Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Sep 25 -समाधी के तल से कुछ प्रश्न उतर!समाधि के प्रश्न और महादेव के उत्तर! आत्मिक रहस्योद्घाटन!
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- 0:10सतगुरु होए तैयार कर सब रंग मानिए, इसका क्या अर्थ है बाबू
- 0:28अगर भोजन है। और भूख नहीं है।
- 0:35ये अगर भूख है और भोजन नहीं है तो आप उसके रंग को मान नहीं सकोगे।
- 0:44उसके रंग को तभी मान सकोगे जब भोजन भी है।
- 0:50और भूख ब्याह विस्तरा है, नींद नहीं और नींद है और विस्तरा नहीं
- 1:08तो ध्यान रखना तुम वो उसके रंग नहीं मान सकोगे।
- 1:17उसके सृष्टि में अजब कारीगरी है और कुशल कारीगर है, कुशलतम कारीगर
- 1:26है, इन शब्दों का यही अर्थ है। पर्याप्त मात्रा में आपके पास
- 1:35जन्म हो, चेंज न हो तो दिन वर्ष हो जाता है बुद्ध इसलिए बाकी
- 1:44गर्ल्स है कभी ऐसा था सृष्टि में भूख?
- 1:57तो थी भोजन आज ऐसा ज़माना आ गया भोजन तो बहुत है, प्रचुर मात्रा
- 2:10में भूख हो गया। कोई वक्त था जब तुम्हारे पास खाली
- 2:26रम है तो बहुत चिकन तुम्हें भीतर जाने का रास्ता नहीं पता था।
- 2:37वक्त आज भी है भीतर जाने का रास्ता पता है वक्त नहीं।
- 2:54फुर्सत के लम्हे आज नहीं हैं, ग्रंथ तो भरे पड़े हैं, उस तक
- 2:59पहुंचने के लिए गलत मार्गदर्शक भी है।
- 3:05सही मार्गदर्शक भी है, लेकिन तुम्हारे पास वक्त हो गया है।
- 3:14सावधान पर्याप्त मात्रा में है लेकिन चैन में हड़बड़ाहट में
- 3:22तुम्हें जाना कहीं और होता है। तुम पहुँच कहीं और जाता है।
- 3:27इसका यही मतलब है जब परमात्मा ज्यालू होता है तो दोनों चीजें
- 3:31होती हैं। भोग भी मिलती है, भोजन भी मिलता
- 3:37है, नींद भी मिलता है और शाइन कक्ष भी मिलता है।
- 3:49गर्मी आवे, कपड़ा, नदरी, मोक दवा। अगर उसकी नजर नहीं तो हमारे पास
- 3:57सारे जहन के दौलत भी हो शहंशाहे आलमचक्रवर्ती सम्राट भी हो, तुम
- 4:05उसका आनंद नहीं मान सकोगे। सतगुर होयदयाल तसाब रंग मानिए।
- 4:14सतगुरु को इत्यादि सबरम का पूरी है तत्वमसी शयद के इस शब्द का
- 4:30अर्थ होता ये बाबा। तुम सभी जल्दी में हो, यू आर इन
- 4:40हारी सुनिए इसके भीतर का तत्व हरे हँस जल्दी मत कर स्वेत के तू।
- 4:59शीघ्रता को त्यागते, जल्दबाजी को त्यागते क्यों?
- 5:07क्योंकि तो ही है जहाँ जाना और जहाँ जाना है।
- 5:15अगर जल्दबाजी करोगे तो उससे चूक जाओगे।
- 5:23उपनिषद का शानदार शब्द समझे न आए तो बहुत दूर है वो।
- 5:36समझ आ जाए तो तू मि हो ततवा मसी तू ही है, श्वेत के तो श्वेत के
- 5:50तो तू ही है। तू जल्दबाजी मत कर और तुम्हारी
- 5:55सभी पद्धतियां जल्दबाजी विज्ञान भैर्व तंत्र के 112 के 112 सूत्र
- 6:08जल्दबाजियाँ। और उपनिषद कहता है तू जल्दबाजी न
- 6:16कर रुक जा, ठहर जा क्यों न कर। क्योंकि तू ही है जहाँ जाना है वो
- 6:33तू ही है जल्दबाजी में तुम उससे चूक जाते हो, वो ऐसी मंजिल है।
- 6:52और तुम्हारी मंजिल को तुम्हारा ही मन छीन लेता है सर थी ना कोई
- 7:06मंजिल दिया है ना कोई। महफिल चला मुझे के दिल अकेले
- 7:30कहाँ? साथ ही न कोई मन दिया है न कोई
- 7:48मह। चला मुझे लेके है दिल अकेले कहाँ
- 8:05तुम जहाँ जब भी जाओगे अकेले जाओगे तुम्हारे साथ कोई नहीं होगा।
- 8:13सच खंड में ले जाएंगे। तो महंत वेला में ये झूठ बोलते
- 8:16हैं। अकेले होने का साहस करो भी अलोन
- 8:25अकेले हो जाओ तू ही है तत्व मर्सी श्वेत के।
- 8:32तू जल्दबाजी न कर यही उपनिषद के इन वचनों का सार है।
- 8:39सत्य बड़ा सरल है, तुम्हारा मन उसे कठिन कर देता है।
- 8:45सत्य बड़ा सरल है, सरल, सरल तम है।
- 8:49तुम पाए ही हुए हो अपने आप को सदा कभी खोये नहीं बस चूक गए हो थोड़ी
- 8:55देर के लिए आश्रम भरे पड़े अस्पताल भरे पड़े कराह रहा है कोई
- 9:18पीड़ा से। वे इतना से बिरहा से जीस तरफ देखो
- 9:32भारी भीड़ है तुम्हें लोग तीर्थ पर भी नजर आएँगे।
- 9:41तुम्हे लोग अस्पतालों में भी इंतजार करते नजरों में, कौन हैं
- 9:49ये लोग? क्या हो गया है मानवता को आज?
- 9:58चारों तरफ भीड़ ही भीड़ है। चारों तरफ भीड़ ही भीड़ है।
- 10:15लोग दुखी हैं, त्रस्त पीड़ाओं से अभाव से।
- 10:22एक धन का अभाव है, वो इतने पीड़ा नहीं देते, लेकिन तुम्हें ये नहीं
- 10:28पता। एक आनंद का अभाव भी है।
- 10:38राजमानवता। आनंद के अभाव से त्रस्त हैं तुम
- 10:45कितने ही शहंशाह हो जाओ गानों के अंबार लगा लो।
- 10:54हिमालय तक जोड़ लो सोने की खदानें।
- 11:00सब कुछ पालो, लेकिन अगर एक नहीं पाया तो तुमने कुछ नहीं पाया।
- 11:20आज आग में जलते हुए लोग आनंद के अभाव से कराह रहे हैं।
- 11:33ऐसे लगता है आज प्रत्येक व्यक्ति मेरा हो गया।
- 11:42मीरा के बिरहा के आंसू आज तुम्हारी आँखों में स्पष्ट दिखाई
- 11:48पड़ते हैं पर तुम जानते नहीं तुम्हारी ही भीड़ से पर एक एकांत
- 11:59कुठिया में बैठा। एक मस्त फकीर जाम पे जाम पिया
- 12:11जाता है। आज त्रासदी घटित हुई है मानवता के
- 12:19साथ। जो कभी भी घटित नहीं हुए।
- 12:28भारत की भूमि में सदा ही ऐसे संत पैदा हुए जिन्होंने इस प्यालों को
- 12:37बड़ी शान से पीया और भर भर के पीया।
- 12:43आज अध्यात्म के भोगवाद ने सब समाप्त कर दिया और इसके समाप्त
- 12:52करने का कारण तुम्हारे वह गुरु जो भीड़ में बैठकर।
- 12:59अपने आप का बखान करते काश तुम उस संत की तरह किसी कुटिया में बैठ
- 13:11के आनंद के प्याले पीते ही चले जाओ।
- 13:18देते हैं, चलो जाओ फिर तुम्हें किसी चीज़ का अभाव नहीं रखा।
- 13:29अभाव चाहे धन का हो, चाहे आनंद का हो, आनंद का अभाव ज्यादा कीड़ा
- 13:35देता है। गरीबी का अभाव तो कुछ भी नहीं
- 13:44लेकिन आनंद का अभाव मेरा आँख के आंसू मेरा क्या तुम्हें पता ही
- 13:51नहीं वो कहती क्या है? उसके आंसू क्यों आते हैं?
- 14:04सब कुछ तो है उसके पास राजपरवार में ब्याही है, सब है उसके पास,
- 14:13लेकिन आँखों में आंसू आनंद का भी अभाव होता है।
- 14:21आज उसी चीज़ का अभाव है। मानवता इसी रोग से त्रस्त है।
- 14:26आज ये प्यास हमें बजानी होगी। इस भीड़ को छाँट के और भीड़ चाहे
- 14:34राजनीतिक हो, चाहे धार्मिक हो, ये दोनों भिड़े हैं।
- 14:40और वो आनंद का प्याला भीड़ में नहीं पिया जा सकता, वह एकांत में
- 14:46मिलता है। काश तुम जान सकते कहीं किसी एकांत
- 14:53में अज्ञात तुम्हारी ही भीड़ के बीच बैठा।
- 14:58कोई फकीर भर भर के जांघ भर भर के प्यारे पी रहा है, पी रहा है और
- 15:07तुम बाहर खड़े भेड़ों के भीतर रो रहे हो।
- 15:13आंसू उसके पीछे रखते हैं लेकिन वो आहो भाव के।
- 15:18आंसू तुम्हारे भी छिलकते हैं लेकिन वो वेदना के हैं, दर्द के
- 15:23हैं, अभाव दोनों का है, मीरा का अभाव आनंद का है।
- 15:41तुम्हारी आज की मानवता का अभाव भी आनंद का है।
- 15:47मेरा के पास सब कुछ है तुम्हारे पास भी और सब कुछ है आज पश्चिम
- 15:53बहुत प्रचुर मात्रा में अमीर हो गया है धनी हो गया।
- 16:02लेकिन एक चीज़ जो गुम हो गई वो मेरे पास है, गुम हो गई है।
- 16:20आ जाओ, मेरे पास आ जाओ, मेरे पास मिले क्यों?
- 16:36कल परसों मेरी चीज़ गवाची है, ओह तेरे कोल माहिया, है कुछ बोलना।
- 16:54कुछ बोल मा ही आवे, कुछ बोल मा ही आवे कल बरसों मेरी चीज़ गवाची है
- 17:12वो तेरे। कॉलमहियावे कुछ बोल कुछ बोल
- 17:21माहियावे, कुछ बोल माहियावे। आ जाओ, मेरे पास मत मत करो, अकेले
- 17:36में मिलेगा बस एक बार दीदार करो, मंजिल तुम्हारे सामने है पहला भरा
- 17:44पड़ा है, जल्दी से उठाओ और घटक जाओ।