Latest / Baba ji Vijay Vats / मनोकामना पूर्ति vs आत्म दर्शन | सुनो, गुनो और प्रयोग करो
Transcript
- 0:04शालू आपने कहा बाबा जी जो इन वचनों को सुनेगा उसकी मनोकामनाएं
- 0:17पूर्ण होगी। और वह आत्मदर्शन तक पहुंचेगा
- 0:29थोड़ा सा सरलता से सरलतम ढंग से, जैसे आप अन्य प्रश्नों को समझाते
- 0:36हैं। इन शब्दों को समझाने का कष्ट करें
- 0:44कैसे मनोकामनाएं पूरी होंगी और कैसे आत्मबोध होगा।
- 0:57एक है थ्योरी एक है, प्रैक्टिकल थ्योरी है जैसे आप वचनों को सुन
- 1:10लेते हो, वीडियो को सुन लेते हो वह थ्योरी।
- 1:16वचनों को सुनने से वीडियो को सुनने से आपकी मनोकामनाएं पूर्ण
- 1:22होंगी। यह एक हिस्सा आ गया।
- 1:29आपने सुना सिर्फ सुना, मन लगा के सुना के सुनने से।
- 1:38आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होगी। और दूसरा मैंने कहा यह प्रैक्टिकल
- 1:50औचित थ्योरी आपने सुनकर इस राह पर भी चले?
- 1:56आपने सुनकर आपने क्रियायोग भी किया, वीडियो को सुना, वचनों को
- 2:01सुना, क्रियायोग भी किया। ध्यान में भी कुछ न करने की
- 2:06स्थिति में भी बैठी यह प्रैक्टिकल प्रैक्टिकल में आप अपने भीतर
- 2:14उतरे। सुना सुन के गुणा और फिर अपने बीच
- 2:20अंतर यात्रा शुरू की। अगर आप प्रैक्टिकल करेंगे तो आपको
- 2:25आत्म बहुत हो जाएगा और आत्म बहुत से परमात्मा बहुत हो जाएगा।
- 2:31ये सरलता व्याख्या मैंने दे दी। सिर्फ वचनों को सुनोगे तो
- 2:39मनोकामना ही पूर्ण होंगे और अगर वचनों को सुन के अभ्यास भी करोगे
- 2:49उन पर चलोगे भी। तो यह सिर्फ थ्योरी नहीं रह जाती,
- 2:55वह प्रैक्टिकल भी हो जाता है। फिर आप इसके कहे अनुसार प्रयोग भी
- 3:01करेंगे। सुबह उठकर क्रिया योग भी करेंगे।
- 3:05या जब भी आपको वक्त मिल जाए। पहले वीडियो सुनी फिर क्रिया योग
- 3:13किया। फिर आप ध्यान में बैठे न कुछ करने
- 3:17की स्थिति में बैठे यह प्रैक्टिकल।
- 3:22इससे आपको होगा आत्म बोध और अगर आप सिर्फ सुन लिए।
- 3:29उसके बाद प्रैक्टिकल कुछ नहीं किया।
- 3:33न क्रिया योग किया न ध्यान में उतरे।
- 3:38फिर आपकी सिर्फ मनोकामनाएं पूर्ण होगी।
- 3:43सर एकदम ढंग से मैंने समझा दिया फिर सुन लो।
- 3:46अगर सिर्फ वचनों को सुनोगे सिर्फ वीडियो को सुनोगे तो आपकी
- 3:50मनोकामनाएं अगर वचनों को सुनकर प्रैक्टिकल में उतर गए, प्रयोग
- 3:56में उतर गए, क्रययोग भी किया। ध्यान में भी न कुछ करने की
- 4:02स्थिति में भी आ गए, आराम से बैठे रहे।
- 4:06जो कुछ होता है उसे देखते रहे, मन के विचार, दिल की भावनाओं बह रोष,
- 4:18वह घृणा, वह नफरत, वह प्रेम, वह लोभ।
- 4:27सब तुम्हारे सामने आएँगे। अगर तुमने इसे प्रैक्टिकल रूप में
- 4:33डाला तो तुम किसी दूसरी दिशा में चले।
- 4:40फिर यह सिर्फ थ्योरी नहीं है, थ्रोटिकल नहीं है, यह प्रैक्टिकल
- 4:44है। यह प्रयोग है अपने भीतर जाने का
- 4:48प्रयोग है, तो अगर तुम सिर्फ सुनोगे तो तुम्हारी मनोकामनाएं
- 4:53पूर्ण होगी और अगर सुनकर तुम प्रयोग में उतरोगे तो तुम अपने आप
- 4:59को करोगे। आत्मबोध होगा, परमात्मबोध होगा।
- 5:04यही है सरलतम व्याख्या इसको बार बार न समझाये तो बार बार सुन समझ
- 5:14में आ जाएगा।