Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Dec 24 - किस ढंग से दान किया जाए? दीक्षा के बारे में कुछ ज़रूरी बातें! गृहस्थ जीवन कैसे जिया जाए!
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- 0:24श्रीवास्तव आपने थोड़े दिन पहले कहा किसी को दुख देना पाप है।
- 0:44और फिर आपने एक प्रवचन में कहा कि अहंकार को ठेस पहुंचाना पुण्य है,
- 0:53ये क्या गड़बड़ घुटा रहा है? प्रभु अहंकार को ठेस पहुंचाना
- 0:59पुण्य है। इसका अर्थ क्या हुआ?
- 1:11किसी को दुख देना पाप है, इसकी व्याख्या कीजिए।
- 1:22प्रभा। प्रश्न बड़ा साफ तुम्हारे अहंकार
- 1:36को जो ठेस पहुंचाएगा, तुम्हारा अंकार टूटेगा और तुम्हारा अंकार
- 1:43टूट जाए, ये पुण्य है। एक भ्रांति टूट जाए पुण्य क्योंकि
- 1:49अहंकार, भ्रांति और फिर आपने पूछा।
- 2:04कि आपने कभी क्षमा भी नहीं मांगा। रोज़ दुख देते हो?
- 2:11लोगों को साधु संतों तक की आत्मा करती है आपके शब्दों से।
- 2:23आपने कभी क्षमा नहीं मांगी, जिनके लिए मैं बोलता हूँ, वह साधु संत
- 2:33हैं, जिनके अहंकार को ठेस पहुंचती है, वह अहंकारी व्यक्ति, साधु,
- 2:41संत नहीं होता। निर, अहंकारी होता है साधु निर
- 2:47अहंकारी होता है संत अगर संत की भावनाओं को ठेस पहुँच गई, अहंकार
- 2:55को ठेस पहुँच गई तो वह संत कहाँ से हो गया?
- 3:02संतत्व मिलता है। अहंकार के खून और उसके अहंकार को
- 3:08चोट पहुंचाकर मैंने पाप क्या किया?
- 3:13मैंने पुण्य किया थोड़ा सा इस गहराई को समझ लेना।
- 3:17मेरे पास रोज़ ऐसे क्वेश्चन आते हैं, तुम तो बाबा निंदा करते हो,
- 3:26इसलिए मैं कह देता हूँ, ठीक है और निंदा सुनना पाप है बिल्कुल ठीक
- 3:37है। तुम्हारी मौज है, तुम स्वतंत्र
- 3:41हो, रोज़ दुःख देते हो लोगों को और फिर तुम कहते हो किसी को दुःख
- 3:59देना आप मैं आज भी कहता हूँ। सदा कहता रहूंगा दुख देना पाप और
- 4:13तुमने कहा कि तुमने मासिक भी नहीं मांगे माफी क्यों मांगे?
- 4:25जो कर्म मैंने किया ही नहीं, उसके लिए मैं माफी क्यों मांगू?
- 4:32ध्यान से समझी ये जो अहंकारों को तोड़ता है किसी ने पूछा था भगवान
- 4:39से? भगवान हम तो रोटी खाते हैं, चावल
- 4:43खाते हैं, जूस पीते हैं, फल फ्रूट खा लेते हैं, तुम क्या खाते हो,
- 4:48तुम्हारा आहार क्या है? भगवान कहते मेरा आहार अहंकार है,
- 4:58मैं अहंकार को खाता हूँ। जिसने तोड़ा होगा अहंकार, वही
- 5:13जिम्मेवार और उसका भोजन है। मैंने तो कुछ बोला नहीं, मैं क्या
- 5:21बोलता? 2000 वीडियो बोल गया कभी तो क्षमा
- 5:25मांगता, लेकिन कभी क्षमा मांगा नहीं।
- 5:31क्यों? क्योंकि मैंने कोई अपराध नहीं
- 5:34किया। यंत्र कभी अपराध किया करते हैं।
- 5:41माइक में से कोई गाली निकाल दे या वेद मंत्र पढ़ दे?
- 5:48माइक ने पाप या पुण्य किया, उसने प्रसारित किया सिर्फ बोलने वाले
- 5:55की आवाज़ को प्रसारित करता है यंत्र और मैं यत्र।
- 6:03और ध्यान रखना जो माफी मांगता है वो यंत्र नहीं है, वो करता है।
- 6:13जो भी माफी मांगता दिखे, आपको तुरंत समझ जाना।
- 6:19के यह संत नहीं संत कभी माफी नहीं तुम कह दोगे कि तुमने गलती की है,
- 6:28माफी मांग लो, वह मांग लेगा लेकिन तुम्हारे कैन्स।
- 6:35उसका अंतर विद्रोह नहीं करेगा कि तुम माफी मांगो, तुमने गलती की
- 6:39है, तुमने पाप किया है तुम्हारी कहने से अब बात अलग है।
- 6:49यंत्र कभी माफी नहीं मांगता क्योंकि यंत्र जानता है।
- 6:54कि कौन बोलता है और मूर्ख पन्थों तो मैं अभी तक समझा नहीं, जब तुम
- 7:05निकल जाओगे तो यंत्र तो यहीं रह जायेगा।
- 7:10मुँह खोल के देखना जी, वह भी यही हो।
- 7:12के। गले के सारे और गंध यही होंगे,
- 7:16यही फेफड़ा होगा, यही हृदय होगा, लेकिन ठहरा होगा, तुम नहीं होगे,
- 7:23बोलने वाला, चला गया, किस्से मांगू फिर क्यों मांगू?
- 7:37जो करता है वो माफी भी मांगता है देर अवेर उसे माफी मांगनी ही
- 7:47पड़ती है और जो करता ही नहीं है वो कभी कभी माफी नहीं मांगता है
- 7:55क्योंकि। उसका भीतर विद्रोह नहीं करता।
- 8:01अक्शॅन का रिएक्शन नहीं होता क्योंकि उसने अक्शॅन नहीं किया।
- 8:05रिएक्शन होता है माफी मांगना अक्शॅन होता है देव दुखाना जब
- 8:12उसने दिल ही नहीं दुखाया अक्शॅन नहीं किया।
- 8:15तो माफी क्यों मांगेगा? रिएक्शन क्यों आएगा?
- 8:26मेरे ख्याल में तुम्हारी दोनों बाते साफ हो गई।
- 8:31कुछ दिन पहले तुमने कहा था। कि किसी का दिल न दुखाना मैं आज
- 8:36भी कहता हूँ श्रद्धा कहता रहूँगा दिल तो तुम दुखा रहे रहो और आधे
- 8:45राधे करो, गुमराह करके राम राम करो।
- 8:54दिल दुखा करके, गलत राह डाल करके आज नहीं कल तुम्हें भुगतना पड़ेगा
- 9:08बिना उस तत्व को जाने क्यों ही दिन भर बकवास करते रहना वापस होता
- 9:14है। जब तुम पाप के सताए हुए दुख
- 9:28बांटते हो, लोगों को झूठ बांटते हो, लोगों को तो 1 दिन तुम्हारा
- 9:33अंत से दुखेगा विद्रोह करेगा तुम्हारा अंत से बड़ा सेंसिटिव है
- 9:41तुम्हारे अंत में। खुद परमात्मा विराजमान है।
- 9:50इस घूँघट को उठा तू घूँघट के पटखोल रे।
- 10:05तोहे ब्याह मिलेंगे घोंघट के पठखोल रे तोहे ब्याह मिलेंगे।
- 10:22इस आवरण को उठाओ और देखो कौन बैठा है पाप तुम करते हो, किसी को
- 10:37गुमराह हक कर देना। इससे बड़ा पाप कोई हो सकता है और
- 10:42दिन भर रात तुम चिल्लाते ही चले जाते हो।
- 10:45मैं देखती हूँ और जोश और जोश किसी दिन ये जोश ठंडा हो जाएगा।
- 11:01है खरा माली वो पीछे। होशियार हो रही बुलबुल क्यों गुल
- 11:22पे निसार है खड़ा माली वो पीछे? होशियार मारकर गोली गिरा ली जाए।
- 11:45है गिर। जब तेरी डोली निकाली जाएगी।
- 12:04बे मुहूर्त के। उठा ली जाएगी जब तेरे।
- 12:21जीस दिन मैं दिल तो खाऊंगा उस दिन क्षमा भी मांग लूँगा।
- 12:30लेकिन तुम्हें एक बात साफ साफ कर दी है।
- 12:33मैंने यंत्र कभी दिल नहीं दुखाया करते यंत्र प्रसारित किया करते
- 12:39हैं। जो बोला उसके भीतर से और यंत्र
- 12:46कभी भ्रम नहीं खाता। यंत्र कभी भ्रम नहीं कहा था, तुम
- 12:51भ्रम खा जाते हो, यंत्र नहीं भ्रम खाता तुमसे यंत्र अच्छा है, तुम
- 12:59भ्रम खा जाते हो कि मैंने गाली दी, तुम क्षमा मांगते हो, तुमसे
- 13:05यंत्र अच्छा है, यंत्र कभी भ्रम नहीं का।
- 13:08उसे पता है कि मैंने बोला ही नहीं।
- 13:17हाँ मैंने कहा था आज भी कहूं कल भी कहूंगा दिल दुखाना का।
- 13:30और जिन्हें तुम संत कहते हो वह झूठे हैं, बकवादी हैं, गुमराह कर
- 13:35रहे हैं, मैं आज भी बोल रहा हूँ कहाँ रुक गया जब तक सांस में सांस
- 13:43है। हृदय धड़क रहा है।
- 13:50बोलता ही और दूसरा ने पूछा की अहंकार को तोड़ना पुण्य है,
- 14:03बिलकुल पुण्य है। यही काम मैं करता हूँ, मेरा भोजन
- 14:08ही अहंकार है और ये भोजन मैं रोज़ खाता हूँ, मैं तुम्हारे अहंकारों
- 14:23को खा जाऊं, तुम लाख पीले काले लपटे हो।
- 14:29तुम लाख नाविक टोपियां डालते हो। तुम लाख जनता को गुमराह करके झूठे
- 14:35वायदे करते हो, मैं तुम्हारे अहंकार को निगल ही जाऊंगा।
- 14:41तुम्हारे अहंकार के लिए मैं भस्मेश्वरम याद रखूं।
- 14:52मेरा भोजन है भाई मैं ये पुण्य सदा करता रहूंगा।
- 15:07तुम्हारे अहंकारों को तोड़ना वाकई ही पुण्य है, कोई गलत रास्ते जा
- 15:13रहा है। उसको आवाज दे देना कि गलत रास्ता
- 15:18आगे कुआं है, घर जाओ रुक जाओ, ये पुण्य है, तुम इसे पाप समझो,
- 15:27तुम्हारी अपनी मान्यता है, तुम्हारी अपनी खोपड़ी है, लेकिन
- 15:32तुम्हारी अपनी खोपड़ी। मुझे कुछ बोलने पे मजबूर नहीं कर
- 15:37सकते मैं जो बोलेंगे तुम कृपा करो तुम अगर मेरे विचार नहीं जचते तो
- 15:48मैं रोज़ कहता हूँ। दूसरा प्रश्न वो ही प्रश्न और वो
- 16:12ही जवाब। आपने कहा गोवर्धन जैन ने पूछा है
- 16:20रयूसन पर्व में जैन धर्म एक बड़ी शानदार महोत्सव करता है, वर्ष भर
- 16:34में हुई अपराधों के लिए क्षमा मांगता है।
- 16:39जीवजंतुओं को जो नीचे आके मर गए, किसी को भूलवश या जानबूझकर तिल
- 16:49दुखा दिया हो, दर्द पहुंचा दिया हो, नुकसान कर दिया हो।
- 16:59उसके लिए क्षमा मांगते हैं एक दूसरे से और सभी क्षमा मांगते
- 17:04हैं। इसका मतलब सभी ने अपराध किए होते
- 17:07हैं। आप क्यों नहीं ऐसा करते?
- 17:20क्योंकि मैं पाप करता ही हूँ, कवर्धन जयंती मैं पाप करता है
- 17:30मुझसे पाप होता ही है। पाप नाम की चीज़ मेरी डिकिशेनरी
- 17:39में नहीं है, मेरा शब्दकोश पाप शब्द से खाली मिलेगा।
- 17:48मैं क्यों किसी के पांव हाथ लगाऊं?
- 17:54वर्ष भर में? जो मैंने पाप किये तो मैं ठेस
- 18:05पहुंचाई, जीव जंतुओं को मार दिया फिर न बोलने वाले पंछियों।
- 18:16जीव जंतु जो मेरे पांव के नीचे आ गए, गलती से जानबूझकर तुम्हारा मन
- 18:28दुखाया, तुम्हें नुकसान पहुंचाया उसके लिए मुझे क्षमा कर दो।
- 18:38बिल्कुल ठीक है, ध्यान से सुनो मेरी बात मैं इसलिए क्षमा नहीं
- 18:47मांगता, क्योंकि यह पाप मुझसे होता नहीं।
- 18:54मेरे से पाप होना असंभव है अगर अर्जुन को मैं एंकर न करता
- 19:0840,00,000 लोग न मरते 18 सोनी से न ढेर न होती लाशों के ढेर में
- 19:14तब्दील न होती। कौन थकर मैं कर था, मैंने उकसाया,
- 19:26अर्जुन को वाणों की श्रेय पे बेशु जैसे महारती को सुला दिया।
- 19:33अपने हैं गुरु के गर्दन कटवा से ऐसे ऐसे व्यंकर काम किए हुए हैं
- 19:39मैंने लेकिन ज़रा भी ज़रा भी अफसोस नहीं ज़रा भी दुख नहीं ज़रा
- 19:50भी दर्द नहीं कोई माफी। वो मेरा भोजन थे, मैंने कर लिए
- 20:08इसलिए गोवर्धन जयंती ध्यान से समझना।
- 20:17ये जो माफी मांगने वाले हैं ये अज्ञानी है।
- 20:22इन्हें पता ही नहीं है। इन्होंने किया होगा, ये अपनी जगह
- 20:28ठीक है। किया होगा तो इन्हें माफी मांगकर
- 20:33ही पीछा छुड़ाना पड़ेगा। जिसने कतल किया है सजा तो भोगकर
- 20:38ही आना पड़ेगा हमने जब किया ही नहीं नाजायज, हम सजा भोगते रहे
- 20:53क्यों माफी मांगे से? और फिर?
- 21:00किस्से माफी मांगूंगा, कौन माफी मांगेगा माफी मांगने वाला?
- 21:07फिर मैं जिससे माफी मांग रहा हूँ माफ़ करने वाला फिर मैं।
- 21:17सभी जगह मेरा ही पसार रहा है मैं ही मैं हूँ, मेरे सिवा कुछ नहीं
- 21:26अहम् ब्रह्मास्त्र एम आत्मा प्रश्न कौन किस्से माफी मांगे?
- 21:36भेद बुद्धि की बात है और मुझमें भेद है।
- 21:44मैं एक हूँ, कहीं कोई कहीं कोई छिद्र नहीं।
- 21:55कहीं कोई टूट फूट नहीं, बिल्कुल एक हूँ सारे विश्व ब्राह्मण में
- 22:01छाया हुआ यकस्म ठीक कहा जिन्होंने बात किया होगा माफी मांगे लेकिन
- 22:17ये मूड है मेरे दष्ट। जैसे मैं कर लूँगा, उससे मैं माफी
- 22:27मांग लूँगा, लेकिन गोवर्धन मैं कभी।
- 22:37पाप नहीं करूँगा उससे पाप होते ही पाप नाम का शब्द मैंने कहा, मेरे
- 22:43शब्दकोश में रही जो करता हूँ ठीक करता हूँ, जो करता हूँ पुण्य करता
- 22:54हूँ और सही करता हूँ और भले के लिए करता हूँ।
- 23:01मैंने गर्दन कटवा दी, बच्चे अनाथ कर दिए, विधवाएं कर दी लेकिन ज़रा
- 23:11भी पाप ना है। किसी पाप की आंच मुझ तक पहुँचती
- 23:16ना। यही तो समझा रहा।
- 23:27गीता के चौबीसवें श्लोक में दूसरे अध्याय के चौबीसवें श्लोक में यही
- 23:31तो समझा रहा हूँ कोई जलता नहीं मैं पाप की अग्नि मुझ तक पहुंचती
- 23:38नहीं और अगर तुम पाप की अग्नि में जल रहे हो।
- 23:42तो आ जाओ, आ जाओ हमारी बाहों में हम आस लगाए बैठे हैं अगर तुम पाप
- 23:57की अग्नि में जल रहे हो तो दौड़ आओ मेरे पास।
- 24:02तुम्हारा स्वागत है कौन रोकता है तुम्हें कोई नहीं रोकेगा मैं जो
- 24:08हूँ मैं बैठा हूँ, तुम आ जाओ मेरे पास हम तम सर्वाबावे भव मोक्ष
- 24:16स्वामी महसूस। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त
- 24:20कर दूंगा। ज़रा आओ तो पुकारा तो बहुत लगातार
- 24:36बजता हुआ अनहद का नाक तुम्हें क्या खबर देता है तुम आज तक
- 24:41समझना। ये मेरी ही तो आवाज़ है तुम कब से
- 24:49सुन रहे हो, अभी तक नहीं आया ये मेरी पुकार है।
- 25:02तुम आ ही जाओ और ध्यान रखना कितना ही बड़ा साधु संत गुरु, महात्मा
- 25:14कितना ही बड़ा देवता देवी। आखिर उन्हें मेरे शरण में आना ही
- 25:22पड़ेगा। 1 दिन कोई नहीं बच पाएगा, सभी को
- 25:31मेरे शरण में आना पड़ेगा सभी को। ना कोई बचा है ना कोई बचा का देर
- 25:40अवेर हाँ जितना भटकना है भटक लो मेरी सृष्टि में भटक सकते हो
- 25:51जितनी देर भी तुम जाओ। कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जब थक
- 25:58जाओगे पुत्र तो मेरे पास आ जाना थक जाओगी पुत्री तो आ जाना मेरे
- 26:05पास, मैं तुम्हें अपनी बांहों में लेने के लिए बेताब बैठा है।
- 26:17अगर तुम व्याकुल हो उस आनंद के लिए तो मैं भी व्याकुल हूँ
- 26:24तुम्हारे लिए तुम्हें आने के लिए कोई भी तो नहीं रोकता है।
- 26:32ज़रा एक बार आने का संकल्प तो ले लो, यही कमी रह जाती है तुम तुम
- 26:41आने का संकल्प ही तो नहीं गजब तुम मेरी सृष्टियों में उलझते ही चले
- 26:48जाते हो। ऐसी चकाचौंध बिल्कुल है वो ठीक जो
- 26:59मैंने बनाई वो सृष्टि कम खिंचाव वाली नहीं होगी।
- 27:09वो भी तुम्हें खेचती है, लेकिन जब तुम थक जाओ, सब कुछ पा लो, जो भी
- 27:23मैंने बनाया भोगलो। और पांव के तृप्त नहीं हुए।
- 27:30सुख मिला पल भर का और उसके बाद खो गया।
- 27:47मेरा रास्ता सभी के लिए सर्दा खुला है।
- 27:50दिन भर रात कोई वक्त नहीं है। इस समंदर के गेट को बंद करने का
- 27:57कोई समय नहीं ना खुलने का कोई समय ये खुला ही हुआ है।
- 28:06कभी बंद नहीं होता। यहाँ के मंत्र तुम्हारे बंद हो
- 28:10जाते हैं लेकिन मेरा मंत्र बंद नहीं होता।
- 28:14कभी ये मंत्र श्रद्धा के लिए खुला है तुम जब जाओ।
- 28:24कभी ऐसा वेला न पाओगे कि तुम आके द्वार खटखटा दो और मुझे अनुपस्थित
- 28:30पाओ नहीं मैं सदा जागता रहता हूँ तुम्हें निहारता हुआ सदा बांध
- 28:37देता हूँ, सदा आवाज देता हूँ। तुम मुझे यह मत कहा करो कि तुमने
- 28:51मुझे पुकारा नहीं दिन भर रात पुकारना हूँ पूछो जो योग्य हुए
- 28:57दिन भर रात पुकार। रहे।
- 29:09हमें तुम बुला आवाज देखे हमें तुम बुला।
- 29:28मोहब्बत में दना नहम को सताओ। आवाज दे रहा हूँ तो मैं कब से अगर
- 29:52बेचैन हो गए हो तो आ जाओ। मेरे पास एक ही रास्ता है चैन के
- 29:59लिए एक ही रास्ता है। संतोष के लिए एक ही रास्ता है
- 30:05तृप्ति के लिए मेरे पास आ जाना भटकना चाहते हो तो भी तुम्हारी
- 30:14मर्जी उलझो खूब उलझो यह सृष्टि भी बड़ी प्यारी।
- 30:24और जब इस उलझन से कुछ न मिले, गाठों की कैद मिले और कैद का दर्द
- 30:39और दुख मिले। और घबरा जाओ तो मेरे पास आ जाना।
- 30:53मेरा दर्द तुम्हारे लिए श्रद्धा खुला है।
- 31:05मनीष का सवाल है, सूक्ष्मलोक से? कल के प्रवचन में आपने कहा दान की
- 31:19अगर लकीर बाकी रह गई तो वह तुम्हारे अहंकार को बढ़ाएगी और
- 31:26बाबा? धान की लकीर हमेशा छूट जाती है,
- 31:32क्या करें? बड़ा असमंजस में डाल दिया आपने,
- 31:43हम दान करते हैं। जैसे इच्छा के बिना कोई काम नहीं
- 31:50होता, वैसे इच्छा के बिना कोई दान नहीं होता है।
- 31:58इस समस्या में क्या किया जाये बाबा क्या कोई कभी मुक्त न हो
- 32:03सकेगा? आपकी शब्द बड़े गहरे अगर दान देने
- 32:12वाला दाता बन गया तो दाता तो एक ही है तो फिर परमात्मा से।
- 32:23झगड़ा तुम्हें महंगा पड़ेगा क्योंकि दो दाता नहीं होते, दाता
- 32:26एक होता है, तुम भी दाता बन गए और एक और दाता है जिसने तुम्हें
- 32:33दिया, फिर तुमने उसका प्रतिद्वंद्विता शुरू कर दी, बैर
- 32:39मोर ले लिया, उसके शरीर के बन गए। तो ऐसे में क्या किया जाए?
- 32:51मनुष्य के सवाल अक्सर ही बड़े अच्छे होते हैं।
- 33:04शरारती है। लेकिन सवाल बढ़िया कर देता है, एक
- 33:10शब्द में तो मैं समझा दूंगा। सवाल बड़ा पेशेदा है जो आप बड़ा
- 33:17सर ले किस ढंग से दान किया जाए कि दान की लकीर ना सोखे?
- 33:31धन भी तुम त्यागते हो, आप गौर से सुन लेना तो मैं एक शब्द में जुआ
- 33:36दे दूंगा। धन भी त्यागते हो, मल मूत्र भी
- 33:43त्यागते हो, सुबह रोज़ नहीं त्यागते अगर तुम्हारा दान मल
- 33:50मूत्र की तरह त्याग हो जाए तुमने कभी कहा कि मैंने पांव भर या आधा
- 33:57शेर भर मूत्र और मल त्याग दिया? तुम्हें याद रहता है बताओ वृद्ध
- 34:10लोग तो खुश होते हैं क्या आज दस्त क्या आया?
- 34:15कमाल आया ऐसी ही खुशी मिले तुम्हें दान करने के बाद।
- 34:21वो भी तो दान है तुम छोड़ते हो उसे तुम्हारे शरीर का अंश था कभी
- 34:28लेकिन अब तुमने छोड़ दिया मल मूत्र की तरह अगर दान हो जाए जैसे
- 34:33मल मूत्र छोड़ा तुमने वैसे ही दान को भी छोड़ दो।
- 34:38उसकी कोई रेखा ना रहे या बता दो अगर मरमूत्र की रेखा कोई बीच में
- 34:45रहती है तुम्हारे रहती है क्या? बस ऐसे अगर दान हो जाए, सहजता से
- 34:56दान हो जाए। प्राकृतिक रूप से दान हो जाए।
- 35:00लेकिन तुम इस बात को थोड़ा सा ढंग से समझो।
- 35:06कई बेर मौके आते हैं। तुम्हारे मन में दान करने की भीतर
- 35:13से प्रेरणा आती है, वो परमात्मा देता है, तुम दबा लेते आओ।
- 35:20तुम कहती नहीं, अगर ये चार हैं और दो दान कर दिए तो फिर मेरे पास तो
- 35:26दो ही वचन बस यही हिसाब किताब। किन्हीं पीते किन्हीं बाकी है
- 36:07मीनू के हो हिसाब? ले बैठा किन्नी पीती तकिन्नी
- 36:19भाटिया मेनू अहो हिसाब ले बैठा ये हिसाब तुम्हें ले बैठेगा ले बैठ
- 36:30रहा है। इसलिए सभी संत कहते हैं कि इस
- 36:37खोपड़ी को जो हिसाब लगाती है इसको छोड़ दो, हृदय हिसाब नहीं लगाता,
- 36:47हृदय कहता है तुम्हें बांट दो। और बाबा नानक बाण देते।
- 36:57पिता कहते हैं, जेले कुछ सच्चा मुनाफ़े वाला सौदा करके आना और
- 37:08बाबा संतो को। भूखे पेटों को भर के आ जाते हैं
- 37:16पिता पुजते हैं माल पिता वो तो मैं सच्चा सो तो करा है, आपने कहा
- 37:22था ना क्या करा है भूखे के संत चार पांच दिनों के भूखे?
- 37:32उनको भोजन खिलाया। इससे ज्यादा सच्चा सौदा और क्या
- 37:37होता है बताओ पिता ने माथा पीट लिया है, सभी पिता माथा पीट लेते
- 37:46हैं, ध्यान रखना। बच्चा अपराधी हो जाए, बलात्कारी
- 37:53हो जाए हत्यारा हो जाए, गैंगस्टर हो जाए, पिता बहुत कुछ होगा,
- 38:01बच्चा सन्यासी हो जाए, पिता बहुत दुखी होगा।
- 38:12सन्यासी होने में पिता को बड़ी तकलीफ है, गैंगस्टर हो जाये, पिता
- 38:19को कोई तकलीफ नहीं, चोर हो जाये उचक्का हो जाये ये राजनीतिक और
- 38:27क्या होते हैं? चोर उचक्के ही तो होते हैं।
- 38:37जैसे जैसे दुख बढ़ेगा, धरती पर जैसे जैसे दुख बढ़ेगा वैसे वैसे
- 38:45राजनीति बढ़ेगी। आज सारी धरती दुखी है और सारी
- 38:53धरती आज राजनीति में घुस गई। क्यों दुख के कारण दुख राजनीति
- 39:03में ले जाते हैं तो हर घर में राजनीति हो रही है?
- 39:09बड़ा भाई चाहता है मैं छोटे का हड़प लू और छोटा चाहता है मैं
- 39:14बड़े का हड़प लू। हर घर में राजनीति होती है।
- 39:22इसका मूल कारण है दुख एक शब्द मैंने पहले बोला इसे लिख लेना
- 39:32दुख। व्यक्ति को राजनीतिज्ञ बनाता है।
- 39:38अगर ये भ्रम तुम्हारे मन में हो के राजनीतिज्ञ की चरम सीमाओं को
- 39:44छूने वाला, चरम गद्दियों पर बैठने वाला व्यक्ति बहुत सुखी है तो इस
- 39:51भ्रम को निकाल फेंकना। क्योंकि ये सत्य नहीं है।
- 39:56परम दुखी व्यक्ति बड़ी से बड़ी गद्दी पर बैठ जाता है और बड़ी से
- 40:04बड़ी गद्दी उसे सुकून नहीं दे पाते।
- 40:10ये तो नाक कट जाती है। तो बनावटी मुस्कराहट से मुस्कराते
- 40:16हैं, ये बड़ा अजूबा है। गधा कभी मुस्कराते हुए देखा है और
- 40:26गधा जब मुस्कराता है और राजनीतिज्ञ जब मुस्कराते है तो
- 40:31कहर डाल देता है। मुस्कुराहटें नकली होती है भीतर
- 40:38तो इनके आग जली होती है उससे बदला लेना है, उसको दबा के रखना है,
- 40:46उसको ऊंचे नहीं उठने देना उसका क्या इंतजाम करना है?
- 40:50जेल सलाखों के पीछे उसको कैसे ले के जाना है?
- 40:54इनका मन दिन भर रात यही शतरंज की बिसातें विचार करता है।
- 41:01राजनीतिक होना बड़े से बड़ा दुख है और मैंने कहा जैसे जैसे।
- 41:10इस संसार में विश्व में दुख बढ़ता जाएगा, राजनीति बढ़ती जाएगी।
- 41:17आज तो घरों तक में राजनीति हो रही है।
- 41:21वो जमाने गए जब पांच भाइयों और उनकी संतान बैठते।
- 41:29जमीन पर बैठकर इकट्ठा खाना खाया करती थी और हमारे विष्णु ने हमें
- 41:36एक मंत्र दिया था वसुधैव कुटम्बकम सारी वसुधा एक परिवार की तरह वो
- 41:44वक्त गए, आज तो वक्त ही है। कि बस मैं और मेरी माशूका और आगे
- 42:02आगे वक्त आएगा जब न माशूका रहेंगी।
- 42:08न मैं रहेगा, दोनों अलग अलग हो जाएंगे।
- 42:11तुम देख लेना जल्दी ही ऐसा वक्त आने वाला है।
- 42:17अभी कल ही मुझे किसी ने प्रश्न पूछ लिया शादी के बारे में क्या
- 42:23कहले शादी तो बंधन है। मैंने कहा देखो जिनके लिए बंधन है
- 42:36वो शादी न कराए, जिनके लिए बंधन नहीं है, वो मज़े से कराए तो फिर
- 42:45बच्चा पैदा करे न करे। फिर वो ही जवाब जिनके लिए बंधन है
- 42:51बच्चा ना करें, जिनके लिए बंधन नहीं है वो तो आप हिसाब लगा सकते
- 42:58हो 1,61,000। 81 बच्चे थे भगवान कृष्ण के
- 43:131,61,081 बच्चे भगवान कृष्ण थे 16,108 रानी।
- 43:25आठ रानियाँ कहते वैलिड थी और 1,00,000 क्षमा करना 16,100
- 43:39रानियाँ इनवैलिड थी, नहीं, कोई इनवैलिड नहीं।
- 43:43जब कृष्ण ने अपना ही ली फिर इनवालिड कैसे है कि इनवालिड तो
- 43:48होती अगर उनकी रजामंदी के बगैर उन्हें रस्ता हो तो?
- 43:54उनकी याचना के उपरांत उन्हें आश्रय दिया गया।
- 44:02यह कोई जबरदस्ती नहीं होती, बुरा नहीं होती।
- 44:0716,108 ज़रा भी बंधन नहीं, कच्चे धागे का सामान भी बंधन है
- 44:14तुम्हारे लिए अगर एक बंधन बनता है तो मत बनाओ।
- 44:22इट वेरीस समबडी टू माइंड टू माइंड।
- 44:25शरीर से शरीर और दिमाग से दिमाग अलग अलग होगा।
- 44:34तुम्हारा फैसला जो मानते हैं, शादी बंधन हैं वो ना कर।
- 44:42ये जो नियम और कायदे कानून समाज थोप देता है ना समाज बड़ा
- 44:48डिक्टेटर है, समाज तानाशाह है। अगर तानाशाह देखना हो तो समाज को
- 44:54देख ले। समाज से बड़ा तानाशाह कोई नहीं
- 44:59समाज। अन्नकूट है, बांटी बांटी की
- 45:03सब्जियां, चावल, कढ़ी, पकौड़े बिच में दाले होते हैं उसको अन्नकूट
- 45:09कहते हैं। समाज अन्नकूट की तरह है।
- 45:13सब के अलग अलग विचार इकट्ठे कर लिए गए और समाज बन गया।
- 45:30ये तुम्हारा निजी मसला है। तुम कितने बच्चे पैदा करो
- 45:35तुम्हारी इच्छा अभी कल ही मेरे पास किसी ने प्रश्न पूछ लिया बाबा
- 45:43बड़ी दुविधा में। मैं आरएसएस का स्वयंसेवक हूँ और
- 45:51हमारे सुप्रीमो ने ऑर्डर कर दिया कि तीन बच्चे पैदा करो, मैंने कहा
- 45:59तो करो, सुप्रीमों का ऑर्डर तो मान हो।
- 46:05लेकिन दूसरे क्या करेंगे? मैंने कहा बिल्कुल तीन बच्चे पैदा
- 46:12करो। सरकार से कहो हम पांच बच्चे पैदा
- 46:16करने गए, जापान वाला हाल न हो जाए यहाँ पर आज जापान तरस रहा है
- 46:21बच्चों के लिए वहाँ की। लड़के लड़कियां बच्चे निर्भर करते
- 46:26हैं उनके लिए बोझ है और जन के लिए बोझ है।
- 46:31ना करो क्यों बोझ को रखना है सर के ऊपर सरकार से बोल दो।
- 46:42अमेरिका की तरह हर बच्चे का भरण पोषण, बिमारी शुमारी में उनका
- 46:47इलाज, खाने के लिए भोजन सभी फैसिलिटीज मुहैया करा दो हम तीन
- 46:55का हम तो पांच कर देंगे, 20 कर देंगे तुम बताओ।
- 47:00चौके सिक्के मारते जाएंगे, लेकिन तुम्हारी शर्त है हमारी भी छोटी
- 47:08सी शर्त है, अरे भूखे मारने के लिए थोड़ी जन्म देंगे।
- 47:19भोजन की व्यवस्था कर दो, बीमार हूँ तो दवाई की व्यवस्था कर दो,
- 47:23कपड़े लत्ते की व्यवस्था कर दो रहने का मकान की व्यवस्था कर दो।
- 47:27बच्चे तुम जीतने कहो के पैदा कर देंगे और इन्होंने कोई बच्चा नहीं
- 47:32पैदा किया। बड़े मज़े की बात है और जिसने कोई
- 47:36बच्चा नहीं पैदा किया। वो ऐसी बातें कहता है कि तीन
- 47:39बच्चे पैदा करो, एक डिक्टेक्टशिप है कृष्ण नहीं, किसी से कहते कि
- 47:49पांच करो, खुद करते हैं 1,61,081 बच्चे।
- 48:02यह आंकड़ा थोड़ा सा गलत फिर हो सकता है।
- 48:04आंखें की तरफ ख्याल मत किया है। 16,108 रन में 10 बच्चे हर एक के
- 48:1410 ही थे, बस उसने सब लगा रखा था के 10 से ज्यादा में।
- 48:20और एक चारुमती रुक्मणी से उसके 11 थे बेटी एक ही थी।
- 48:25उसके बेटे का एक फॉर्मूला होता है तुम सोचोगे हैरान मत होना।
- 48:36कृष्ण की बेटी एक ही थी। पांडवों के बेटी हुई ही नहीं,
- 48:46कहते हैं युधिष्ठिर ने शराब दे दिया, कुरबों के बेटी हुई ही
- 48:53नहीं, एक बेटी हुई दुशाला धृतराष्ट्र के।
- 48:59एक ही धृतराष्ट्र की हुई, एक ही कृष्ण की हुई।
- 49:02ये क्या माजरा है? एक फॉर्मूला था वह फॉर्मूला कानों
- 49:12से काम कर कानों से काम तक बहुत से लोग मुझसे खफा हो जाते हैं।
- 49:17बाबा आप आंधी बात करके फिर सारी बात नहीं बताते वाह भाई वाह बड़े
- 49:25बात तो हो तुम तो भाई नाराज हो जाते।
- 49:31ये भी क्या फराक दिली हुई आंधी बात बता दी आंधी बताई क्या बता
- 49:36तुम्हें? मारने के मंत्र बता दो सबको
- 49:41तुम्हें क्या पता कितने झगड़े होते है रोज़ कि बाबा मंत्र बताओ
- 49:47मैंने तो उसको मारना है क्यों बताऊँ भाई तुम मार दो नहीं तुम से
- 49:54मंत्र लेके मारना है नहीं मैं नहीं बताऊँगा।
- 50:00दुश्मनी तुम्हारी है, मेरी ख्याल दुश्मनी से मेरी दुश्मनी होगी तो
- 50:05मैंने मत लूँगा, मैं देखूंगा उसे माफ़ करना है या दंड देना है ये
- 50:10मेरा काम मारना तुमने है मंत्र मुझसे पूछ रहे हो।
- 50:18ये पुजारी वाला काम है ना वो हमारे मंदिर में एक पुजारी रहता
- 50:21था सामने गौशाला में सांप सांप निकल गया और निकलता निकलता सभी ने
- 50:28देख लिया, सब उसके पीछे पड़ गए। सांप बिल के भीतर घुस गया।
- 50:33सांपले मंदिर। मंत्र के पुजारियों को बुलाया
- 50:36गया। अब नाम मैं क्या लूँ?
- 50:38बुद्धूओं के क्या नाम होते हैं? बुद्धूओं का तो एक ही नाम होता है
- 50:47उसको बुलाया गया वो मैंने घर से कहने लगा ठीक ऐसा।
- 50:54कर। इस खोड़ में हार्ट डाल अच्छा
- 51:04बद्रीनाथ जी होते थे, इस खोड़ में हार्ट डाल ठीक है, डाल दूंगा तू,
- 51:11क्या करेगा मैं मंत्र? बस ये तुम्हारे तीन बच्चे पैदा
- 51:18करने की सलाह देने वाले मंत्र पढ़ते रहते हैं।
- 51:23कहता मैं मंत्र पढूंगा और बद्रीनाथ आगे उछारते हो कहता ठीक
- 51:29डसेगा तो मेरे को डसेगा और तू मंत्र पढ़ेगा ठीक है।
- 51:34जाओ जाके टेली बजाओ ये लोग टेलीयों से शादी करा देते हैं,
- 51:44ज़माना जल्दी ही आ जाएगा। कहने वाले बिल्कुल ठीक कहते हैं,
- 51:50आज मानसिकता बदल गई है। वातावरण बदल गया है।
- 51:55आज वो ज़माना नहीं रहा कृष्ण वाला आज तो ज़माना बुध वाला भी नहीं
- 51:59रहा। आज ज़माना वो आ गया जब एक बच्चे
- 52:05का भार वहन तुम नहीं कर सकते। मेरी बातों को ध्यान से समझ लेना।
- 52:12ये आपको आध्यात्मिकता से में बड़ी सहायता करेंगे।
- 52:18कोई ऐसा काम न करो, जिससे तुम्हारे दिमाग पर बोझ बने जीतने,
- 52:22जन्म चूके हो, जन्म चूके हो, अब ब्रेक लगा दो भाई, इनको ही पाल
- 52:29बोस लो। और प्लान शिलान बनाने की जरूरत
- 52:33नहीं है। आगे आगे दिन खराब आ रहे है।
- 52:41मेरे चाचा से कह देते है कि तनाव मत लेना, कोई बात नहीं, शादी करवा
- 52:50लो, कुछ नहीं होता है। कोई बोझ वगैरह नहीं होता है।
- 52:53मैंने कहा देखो, तुम्हारे जमाने की बातें थी, लेकिन बोझ वगैरह की
- 52:57मैं बातें मानता ही नहीं। मेरा एक लक्ष्य है।
- 53:02जीस दिन वो लक्ष्य पूरा हो जाएगा। मैंने ठान रखे संकल्पवान हूँ बस
- 53:09उसके बाद मैं कभी भी शादी कर लूँ। चाचा कहती है, ठीक है, अब आजकल के
- 53:17बच्चे नहीं कहते थोड़ा सा पर स्टैंड, बोले शादी का क्या?
- 53:232 साल आगे पीछे लोग तुम्हें वर्माएंगे लोग तुम्हें कहेंगे?
- 53:30वक्त बीता जाता है, लेकिन तुम लोगों की बात मत सुनना।
- 53:34समाज बड़ा उपकार्य परोपकारी है। इस मसले में तुम्हें बड़ी राय
- 53:39देखा, लेकिन किसी की बात मत मानना।
- 53:44पहली बात तो बच्चा पैदा ही न करना, ये तीन बच्चों की बात करते
- 53:47हैं। इनसे कहो हमारे बच्चे का जन्म
- 53:55पालन पोषण, पढ़ाई लिखाई, कपड़े लत्ते, रिहाइश, दवाई, वोटे सारा
- 54:06खर्चा जीवन भर का। तुम्हें पता नहीं ये बिलकुल
- 54:11देंगे, तुम देख लेना ये देंगे जापान आज दे रहा है और जहाँ भी
- 54:18आबादी कम हुई वहाँ ऐसा ही होता है जहाँ आबादी अभी घनी है अमेरिका
- 54:27में। मेरी बहन मुझे बताती थी कि कोरोना
- 54:32के अंदर बकायदा हमें घरे बैठे, हमारा खर्चा मिल जाता था।
- 54:384000 डॉटर्स क्यों? क्योंकि हमने ऑर्डर किया है वो
- 54:44यार रिस्पांसबल। तुम्हारा जो खर्चा होगा हम से ले
- 54:49लो, घर बैठे रहो बाहर न निकलो, बाहर निकलोगे छुआछूत की बिमारी
- 54:54है, सबको बीमार करो, घातक बिमारी है, मृत्यु दायिनी है तुम भीतर ही
- 55:02बैठे रहो बाबा हम तुम्हारी चेक भेज देंगे।
- 55:09इनकी बातों में ये तीन कहें ये पांच कहें एक कहें इन्होंने खुद
- 55:14कोई बच्चा नहीं पैदा किया, कोई देख लो दूसरों को राय देने वाले
- 55:20खुद बच्चा नहीं पैदा करते। क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता
- 55:24बच्चे की कितनी तकलीफ होती है। बच्चे को जन्म देना माँ का हुलिया
- 55:29बिगड़ जाता है। उसको पालना पूछना बीमार हो जाए,
- 55:36उठा के बाबू अपनी नींदें खराब। और फिर बच्चा बड़ा हो के कहता है
- 55:43तुमने किया है क्या? अरे तू इतना बड़ा हो गया?
- 55:47इतना ही बड़ा मन जन्मा बेतर की बात है?
- 56:04तो मैंने कहा देखो भाई इसकी बात मत मानो, कहता है भक्त हूँ, मैंने
- 56:09कहा फिर भक्ति को करो पर याद रखना बेटा ये तुम्हे चूट चूट के मार
- 56:20देंगे। मेरी मानो तो एक भी बच्चा पैदा ना
- 56:25करना पहले गवर्नमेंट से लिखा ले ना बच्चा पैदा करूँगा उसकी
- 56:37जिम्मेदारी तुम्हारी। जापान बच्चों के लिए तरस रहा है
- 56:46और बहुत से मुल्क है। आने वाली जैसे युद्ध में देखते हो
- 56:50ना अहंकार बढ़ता जाता है, बदला लेने की भावना बढ़ती जाती है।
- 57:00नाम तो होगा पुतिन का मरींडे भगाने बैठे हैं नाम होगा ट्रंप का
- 57:14मरींडे भगाने बैठे बैठे। इन्होंने तो जवान ही हिला देनी
- 57:22हमारे वक्त कुछ और थे भाई हमारे से पहले हमारे चर्चा के वक्त कुछ
- 57:28और थे। उससे पहले कुछ वक्त और थे, कोई
- 57:31फर्क न पड़ता था। 26 मई मिट्टी में खेल खोल के बड़े
- 57:36हो जाते। और तुमसे ज्यादा आनंद मानते आज जो
- 57:40तुम सैर सपाटे करके सारी जिंदगी में कुल मिलाकर आनंद ले पाते हो।
- 57:45बच्चे 1 दिन के खेल में मिट्टी में खेल खेल के उतना आनंद ले पाते
- 57:51आज वक्त हो गए। आज मिट्टी है ही नहीं।
- 58:00तो इन मूर्खों के पीछे मत जाना, ये तुम्हें पता नहीं क्या कहेंगे
- 58:05मेरा चाचा मुझे कहने लगा बेटा बच्चे दो, मैंने शादी करा ली।
- 58:10उसके बाद पिताजी देह तिहारते हुए मेरे।
- 58:18जांघों पर प्राण त्याग और माता से बोले बागी जी को कह देना बागी जी
- 58:24कहते थे की शादी प्राद है, अब आखिरी इच्छा थी, उनकी आखिरी इच्छा
- 58:31होती, लेकिन अगर मुझे ज्ञान न हुआ होता तो मैं उनकी बात नहीं मानता।
- 58:38ये तो मेरा प्राण था। 85 में 28 अक्तूबर को मेरा प्राण
- 58:42पूरा हुआ, उसके बाद 87 में पिताजी कह गए और 91 में मैंने शादी कर
- 58:49ली। 39 वर्ष की उम्र में है।
- 59:00एक बेटा हुआ चर्चा कहने लगा देखो अरे बेटा एक आंख का क्या मूंदना
- 59:11और क्या खो रहे हो? अपना ढंग होता है कहने का एक आंख
- 59:17का क्या मूंदना और क्या खोला? दो तो होने ही चाहिए ना मतलब मैं
- 59:23समझ गया कोई इधर उधर हो जाए कुछ मैंने कहा वो तो दोनों के साथ भी
- 59:33हो सकता है। ऐसा नहीं है।
- 59:35कम आसार होते हैं आसार। लेकिन दो बच्चे जरूर जाएंगे।
- 59:43ठीक चार दो बच्चे हो गए, वही बात है।
- 59:50बड़ा बेटा 25 वर्ष की जवान उम्र में उसका मर्डर कर देगा।
- 59:55अभी 10 दिन पहले मेरे पास फ़ोन आया बाहर खड़ा।
- 1:00:01आश्रम के देहली से माथा रगड़ रहा हूँ, मुझे क्षमा कर दो, मैंने कहा
- 1:00:13मैंने तो कब का क्षमा कर दिया? अगर दंड देना होता तो दंड दे
- 1:00:20देता। अरे छे सात और सूत गए तू कहता है
- 1:00:25क्षमा कर दो, क्षमा ही किया हुआ है, लेकिन उस कसम से कुछ जिसके घर
- 1:00:32हिसाब होता है मैं थोड़ी हिसाब मैं खुद अपने ऊपर हिसाब लेता ही
- 1:00:36हूँ, तुने मारे हैं तू ही भुगत। मैं इसमें क्या कर सकता हूँ?
- 1:00:45मुझसे गलती हो गई और तुमने तो ही मारना था ना अगर तुम जन्म दे सकते
- 1:00:50थे, तुम बच्चे को जन्म दे दो, बच्चे को जिंदा कर दो उसी को और
- 1:00:56तुम क्षमा ही हो, परमात्मा की दरगाह में भी क्षमा हो।
- 1:01:00यही बात तो महात्मा बुद्ध ने कहा था, देवव्रत ने जाते हुए पंछी को
- 1:01:06तीर मारा फड़फड़ा के गरजा मर गया, बुद्ध ने उस प्राणी को फरफराते को
- 1:01:14उठाया, लेकिन वह बचना सका, मर गया।
- 1:01:18देवदत्त कहने लगा छोड़ ये मेरा शिकार है बुद्ध कहने लगे शिकार तो
- 1:01:25तेरा है, लेकिन तुने इसे मारा क्यों कहता?
- 1:01:30मैं तो तीरंदाजी सीख रहा हूँ, अब तू चिंता कर उसको।
- 1:01:37बुद्ध कहने लगे, देवदत्त कहने लगे मैं नहीं कर सकता, ये मुझे याद
- 1:01:40नहीं आता। बुध कहने लगे जो जिंदा नहीं कर
- 1:01:47सकता उसे जीवन को छीनने कहा कभी नहीं सिर्फ जीवन को वो ही छीने।
- 1:01:57जो जिंदा करने का सामर्थ्य रखता हो।
- 1:02:03दूसरा जीवन को ना छीन कोई भी तुम्हारा प्रयास ये ठीक है दंड दे
- 1:02:10देते है 20 साल का लेकिन बच्चा नहीं जिंदा होता है।
- 1:02:17मैंने कहा तू चला जा यहाँ से जब मैंने तुम्हें कुछ कहा ही नहीं,
- 1:02:23मेरी आत्मा जलती है तो जल्द नहीं दो मैं क्या कर सकता हूँ बताओ
- 1:02:28मुझे बताओ मैं क्या कर सकता हूँ कि मुझे क्षमा कर दो कर दिया भाई
- 1:02:33बदला कब लिया ये बताओ। अब इसको चैन नहीं है, इसीलिए मैं
- 1:02:41कहता हूँ बुरे कर्म मत करो अब कर दिया इसने इसी पीसीओ पे जाके।
- 1:02:57फ़ोन कर दिया। बस इतनी सी बातें कहूंगा क्या
- 1:03:01बोला क्या नहीं बोला वो छोड़ दो पिताजी मुझे कहने लगे बेटा शादी
- 1:03:05कर ले इनडैरेक्ट शादी कर ली, दो बच्चे हो गए।
- 1:03:13बहुत से भगत जन मेरे पास आए नहीं, इनका क्या हुआ कहते बाबा तुमने
- 1:03:25शादी कर ली पर क्या अपराध कर ली? राम ने नहीं की, कृष्ण ने नहीं की
- 1:03:35कबीर नानक किसको मानते हो तुम? बुद्ध किसको मानते हो?
- 1:03:41उसने शादी नहीं की। क्या ये तुम्हारी पूर्व धारणाएं,
- 1:03:45मान्यताएँ, सामाजिक मान्यताएँ ये खराब खोपड़ी वालों की बातें होती
- 1:03:51हैं। के भाइयों ने इकट्ठे ही रहना है।
- 1:03:54क्यों भाई अगर कोई एक रावण हो जाए या विभीषण हो जाए, दोनों की मत ना
- 1:03:59मिले तो एक क्यों रहना है? इसलिए के बांडे खडकते रहे।
- 1:04:07हाँ भाई उन्हें अलग कर दो। भाइयों की भी तो मत नहीं मिल
- 1:04:09सकती, भाइयों की छोड़ो, बाप बेटे की मत नहीं मिलती कहाँ मिली
- 1:04:14हिरण्यकशब के प्रहलाद के साथ? मत मिली नहीं।
- 1:04:21ये कोई जरूरी नहीं है। यहाँ तो एक परिवार ऐसा है जो आज
- 1:04:27भी कहता। है।
- 1:04:28हम पाँचों भाई इकट्ठे हो जाए जब मत।
- 1:04:32ही नहीं मिलती तो पाँचों भाई? क्या इकट्ठे होगे लड़ोगे?
- 1:04:37अलग अलग रहो, बस सुखी रहो, एक ही मंत्र याद रखो।
- 1:04:43अलग रहो या इकट्ठे। रहो सुख ही रहना।
- 1:04:45चाहिए सुख को मूल मंत्र समझ लो अगर इकट्ठे रह के सुख।
- 1:04:51मिलता है तो ठीक। नहीं मिलता तो अलग हो जाओ लेकिन
- 1:04:55आगे आगे ज़माना क्या आएगा ज़माना यही आने वाला है।
- 1:05:04पहले भाई भाई अलग होते थे। मियाँ बीबी हो जाते थे इकट्ठे और
- 1:05:13अपने बच्चों के साथ रहते थे। अब अपने बच्चों से भी अलग रहेंगे
- 1:05:17मियाँ बीबी? और फिर वक्त ऐसा आएगा मियां बीवी
- 1:05:22दोनों अलग अलग रहेंगे। तुम्हारे दिमागों की सहनशक्ति।
- 1:05:28कम होती जा रही है तुम्हें बता दूँ।
- 1:05:33सहनशक्ति कम होने का कारण है। कि तुम दूसरे को।
- 1:05:41बर्दाश्त नहीं कर सकते। सहन शक्ति कम होने का ये
- 1:05:48इम्युनिटी कम होने का ये लक्षण है।
- 1:05:51तुम दूसरे को सहन नहीं कर सकते, तुम्हारी कोई गलती नहीं।
- 1:05:57छोटी छोटी। बातों को प्रथम झड़प पड़ती हो
- 1:05:59क्योंकि सहन शक्ति नहीं हमारी। जमाने की बातें और थीं।
- 1:06:05कबीर के जमाने की बातें और थीं। कबीर को लोई मिली और।
- 1:06:11मुझे भी लोई ही मिली। ऐसी सहिंसक्ति अगर हो तो शादी।
- 1:06:18बंद नहीं होती फिर शादी स्वर्ग होता है स्वर्ग का।
- 1:06:27कौन करेगा जब तुम गिर गए चूकना? तुम्हारा टूट गया कौन करेगा?
- 1:06:32बस एक साथ ही होगा तुम्हारा। वो करेगा अगर तुम्हें लोई मिल गई
- 1:06:39तो वो करेगा अगर तुम्हें अदालतों में घसीटने वाले मिलेंगे तो
- 1:06:47तुम्हें यू विल हॅव टु कमिट सुसाइड इशारा ही समझ लेना।
- 1:06:56शादी करो तो पहले कर लेना देखो अलग रहेंगे जब चाहे मैं चला जाऊं
- 1:07:05जब चाहे तू चली जा मेरी। तुम पर कोई पकड़ नहीं तुम्हारी
- 1:07:10मुझ पर। कोई पकड़ नहीं।
- 1:07:12कोई शर्त नहीं, कोई शर्त होती नहीं प्यार में ये है प्यार तुम
- 1:07:25बंधन को। प्यार करते हो?
- 1:07:27वो भी होता है अगर बिलकुल। आसानी तरंगे एक मिक हो जाए, फिर
- 1:07:33राँझा की तरह, लेकिन कभी कभी कोई जोड़ा बैठता है।
- 1:07:39मगर प्यार शर्तों। कोई शर्त होती नहीं प्यार में।
- 1:07:48मगर प्यार? शर्तों।
- 1:07:51पे तुमने। किया शर्त नहीं होती क्या?
- 1:08:00लेकिन? आज मौका गया है आज वक्त।
- 1:08:02आ गया है। शर्त रखते हम।
- 1:08:06अकेले ही रहेंगे। और ध्यान रखना मैं तुम्हें एक बात
- 1:08:11अब आखिर में आध्यात्मिक की बात बता दूँ, ये तो बहुत सी बातें
- 1:08:16कहेंगे। आचार्य गुण?
- 1:08:19कि बंधन? है।
- 1:08:20बोले जाओगे ये। हो जाओगे वो हो जाओगे, लेकिन मैं
- 1:08:24तुमसे एक बात कहता हूँ। इनके दिमाग क्यों खेला रहते हैं?
- 1:08:33तुम्हारे बासों के एक चीफ ओहदे के ऊपर बैठा हुआ है, इन्हें फिक्र
- 1:08:39नहीं है कोई दाल भात का इन्हें भाव नहीं मालूम है।
- 1:08:45और आध्यात्मिक व्यक्ति को शादी नहीं करवानी चाहिए।
- 1:08:52शादी? करवाए।
- 1:08:54बड़े बड़े रेयरेस्ट। ऐसे मिलेंगे आसानी रंगों से
- 1:09:02युक्त। फिर उसको तो वो उसको तो आपको पता
- 1:09:05ही नहीं चलेगा अगर दूसरा है भी करे।
- 1:09:11जैसे बाचस्वती मिश्र। और उसकी घर वाली।
- 1:09:19शादी करके ले आया पिता कहने लगा शादी करा।
- 1:09:22दे करा दो पिता जी कोई बात नहीं बाबा नानक से कहने लगे पिता शादी
- 1:09:30करवा। दे करवा दो।
- 1:09:33करवा दे। और।
- 1:09:37वह ब्रह्मसूत्र की वाष्य टीका। लिख रहे थे।
- 1:09:42उदाहरण दे रहा हूँ। तुमने किसी की नकल नहीं करनी है,
- 1:09:47तुमने नकल करनी है अपने स्वय की जैसा तुम्हें अच्छा लगता है।
- 1:09:57वो सेवा करती रहे। दीप।
- 1:10:00जला जाते सांझ। होते सूरज।
- 1:10:02ढलता दीप जल जाता, खाना परोस जाती, पानी रख जाते डातन कुरली रख
- 1:10:11जाते। भोजन।
- 1:10:14की थाली उठा के ले जाते है। 30 वर्ष भीग गए ब्रह्मसूत्र का
- 1:10:21आखिरी श्लोक अनुवाद कर दिया गया 30 वर्ष।
- 1:10:2930 वर्ष के बाद जब। ब्रह्मसूत्र का आखिरी शब्द लिख
- 1:10:33दिया और लिख दिया कितनी शुभम बस। पूर्ण हो गया सारा।
- 1:10:40बोझ उतर गया। ये करना है वो करना है पूरा
- 1:10:45ब्रह्मसूत्र का वश करती हूँ, तो आज कुछ।
- 1:10:49थोड़ा सा। इंटेंशन वॉर की तरफ आयी अब तक
- 1:10:53अंतरमुखी था? उसकी घरवाली आई।
- 1:11:07धर्मपति ने। आके दीपक।
- 1:11:10जलाया सांझ हुई। पहली बार उसने।
- 1:11:14अपने घरवाली धर्म। पत्नी के हाथों का लाल चुरा दिखा
- 1:11:19अभी तक डाला हुआ था। बड़ा परेशान हुआ, हैरान हुआ।
- 1:11:27बाचस्वती मिश्रा। ये कौन है?
- 1:11:32उसने हाथ पकड़ लिया। कौन है बामती ने उसकी आँखों में
- 1:11:38झाँका स्वामी भूल गया याद। करो 30 वर्ष पहले मुझे शादी।
- 1:11:45कराके ब्याह के लेके आए थे। तुम मस्त हो गए मैंने मस्ती में
- 1:11:51खलल ऐसे भी जुड़े हुए हैं आचार्य जी।
- 1:12:07ऐसे भी जुड़े हुए हैं। लोई कबीर जैसे भी हो लम्बी साँस
- 1:12:15भरी वह जस्पती मिश्र ने वो याद तो आया बिल्कुल आया बारात ले के गया
- 1:12:21था, ब्याह के ले के आया था लेकिन याद नहीं रहा।
- 1:12:29तुम तो लाख लाख करते हो, वो तो कुछ है नहीं।
- 1:12:32प्री वेड्डिंग करते हो पोस्ट वेड्डिंग करते हो मिड वेड्डिंग
- 1:12:34करते हो बाहर के मुल्क में। करते हो यहाँ करते हो वो तो?
- 1:12:39कुछ है? नहीं।
- 1:12:47क्यों बर्बादी करते हो? पैसों की ऐसा कुछ चलता है?
- 1:13:02उसने कहा देखो मुझे क्षमा करता है।
- 1:13:05मैं भूल गया। था।
- 1:13:07इसमें मेरा कसूर का कुछ है। लीन होना कोई किशोर नहीं पर
- 1:13:12महात्मा के भीतर ही मैं गुम हो गया था, उसी की टीका लिख रहा था,
- 1:13:17मस्त हो गया और मस्त होना कोई अपराध नहीं है।
- 1:13:20तुम कहते हो ब्रह्मचर्य का पालन नहीं होता यहाँ तो कवारी
- 1:13:27लड़कियां। क्या बताऊँ तुम्हे सुहाग की?
- 1:13:33सेज कैसे सजाई जाती है ये बता देती हूँ और तुम्हे राम कथा भी
- 1:13:38सुना देती हूँ भागवत कथा सुनाने वाली किशोरियां।
- 1:13:43तुम्हे ये भी बता। देंगी कि सुहाग का सेज कैसे
- 1:13:46सजाया। कैसा जमानो आ गया भाई अभी और भी
- 1:13:54बदलेगा तुम चेतन रहना अपना शादी करना अगर बंधन लगता है तो?
- 1:14:08अब अच्छे पैदा करना अगर बंधन रखता है तो, और अगर।
- 1:14:13बंधन नहीं रखता। तो फिर तो तुम कृष्ण कैसे हो गए?
- 1:14:18कबीर जैसे हो गए, कबीर के नहीं बंधन बनता, नानक के नहीं बंधन
- 1:14:22बनता। खुद को बंधन बन जाता है।
- 1:14:27बंधन था तभी तो भागा। नहीं तो महल ज्यादा बढ़िया था।
- 1:14:34माँ के खाना कोई आसान बात नहीं होता।
- 1:14:38बंधन लगा तो भागा, बंधन लगा तो महावीर।
- 1:14:42भागे। लेकिन बस इतना फर्क था महावीर और
- 1:14:49बुद्ध। में महावीर बता के भागे पिता से
- 1:14:53कहने लगा, पिता जी। मैं चला जाऊ।
- 1:14:56कहते नहीं जाना मेरे रहते नहीं जाना मेरे मर जाने के बाद चले
- 1:15:02जाना कोई बात नहीं। और महावीर के पिता मर गए।
- 1:15:10देखिए कमाल की बात संस्कार करा के आ रहे हैं वापस बड़े भाई से बोले
- 1:15:15वो छोटे थे भैया, पिताजी ने कहा था संन्यास की बात मेरे जीते जी न
- 1:15:23करना। ऐसे भी लोग हुए हैं अब पिताजी का
- 1:15:27तो अंतिम संस्कार हम कर आए, अब बस क्या मैं चला जाऊं?
- 1:15:33यहीं से भाई तो बड़ा गुस्सा हुआ। ये कोई वक्त है कहने का?
- 1:15:41अरे मेरी बाह बन बराबर की। मुझे भी तो अफसोस है।
- 1:15:46कैसे संभालूंगा इतना दायित्व देखो मेरे जीते जी तुम ये बात मत कहना
- 1:15:52उसके बाद कह रहे हैं ना लेकिन? महावीर पुष्कर।
- 1:15:58गए जब भाई ने देखा कि। इसका होना ना होना।
- 1:16:02बराबर है। तो फिर भाई कहने लगे देखो मुझसे
- 1:16:05गलती हो गई, तुम्हें रोका नहीं जा सकता, तुम अगर चाहे तो जा सकते
- 1:16:11हो, तुम जब चाहे तो आ सकते हो तुम्हारा ही है।
- 1:16:16और चले गए, बता के गए। बुद्ध आंधी रात।
- 1:16:21भाग के गए भगोड़ों की तरह। उनके लिए बंधन था, महावीर के लिए
- 1:16:26बंधन नहीं था, महावीर के लिए भीतर की चेतना की प्यास थे।
- 1:16:31दोनों में इतना फर्क था तुम एक ही समझ लेते हो तो सीधी सी तो मैं
- 1:16:38डेफिनिशन बता दूँ। प्रश्न ये भी बड़ा महत्वपूर्ण था।
- 1:16:43बहुत से लोग तुम्हे उत्तर देते हैं, लेकिन सबके लिए उत्तर समान
- 1:16:47नहीं होते। हमारे पंजाबी में एक कहावत है,
- 1:16:51माँ की दाल होती है, किसी को वादी और किसी को स्वाति।
- 1:16:57वैसे ही किसी को अच्छा लगेगा शादी।
- 1:17:01तड़पेगा, किसी को? बुरा लगेगा शादी?
- 1:17:05तो अगर बंधन लगता है तो मत करवाना बच्चा बंधन लगता है तो मत जलना और
- 1:17:10जनों तो फिर आप सरकार को कह देना, आज तो बंधन लगता है।
- 1:17:17आज की। सिचुएशन को जब मैं देखता हूँ,
- 1:17:19जवानों। के मुक्म पर।
- 1:17:22क्या लड़की क्या लड़का बंधन तो? फिर ठीक लिव इन में रहो क्योंकि
- 1:17:29ब्रह्मचर्य का। पालन नहीं होता।
- 1:17:33बच्चा? हमने पैदा नहीं करना दिमाग पे
- 1:17:35बोझ। नहीं रखा तो लीव इन में रहो और
- 1:17:37किसी दिन लीव इन में भी रहना खत्म हो जाएगा।
- 1:17:41ये वक्त भी। आएगा आप एक।
- 1:17:44दूसरे का सनिध्य बर्दाश्त नहीं कर सकोगे अब आ जाओ अध्यात्म पे।
- 1:17:50अध्यात्म के लिए पहली शर्त है। टु बी अलोन अकेले हो जाऊं और अगर।
- 1:17:58तुमने ये गुणवत्ता प्राप्त कर। ली।
- 1:18:00अकेले होने में सामर्थ्य हो गए आप तो।
- 1:18:05तुमने समझ लो। 99% रास्ता तय कर लिया।
- 1:18:10मैं कहता हूँ 99% 19 9% अगर तुम अकेला होने में समर्थ हो गए कवारे
- 1:18:24से तुम रह सकते हो। लेकिन कवारा होना अकेला होना नहीं
- 1:18:29है। अब ये बड़ा उलट मसला।
- 1:18:32है। कवारा होना अलग होना नहीं है।
- 1:18:39तुम अलग हो जाओ, चाहे कवारे हो चाहे शादीशुदा हो कृष्ण।
- 1:18:45इतने बच्चों के पिता है और इतने। धर्म पतियों के पति।
- 1:18:52लेकिन अकेले हैं उन्होंने वो तत्व जान।
- 1:18:55लिया है जो भीतर। अकेला है।
- 1:18:58तभी कृष्ण कहते हैं अर्जुन से की स्थिति प्रज्ञ हो जा, अपनी
- 1:19:02प्रज्ञा मिश्रित हो जा। उन्होंने उस एक को जान।
- 1:19:06लिया है जो। अकेला है अगर तुम।
- 1:19:10वहाँ पहुंचने में समर्थ हो गए। तो बाहर की कोई भी ज़ंजीर तुम्हें
- 1:19:14बांध नहीं सकेगी। यही पता किया।
- 1:19:17कबीर ने यही पता किया ना? फिर तुम्हें कोई बंधन बांध नहीं
- 1:19:24सकेगा। कोई बच्चे तुम्हारे लिए बंधन नहीं
- 1:19:27बन सकेंगे जब तुमने अपना आपा खोज लिया, तुम अकेले होने की तरह सीख
- 1:19:33गए, सबसे पहले तो अकेले होने की तरह सीखो मैं तुम्हें रोज़ कहता
- 1:19:37हूँ जब यहाँ से दीक्षित हो के जाओ ना।
- 1:19:41तो उसी दीक्षा। की बात भी कर रहा हूँ।
- 1:19:44जिन लोगों ने पहले अप्लाई कर रखा है रजिस्ट्रेशन उनको दीक्षा तो
- 1:19:47मिलेंगे उनको, लेकिन नए लोग कृपया करके अप्लाई ना करें।
- 1:19:53देखो मैं पहले भी कह चुका हूँ। जीस अध्यापक में जिसने।
- 1:20:02पढ़ाना है उसके लिए जिसने पढ़ाना नहीं, उसके लिए तो कितने बच्चे आ
- 1:20:05जाए, चाहे करोड़ बच्चे आ। जाए और हैं लोगों के।
- 1:20:10शिष्य हैं इतने जिसने पढ़ाना है, जिम्मेवारी से पढ़ाना है।
- 1:20:17और तुम्हें मुक्त करने के लिए पढ़ाना है।
- 1:20:19ये मुक्ति का ही तो है पढ़ाना तो वह तो।
- 1:20:23एक सामर्थ्य रखेगा और हमारी। सामर्थ्य पूरी हो गई।
- 1:20:28हम इससे ज्यादा व्यक्तियों को नहीं पढ़ा सकते।
- 1:20:32साफ साफ। इसमें कोई संदेह नहीं।
- 1:20:35इसमें कोई किसी तरह की झूठ फूटनी है।
- 1:20:40इसलिए हमने। आगे के लिए दीक्षा बंद कर दी है।
- 1:20:42जितनी दीक्षा हमने देनी थी, वो जीतने आपने अप्लाई कर लिया, वो
- 1:20:47हमें पता है उन सबको दीक्षा दे देंगे बिलकुल सही।
- 1:20:52दीक्षा मिलेंगे उन्हें। लेकिन नया व्यक्ति कोई अपराध ना
- 1:20:58करें, नई व्यक्ति को किसी को दीक्षा हम नहीं देंगे कोटाफुल है
- 1:21:03यहाँ हाउसफुल है, और हम नहीं। चाहते?
- 1:21:09कि आप। रोते रहो मेरे।
- 1:21:11पास आ जाते हैं। बाबा ये शब्द और सूती का मिलान
- 1:21:15कैसे होता है? ये तुम किस्से शिक्षित्वक रहने की
- 1:21:22हो बाबा मैं तो फलाना डेरे से आयी हूँ, तब फिर उस डेरे से जाके
- 1:21:26पूछो, वो बाबा तो मिलते नहीं? तो फिर और क्या?
- 1:21:30करते हैं। वो सुबह दर्शन दे।
- 1:21:34देते हैं छोर कसे पास? से निकल जाते हैं।
- 1:21:36मकफर इससे ही गुजर कर लिया करो। संतों के दर्शन कौन सा जल्दी से
- 1:21:43हो जाते हैं, ऐसा ही कर लिया करो। मुझसे मत पूछो।
- 1:21:51उनका अलग मसला है। हमारा अलग मसला।
- 1:21:54है, हमसे क्यों पूछते हो, लेकिन उनकी मजबूरी है गुरु दर्शन ही
- 1:22:03देता है, कभी कभी जीप पे बैठता है।
- 1:22:08और चुर्क से पास निकल। जाता है बस इतना सा काम है कभी
- 1:22:11कभी करते हैं वो। देखो सीधी सी बात है भाई।
- 1:22:19अध्यात्म का मसला है तुम अकेले होने की चेष्टकराम यहाँ से दीक्षा
- 1:22:24लेके जाओ, 7 दिन का प्रोग्राम बना के आओ।
- 1:22:28छुट्टी किस तरह करे 7 दिन अगर। नहीं कर सको तो कोई जरूरत।
- 1:22:33नहीं है। दिमाग के ऊपर भोज भी मत रखना।
- 1:22:36दीक्षा को। कर सको तो?
- 1:22:397 दिन एकांत। में बैठ जाओ, अकेले रहो, बिल्कुल।
- 1:22:43अकेले रहो। अकेलापन का जब स्वाद आना शुरू
- 1:22:47हुआ। तो अकेले पण को तुम तरसोगे दूसरे
- 1:22:52की छाया भी तुम्हें दुखी करेंगे। दूसरा आया तुम?
- 1:22:57माता पिटोगे कहाँ से? दुष्ट हो गया।
- 1:23:01ये वक्त भी आएगा अभी तुम ढूंढ़ते हो, चाचू।
- 1:23:04ताऊ की संगत। फिर तुम्हें प्रिय से प्रिय
- 1:23:10व्यक्ति। की छाया भी बुरी।
- 1:23:12लगी ये भक्त भी आएगा। अकेले होने की मंशा?
- 1:23:19जब तक ये नहीं। आएगी तब तक तुम्हें।
- 1:23:22वो अकेला तुम अकेले हो। एको अहम, द्वितीय नास्ते उसका पता
- 1:23:29नहीं चलेगा एक जो हो तुम। एक होने की कला सीखनी होगी यहाँ
- 1:23:35से। दिशा लेके जाओ, भरे पूरे होते हो
- 1:23:40शक्ति सात। होती है तो बैठ जाओ बड़ा।
- 1:23:42आनंद आएगा, ये रस आएगा और तुम? वो तुम्हें अपने भीतर जाने के लिए
- 1:23:48शक्ति दे देगा। वैसे तो शक्ति तुम जुटाते हो,
- 1:23:53रोज़ खराब कर देते हो, तो इस शक्ति को जो बाहर से शक्ति दी गई
- 1:23:58है, इससे तुम अपने भीतर बैठो, 7 दिन बैठो और अगर तुम्हें।
- 1:24:06एकांत में होने का स्वाद लग गया, चस्का लग गया तो फिर बात बन गई।
- 1:24:16फिर तुम्हें अमर से झड़ने लगेगा। धीरे धीरे धीरे धीरे जहाँ तुम्हें
- 1:24:22अड़चन आए मुझे कंसल्ट करो। नहीं तो तुम पहुंचते ही चले जाओगे
- 1:24:27ये स्वाद, ये आनंद की झलक यही तुम्हें रास्ता दिखाती रहेंगी,
- 1:24:35लेकिन फिर भी अटक जाओ, तुम मुझसे पूछ लो तुम्हें बिल्कुल स्पष्ट
- 1:24:41कहता हूँ कि जिन लोगों ने अप्लाई किया है।
- 1:24:44रजिस्ट्रेशन करवाया है वो मत घबराए।
- 1:24:48उन्हें तो दीक्षा मिल ही जाएगी, जिन्होंने ऑनलाइन दीक्षा।
- 1:24:52ली हुई है। वो दीक्षित हो गए।
- 1:24:56उन्हें भी दीक्षा मिल गयी। ऑफलाइन आके यहाँ दीक्षा ले लें,
- 1:25:00एक बार यहाँ पर अंगूठा लगवा लें आके।
- 1:25:05उससे उसके बिना। बात ना बन जाएगी।
- 1:25:09और फिर आप। एकांत में बैठ जाओ वो।
- 1:25:14स्वाद जो तुमने कभी चखन एक। बार तुम्हारे भीतर उतर गया।
- 1:25:22तुम्हें आज तक तो पता ही है। कि ऐसा भी कोई स्वाद होता है जो
- 1:25:28सुख के इलावा होता है वह है जो। सुख से इलावा।
- 1:25:33है और वह है। तो तुम मेरी जिंदगी से ही सीख
- 1:25:37सकते हो। 12 वर्ष हो गए, मैं अकेला बैठा
- 1:25:40हूँ बस इसी एकांत की। तुम भी तलाश करो, अकेले होने का
- 1:25:47मन। करेगा तो मन को।
- 1:25:48बांध के दमन करके नहीं बैठोगे मन। ऐसा नहीं कि कहेगा हिल स्टेशन
- 1:25:54चलो। और तुम दबा के बैठोगे नहीं, मन ही
- 1:25:57नहीं करेगा हिल स्टेशन पे जाने का।
- 1:26:00जब भीतर इतनी प्रगाढ़ता आनंद की हो, हमारी छाई हो किसका मन करता
- 1:26:06है, मन ही नहीं रहता, डूब जाता है।
- 1:26:08मन उस रस को पीता है। उस रस में तुम डूब जाते हो।
- 1:26:15जिसे। उपनिषदों में कहाँ है रसो वैसा वह
- 1:26:20रसोई? उस रस को तुमने आज तक उसकी झलक
- 1:26:24नहीं देखी, इसलिए तुम चूके जा रहे हो तो मैं।
- 1:26:28सत्य की तरफ इशारा करता हूँ कि रस की।
- 1:26:30एक बार बूंद चखलो बस एक बार चखलो। फिर तुम्हें किसी गुरु की
- 1:26:36आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐसी ही भीड़ भड़के में उलझ ना हो।
- 1:26:40भेड़ चाल में अगर इकट्ठे करके बैठना हो तो तुम्हारी मर्जी है
- 1:26:45मैं किसी को रोकता नहीं, मैं किसी को निंदित नहीं करता।
- 1:26:50मैं किसी को गलत साबित नहीं करता। मैं सिर्फ अपनी बात करता हूँ।
- 1:26:55मैं तुम्हें अकेला। देखना चाहता हूँ भीतर।
- 1:26:58से बाहर से नहीं भीतर से तुम अकेले हो जाओ और जीस वक्त तुम।
- 1:27:04अकेलापन का आनंद। उठा लोगे?
- 1:27:06बस फिर तो तुम अपना रास्ता खुद ही तलाश लोगे।
- 1:27:09फिर तो आनंद ही तुम्हें रास्ता दिखलाता चला जाएगा, फिर मेरी कोई
- 1:27:13जरूरत नहीं है। अगर गलत रास्ता।
- 1:27:21पकड़ लिया तो अपने मुकद्दर। पे मत रोना।
- 1:27:28रास्ता गलत तुमने पकड़ा इन दुष्टों ने तुम्हें पथ भ्रष्ट
- 1:27:36किया रोते हो तुम अपनी तकदीर पर? कोई भी हमारा न हुआ ईश्वरी दुनिया
- 1:28:01में कोई। भी?
- 1:28:05हमारा न हुआ घर तो गैर अपनों का सहारा न हुआ।
- 1:28:23इस पर ही दुनिया में। लोग।
- 1:28:30रो। रो के भी इस दुनिया।
- 1:28:35में जी। लेते हैं।
- 1:28:42लोगरों के भी इस दुनिया। में।
- 1:28:51जी लेते हैं। हम हसे भी।
- 1:29:01हम हसे। भी तो?
- 1:29:05जमाने। को।
- 1:29:08गवारा न हुआ ईश्वरी? ध्वनिया।
- 1:29:18इश्क हकीकी। की तरफ लेके जाना है शब्दों को एक
- 1:29:25मोहब्बत के सिवा। और न कुछ।
- 1:29:34मांगा था। इक मोहब्बत के सिवा और न कुछ
- 1:29:47मांगा था क्या करें? ये।
- 1:29:55भी? क्या करें?
- 1:29:58ये भी जमाने को गवारा न हुआ इस पर ही ध्वनिया में।
- 1:30:16आसमान के तू ने सितारे। हैं।
- 1:30:23तेरी महफिल में, आसमान के तू ने। सितारे।
- 1:30:35हैं। तेरी महफिल में अपने तकदीर का ही
- 1:30:48अपने तकदीर। का?
- 1:30:52ही। कोई सितारा न हुआ अपने तक।
- 1:31:03देर। का ही सितारा न हुआ।
- 1:31:14इस पर। दुनिया।
- 1:31:17में कोई? भी?
- 1:31:21हमारा न हुआ घर तो। घर।
- 1:31:32अपनों? का?
- 1:31:34सहारा न हुआ इस पर दुनिया में। श्रीकृष्ण गोविंद।
- 1:31:51हर वे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:32:08हरे मुरारी एनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:32:27नाथ नारायण, वासुदेव पितमात स्वामी सखा हमारे पितमात स्वामी।
- 1:32:48सखा हमारे अनाथ नारायण वासुदेव। श्री?
- 1:33:05कृष्ण को। बिंद, हरे मुरारी।
- 1:33:15हे नाथ? नारायण वासुदेव।
- 1:33:28धन्यवाद।