Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Apr 26 - सच्चा आनंद पाने के लिए किन 'पर्दों' को हटाना जरूरी है? क्या आप भी दिखावे के जाल मे हैं?
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- 0:15अनंत सागर तमिलनाडु से एक दो जीवो लव हुए तिरलक हुए लखवी।
- 0:43ध्यान से समझना भगवान ने कुछ शब्द जीस मंतो से कहे हैं।
- 0:55उस मंतो से तुम समझ नहीं पाते। तुम उलट अर्थ ले लेते हो और उलट
- 1:09अर्थ लेते ही तुम उलझ जाते हो। बहुत साल पहले मेरे पास एक।
- 1:20गुरुद्वारा की ग्रंथी अब मुझ से तुक बोले बंदी खलासी प्राण हुए
- 1:38बाबा स्कार्स के मैं क्या स्कार्स करने की जरूरत ही नहीं है।
- 1:47सीधा सा शब्द बंधन हो के मुक्ति हो, उसके वाण में होती है।
- 2:00वह कुछ अर्थ और का और ही ले रहा था।
- 2:03जबकि बाबा सहेज वाणी से ओले। बंदी खलासी पाणे होय।
- 2:13उसके भाड़े में ही तुम बंधे हो, उसके भाड़े में ही तुम मुक्त हो
- 2:20जाओगे। वही जो कृष्ण कहते हैं लीला है
- 2:26मेरी। तुम जो कहते हो मैं यही तो रोग
- 2:37है, इट्स ए फॉरेन सबस्टैंस यह बीजाती या द्रव्य?
- 2:53बाहर से आया हुआ मटेरियल जो जीवन के लिए आवश्यक नहीं है वर्ण दुख
- 3:00लायक है अगर सारे धार्मिक ग्रंथों को एक कर लिया जाए।
- 3:18तो इतने ग्रंथों की आवश्यकता नहीं, एक शब्द में ही निपटारा हो
- 3:22सकता है, लेकिन हमने अपना सुखों, अपना चैन खुद ही खो दिया है।
- 3:40और उसकी जिम्मेदारी हम दूसरे पर डालते हैं।
- 3:46यही हमारे तो का मुख्य कारण है। भगवान महावीर कहते हैं।
- 3:54तुम्हारे दुखों के जिम्मेदार तुम हो दूसरा कोई तुम ही हो कारण और
- 4:09जब तुम इसका कारण दूसरे को मानने लगते हो तो दुखी हो जाते हो और
- 4:15ज्यादा। तो नाम की व्याख्या करते हुए इस
- 4:24पोड़ी में लिखते हैं बाबा 32 पोड़ी एक दो जीभो लक होण लक होयें
- 4:34लक विश लक लक घिणा आंखें एक नाम जगदीश।
- 4:44तथ्य तुम एक एक जीव से परमात्मा का उच्चारण करते हो और एक के बजाय
- 4:56दो हो जाए, लाश हो जाए। और लाख जीवों से तुम लाख लाख बार
- 5:02उसका नाम जब स्मरण करो तो भी उसको कहना पाओगे और यही तो तुम कर रहे
- 5:12हो तुम और क्या कर रहे हो? एक दो जीव हो लक होवें अब तो एक
- 5:25जीव है तुम्हारी लाख भी हो जाए लक होवें लक 20 वो 20,00,000 जीव है
- 5:33भी तुम्हारे हो जाए। लक लक घिड़ा आँखें पे एक नाम
- 5:38जगदीश और लाखों लाखों बार तुम उसके नाम सवर्ण करो, तब भी वह
- 5:52नहीं मिलेगा ऐसा कपड़े का है। बत्तीसवीं पूड़ी नाम के हिसाब से
- 6:06बंदरों को काटने वाली है तुम्हारे बंधन तुम्हारी मान्यताएँ एक दो
- 6:16जीभ हो लख होवें। लक होवे लक वीस लक लक गेड़ा आँखें
- 6:22एक नाम जगदीश एक राह पति पपड़या चड़िया होई एक्कीस छोड़ दे इन
- 6:35राहों को। ये जपना तपना बंद कर यह तेरी
- 6:47मुर्ता है नाम एक हॉरन सबस्टेंस। अवांछित तत्व इसकी जरूरत नहीं है।
- 7:07यह एक फोड़ा है और जब तक यह फोड़ा रहेगा तब तक तुम्हारे भीतर चस चस
- 7:16चस। तुम कितना ही एनल जैसे खा लो,
- 7:25कितना ही तुम ट्रिमेडोल का इन्जेक्शन लगा लो।
- 7:35अगर ये मवाद तुमने जपनी शुरू रखी तो क्या सोते क्या जगते?
- 7:47यह मवाद रूपी फोड़ा तुम्हें दुख देता ही रहेगा और तुम जितना नाम
- 7:59जुपाओगे उतने दुखी हो जाओगे। मेरी बातों से, दुकानदारों को।
- 8:09तकलीफ पहुँचती है और जब तुम्हें किसी को किसी से तकलीफ पहुंचती है
- 8:23और तो तुम्हारे पास जरिया नहीं होता, फिर तुम उसको दूर हटाने की
- 8:28चेष्टा करते? फिर तुम अब कौन सी बिटिया थी जो
- 8:40कनाडा में मार दी गई? किसी व्यक्ति का विरोध कर रहा
- 8:45हूँ? ये लोकतंत्र है भाई।
- 8:51तुम्हारे विचारों में भेद हो सकता है।
- 8:54यही तो लोकसंत्र अगर कोई राजा विचारों की मत भेदता को स्वीकार
- 9:05नहीं कर सकता ही शुड रिसाइन इमिडियटली?
- 9:11वो चाहे ट्रंप हो। चाहे नरेंद्र मोदी हो, चाहे कोई
- 9:15भी देश का कोई भी राजा हो क्योंकि जीतने मानव हैं, उतने मत हैं और
- 9:26जीतने मत हैं, उतने ही मतभेद होंगे।
- 9:32परमात्मा ने दो कंकड़ भी एक जैसे नहीं बनाए।
- 9:42तुम देखना किसी को कैंसर का फोड़ा निकल आता है।
- 9:50जब कैंसर का फोड़ा नहीं था तो तुम मज़े से सोते थे।
- 10:01तुम्हें कोई तकलीफ मत तुम सारा काम कर्तव्य बड़े मज़े में किया
- 10:11कर्तव्य दिन भर रात अपने कर्तव्य, निष्ठापूर्वक।
- 10:20उड़न किया करते थे और जैसे ही यह फोड़ा आ जाता है राम नाम का फोड़ा
- 10:33नाम का फोड़ा बस नाम का है। कोई भी हो नाम उसका कोई है नहीं
- 10:39और तुम दे देते हो। वैसे यही तकलीफ है।
- 10:47जब फोड़ा नहीं हुआ था तो तुम मज़े की नींद सोते थे।
- 10:51बच्चा कितने मज़े की नींद सोता है, क्योंकि इसके भीतर ये फोड़ा
- 10:59है। यह केन्सराइटिस का फोड़ा अभी उपजन
- 11:05है, इस फोड़े का नाम है मैं एक अहंकार नाम तो मैं बहुत बार सुन
- 11:18लिया। इसलिए मैं पलट देता हूँ नमो को
- 11:23तुम्हें समझाने के प्रयास से कि तुम किसी तरह समझाओ, आखिर में
- 11:28बोलना चाहता क्या हूँ यह नाम भी एक थोड़ा है कहाँ से आया?
- 11:40नाम लेकर कोई पैदा नहीं होता। वरुण गुरु की आवश्यकता ही क्या
- 11:48थी? गुरु के पास जाते हो तुम, वह
- 11:52तुम्हें नाम दे देता है बस। दुख का कर्ण दे दिया तुम्हें तुम
- 12:01में से झपोगे और वह का खूब जपरा कोई कोर कसर बाकी मत छोड़ देना,
- 12:11जूं जूं तुम जब से जाते हो तुम तुम दुखी हो।
- 12:17मर्ज बढ़ता ही किया जू जू दवा की तुम इसको दवा समझे बैठे हो और
- 12:24तुम्हारा रोग दिन ब दिन बढ़ता ही जाता है और जब ये कैंसर का थोड़ा
- 12:29इतना बड़ा हो जाता है कि दिन भर रात चैन नहीं आता।
- 12:34फिर तुम डॉक्टर के पास चलते हो, मेरे पास ऐसे पेशेंट बहुत आजा।
- 12:42मैं उनकी सर्जरी करता हूँ। हाँ ये स्ट्राइक ही होता है।
- 12:48कसम से तो सर्जरी का स्ट्राइक कर देता हूँ।
- 13:00यह नाम को काट देता है। यह अवांछित तत्व है।
- 13:13इट एस ए अननेसेसरी प्रॉडक्ट इसके कोई लोग ने।
- 13:22बच्चा नाम के बिना ही खिलखिलाता है हँसता है इसलिए तो बच्चे की
- 13:31मुस्कराहट देखने के लिए तुम तरस ही जाते हो।
- 13:37बच्चे का खिलखिलाना। जैसे इस जहन में ब्रह्मांक में
- 13:45उतर गया इक दो जीवों लख होवें लख होवें लख
- 14:02वीस लख लख गिड़ा आँखें एक नाम जगदीश।
- 14:11पहले तो यहाँ तक हम बात सही कर ले।
- 14:16नाम एक फौरन मटेरियल है क्योंकि बात से आता है ठीक है।
- 14:23इसको सर्कल में दिलाओ नाम अवांछित तत्व है।
- 14:31हाँ न नेसेसरी प्रॉडक्ट इसकी कोई जरूरत नहीं
- 14:45और बाबा कहते हैं कि एक जीभ क्या अगर तुम्हें लाख जीभें मिल जाए और
- 14:54उन लाख जीभों से 20,00,000 जीभें मिल जाएं?
- 14:58उन 20,00,000 जीवों से तुम लाख लाख गेड़ा बार उचरित करके नाम
- 15:06उचरण करो। कभी तो हमारा कल्याण नहीं हो सकता
- 15:16क्यों? क्योंकि तुम्हारे दुख का कारण जो
- 15:27भी है वह नाम से मिटाए नहीं जा सकता।
- 15:33इसको भी अंडरलाइन। तुम्हारे दुख का जो कारण है वह
- 15:43नाम से मिटाया नहीं जा सकता। कभी कैंसर का थोड़ा नाम से मिटाया
- 15:47जा सकता है, वह तो सर्जन काटेगा, चिड़ा देगा।
- 15:57वो सारी अवांछित जो बढ़ गई हैं, तुम्हारे भीतर टिशूज की मात्रा
- 16:06उनको बाहर निकाल देगा। फिर तुम चैन की नहीं सो गए।
- 16:20इस रोग के मरीज मेरे पास बहुत आते हैं क्योंकि इस रोग को फैलाने
- 16:25वाला मीडिया बहुत है और तो कुछ आता नहीं तो नाम को ही फैलाने लग
- 16:38जाते हैं। पता है नहीं खोजा है नहीं, गुरु
- 16:44से गुरु तक चलता है उसे श्रोतियां कहते हैं।
- 16:47श्रवण कांड से कांड तक का आज ही गुरु ने उसके शिष्य उसके शिष्य
- 16:57आगे से आगे। कुर्सियां भी तब्दील हो जाती हैं।
- 17:01गद्दियाँ भी और नाम भी और वह तुम तक आ पहुंचा है आज और तुम भी इसके
- 17:09नाम के पीछे पागल हो गया। मेरे पास ही रोग के मरीज ही आते
- 17:16हैं। केन्ससराइटिस का फोड़ा फॉरेन
- 17:28सबस्टेंस है अवांछित तत्व है बाहर से आया है और शरीर कभी भी अवांछित
- 17:35तत्वों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। शरीर लगातार मेहनत करके अवांछित
- 17:42तत्वों को बाहर निकालने की चेष्टा करेगा क्योंकि वह उसके दुख का
- 17:47कारण है। वह पीड़ा का कारण है।
- 18:00और यह है फूड़ा जो तुम्हारे शरीर से पैदा हो गया, तुमने तो पैदा
- 18:11किया नहीं इस उसको चीरा देना होगा छोड़ दो अगर तुम नाम जब करते हो
- 18:27तो। देखना जिंदगी खुशहाल हो गई,
- 18:35हजारों हजारों की जिंदगियां खुशहाल हो गई।
- 18:38इस नाम को छोड़ गई जरूरी चीजों को तुम छोड़ देते हो जीस ऑक्सीजन के
- 18:45बिना कोरोना में लोग मर गए। उस ऑक्सीजन को तुम मैं कहता हूँ
- 18:52क्रिया योग करो सुबह उठ के लंबे लंबे सॉन्ग फिर जैसे रात निद्रा
- 19:02में सोयत ने कुछ करने में उतर जाओ।
- 19:10बस थोड़े से दिन और तुम पाओगे तो मैं सोकु आना शुरू हो गया तुम्हें
- 19:19ज़िन्दगी का मकसद मिल गया बहुत से लोग यहाँ आने से पहले कहते बाबा
- 19:30हमें ज़िन्दगी जीने का मतलब नहीं पता था।
- 19:38अब ज़िन्दगी जीने का अर्थ पता चला क्या है?
- 19:43जैसे ही हम लंबी सांस लेते हैं, 150 बार वह आनंद हमें अपने घेरे
- 19:50में ले लेता है। और हम मस्ती के आरंभ में झूमने
- 19:54लगते हैं तो समझ आता है कि जीने का मकसद क्या है?
- 20:01फिर यह भी समझाता है कि जीने का मकसद नाम झपना नहीं, उस परमात्मा
- 20:11को में। इंकार करता हूँ।
- 20:15जो तुम्हें नाम समझ देता है, वो परमात्मा रिश्वतखोर है, तुम्हारी
- 20:29यहाँ के कारोबारी डॉलर्स में, पैसे में, यूरो में।
- 20:36रुपये में रिश्वत लेते हैं। तुम्हारा परमात्मा नाम के रूप में
- 20:42रिश्वत लेता है। फिर तो रिश्वत खोर हो गया फिर तो
- 20:48वो व्यापारी हो गया, ध्यान रखना। वह व्यापारी ने उसके भीतर तो
- 21:05बड्डा दाता तिलना तमा है, उस विराट परमात्मा में तिल मात्र लेस
- 21:13मात्र भी तमा नहीं है उसके भीतर। ज़रा भी इच्छा नहीं है कुछ वह
- 21:23इच्छा से विहीन है जहाँ तक हमने साफ कर ली बात इसको मैं अर्क रूप
- 21:32में आपको बदलता हूँ। तुम्हारी ज़िन्दगी में तुम्हारे
- 21:40यहाँ आने का कोई मकसद है, कोई लक्ष्य है कोई एम है वह एम।
- 21:52क्या है दुखो से निवृत्त? प्रत्येक व्यक्ति चाहे उसके पास
- 22:02सारा जाहन हो, लेकिन फिर भी वह दुखी है।
- 22:14तुम देख लो जैसे जैसे तुम्हारे पास द्रव्य बढ़ता जाए।
- 22:25ये अभाव का होना एक पर्दे की तरह था जो तुम्हारे दुख के ऊपर पड़ा
- 22:31हुआ था। जैसे जैसे तुम्हारे पास पदार्थ
- 22:36आएगा, ये बात गहरी है। थोड़े शांति ढंग से सोना।
- 22:43वैसे ही पर्दे उठते जाएंगे। दुख के ऊपर से तुम्हारा दुख ढका
- 22:50हुआ है, इसलिए तुम्हें नजर नहीं आता और ढका हुआ है इन बर्तों से।
- 23:05जैसे जैसे तुम इन परतों को उठाना शुरू करोगे तो आखिरी पर्दा उठेगा,
- 23:18नीचे से निकलेगा दुख यह दुख छिपा हुआ।
- 23:28और इन पर्दों के कारण तुम्हें तुम्हारा दुख नजर नहीं आ रहा था
- 23:40क्योंकि तुम गफलत में थे। हम दुखी हैं क्योंकि हमारे पास
- 23:46पैसा नहीं है। हम दुखी हैं, हमारे पास नॉलेज
- 23:52नहीं है, हमारे पास सूचना ही नहीं है।
- 23:57हमारे पास कोई रुतबा है, मान सम्मान हमें कोई देता नहीं
- 24:06गद्दियाँ हमारे पास है ही नहीं। इसलिए हम दुखी है, तुम समझते हो
- 24:15यह समझना ही पर्दे है जो तुम्हारे दुख के ऊपर पड़े हुए है और जैसे
- 24:24जैसे तुम्हारा अभाव समाप्त हुआ। कि एक एक करके सारे पर्दे उठेंगे,
- 24:34फिर जब तुम पूर्ण संपन्न हो जाओगे, पदार्थों से तुम्हें धन भी
- 24:40मिलेगा, तुम्हें बल भी मिलेगा, तुम्हें मान सम्मान भी मिलेगा।
- 24:44तुम गद्दी निश्चय भी होगे। तुम्हारा नाम भी सारी दुनिया में
- 24:49फैलेगा, तुम्हारे पास बंगले भी होंगे।
- 24:55तुम्हारे पास बढ़िया से बढ़िया कार्य भी होंगे।
- 25:03तुम्हारे पास बढ़िया से बढ़िया फ़ोन भी होगा।
- 25:06आदरू की सुविधाएं भी होंगी, हेलिकॉप्टर भी होंगे, जहाज भी
- 25:11होंगे। तो ये सभी परतें थीं जो तुम्हारे
- 25:17दुख के ऊपर डरी हुई थीं। आज तुम्हारे पास कुछ भी ऐसा नहीं
- 25:23जो नहीं हो। सब पर्दे उठ गए और इन पर्दों के
- 25:30उठ जाने से क्या निकला दुख नजर आया नीचे फिर तुम्हें पता चला कि
- 25:38मैं तो समझता था कि यह जो दुख है। यह अभाव के कारण है यह क्योंकि
- 25:51गद्दी नहीं है रुस्तमाँ नहीं है सूचनाएं नहीं है, इस कारण से मैं
- 25:58दुखी हूँ, लेकिन पूछना सर लोगों से।
- 26:06जिनके पास सभी सूचनाएं होती हैं क्या वो सुखी हैं?
- 26:10नहीं अगर सूचनाओं के होने से कोई सुखी हो जाता सबसे पहले
- 26:16आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स सुखी होता ए आई उसके पास तो हमारे से
- 26:21ज्यादा सूचना। ए आई नाचता भरता मैं नाच नाच के
- 26:33गाणें करता हूँ, लेकिन ए आई सुखी नहीं।
- 26:46कबीर के पास कोई सूचना नहीं है, लेकिन परम सुख है।
- 26:54कबीर के पास जैसा रूखा सूखा आता है, गुजर बसर कर लेते हैं लेकिन
- 27:04आनंद की जिंदगी जीते हैं। देख पराई झोंपड़ी मत लल चावेगी।
- 27:16देख बुराइ चौपड़ी दूसरों को चौपड़ी खाते हुए देखकर अपने जीरा
- 27:22को ललचा मत लेना कि देखो वो तो रॉयल सराज पे जा रहा है, वो तो जा
- 27:29रहा होगा। लेकिन अगर सवाल पूछना किसी से जो
- 27:37अपने आप को सफल कहता है, उसके कान में जाके पूछना सारा जहान मिल गया
- 27:48तुम्हें क्या तुम सुख हो? तो फिर इतनी मगज खपाई क्यों करी
- 28:03सारी उम्र ये देर मुझे दे दे बेंजू वाला क्या करोगे फिर तुम आई
- 28:13विल मेक इंडिया? आई विल मेक अमेरिका ग्रेट अगेन
- 28:18क्या बात कंगाल हो गया था? क्या आई विल मेक अमेरिका ग्रेट
- 28:26अगेन कोई पोडियो हो गया था उसका? तो फिर दूसरी बार फिर इसको ग्रेट
- 28:43बनओगे ऐसे ही तो मोर तुम इन लोगों को वोट दे के गलियों पे बिठा देता
- 28:53है, लेकिन कबीर कहते हैं, फरीद कहते हैं, रूखी, सूखी खाये के
- 28:59ठंडा पानी। देख पराई चौपड़ी मत ललचा क्योंकि
- 29:06जिन्होंने चौपड़ी खाली और दो दो खाली और चार चार खाली और पेट भर
- 29:10का कुछ तो इतनी खा लेते हैं कि वोमिटिंग हो जाती है।
- 29:27कबीर ताना माना बनते हैं, चदरहिया को बनते हैं, भगवान के गीत लाते
- 29:32हैं, वह नाम स्मरण नहीं करते। यह गीत उनके आनंद के प्रार्थ
- 29:46दुर्भाव से आया है। जैसे ही आनंद का जन्म होता है
- 29:57वैसे ही तुम्हारी आँखें छलछला तुम्हारा कंठ मधुर गायन करना शुरू
- 30:05कर देता है, यह आनंद के पैदा होने की।
- 30:11लक्षण तुमने देखा, कभी बाथरूम में जाते कोई किता ही बेसुरा हो, वह
- 30:20गीत गाना शुरू कर देता, क्या हूँ मैं?
- 30:25दो लोटा पानी का पूरा सिर्फ गीत सूझ गए।
- 30:31और बिल्कुल वे सुरा है कोई सुर नहीं है उसका, लेकिन वह आनंदित है
- 30:39फूल फूल होने में आनंदित है। वह परवाह नहीं करता कि पाश का
- 30:45मूतियां ज्यादा सुगंध देता है। गेंदे का फूल कभी कंपैरिजन और
- 30:57कॉम्पिटिशन नहीं करता के पास लगा। रात की रानी का फूल ज्यादा सुगंध
- 31:09देता है नहीं, वह अपनी मस्ती में प्रसन्न है।
- 31:19तुम भी जीस दिन अपनी मस्ती में प्रसन्न हो गए।
- 31:22उस समय एक चीज़ सबसे पहले खोयेगी क्या?
- 31:30दिखावे वज इस वक्त को सर्कल में चला दुखी व्यक्ति दखावेबाजी करता
- 31:50है। और अगर तुम अभी दिखावेबाजी कर रहे
- 31:55हो और अपने आपको सुखी समझ रहे हो तो तुम मुर्ख हो क्योंकि सुख पैदा
- 32:05होने के बाद सुख प्रकट। हुआ करता है ना कि दिखावा हुआ
- 32:10करता है। मियाँ बीबी भीतर से लड़के आते
- 32:17हैं, थपड़ों थपड़ी हो के जूतों जूती हो के आते हैं और मेकअप करके
- 32:23बाहर हंसते खेलते जाते हैं ठाके लगाते हैं।
- 32:29भीतर से थपड़ो थपड़ी हो के आए, उसने उसके केस पार किए।
- 32:32उसने जूता मारा, उसने बेलन मारा, चला के यह आनंद के पैदा होने के
- 32:43लक्षण। यह दुख के पैदा होने के लक्षण
- 32:50हैं। अभी कल ही मुझे कोई कह रहा था
- 32:54मेरे शरीर ने तो फला मर्सिडीज ले ली।
- 33:02मैंने कहा फिर उसको ऐश करने दे। तू अपनी ऐश में रह ध्यान रखन ऐश
- 33:12कभी ट्रांसफर नहीं हो सकती ज्ञान की तरह।
- 33:21तुम्हारा मन तो बड़ा होता है, मेरा बड़ा मन होता है कि मैं
- 33:24तुम्हें अपना आनंद ट्रांसफर कर दूँ, लेकिन क्या करूँ?
- 33:34मैं इन गुरु डूबा के कारण की तरह गद्दियों को ट्रांसफर कर सकता
- 33:40हूँ। आनंद को ट्रांसफर नहीं कर सकता
- 33:44आनंदा इस ए नॉन ट्रांसफर आनंद ट्रांसफर नहीं किया जा सकता
- 33:53गलतियाँ ट्रांसफर हो सकती हैं आज एक राष्ट्रपति है कर बदल जाएगा
- 33:58दूसरा आ जाएगा। अगर तुमने दिखावेबाजी शुरू कर दी
- 34:09है तो होशियार आई वॉर्न, यू अलर्ट हो जाने यह प्रकृति की एक
- 34:21अलर्टेशन है। प्रकृति तुम्हें बता रही है कि
- 34:26तुम दुखी होने जा रहे हो। अगर तुमने दिखावा करना शुरू किया
- 34:43कभी मन में भी आई देखावा करने की तो समझ लेना अपने आप में।
- 34:56के दुख का कारण पैदा हो गया। दिखावा करने की इच्छा तभी प्रकट
- 35:08होगी जब तुम वास्तव में दुखी हो जाओगे।
- 35:16यह बड़ा अमर या सूत्र संभाल के रखना दिल के किसी कोने में अपने
- 35:26आप को वक्त वक्त पर परख रहे हैं। क्या दिखावा करने की इच्छा प्रकट
- 35:32तो नहीं होगी? क्या तुमने दिखावा करना शुरू तो
- 35:37नहीं कर दिया? अगर कर दिया तो एक बात तय है कि
- 35:42तुम दुखी होना शुरू हो गया। भगवान कृष्ण ने एक शब्द कहा।
- 35:54अमानित्वम दंभित्वम हिंसा शांति राजम आचार्य उपासनम सजम सरम
- 36:03आत्मभिनग्रह आत्मभिनग्रह जांच पड़ताल करते रहना अपने खुद की।
- 36:16कहीं दखावा करने की इच्छा शुरू तो नहीं हो गई?
- 36:22अगर हो गई तो ततक्षण सावधान ततक्षण सावधान हो जाना क्योंकि यह
- 36:31ऐसा रोग है। जिसका कोई इलाज, दिखावे बाजी का
- 36:41रोग इसका कोई इलाज नहीं, बस इसको पैदा होने से रोकना होगा।
- 36:49प्रिवेंशन। इसका कोई क्यूर नहीं है।
- 36:55प्रिवेंशन ओनली प्रिवेंशन तो जैसे ही तुम्हें दिखावा बाजी की बू आनी
- 37:05शुरू हो जाए तो फौरन सावधान हो जाना।
- 37:19क्योंकि दिखावा करने की प्रवृत्ति उसी वक्त आती है।
- 37:24जीस वक्त तुम दुखी होना शुरू होगा यह प्रकृति का एक अलर्ट एक्शन है
- 37:32चेतावनी है, और मैं भी तुम्हें चेतावनी दिया देता हूँ।
- 37:36वो किया सारी दुनिया दिखावे मर जो हुई कह रे तुने मिसाइल करा दी अब
- 37:44मिसाइल मैं भी कराता हूँ डान्सिंग मिसाइल भाई तू उसको मारेगी भी और
- 37:49नाश्ती नाचती। आज दिखावेबाजी में सारी दुनिया
- 37:55उलझ गई, इसलिए दुखी हो गई। कहीं सुख है?
- 38:00बस ये इसी बात का सूचना है के इस धरती से सुख गायब।
- 38:10इस धरती पर मात्र कुछ गिनती छुनती के लोग बचे हैं जो अपनी झोपड़ी
- 38:16में अकेले बैठे हैं और सुखी हैं उनकी कोई तमन्ना नहीं और वह
- 38:29भाग्यशाली। वह दिखावा नहीं करते।
- 38:46आत्म विनग्रह इस शब्द को अच्छी तरह से जांच कर लेना।
- 38:56बहुत से मूर्ख आचार्यों ने दिखावेबाजी का रोग जैसे ही पैदा
- 39:00हुआ, इग्नोर कर दिया और आज सहस्त्रो किताबें और सहस्त्रो
- 39:07वीडियो इनकी प्रकाशित होंगी। लेकिन इनके भीतर झांकोगे तो दुख
- 39:13हुआ होगा। आज नहीं, कल मैं जानता हूँ और
- 39:19बखूबी जानता हूँ बाला मेरे से ज्यादा अच्छा कौन जानता है, कृष्ण
- 39:28के उस स्थल पर गया हुआ व्यक्ति इतना समझदार हो जाता है।
- 39:35कि वह वास्तविक समयदार होता है, तुम्हारी समझदारी दिखावे की
- 39:41समझदारी है, इसलिए तुम दीवाने लगाते हो प्रकट करने के लिए देखो
- 39:50मैं कितना समयदार। बोलते संत भी हैं, लेकिन तुम्हें
- 39:57चेताने के लिए वो तुम्हें बुलाते नहीं, तुम आ जाते हो उन्हें सुनने
- 40:06के लिए? और वो तुम्हें रोकते भी थे, बस वो
- 40:19तुम्हें रोकते हैं जब तुम उनके आनंद में खलल डालने की चेष्टा
- 40:23करते हो और जो उनका अधिकार भी है। वो तुम्हारे आनंद में कोई खलन
- 40:33नहीं डालेंगे। सत्य को अवश्य प्रकट करेंगे वो
- 40:41तुम्हारे विपरीत हो, जो तुम्हारे संगीत साथी में हो वह सत्य का
- 40:49बखान करेंगे। समय समय पर अपने भीतर डुबकी लगाते
- 40:57रहना, देखते रहना, कभी देखावेबाजी की लोग शुरू तो नहीं हो गई अगर
- 41:08शुरू हो गई? प्रतिक्षण सावधान इस दखावेबाजी को
- 41:24अच्छी तरह से देखना प्रखना होगा कि यह पैदा क्यों हुई?
- 41:30अब इसको मैं तो समझा देता हूँ आपको।
- 41:33क्योंकि आपको फैसला करना मुश्किल हो जाएगा।
- 41:36आपको फासला करना भी मुश्किल हो जाएगा।
- 41:43जैसे ही तुम दुखी होना शुरू हो, वे दिखावे की अंकाक्षा आनी शुरू
- 41:50हो जाएगी। बस इनको आप सरक में रख लेना तो
- 41:55दक्षिण सावधान हो जाना तो तुम दुखी होना शुरू हो गए और जब यह
- 42:02अपने चरम पर होती है तो तुम मूर्खता भरे काम करना शुरू कर
- 42:12देते हो। किसी ने मंदिर बना दिया।
- 42:15किसी ने मस्जिद बना दी, किसी ने गिरिजा घर बना लिया, किसी ने चर्च
- 42:22बना लिया, ये सब मूर्खों के काम है।
- 42:27वेटिकन सिटी में बैठे हुए पोप उनसे बड़ा मूर्ख और कौन होगा?
- 42:36जिन्हें ये नहीं पता कि सुख तुम्हारे अंत स्थल में विराजमान
- 42:46है, गरजा घरों में चर्चा में सुख नहीं होता।
- 42:55मंदिरों में, मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों में सुख कहाँ, वह तो
- 43:03मूर्तियां पाओगी? निर्जीव चीजें होते हैं।
- 43:11तुम उनको अपनी कल्पना से जीवंत कर देते हो।
- 43:15यह कल्पना है जड़ मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा कर देना यह
- 43:22तुम्हारी कल्पना है जड़ कागजों के ग्रंथ साहब में।
- 43:31प्राण प्रतिष्ठा कर देना। यह तुम्हारी मूर्खता है क्योंकि
- 43:37जीवंत चीजों का कुछ लक्षण होता है।
- 43:44अब यह खंड हर जीवंत है। मेरे होने के कारण मैं हूँ इस समय
- 43:50बैठा हुआ तो यह जीवंत है और मैं निकल जाऊंगा तो यह जड़ हो जाएगा,
- 44:07लेकिन तुम तो मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा करते हो।
- 44:09तुम तो कागजों में प्राण प्रतिष्ठा कर देते हो।
- 44:15तुम तो कागजों के पन्नों को पड़ने के बजाय अमल में लाने के बजाय
- 44:21उनके भार को ढोना शुरू कर देते हो।
- 44:29तुम तो उनके भार को सिर के ऊपर रखना शुरू कर देते हो।
- 44:33चूक हो गए, चूक हो गई क्या? चूक हो गई?
- 44:40जब पूजनीय तो हैं, सदा से रहेगा, सदा तक रहेंगे।
- 44:48लेकिन इसको ढो क्यों रहे हो? इसके भीतर लिखी हुई चीज़ को तुमने
- 44:57कभी हृदय में उतारा नहीं, तुम इसका पाठ कर।
- 45:05और वही तो बाबा कहते हैं इक दू जीव हो लक्वे लक भवे लक लक गेड़ा
- 45:14आँखें एक नाम जगदीश तुम लाख बारिश की पन्नों को पढ़ दो मेरे पास।
- 45:26बहुत से लोग आ जाते है बाबू आप जपजी साहब कितनी देर में कर देते
- 45:30हो? मैंने कहा मैं तो एक अक्षर पर भाई
- 45:35जब भी हो सकता है कि सारी उम्र ही बोलता रहूँ हैं।
- 45:39हाँ क्या हुआ? हम तो बाबा 28 मिनट में पूरी जपजी
- 45:47साहब पढ़ देते है मैंने का पुत्र वो जपजी साहब नहीं होता वो
- 45:54रिटेफिकेशन होता है वो तुम्हारी न्यूरोनिटी में घुसे गए है शब्द।
- 46:05मज़ा तब आये अगर तुम हृदय के भीतर उतारो, उनको सूर्यदास की कहानी पर
- 46:11याद आ जाती है। बाल रूप में भगवान कृष्ण सूर्यदास
- 46:17को छेड़ते हैं, कभी उसकी चुटिया खींच ली।
- 46:23सूर्यदास की लंबी चोटियां थीं कब इसके हाथों को हिला दिया अंदाजा
- 46:33कभी उसको डाले हुए कपड़ों को छेड़ दिया, खींच दिया तो पकड़ने की
- 46:39चेष्टा करते, लेकिन दिखता नहीं। और कभी हाथ में आ जाते काना तो
- 46:51काना हाथ छुड़ा के भाग जाते थक गए।
- 47:02सूरदास कहने लगे प्रिय कान्हा बाहा छुडाये जाते हो नहीं रे पहले
- 47:12जान के मैं बूढ़ा हो गया हूँ अंधा हूँ दिखता नहीं, बाहा छुडाये जाते
- 47:20हो? निरबल जान के मो।
- 47:24हृदय से जो जाओ तो मर्द कहूँ, मैं तो मेरे हृदय से निकल के दिखाओ ना
- 47:37अरे नटखट क्या नटखट क्या करता है। हाथ को तुम छुड़ा लोगे, क्योंकि
- 47:45तुम होम इम्पोर्टेन्ट हो सर्वशक्तिमान, मैं लाचार व्यक्ति
- 47:52हूँ वृद्ध हूँ, अशक्त हूँ, मेरे में बल नहीं मेरे में चोर नहीं।
- 48:00मेरी आँखें भी तो नहीं हैं और आंख गयी जहान गया और तुम मुझे लुभाते
- 48:14हो, मुझे तुम्हारी मंद मंद मुस्कान बड़ी प्यारी लगती है।
- 48:21मैं तुम्हारी पद चाब से ही। पहचान लेता हूँ कि तुम आ गए कहाँ
- 48:31और मैं तुम्हें पकड़ने की कोशिश करता हूँ।
- 48:33तुम पकड़ में आ भी जाते हो, लेकिन फिर तुम बली हो बांह छुडाए जाते
- 48:41हो। निर्भबल जान के मोह ह्रदय से जो
- 48:47जावता मर्द का, काश तुमने गुरु ग्रंथ साहब को हरदा में उतारा
- 48:58होता है फिर कोई छीन के। तुमने हृदय भी नहीं उतारा, यही
- 49:07गलती खा गए, तुमने दोहराव किया, जीस नाम को बसाना चाहिए था अपने
- 49:13अंत स्थल में तुमने उस नाम को जीवों से वर्णित करना शुरू कर
- 49:19दिया यही कहते हैं। इस बत्तीसवीं पौड़ी में एक दो
- 49:25जीवों लाखों में लाखों में लाखों 20,00,001 नाम जगदीश लाखों बार
- 49:38तुम्हारी जीव इसका गुणगान करते। कोई फायदा नहीं वो कभी।
- 49:47उसका गुणगान तुम कर पाओगे जैसे जैसे नई रिसर्चेस होती चली जाती
- 49:56हैं, वैज्ञानिक की अकल ठिकाने आए जाते हैं उसकी सृष्टि में।
- 50:04ऐसा कुछ बड़ा है जो तुम सोच भी नहीं सकते।
- 50:14मैंने एनलाइटनमेंट का वीडियो बोला और आचार्य जी कहते हैं।
- 50:21देर इस ए नो एनलाइटनमेंट मैंने कहा, आपको नहीं होगी आपने थोड़ा
- 50:27सा व्याख्यान गलत कर दिया एनलाइटनमेंट तो होती है तो फिर
- 50:37रामकृष्णा भरमंस को मिर्गी का दौरा पड़ता था क्या?
- 50:41मैं जब दसवें शहरशरार में अपने प्राण को चढ़ा लेता हूँ तो आप
- 50:46मुझसे लाख प्रश्न पूछते जाओ मुझे तुम कितने ही ऊंचे चिल्लाओ ढोल
- 50:55नगड़े हो जाओ मैं अपनी मस्ती में आनंद में स्थिर बैठा रहूँ।
- 51:11समय समय पर अपने भीतर यह देखता रहना, कभी दिखावा करने की
- 51:20प्रवृत्ति ने जन्म तो नहीं ले लिया।
- 51:25अगर दिखावा करने की प्रवृत्ति ने जन्म ले लिया है जो कि सभी
- 51:29राजनीतिज्ञों में जन्म ले लिया है।
- 51:32आज मैं देख ट्रंप ने सबका छीन लिया माल।
- 51:43और अभी उसकी तृप्ति हुई नहीं और कभी इसकी तृप्ति नहीं होगी।
- 51:47अमेरिका की तृप्ति कभी नहीं होगी क्यों?
- 51:56क्योंकि यह वो खाली पात्र है जिसके नीचे से पैदा।
- 52:02पैंदा नहीं है, मोरा निकला हुआ है, ऊपर से जितना डालोगे, नीचे से
- 52:07निकल जाएगा अमेरिका ऐसा महान है पैंदा विहीन मटका तुम खा किसको
- 52:20महान बनोगे? इसके पैसे को नया लगवा लो, सबका
- 52:28लूट लो और लूटते चले जाते हो। कब से लूट रहे हो तुम अभी भी
- 52:37तुम्हें? यह महसूस होता है कि हमने महान
- 52:41होना है। इसका मतलब तुम अभी शूद्र हो, यह
- 52:50आभास कहाँ से आया? यह शुद्रता से आया कि हमने महान
- 52:56होना है। यह शुद्रता से आवाज आया।
- 53:02आई विल मेक अमेरिका ग्रेट अगेन तुम महान कब थे?
- 53:08तुम कभी भी महान नहीं हुए, तुम ऐसे ही दुनिया को लूटते रहे
- 53:13लड़ाते रहे और अपने अस्त्र शस्त्र विनाशक चीजों को बेचते रहे तुमने
- 53:19कभी? दुखी आदमी की जख्म के ऊपर मर्म
- 53:23लगाने की चेष्टा की। तुमने अच्छे भले आदमियों को जख्म
- 53:32देने की कवायद की है, इसलिए तुम दुखी ही रहोगे।
- 53:44आज भी दुखी हो आंधी काल से तुम दुखी हो और कल भी तुम दुखी रहोगे
- 53:53क्यों? क्योंकि तुम पैदाविहीन लूटा।
- 53:59इसमें चाहे तुम सोना पिघला पिघला के फटके जाओ, वह ठहरने वाला नहीं
- 54:08है, नीचे से मोरा है, इसके सोरा या खाली का खाली रहेगा डम डम डम।
- 54:28समय समय पर अपने भीतर उतर कर यह परीक्षण करते रहना, आत्म विनिग्रह
- 54:39निग्रह का मतलब देखना आत्म अवलोकन के कहीं दिखावा करने की।
- 54:47कोई प्रवृत्ति पैदा तो नहीं होगी अगर हो गई तो तुरंत सावधान अन्यथा
- 54:54हजारों वीडियो से रिलीज हो जाएंगी।
- 54:58सब कुछ लुटा के। होश में आए तो क्या हुआ, सब कुछ
- 55:14लुटा के होश में आए तो क्या हुआ? दिन में
- 55:37हुआ? सब कुछ लुटा के होश में आए तो
- 55:51क्या हुआ अब 10,000? कैसेट्स रिलीज कर दी।
- 56:00हजारों पुस्तकें रिलीज कर दी। अभी अक्ल नहीं आई।
- 56:08अब भी लोगों से उसके दुःख पूछते हैं और दुख का हल बताते हैं।
- 56:21मुझे बड़ी हैरानियां होता। है एक राजा के राजदुलार बन बनु।
- 56:36फिरते मारे मारे इक राजा के राजदुलार बन बनु
- 57:04करमू, गति तरईना काहु के तार। चरईना, काहु के ता सबके कष्ट
- 57:26मिटाने वाले। कष्ट उठाते हैं, सबके कष्ट मिटाने
- 57:43वाला कष्ट उठाते हैं। जन जन के प्रिय राम लखन सी मन को
- 58:04जाते हैं। वेदना तेरे लेख किसी के समझ नाते
- 58:21हैं, सबके कष्ट मिटाने वाले हैं। कष्ट उठाते हैं।
- 58:34मैं जब इनके भीतर देखता। हूँ।
- 58:39घट घट के अंतश की जान भले बड़े के लिए तो इनसे ज्यादा दुखी किसी और
- 58:47हो पाता है। बड़ी हैरत होती है।
- 59:00मुझे यह खुद का दुख अभी हैरा नहीं किया।
- 59:04लोगों के दुख मिटाने के लिए बैठ गए।
- 59:07दीवान लगा के बस यही कहना चाहता हूँ।
- 59:15अमानित्वम दंभित्वम हिंसा शांति राजम आचार्य उपस्म शोचम सेरिम
- 59:21आत्मा विनकढ़ा उपदेश देने से पहले कहीं ये उपदेश?
- 59:31तुम्हारी आत्म विकृति से न आई हो, कहीं ऐसा तो नहीं है?
- 59:37दिखावा देने की प्रवृत्ति शुरू हो गई और तुमने बोलना शुरू कर दिया,
- 59:45यह तो बड़ी परिस्थिति यह रोंग दो। ला इलाज है एक बार प्रकट हो जाए
- 59:58तो यह रूप लगती नहीं है। काफिर छूटती नहीं है काफिर मुँह
- 1:00:05को लगी हुई देखिए मैं आनंद से। रसा लीन रहता शब्द इधर उधर हो जाए
- 1:00:16तो क्षमा कर दिया करो मस्ती के आलम में कदम लड़खड़ाते हुए इधर
- 1:00:26उधर पढ़ जाया करते है ततिक्षण। मैं समझ जाता हूँ वो आनंद मुझे
- 1:00:37अपनी तरफ़ खींचता है और मैं तुमसे मुखातिब होना चाहता हूँ।
- 1:00:43यह द्वन्द ही मुझे लड़खड़ाहट दे देता है।
- 1:00:51वह सब का कष्ट मिटाने वाला मुझे खींचता है अपनी तरफ और तुम्हारे
- 1:00:58लंबे चेहरे दुखद चेहरे मुझे तुम्हारी तरफ खींचते हैं इन
- 1:01:05दुविधा में तुम्हारे दुखों को आहरण करने की।
- 1:01:10इस सब प्रवृत्ति के कारण मैं कभी कभी अक्षरों से चूक जाया करता
- 1:01:14हूँ, सबके कष्ट मिटाने वाला कष्ट उठाते हैं।
- 1:01:36जन जन के प्रिया राम लखनऊ सी वन को जाते हैं, एक दूजे बोला।
- 1:01:54लक व्हई लक विस लक लक गेड़ा अँखें एक नाम जगदीश सुमरण एक रोग है।
- 1:02:05यह कैंसरराइटिस का रोग है। इसको चीरा देना ही होगा अन्यथा
- 1:02:15इसके भीतर की बात सारी रात और दिन चस चस करती रहेंगी।
- 1:02:24इसको चीरा कौन दे पाएगा? कोई एक कृष्ण, कोई एक नानक, कोई
- 1:02:37एक कवि, कोई एक दादू, कोई एक पलटू, कोई एक मेरा कोई एक राग
- 1:02:49मिया। और तुम्हें क्या पता चलेगा?
- 1:02:57जब वह चीरा देगा ना तुम्हारी मवाद सारी बाहर निकल जाएगा।
- 1:03:05वह जो दुख देती थी। वह जो सारी रात चस चस करती थी,
- 1:03:11तुम्हें सोने नहीं देती थी तुम सें, सें सारी रात सोओगे यह चस चस
- 1:03:21तुम्हें जगाएगी नहीं उसे ही मैं आनंद कहता हूँ।
- 1:03:26सुकून की नींद सो जाओगे, तुम सारी रात इस चीरे को कोई गुर ही देगा।
- 1:03:35ज़रा देखना चीरा जीस से लगवा के आए क्या पीड़ा कम हुई।
- 1:03:43क्या आनंद की बुछार हुई? क्या उस सुकून को का झरना बरसा
- 1:03:49तुम ऐतरह पति पबड़या ते चिढ़िया हुई ए केस सुन गला आकाश की केटा
- 1:04:04आई रिस नानक नजर पाइए। कोड़ा कोड़ा ठीक देखिए ये चार
- 1:04:18शब्द बोलने में एक पूरी वीडियो रख गई।
- 1:04:24अब शेष इसका दूसरा बड़ा प्यारा है।
- 1:04:31तो फिर मैं अगली वीडियो में बोलेंगे, तो आज के वीडियो का सार
- 1:04:44मोरल रस रूप में जैसे ही तुम्हें दिखावा करने की प्रवृत्ति जन्म ली
- 1:04:52है। फौरन सतर्क हो जाना क्योंकि तुम
- 1:04:56दुखी होना शुरू हो गए और दिखावे की प्रवृत्ति जब अपने चरम पर
- 1:05:03पहुँच गई तो समझ लेना क्या अब रोग ला इलाज हो गया।
- 1:05:11इन ट्रम्पों का इन मोदी का दुख ला इलाज है तुम नहीं कर पाओगे इनकी
- 1:05:21वासनाएँ बहुत विशाल हैं। अब ये ला इलाज हो चूके हैं।
- 1:05:30मैं मरीजे इश्क हूँ, मेरी दवा पर्दे में करो, ये बता भी नहीं
- 1:05:37पाएंगे। हमें रुक गया।
- 1:05:43ये बड़ी विकट परिस्थिति है। कैसे कहेंगे कि हमने एपिस्टीन में
- 1:05:51ऐसा कुछ किया? कैसे कहेंगे?
- 1:05:55हमने हीरेन पांडा को मार दिया, कैसे कहेंगे तुलसी प्रजापति को
- 1:06:01सबूत मिटाने के लिए जस्टिस लोहा को न्याय न हो जाए।
- 1:06:08तुम समझ सकते हो इनकी पीड़ा को। मैं समझता हूँ इनकी तरफ़ देख कर
- 1:06:19झूठ तो मैं वैसे भी नहीं बोलता, मुझे बड़ा तरस आता है ये इलाज रोग
- 1:06:33से घर में दिखावे करने की प्रवृत्ति।
- 1:06:38अगर तुम में उपज गई है तो किसी अच्छे गुरु की शरण ले लेना।
- 1:06:44यह एक रोग है टेन्सराइटिस का गुरु इसको चिढ़ा दे देगा।
- 1:06:50और इसका लक्षण क्या है? तुम्हारा दुख दर्द यह दुखती हुई
- 1:06:57नस। कैंसराइटिस के भीतर का फूड़ा मवाद
- 1:07:06जब गुर निकाल देगा तो तुम से से सो के सारी जब तुम्हें तुम्हारे
- 1:07:17होने में आनंद आना शुरू हो जाए। तो समझ लो गुरु ने हमारी पीड़ा को
- 1:07:23भर लिया है। गुरु ने हमारे कैंसराइटिस की मवाद
- 1:07:28को बाहर निकाल दिया है। इसमें किसी दिखने वाले सर्जिकल।
- 1:07:44उजारों की जरूरत नहीं होती। यह तो गुरु अपने मुकाम पर यहीं
- 1:07:50बैठा भी कर सकता है। आपको इसमें कोई कट्टर नहीं चाहिए।
- 1:08:03इसमें कोई कैंची, सीज़र, कोई स्टिच न कुछ नहीं चाहिए।
- 1:08:09यह ऐसा रोग है यह गुरु बिना औजार के जो औजार तुम्हें दिखते नहीं
- 1:08:16अदृश्य हैं उनसे भी तुम्हें तुम्हारा रोग धारण कर लेगा, लेकिन
- 1:08:22लक्षण पहचान लेना। ऐसा न हो कि गुरु तुम्हें ऐसी
- 1:08:32खतरनाक चीज़ उमाइयां कर दें जिससे तुम और दुखी हो।
- 1:08:37राम राम करते रहो यह फोड़ा, यह फोड़े का मवाद।
- 1:08:47निकल जाएगा, नहीं निकलेगा यह बढ़ता ही जाएगा।
- 1:08:52मर्ज बढ़ता ही गया आजूं जू तबाह के तो पहली बात तो मैंने कही
- 1:08:59दिखावे की प्रवृत्ति को छोड़ देना।
- 1:09:03अगर ये शुरू हो गई तो सावधान। क्योंकि अगर ये बढ़नी शुरू हो गई
- 1:09:13तो यह रक्त बीज, राक्षस जैसा है या बढ़ता ही चला जाएगा।
- 1:09:19अनंतगुण। और दूसरा मैंने कहा यह कैंसराइटिस
- 1:09:30का फूड़ा किसी अच्छे सर्जन से इसका इलाज करा देना, फिर वह काट
- 1:09:40पिट देगा। मवाद को निकाल देगा अच्छे से?
- 1:09:43और उसके लक्षण क्या आएँगे, लक्षण आएँगे तुम आनंद से झूमोगे तुम
- 1:09:55गुनगुनाओगे गीत झोंगझों के नाचो आज।
- 1:10:13गांव खुशी के की। आज।
- 1:10:20किसी के हार हुई है। आज अज्ञान हार गया।
- 1:10:29आज। किसी की हार हुई है और किसी की
- 1:10:37जीत रे जीत कौन गया ज्ञान जीत गया।
- 1:10:46गाओ खुशी केगी झुमके नाचो आ जब जीरा भीतर से ऐसा करने लगे, जैसे
- 1:11:00बाथरूम में तुम गाने लग जाते हो, तुम ये नहीं देखते कि मैं मोहम्मद
- 1:11:05रफ़ी नहीं। लेकिन तुम कौन बनाती हो और बड़े
- 1:11:07प्रसन्न भी होते हो अरे मैं इतना अच्छा प्रत्येक व्यक्ति को ये
- 1:11:13भ्रम होता है नहीं, नहीं, मैं तो मैं नहीं कह रहा हूँ।
- 1:11:25बाथरूम सिंगर कहते हैं उन्हें। दखाव्य की प्रवृत्ति सावधान और
- 1:11:36अगर गहरी हो गई हो तो कोई गुरु न मिला हो, ऐसा आज पता चला हो तो
- 1:11:41कोई गुरु तलाश लेना जो चीरा। वह मवाद अच्छे से निकाल देगा और
- 1:11:48स्टिच कर देगा और ऊपर से बैंडिज कर देगा।
- 1:11:54और तुम चैन से सो गए आनंद की नींद सो गए तुम।
- 1:12:08जिसका तुमने कभी स्वाद नहीं सखा आनंद का पहली दफ़े तुम उस आनंद को
- 1:12:15पियोगे यह लक्षण है उसका। और यह स्वाद बिल्कुल अलग होगा
- 1:12:31क्योंकि इससे पहले तुमने कभी पिया नहीं, जैसे कोई पहली दफा शराब
- 1:12:37पीले है, शराब तो कड़ती होती है, यह तो बड़ा मीठा रस है।
- 1:12:51और फिर जब तुम इस रस को पी लोगे तो फिर तुम संसार में भटकोगे
- 1:12:57नहीं। अगर कहीं भटक भी गए गलती से तो
- 1:13:02फिर वापस फिर आ जाओगे वहीं पे। आखिर में छोटा सा प्रश्न 1 मिनट
- 1:13:12नीना आपने मुझे ठुकरा दिया, मैं यहाँ से आकड़ के किसी और गुरु की
- 1:13:20शरण में चले गए। लेकिन पाया कि हर पल आपकी क्या?
- 1:13:30अब आप मुझे अपना लोगे। नीना मैंने तुम्हें ठुकराया कब
- 1:13:40अगर मैंने तुम्हें ठुकरा दिया होता।
- 1:13:50तो तुम्हारा कुछ शेष न बचता अभी तुम हो इसका मतलब मैंने तुम्हें
- 1:13:58ठुकराया नहीं अगर ठुकरा दिया होता तो तुम्हारा नामो निशा मटकला
- 1:14:06होता। तुम हो तुम्हें ठुकराए और मेरे
- 1:14:12दरबार सदा खुला, देर आयत दुरस्तायत तुमने कोई हेम खेम किया
- 1:14:20होगा, पुत्र आगे से हेम खेम मत कर।
- 1:14:28मैं यहाँ तुम्हें आनंद सिखाने आया हूँ।
- 1:14:32शरारतों ने और अच्छा किया तुम किसी और गुरु के पास से भटक लिया
- 1:14:50सब ने अपने अपने जाल बिछा रखे हैं, किसी ने गुफाएं बना रखी हैं।
- 1:14:56किसी ने नाम दान की व्यवस्था बना रखी।
- 1:15:00ये झूठी शराबें हैं, इनका नशा चढ़ता ही नहीं उतरेगा क्या खाक
- 1:15:10बाबा तो कहते हैं कि ऐसा है? तो उतरता ही नहीं है।
- 1:15:14मैं कहता हूँ चढ़ता ही नहीं है तुम्हारा नस जिनने नसें जहाँ पे
- 1:15:20उत्तर जान पर भात नाम हमारी नाम का चढ़े रहे दिन रात तुमने कभी
- 1:15:25सुना ये लक्षण था बाबा ने नाम का लक्षण बताया है।
- 1:15:37तुम्हे कभी ऐसा लक्षण आया की तुम्हे कोई बुलाता रहे तुम्हे पता
- 1:15:42ही ना तुम कहाँ हो हम? ताल तलैया क्यों ढोल ताल।
- 1:16:19तलैया क्यों? दो र मन्नू मस्त हुआ, फिर क्यों?
- 1:16:29वो ल मनू मस्त हुआ फिर क्यों वो ल।
- 1:16:44हीरो पायो। गांठ।
- 1:16:49गठ आयो हो? वही शब्द है दिखावा मत करना, शुरू
- 1:16:56कर देना जीसको सच्चा हीरा मिल जाता है।
- 1:17:04उसको गांठ बांध के रख लिया करता है दिखावा नहीं करता हीरो पायो
- 1:17:14गांठ गठ आयो। बार बार बा को क्यों खोलें?
- 1:17:27बार बार बा को क्यों खोलें? मन मस्त हुआ।
- 1:17:37तो क्यों बोला? मन मस्त हुआ, फिर क्यों बोला?
- 1:17:53धन्यवाद?