Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 Nov 24 - मृत्यु ही जीवन का सबसे महान गुरु है। क्या मृत्यु ही ध्यान का अंतिम और सर्वोच्च अनुभव है?
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- 0:05परिणाम बाबा पूर्णिमा हिसार से सत्य क्या है और सत्य को कैसे
- 0:19जाना जा सकता है बाबा? कृपया इसको पूर्ण विस्तार से खोल
- 0:29कर समझा दीजिये, सरल भाषण सब बड़ा महत्वपूर्ण है रोज़ पूछा जाता है।
- 0:44रोज़ मैं बतलाता हूँ कैसे जाना जाए सत्य कबीर का एक दो है जब।
- 1:04वह था तब जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि है मैं ना प्रेम गली पति
- 1:17सांकरी ता मैं दो न शमार। दोगले हो के तुम रह नहीं सकते,
- 1:29चैन नहीं मिलेगा और चैन कर चैन के ही तो में तलाश है क्या ढूंढ रहे
- 1:38हो चैन? सत्य क्या है?
- 1:49चैन सत्य है, झूठ बेचैनी है। कबीर कहते हैं।
- 2:02इस बयान में दो तलवारें नहीं आती और तुम सदा दो तलवारें रखते हो,
- 2:09एक मान्यताओं की और दूसरी जो है वास्तव में इस बयान में पहले से
- 2:17एक तलवार रखी है कि तुम कौन हो? वह सत्य है, दूसरी इस म्यान में
- 2:26तलवार तुमने रख ली है अपनी बना के मनगड़ंत कल्पना से वो सत्य नहीं
- 2:32है वो तुमने बनाई हुई है तुमने कैसी भी बना ली?
- 2:39किसी ने तुम्हें समझा दिया कोई शस्त्र पढ़ लिया, कोई गुरु बना
- 2:44लिया उसने तुम्हें समझा दिया रबोट में रट लिया, लेकिन कबीर कहते हैं
- 2:54कि सत्य की तलवार। एक ही होती है दो नहीं होती सत्य
- 2:59कभी दो होते हैं एक ही सत्य होता है ना तुम कहीं गए थे तो बस वहाँ
- 3:09गए थे यह सत्य। सत्य दो नहीं होते, सत्य एक है
- 3:19इसलिए कबीर कहते हैं बड़ा गहरा शब्द है दो नहीं समाते, उसमें
- 3:31सत्य, वेह जो तुम्हें चयन दे दे और तुम सत्य की तलाश में हो।
- 3:40क्योंकि तुम बेचैन बेचैन हुए हुए तुम कुछ भी करते हो बेचैन हुए हुए
- 3:54तुम जो भी कुछ करते हो, वह सिर्फ धूल में लट्ठ है जैसे धूल हो
- 4:00तुम्हें दिखता कुछ नहीं और तुम्हें कोई मार के भाग गया हो।
- 4:05तुम अंदाज़े से लट्ठ फेंक देते हो, दिखता तो है नहीं, लट्ठ लग
- 4:10गया तो लग गया, धूल में दिखता तो है नहीं, नहीं लगा तो नहीं लगा बस
- 4:17तुम्हारी मान्यताएँ धूल में लट्ठ है, पता तुम्हें कुछ नहीं।
- 4:23तुम्हें कोई चपथ मार के भाग गया धूल में खो गया पता तुम्हें है
- 4:30नहीं देखता तुम्हें है नहीं कि कौन चपथ लगा गया और तुम दूर से लट
- 4:34से ला देते हो लग जाएगा लग जाएगा, नहीं लगेगा तो ठीक है, भाग ही गया
- 4:41अब तो। सत्य क्या है और सत्य को पाने का
- 4:51तरीका क्या है? सत्य चैन है और तुम भी चैन हो।
- 5:00तुम सत्य को पाने की 1000 1000 कोशिशों करते हो।
- 5:03तुम चैन को पाने की अनंत कोशिशों करते हो, धन इक्कठा करते हो,
- 5:13बेकरार दे। तुम गाये जा बेकरार, दिल तू गाये
- 5:28जा खुशियों से भर वो थराने। जिसे सुनके दुनिया झूम उठे और
- 5:45झूमठ दिल दीवाने बेकरार दिल। तो गाये जा गाये जा।
- 6:00बस तुम गाये ही चले जाते हो। ये गाना धुल का लट है गाने से
- 6:11तुम्हें चैन मिलता है। पैसा कमाने से तुम्हें चैन मिलता
- 6:15है, सुरक्षा मिलती है, सुविधाओं के साधन मिलते हैं, तुम अपनी
- 6:22आरामदायक वस्तुओं को खरीद सकते हो, पद भी मिल जाए तो हुकुम चलाते
- 6:26हो, तुम सेफ महसूस करते हो। और इस रास्ते पर सेफ होना बड़ी से
- 6:35बड़ी बाधा है। परमात्मा के रास्ते पर सेफ होना
- 6:43बड़ी से बड़ी बाधा है। सुरक्षित मत हो, असुरक्षित हो
- 6:50जाओ। अगर तुम सुरक्षित होने की चेष्टा
- 6:54करोगे तो फिर परमात्मा को जानने की इच्छा त्याग देना एक ही मिलेगा
- 7:06या सत्य मिलेगा या इल्यूज़न मिलेगा।
- 7:09यह सत्य मिलेगा या फीक मिलेगा, यह तुम्हारी मर्जी है।
- 7:14तुमने क्या चुनना है अगर वास्तव में तुम दुखी हो, चिंताएं तुम्हें
- 7:24घेरती हैं, निराश हो, जीवन से तंग आ गए हो।
- 7:30जीवन बोझल मालूम पड़ता है और तुम वास्तव में शांति की तलाश में हो।
- 7:39सत्य की तलाश में हो, चैन की तलाश में हो तो यह गाना बंद करो।
- 7:48क्योंकि गाने से कुछ नहीं होगा। गाना वैसे कमाने जैसा है, पदवी
- 7:54कमाने जैसा है, शान कमाने जैसा है, लोगों को अपने पीछे लगाने
- 8:02जैसा है, कम्यून बनाने जैसा है गाना गाना तुम्हें सुरक्षित।
- 8:08कर देता है। बहुत से लोग मेरे साथ हैं, तुम
- 8:13सुरक्षित महसूस करते हो और सुरक्षा ही बाधा है।
- 8:18इस रास्ते पर चलना हो तो सबसे पहले इस सुरक्षा को त्यागना होता
- 8:23है, इसलिए शांत। बार बार में आगाह करते हैं।
- 8:32अगर यह रास्ता चुन ही लिया है जे तो प्रेम मिलानो की इच्छा।
- 8:47जय तो प्रेम मिलन की इच्छा शी श तलीधरु।
- 9:06शीश तलीधर शीश तलीधर, शीश तलीधर घर मेरे।
- 9:24आं? असुरक्षित होके आओ मेरे घर में
- 9:35अगर आना है तो सुरक्षा ले ले के अगर आओगे तो मेरे घर तक ना पहुँच
- 9:44पाओगे। गलत दरवाजों को खटखटाते रहोगे।
- 9:49वास्तव में चैन चाहिए तो देख लो पहले बेचैनी में कुछ मिला अगर
- 9:59वास्तव में बेचैनी से कुछ नहीं मिला।
- 10:04तो फिर मेरा दरवाजा खटखटा रहा हूँ, मैं चैन हूँ, मैं करार हूँ,
- 10:13मैं आनंद हूँ, मैं मद्द होसी हूँ, मैं आनंद का सागर हूँ मैं खुमारी
- 10:20के गीत हूँ। असुरक्षित होना सीखो सबसे पहले
- 10:31तुम सुरक्षित होना सीखते हो, सत्य से वंचित हो गए, जैसे ही तुमने
- 10:40सुरक्षा खोजी, तुम सत्य से विहीन हो गए।
- 10:44क्यों यहाँ कोई सुरक्षित है? जो तुम्हारी सुरक्षा करते हैं वो
- 10:51खुद असुरक्षित है। कहीं तुम्हें ख्याल नहीं आता।
- 10:59तुम्हारी सुरक्षा करने वाले लोग खुद असुरक्षा के जाल में फंसे हुए
- 11:05हैं। सत्य क्या है, उसको पाने का
- 11:11रास्ता क्या है? असुरक्षित हो जाओ, यह रास्ता है
- 11:16अनसेफ हो जाओ और तुम्हारा मन डिमांड करता है।
- 11:20सेफ होने की यही द्वंदा है तुम्हारा।
- 11:27ये रास्ते कांटों से भरे हैं, तुम चाहते हो फूलों के रास्ते पर चलना
- 11:34तो चलो संसार के रास्ते फिर तुम्हारे लिए फूल हैं इनके रास्ते
- 11:42पर चलो। परमात्मा का रास्ता फूलों से भरा
- 11:48नहीं है। ये डगर कांटों से भरी है।
- 11:54मीरा ने कहा है सूली ऊपर से जो प्रिया के के समेत मेरे न होए।
- 12:02पिया की सेज तो कांटो के ऊपर है, सूले के ऊपर है तुम चाहते हो
- 12:08फूलों की सेज कैसे मिलेगा तुम्हें नहीं मिलेगा मेरा एक तरीका है अगर
- 12:22कोई व्यक्ति मुझसे पूछ लेता है। अभी दो 4 दिन पहले एक मुमुक्षु ने
- 12:30मुझसे पूछ लिया मैं कौन हूँ? बताओ ये सामने खड़ा हूँ, बताओ मैं
- 12:36कौन अब मैं तो जानता हूँ। यह कौन है, भली भाँति जानता हूँ,
- 12:47अगर मैं नहीं जानता फिर और कौन जानता है अगर कभी फरीद, नानक ये
- 12:55नहीं जानते कि तुम कौन हो और कौन जानता है?
- 13:03तो मैं एक बार तो बड़ा अचंभित हुआ सदा ही अचंभित होता हूँ।
- 13:09जब कोई व्यक्ति पूछे मुझसे कि मैं कौन कमाल है तो मुझसे पूछो कि मैं
- 13:16कौन हूँ तो बात अलग है। तुम मुझसे पूछो कि तुम कौन हो, यह
- 13:23तो बात जची नहीं तो पूछा बताओ मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूँ, मैं कौन
- 13:30हूँ बताओ अब जो जवाब तुम देते हो वह मैं नहीं देता।
- 13:39क्योंकि पूछने से पहले ये देख लेना चाहिए कि मैं किस्से पूछता
- 13:42हूँ ये तो तुम अपने पड़ोसी से ही पूछ पूछ सकते हो, वो बदला देगा कि
- 13:49तुम्हारे बाप का नाम यह है, तुम्हारा नाम यह है इस जाति गोत्र
- 13:54के हो? इतने साल के हो, शादीशुदा हो नहीं
- 13:58हो, उलाद है, नहीं है, यह बात तो तुम्हें तुम्हारा भी बता देगा।
- 14:06मुझसे पूछने की आवश्यकता क्या है और तुम भी जानते हो कि तुम कौन
- 14:11हो? खैर मेरे दर पे जो पूछने आए हो
- 14:15क्यों? पूछने आए हो मेरे घर पे तो सदा वो
- 14:20पूछे इस चीज़ का इलम नहीं है? तुम अपनी टीचर से पूछते हो मास्टर
- 14:27से पूछते हो वो प्रश्न पूछते हो जो तुम्हारी समझ में आता है?
- 14:33जो तुम्हारी समझ में आ जाए। कभी वो प्रश्न पूछा है तुमने नहीं
- 14:41पूछते ना मुझसे वो प्रश्न पूछा जाता है जो तुम जानते नहीं, उसने
- 14:50पूछ लिया बताओ मेरे को? और भी बहुत कुछ बता दिया।
- 14:58वह मेरे बारे में तो जानता है लेकिन खुद के बारे में नहीं
- 15:03जानता। इसे ही अंधभक्ति कहते हैं।
- 15:13खुद के बारे में नहीं जानता, दूसरों के बारे में जानता है और
- 15:19सारा संसार अंधभक्त है? तुम दूसरों के बारे में जानते हो?
- 15:27दूसरा पाप ही है क्योंकि तुम्हें उनका पाप दिखता है।
- 15:33दूसरा पुण्य आत्मा है, दूसरा लोभी है, दूसरा ठग है, दूसरा झूठा है,
- 15:41दूसरा समझदार है, दूसरा पागल है अपने बारे में तुम लोगों से पूछते
- 15:48हो। ये बात कित्तुकी में ही है कि तुम
- 15:56अपने बारे में दूसरे से पूछो ऐसे लोगों को मैं कह देता हूँ भाई
- 16:04बागेश्वर जाओ वहाँ पूछो। वो तुम्हें सब बतला देगा कहाँ से
- 16:10आए हो कैसे बतलाता है यह तो वही जानता है तेरे का तो कोई होगा तुम
- 16:24ऐसा मत करो, वह बतला देगा तुम्हारी बुआ का नाम क्या है?
- 16:31वह बतला देगा। तुम्हारे बाप का नाम क्या है,
- 16:34दादी का नाम क्या है? तुम क्या इच्छा लेकर आए हो, सब
- 16:38बता देगा और उसका हल भी बता देगा। हालांकि हाल होता नहीं अगर कैंसर
- 16:46का हल तक होना शुरू हो जाए अगर बिमारी का हल होना शुरू हो जाए।
- 16:52सारे अस्पताल विश्व के एक क्षण में बंद हो जाएंगे और धरती के
- 17:01सारे रोगी बाबा बागेश्वर के चरणों में हो गए।
- 17:05दिखावा है मात्र दिखावा है। क्या कहें हम?
- 17:12देखिए, करनी भरनी यही है रोज़ हम बोलते हैं जैसे कर्म करेगा वैसे
- 17:26फल देगा भगवान। ये है गीता का ज्ञान, ये है गीता
- 17:35का ज्ञान करनी भरनी यही है जैसा करोगे वैसा भरोगे मतलब दूसरों को
- 17:47ये बताने की क्या जरूरत है कि तुम ठगों।
- 17:52जरूरत है। अरे भाई अगर ठग है तो जैसा करेगा
- 17:59वैसा भरेगा तुम्हे क्यों चिंता हुई औरों के घर के झगड़े नाहक न
- 18:11छेड़ तू? औरों के घर के झगड़े ना हक ना
- 18:16छेड़ दूँ तुझको भगाने क्या पड़ी अपनी निबट दूँ, लेकिन अहंकार की
- 18:23ये बड़ी शानदार तरकीब है, इसीलिए बचा चला आ रहा है।
- 18:28हम आज अगर यहाँ विद्यमान हैं। तो अहंकार की इस तरकीब के कारण
- 18:35विद्यमान हम अपना ध्यान दूसरी ओर आकर्षित कर लेते हैं।
- 18:45अहंकार की ये तरकीब बड़ी पुरानी है, आज नहीं।
- 18:49जब से मानवता का जन्म हुआ है, अहंकार का सदा एक ही फार्मूला है,
- 18:55समस्याओं को सर्व मत करो, समस्याओं से ध्यान हटाओ।
- 19:06यही फार्मूला राजनीतिक पर रखते हैं।
- 19:10वो कभी नहीं कहेंगे कि तुम्हारा पेट भूखा है या कुछ खाया, यह तो
- 19:19कोई शांत ही पूछ सकता है। सुबह से कुछ खाया मैं जब पहली बार
- 19:26घर से भागा। 3 जनवरी 1973 तो मेरे पास कुछ
- 19:35नहीं था। जनवरी में कितनी ठंडक होती है
- 19:39तुम्हे पता है? उत्तर भारत में बड़ी सर्दी लग रही
- 19:44थी। या ही दो ₹4 थे, अगर थे तो वो भी
- 19:49मैंने रद्दी भेजी थी, वो ही पुस्तकें जो मेरे पास पड़ी थी,
- 19:55कोई पुरानी पाठ्यक्रम की पुस्तकें मेरी फिजिक्स, केमिस्ट्री,
- 20:00बायोलोजी वगैरह या कुछ धार्मिक? ये सब बिच बुच के मैं जो उसने
- 20:09पैसे दिए मुझे वो मैंने जेब में डाल दिए पिताजी से याद कर लिया और
- 20:15चल पड़ा विथाउट क्योंकि पैसे नहीं थे हरिद्वार जाने के लिए वहाँ
- 20:23ढूंढेंगे। सुना था वहाँ बड़े महर्षि ज्ञानी
- 20:35ब्रह्मर्षि योगी खुद को जानने वाले बैठे सुना था तो चल पड़े।
- 20:43सुनी सुनाई बात को हम यकीन कर लेते हैं तो मैं गया तो सारी
- 20:50कहानी मेरी वायब्राफी में भरनी है अम्बाला से पार।
- 21:01लस्कर जंक्शन से पहले जब मैं पहुंचा तो मेरे पास टीटी आग है
- 21:08ऊँचा लंबा कथ स्वेत दाढ़ी शुभ्र स्वेत आज भी उसका बू बू नक्शा याद
- 21:17है मुझे पगड़ी। लम्बे केस, दाढ़ी का लाल उसका
- 21:27रंग, माथा हाथ में टिक, टिक्की, टिकट टिकट सब टिकट दिखा रहे थे
- 21:37मेरे पास आके। टिकट मैं चुप बैठा रहा, टिकट तो
- 21:45था ही नहीं मुझे फिर बोले टिकट मैंने कहा नहीं है, नहीं है क्यों
- 21:57नहीं है? पैसे नहीं है घर से भाग के नहीं
- 22:03पूछ क्या क्यों नहीं मन लगा मैंने साधू बनना है, बनना है, कहाँ चले
- 22:15हरिद्वार? आगे ऋषि के मुझे नहीं पता था, तब
- 22:24तक मुझे नहीं पता था कि यह जो सामने जिसका सिर करीब करीब गाड़ी
- 22:31की छत से लग रहा है, इतना ऊंचा व्यक्ति कोई अद्वितीय पुरुष है।
- 22:41उसका चेहरा आज भी मेरी आँखों में चमकता है।
- 22:49लश्कर जंक्शन आ गया जंक्शन पे गाड़ी थोड़ी रुकती है।
- 23:00मुझे वो संत हम बोले चलो उतरो, कुछ खाया नहीं, क्यों नहीं खाया?
- 23:11पैसे नहीं है। भूख लगी है, बिल्कुल लगी है जवान
- 23:17उम्र 21 वर्ष की उम्र भरपूर जवानी और खुराक भी बहुत थी मेरी तो तीन
- 23:29तीन किलो दूध पी जाना, सात सात किलोमीटर की दौड़।
- 23:37पांच 500 दंड बैठ के 2000 क्रिया योग मैं खाने पीने के कुक्के में
- 23:51थी दूध, घी आम था। पौष्टिक भोजन था, चारों तरफ कोई
- 23:58कमी नहीं थी। खाने की दूध की गंगा बहती थी,
- 24:05मलाई, घी, बर्फी सब पौष्टिक पदार्थ जितनी चाहे कार।
- 24:15खूब खाया, खूब व्यायाम किया, पौष्टिक और सुडौल शरीर भूख तो
- 24:24लगनी ही थी, शाम का चला 4:05 बजे का सायं की रोटी भी नहीं खा रही।
- 24:31सारी रात बीत गयी ठंडी रात है। मुझे ऐसा लगा की जैसे ये पहचान
- 24:42गया हो की इस बच्चे ने कुछ खाया नहीं।
- 24:47मासूम एक चेहरे से टपक रही है अबौद्ध चेहरा, मासूम सा चेहरा।
- 24:572021 वर्ष की उम्र होती क्या है? अब जमाने भी कुछ और थे।
- 25:06आज से 50 साल पहले की बात कर रहा हूँ।
- 25:1050 साल पहले की दुनिया में कुछ ज्यादा बोली हुआ करती थी।
- 25:19चलो कुछ खा लो पहले वह क्योंकि चिट्टी था फर्स्ट क्लास वेइटिंग
- 25:28रूम में रुक गए आमने सामने बैठ गए।
- 25:31मैं लगातार उसके दर्शन कर रहा हूँ।
- 25:37क्या खाओगे? मैंने कहा भूख लगी है कुछ भी खा
- 25:41लूँगा आलू के परोठे आ गए हैं खूब मोटे, मोटे बड़े बड़े और उस उसकी
- 25:52खुराक मेरे से। कहीं ज्यादा मैंने पेट भरकर परूठे
- 25:59खाये, खूब खाये, पेट भर गया कि कहते और खाओ नहीं और नहीं कम और
- 26:06खाया नहीं जाएगा बस बहुत भारी परूठे हैं बड़े स्वादिष्ट हैं।
- 26:14फिर चाय का ग्लास बड़ा ग्लास पटियाल भी बैग इसे कहते थे इतनी
- 26:22चाय आ गई मैंने मन में सोचा इसे कैसे पता लगा कि मैं इतनी चाय
- 26:28पीता हूँ, मैं इतनी ही चाय पीया करता हूँ।
- 26:32पिताजी दूध में प्रतिपा के देते थे और बड़ा तुम्बा होता दो किलो
- 26:35का। वह करीब आधा पूना करके मुझे दे
- 26:40देते। मैं सारी पी लेता वाटी में भर
- 26:42गया। सुबह सुबह दौड़ लगा के आता
- 26:48व्यायाम करके आता भूख लगी होती, इतनी चाय पी लेता?
- 26:55बड़ा कन्नी वाला ग्लास चाय का भर के आ गया।
- 26:58हमने पी लिया हो गई सारी रात का भूखा शाम भर का भूखा सुबह की रोटी
- 27:10खाई थी। मुझे कहने लगे वापस चले जाओ, नहीं
- 27:21जाऊंगा, पहली बार मैंने जीवन में कुछ आश्चर्य चकित चमत कार्तिक?
- 27:32इससे पहले तो साइंस स्टूडेंट्स इन चीजों को मानता ही नहीं था।
- 27:38वो ठीक भी है। ऐसे लोग ईमानदार होते हैं, मैं
- 27:40सदा से बोलता हूँ, मार्कर्स कहता है कि परमात्मा नहीं है, नास्तिक
- 27:46है, लेकिन ईमानदार है, ईमानदार है।
- 27:51जब देखा नहीं तो माना भी नहीं। अगर चार बार कहता है कि कोई जो
- 28:01जिससे कर्जा उठाओगे, वापस नहीं आता तो बिलकुल ठीक है, ऐसा ही है।
- 28:06कौन वापस आता है, नास्तिक है? असामाजिक हैं।
- 28:18गलत बातें कह रहे हैं, लेकिन गलत होगी।
- 28:22तुम्हारे समाज के हिसाब से वह सत्य बोल रहा है।
- 28:27सत्य बोलना अपने आप में एक कला नहीं, एक ईमानदारी है।
- 28:36इसलिए मैं श्रद्धा से कहता हूँ कि चारवाक तुम कुछ भी कहो, ईमानदार
- 28:41है, सच बोलने का साहस है और तुमने पूछा सत्य क्या है?
- 28:49उसे पाया कैसे जाता है? मार्क एस कहते हैं, परमात्मा नहीं
- 28:56सत्य बोलते हैं, नीत से कहते परमात्मा नहीं सत्य बोलते हैं।
- 29:02जब तक जो चीज़ देख ना लो उसका प्रचार करना पाप सत्य से मैं
- 29:11बोलता हूँ। जब देखोगे तो तुम्हारे लिए सत्य
- 29:18होगा जो किसी का सुना कहा पड़ा, लेकिन देखा नहीं वो तुमने बोल
- 29:28दिया वह तुम्हारे लिए असत्य है। इसलिए उसका प्रचार प्रसार पाप है।
- 29:38वही बोलो जो तुम जानते हो तो तुम ईमानदार हो।
- 29:45इसमें आस्तिक और नास्तिकता का कोई स्वर्ग नहीं।
- 29:49नहीं देखा परमात्मा कह दोहे नहीं परमात्मा बुद्ध कहते हैं,
- 29:54परमात्मा नहीं आत्ममतत्व को देख लिया है परमात्मा तत्व को नहीं
- 30:03जाना है तो स्पष्ट बोलते हैं कि नहीं है परमात्मा।
- 30:12स्पष्ट बोल देना ईमानदारी इमानदारी तुम्हें वहाँ तक पहुंचा
- 30:18देगी ये कथन बेईमानी तुम्हें नहीं पहुंचाई इमानदारी में तुम एक होते
- 30:25हो दो नहीं होते तुम्हारे खंड नहीं होते बेईमानी में।
- 30:30तुम खंड खंड हो जाती हो एक जगह कह के आओगे मैंने ये किया दूसरी जगह
- 30:39कह के आओगे मैंने ये किया तीसरी जगह कह के आओगे मैंने ये किया तुम
- 30:43कंड गंड हो गए ईमानदारी एक ही बात बोले।
- 30:49और अगर तुम एक ही बात बोलोगे, एक ही बात तुमने देखी है एक में आ गए
- 30:56तो एक को अहम, द्वितीय और नास्ती एक में पहुँच जाओगे, यही सत्य है।
- 31:04एक के पास पहुँच जाना सत्य है। एक में रम जाना सत्य है सब में रम
- 31:17रया, प्रभु एको नानक पेख पेख शरणई नानक कहते हैं कि मैं।
- 31:26उस एक को सभी के भीतर देखता हूँ और देख देख के मैं सबको सबकी शरण
- 31:36में होकर सबको वंदन करता हूँ। नानक पेख वेख शरनाई सब में राम
- 31:45रेयो प्रभु एक को। देख कर बात करते हैं।
- 31:50नानक लिखी लिखाई पूछी पूछाई सुनी सुनायी बात नहीं कहते।
- 31:57नानक अपनी आँखों से जो अनुभव किया वैसा बोलते हैं, कबीर भी वैसा ही
- 32:05कहते हैं। मैं कहता आंखन दिख तुम कहते कागज
- 32:11की लिखी और जो आंखन दिखी बात वही तुम्हें मुक्त करेगा तो उस भक्त
- 32:25ने मुझसे पूछा मैं सामने खड़ा हूँ, बताओ मेरे को?
- 32:31अब मेरी तो आदत है जो पूछता है कि मैं कौन हूँ, जब मुझे ये पता है
- 32:37कि मैं कौन हूँ तो मुझे ये भी पता है कि ये कौन है?
- 32:42लेकिन मुझे ये भी पता है कि ही इस इन इलूशन।
- 32:46वह अपने आप को जो समझता है, मैं तो उसका पड़ोसी भी बता देगा।
- 32:50वह तो उसके शहर का कोई भी व्यक्ति बता देगा कि वह कौन?
- 32:58लेकिन मेरे से पूछा है तो मैं तो वही बताऊँगा।
- 33:04जो संत बताते हैं जो गोरख बताते हैं, जो कबीर बताते हैं जीस मरने
- 33:15से जग डर है मेरे मन आनंद, मरने से पाइए पूर्ण परमानंद।
- 33:25अब कोई पूछने ही आ गया, छाती तान ली उसने शायद कोई मोमबक्ष हो,
- 33:34लेकिन आगे वो निकला बेमे वाला। अब बीमे वालों से ज़्यादा डरपोक
- 33:42और कौन होता है? मैंने उसको मृत्यु का मंत्र दे
- 33:48दिया। असलियत सामने आ जाएगी।
- 33:51बस ज़्यादा जखाई मारने की शास्त्र शास्त्र करने की जरूरत नहीं।
- 34:00मृत्यु का भेद खत सत्य सामने आ जाएगा।
- 34:06अगर तो हाथ पांव कापने लगे जीरा कापना लगा तो समझ लो इसकी
- 34:12मोमुक्षा नहीं है यह तुम्हारी परीक्षा ले रहा है।
- 34:20और अगर इसके भीतर उतर गई बात तो यह बदल जाएगा, जान जाएगा सत्य
- 34:24क्या है और उसको पाया कैसे जाता है?
- 34:28और मैं तो सदा यही बताता हूँ कि सत्य को पाया कैसे जाता है?
- 34:31संत भी यही बताते हैं। मरो ही जोगी मरो मरो मरण है मीठा।
- 34:40तो मैंने मृत्यु का मंत्र दे दिया।
- 34:42वो थर थर का अपने लगा। इसका मुझे पता लगा कि अगले दिन
- 34:47आपने देखा, वीडियो के कॉमेंट्स में नीचे आने लगे।
- 34:53यह फ्रॉड है, यह फ्रॉड है। बिल्कुल फ्रॉड ही लगेगा।
- 35:01तुम्हें नहीं लगा जब कबीर जैसे लोग कहते हैं कि परमात्मा है, जब
- 35:06कृष्ण जैसे लोग कहते हैं मैं परमात्मा हूँ मेरी शरण आजा अहम तो
- 35:12आम सर्व का पे भ्रममुख श्याम महासूच।
- 35:16अनन्या चिंतन तो माँ मुझे जन परिपास से जो अनन्य भाव से मुझे
- 35:23भजता है देशाम नित्या भुगतानम योग शमां वामम उसकी रोज़मर्रा की
- 35:29जरूरतें मैं पूरी करता हूँ पता चला।
- 35:36की जाए तो कोई बीमे वाला है। बीमे वाले से ज्यादा सुरक्षा
- 35:43मांगने वाला व्यक्ति और कायर और दुर्पोक और कांपने वाला व्यक्ति
- 35:47और कौन हो सकता है? भले ही भाँति जानता हूँ मैं लोगों
- 35:52को डरा कर जो पैसे इकट्ठे करते हैं, मृत्यु का वेद दिखाते हैं।
- 35:57पुकार होते हैं और लोगों को जो कहते हैं मरो हे जोगी मरो जो
- 36:06सुरक्षा नहीं मांगते, जो असुरक्षित करना चाहते हैं वो ही
- 36:11सच में धीर गंभीर। और मृत्यु से नह डरने वाले होते
- 36:16हैं। मृत्यु में वो कूद जाते हैं।
- 36:19बक्शी आग में वो छलांग लगा देते हैं।
- 36:27पता चला तुम ठग हो बाबा काहे ये काम करते हो भाई तुमसे क्या ठगी
- 36:36मर रहे हो? तुम मत सुना करो, ऐसे बहुत से
- 36:41भक्त आये हैं, आपने वीडियो देखे होंगे और मैं सदा से उन्हें कहता
- 36:46हूँ कि भाई मत सुनो, लेकिन फिर भी न जाने कहाँ से आ जाते हैं।
- 36:52कोई व्यक्ति मुझे कहता है मैं जुए में हार गया ₹3,00,000 और मैं उसे
- 36:56₹3,00,000 देता नहीं सट्टा बता दो बाबा मेरे पास है नहीं, मैं कहाँ
- 37:04से सट्टा बताता हूँ, मैं हार गया बाबा भाई तुम क्या हार गया?
- 37:09मैं हार गया जो मेरे से मांग रहा है।
- 37:13और ऐसे ही लोग तंग आकर फिर बीमे करने लग जाते हैं।
- 37:18लोगों को ठगना इनका काम और ठग को पता कैसे लगेगा कि ठगी होती भी
- 37:25है। खुद ठग्गी मारी होगी तो ठगी का
- 37:30पता होगा। भोले व्यक्ति को पता क्या होता है
- 37:34ये तो खुद ही ठगा जाता है। बड़ा प्यारा शब्द कहा गोरखनाथ ने
- 37:44माया तो ठगनी भाई ठगत फिरत शब्द। जीस ठग ने ठग ने ठग अरे भाई ठग
- 37:55हूँ बिल्कुल ठग हूँ संत ठग ही होते हैं और अगर संत ने तो मैं
- 38:02नहीं ठगा तो समझ ले वो संत है ही नहीं।
- 38:10ये परिभाषा को ठीक से नोट कर लेना।
- 38:12मैंने नहीं बोली ये गोरखनाथ ने बोली माया तो ठगनी भाई ठग तो फिर
- 38:21तो स्वदेश जा ठगनी ठगनी ठगी? जीस ठग ने इस ठगनी को ठग दिया ता
- 38:32ठग को आदेश उसको मैं प्रणाम करता हूँ और तुमको किसने कहा कि मैं ठग
- 38:40नहीं हूँ तुम्हारी दृष्टि में ठग एक गाली हो गई।
- 38:48लेकिन संतों की दृष्टि में गोरख की दृष्टि में ठग एक बहुत ऊंची
- 38:55अवस्था है। जीस ठग ने ठगनी को ठग लिया।
- 39:00गोरख कहते हैं कि मेरा उसे प्रणाम है।
- 39:02आदेश ता ठग को आदेश। तुम ठग को नकारात्मक सिंगा देते
- 39:10हो और गोरख ठग को आदेश करते हैं तो ठीक कौन तुम या गोरख ऐसे ऐसे
- 39:23लोग? पर त्यावा लेने के लिए आ जाते
- 39:26हैं। भाई क्यों आते हो?
- 39:29मैं तो खुद ही कह रहा हूँ मैं ठग हूँ मैं चुरा लूँगा तुम्हें
- 39:37तुम्हारे माल को नहीं, मैं तुम्हें ही चुरा लूँगा, मेरी
- 39:41बातों को समझते रहे ना? तुम्हारे प्रश्न का जवाब ही दे
- 39:48रहा हूँ। सत्य क्या है, इसको जाना कैसे
- 39:51जाता है? सेफ रहोगे तो ठीक रहोगे, अनसेफ हो
- 40:00जाओगे तब ट्रू हो जाओगे। अध्यात्म की यह परिभाषाएं हैं।
- 40:11अगर तुम सुरक्षित रहे या बीमे वालों को ऐसा होता है योग क्षेम
- 40:17हम भाव में हम बस वह टिड्डी मातम बीमा कंपनी मतलब उठा कंपनी।
- 40:25तुम को डरा कर पैसे वसूलते हो अब प्रत्यक्ष रूप से तुम्हे गाली
- 40:31नहीं निकालते अब प्रत्यक्ष रूप से तुम्हें कहते हैं तुम मर गए फिर
- 40:36बाद में क्या होगा? अरे भाई मैं क्यों मर गया मरो
- 40:40तुम? मेरे एक बीमे वाले मित्र थे, वह
- 40:44बता रहे थे मैं किसी के पास चला गया।
- 40:48बीमा करा लो क्यों जब तुम नहीं रहोगे, जब तुम मर जाओगे, तुम्हारे
- 40:54घरवालों को इतना पैसा मिलेगा? वो कहता है वो तो मेरे पीछे पड़
- 40:59गया। अपना लाठ उठा के मरो तुम तुम्हारा
- 41:04बाप मरे, तुम्हारी माँ मरे तुम्हारे बच्चे मरे मैं घुमरू
- 41:09कैसे भी लोग होते हैं जिन्होंने लोगों को बेवकूफ बना के धन इकट्ठा
- 41:22किया हूँ। वह पूछते हैं कि मैं कौन?
- 41:33यह प्रश्न उस मूर्ख ने भी पूछा मुझसे यह प्रश्न आज तुमने भी पूछा
- 41:40मुझसे, लेकिन पूछने का अंदाज बिल्कुल अलग था।
- 41:46उसको मैंने मृत्यु का मंत्र दे दिया और उसकी टाँगें काँपते रहे
- 41:53और अगले दिन की प्रतिक्रिया बदला गई।
- 41:55के भौखला गया मृत्यु से कोण नहीं भौखलाता और जो मृत्यु से भौखलाता
- 42:02नहीं है, ये मृत्यु को शहर से स्वीकार कर लेता है।
- 42:06हृदय में बसा लेता है वह पहुँच भी जाता है।
- 42:12कठोर निश्चित की कथा मैंने बहुत बार कही।
- 42:16नच केता को उसके पिता उद्धारक ने मृत्यु को सौंप दिया।
- 42:21मेरे पास भी यही फॉर्मूला है। मुझसे जो पूछता है मैं कौन हूँ?
- 42:26मैं उसके मृत्यु को सौंप देता हूँ, ये बताएंगे तुम्हें ये गुरु
- 42:31है मृत्यु से बड़ा गुरु और कोई होता भी नहीं है मृत्यु का मंत्र
- 42:38उसे दे देता हूँ काली कपालनी भद्रा काली कपालनी उम्र में
- 42:47भक्षणाई भक्षणाई भूत प्रेत आए, वेताल आए और तुम डर भूख तो हो ही
- 42:55और कपड़े लग जाते हो, बस पता चल जाता है कि पूछना ठीक था या गलत
- 43:01था। अरे भाई हमसे तो तुम सत्य की
- 43:04बातें पूछा करो, ये नकली बनावटी चेहरे, ये नकली बनावटी भ्रम ये
- 43:10नकली, बनावटी इलूशन अपने आप को तुम यही समझे हो और तुम अपेक्षा
- 43:17करते हो कि मैं तुम्हें बता दूँ कि तुम कौन हो?
- 43:23मैं तुम्हारे भ्रम के ऊपर स्टेम्प लगाने वाला हूँ, नहीं कि तुम फला
- 43:29हो फला काम करते हो इस शहर में रहते हो उसको तो मैं मारना चाहता
- 43:35हूँ मरो हे जोगी मरो। मैं जानता हूँ तुम कौन हो, लेकिन
- 43:43वास्तव में जानता हूँ कि तुम कौन हो नकली नकली जो तुमने बना दिया
- 43:49है वह मैं नहीं जानता तुम कौन हो और उसको जानकर करना भी क्या है?
- 43:58झूठ तो 1000 होते हैं, झूठ अनंत होते हैं, जीतने लोग हैं, उतने
- 44:03झूठ हैं। आठ अरब की आबादी है तो आठ अरब झूठ
- 44:08हैं। प्रत्येक व्यक्ति एक झूठ को
- 44:11मान्यता दिए बैठा है मैं कौन मैं जॉन टॉमसन मैं कौन मैं एल्बा
- 44:19टास्ट गणितज्ञ हो सकता है भौतिक वेद हो सकता है, लेकिन समझदार
- 44:28नहीं हो सकता ना समझ आया। अल्बर्ट आइंस्टीन मुर्ख है, संत
- 44:37की नजरों में मुर्ख है, क्योंकि वह भी कहेगा कि मैं भौतिकविद हूँ।
- 44:46फिजिक्स का ज्ञात हूँ, खुद का ज्ञात है या वो एक संत ही व्यक्ति
- 44:53है, वो जो कह सकता है मैं खुद का ज्ञात हूँ?
- 44:56आत्मबोध है मुझे आत्मा को मैं जानता हूँ मैं कौन हूँ यहीं भगवान
- 45:03कृष्ण ने कहा आखरी शब्द अमानित्वम दंभित्वम हिंसा शांति राजवं
- 45:10आचारों वश्रम शोषण सरम आत्म विनग्रह।
- 45:16किसने खुद का नग्रह कर दिया, जान दिया मैं हूँ कौन तुम कपड़ों को
- 45:24अपना होना समझते हो और फिर पूछते हो बताओ मैं कौन हूँ मैं तुम्हारे
- 45:31इलूशन को? मान्यता देने वाला मैं नहीं हूँ
- 45:36ये भ्रम त्याग दो कि मैं तुम्हें कहूंगा कि तुम वास्तव में जो हो
- 45:42मैं तो तुम्हें मरूँगा मरना मंजूर है, सिर देना मंजूर है।
- 45:52मुझे तो प्रेम मिलन की जा शीश तलीधर घर मेरे आऊँ घर मेरे।
- 46:11हाँ हाँ, जय तो प्रेम मिलन की चाल शीश तलीधर घर घर मरने से कम मंजूर
- 46:28नहीं बचा। ये कोई व्यापार नहीं है।
- 46:33तुम कहोगे दो पैसे कम कर लो, चार पैसे कम कर लो, यह व्यापार नहीं
- 46:41है, यह तो एक सत्य है। सत्य को जानना चाहती हो?
- 46:48तो शीश को हथेरी पर रख लो, प्रेम की गली में पहुँच जाओगे ऐसे
- 47:00पर्वतावे लेते मत फिरो वो तो तुम जानते हो।
- 47:06दूसरों को तुम अलंकारों से ग्रसित कर देते हो।
- 47:08तुम ठग हो, तुम लूट रहे हो, बिलकुल लूट रहा हूँ, बिलाशक लूट
- 47:15रहा हूँ, तुम मत लूटो, तुम लूटने क्यों आ रहे हो?
- 47:22और ऐसा नहीं। जो मेरे पास नहीं आते वो घर बैठ
- 47:25जाते हैं नहीं वो किसी और के पास जाते हैं।
- 47:29लूटने का इरादा उनका भी है। यहाँ से चले जाओगे कहीं और चले
- 47:36जाओगे बाबा तुम्हारी बातों पर अविश्वास होना शुरू हो गया है,
- 47:40अच्छा है। पहले तो अविश्वास ही होना चाहिए,
- 47:46क्योंकि अगर तुमने मान ही लिया तो तुम अंधभक्त बन जाओगे और मैं कभी
- 47:52भी अंधभक्तों को मान्यता नहीं देता।
- 47:55मैं नहीं चाहता कि मेरे साथ संघ चलने वाला व्यक्ति अंधभक्त हो,
- 48:00मेरी बातों को मान ले। और मेरे प्रवचनों में अगर तुमने
- 48:04सारे सुने हैं तो जानते हो मैं सदा से कहता हूँ कि मुझको भी पकड़
- 48:08के मत बैठ जाना, मैं भी तुम्हारे लिए गलत हूँ, मैं भी तुम्हारे लिए
- 48:16दूसरा हूँ, मैंने खाया होगा तो मेरी भूख मिटटी होगी।
- 48:21मैंने पिया होगा तो मेरी प्यास मिटी होगी, लेकिन मेरे खाने से
- 48:25तुम्हारी भूख नहीं मिलती मेरे पीने से तुम्हारी प्यास नहीं
- 48:29मिटती, इसलिए मेरा अनुकरण मत कर लेना, मुझे सुन लेना बट मुझे
- 48:35सुनने के बाद इन्वेंशन करना है। खोज करना।
- 48:41मैं सत्य हूँ या नहीं? डिपेंड करता है तुम्हारी खोज पर
- 48:50बहुत से लोग मेरी बातों को सुनकर मान लेंगे।
- 48:58एक हिसाब से सत्य भी है। और एक हिसाब से असत्य भी है।
- 49:02मान लेना सत्य है। अगर मान लेने से आगे तुम परीक्षण
- 49:06की तरफ चले जाओ कि देखें सत्य है या नहीं है दूसरे जीने मैं
- 49:13अंधभक्त कहता हूँ? मेरी बातों को सुनेंगे, मान लेंगे
- 49:15और मानकर बैठ जाएंगे और बड़े खतरनाक लोग हैं।
- 49:21वो ही कल को गुंडागर्दी खिला देंगे, बाजारों में खून खराबा
- 49:26करेंगे, धरती को लाल कर देंगे ये अंत भक्त जिन्होंने मेरी बात सुनी
- 49:34सुनकर मान ली और मान कर बैठ गए। बहुत खतरनाक निकलेंगे।
- 49:40आज नहीं, कल ये मानने वाले लोग खतरनाक होने वाले हैं, इसलिए मैं
- 49:47सदा से कहता हूँ मुझे सुनना मुझे मान लेना क्योंकि मैं वो बोल रहा
- 49:51हूँ जो सत्य है लेकिन। अगर सत्य को तुम मानकर बैठ गए और
- 49:59बैठ ही गए तो तुमसे क्रूरतम व्यक्ति कोई भी नहीं होगा।
- 50:06ये जो आज झगड़े हो रहे हैं, आगजनी हो रही है, चारों तरफ हाहाकार है,
- 50:12हर तरफ जलते हुए लोग हैं। चेताएं बाहर से जल रही हैं भीतर
- 50:17से हृदय जल रहे हैं, तुम उसे विषो कहते हो, यह विषो नहीं है, यह
- 50:26विषय यह संसार नहीं है, यह जहर है।
- 50:34यहाँ सभी वो लोग निवास करते हैं जिन्होंने कुछ ना कुछ माना हुआ है
- 50:42और मैं नहीं कहता कि तुम ना मानो मेरी बात को फिर सुन लो मानो
- 50:50लेकिन सत्य को मानो। ए अनार होता है बिल्कुल मानो
- 50:54क्योंकि ए अनार होता है ए खरगोश होता है यह मत मानो क्योंकि ए
- 51:02खरगोश नहीं होता ये मानो का तो भरत हो जाएगा।
- 51:08और रोज़ मैं इस चीज़ की निंदा करता हूँ रोज़ मैं कहता हूँ बताओ
- 51:12राधे राधे कहने से तुम्हें तुम्हारा पता कैसे चल जाएगा?
- 51:16मुझे कोई बताए तो व्हाटस दी अल्कमी बिहाइंड इट इसके पीछे की।
- 51:28केमिकल प्रोसेसर क्या है? क्या है पीछे की अल्केमी क्या है
- 51:34इसके पीछे की नहीं, बता सकोगे तो क्योंकि यह सत्य नहीं है।
- 51:41दूसरों को याद करने से दूसरों का नाम दोहराने से।
- 51:45तुम अपने आप को जान जाओगे। हाउ इट?
- 51:48इस वासी बल यह संभव कैसे हैं? तो दो तरह के लोग मैंने गंवाए।
- 51:56एक तो जो मानते हैं और मानकर रिसर्च करते हैं, ऐसे व्यक्ति
- 52:04पहुँच जाते हैं। 1 दिन उस गुड़ का लुत्फ उठा लेते
- 52:10हैं जिसे कबीर कहते हैं जो गुंगा गुड़ खाई के कह कौन मुख्य स्वाद
- 52:18वे उस गुड़ को चख लेते हैं स्वाद नहीं बताया जा सकता।
- 52:24परिभाषण में नहीं आता। यह अलग बात है और दूसरे जो मान
- 52:32लेते हैं और मानकर रिसर्च नहीं करते हैं, मानकर बैठ जाते हैं।
- 52:38मेरे गुरु ने बताया है मेरे गुरु सर्वज्ञानी हैं, सर्वव्यापी हैं।
- 52:43सर्वज्ञ हैं और मेरे गुरु ने कहा इसलिए ये सत्य है सत्य तो है भाई
- 52:52लेकिन तुम्हें किसने कहा कि तुम मान के बैठ लेना, मान लेना, यहाँ
- 52:56तक ठीक मान के बैठ जाना, ये गलत हो गया मान लेना?
- 53:03मान के बैठ मत जाना मान के रिसर्च के यात्रा पर चलना खुद खोजना सबसे
- 53:13पहले अविश्वास करना होगा, क्योंकि जैसे हित में खोज शुरू किया खोज
- 53:20होगी अविश्वास से। विश्वास से कभी खोज नहीं होगी,
- 53:24विश्वास से तुम बैठ जाओगे और जो लोग कहते हैं श्रद्धा विश्वास
- 53:29रुकना हो वो मूर्ख है और तुलसी दास जैसे लोग इनको मैं मूर्ख कहता
- 53:35हूँ क्यों कहता हूँ? क्योंकि ये कहते हैं मान लो और
- 53:38मान के बैठ जाओ बिल्कुल मानो मैं कभी नहीं कहता कि तुम ना मानो।
- 53:42क्योंकि अगर माने नहीं तो अभी नहीं चलोगे।
- 53:45अब कहाँ मार्क्सस चलते हैं? मार्क्सस कहते हैं परमात्मा नहीं
- 53:48हैं और बैठ जाते हैं, वो भी बड़े खतरनाक हैं।
- 53:52चारवाक भी बड़े खतरनाक हैं जो कहते हैं रिणम कर्तुआ घटम पी पीते
- 53:59भस्मभूत से देह से पुनर्गन कुतह यह शरीर तो भस्म हो जाता है।
- 54:07ऋण देने वाला, ऋण लेने वाला दोनों भस्म हो जाते हैं।
- 54:10फिर आता कौन है? किसी ने देखा है?
- 54:15दोनों के तर्क बिल्कुल ठीक है। लेकिन मेरी इस एक बात को समझ लेना
- 54:21बार बार कहता हूँ, परीक्षा लेने का तो सवाल ही नहीं है, तुम किसी
- 54:27को कुछ नहीं कहते हो, क्या नहीं कहा आकर्षण को अपराधी हो।
- 54:37लोगों के स्त्रियों को भगा के ले जाते हो, गुंडे हो, स्त्रियों के
- 54:46कपड़े उठाकर भाग जाते हो, छेड़छाड़ करते हो, मस्ती ही मनाते
- 54:50हो, कायर हो रणछोड़ हो। हत्यारे हो क्या कहता हूँ?
- 55:00मैं देने लगी, लेकिन कृष्ण शांत रहे क्योंकि कृष्ण जानते हैं कि
- 55:07यह जो बोल रहा है यह मेरे ऊपर का आवरण है और तुम मुझे कहते हो
- 55:14लुटेरा बिल्कुल लुटेरा। तुम मुझे कहते हो चोर बिल्कुल चोर
- 55:20तुम मुझे कहते हो ठग बिल्कुल ठग, लेकिन एक बात और भी सुन लो जितना
- 55:28ठग मुझे कहते हो, मैं उससे कहीं जाता हूँ।
- 55:34जितना चोर तुम मुझे कहते हो, मैं उससे कहीं ज्यादा चोर हूँ क्योंकि
- 55:41चोर तो तुम्हारे माल को हड़प लेता है, मैं तुमको ही हड़प लूँगा।
- 55:53तुमने पूछा सत्य क्या है? सत्य तुम हो लेकिन इसको पकड़ के
- 56:01मत बैठ जाना, रिसर्च करना क्या मैं ठीक हूँ?
- 56:06ये रिसर्च करना पहले यह विश्वास करना मेरी बात पर मानना कि ये ठीक
- 56:14है या गलत है इस तरह मानना। वैज्ञानिक रूप से मानना व्हेदर एम
- 56:20राइट ऑर और फिर चलना रिसर्च करना मिलता कैसे मृत्यु को स्वीकार
- 56:32करने से मिलता है। संतों के पास एक ही मंत्र है,
- 56:39उससे पूछोगे मैं कौन हूँ? वह तुम्हें मौत के घेरे में रह
- 56:44जाएंगे? तुम डरोगे बाहर आ जाओगे, बहुत से
- 56:47भागे हैं पीछा छुड़ा के एक शिष्य को मैं साधना कराया करता था।
- 56:57मौत से कोण नहीं डरता और जब मौत से नहीं डरता वो उसको पा जाता है
- 57:03जहाँ मौत जाती नहीं, एक स्थान ऐसा भी है हमारे भीतर जहाँ मौत नहीं
- 57:09पहुंचती जहाँ डर भी नहीं पहुंचता नैनं छेदंत शस्त्रण नैनम दसवी
- 57:15पांव का न चैनम क्रेतन त्यापो न सो सती मरुता वह न बंधन जाता है
- 57:22कोई न आग पहुँचती है कोई न वहाँ मृत्यु जाती है तुम अमर होना
- 57:28चाहते हो, आओ आओ तुम इस द्वार पे ले चलो।
- 57:35जहाँ तुम अमर हो जाओगे, तुम मरोगे नहीं कभी, लेकिन वो रास्ता मृत्यु
- 57:41में से होकर गुजरेगा। ये ध्यान रखना तो पूछा कि सत्य
- 57:47क्या है? तुम सत्य हो और मिलता कैसे है?
- 57:52मृत्यु के द्वारा मिलता है। क्योंकि अभी तुम जो हो वो झूठ हो
- 57:58और एक मरेगा झूठ मरेगा तो सत्य उत्पादित होगा, झूठ मरेगा रहेगा।
- 58:06एक। प्रेम गली अति सांकरी ता में दो न
- 58:10समाये तुम ये चाहते हो ये लवादा भी बचा रहे और मैं भी पता चल जाए
- 58:16कौन हूँ मुश्किल है? यह प्रेम गली इतनी सांकरी है कि
- 58:22इसमें एक ही म्यान में एक ही तलवार आती है।
- 58:27या तो तुम बचोगे या सत्य बचेगा और तुम जो अभी हो तुम झूठ और सत्य जो
- 58:36है वह तुम्हें अभी जाना नहीं है हम म्यान के भीतर की तलवार एक ही
- 58:43होती है। और अहंकार की सदा काक्षा रहती है
- 58:47कि मैं भी बच जाऊं और सत्य क्या है यह भी पता चल जाए।
- 58:52दोनों चीजें नहीं होगी ता मैं दोगुना समाये दोनों नहीं समायेंगे
- 58:58तुम कहते हो कि वस्त्र भी बच जाए, मैं यह भी मानने रहूं कि मैं
- 59:02वस्त्र हूँ। और मैं वस्त्र रही हूँ ये भी पता
- 59:05चल जाएगा नहीं, ऐसा नहीं होगा। एक समाता है इस म्यान में या तो
- 59:13तुम वस्त्र हो पर वस्त्र ही रहोगे या तुम वस्त्र नहीं हो तो
- 59:19वस्त्रों से पार हो तुम बोको। तो तुम्हें आयतक तुमने देखा नहीं
- 59:27यही बात कहते हैं। कृष्ण व शान श्री जिरनान यथा
- 59:31विहार नवानी घृणाति नरो प्राणी तथा स्त्री रानी विहाय जिरना
- 59:37अनन्याणी सयादि नवनि दे। कृष्ण की ये बात या तो सत्य साबित
- 59:45होगी या झूठ साबित होगी। अगर तुम अपने लवादों को देखोगे तो
- 59:53तुम कहोगे मैं ये लवादा हूँ। मैं कपड़े हूँ, मैं वस्त्र हूँ,
- 59:59लेकिन कृष्ण की बात को अगर। तहे में चले जाओगे, सर्च में उतर
- 1:00:03जाओगे तो तुम पाओगे के कृष्ण ठीक कहते हैं, वसांझी जीर्णन यथा
- 1:00:10बिहार जैसे पुराने वस्त्रों को हम स्नान करके छोड़ देते हैं, नए डाल
- 1:00:18लेते हैं, वैसे ही आत्मा। प्राण शरीरों को वृद्ध शरीरों को
- 1:00:24जीर्ण क्षीण शरीरों को छोड़कर नए शरीरों को घृण कर लेती है, दोनों
- 1:00:31में से तुम कहो, दोनों बचे रहे मुश्किल है सत्य क्या है?
- 1:00:35इनमें से एक सत्य है एक तुमने मान रखा है वह सत्य नहीं।
- 1:00:41क्योंकि तुम्हारे चेहरे की सिलवटें बताती हैं कि तुम जानते
- 1:00:48नहीं हो मानते हो? किसी ने पूछा था कि स्त्री का तो
- 1:00:55पता चल जाता है कि यह शादीशुदा है?
- 1:00:59माथे की बिंदिया ये मांग में भरा हुआ सिंधु हाथ का लाल चूड़ा ये
- 1:01:08लिपस्टिक बता देती है यह शादीशुदा है लेकिन मर्द का कैसे पता चलता
- 1:01:14है? वह भोखला के व्यक्ति बात तो ठीक
- 1:01:20है, कोई साइन तो मेरे पास आ गया बाबा मर्द का कैसे पता लगे यह
- 1:01:28शादीशुदा है? मैंने कहा चेहरे के सिलवटें या
- 1:01:36मरजाये हुए चेहरे। रोते चीखते चिल्लाते हुए चेहरे और
- 1:01:42तुम चाहते हो कि तुम्हारे लड़का बेदा हो, क्यों?
- 1:01:47क्योंकि तुम नर्व हो जाते हो बेटा हुआ और तुम मुक्त हुए क्योंकि
- 1:01:55तुम्हारे घर परिवार। सबके बोझ को उठाने वाला आ गया।
- 1:02:01लड़की बोझा नहीं उठा सकती, उठा भी नहीं सकते।
- 1:02:06प्राकृतिक रूप से कमजोर है, तुम कितने ही उसे शक्तिरूपा कहते हो,
- 1:02:13लेकिन प्राकृतिक रूप से। वह डिफेंडर है, डिफेंड करेगी,
- 1:02:19अपने आपको वह अटैक नहीं करेगी, वह संभालेगी नहीं, पुरुष ही संभालना
- 1:02:26है इसलिए तुम खुश होते हो, लेकिन भीतर की इस मनोवृत्ति को तुम
- 1:02:31जानते नहीं हो। लड़की हो जाती है, तुम रोते हो?
- 1:02:36हालांकि लड़कियां ज्यादा प्यारी होती हैं, ज्यादा प्रेम बटोरती
- 1:02:40हैं, माँ बाप से लड़के प्रेम नहीं बटोरते लड़के हमेशा लहू ही पीते
- 1:02:47हैं, लेकिन फिर भी प्यारे होते हैं क्यों?
- 1:02:51क्योंकि बाहर समेट लेते हैं सारा। पिता की चिंता खत्म हो जाती है।
- 1:02:57मेरे पुस्तों की कमाई हुई संपत्ति किसके हवाले करके जाऊंगा लड़की के
- 1:03:04हवाले लड़की तो पराया धन है, फिर तो धन पराया हो गया तुम क्यों
- 1:03:11चाहते हो हिंदुस्तान की समाज की प्रथा के मुताबिक?
- 1:03:16तुम्हारी बीसियों पीढ़ियां जोड़ती रहती है और तुम्हारे पास जो आया
- 1:03:19है, सभी पीढ़ियों की अमानत साथ लेके आ जाए और तुम्हारे अगर लड़का
- 1:03:25हो जाता है तो तुम बेफिकर हो जाते हो।
- 1:03:28हाँ संभालने वाला आ गया हमारी पुस्तों की जमीन जायदाद को, कमाई
- 1:03:32को परिश्रम को। तो मुक्त हो जाते हो, ये है कारण
- 1:03:37तुम्हारी मुक्ति का इसलिए तुम खुश होते हो पकौड़े बांटते हो, मिठाई
- 1:03:43बांटते हो लड़की जन्म जाती है तुम सिर्फ परंपरा करो भीतर खुशी नहीं
- 1:03:50होती। बाहर से खुशी दिखाने के लिए तुम
- 1:03:55बर्फी बांटते हो, गुलाबजाम में बांटते हो, भीतर खुशी नहीं होती,
- 1:03:59भीतर दुख होता है मेरी बहन के पांच लड़कियों के थे और सासु कहती
- 1:04:07है रोज़ बाठा जाम देवे, कमाल है? मैं छोटा था, पिताजी हर दो तीन
- 1:04:16महीने के बाद कहते है चल बेटा सुबह 3:00 बजे गाड़ी से जाना है,
- 1:04:20कहाँ जाना है, सरसा जाना है, क्यों जाना है बेटा तू नहीं
- 1:04:25समझेगा, तू मेरे साथ चल तू थोड़ा सा समझदार है।
- 1:04:29तुझे कोई काम धाम भी नहीं है, बाकी सब अपना काम करते है।
- 1:04:32चलो मेरे साथ और मैं चलता हूँ मैं जाके देखता हूँ मेरी बहन के लड़की
- 1:04:37हुई होती और हमें पानी भी नहीं पूछा जाता बाहर से ही गालियों के
- 1:04:42बछार से रोज़ बाठा जाम बाठा जाम जाम के पटक देव।
- 1:04:48मैं क्या करूँ? मुझे तो समझ नहीं आता रात भर का
- 1:04:52जागता हुआ चाय पानी भी नहीं पूछा इसने तो ये पता नहीं क्या बोल रही
- 1:04:57है या क्या बाटा उस वक्त इतनी समझ कहाँ थी बच्चा था सात 8 साल का
- 1:05:06लड़कियों को तो तुम बाटा कहते हो? हमारे समाज की फ़िल्म पर है
- 1:05:11मान्यता और बरसों पुरानी मान्यता और ये संस्कार बन गया है संस्कार
- 1:05:16टूटते टूटते टूटते टूटेगा, एक दम से नहीं टूटेगा।
- 1:05:22धीरे धीरे ये प्रथा टूटनी पड़ेगी। कितना ही लड़कियों को संपत्ति के
- 1:05:29बराबर वारिस कर लो, लेकिन आखिर में तुम्हारी अंत आत्मा स्वीकार
- 1:05:35नहीं किया। तुम जानते हो कि प्रवृत्ति तो
- 1:05:38इसकी डिफेंडिंग है अटैकिंग नहीं है तुम अटैकिंग प्रवृत्ति का मर्द
- 1:05:44ढूंढ़ते हो। लड़का हो सुडोल मर्द बने जो अपने
- 1:05:51कंधों के ऊपर इस सारी घरक्रेती का बोझ उठा रहे हैं।
- 1:05:55इसलिए जैसे ही लड़का हुआ तो अंदर बोझ हो जाते हो, रीलैक्स हो जाते
- 1:06:00हो। क्यों संभालने वाला कोई आगे?
- 1:06:08मैं तुम्हारे माल को भी चुराऊंगा और तुम्हे भी चुरा लूँगा मैं महा
- 1:06:13चोर महा ठग हूँ तुम ठग कहते हो मैं तो तुमको ही ठग लूँगा
- 1:06:22तुम्हारी माल को ठगुंगा ठगुंगा तुमको भी ठग लूँगा, आ जाओ।
- 1:06:30माखन जो नन्द किशोर, जो। कर गयो मन की चोरी रे सुध विसरा
- 1:07:03गयो। मोरी वो काला, वो काला इक बांसुरी
- 1:07:20वाला। कर गया मन की चोरी रे सुध विसरा
- 1:07:37गयो। मोरी बो काला इक भां सूरीवाला।
- 1:07:53अगर चाहते हो मरना। अगर चाहते हो कि कोई तुम्हें ही
- 1:08:00चुरा ले, अगर चाहते हो कि कोई तुम्हें ही ठग ले तुम्हारे माल को
- 1:08:06नहीं तुम्हें ही ठग ले तुम मेरे पास आ जाना अन्यथा मैं बहुत बार
- 1:08:14कह रहा हूँ कितनी बार कहूं? तुम बहरे हो या अंधे हो या पागल
- 1:08:21हो क्या हो? बार बार कहने के बावजूद फिर फिर
- 1:08:27वो ही फिर फिर वो ही हरकतें। मैं तुम्हें कहता हूँ, बिल्कुल,
- 1:08:37मैं तुम्हारी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरूंगा कितनी बार कहूँ, लिख
- 1:08:49के दे दो स्टेम्प पेपर पर रोज़ बोलता हूँ।
- 1:08:55समझ तो मैं फिर नहीं आता और बोलता मूवी दो फिट ए मूवी कहता हूँ,
- 1:09:01धुधकारता मूवी धक्के मारता भी ब्लॉक भी कर देता हूँ तुम फिर फिर
- 1:09:10आ जाते हो किसी न किसी और रूप में आ जाते हो और नाम बदल के आ जाते
- 1:09:15हो। लेकिन हो तुम वही मैं पहचान जाता
- 1:09:21हूँ रूप बदल लिया नाम बदल लिया पहचान बदल लिया हो तुम वही मैं
- 1:09:31कहता हूँ बहुत से जन्म। तुम कहते हो नहीं नहीं हम तो यहीं
- 1:09:36आएँगे, डिस्टर्ब भी करेंगे लोगों का वक्त भी खराब करेंगे करो भाई
- 1:09:43लोगों का वक्त खराब, मैं नहीं होने देता याद रखना मैं तुम्हारी
- 1:09:48बातों में मेरे से भी कुछ ज्ञान निकाल लूँगा।
- 1:09:52जब लोगों के काम पड़ेगा और ऐसा काम पड़ेगा जो मेरी साधारण बातें
- 1:09:56काम भी नहीं पड़ती और तुम्हारी गालियां बड़ा काम करें।
- 1:10:08मीठी मीठी बातें करने वाले। मैं सदा ही कहता हूँ, ये बीमा
- 1:10:16करने वाले लोग महाठग होते हैं सच में ये तुम्हारा माल ठगते हैं,
- 1:10:24तुम्हें डराएंगे बच्चे, बच्चों का क्या होगा, आदमी का क्या भरोसा
- 1:10:30है, कब खिसक जाओ। स्वाद निकल जाए, जमीन पर गिर जाओ,
- 1:10:40बच्चों का क्या होगा और तुम डर जाओ, यही फॉर्मूला हमारा है, हम
- 1:10:47कहते हैं फिर क्या होगा अभी से संभल जाओ।
- 1:10:53भियोगी राम राम जप ले। अभि, फिर भी तो राम राम होती है
- 1:11:03तुम्हें डरा के और अप्रत्यक्ष रूप से तुम्हें गाली निकालते हैं।
- 1:11:08तुम्हारी अनहोनी बिचारते हैं तुम मर गया फिर उसके बाद क्या होगा?
- 1:11:13लट्ठू उठा लेना हराम करो मैं क्या मरो उस बूढ़े की तरह मरो तुम इस
- 1:11:27कार का अक्सीडेंट हो गया फिर क्या करोगे?
- 1:11:32तुम्हें डराते हैं। इस संत भी तुम्हें डराते हैं
- 1:11:39लेकिन संतो का डराना संत की बात करता हूँ।
- 1:11:43धोखेबाजों में संत का डराना तुम्हारा काम पड़ेगा।
- 1:11:52बीमे वालों का डरा ना हो, तुम्हारे कोई काम नहीं पड़ेगा
- 1:11:58किसी के मरने से या कुछ भी नहीं बिगड़ता संसार चलता है कितने मर
- 1:12:03गए अब्राहम लिंकन के माँ बाप मर गए थे, राष्ट्रपति बने।
- 1:12:13क्योंकि माँ बाप के होते तुम नकारा रहते हो, आलसी रहते हो।
- 1:12:19सच में ये है कि माँ बाप को अपनी पूंजी बतानी नहीं चाहिए।
- 1:12:23बच्चों को बच्चे खूब संघर्ष करें। तूफानों से लड़ना सीख ले, ब्लास्ट
- 1:12:33हो जाएं, विपत्तियों से आमनेसामने आँखों आँखों को चार करना सीख लें
- 1:12:41और जब वह सुदृढ़ हो जाएं तो माँ बाप बताएं कि हमारे पास यह है,
- 1:12:46उससे पहले न बताएं। क्योंकि अगर पहले बता दिया डोलमल
- 1:12:50हो जाएगा, गोलमाल कर देंगे फिर वो उड़ाने पे आ जाएंगे, फिर वो खुद
- 1:12:57मेहनत करना सीख ही ना पाएंगे और जिसने मेहनत करना नहीं सीखा वो
- 1:13:03कुछ पा भी ना सकेगा। जिन खोजा तिनपाइयां गहरे पानी पेट
- 1:13:12जितना गहरा खोजोगे। जितनी गहरी मशक्कत करोगे, दोनों
- 1:13:16बातों में सही है, संसार में भी सही है।
- 1:13:19ये दोहा और परमात्मा में भी सही है, जिन खोजा तिनपाइयां गहरे
- 1:13:25पानी, पेट। जितनी मशक्कत करोगे उतना ही
- 1:13:28पाओगे। संसार में जितनी मशक्कत करोगे
- 1:13:32उतना ही दान माण, गद्दियाँ सुविधा के शोक के साधन और परमात्मा में
- 1:13:42भी जन खोज तेनपईया। गहरे पानी, गहरे से गहरे परिश्रम
- 1:13:49कर देना, तोड़ देना अपने सन्तुओं को संसार हो या परमात्मा हो,
- 1:13:55संसार में पूरी जखाई करना, पूरी खपाई करना, शरीर को तोड़ देना,
- 1:14:00प्रत्येक टिशू को तोड़ देना। इतनी मेहनत करना, तूफानों से टकरा
- 1:14:05जाना, बाहर के तूफानों से टकराने की आदत आ गयी तो भीतर मौत से तुम
- 1:14:14बड़े प्यार से लड़ सकोगे। ये सूत्र बड़ा काम आएगा।
- 1:14:21संसार में बलिष्ठ होकर विपत्तियों का मुकाबला कर जब तुम विपत्तियों
- 1:14:29को सहना सीख गए, लड़ना सीख गए तो फिर तो मृत्यु को भी स्वीकार करना
- 1:14:39आसान हो जाएगा तुम्हारे लिए। संसार में भी काम पड़ेगा।
- 1:14:44यह सूत्र जिन्ह खोजा तनपानी खूब मेहनत करो, खूब प्रयास करो, संसार
- 1:14:51में गहरे पानी बैठ, इतने गहरे पानी बैठ इतने गहरी मशक्कत करो कि
- 1:14:58टूट जाए हाथ कम साय। सुबह से शाम तक और संसार से पार
- 1:15:07यही सूत्र काम आएगा, वहाँ भी खोजना पड़ेगा।
- 1:15:11पूरी मशक्कत से खोजना पड़ेगा। पूरी गहराई से खोजना पड़ेगा।
- 1:15:17जो समुद्र में गहरे उतर जाते हैं। हीरे लाल मोती जौहर हाथ वो ही
- 1:15:24निकाल के लेके आया करते हैं जो ऊपर ऊपर थुल थुल ऊपर ऊपर हाथ
- 1:15:29मारते हैं कुछ नहीं आता उनके हाथ में मछियों के सिवा मैं बपुरा
- 1:15:37भूडेन धरा। गयो किनारे बैठ मैं बेचारा बूझ
- 1:15:42जाता, डर गया अगर डर जाओगे, डर जाओगे तो कुछ न पा सकोगे मौत से
- 1:15:54डरे। कि न संसार के रहोगे, न खुदा ही
- 1:15:59मिला, न बसा वैसा ना इधर के रहे, न उधर के रहे।
- 1:16:05तूफानों से टकराना सीखूं यह मंत्र दोनों जगह काम आएगा संसार में भी
- 1:16:13परमात्मा। क्योंकि परमात्मा में जितनी
- 1:16:19परमात्मा में तो मृत्यु होएगी संसार में मृत्यु तो नहीं आएगी,
- 1:16:24मेहनत ही आएगी, मेहनत कर लो व्याध्य आएंगी, विपत्तियां आएंगी,
- 1:16:30बाधाएं आएंगी, उनसे लड़ना सीख लो और व्यस्त हो जाओगे।
- 1:16:35यही कहा था भगवान कृष्ण ने वैराग्य और अभ्यास संसार से
- 1:16:40अभ्यास सीखो और भीतर वैराग्य को साथ लेकर जाओ।
- 1:16:47संसार में विपत्तियों से लड़के बाधाओं से लड़के अभ्यस्थ हो जाओ।
- 1:16:52इतने व्यस्त हो जाओ के भीतर जाते वक्त वैराग्य हो तुम्हारे मन में
- 1:16:56कि कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला इस वैराग्य को साथ लिए लिए जब तुम
- 1:17:08अंदर जाओगे तो छलांग लग जाएगी। जितनी सुविधा सुविधा पूर्व की
- 1:17:16छलांग विपत्तियों से लड़ने के बाद तुम लगा पाओगे उतना डरे डरे तुम
- 1:17:22छलांग नहीं लगा पाओगे? संसार से लड़ने की आदत बनाओ।
- 1:17:29साहस इकट्ठा होगा। और ये साहस दोनों का काम आता है।
- 1:17:32मैंने पहले ही कहा था साहस संसार की सामग्री इकट्ठे करने में भी
- 1:17:38आता है। काम और परमात्मा में छलांग लगाने
- 1:17:44के लिए भी आता है काम। साहस जुटाना सीखो, साहस आएगा
- 1:17:52कैसे? विपत्तियों से बाधाओं से लड़ के
- 1:17:59सामना करके साहस को पैदा करो, उस मुकाम पे काम आएगा।
- 1:18:08जहाँ तुम्हें आखिरी छलांग लेनी होगी, वहाँ एक ही चीज़ काम आती है
- 1:18:15क्या होता है वो साहस तुमने पूछा सत्य क्या है?
- 1:18:20सत्य यह है कि तुम जो माने हो वो तुम और है कुछ और हो।
- 1:18:25वह मिलेगा कैसे सहस्य मिलेगा साहस पैदा करो साहस के बिना सब अधूरा
- 1:18:34है, ना खुदा से मिला ना बसा ले सनम, ना इधर के रह ना उधर के रह
- 1:18:43धन्यवाद।