्रचन किए बचने के,
- 8:52लेकिन बुद्धि इसका जवाब नहीं ढूंढ।
- 8:56पाई और यह बात। मुझे बाद में जाके।
- 9:02बड़ा कमाई कि बहुत सी। बातें ऐसी होती हैं।
- 9:07जिसका जवाब। बुद्धि के पास नहीं होता।
- 9:11और तथा कथित सर लोग अच्छा लोग। बुद्धि से ही सब कुछ व्यख्यात कर
- 9:25देने की फिराक में बैठे। उन्हें पता ही नहीं।
- 9:31कि तुम जो बांट। सकते हो?
- 9:36वह 100 में से एक और एक का असंखवा भाग।
- 9:41है। इतना सा तुम बांट।
- 9:43सकते हो? वक्त चलता क्या?
- 9:53मेरे सिर वैसी बहुत हो गई, सस्ती कीवानी।
- 9:57की बात है। मैं जाता शंकर मंत्र में बैठ जाता
- 10:10भगवान शंकर की मूर्ति। से।
- 10:13मुझे लगाव था। उसकी शांत मूर्ति।
- 10:21मुझे भा जाती मैं। उसकी तरफ देखता रहता और उसकी
- 10:28शांति में खो जाती। फिर 1 दिन जहाँ से जोगा ले गया।
- 10:41था। उसने मेरे से पैसे।
- 10:43मांगे और मेरे पास कोई पैसा है। ध्यान रखें, विद्याचरण।
- 10:55तुम्हारे प्रश्न का जवाब। दे रहा हूँ।
- 10:58अब कीमत चुकी जान 1975 के बाद। शिवरात्रि की वो रात जब प्रथम बार
- 11:16फर्स्ट। एनलाइटन पर्सन ऑफ थिस अर्थ?
- 11:21महादेव मेरे पास आए थे। मैं किसी की दुकान की छत।
- 11:25पर बैठा था। उसके बाद से यदा कदा मेरे।
- 11:30पास भगवान शंकर आते। ही रहते हैं।
- 11:34आज भी आते हैं। तो मेरे सपने में भगवान शंकर आए
- 11:50क्योंकि कई दिनों से वह व्यक्ति चौगे के पैसे मांग रहा।
- 11:54था। तो भगवान सुनकर सपने में बोले उस
- 12:05वक्त मुझे सपने आया। करता।
- 12:10एनलाइटनमेंट के बाद। सपना नहीं आता रातें।
- 12:18सपने न आवे ऑन। जेड़े अल्लाह पाले हो यहाँ से
- 12:27समझा आता है। कि एक व्यक्ति की।
- 12:33प्रज्ञा का अनुभव। दूसरे व्यक्ति की प्रज्ञा के
- 12:40अनुभव से मिल। गया।
- 12:44कैसे न मने? के भूले शाह उस जगह पे पहुँच गए
- 12:50थे। जहाँ मैं चला गया हूँ प्रात्ती
- 12:55स्वप्ना? आवो?
- 12:58जड़े अल्लाह वाले, उसके बाद मुझे सपना और दृष्टांत इसमें।
- 13:07फर्क होता है। मैं तुम्हें ये कभी।
- 13:09बाद में बताऊँगा लम्बा प्रश्न संक्षेप मैं बता देता।
- 13:17हूँ। के सपना है मन की।
- 13:18भटकना जब तुम शांत। नहीं होते तो सारी।
- 13:24रात भटकते हो और। दृष्टांत है सुबह सवेरे क्षण भर
- 13:31के लिए कोई चीज़ का दिख जाना वह है दृष्टांत।
- 13:36मन ठहरा हुआ है ब्रह्म वेरा में सुबह सुबह तुम्हें दृष्टांत।
- 13:42आ गया तुमने देख लिया। वह सपना नहीं होता।
- 13:47वह दृष्टांत होता है, उसका फल कुछ और होता है।
- 13:52वह सच्ची घटनाओं। पे आधारित होता है।
- 14:00तो भगवान शंकर सपने में मेरे। पास आए।
- 14:06मुझे कहने लगे 36 से नंबर लगा लो। 3636 और गायब।
- 14:22ना मुझे ये पता था कहाँ ये नंबर लगता है ना मैंने ये धंधा कभी
- 14:34किया बचपन में चर्चा के साथ में जाया।
- 14:39करता था वहाँ का एक। यह सट्टा का नंबर।
- 14:43दिया करता था बस। इतना सा नॉलेज था।
- 14:51मुझे तो मैं। गो चला गया वहाँ शिनान ध्यान वहीं
- 14:59किया करता। बाजार में आया।
- 15:03तो एक मित्र के। दुकान पे चला गया।
- 15:09मुझे पता चला कि यह व्यक्ति नंबर लगाता है।
- 15:14मैंने उसे सारा सपना सुनाया। और मुझे कहने।
- 15:19लगा आप मेरे पास। 2:00 बजे आ जाना पैसे ले आना
- 15:32जितना आपने लगाना हो, गंगानगर लगता है।
- 15:37वहाँ भाव सूखा। मैं भी संघ चलूँगा, मैं भी लगा
- 15:46लूँगा वो रोज़ का एडिक्टेड। था।
- 15:55आदि था जैसे शराब की आदि। मैंने कहा, ठीक है, मैं जब 2:00
- 16:06बजे गया उसका एक मिस्त्री वहाँ बैठा था जिसके एक हाथ नहीं था।
- 16:12यहाँ तक टुंडा था। वो मुझे कहने लगा कि सेठ जी तो
- 16:25किसी की शादी के लिए लड़की लड़का। देखना है वहाँ गए अभी आते हैं
- 16:33थोड़ी देर। कह के गए थे।
- 16:36बैठालिन मैं बैठा रहा। 3:00 बज गए नहीं आया।
- 16:474:00 बज गए 5:00 बज गए। सर्द रात थी।
- 16:51अंधेरा जल्दी हो जाया करता। था।
- 16:58सूरज ढल गया। और मैं हार गया।
- 17:08मैंने कहा कहीं गहरा। उलझ गया चलो।
- 17:14जैसी उसकी मर्ज़ी तो मैं घर वापस आ गया हूँ रात।
- 17:26को फिर मैं सोया हूँ। सुबह सुबह मुझे फिर सोपना होता।
- 17:35है। महादेव फिर आते, मुझे कहते तुम
- 17:46ऐसे करो। तुम चुप हो रहे।
- 17:50तुम जो कल वाली शक्ति थी। आज फिर लगा दो।
- 18:01मैं गोशला मंदिर चला। गया।
- 18:03नहा धो के जब बाजार में आया तो मैं उस व्यक्ति की दुकान।
- 18:07पर चला गया, बता ही दूँ सतनाम दास बिजली वाले उसका नाम।
- 18:13था। तो वह मुझे देखकर उसने माथे।
- 18:28पे हँसाया मैंने कहा क्या बात कह तो तुम भी कर्मों के बलि आज।
- 18:4336 आ गई। मैंने कहा भाई, मैं तो यहाँ बैठ।
- 18:47रहा। हूँ एक व्यक्ति से मैं पैसे ले के
- 18:51आया वरुण कोई मुझे उधारी भी नहीं देता था तो कमाता धमाता कुछ नहीं।
- 19:05डॉक्टर धर्मपाल मैंने कहा डॉक्टर। साहब?
- 19:11₹3000 देता। हूँ क्या?
- 19:16करना है। मैंने कहा।
- 19:17सेक्टर का? बोले तू रहने दे।
- 19:29वो एक तरह से मेरे मार्गदर्शक भी रहे हैं।
- 19:34उम्र में बड़े थे तजर्बेकार्थ सहनशील व्यक्ति।
- 19:41अगर मैंने देखा ज़िन्दगी में तो उनमें से एक।
- 19:47डॉक्टर धर्म पादिक अति सहनशील कोई गाली भी निकालता है।
- 19:55तो हाथ जोड़ लेते हैं। उर्दू लिखा करते हैं, कहते हैं
- 20:08वापस कब कर दोगे मैंने? उन्होंने मुझे पैसे दे दिए, पहले
- 20:19दिन भी उन्हीं से ले गया था। वही पैसे मेरी जेब में थे, मैं
- 20:28फिर उस व्यक्ति के पास नहीं गया। मैं सीधा गनवर चला गया।
- 20:34सीधा गाड़ी। पकड़ी स्टेशन पे उतरा, बाहर रक्षा
- 20:44वाला पड़ा मैंने रक्षा वाले से कहा उस वक्त प्रेम मास्टर नाम का।
- 20:51एक व्यक्ति। वहाँ पर सबसे बड़ा सट्टे का
- 20:56खाईवाल। मैंने धीरे से पूछा क्योंकि यह एक
- 21:01क्राइम है। मैंने कहा भाई तुम प्रेम मास्टर
- 21:06सट्टेवाला का घर जानते। हो?
- 21:09कहता हाँ जी। वी ब्लॉक में है गरीब।
- 21:16आदमी मुकद्दर का मारा। मेहनतकशी करके उसका पेट।
- 21:24नहीं भरता है। आज समझाता है कि यह गरीब।
- 21:31गरीब क्यों? इन गरीबों की गरीबी को देखकर
- 21:41अंतरुजन होता है और उस अंतरुजन से?
- 21:47मैं बोलता हूँ। अगर मैं किसी।
- 21:50सेठ के खिलाफ़ एक व्यक्ति भूखा मरा जा रहा सड़क पर और तुम धन को
- 21:59इकट्ठा। करके।
- 22:02ट्रंको में संदूकों में, बैंकरों में जमा रुद्रन होता है।
- 22:14मुझे कहता पांच। ₹6।
- 22:18मैंने कहा तू चाहे 10 ले, मेरी दाढ़ी थी, कहता सरदार थी कुछ
- 22:27सट्टा वगैरह है। मैंने कहा।
- 22:33मेरा भी बच्चा बीमार है, आप मुझे बता दोगे?
- 22:39मैंने कहा मैं लगा। ही दूंगा तेरा।
- 22:42तू जितना लगाना है बोल मैं उतना ही लगा दूंगा, वो तेरे किराये में
- 22:48कट जाएंगे। तू कितना ही लगा दे।
- 22:52कहता हूँ मैं ₹20 लगा दूंगा और बस ₹20 तेरे पूरे हो गए, तुने पांच
- 23:02मांगे मैं तुझे 20 दे दूंगा, तू मुझे ले चल वहाँ चला गया।
- 23:13मैंने भी लगाई। 36।
- 23:17मेरी चाचा कहा करते थे कि जो नंबर लगाए उसका अक्षर जरूर लगाए तो
- 23:27मैंने ₹800 की छतिस लगा दी। और ₹2000 का अक्षर लगा।
- 23:36दिया। ₹2800 और ₹200 मेरे?
- 23:40पास। किराया भाड़ा आना जाना खाना।
- 23:45पीना। सस्ते।
- 23:49जवानों की बात मैं। वहाँ।
- 23:58जाकर। नंबर लगाकर उसने मुझे पर्ची दे
- 24:03दी। मैंने उससे पूछा, ठीक सी उम्र का?
- 24:12व्यक्ति था वो? टीचर था इसलिए उसको मास्टर जी
- 24:14कहते थे। मास्टर प्रेम पता नहीं।
- 24:24टीचर ऐसे कामो में क्यों पड़ जाते है?
- 24:27अच्छी। खासी तनखा होती है, लेकिन ये लोग
- 24:33पीछे नहीं छोड़ते। मैंने लगा के कहा।
- 24:39मास्टर जी, मैं। तप करता हूँ कोई ऐसा होटल बता
- 24:51जहाँ खाना वेसुम में जाए। और कोई धर्मशाला भी बता।
- 24:57दो। मैं वहाँ रात भर रुक लूँगा, सुबह
- 25:03चला जाऊंगा। मास्टर जी बोले मोड़िया मोड़िया?
- 25:15दाढ़ी वगैरह और वेशभूषा देख के मोड़या तू यहीं रुक जा, आज कोई
- 25:21नहीं आया। ऊपर दो कमरे हैं, उसमें तेरा सारा
- 25:28सामान रख दूंगा। एक कमरे में माला रख दूंगा पूजा
- 25:34पाठ का सामान रख। दूंगा और रोटी?
- 25:40तू यहीं से खा लेना, दूसरे यहाँ कोई पता नहीं उठा, एक दूसरे में
- 25:46कड़छी मारते रहते हैं। मैंने हाथ।
- 25:51जोड़े भाई आपका बहुत शुक्रिया। ऊपर।
- 25:57जाके बैठ गया। 20।
- 25:59रुपए की उस रक्षा वाले ने भी लगाई।
- 26:02उसका बच्चा दवाई के लिए पैसे नहीं थे।
- 26:11गरीब व्यक्ति मजदूरी करता है सुबह से शाम तक बाढ़।
- 26:14ढोता है। वह बी ब्लॉक इतनी दूर था कि वह
- 26:20बेचारा थक गया। सर्दी के मौसम में भी उसे पसीना।
- 26:30मैं ऊपर जा के सोया 2:00 बजे तक पाठ।
- 26:35पूजा किया करता था। यही ओम नमो?
- 26:40भागवत ए रुद्र है, इसका मैं जाप किया।
- 26:43यह मेरा मूल मंत्र। था।
- 26:45यह मेरा सिद्ध है, आप भी कर सकते। ओम नमो भगवते हरुजराज बस इसी
- 26:55मंत्र का जाप मैं। करता रहता।
- 27:01भगवान शंकृति के छूटे से मूर्ति जेब में रखी।
- 27:03हुई थी वो सामने। रखे थे।
- 27:08कॉन्सेंट्रेशन के लिए तो तब ध्यान व्यान मुझे आता।
- 27:12नहीं था। सुबह 5:06 बजे के आसपास दिल्ली से
- 27:25खबर आया करती। थी।
- 27:27के आज घड़े में। खुला क्या है?
- 27:34देखो भाई मेरी वीडियो। को।
- 27:38ये गंजड़ी, नशेड़ी, बंगेली ये सट्टा ये लॉटरी, ये जुआ।
- 27:51ये शेयर मार्केट वाले सुनते बहुत। हैं ये मैं।
- 27:56कहानी सच सुना। रहा हूँ।
- 27:58कभी सच में जाकर छत लगा लेना पैसे खराब।
- 28:02मत कर देना सुबह 5:00 बजे उठा। नींद काहे आनी थी, हालांकि?
- 28:15वहाँ इंतजाम बहुत अच्छा। था।
- 28:18रात को मुझे ताजा घर की रोटी। बना के दी।
- 28:24एक ग्लास दूध का तिया। मैंने कह दिया तुम मोझ बना दो,
- 28:31तुम सुखी रहो। सुबह मैं उठा।
- 28:395:00 बजे जाके बैठ गया, मास्टर प्रेम सुबह उठकर कोई हिसाब किताब
- 28:50कर रहा था मुझे देखकर बोला मोड़िया आ?
- 28:57गया। मैं कहा।
- 29:00कहते हैं अभी खबर आई नहीं है दिल्ली से।
- 29:05मैंने कहा, ठीक? तो तू ऐसे कर चाय पी ले चाय आगे
- 29:12सेवा बहुत। करते थे।
- 29:19चाय पी ले। मैंने चाय पीते पीते फ़ोन की घंटी
- 29:26बजी, वह भी चाय पी रहा। था।
- 29:32उसने फ़ोन की घंटी उठाई आगे। से कुछ।
- 29:34आवाज आई, उसने सुना। और फ़ोन रख दिया।
- 29:51मेरी तरफ देखने का। मैंने कहा क्या हुआ मास्टर?
- 30:04कहन से लेके आया था आज तेरी 36 आ गई।
- 30:11फिर दूसरी बार कल। भी 36 आई थी।
- 30:17आज भी 36। यह आप देख सकते हो पुराने रिकॉर्ड
- 30:25में आपको मिल जाएगा दो तीन तारीख की बात है जब एक तारीख को 62 आई
- 30:39थी ऊपर से फिर 36 आई थी। फिर।
- 30:42इतना आंकड़ा मुझे याद। है।
- 30:48मुझे कहने लगा मैंने कहा मैं किसी से नहीं ले जाता, ये जो पूजा पाठ
- 30:53करता हूँ हाँ भगवान शंकर से जाते। है ठीक है।
- 31:01अच्छा ऐसा कर पैसे जाते हैं, सस्ता ज़माना था और रुपया बहुत
- 31:172000 का अक्षर 20,000। और ₹800 का 80801000।
- 31:25₹1,00,000 तो मैं तुझे टैक्सी मांगा देता हूँ, बस वे मजाना चोर,
- 31:35लुटेरे, जेब गदरे बहुत। और यहाँ गंगानगर में तो?
- 31:42खास दुख है। मैंने कहा सभी जेव कतरे यहाँ बैठे
- 31:47हैं। पता है यहाँ।
- 31:50सट्टा लगता है। सभी के पास पैसे होते।
- 31:53हैं। जो कोई आएगा वो।
- 31:57भी पैसे लेके आएगा जो जाएगा वो भी पैसे लेके जाएगा तो उसने टैक्सी
- 32:05मंगवाली कोई क्या भाई ₹700 ही लूँगा मैंने कहा कोई बात नहीं तुम
- 32:11ले लेना। तो मास्टर जी ने कहा देखो ये
- 32:18हमारे मोडिया ही हैं इनको अच्छे से घर पे जाके पैसे।
- 32:24गिणवा के वहाँ। चाय, पानी पी के खाना वगैरह खा के
- 32:28फिर। आना है।
- 32:31उसका कोई खास हाथ नहीं। वो कहते हैं, ठीक है मास्टर जी
- 32:35कोई? बात नहीं।
- 32:39मुझे पैसे देती है उसने ₹1,00,000 इतने में वो।
- 32:46रिक्शा वाला आ गया उसको पता चल। गया था।
- 32:51वह तो दंडवत प्रणाम करने। लगा।
- 32:54मेरा बच्चा बच जाएगा मेरा बच्चा बीमार है बैनर के लिए छोटे नोट भी
- 33:08लिए बाहर बच्चों को बांटता रहा एक एक कृपया बाहर बच्चे खेल रहे थे
- 33:17गाड़ी में बैठा। मुझे वो कहने लगा मास्टर कहते आप
- 33:23बिचड़बासे हैं, आप थोड़े से पैसे ले जाओगे, मैंने कहा किसके कहता
- 33:35आप वहाँ सतनाम बिजली वाले को जानते हो, मैंने कहा।
- 33:39जानता हूँ। तो उसके ₹75,000 मेरे पास वो कल
- 33:48आया था और 36 से लगा गया। था और चला गया था।
- 33:58सारी बात मेरे दिमाग में खोज के भीतर से एक हुक जब आदमी श्राप
- 34:14देता। है।
- 34:20तो वस्त में वह सच्ची बात में दुखी।
- 34:23होता है। उस वक्त तक मैं एनलाइटन तो मेरे
- 34:31भीतर से एक आवाज़ आई। सतनाम दास तुम कुत्ते की मौत
- 34:37मरेगा। बस।
- 34:41सारी बात समझ में। और वह व्यक्ति काफी।
- 34:48साल के बाद बाहर। गैस एजेंसी से गैस सिलिंडर?
- 34:53ले के आया था। आती हुई बस ने उसे कुचल।
- 34:56दिया तड़प, तड़प कैमरा। पता नहीं।
- 35:04वो शराब मेरा था या किसी और का था जी दुख में?
- 35:10हुआ। लेकिन मैं उस शराब को रोक नहीं
- 35:14सकता। था ध्यान रखना।
- 35:18अगर किसी की सेवा करोगे उसके भीतर से आया।
- 35:23होगा आपको वरदान आशीष आशीर्वाद व्यर्थ।
- 35:35नहीं जाएगा। फलीभूत।
- 35:37होगा। अगर उसके भीतर की आत्मा तक
- 35:41प्रसन्नता हो। गई।
- 35:46और अगर किसी ने इतनी बुरी कर दी कि तुम्हारे अंत तक रुझन आ गया।
- 35:54तो उसे भी तुम रोक नहीं पाओगे शराब मैंने नहीं दिया था।
- 35:59मेरे उस अंत स्थल से। आज जहाँ परमात्मा बैठा।
- 36:04है वह जंक्चर। पॉइंट से आता है श्राप मैंने पहले
- 36:10भी आपको बताया। मैंने कहा, हाँ।
- 36:22दे दो, कोई बात नहीं, अब तो मैं गाड़ी में चला हूँ।
- 36:27कोई खतरा नहीं कहाँ लेके जाएगा। वो चोर?
- 36:32उचक्के फिरते हैं जीव पत्र उसने मुझे भी ₹75,000 दे दिया।
- 36:45मैं आ गया घर पे आ गया कहता। पैसे गिन लो ड्राइवर कहता मैंने
- 36:54कहा गिन लिए हम कहीं गए तो है नहीं, गिन के ही तो लेके आये,
- 37:00कहता नहीं जी गिन लो मैंने वैसे ही।
- 37:05हाथ मार लिया। ठीक है अच्छा तू बैठ तू चाय पी
- 37:10ले, तू खाना खा ले, खाना खा के वो चला।
- 37:17गया। और मैं ₹75,000 ले।
- 37:22सतनाम दास की। दुकान पर झलक गए।
- 37:30मुझे देखकर उसने फिर हाथ जो, लेकिन मैं दूसरे दिन उसके पास गया
- 37:38नहीं था परमात्मा की कुछ ऐसी करनी।
- 37:41थी कमिंग। इवेंट्स कास्ट देर सैड।
- 37:45बिफोर? कुदरत ने मुझे समझा दिया कि ये
- 37:49बदनीयत व्यक्ति है, इसको मत बताना और मैंने नहीं बताया मैं खुद ही
- 38:00चला गया ढूंढ लेंगे। मैंने कभी ये ₹75,000 ये मुझे
- 38:14मास्टर फ्रेम नहीं दी है। गंगानगर उसके चेहरे का।
- 38:21रंग पीला पड़ गया। बस मैं रुपये दिया और वहाँ से
- 38:32वापस। आ गया और फिर उसकी दुकान पर कभी
- 38:35नहीं गया। उसने बहुत कोशिश की मुझे बुलवाने
- 38:40की, लेकिन परीक्षा? बार बार नहीं।
- 38:47ले जाता और जो। परीक्षा परमात्मा ने स्वयं दे दी
- 38:51हो, उसको दोहराना नहीं चाहिए अगर तुम एक बार किसी।
- 38:57से धोखा खा गए तो ये धोखा। देने वाले का।
- 39:02कसूर है? बात सुन लो।
- 39:07एक बार अगर जिंदगी में कोई तुमसे। धोखा कर गया।
- 39:12तो यह कसूर है धोखा देने वाले का क्योंकि तुम तो बेपरवाह थे, तुमने
- 39:18तो एक बार कर लिया उसको और अगर दूसरी बार तुम उसी व्यक्ति से।
- 39:23धोखा खा जाओ फिर। धोखा खाने वाला जिम्मेदार है जी
- 39:28मेरे शब्दों का हृदय पे लिख लेना, एक बार धोखा खा लेना, उसका
- 39:34जिम्मेदार वह है इसलिए कबीर ने। कहा धोखा देना मत।
- 39:39धोखा खा लेना। मैं भी तुम से कहता हूँ पहली।
- 39:52बार जो धोखा देता है वह उसका फल भुगता है अगर।
- 39:57दूसरी बार तुम उसी व्यक्ति से धोखा खा गए तो फिर तुम जिम्मेदार?
- 40:05प्रकृति ने तुम्हें समझाया सबक सिखाया तुम।
- 40:08समझे मैं उसके बाद? उसकी दुकान पे गया ही सामने वाली
- 40:17दुकान पे बैठा रहता हूँ। गोशाला मंदिर चला जाता, दुर्गा
- 40:27मंदिर चला जाता और ज्यादा कोई ठिकाना नहीं था।
- 40:35ये कहानी मैंने क्यों सुनाई? ये कहानी उस काल की है।
- 40:48जीस काल में हमारा घर। आर्थिक समस्या से जूझ।
- 40:55रहा था। पिताजी जाते हुए।
- 41:01हमारे दो भाइयों के नाम दुकान करवा रहे थे।
- 41:06मुझे कहने लगे ये तुझे रोटी नहीं देंगे, तू शादी नहीं कराएगा इसलिए
- 41:14ये दुकान मैं तेरे नाम करा देता हूँ।
- 41:18कम से कम ये तुझे खाने पीने को रोटी दे देगा तुम मज़े से अपना।
- 41:25राम राम। करते रहियो, भले यार अपनी औलाद का
- 41:35भला बुरा समझते। तो फिर हमने ये बियोंत बनाई कि इस
- 41:45दुकान को भी। चित्त है।
- 41:52हमने बाजार में पूछा तो कहते। सवा।
- 41:55₹2,00,000 मैंने मांगा और ₹2,00,000 देने वाले आ गए।
- 42:03आज वो दुकान। 2,00,00,000 से भी शायद जाता होगी
- 42:14तो मैंने कहा नहीं भाई, मैंने तो 2,25,000 ही लेने हैं।
- 42:19इससे कम अगर तुम्हारे पास इतने पैसे की होश आई।
- 42:25तो आ जाना, अन्यथा। इतने में मेरे।
- 42:34पास पैसा आ गया ये लाख और। ₹1,00,000 उस जमाने में कई
- 42:47करोड़ों के बराबर होता। था।
- 42:54बहुत। सस्ते जमाने थे।
- 43:01बस जैसे ही मेरे पास रुपए आया था, मैंने मिस्त्री बना ली है।
- 43:07इस दुकान को गिरा तो हम दुकान नई बनानी।
- 43:18दुकान करा दी गई धूल उड़ी सारी बाजारी में लोग भाग कर आए, शर्मा
- 43:27जी की दुकान गिर गई, गिरे नहीं भाई घर।
- 43:30आए। कुछ गड़बड़ है जो ग्राहक था उसने
- 43:422,25,000 की ये दुकान मेरे को दे दो।
- 43:46ऐसे ही बढ़ी। रहने दो, मैंने कहा।
- 43:49अब तो हम किसी भाव नहीं बेचेंगे। हमारे पास पैसा।
- 43:58तो उस बनती हुई दुकान में ये सारी बैकग्राउंड मैंने तो सुनाई कि
- 44:05तुम्हारे इस प्रश्न का जवाब आसान हो जाए और उस पैसे से मैंने चोगी
- 44:16वाले के पैसे से। और चौके वाले के पैसे अगले महीने
- 44:23के भी दो तीन महीनों के दे दिए। यही पांच ₹600 पर सस्ते जमाने थे।
- 44:38पहली बात अगर तुम। दयावश कोई काम करते?
- 44:47हो? भगवान तुम्हें उससे कई गुना।
- 44:53ज्यादा फल देता। है।
- 44:56भगवान प्रसन्न होता है वह भगवान जो मार्कस की नजर में होता।
- 45:04नहीं जो चारवाकों। की नजर में होता नहीं उस भगवान की
- 45:14बात मैं। कर रहा हूँ आज।
- 45:18ऑथेंटिक प्रश्न बोल रहा। मूर्ख लोक कुछ डिग्रीज़ लेके
- 45:28यूपीएससी पास करके आईएस के डिग्री लेके आचार्यों की पदवी लेके।
- 45:38अष्टवक्र, गीता, उपनिषद और गीता का।
- 45:42व्याख्यान करने में लग जाते हैं और वो कहते हैं, एनलाइटनमेंट होता
- 45:50है सत्य को। अपने डंगों से, बुद्धि के, डंगों
- 45:56से। सजा संवार कर पेश करने की फितरत
- 46:01है इन लोगों। की।
- 46:06हम आनंद को पीते पीते चले जाएंगे और ये संस्थाओं के हाथ मजबूत करते
- 46:14करते गुजर जाएंगे। और।
- 46:20इनकी बताई हुई तरकीबें ना किसी की वैवाहिक जीवन को सुखी कर पाएंगी,
- 46:28ना किसी व्यक्ति के जीवन को सुखी कर पाएंगी।
- 46:32वर्ण। इनके स्वयं के जीवन को भी सुख
- 46:35नहीं मिलेगा क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानता।
- 46:39हूँ। सच्चा सुख मिलता है।
- 46:44उस स्तर पर जाकर। बस दूसरी बात ही नहीं है मेरे पास
- 46:49सत्य दो नहीं हुआ करता। एक ही सत्य है और सच्चा सुख यानी
- 46:57आनंद उसी तल पर मेला करता है। उस तल पर खोपड़ी धारी पुतरा नहीं
- 47:04करते। तो कैसे मान लूँ?
- 47:10कि यह। व्यक्ति गीता की व्याख्या।
- 47:12सही करेगा इसलिए मैं सुनता नहीं इनको अष्टावक्र, गीता उपनिषद की
- 47:17व्याख्या यह सही। करेगा?
- 47:21कैसी सुन लूँ इन्हें मैं जानता ही हूँ।
- 47:30ये बोलते रहेंगे संस्था के हाथ मजबूत।
- 47:35करो संस्था को दान। करो इनका कोई नहीं तो।
- 47:40स्वास्थ्य होगा और अगर। इन्होंने आईएस की कुर्सी छोड़ी।
- 47:50वह भी निहेत स्वार्थ। के कारण।
- 47:55आगे कुछ ज्यादा अपॉर्चुनिटीज़ दिखती होंगी कि यह बढ़िया है
- 48:01रास्ता यहाँ 1020 लोग अपने अंडर काम करेंगे।
- 48:08यहाँ तो लाखों लोग अपने अंडर। यहाँ तो गिनती मिनती की पगार
- 48:16मिलेंगे, यहाँ कितना ही इकट्ठा कर लो, संस्था के ऐसी भावना रखने
- 48:24वाला। व्यक्ति आध्यात्मिक नहीं हो।
- 48:28सकता। और।
- 48:30अध्यात्म के बारे में नहीं बोले तो अच्छा है।
- 48:36धरती का सुधार करेगा। अन्यथा धरती को बिगाड़ जाएगा
- 48:42क्योंकि लोग क्वालिफिकेशन्स की तरफ ज्यादा।
- 48:46देखते हैं। देखेंगे।
- 48:50इतना पढ़ा लिखा व्यक्ति बोल रहा है इसी को सुने यह है मन की एक
- 48:57कमजोरी, लेकिन उसे कहीं ना कहीं आकर चैन मिलेगा जब वो कबीर को
- 49:05सुनेगा। और कबीर कहते हैं कि।
- 49:11कागज, कलम, छुआल दुकान की उसारी शुरू हो गई है।
- 49:25सस्ते जमाने की बात है, बेरोजगारी आज तो बहुत।
- 49:29है। लेकिन उस वक्त भी।
- 49:32बेरोजगारी थी। बात शायद 1986 की है।
- 49:41जहाँ तक मुझे याद आता है 85 या 8685 में 22 स्वर्गवास हुए बड़े
- 49:48डॉक्टर। 86 की बात है, मैं स्मृति को
- 49:55खंगालता हूँ तो ऐसा ही कुछ निकलता।
- 49:59है तो वहाँ। मिस्त्री काम कर रहे।
- 50:03थे मजदूर? काम कर रहे थे 1 दिन एक।
- 50:10पैंट शर्ट डाले ग्रीन शेप्ड व्यक्ति बाल बिखरे हुए मुँह के
- 50:18ऊपर धूल फंकी हुई मेरे पास आता है मुझे बोला सेठजी।
- 50:25मैंने कहा भाई मैं कोई सेठ वगैरह नहीं, मैं तो तेरे जैसा ही हूँ
- 50:33कहता मुझे कोई यहाँ पर काम मिल जाएगा।
- 50:38मैंने कहा क्या काम कर सकते हो? कहता यही मजदूरी का ढोलू?
- 50:48मैंने कहा ठीक है, चल तू भी लग जा।
- 50:51सट्टे में पैसा आया चोरी का माल डांगों के गच तो मैंने कहा चल तू
- 51:02भी लग जा। कोई नहीं।
- 51:05देने वाला और दे देगा जब उसने इतना दे दिया बिना मांगे की नहीं।
- 51:13मैंने तो मांगा भी नहीं। तू यहाँ बात समझो, मैंने पंछियों
- 51:21का दर्द समझा। और।
- 51:24कर्ज लेकर मैंने चौंका। डाला तो परमात्मा।
- 51:29ने मेरी आत्मा की। पुकार देखी।
- 51:33उसने मुझे स्वयं। आके कहा तुम मांगता?
- 51:36तो है नहीं, अब मुझे ही तुम्हें देना पड़ेगा।
- 51:43जा तुम छती से लगा। ले फिर।
- 51:47चूक गया तो फिर कहे कि तू आज लगा ले फिर लगा ले देने वाला ज्यादा
- 51:53भली है और उसको सबका ध्यान। यह मेरी जिंदगी की बीती हुई बातें
- 51:59हैं। किसी प्राणों करणों में लिखी हुई
- 52:02बातें नहीं, मेरे जीवन के साथ घटी हुई घटनाएं और बहुत बार व्याख्यात
- 52:08यज्ञ सा कर चुका हूँ।