Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Apr 26 - 8 Billion में केवल एक ही इंसान शाकाहारी है! मांसाहार और शाकाहार की आध्यात्मिक परिभाषा!
Transcript
- 0:11सुभद्रा पाठक बड़ी दुविधा में हूँ बाबा जी मांसाहारी।
- 0:27और शाकाहार के बारे में कृपा करके रहस्यत्मक उद्घाटन कीजिएगा।
- 0:38आप सिर्फ दूध पीछे है और बहुत से ज्ञानी लोग।
- 0:47दूध को मांसाहारी कहता है जैसे ओशो, आचार्य, प्रशांत और भी बहुत
- 0:58से लोग आप कह रहे है स्यात्मक। उद्घाटन बड़ा शानदार होता है और
- 1:12तर्ककित होता है आज बिल्कुल स्पष्ट त्याग इस प्रश्न के ऊपर
- 1:24हमें उलझन। कोई शेष ना बाकी रहे, ऐसी शानदार
- 1:31पद्धति से समझा दीजिए। सुभद्रा पाठक, ग्वालियर।
- 1:46उत्तरी असल में बहुत सी भ्रांतियां दर्शन न होने के कारण
- 2:04पैदा होते हैं। ओशो चिंतक से तुमने फिलॉसोफी का
- 2:16हिंदी दर्जावां दार्शनिक गलत कर दिया फिलॉसोफर का?
- 2:23जबकि वह चिंतक होता है और चिंतन होती है बुद्धि से।
- 2:31बुद्धि के तर्क से चिंतना निकलती है।
- 2:35ओशो भी चिंतक है और शानदार चिंतक है।
- 2:42ध्यान रखना मैं ओशो को यह नहीं कहता हूँ कि वाज ना टाइम।
- 2:47एनलाइटन पर्सन था। लेकिन जब वह समाज की किसी बात या
- 2:55किसी अन्य अन्य बातों को डिफाइन करते हैं तो वह चिंतक।
- 3:04होते हैं और। बहुत बढ़िया चिंतक होते हैं।
- 3:08लेकिन वो एनलाइटन भी हैं जहाँ तक रहा आचार्य प्रसंत का स्वर वो
- 3:20मात्र चिंतक है और बहुत हल्का गरीब चिंतक है।
- 3:26गरीब समझते हो उस उस हिसाब से कि बड़ा पुअर चिंता है लेकिन एनलाइटन
- 3:38तो बिल्कुल नहीं क्योंकि एनलाइटन तो इसके लिए होती नहीं।
- 3:42उसका मतलब हुई नहीं से और उसकी बातें भी बताती हैं।
- 3:54वह तो बात कुछ अलग होती है। उसका लावण्य कुछ अद्भुत होता है
- 4:06जिसने भीतर का बोतल छू लिया। हस्ता हुआ
- 4:34तोगा दिलजुबा दिलजुबा दिलजुबा दिलजुबा।
- 4:47हँसता हुआ नूरानी चेहरा वह। लावण्या जो भीतर से इकट्ठा करके
- 4:56लाता है, उसकी प्रज्ञा हर व्यक्ति समझ नहीं सकता।
- 5:07वह कुछ अलग तरह की आँखों से देखी जाती है।
- 5:14वह दीपचक्षों से निहारी जाती है, वह इन चर्मचक्षों से नहीं देखती।
- 5:25तुमने पूछा, पुत्री मांसाहारी क्या है?
- 5:33शाकाहार क्या है पहले डेफिनिशन? जो अपने समान दूसरी जीवित जीवन को
- 5:53पैदा कर सके। अगर हम उसे खाएंगे वह माँ सहा।
- 5:57फिर इसे समझ थोड़ा गहरा है। और तुमने क्योंकि ऐसा जवाब पूछा
- 6:03है कि जड़ से नष्ट हो जाए आपका अग्न तो आज बहुत सी भ्रांतदार
- 6:09नहीं टूटेंगे? आदमी स्त्री का मिलन करके बच्चा
- 6:16पैदा होता है। मैं लड़का हूँ या लड़की हूँ?
- 6:22इस जीवंत जीवन को खाना मांसाहारी है, समझा नहीं तुम मुर्गा मुर्गी
- 6:31के विलियम से जो बच्चा पैदा होता है, अंडा पैदा होता है, उसमें से
- 6:37बच्चा निकलता है। उसको खाना मांसाहारी मुर्गे को
- 6:42काट के खा लेना मांसाहारी वह जीवन है वह जीवन को पैदा कर सकता है
- 6:50उसके भीतर शुक्राणु मुर्गी को खाना पाप है क्योंकि उसके भीतर
- 6:55अंधाणु। शायद तुम्हें समझ आ गई होगी जो
- 7:04अपने ही जैसा जीवन पैदा कर सके उसको खा जाना, मांसाहारी और जो
- 7:14अपने ही जैसा जीवन पैदा न कर सके। उसको खा जाना शाकाहार अब इसको
- 7:23मैंने आपको डिफाइन कर दिया ओशो कहीं या प्रशांत कहीं या कोई भी
- 7:36कहे? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 7:39डेफिनिशन यह मूल उदगम से डेफिनिशन आई अपने ही समान जीवन को पैदा
- 7:50करने की क्षमता रखने वाला प्राणी। जीवत कहलाता है और उसको मार के खा
- 7:57जाना मांसाहारी होता है। अब समझिए मैं दूध पीता हूँ कणक
- 8:07नहीं खाता। दूध किसी भी तरह से दूध को पैदा
- 8:12नहीं कर सकता। अनीता तुम तो दूध से दूध पैदा कर
- 8:20दो फिर भैस से दूध लेने की क्या जरूरत है?
- 8:22गाय से दूध लेने की क्या जरूरत है?
- 8:27मैंने क्यों कहा गो पालन मैंने क्यों कहा?
- 8:30गो वध बंद करेंगे? हर हार में बंद करेंगे क्यों?
- 8:35क्योंकि वह जीवंत प्राणी है। बूढ़ा हो गया है बात अलग बूढ़ा हर
- 8:44प्राणी होता है मुर्गी मुर्गा भी बूढ़े होते हैं आदमी स्त्री भी
- 8:50बूढ़े होते हैं। हर जीव बूढ़ा होता है मरता दूध
- 8:59दूध को पैदा नहीं कर सकता इसलिए दूध सापहार इसलिए भगवान कृष्ण
- 9:09देखियो। एक बात गहरे में बैठा लो, भगवान
- 9:15कृष्ण के जीवन से तुम्हें जीवन जीने की कला आ जाएगी।
- 9:25बस भगवान कृष्ण का खान पान। चाल, चलन और सब कुछ अगर तुम अपना
- 9:35लो तो तुम प्योर शाकार अब तुम कहोगे कनक कनक मांसाहारी चौकन्ना
- 9:51मत चावल मांसाहारी। जो मूंगी की दाल खाते हैं मांस जो
- 10:01फूल हम तोड़कर अपने शूद्र नेताओं पर फेंक देते हैं, वह एक प्रकार
- 10:08का जीवन हत्या है, वह व्यक्ति हत्यारा है।
- 10:15मैंने बहुत बार कहा अपने शिष्यों से कि मेरे पास फूल को तोड़ के मत
- 10:21अर्पण किया करो, यह हत्या है, यह तुम फूल नहीं भेंट कर रहे, यह तुम
- 10:28फूल की लाश भेंट कर रहे हो। उसका जीवन बेचारे का वामुसकल एकाध
- 10:37दिन का जीवन था, वो भी तुमने छीन लिया कितने बड़े अपराधी और डाकू
- 10:42हो तुम हत्यारे हो, तुम तुम जरलाद हो।
- 10:47अगर तुम खेले हुए फूल को तोड़कर मेरे अर्पण करो या बाजार से
- 10:52खरीदता होगा या किसी बाग बगीचे से तोड़ा होगा, लेकिन वह अपराध तो
- 11:00मुंगी की दाल, कनक चावल। यह मसा है क्यों कण को बीज दो, एक
- 11:12कण का दाना परिपृष्ठ हो के 1000 दानें पैदा कर देओ।
- 11:22जीवन से जीवन निकला ना? कनक का दाना जीवंत है, बस उसे
- 11:28वातावरण की आवश्यकता है, वह प्रस्तुतित होगा, अंकुरित होगा
- 11:36उचित माहौल में और अन्नन्ना पौधा बनेगा।
- 11:43बड़ा पौधा बनेगा। फिर तुम पानी दोगे, फिर वह सूर्य
- 11:49की किरणों से क्लोरफिल लेगा और आवश्यक उसको आप फर्टिलाइजर्स
- 11:58दोगे? 1 दिन वह भारी फसल हो जाएगा।
- 12:06एक दाना 1000 दानों में परिवर्तित हो जाए तो कनक मांसाहारी चावल
- 12:17मांसाहारी मूँकी की दार कोई भी दार मांसाहारी?
- 12:24जो चीज़ ग्रो होकर अंकुरित होकर अपने ही जैसा जीवन पैदा कर सके,
- 12:32उसको खाना मांसाहारी है इसलिए मैं दूध पीता हूँ, सिर्फ दूध पीता हूँ
- 12:40क्योंकि दूध दूध को पैदा नहीं कर सकता।
- 12:45मेरे पास इस धरती का फर्स्ट एनलाइटन पर्सन मेरा मार्गदर्शन
- 12:51करता है लॉर्ड शिवा जिसे तुम कहते हो लॉर्ड शिवा जब मैं फंस जाता
- 13:02हूँ। से पूछता हूँ तुम बताओ बता देते
- 13:05हो? जो चीज़ अपने जैसे जीवन को पैदा
- 13:20कर सके उसको खाना मांसाहारी है जैसे मैंने आपको।
- 13:27उदाहरण देती है। इसलिए मैं कनक नहीं खाता हूँ।
- 13:36मैं अंडा खा सकता हूँ, खाता नहीं है, खा सकता हूँ जो मुर्गी खाने
- 13:43में जो प्लेट्री फार्म में मुर्गी अंडा देती है।
- 13:50उस से बच्चा नहीं पैदा हो सकता, अपने जैसा जीवन पैदा नहीं कर
- 13:54सकता, वह मुर्गा नहीं बन सकता, मुर्गे नहीं बन सकता मुझे कोई घरे
- 14:01खा सकता हूँ मैं मैं दूसरों को खाने के लिए कहता भी हूँ।
- 14:09जो तुम्हारा दूसरा मुर्गा मुर्गी के मिलन से बच्चा पैदा होगा।
- 14:15चूजा निकलेगा अंडा उसमें जीवन पैदा हो सकता है।
- 14:19वह खानामासा ये दो प्रकार का है एक बहुत बड़ी क्रांति की विज्ञान।
- 14:30मुर्गी पादन की व्यवस्था करके एक ऐसा हमें खाद्य पदार्थ दे दिया
- 14:37जिसमें करीब करीब आपको सभी पोषक तत्व मिल जाएंगे।
- 14:42बिलकुल यह खाना शाकामार है। खूब खाइए, मचे से खाइए।
- 14:48इसमें प्रोटीन भरपूर मथुरा में होता है और एक बात और बताता हूँ।
- 14:54शुगर के पेशेंट्स को अवश्य ही खाना चाहिए क्योंकि इसमें
- 14:59कारोबार। अगर कुछ फैट्स ज्यादा है तो तुम
- 15:07चर्बी को हटा दो। देखो कितनी शानदार व्यवस्था पहले
- 15:13भाग को हटा दो, चर्बी को हटा दो, ऊपर का भाग प्रोटीन का है।
- 15:20ओशो क्या कहते हैं? इस पर तुम विश्वास करो, मैं सिर्फ
- 15:27सत्य पर और तथ्यों पर विश्वास करता हूँ।
- 15:31मुझे कोई मतलब नहीं है। तुम्हारा आचार्य क्या कहता है?
- 15:37मुझे यह मतलब है कि सत्य है क्या वास्तव में सत्य क्या है?
- 15:42और वह सत्य लॉर्ड शिवा अच्छी तरह से जानते हैं जब मैं उड़ जाता
- 15:49हूँ। पहली बात तो मुझे खुद पता चल जाता
- 15:51है लेकिन कभी कभी मैं उड़ जाता हूँ तो मैं लॉर्ड शिवा से पूछता
- 15:58हूँ बताइए? वह सर्वाध्य है, हर चीज़ का उत्तर
- 16:04देता है तो तुमने पूछा पुत्रे सुभद्रा के मांसाहारी और शाकाहार
- 16:15पर हमने तो इन तथा कथित। वाच को नहीं चिंत को ने पागल बना
- 16:24दिया। हाँ बना दिया।
- 16:25इसमें कृषक को ओशो आत्मा ज्ञानी तो है लेकिन कृष्ण जैसे
- 16:35ब्रह्मज्ञानी नहीं है। ये समझ लो आप।
- 16:38आत्मज्ञानी और ब्रह्मगणी में बड़ा फर्क होता है।
- 16:43बुद्ध आत्मज्ञानी है, ब्रह्मगणी नहीं, या केबल को प्रभंगानी कृष्ण
- 16:49ब्रह्मगणी नानक ब्रह्मगनी कबीर ब्रह्मगनी मीरा ब्रह्मगनी।
- 17:00लेकिन ओशो ब्रह्मगनी नहीं, बुद्ध ब्रह्मगनी नहीं बुद्ध, आत्मज्ञानी
- 17:06और आत्मजानी और ब्रह्मगनी का फर्क मैंने बहुत सुंदर ढंग से आपको
- 17:12विस्तृत। व्याख्याएं करके दो 2 घंटे के
- 17:15प्रोफेशनल बोले हुए हैं, आप सुनिए तो मैं करीब करीब जो आपने पूछा और
- 17:25जो नहीं भी पूछा, उन भी प्रश्नों का जवाब देकर चला हूँ इस संसार से
- 17:32बधाई। लेने से पहले और भी जो कुछ रह
- 17:36जाएगा, जो श्वास दिए मुझे, मैं उनका सदुपयोग ऐसे करूँगा तुम्हारी
- 17:43ब्रांत धारणा को तोड़ने के लिए ज़रा देखूं।
- 17:48अंडे में से चूजा निकलता है। एक अंडा ऐसा भी है वह मांसाहारी,
- 17:55वह जैसा तुमने मुर्गी को खा लिया, मुर्गे को खा लिया, वैसे ही तुने
- 17:59बोंडा खा लिया। बस अभी वो पूरा नहीं हुआ था तुमने
- 18:06उसको जैसे गर्भ में बच्चा होता है।
- 18:11तुम उसको गिरा देते हो, वह जीव हत्या ही होती है।
- 18:19आज वैज्ञानिक युग है, बच्चे अल्लाह की नियामत हैं, वो ज़माना
- 18:25चला गया। आज तुम ऐफ़ एल वगैरह का प्रयोग कर
- 18:29सकते हो और हजारों चीजें वैज्ञानिक आज वो बात ही न चलेंगी
- 18:37जो के वक्त आज होते है और मेरा तर्क सुनते जो सुन रहे है मेरा हर
- 18:44कुछ में सुनते है करीब करीब। और कुछ लोग तो कहते हैं कि वो
- 18:51अवतरित भी हो गए ना लोग उन्हें यहाँ भी सुन रहे हैं।
- 18:55यहाँ भी उनके आश्रम बन गए हैं। झूठ है ये बात ऐसा कुछ नहीं है।
- 19:01ओशो ने अभी जन्म नहीं लिया है। ओशो के लिए अभी पर्याप्त गर्व ही
- 19:05नहीं है, ना ही बुद्ध के लिए अभी प्राप्त कर।
- 19:09ऐसी आत्माओं को शीघ्रता से गर्भ नहीं मिला करता है।
- 19:172500 पर 100 के बुध गर्भ नहीं पा सके।
- 19:22कोई ऐसी माता है ही नहीं जो उनको गर्भ में ठहरा सके।
- 19:29बहुत सुकृत करने वाली धन्य भागी स्त्री ही होगी जो उसको घर में
- 19:34प्रवेश कर पाएगी तो कण का खाना मसा है, चावल खाना मसा है, मूंगी
- 19:45की दाल, मसर की दाल, उड़द की दाल, अरहर की दाल सब।
- 19:48मस्त है, कुकी के बीज हैं ये जो तुम खाते हो और उनसे और जीवन पैदा
- 19:56हो सकता है, लेकिन जो मैं दूध पीता हूँ दूध से और दूध नहीं
- 20:04बनाया जा सकता। कनक से और कनक भलाई कर सकती है
- 20:10हजारों गुण ज़्यादा और मैं सिर्फ दूध इसीलिए पे तुमने पूछ लिया
- 20:16पुत्री स्वद्र तो आज मैं राज़ खोल दिया, लेकिन क्योंकि तुम्हारी
- 20:22धारणाएं खंडित न हों, बहुत सी हाथ में दुखेंगी आज?
- 20:29लेकिन बहुत से पट भी खुलेंगे। आज और बहुत सी तर्कबद्धियाँ भी आज
- 20:35धराशायी हो जाएंगे। आचार्य प्रश्न जैसे लोग और शु तो
- 20:41गए और शु तो सुनते ही हैं। तो तुमने जो सवाल पूछा उसका मैंने
- 20:49बड़ा इजी सर्वेक्षण दे दिया। जो चीज़ अपनी ही जैसे जीवन को ऐसा
- 21:01कर रहे उसको अगर खाओगे तो बेमासा। जो चीज़ अपने ही जैसे जीवन को भला
- 21:08न कर सके उसको खाओगे तो वह शाकाहार तो अंडे दो तरह के मैंने
- 21:14बताए एक मुर्गी बालों से जो अंडा होता है वह शाकाहार जो घरों में
- 21:23जमींदार लोग पालते हैं, जो ऊर। लोग पालते हैं जिनसे चूजे पैदा
- 21:28होते हैं। हंटो से उनका रंग भी थोड़ा फर्क
- 21:32होता है। उसमें से चूजा निकलता है।
- 21:36वह मांसाहारी है। ध्यान से समझ लेना, यह
- 21:42आर्टिफीसियल होता है। वह फाइटाइल एंड यह लोन फाइटाइल तो
- 21:53इस परिभाषा को आप मूल रूप से तुमने कहा रहस्यत्मक गहरा रहस्य
- 21:59उद्घाटन कीजिए तो मैंने उद्घाटन कर दिया।
- 22:05अब ब्रांचेस आप देखते जाओ आप क्या खा रहे हो क्या उससे वैसी ही चीज़
- 22:11उगाई जा सकती है तुम कहीं बीज तो नहीं खा रहे?
- 22:17जीस बीज को रोपण करके? हजारों उसी तरह के अन्य बीज पैदा
- 22:23किए जा सकते हैं। अगर वो खा रहे हो तुम तो तुम
- 22:27मांसाहारी फिर शाकाहार दूध है। दूज को मांसाहारी कहने वाले
- 22:40तार्किक लोग अपनी भाषा में बोलो। उल्लू के पट्ठे हैं उनकी से
- 22:51प्रज्ञा नहीं उनके पास कोई। राह बताने वाला मार्गदर्शक नहीं
- 22:58है उनकी बुद्धि जो जवाब देती है पढ़ा लिखा सुना ये सब बेकार है
- 23:05भाई तुम कहते एकाद की लिखे और मैं कहता आँखों देखी।
- 23:16और तुम्हारे सामने 14 वर्षों से मैं कुछ नहीं ले रहा।
- 23:20दोस्त के सिवा दो 2 घंटे बोलना और उसके बाद फिर बोलना प्रत्येक
- 23:26व्यक्ति का किसी का फ़ोन भी आगे जवाब देना हर रोज़ का पर बचाओ हर
- 23:33रोज़ का। और बिलकुल सवस्थ हूँ, आनंदित हूँ।
- 23:40मज़े में। हस्ता हुआ नोरा नी चेहरा।
- 23:53आली जुल दिलरुबा दिलरुबा।
- 24:13दिलरुबा हँसता हुआ नूरानी चेहरा, काली जुल में रंग सुन हैरा तेरी
- 24:29जवानी। तोबा तोबा दिलरुबा दिलरुबा
- 24:41दिलरुबा दिलरुबा। यह लाभन है उस भीतर का जो चर्म
- 24:49चिक्षू नहीं पकड़ पाते। ज्योति भाईचक्षु पकड़ पाते हैं ये
- 24:55वहाँ की बात है उस तल की बात जो उस तल पर गया नहीं बंदर क्या
- 25:01जानिए अदरक का स्वाद उनकी बातें तुम सुनो मैं।
- 25:07तुम्हारा ऑप्शन। लेकिन उनकी बातें तर्कबुद्धि से
- 25:12आए हैं और बुद्धि किसी भी चीज़ को परिपूर्ण हत्या व्याख्यात नहीं कर
- 25:19सकती, क्योंकि बुद्धि सीमित है और सीमित चीज़ असीम की परिभाषा नहीं
- 25:26कर सकती। जिसकी परिभाषा तुम करने जड़े हो
- 25:30वो है प्रकृति और प्रकृति असीम और तुम्हारी गुत्थी सीमित है।
- 25:38सीमित चीज़ असीम को कैसे व्यख्यायित कर पाएगा?
- 25:44यही तो तुम कर रहे हो। यही तो तुम्हारे सर लोग कर रहे
- 25:47हैं। मुझे ओशो से कुछ लेना देना नहीं।
- 25:52ओशो बाजे ग्रीक फ्लस्फर लेकिन फिलॉसफर का मतलब आपने हिंदी में
- 25:57शब्द अर्थ गलत कर दिया। तुमने दार्शनिक कह दिया नहीं वो
- 26:01चिंतक होता है। आज मैंने इसका फर्क निकाल दिया।
- 26:06दर्शन और चिंतन इसमें दोनों में फर्क जो भीतर चढ़कर ओब्सर्वर हो
- 26:14गया वह दर्शक वह साक्षी और जिसने बुद्धि के सर पर बैठे बैठे।
- 26:22व्याख्या युद्ध किया वह है चिंतन तो फिलॉसफी के स्टूडेंट थे।
- 26:29ओशो फिलॉसफर से बाल की गाल निकाल लेंगे।
- 26:34तुम्हें अच्छे लगेंगे, तुम्हारी बुद्धि को जचे जाएगा क्योंकि ऑन
- 26:38दी सेम लेवल यू आर। तुम भी उसी लेवल पे हो सब उसी
- 26:42लेवल पे एक दूसरे की भाषा को कन्वर्सेट कर पाओ लेकिन कृष्ण की
- 26:50भाषा को तुम कैसे कन्वर्सेट कर पाओगे?
- 26:54कैसे ताजात में बिठा पाओगे? उसके साथ नहीं बैठेगा।
- 26:58वह किसी और तल से बोल रहा है तुम किसी और तल पर खड़े सुन रहे हो,
- 27:04कैसे होगा कंपॅरिज़न? तो आज मुझसे सुन लो मांसाहारी और
- 27:11शाकाहार की परिभाषा। जो कण की रोटी तुम खाते हो मज़े
- 27:17से और कहते हो मैं शाकाहारी हूँ, घर है कन का मांसाहारी और डिफाइन
- 27:25मैंने कर दिया है यह तुम बीज खा रहे हो।
- 27:28इस बीज को रोपित किया जा सकता है इस में से अंकुरण होगा।
- 27:33और 1000 बीज पैदा होंगे। एक कणक का दाना 1000 कणक के दाने
- 27:39पैदा कर देगा तो तुम क्या खा रहे हो?
- 27:41फिर आगे वो कणक के दाने फिर बीज बन जाएंगे तुमने एक कणक का दाना
- 27:46क्या खाया, तुमने अनंत असीम कणक के दाने जीवने को नष्ट कर दिया।
- 27:56लेकिन दूध में ऐसा कृष्ण, माखन, मिश्री, दूध, दही, बगैरा का सेवन
- 28:09पागल नहीं जो खाते हैं। मैंने अगर कहा कि मैं सबसे ज्यादा
- 28:16सबसे पहला मैंने शब्द कहा 10,00,00,000 लोगों में गायों की
- 28:24सेवा करने में संलग्न कर दूंगा क्यों?
- 28:28क्योंकि गाय को माता ऐसे ही नहीं करता, गाय दूध देती है ओय गाय गहु
- 28:36का वध, बस तुम्हें बतलाया नहीं गया सबसे बड़ा वध गहु का वध है।
- 28:46अजीब हत्या अगर सबसे ज्यादा है तो वह गऊ की हत्या सबसे ज्यादा बड़ी
- 28:52जीव हत्या है क्योंकि गऊ के भीतर ठीक है, गऊ दू तो देती है लेकिन
- 29:00गाय के भीतर कुछ ऐसी तरंगें निकलती हैं, बड़ी नहीं।
- 29:06जिन्हें मैं आसानी तरंगें गाता हूँ, उन तरंगों के पास अगर आप
- 29:12गायब के पास भी बैठ जाओ दो घंटा तो आपकी होर नूर बदलनी शुरू हो
- 29:21जाएगी। मेरी चाचा गाय रखते थे।
- 29:28हमेशा अगर कभी बीमार हो ना तो गाय के शरीर के ऊपर से हाथ फेरना,
- 29:38उसको भी आनंद आएगा। उसको भी जब तुम सहेजोगे मसाज
- 29:46होगा, उसका बड़ी आनंदित होगी और उसके भीतर की जो तरंगें निकली है,
- 29:53रोम रोम में से आसानी तरंगें। तुम्हारे हाथों में वो आसानी
- 30:00तृंगे प्रवेश करते है। गाय के करीब बैठने वाला व्यक्ति
- 30:05जल्दी प्रबुद्ध हो जाता है। गाय के करीब बैठने वाला व्यक्ति
- 30:12जल्दी प्रबुद्ध हो जाता है। क्योंकि गाय के क्रीब बैठने वाला
- 30:18व्यक्ति उन आसानी तिरंगों को आत्मसात कर लेता है, जो भीतर से
- 30:24आसानी तिरंगे संत के भीतर से आती हैं।
- 30:27जब वो मोड़ता है उस स्तर से आई हुई तरंगें आसानी तिरंगों से
- 30:33क्रीब मेल खाती है। मांसाहारी और शाकाहार का बहुत ही
- 30:45फर्क मैंने समझा दिया अब व्याख्या तुम करते रहे ना मूल रहस्य
- 30:51उद्घाटन मैंने कर दिया करना तो नहीं चाहता था, मैं पता था बहुत
- 30:57लोगों ने पहले भी क्वेश्चन। लेकिन क्योंकि मैं समझता हूँ कि
- 31:03रोज़ रोज़ एक चला जाता है कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले
- 31:12मिजाज़। तो 1 दिन तो हमने भी जाना है,
- 31:21लेकिन जो है तो पूछ लिया तुमने और देखो तुम पूछते नहीं हो उसे सही
- 31:28बताऊँ तो यह उसकी लीला है, वह मुझसे पूछवा लेता है।
- 31:35तुम्हारे भीतर प्रवेश करते है, सब उसका है और जब तुम अपने भीतर
- 31:47आत्मप्रज्ञा को अनुभव करोगे। उसके बाद दूसरा एक तल और आता है,
- 31:54जो मैंने बहुत वृहद रूप से आपको व्याख्यायित किया है।
- 32:06वो ये है कि आप आत्म से परमात्मा तक की यात्रा बुद्ध से कृष्ण तक
- 32:12की यात्रा तो जब तुम परमात्मा हो जाते हो, जो विराट रूपकृष्ण ने
- 32:19युद्ध क्षेत्र में महाभारत के कुरुक्षेत्र की भूमि में दिखाया
- 32:26वह विराट तुम भी हो। तुम्हारे भीतर भी वो क्षमता है
- 32:33जैसे हर कण के दायरे में क्षमता होती है।
- 32:36अपनी जैसे हजारों डाकों दाने पैदा करते हैं।
- 32:40वैसे तुम में भी क्षमता है, तुम भी परमात्मा स्वरूप हो।
- 32:46ऐसे ही ये गीत नहीं है। शिबो हम शिबो हम शिबो हम शिबो अमर
- 32:54आत्मा सच्चिदानंद मैं उस तल पर पहुँचकर कोई मंसूर कहता है अनल हक
- 33:04मैं ही खुला हूँ। उस स्थल पर कोई ऋषि पहुँच के कहता
- 33:09है अहम् ब्रह्मस्व एक को ब्रह्म द्वितीय नास्त्र बस एक ही है,
- 33:16दूसरा कोई उसी दल के ऊपर जाकर बाबा सर्वप्रथम जो शब्दवास करते
- 33:22हैं वो कहते हैं एक कोंकार। बस यही से पता चलता है कि इस संत
- 33:37ने उस तप को छू लिया जिसे परमात्मा कहते हैं।
- 33:42तुम क्षुद्र से वराट हो जाते हो वहाँ जाकर।
- 33:45तुमने विराट के उन्नतनों को छू लिया जहाँ आनंद का रस झरनों की
- 33:50तरफ रहता है हर पल, हर घड़ी तुम पीते हो और हर पल हर घड़ी तुम
- 33:59मदहोश रहत हो। मखनचोरबो नन्द किशोरजो मखनचोरबो,
- 34:57नन्द किशोरजो। ओह।
- 35:21काला काला, इकबा सूरी वाला, मखन चोर।
- 35:39नन्द की शोर, जो कार गयो, मन की चोरी रे कार ओह काला।
- 36:06इक। बा सूरी वाला।
- 36:10मन की चोरी मन तैर जाता है वहाँ। मन रहता नहीं एम् मन की स्थिति हो
- 36:16जाती है। अमन का मतलब है शांति।
- 36:24छिप गए हो फिर इक बाण चला के। छिप गए हो फिर इक तान सुना के
- 37:21गोकुल ढूंढा मैंने मथुरा ढोंढी। गोकुल ढूंढा, मैंने मथुरा ढूंढी
- 37:41कोई नगरिया। नचोरे मोरे वो काला।
- 38:06ओकला सुरिवाला।