Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Feb 26 - आत्मा का भोजन क्या है? "मिठत नीवीं नानका" का गहरा आध्यात्मिक रहस्य!! Must Watch
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- 0:00विख्यात नैमी नानका गुण चंगई आपका मैंने आपको बताया, ज़िन्दगी कैसे
- 0:12जीनी है अपनी शक्ति को कमाना नहीं।
- 0:17और तुम्हारी शक्ति सबसे ज्यादा जो तुम खर्च करते हो वो है परमात्मा
- 0:23के नाम के जाप को जिसका कोई अर्थ नहीं, जिसका कोई नतीजा नहीं, उसे
- 0:29रिश्वत नहीं चाहिए। उसने कब कहा मुझे रिश्वत?
- 0:35संकल्प मात्र से सारी सृजना को बना देने वाला मालिक तुम उसका नाम
- 0:43रखो, तुम उसकी सलाह करो, इसका भूखा है क्या?
- 0:49तुम इतनी भी समझ नहीं तुम इतने मूर्ख हो।
- 0:58सब ना जियाँ का एक दात था सो मैं बिसरण ना जाए वह ना मुझे भूले मैं
- 1:06तो भूल भूल जाऊंगा मुझको 2000 काम है शरीर को।
- 1:14बचाना है, पालना है, दूसरों के काम करने हैं, सुख दुख में साथ
- 1:20निभाना है मुझे जिम्मेदारियां, कर्ज, फर्ज, मर्ज कर्ज बहुत है,
- 1:29लेकिन हे दाता मैं तो भूल भूल जाऊंगा।
- 1:32तू मत भूल जाना तू मुझे याद रख।
- 1:50मेहरा वाले आ? साईंया रखे चरिना देखो मेरा
- 2:07वालिया। शरना देखो मेरा शरना देखो।
- 2:38चरना देखो ल रखें चरना, देखो ल। मेरा आलिया मेरी फरियाद तेरे दर
- 3:11के और सुनामा कैनूं। मेरी फरियाद तेरे दर के और सुना
- 3:28के न खोलना दफ्तर है ब वाले। दर्दो तक ना मिनु खोल ना दफ्तर
- 3:46एबो वाले दर्दो तक ना मिनु। दर्दों तक न मेनू रखें चरी न निकल
- 4:06मेरे वाले आसैया रखें। चरना दे खोल मेरा वाले आ।
- 4:22संसार के सभी काम निपटा के अब आजाओ असली काम पे जब तुम्हारी सभी
- 4:31बेड़ियों को तोड़ेगा। और तुम उस रस को भी जाओगे जैसे
- 4:36रात को नींद की जरूरत होती है। वैसे आदमी को जीवन में इस रस की
- 4:41आवश्यकता होती है और तुम सारी उम्र बीत जाती है।
- 4:45इस रस का एक भूत भी नहीं पी पाते। रात की नींद ने तुम्हें ऊर्जा से
- 4:52युग तो कर दिया, तुम तरो ताजा तो हो गए लेकिन ध्यान रखना, तुम्हारा
- 5:03मन और मस्तिष्क और शरीर के टिशु तरो ताजा हो गए।
- 5:11और इसके अलावा कुछ और भी है। जीसको आहार की जरूरत है वो क्या
- 5:21है? वो है तुम्हारा अपना आपा?
- 5:28उसको क्या आहार चाहिए? उसको तुम ही चाहिए, वह तुमको ही
- 5:37मांगता है, पिता पुत्र को ही मांगता है।
- 5:43आ लग जा गले दिल दुआ लग जा गले दिल दुआ।
- 6:03ऐसे पुकारना है वो मेरे दिल के टुकड़े हाँ, मेरी आगोश में आज है
- 6:15उससे जुदा हुए हो तुम। उसको तुम्हारी जरूरत है तुम ही
- 6:20उसका भोजन तुम शरीर को भोजन दे देते हो, नींद दे देते हो, लेकिन
- 6:26तुम्हारी आत्मा भीतर बिलखती रहती है, यही अतृप्ति का कारण है।
- 6:33तुम शरीर को तृप्त कर लेते हो, मन को तृप्त कर लेते हो।
- 6:38मनोरंजन के द्वारा, लेकिन आत्मा है सदा ही भूखी रह जाती है, आत्मा
- 6:47का भोजन है तुम। लग जा गले।
- 7:01वह तुम्हें चाहता है उसके जिगर के टुकड़े तुम या कोई आहार नहीं
- 7:09मानता वह कोई निद्रा नहीं मानता, वह तो तुम्हें ही मानता है।
- 7:18तुम ही जाके उसकी गोदी में सो जाओ, तुम ही उसके आँचल में समा
- 7:23जाओ वह ऐसी माँ है जो तुमसे प्यार करना चाहती है।
- 7:34जो तुम्हें लोरी सुना के सुलाना चाहती है।
- 7:37तुम मुद्दों से सोए, वह भी जागता रहता है कि तुम कब आओगे और तुम भी
- 7:48चैन से सो नहीं पाते। और तुम्हें पता भी नहीं कि हम चैन
- 7:53से सो क्यों नहीं पाए? वह इंतजार करता रहता है कि कब
- 8:02आओगे तेरे आने की खुशी में सिर्फ मैं जागा नहीं तेरे आने की खुशी
- 8:11में सिर्फ मैं जागा नहीं। तेरी आँखों से भी लगता है कि तू
- 8:16सो या ना था, तरक्की तो मैं भी नहीं होती और चैन उसे भी नहीं
- 8:26पड़ता। हर बार ज़रा सा खटका होता है।
- 8:34ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोता है, ज़रा सी आहट।
- 8:52होती है तो दिल सोचता है कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये।
- 9:11वो तो नहीं। कहीं।
- 9:18ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो?
- 9:36जो तुमने दिन भर के, जो व्यर्थ के कामों को न करके जो जापताप वगैरह
- 9:46जो शक्ति जुटाई थी। उसको कहाँ खर्च करो?
- 9:51अब मैं यह बताने चला हूँ मिठ्ठ नीमी नान का गुण शंग है अब हमने
- 9:59वहाँ जाना है जो रस रूप है, जो तत्व है जो रस तत्व वह रसो वैसा
- 10:06हो। जो मीठा है, जो मीठा है, जो आपको
- 10:17बुलाता भी है, लेकिन बुलवाने का अंदाज बड़ा पैसिव है।
- 10:26अटैक्टिव नहीं, तानाशाही नहीं। अहिंसक है, जो ऐसा बुलाता है
- 10:33तुम्हें उसकी पुकार, भीनी भीनी मीठी मीठी अनदनाद की तरह हल्की सी
- 10:43झंकार आती है तो मज़े से सरप और तो होते हो।
- 10:48लेकिन तुम उसके पास नहीं जाते। वह तुम्हें पुकार रहा है और बाबा
- 10:59कहते हैं बड़ा मीठा है मिट्ठक नीमि वह अहिंसक है, हिंसक नहीं
- 11:07है। नण का गुण है चंगाईयाँ, तप और सब
- 11:13चीज़ का सार है वो तुम्हारे जीवन का सार है संसार का सार अध्यात्म
- 11:21का सार है, बड़ा मीठा है, अमृत है।
- 11:30अब वहाँ जाना है। एक तीसरी प्यास बाकी रह गई यह तुम
- 11:37कैसे मिटाओगे उसके पास से जाते हैं और उसके पास कैसे जा पाओगे?
- 11:46जो दिनभर में तुमने व्यर्थ के कामों को छोड़कर मत जब हो जा पांच
- 11:51नौ पहुंचने वाले 7 साल में पहुँच जाते हैं।
- 11:57ज्यादा से ज्यादा बुद्ध घर से गए, 6 साल में पहुँच गए।
- 12:04महावीर ने सफर जारी रखा, 12 वर्षों में पहुँच गए, लेकिन मैं
- 12:09तो सुना है यहाँ 4040 साल ढेर में बैठे लोग पांच नाम का जब कर रहे
- 12:17कुछ उसमें बदलाव आया ही नहीं। शरीर बूढ़ा हो गया माथे पर सलवटे
- 12:23आ गई, हाथ कांपने लग गए, सास चढ़ने लग गया, पहुंचे कहीं नहीं,
- 12:30अमृत की एक बोध न मिले। मैं कहा करता हूँ अरे भाई जिसने
- 12:37तुमको पांच नाम दिए। रस तो उसने ही कभी नहीं पिया तुम
- 12:43मुझसे क्या उम्मीद रखते हो? थोड़ा देख परख लिया कर मिठ तनी
- 12:53नीना का बड़ा प्यारा है बड़ा मीठा है।
- 13:00बड़ा अहिंसक है नीविंग मिठत अमृत है कड़वा तू नहीं है।
- 13:19सभी गुण और अच्छाइयों का तत्त्व है।
- 13:22वो रस है, वो इतना मीठा है कि तुम उसमें समा जाते हो तो सदा के लिए
- 13:31समय ही रहते हो, फिर उससे बाहर आने का दिल नहीं करता।
- 13:39ठहर जाते हो। पाली मंजिल जीस चीज़ की तलाश थी।
- 13:45वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गए। नजर के सामने।
- 14:04घटा। सी छा गई।
- 14:08संसार के प्रति अरुचि हो जाती है। और भूली दास्तां यकीन।
- 14:24होगा किसे कि? हम तुम।
- 14:30इकरा संग चले थे। कभी हम उसके पास थे।
- 14:40लेकिन जो से बिछड़े हैं तब से न उसे चैन, न तुम्हें चैन वो भूली
- 14:53दास्तां जो फिर याद आ गई अब उसकी याद जहाँ वो है उसके घर चलो।
- 15:06उसका कोई भी नाम इजाद करके पुकारो मत।
- 15:10उससे कोई नाम उसका नहीं है और तुम्हारी इंट्रोडक्शन भी उससे
- 15:15नहीं है और तुमने कभी सोचा कि यह लोग तुम्हें उल्लू तो नहीं बना
- 15:22रहे हैं? जो कभी देखा नहीं जो कभी जाना
- 15:29नहीं जो कभी निहारा नहीं भला उसको हम सवरन कैसे करें।
- 15:37मैं एक शब्द बोलता हूँ तुम बताना यह क्या होता है।
- 15:44तड़प व्याम सेंगे बताओ क्या होता है तड़प व्याम सेंगे।
- 15:59बस ऐसे ही तुम्हें परमात्मा का पता है किसको याद करते हो?
- 16:05महज इन शब्दों का रेपेटिशन है क्या बताना फिर क्यों मग्ज़ जखई
- 16:14करते हो? क्यों मग्ज़ जखपाई करते हो?
- 16:20जब तुम्हें पता ही नहीं किसको तुम स्मरण कर रहे हो, वह कभी देखा
- 16:25नहीं मिला नहीं राह में मुलाकात कभी हुई नहीं फिर पुकार किसे रहे
- 16:32हो, याद किसे कर रहे हो और क्या याद कर पाओगे?
- 16:38उसको कभी से पहले देखा है तुमने कभी उसकी हवा का झोंका तुम्हें
- 16:48छुआ है, कभी शानो शक्ल। से कभी तो कि वो है कैसे नहीं,
- 17:01नक्श कैसे नहीं तो उनसे नहीं जानती बस इन इन पाखंडियों की।
- 17:17तो यह दुकानदारी है। इन पाखंडों ने अपनी दुकानदारी
- 17:28करनी है और तुम इसीलिए नहीं छोड़ पाते कि तुम्हें ब्याह है कि क्या
- 17:36करें? 35 साल तो हो गए, अब व्यर्थ हो
- 17:39जाएगा काम। शायद और यह भी कह देते हैं कि
- 17:44देखो देखो बेटा हँसी है, अच्छी है, ता टाइम तो फिर लगते ही होता
- 17:56है थोड़ा और तेज चरखड़ी को मारया करो।
- 18:03थोड़ा नाम समृण तेजी से कर दिया करो, जल्दी पागल हो जाओगे जल्दी
- 18:12एनर्जी लेसनस में चले जाओगे मुर्छा आ जाएगी गिर पडोगे दम से।
- 18:21बिल्कुल व्यर्थ की बातें हैं और इन व्रत की बातों को छोड़कर जो
- 18:26तुमने शक्ति कमाई थी वो कहा लगा दो अब मैं वो बताने जा रहा हूँ वो
- 18:31उस अमृत को पीने की जिसे बाबा कहते है मिठत नहीं, नान का गुण
- 18:36चढ़ उस अमृत रस को पीने में लगा दो।
- 18:41वह बड़े काम का है, यह शक्ति को बचाना इसलिए आदि संतों ने
- 18:48ब्रह्मचर्य पे इतना ज़ोर दिया। ब्रह्मचर्य का अर्थ है सभी
- 18:56सुराखों से झड़ता हुआ जीवन। सेव करो बचाओ, उसको एकत्रित करो,
- 19:07उसको इकट्ठा करो एक जगह पर और फिर उसको उससे कोई काम लेना है उसको
- 19:14अपने भीतर उतरने में काम लेना है। वह तुम्हारे संग होगा।
- 19:21तुम एनर्जेटिक और कॉन्शसनेस से ग्रस्त होगे, फुल होगे तो तुम
- 19:28अपने भीतर जा सकोगे। उछलते, कूदते, नाचते गाते हम ऐसे
- 19:36ही गए हैं। हमने रो पिट के ये सफर तय नहीं
- 19:41किया। हमने मेरा की तरह नाचते गाते हैं,
- 19:51कूदते फांदते हैं। गीत गाते, गुनगुनाते यह सफर तय
- 20:01किया हमने अपनी जिंदगी इन पागलखानों में नहीं गुजारी यह
- 20:08डेरे पागलखाने यह संस्थाओं। जिनको आप कोई भी नाम दिए हो इसे
- 20:20नरंकार कह दो, इसे भी के कह दो इसे कुछ भी कह दो, ये पागल कहाँ
- 20:26है इनको पता ही नहीं मुरली। बजाई जाती है कि मुरली सुनाई जाती
- 20:33है, क्योंकि उस धन को कभी सुना ही नहीं।
- 20:42उन्होंने मुरली तो तुम्हारे भीतर ही बज रही है।
- 20:46हर वक़्त उसे सुनना होता है, उसे आनन्दनाद कहते हैं।
- 20:54ये शब्दों की मुरली सुनाते हैं। सुबह सुबह और तुम लोग बैठ जाते
- 20:59हो, परमात्मा की यही आसानी है और यही मुसीबत है।
- 21:06परमात्मा किसी ने देखा नहीं इसीलिए किसी भी तरह से खैद पर।
- 21:13सभी मूड हैं। सभी को आवश्यकता है उस रस की
- 21:16खींचे चले जाएंगे और जो चाहे बोल दो और जो जितना बड़ा पागल छाती
- 21:25ठोक के कहेगा, मैंने देखा है उसके पास ज्यादा जाएंगे मेरे जैसा
- 21:31व्यक्ति जो कह के देखो भाई। नहीं बताया जा सकता ही कैनट बी
- 21:37एक्सप्रेस्ड ही इस नॉट ओनली अननोन बट ऑल्सो अननोनबल हम तो दूर तलक
- 21:44की बात मुखा देते हैं, वह जाना ही नहीं जा सकता।
- 21:48वह अज्ञेय है तो फिर वो पिया जाता है।
- 21:58उसको पीलाओ और बच जाए तो नहा लो। दो कुट पीला दे साकिया, दो कुट
- 22:14पीला दे साकिया। बाकी मेरे के रोड़ दे दो, कुट
- 22:28पिला दे साकिया। बाकी मेरे तेरो।
- 22:36ये नहाने की चीज़ है। यह पीने की चीज़ है, गटकने की
- 22:41चीज़ है, जपने की चीज़ नहीं है तो इस शक्ति को साथ लेके फ्रेशनेस।
- 22:51अवस्था में नाचते गाते कूदते फांते यह आसान सफर तय हो जाएगा।
- 22:58रोते चिल्लाते, छाती पीटते हुए सफर कभी तय नहीं हुआ।
- 23:04यह सफर मस्ती से हल होता है। रोनी सुरते कभी इस सफर को तय नहीं
- 23:14कर सकती। ये लटके हुए चेहरे शिकायत से भरे
- 23:18हुए थे। इस सफर को तय नहीं करवा सकते।
- 23:25इन्होंने खुद ही नहीं किया। इनको भी आगे से ही कुर्सी मिली और
- 23:33आगे से ही कुर्सी देखे जाएंगे। बुद्धों जिसने उस रस का एक बूंद
- 23:40भी कभी नहीं पीया। गुरु बदल जाते हैं, देखो शीशे वही
- 23:46रहते हैं, एक भी नहीं कम होता है, बढ़ते ही जल जाते हैं।
- 23:54इसीलिए तुम कहते हो डेरे में इतने करोड़ हो गए होंगे भाई जब पिछले
- 23:57निकले नहीं अगर कोई मरे ना। तो जनम ही जन्म लेते रहे तो धरती
- 24:04भर जाएगी ना। जब मूक तो कोई हुआ नहीं और मुक्त
- 24:13होने के लिए नए नए लोग आते रहे और पुराने ये ले नहीं तो फिर संख्या
- 24:20तो बढ़ेगी ना भाई। गहरा से जो व्यर्थ के कामों में
- 24:31तुमने शक्ति बचाई थी, उस शक्ति को तुम अपने अंत समय उतरने के लिए
- 24:37प्रयोग कर लो, यही इसका सही ढंग है प्रयोग करने का।
- 24:45पहले बचाओ, फिर बचाई हुई उस शक्ति को संघ लेकर अपनी चेतना में उतर
- 24:53जाओ। अंत समय और बाबा कहते हैं वो नीचा
- 24:59नीचे होने से मिलेगा। मिठत नीम।
- 25:06वह नमन से मिला। हम नमन तो करते हैं लेकिन नमनकार
- 25:10से नहीं पता। नवाज तो पड़ते हैं, हमारा शरीर
- 25:14झुकता है अहंकार कहाँ झुकता है? अहंकार तो घोड़े खरीद रहे होते
- 25:23हैं पेशावर में। इसको तुम नमाज़ कह देते हो?
- 25:31फिर शुक्रवार को छः बार पढ़ो की पांच बार पढ़ो, फिर रोज़ ही 10
- 25:36बार पढ़ लो। सारे दिन नमाज़ करते रहो, वो
- 25:39मात्र मगज खपाई के अंदर और कुछ भी नहीं।
- 25:43कुछ न मिलेगा उस रस की एक बूंद भी न पी पाप है।
- 25:56फिर वो दिन कभी नहीं आएगा कि कल ही फूल बन के खिल जा कल ही अपनी
- 26:03महक खिलने से पहले बिखेरनी शुरू कर दे।
- 26:09कलियों ने घोंघट खोले कलियों ने। घूँघट?
- 26:19खोले। हर फूल पे भंवरा।
- 26:28हर फूल पे महरा ढोल खाया प्यार का।
- 26:36मौसम गुलजार का। मौसम कलियों ने।
- 26:47घूंघट। को ओले, हर फूल पे भंवराडो।
- 26:57फिर जैसे ही तुम फूल की तरह खिल जाओगे, सुगंध बिखेरने शुरू कर
- 27:01दोगे तो भंवरी भी आ जाएंगे। यह इकट्ठा भावरों का उनका होगा जो
- 27:13सुगंध पी लेना चाहते हैं, जो उस प्रयाग के रस को इकट्ठा करना
- 27:19चाहते हैं वो इकट्ठा करना जिनके भीतर प्यास से जगी।
- 27:24वो आ जाएंगे कहीं ना कहीं से निकल के आ जाएंगे।
- 27:27उनको तो खुशबू दूर से आ जाती है तो जो दिन में मग्ज खपाई ना करके
- 27:39तुमने इस शक्ति को जुटाया था शुद्ध भोजन के जरिए।
- 27:44शुद्ध आहार और व्यवहार के जरिये शक्ति खोई न थी।
- 27:48जो बचाई थी उस शक्ति को संघ लेकर पूंज्य बनाकर इकट्ठा करके उस
- 27:56शक्ति के सहारे अपने ही अंत में उतरना शुरू कर देना।
- 28:01मिठत नी मि नका। वह नमन से मिलता है।
- 28:08ये ठीक नमन से नमाज़ बना लेकिन नमाज़ किसने पड़ी किसी का अहंकार?
- 28:23नमन हुआ। किसी का अहंकार कम हुआ, किसी के
- 28:28अहंकार की मात्रा कम पड़ी। अहंकार छोटा हुआ न?
- 28:37तुम नमाज़ करके ज्यादा बड़े अहंकारी हो जाते।
- 28:41शुक्रवार के दिन खास तौर से जुमे के दिन पांच नमाज़ आज ज्यादा
- 28:49अहंकार है। आज पांच दफ़े नमाज़ पड़ी तुम
- 28:56गलती? नमाज़ पढ़ने जैसी चीज़ थोड़ी होती
- 28:59है, नमाज़ पीने जैसी चीज़ होती है, नमन करने जैसी चीज़ होती है,
- 29:06अभिवादन झुकना करने जैसी चीज़ होती है जिसमें तुम्हारा अहंकार
- 29:11गल जाए, शून्य हो जाए, भस्म हो जाए, कम हो जाए।
- 29:17इसी तरह रोज़ नमाज़ करते रहो और शुक्रवार का दिन क्यों चुना था?
- 29:21क्योंकि उस दिन शुक्र तारा ऊर्जा का प्रतीक शुक्र तारा ऊर्जा का
- 29:32प्रतीक। घनी ऊर्जा तुम लोगे तो अपने भीतर
- 29:39गहरे उतर पाओगे। इसलिए जैसे शुक्र अस्त होता है तो
- 29:46हमारे एस्ट्रोलॉजिस्ट कोई नया काम करने से रोक देते हैं।
- 29:52कारण? कारण ये तुम्हारे भीतर जोश नहीं
- 29:55होगा। शुक्र ऊर्जा पैदा करता है, जोश
- 30:00पैदा करता है। तुम इतने जोश पूर्व काम शुरू ना
- 30:06कर सकोगे और आवाज ही अंजाम हुआ करता है।
- 30:12फर्स्ट एंड द लास्ट इम्प्रेशन्स आर काउंटेड आगाज़ ही गलत कर लिया।
- 30:22इसलिए शुक्रवार के दिन पांच बार पांच बार पियो उस रस को।
- 30:31लेकिन नमाज़ होती है लेकिन नमन होता कहाँ है?
- 30:36क्या शुक्रवार के दिन तुम्हारा अहंकार कम हुआ बढ़ जाता है?
- 30:44आज तो नमाज़ पांच बार। फिर तुम ये स्वपन देखते हो के ईद
- 30:53आएगी गलती में वह ईद तो तब आती है जब तुम झुकते हो झुके तो तुम है न
- 31:07तो ईद की भी आकांक्षा मत रखना। तुमने हर चीज़ की डकर बना ली
- 31:13अहंकार की बलि देने के बजाय तुमने मासूम मेमनों की बलि देनी शुरू कर
- 31:17दी और बकरीद बनाना शुरू कर दी। यह है मूर्खता की निशानी है तुमने
- 31:25हर चीज़ को कर्म कांड में डाल दिया जबकि ये मनो अवस्थाएँ।
- 31:32ढालना था, अहंकार को बलि देना था, अहंकार को बलि दे दी तुमने मेमने
- 31:37को खुद के स्वाद के लिए के आज ये मेमना बनाएंगे।
- 31:53तो निगाहें तो तुम्हारी फल पर अटकी रही ना?
- 31:58कृष्ण कहते हैं फल को भूल जा कर्मण्य वाध का रस से मा फले सु
- 32:02का राज़ तुम्हारी निगाहें फल पर अटकी रहीं आज नरदोष मेमना लबा लबा
- 32:10सा प्यारा प्यारा सा ढूंढ के ले। लेके आते हो 150 से ज्यादा लग
- 32:14जाये कोई बात सभी धर्मों ने संतों के वचनों को कर्मकांडव में डाल
- 32:26लिया है इसलिए धर्म आज धर्म न रहकर।
- 32:32कर्मकांड मात्र रह के सभी धर्मों का यह हाल आगा ऊत है।
- 32:40या किस किस को समझाऊं? बर्बाद उलस्ता करने को बस एक ही
- 32:54उल्लू काफी है बर्बाद उलस्ता करने को बस एक ही उल्लू काफी है, हर
- 33:02शाख में उल्लू बैठा है। हर शक पे वो लोग बैठा है अंजाम
- 33:10में बलसता क्या होगा बरबाद हो जायेगा वो बलसता तुमने हर संत के
- 33:18अलफ़ाज़ को कर्मकांड में ढक लिया। इसलिए तुम गुण तत्व से भी हीन हो
- 33:29मिठत नीम नान का गुण चंगईया तत्व अगर सच में नमन हो जाती तो वह रस
- 33:37पी लेते, जो सार्थ था, गुणों का तत्व था अच्छाइयों का।
- 33:47लेकिन तुमने सभी को कर्मकांठ बना लिया।
- 33:54आज सर्कसे बाकी हैं, धर्म हो गया सभी धर्म आज सर्कस बन के रह।
- 34:06यही कारण है धार्मिक व्यक्ति के चेहरे पर प्रसन्नता के फूल खिले
- 34:11होने चाहिए। होंठों पर बंसरी होनी चाहिए।
- 34:16कृष्ण जय। कंठ में गीत होने चाहिए नानक जैसे
- 34:22सुरती खुमार होनी चाहिए कबीर। येस?
- 34:33लेकिन तुम्हारे चेहरे पर नहीं है, तुम्हारी आवाज में कोई जादू नहीं
- 34:41है। तुम्हारी आवाज़ में वो लिवड़ के
- 34:47आई हुई अमृत के रस की झंकार नहीं है क्यों नहीं है क्योंकि तुमने
- 34:57अमृत रस पिया नहीं? तुमने कर्म कांडों में डाल दी,
- 35:02सभी प्रथनाएँ बना ली तो दिन भर में जो शक्ति तुमने बचाई थी उस
- 35:09शक्ति को साथ लेके वृहद्य शक्ति को साथ लेके अपने अंत में उतर
- 35:15जाना उससे ये काम लेना पहले बचाना।
- 35:21फिर उसको भीतर आयोजित नियोजित कर लेना, अंतश में उतरने के लिए उससे
- 35:27काम ले लेना और 1 दिन तुम पाओगे कि तुम उस रस के पास पहुँच गए
- 35:35जिसे बागवा कहते हैं मिठुतनी में ही नान का।
- 35:40गुण संज्ञान तथ्य उस रस अमरत रस के पास पहुँच जाओगे जीसको पीने से
- 35:47नमनता आती है जीसको पीने से श्रद्धा आती है जीसको पीने से
- 35:53अहंकार खो जाता है जीसको पीने से जिंदगी जीने का स्वाद आ जाता है।
- 35:59लोग शक्ति को साथ लेके अपने भीतर उतरे कैसे प्रत्येक घटना को जो
- 36:07तुम्हारी जिंदगी में घटित हो रही? है उसको पूरे।
- 36:11प्राणों से स्वीकार कर के। कुछ भी हो जाये वो तुम्हारे हित
- 36:23में हो, वो तुम्हारे अहित में हो, उसको पूरे प्राणों से स्वीकार कर
- 36:32ठीक है, तू जो करता है? वह ठीक करता है और भले के लिए
- 36:37करता है, अवश्य नहीं। इसमें कोई न कोई भला होगा।
- 36:41छुपा हुआ मैं अज्ञात मैं गवार मैं भू जड़ मैं नहीं जानता होऊंगा
- 36:52लेकिन तू जानता है तू विराट है। तुने ये सर्चना की है?
- 36:56हम तो एक रेत का जर्रा भी नहीं बना सकते हैं तो तू जो करता है आज
- 37:04भले ही हमें ना मालूम हो, लेकिन कल पता चलेगा यह है हमारे भले के
- 37:09लिए था। ऐसी मनोदशा को साथ लेकर हृदय में
- 37:15बरसा की तुम जैसे ही भीतर उतरोगे सफर बड़ा आसान हो जाएगा हे।
- 37:28खुदा हर फैसला। तेरा मुझे मंजूर है, है खुदा तेरा
- 37:49मुझे हर फैसला। मंजूर है, सामने तेरे तेरा बंदा
- 38:05बहुत मजबूर है। अल्ला।