Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Mar 25 - नवरात्रों में दुर्गा सप्तशती का पाठ कभी ना करें! सप्तशती पाठ करना परमात्मा का अपमान है!
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- 0:14प्रणाम बाबा जी नवरात्र आने के करीब हैं।
- 0:24ये दुर्गा सप्त सती यह क्या होता है आपने प्राणों के बारे में बहुत
- 0:34बोला। दुर्गा सप्त सती के बारे में कभी
- 0:38नहीं बोला। दुर्गा सप्तस्ती परमात्मा की
- 0:52तुहिन है चौकना मत परमात्मा की तुहिन है दुर्गा सप्तस्ती एक तरह
- 1:11से अगर मैं देखूं। गीता की नकल से बनाई गई गीता में
- 1:21700 शुल्क, सप्तस्थी में 700 शुल्क।
- 1:34दुर्गा सत्य स्त्री को उपर कर नरक में जाओ, बिल्कुल ठीक कहता हूँ
- 1:49नरक का मतलब दुख में जाओ के। यहाँ मेरे एक शिष्य दुर्गा सत्य
- 1:58स्त्री पढ़ते थे। नवरात्र में आलू, दही वगैरह का
- 2:11इस्तेमाल करना, अन्न त्याग कर देना, फल, फ्रूट खाले।
- 2:21और दुर्गा सप्तस्ती का पाठ करना 9 दिन बड़े भगत हैं, सभी माताओं के
- 2:31जाते हैं च्यंतपूर्णी ज्वालाजी। वहाँ सिर नभाते हैं, सरचार्ज और
- 2:49मेरे पास भी आ जाते हैं। जदा कदा जब तकलीफ होती तो मेरे
- 2:54पास आ जाते हैं। एक दो बार उनका मोटरसाइकिल गवाह
- 3:08गुम हो गया। अब तो वो दुनिया में नहीं है।
- 3:13शायद उनके पुत्र को पता हो, मेरे पास आए मोटरसाइकिल, मोटरसाइकिल तो
- 3:23मेरा भी कोई ले गया। तो मैं उससे कहता जो ले गया वो ले
- 3:38गया। बेचारे को जरूरत होगी नहीं नहीं,
- 3:42मेरे पास ही बाबा जी एक है और एनफील्ड है।
- 3:49और गरीब आदमी हूँ वैसे भरे पूरे खानदान से था, मैं बता देता हूँ
- 4:05वहाँ जा वहाँ खड़ा है, बांट लिया ये पुरी रोड पे मिल जायेगा या
- 4:11फोकरसा रोड पे मिल जायेगा जा ले जा के ले आता।
- 4:23कई बार तकलीफ हुई तो मेरे पास आ जाता।
- 4:30नवरात्रों में दुर्गा सत्य सी का पाठ करता।
- 4:36मैंने कहा तू ये मत बढ़ा कर। इससे तेरी मानसिकताएँ कुंठित हो
- 4:45जाएँगी एको सुमर्य नान का जो जल थल रे असम आय हिंदू जा काहे
- 4:55सुमर्य जो जब मैं तो मर जाए। दुर्गा सत्यस्ती परमात्मा को
- 5:03चिढ़ाती है, पैरेलल खड़ी की है पाखंडियों ने जिनका मैं नाम लेता
- 5:13हूँ लोभियों ने लालचियों ने। संस्कृति ये जानते हैं जैसी चाहे
- 5:26तोड़ भरोड के लिखते हैं। अब देखिए परमात्मा पांच चार
- 5:44दैत्यों को मारने के लिए आया था, इतना कमजोर है।
- 5:51और जैसे जैसे विज्ञान विकसित होगा, वैसे वैसे परमात्मा की
- 6:00डेफिनिशन विशाल होती है। आय तो मैं यहाँ बैठे रिमोट के
- 6:07द्वारा चंद्रमा बर। वायुयान उतार देते हैं, रॉकेट
- 6:13उतार देते हैं, मंगल तक पहुंचा देते हैं, दिशा बदल देते हैं।
- 6:22जीस परमात्मा को पांचचार राक्षसों को मारने के लिए अवतरित होना
- 6:29पड़े। वह परमात्मा की ज्यादा शक्तिशाली
- 6:33नहीं है। उस सर्वशक्तिमान की सर्वज्ञता को
- 6:41अल्पज्ञता में अल्पता में बदलने का काम करती है।
- 6:48दुर्गा शब्द से वह सर्वज्ञ है। वह सिर्फ शक्तिमान है लेकिन जब
- 6:57तुम इन तुच्छ किताबों को पढ़ोगे, वो तुम्हारे दिमाग में भूसा भर
- 7:01जाएगा। के राक्षसों को मारने के लिए
- 7:06परमात्मा अर्पित होता है खुद जब कोई भारी राक्षस आता है।
- 7:12शुंभ, निशुंभ और हिरण्य कश्यप को मारने के लिए परमात्मा अवतरित
- 7:23होता है। सब कहानियों घड़ी के परमात्मा
- 7:32इतना कम शक्तिशाली नहीं है। जिसका पार उरार खुश न हो, जिसका
- 7:41आदि अंत खुश न हो, उसको मापने के लिए तुम्हारे पास कोई पैमाना न
- 7:47हो, वह भला इन छोटे मोटे राक्षसों को मारने के लिए अवतरण होगा।
- 7:57परमात्मा की विराटता पर एक मजाक है दुर्गा शब्द से इसको मत बड़ा
- 8:03करो शब्दों का अर्थ करने वाले ये आचार्य।
- 8:13बहुत से गुमाव फिरा के आपको अर्थ बता देंगे, लेकिन सप्तस्ती का कोई
- 8:20अर्थ नहीं होता। यह मात्र इनके भीतर।
- 8:28वोकबुलरी कितनी है यह दर्शाती और कुछ नहीं सत्य का न इन्हें पता है
- 8:36न किसी को पता है। ये लोग कह देते हैं पापा।
- 8:46क्या आपने भी नहीं जाना क्या कृष्ण ने भी नहीं जाना?
- 8:50कबीर ने भी नहीं जाना जाना है। बिल्कुल जाना है कबीर ने, लेकिन
- 9:02कबीर कहते हैं वह शास्त्रों में लिखा नहीं जाता।
- 9:06लिखा लिखी के है, नहीं देखा तेख की बात अनुभव में आती है जाना
- 9:16मैंने मैं स्टेम्प लगाता हूँ, जाना वह है और इससे बड़ी बात मैं
- 9:21आपसे नहीं कह सकता। अगर मेरी 1000 2000 5000 वीडियो
- 9:31जितना भी मैं बोल जाऊं उन सबका सिंस निकालना हो जूस।
- 9:41तो जूस यही है कि तुम सीख जाओ। एक बात मेरे से कि वह है वह है और
- 9:56मैंने देखा है अब इससे ज्यादा मैं आपको कुछ नहीं कह सकता।
- 10:04कृष्ण कहते हैं लक्षण देखो मैं भी कहता हूँ लक्षण देखो काहे एक बंदा
- 10:1112 साल तक एक कमरे में बैठा है, बाहर जाने का मन नहीं, कुछ खाने
- 10:20का मन नहीं। सब है।
- 10:21खाने को कुछ पहनने का मन नहीं है, कुछ वार्तालाप करने का मन नहीं
- 10:30है। हर कोई मुझसे मिलने आता है तो
- 10:34मेरी पहली प्रतिक्रिया होती है कि नहीं भला हुआ?
- 10:41मैं मस्त बैठा हूँ, क्या लेना है मेरा पुत्र कह देता है पापा बड़ी
- 10:51श्रद्धा से आए हैं, बड़ी दूर से आए हैं, कहीं किसी तरह मुझे मना
- 10:57लेता है। लेकिन सत्य में मैं बताऊँ पांडाल
- 11:07लगाने की बात तो छोड़ दो, मुझे लोग कह देते हैं आप शिष्य नहीं
- 11:10बनाते, शिष्य तो गुरु के ऊपर। गुरु अहंकार के कारण शिष्य बनाता
- 11:22है। ये तुम्हें पता है जिसके जीतने
- 11:27शिष्य होंगे, जिसके जीतने फॉलोअर्स होंगे, वह उतना ही
- 11:31अहंकारी होगा। झूठ का क्या है?
- 11:35मीडिया के पांच 400 लोग इकट्ठे कर लो, जितनी चाहे इकट्ठे कर लो आप
- 11:41फॉलोअर्स मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी गद्दी निशी हो जा के तुच्छ
- 11:53बातें हैं। यह साइकोलॉजिकल परिणाम है।
- 12:00लेकिन जहाँ तक बात है, मैं मन की बात नहीं करता, मैं बात करता हूँ
- 12:05विराट पढ़ने वाली दुर्गा सप्तशती पढ़ेंगे, मैं नहीं रोकता।
- 12:17मेरे बोलने के बावजूद गरुड़ भण का पाठ चल रहा है।
- 12:23और कितनी भी बोलते जाएं क्योंकि ब्राह्मण आश्वस्त हैं कि हजारों
- 12:32हजारों सालों से इनके अचेतन मन में जो धकेल दिया गया है वो इतनी
- 12:38जल्दी नहीं टूट पाएगा। वह टूटते टूटते, टूटते टूटते पता
- 12:46नहीं कितनी पीढ़ियों तक आ जाएगा। हज़ारों वर्षों तक शुद्र प्रणाम
- 12:55रहेगा। स्त्रियाँ गुलाम रे।
- 12:58और इसका परिणाम आज भी स्त्रियाँ भोग रही है।
- 13:01स्त्रियाँ अपने आपको उच्च नहीं मानती।
- 13:06प्राकृतिक रूप से तो थोड़ी कमजोर बनाई है।
- 13:09स्त्री है तो सत्य है, लेकिन भावनात्मक रूप से।
- 13:18स्त्री यह मानती नहीं कि मैं श्रेष्ठ हूँ, ये सब इन पंडितों का
- 13:24प्रणव है। दुर्गा शब्द से अगर सीखना हो तो
- 13:36इतनी ही बात सीख लेना के स्त्री भी।
- 13:43अवतरित हो सकती है। स्त्री भी शक्तिशाली हो सकती है।
- 13:51बस इतनी सी बात समझ लेना बाकी के भीतर कूड़ा है भर मत लेना।
- 14:02अस्तित्व को सम्मान दिया गया। उसको अवतार के रूप में उनके
- 14:08खिलाफ़ है। शक्ति संपन्न दिखाकर बड़े बड़े
- 14:17राक्षियों का वध कर देते हैं। अगर सीख लेनी हो तो यही सीख लेना।
- 14:25स्त्री के लिए पोजिटिविटी यही है सीखने वाली दो समान्यताओं में
- 14:31मतोले जाना इन कहानियों में कुछ नहीं रखा, न कोई शुभ हुआ, न कोई
- 14:38निशुभ हुआ। और शुभ अनिशुम तो आज भी हैं
- 14:44नमस्ते क्या शुभ अनिशुम सदा ही रहते हैं।
- 14:54इनकी कभी कमी नहीं है क्या कसूरता बेचारे शुभ बनिश्चम को उससे
- 15:01ज़्यादा बड़ा कसूर तो पेट्रर का था।
- 15:04मसोलने का था चंगेस का था तब तो परमात्मा अवतार तो क्या है?
- 15:15तुम्हें इतना सा बता दूँ जब कोई कहर करता है, परमात्मा का नियम ही
- 15:22उसे गिरा देता है, मार देता है। परमात्मा ने ये जो नियम बनाया है
- 15:31कार्यकरण का और फल का यह नीम ही उसको गिरा देता है।
- 15:40उसको विशेषज्ञ नहीं आना पड़ता इसलिए वह निश्चिंत होके बैठा है।
- 15:49न्याय प्रणाली ही उसको दंड दे देगी।
- 15:53और हेटलर को किसने दंड दिया? जब वो बढ़ गई, उसकी अत्याचार की
- 16:01सीमाएं तो सारे देश व्याकुल हो गए।
- 16:06क्योंकि मनुष्य की वासनाओं की कोई सेवा नहीं, मनुष्य चक्रवर्ती
- 16:14सम्राट बन जाये तो वह मंगल को जीतने की कोशिश करेगा।
- 16:22आज ऐसा ही हुआ है। आज तो बल्कि गलत हुआ है।
- 16:28धरती को जीता नहीं गया। मंगल को जीतने की चेष्टा हो रही
- 16:33है, वास्तव का दुष्परिणाम है। इतना कमजोर नहीं है परमाद में वह
- 16:48विराट, वह विराट जिसकी विराट संरचना में।
- 17:00पृथ्वी से भी बड़े एस्ट्रॉयड आवारा घूमते फिरते हैं और
- 17:07तुम्हारी औकात उसके सामने ये कि तुम उसका ए कजर्रा रेत का, उस
- 17:13एस्ट्रॉयड का, उस आवारा घूमते हुए एस्ट्रॉयड के।
- 17:19रेत का एक ज़रा तक निर्मित नहीं कर सकते ये तुम्हारी औकात है शिक
- 17:30शिकायत तुम करते हो उस विराट से। इच्छा करते हो, द्वेष करते हो,
- 17:47नफरत पालते हो उस विराट के पति तुम्हें पता नहीं अगर वो 2 मिनट
- 17:56के लिए तुम्हारी वायु बंद कर दे, ऑक्सीजन और कोरोना में हुआ।
- 18:03तो तुम कहाँ रहोगे? सूरज ठंडा हो जाये, तुम कितने
- 18:12घंटे से होता रहोगे? सारी सृष्ट बस सूरज ठंडा हुआ केजी
- 18:22बन गया। उसकी विराटता शलाघा को अति क्षीण
- 18:41कर देती है दुर्गा शब्द इसलिए ऐसे ग्रंथों का।
- 18:52दुष्ट लोग तो रचना करेंगे, लेकिन समझदार व्यक्ति इनको पढ़ेंगे।
- 19:07क्योंकि तुम्हारी समझ भी वैसी ही हो जाएगी कि परमात्मा ऐसा होता
- 19:11है। बस हाथ में छोटा सा वर्षा ले
- 19:16लिया, त्रिशूल ले लिया, 468 हाथ दिखा दिए और उन सब में शस्त्र
- 19:24पकड़ा दिए। और फिर वो शुंभ निशुभ को मारेगी
- 19:29और जय जयकार हो जाएगा? दो दो ही वजह की चारो तरफ बस इतनी
- 19:35सी व्याख्या करते हो उस विराट की तुमने उसके व्रत तत्व को संकीर्ण
- 19:43कर दिया। सच पूछो तो परमात्मा की विरहदता
- 19:48को चिढ़ाने का काम करती है दुर्गा शब्दस्त ये कहानी तुमने बना तो
- 19:55ली, लेकिन ये पुराण, ये भागवत पुराण वगैरह सब तुम्हारी चला की
- 20:02हैं। लूटने के ढंग है इस शिविरों का
- 20:10आयोजन ये ऑनलाइन क्लासेज और कुछ भी नहीं।
- 20:20क्योंकि तुमने मूल तत्व को जाना नहीं।
- 20:23व्हाटस आवर बेसिक नीड सर लोग मुझे कहते थे मुझे दो 3 दिन पहले सर का
- 20:32फ़ोन आया बाबा आप हमारे विरुद्ध जैसा क्यों?
- 20:39मैंने कहा मैं तो तुम्हारे वृद्ध नहीं बोला।
- 20:48मैं तो यह कहता हूँ कि सर लोग तुम्हें जहाँ पहुंचाएंगे और वहाँ
- 20:51जो तुम्हें मिलेगा उससे जो तुम कमाओगे उससे तुम्हारी जरूरत पूरी
- 20:58नहीं होगी। धन मिल जाएगा, कोठी कार बंगला मिल
- 21:03जाएगा। मान सम्मान मिल जाएगा, लोग डरेंगे
- 21:07तुमसे तुम्हारी छाती चौड़ी होगी आकड़ के बाहर जाओगे तुम न्यायाधीश
- 21:13के गुस्से पे और तुम्हें पता नहीं है।
- 21:22कि तुम कैसी कैसे सर्कमस्टैंसेस में से निकल कर आए।
- 21:29मैंने बड़े केस देखे ऐसे एक मेरे ही शिष्य के पत्नी गर्भवती हो के।
- 21:49किस तरह पता लगा? ये लड़की है और दुर्गा सप्तशती को
- 21:58पढ़ने वाले लोगों को नारी शक्ति को गर्भ में ही काटने वाले लोगों
- 22:06को। यह नारी शक्ति के साथ उपहार सुनी
- 22:11है कि तुम सिर्फ 1 दिन नौ कन्याओं को कहला दो और फिर सारा साल तुम
- 22:19उनको गर्भ में ही काट दो, यह शक्ति का अपमान है।
- 22:28या उसकी शलागाह तुम्हारी मानसिकता विकृत हो गई है और मानसिकता विकृत
- 22:42की है। इन पंडितों ने कुंठित पंडितों ने
- 22:47नहीं नहीं आपसे पहली। पहले भी बहुत बार यह कहानी बताई
- 22:51है। मेरे बड़े भाई डॉ।
- 22:56रमेश शर्मा इंडियाना स्टेट में थे, हार्ट के स्पेशलिस्ट थे।
- 23:11मुझे बताया करते हंस हंस के बताया करते कभी कभी के भाई वहाँ गर्भ को
- 23:20चेक कराने के लिए जब स्त्रियां आती हैं, पुरुष आती हैं कपल्स तो
- 23:25वहाँ भारतीय जोड़े भी होते हैं। और अंग्रेज जोड़े हुए होते हैं तो
- 23:35हम चेक करने के बाद जब अंग्रेजों के लिख देते हैं बेबी बॉय तो उनका
- 23:45मुँह फूल जाता है। जो रह जाता है, गमगीन हो जाते हैं
- 23:54और अगर इंडियंस के लिख देते हैं वे विवाह तो मिठाई बांटने लग जाते
- 23:59हैं। ये मूलनवासियों के लिख देते हैं
- 24:05अमेरिकन। बेबी गर्ल तो मिठाई बांटने लग
- 24:09जाते हैं यानी हमें तो मिठाई मिलनी ही मिली, लेकिन फर्क है
- 24:20अंग्रेज नहीं चाहता के लड़का हो और भारत से गया हुआ।
- 24:30कपल नहीं चाहता कोई लड़की? वही दो मान्यताएँ साथ चली गईं।
- 24:35देश बदल लिया। 20 30,000 किलोमीटर आगे निकल गए।
- 24:40जहाज की यात्रा कर ली, लेकिन मान्यताएँ साथ ली।
- 24:43ये सड़ी गली मान्यताएँ साथ दें। तुम वहाँ जाकर भी सप्त स्त्री का
- 24:53पाठ करते हो, वहाँ जाकर भी भाग्य परना पड़ते हो।
- 24:58और तो और छोड़ो ये जो अभिनेत्री टाइप।
- 25:06जो बन नहीं सकी बेचारे पुराण पटर ने शुरू कर दिए।
- 25:14ये बाहर जाकर भी गंध फेरना शुरू कर दिया।
- 25:16इन्होंने इनको अक्सर ही देखा होगा।
- 25:26कहाँ चली वहाँ, चली क्यों चली भागवत पुराण के कथु के जैसे पता
- 25:32नहीं कोई इन्वेंशन कर ली कोई चंद्रयान फ़ोर निकाल नहीं चली न
- 25:40सके पिता। क्यों व्यक्ति अपनी मान्यताओं को
- 25:51अपनी वासना को नहीं जीत पाया? घड़ी तक उसे एक विशिष्ट प्राण का
- 26:00चाहिए है। कहते हैं वाह वाह वासली कराओ।
- 26:09अरे बस कर देता हूँ कई बात नहीं। दुर्गा शक्ति परमात्मा की विराटता
- 26:22को क्षीणता में, सुद्रता में बदलती है।
- 26:28दुर्गा सत्य सी को लिखने वालों को ये नहीं पता कि उसकी विराटता
- 26:31कितनी है। उनको पता ही नहीं है।
- 26:38इसलिए जब उसका पता ही नहीं है तो खिलारो गंध जितना खिला सकते हो।
- 26:47अभी कल ही मुझे कोई व्यक्ति बता रहा था सर व्यक्ति है एक वो कहते
- 26:53देखो उसका कोई पता तो है नहीं। किसी को बात बड़ी मजेदार है और ना
- 27:01ही पता लग सकता है। संसार में कोई व्यक्ति नहीं है जो
- 27:06ये। छाती ठोक के कह सके हाँ परमात्मा
- 27:09है इसे पता नहीं कितनी? देर पहले कबीर कह गए कितनी देर
- 27:15पहले नानक कह गए कितनी देर पहले कृष्ण कह गए और आज भी है छाती ठोक
- 27:22के कहते हैं कि वो है, हमने देखा है।
- 27:28लेकिन वो ही तुम्हारी भी गली सड़ी मान्यता होगी।
- 27:32तुम कहोगे फिर चमत्कार दिखाओ, क्या चमत्कार दिखाने से परमात्मा
- 27:38का होना सिद्ध हो जाएगा? ये तुम्हारी?
- 27:50छोटी छोटी मान्यता है कि छोटे मोटे संस्कृत के या हिंदी के
- 28:01विद्वान पढ़े लिखे शास्त्री को परमात्मा बना देती है।
- 28:06लाखों रूपों का इकट्ठा हो जाता है।
- 28:08झूम। क्यों?
- 28:13क्योंकि वो आपको थोड़ी सी बात बता देता है।
- 28:20मेरे पास एक केस आया। मेरे पास करीब करीब मेरे जानकारों
- 28:27के केस ही होते हैं। क्योंकि मैं अपना दायरा बढ़ाता
- 28:32नहीं, ना मुझे प्रसिद्धि चाहिए, ना मुझे धन की कामना है, जरूरत के
- 28:44लिए मुझे मिल जाता है। उससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए।
- 28:53वस्त्र मिल जाता है, जाना आना मैंने कहीं नहीं।
- 29:01शरीर बीमार हो जाता है, डॉक्टर्स गारा आके इलाज कर देते हैं।
- 29:08यही कुछ होता है तो उस स्त्री का गर्भ गिर जाता था दो तीन बार गर्भ
- 29:23गिर गया। अब यहाँ तो बड़ी मान्यता है किसी
- 29:29के पास जाओ, किसी ने कुछ कर रखा है।
- 29:3320 50,000 लगेंगे। इलाज हो जाएगा।
- 29:4020 50,000 भी लगा देते हैं, लेकिन इलाज फिर भी नहीं होता।
- 29:47संयोग से वह व्यक्ति मेरे सान्निध्य में थे।
- 29:54उसने अपनी व्यथा बताई। वो आज व्यक्ति जीवत है और सिर्फ
- 30:06एक उदाहरण के लिए आपको बातें इसलिए नहीं कि आप मेरा सम्मान
- 30:13करो। सम्मान तो जब तुम यहाँ आओगे ना,
- 30:18आपको दरवाजे पर ही रोक लिया जाएगा कहाँ चले वो जनाब, आपको बुलाया
- 30:28जाएगा तो आपका स्वागत है अगर आप वैसे ही आ गए।
- 30:33तो फिर गजड़ बहा मंडी के दर्शन करना बड़ी सुन्दर मंडी है।
- 30:42स्वच्छ साफ संतो की नगरी है। मैंने उसे कहा, पुत्र बात किया है
- 31:00कि किसी स्त्री ने गर्व को घराने की एक प्रक्रिया दी है, मैं तो
- 31:10लुवाई तो है नहीं। मैं तो कुछ देख के बोला तो बाबा
- 31:21ये तो दो बार तीन बार हो गया। मैंने कहा ठीक तू ऐसा कर देख तेरी
- 31:28धरमपत्नी। जहाँ पढ़ाती है मुझे ये भी नहीं
- 31:36पता वो कहाँ पढ़ाती है। बहुत दूर है यहाँ से उसके स्टाफ
- 31:44में कोई छोटा सा गांव है। थोड़े से टीचर हैं, पान सात उसमें
- 31:53एक इस नाम की औरत है। ज़रा पूछना ये सांप सबका मुस्का
- 31:59है। ये छोटे मोटे तंत्र टूने वगैरह
- 32:03सीख लेते हैं। बुरा तो किसी का भी कर दो, जातीय
- 32:08व्यक्ति के पीठ में छुरा घोंप दो। वह बेचारा अनभिज्ञ चल रहा है।
- 32:14सड़क पर उसे कुछ पता भी नहीं मारना बड़ा आसान है।
- 32:23यही बुद्ध ने कहा जब तीर मारा देवव्रत ने फड़फड़ा के गिर गया
- 32:29पंछी तो उसने उठाया सहलाया, मर्म पट्टी की, लेकिन वह मर गया तो
- 32:38बुद्ध ने देवव्रत से कहा कि तुमने इसे क्यों मारा?
- 32:43कहता मैंने तो नहीं मारा, मैं तो तीरंदाजी कर रहा था, संयोग से लग
- 32:47गया पर अगर मारा भी है तो क्या है?
- 32:56ये होते ही मारने के लिए बुध ने उसको सहलाया।
- 33:04बुध कहती है अच्छा फिर इसमें जी पंडाल।
- 33:15मुझसे भी कह देते है मेरे पुत्र की जिसने हत्या की वो मुझे कह
- 33:22देते है मुझे माफ़ कर दो, मैंने कहा मैंने दंड कब दिया ये तो बता
- 33:27दो, मैंने दंड दिया नहीं, मैंने कुछ कहा नहीं।
- 33:33फिर माफ़ क्या करते हो माफ़? तो वो विक्की करता है जो दंड देता
- 33:38है नहीं, नहीं दंड नहीं दिया तो मैं कुछ कहा नहीं, बस मैं जानता
- 33:44कि तुमने ये किया, तुमने वहाँ से फ़ोन कर दिया, उसको डरा दिया।
- 33:50सब बातें मुझे पता हैं। अगर वो चला गया तो उसकी आत्मा तो
- 33:55है सब उसने मुझे बता दिया क्या हुआ, क्यों हुआ, किस करके हुआ और
- 34:06मैंने उसी पुत्र को फिर यहाँ पर गर्व में उतार दिया।
- 34:14यह छोटी मोटी। छोटी मोटी उस विराट की सृष्टि में
- 34:20छोटी मोटी क्रियाएं हैं। बड़ी आसानी से सीखी जा सकती हैं।
- 34:28मैंने उस काल के दौरान जो शमशान साधना करता था उस काल के दौरान इन
- 34:33सभी चीजों को सीखा। और तीन वर्ष से कम वक्त में मैंने
- 34:38सीख लिया और मैं समझता हूँ कि यह वक्त बेकार गया।
- 34:42बस दो चार काम हुए जो काम के हुए बाकी वक्त बेकार गया।
- 34:51जादूगरी में, दिखावे बाजी में। मान सम्मान में जय जयकार में बीते
- 35:00और कुछ नहीं मिला तो बुद्ध कहते अब जीवत कर कहते जीवत तो मैं नहीं
- 35:10कर सकता, फिर मारा क्यों था तो मैं उनसे कह देता हूँ देखो।
- 35:17तुम रोज़ आ जाते हो, रोज़ कह देता हूँ, मुझे तो बच्चा वापस कर दो,
- 35:28बच्चा कहाँ से वापस करें? उसमें तो जान नहीं डाली जा सकती,
- 35:34फिर मारा क्यों? हम ऐसे मूर्ख हैं।
- 35:48कुछ दिन पहले मुझसे एक आदमी ने प्रश्न पूछ लिया, बाबा आप बलिदानी
- 35:52आज पैदा क्यों नहीं होते, ये देशभक्त आज क्यों नहीं पैदा होते?
- 35:56आज देशद्रोही का है। ये थोड़े से पैसे लिए, पार्टी
- 36:00बदली, ये क्यों हो रहा है? ऐसा आज गाँधी क्यों नहीं पैदा
- 36:08होते? मैंने कहा, गाँधी ने जान लिया कि
- 36:14अगर मैं कुछ करूँगा इन लोगों के लिए।
- 36:17ये मुझे गोली मार देंगे, फिर कोई क्यों करेगा?
- 36:33जब पता है हसर क्या होगा? आज ईमानदार क्यों नहीं रहा?
- 36:40क्योंकि कीमत अब भ्रष्टाचारियों की बढ़ती है।
- 36:43इमानदारों के तो प्रत्येक व्यक्ति वातावरण तो देखता है ना आज बाबाओं
- 36:54की कीमत है तो बाबा बन जाओ और राजनीतिज्ञों की कीमत है तो
- 37:01राजनीतिक हो जाओ। जिसकी कीमत है दुनिया, उधर दौड़
- 37:06पड़ती है। सीधी सी बात है जब तुम गोडसे की
- 37:13पूजा करोगे तो गाँधी की उम्मीद मत करो, फिर गोडसे से कहो।
- 37:22तुम वो काम करो नहीं किया और गोडसे के बस की ये बात नहीं।
- 37:29गोडसे के गुरु के बस की ये बात नहीं, वो भी चरण चमक बन गया।
- 37:34बड़ा आसान होता है चरण चमक बंजन। पैसे भी मिलते हैं, सुरक्षा भी
- 37:45मिलती है। कोई उपद्रव भी नहीं रहता और
- 37:49सेफ्टी ही तो चाहिए। आदमी को कुछ व्यक्ति आज भी कहते
- 37:58हैं धर्म का एक पैर। लेकिन आज मैं ऐसे पत्रकारों की
- 38:05ऐसे व्यक्तियों की तारीफ करूँगा जो महाबलियों के विरोध में छाती
- 38:12तान के खड़े हैं। गोली मार दो बिकेंगे तुम्हें कोई
- 38:20करेन्सी नहीं बनी। जो हमें खरीद ले और इन वक्ताओं को
- 38:26मैं चाहे बड़ा हूँ और मैं चाहे छोटा हूँ, ओह दा बड़ा है छोटा,
- 38:33लेकिन मैं इनको नमन करता हूँ नाम क्या लूँ नाम तुम्हें पता है?
- 38:43कुछ गिने चिन्ह लोग हैं। बाकी दो चारण चुम्बक हैं चारण
- 38:52चुम्बकों का नाम तो पता ही नहीं कितने हैं।
- 38:55बहुत से जयचंद छपे पड़े होते हैं। और उनको पता नहीं है कि सिर का
- 39:04भार हमेशा प्रणों पे आता है। बस ये बात वो नहीं जानते जब गोड
- 39:14से बात की पूजा होगी। तो गाँधी पैदा होना बंद हो
- 39:18जायेंगे, ये बात समझ लेना और गाँधी पैदा होना बंद हो गया।
- 39:25फिर जो रह जायेंगे वो गोट से फिर गोट से से कहो तुम करो वो कर ना
- 39:31पाएंगे उनके बस के बाद। ये है सारा विधान तुम्हें बता
- 39:37दिया मैंने तो वो तो बोले अगर तुम जीवन नहीं दे सकते, तुमने मारा
- 39:47क्यों? लेकिन इन लोगों के पास कोई जवाब
- 39:51नहीं है। ये तो बस हाथ उठाएंगे चकता भी
- 40:02चकता भी चकता लेकिन क्वेश्चन जानते हैं कोई चक चूका नहीं जाता
- 40:13यहाँ मैं तो हूँ। नैनुम छेदन तीशा त्रावणी नैनुम
- 40:19दीपा मैं चैनम के लिए दिन तपुन ऐशो स्याति मारू ता आज आचार्य भी
- 40:30हैं तो कैसे? अरे थोड़ा सा हस पैदा करो, बरना
- 40:35एक बार होता है। हैं, रोज़ रोज़ मरोगे।
- 40:42परमात्मा ने प्रतिभिज्ञा दी है, सोच समझ सकते हो, विक्केब्ल्री भी
- 40:47बढ़िया है और त्याग भी कर दिया है तो थोड़ा सा हस भी पैदा कर लो।
- 40:59बस इसी की कमी है अन्यथा और कोई कमी नहीं है।
- 41:07एक तरफ तो पूरे हो जाओ, भीतर की बात तो तुम बता न सकोगे क्योंकि
- 41:12गए नहीं। मरना तो वहाँ भी पड़ता है लेकिन
- 41:17अमूल चूल मरना पड़ता है वहाँ तो ख़ाक भी न बचे ऐसा हो जाता है
- 41:25लेकिन यहाँ तो थोड़े साहस की जरूरत है संसार में वो ही पैदा कर
- 41:31लो बाकी सब है तुम्हारे पास। दुर्गा सप्तस्ती मैंने उससे कहा
- 41:46तू मत ये आलू दही खाया कर तू बढ़िया परोठे छखा कर हष्ट पुष्ट
- 41:55शरीर सुंदर काया ऊँचा लंबा शरीर। वरीष्ठ मैंने कहा तू छोड़ दे क्या
- 42:08पड़ा है इसमें कुछ नहीं लेकिन नहीं वो अंत तो मैंने उसे कहा तू
- 42:23सुसाइड कर लेगा। क्योंकि अक्सर दुर्गा सप्तस्थी
- 42:28पड़ने वाले लोग दूसरे को तो मार नहीं पाते, इतना बल नहीं आता
- 42:34उनमें फिर वो माता को ही कहते हैं कि तू ही मार और माता किस किस को
- 42:43मारेगी आँखें दो बच्चे लड़ रहे थे।
- 42:47एक कायर था, एक साहसी था, उस साहसी ने कायर को खूब पीटा
- 42:55हुरियां पकड़ती हैं जो कायर था वो दुर्गा सत्य से बढ़ने वाला होगा।
- 43:06दुर्गा माही करेगी जो कुछ करेगी तो भागता हुआ देखा उसने पीछे कोई
- 43:21नहीं अच्छे से भाग सकता हूँ मैं पहले देख लिया उसने भाग सकता हूँ
- 43:26मैं क्योंकि ये पीछे भागेगा। तो कहता तुझे आज रात को 12:00 बजे
- 43:42देवी माता पटका, पटका के मारेगी कह के बाद बस तुम्हारा बदला ऐसे
- 43:51ही होता है। रात को 12:00 बजे तुझे दुर्गा
- 43:55माता पटका पटका के मारेगी होता वाता कुछ नहीं न दुर्गा माता आती
- 44:03है, न पटका पटका के मारती है मैंने तुम्हें समझाया ये सब।
- 44:11ऊर्जा के स्वरूप हैं जैसे तुम्हारे घर के विद्युत विद्युत
- 44:17से काम लेना होता है, पंखा चलवा लो, हीटर चला लो, मोटर चला लो,
- 44:23एसी चला लो, बल्ब जगा लो, बहुत से काम देती है ऊर्जा विद्युत।
- 44:34और तुम पूजा करने लग जाओ तो फिर बिजली की पूजा करने वाले को आम
- 44:43व्यक्ति क्या कहेगा? ही शुड बी ट्रीटेड मेंटली।
- 44:51सेकंड ट्रिप के पास ले जाओ दिखाओ कहाँ गड़बड़ाई मुझे तुम ऐसे ही
- 45:00लगते हो यू शुड बी ट्रीटेड मेंटली तुम्हे उपचार की जरूरत है।
- 45:12नवरात्री आ रही है जिसने पढ़ना है पढ़ो मेरे को रोकने को थोड़ी है
- 45:19मैं सत्य बताने को हूँ जिसने समझना है समझ लो नहीं समझना है तो
- 45:27आप मारिको। यू आर इंडिपेंडेंट परमात्मा ने
- 45:33प्रत्येक व्यक्ति को इकाई के रूप में स्वतंत्र बनाया।
- 45:42मेरी बातों को मानना भी मत। लेकिन मैं जो बोलता हूँ देख के
- 45:49बोलता हूँ ये बात समझ लेना न तो ये निंदा है, न ये आलोचना है।
- 46:02ये आलोचना हुए न यह सत्य है। यह सत्य के दर्शन का अनुभव है जो
- 46:14मैंने जैसा देखा मैं कहता आँखों देखी न किसी से सुना, न किसी से
- 46:22पूछा दुर्गा सत्य स्त्री मैंने आज तक कभी नहीं पढ़ी।
- 46:28लेकिन बस उसकी बातें कुछ लोग मुझे बता देते हैं।
- 46:33कुछ राक्षसों को मार दिया मुट्ठी भर राक्षसों को और उसको देवी माता
- 46:41ने और बड़ी मुश्किल से मारा कई दिन लग गए।
- 46:45तो क्या खाक वाली होगी? अरे दुर्गा माता से ज्यादा तो एटम
- 46:51बॉम्ब भी ज्यादा शक्तिशाली है। पलक झपकी भी न थी पूरा नागासा के
- 47:01हीरो शिवा बारूद बनकर उठ गया ओपेन हाय उम्र कहती हो गॉड हे शुब्सरूप
- 47:16हे कॉल स्वरूप तुझे नमन तेरी दुर्गा माँ का बाप क्या करे?
- 47:25इसलिए तो हिंदुस्तान साइंटिस्ट पैदा नहीं कर पाया, वहीं इन
- 47:36माताओं पिताओं में ही उलझा। आज चाइना तरक्की कर क्या अमेरिका
- 47:43ने एआई बनाया? चाइना ने सुपर एआई बना लिया।
- 47:47और आज नहीं कल चाइना अमेरिका को क्रॉस कर जाएगा बिल्कुल कर जाएगा
- 47:57क्योंकि मैं जानता हूँ उसकी वेश बड़ी शानदार अमेरिका में तो फिर
- 48:02भी वेश जो है इनकी है जहाँ धार्मिक लोग हैं।
- 48:08महाभारत की तरक्की नहीं होगी और अमेरिका में तो सभी धर्म के रूप
- 48:15और धर्म को छोड़ो। वहाँ तो काले गौरों की लड़ाई है,
- 48:19जहाँ वेद है, भगवान कृष्ण का वचन है।
- 48:31जहाँ भेद है, वहाँ विपन्नता है जहाँ मिलन है, योग है, वहाँ
- 48:42संपन्नता है, इसलिए हमारे हिंदुस्तान में योग की इतनी
- 48:48महत्ता थी, लेकिन हम? टेढ़े फूठे होने शुरू हो गए
- 48:53चक्रासन, शीर्षासन, सर्वंगासन मैं भी बहुत करता रहा हूँ।
- 48:57नेओली, वज्रोली ये सब क्रियाएं वगैरह सब कुछ किया हुआ है।
- 49:02बस्ती धोती नीती। क्या मुँह में पट्टिका डालकर भीतर
- 49:17ले जाओ और दूसरी बार निकाल दो? ये कोई समझदारी है?
- 49:34दुर्गा सप्तस्थी परमात्मा की विराटता पर एक क्रूर प्रहार है और
- 49:42ऐसे ही तुम विराट से हल्के हल्के हल्के होते होते इन क्षुद्रवतों
- 49:48पर आ गया। नकलची बंदर की तरह गीता का नकल कर
- 49:53दिया। 700 शलोक हैं।
- 49:56हम भी शब्दस्थी बना ले और फिर इसकी व्याख्या करने वाले आचार्य
- 50:02मिल गए। ओके समझ है जिसने यूपीएससी लांग
- 50:08ली। उसके लिए दुर्गा शब्दस्थ क्या है?
- 50:15शब्दों का अर्थ ही तो है इधर कमालो उधर कमालो शब्दों का क्या
- 50:20है? शब्दों से किसी को भी मूर्ख बनाया
- 50:26जा सकता है। भूख आज लगी है रोटी 2000 संताली
- 50:41में मिलेंगे तब तक तो मर जाएंगे भाई तन बदन से आज नंगे बारिश
- 50:51तूफानों को आज झेल रहे हैं। सिर्फ ये छत मिलेंगे 47 समय तब तक
- 51:00हम बचेंगे और तब तक ये वायदा करने वाले बचेंगे।
- 51:11प्रत्येक शरीर की अपनी ढलान होती है, ढलते ढलते ढलते ढलते चौंक गए।
- 51:18हाथ में छिड़ी आ जाएगी नहीं, ऐसा नहीं होगा।
- 51:34दुर्गा सप्तस्थी परमात्मा की विराटता के विपरीत शुद्रता की
- 51:43परिभाषा शुद्रता का परिणाम। मेरे शिष्य तो इसे न पड़े, दिमाग
- 51:53को खराब करो, घर उतना वक्त परमात्मा की शलागाह में लगा देना
- 51:59उसकी बराटता में उसको याद करके। गुणगान कर लेना, हरिभजन कर लेना
- 52:07ज्यादा अच्छा रहेगा। इन कुंठों से बच जाओगे ये
- 52:13शुद्रताएं तुम्हारे दिमाग में प्रवेश कर गईं और तुम कहो चाहे
- 52:23अपने आप को ब्राह्मण लेकिन। हो तुम से कम थोड़ी है, बल्कि
- 52:31सुद्र तुमसे ज्यादा बढ़िया है जिनको तुम सुद्र कहते हो
- 52:36स्त्रियाँ तुमसे ज्यादा बढ़िया आज स्त्रियाँ पुरुषों को हराने लगी
- 52:41हैं। दुर्गा शक्ति संक्षिप्त रूप से
- 52:53कहूँ यह शक्ति का वर्णन है बस अगर इस में से कोई अच्छी बात निकालनी
- 53:03हो तो सिर्फ यही। ते शक्ति पूज्यनीय है, यत्र
- 53:09नारियसत पूज्यन्ते निवरसन्ति तत्र देवता नारी की जहाँ पूजा होती है,
- 53:18वहाँ देवताओं का निवास। और तुम नारी की पूजा करते नहीं और
- 53:28फिर हम बोलते हैं तो मेरे पास हजारों तब भी आ जाते हैं कमेंट्स
- 53:34तो मैं इससे कहता हूँ कि देखो तुम वही हो जो जलती हुई चिता में जो
- 53:40बैठ जाए। उसको बड़ा मान सम्मान देते थे।
- 53:46ये मानसिक विकृतियाँ नहीं तो और क्या है?
- 53:50और अच्छी भरी औरत समझदार औरत अपने पति के साथ जिंदा जल जाती थी।
- 53:56जिंदा जलना सबसे बड़ा दुखदायी मौत होती।
- 54:03जिंदा जलने की मौत सबसे ज्यादा दुखदायी है।
- 54:06तुमने सतियों को सबसे खतरनाक मूर्ति और उकसाया के बाद में देखो
- 54:15कैसे आपकी पूजा होगी बात किसने देखा है भाई?
- 54:26मरने के बाद तुम श्राद्ध खिलाओ ना खिलाओ, जीते जी तो तुमने पानी का
- 54:31ग्लास नहीं दिया, जीते जी तो तुम वृद्ध आश्रम में चले गए।
- 54:44जन्म तुम्हें दिया माँ बाप ने पालन पोषण तुम्हारा किया बलमूत्र
- 54:49तुम्हारा उठाया, अब तुम बड़े हो गए तो छोड़ दो, वृद्ध आश्रम में
- 54:57छोड़ दो वो संभाल लेंगे। यह नहीं सिखाया हमारे बुजुर्गों
- 55:12ने, लेकिन तुम न जाने कहाँ से सीख गया आज माँ बाप तरसते रहते हैं
- 55:24बाल बच्चों से इमदाद लेने को। उन्होंने तो भरी दुनिया बनाई थी,
- 55:35लेकिन तुमने क्या किया तुम न जाने किस जहाँ में खो गए?
- 55:49तुम न जाने किस जहाँ में खो गए, हम भरी दुनिया में तनह हो गए।
- 56:09तुम न जाने किस जहाँ में खोएं, हम भरी दुनिया में तनहा हो गए।
- 56:30तुम्हें जन्म दिया था तुम्हें सुख दुख का सहारा बना बस इनका ही
- 56:41उपकार होता है और किसी का उपकार नहीं होता।
- 56:47और सब बातें हैं बातों का क्या? लेकिन दो ही शख्सियतें पूज्यनी
- 56:57माता और पिता, लेकिन सिर्फ मात्र अपेक्षा मत करना।
- 57:07वैसे तो माँ बाप ने बहुत कुछ कर दिया होता है।
- 57:11उसके बाद भी भेद न डालें, समानता व्यवहार करें।
- 57:19किसी बच्चे को पता न लगे कि मेरा मुझको नज़रअन्दाज़ किया जा रहा
- 57:28है। बस थोड़ी सी कमी माँ बाप को भी
- 57:34सुधारने होंगे। वह बच्चा पढ़ता रहा, पढ़ता रहा,
- 57:42दुर्गा शक्ति से उसने छोड़ी नहीं और 1 दिन मुझे खबर मिली।
- 57:48मैं तो अंडरग्राउंड हो चुका था, मैं बैठ चुका था तब तब मुझे खबर
- 57:54मिली इकोमेट्रिक सुसाइड भाई हैंग यही असर होता है जब तुम दिमाग
- 58:09में। सड़ीयल चीजों को बढ़ाओगे तो
- 58:13शुद्धताएं गुम हो जाएंगी। जब तुम राक्षसी प्रवृत्ति को भीतर
- 58:20बैठा लोगे, ये राक्षसी प्रवृत्ति है तो देव प्रवृत्ति बाहर चली
- 58:26जाएगी। पर तुम्हारा जो हसर होगा, मैं
- 58:30इसलिए कहता था मत पढ़ना, मत पढ़ना, क्योंकि भीतर से या चेतन
- 58:38से ये बात उठती है, वो परमात्मा ही क्या जीसको शोभनशुभ को मारने
- 58:45में इतने दिन लग गए। इतने दिन तो एटम बम को नहीं लगते
- 58:49एटम बम को तो एक पलक झपके नहीं जितना वक्त लगा तो इसका मतलब एटम
- 58:55बम से भी कम है। इनकी ताकत तुम किस्से जमाने की
- 59:04बात कर रहे हो। मैं यूं ही नहीं कहता कि इन
- 59:09शास्त्रों को आग लगा दूँ, गंगा जी में बहा दूँ, ये भी बेचारी मुक्त
- 59:16हो जाएंगे, लेकिन तुम हो के सुनने को ही तैयार है।
- 59:29ऐसे ही मैं ब्लॉक नहीं कर देता। ऐसे ही तुम्हारे कुछ प्रश्न होते
- 59:35हैं। फिर शुभम ने ऐसा क्यों किया?
- 59:38फिर निशुभ ने ऐसा कुछ किया क्यों किया?
- 59:41मैं ब्लॉक कर देता हूँ। अब इसके दिमाग में शास्त्र रहे और
- 59:55मैं तुम्हें कहता हूँ यहाँ आओ तो खाली हो गया इस सर को तो साथ लिया
- 1:00:03न दिमाग को तो साथ ले आना, लेकिन दिमाग के भीतर जो भरा पड़ा भूसा।
- 1:00:09उसको बाहर फेंक के आना, कैथोर्सिस करके आना मैं कह देता हूँ
- 1:00:16कैथोर्सिस आपने क्रिया योग किया हाँ किया कैथोर्सेस कितना किया
- 1:00:22बहुत किया तो मैं देखता हूँ ऐसे ही हमें दीक्षा नहीं देता।
- 1:00:30पहली बात तो इसे जो भेजने वाला, जिसने दीक्षा देनी वो ही नहीं
- 1:00:34भेजता मेरे पास फिर गाहे बगाहे कोई आ जाता है, चलता फिरता भी कोई
- 1:00:41आ जाता है। उसका औरा देखकर मैं कह देता हूँ
- 1:00:46कि क्षमा मांग लेता हूँ, मत भेजो। इसको अंदर इसको लासानी रंगों में
- 1:00:54ही आनंद लेने दो, इसको यहीं पे आनंद है।
- 1:01:00इसको मीट मास की दुकानों पे आनंद है।
- 1:01:03वो क्या करेगा? दूध और जलेबी को आनंद भी तो देखना
- 1:01:11है रसू भी तो देखना है यहाँ आ जाएगा अंगूठा करवा लूँगा मुझे आज
- 1:01:18ही एक कमेंट आया एक देवी का हल्का चोपड़ा दिल्ली।
- 1:01:24यहाँ नाम बताने में कोई बुरे ही नहीं कि कोई बहुत से लोगों के
- 1:01:28भ्रम टूट जाएंगे। बाबा आपने जब अंगूठा रखा मुझे कुछ
- 1:01:40नहीं हुआ। न नेगेटिव, न पोस्ट बस ऐसे जैसे
- 1:01:47किसी ने गोटे लगा दिया। इसका मतलब क्या है?
- 1:01:55प्रश्न पूछने योग्य है, तुम्हारे जीवन से संबंधित है?
- 1:02:01देखिये दो ही कारणों से आपको कुछ नहीं होगा एक तो आप बिल्कुल जड़
- 1:02:06हो अभी आप चले नहीं इस रास्ते पे, तो आपको कुछ महसूस नहीं होगा
- 1:02:13सेंचिशन नहीं है महसूस करने की बहुत से लोग यहाँ कंपनी में रख
- 1:02:18जाते हैं। तो मैं देख लेता हूँ कि थोड़ी सी
- 1:02:26पावर को भी नहीं झेल पाया तो मैं कहता हूँ कि भाई देखो तुमने
- 1:02:32मास्टरवेट किया किया, तुम जाओ पहले एक बार मुझे।
- 1:02:39साल 2 साल, 4 साल अगर तब तक मैं रहूँगा, दीक्षित कर दूंगा।
- 1:02:45अभी तुमसे ये जली नहीं जाती तो मैं यहाँ भी ऐसे वहाँ भी ऐसे इससे
- 1:02:49अच्छा वहीं बैठे रहो और ऐसे लोग सुधर भी गए हैं।
- 1:03:02और काश ये सुदर्शन क्योंकि मैं इन्हें यही बताना चाहता हूँ, जो
- 1:03:09आनंद तुम बल्क और बुखारी में लेते हो वो नहीं है वहाँ छज्जु के
- 1:03:13चबारे में हैं सुख तो या तो फिर यहाँ से अगर तुम।
- 1:03:20आदत पड़ गई है एडिक्टेड हो गए हो फिर यहीं से लेते रहो आनंद को ये
- 1:03:25तुम्हारी इच्छा है यहाँ से भी आता तो है लेकिन दूर से दिखता है
- 1:03:35लेकिन मैं जो सीखाता हूँ वो दूर से दिखता है लेकिन फिर उसमें
- 1:03:40जाके। इंटर मिंघल्ड होना पड़ता है और
- 1:03:43फिर तुम आनंद के स्वरूप ही हो जाते हो, चेतन हो जाते हो, सत हो,
- 1:03:51आनंद सुर हो जाते हो, ये जो तुम मस्टरबीट वगैरह।
- 1:04:02मैं तुल वगैरह की क्रिया से तुम दूर से देखते हो सिर्फ उसे ज़रा
- 1:04:08सोचो जीसको दूर से देखने से इतना आनंद आता है अगर उसके बीच में ही
- 1:04:14मिल गए जाके तो कितना आनंद आएगा? बस इसी बात से इशारा समझ लेना
- 1:04:23जीसको दूर से देखने से इतने आनंद में आ जाते हो, फिर फिर रोज़ उसी
- 1:04:31क्रिया को दोहराते हो और हमारे पाश्चात्य वैज्ञानिक नेता को है।
- 1:04:40ये व्यक्ति सारे दिन भर जो काम करता है वह है ओनली फॉर सिक्स
- 1:04:43अराउंड द सिक्स, तो उसे बेचारे को पता ही नहीं सत्यवादी है।
- 1:04:55जब पता ही नहीं है कि इसके बाद भी कुछ होता है तो उसकी मजबूरी है।
- 1:05:03वो जैसा जानता है वैसा कह देता है तो वह बेचारा सारे दिन इसी के
- 1:05:09रत्गर्द घूमता होगा। स्वयं भी तो उसने सत्य बोल दिया।
- 1:05:15बस यहाँ तक ही वो जानता है लेकिन कबीर से यहाँ तक नहीं जानते कबीर
- 1:05:21से पार जानते हैं कबीर तो कहते हैं तुम खो जाओ और वहाँ जाकर
- 1:05:30तुम्हें खुद को खोने का आनंद आएगा।
- 1:05:33जिज्ञासा भी जगेगी, उसमें गुम होने की इच्छा भी जगेगी।
- 1:05:49तेरे में फना होने की इच्छा होती है।
- 1:05:53इंटर मींगल्ड होने की इच्छा होती है।
- 1:06:01सिर कटाने की इच्छा होती है। जो भी कोई सिर नहीं कटा देता है,
- 1:06:06कुछ मिलता है उसे तो सिर कटा देता है।
- 1:06:10गुरु तेग बहादुर को कुछ मिला वो जानता था खोए का तो कुछ नहीं।
- 1:06:20क्योंकि मैं वो हूँ जो काटा नहीं जा सकता।
- 1:06:26कृष्ण ने बोला साक्षात उदाहरण बन के पेश आए गुरु तेग बहादुर ले काट
- 1:06:31ले तेरे धर्म की परिभाषा सही कर ले।
- 1:06:41और सिर कटारिया क्योंकि जानता है नैनम चेतन तीर्थस्त्राणी ये तलवार
- 1:06:46मुझे काट नहीं पाएगी तो ऐसे मत बनो कि अगर मैंने सत्य कहा तो ये
- 1:06:54मुझे मार देंगे। फिर तो तुम कायरता का प्रमाण हो
- 1:06:58और जो कायरता का प्रमाण होता है, वह सत्य नहीं कह पाता, फिर तुम
- 1:07:04बोलना ही बंद कर दो, क्योंकि अधूरा सत्य झूठ से ज्यादा खतरनाक
- 1:07:09होता है। मेरी इस बात को फिर से समझो।
- 1:07:15अधूरा सत्य झूठ से ज्यादा विनाशकारी होता है।
- 1:07:21फिर बोलो ही मत फिर चुप हो जाओ, तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर।
- 1:07:37हम भी देखेंगे किसी के प्यार में दुनिया लुटाकर हम भी देखेंगे
- 1:07:53मोहब्बत करने वालों का बस इतना ही अफसाना।
- 1:08:00मोहब्बत करने वालों का है बस इतना ही अफसाना तड़पना चुपके चुपके आह
- 1:08:08भरना गुटके मर जाना किसी दिन मुस्करा कर ये तमाशा हम भी
- 1:08:15देखेंगे। घड़ी भर के लिए नज़दीक आकर हम भी
- 1:08:22देखेंगे। बड़ा मज़ा है उसके करीब जाओ तो
- 1:08:29तेरी महफिल में किस्मत आजमाकर हम भी देखेंगे जरूर देखनी चाहिए
- 1:08:35किस्मत आजमाके। बाहर तो बहुत खंगाल दिया, जन्मो,
- 1:08:39जन्मो से भटके फिरा, थोड़ा उसके करीब जाके भी देखो उसकी महफिल में
- 1:08:45भी किस्मत आजमा के देखो उसके प्यार में भी आंसू बहा के देखो
- 1:08:52ज़रा रहो उसकी याद में रहो। घड़ी भर को तेरे नजदीक आकर हम भी
- 1:09:01देखेंगे, इसको तमन्ना ही मत रख लेना, इसको कार्यान्वित करना
- 1:09:09अक्शैन में डाल देना, मेरा भीतर उतारो, उसके नजदीक जाओ।
- 1:09:15नीतीश जाने से पता चलेगा वह कितना रसपूर्ण है, वह कितना आनंद से भरा
- 1:09:22हुआ है और कब से पुकार रहा है तुम्हें उसको भी आपकी जरूरत है।
- 1:09:28तुम उसके प्यारे बच्चे बच्चियां हों, जाओ।
- 1:09:34जाकर उसके आगोश में खो जाओ। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारियाँ।
- 1:10:00नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्णबविन हरे मुरारी।
- 1:10:19हे नाथ नारा यन वासुदेव पितुमात स्वामी सखा हर।
- 1:10:38पितुमात स्वामी सखा हमार हे नाथ नारा यन वासुदेव।
- 1:10:55श्री कृष्ण गोविंद हरिमराय हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:11:20धन्यवाद।