Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 Jan 26 - शीशे में दिखने वाला 'मैं' नहीं हूँ! जो दिखता है, वह तुम नहीं हो! असली पंचगव्य क्या था?
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- 0:14बाबा जी, प्रणब, शालीन अवस्थी। पंचगव्य का क्या महत्त्व है?
- 0:47हमारे धर्म में पंचगव्य को बहुत पवित्र माना गया है।
- 0:56कृपया आप वैज्ञानिक ढंग से इसे समझाने का कष्ट कीजिएगा।
- 1:05हम इसे रोज़ प्रयोग करते है हमारी धार्मिक पुस्तकों में।
- 1:14इसका बड़ा महत्त्व है। पंचगव्य क्या होता है?
- 1:26गाय के द्वारा दिए गए पांच तत्व दूध, दही।
- 1:33घी, गो, मूत्र और गोबर ध्यान से समझियेगा एक वक्त था कि
- 1:57हम गुलाम थे। और ऐसे ही रहे तो हम शीघ्र ही फिर
- 2:10गुलाम हो जाएंगे। यह जो हमारी विविशा ग्रंथियों में
- 2:24और हमारे संघ सरकारों में नॉन साइंटिफिक चीजें।
- 2:31फेंक दी गई हैं। यह मनुष्यता के लिए बड़ी हानिकारक
- 2:42है दूध, दही, घी। ये तीन चीजें आपके स्वास्थ्य के
- 2:55लिए बहुत बढ़िया है। मैंने कल बोला लेकिन चौथा गौमूत्र
- 3:04और पांच म गोबर। और वो भी सुबह सुबह का और हमारे
- 3:18अनपढ़, अशिक्षित, मेंटली एंड डेवलप नेता ओक लगा के भी।
- 3:43रचनाकर्ता ने हमें बुद्धि दी है तो वह विश्लेषण करने के लिए थी।
- 3:54मैंने बहुत बार समझाया है आपको। सारी रात भर प्रकृति हमारी साफ
- 4:03सफाई करती है, शरीर के अंदरूनी हिस्सों की और शरीर के अंदरूनी
- 4:14हिस्सों में जो वीजा की अद्रव्य होते हैं फौरन मैटेरियल्स।
- 4:19उनको सुबह के पेशाब में निकाल देती है।
- 4:23यह प्रकृति का काम है। यह सभी प्रकार के जीवों में उनके
- 4:30शरीरों में होता है। मनुष्य में भी यही होता है।
- 4:40लेकिन हम गुलाम थे तो हमारे शस्त्र बदल दिए गए।
- 4:47अब किसी शास्त्र पर आप यकीन मत किया करो, इसलिए मैं रोज़ कहता
- 4:54हूँ, शस्त्रों को। किसी भी सभ्यता को बर्बाद करना तो
- 5:05जिससे वह प्रेरणा लेता है वह प्रेरणा स्रोत विकृत करता वह
- 5:12सभ्यता नष्ट हो जाए। ऐसा ही हमारे ऊपर शासन करने वाली
- 5:17सब्यताओं ने किया। वो हूँ हूँ अंग्रेज हो हम
- 5:26मुसलमान। हैं।
- 5:37इन्होंने वही कुछ किया की व्यक्ति को सीधे सीधे मार मत मारो।
- 5:45व्यक्तियों का साहित्य दूषित कर दो, जैसे हम।
- 5:56किसी दुश्मन को खुद सीधे ना मारे, गोली ना मारे लेकिन पानी दूषित दे
- 6:02रहे हवा दूषित दे रहे धरती दूषित कर दे तो उससे पैदा होने वाला
- 6:12अनाज भी दूषित होगा। पानी हमें रोज़ जरूरत होती है हवा
- 6:17की। हमें हर मिनट में जरूरत होती है,
- 6:21बस यह है विकृत कर दे। आपके ऊपर हत्या का आरोप भी नहीं
- 6:27लगेगा और सभ्यता भी खत्म हो जाएगी।
- 6:32यही हमारे दुश्मनों ने किया। जब उन्होंने देखा कि हम इनके ऊपर
- 6:46ज्यादा देर तक राज़ नहीं कर सकते तो उन्होंने सब कुछ गंदा कर दिया।
- 6:51हमारा साहित्य गंदा कर दिया। हमारे धार्मिक ग्रंथ गंदे कर दिए
- 6:58जिनकी हम व्याख्या कर रहे हैं और सोचने वाली बुद्धि
- 7:17व्याख्याकर्ताओं में होती है इन्वेंशन्स ये कर नहीं सकते।
- 7:24तो वह सब तो मरेगी ही मरेगी पंचगव्य क्या होता है?
- 7:31आप रोज़ इसको धारण करते हो? किसी भी अच्छे कर्म कांड में
- 7:38पंचगव्य का सेवन हो। दूध नहीं और घी ये तो ठीक आपत्ति
- 7:48होती है गोबर और गौ मूत्र गौ मूत्र में सुबह सुबह का गौ मूत्र
- 7:59तो जहर हो। जहर मेरे पास बहुत से पेमेंट आता
- 8:11है बाबा तुम्हारा दिमाग। खराब हो गया है।
- 8:16मैंने कहा बिलकुल। हमारा दिमाग शुरू से ही खराब गोबर
- 8:33गोबर ऐसा जहरीला तत्व है, पदार्थ है जिसके भीतर एक तत्व ऐसा होता
- 8:42है। जो 10 साल बाद भी 5 साल बाद भी
- 8:45आपको अटैक कर सकता है। जो भी गोबर पार्टी करते हैं वो
- 8:53संभल जाएं, जिन्होंने खाया हो कभी भी इन लोगों को।
- 9:02फूड पॉइज़निंग वगैरह तो छोड़ो वो तो हम बात है।
- 9:07गोबर में रोग जनित बैक्टीरिया होते हैं इ कोली सबसे खतरनाक
- 9:20बैक्टीरिया है। सेल्वोनैला क्लॉस्ट्रिटियम की
- 9:28इतनी घातक बैक्टीरिया है कि इनका जल्दी जल्दी इलाज करना और यहाँ तक
- 9:39भी छोड़ो आप अगर आप दूध को 2 घंटे के बाद भी हो गए।
- 9:45तो उससे भी आपको अमीबा सेस हो जाएगा।
- 9:49हालांकि दूध अमरता है, तो दारु क्षणों दूध।
- 9:55मैंने कल भी कहा था। बच्चा पीता है तो सीधा स्थनों से
- 10:02पीता है दारु क्षणों। उसमें किसी प्रकार की प्रकृति रोग
- 10:08जनिक बैक्टीरिया को पैदा ही नहीं होने देती।
- 10:12जैसे जैसे हवा के संपर्क में आएगा वैसे वैसे इक्वाली वगैरह ये
- 10:18फैलेंगे सेल्वोनेला क्लोस्टर्डियम।
- 10:25बहुत खतरनाक बैक्टीरिया से गाय का गोबर दो चीजों में लाभकारी है।
- 10:44एक तो खेती के लिए खाद और दूसरा उपले बनाकर उनके ऊपर खाना पकाना
- 10:57है या पुराने जमाने की बात है। लेकिन सीधा सीधा गोबर का सेवन
- 11:12करना, रोगो को बुलावा देना और यहाँ तक कि मृत्यु को भी बुलावा
- 11:22देना है। गोबर पार्टी करने वाले लोग समझले।
- 11:29किसी भी वक्त उनको अटैक आ सकता है क्योंकि उसमें ऐसा तत्व होता है
- 11:38जो कि हार्ट की वेन को ब्लॉक कर सकता है।
- 11:53संकुचित कर देता है। जैसे कुछ शर्ट होते हैं, आपने
- 11:58सुना, डायज़ पंप वगैरह ये हार्ट ये वेन को ब्रॉड करते हैं, ब्रॉड
- 12:10संकीर्ण होते हैं, खोल दिया। खून ने खून ने गुजरना आसान कर
- 12:17दिया। अपने आप में उसमें कोई छक्का नहीं
- 12:21जमेगा तो अटैक नहीं आएगा, लेकिन गोबर के भीतर एक ऐसा पदार्थ है।
- 12:34जो आज तक विज्ञान ने खोजने उस पदार्थ का कोई साइंटिफिक नाम तो
- 12:42है नहीं, लेकिन हम उसको वैज्ञानिक पुरानी भाषा में।
- 12:49ईरा कहते हैं, ईरा नाम का एक ऐसा तत्व होता है जो कि हमारी वेन को
- 12:57संकुचित कर देता है। कांट्रैक्ट।
- 13:06और कुंट्रेक्षण होते होते कुंट्रेक्षण होते होते आप लगातार
- 13:10दो महीने दो महीने लगातार गोबर का सेवन करते रहे, आपको अटैक आ
- 13:20जाएगा। क्यों?
- 13:25उसके भीतर जो ईरान नाम का जहरीला तत्व है वो आपकी वेंस को
- 13:31कांट्रॅक्ट कर देता है। सुकड़ो देता है।
- 13:38गौमूत्र की तो बात ही मत छू जनाब, गौमूत्र में तो इतने विषैले तत्व
- 13:45होते हैं जो शरीर के लिए। उपयोगी नहीं थे।
- 13:49वर्ण हानिकारक थे। इसलिए प्रत्येक शरीर रात्रि में
- 13:54यही काम करता है। साफ सफाई शरीर के अंदर होने वाला
- 13:58है और उस साफ सफाई में जैसे हम अपना घर साफ करते हैं।
- 14:05फर्श तो क्या? घर साफ करने में वह है जो पानी
- 14:11आखिर में निकलता है गंधला हमू से पी लेते हैं।
- 14:17जवाब देना मुझे जब हम पानी से अपने घर की साफ सफाई करते हैं,
- 14:24फर्श को साफ करते हैं। तो आखिर में जो गंध रहा पानी हम
- 14:30उसे नाले में फेंक देते हैं, क्या हम उसे पी लेते हैं?
- 14:35बस ऐसा ही अगर आपने वो मूत्र किया तो ऐसा ही परिणाम आएगा।
- 14:43हमारे शास्त्रों को नॉन साइंटिफिक बना दिया गया।
- 14:48और हमारी विद्या को हमारे ग्रंथों को नॉन साइंटिफिक बना दिया गया।
- 14:54इसलिए आज नामधारी तो बहुत है। नामों के ऊपर तो झगड़े होते हैं,
- 15:01लड़ाईयां होती है। लेकिन इनवेंटर हमारे हिंदुस्तान
- 15:09ने कितने खोजी? अगर कोई 2412 नोबेल आए हैं तो वह
- 15:17व्यक्ति शुद्ध भोजन खाते थे। पंचगव्य तीन पदार्थ ठीक है तीनों
- 15:33में से अगर आप इनको उबासी कर दोगे तो तीनों ही दूषित हो जाएंगे।
- 15:39दूध एक ऐसा पदार्थ है जो बहुत ही जल्दी बैक्टीरिया को उत्पन्न कर
- 15:46देता है। अगर आप बादशाह दूध पिओगे 2 घंटे
- 15:53पुराण तो आपके अमी वायुसे सन्नाम की बिमारी हो जाएगी, आपके पेट में
- 16:03मरोड़ उठेगा और डायरिया हो जाएगा। डायसेंट्री भी हो सकती है।
- 16:13शास्त्रों की बातों को मत मानो क्योंकि हमारे शास्त्र उस काल में
- 16:24जब हम गुलाम विकृत करते थे और किसी भी।
- 16:30दुश्मन की संस्कृति को नष्ट करना हो या उनके वजूद को नष्ट करना हो
- 16:38तो ध्यान रखना उनकी पवित्र किताबों को नष्ट हो, पवित्र
- 16:46किताबें हम पढ़ेंगे, बड़ी श्रद्धा से पढ़ेंगे।
- 16:49और श्रद्धा से पड़ी हुई चीज़ हमारे क्रांति में वह निकलती है
- 16:57अजमंड भूतियों को आप कितना भी गोबर खाना मृत्यु का भय।
- 17:09फिर इन्हें सब कुछ छुड़वा देगा, फिर कहेगा अब नहीं खायेंगे
- 17:23पंचगव्य बिलकुल बोल कर भी हूँ मैं पीना।
- 17:27इनमें से कुछ पदार्थ हैं वैसे गोबर कभी खा भी नहीं।
- 17:36गोबर बाद में पंचगव्य शुरू में क्या होता था?
- 17:39मैं आपको बता इन्होंने बाद में विकृत कर दिया।
- 17:45पंचगव्य में तीन चीजें तो होती थी दूध, दही और घिसी चौथा होता था
- 17:53शहद। शहद को निकालते इन्होंने गोबर को
- 17:57रख दिया और गोमूत्र को रख दिया। पांच में हो तो तक गोड़ जी पांच
- 18:12तत्व होते पंचगव्य गव्य नहीं थे। क्योंकि गाओ गव्य कहते हैं गाओ गउ
- 18:19ने दिया हो। गो ने दिया पंच पांच पदार्थ जो गो
- 18:24ने दिया अब गो मूत्र भी गो ने दिया, गो वर भी गउ ने दिया और
- 18:30दूध, दही और घी ये भिगो ने दिया तो पंच गव्य पंच गव्य नहीं थे।
- 18:41तू तो दही और थी और शहद और गुड़ ये पांच चीजों को घोल कर पीना।
- 18:57और उन पर विशेष तरंगों को फेंक देना।
- 19:05उन तरंगों को पी जाती हैं ये चीजें और जब हम इनको पीते हैं तो
- 19:12वो हमें स्वास्थ्य देते है। स्वास्थ्य लाभ।
- 19:18लेकिन आज विकृत हो गया है सर, पंचगब्बे का क्या फायदा है?
- 19:24पंचगब्बे का कोई फायदा नहीं जो आप आज बनाते हो उसका नुकसान ही
- 19:29नुकसान। मेरा बताना फर्ज है।
- 19:44मैं अपनी बातों को संसार भर में फैलाना नहीं चाहता और मेरे पास
- 19:49माध्यम भी नहीं है। अपने आप ही फैल जाएंगे संसार जो
- 19:54अच्छी चीज़ होती है वो खुद ब खुद फैल जाएगा।
- 20:01जब आप उस पंचगव्य से और इस पंचगव्य से परिणामों को देखोगे तो
- 20:09पंचगव्य जो गऊ ने दिए उससे आप बीमार पड़ जाओगे और ऐसे बीमार
- 20:15पड़ोगे की लंबे बीमार पड़ोगे। कई के सालों तक मार लोगे,
- 20:21तुम्हारे फेफड़ों में संक्रमण हो जाएगा तो हमारे पेट में तो पक्का
- 20:25संक्रमण हो जाएगा। क्योंकि ये तीनों जो मैंने आपको
- 20:29बताए ये तीनों ही जहर हैं। ई।
- 20:33कोहली सेलमोनेला क्लोस्टोडियम पंचगग्न में कुछ लोग दूध, दही और
- 20:48घी के अलावा गंगाजल को गुजार दे। लेकिन गंगा जल भी आज दूषित हो गया
- 20:56है। ध्यान रखना गंगा जल भी मत डालो।
- 21:01गुड़ चौथा गुड़ रख लें। पांचवां शहद रख लें।
- 21:11शहद में जल्दी जल्दी कीड़ा नहीं लगता भगवान के प्रशाद में जो हम
- 21:25चीज़ रखते हैं पूछा है किसी ने के प्रसाद में कौन सी चीज़ पांचवीं
- 21:35चाहिए? फल के रूप में फल के रूप में सबसे
- 21:40सुंदर है केला बनाना बनाना एक ऐसा फल है जिसमें कभी कीड़ा लगता नहीं
- 21:48चाहे गल जाए हो। प्रसाद में आप ये दे सकते हो
- 22:00पंचगव्य वगैरह का लोगों के प्रभाव में आकर यह मतमंद लोग हैं।
- 22:10इन लोगों के प्रभाव में आकर अपने शरीर को खराब मत कर लेना।
- 22:15अगर आपका शरीर खराब हो गया तो फिर आपका सच्चा साथी शरीर, सबसे करीबी
- 22:23मित्र, आपका शरीर है, इसको दूषित मत होने देना।
- 22:31गंगाजल तो आज स्नान करने के योग्य भी नहीं रहते है।
- 22:36अपवित्र हो गया है नदियों का जल क्योंकि जब व्यवस्थापक कुछ चंदा
- 22:52लेकर अपनी फैक्टरीस का जहर। गंगा के भीतर छोड़ने की अनुमति दे
- 22:59दें तो इस देश का हाल क्या होगा? कुछ मूर्ख आनंद पैसे को जोड़ना ही
- 23:11लक्ष्य समते। और उनके चेहरे पर सगा ही 12 गज के
- 23:193.75 मिनट होते है। यह तोता नाक वाला अडानी है, तोता,
- 23:28नाक और तोता नाक वाले अडानी सच्चे मित्र।
- 23:37मैं व्यक्तियों की परिभाषा बता रहा हूँ।
- 23:39आपको गुणतत्त्व तोता, नाक जिसका होगा उसके ऊपर यकीन मत करना, वो
- 23:45कभी भी धोखा दे सकता है। यह बॉडी स्ट्रक्चर है।
- 24:04इनको यही नहीं पता कि जोड़ने योग्य होता क्या है धन जरूरत के
- 24:16लिए होता है, जोड़ने के लिए नहीं होता धन हमने सब ने।
- 24:23मान अंडिया सत्य तो है ही नहीं धन तो एक अल्प है, धन सत्य नहीं।
- 24:35हमने एक कागज के टुकड़े को मान्यता दे दी है कि इसकी कीमत
- 24:40डॉलर है तो ₹90 है। इसकी कीमत ₹100 है।
- 24:46इसकी कीमत ₹1 है। इसकी कीमत ₹5 उसके ऊपर हम नहीं
- 24:50लेती। यह हमारी मान्यता है, यह है सत्य
- 24:55नहीं उस कागज़ की कीमत ₹5। उस डॉलर की के ₹90 नहीं कागज़ है
- 25:03वो, लेकिन वह हमारी मान्यता है और मान्यता सदा ही गलत होती है।
- 25:12देखो, मान्यताएँ बदलती है। कभी यह ₹50 का था, ₹58 का था, आज
- 25:19ये 90 का हो गया। मान्यताएँ बदल गई।
- 25:25धन वास्तविक रूप से लेन देन के लिए जरूरतें पूरी करने के लिए एक
- 25:36आदान प्रदान का जरिया है। आसानी होती है, लेकिन यह सच्चा धन
- 25:52नहीं है। सच्चा धन तो वह है जो आपके।
- 26:03आंतरिक प्राणों को आनंद से खिलाते हैं, जो आपको आनंद विभोर कर दे,
- 26:15जो शहद से भी मीठा हो। जो अमृत की तरह जड़े और तुम्हारे
- 26:25रोम रोम में खुशबू मरकर बाहर प्रकट हो
- 26:40वो है रामधन हमारे अंतश का वो तत्व।
- 26:51जो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर है, कातिल के भीतर, जैन मुनि के भीतर,
- 27:03जैन मुनि के भीतर भी उतना ही बुद्ध के भीतर भी उतना ही है।
- 27:08अजामिल के भीतर भी उतना ही है और बुद्ध के सामने खड़े हुए अंगुली
- 27:13माल के भीतर भी उतने वाल्मीकि के भीतर भी उतने ही जब वो डाक का
- 27:19डालते हैं तो भी उतनी ही और जब वो शांत हो जाते हैं तब भी उतने सभी
- 27:25के भीतर है। ये धन जरूरत के लिए आदान प्रदान
- 27:40के काम आते हैं। इनसे काम ले लो।
- 27:44जैसे ये इंद्रिया हमारा रथ है, इनसे काम ले लो, लेकिन यह हमारा
- 27:51लक्षण ही है। हम इसके मसल्स को बढ़ाना शुरू कर
- 27:54दे। हम बैटरी लिफ़्टर बन जाए, हम
- 27:57अच्छे क्रिकेट बन जाए, यह लक्षण ही है लक्ष्य को साधता है सिर्फ।
- 28:15और संत फकार करता है। जीना बंधु दीना ना मेरी सुध ली जी
- 28:31है। मेरी सुध लीजिए देना बंधु देना ना
- 28:46मेरी मेरी सुध ली जी है मेरी सुध लीजिए देना बंधु देना।
- 29:31इसको इकट्ठा करना, इसकी आस शो जरूरत के लिए इकट्ठा कर कह तू।
- 29:40मलोपना क्षण दे परायी आ। छोड़ दे पराई आ जो जो पराया है जो
- 29:57जो तुम नहीं हो वास्तव में उसको छोड़ दो।
- 30:01यह एक तरकीब भी है अपने भीतर उतरने की और उस सत्य के तत्व के
- 30:07पास। जो जो तुम नहीं हो उसको छोड़ते
- 30:12चले जाओ। कैसे पता लगेगा कि यह मैं नहीं
- 30:19हूँ जीसको तुमने देख लिया वो तुम नहीं, तुम अपने आपको नहीं देख
- 30:25सकते, तुम विचारों को देखते हो। वह दूर है विचारों को देखते हो,
- 30:36इसका अर्थ साफ है कि विचार तुम नहीं और विचार पल पल पर बदलते हैं
- 30:45और बदलती हुई विचारों को तुम देते हो।
- 30:50तो सीधा सीधा तो मैं समझाऊं कि जो जो तुम देख लेते हो वो तुम नहीं
- 30:57अब मूवी देख रहे हो, तुम तो मूवी थोड़ी सामने का दृश्य देखते हो।
- 31:04हरा भरा बगीचा। आम लगे हुए वृक्ष, पीपल, वट वृक्ष
- 31:13ये तुम इन्हें देखते हो ये तुम नहीं जिनको भी तुम देख सकते हो
- 31:19सीधा सीधा फॉर्मूला, वो तुम नहीं। कह तू?
- 31:27मलोकुदा छोड़ दे है पराईया। छोड़ दे जो तुम नहीं हो उसको
- 31:41छोड़ते चले जाओ गहरा फॉर्मूला है। अब इसको हृदय में बसा लो एक वक्त
- 31:58आएगा जैसे अब मैं बोल रहा हूँ, मैं बोल भी रहा हूँ, मैं देख भी
- 32:03रहा हूँ कि कोई बोल रहा है, यह ढांचा बोल रहा है ये जीवा उलट
- 32:09पुलट हो रही है। गले में से कुछ निकल रहा है आवाज
- 32:13की तरह या मैं देख भी रहा हूँ और क्योंकि मैं देख रहा हूँ तो मुझे
- 32:23सुनते नहीं होना चाहिए कि ये मैं हूँ, जो दिखता है वह मैं हूँ।
- 32:29दृश्य कभी भी मैं नहीं होता जीसको तुम देख सकते हो वह दृश्य है और
- 32:38जिसके द्वारा तुम देखते हो वह दर्शन है, लेकिन तुम तो दर्शन
- 32:45करने वाले हो साक्षी हो। वेटरनेस हो ऑब्जर्वर हो, तुम तो
- 32:54अनुभूत करने वाले हो, तुम्हें दर्द होता है, लेकिन दर्द तुम्हें
- 33:00होता है। गौर से देखो, तुम्हें दर्द दिखेगा
- 33:07और जब दिखेगा। ब्रेन को दर्द दिखता नहीं,
- 33:28क्योंकि ब्रेन स्वयं में उसकी प्रतिकृति है।
- 33:33जो आपके अंतःस्थल में बैठा है वह आनंद से युक्त।
- 33:39स्वभाव है जिसका। कहत मलोकना छोड़ दे पराई आश।
- 33:57छोड़ दे। बाहर के जीतने भी पदार्थ हैं, वह
- 34:04प्राणी जिनको तुम देख सकते हो वह प्राणी, यह बैड, यह चादर यह कंबल
- 34:15यह बल्ब। यह दीवार यह छत, यह मैं नहीं हूँ
- 34:21क्यों क्योंकि मैं नहीं देख सकता हूँ।
- 34:27आज से सीधा सीधा एक फॉर्मूला देख लो।
- 34:30सिंपल है फॉर्मूला जो तुम्हें दिखता है वो तुम्हें।
- 34:38आईने में तुम देखते हो अपनी तस्वीर लेकिन याद रखना आईने में
- 34:44देखती हुई तुम्हारी ही आकृति तुम नहीं हो तुम आकृति है तुम्हारे
- 34:50शरीर में। ज़रा देखना अगर तुम होते तो आईने
- 34:57को तोड़ दो तो आकृति टूट जाएगी क्या तुम भी टूटोगे आईने में
- 35:09देखना साफ़ सुथरा आईना तुम्हें अपनी तस्वीर दिखेगी तुम समझोगे ये
- 35:13तस्वीर मैं ये ब्रह्मत पा लेना। ऐसा ही भ्रम तुमने पैदा किया है
- 35:22आईने में तस्वीर बन रही है तुम्हारी और तुम कहते हो या मैं
- 35:25हूँ, ये विचार मैं हूँ यह सोच में रहा, यह विचार मेरे हैं।
- 35:38ये दिल धड़कता है ये मैं हूँ नहीं, ये धड़कता हूँ तुम्हें
- 35:43दिखेगा दिमाग सोचता हुआ तुम्हें दिखेगा तो आइने में जो तुम्हारी
- 35:49तस्वीर बनी वो सच में तुम नहीं हो तुम्हारी तस्वीर नहीं है वो।
- 35:55कैसे पता लगा तोड़ दो आईने को आईने को तोड़ दोगे?
- 36:02लेकिन तुम नहीं टूटोगे तुम्हारी तस्वीर टूट जाएगी।
- 36:06ऐसे ही यह ढाँचा टूट जाएगा, लेकिन तुम नहीं टूटोगे।
- 36:16जीस ढांचे को तुम मैं समझते। हो जीस।
- 36:23ढांचे को तुम मैं समझते हो? जिसके साथ एकाकार हुए हुए।
- 36:29तुम इसे मय समझते हो? इस ढांचे को टूटने के बाद बिल्कुल
- 36:34वैसे ही तुम्हारी परछाई मिटेगी जैसे शीशे में देखते वक्त किसी ने
- 36:39शीशा तोड़ दिया हो। शीशा टूट जाएगा, तुम्हारी परछाई
- 36:43दिखनी बंद हो जाएगी, इमेज दिखनी बंद हो जाएगी।
- 36:46लेकिन तुम्हारे ऊपर ज़रा भी प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- 36:49इसी तल पर जाकर भगवान किशन कहते हैं, नयनम चरन ती शस्त्राण नैनम
- 36:55धरती पांव का नयनम कलेदन क्या कोना इमेज के टूट जाने से कभी?
- 37:09ढांचे टूटा करते हैं, नहीं। ऐसे ही यह ढांचा भी तुम्हारा इमेज
- 37:17है। यह ढांचा टूट जाएगा।
- 37:23तुम पर ज़रा भी यह असर नहीं होगा। जैसे शीशा आईना टूट गया था और तुम
- 37:29बिल्कुल बरकरार रहे थे, तुम्हारा ज़रा भी कोई अंश भी तुम्हे नुकसान
- 37:35नहीं हुआ, तुम यथावत बने रहे। कहत मलू कला छोड़ दे परैया रामधन।
- 38:06पाई के रामधन के रिका की सरण जाएगी।
- 38:26अपने की शरण में जाओ पराई आज छोड़ दो, इस ढांचे की आज छोड़ दो,
- 38:35तुम्हारी कामना आएगा आखिर में बिखर जाएगा स्कैटर हो जाएगा खंड
- 38:39खंड हो जाएगा विखंडित हो जाएगा। कह तू मलूकदास छोड़ दे पराई आश।
- 38:59को छोड़ दे बड़ा शानदार। फार्मूला है, तरीका है तरकीब है
- 39:07अपने भीतर उतर ले, पराये को जान के यह पराया है, उसकी आशा छोड़
- 39:17दे। और फिर जब तुम उसकी आशा को छोड़
- 39:26दोगे, जो पराया है, उसको छोड़ते चले जाओगे।
- 39:29क्या एक विधि है स्वयं तक पहुंचने की जो तुम नहीं हो, जो तुम्हें
- 39:38दिखता है वो तुम नहीं हो उसको छोड़ते चले जाओ।
- 39:44यह हदय है तुम्हें दिखती है यह विचार तुम्हें दिखते हैं यह
- 39:48भावनाओं तुम्हें दिखती हैं, तुम इनके संघचपक मत जाओ तुम इनको
- 39:52अलगाव हो के देखो तुम दिखेंगी क्या?
- 39:57और जो चीज़ तुम्हें दिखती है वो तुम्हें तुमसे जुदा है वो चीज़?
- 40:03आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं, लेकिन खुदा के नो से आदम
- 40:10जुदा नहीं, ये दिखेंगे विचार ये भावना ही तुम्हें दिखेंगी, ये
- 40:17क्रोध आता हुआ तुम्हें दिखेगा। काम वासना आती हुई तुम्हें दिखेगी
- 40:22अगर तुम इसे जाकर देखोगे, दूरी बनाकर देखोगे तो दिखेंगे, अगर तुम
- 40:28चुपके जाओगे, इनके साथ तो नहीं दिखेंगे।
- 40:32वैसे यही फॉर्मूलेशन बताते हैं मधु दास।
- 40:41डोंकलिंग छिपको मत दूरी बना लो दूरी बनाने से तुम्हें वह चीज़
- 40:50दिखाई पड़ेगी और जो चीज़ दिखाई पड़ेगी वो तुम हो नहीं।
- 40:59तुम सिनेमा हॉल में जाते हो, मूवी देखते हो, मूवी तुम होते हो, क्या
- 41:04नहीं और मूवी को तुम छोड़ के आ जाते हो ना त्याग देते हो ना?
- 41:11ऐसे ही जो तुम नहीं हो उसको छोड़ दो।
- 41:17फिर तुम संसार में अपना काम धाम करना शुरू कर देते हो।
- 41:20हो जाते हो मूवी वो तुम्हारी यादों में रह जाती है तो हमारी
- 41:24स्मृतियों में रह जाती है। ऐसे ही मरूकदास कहते हैं कि ये
- 41:30फ़ॉर्मूला है अपने उस सत्य तत्व तक पहुंचने का।
- 41:38कह दूँ मलूकदा छाड़ दे परइया। जो प्राया है उसको छोड़ दे।
- 41:53जो तुम नहीं हो उसको छोड़ दो और छोड़ते चले जाओ, छोड़ते चले जाओ न
- 41:59जाने तुमने कितनी आफ़तें मान्यताएँ या मान्यताएँ तुम्हारी
- 42:06आफ़तें हैं अपने ऊपर ओढ़ ली हैं नकाब की तरह।
- 42:12जो तुम नहीं हो उसको छोड़ दो छोड़ते छोड़ते छोड़ते तुम्हारा
- 42:20भार हल्का होता जाएगा। ये भार है तुम्हारे ऊपर फिर मलूक
- 42:28दास कहते तुम कहा पोचोगे पराई आस्क को छोड़ दोगे याने पराई को
- 42:35छोड़ दोगे? क्योंकि तुम इससे कलिंग मत कहो,
- 42:38फिर तुम इसको छोड़ दोगे, दूसरा दूसरे की तरह नजर आएगा तो तुम
- 42:44उसको छोड़ दोगे। भ्रम हुआ है के आईने में दिखती
- 42:50हुई तस्वीर में हूँ कोई पत्थर से, उस तस्वीर को उस।
- 42:56आईने को तोड़ दो तो क्या होगा? वह आईना टूट जायेगा।
- 43:01संघ में तुम्हारी तस्वीर भी टूटेगी तब तुम प्रथम बार जागोगे
- 43:07अरे यह तो तस्वीर टूट गयी लेकिन मैं तो नहीं टूटा प्रथम बार
- 43:14तुम्हारा। इल्यूजन समाप्त होता है।
- 43:24ज़िन्दगी के हाइने को, तोड़ दो ज़िन्दगी के।
- 43:44दो ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो इसमें।
- 43:58अब। कुछ भी नजर आता।
- 44:04नहीं, इसमें अब कुछ भी नजर आता है।
- 44:10जब आईनो को तुम ईंट मार के तोड़ दोगे तो आईना टूट जाएगा और
- 44:17तुम्हे? कुछ दिखाई नहीं पड़ेगा।
- 44:21ऐसे ही तुम इन तस्वीरों को जो तुम्हारे मनस पटर पर बनती है मैं
- 44:27की तरह जो दिखती है तुम्हें वो है तो जाली तुम उनसे चिपके जाते हो
- 44:36और बन जाता है वह असली। ये कल्पनाएँ यही हिंदू धर्म में
- 44:40सिखाई जाती हैं। इसलिए मैंने तुम्हें कहा हिंदू
- 44:43धर्म का पथिक कभी नहीं पहुंचेगा क्यों?
- 44:49क्योंकि वह तस्वीर को स्वयं समझता रहेगा और आईने में अपनी तस्वीर
- 44:56को। देख कर वह खुश होता रहेगा और चिपक
- 45:01जाएगा। मैं कितना सुन्दर हूँ, मैं कितनी
- 45:04सुन्दर हूँ, तिल लगा लोगे, कभी मेकअप कर लोगे यह तुम्हारा ही
- 45:10आयोजन है। यह तुम्हारे ही बाजार से
- 45:15खरीदेंगे। फेसबुक।
- 45:16लाली हैं। ये भीतर से आई हुई वह लाली माँ
- 45:24नहीं है, वह गालों नहीं है जो भीतर से आई जो साहिबा के चेहरे पर
- 45:32थी। वो गुरु नहीं लाबन्य नहीं है जो
- 45:43भीतर से आया कहते हैं साहिबा बड़ी सुंदर थी, मिर्ज़ा उसकी सुंदरता
- 45:53पे आशक्त हुआ लाबन्य था भीतर से, लेकिन यह जाली थी।
- 46:00ऐसे ही तुम अपनी ही तस्वीरों पर मोहित हो जाते हो, आईने में
- 46:06तस्वीर देखते हो, सजा लेते हो, फेस पाउडर लगाते हो, लाली लगा
- 46:11लेते हो, कजरिया लगा लेते हो, बिंदिया लगा लेते हो और फिर देखते
- 46:16हो बालों की लट्ठ बना लेते हो। ये सब नकली है, ड्रामा है, दूसरों
- 46:23को मूर्ख बनाने के एक ढंक है। लोकदास कहते हैं, इस आशा को छोड़
- 46:35दो। छड़।
- 46:39दे पराईया कहत मलूकदा छड़ दे पराईया।
- 46:55फिर जब तुम को छोड़ दोगे, दूसरे को छोड़ दोगे, जो दूसरा है नहीं,
- 47:00उसको छोड़ दोगे को छोड़ दोगे तो तुम कहाँ जाओगे?
- 47:04तुम अपने भीतर जाओगे, स्वयं में चले जाओगे, स्वयं में कूद जाओगे,
- 47:09तुम तुम जो हो वास्तव में हो, फिर तुम इमेजिनेशन से छुटकारा करो।
- 47:18फिर यह जो तुमने कृत्रिम कृत्रिम बनाया था, आर्टिफिशियल
- 47:22आर्टिफिशियल ऑथेंटिसिटी नहीं थी। उस समय प्रमाणिकता नहीं थी।
- 47:31यह टूट जाएगा जैसे कांच का आइना टूट गया।
- 47:41फिर तुम रामधन के पास पहुँच जाओगे, अभी तो तुम बाहर से धन
- 47:45इकट्ठा किया, यह बिल्कुल वैसे ही सजने की कवायद है जैसे कोई स्त्री
- 47:51अपने आप को कुरूप स्त्री अपने आप को फेस पाउडर लाले लगा के कजरिया,
- 47:56लगा के काजल लगा के बिंदिया लगा के सजाते।
- 48:00जुल्फों की लठ बना के सजाती है अपने आप को होता सब नकली है?
- 48:06ड्रामा फिर। मलूक दास कहते हैं, अगर तुमने ऐसा
- 48:13करना शुरू कर दिया जो तुम नहीं हो उसको छोड़ना शुरू कर दिया।
- 48:20और पता लगेगा जिसे तुम देख लेते हो वह तुम नहीं जो दिखता है
- 48:26तुम्हें वो तुम नहीं है सीधा सा फॉर्मूला सीधा सा एक तरकीब।
- 48:40फिर तुम रामधन के पास पहुँच जाओगे।
- 48:42असली रामधन के पास असली धन के पास से बाहर के सिक्के तुम्हारी
- 48:47मान्यता है ये सब सिक्के तुम्हारी मान्यता है सब तुम्हारी मान्यता
- 48:53है बाहर। लोहे का भाव कम है, सोने का भाव
- 48:57ज्यादा है। क्या है तुम्हारी माँ ने का लोहा?
- 49:03ज्यादा काम आता है लोहे के गार्डन बड़े बड़े महलों को खड़े कर देते
- 49:08हैं। सोने के गार्डन में खड़ा कर
- 49:09पाएंगे क्यूँ? क्योंकि सोना?
- 49:14उतना सख्त नहीं होता जितना लोहा होता है।
- 49:24रामधन पाई, के। फिर तुम रामधन को पालोगे।
- 49:33फिर का की शरण जाइए। रामधन पाई के फिर का की शरण जाइए।
- 49:52का की शरण जाइए देना बंदो। देना ना अपने अंतस के उस देना
- 50:06बंदो देना ना को कहते हैं। हम लोग का कोई बाहर नहीं बैठा है।
- 50:13मेरी सुध लीजिए। मुझे भी अपने पास बुला लीजिए,
- 50:20मुझे भी खेंच लीजिए। मेरी सुध लीजिए देना बंधु देना।
- 50:33हे दीना बंधु हे दुखियों के बंधु हे दुखियों के नाथ मुझे भी अपनी
- 50:42तरफ खेच लो तुम आनंद के सागर हो सोना है जब तक पहुंचते नहीं।
- 50:53और देखो सुनाने वाला गलती भी। सुना सकता है भरा पड़ा है।
- 50:59आज यूट्यूब गलत सुनाने। वालों को नामदेव की कथाओं को कहने
- 51:04वालों को जो नॉन साइंटिफिक है। कह तू मलूक दा।
- 51:16छोड़ दे पराया रामधन। पाई।
- 51:24कै। फेर?
- 51:26का का कि शरण जाई है। देना बंधु देना।
- 51:45मेरी सुध ली जी। ये कुछ मेरे भी सुध।
- 51:51लोग हैं हे दिन बंधु। सबके हर्द में।
- 51:55अंत स्थल में विराजमान। हे परमपिता परमेश्वर।
- 52:05मेरी भी सुधरा। मेरी सुध ली।
- 52:13जी है देना बंदो। देना ना?
- 52:21मेरी सुध। लीजिए मेरी सुध लीजिए मेरी सुध।
- 52:33लीजिए। देना ना?
- 52:52धन्यवाद इख राजा। के राजदुलार इख राजा के।
- 53:08राजदुलारे बन बन। फिरते।
- 53:17मारे मारे एक राजा के राजदुलारे। अन फिर से मारे मारे ओनी हो तर
- 53:44ईना का। टारे डरना, काऊ के तार सबके।
- 54:01कष्ट। मिटाने।
- 54:04वाले? सबके।
- 54:08कष्ट। मिटाने वाले कष्ट उठाते हैं।
- 54:23सबके कष्ट। मिटाने वाले कष्ट उठाते हैं जन जन
- 54:39के प्रिय आम लखनो सिय धन को जाते हैं हो विगना तेरे लेख किसी के?
- 55:02समझ न आते हैं।