Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Sep 25 - अगर पिछले जन्म में आप गांधी जी थे, तो गुजराती बोल कर दिखाओ! पिछले जन्मों के रहस्य!
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- 0:05नीलू व्यास बाबजी चरण स्पर्श अगर आप गाँधी थे पिछले जन्म में आप
- 0:24गुजराती भाषा। बोलना, लिखना, पढ़ना क्यों नहीं
- 0:31जानते? बुनियादी प्रश्न है पर इस प्रश्न
- 0:47को वही हाल कर सकेगा जिसने मौत के बाद का जीवन देखा है।
- 1:04और मुँह से पहले का है। प्रश्न बढ़ाओ तुम मैं इसका जवाब
- 1:16दे भी चुका हूँ, लेकिन वो जवाब किसी और संदर्भ में था।
- 1:28आज संदर्भ बदल गया है। ऐसा समझे कि आप मेरी फोटो खींच के
- 1:48ले गए। और आपने जाकर उस फोटो की पूजा की
- 2:00आपने जाके उस फोटो के चाकू से काटा उस फोटो के ऊपर आपने लट्ठ
- 2:12बरसाए? गोलियां बरसन तो मुझ पर कोई फर्क
- 2:21तो पड़ेगा नहीं पड़ेगा क्यों? क्योंकि फोटो में सिर्फ इमेज चला
- 2:31गया। इमेज का मतलब चित्र और चित्र का
- 2:38मतलब होता है प्राण विहीन जड़ प्राण नहीं गए।
- 2:51चेतना नहीं गई मात्र आकृति की थोड़ा समझ लो।
- 3:07प्रश्न बड़ा गहरा बड़े काम का है, पीएलआर वाले इसका लाभ न उठाये।
- 3:22आजकल धंधा ऐसा ही चल रहा है। कल मेरे पास फ़ोन आ गया बाबा मेरे
- 3:31से कोई ₹15,000 ले के आपका सिक्का दे गया।
- 3:39मैंने कहा बेटा वो काम नहीं करेगा और वो मेरे पास से गैप है।
- 3:47निशुल का अब तक बांटा नहीं कोई नशेड़ी वंघेड़ी कोई ले गया हो।
- 4:01नशा पूरा करने के लिए भेज दिया। फिर ऐसा नहीं निशुल्क हमारी
- 4:11संस्था मुहैया करवाएगी, उन लोगों को मुहैया करवाएगी।
- 4:18ये लोगों को वास्तविक जरूरत होगी और उनके पास ध्यान नहीं होगा।
- 4:26और देख के परख के कहीं यह नशेड़ी तो नहीं?
- 4:31गलत इस्तेमाल तो नहीं करेगा लोग मेरे घर के सामने से मोटरसाइकिल।
- 4:37उठा के ले गए। ये कौन थे ये वही लोग हैं जाके
- 4:49कबाड़ में बेच दिया होगा रुक दो नंबर का धंदा करेंगे।
- 5:03इसलिए सावधान रहना पहली बात प्रत्येक व्यक्ति के नाम का
- 5:08सिक्का प्राण प्रतिष्ठित होता है। हम हनुमान की मूर्ति के भीतर सीता
- 5:16की प्राण प्रतिष्ठा नहीं कर सकते। कोई तुम्हें बेचे, चाहे मुफ्त में
- 5:27बेचे तुम मत लेना उससे क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा तुम्हारे नाम की
- 5:33नहीं है तुम्हें काम नहीं करेगा, हाँ तुमसे बाजार में बेच सकते हो?
- 5:41हमारे काम का वो नहीं है क्योंकि तुम्हारे नाम की प्राण प्रतिष्ठा
- 5:46उसमें हुई। ये धोखेबाजी है, ये चालबाजी है।
- 5:52गोरखधंधा है ऐसे लोग जनमेंगे हमें पता था।
- 6:01बस मेरे पास एक कंप्लेंट आयी है, मैं फ़ोन आपको सावधान करता हूँ
- 6:11क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा करनी शुरू कर दी है।
- 6:18इसलिए कोई ऐसा भी व्यक्ति आ सकता है।
- 6:21जीसको संस्था निशुल्क में या करते।
- 6:24वास्तव में उसके पास पैसा हो तो उसको सिक्का नहीं देंगे।
- 6:30हम सिक्का देंगे, उसके जानकार को वास्तव में जानता होगा।
- 6:34ये गरीब है। इसके पास पैसा नहीं है।
- 6:45जिम्मेदारी के साथ पौषिक्का मइया कराया जाएगा क्योंकि यह लाखों
- 6:51वर्षों की तपस्या का प्रण 78000 साल पहले।
- 6:58विश्वामित्र ने गायत्री को स्थापित किया था।
- 7:02उसके बाद गायत्री खंडित रूप से ही बोली गई।
- 7:06खंडित ही सुनी गई, खंडित ही परिभाषित की गई तो हजारों वृषों
- 7:16के बाद बाबा ने। मानवता पर कृपा है और तुम्हें एक
- 7:27ऐसा सूक्ष्म फार्मूला दिया है जो लाखों लाखों साल तक का पुनर्जीवित
- 7:35रहेगा। ना तो ये धातु कलेगी ना ही इसके
- 7:39भीतर की हुई प्राण प्रतिष्ठा करी। तो ऐसी गलती मत करना अगर खरीद भी
- 7:51लोगे ना तुम तो तुम्हारे काम नहीं आएगा बॉक्स बाजार में बेच सकते हो
- 7:59सिर्फ क्योंकि है चाँद। नीलू व्यास के प्रश्न का आयोजन
- 8:16ध्यान से सुनना प्रश्न बड़ा प्यारा है गहरी मती से आया हुआ है
- 8:22मती तार्किक हो या। जिज्ञासा की हो, उससे कोई फर्क
- 8:30नहीं पड़ता। कईयों के काम संवारेगी कईयों के
- 8:35भीतर के गलत मान्यताएँ जो नहीं जानते उन्होंने बिखरे हैं वो टूट
- 8:44जाए। तो आप मेरी फोटो को ले गए लेकिन
- 8:49उसमें प्राण प्रतिष्ठान उसको चाकू मारो, उसको गोली मारो, उसको प्यार
- 9:01करो उसको चूमा चाटो कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 9:14अब समझना बात को ईश्वर की प्रकृति में ये नियम है पहली बात तो कोई
- 9:24व्यक्ति किसी के पिछले जन्म को जान नहीं सकता।
- 9:28अति गोपनीय बात है और प्रकृति बड़ी समझदार है।
- 9:35प्रत्येक व्यक्ति के पिछले जन्म में वह क्या था, वह खुद तो जान
- 9:39सकता है। इसका दूसरा ढंग भी है कोलेक्टिव
- 9:47अनकॉन्शियस में जाकर, लेकिन कोलेक्टिव अनकॉन्शियस में जो चला
- 9:52गया। वो ठड्डी नहीं मारेगा क्यों?
- 9:56क्योंकि कोलेक्टिव अनकॉन्शियस में जाने से पहले वह गुजरेगा जंक्चर
- 10:01बांड से जो कुछ चाहिए उसे जंक्चर बांड पे ये मांग लेगा जो मांगू।
- 10:12ठाकुर अपने थे सोई सोई देब्रे कोल्लेक्टिव अनकॉन्शियसनेस में
- 10:22सिर्फ सूचनाएं जुटाने के लिए व्यक्ति जा सकता है।
- 10:25कभी कभार जाएगा नहीं क्योंकि। उसकी जीव क्षणा मर जाएगी और जीव
- 10:36क्षणा के साथ साथ जानने की इच्छा भी मर जाएगी और जिज्ञासु भी ना
- 10:43रहेगा। और उसके भीतर की जीव वेषण भी मर
- 10:52जाएगी। साथ में क्या जाता है जैसे
- 11:04फोटोकॉपी होती है आपने मेरी फोटो ले ली, आपके पास ही इमेज गयी।
- 11:13जिसकी फोटो ली, वो यहीं रह गए। अगर ऐसा होता तो फिर हम न जानें
- 11:24कितने जन्मो से कहाँ कहाँ से जा के आए।
- 11:31हम सभी भाषाएँ जानते होते हैं, हम कभी अंग्रेज भी हैं मनुष्य बहुत
- 11:44स्थानों पे जन्म लेता है और वहाँ की भाषाएँ सीखता है जाति वक्त।
- 11:54उसकी इमेज सात होती है। जब तुम अपनी पिछली जगह में जाओगे
- 12:02तो तुम सिर्फ चित्र देखोगे जैसे पर्दे पर कोई मूक।
- 12:11फ़िल्म चल रही हो आवाज़ ना मुँह को फ़िल्म में तुम होंठो की
- 12:23चिपचपाहट के हिसाब से तो बेशक समझ जाओ लेकिन भाषा का संपादक।
- 12:34अगर ऐसा होता तो अल्बर्ट आइंस्टीन अगले जन्म में ए एप्पल से शुरू
- 12:40नहीं करेंगे। बी बॉल से शुरू नहीं करेंगे।
- 12:45सी कैट से शुरू नहीं करेंगे ए इज़ इक्वल टू एम सी स्केयर, उसको फिर
- 12:51कोई सिखाएगा? अपना ही खोजा हुआ वह मूल सिद्धांत
- 13:00वह फिर से किसी और के जुबान से सीखे हो क्यों?
- 13:06क्योंकि अल्बर्ट आइंस्टीन, जो छोड़ गई राह जब खोजा।
- 13:14उनके ब्रेन के तंतुओं में रहकर साथ जाएगा।
- 13:25उसका एमएस और एमएस में प्राण नहीं होता है।
- 13:33देखिए जैसे हम सूक्ष्म शरीरों से बात करते हैं।
- 13:39यह सूक्ष्म शरीर किसी जगह से आए हो, इनमें अंग्रेज भी होते हैं,
- 13:46अफ्रीकन क्यों करते हैं, सारे विश्व से आए होते हैं और कई बार
- 13:50दूसरे घरो से भी आए होते हैं। देर इस ए लैंग्वेज ऑफ कन्वर्सेशन
- 14:02कॉमन लैंग्वेज ऑफ कन्वर्सेशन, जो सारी सस्ती सारे वरमंड में काम
- 14:09आती है, जैसे कोई हसेगा। तो पंजाबी भी हंसेगा, पता चलेगा
- 14:19अंग्रेज भी हंसेगा, पता चलेगा तमिल मराठी कोई भी हंसेगा, पता
- 14:29चलेगा, खुश है, कोई बात है। एक कम्यूनिकेशन की सार्वभौमिक
- 14:40भाषा है उसे भाषा कह लो, जरिया कह लो, संवाद का एक ढंग कह लो।
- 14:54न्यूटन कल को पैदा होंगे तो यही जो गति के नियम बता के गए थे, खोज
- 15:02के गए थे। खुद उनको किसी और अध्यापक से फिर
- 15:06सीखना पड़ेगा। गाँधी तो अंग्रेजी भी बहुत अच्छी
- 15:10बोलते थे। बैरिस्ट।
- 15:12लंदन से बड़े थे। गुजराती तो थे, लेकिन ध्यान रखना
- 15:22अगले जन्म में भाषा साथ में जाती चित्र यात्रा।
- 15:30पर मैंने आपको बताया जैसे पर्दे के ऊपर कोई फ़िल्म चल रही हो तो
- 15:36भाषा तो वहाँ नहीं होती क्या हुआ, क्या घटा आप चित्रों की जुबानी से
- 15:45जो समझो वो समझो। बोलकर कुछ समझाया नहीं जा सकता।
- 16:00इसलिए मुक्ति का मार्ग टु नो दाय शायद किसी भाषा का मार्ग नहीं।
- 16:14आज़ाद में क्या? सिया क्या।
- 16:24शांत कहते हैं स्मरण करो अपना हू आर यू अपना स्मरण करो।
- 16:34भाषा ने बिगाड़ के उसे स्मरण कर दिया।
- 16:38किसी और को स्मरण जैसे जानते भी नहीं।
- 16:51और भाषा के कई अर्थ होते हैं अलग अलग भाषाओं में एक ही शब्द के अलग
- 17:00अलग अर्थ होते हैं। एक शब्द में वो आशीर्वाद भी हो
- 17:13सकता है किसी भाषा में और एक शब्द में वह गली भी हो सकती है।
- 17:20दूसरी भाषा में, हमारे चैतन्य मन में बहुत कुछ हमने संग्रहीत कर
- 17:33रखा है। लेकिन उसकी पिक्चर जाएगी और
- 17:37पिक्चर से तुम्हें कुछ पता नहीं लगी।
- 17:42असल यहाँ रह जाता है फोटो कॉपी साथ में जाता है फोटो कॉपी से अगर
- 17:51तुम्हें कोई अंधेसा लग जाए। यह प्रश्न है या दुखी है यह किस
- 17:58फंक्शन के ऊपर किसी की फोटो है, यह बात अलग है और पिछले जन्म की
- 18:07बात के बारे में एक प्रक्रिया है। तुम्हारा पिछला जनम कोई दूसरा
- 18:16व्यक्ति जान नहीं सकता। अगर कोई दावा करे पिछले जनम के
- 18:23जानने का तो झूठ बोल रहा है। सिर्फ तुम जा सकते हो या कोई संत
- 18:42जा सकता है। जो कलेक्टिव अनकॉन्शस में चला
- 18:46गया, वह किसी के भी चेतन में जा सकता है, इसलिए बाबा ने कहा घट घट
- 18:54के अंतर की जान। भले बरे की पीर बचाना कहाँ जाके
- 19:01पता चलेगा कोलेक्टिव वन कॉन्शस, वहाँ जाकर उसे पता चलता है संत को
- 19:09कि यह सुखी, यह दुखी, यह झूठा या सत्य?
- 19:23लेकिन जो वहाँ पहुँच गया उसे ज्यादा प्रभाव नहीं होता।
- 19:30वह उससे प्रभावित नहीं होता, वह निर्लिप्त हो जाता है, जो जंक्चर
- 19:40पॉइंट को क्रॉस कर गया। वह शुद्ध सोना हो गया।
- 19:48उसमें कोई खोट ना रहा क्योंकि अगर कुछ मांगने की इच्छा होती तो जंग
- 19:53से मांग लेते। कुछ बढ़ने की इच्छा होती तो वहाँ
- 19:57मांग लेते इसी को भ्रमण्डीय। कान कहते हैं, भ्रमण सुनता है
- 20:05सिर्फ यहाँ से दी हुई आवाज़ को तुम खोपड़ी से आवाज देते हो वो
- 20:11सुनता नहीं। यहाँ से उसकी तार बढ़ती है, उसकी
- 20:19तार जहाँ से बढ़ती है। वहीं से संवाद किया जा सकता है।
- 20:31प्रत्येक व्यक्ति जब मरता है और हम बहुत जन्मों में बहुत बहुत
- 20:41यौनियों से होकर गुजरे। बहुत स्थान तब्दील की है बहुत
- 20:54लेकिन हम सभी भाषाओं को भूल गए। भूल का क्या हमारे संग नहीं आये
- 21:02और प्रकृति ने अच्छा भी किया। अगर तुम्हें सभी जन्मों की बातें
- 21:09याद रह जाएं तुम्हें पता नहीं हाहाकार मच जाएगा धरती पर अगर
- 21:20तुम्हें पता चल जाए। कि तुम्हारा जो बेटा है वह
- 21:23तुम्हारा दुश्मन पिछले जन्म का तो तुम उसे बेटे की तरफ प्यार ना दे
- 21:31पाओगे, मोह ना दे पाओगे, किसी को भी पता चल जाए पिछले जन्म का।
- 21:47उसका कार्य व्यवहार बदल जाएगा। इसलिए प्रकृति ने अच्छा किया कि
- 21:55दो जन्मों के बीच में एक पक्की दीवार लगा दी फौला से भी ज्यादा
- 21:59दस्तों उसकी चाबी तुम्हारे पास है।
- 22:07फिर कुछ लक्षण भी हैं। जब व्यक्ति पिछले जन्म में चला
- 22:11गया, उसका मृत्यु का ब्यास समाप्त हो जाएगा।
- 22:16लोभ समाप्त हो जाएगा उसका महावीर बुद्ध।
- 22:26कहाँ लोग रखते हैं ऑपर्च्युनिटीज़ थी सिंहासन अब भी था बैठ सकते थे
- 22:39संघासन पर, लेकिन लोग होमवर्क गिरा।
- 22:46बैठेगा कौन? किसके कारण बैठेगा?
- 22:50बहुत हो गया लोभ के कारण बैठेगा लोग झलक निर्लिप्त हो के व्यक्ति
- 22:56जाता है, जंक्चर पॉइंट के पार संदी क्षेत्र से पार लोभ नहीं
- 23:02रहता। क्योंकि अगर कोई लोग होगा तो
- 23:05जंक्चर पॉइंट पे ही मांग लेगा और ब्राह्मण उसे दे देगा।
- 23:09ब्राह्मण के पास ऐसा क्या है जो तुम्हें नहीं दे सकता?
- 23:13दाता दे लें दाथ का जुगा जुगंतर खाई का?
- 23:21ब्राह्मण के पास सब कुछ है तुम्हें देने के लिए, इसलिए देर
- 23:27अबे जो भी तुमने इच्छा की वो पूरी हो जाती, गलत मत मांग लेना।
- 23:35अगर तुमने कुछ भी गलत मांग लिया, भ्रमण उसे पूरा करते।
- 23:45क्योंकि बीज 1 दिन वृक्ष बनता ही बनता है और फल लगते ही लगता है और
- 23:52ध्यान रखना आम के बीज पर आम लगेंगे।
- 23:57बाबुल के बीज पर बाबुल लगेंगे, मिर्च के बीज पर कड़वी मिर्च
- 24:02लगेंगे। तुम्हारे संग जाता है अचेतन पिछले
- 24:16जन्म की स्मृतियां एक जन्म के नहीं बहुत जन्म लेकिन वो होता है
- 24:24चित्रों की बातें। इसलिए हम बच्चे को सिखाते हैं।
- 24:32तो भाषा को नहीं जानते तो चित्रों की भाषा में समझाती है, ए एप्पल
- 24:37साथ में सेब बना होता है सी कैट साथ में बिल्ली होती है।
- 24:52चित्र साथ जाती है। मेमोरी के रूप में आवाज़ साथ नहीं
- 24:57जाती आवाज़ होंठों की फर्क राह से तुम पहचान जाओ तो बात अलग है वो
- 25:08तुम पहचान न पाओगे। क्योंकि गाँधी कब क्या बोलें जब
- 25:15मैं गुजराती जानता ही नहीं, उनके होंठों की फड़फड़ाट से मैं
- 25:20जानूंगा कैसे? वो क्या बोलें?
- 25:31कहाँ कहाँ से मैं आया हूँ वो समृतियां मेरे भीतर हैं, नेपाल की
- 25:36भाषा अब मैं नहीं बोल सकता। और कैसी वक्त अंशु नाम का राजा था
- 25:44लेकिन नेपाली भाषा में आप नहीं बोल सकते।
- 25:47चित्र आए, साथ रहे। दुःख कर्म किया उसके चित्राय ये
- 25:53देखो तुमने ये किया और जब व्यक्ति मरता है ना तो चित्रों की भाषाएं
- 26:00घूमती है, शब्द नहीं होते प्रकृति दिखाती है कि देखो तुम्हारी ये
- 26:07कर्म है भाई साथ ले के जा रहे हैं।
- 26:09वो चित्र जाते हैं साथ में इसलिए संत खुशी खुशी विदा होता है
- 26:20क्योंकि उसने बुरा किया ना और असंत मारा मारा सा जाता है जैसे
- 26:29फांसी की सजा हो गई। सारे जीवन भर जो कुछ किया वो
- 26:33सामने गुजरेगा तुम्हारे अंत समय में कुछ मिनटों में प्रकृति दोहरा
- 26:40दी भी तुम्हारे जीवन की सारी यात्रा को ये ले चला हूँ मोबाइल
- 26:44देख लो। तुम अपने कर्मों को अपने अंतिम
- 26:51वेला में जान सकते हो। थोड़ा से जागरूक होने की आवश्यकता
- 26:56है। तुमने क्या किया ये पी एल आर वाले
- 27:02हमारे भीतर अनकॉन्शियस में इतना कुछ छिपा पड़ा दबा पड़ा।
- 27:06बस उसी को निकाल पाते हैं। पिछले जन्म पर ना तो कोई उगाड़
- 27:13सकता है। हाँ झूठ हो सकता है, मुझे बोल रहे
- 27:21हैं इनका निहित स्वार्थ है कोई? तो बैठी तुमने जो पूछा, मैं आशा
- 27:34रखता हूँ की तुम तुम से दी हो संस्कार जाते हैं संस्कार का मतलब
- 27:45आदतें। जो तुमने बार बार किया जीवन में
- 27:55आदत बन गई है। बुतचल हो गए तुम अगले जन्म में भी
- 28:01ज्यादा संभावना है कि तुम उसी लकीर के फकीर हो, क्योंकि
- 28:05संस्कार? सिर्फ एक ही चीज़ तुम्हारे अगले
- 28:11जनम में तुम्हारे साथ जाती है अब समझ लेना आनंद तुम्हारे साथ जाता
- 28:18है यानी लेवल ऑफ़ युअर कान्शस्नस क्षमा करना कान्शस्नस।
- 28:32जब तुमने अपने जीवन की कॉन्शस को चेतना को उत्थान दिया, वो
- 28:39तुम्हारे संग जाएगी और इस फॉर्म को अच्छी तरह समझ लेना।
- 28:46लेवल ओएफ कान्शस्नस आईएस इक्वल टू लेवल ओएफ आनंदा येस वन लेवल ओएफ
- 28:58कान्शस्नस आईएस इक्वल टू लेवल ओएफ कान्शस्नस लेवल ओएफ।
- 29:06आनंदा, तुम जितनी मात्रा में ज्यादा कॉन्शस होगे, उतनी मात्रा
- 29:14में तुम खुश होगे, उतनी मात्रा में तुम अहोभाव से भरे होगे।
- 29:23मदहोशी के आलम में जिओगे। निश्चिंत होके जियोगे बेफिक्री
- 29:29में मगन होके जियोगे लग्न से जियोगे मगनता से जियोगे आनंद से
- 29:37जियोगे रसभवर होके जियोगे। लेबल ऑफ कान्शस्नस को बढ़ाओ, वो
- 29:48तो हमारे संग जाएगा। वो कहते है कर्म साथ हो जाते है,
- 29:52बस समझाने नहीं आया। उन्हें यह समझने वाले कमजोर थे,
- 29:57यह समझाने वाले थोड़ा सरलता से बोल रहा हूँ।
- 30:01शायद बोलने में अभी कोई गुंजाइश बाकी हो।
- 30:04आने वाले शायद मेरी बात में थोड़ी सी और सरलता ली है, इस बात से मैं
- 30:09मुमकिन नहीं हूँ कौन से सने तुमने एक ही बना ली है वो तुम्हारे संग
- 30:24जायेंगे गिराली तो वो भी संग। जो जन्मजात दुखों के गहरे में
- 30:33जन्मते हैं, पलते हैं, बड़े होते हैं वह कॉन्शसनेस के लेवल का ही
- 30:39परिणाम तुमने कुछ गलत किया होगा। कॉन्शसनेस को बताने में वो कर्म
- 30:47किए होंगे। कौन सी स्नेक्स को बढ़ाने में
- 30:51कर्म करना आनंद बढ़ेगा? कौन कौन सी कर्म है?
- 30:56थोड़ी से दूसरे के दर्द को हमदर्दी से देखना।
- 31:10दूसरे की यथासंभव सहायता करना करुणावान हुन आस्थावान हुन अब तुम
- 31:32कल को यह न कह देना। कि हमें झूठी आस्था करना सिखाते
- 31:36हैं। नहीं, आस्था झूठी नहीं है।
- 31:41परमात्मा के बारे में परमात्मा है, झूठा है मार्कस जो तुम्हें
- 31:49गलत रास्ता दिखा दिया, कबीर झूठे नहीं होते।
- 31:54कबीर तो कहते हैं मैं तो स्टेम्पिंग करके जाता हूँ, मैं
- 31:58कहता आंखन देखी मैंने देखा है तुम्हारे संग जाएगा तुम्हारा
- 32:09कान्शस्नस लेवल और वो पता चल जाएगा तुम्हारे आनंद से।
- 32:18आनंद घना होगा तो तुम्हारे भीतर सहनशक्ति भी ज्यादा होगी।
- 32:25राम की तरह कृष्ण की तरह, इसलिए इन्हें हमने अवतार कहा।
- 32:33इनकी सहन शक्ति बड़ी प्रबल थी। क्षण भर पहले राय तिलक होना था,
- 32:40क्षण भर बाद बनवास हो गया। तुमने पूछा बेटी सवाल तो बड़ा
- 32:57प्यारा था? जरूरी पिता बहुत से सवाल छूट
- 33:02जाएंगे, मेरे जाने के बाद भी सवाल तो बने ही रहेंगे, लेकिन मेरी
- 33:11कोशिश होती है व्यर्थ के प्रश्नों को छोड़कर।
- 33:15जो सार्थक प्रश्न है, उनके जवाब देता जाऊं और सही पूछो तो मैंने
- 33:23बहुत बार बोला पूछने योग्य प्रश्न एक ही वो है कि मैं कैसे तृप्त हो
- 33:30जाऊं, कैसे शांत हो जाऊं? कैसे आनंद से युक्त हो जाऊं, कैसे
- 33:37रस में भोर हो जाऊं मेरा रोम रोम नाचे मेरा रोम रोम गाये पूछने
- 33:44योग्य प्रश्न यही है, मैं सुखी कैसे हो जाऊं, यह पूछने योग्य
- 33:50प्रश्न नहीं होते, तुम पूछ लेते हो?
- 33:53और हम जवाब दे देते हैं करुणा बस क्योंकि गलत राह बताने वालों ने
- 34:02तुम्हें उलझाया बहुत नामदेव की माता बिना पुरुष के अगरकृति हो
- 34:09जाती। एस्सा मसीह की माता मरियम कवारी
- 34:19रह जाती है। तुम्हें बरगलाया क्या?
- 34:26फोकट की बातें सीखने के प्रयास किए गए।
- 34:30इसलिए दुनिया आज इतनी दुखी है। मैंने बात छेड़ी थी कि संत कहते
- 34:38हैं स्मरण करो अपने आप का नो दाए सर्व अपने आप को स्मरण करो।
- 34:43तुम हो कौन और तुमने अपना जीवन इतना नर्क बना लिया।
- 34:50कि साँझ ढले ढले सारे दिन के थके मादे वक्त के चपीड़े खाते खाते
- 34:55समाज के चपीड़े बॉस के चपीड़े खाते खाते दुनिया के चपीड़े खाते
- 35:01खाते तुम श्याम जब घर पहुंचते हो। तो खुद को जानने की चेष्टा नहीं
- 35:07करते। खुद को बुलवाने की चेष्टा करते
- 35:09हो। शराब का शार लिख हमने अपने आप को
- 35:16कितना दुखी बना लिया है तो हम संतों के वचनों को चल के।
- 35:26संत कहते अपने आप को स्मरण करो, हमने राम को स्मरण करना शुरू कर
- 35:33दिया, कृष्ण और राजा को स्मरण करना शुरू कर दिया।
- 35:37दूसरे का स्मरण करना कभी सुख दाई नहीं हो सकती।
- 35:45हमने शब्दों के अर्थ के नर्थ कर लिए और उसके जिम्मेदार लोग कौन
- 35:51जही आचार्यगण तथा कथित विद्वान सर।
- 35:58जो आईएस कराने के बहाने घुस जाते हैं।
- 36:13अजातश? उसके चरण जहाँ विराजमान हैं अगर
- 36:37तुम वहाँ चले गए। तो वह नवाज के सूखों से भरा पड़ा
- 36:42है। वहाँ चले जाओ।
- 36:47इसका अर्थ ये था करने वालों ने पता नहीं क्या क्या बखीरे खड़े कर
- 36:51दिए। बस एक बात को उसमें रखना।
- 36:55पुत्री याद करना है खुद को। ना राधा को, ना राम को, ना कृष्ण
- 37:02को दूसरे को और तुम्हें अपना नाम भी याद नहीं करना है तुम्हारा कोई
- 37:07नाम था भी नहीं तुमने अपने भीतर जाके देखना है तुम हो कौन वो ही
- 37:17है सच्ची? भक्ति वो ही है सत्य का मार्ग
- 37:27बाहर से अगर तुमने जानने की चेष्टा की तो ऐसे ही तुम गम गलत
- 37:32करते रहोगे तर्कों के जंजाल में। थपेड़ों से मरे मरे से शाम घर
- 37:43लौटोगे और संत कहते हैं, शमण करो तुम कौन हो तुमने इतना दुख मइ
- 37:52अपने आपको बना लिया है कि शमण करते हो तो तकलीफ होती है मैं
- 37:58इतना पंगू। मैं इतना पराधीन हो गया हूँ, मैं
- 38:07इतना दुखी हूँ लोगों की हाथों की कठपुतली जिनको हाथ काट के देते हो
- 38:15वो तानाशाह बन जाते हैं। फिर तुम गम को गलत करते हो और
- 38:29पराधीन व्यक्ति गम को गलत करने के अलावा उसके पास कोई रस्ता नहीं।
- 38:35वक्त के थपीड़ो की मार इतनी तुम्हारे वेतर हिम्मत नहीं की तुम
- 38:42उनको संहार जाओ। एक ही रास्ता बचता है
- 38:49परिस्थितियों से भाग जाओ और परिस्थितियों से तुम सांझ डले हुए
- 38:58भाग जाते हो। बाहर के ठेकों के जाम ढलने लगते
- 39:05हैं, रातें गुलाबी हो जाती हैं, रात अँधेरी नहीं, गुलाबी हो जाती
- 39:13है, शराबी हो जाती है, रात का अँधेरा, शराब कबाब और शबाब ये
- 39:22लेके आता है। और उसे तुम कहते हो ऐश नहीं,
- 39:30मैंने आपको बहुत बार समझाया, ऐश करती हैं तुम्हारी इन्द्रियां और
- 39:35इन्द्रियां तुम हो नहीं तो तुमने कहा ऐश किया।
- 39:43अगर सच में ऐश करना चाहते हो तो उस स्तर पर चले जाओ जैसे कृष्ण
- 39:48कहते हैं स्थिति प्रज्ञाता हे अर्जुन तो स्थिति प्रज्ञ हो जाओ।
- 39:53अगर सच में ऐश करना चाहते हैं, बाकी तुम्हारी ऐश है तो सिर्फ दिन
- 39:58में छह बार कपड़े बदलने के। जहाजों पे घूमना महज इंद्रियों का
- 40:07खेल है, लुभाते हैं। इससे तुम्हें प्रसन्नता नहीं
- 40:14मिलेंगे, हमारे दुःख नहीं हटेंगे। तुम्हारे हाथ में ठूठा भिक्षा
- 40:22पत्र रहेगा ही रहेगा क्यों? क्योंकि तुमने जानना था अपने आप
- 40:27को और तुमने या तो दुनिया के पदार्थ इकट्ठे करने शुरू कर दिए।
- 40:35तुम संसारिक हो गए। या आध्यात्मिकता में तुमने दूसरों
- 40:41को याद करना शुरू कर दिया? ये दोनों मार्ग करते हैं।
- 40:50मार्ग था दूसरों को याद न करो, स्वयं का स्मरण करो और तुमने
- 40:55बिगाड़ तगाड़ लिया। स्मरण से सुमरण बना लिया और सुमरण
- 41:00से फिर नाम स्मरण करने लग गए और आए तो नाम सुमरण बांटे जाते हैं।
- 41:10मुझे पता है तुम संस्कारित हो। संस्कारित का मतलब तुम भक्त हो वो
- 41:22भक्त जिसकी आँख नहीं होती जैसे अंधों की महफिल सजी हो, गुष्ठ गुम
- 41:36हो रही हो। विचार गोष्ठी शास्त्रार्थ चढ़ रहा
- 41:40हो। एक अंधा कहता की हरे रंग के चार
- 41:44टंगे होते हैं हरा रंग जब चलता है तो क्या बात है, कलियाँ खिल जाती
- 41:56हैं दूसरा कह तो नहीं भाई। दूसरा अंधा देखो हरे रंग के तो दो
- 42:08टाँगे होती है, एक आठ टांगों वाला भी होता है वो गुलाबी होता है।
- 42:24झूठ पे झूठ बोले जाते हैं किसी बात में कोई सत्य नहीं क्योंकि
- 42:33आँख नहीं और आँख के बिना तुम जो बोलोगे गलत बोलोगे, अंधे रंगों के
- 42:43बारे में समझा रहे हैं और मैंने कितनी बार बोला कल ही
- 42:56रामभद्राचार्य जी कह रहे थे। संस्कृत जो नहीं जानता वह विद्वान
- 43:01ही नहीं। मतलब गुजराती विद्वान नहीं हो
- 43:05सकता मस्तिका संस्कृत जो नहीं जानता वह विद्वान नहीं, मेरे एक
- 43:19संस्कृत के श्लोक का। अर्थ बता दे प्रेमानंद और मूर्ख
- 43:25आगे वो है उसको एआई के जरिए अंग्रेजी में बोलने लगा देते हैं।
- 43:33ये क्या है? फोंकी बनावट दिखावा आज दिखावा
- 43:38हीर। घर के भीतर से पति पत्नी लड़ झगड़
- 43:43के आते हैं, जूत पटांग हो के आते हैं और बाहर मेकअप करके जाते हैं,
- 43:49दुनिया को दिखाने के लिए ठहाके लगाते जाते हैं के पड़ोसी देखें।
- 43:58तो जल भुन जाए, यह तुम्हारी मंशा है।
- 44:01पड़ोसी को सुखी रखने की तुम्हारी मंशा कभी नहीं रहेंगी पड़ोसी कैसे
- 44:08जलें भुनी? तुम लड़ गुल के आए हो भीतर उसने
- 44:13बेलन मारा सिर में और तुमने जूता फेंक दिया।
- 44:18ये कुछ करके आये हो और चोट भी लगी है तो ढक लेते हो, फेस पाउडर लगा
- 44:26के ये तुम्हारी हकीकते बयान कर रहा हूँ मैं ये दुनिया की हकीकते
- 44:34हैं। संत कहते हैं स्मरण करो स्वस्मरण
- 44:38करो। इसे ही आत्म स्थिति कहते हैं।
- 44:43इसे ही स्थिति पर गधा कहते हैं। इसे ही आत्म अवरोकन कहते हैं और
- 44:53तुमने सस्मरण कण के बजाय। स्वय भी स्मरण करना शुरू किया।
- 44:59क्योंकि तुम जैसे बन गए हो मान मान कर असली रूप तो तुम्हारा सदा
- 45:05से ही आनंद से भरा पड़ा है वहाँ तुम जाते नहीं गए नहीं बताने वाला
- 45:11कोई नहीं मिला। जो तुमने नकली नकली बना लिया
- 45:16दिखावा कर करके ये नकली नकली है और ये नकल कब तक चलती है?
- 45:28फौकी होती है नकल कागज़ के जहाज कभी उड़ते है।
- 45:35छलावा होता है। थोड़ी दूर उठ सकते हैं।
- 45:37हम जहाज उगाये करते थे बचपन और कागज की किस्तियां कभी समुद्र को
- 45:43पार तुम्हें लगा सकती हैं डूब जाएंगी खुद ही डूब जाएंगी।
- 45:52तो तुमने खुद को जाली जाली बना लिया, दिखावा कर कर के और ये
- 46:00दिखावा दिखावे बाजी अपने आप में दुख का कारण जितना व्यक्ति दिखावे
- 46:08बाज होगा, भीतर से उतना ही दुखी होगा।
- 46:13हाँ, इसको आप एक डेफिनिशन के तौर पे भी ले सकते हो।
- 46:18जितना व्यक्ति दुःखी ज्यादा होगा, भीतर से उतना दिखावा ज्यादा
- 46:23करेगा। संत कभी दिखावा नहीं।
- 46:30संत तो मलंगों की तरह पड़े रहते हैं ना वे मूछें कुण्डी वाली करते
- 46:39हैं, ना जूती कुण्डी वाली डालते हैं, क्यों डालें?
- 46:50पर्पस हल हो क्या? जिसके जाने से सब दुखड़े दूर हो
- 46:59जाते हैं, सब रोगनाश हो जाते हैं। वह मिल गया।
- 47:13दिखावा करेगा क्या? दिखावा मात्र उसे ही करना पड़ता
- 47:18है जो नकली है। जेवरात ढूंढ रहे थे राम और
- 47:29लक्ष्मण बहुत से जेवरात मिले तो राम ने कहा।
- 47:36भैया लक्ष्मण देखना ये जेवर तुम्हारी भाभी के है ये हाँ ये
- 47:42कंठी ये बिछुआ देखना तुम्हारी भाभी के है लक्ष्मण रो पड़े।
- 47:56भईया मैं सिर्फ पाई जीव को पहचानता हूँ, ये भाविक है ये माता
- 48:05के जब मेंसिरण शमर्ष करता था प्रातः स्वरणीय सुबह उठ कर तो इन
- 48:10पाजीवों को रोज़ दर्शन करता था जो उसी की है पक्का।
- 48:17भैया मैं तो यती और मेरे संघ मेरी नारी उर्मिला भी नहीं, लेकिन तुम
- 48:31तो पति हो। क्या तुम्हें भी उसका कंठी, हार
- 48:39बिछुआ और ये कानों के कर्ण फूल नहीं पहचान में आते तो राम का
- 48:49जवाब सुनने योग्य था? एक को वर्दे में बसा लेना राम
- 48:59कहने लगे, वो इतने लावार्य से युक्त थी, इतनी शीतलता से युक्त
- 49:04है, इतनी सुंदरता से भरी है वो कौन देखता है देवरात को भैया?
- 49:14सही पूछो तो सीता के जीवन सीता के लावण्य के आगे प्राणविहीन लगते
- 49:20हैं, सीता प्राण से युक्त है और जेवरात प्राण से ही सोने में कहाँ
- 49:27प्राण होते हैं? लेकिन सीता?
- 49:33तो प्राणवती सीता के लावण्या के आगे जेवर दिखते ही नहीं थे भईया
- 49:44वह परम सुंदरी ऐसे लोग कहाँ चले गए?
- 50:05ग्रथ व्यक्तियों की बातों में मत आ जाना, चाहे वो आध्यात्मिकता का
- 50:10प्रचार की क्यों ना हो, जो हमारे ऋषियों ने ढंग खोजते, जीवन के
- 50:27उनसे बढ़िया ढंग खोजे नहीं जा सकते जीवन के।
- 50:33साइंस को तो तुम बहुत उचाईयों पे ले जा सकते हो लेकिन जीवन को जीने
- 50:37का ढंग ऋषि अत्यंत रूप से तुम्हें पता है।
- 50:41उससे ज्यादा सुधार करे की गुंजाइश नहीं है।
- 50:46आज के तथा के तित बोलने वाले लोग। तुम्हें भर्मगे हैं, वह तुम्हें
- 50:53पाश्चात्य से जोड़ना चाहते हैं। पाश्चात्य में तुम्हें डाडरों की
- 50:58खनक तुम्हें, लेकिन जीवन की आभा उसमें न चमके।
- 51:08तो स्थिर कहना पक्षियों से जाना चाहती हैं जाएं, लेकिन तुम जाना
- 51:19अपने भीतर तुम ऐसा स्वाद पाओगे अपने भीतर जा के।
- 51:29सब भूल जाओगे पहले मंजिल तय करना तुमने जाना की
- 51:44तरह अगर संसार ने तुम्हें दुखों के अलावा कुछ नहीं दिया।
- 51:54निरसता के अलावा कुछ नहीं दिया। बोरिंग के अलावा कुछ नहीं दिया और
- 52:00संसार में यही कुछ है जब तुम थक जाओ, संसार के थपेड़ों से, दुखों
- 52:11से घबरा के। तो फिर तो मेरी शरण में आजा यही
- 52:17कहते हैं कृष्ण सर्वधर्माण पर तंज माँ मी कम शरण ब्रज अहिं तम सर्व
- 52:24पापे भ्रम मोक्ष श्यामी माँ सूजा कोई ही जब।
- 52:32तुम्हारा हृदय तोड़ दे तड़कता हुआ आज कोई छोड़ दे जब संसार तो मैं
- 52:49तड़कता हुआ छोड़। सोचा था साज सजाऊंगा गीत गाऊंगा
- 53:00मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूस होते हैं मोहब्बत के लिए कुछ खास
- 53:07दिल मकसूस होते हैं। ये वो नगमा है।
- 53:10जो हर साज पे गाया नहीं जाता। पहली मंजिल चुनना है तुम्हे डॉलर
- 53:20की चमक चाहिए के भीतर का रस चाहिए जिसे पीकर तुम्हारी दोस्त समाप्त
- 53:24हो जाएगी। जहाँ डॉलर की चमक खनक फीकी पड़
- 53:28जाती है। कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे
- 53:41तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे। जब तुम मेरे पास आना प्रिय तुम
- 53:59मेरे प्यारे ही बने रहो किस्सा किन्हीं गन्दी नालियों में भटकते
- 54:05रहो। जब तुम मेरे आंचल में आके छिप
- 54:09जाओगे, मैं तुम्हें गली से लगा लूँगा जब तुम मेरे पास आना प्रिये
- 54:23मेरा। खुला है, खुला ही रहेगा।
- 54:31यहाँ कोई शर्त नहीं होती। यहाँ कोई शर्त नहीं होती के द्वार
- 54:38बंद हो जाएंगे। 12:00 बजे के बाद 4:00 बजे के
- 54:40तुम्हारे मंदिर के दरवाजे बंद हो सकते हैं।
- 54:52कोई जग तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जग कोई छोड़ दे।
- 55:09तब तुम मेरे पास आना प्ले मेरा चल खुला है, खुला ही रहेगा तुम्हारे
- 55:25लिए। तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए हम तुम
- 55:35सर्व पापे ब्यो मोक्ष, शमी मा सूजा।
- 55:47मेरा दर्द खुला है, खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए धन्यवाद।