Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Dec 25 - अनहद नाद सुनाई दे तो क्या करें क्या नही? -अनहद शब्द गगन में गाजे पिण्ड पड़े तो सतगुरु लाजे Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:10कुमार प्रशांत बाबा जी, कृपया एक शब्द का रहस्यत्मक अर्थ समझाने का
- 0:26कष्ट करें। उँ भा बैठा सूतां लीजय कब हूँ
- 0:38चित्त भंग न कीजय अन्हद शब्द गगन में गाज पैंट पढ़ें तो सतगुरु
- 0:47लाज। गुरखवणी का ये शब्द है
- 1:04जीस, परमात्मा के पीछे तुम पागल हुए जा रहे हो वह पल भरती खेल है।
- 1:20लेकिन पता चलता है वहाँ पहुंचने के बाद बड़े से बड़ा आश्चर्य होता
- 1:30है ये जब कोई व्यक्ति मोहमोक्षु। उस स्थल पर पहुँच जाता जहाँ से
- 1:46अन्हदन का गुंजार होना शुरू होता है।
- 1:52उदगम स्थल है वो अन्हदन का। मूर्खों ने इस धरती को जितना
- 2:04नुकसान पहुंचाया वो मूर्ख धर्म के नाम पे हो विज्ञान के नाम पे हो।
- 2:19या अंधविश्वास के नाम पे हूँ उतना धरती पे?
- 2:27किसी ने नुकसान नहीं पहुंचाया। गुरख कहते हैं, उम्भा?
- 2:38बैठा सोता ली जय कब हूँ चित्त भंगना की जय अनहद शब्द गगन में
- 2:45गाज पैण पढ़ें तो सतगुरु लाज गगन मंडल से एक आवाज।
- 2:58गूंज रखी है। निरंतर चौबीसों घंटे दिन भर रात
- 3:09धन्यभागी हैं वो जिनके भीतर। गगन मंडल का ये सुर ध्वन बजना
- 3:21शुरू हो गया है। अनहज शब्द गगन में गाजै पेड़ पड़ै
- 3:29तो सतगुरु लाज। गुरु गोरखनाथ कहते हैं, गगन मंडल
- 3:47में गगन मंडल ऑन दी टॉप ऑफ दी हेक।
- 4:00यहाँ पर एक आवाज निरंतर सुनाई पड़ती है।
- 4:0424 घंटे झिंकू की प्यारी प्यारी आवाज मधुरबंसरिया शंखनाद घंटा
- 4:21घड़ियाल वीणा मृदंग। कोयल की कुहू को अनहद शब्द गगन
- 4:33में गाजे तंड पड़ें तो सतगुरु लाजे।
- 4:44गौर कहते हैं कि गुरुकृपा से ये शुरू हो जाता है।
- 5:00क्या करना है? उस वक्त अनाध शुरू हो गया तो
- 5:11डॉक्टर के भाषा वो कहेगा ये तो बिमारी है।
- 5:173110 की बिमारी है, इसका इलाज कराओ।
- 5:22बहुत से डॉक्टर मेरे पास खुद आकर इसका इलाज पूछ चूके हैं।
- 5:31मैं समझता हूँ कि यह कोई बिमारी नहीं है।
- 5:37यह उस व्रत सर्जना को रचने वाला सर्जन हारा।
- 5:45उसके मूल तत्व से उठती हुई ध्वनि जो तुम्हें अनद की तरह सुनाई
- 5:53पड़ती है गगन वंडर में। बहुत से लोगों को ये सुनाई पड़ती
- 5:58होगी। आज भी सुनाई पड़ रही है और कभी
- 6:02बंद नहीं होती। शुरू तुम्हारे करने से नहीं हुई,
- 6:07लेकिन बंद भी तुम्हारे करने से नहीं होती।
- 6:13तुम खड़े हो बैठे हो, लेटे हो, ऑन द चेयर हो, कंप्यूटर के सामने काम
- 6:23कर रहे हो, बॉस की कुर्सी पर बैठे हो या सो रहे हो?
- 6:32किसी भी अवस्था में ये बंद नहीं होता।
- 6:40निरंतर चौबीसों घंटे दिनभर रात ये चलता ही रहता है।
- 6:59गुरु की नर्स कहती हूँ तुम्हें क्या करना है शुरू तुम्हारी
- 7:08मर्ज़ी से नहीं हुआ उसने तुम्हें पुकारा पुकारा, ये आवाज तुम्हें
- 7:22सुनाई पड़ेगी। बड़े मधुर हो गये, जैसे ऊपर से
- 7:32झरता हुआ झरना आनंद की भारी और तुम अगर इसे पी न पाओ, तो तुम से
- 7:43बड़ा अभागा और कौन होगा? आनंदनाथ शुरू होने के बाद अगर तुम
- 7:56कोई मूवी देखने चले गए, ताश खेलने बैठ गए, लूडो खेलने बैठ गए,
- 8:07टेलीविज़न पर बैठकर शर्तें लगा रहे हो, आज की ताजा खबर सुन रहे
- 8:11हो? गौरव कहते हैं कि तुम्हारे से
- 8:16बड़ा अभागा व्यक्ति और कोई नहीं फिर क्या करना है?
- 8:32गौरव कहते हैं कि इसको सुनो इसको सुनो, इस पर ध्यान लगाओ।
- 8:43निरंतर यह बज रहा है एक क्षण के लिए भी बंद नहीं होगा परमात्मा की
- 8:50आवाज़ है आवाजाही खलक नकार है, होता।
- 8:57समस्त भमंड की आवाज है और परमात्मा का नगाड़ है यह अनाह
- 9:04धनाह आवाजा एक हल्क है तुमने ये करना है।
- 9:13कि तुम्हें शांति से बैठ जाना, लेट जाना कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- 9:17यह कोई आसन नहीं है, यह कोई आसन नहीं है।
- 9:22आराम से लेट जाना कुर्सी पर बैठ जाना है।
- 9:29स्वभाविक मुद्रा में जैसा आपका मन चाहता है।
- 9:35उस मुद्रा में लेट जाना कोई वादा नहीं है।
- 9:39हमारे लेटने से बैठने से चलने से दौड़ने से यह बंद नहीं होगा।
- 9:47तुम वार्तालाप कर रहे हो तो भी ये चलता ही रहेगा।
- 9:56ज़रा भी तो इसमें व्यवधान तुम डाल नहीं सकते परमात्मा की किस सर्जना
- 10:03में तुम व्यवधान डाल सकते हो। किसी भी सर्जना में व्यवधान नहीं
- 10:08डाल सकते, कोई खोज करनी। तो परमात्मा की सृजना के अनुसार
- 10:15ही खोज करनी पड़ेगी। फिर तुम चाहे चंद्रमा पे पहुँच
- 10:20जाओ, मंगल पे पहुँच जाओ या किसी दूर दराज ग्रह नक्षत्र पे पहुँच
- 10:27जाओ, ध्रुव तारे पे पहुँच जाओ, सप्त ऋषियों के पास पहुँच जाओ।
- 10:36लेकिन चलना पड़ेगा परमात्मा के नियमों के अंतर्गत परमात्मा के
- 10:42नियमों को ज़रा भी चूके तो पल भर में तुम राख हो जाओगे।
- 10:55परमात्मा का नियम है परमात्मा ने तुम्हे कॉन्शसनेस दी और एनर्जी दी
- 11:05इस एनर्जी को तुम चाहो तो काम वासना में बदल सकते हो।
- 11:13क्रोध में बदल सकते हो लोह मोह, अहंकार, भय, मद, मत्सर में बदल
- 11:24सकते हो और इसी ऊर्जा को तुम चाहो तो ओज में परिवर्तित करके।
- 11:33अपनी स्वय तक पहुँच सकते हो। इसे ही कहते हैं कि परमात्मा
- 11:39तुम्हें स्वतंत्र बनाता है, शक्ति देता है, हथियार देता है अब
- 11:47प्रयोग तुमने करना है। तुम उसी चाकू से सब्जी छीन सकते
- 12:00हो, सब्जी छील के सब्जी बना सकते हो, खा सकते हो और उसी चाकू से
- 12:10किसी के पेट में चाकू घुसा के उसे मार सकता।
- 12:18प्रयोग करना तुम्हारा स्वतंत्र हक है, लेकिन प्रयोग के बाद उसके जो
- 12:31परिणाम आएँगे। उसको भोगने में तुम परतंत्र हो,
- 12:39तुम किसी का कतल करो, तुम स्वतंत्र रहो, बलात्कार करो,
- 12:45स्वतंत्र रहो, लेकिन ध्यान रखना। परमात्मा तुम्हें सिर्फ कर्म की
- 12:54स्वतंत्रता देता है। यहीं तुम उलझ जाते हो जब तुम्हारा
- 13:02मन कहता है परमात्मा किसने देखा कहीं दिखता है वो यहीं से शुरुआत
- 13:10होती है व्ययव्यचार की। मूड़ताओं की और पापों की किसने
- 13:19देखा? परमा तुम बस तुम ये नहीं देखते कि
- 13:28तुम्हारे पास जो यंत्र हैं। ये सथुल आँखें, चरम चक्षु और ये
- 13:34बुद्धि इसे वो देखा नहीं जाता। तुम ये नहीं समझते कि जीस यंत्र
- 13:44से वह दिखाई पड़ता है वो तुम्हारे पास नहीं है।
- 13:50सस्ते में काम चला लेते हो परमात्मा नहीं तुमने देखा अपनी
- 13:57आँखों से वो कहीं दिखा नहीं तुमने सोचा अपनी बुद्धि से वो कहीं दिखा
- 14:04सूजा नहीं फिर अगर वो है। तो गलत घर क्यों होती है?
- 14:10अगर वो है तो हत्या कतलोगार क्यों होती है?
- 14:18वो तो है लेकिन किम जोंग उन उत्तर कोरिया में आज भी कहर बरसा रहा।
- 14:29हमारे सामने इसी धरती पर यह मिसाल कितने तानाशाह हिटलर आया, स्टालिन
- 14:44आया, वह सोलनी आया, चंगेज आया। उनका हाथ कभी परमात्मा ने रोका,
- 14:54बलात्कारियों को कभी परमात्मा ने रोका नहीं रोका तुम बड़े हक से
- 15:06पूछते हो कि तुमने सृष्टि को बनाया?
- 15:10अगर तू है तो बलात्कार क्यों हुआ? तुम्हारे बाप का बोला रखा है
- 15:22बलात्कार करने वाले को दंड दो, हत्या करने वाले को दंड दो।
- 15:35तुम दंड उसे देते हो जो चार अक्षर तुम्हारी शान में गुस्ताखी कर
- 15:40जाता है फेंकोस कुजल नहीं तुम्हारे बारे में सच बोलने वाला
- 15:49व्यक्ति देशद्रोही हो जाता है। तुम अपने आप को दे से समझे बैठो
- 16:03जबकि तुम्हारी देले की औकात नहीं है 1 दिन आएगा जब तुम धर्म शेर से
- 16:15जमीन पर गिर जाओगे। मारकर गोली गिरा ली जाएगी।
- 16:32मारकर गोली? गिराली जाएगी ये मुहूर्त के उठा
- 16:45ली जाएगी जब। डोली निकाली जाएगी बे मुहूर्त के
- 17:03उठा ली जाएगी जब तेरी। वीर कौन वीर?
- 17:25वह जो मरने का साहस रखता है, जो मरने के डर से माफी मांगता है, वह
- 17:36वीर नहीं होता। वीर वह जो मरने का साहस रखता है
- 17:44लेकिन तुम्हारे शब्दार्थ उलटे हैं, कायर व्यक्तियों को तुम वीर
- 17:54का खिताब दे देते। तुम्हारे खिताब देने से वो वीर
- 18:02थोड़ी हो जाता है, तुम आलू को टमाटर कहना शुरू कर दो तो क्या वह
- 18:11टमाटर बन जाएगा? सत्य नहीं बदलता, तुम्हारे शब्द
- 18:19बदल सकते और शब्दों के बदलने से सत्य पर ज़रा भी प्रभाव नहीं
- 18:25पड़ता। मैंने कल ही समझाया था गुलाब के
- 18:30फूलों को तुम लाख गाली निकालो, वह खुशबू देना बंद नहीं करेगा।
- 18:36गुलाब के फूल को तुम कहो तुम बड़ा कुरूप है, बदसूरत है, तू दुर्गन्ध
- 18:42फैलाता है, वह ज़रा भी बुरा नहीं मानेगा।
- 18:47यह अस्तित्व को बुरा नहीं मानता। क्यों?
- 18:53क्योंकि वह इतना कॉन्फिडेंट है कि मैं सुन्दर हूँ, मैं लावण्य से
- 19:02युक्त हूँ मैं सुगंध फैला रहा हूँ, मैं गुलाब हूँ उसको ज़रा भी
- 19:12संदेह। तुम अगर किसी बात के ऊपर तुम्हें
- 19:19कोई गाली निकालता है, तुम गुस्सा हो जाते हो, इसका मतलब तुम्हें
- 19:28कहीं शक है कि यह गाली सत्य है? गुलाब को ज़रा भी शक नहीं होता।
- 19:36अपने होने पर गुलाब जानता है कि मैं सुगंध को बिखेर रहा हूँ।
- 19:44मैं लावण्य से युक्त मेरे पतियों में बड़ी कोमलता है।
- 19:56अस्तित्व के ऊपर तुम्हारी किसी कथनी का कोई प्रभाव कभी नहीं
- 20:02होता। तुम परमात्मा को गाली निकालो,
- 20:06मज़े से वह कभी प्रतिकार नहीं करेगा।
- 20:12क्यों ही इज़ कॉन्फिडेंट? अबाउट हिमसेल्फ ही इस ओमनी
- 20:18प्रेसेंट ही इस ओमनी पोर्टेंट ही इस ओमनी शिएंट सर्व व्यापक है।
- 20:24वो सर्वशक्तिमान है। वो सर्वभाज्ञ है, वो तुम्हारे
- 20:29किसी कथन के ऊपर कोई तो प्रतिकार नहीं करता।
- 20:37जैसे की बहुत बड़े पहलवान के कुछ दो 4 साल का बच्चा ललकार किया
- 20:45मेरे से लड़ तो पहलवान अगर तो मुँह रख है।
- 20:56तो हाथ पांव घुसा चलाएगा, अगर समझदार है तो हंसेगा बच्चे की
- 21:04नाजानी पे हंसेगा, अस्तित्व बड़ा समझदार है और अस्तित्व वेराट है।
- 21:17इन शब्दों में नहीं खुली आँखों से देखो आँखें उठाकर आसमान की तरफ़
- 21:26देखो उसकी वराड्यता उसका नूर उसका शबाब।
- 21:38उसकी सुगंध, उसका फैलाव तो तुम अवाक हो जाओगे, बोलती बंद हो
- 21:50जाएगी। वह कोई प्रतिक्रिया नहीं करता।
- 21:57कोई प्रतिकार नहीं करता क्योंकि उसके सामने तुम तुम्हारी औकात रेत
- 22:08के जर्रे से भी। बहुत कम है और सही पूछो संत की
- 22:16बोलती बंद हो जाती है आखिरी पड़ाव पे जाके क्यों?
- 22:23क्योंकि उसे एक सत्य पता चलता है। बहुत सत्य ये पता चलता है और उसने
- 22:30अपनी नग्न आँखों से देख लिया होता है वो सत्य उसे सत्य ये पता चलता
- 22:36है कि मैं नहीं हूँ और इस सत्य का पता इन शब्दों को पूरे ध्यान से
- 22:46सुन। इस सत्य का पता तब चलता है जब मैक
- 22:51हो जाता है तो उसे पता चलता है अंतिम पडाव के मैं नहीं हूँ और उस
- 23:01अंतिम पडाव पे पहुंचता तब है जब मैक हो जाता है।
- 23:08अब इसको आप एक धारा में बांध लेना।
- 23:13मैं खो गया तो उसे पता चला कि मैं नहीं हूँ स्पष्ट त्याग उदाहरण हो
- 23:18गई ना जब मैं खो गया तो उसे पता चलता है।
- 23:25कि मैं नहीं हूँ होगा भी कहाँ अगर होता तो उस पड़ाव पे ना पहुंचता,
- 23:33उस पड़ाव पे पहुंचा और उस पड़ाव पे पहुंचने की शर्त है कि तुम
- 23:39शून्य हो जाओ। नागार्जुन का शून्य बात।
- 23:45तुम शून्य होगे, वह प्रकट हो जाओ गाय तुम अपप्रकट हो जाओगे, विलीन
- 23:51हो जाओगे वाष्प विभूत हो जाओगे तो वह प्रकट हो जाएगा तो संत यह बात
- 23:59जान लेता है इस नियम को अच्छी तरह से समझ लेना।
- 24:06संत आखिर में जाके क्या चीज़ देखता है कि मैं नहीं हूँ यह झूठ
- 24:14सा जो मैंने अपने आप को माना कि मैं हूँ यह पता कब है?
- 24:23बात तब है जब वह अहम् शून्य हो जाता है।
- 24:32बिलकुल सीधी, सरल बात अगर तुम समझ गए तो अहम् शून्य हो जाएगा तो
- 24:41अहम् नजर कैसे आएगा? तो तुम आखिरी पड़ाव पे पहुँच गए,
- 24:48तुम्हें मंजिल मिल गए मुझसे लोग पूछते हैं अंतिम मंजिल पे जा के
- 24:57संत मौन क्यों हो जाता है इसलिए? कि वह एक परम सत्य को जान लेता।
- 25:07वह परम सत्य जीसको मैं मानता रहा कि मैं हूँ और मैं ही हूँ जिसका
- 25:15मैं इतना प्रगाढ़ हो जाता जो कहता मैं हूँ तो सब है।
- 25:21और अगर मैं नहीं हूँ तो कुछ भी नहीं है, समझो उसका अहंकार चरम
- 25:27पड़ाव को छू चुका। वह परम अहंकारी व्यक्ति है जो
- 25:34कहता मैं हूँ तो है इम्पॉसिबल वर्ल्ड इस नॉट फाउंड इन मैं
- 25:39डेक्शनरी। असंभव नाम का कोई शब्द मेरे
- 25:48शब्दकोश में नहीं तो समझ लेना कि यह परम अहंकारी व्यक्ति है।
- 25:59संत पर मौन हो जाता, सिखाने वालों ने तुम्हें सिखाया नाम जपु तुमने
- 26:18नाम जपना शुरू कर दिया। तुमने इस सत्य को नहीं पहचाना?
- 26:25इस नियम को नहीं पहचाना के बोलने से मौन खो जाता है और परमात्मा
- 26:37वहाँ मौजूद है जहाँ पर मौन है। तुम्हारे संत तुम्हें सिखाते हैं
- 26:48के नाम जब तुम इतना भी समझ नहीं पाते, इतने मोरू हो, तुम के
- 26:58शब्दों से मौन टूटता है। जो मिल सकता था मौन से परमोन तक
- 27:12पहुंचा जा सकता है, वह तुम्हारे संत निरंतर प्रयास करते हैं।
- 27:21कि शब्दों से मिल जाए और तुम्हें ये समझ नहीं आता और जब तक तुम
- 27:28अभागे रहोगे तब तक तुम्हें समझा आएगा भी नहीं कि शब्द शोर हैं, जब
- 27:38तक तुम्हें ये बात समझ नहीं आती। के शब्द शोर और जहाँ हमने पहुंचना
- 27:46परम आनंद में वह परम मौन मौन होकर परम मून तक पहुंचा जा सकता है।
- 27:59नाम शमण करके परम शोर तक पहुंचा जा सकता है।
- 28:04इसलिए तुम नाम जपते जपते, परम शोर तक पहुँच जाते हो, फिर तुम मेरे
- 28:09पास आके कहते हो, बाबा मन बड़ा शोर मचा रहा है, शोर तुम्हारे सिर
- 28:16में दर्द पैदा करता। लक्षण बताता हूँ नाम जप तुम्हारे
- 28:26सिर में दर्द पैदा कर देगा और तुम्हें दर्द नवारक को लिखने
- 28:33पड़ेंगे। एनल जैसे कहवा भ्रमण।
- 28:40वह तुम्हारे तंतुओं को छेड़ेगा। नाम जब से सर दर्द के सिवा कभी
- 28:50किसी ने कुछ पाया। चाहत है तुम्हारी आनंद का उस रस
- 29:01को पीने के लिए और काम करते हो तुम नाम जब नाम जब से पैदा होता
- 29:10है सरदत मौन से पैदा होता है। आनंद का वो रस जिसकी तुम्हें तलाश
- 29:18है लेकिन न जाने किस दुष्ट ने ये परंपरा छेड़ दी और अंध भक्तों ने
- 29:30इसके पीछे लग के गुणगान शुरू कर दिया।
- 29:38और सारी मानवता एकतरासिद्धि में फंस गई, नामों पे झगड़ा हुआ, कोई
- 29:47कहता लह कोई कहता रहीम कोई कहता राम कोई कहता कृष्ण।
- 29:57जगड़ों में फंस के उलझ गए, शांति ना मिले, अशांति मिले तुम भटकते
- 30:11हो संत के चेहरे पर नूर लागण्य। पर मौन की आभा देखकर तुम हाथ पर
- 30:20रह जाते हो घड़ी दो घड़ी के लिए तुम तुम्हारा मन करता मैं यहाँ
- 30:28ठहर जाऊं अभी कल ही मेरे पास प्रश्न आया बाबा जब मैं तुम्हारे
- 30:35पास आया तो देखता ही रह गया। मन के भीतर ये आगे उठा।
- 30:42काश मैं भी इसी स्थिति में पहुँच जाऊं और आपके पास बैठे रहने का
- 30:47बड़ा मन किया। लेकिन मजबूरी है मैं अकेला नहीं
- 30:52आया हूँ और भी बहुत सी जनता है। तो आपके सेवकों ने कहा कि बस चलो
- 31:02भक्त हो गया, दर्शन करने का मतलब है कि झलक जहाँ तुमने जाना है।
- 31:13उस मंजिल को छू के तुम्हारी दशा क्या होगी ये देख लो तुम्हारे
- 31:18सामने बैठे हैं जिंदा जागती तस्वीर कोई संगेमरमर की मुहूर्त
- 31:24नहीं है, मैं तुमसे कहता हूँ पुत्र मन तो तुम्हारा करता है,
- 31:35तुम मुझे निहारते रहो। लेकिन तुम मुझे ही पाओगे, अगर
- 31:43अपने अंत में चले जाओगे, मैं सब जगह मौजूद हूँ और तुम मुझे
- 31:53परमानेंट रूप से अपने भीतर पाओगे। तेरा भीतर उतरो तो बाहर की चमक
- 32:01दमक से डालरों की खनक से थोड़ा मूंक तो ये शोर शराबे से गद्दी
- 32:10की। चमक दमक से परे हट के अपने भीतर
- 32:15से उतरो, तुम पाओगे वहाँ मैं ही बैठा हूँ।
- 32:30अजय रोट कर अब कहाँ जाइएगा अजय रोट कर।
- 32:46कहाँ जाएगा जहाँ जाएगा हमें? आएगा क्योंकि मैं सिर्फ व्यापक
- 33:01हूँ कहाँ जाओगे मुझे छोड़कर? अजय उठ कर अब।
- 33:11कहाँ जाइएगा जहाँ जाइएगा हमें? कहाँ जाओगे तुम में चले जाओ वणो
- 33:31में चले जाओ, पहाड़ों पे चले जाओ, घर में रहो चुभारी में बैठ जाओ।
- 33:41किसी बाग बगीचे खेत खलिहान में बैठ जाओ, हर जगह तुम्हे मेरे पद
- 33:48से न दिखाई पड़ेगी, हर जगह तुम मुझे ही पाओगे, तुम मुझे कभी छोड़
- 33:56के जा नहीं सकते भूल सकते रहो। यही हुआ है मानवता के साथ मानव
- 34:10मुझे छोड़ नहीं सकता बोल सकता है भी स्मरण हो सकता हूँ मैं।
- 34:18यू कैन फर्गॉट मी बट कैनट लूज़, तुम मुझे गवा नहीं सकते, तुम मुझे
- 34:28भूल सकते हो और तुम मुझे भूल गए हो।
- 34:34सारा संसार आज दुखी है। और पल भर में सुखी हो सकता है।
- 34:44पल भर में सुखी होने का ये ही फॉर्मूला है।
- 34:50जिसे भूल गए हों, उसे याद कर लो। गुरजोफ ने यही कहा सेल्फ ए
- 34:56मेंबरिंग अपने आप को याद कर लो ज्यादा ऊह पोहा मत करो, कुछ करने
- 35:06की आवश्यकता नहीं नथिंग टू डू एल्स।
- 35:16अपने ही भीतर उतर जाओ, उस शून्य में उतर जाओ जो तुमने कूड़ा करकट,
- 35:22मान्यताओं को इकट्ठा किया, जो तुमने सत्ता को हत्या के बुरे
- 35:33कर्म किये। मैं को तुमने दृढ़ बनाया वह तो
- 35:38अड़े आएगा, यू विल विल हैव टु क्रॉस दट तुम्हें उसको लांघना
- 35:47पड़ेगा क्योंकि ये तुमने ही बनाया।
- 35:53वो इकट्ठे किये हुए कूड़े करकट को लांघ जाओ, अपने भीतर उतरते हुए ये
- 35:59आएगा, क्योंकि ये तुमने ही इकट्ठा किया है।
- 36:05कभी काम को दबा लिया काम आएगा, कभी मृत्यु के भय को दबा लिया वो
- 36:10भय आएगा। कभी जोड़ना चाहते थे नहीं जोड़
- 36:14पाए, वो भी आएगा मोह भी आएगा। जरूरी नहीं है कि अपने बच्चों से
- 36:21ही मुँह किसी पूँजीपति से भी मोह हो सकता है मुँह है।
- 36:31किसी पे भी आ जाए ज़रूरी थोड़ी है कि तुम्हारे बच्चों से ही तमरम
- 36:38होगा। बहुत से व्यक्ति मैंने देखे हैं,
- 36:40जो बच्चों से मूड नहीं करते, बेदखल कर देते हैं और परमात्मा बन
- 36:47जाते हैं। उस पर वे कहते हैं जाओ मैंने
- 36:49तुम्हें बेदखल की। मैंने कहा भाई आज तो यह बादशाह बन
- 36:56गया मैं तो ये कंगाल पल्ले क्या है?
- 37:02जो ऐसा बोलता मैं नहीं, मैंने तुम्हे बेदखल किया तुम्हारे पल्ले
- 37:09कुछ है? नहीं है।
- 37:12अंतिम वेला में पता चल जाएगा, जब धर्म से गिर जाओ और जब बीमार होकर
- 37:19खटड़ी में पड़ गए तब भी पता चलेगा जब तुम्हें तुम्हारे प्रिय पुत्र
- 37:23उठा ना पाएंगे या उठाने से इंकार कर देंगे।
- 37:35आज अंधकार के कारण तुम बोल रहे हो कि मैंने तुम्हें बेदाब किया।
- 37:391 दिन परमात्मा में सृष्टि से बेदाब लगा देगा क्योंकि असली माल
- 37:46वो है जिसका माल है वो तुम्हारे शरीर पर भी उसका माल लगा हुआ है।
- 37:55इसे ही भ्रम कहते हैं, इसे ही इल्यूजन कहते हैं।
- 38:00इसे ही मिथ्या कहते हैं। यही मट जाए तो तुम पल भर में
- 38:04भगवान हो जाओ। यह माटी का पुतला कहता है मैं मैं
- 38:16भगवान हूँ तो तुम उस वक्त बिल्कुल हिरण्य का क्षप होते हो जो
- 38:22प्रहलाद को अपने ही पुत्र से कहते हो कि मेरा नाम जपो लेकिन प्रहलाद
- 38:28कहता देखो पिता श्री। तुम सर्व व्यापक नहीं हो, तुम
- 38:34सर्वसमर्थ्य नहीं हो, तुम सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ नहीं हो,
- 38:40इसलिए मैं तो उसी को पुकारूंगा जो वास्तव में सर्वज्ञ है।
- 38:45तुम नकली नकली हो, तुम बनना चाहते हो तुम हो, नहीं तो प्रहलाद बड़ा
- 38:53समझदार है। ऐसे समझदार बच्चे कभी कभी कहीं ना
- 38:58कहीं मिलते हैं और तुम उसे टीटने से कह के परे कर देते हो।
- 39:04इसका क्या है? तो टीटना है इसको तो जब चाहे
- 39:08डालेंगे वहाँ पहुँच जाओगे जीस उदगम सतल से यह अन्हदन की ध्वनि
- 39:24प्रकट होती है सुनाई पड़ती है। भ्रमवरंत्र में गगनमंडल आती है
- 39:35उद्गम सथल से तुम्हारे अंतः में कुंडलनी के पास से ना भी के
- 39:42बिल्कुल पास से आती वहाँ से है उद्गम सथल वाहन है।
- 39:48सुनाई यहाँ पड़ता है तुम पूछोगे, ऐसा क्यों होता है जैसे सूरज यहाँ
- 39:54से 15,00,00,000 किलोमीटर अवे है, लेकिन एक घड़ा रख दो।
- 40:03पानी से भरा हुआ तो उसमें उसकी तस्वीर नजर आएगी।
- 40:09सूरज उसमें चमकता हुआ नजर आएगा। और तुम कहोगे सूरज ये है इस पानी
- 40:15में है, पानी में उसकी रिफ्लेक्शन है।
- 40:22सूरज तो यहाँ से 15,00,00,000 किलोमीटर दूर है।
- 40:27उसकी रिफ्लेक्शन पानी के घड़े में पड़ रही है और तुम 1000 घड़े रख
- 40:31दो तो तुम 1000 सूरज भी पैदा कर सकोगे लेकिन ये आँखों का भ्रम है।
- 40:39यह परछाई है रिफ्लेक्शन ऑप्शन। रिफ्लेक्शन तो तुम कितने ही पैदा
- 40:46कर दो? जीतने लोग चले फिरते हैं जहाँ
- 40:51सबने अपनी अपनी रिफ्लेक्शन पैदा कर ली।
- 40:55सूर्य तो मैं हूँ सूर्य तो मैं हूँ, हर घड़ा पुकारना है सूर्य तो
- 41:00मेरे भीतर। लेकिन नहीं।
- 41:04सूरज तो कहीं और है तुम्हारे भीतर तो सिर्फ वह उसकी रिफ्लेक्शन है।
- 41:10उसकी शैडो ऐसे ही उदगम शतल कुंडालिनी के बिल्कुल पास नाभी
- 41:19शतल के बिल्कुल पास से यह अनहद नाज।
- 41:23की आवाज उठती है यह उसका उद्गम सतल है उठती उठती ऊपर तुम्हें
- 41:30सुनाई यहाँ बढ़ती है गगन मंडल पे बात अलग है जैसे सूरज है तो
- 41:3715,00,00,000 किलोमीटर्स अवे फ्रॉम अर्थ।
- 41:43दिखाई पड़ता है यहाँ घड़े के भीतर बस ऐसा ही तुम समित हो के शायद
- 42:00जहाँ सुनाई पड़ता है ये। शे शे की आवाज़ जब बंसरी में बदल
- 42:08जाती, किसी किसी को नहीं बदलती, तो वह अपने आप को अभागा न माने।
- 42:17कई बार ये ध्वनि बदलती ही नहीं। ता ज़िन्दगी एक ही ध्वनि चलती
- 42:23रहती है तो उसकी तुमने कोई चिंता नहीं लेनी है।
- 42:29बस ध्वनि प्रकट हो गई। तुम भाग्यशाली हो गए अनहद नाथ गगन
- 42:39में बाज। गगन मंडल में बजता हुआ सुनाई
- 42:49पड़ता है, दिखाई पड़ता है लेकिन उदगम सतल इसका नाभि के पास
- 42:54कुंडलिनी के पास है। तुम उसके पास पहुंचोगे कैसे?
- 43:02अपने भीतर उतर गए। धीरे धीरे तुम खिसकते जाओगे, सब
- 43:11कुछ आएगा जो तुमने इकट्ठा किया वह भी आएँगे, लोग भी आएँगे, कामवासना
- 43:22भी आएगी, क्रोध भी आएगा। सब आएगा एंड यू विल हैव टू क्रॉस
- 43:27दैट आने दो, घबराना मत वीर, पुरुष की तरह चले ही जाना, क्रॉस करते
- 43:40जाना या तुम्हें डराएगा, तुम डरना नहीं।
- 43:45बहुत से व्यक्ति कहते हैं बाबा कपड़ा हो बुरे तरह मैंने फिर
- 43:53कँपते हुए शरीर को देखो, तुम भाग्यशाली हुए तुम्हें दूसरा
- 44:01अनुभव मिला। जो ज्यादा क्लियर कर देगा, यह
- 44:05कंपित हुआ कोई और है? मैं इसको देखने वाला हूँ।
- 44:11यह और भी शुभता की घड़ी आये लेकिन ध्यान रखना तुमने डरना नहीं।
- 44:22वीर पुरुष की तरह शिथर बना रहना है, शरीर में चीटियां रहेंगे
- 44:31रहेंगे कोई बात नहीं अगर तुम्हें खारिज करने का मन करता है, कर लो
- 44:40लेकिन भाव होश कर लो। ये चीटियाँ रेंग रही थीं इसलिए
- 44:44मैंने खारिज कर ली और वो हट गई। चीटियाँ रेंगने कोई हरजा नहीं
- 44:54महात्मा बुद्ध और उसके बड़े भाई आनंद और शिष्य थे उसके।
- 45:01साथ साथ चल रहे थे। महात्मा बुद्ध ने एक जगह जाकर ऐसे
- 45:08किया ऐसे आनंद उनकी प्रत्येक गतिविधि के ऊपर पैनी नजर रखा करता
- 45:17था। आया ही इसलिए था।
- 45:20आनंद से ज्यादा करीबी से किसी ने नहीं देखा होगा।
- 45:26बिलकुल आनंद ने पूछा बनते प्रभु यहाँ कुछ था तो नहीं?
- 45:42फिर तुमने हाथ क्यों मारा? बुध बोले मैं मुर्षा के वश मेरे
- 45:53नाक पे मक्खी बैठ गई थी, मैंने मुर्षा में उस मक्खी को उड़ा
- 45:57दिया। फिर अब क्या कर रहे हो?
- 46:01अब मैं बहूश उसे उड़ा रहा हूँ। हालांकि ये मक्खी नहीं है, लेकिन
- 46:07संस्कार पड़ गया बेहोशी में मक्खी को उड़ानो लेकिन मैं इस संस्कार
- 46:14को तोड़ रहा हूँ उल्टा करके। उल्टा नाम जबे ते जाना बालमीक भय
- 46:20भ्रम असमान मैं तुम्हे कहता, राम राम मत करो, राम का उल्टा होता है
- 46:28मरा मृत्यु को याद करो, राम राम करने से नहीं पहुंचोगे उल्टे नाम
- 46:35जबे ते जाना। जब तक तुम मृत्यु को याद नहीं
- 46:40करोगे और मृत्यु इस दी अल्टीमेट ट्रुथ तब तक तुम अपने अस्तित्व तक
- 46:49नहीं पहुँच सकोगे। मैं तुम्हें कहता हूँ मेरे पास
- 46:52आना। तो इतना साहस जुटा किया ना कि तुम
- 47:03में मरने का साहस हुआ, दूसरों को मारने का नहीं।
- 47:11तुम सुसाइड करते हो तो तुम्हें पता नहीं होता कि तुम दूसरे को
- 47:16मार रहे हो, क्यों? क्योंकि तुम शरीर हो नहीं तुमने
- 47:23अपने शरीर को मारा, अपनी इंद्रियों को मारा, जो तुम नहीं
- 47:26थे। इसलिए इट इस कॉल्ड मर्डर फॉर मी।
- 47:32मैं इसे एक हत्या कहूंगा, तुम आत्महत्या कह सकते हो।
- 47:37आत्महत्या नाम की कोई चीज़ कभी होती ही नहीं।
- 47:42आत्मा तो वो जो मरती नहीं नैनम चिदंती शास्त्रण।
- 47:47नहीं नहीं मल्दाती पांव का जो जलती है तुम जब भी मारोगे दूसरे
- 47:58को मारोगे आत्महत्या कभी होती है आत्महत्या करना भ्रम है तुम्हारा,
- 48:09तुम कभी नहीं मरोगे। तुम वहाँ पहुँच जाओ जहाँ से ये
- 48:17उदगम स्रोत इसे गोर्ख कहते हैं ऊभं बैठा सुताली जय कब हूँ चित्त
- 48:28वंदना की जय? बड़ा प्यारा उपदेश है।
- 48:36इस अन्न नाद के शब्द से ध्यान को भटकाना नहीं गौरख कहते हैं कबहु
- 48:47चित्र वंद न की जाए। चित्र को कभी यहाँ से हटाना नहीं।
- 48:52इसको सुनते ही चले जाना और इसके आलम में बेखुदी में, खुमारी में
- 49:01मदहोशी में तुमने डूबते ही चले जाना मज़ा आएगा लज्ज।
- 49:10जो लोग कहीं और लज्जत ढूंढ़ते हैं नहीं मिलेंगे, लज्जत लेनी है अपने
- 49:18भीतर वहाँ है असली लज्जत और कहीं नहीं मिलेंगे बस एक ही ठिकाना।
- 49:31लज्जत तुम्हारे भीतर है, ज्यादा सटीक शब्दों में बोलूं तो तुम ही
- 49:38लज्जत हो। कब हूँ चित्त भंग न कीजिए कभी भी
- 49:44ध्यान को यहाँ से हटाना। तुम कहोगे और भी काम करने हैं
- 49:50बिलकुल करो जब वो अपने कर्तव्यकर्मों से तुम निपटान कर
- 49:57लो और तुम फुर्सत के लम्हों में आ जाओ।
- 50:04तो तुम मनोरंजन करने के लिए मूवी मत देखो मनोरंजन करने के लिए
- 50:09कुल्लू मनाली मत निकलो, बाहर के विदेशों की सैर मत करो, उल्लू
- 50:15होते हैं बोलो जो दुनिया भर की सैर करना चाहते हैं और बहुत से
- 50:20उल्लू। उच्चस्त पधवियों पर बैठे हैं, बस
- 50:28वो उल्लू हैं, नजर आना चाहिए। दिन में उल्लू को नजर आता है रात।
- 50:44कब हूँ चित्त भंगना कीच? ये जो अनाथनाथ की आवाज है, यहाँ
- 50:50से ध्यान को हटाना मत गौर कहते हैं।
- 50:56इस आवाज को निरंतर सुनते चले जाना अब तक तुम निर्भागे थे, जब तक
- 51:08अन्ह दिन आज शुरू नहीं हुआ था, अब तुम सौभाग्यशाली हुए, तुम
- 51:17भाग्यवान हुए? और भाग्यवान हुए तो भाग्यवान को
- 51:20ही भगवान कहा गया भाग्यवान वो जो जिसके भीतर अनंतनाथ का गुंजार
- 51:29शुरू हो, अगर तुम्हारे भीतर भी शुरू हो गया तो तुम भाग्यशाली हो।
- 51:36तुमसे बड़ा शहंशाह कोई भी नहीं लेकिन इसको ऐसे ही गुजर मत जाने
- 51:45देना, इसको बराबर सुनते रहना। कब हूँ चित भंग न की जाए चित को
- 51:58कहीं और मत लेके जाओ लगातार सुनते रहना जब रात को सो जाओ तो यह तो
- 52:15चलेगा। यह नहीं हटेगा।
- 52:19रात को भी तुम सो जाते हो लेकिन तुम्हें पता नहीं जो योगी रात को
- 52:26भी जानता है जागता है। वह इसको रात को भी सुनता है जब
- 52:34तुम उस अवस्था में पहुँच गए। जब योगी हो गए जब तुम्हारा मिलन
- 52:40हो गया परमात्मा के साथ तो तुम रात को सोए सोए सी सुनोगे इसलिए
- 52:51कृष्ण कहता है जब तुम्हारा संसारिक व्यक्ति सोता है तो मेरा
- 52:55योगी रात को जागता है। कृष्ण खुद भी जागते हैं।
- 53:01कृष्ण वो तत्व हैं जो कभी सोते नहीं।
- 53:05सोना तब होता है जब एनर्जी लेस्सनेस आती है और कृष्ण वो तत्व
- 53:13हैं। जो एनर्जी और कॉन्शस नर्स का
- 53:17खजाना है, समुद्र जो कभी चुकता नहीं, ना लाखों, न करोड़ों, न
- 53:23अरबों, न खरबों तुम्हारी संख्या खत्म हो जाएगी, लेकिन ये शक्ति और
- 53:29चेतना चूकेगी ना बढ़ती ही जाएगी। बढ़ती ही जाएगी।
- 53:37तुम्हारी बुद्धि में ये चीज़ आती नहीं इसलिए तुम कहते हो है नहीं,
- 53:45तुम कहोगे ऐसे कैसे बढ़ती जाएगी। आज वैज्ञानिक ने सिद्ध कर दिया
- 53:53यूनिवर्स। इस कंटिन्यूवस्ली एक्सपेंडिंग
- 53:59ब्रम्हंड लगातार विस्तार पा रहा है।
- 54:03अपने आपको फैला रहा है निरंतर कभी ये चंद्रमा हमारी धरती के बहुत
- 54:10करीब हो जाया करता था। कभी चंद्रमा इतने करीब था।
- 54:15कि हम हाथ लगा लेते और चंद्रमा को छू जाता, लेकिन एक्स्पर्ट होता
- 54:22गया और आज 3,84,000 किलोमीटर दूर चला जाता और कभी 5,84,000 भी हो
- 54:30जाए। बिकॉज़ यूनिवर्स इज़ कंटिन्यूसली
- 54:39एक्सपेंडिंग और ये एक्सपैंड होता ही रहेगा, क्यों होता है, कैसे
- 54:46होता है? विज्ञान के शायद खोज लें।
- 54:53लेकिन बस वो खोज नेगलिजबल होगी नेगलिजबल का कोई अर्थ नहीं होता।
- 55:01जैसा खोजा तुमने क्या कहा, खोजा कुछ भी तो नहीं खोजा तुमने।
- 55:07जो खोजा, परमात्मा के नियमों के विधान के अनुकूल हो के खोजा प्रति
- 55:13कूल हो के तुम खोजो ना, तुम्हें पता चलेगा, तुम्हें पता है जब कोई
- 55:20इन्वेंशन किसी ने की। इन्वेंशन होते ही उसे पता चलेगा।
- 55:27कि ये इन्वेंशन ऊपर से उतरी। मैंने नहीं किया किसी कभी से
- 55:33पूछना यह रचना तुमने बनाई, वो कहेगा नहीं यह ऊपर से उतरी, उन
- 55:39क्षणों में उतरी व्हेन आई वास् एम्प्टी जब मैं फुर्सत के लम्हों
- 55:45में था। फिर तुम्हें इस कविता को महंगे
- 55:50भाव में बेचो। ऋषि इसको बांट देते हैं।
- 56:01100 हाथों से इकट्ठा कर 1000 हाथों से काटता है।
- 56:05लेकिन महंगे कभी इसको बेच देंगे ये ऊपर से उतरी हुई बाबा के ऊपर
- 56:13जपजी उतरी। गगन मंडल बाबा सप्रेस क्या लिख
- 56:18देते हैं? जिन ए लिखे तिसे शरण ना।
- 56:23जब्ब फुरमाये तेबते बप्पा जो यह लिख रहा है उसकी यह खोज नहीं है,
- 56:31यह खोज तो उसकी है। वह फरमान जारी करता है और मेरे
- 56:35हाथ वैसे ही चलते हैं। मैं उसके फरमान के अंतर्गत उसके
- 56:41हुक्म में बंधा हुआ। वैसे ही लिखा चला जाता हूँ जैसे
- 56:45उसका हुक्म होता है। उस तत्व के पास पहुँच जाओ जहाँ से
- 56:51ये हुंकार अनहद की नाका की आवाज शुरू होती है।
- 57:03गोरख क्या कहना चाहते हैं? कोई भी संत एक ही बात कहना चाहता
- 57:10है, किताब भी हेर फेर करके बोले। किसी भी भाषा में बोले किसी भी
- 57:18प्रणाली का प्रयोग करें। लेकिन उसका लक्ष्य एक ही होता है
- 57:26जैसे स्फेयर का लक्ष्य एक ही होता है केंद्र केंद्र से हम प्रकार रख
- 57:34के एक बोला खींच देते हैं तुमने कभी सोचा?
- 57:38कि सफीर के ऊपर जीतने भी बिंदु हैं, उनका सबका मुख केंद्र की
- 57:45तरफ़ है। सारी लकीरें केंद्र पे जाके मिल
- 57:49जाती हैं जो सफीर से खींची जाएँगी लकीरें वो केंद्र पे जाकर मिल
- 57:55जाए। गोरख तुम्हें बताना चाहते हैं कि
- 58:06हमारे केंद्र में एक ऐसा आनंद का समुद्र पड़ा हुआ है जिसे तुम भूल
- 58:14गए हो। और तुम बाहर भिक्षापत्र उठाए करते
- 58:22हो, जिसके तुम खजाने हो उसकी एक बूंद तुम लोगों से मांग रहे हो।
- 58:35तुम महाबली हो, सर्व शक्तिमान हो, और तुम शक्ति लोगों से मांगते हो
- 58:41वोट मुझे डाल दो, तुम भी वोट मुझे डाल दो, तुम भी वोट मुझे डाल दो।
- 58:49मैं तुम्हें ये दूंगा, मैं तुम्हें वो दूंगा, ये लो ये लालच
- 58:54देना देना कुछ नहीं। गोरख ये कहते हैं गोरख का इशारा
- 59:04सिर्फ गोरख का नहीं, सभी संतों का इशारा सभी सफीर से बोलते हैं।
- 59:12वो सफियर चाहे किसी दिशा में हो, लेकिन उनका इशारा सभी का होता
- 59:18केंद्र की तरफ है और केंद्र में तुम मौजूद हो जीसको कृष्ण कहते
- 59:30हैं, स्तिथि प्रज्ञा। बुद्ध कहते हैं निर्वाण महावीर
- 59:37कहते के बोल्ड हिंदू, कहते मुक्त सनातन कहते मुक्त।
- 59:57इस्लाम कैसा शांति है वहाँ जाकर असली शांति मिलती है तुम शांति
- 1:00:11कैसे हो? शोर विहीन अवस्था को जहाँ शोरगुल
- 1:00:16नहीं होता नहीं तुम्हारी शांति मन गढ़ता, बहुत शांति ही क्या जिसमें
- 1:00:23आनंद का रश्ना हो ओम शांति कहने वालों को?
- 1:00:29भी मनों के अंदर देखोगे तो तुम्हारा मन चला ईमान होगा फिर
- 1:00:34तुम शांत कैसे हो? चुप पे चुप न हो गई जय लाए रहा
- 1:00:40लेवतार जब तुम्हारा मन भूल रहा है तो तुम होठों को चाहे सी भी लो।
- 1:00:50तो फिर शान्ति कहाँ से आये? मन तो बोलता ही रहा, मन ने तो
- 1:00:55खटपट खटपट करनी शुरू ही रखी तो कैसे तुम्हारी लेव लगेंगी, उसमें
- 1:01:03कैसे तुम्हारा ध्यान जायेगा? बड़ा अनोखा और सरल सूत्र बताते
- 1:01:10हैं गोरख आनंदनाथ जिसके शुरू हो गया कहते इसे तुम कभी भूल मत जाना
- 1:01:21छोड़ मत देना कब हूँ चित्त बंध न की जा?
- 1:01:28कभी भी चित्त को यहाँ से हटाना मत।
- 1:01:30वैसे अगर तुम्हें इसमें रास आएगा, तुम्हारा चित्त ही नहीं करेगा
- 1:01:39यहाँ से हटने का यह इतना मजेदार है अगर कहीं तुम्हें किसी।
- 1:01:47मजबूरी वर्ष यहाँ से चित को हटाना पड़ा तो तुम हटाओगे तो सही लेकिन
- 1:01:54दुखी होके हटाओगे गौरा कहते हैं यहाँ से कब हूँ चित भंग न की ज
- 1:02:04चित को यहाँ से हटाना है। उठते बैठते, सोते जागते चलते
- 1:02:10फिरते काम करते इसको सुनते ही रहना यह लगातार चलेगा।
- 1:02:16इसी को कहते हैं हाथ पांव से काम कर चित निरंजन माँ।
- 1:02:31उम्भ बैठं, सूतां ली जय हमारी भाषा बागड़ी उम्भ, बैठं सूतां।
- 1:02:49ली जय का बहू चित्र भंग न की जय गोर कहते के खड़े हुए उम्भा बैठन
- 1:03:01बैठे हुए सूता सोते वक्त। कब हूँ?
- 1:03:10चित्त भंग न कीजिये कभी भी इस आनंद न से चूकना मत ध्यान मत अटन
- 1:03:22यही शब्द कहा था कुर्बानी में आता है नाम कहित लोचना।
- 1:03:39हाथ पांव ते काम कर छी निरंजनमा नाम देव कहते हैं, त्रिलोचन से
- 1:03:50फिर तू हाथ पांव से काम कर खड़े हुए।
- 1:03:56बैठे हुए, सोए हुए या काम करते हुए चलते फिरते हुए काम धाम करते
- 1:04:05हुए तू कुछ भी कर, लेकिन याद रख तू जब भी देखेगा इस तरफ।
- 1:04:15इस आनंद को बजते हुए पाओगे। जहाँ जाए ये गा हमें।
- 1:04:34जहाँ जाइएगा, हमें आएगा। सोते, उठते, बैठते, जागते काम
- 1:04:47करते चलते फिरते कुछ भी करते, यह नहीं हटेगा।
- 1:04:56बड़ा सर्ल सूत्र बताया सारी गोर्ख वाणी के सभी गोर्ख के सूत्रों में
- 1:05:04सबसे स्वर्ण मैंने यही सूत्र पाया गोर्ख वाणी सारी पढ़ी।
- 1:05:13लेकिन इससे शल सूत्र नहीं मिला। सरल से सरलतम है ये सूत्र बस जग
- 1:05:24जाना चाहिए तो तुम्हारे भाग्य जग गए इसके जग जाने से तुम्हारे
- 1:05:30भाग्य जग गए। खुशी की बात उस दिन प्रसाद बांटो
- 1:05:38क्योंकि गुरु प्रसाद जो तुम्हारे ऊपर से उतरा तुम इसकी परवाह ही
- 1:05:43नहीं करते। बहुत से लोगों को कहते मेरे तो 35
- 1:05:47वर्ष हो गए। तो मैंने कहा तुम्हारे गुरु ने
- 1:05:55तुम्हें चेगाया नहीं, मैंने पहली वीडियो डाले थे अनाथनाथ थे।
- 1:06:00यह चेताना आवश्यक है, यह इतना सर्वोत्तम है इससे पहले के मार्ग
- 1:06:07बताने शुरू करूँ, तुम्हें अनाथनाथ के बारे में बता दूँ।
- 1:06:13अगर आना देना तुम्हें उतर गया तो तुम्हें कुछ भी करने की आवश्यकता
- 1:06:17नहीं, फिर बाबा नानक का वो शब्द सार्थ हो जाएगा।
- 1:06:32ज़ोर न जोगती छोटा संसार मुक्ति के लिए संसार से मुक्ति पाने के
- 1:06:43लिए किसी भी युक्ति में कोई भी ज़ोर नहीं है।
- 1:06:48तुम कितना ही पांच नाम ले लो, कितना ही सात नाम ले लो।
- 1:06:51मैं तुम्हें लिख के दे देता हूँ, अगर तुम कभी भी उस तल पे पहुँच
- 1:06:57गए, वह तल तुम्हें और बाहर निकालता जाएगा तुमने आज शुरू किया
- 1:07:05तुम जब 10 अरब 10 खरब। जाग कर लोगे तो तुम पाओगे, तुम
- 1:07:11बाहर इतने निकल गए की वापस आना मुश्किल हो गया तो बाबा कहते हैं
- 1:07:18ज़ोर न जुगती छोटे संसार तुम्हारी किसी भी जुगती में तुम्हारी किसी
- 1:07:24भी विधि में तुम्हारे किसी भी। फॉर्मूला में इतना ज़ोर नहीं है,
- 1:07:31इतनी ताकत नहीं है लेकिन तुम संसार से निजात पा सको तो युवती
- 1:07:38का एक फॉर्मूला गोरख ने बताये गोरख कहते तुम भाग्यशाली हुए उस
- 1:07:47दिन। नचो नी संयोग बालम आया, आज
- 1:08:00परमात्मा प्रकट हुआ, नाचो गाओ। झूम झूम के नाचो आज।
- 1:08:13नाचो आह झूम झूम के नाचो आज गौ खुशी के गीत रे।
- 1:08:27गौ। खुशी के गीत।
- 1:08:32ये सुन अनंतनाद ब्रगट हो गया परमात्मा ने तुम्हें आवाज दी, खलक
- 1:08:36ने तुम्हें पुकारा, खुदा ने तुम्हें नगाड़ा बजा दिया, ये खुदा
- 1:08:42का नगाड़ा है ये अस्तित्व की आवाज है।
- 1:08:45आवाज आए खलक नकाराएं खुदा। आज किसी की जी हार हुई है, आज
- 1:08:55संसार हार गया, आज संसार हार गया। झुमझुम के नाचो आ।
- 1:09:09गाओ। आज गाओ खुशी के गी सुरे।
- 1:09:19आज किसी की हार हुई है संसार हार के आज।
- 1:09:26और किसी की जीत रे गउ खुशी के गी। आज संसार हार गया, आज परमात्मा
- 1:09:38जीत गया, आज अध्यात्म जीत गया, आज संसार हार गया।
- 1:09:45यह है बहुत भाग्यशाली वेला जब तुम्हारे भीतर अध्यात्म का आवाज़
- 1:09:51दिया परमात्मा ने चले आओ जहाँ भी हो आवाज़ दी परमात्मा ने।
- 1:10:08अकेले हैं चले जाओ, जहाँ हो अकेले हैं चले जाओ।
- 1:10:28जहाँ कहाँ हवा जो दें तुमको कहाँ हो?
- 1:10:45अकेले हैं चले आ जहाँ ये तन्हाई का आलम।
- 1:11:05उस पर आप का गम। तुम ये मत सोचना की तुम ही
- 1:11:13परमात्मा को भूलकर दुखी हो, वह भी तुम्हें बराबर निहार रहा है।
- 1:11:20उसका प्यारा बच्चा, उसकी प्यारी पुत्री।
- 1:11:24उसका प्यारा पुत्र कब उसकी आगोश में लिपट जाए, भय भी उस वेला का
- 1:11:30इंतजार करता। है चेतन हई का आलम और उस पर आप।
- 1:11:43तुम्हारा गम है मुझे ना? जीते हैं ना मरते बताओ क्या करें
- 1:11:58हम? बताओ क्या कहें?
- 1:12:03अकेले हैं चले आओ जहाँ हो कहाँ आओ आज में तुमको।
- 1:12:21कहाँ हो अकेले चले आओ जहाँ। ये मत सोचना की बूंद ही प्यासी है
- 1:12:38समुद्र के लिए। तुम भूल में हो, समुद्र भी प्यासा
- 1:12:42है बूंद के लिए और समुद्र प्यासा था तो 28 अक्तूबर को रात्रि 8:30
- 1:12:50बजे समुद्र बरसा बूंद पर वो घड़ी थी जब मैं।
- 1:12:59शून्य हो गया 28 अक्टूबर 1950 यह न समझना की बूंद ही प्यासी है।
- 1:13:08समुद्र के लिए समुद्र भी प्यासा है बूंद के लिए जब तुम बिछुड़
- 1:13:14जाते हो उससे। दर्द उसको भी होता है तनहाई का
- 1:13:30तेरे आने की खुशी में सिर्फ मैं जाग नहीं हूँ तेरे आने की खुशी
- 1:13:37में सिर्फ मैं जाग नहीं हूँ, तेरी आँखों से भी लगता है कि तू सोया
- 1:13:41ना था। तेरे आने की खुशी में सिर्फ मैं
- 1:13:47जागा नहीं तेरी आँखों से भी लगता है कि तू सोया न था, बूंद भी
- 1:13:52बेकरार है उससे मिलने के लिए लेकिन ये मसंजना कि सिर्फ बूंद ही
- 1:13:59बेकरार है। समुद्र भी बेकरार है तुम्हें अपने
- 1:14:04आगोश में लेने के लिए कितने ही बच्चे हो उसके लेकिन एक बच्चा गुम
- 1:14:12हो गया। वो चाहता है सभी बच्चे मेरे में
- 1:14:16विलीन हो जाए। वहीं वेला भाग्यशाली वेला होगी।
- 1:14:25अनदनाद अगर शुरू हो गया तो तुम्हें कुछ करने की जरूरत नहीं।
- 1:14:29मेरा यह वीडियो आप जरूर सुन ना वर्स अन आहत साउंड ऑफ स्टाइलेंस।
- 1:14:39ये प्रथम वीडियो है मेरा बहुत पहले बोला मैंने चार वर्षों पहले
- 1:14:46उम्बा बैठूं सुताम ली, जय कबहु चित भंगना की जय अन्ह द शब्द गगन
- 1:14:56मैं गा जय। पैंट पड़ोसो सतगुरु लाज देखिये
- 1:15:04कभी भूल मत जाना यहाँ से ध्यान को हटा मत लेना।
- 1:15:09इसमें इतना नशा है, कुमारी है, आनंद है, रस्य है।
- 1:15:15नाच उठेगी तुम्हारी आत्मा नाच उठेगा तुम्हारा कोमल मन सावन का
- 1:15:25इंतजार मत करना इसको सुनने से तुम्हारा मन झूमने लगेगा।
- 1:15:35सावन आए या न आए, सावन आए या न? आए जिया जब जुमे सावन है, सावन
- 1:16:06आए। सावन का इंतज़ार मत करना वो आए जा
- 1:16:12ना आए जब तुम्हारा जिया झूमने लग जाए वही सावन और जिया कब झूमेगा
- 1:16:21फ्रेंड? बड़ा तो सतगुरु लाज है, देखिये
- 1:16:24कभी चूक मत जाना, इससे गौरव कहते हैं।
- 1:16:28अगर तुम चूक गए तो तुमने व्यवधान खड़ा कर दिया तो तुम संसार में
- 1:16:32निकल गए तो इसमें सतगुरु को शर्म आ गई।
- 1:16:40सतगुरु ने तुम्हारे भीतर अन्नधनाथ का संचार किया और तुम कहीं और ही
- 1:16:46लग गए। तो सतगुरु को शर्म आयेगी।
- 1:16:49इस बात से अनहद शब्द गगन में गांजाएं बेंड बड़े तो सतगुरु लाजे
- 1:16:59या अनहद का शब्द जब शुरू हो जाता है तो उसे बराबर इस रस को पीते
- 1:17:04रहना बड़ा शिला। बड़ा स्वाद है और तुम इस स्वाद को
- 1:17:07तरस करो। मुझे लोग कह देते हैं 3540 वर्ष
- 1:17:12हो गए तो गुरु ने तुम्हें चेताया नहीं, गुरु ने हमें पांच इनाम दे
- 1:17:17दिया। बस ठीक यही निशानी होती है
- 1:17:22मूर्खों के। यही निशानी होती है मूड़ों की।
- 1:17:28जब उसने खुद ही रस नहीं पिया तो मेरा रस कैसे पीला पायेगा?
- 1:17:37ये धुर्त लोग दुकानदार होते हैं। इन दुकानदारों के चंगुल से जितनी
- 1:17:44जल्दी हो उतनी जल्दी मुक्त हो जाओ।
- 1:17:48जीवंत गुरु सच्चा गुरु तलाश लो लोभियों की शरण में मत जाओ,
- 1:17:53तुम्हें लूट लेंगे। अगर तुम्हारा आनंद लूट गया तो
- 1:17:57आनंद ही तो तुम्हारा सब कुछ है। तुम्हारे पास मात्र एक हितों के
- 1:18:01जाना है जो श्रद्धा के लिए रहेगा ना शरीर रहेगा, नमन रहेगा ना चित
- 1:18:06रहेगा ना विकार रहेगा तुम्हारे पास एक ही चीज़ रहेंगी सदा के
- 1:18:12लिए, वो है तुम्हारा आनंद और ये आनंद ही तुमसे छीन लेते हैं गुरु
- 1:18:16लोग। और तुम तले खड़काते रह जाते हो।
- 1:18:22राम मंदिर में इन्होंने तुम्हें तले खड़काने के योग्य कर दिया,
- 1:18:32खुद तो तले खड़का ही रहे। क्या इकट्ठा करेंगे के संगीत जा
- 1:18:37रहे। गद्दियों से गद्दियाँ ट्रांसफर हो
- 1:18:41जाएंगी लेकिन अनुभव से अनुभव ट्रांसफर नहीं होता ध्यान रखना यह
- 1:18:47तो बड़ी बाहर की स्कूल बात है एक राजा अपने पुत्र को गद्दी सौंप दे
- 1:18:54या अपने मित्र को गद्दी सौंप दे, कोई बड़ी बात नहीं।
- 1:18:57बाहर की चीजें पदार्थें एंड ए मटेरियल मैटर कैन बी ट्रांसफर्ड
- 1:19:05लेकिन अनुभव वो आनंद दट। कैननॉट बी ट्रांसफर्ड वह नहीं
- 1:19:12ट्रांसफर हो सकता, वह नहीं आपको बांटा जा सकता।
- 1:19:21वह तो आपको खुद ही कमाना पड़ेगा। तुम्हें खुद ही चलना पड़ेगा उन
- 1:19:26राहों पे तुम्हें खुद ही शीश देना होगा।
- 1:19:35तुम्हें खुद ही कुरबान करना होगा, बकरों को नहीं।
- 1:19:38अहंकार उससे सही बकरीद नहीं होगी, उससे ईद होगी और ईद होगी तो बकरी
- 1:19:48को मत मारना, अहंकार को मार देना, बकरीद मत मनाना।
- 1:19:54अहंकार ईद मंगना अहंकार की बलि दे दो और मिल जाओ योगी हो जाओ योग कर
- 1:20:02लो, ईद मिला लो, उसके गले से लग जाओ, इसे योग कहते हैं।
- 1:20:10सभी धर्मों ने पाखंड खिला लिए। यद्यपि उनके गुरु से ही बता के गए
- 1:20:16थे, लेकिन तुमने करते करते करते करते विकृत कर दिया।
- 1:20:21सब आज आज सिर्फ़ विकृतियाँ ही बची हैं।
- 1:20:30मान्यताएँ ही बची हैं। सत्य मान्यताओं के भार के तले दब
- 1:20:35गया। जब मैं जवान हुआ तो मेरी माँ ने
- 1:20:44मुझसे कहा, बेटा अब तुम जवान हो गया।
- 1:20:53जवानी में जोश होता है होश नहीं होता पता है मैं तुम्हें एक ही
- 1:21:06सबक सिखाउंगी इसे याद रखना। होश को बचाए रखे होश को बचाए रखे
- 1:21:22और आज मैं बूढ़ा हो गया। जोश तो खो गया।
- 1:21:29होश ही बाकी बचा है। सब कुछ लुटा के होश में आए तो
- 1:21:39क्या हुआ? दिन में अगर चिराग जलाये तो क्या
- 1:21:52हुआ दिन में अगर चिराग जलाये। तो क्या हुआ?
- 1:22:07सब कुछ लूटा के होश। में आए तो क्या हुआ?
- 1:22:19तुम सब कुछ लूटा बैठते हो। पांच नामों को जपते जपते राधे
- 1:22:24राधे को जपते जपते राम राम को जपते जपते फिर हो से ही बाकी रह
- 1:22:29जाता है और फिर सब कुछ खत्म हो जाता है।
- 1:22:35कहानी खत्म हुई, लुढ़क गए तुम जमीन पर छह से बजे।
- 1:22:42आज 6 दिन पाछे गए, गुरु से किया ना हेत आज 6 दिन पाछे गए गुरु से
- 1:22:52किया ना हेत अब पक्षताय होत क्या जब चिड़िया चुक गई खेद?