Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Jul 25 - स्वयं की खोज की यात्रा! ये है मेरी पूरी ज़िंदगी का निचोड़! आत्मा, अनुभव और अनकही बातें!
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- 0:06बालकनाथ पुंज्य बाबा जी। सुना है कि आप सत्य बोलते?
- 0:23हैं। सुना है कि आप एक स्थान पर बैठे
- 0:33हैं 13 वर्ष सुना है कि आप अन्य भक्षण।
- 0:47सुना है कि आप पंच विचारों से करें, हो विषयों से करें, हो
- 1:03क्या? अनुभव से बता सकेंगे कि परमात्मा
- 1:10है अपने अनुभव से बता सकेंगे कि परमात्मा है।
- 1:26बालकनाथ कुंज महाराष्ट्र से ये सवाल एस सवाल है, जो सबसे
- 1:47ज्यादा बार पूछा गया। इससे ज्यादा बार आए तक कोई सवाल
- 1:55नहीं पूछा गया। आध्यात्मिक क्लासेज में सबसे
- 2:09ज्यादा पूछे जाने वाला प्रश्न यही है क्या परमात्मा है भी?
- 2:21जहाँ हम सिर्फ टक्करें ही मार रहे हैं स्वाद कीमती कहीं ऐसा तो नहीं
- 2:36बाबा? 50 वर्ष हो गए अभी तो कुछ मिला
- 2:49नहीं, कहीं ऐसा तो नहीं कि वो हो ही ना?
- 3:08तुम्हारा प्रश्न सुनकर पुत्र तुम्हारी व्यथा समझ में आती है और
- 3:20तुम्हारी व्यथा सार्थक निरर्थक ने।
- 3:41मैं तुमसे एक बात कहूंगा, अगर इस सवाल को एक एक बार एक तरफ हटा दो
- 3:52और इस सवाल को दूसरी तरह से पूछ लो तो ज्यादा अच्छा नहीं है।
- 3:59ये मत पूछो की परमात्मा है, क्योंकि जीस ढंग से मैंने पाया उस
- 4:15ढंग से ज्यादा बढ़िया रहेगा पूछना।
- 4:19कि क्या तुम भी हो परमात्मा है, मैं तुमसे कहता हूँ ये पूछो क्या
- 4:29मैं हूँ क्या आप हो ये पूछना ज्यादा सार्थक है।
- 4:44कहीं ऐसा तो नहीं की तुम्हारा होना?
- 4:47एक ब्रह्म? चीन का एक आध्यात्मिक गुर सुबह
- 5:01सुबह उठा है। शिष्यों ने उसे चाय ला दी।
- 5:15चाय के दो चूस किया नहीं। उसने कहने लगा सभी शिक्षक एक बार
- 5:24की तुम इकट्ठे बैठ जाओ आगे। बैठ गए।
- 5:34चांगस से चांगस से पूछने लगा पुत्र मुझे रात्रि एक स्वप्न।
- 5:54स्वप्न किया यार कि मैं तितली बन गया हूँ यानी कि चोंग से एक बटर
- 6:00फलाई बन गया, तितली बन गया हूँ, फूल फूल डाल डाल।
- 6:09पेड़ पेड़, तना, तना, कली, कली, तितली बन के घूम रहा हूँ मुझे तो
- 6:25पता नहीं कितनी देर यह सपना आता रहा।
- 6:35तुम्हें स्वपन का नीद का वक्त नहीं मालूम पड़ेगा क्योंकि वहाँ
- 6:40के वक्त के आयाम बदल जाया करते हैं।
- 6:52सुबह आँख खुली तो देखा शीशे अपना अपना काम कर रहे।
- 7:10पहले तो मैं तुम्हें बताया करता था कुछ हुआ आज मैं तुमसे पूछता
- 7:20हूँ रात्रि चौंगत से तितली हो गया?
- 7:25ये तो ठीक है गुरूजी? ये स्वप्न तो आपको आया लेकिन हमसे
- 7:31क्या पूछना चाहती हूँ? यही तो दुविधा है पुत्र कहीं ऐसा
- 7:42तो नहीं कि अब तितली को स्वप्न आ रहा हो कि वह चौंगस्य हो गई?
- 7:59मैंने बड़ी कोशिश की सुबह सो उठा हूँ चुटकी भरी।
- 8:02अपने आप को खूब ज़ोर से दर्द हुआ, लेकिन दर्द तो सपने में भी उठता
- 8:08है। मेरे सभी तर्क बेकार हुए।
- 8:17चुटकी भरी, उछला, कूदा, नाचा गाया, लेकिन यह सब कुछ तो सपने
- 8:24में भी होता है और सत्य होता है। तुम कहते हो सपना सपना था, भ्रम
- 8:31था नहीं, सपना, सपना था नहीं, सपना सत्य था।
- 8:38जीस वक्त सपना देख रहे थे सत्यम बाद में झूठा हो जाए ये बात अलग
- 8:47है। चोंगश्य बोला कहीं ऐसा तो नहीं
- 8:57क्या वह तितली का सपना आ गया? की मैं च्वांगत से हो गयी हूँ।
- 9:06मेरे इतने शिष्य हैं, काम धाम कर रहे हैं और एक शिष्य आगे सुबह चाय
- 9:11देगा। मुझे दो चुस्कियां ही पिए हैं, ये
- 9:15सब सपना तो नहीं। शिष्य तो बौखलाए गुरु की बात तो
- 9:30बिलकुल ठीक है। अंतश को हिला देने वाली यह कौन
- 9:36जाने? सपना तो हमें भी आता है।
- 9:44ऐसा हो सकता है कि हमें सपना आ रहा हो और हमारा गुरु हमसे पूज
- 9:49रहा हो। बड़ी दुविधा पड़ी किसी को कोई
- 10:00जवाब? नहीं।
- 10:06तो च्वांगत सिंह ने दो चुस्कियां चाय की ओर ले ली।
- 10:12धीरे धीरे सारी चाय पी गया। पूरा पुत्र।
- 10:24यही रहस्य है इस दुनिया का कि तुम समझ सकते हो कि मैंने जान
- 10:39लिया। और हो सकता है कि वो जानना
- 10:46कल्पनाओं में हो और कल्पनाएं स्वप्न ही तो हुआ करती हैं।
- 10:55बहुत से लोग कल्पनाओं में जान लेते हैं।
- 10:57ब्रह्मात्मा मुझे रोज़ संदेश आते हैं।
- 11:01आज कृष्ण भगवान मेरे सामने नाचे। संघ राधा भित थे।
- 11:13इन सपनों ने बड़े से संस्थान केंद्र अध्यात्म के योग केंद्र
- 11:20खड़े कर दिए। कोई सत्य को जानता भी है।
- 11:34यह प्रश्न विचारणीय नहीं, यह प्रश्न देखने योग्य है।
- 11:46क्योंकि सत्य के बारे में विचार करना मोड़ता है।
- 11:55सत्य के बारे में दर्शन करना ही सही मार्ग है।
- 12:03चौंगस्य ने प्रश्न पूछा। और तुमने प्रश्न पूछा पुत्र क्या
- 12:13भगवान है? छोड़ो भगवान की बात है, ये भगवान
- 12:21भगवान, ये धर्म अधर्म। इन्होंने तुम्हें क्या दिया?
- 12:30थोड़े अतीत के झरोखों को खोल के देखो, माओं ने बच्चों को जन्म
- 12:40दिया, परपोसा अपने स्तनो से दूध पिला के बड़े किये।
- 12:51खेले कूदे गाय, उसके सांनिध्य में हर पल ख्याल किया रोहुआ का।
- 13:03इन राजनीतिक लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए उन्हें आहूत कर
- 13:07दिया। ये आहूत होने वाले लोग खुद को
- 13:26शहीद मानते हैं जबकि ये है बली का।
- 13:31बकर। जो आहूत हो जाती हैं धर्म की, वो
- 13:43अपने आपको शहीद मानते हैं जबकि हैं ये बाली के पक्का हैं।
- 13:57जमाने ने मारे जमा कैसे कैसे जमीं खा गई आसमान कैसे कैसे?
- 14:13एक बार की यह प्रश्न और तो पूछो बैठा यह पूछो के पूछने वाला है
- 14:25जिसने यह प्रश्न पूछा के भगवान है।
- 14:31वो एक बार की ये पूछ ले कि क्या मैं हूँ असली खोज तक शुरू होती
- 14:41है, भगवान की खोज नहीं की जा सकती, स्वयं की खोज की जा सकती
- 14:50है। कहीं ऐसा तो नहीं?
- 14:54कि तुमने रास्ता ही गलत छू लिया है।
- 15:00खोजना स्वयं को था खोजना शुरू कर दिया भगवान ऐसा ही लगता है मुझे।
- 15:21और भगवान को खोजोगे तो भगवान को कभी न भोग क्योंकि जीस यंत्र से
- 15:32भगवान को खोजने चले थे। वो यंत्र भगवान को देख नहीं पाता।
- 15:39तुम्हारे पास चरण चक्षु हैं। यह चरम शिक्षकों का विस्तार है।
- 15:45हर्बल टेलीस्कोप होगी जेम्स वेव टेलीस्कोप होगी और बड़ी टेलीस्कोप
- 15:51बना लो। ये आंख का ही विस्तार है।
- 15:57क्या भगवान को देख पाओगे? आकाश को देखोगे, चंद्रतारों को
- 16:07देखोगे, ग्रहण, क्षत्र आदि को देखोगे, गैलेक्सीज़ को देखोगे,
- 16:14ब्लैकहोल्स को देखोगे, इस अभ्रमंड का विस्तार देखोगे।
- 16:20किते दूर दिगंतर तक यह फैला हुआ है ये देखो क्या भगवान को देखो
- 16:37नहीं भगवान को नहीं देखो। क्योंकि भगवान देखने को।
- 16:46भीषण। इसलिए कृष्ण कहते हैं तुमको कृष्ण
- 16:56कहते हैं बरबरी को। हे योद्धा अगर तू युद्ध में
- 17:07वास्तविक क्या घटा यह देखना चाहता है तो फिर तू इन चरम शिक्षकों से
- 17:17न देख पाएगा। ये चमड़े की आँखों से न देख
- 17:20पाएगा। वास्तव में क्या घटा यह देखने के
- 17:32लिए तो पर ब्रेक हे योद्धा हे अपूर्व योद्धा उसके लिए दूसरे
- 17:43जक्ष्यों की जरूरत पड़ेगी। और वो तुम्हारे पास है नहीं, तुम
- 17:56महाभारत की लड़ाई को सत्य रूप में परिपूर्णता देखना चाहते हो तो फिर
- 18:08ऐसा करो। कि सत्य को दिव्य जक्षियों से
- 18:16देखा जाता। है।
- 18:19चर्म जक्षियों से नहीं देखा जाता है बर्फी, बोले।
- 18:33भगवान यह दिव्यचक्षु कौन देगा? कृष्ण का दिव्यचक्षु तो मैं ही दे
- 18:44दूंगा, लेकिन उसकी कीमत चुकानी होगी।
- 18:54बरवृक्ष ने छाती भला ली, मैं जोधा हूँ, किसी भी प्रकार के मूल्य को
- 19:03चुकाने के लिए हर वक्त तैयार बोलिए महाराज क्या चाहिए?
- 19:13भगवान कृष्ण बाली तुम्हारा शीश तुम्हारा शीश प्रेम न बाड़ी उपजाई
- 19:25प्रेम न हार्ट बिकाये राजा पर जा यही रूच।
- 19:33शीष दे ले जाए। शीष देना होगा बर्बी को लो प्रभु
- 19:51कहानी है कि बर्गरिक ने शीष देखे। और कहानी है उस चीज़ को बहुत ऊंचे
- 19:58से डांग दिया, भगवान कृष्ण ये ले अब तू देखता रहा मेरी कृपा से तू
- 20:05सारा महाभारत का युद्ध यथावत देखेगा जैसे हुआ कहानी।
- 20:17पर मैं जब भी कहूं कहानी है तो उसका अर्थ ये होता है कि आदि
- 20:23सच्ची भी है और आदि झूठी भी है। कुछ अंशिस में सत्य और कुछ अंशिस
- 20:32में झूठ। और अगर ठीक से देखा जाए तो
- 20:39महाभारत का युद्ध है। दो ही भेषण देखा या तो देखा कृष्ण
- 20:53भगवान ने स्वयं? क्योंकि वह दृष्टता है, कण कण में
- 20:59समाहित है और कण कण में समाहित होकर अपनी ही सृजना में क्या हो
- 21:06रहा है? वो देखता है या देखा?
- 21:16निष्पक्ष भाव से सिर्फ देखा धर्मजक्षु नहीं थे, उसके पास
- 21:25दिव्य सक्षु नहीं और दिव्य जक्षु उसे कहते हैं जहाँ बुद्धि नहीं
- 21:30होती। दिव्य शिशुओं का थोड़ा सा गहंस
- 21:36मतलब मैं आपको समझाती हूँ, बुद्धि हो जाती है किंतु परंतु कटिंग
- 21:45सेटिंग सेंसरशिप करने वाले बुद्धि नहीं।
- 21:53और बुद्धि के अभाव में जो दिखता है वो ज्ञान शक्षु देवचक्षु होता
- 21:59है। तुम भी अगर अपने आप को देखोगे,
- 22:06सत्य को देखोगे। इस बुद्धि को छोड़कर ही देख रहा
- 22:13होगा दिव्य चक्षरों से ही और उसके लिए बलि देनी होगी सिर के सिर या
- 22:29बुद्धि। सर्वे और है क्या?
- 22:34बुद्धि ही तो है देखिए उन्होंने हर्ट नहीं मांगा।
- 22:40हृदय ने मांगी अजीबोगरीब सी कहानी भगवान कृष्ण ने बरप्री से मैंने
- 22:47कहा मुझे दिल दे दे। दिल का कोई फायदा नहीं है दिल तो
- 22:57कोई अर्जुन डालता। है।
- 23:03मुझे बुद्धि दे दे सर दे दे यही है कबाड़ा?
- 23:10यही फैलाता है। सारे ब्रह्मों यही फैलाता है।
- 23:15सारे ज्ञान को बड़े सुंदर शब्द ज्ञान भी यही फैलाता है।
- 23:26भ्रम भी यही फैलाता है। एक शब्द बीच में लेते चले प्रश्न
- 23:43हाँ, क्योंकि यहाँ थोड़े से शब्दों में निपट जाएगा।
- 23:50एक प्रश्न आया है, के एन के शर्मा नाम के एक डॉक्टर नेचरा नेचरपैथी
- 24:07जानते हैं, पास्ट लाइफ रिग्रेशन भी करते हैं।
- 24:19उसके बारे में क्या कहूँगी और भी बहुत सी चीजें बताती हूँ के बारे
- 24:28में। मैंने कहा देखिये मैं इस तरह के
- 24:34नाम की किसी व्यक्ति को जानती हूँ।
- 24:39डॉक्टर हो गए तो समझदार हो गए, लेकिन बात कुछ समझदारों जैसी लगती
- 24:50है। बात तो उल्लुओं जैसी लगती है।
- 24:58दूसरों का जन्म तुम कैसे बताओगे और दूसरों का जन्म बताने के लिए
- 25:07जो प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।
- 25:14फिर वह व्यक्ति तो अपने अंतःस्थल पर पहुँच गया व्यक्ति ही हो सकता
- 25:21है। मेरे सर्च करने वाली संस्थाओं को
- 25:36इसका सर्च करने दो। इस दिन मैं बात को आगे बढ़ा देता
- 25:40हूँ। जे एन के शर्मा नाम के व्यक्ति की
- 25:45सर्च कर लेने दो। मुझे ये कौन है, जानता है या नहीं
- 25:51जानता है। क्या है नेचुरोपैथी पास्ट लाइफ
- 25:56फ्री ग्रेशन और बहुत सी बातें बताते हैं, ये बताती हूँ आपको पता
- 26:06है मैं अपनी शक्ति को इन फिल्मों पे।
- 26:12मोबाइल के बिना काम की बात के खर्च नहीं करता।
- 26:20किसी भी प्रकार की शक्ति को मैं संग्रहित रखता हूँ काम पड़े
- 26:26तुम्हारे कम पड़े। युद्ध समाप्त हुआ।
- 26:41सभी गौरव मारे गए, एक बचा लेकिन वो गांधारी पुत्र ने एक बचा जब
- 26:53गांधारी गर्भवती थी। तो धृतराष्ट्र ने एक दासी को अपनी
- 27:03अर्धांगनी बना लिया। पत्नी रूप में उनसे एक पुत्र
- 27:07उत्पन्न हुआ जिसका नाम था यू जूसव।
- 27:13युद्ध होने से पहले जब युधिष्ठिर कहने लगे देखिए हम आमने सामने
- 27:19खड़े हैं, युद्ध की शुरुआत होने को है और भगवान कृष्ण अर्जुन को
- 27:26समझा रहे हैं। बड़ी दुविधा की बात है अर्जुन का
- 27:29प्र है। उसकी समस्या अपनी समस्या है।
- 27:36कैसे मारू अपने गुरु को कैसे मारू अपने दादा श्री को और इधर
- 27:44युधिष्ठिर युद्ध के मैदान में दोनों सेनाओं से किताब करते हैं।
- 27:52अगर मैं धर्म। युद्ध लड़ रहा हूँ।
- 27:57जो ये समझता। है वो मेरे पाले में आ जाए और
- 28:01अगर। मैं अधर्म युद्ध लड़ रहा हूँ, तो
- 28:04जो मेरे पाले में है वो उधर चला जाए गौरव पक्ष में।
- 28:09अभी समय है जब तक भगवान कृष्ण पांच्यजन्य शंखनाद नहीं कर देते।
- 28:18युद्ध नहीं शुरू होगा। उधर से विष्णु प्रथम ने शंखनाद कर
- 28:23दिया था। लेकिन कृष्ण?
- 28:27समझा रहे हैं अर्थ। अभी थोड़ी देर।
- 28:32लग रही है। तो कोरुओं के।
- 28:37पक्ष में युज उत्सव तृतराष्ट्र का पुत्र था दासी के गर्व से।
- 28:47पांडवों के पक्ष। में आ गया।
- 28:50वहीं बच गया। तुम ये मत पूछो कि परमात्मा है या
- 29:12नहीं है, थोड़ा सवाल को उल्टा करो, तुम हो के नहीं, क्योंकि तुम
- 29:22हो तो तुम्हारा पूछने जा ही जा। अगर तुम ही नहीं हो।
- 29:28तो तुम्हारा पूछना। जायज नहीं है।
- 29:32फिर पूछेगा तू मेरे हिसाब से चलो, तुम पूछो।
- 29:40ये मत पूछो। परमात्मा है।
- 29:43ये पूछो कि मैं। हूँ।
- 29:49और परमात्मा। को सर्च करने के लिए तुम बाहर
- 29:52जाओगे वनों में ढूँढोगे किसी गंगा किनारे किसी पहाड़ की कंधाओं।
- 30:05किसी पहाड़ की। रोगियों में हिमालय की कंधाना में
- 30:08जाओगे वण वृक्षों में। ढूंढोगे इधर उधर।
- 30:12ढूंढोगे। लेकिन ये?
- 30:15ढूंढ़ना बाहर होगा। ब्रह्मात्मा को।
- 30:20ढूंढ़ना सदा ही मनुष्य ने बाहर किया है।
- 30:23इसलिए लोग बाहर? भाग जाते थे।
- 30:29संत कितना ही। चिल्लाते रहे कस्तूरी कुंडर बसा
- 30:35है मृगटुंडा है अम्मा। ऐसे घाटों में।
- 30:40भी वह मूर्ख जानें ना। वो तुम्हारे भीतर बैठे।
- 30:47लेकिन वो तुम हो। खुद हो।
- 30:54लेकिन तुम उसे। बाहर।
- 31:00किसी दूरबीन से। दिखाई नहीं पड़ेगा वो किसी सच खंड
- 31:03में नहीं बैठा है। सच खंड नाम।
- 31:06की कोई चीज़ नहीं शर्क नाम की कोई चीज़ नहीं नर्क नाम की कोई चीज़
- 31:10नहीं। यार तुम्हारे।
- 31:13बनाए हुए ब्रह्म। ज़रा देखो तो।
- 31:17शर्क का काम क्या है? नर्क का काम।
- 31:21क्या है जो तुमने पाप कर लिया? उसका दंड।
- 31:26नर्क में जाके भोगो गया। फिर यहाँ जो।
- 31:30हॉस्पिटल में कराह रहा है 3030 वर्षों से कराती है लोग मैंने
- 31:34देखी। क्या एक पाप।
- 31:42का एक कर्म का दंड दो बार मिला करता है।
- 31:51किसी ने कतल कर। दिया।
- 31:53जज ने एक बार सुना दिया फैसला, उम्र कैद उम्र कैद करके फिर।
- 31:59कहीं और जाके भुगतना होगा। ही विल बी।
- 32:04रेरिस्ड फ्रम दी जेल? उसको जेल से।
- 32:10छूट दिया जाएगा। अंधापन हो गया।
- 32:20यहाँ भी भोगो हॉस्पिटल में भी भोगो, संसार में भी भोगो और
- 32:25तुम्हारे नर्क में भी भोगो, यह पागलपन किसने बनाया?
- 32:31और फिर तुम्हारे। शास्त्रों में लिखा वो इतने योजन
- 32:34दूर है। कोई तोक।
- 32:38वैक्सीन। भगवान ने बुद्धि भी।
- 32:41दी है और भगवान ने विवेक भी दिया है।
- 32:45ऐसी शानदार संरचना के बनाने वाले सृजना सृजनार ने इतनी सूक्ष्म
- 32:52व्यवस्था को? व्यवस्थित कर।
- 32:55दिया है। कि उसमें कोई कमी निकाली नहीं जा
- 32:59सकती। एक बार का।
- 33:02पाप। एक बार ही।
- 33:05भोगना पड़ता है। यहाँ तुमने भोग।
- 33:08लिया। नर की आवश्यकता क्या थी?
- 33:14कोई जवाब देगा मुझे? शर्क की आवश्यकता।
- 33:22क्यों थी? तुमने कोई पुण्य किया जहाँ तुम
- 33:27सवस्थ हो सुन्दर हो, तुम्हारा नाम है, ख्याति है, धन है, संपत्ति
- 33:34है, गद्दियाँ है। श्री सलमान है।
- 33:42सब कुछ है, लोग फ़िदा होते हैं। स्वर्ग है यही तो स्वर्ग है।
- 33:52फिर और बाकी। के रह गए जो स्वर्ग।
- 33:57एक कर्म का। फल दो बार नहीं मिलता, वो सुख है,
- 34:01चाहे दुख है, पाप है या पुण्य है, सर्व और नरक की वैसे भी कोई जरूरत
- 34:06नहीं है। जहाँ तुम।
- 34:11कर्म करते हो प्रछी पे वहीं भोगते भी हो।
- 34:17यही स्वर्ग भी। है अच्छे कर्म करने वालों के लिए
- 34:21और यही नर्क भी है बुरे कर्म करने।
- 34:25यहाँ तुम देखते। हो?
- 34:30और अच्छे कर्म? करते हो भी देखते हो, बुरे कर्म
- 34:33करते हो भी देखते हो। सही मायने?
- 34:38में नरक और स्वर्ग की जरूरत भी नहीं थी और व्यर्थ की बातें
- 34:43परमात्मा पैदा भी नहीं किया गया था।
- 34:50स्वर्ग नरक की कोई। आवश्यकता नहीं थी अगर कोई
- 34:52आवश्यकता है, तो बता दो। स्ट्रीट ऑफ माइन तुम इतने दुखित
- 35:01व्यथित होते हो, वही तो नर्क होता है।
- 35:07स्ट्रीट ऑफ माइन। तुम इतने प्रसन्न होते हो।
- 35:11दिन भर रात। हम कहते हैं तीयों की तरह दिन
- 35:14गुजर गए। सावन की ती?
- 35:17होती है तीज? कितनी खुशहाली।
- 35:20में दिन व्यतीत हो जाते। हैं यही तो स्वर्ग।
- 35:24है और स्वर्ग क्या होता है? सही से।
- 35:29देखें। तो स्वर्ग और नरक सर्जना सर्जन
- 35:37आर्की सर्जना तुमने बनाया कि अपनी किताबों में बनाया क्या परमात्मा
- 35:45इसे नहीं बना सकता? हर चीज़ की।
- 35:49ऐक्युरेसी में बनाने वाला। वह सर्जनहार।
- 35:55क्या नरक और स्वर्ग नहीं बना सकता?
- 36:01ये तुमने बनाया तुम कह देते हो वेद परमात्मा नहीं लिख।
- 36:11उपनिषद परमात्मा। ने लिखे।
- 36:15सारे धर्म शास्त्र। परमात्मा ने लिखे।
- 36:22इसी कि दावे तो? परमात्मा लिख नहीं सकता।
- 36:27परमात्मा। मल्टीडायमेंशन विचारों का नहीं
- 36:30है। सीधी सीधी बात।
- 36:32लव ग्रैविटेशन। जो चीज़ लव।
- 36:38ग्रैविटेशन ग्रैविटेशन फोर्स से बाहर हो जाएगी, वो वापस धरती पर
- 36:42कभी नहीं आए एक ही सिद्धांत है। अगर किताब।
- 36:48बनाता तो एक ही बनाता। लेकिन उसकी कोई?
- 36:53किताब नहीं। क्योंकि उसने तुम्हें।
- 36:58जीवन दे दिया। और जीवन को?
- 37:02जीने के लिए बुद्धि और विवेक दे दिया।
- 37:05तुम इनका इस्तेमाल करके अपनी जिंदगी को तुम ही नर्क बना सकते
- 37:11हो। तुम ही स्वर्क बना सकते हो।
- 37:18इट्स इन यूर। ओन हैंड्स ये तुम्हारे अपने हाथों
- 37:22में। महाभारत खत्म हुआ, वही बात डटने
- 37:30लगे भीम कहता मैंने मारे 98 योद्धा सिनेमा गंधारी के 98 बुध
- 37:36सिनेमा। वो कहता है, मैं नहीं।
- 37:44जीता। आज दिन कहता है।
- 37:48ना मैं नहीं सुनता नहीं, मैं नहीं जीता अगर मैं झूठ नहीं बोलता।
- 38:00चरित्रवान लोग। भी मूर्ख होते।
- 38:04चरित्रवान लोग। समझदार हों, जरूरी नहीं है।
- 38:09अक्सर तो। चरित्रवान वही होता है जो मूर्ख
- 38:12होता है। अन्यथा चरित्र।
- 38:15साधना नहीं पड़ता साध जाता है। छाया की तरह साध।
- 38:21जाता है। साधना नहीं पड़ता।
- 38:24तुम अगर पवित्रता को साध रहे हो देवियों तो तुम्हारी पवित्रता का
- 38:29साधना गलत है, पवित्रता साधती है, साधना नहीं होती।
- 38:38तुम समर्पण। करते हो देवियों?
- 38:42समर्पण? कराया नहीं जाता, समर्पण हो जाया
- 38:46करता है। बड़ी चीजें।
- 38:52होती है, कराई नहीं जाती। जितनी भी वृहत चीजें हैं,
- 38:57ब्रह्मात्मा के संसार में वह हैपन होती है।
- 39:05फिर धड़कता है। तुम धडकाते हो।
- 39:10फूस फूस श्वास। लेते हैं तुम श्वास लेते हो?
- 39:16जितनी भी वृहद। चीजें हैं बड़ी चीजें हैं।
- 39:20जो तुम्हारे जीवन का कारण बनती है भीतर रस रक्त मास में मजाक हड्डी।
- 39:29सब बनता है। वीर बनता है, ओस बनता है, तुम
- 39:33करते हो? तुम भोजन कहाँ लेते?
- 39:38हो बस। मज़ा उठा लेते।
- 39:40हो टेस्ट वर्ष के द्वारा बाकी काम काम करता है और असल काम तो बाकी
- 39:46का होता है। ये सब भीतर जो।
- 39:49मशीनरी परमात्मा ने ऑलरेडी फिट करती है तो हमारी कोई आवश्यकता
- 39:53नहीं थी। लेकिन ये लोग?
- 39:56भी मन। मन लोभी मन लाल ची मन, चंचल मन
- 40:00चोर। इसकी इजाद?
- 40:04है स्वर को नर्क। ये लोग ही।
- 40:09तुम्हें रावण के पास फ़ोन कराता है, जबकि उसके मरे हुए कितने 1000
- 40:13सालों के। लगाओ रहा हूँ।
- 40:24कथावाचक ऐसे ही मूड होते। हैं छवि लड़ने।
- 40:30लगे तो भगवान किसने कहा लड़ो मत। मैंने तुम्हारा।
- 40:35इंतजाम पहले ही कर दिया। ज्ञान चक्षु।
- 40:39से युक्त एक व्यक्ति दिव्य चक्षु से युक्त एक व्यक्ति बरबरी
- 40:44तुम्हारा ही अपना भीम का पोता, वो देखो कंगा पर।
- 40:55उसने सब देखा। बिना बुद्धि के देखा साफ साफ
- 40:58देखा। और जो बिना बुद्धि के।
- 41:01देखता है वो साफ साफ देखता है। तुम्हारा सीसीटीवी कैमरा है इसमें
- 41:05बुद्धि का। सिर्फ दर्शन ही।
- 41:09दर्शन? सिर्फ देखता है अपनी।
- 41:12बुद्धि रिडाता है। जीस दिन।
- 41:16सीसीटीवी कैमरा ने अपनी बुरी लड़नी शुरू कर दी।
- 41:21उस दिन स्पष्ट। रूबेन चित्र नहीं आएगा, फिर एआई
- 41:26की तरह वो विकृत कर दिया। सीसीटीवी।
- 41:30कैमरा तभी तक सुरक्षित है और निष्पक्ष है जब तक उसमें अपनी
- 41:34बुद्धि नहीं आती। तो कृष्ण ने कहा बहुत।
- 41:43सामने आया सब कुछ। चले गए कुछ।
- 41:51हाथ जोड़ के खड़े हो गए। आपने सारा दृश्य महाभारत का देखा?
- 41:56हाँ देखा तो आपने क्या देखा बताइए?
- 42:04हम सभी भाइयों। में से कौन सबसे ज्यादा बनी?
- 42:09किसके सिर पे? ताज सजे।
- 42:13शेरा बने। जीत का।
- 42:20तो बरबरी बोले। बोल ही सकते थे।
- 42:23हाथ पहुंचे थे। ये कहानी तुम्हारे अरबाज़ में
- 42:28कहता हूँ। वैसे तो शीष।
- 42:32मांगा था। ये शीष, नहीं मांगा था अंकार
- 42:34मांगा था। अच्छे भले।
- 42:38थे पर वीर। और तुम सिर्फ सिर।
- 42:42की पूजा करते हो, आज खाटू श्याम में जाकर देखो।
- 42:48हद कटा मानव। रखा।
- 42:51और मैं अक्सर छेड़ दिया। करता हूँ श्याम भक्तों, मैंने कहा
- 42:56गल कटिए के पास से। नाराज हो जाते हैं।
- 43:01बाबा हमारे बाबा को क्यों कहते हो आप?
- 43:04मैंने कहा गल कटिया ही तो है। खाने को काना।
- 43:08कहना क्या गलत है? अंधे को अंधा कहना क्या गलत?
- 43:13शीश कटिया, तो। है ही?
- 43:16नहीं बाबा ऐसे। मत कहो तुम कहो, शीश के दानी।
- 43:20भाई तुम्हारे अलफ़ाज़ हैं भाई कुछ भी कर लेकिन सही तो बात ये है कि
- 43:27तुम्हें भी सच पता नहीं। पूर्ण।
- 43:31बर व्रीप पूर्ण रहा, उसने कुछ नहीं गंवाया, अपने शरीर का कोई
- 43:36अंग उसने काटा नहीं। भगवान कृष्ण।
- 43:42ने उसका ईगो खत्म कर दिया। वह प्रभुत्व।
- 43:49जैसे ही ईगो। खत्म होता है।
- 43:53तो तुम। विस्तार फैलाव।
- 43:57उस अखंड के आनंद के स्वयं हो जाते हो, परमात्मा हो जाते हो।
- 44:07उस दिन बर्बी। को परमात्मा हो गया यह कृष्ण की
- 44:10कृपा। अर्जुन पर इतनी।
- 44:16कृपा नहीं की जितनी बरवी। अर्जुन को कोई?
- 44:21वरदान नहीं दिया बरवी को वरदान किया।
- 44:25करीब मैं तेरी। मान्यता होगी तेरी पूजा होगी ये
- 44:29भगवान कृष्ण ने वरदान दिया। वह मुक्त हो गए।
- 44:37और मुक्ति हमारे धर्म में सबसे बड़ा।
- 44:41आखरी? पड़ाव है मोक्ष, संबोधि क्या कोई
- 44:52चीज़ वगैरह नहीं मांगा था? अक्सर।
- 44:56भाषा में कहते थे।
- 45:34शेष। तलीधर शेष तलीधर शेष तलीधर।
- 45:55घर घर मेरे आऊं जी प्रेम मिलन की चा।
- 46:15ये तो प्रेम। मिलन की इच्छा है।
- 46:19वो विराट प्रेम। जो कण कण में।
- 46:22विस्तरित है। फैला हुआ है।
- 46:25अगर तू उससे मिलना चाहता है। तो शीष को।
- 46:31काट के मुझे दे दें इस शीष को नहीं काटना ये तो शरीर का अंग है।
- 46:41सभी पांडव। इकट्ठे हो के द्रोपदी संग थी
- 46:46कुंती की संग थी। बरबरी के पास।
- 46:49गए। पुष्य नगर।
- 46:53फास्ट चौक के प्रमुख आपने क्या देखा?
- 47:00दिव्य जिक्षुओं। से युक्त व्यक्ति प्रभु हो जाता
- 47:02है। ज्ञान शिक्षुओं।
- 47:08से युक्त व्यक्ति भगवान हो जाता है।
- 47:11पूजा के योग्य हो। जाता है।
- 47:16सत्य बताओ वर्दी। तुम्हें कैसी?
- 47:22खबर हूँ। बट नहीं कहता।
- 47:28जो सदा से सत्य है वो आज भी हुआ, कुछ तो समझ नहीं आया।
- 47:37भीम थोड़ा मोटे दमा भीम कहता, मुझे समझ नहीं आया।
- 47:42उसका ही तो। जो सदा से।
- 47:52सत्य है वो आज भी हुआ। इसका मतलब क्या?
- 47:56है, समझाओ पुत्र बरबरी पूरा पितामयह।
- 48:11सदाश्री सत्य। हैं।
- 48:14के भगवान कृष्ण। का सुदर्शन ही सारे काम करते हैं।
- 48:18आज भी सुदर्शन ने ही काम किया। जीतने वध हुए पिता में हैं, आपने
- 48:27नहीं मारे? न कृष्ण ने हमारे नारी जी बस एक
- 48:37कार्य में बने मारे तो कृष्ण के सुदर्शन चक्र।
- 48:49और सदा से ये। सत्य हो रहा है।
- 48:55जो करता है। वो ही करता है।
- 49:00कृष्ण नहीं। चाहता।
- 49:02कोई मरे यह समझ लेना। किसी व्यक्ति।
- 49:09के पाप या पुण्य बाधित करते हैं कि कृष्ण का सुदर्शन चक्र चले रो
- 49:16से मार दे अब सुदर्शन चक्र, क्या इसे समझा दूँ?
- 49:21क्योंकि मैंने एक शब्द। उपयोग किया।
- 49:23मैंने कहा कृष्ण ने नहीं मारा तो झटका ना अर्जुन ने मारा, ना भीम
- 49:33ने ना कृष्ण। कृष्ण के चक्कर।
- 49:36ने मारा मतलब किसने मारा? भगवान की सरजना ने मारा भगवान की
- 49:43सरजना के नियम ने मारा। जब बुद्ध कहते।
- 49:49हैं लार्ज अरे सुफ्फिसिएंट उन्होंने मारा क्रिया की
- 49:58प्रतिक्रिया ही मार देती। जिन्होंने पाप किया।
- 50:03था। पाप के बदले।
- 50:08में जो वापसी हुआ रिएक्शन उसने मार दिया उन्हें।
- 50:13ना कृष्ण ने कुछ। शस्त्र उठाया बिल्कुल सही अगर
- 50:17कृष्ण। ये बड़ा प्यारा।
- 50:21शब्द है किसी भक्त ने प्रश्न पूछ लिया ये कृष्ण ने सौगंध कही थी
- 50:27क्या झूठ फोड़ते है कृष्ण ये बड़ा प्यारा सुवाद क्या कृष्ण झूठ
- 50:35बोलते हैं? शास्त्रों के आखिर में लिखा कि जब
- 50:40गए कृष्ण पूछने और सभी पूछने तो भरप्रीख बोला कि किसी ने नहीं
- 50:46मारा, भगवान कृष्ण ने मारा सब। तो फिर इसका मतलब?
- 50:52कृष्ण झूठे हैं, बाहर से कहते हैं मैं शस्त्र नहीं उठाऊंगा, लेकिन
- 50:57अंतर से तो शस्त्र उठा रहा। है, झूठे भी हैं।
- 51:01पखंडी भी हैं। और नकाबपोश?
- 51:05भी है। यही तो मैं बोला हूँ, आज मैंने
- 51:09दुविधा दूर कर दी आपको। न भीर ने मारा।
- 51:14न अर्जुन ने मारा, न कृष्ण ने मारा।
- 51:20बरप्री कहते। हैं।
- 51:22कृष्ण ने भी नहीं मारा, कृष्ण के चक्कर में मारा।
- 51:26वो चक्र क्या है? चक्र है परमात्मा।
- 51:32ने जो सृजन हारने सृजना बनाई। उनके भीतर जो।
- 51:37नियमों से अभद्र कर दी ये सृष्टि? उन्हें नहीं, मैंने।
- 51:41मारा। पाप का परिणाम दुख।
- 51:47पुण्य का प्रण हम। सुख एंड दीज़ आर सुफिशिएंट लार्ज
- 51:52आर सुफिशियन भगवान कृष्ण को कुछ नहीं करते भगवान कृष्ण तो नकलिप्त
- 51:57और साक्षी। बहुत।
- 52:04गहरे प्रश्न का। ये प्रश्न था।
- 52:07किसी वक्त का है। तो भगवान कृष्ण?
- 52:15कहाँ अपनी प्रतिज्ञा को कहाँ तोड़ा?
- 52:24ये भी झूठ। है कि उन्होंने रथ का पहिया उठा
- 52:28लिया और खुद। इतने मूर्ख नहीं है।
- 52:31इतने जल्दी बोलने वाले नहीं हैं। उनको कोई सीजोफ्रेनिया नहीं हो
- 52:34गया तो सब जानते हैं कि मैं सुगंध वध मैं शस्त्र नहीं उठूंगा तो
- 52:42नहीं उठाऊंगा और सुदृष्टि चक्र भी उन्होंने नहीं उठाए तो यह आप समझ
- 52:48लेना। बड़ा गहरा प्रश्न था।
- 52:54मैंने कहा था जब प्रसंग। आएगा तो आपको जवाब दे दूंगा।
- 52:59आज प्रसंग आ गया। है।
- 53:02कृष्ण ने भी। नहीं मारा पापियों को।
- 53:06पापियों को। उनके।
- 53:10भगवान कृष्ण। की सृजना के नियमों ने मारा।
- 53:16यही सुदर्शन चक्र कहलाता है। क्या लाश?
- 53:25आर्ट्सफीसिएंट यही वो दिखता है। ठीक भी है, नियम काफी नियम ही
- 53:37अपना काम करते है। नियम ने अपना काम।
- 53:40किया। पापियों का।
- 53:43वध कर दिया। ये पाप।
- 53:48वर्शाली थे मसल से बुद्धि थी, अनुभव था एष्ट थे।
- 53:57संख्यात्मक रूप। से ज्यादा कहाँ 11 और कहाँ सात।
- 54:0718। अरब अक्षोनी सेना।
- 54:1211। अक्षोनी कुरबों के पास सात
- 54:15अक्षोनी पांडवों के पास चार अक्षोनी का फर्क बहुत होता है।
- 54:20चार व्यक्ति भी। हो जाए, कभी भी बहुत होता है।
- 54:25लेकिन 11। अक्षुवणी सेना समाप्त करती है
- 54:30किसने मारा? कृष्ण तो बच्चन भक्त थे उन्हों से
- 54:39शस्त्र नहीं उठाना। फिर अगर उन्होंने।
- 54:42सुदर्शन चक्र भी उठाया तो वचन का उल्लंघन हुआ नहीं, सुदर्शन चक्र
- 54:48उन्होंने नहीं उठाया। नियमों को वो थोड़ा।
- 54:52कहते हैं कि गतिशील हो जाओ नियम तो खुद से ही गतिशील हो जाते हो।
- 54:57सुदर्शन चक्र का। काम ही है।
- 54:59लोग कह देते हैं शिशुपाल को कृष्ण निमार शिशुपाल को कृष्ण निमारण।
- 55:07शिशुपाल को कृष्ण? निमारण।
- 55:12शिशुपाल? वचनबद्ध था।
- 55:16कृष्ण वचनबद्ध। थे सो।
- 55:19गालियों तक मफ नियम आड़े आ गए ना और 100 गालियों तक कृष्ण कुछ नहीं
- 55:26बोले। कृष्ण का न्याय परना कुछ नहीं
- 55:28बोला। जब 100 गालियां।
- 55:31हो गए। कृष्ण तो बल्कि उसको चेताते रहे,
- 55:35अरे मूर्ख समझा। तो नियमों का उल्लंघन।
- 55:39ना कर। कृष्ण बड़े।
- 55:42करुणा बान। उसको बराबर।
- 55:47गिनती कर रहे हैं 90 एक कान में निडान में अब एक रह कर देख लो।
- 55:53लेकिन रुकते ही। नहीं।
- 55:56और शिशु उपल। का वध कर देते हैं, कृष्ण नहीं
- 55:58करते हैं। भगवान कृष्ण की।
- 56:01न्यायप्रणाली करती है लाज। तुम्हारा क्या ख्याल है तुमने?
- 56:08जूता ऊपर पटक दिया भगवान कृष्ण लेके आएँगे नीचे।
- 56:14ग्रैविटेशन। फोर्स से भगवान ने बनाया, बोले
- 56:16क्या है? कृष्ण की आवश्यकता।
- 56:21क्या है कहाँ कहाँ जाएंगे कृष्ण? जी मैं तुमसे।
- 56:26कहता हूँ। गीता के एक स्लोप।
- 56:29में पड़ा। अंधेरा छा।
- 56:35गया ऐसी हमारी सनातन संस्कृति में।
- 56:41बिलकुल साफ और। तिस्क।
- 56:44यदा जदा। ही धर्म से गला निर्भक्ति भारत।
- 56:48जब जब धर्म। की हानि होती है।
- 56:54यदा जदा। ही धर्मस्य गलाने भवती भारत।
- 57:00अभिथानम। धर्मस्य तदात्तानम सरजमीहम।
- 57:06पित्रानय। साधुना विनाशाई से दुष्क्रेता।
- 57:10धर्म संस्थापनार्थाय। संभवानु जोगे।
- 57:15जोगे। जबकि कोई?
- 57:26इम्बैलेंस होता है इम्बैलेंस मेरी।
- 57:31तो भगवान खुद थोड़ी। जाते हैं।
- 57:36लार्ज और। सफीशियंट।
- 57:39इसको ठीक से समझ। लेना तुम।
- 57:44तुम्हारे। इसी।
- 57:47शलोक के कारण। बहुत सी मान्यताएँ जन्म दे गईं।
- 57:51तुमने कृष्ण की पूजा करनी शुरू कर दी।
- 57:55जरूरत भी क्या? थी।
- 57:57कृष्ण को पता भी। नहीं, तुम कृष्ण की पूजा कर रहे
- 58:00हो सही तो बात ये है कि तुम रिश्वत दे रहे हो कृष्ण को।
- 58:05कोई मान्यता होगी। कोई मन्नत होगी यह पूरा कर दो।
- 58:09बाबा लड्डू गोपाल है, बेटा दे दो। आज नियमों।
- 58:16को अंधभक्ति में लिपट दिया गया है।
- 58:22कल मैंने एक छोटा सा। शॉट डाला था कलमा के वो।
- 58:27किसी अंधभक्त ने? सुन लिया होगा।
- 58:30और रिप्लाय आता? है।
- 58:32रिप्लाय क्या आता है अनसबस्क्राइब?
- 58:36मैं अच्छे से समझ। सकता हूँ?
- 58:39यह व्यक्ति कितना? जला होगा।
- 58:43अंधभक्त के पास? और होता भी क्या?
- 58:46जले के सिवा? और क्या होता है?
- 58:48मैं कहता हूँ अच्छे से ही जला दो। थोड़ा सा पूरा।
- 58:53जला दो। इतना सा जले मेरी बात से अगर पूरन
- 58:58जला दिया होता और तुम्हें दिव्यदृष्टि मिल गई होती तो पागल
- 59:04हुए अनसबस्क्राइब। मैंने कहा, भाई।
- 59:13सबस्क्राइब, मेरे से पूछ के किया। मुझे।
- 59:21अनसबस्क्राइब का? तुम सैटर्न तो कर सकते हो, अगर
- 59:24सबस्क्राइब मेरी मिन्नतों के बावजूद, किया सबस्क्राइब मुझसे
- 59:30पूछ के किया मैं तो कभी किसी को कहा नहीं।
- 59:34कहता नहीं। मैं तो एक ही।
- 59:37जानता हूँ। गुरु को इतना।
- 59:40ही शिष्य बनाना चाहिए। जीतने विद्यार्थियों।
- 59:44को वो पढ़ा सकता है। बाप को उतना ही।
- 59:50बच्चा पैदा करना चाहिए जीतने बच्चों की वह देखरेख परिपोषण कर
- 59:54सकता है। गुरु को इतना ही।
- 59:58शिष्य बनाना चाहिए। ये तो कोई बात ना?
- 1:00:03भाई 5,00,00,000 लोग बना के। और बड़ी सी थार।
- 1:00:08में बैठ गए और छर्क से पास से निकल गए।
- 1:00:11ये दर्शन हो गए। बाबा की हवाएं।
- 1:00:15छू गईं तुम्हारे दिल में और तुमने।
- 1:00:18कहा आह। हाँ, हाँ, क्या बात है, तुम अपने
- 1:00:24सोख तुम अपने दोख तुम अपनी जरूरतें, तुम अपने कष्ट क्रैश
- 1:00:29पीड़ा दर्द। कुछ भी तो साझा नहीं कर सकते पर
- 1:00:33गुरुक इसलिए होता है फोड़े पे लगाना होता है।
- 1:00:39गुरुक फोड़े पे लगाना। होता है।
- 1:00:43तुम्हें कोई कोई भी सब्जेक्ट पढ़ा रहा है?
- 1:00:47अगर बच्चा इतना। समझदार होता।
- 1:00:52तो पाठशाला में। प्रविष्ट क्यों होता इतना समझदार
- 1:00:56नहीं है। तभी तो उसने दाखिला लिया और
- 1:01:00दाखिला लिया तो वो प्रश्न किस्से पूछेगा।
- 1:01:05प्रश्न उसी से पूछेगा जो व्यक्ति। निर्धारित किया गया है।
- 1:01:09समझाने के लिए किसी पड़ोसी को जाके पूछेगा।
- 1:01:18यहाँ लोग मूड़ लोग बैठे जो पांच 5,00,00,000 शिष्यों को बना लेते
- 1:01:23हैं। फिर 5,00,00,000।
- 1:01:27शिशु। दहल जाएंगे।
- 1:01:34दिल दुश्मन के। छोड़ जाएंगे।
- 1:01:38प्राण। ये कोई राजनीतिक?
- 1:01:42पार्टी है या धार्मिक या धार्मिक उन्माद है पार्टी में?
- 1:01:49धार्मिक। उन्माद है।
- 1:01:55तुम पीड़ाग्रस्त हो। तुम रोगग्रस्त हो।
- 1:02:00और डॉक्टर ने। 5,00,00,000 शीशे बना लिए तो कब
- 1:02:04मौका मिलेगा? जब तक तुम्हारी बारी आएगी, तुम
- 1:02:07पर्ण त्याग कर दो। कैसे पहुंचोगे?
- 1:02:12उसके पास। 5,00,00,007।
- 1:02:16करोड़ लोगों की लंबी कतार और डॉक्टर एक है।
- 1:02:22फिर तुमने नए नए। फॉर्मूले खोज लिए।
- 1:02:26बस मन ही मन। में कह दो।
- 1:02:30तुम्हारी समस्याओं। को मैं समझ लूँगा क्योंकि मैं गट
- 1:02:34गट के अंतस की जानत भले बुरे के पीर पहचान यहीं से तो पागलपन शुरू
- 1:02:40हो जाता है। उस तल पे?
- 1:02:48जगय नहीं जहाँ घट घट की भीड़ बछानी जाती है।
- 1:02:54जहाँ घट घट के अंतः को जाना जाता है, वो कौन सा तरह थोड़ा समझाएं?
- 1:02:59थोड़ी वीडियो लंबी हो जाएगी। चेतन मन।
- 1:03:09अवचेतन मन, अचेतन मन स, मुहि का अवचेतन मन।
- 1:03:15ये वो मन? है जो अचेतन मन से बिलकुल नीचे
- 1:03:19आता है और स मुहि का अवचेतन मन यह कोलेक्टिव अनपॉन्शस माइंड है।
- 1:03:27यहाँ गुरु फेरी। लगाता है अपने शिष्यों को।
- 1:03:31देखता है किसको? क्या तकलीफ है?
- 1:03:33सच्चा गुरु यही करता है। बहुत बार।
- 1:03:38लगेगा तुम्हें तुम्हारी समस्याएं। हमने सोचा।
- 1:03:46कोई प्रश्न किया, सब वह वीडियो में आ जाएगा।
- 1:03:51ये क्या हुआ? गुरु ने तुम्हारे कलेक्टिव
- 1:03:54अनकॉन्शस माइंड में जाकर देख लिया कि यह प्रश्न इसके भीतर है।
- 1:03:59यह समस्या इसके भीतर है। इसको हल कर।
- 1:04:06वो हल करने का उपाय करेगा कलेक्टिव अनकॉन्शस माइंड में
- 1:04:12लेकिन जो चेतन पे ही बैठा। ज्यादा से।
- 1:04:17ज्यादा हृदय में उतर गया प्रेमपूर्ण है।
- 1:04:23वह तो कलेक्टिव। अनकॉन्शियस को जानता नहीं
- 1:04:27कलेक्टिव कान्शस्नस को तो जानने का सवाल ही नहीं।
- 1:04:31वह तो जो। जानेगा वह इतना पाकलिपन कैसे
- 1:04:34करेगा? वह क्यों छह?
- 1:04:38करोड़ शिष्य बनाएगा। ये तो भाग लूँगा।
- 1:04:41कम है जब किसी शीशे से संवाद नहीं हो सकता आमने सामने बैठ के।
- 1:04:50हम जहाँ घंटा घंटा। बात कर जाते हैं।
- 1:04:54क्योंकि घंटे में। बात 1 घंटे में बात उनकी समझ में
- 1:04:57आती वो कहना क्या चाहते हैं? किसके बच्चा नहीं?
- 1:05:05होता किसके पीड़ा है किसी के रोग है।
- 1:05:10किसी के कोई। तकलीफ है किसी के कोई 1000 तकलीफ
- 1:05:13होती है दैहिक दैविक भौतिकता का। बहुत से प्रकार।
- 1:05:20के ताप हैं, कमियां हैं। लेकिन अगर इतने।
- 1:05:25शिष्य तुम बना लोगे कि तुम संवादित भी ना कर पाओगे तो शिष्य
- 1:05:30जाएगा। मैं तो इस वृत्ति।
- 1:05:35का हूँ? मैं इसे समझ का हूँ?
- 1:05:38कैसी सोतनी ही बनाओ इसीलिए तो। आप भीतर घुसने?
- 1:05:43की कोशिश करते हैं। यहाँ स्वयंसेवक आपसे कहते हैं
- 1:05:46नहीं, नहीं आप जाइए यहाँ आपका कोई स्थान नहीं है।
- 1:05:52हमने हाउस पर जितनी चिटें थी, लेकर गए।
- 1:05:58अब तुम्हारा कैसा? है अब तुम वहाँ जाओ।
- 1:06:01जहाँ भेड़ों का। जमावड़ा है भेड़ों का वहाँ जाओ,
- 1:06:06वहाँ सब समाहित हो जाता है। सर्व कार्य भक्षण।
- 1:06:12काल सबको भक्षण कर देता। है।
- 1:06:22ये मत पूछो कि क्या परमात्मा है? मैं तुम्हें आसान।
- 1:06:28उपाय बता देता हूँ तुम पूछो। तुम हो तो पूछो।
- 1:06:35तो फिर खोजो क्या तुम हो? यही तो।
- 1:06:39सारे। ऋषि कहते हैं तुम नो दाई सर रमन
- 1:06:46कहते हैं हूँ एमआइ रिमेम्बर यूरसेल्फ गुरजीत कहते हैं, कुक्की
- 1:06:53परमात्मा को खोजना तो न मुमकिन है।
- 1:06:57इम्पॉसिबल। अपने आप को खोजना पॉसिबल नहीं है
- 1:07:04क्योंकि तुम हो और परमात्मा को तो बाहर खोजना पड़ेगा।
- 1:07:10तुम अटक जाओगे भटक जाओगे। द्रव्यों में अटक जाओगे, धन दौलत
- 1:07:15में अटक जाओगे, मान सम्मान में अटक जाओगे।
- 1:07:17बहुत ही जगहें हैं तुम्हारे भटकने के बड़े।
- 1:07:22क्षेत्र हैं तुम भटक। सकते हो?
- 1:07:26अपने भीतर तुम क्या। खाक भटकोगे अपने भीतर जाओगे।
- 1:07:33और अपने को। खोजना है, परमात्मा को नहीं।
- 1:07:38अपने को खोजते खोजते जब तुम खो जाओगे।
- 1:07:46जीसको खोजने। चला था वो पाओगे, फिर मिल गया
- 1:07:54अपने को खोजते कोई अपने को खोजते। क्योंकि तुम्हारे बुजुर्गों।
- 1:08:01ने तुम्हारे धर्मों ने तुम्हें सिखाया कि बाहर जाने से खोजने से
- 1:08:05मिलता है बाहर वो है नहीं भीतर है वो खोजा जाता है भीतर से।
- 1:08:15भीतर ही उतरना। पड़ेगा।
- 1:08:19अपने आप। को खोजो सबसे पहले मैंने कहा।
- 1:08:22बुद्ध का तल अनिवार्य रूपेण तय करना ही होगा।
- 1:08:32अपति को भव नो दायसल्क। अपने आप को जाना।
- 1:08:37यह जरूरी। कदम है।
- 1:08:40फिर चाहे वहाँ पर। रुक जाओ कोई बात नहीं।
- 1:08:44क्योंकि तुम्हारी सारी समस्याएं दुख तकलीफ पर रोक चिंताएं
- 1:08:49चिन्ताएं। कष्ट क्लेश।
- 1:08:52झगड़े झूठे। सब खत्म हुए, वहाँ जाते फिर कोई
- 1:09:03उत्पाद, कोई चिंता, कोई क्लेश। तुम्हें उद्दगृण।
- 1:09:08नहीं करेगा तुम्हें खुशी भी नहीं देगी, कोई खुशी।
- 1:09:14या तो पाल या। फिर कलंदर था।
- 1:09:18बुहा खुल गया। अपने अंदर दा सुखवासी हाँ उसमन
- 1:09:22दर्दा जीतने चढ़ दी है ना लेंथी है जाना तो चढ़ोगे ना उतरोगे।
- 1:09:31जहाँ तुम्हारे बाबा। विश्व बदली, तुम शांत रहोगे।
- 1:09:36यक सार। हो?
- 1:09:45परमात्मा। है ये मत पूछो क्योंकि मेरे पूछने
- 1:09:52से अगर कोई भी जवाब मैं दे दूँ, तुमने बहुत से शास्त्रों में पढ़ा
- 1:09:55होगा कि वो है। लेकिन वो जवाब तुम्हारे।
- 1:09:59लिए सही नहीं। रोटी है, सब्जी है, पानी है, भूख
- 1:10:08भी है और मठ भी जाती है, प्यास भी बूझ जाती है।
- 1:10:13लेकिन। ये सिर्फ ब्लैकबोर्ड पे लिख के या
- 1:10:16किताबों में पढ़ के तुम्हारी भूख थोड़ी मिटती है।
- 1:10:21नहीं मिटती तुम अपने आप को। खोजो परमात्मा को मत खोजो और मत
- 1:10:31पूछो के परमात्मा है ये पूछो कि तुम हो।
- 1:10:36तुम्हें अभी तो। अपना ही पसंद है।
- 1:10:43पहले अपना। तो?
- 1:10:45कि तुम हो चौंगस से कहते हैं कहीं ऐसा तुम की।
- 1:10:50तितली को। सपना है कि मैं चौंगस से होगी।
- 1:10:54बात बड़ी मज़ाकी। है और बात बड़े काम की है।
- 1:11:07और तुम पाओगे अपने आप को खोजते खोजते खोजते खोजते तुम पाओगे तुम
- 1:11:21ही खो गए। बड़े शोक से सुन रहा था ज़माना,
- 1:11:30फनी सो गए दास्तां कहते कहते। तुम खोजते।
- 1:11:39खोजते खो जाओ। याद रखना।
- 1:11:44एक तल पे खो जाओगे और दूसरे तल पर हो जाओगे और हो के भी शुद्र को
- 1:11:51खोया और हुआ तो विराट हो गए। शुद्र को खोकर।
- 1:11:57विराट हो जाओगे? शूद्र को खोकर।
- 1:12:03विराट हो जाओगे? ये जवाब दिया गया।
- 1:12:06हमारी रिसर्च कमेटी। ये कहते है हमने।
- 1:12:10पड़ताल कर ली। वो झूठा है।
- 1:12:12मैं कहा। उसको तो खुद के।
- 1:12:18ही नहीं पता कोई पिछले जन्म में क्या था चलो।
- 1:12:21मैंने आपको जवाब दे दिया यह भी प्रश्न था अब किंतु परंतु मेरे से
- 1:12:29मत करना। किंतु परंतु।
- 1:12:34करोगे तो फिर अच्छी तरह से कर लेना।
- 1:12:41हमारी रिसर्च। कमेटी का जवाब आ गया वह झूठा है,
- 1:12:46प्रसिद्ध होगा, बलवान होगा। गणपति होगा, डॉक्टर है, सब है,
- 1:12:56क्वालिफिकेशन है, डिग्रीज़ है। धन होगा, पद भी होगी, कुछ ना कुछ
- 1:13:02पुरस्कार भी जीता होगा। लेकिन हमारी।
- 1:13:11सत्य खोजने वाली। फ़ैक्ट्स खोजने।
- 1:13:15वाली कमिटी गति में झूठा है। वो तो खुद को भी।
- 1:13:18नहीं जानता कि पिछले जाम में कौन थी?
- 1:13:21पिछला जन्म होता भी है कि नहीं? मैं इसको भी पक्के से नहीं जानता।
- 1:13:26चलो मैंने अपना जवाब दे दिया। अपने आप को।
- 1:13:32खोजो परमात्मा को मत खोजो। और अपने आप को इतना।
- 1:13:38खोजो। कि तुम्हारा।
- 1:13:40अपने आप का खोजना ही ग्राहक बन जाए।
- 1:13:47हज होना आये बहाल माँ? अजहु न?
- 1:14:00आए बालमा। सावन?
- 1:14:13ई। सावन?
- 1:14:17ई। ता जा आज हूँ ना आए बालमा सावन वि
- 1:14:33ता जा। हाय रे सावन बी ता जा हाय रे सावन
- 1:14:50बी ता जा। धन्यवाद।