Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Dec 25 - तामस ग्रंथि और चेतना का रहस्य! मेलाटोनिन–सेरोटोनिन का गुप्त ज्ञान! प्रबुद्धता का विज्ञान!
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- 0:23हरप्रीत सिंह, थ्रो बाई लैंड क्या होती है?
- 0:33तामम ग्रंथी क्या होती है? इस संदर्भ में बहुत से प्रश्न
- 0:45अन्य भी है। अध्यात्म के गहनतम प्रसंगों में
- 0:53से ये एक है। बड़े दूरगामी शाखाओं के विस्तार
- 1:02आएँगे। थोड़ा खेलता से सूक्ष्म बुद्धि से
- 1:12समझने की चेष्टा कीजिएगा। आपने सुना होगा।
- 1:28हिंदू पंचांगों में देवशरनी व्यास देवउठनी व्यास ये दो चीजें होती
- 1:40हैं। आपने रामायण के भीतर कुंभकर्ण की
- 1:51कहानी भी सुनी होगी जो छह महीने सोता था।
- 1:59छः महीने के बाद तक पहली बात आपको समझा दूँ।
- 2:09दीज़ आर ऑल दी सिम्बोलिक अब्रीविएशन प्रतीकात्मक चिन्ह हैं
- 2:24सारे। क्षीरसागर में विष्णु का शो जाना
- 2:35और क्षीरसागर में विष्णु का जग जाना।
- 2:45देवोचन ग्यारस, देवशयनी ग्यारस कुंभकरण का छह महीने सो जाना छह
- 3:03महीने जॉर्ज। सभी प्रतीकात्मक चिन्ह किस चीज़
- 3:11के आध्यात्मिक तट हैं? जैसे हम आज उस साइंस को सिम्बोलिक
- 3:21रेप्रेसेंटेशन्स में लिखते हैं पानी?
- 3:24टेक्स्ट टु ओह ज़रा ध्यान से सुन लो पानी को हिंदी में पानी कहेंगे
- 3:37उर्दू में आप कहेंगे शायद अंग्रेजी में वाटर कहेंगे?
- 3:44नाम बदल जाते हैं भाषाओं में, लेकिन साइंटिफिक नाम एक ही रहता
- 3:50है। क्या ऐसे तो ठीक है?
- 3:56ऐसी ही साइंटिफिक भाषा अध्यात्म में केंद्र की भाषा है।
- 4:01वह एक है। यह है सेंटिफिक भाषा है एच टू यह
- 4:13नहीं बदलते किसी भी धर्म का व्यक्ति बढ़ेगा हिंदू हो, मुसलमान
- 4:18हो, सिख हो, ईसाई हो, पादरी हो, यहूदी हो।
- 4:24अब। पानी को पड़ेगा।
- 4:29हेच टू ओह की तरह इसलिए झगड़ा नहीं होगा।
- 4:38झगड़ा होता है। जब हम बुद्धि को बुद्धू बना लेते
- 4:47हैं, बुद्धू का काम बुद्धू का काम बुद्धू करने लग जाते हैं तब झगड़े
- 4:56पैदा हुए। आइएगा।
- 5:02यह प्रश्न बड़ा गहरा अध्यात्म से संबंधित है।
- 5:07आपकी बहुत सी गांठें घोलेगा आपको बहुत सी नए आयाम दिशाएं दिखाएगा।
- 5:15पाग के पग को पथ को प्रज्वलित करेगा, रोशनाई से भरेगा हमारे
- 5:25प्राचीन ऋषियों ने सनातन धर्म के और जैन धर्म के।
- 5:35ऋषियों ने खोजें करके ये पाया के वर्ष भर के 12 महीनों में चार
- 5:46महीने ऐसे होते हैं जब ब्राह्मण से कुछ अज्ञात करने।
- 5:57धरती पर गिरते हैं और उन किरणों का नाम तामस किरणें कहते हैं।
- 6:11इन चार महीनों के दौरान। तामस किरणों को पी जाता है हमारे
- 6:21हाइपोथैलमस जो दिमाग में है हाइपोथैलमस के पास पड़ी एक ग्लैंड
- 6:28है। पीनियल ग्लैंड।
- 6:31पीनियल ग्लैंड के बिल्कुल दाईं ओर एक छोटी सी ग्रंथि और भी है।
- 6:39जीसको कहते है त्रमवाय ग्लैंड तमस ग्रंथि।
- 6:52तेरे से सुनते जाना ये वैज्ञानिक शब्द हैं, अब मैं सरलता से अनवाद
- 6:57करूँगा। इसका वर्ष भर में चार महीने ऐसे
- 7:04होते हैं। जब ये किरने ऊपर से उतरती हैं
- 7:13ब्रह्मांड में से यह खोज की थी हमारे ऋषियों ने, उर्वशी संबंधित
- 7:20थे सनातन धर्म से और जैन धर्म से। एक बात कॉमन है दोनों धर्मों में
- 7:32आपको जानकर आश्चर्य होगा सनातन धर्म में देव सो जाते हैं चार
- 7:41महीने और जैन धर्म में बिल्कुल इन्हीं चार महीनों में।
- 7:50चमासा कहते हैं, चित्र मास बिलकुल इन्हीं चार महीनों में ऋषियों की
- 7:59खोजें बराबर बनी। ये चार महीने कौन से हैं?
- 8:05आषाढ़ के शुक्ल पक्ष के क्या स्थित है?
- 8:12से लेकर कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की 11 स्तिथि कार्तिक शुक्ल
- 8:22एकादश और आषाढ़ शुक्ल एकादश। ये चार महीने बीच के तमस्य।
- 8:32होते हैं, जब तमस की तरंगें ब्राह्मण में से उतरती हैं और
- 8:41मारी पीनियल ग्रैंड के पास पड़ी हुई तमस ग्रंथि को।
- 8:49समाहित कर लेती हूँ, उसको आच्छादित कर लेती हूँ, उसमें समझ
- 8:55जाती हूँ। दोनों धर्मों ने इसकी खोज की थी।
- 9:04यद्यपि तब तक जैन धर्म सनातन धर्म से अलग हो गया था।
- 9:11सनातन धर्म की पांचवीं पीढ़ी जैन धर्म की पहली पीढ़ी थी।
- 9:17ऋषभदेव। उसको ऋषभदेव भी कह सकते हो।
- 9:23ऋषभदेव भी कह सकते हो। सनातन धर्म शुरू होता है मणु जी
- 9:30महाराज से और जैन धर्म शुरू होता है वृषभदेव से।
- 9:37इन दोनों की खोजें समान। 12 महीनों में से चार महीने ऐसे
- 9:44होते हैं जिसमें एक विशेष तरह की ऊर्जा उतरती है और हमारी एक विशेष
- 9:53ग्रंथि को प्रभावित करती। है।
- 9:58उस गलती को तामस गलती कहते हैं और उन किरणों को तामस किरण कहते हैं,
- 10:09ठीक से समझा के तुम आगे और विस्तार करता हूँ।
- 10:18स्नातक ने कहा विष्णु भगवान क्षीर सागर में सो जाते हैं।
- 10:25क्षीर सागर की कल्पना ही एक सिम्बोलिक अब्रीविएशन है।
- 10:35क्षीर सागर। हमारे शरीर में खून की संरचना का
- 10:42अनुपात जो नमक होता है वो बिलकुल समुद्र में नमक के बराबर होता है।
- 10:52यह सागर की तरह है। बेहतर का क्षीर सागर ब्लड में भी
- 11:00उतनी ही मात्रा में नमक होता है जितनी मात्रा में समुद्र में नमक
- 11:05होता है तो उसके भीतर भगवान विष्णु छुर जाते हैं।
- 11:13यह सिम्बोलिक्री प्रेजेंटेशन से यह प्रतीकात्मक चिन्हित ऋषू ने तो
- 11:23जिंदा रखना चाहा कि अगर जिंदा रहना है किसी चीज़ को तो इनको
- 11:29सिंबल्स में ही रखना होगा। जैसे कभी गलत नहीं सोचा जा।
- 11:34सकता पानी नीर आग ये बदल सकते हैं कल को भाषाएं खो सकती हैं एक
- 11:44वैज्ञानिक भाषा सदा ही सभी जगह पे।
- 11:49उसका मतलब एक ही समझा जाएगा। बाकी की भाषाओं का मतलब समझा जाए
- 11:54या न समझा जाए। एच टू ओह का मतलब सभी समझाए।
- 11:59सभी धर्म के लोग समझाएंगे कि ये पानी है सनातन धर्म में आप पंचांग
- 12:11लेखा। जैसे ही आषाद शुक्ल की 11 साल
- 12:16एकादश तो देव सुजाई देव शयनी ग्यारस कहते हैं।
- 12:25उन्हें। इस साल 2521025 में।
- 12:32आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी 7 जुलाई 2025 को देव सो जाएंगे और देव
- 12:41उठेंगे हरी उठेंगे, विष्णु उठेंगे कब?
- 12:4631 अक्तूबर 2025 को। इन चार महीनों में।
- 12:52कोई भी संसारिक की शुभकामनाएं होगी।
- 12:56हमारे पंचांग के हिसाब से, सनातन के हिसाब से और जैन धर्म के हिसाब
- 13:02से जैन धर्म में भी व्रत उपवास। शास्त्र विद्या का अध्ययन होता
- 13:16है। ये चार महीने अध्यात्म के लिए रख
- 13:20दिए गए। उसका कारण तुम जानकर हैरान हो गए
- 13:28क्योंकि हमेशा ही। ध्यान की गहराइयां तमो गुण में
- 13:39छुई जाती हैं, इस बात को सुनकर बहुत से लोग हैरान भी हो जाएंगे।
- 13:50अध्यात्म के गहरे दल अंधेरे में छुए जाते हैं।
- 14:00सत्व गुण में अध्यात्म के दल नहीं छुए जाते।
- 14:06एक एक शब्द को गोर से समझोगे तो समझा जाएगा रजो गुण में अध्यात्म
- 14:15के तल नहीं छुए जाते हैं, ऊपर ऊपर रह जाओगे।
- 14:22सत्व गुण में तो बिल्कुल ही ऊपर रह जाओगे।
- 14:25दान पुण्य कर्म क्रिया इन चक्रों में उर्जाओगे और रह जाओ गुण में
- 14:34काम धान व्यापार इन कामों में लग जाओगे।
- 14:41लेकिन जब आएगा तुमको तो तम से छाने लगेगा, अलग से छाने लगेगा
- 14:53तुम्हारे शरीर की और मन की मस्तिष्क की इन्द्रियां शीतल होने
- 14:57लगेंगी। तुम्हारी न्यूरोनिटी ढीले पड़ने
- 15:01लगेंगे। ध्यान से सुनते रहना तमस के कारण
- 15:11ही तुम ध्यान में उतरोगे लेकिन तमस सजे सजे होना चाहिए।
- 15:18ये बात का ध्यान रख लो, इतना भी तमस नहीं होना चाहिए कि तुम पूरे
- 15:28सो ही जाओ, इतना सा होना चाहिए कि बस।
- 15:39तुम अपने आप को खोने में सहायता कर सको रात सुरक्षित जाता है और
- 15:54दोषकाल होता है। पर दोष काल के बाद निश्चित का
- 15:59रास्ता है। अंधेरा होने लगा।
- 16:06सूरज नहीं रहा तो क्या हुआ? एक हार्मोन का निर्माण होना शुरू
- 16:19हो गया। जैसे ही सूर्य धरा सांज भी एक
- 16:28हार्मोन जिसका नाम मैलाटोनियन। मैलाटोनिन का निर्माण होना शुरू
- 16:35हो जाता है और आप ध्यान से सुन लेना बात ये मैलाटोनिन साल्ट
- 16:45तुम्हें देता है नींद तमस। और यह तुम तुम्हें ले जाता है
- 16:53ध्यान में, लेकिन ध्यान रखना इसकी गोलियां भी उपलब्ध हैं बाहर ये
- 17:00ज्यादा मत खा जाना विथाउट मेडिकल प्रैक्टिशनर के प्रिस्क्रिप्शन के
- 17:09बिना। इन दवाओं का सेवन मत करना कतई
- 17:16मेलाटोनिन बाहर से भी लिया जा सकता है।
- 17:22मेराटोनिन बाहर से सीधे सीधे नहीं लिया जा सकता, लेकिन सेराटोनिन को
- 17:28बूस्ट करने के उपाय। वो अलग से हैं तभी बाद में बात
- 17:32करूँगा। अभी बात नहीं चल रही है, ये अभी
- 17:36बात चल रही है ध्यान की समाप्ति की आम तो से तुमने देखा होगा।
- 17:54जो भी लोग समाधि में पहुंचे अरुणोदय काल हो।
- 18:01महावीर अरुणोदय काल में पहुंचे बुद्ध हुई सुबह सुबह पहुंचे।
- 18:08रात छँटी नहीं थी पूरी नानक भी रात को पहुंचे अंधेरे में बहुत
- 18:26अक्सर। 99% लोग दिन में नहीं पहुंचते।
- 18:36आपको जानकर हैरानी होगी 1% व्यक्ति ही दिन में संबोधित
- 18:44उपलब्ध होते हैं। बाकी सूरज उदय नहीं हुआ होता।
- 18:49अरुणैताकार या सूरज छप गया होता है परदोषकार निषिद्धकार उस में ही
- 19:01उपलब्ध हुए। आमतौर से तुम किसी भी ऋषि।
- 19:05किसी भी प्रबुद्ध व्यक्ति का जीवन खंगाल लेना तुम्हें एक चीज़ कॉमन
- 19:11मिलेंगे। रात के अंधेरे में जब तम से गहरा
- 19:17था तब वो संबोधि का उपलब्ध। इस समस का अंधेरी का क्या संबंध
- 19:27है प्रबुद्धता के साथ जबकि संबंध तो होना चाहिए।
- 19:33सत्व गुण का न सत्व गुण आप में अच्छे विचार पैदा करता है।
- 19:41रजोगण आप में मिश्रित विचार पैदा करता है, पापु भी पुण्य भी एक
- 19:50वेला होगा, तुम्हारे मन में होगा के दान कर दें, एक वेला होगा
- 19:55तुम्हारे मन में होगा के छीन ने यह रजोगण है।
- 20:01सत्य गुण शुद्ध है इसलिए सुबह सुबह भिखारी आपके द्वार पे आता है
- 20:09सुबह सुबह सत्य गुण है अभी तरो ताजा हो तुम।
- 20:19अभी मेलोटोनिन पैदा नहीं होना शुरू हुआ है।
- 20:23अभी रात बीत गई तमास का प्रभाव अभी बहुत देर तलक आएगा।
- 20:34दोपहर में आप रजो गुण से भरे होते हैं।
- 20:39और संध्या। होती ही है।
- 20:40और दोष काल में सूर्य छपते हैं। मेलाटोनिन इसको याद रख लेना,
- 20:45मेलाटोनिन नाम का हार्मोन पैदा होना शुरू हो जाता है।
- 20:48ध्यान रखना ये रौशनी में नहीं पैदा होता।
- 20:52सिर्फ अंधकार में पैदा होता है मेलाटोनिन।
- 20:57सूर्य अस्त हो जाए छुप जाए तो आप देखोगे पक्षी परिंदे अपने घोंसलों
- 21:06को वापस लौटने लगे हैं। क्या हुआ इनके भीतर?
- 21:13मेलाटोनिन पैदा होना शुरू हो गया। उवासिया आने लगीं, आलस आने लगा,
- 21:23खून ठंडा पड़ने लगा, रज खत्म हो गया, सत्व खत्म हो गया तब असर हो
- 21:29गया। अब तो ये जानकर बड़ा आश्चर्य
- 21:34होगा। कि स्मृति तमश के द्वारा घटित हुई
- 21:39एक घटना प्रगाढ़ अंधकार कई घटना घटती है और इसलिए इसके देवता हैं
- 21:48शिव शिव मृत्यु का देवता। यानी तमस के देवता है।
- 21:56काल के देवता है और तामसिक वस्तुओं का सेवन करते हैं।
- 22:06भगवान शंकर खीर नहीं खाते हैं। पता है आपको नहीं?
- 22:12भगवान शंकर बाग, धतूरा, गांजा इनका सेवन करते हैं।
- 22:22ये सब तामसिक बस्ती हैं। क्यों करते हैं और फिर?
- 22:29जब इनका असर उनके ऊपर नहीं होता, तुम ऐसा मत करना तुम्हें मैं बता
- 22:33दूँ गलती मत खा जाना तुम्हें समझाने के लिए बता रहा हूँ तुम बस
- 22:46न ब्रह्मा पहुँचेंगे, न विष्णु पहुँचेंगे, शिव पहुँचेंगे।
- 22:53शव शिव एक रास्ते से नहीं पहुँचेंगे।
- 22:56शिव अनेक रास्तों से पहुँचेंगे। इसलिए शिव पार्वती को समाधिष्ट
- 23:04होने के 112 तरीके बता देते हैं। विज्ञान भारत तंत्र में।
- 23:13तमोगुन के बिना नींद नहीं आती और तमोगिन के बिना समादेष्ट नहीं हुआ
- 23:22जाता। तुम्हें जानकर बड़ा आश्चर्य होगा
- 23:27और प्रथम बार तुम सुन रहे होंगे। आँखों का मरम मत मैं जो बोल रहा
- 23:36हूँ शिव के अनुभव से और स्वयं के अनुभव से बोल रहा हूँ संतों के
- 23:41अनुभव से बोल रहा हूँ ऋषियों के अनुभव से बोल रहा हूँ ये चार
- 23:48महीने जो बनाए गए। इनमें कोई भी सांसारिक शुभकाम
- 23:55नहीं हो सकता। ध्यान से समझ लो आषाढ़ शुक्ल
- 24:02एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक।
- 24:06इस 7 जुलाई 2025 से 31 अक्तूबर 2025 तक सनातन धर्म में कोई
- 24:14शुभकाम नहीं होगा। संसारिक।
- 24:23कोई दुकान नहीं खुलेगी, कोई गृह प्रवेश नहीं होगा, कोई विवाह है,
- 24:27शादी नहीं होगा। कारण अब सुनिए कारण क्या है,
- 24:36क्योंकि तमस में। तुम्हारी बुद्धि की निर्णायक
- 24:42क्षमता कमजोर हो जाती है, तुम ठीक से फैसला नहीं ले सकते, तुम संचय
- 24:53की स्थिति में फैसला लेते हो। और भगवान कृष्ण ने कहा है शंश्य
- 25:00आत्मा विनिश्चित हो शंश्य से फैसला मत लो अर्जुन तुम्हारा
- 25:08विनाश हो जायेगा तुम्हें इस वक्त लड़ना चाहिए तुम इस वक्त।
- 25:15जैन मुनि बनने की कोशिश कर रहे हो, ये तुम्हारी धारणा गलत है।
- 25:22तुम अपना कर्तव्य पहचानो और अपने कर्तव्य क्रम में जुट जाओ माँ
- 25:29मुनव्वर युद्ध इन चार महीनों में भ्रमण से ऐसी किरणें उतरती हैं
- 25:46जिनको ताम्र से किरणें कहते हैं वो हमारी पीनियल ग्लैंड के बिलकुल
- 25:51पास अब जरूरी नहीं है। कि तुम साइंटिस्टों को जैसे चकर
- 25:57नहीं दिखे, कुंडली नहीं दिखी, परमरेंद्र नहीं दिखा तो जरूरी
- 26:03नहीं है कि तुम्हें यह ताम्र सगृद्धि दिख जाए कि मैं तुम्हें
- 26:09पहले ही समझा दूँ। कल को तुम्हारे प्रश्न आए तो मेरे
- 26:13पास कोई जवाब नहीं इसका। क्योंकि ये अनुभव की बात है जो
- 26:19चीज़ तुम समझ सकते हो वो तो तुम समझोगे, मैं लैटर नहीं, तुम समझ
- 26:22जाओगे, इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ रात को नींद पूरी कर लिया करो।
- 26:34रात को 1:30 बजे उठ के दुष्ट दर्शन मत किया करो, नींद खराब तो
- 26:41जगत खराब, जिंदगी खराब रात को जागो।
- 26:46मत। वह आध्यात्मिक प्रक्रिया है।
- 26:52इट एस ऑल्सो री। सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन।
- 26:56यह भी प्रतीकात्मक चिन्ह चाहिए। रात को जागो वह आध्यात्मिक
- 27:03प्रोसेसर है वह कभी फिर इसके ऊपर बात करूँगा।
- 27:09सोई में भी कैसे जागना है? कैसे?
- 27:13भगवान कृष्ण कहते हैं शरीर तुम्हारा सोया हुआ है, लेकिन शरीर
- 27:22के सोने के भीतर भी एक ज्वाला निरंतर तुम्हारे भीतर जग रही है।
- 27:31उसमें आरूढ़ होना है, उसको पहचानना है।
- 27:36तो भगवान कृष्ण ने कहा जब तुम्हारा संसार सो जाता है तो
- 27:42मेरा योगी जागता है। मेरा योगी कौन?
- 27:48वह तत्व। जीसको स्थिति पर के कहते हैं
- 27:51भगवान कृष्ण वह तत्व सदा जागता रहता है, कभी नहीं सोता, उसमें
- 27:56तमौ गुण नहीं होता ना उसमें तत्व गुण होता है, ना राजौ गुण होता है
- 28:03वह त्रिगुणा तीर्थ। है।
- 28:06त्रिगुण से पार। तो ये चार महीने संसारिक फैसला मत
- 28:17लेना क्योंकि तुम तुम्हारा चित चिन्ह्सा की स्थिति में।
- 28:27भ्रमण से रेंज उतर रहीं तमसी और वो तुम्हारी तमश ग्रंथि को
- 28:37इफेक्टेड कर रहे है, ले रहे है उसी से आना फैसला।
- 28:48और ये तमिस की किरणें तमस ग्रंथि को है।
- 28:51बिल्कुल पिच्यूटरी ग्रंथि क्षमा करना पिनील ग्रंथि के पास पड़ी
- 28:57हुई है। सच में तो पिनील ग्रंथि भी आप ठीक
- 29:01से पहचान नहीं सके? आप ठीक से पहचान पाए पिच्यूटरी
- 29:06को? पीनियल ग्रंथि आज भी तुम्हारे लिए
- 29:10कुछ अजूबा और कुछ समझ में आया। पीनियल ग्रंथि के पास जो तमश
- 29:18ग्रंथि है, तमश ग्रंथि है उसको तो तुम।
- 29:23बिल्कुल नहीं समझ पाओगे। जैसे ही चक्करों को नहीं समझ पाए,
- 29:27ब्राह्मणत्र को नहीं समझ पाए। कुंडली शक्ति को नहीं समझ पाए।
- 29:31ऐसे ही तुम इस ग्रंथी को भी नहीं समझ।
- 29:33पाओगे? इस ग्रंथी से ब्रहमंड में इन चार
- 29:41महीनों में लगातार कोंसेटली दिन भर रात।
- 29:47ऐसी रेंज गिरती है कि तुम्हारी ये ग्रंथि पी जाती है और ये तुम्हारे
- 29:52हाइपोथेल्मस के पास पीनियल ग्लैंड के बिल्कुल पास ही ग्रंथि है।
- 29:58तुम्हारे सभी के शरीरों में तो हमारे सनातन ने कहा विष्णु सो
- 30:06जाते हैं? चार महीने जैन धर्म ने कहा ये
- 30:15चैत्र महाशय कहीं जनन बस अध्यात्मिक कर्म करण।
- 30:25ध्यान करो जो भी आपके जैन धर्म में आपको बताया गया है वही करो,
- 30:32नमस्कार करो, नमो अरे हंता अणम नमो सिद्धानम नमस्कार करो, नमन
- 30:40करो, जोगने की प्रक्रिया सीखो। विच्छत नेवी नानकात गुण चंगईया तत
- 30:55झोंकने की कल बहुत। बड़ी कला है।
- 31:00तो इन चार महीनों में शुभकर्मों से क्यों रोका गया?
- 31:04शादी ना कर नया घर ना प्रवेश करो, नई दुकान ना खोलो कोई नया डिसीजन
- 31:14ना लो। सांसारिक बातों के बारे में बोल
- 31:21रहा हूँ अध्यात्म के लिए तो इन चार महीनों में क्या?
- 31:24छूट दी गई है। सनातन चार महीनों में छूट दी गई
- 31:31है अध्यात्म के। क्योंकि इन चार महीनों में अभी
- 31:47शिवरात्रि आ जाएगी तो सबसे बड़ा त्यौहार और शिवरात्रि के बाद।
- 31:56दीपावली आ जाएगी। कार्तिक अमावस्या कार्तिक
- 32:03अमावस्या के बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी को देव उठेंगे दो त्यौहार
- 32:13तुम्हारे। बड़े त्यौहार और भी बहुत आयेंगे,
- 32:18लेकिन ये दो त्योहारों के बीच में जो वक्तकार।
- 32:21होगा उसमें सांसारिक फैसले मत लेना, आध्यात्मिक क्रियाएं करना
- 32:28क्या ध्यान इस वेला में? प्रश्न है हरप्रीत का कि बच्चों
- 32:41को क्या कराया जाए? जब वो 12 वर्ष की उम्र के हो जाएं
- 32:48तो उनको क्रिया योग करवाया जाए। क्रिया योग?
- 32:54लम्बा सास खेचो नाक से खेचो और पूरे का पूरा सांस एकजैल कर दो
- 33:08उलट दो बाहर। खूब की आवाज निकलेगी स्वभाव्यताएं
- 33:15खूब खूब टैक्सेल करो इनहेल करो क्रियायुक्त सखाओ बच्चों को जब
- 33:26भारत सड़कों। और उसके बाद लगातार क्रिया योग
- 33:35करते हो। इससे क्या क्रिया योग से तुम्हारे
- 33:42भीतर की यह ग्रंथ थी कौनसी ग्रंथ? थी।
- 33:48तामस ग्रंथ थी। सक्रिय हो जाएगा।
- 33:56फिर क्या तुमने देखा होगा तुम सभी का अनुभव होगा क्योंकि क्रिया आज।
- 34:05लोगों को करते करते 5 साल तो हो ही गए कम से कम क्योंकि मुझे
- 34:09बोलते को 5 साल तो हो गए। तुम्हे हल्का हल्का जरूर आएगा,
- 34:16नशा सा आएगा, कुमारी सा आएगा, धीरे धीरे तुम्हारी चिंताएं खत्म
- 34:22होने लगेंगी। और एक वेला ऐसी आएगी कि तुम्हें
- 34:27नींद आ जाएगी, उस नींद के काल में तुम्हें कोई चिंता नहीं होगी जैसे
- 34:34तुम रात को सो जाते हो। गहन नेत्र में और कोई चिंता नहीं
- 34:38होती, वैसे ही योग नेत्र आएगी। हो?
- 34:44जो यह निद्रा आएगी। क्रिया योग के बाद तामस ग्रंथी
- 34:50तुम्हारी सक्रिय हो जाएगी और तामस ग्रंथी के सक्रिय होने से देखिए,
- 34:57तमस गुण नहीं आएगा, इस बात का ध्यान रखना तमस वाइब्रेशन जाएंगे।
- 35:05कभी गुण मत समझ लेना इसको मैं अध्यात्म की भाषा बोल रहा हूँ।
- 35:11वह प्रकृति की भाषा है, सत्व गुण राजगुण उससे मेरा कोई मतलब नहीं।
- 35:19ताम्र ग्रंथी के सक्रिय होने का मतलब आध्यात्मिक ग्रंथी से।
- 35:25सक्रिय होने से है तुम्हारी जो रजो गुण, तम्मगुण और सत्व गुण
- 35:31हैं, यह तो प्रकृति में चलंत रहेंगी, बदलते रहेंगे।
- 35:37लेकिन यह जो तामज गुण है, गुण नहीं है, यह ग्रंथी है।
- 35:42तमस ग्रंथी का सक्रिय हो जाना, यह तुम्हें योग नित्रा देगा।
- 35:51मैं फिर बोल रहा हूँ कहीं तुम इस तमस को तमों गुण के साथ मत जोड़
- 35:57लेना। भगवान शंकर तमश में नहीं है,
- 36:04भगवान शंकर तमश किरणों में हैं और दीज़ रेन्स।
- 36:12अरे डिफरेंट फ्रम युअर तमश गुण तमश किरणें।
- 36:20और तम्मो गोण ये दो चीजें हैं इसको डिफ्रेंशीएट मैं भी कर दूँ,
- 36:26नहीं तो नहीं जाओगे। यह तमस गुण का प्रभाव बढ़ना,
- 36:33तुम्हारी आध्यात्मिकता में वृद्धि करे और जैसे तुम स्वास्थ्य
- 36:38खींचोगे क्रिया योग। करोगे क्रिया योग करने की विधि
- 36:45मेरे सभी शिष्यों को भी पता है और प्रवचन भी बहुत हुए हैं।
- 36:52बहुत बार इसको करने की विधि रोहित ने भी बताई है।
- 37:00नाक से सांस लो, पूरा फेफड़ा भर लो, थोड़ी देर रोकना है तो रोक
- 37:05लो, कोई बात नहीं लेकिन उसको मुख से बाहर फेंक।
- 37:10दो। फिर बाहर थोड़ी देर रोकना है तो
- 37:14रोक लो, कोई बात नहीं, नहीं रोकना है तो मत रोको।
- 37:19लगातार तुम ये क्रिया करोगे छोटे बच्चे से थोड़े से शुरू करते हो।
- 37:251020 से शुरू करना फिर अपनी कैपेसिटी के अनुसार उम्र के
- 37:29अनुसार बढ़ा सकता है। मैं 2000 तक ये क्रियाएं करता था
- 37:33एक बार में। और 40 वर्ष तक लगातार मैंने यकनै
- 37:40थी। तमस ग्रंथी और तम्म गुण का फर्क
- 37:48आपको मैंने डिफ्रेंशीएट मैंने कर दिया है इन चार महीनों में ये तमस
- 37:55ग्रंथी ब्राह्मण की उन। किरणों से प्रभावित होती है और
- 37:59जागृत हो जाती है। यही ताम्र ग्रंथि तुम्हारे क्रिया
- 38:04योग से बिना इन चार महीनों के भी जागृत हो जाएगी।
- 38:09मैं ये कहना चाहता हूँ तो इसका मतलब इन चार महीनों में क्रियोग न
- 38:14करें, बिल्कुल करें। इन चार महीनों में तुम्हारा
- 38:18क्रिया योग करना ज्यादा बेनेफिशियल होगा लाभदायक क्योंकि
- 38:24वातावरण भी है। बाहर से रेंजील भी आ रही है, जो
- 38:30कि तुम्हारी तमस ग्रंथि को जागरूक कर रही हैं।
- 38:34और इधर से तुम क्रिया योग भी कर रहे हो तो दुगणा प्रभाव होगा।
- 38:39तुम जल्दी से अपने में उतर जाओगे। अपने गहरे तल को छूने में कारगर
- 38:49सिद्ध होगा। तो?
- 38:53भगवान शंकर तमस के देवता कहलाये तमस गुण के नहीं, ध्यान रखना तामस
- 38:59ग्रंथि के तमस रेंज के विष्णु रच। अब ब्रह्मा सत विष्णु सो जाती चार
- 39:20महीने सोने का अर्थ क्या हुआ? सोने का अर्थ ये हुआ कि तामस
- 39:29भ्रमण से निकलती हुई। करने तुम्हारी इस ग्रंथि को
- 39:34अक्टिवेट कर देंगे जैसे तुम्हारी पीनियल ग्लैंड सांज ढलते ही सूरज
- 39:44छपते ही अंधेरे में हार्मोन पैदा करती है।
- 39:48क्या मेलाडोन? सूरज डूब जाता है, अंधकार हो जाता
- 39:56है। अंधकार में हमारी पेनियल ग्लैंड
- 40:01मैलाटोनेन नामक हार्मोन को पैदा करना शुरू कर देती है क्योंकि
- 40:07मैलाटोनेन नामक शर्ट। हार्मोन्स अंधेरे के बिना पैदा
- 40:13नहीं होता यार वो सुनाई में नहीं पैदा होता।
- 40:18अब दूसरी बात थोड़ी सी अप्रसंग जो है देख के बता दो दिन के उजाले
- 40:24में होता है सैराटोन पैदा। अगर तुम खुशी का हार्मोन पैदा
- 40:29करना चाहते हो सेराटोनिन मैं रात को नहीं पैदा होगा, रात को तो
- 40:38तुम्हारा सेराटोनिन भी मेलाटोनिन में बदल जाएगा।
- 40:44ताकि तुम्हें नींद गहरी आ जाये। प्रकृति भी तुम्हारी सहायता करती
- 40:49नींद को गहराने में प्रकृति भी तुम्हारी सहायता करती नींद अमूल्य
- 40:55निधि है परमात्मा की इसे चुप मत जाना, यह संतों के दर्शन करने में
- 41:01मत चूक जाना जागरण करने में। माँ माँ करने में रात मत गुजार
- 41:07देना, यह रात की वेला बड़ी लाभप्रद हो सकती है तुम्हारे लिए
- 41:12बड़ी। शुभ हो सकती है।
- 41:14इस रात में तुम इस अंधकार में तुम अपनी सरोशनायी का दर्शन कर सकते
- 41:20हो। सांझ डलते ही मेलाटोनियन पैदा
- 41:28शुरू हो जाता है वैसे ही इन चार महीनों में तामस रेंज ब्राह्मण से
- 41:35उतरती है और हमारी तामस ग्रंथि सक्रिय हो जाती है।
- 41:41मेलाटोनियन पैदा करती है पीनियल ग्लैंड।
- 41:44हमारे भीतर जो थैलमस के पास पड़ी है, हाइपोथैलमस के पास पड़ी है और
- 41:51पीनल ग्लैंड के बिल्कुल पास पड़ी है।
- 41:53तामस्करन और उसकी लोकेशन मैंने आपको सुना था तो थोड़ा ब्रेन के
- 42:01मध्य भाग के। दानी और चलोगे तो तुम्हें खुजलाहट
- 42:05भी होगी। थोड़ी सी कभी कभी ध्यान में भी
- 42:08तुम्हें खुजलाहट होगी। कभी कभी योग निद्रा में भी इस
- 42:12संस्थान में तुम्हें खुजलाहट होगी।
- 42:15क्या होगा वो तमसग्रंथी अक्टिवेट हो रही है इन चार महीनों में?
- 42:23क्यों रोका गया संसारिक शुभ कामों से?
- 42:28क्योंकि इन चार महीनों में तुम करीब करीब जिसे खुमारी कह देते
- 42:36हैं, खुमारी अवस्था बड़ी प्यारी। जिसे हम मदहोश ही कह देते हैं।
- 42:45अवस्था बड़ी प्यारी इन चार महीनों में मदहोश ही की अवस्था को बढ़ाना
- 42:55यह तामित संकरणों से तुम्हें मदोसी की अवस्था मिलेंगे।
- 42:59और क्रियायुग से जैसे तुम क्रियायुग करने के बाद मदहोश से
- 43:03हो जाते हो, नींद सी आने लगती है, खुमार सा छा जाता है और तुम सो
- 43:11जाते हो। वह ऐसी नींद नहीं है जो तुमने रात
- 43:15को ली। यह नींद बिल्कुल उससे अलग है।
- 43:19क्वालिटेटिव डिफरेंस बिटवीन दी टू रात की नींद में और योग निद्रा
- 43:25में क्वालिटेटिव फर्क गुणात्मक फर्क योग निद्रा रात की सुसूक्ति
- 43:35की निद्रा जैसी नहीं होती। यह उससे बिल्कुल अलग होती है।
- 43:39यह करी की व जागृति की निद्रा के बराबर होती है इसलिए इसको योग
- 43:43निद्रा कहते हैं क्योंकि वह मिलन की नींद है।
- 43:49काहे में मिलन थी परमात्मा में मिलन थी योग निद्रा यानी परमात्मा
- 43:55से। प्रेम का मिलन प्रेसी और प्रेमी
- 44:00मिल गए। योग हुआ उस सम्मेलन को उत्पन्न
- 44:07करती है जो निद्रा जो रिलैक्सेशन उसको योग निद्रा कहते।
- 44:13हैं। आपने अक्सर ये सुना होगा बड़े
- 44:19बुजुर्गों से हमारे पुराने बूढ़े बुजुर्गों से किसी भी शुभ काम को
- 44:27बनाने का कार्यक्रम रात को नहीं करना है।
- 44:31जरूर आपको पता होगा इस बात को। आपके बड़े बुजुर्गों ने यह बात आप
- 44:36से कही होगी। कभी मैं कहता हूँ कि सिंबल जो बचा
- 44:42दिए गए हैं, सिंबल का अर्थ बताने वाला कभी कोई ना कोई आ जाएगा
- 44:49लेकिन सिंबल होनी चाहिए। एसिड टू वो क्या है?
- 44:51उसका मतलब क्या है? बताने वाला कोई ना कोई साइंटिस्ट
- 44:54मिल जाएगा आपको कभी ना कभी कहीं ना कहीं लेकिन नीर क्या है, वाटर
- 45:01क्या है, पानी क्या है, जल क्या है, आप क्या है?
- 45:05ये खोल सकते है। सिंबल को जानने वाला कोई न कोई
- 45:11कभी न कभी कृषि क्षेत्र में दुनिया के कोई न कोई कभी मिल
- 45:16जाएगा अगर वाशपाई खो जाती है। तो?
- 45:23तो आपने सुना। होगा कोई रात को आप बैठे प्लानिंग
- 45:28कर रहे हैं? तो कोई बूढ़ा बुजुर्ग बोला होगा
- 45:32की नहीं, रात को नहीं प्लानिंग करना है तुमने रात को प्लानिंग
- 45:38नहीं करना होता है। क्या रात को तुम्हारी मलाटोनिन
- 45:46हार्मोन का प्रभाव ज्यादा होता है?
- 45:50और मलाटोनिन हार्मोन का प्रभाव जितना ज्यादा होगा, उतनी ही दिमाग
- 45:56में मस्ती होगी। ये बुरा नहीं है।
- 45:59ये हार्मोन ये मस्त करता है आपको और मस्ती के आलम में।
- 46:06सांसारिक फैसले कमजोर होना स्वाभाविक है।
- 46:11एक एक शब्द को 60 देना बीच में से फिर आपको समझाएगी इसका मर्म कि
- 46:17मैंने बोला क्या मस्ती के आलम में मदहोशी के आलम में?
- 46:29सांसारिक फैसले जो तुम लोगे, उसमें जो तुम दिन में फैसले लोगे,
- 46:38सूरज की रौशनी में उन फैसलों में अंतर आ जाएगा।
- 46:45रात के फैसले आध्यात्मिकता से भरे होंगे, बीच में आध्यात्मिकता जुड़
- 46:53जाएगी। दिन के फैसले आध्यात्मिकता से
- 47:02इतने नहीं जुड़े होंगे। दिन के उजाले में सेरेटोनियन पैदा
- 47:08होता है। अगर आपने हैप्पी हार्मोन पैदा
- 47:10करने हो तो धूप में रोज़ बैठना, ज्यादा धूप में बिना बैठना तो फिर
- 47:21और दूसरा हार्मोन बनना शुरू हो जाएगा।
- 47:25सेरेटोनिन हैप्पी हार्मोन पैदा करना है तो धूप अवश्य सेकना 1015
- 47:3220 मिनट सर्दी में तो जरूर सेकना उससे आपके भीतर सेरेटोनिन हैप्पी
- 47:38हार्मोन का निर्माण। होगा।
- 47:42यह दिन के उजाले में ही पैदा होता है।
- 47:44सूर्य की रौशनी में भी पैदा होता है लेकिन मैलाटोनिन अंधकार में
- 47:50पैदा होता है सर और दूसरा जब ब्राह्मण के इन चार महीनों में जब
- 47:59ऊपर से गिरती है ये तामसी। करनी तो हमारी तामस ग्रंथि को यह
- 48:04अक्टिवेट कर देती हैं, फिर मेलाटोनिन साल्ट जैसा ही एक साल्ट
- 48:10हमारे भीतर पैदा होता है, जो हमें मदहोशी के आलम में डोह देता है।
- 48:41बो कला इक बां सूरीवाला सुध भी सुराग।
- 49:36नन्द किशोर, जो कर गयो मन की चोरी रे।
- 50:22हमने कभी सोचा कृष्ण ने नदी वन में रात को ही क्यों रस रचा?
- 50:32और कृष्ण को देखने से गोपियाँ क्यों गश गा कर के जाती हैं?
- 50:41नकुल भी ऐसे ही थे। नकुल का रंग भी सम्बलत अगर तुम
- 50:50पूछो। कि सबसे ज्यादा अट्रैक्टिव रंग
- 50:53कौन सा शामला शामले रंग की भूख कभी जाती है।
- 51:03कृष्ण को देख कर मन तृप्त होता। है।
- 51:06मन करता है सब देखते रहे। गोरे आदमी को देख कर मन भर जाएगा,
- 51:13बिलकुल काले आदमी को देख कर मन भर जाएगा, लेकिन कृष्ण वरन को देख कर
- 51:20मन नहीं भरेगा इसलिए कृष्ण पर गोपियाँ इतनी समाहित हो नथूल पर?
- 51:29इतनी स्त्रियाँ संभवत हुईं कि नक्ल को देखकर डर पड़ती थी।
- 51:33स्त्रियाँ इतने सुन्दर नए नक्ष और कृष्ण वर असल में काला रंग कृष्ण
- 51:43वरन में तब्दील हो गया। हालांकि कृष्ण नाम था।
- 51:48भगवान कृष्ण नाम था। अब किसी ने कल मुझे पूछ लिया कि
- 51:55कौन सा नाम उसकी माता ने सबसे पहले दिया?
- 52:01मैंने कहा देवकी ने तो उसको कोई नाम दिया ही नहीं तो देवकी तोह पर
- 52:05सब पीड़ा का दुख झेल रही थी। जब कृष्ण का जल उसी को सुध बुध थी
- 52:11नहीं मैं का नाम दे सकती थी, कोई नाम नहीं दे सकती थी।
- 52:17देव जी ने कोई नाम नहीं दिया लेकिन जब वसुदेव पहुंचे नन्द के
- 52:23घर में। तो माँ यशोदा उसको नाम दिया सबसे
- 52:33पहला और वो कृष्ण ही था। कृष्ण का मतलब श्यामल वरन वो
- 52:45कृष्ण का पहला नाम। कृष्ण ही था।
- 52:50और कोई नाम नहीं जो नन्द भी थे। और शो थे दोनों से उस वक्त।
- 52:58वह रोहीनि पहले से ही रह रही थी। वासुदेव की पहली पत्नी।
- 53:06नन्द ने और रिचोता ने उसका इतना सुंदर रूप देखकर नैन नक्ष देखकर
- 53:13अरे ये तो बच्चा बड़ा सुंदर है, उसको नाम दिया कृष्ण और इस वर्ण
- 53:21का नाम ही कृष्ण वर्णन बढ़ गया। श्यामल रंग।
- 53:26दरअसल ये रंग काला मिश्रित रंग काला होता है।
- 53:32ये बड़ा प्यारा लगता है कृष्ण भरन का व्यक्ति कृष्ण नाम का नहीं
- 53:41कृष्ण भरन का। तुम्हें अगर मोह लेगा तो तुम्हें
- 53:48पीसा छुड़ाना मुश्किल हो जाएगा। नकुल ऐसे ही स्त्रियों से तरस
- 53:55रहते थे। नकुल बड़े सुंदर इस धरती के
- 54:00पुरुष। खैर वो कहानी रमदी हो जाएगी, छोड़
- 54:04दो उसको अम्ब्रेला टु तो इन चार महीनों में कोई शुभ काम नहीं करना
- 54:13इसका मतलब संसारिक काम क्योंकि तुम्हारी बुद्धि।
- 54:20तुम्हारे सारे निरौंज मदमस्ति के आदतु में होंगे और सांसारिक जो
- 54:28काम धंधे हैं वो हैं लाभ के और उस अवस्था में लाभ और हानि का इतना
- 54:36कोई फिक्र नहीं होता, वो अवस्था ऐसी है।
- 54:44लल्लभम ना हानि, ना यशम ना बेशम दोनों बराबर हो जाती है वहाँ जाती
- 54:55है वह अवस्था। कुछ ऐसी खुमार की अवस्था कुछ ऐसी
- 55:00होती है। और इन चार महीनों में वही अवस्था
- 55:03होती है। कोई आस्तिक हो, कोई नास्तिक हो,
- 55:10कोई परमात्मा को मानता, ना मानता ये बात नहीं है तिरने सभी पे
- 55:16इफेक्ट करी। सभी के सांसारिक निर्णय लेने की
- 55:22क्षमताएं कमजोर पड़ेंगी। जितना लाभ तुम सत्त्व गुण में ले
- 55:30पाओगे, दिल में या उस काल से अलग। उतना लाभ तुम्हें इन चार महीनों
- 55:40में नहीं मिलेगा। अल्प लाभ मिलेगा।
- 55:43इसीलिए ऋषियों ने इन चार महीनों में शुभ काम करने की मनाही कर दी।
- 55:49कारण का गहरा यह है संसारिक काम होते हैं।
- 55:54मात्र। लाभ के लिए।
- 55:57सुख के लिए लेकिन यह किरणें ऐसीं के सुख क्या तुम दुख को भी समाहित
- 56:08कर लोगे तुम कहोगे दुख भी आ जाओ स्वागतम मोस्ट वेलकम।
- 56:17बड़ी गडबड हो जाएगी इस संसार एक। आदमी के लिए ये करने तुम्हें
- 56:23मधुमस्ती के आलम में धकेल देंगे। इसलिए ये चार महीने क्या करो तो
- 56:28जैन धर्म क्या कहता है? उपवास करो, व्रत करो।
- 56:31जो भी उनकी प्रमुखता है चार महीने बाहर न जाओ।
- 56:36ये वजन्तु मरेंगे अपने ढंग से व्याख्यान करने की चेष्टा की
- 56:43बारिश है कि अपने बिलों में से अपने घरों में से कीड़े मकोड़े
- 56:50निकलेंगे, तरह तरह के जानवर निकलेंगे।
- 56:54गांव के नीचे आके मर जाएंगे पाप तुम्हें लगेगा ये कहने की बातें
- 56:58थी बात भी ठीक है, कुछ लेवल तक वह ठीक हुई है बात मदहोशी की थी।
- 57:12कि इस वक्त मदहोशी के आलम में तुमने परमदोषी में जाना है जहाँ
- 57:19तुम्हारी होश बिल्कुल खोज रहे जहाँ होश नाम की कोई चीज़ ना बचे
- 57:26बाहरी और मात्र एक होश बचे जो शुद्ध होश।
- 57:32है। अवेयरनेस वह भी है तो होश लेकिन
- 57:37क्वालिटेटिव डिफरेंस है तो तुम्हारा बाहर का होश, बुद्धि का
- 57:42होश और भीतर का होश, ये दोनों समान नहीं हैं।
- 57:48कोई क्वांटिटेटिव डिफरेंस नहीं होता है, इनमे मैं फिर समझा दूँ।
- 57:52इनमें भी क्वांटिटेटिव डिफरेंस होता है।
- 57:56तुम्हारा बाहर का होश तुम्हें चलाकी देता है।
- 58:01व्यापार करना सखाता है काम धाम में निष्पार्थ करना सीखाता है कोई
- 58:06स्किल सीखना सखाता है। राजनीति के लिए बेहतर है तुम्हारी
- 58:14बाहर की बुद्धि का जागृत। होना लेकिन भीतर का होश भी असर
- 58:25होश तो वही है। जो तुम्हारी आखिरी जरूरत को पूरी
- 58:32करेगा तुम्हारी आखिरी जरूरत क्या है आनंद तुम्हारी आखिरी जरूरत।
- 58:43है। आनंद तुम्हारी आखिरी जरूरत है और
- 58:56तुम अपने उस मुकाम पे पहुँच जाते हो पहुँच सकते हो इन चार महीनों
- 59:00में इजीली इसलिए ऋषियों ने इन चार महीनों में।
- 59:09संसारी का काम करने को वर्जित किया।
- 59:13कारण यही था, पूरे होश में नहीं होते।
- 59:15तुम दिन में भी होश में नहीं होते, रात में भी होश में नहीं
- 59:22होते, तुम होश में नहीं हो, तीन चार महीने में इसलिए ऋषियों ने
- 59:27पाबंदी ही लगा दी। के इन चार महीनों में नवग्रह
- 59:31प्रवेश नहीं करना नई शादी नहीं करनी।
- 59:34नया काम धाम नहीं छेड़ना नमी योजनाएं नहीं बनानी कोई
- 59:38इन्वेस्टमेंट नया नहीं करना कोई जमीन जायदाद नहीं खरीदनी फैसला
- 59:46नहीं करना इन चार महीनों में। कुल कहने का मतलब चाहिए।
- 59:53था। 23 7 जुलाई 2025 31 अक्तूबर 2025
- 59:59तक यह है चार महीने का वेला आता है।
- 1:00:10ये 7 दिन कम हो गए इसलिए कम हो गया।
- 1:00:13देसी महीनों में कम पड़ती है इसलिए कम हो गया।
- 1:00:19हर 3 साल के बाद एक महीना बढ़ाया जाता है।
- 1:00:22देसी महीनों में इसलिए बढ़ाया जाता है।
- 1:00:25ये कुछ दिन कम हो जाते हैं क्योंकि चंद्रमा का जो साल है वो
- 1:00:32365.25 दिन का नहीं होता। चंद्रमा का जो साल है वो 300 चौपन
- 1:00:40दिन का होता है। 11 दिन का फर्क पड़ जाता है 11.25
- 1:00:44दिन का। थोड़ा समझा दूँ तुम्हें बीच में
- 1:00:47बीच में प्रसंग ही आ गया था, पूछ लिया है तुमने तो समझा दूँ ये
- 1:00:52फर्क तू पर के चंद्रमा का वर्ष 300 चौरंजस दिन का व्रत पूरा वर्ष
- 1:01:00है और सूर्य की। 300 65.25 दिन का पूरा एक वर्ष है
- 1:01:09तो चंद्रमा और सूर्य की कैलकुलेशन में 11.25 दिन का फर्क पड़ जाएगा।
- 1:01:18अब मुसलमानी जो महीना है। इसलिए छोटे रहते हैं महीने
- 1:01:26क्योंकि चंद्रमा के ऊपर आधारित हैं इसलिए उनकी कभी रमजान गर्मी
- 1:01:32में आ जाती है, कभी सर्दी में आ जाती है और कुछ नहीं।
- 1:01:36ये फर्क सिर्फ चंद्रमा के बेसिस। का है।
- 1:01:44जो मुसलमानी में ही ना है। इस्लामी कैलेंडर इसको हिजरी
- 1:01:54कैलेंडर कहते है तो हिजरी कैलेंडर हमारे विक्रमी।
- 1:02:00और शक संबद्ध के थोड़ा सा फरक है। ये चलते हैं चंद्रमा के हिसाब से
- 1:02:10इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा के हिसाब से और चंद्रमा के हिसाब से 300
- 1:02:16चौपन दिनों का साल होता है। और हमारे विक्रमी कैलेंडर या शक
- 1:02:24संपत के ये चलते हैं सूर्य के हिसाब से शोर प्रणाली से।
- 1:02:30और 365 65.25 दिनों का। साल होता है ये सवा।
- 1:02:3611 दिन का फर्क पड़ जाता है इनमे। बहुत सूक्ष्म रूप से देखा जाए।
- 1:02:48व्याख्यायित किया जाए तो संसार और अध्यात्म को मैं ऐसे व्याख्या
- 1:02:55करूँगा संसार है बुद्धि का तेज होना, परम तेज होना।
- 1:03:02प्रखर बुद्धि का होना संसार और प्रखर अवेयरनेस का।
- 1:03:09होना। अध्यात्म।
- 1:03:14बुद्धि अवेयरनेस नहीं। बुद्धि तो उन सूचनाओं को संग्रहित
- 1:03:22करने के लिए निर्वाज मात्र। है।
- 1:03:24सूचनाओं का केंद्र है, लेकिन तुम्हारा अस्तित्व सूचनाओं का
- 1:03:31केंद्र नहीं है। तुम्हारा अस्तित्व चेतना का
- 1:03:36केंद्र। है।
- 1:03:38चेतना का शक्ति का मिलाजुला केंद्र है और तुम्हारी बुद्धि
- 1:03:46सूचनाओं का केंद्र है। ये फर्क है दोनों में तो संसार की
- 1:03:51परिभाषा हम कर सकते हैं। बुद्धि का प्रकरण होना है।
- 1:03:57और बुद्धि का प्रखर होना सांसारिक रास्ते में तो बहुत अच्छा है।
- 1:04:04अध्यात्मक रास्ते में एक बाधा है सह सशयण पान लखोव एक न चले न कौन
- 1:04:11से मार्ग में परमात्मा के मार्ग पे हजारों सयाण पे हो तो मैं।
- 1:04:16हजारों बुद्धि की सयानप्या हूँ हजारों बुद्धियां हूँ लाख
- 1:04:21बुद्धियां हूँ सेस सयानप्या लक् होवे एक न चल रहे ना तुम्हारी
- 1:04:26चालाकी वह नहीं चलती वहाँ अगर चालाक हो के तुम जाने की चेष्टा
- 1:04:32करोगे तो वहाँ प्रवेश द्वार। बंद मिलेंगे तुम्हें, मैं तो
- 1:04:39इनोसेंट मन ही जा सकता है। दे विल एंटर इन मैं गॉड्स किंडम
- 1:04:44विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाइल्ड।
- 1:04:48तुम प्रखर बुद्धि का तेज होना सेंसार में बड़ा काम करता है।
- 1:04:53इसलिए सर लोग प्रखरबुद्धि करते हैं, ये आचार्य लोग प्रखरबुद्धि
- 1:04:57के हैं। मैं कटाक्ष से करता हुआ मालूम
- 1:05:00पड़ो, अब बात ये फंस गए। प्रखरबुद्धि थी आयास का
- 1:05:08कॉम्पिटिशन कुर्सी मिल गई। अब देखा कि इससे ज्यादा इसी
- 1:05:15बुद्धि से मैं ज्यादा बन्दों को मुर्खा बना सकता।
- 1:05:19हूँ। तो उन्होंने अपनी संस्था को दिया।
- 1:05:25बुद्धि तेज है। बुद्धि हर बात का जवाब दे सकती है
- 1:05:30वेकेबल भी बहुत जाता है तीक्षण बुद्धि कांट शरण की क्षमता और
- 1:05:38संसारिक ज्ञान और आयास कॉम्पिटिशन को लड़कर जीत लेना और गद्दी का
- 1:05:45मिल जाना। फिर।
- 1:05:47छोड़ देना। ये किस चीज़ का सबूत है?
- 1:05:53छोड़कर भी इकट्ठे करने की आदत बनी।
- 1:05:57रहना जी क्या खुद ने भी छोड़ा? लेकिन इकट्ठे करने की आदत खत्म हो
- 1:06:08गई। वो तो ना तो ब्रेकफास्ट से आते
- 1:06:12हैं, ना लंच चाहते हैं, ना डिन्नर चाहते हैं, ना दोपहर की टी चाहते
- 1:06:17हैं, वो तो अपना भिक्षापत्र उठाते हैं।
- 1:06:21जब कहते हैं भूख लगी तो भिक्षापत्र उठा लेते हैं, जैसा
- 1:06:23मिलता है, खा लेते हैं। लेकिन ये बुद्ध होने का दिखावा मत
- 1:06:30कर, ये एक्सप्लेन करेंगे ये एक्सप्लेन करेंगे उपनिषद को जिनके
- 1:06:39करीब कभी फटके ही नहीं हैं। ध्यान में ही इनकी गरीबी मापी जा
- 1:06:48सकती है। उपनिषित उसके करीब आ जाना, उसके
- 1:06:55करीब बैठ जाना। उसके करीब से कब बैठे?
- 1:06:59इनको खाली लम्हें तो कभी मिले नहीं।
- 1:07:02बुद्धि में ही गुजर रहे है, कभी पढ़ते रहे, पढ़ाते रहे,
- 1:07:06कॉम्पिटिशन करते रहे, कंपॅरिज़न करते रहे और आज भी वो वृत्ति बनी
- 1:07:10हुई है। आज भी कॉम्पिटिशन करने है।
- 1:07:13हमने सद्गुरु को मात देनी है। हमने प्रेमानंद को मात देनी है,
- 1:07:17हमने उसको मात देनी है। हमने ज्यादा ऐड लगानी है।
- 1:07:22नृत्य तो वही बने रहे ना? रस्सी जल गई मगर बल ना गया ये कुछ
- 1:07:34और नहीं है सिर्फ। ऑपर्च्युनिटी से ज्यादा है
- 1:07:40संभावना ज्यादा है, पोटेंशिअल टीज ज्यादा है, अध्यात्म के मार्ग पर
- 1:07:48पोटेंशिअल टीज ज्यादा है और बड़े मज़े की बात है।
- 1:07:53आध्यात्मिकता ज़रा भी नहीं है। अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से गुमा
- 1:08:03फहराके सिद्ध करने की कोशिश पूरी करेंगे, लेकिन पकड़े जाएंगे गुण
- 1:08:13भगवान व्यक्ति जो भीतर चला गया। उससे कैसे छुपाए?
- 1:08:19क्योंकि वो तो मैंने बोल दिया, उसने तो अपनी नग्न आँखों से देखा
- 1:08:24उससे कैसे? सत्य को छुपाएंगे जिसका वर्णन
- 1:08:27उपनिषदों में जिसका वर्णन गीता में जिसका वर्णन सभी धर्मग्रंथों
- 1:08:33में अष्टावक्र गीता में। फिर ये क्या करेंगे?
- 1:08:38ये एक टैंक उधर से खींचेंगे, एक टैंक उधर से खींचेंगे और किसी तरह
- 1:08:45खेच धोखे बेड बना देंगे। ये अपने मिशन में कभी कामयाब नहीं
- 1:08:53हो पाएंगे। अगर कामयाब हो गए तो वह दिन इस
- 1:09:00धरती के लिए दुर्भाग्य का दिन। होगा।
- 1:09:04क्योंकि फिर इस धरती ने मानसिक सूचना ही संग्रहित की अनुभव का तो
- 1:09:11ज़रा भी रसूल के हाथ में नहीं आया।
- 1:09:17अभी कल मैं सुन रहा था उशो का एक प्रवचन उसके प्रवचन को ऐसा तोड़ा
- 1:09:26मरोड़ा गया इस आचार्य के द्वारा वह कमाल मैं हैरान हो।
- 1:09:31गया। उशो कहते हैं।
- 1:09:35के एनलाइटनमेंट इस ए लायर बात भी ठीक है, लेकिन क्यों कहते हैं तुम
- 1:09:44किसी चीज़ को ढूंढ रहे हो? क्या वो खो गई है?
- 1:09:55क्या वो गुम हो गई है? नहीं?
- 1:09:59वे सम्मरित हो गए। भूल गए पापा इस दृष्टि से वो सब
- 1:10:05बोलते हैं कि पाना और गंवाना इस सृष्टि में कुछ है ही नहीं।
- 1:10:12एनलाइटनमेंट नाम की चीज़ इस तरह से नहीं होती।
- 1:10:17लेकिन इनके पास तो प्रखर बुद्धि है ये तो उसको कांच शट करेंगे।
- 1:10:23इन्होंने डाल लिया इस बात पे कि वो जल्दी मर गए।
- 1:10:28अगर थोड़ी देर और जीवित रहते तो वो इसकी व्याख्या ज्यादा अच्छी
- 1:10:32तरह से कर लेते तो फिर क्या वो? जो घटनाएं घटी वो झूट थी।
- 1:10:40मैं तो अब चिंता हूँ मेरे बाद में भी तुम यही चीजें बना लोगे मैं
- 1:10:47डंके के झूट से कहता हूँ कबीर ने कभी नहीं कहा एनलाइटनमेंट इस
- 1:10:54लार्ज। कबीर ने कहा, मैं कहता हूँ तुम
- 1:11:00कहते कागज़ की लेखी हो, तो स्टेम्प लगा के गए और मैं भी
- 1:11:05स्टेम्प लगाता। हूँ।
- 1:11:07कभी ऐसा न हो, मेरी बात को यह आचार्य लोग और रूप न दे दे।
- 1:11:13इनके पास बुद्धि तीक्ष्यण है। मिलाशक और बुद्धि हमेशा बाधा बनती
- 1:11:19है। बुद्ध होने में बुद्धि ही एक
- 1:11:24मात्र पत्थर है, रोड़ा है, अड़चन है।
- 1:11:27उपजित बुद्धि से ही ये कोशिश करेंगे और तुमको भरमा भी देंगे।
- 1:11:34कुकिंग के तर्क इतने पहनी होंगे कि तुम्हारी बुद्धि उसको मानने पर
- 1:11:41मजबूर हो जाएगी, लेकिन जहाँ तुमने पहुंचना है, वो बुद्धि का विषय ही
- 1:11:49नहीं विस्डम का? विषय नहीं हो।
- 1:11:57बुद्धि का विषय नहीं हो, बुद्धि से पार का विषय हो इसलिए बुद्धि
- 1:12:03से न उसे हल करना और जो बुद्धि से उसे हल करता है उसको सुनना मत
- 1:12:10वहाँ जाकर तो। चेंहू खाने चित्त हो जाता है।
- 1:12:13व्यक्ति हाथ जोड़ता है नहीं, इतना नहीं है।
- 1:12:18नहीं नहीं, मुझे लोग पूछते हैं कि आप परिणाम कैसे करते हो?
- 1:12:27मैंने कहा मैं सबसे पहले परमात्मा को प्रणाम करता हूँ।
- 1:12:35हे परमिता ब्रह्मात्मा जो ना चीज़ तेरी इस सृजना का एक अंश और कण भी
- 1:12:45नहीं बना सकती। वह तेरा व्याख्यान करने चली इस
- 1:12:55उदंडता के लिए क्षमा कर रहा हूँ, मैं जानता हूँ।
- 1:13:00मैं बोल नहीं पाऊंगा। मैं जानता हूँ।
- 1:13:07सूरज को। आया हाथ अंधेरा।
- 1:13:43कोई नहीं है। मेरा सबके रहते लगता है ऐसे।
- 1:14:04कोई नहीं है मेरा कोई नहीं है मैं।
- 1:14:27सूरज को छूने निकला था आया हाथ। दे रहा कोई नहीं है मेरा कोई नहीं
- 1:14:59है। मेरा कोई नहीं है मेरा तुझे
- 1:15:15व्याख्यायत करने चला हूँ परमिता परमात्मा।
- 1:15:21इस समूर्ख की उदंडता को क्षमा करें और फिर उनसे ही क्षमा मांगता
- 1:15:30हूँ। जिनकी गत मैंने बनानी है वो
- 1:15:34आचार्य को भाग तो हूँ। मैं दुष्ट हूँ।
- 1:15:41और लोगों को वह खाने के मार्ग पे जो चलता है वह मेरा कोपात्र बन
- 1:15:50जाता। है।
- 1:15:53इसलिए उनसे भी क्षमा प्रार्थना करता हूँ।
- 1:15:58मेरा कसूर नहीं मैंने जो देखा उसका कसूर है मेरे ज्ञान का।
- 1:16:05कसूर। और तुम्हारा भी कसूर नहीं है
- 1:16:09क्योंकि तुमने अभी देखा नहीं, तुम अंधे हो तुम्हारे अज्ञान का कसूर।
- 1:16:16इसलिए पहले ही क्षमा मांग लूँ तुमसे गत बनाऊंगा खूब उधेड़ूंगा
- 1:16:22तुम्हारी खाल को, लेकिन मुझे सिमा कर देना मेरा दोष नहीं मेरा ज्ञान
- 1:16:31तुम्हारे अज्ञान को। झिड़क दे रहा है, दुत्तकार रहा है
- 1:16:39बस इतना सा ही है ना इसमें मैं हूँ ना इसमें तुम हो इतना सा मतलब
- 1:16:46है मेरा साँझ ढलते ही। अँधेरा होता है।
- 1:16:56इसलिए हमने अध्यात्म में रातें जो चुनी, जो भी चुनी और आते ही चुनी
- 1:17:05दिन में नहीं चुनी। कोई भी दिन ऐसा है जो जाति में हो
- 1:17:08हमारा नवरात्र। दो नवरात्रिया आती है।
- 1:17:18अश्विनी के ओरक्षेत्र के दोनों ही रात की नवरात्रि होती है।
- 1:17:22दोनों कौन सा वक्त था? हर रात का जब सूर्य नहीं था तो
- 1:17:29हमने। कहा नाम रखा नौ रात्रि नवरात्रि।
- 1:17:35क्योंकि अंधेरे में ही वो तामस ग्रन्ति सक्रिय होती है।
- 1:17:44भगवान शिव, जो तमस के उच्चतम स्रोत समझे जाते हैं।
- 1:17:53थॉमस किरणों के गुण के ने उनकी रात्रि को क्या नाम दिया गया?
- 1:18:01शिवरात्रि भगवान कृष्ण की रात्रि को क्या कहा गया?
- 1:18:10जन्माष्टमी की रात रात्रि का इतना महत्त्व इसलिए है अब आखिरी बार
- 1:18:21क्या है? मैं अपना प्रवचन समाप्त करूँगा
- 1:18:25क्योंकि प्रवचन लम्बा। बहुत हो गया है पर आप ज्यादा सुन
- 1:18:28नहीं सकते। आज के प्रवचन में सबसे पहला कमेंट
- 1:18:34आया कि बाबा अपनी वीडियो बड़ी छोटी डालती।
- 1:18:37हालांकि 4345 मिनट की है। पौने घंटे की वीडियो कोई बनाता
- 1:18:41नहीं। ये बेचारे व्यूस के मारे 8 मिनट
- 1:18:47की वीडियो बना देते है। इनका भी कोई कसूर?
- 1:18:54इनका लक्ष्य कुछ हो रहा है। इनका लक्ष्य मारवाड़ियां जैसा है।
- 1:19:00पीसा कुमार हमारा लक्ष्य निहित स्वास्थ्य नहीं है।
- 1:19:08निहित स्वार्थ नामक कोई चीज़ नहीं, निहित स्वार्थों से योजनों
- 1:19:16पर कोई स्वार्थ नहीं, किसी मित्र शुद्ध ज्ञान का वितरण है।
- 1:19:26और कोई जबरदस्ती नहीं, कोई डिक्टेटी शिप नहीं की।
- 1:19:29तुम सुनो ही इसलिए कभी मुझे दोष मत देना, तुम्हारी भावनाओं आहत हो
- 1:19:34जानी बस मैं तो तुम्हें ये कहूँगा तुमने मुझे सुना तो और तुम्हारे
- 1:19:42पास कोई जवाब नहीं। मैंने तुम्हारी भावनाओं को आहत
- 1:19:48होने के लिए नहीं बोला है क्योंकि तुम मेरे सामने हो ही नहीं।
- 1:19:53मुझे पता नहीं इसको कौन सुनेगा। इसलिए अगर तुम्हारी भावनाओं आहत
- 1:19:59हुई तो मैंने जानबूझ के तो की नहीं क्योंकि मुझे तो पता ही
- 1:20:04नहीं। मेरे इस को कौन कौन सुनेगा?
- 1:20:09तुम आहत हुए तो का आहित हुए तुमको मैंने तो आहट नहीं किया, मैंने
- 1:20:15तुम्हे करके कब आहत किया? मैं तो अंधेरे कमरे में बैठा हूँ
- 1:20:21और तुम मुझे सुने क्यों? और दोस्त तुम्हारे हैं भाई?
- 1:20:25मेरा तो कोई दोस्त जो मुझे सुनते हैं, वो अपनी इच्छा से सुनते हैं,
- 1:20:32अपनी प्रेम से सुनते हैं, अपनी सरदा से सुनते हैं, उन्हें कुछ
- 1:20:36मिलता होगा, भाई तो मुझे सुनते हैं और उनके लिए मैं बोलता हूँ।
- 1:20:43यहाँ के लोग भी ना सुनेंगे तो ये करोड़ों रूहें मुझे सुन रही हैं।
- 1:20:48मैं इनके लिए बोलेंगे तुम्हें लगेगा ये है पगला है तो कोई है
- 1:20:55नहीं, अब कौन सा कोई है अभी तो मैं अकेला हूँ और बस रू हुए हैं,
- 1:21:01इनके सामने बोल रहा हूँ। मुझे कौन सुनेगा, कितने सुनेंगे?
- 1:21:06इससे मुझे कुछ लेनदेन आया ही नहीं।
- 1:21:09अन्यथा में भीड़ बढ़ाने के लिए श्रोता बढ़ाने के लिए श्रावक
- 1:21:18बढ़ाने के लिए कोई एड्स न लगाता। कोई उपाय न करता कोई विधि न पटाता
- 1:21:28कोई किसी प्रकार का यंत्र मंत्र न करता करता।
- 1:21:32क्यों नहीं करता क्योंकि मुझे इसकी।
- 1:21:34इच्छा नहीं है जो सुनेगा उसका भी भला।
- 1:21:44यह न सुनेगा उसका ज्यादा भला, क्योंकि कुछ न कुछ टूटेगा।
- 1:21:50मैं तोड़ने के लिए हूँ और वह तोड़ा नहीं जा सकता।
- 1:21:57कितना ही प्रयास कर दूं मैं जो तुम वास्तव में हो नैनम छिद्दलती
- 1:22:01शास्त्रण। नैनम, दोहती पावका नय चैनम
- 1:22:07क्लेजान तो कोई आग नहीं पहुंचती, वहाँ कोई शस्त्र नहीं पहुंचता।
- 1:22:13वहाँ कितना ही ब्रह्मस्त्र क्यों ना हो नय चैनम क्लेजन तापो
- 1:22:19नसोशोति मारो। कोई बाढ़ नहीं आती, वहाँ कोई
- 1:22:23तूफान नहीं आता। तुम वो तुम्हें तुम्हें तोड़ नहीं
- 1:22:28सकता। जो टूटेगी वो तुम्हारी थोपी हुई
- 1:22:34मान्यताएं होंगी, मूड़ मान्यताएं होंगे।
- 1:22:38तुमने जो भी कुछ थोपा जो भी कुछ थोपा वो गलत था, गलत था, गलत था
- 1:22:48वहाँ थोपना नहीं होता, वहाँ याद करना नहीं होता।
- 1:22:54वहाँ सूचनाओं को संग्रहित करना नहीं होता।
- 1:22:56वहाँ तो दर्शन होता है सिर्फ वहाँ देखना है वहाँ अनुभव करना है इसे
- 1:23:07वो कहते हैं आत्मबोध। आत्मबोध और परमात्मबोध इससे आगे
- 1:23:14की बात ये प्रश्न मैं फिर जवाब दूंगा।
- 1:23:18इसका बहुत लम्बी वीडियो हो गई है। ये कहते है आत्मबोध से आगे रहस्य
- 1:23:23की बात भी हमें समझा दो अभी तो आप हो समझाऊंगा मैं रहस्य की बात ही
- 1:23:29समझाता हूँ। रहस्य की बात को समझाते हुए करीब
- 1:23:35वर्ष भर होने को आ गया जो मैं रहस्य की बातें ही आपको बताता।
- 1:23:38हूँ। अब बुद्ध से आगे कृष्ण तक की
- 1:23:43यात्रा बाकी है। मैं जानता हूँ उसकी यात्रा का
- 1:23:48अवधान करना होगा। उसकी यात्रा में ये सभी पीछे
- 1:23:53छूटेंगे। तुम्हारे सदगुरु, तुम्हारे
- 1:23:58आचार्य, तुम्हारी कथावाचक कथावाचक तो पहले ही नगण्य है, वो तो छोड़
- 1:24:05दो उनको तो वो तो विदेशों में चले गए।
- 1:24:08पर स्लेट तो वहीं सेटल हो जाएंगे। उनकी बात छोड़ो दर्शन की बात है
- 1:24:23याद करने की बात। है।
- 1:24:26अगर तुम्हें हम कहेंगे रिमेम्बर यू, अरे सेट, तो तुम इबारत को याद
- 1:24:31करना शुरू कर दोगे, शास्त्रों को याद करना शुरू कर दोगे तुम चूक
- 1:24:36जाओगे जहाँ भी तो बाबा लाने का बड़ा सुंदर शब्द।
- 1:24:40कहते हैं। भ्रांति तब मटेगी उतर गए हो।
- 1:24:57मेरे मन का संसार। मन का संसार उतर गए वो मेरे।
- 1:25:24मन का संसार जापते दर सन पायो। जब तैं दर सन पाया ठाकुर तुम शरना
- 1:25:52ए आया तभी तुम शरणागति हो सकोगे दर्शन से पहले।
- 1:26:01शरणागति नहीं हो सकोगे तुम्हें कोई विराट चाहिए जिसकी शरण तुम
- 1:26:09पकड़ लो विराट दर्शन अभी हुआ नहीं उतर गए हो मेरे मन का संस है जिसे
- 1:26:16भगवान कृष्ण कहते हैं संस या तुम मनुष्य?
- 1:26:22बाबा नान कहते वो सन से उतर गया कैसे दर्शन से उतर गया उतर गयो
- 1:26:31मेरे मन का सन्स है जब ते दर्शन पाई जब तेरा।
- 1:26:39आनंद से भरा हुआ दर्शन मैंने पाया।
- 1:26:45दर्शन पाने के उपरांत जो समर्पण होता है वो होता है असली समर्पण।
- 1:26:53अभी तो तुम। महज कोहरा समर्पण शब्द का ही
- 1:26:58इस्तेमाल करके समितियों के समर्पण हो गया।
- 1:27:03नहीं ये समर्पण नहीं है सर्वधर्माणम प्रतिजमा में कम शरण
- 1:27:08ब्रज नहीं है, ये शरण कब होगी? शरणाकृति कब जाओगे तो बाबा सीधी
- 1:27:19सीधी बात बताते हैं कि ब्रह्म में मत रहना क्षरणाकृति तुम तब ही हो
- 1:27:25सकते हो जब तुम दर्शन पा लोगे। तुम्हारा संचय जब तक मिट नहीं
- 1:27:37जाता, तब तक तुम्हारा शरणा गति झूठा है।
- 1:27:43मकार गणत है, बेवानी है चलाके दुष्टता।
- 1:27:53उतर गए हो मेरे मन का संसार। मन का संसार, मन का संसार जब ते
- 1:28:24डर सन पायो। ठाकुर तुम सरनाई आयो ठाकुर, तुम
- 1:28:43सरनाई आय। धन्यवाद।