Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Jan 25 - अध्यात्म में सबसे बड़ी बाधा क्या है? अचेतन मन? Process of Emptiness. ध्यान के सूत्र!
Transcript
- 0:05स्वामी आनंदमूर्ति है बाबा जी प्रणब मान ठहर जाए तो स्वर्ग ही
- 0:16स्वर्ग है। मन चलता ही जाए तो नर्क ही नर्क
- 0:26है। बाबा जी किसी तरह इस मन से
- 0:34छुटकारा दिला दीजिए। बड़ा परेशान करता है।
- 0:44जिंदगी एक नासूर बन के रह गई है। सबसे पहली बात तो मैं आपको बताऊँ
- 1:08क्या प्रश्न तो कर देते हो लेकिन अड़चन मुझे ये आती है।
- 1:19कि इससे पहले मैं पिछली प्राणी वीडियो में क्या बोला ये आपको कुछ
- 1:25मालूम नहीं होता। आप अपना रोग बता देते हो, मन ठहर
- 1:33जाए तो स्वर्ग ही स्वर्ग है। मन चलता रहे तो नर्क ही नर्क है।
- 1:45जिंदगी एक अन्ना सुर बन के रह गई। कोई उपाय बताओ?
- 1:59खैर, वक्त वैसे भी कम होता है। पुरानी वीडियो आप सुनते नहीं कसूर
- 2:11भी नहीं क्योंकि आज ही पहुंची होगी आपके पास वीडियो।
- 2:19और आज ही आपने प्रश्न कर दिया, सभी व्यक्तियों को तो यह ज्ञात भी
- 2:29नहीं होगा कि मैं चार 5 साल से बोल रहा हूँ और बहुत से भगत तो
- 2:38मुझे उलाहना देते हैं, बाबा। इतनी देर क्यों लगाते हो?
- 2:44आज पता चला है आपको मैं क्या करूँ भाई ये तो आप लोगों की मेहरबानी
- 2:53है अगर आप में ज़रा भी इंसानियत है।
- 3:01ज़रा भी इस धरती के मार्ग का कल्याण करना चाहते हो तो जो
- 3:08वीडियो आपको अच्छी लगे उसको अपने मित्रगण तक तो पहुंचा दिया करो,
- 3:15किसी और का भला हो जाएगा, ये धरती स्वर्ग हो जाएगी।
- 3:22यही मेरी कामना है, यही मेरा प्रयास है।
- 3:32हम यहाँ से शुरू करें तो ज्यादा शुभ रहेगा।
- 3:39तीन चीजें मैंने बताईं। तीन चीजों से आप सारी बात समझोगे,
- 3:58यह संतूर से है, ये हमारे ओजार हैं।
- 4:08और इसके भीतर एकसूक्ष्म शरीर, सूक्ष्म शरीर के भीतर सभी पुराने
- 4:19जन्म की स्मृतियाँ हमारे प्रारब्ध कर्म आय तक के हैं।
- 4:29हमारी वासनाएं, हमारी इच्छाएं, कामनाएं के सब संग्रहीत हैं और
- 4:46तीसरा बेहतर। जिसकी आप डिमॅंड करते हो मन ठहर
- 4:55जाए तो स्वर्ग ही स्वर्ग है, मन चलता जाए तो नर्क ही नर्क है ये
- 5:05आपकी डिमॅंड। कैसे मन ठहर जाए?
- 5:11बहुत बार बोला मन चलता कैसे है? बहुत बार बोला।
- 5:29मन को चलने की शक्ति देता कौन है, ये सभी बातों को मैं बड़े विस्तार
- 5:35से बता चुका हूँ, लेकिन स्वामी जी आज नहीं आए हैं।
- 5:39क्या किया जाए? ये तीन चीजें हैं फूल शिरीष, इसके
- 5:56भीतर सूक्ष्म शिरीष और तीसरा वह तल जहाँ आप जाना चाहते हो, जहाँ
- 6:06जाकर आपको तृप्ति मिलेंगे। मन ठहरेगा जहाँ एक बात ध्यान में
- 6:16रखने योग्य है, मन वही ठहरता है जहाँ उसे आनंद मिलता है।
- 6:31अब यहाँ थोड़ा फर्क समझ लेना सुख के मिलने से आप फर्क भी समझोगे।
- 6:38आनंद और सुख का फर्क है, सुख के मिलने से आपका मन ठहरता नहीं?
- 6:44वर्ण ज्यादा उत्तेजित हो जाता है। आप नाचते हो, कोई खुशखबरी मिल गई,
- 6:52कोई लॉटरी निकल आई, कोई ज्यादा मुनाफा हो क्या?
- 6:59सुख के मिलने से आपकी उत्तेजना स्टिमुलेशन बढ़ती है?
- 7:05यह है सुख की प्रभाषा। आनंद के मिलने से सभी स्टिमुलेशन
- 7:14सभी उत्तेजनाएं समाप्त हो जाती हैं।
- 7:19यह है आनंद के प्रभाष, इसलिए मैं दोनों को अलग अलग कहता हूँ।
- 7:27आनंद में लहर जैसा कुछ भी नहीं है और सुख में ठहराव जैसा कुछ नहीं
- 7:36है। सुख में लहरें ही लहरें हैं, जो
- 7:44तुम्हें नचाती हैं। तुम हंसते हो खिलखिलाते हो,
- 7:49गुनगुनाते हो लेकिन आनंद परम ठहराव का नाम है और तुमने पूछा
- 8:09स्वामी जी कि मैं उस परम ठहराव तक मेरा मन कैसे ठहर जाए?
- 8:18स्वर्ग ही स्वर्ग है, माँ नगर ठहर जाए हाँ स्वर्ग है निराशक और मन
- 8:29का ठहरना। पल भर की ही तो बात है, क्या करे
- 8:41कोई जब कोई आपका मन थोड़ा ठहरने लगता है तो फिर आप उसमें गचोल मार
- 8:53देते हो। मन एक गंधला पानी है यह ठहरेगा
- 9:06आपके ठहरने से। जैसे मैंने गिलास की उदाहरण दी थी
- 9:14गंदला पानी गिलास में रख दो, रात को सो जाओ, आप भी और गिलास को एक
- 9:23तरफ़ रख दो सुबह उठ के पाओगे माटी, माटी नीचे बैठ गई।
- 9:32शुद्ध जल ऊपर रह गया लेकिन क्या किया जाए अगर फिर आप उसमें गजोल
- 9:42मार दो फिर फिर वो गंधला हो जाता है यद्यपि मन कभी गंधला होता
- 9:51नहीं। मन शुद्ध चेतन स्वरूप है।
- 9:59मन के भीतर की माटी गंदगी है, वो इसे गंदगी बनाती है, वो माटी क्या
- 10:06है? चिपकाट क्लिंगिंगनेस?
- 10:13एकाकृत हो जाना मोह जिसे कह देते हैं किसी दूसरी वस्तु को स्वयं
- 10:22मानने लग जाना के मैं हूँ इसको कहते हैं क्लिंगिंगनेस।
- 10:34तीन चीजें मैंने बताई आपको पहले सोल सर्विस, यह तो इंस्ट्रूमेंट
- 10:41है, जब तक हमारा दे ही। अब इन शब्दों को समझ लेना, लेकिन
- 10:54समझ में आएगा नहीं, बार बार सुनोगे तो आपको एक कनेक्शन समझ
- 11:00में आ जाएगा। दे ही दे ही सूक्ष्म शरीर को कहता
- 11:12हूँ मैं। सूक्ष्म शरीर में बहुत सी
- 11:19भावनाएँ, तमन्नाएँ, इच्छाएं, कल्पनाएं, योजनाएं, समृतियाँ ये
- 11:32सब भरी पड़ी हैं लबा लब भरा पड़ा है।
- 11:35उसे अचेतन मन कहते हैं। फ्रेंड ने इसके दो भाग कर दिये
- 11:41सबकॉन्शस माइंड एंड अनकॉन्शस माइंड, अवचेतन मन और अचेतन मन।
- 11:52लेकिन ऋषिगण इसको अचेतनमन ही कहते हैं।
- 11:57भाई जो थोड़ा सा उथला उथला होता है, वह अवचेतनमन होता है और जो
- 12:02गहरा गहरा होता है वो अचेतनमन होता है।
- 12:10कोई भारी चीज़ फैंक दी गई। वो अचेतन के गहरे तल में चली
- 12:15जाएगी। तुम उससे कहो जे चेतन बन गई जो
- 12:19हल्की चीज़ तैरती रही, कैसे कागज़ है, लकड़ी है, प्लास्टिक है जो
- 12:25ऊपर तैरता रहा उसको तुम अब चेतन बन कह दोगे बस?
- 12:32यह समझने का फर्क है। परिभाषाएं दो कर दी गईं।
- 12:37अचेतन मन है तो एक ही तो तुम्हारे मन की अचेतन मन की भावनाओं वासनएं
- 12:47अपने आप को पूर्ण करने में लगी हैं।
- 12:57अचेतन मन की वासनाएँ कल्पनाएँ योजनाएं अपने आप को पूर्ण करने
- 13:06में लगी हैं और यही रोग है आपको। क्योंकि भरा पड़ा है अचेतन मन,
- 13:19वासनाओं से, कल्पनाओं से, स्मृतियों से, प्राणी या दास्तों
- 13:24से, नए जीवन की संभावनाओं से तुम्हारा मन कभी दौड़ता है भविष्य
- 13:34में? एक सुंदर सपना होगा महल होगा,
- 13:46बड़ी कारें होंगी जहाज होंगे मैं उड़ूंगा धन कमाऊंगा विशाल भंडार।
- 13:58दासदासी होंगी, सेवा को होंगे, बड़े बड़े धन के अम्बार लगे
- 14:06होंगे, मान सम्मान होगा, बड़ी पदभियों के मालिक हो जाओगे।
- 14:14यह मंत्र में समझाता है। यही कुछ कूड़ा भरा पड़ा है मन में
- 14:23और यह कूड़ा जब बाहर निकलता है, चेतन मन में आ जाता है।
- 14:29प्रत्येक अचेतन की बात गाहे बगाहे।
- 14:34चेतन में आ जाती है और जब वो चेतन में आती है, फर्ज करो आपकी एक
- 14:43वासना बड़ी कार खरीदने की है, वह चेतन में आती है।
- 14:53तो आप ऑर्डर करोगे अपनी बुद्धि को, मन को अपने शरीर को कि वह
- 15:02परिश्रम करे, पैसा कमाए और धन कमा कर इतना धन पैदा कर ले कि मैं यह
- 15:10चमचमाती बड़ी कार्यालय हूँ। अब तुमने अपनी वासनाओं को पूर्ण
- 15:16करने का अभियान शुरू कर दिया, आगाज यहाँ से हो गया और उसको पूरा
- 15:27करने में आप बड़ी तकलीफ में उठाओगे, यहाँ अकेले तुम नहीं हो।
- 15:38जो बड़ी कार्यों को चाहते हों और भी बढ़े हैं।
- 15:45ओहदा तो एक होता है, सीएमपीएम का दावेदार हजारों होते हैं, यही
- 15:51कठिनाई है। वासनाओं से भरा भरा मन राजनीतिक
- 16:00की तरफ प्रेरित होता है, क्योंकि मन बड़ा चालाक भी है और आलसी भी
- 16:07है। मन चाहता है कि जल्दी से गुप्त
- 16:12तरीके से। आसानी से बिना ज्यादा मुशक्कत की
- 16:21है घना सारा धन, कमर और बड़ी कार्यालय, बड़ा आहोदा बालम बड़ा
- 16:30धन कमर। इसलिए जीतने बहुत कम होते हैं।
- 16:37अब प्राइम मिनिस्टर एक है। चीफ मिनिस्टर भी एक होता है,
- 16:41स्टेट का दावेदार बने होते हैं। तो वहाँ शरारतें होती हैं,
- 16:49बिसाहतें बिछती हैं शतरंज की और तुम अपनी सारी ज़िन्दगी इन
- 17:02दुष्टकर्मों में गुजार देते हो। मैंने इन्हें दुष्टकर्म क्यों कहा
- 17:06है? मैंने इन्हें दुष्टकर्म इसलिए
- 17:11कहा। किस में तुम शक्ति भी निहित करते
- 17:15हो? समय भी निहित करते हो और फिर पता
- 17:20नहीं मिलेगा कि नहीं मिलेगा, नहीं मिलेगा तो तुम पछताओगे, रोओगे मिल
- 17:26जायेगा तो भी आप रोओगे इसलिए मैं दुष्ट कहता हूँ।
- 17:35तुम कहोगे तुम्हें क्या बताओ? पहली बात तो यह है अगर ईमानदार
- 17:42व्यक्ति कोई सीएमपीएम है उससे पूछ लूँ।
- 17:51कि तुमने इतना बड़ा उधा पाया, तुम्हें सुख मिला।
- 17:59अगर वो ईमानदार होगा तो वो कहेगा नहीं मिला।
- 18:03अगर मिलता तो दूसरी बार फिर पीएम की पोस्ट में ना मांगता।
- 18:10अगर दूसरी बार भी सुख मिल जाता तो तीसरी बार न तीसरी बार मिल जाता
- 18:17तो फिर चौथी बार मिलता ही नहीं। इसलिए ता ज़िन्दगी तानाशाह बन
- 18:24जाता है। ऐसा व्यक्ति ऐसा व्यक्ति पुतिन बन
- 18:29जाता है। किम जोंग जोंग बन जाता है जिनपिंग
- 18:34को बन जाता है क्यों मिलता नहीं? फिर वो कहता बैठे तो हैं और इस
- 18:46बैठने के भीतर। जो पाप हो जाते हैं, बुरे कर्म हो
- 18:50जाते हैं। किसी का धन छीन लिया, किसी का घर
- 18:56घरा दिया, किसी का बच्चा मरवा दिया साजिश के अधीन।
- 19:11ये जो बुरे कर्म होते हैं, पाप कर्म होते हैं, निश्चित रूप से जो
- 19:16हो जाते हैं, ईमानदारी से न मिलते हैं।
- 19:21ईमानदार व्यक्ति राजनीति में टिक नहीं सकता।
- 19:28ईमानदार व्यक्ति को बेईमान लोग टिकने नहीं देते हैं, क्योंकि
- 19:37बेईमान शतरंज की चालुओं को फैला के ईमानदार व्यक्ति को झूठा करार
- 19:44दे देंगे। और आखिर वोट तो आपने डालना और
- 19:53बेईमान व्यक्ति हर प्रयास कर लेगा सभी तरफ से कि मैं अपने ओहदे पर
- 19:59बना रहा हूँ और पहली एक बार तो उसकी इच्छा थी।
- 20:04दूसरी बार मन नहीं भरा। तीसरी बार तीसरी बार मन भी मन तो
- 20:10चलो भर गया लेकिन जो वो पाप कर्म किये हैं अगर तीसरी बार कोई और आ
- 20:16गया पाप कर्म उखड़ेंगे इसलिए आपको एक मजेदार बात बताऊँ?
- 20:26अमेरिका में द्वितीय महायुद्ध के वक्त रुजवेल्टा नाम के राष्ट्रपति
- 20:34थे। रूसवेल्ट चार बार अमेरिका के
- 20:42राष्ट्रपति बने। बेहद शानदार स्वभाव के व्यक्ति और
- 20:50दूसरा विश्व युद्ध उनके ही कमांड में लड़ा गया।
- 20:56ये ओपेन हाइमर वर्ग जैसे। एटम बम का विस्फोट करने वाले
- 21:02व्यक्ति उसी काल में। थे।
- 21:04सर, रूस वेल्ट। के वक्त रूस वेल्ट चार बार
- 21:12प्रेसिडेंट ऑफ़ अमेरिका चुने गए। तो अमेरिका के लोगों ने जब डी
- 21:24रोजवेल्ट चौथे पर चुना गया और उसकी मृत्यु हो गई, वो बड़े
- 21:31समझदार लोग हैं। अमेरिका हमसे आज।
- 21:35200 वर्षा के इतना ही चाइना भी आ गया।
- 21:43उसका कारण लोगों में परिश्रम का अभाव नहीं है।
- 21:52बल्कि हिंदुस्तानी ज्यादा परिश्रम करता है।
- 21:58अभाव है। हमें ठीक से नेतृत्व नहीं मिला।
- 22:11हमारा नेतृत्व सही नहीं मिला। हमें नेतृत्व बिगड़ता तिग्ड़ता
- 22:20रहा। चाइना क्यों कामयाब हो गया?
- 22:25सिर्फ एक व्यक्ति के कारण चाइना कामयाब हो गया।
- 22:31तुम हैरान हो गए एक व्यक्ति की कुर्बानी मुल्कों को सोने की
- 22:37चिड़िया बना देती हैं, एक व्यक्ति की कर्बानी ये आज हिंदुस्तान में
- 22:43भी हो सकता है। एक व्यक्ति की कुर्बानी, मेहनत,
- 22:51ईमानदारी आज हिंदुस्तान को फिरत से सोने की चिड़िया बना सकती है,
- 23:05वो ही है चाल। बेढंगी जो पहले थी वो अभी है।
- 23:10आज हमारी चाल बदली नहीं है। वो ढंक की हो, बेडंकी हो, हम आज
- 23:17भी सोने की चिड़िया बन सकते हैं। जरूरत क्या है?
- 23:21सिर्फ एक ईमानदार मुल्क को संभाल लेंगे।
- 23:28प्राणों को क्या हो गया है? मैं आपको असली रोग बताता हूँ।
- 23:34उसका हाल भी बताऊँगा। मेरी इस विषय के अंदर कई बार बात
- 23:40चलती है क्योंकि मेरे पास कुछ व्यक्तियों के प्रश्न आ जाते हैं।
- 23:46बापू आप भी कुछ करो। तो मैं हाथ जोड़ देता हूँ कि देखो
- 23:55मेरा अंतःस् ट्रांसफॉर्म हो गया है।
- 24:04इच्छा तो तब भी नहीं थी जब गाँधी के रूप में मैं था।
- 24:13अन्यथा कहीं बैरिस्ट्री का शूट गया, कहीं नहीं था और ट्रंक में
- 24:20से निकलता और डाल लेता और बैठ जाता लो भाई मैं प्राइम मिनिस्टर
- 24:27कौन रोकता है? कोई नहीं रोक सकता था।
- 24:33गाँधी को प्राइम मिनिस्टर की कुर्सी पर बैठने से कौन रोक सकता
- 24:37था? लेकिन तमन्ना ही नहीं थी।
- 24:40राज़ करने की तमन्ना ही थी कि मुल्क किसी तरह गुलामी की चंगुल
- 24:47से बाहर निकल जाए। जितनी मेहनत हो सकती थी हुई
- 24:52देखिये गलतियाँ घनानों वालों से मैं ये बात कह दूँ, हाथ जोड़ के
- 24:58जो काम करेगा वो गलती भी करेगा, जो चरण पकड़ेगा वो गलती नहीं
- 25:02करेगा। दो शब्द ही मेरे याद रखने जो काम
- 25:09करेगा। वो गलती भी करेगा जो चरण पकड़ के
- 25:13बैठ जाएगा, वो गलती नहीं करेगा और जितना महान काम करेगा, मेरी बात
- 25:22को समझ लेना उतनी महान गलती करेगा।
- 25:26और जितना महान चरणार बिंदुओं का सेवक होगा, उतनी ही गलती करने की
- 25:34उसकी कोई संभावना नहीं होगी क्योंकि अगर वो गलती करेगा भी तो
- 25:39जिसके चरणों में बैठा है, वह उससे क्षमा कर देगा, तो गलतियाँ सबसे
- 25:45होनी होंगी। निश्चित है, पर मैं गलतियाँ
- 25:51निकालने वालों से कहता हूँ कि आप क्यों नहीं आये भाई आप आएगा न तो
- 25:58गाँधी को शोक था भारत माँ। गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी हुई
- 26:09हजारों सालों से गुलाम करना कोई गुलाम गुलामी से मुक्त करना कोई
- 26:15अपराध तोसान है भी अगर कुछ गलत किया तो तुम आ जाते।
- 26:23तुम अपने बाप दादों से पूछो जो पूछना चाहिए कि तुम क्या कर रहे
- 26:29थे जब आग लगी थी भारत माता गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी हुई थी।
- 26:36बट यू वर्क। बट यू अरे गोइंग ऑन उस वक्त तुम
- 26:52तुम क्या कर रहे थे? खैर, मैं कहता हूँ कि बीती ताही
- 27:02बिसार दे। आगे के सूत्र रहे, मैं पहले भी
- 27:09बहुत बार कह चुका हूँ जो इतिहास बना नहीं सकते वो इतिहास खंगाला
- 27:15करते हैं। कमजोर व्यक्तियों की निशानी होती
- 27:20है इतिहास को खंगालना। ये फरहा के घर के नीचे मंत्र है
- 27:28फरहा के घर के नीचे मस्जिद है होगा भाई तुम्हारा कर्तव्य जो है
- 27:36वो क्यों नहीं करते? तुम्हारा कर्तव्य है?
- 27:40भारत के प्रत्येक वाष्यंद का पेट भरना यही तो काम होता है ना आप
- 27:47किस लिए डालते हो वोट भारत के प्रत्येक पेट को भरना, प्रत्येक
- 27:55तन को कपड़ा देना और प्रत्येक सिर को छत देना।
- 28:00प्रत्येक हाथ को रोजगार देना, प्रत्येक के दिमाग का इस्तेमाल
- 28:05करना। यह राजा का कर्तव्य होता है।
- 28:14तो रुज बेल्ट दी रुज बेल्ट। चार बार राष्ट्रपति बन के देह
- 28:23त्याग करके हैं, वहाँ के लोग समझदार हैं, इंटेलेक्चुअलिटी के
- 28:32मामले में भी समझदार हैं और इसी कारण से वो प्रॉस्पर मुल्क हो गए
- 28:37हैं। और आज नहीं कल चाइना भी
- 28:42प्रोस्फर्स कंट्री में आ जाएगा। हो ही गया है।
- 28:47इसकी 18 ट्रिलियन की जीडीपी है। वह हो ही गया, समझ लो।
- 29:01मैं आपसे कह रहा था कि वहाँ के लोगों ने सोचा कि चार बार और
- 29:07कितनी भी बार यह तो डिक्टेटरशिप की तरफ मार्ग हो गया।
- 29:14फिर जो चार बार बन सकता है वो सदा के लिए भी बन सकता है, क्योंकि
- 29:19मनुष्य की। वासनाएँ असीमित हैं और अमेरिका
- 29:28नहीं चाहता था कि अमेरिका तानाशाही के मुल्क हो
- 29:38डेमोक्रेटिक। तानाशाही वहाँ पर क्रिएट हो ये
- 29:46नहीं चाहता था लोकतंत्र हो। इसलिए उन सब ने बैठकर ये फैसला
- 29:53किया कि ये कानून पास कर दे कि कोई भी व्यक्ति।
- 29:57जो अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ता है।
- 30:00दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन पायेगा।
- 30:03अब उसके बाद यही परंपरा चल रही है।
- 30:05कोई तीसरी बार चाहे कितना भी समझदार है, कितना भी समझदार है।
- 30:12तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं हो सकता अमेरिका में।
- 30:15बड़े काम की बात उन्होंने चुन ली। लेकिन हिंदुस्तान में आज ऐसी बात
- 30:22नहीं है और जहाँ जहाँ तानाशाही है वहाँ वहाँ ऐसी बात नहीं है।
- 30:29एक व्यक्ति श्रद्धा के लिए राज़ करने का मतलब यह है कि सृष्टि में
- 30:34इस धरती में ये संभावना खो गई कि कोई और व्यक्ति भी उसके बराबर का
- 30:40या उससे ऊपर का पैदा करते नहीं। भारत माता की या धरती माता की
- 30:53इतनी व्यतीति मत करो। ये रोज़ लाल पैदा करती है, रोज़
- 31:00सुर में पैदा करती है, नई से नई दिमाग पैदा करती है।
- 31:05नई से नई इन्वेंशन तभी तो रोज़ हो रहे हैं जो हमारी पुरानी
- 31:12साइंटिस्ट नहीं कर सके। वह आने वाले आइंस्टीन ने कर दिया
- 31:19स्टीफेन हॉकिन ने कर दिया और आज और भी लगे हुए हैं।
- 31:24दिन भर रात मेहनत करते हैं। ऐसा नहीं है कि एक व्यक्ति है बस
- 31:30वो ही राज़ करने के योग्य है तो ठीक कानून पास किया उन्होंने।
- 31:34इस प्रश्न को मैं थोड़ा बाद में उठाऊंगा।
- 31:37पहले उसे पहले वाले। प्रश्न को उठा लें फूल, शरीर,
- 31:45सूक्ष्म शरीर और आपकी अस्तित्व की तल।
- 31:54ये तीन चीजें मैंने बताई। बीच वाला सूक्ष्म शरीर वासनाओं से
- 32:04भावनाओं से इच्छाओं से पारा पड़ा है।
- 32:13और संत कहते हैं, यही है आपके रोग का असली कारण कि तुम इस सूक्ष्म
- 32:25शरीर की वासनाओं को पूर्ण करने में इतनी जिंदगियां खपा दी हैं
- 32:30तुमने। और न जाने कितनी जिंदगियां और खपा
- 32:37दोगे और ऐसे वक्त गुज़रना जाएगा और तुम कभी भी जान न सकोगे।
- 32:50के मैं बंधन में हूँ इन वासना के कारण तुम बंधन में हो मन के
- 33:05दौड़ने के कारण तुम बंधन में हो यही है एकमात्र कारण।
- 33:12अगर इस कारण को सॉल्व कर लिया जाए तो तुम परम शांति में चले जाओगे
- 33:20और मैं रोज़ बोलता हूँ। ऊपर से दुखद स्थिति यह है कि
- 33:28दौड़ते हुए मन को। हमारे तथाकथित धार्मिक गुरु और
- 33:34दौड़ाते हैं, घोड़ा पहले से ही तेज दौड़ रहा है।
- 33:41तुम्हारा मन बड़ा दौड़ता है। तुम दिन भर रात तुम्हारा मन
- 33:47दौड़ते हुए देखते रहते हो। और ऊपर से धर्मगुरु कहते हैं,
- 33:52दौड़ो और दौड़ो ये पांच नाम जपो ये राम राम जपो ये तुम्हारे मन को
- 34:03और दुड़ाते हैं दौड़ तो पहले से ही राहत हो जैसे गंधले पानी में।
- 34:10कोई फिर फिर से हाथ फेरता रहे। बस क्या होगा और ज्यादा गंधला
- 34:15होता जाएगा। बस ऐसे ही तुम्हारे धर्मगुरु
- 34:22करें। और संत बड़ी सरल बात कहते हैं और
- 34:28सरल बात को तुम मानने को तैयार नहीं।
- 34:30है। क्यों जैसे मैंने कहा था।
- 34:34ईमानदार व्यक्ति राज़ नहीं कर सकता क्योंकि ईमानदार व्यक्ति में
- 34:38छल का पट नहीं होता। निर्मल मान जन सोई मोहि बाबा मोहि
- 34:48कपट चल छित्र न बाबा तो ईमानदार व्यक्ति राजनीति नहीं कर सकता।
- 34:58उसको बेईमान लोग हटा ही देंगे आज नहीं कर।
- 35:04और अगर वो नहीं हटेगा तो उसे मरवा देंगे क्योंकि वे ही मान लो ऐसे
- 35:10ही गुंडे होते हैं, इसलिए मैं दुष्ट कहता हूँ इन लोगों को हटाने
- 35:19की चेष्टा करेंगे, वार न करेंगे। ढंग से कहेंगे तू जा भाई, तेरे
- 35:23काम का नहीं है तू तो पप्पू है बड़े बड़े नए नए अलंकार देने में
- 35:41समर्थ हैं ये लोग अब क्या किया जाए?
- 35:48के दौड़ते हुए मन और राजनीति खेलते हैं वो तीन चीजें मैंने
- 35:55बताई फूल, शरीर के यंत्र। तुम्हारी वासनाओं को पूर्ण करने
- 36:04में सहयोग करते हैं। तुम्हारी वासना है के हिल स्टेशन
- 36:10देखाऊ स्विट्जरलैंड के दर्शन कर लूँ कोई अच्छा सट्टापू देखाऊं कोई
- 36:18हरियाली वाली जगह देखाऊं। तो तुम्हारी दे ही ने ये कामना
- 36:23प्रकट की शक्ति ली तो मैंने भीतर के तल् के साथ जहाँ एनर्जी का
- 36:31भंडार भरा पड़ा है यानी जो तुम हो, तुम एनर्जी के भंडार हो इसलिए
- 36:38तुम्हें ओमनी पोटेंट कहा गया। सारी शक्ति तुम्हारी है, तुम
- 36:45शक्ति देते हो। केन्द्रों को तो तुम अपनी वासनाएँ
- 36:52पूरी करते हो, घूम आते हो, हिल स्टेशन चले जाते हो, प्राइम
- 36:57मिनिस्टर बन जाते हो। चीफ मिनिस्टर बन जाते हो तो मैंने
- 37:02कहा तुमने बड़ी मशक्कत से ये सब पाया तो भी निरस्त हुआ क्यों
- 37:11निरस्त हुआ? क्योंकि सब कुछ पाके भी।
- 37:18व्यक्ति पाता है कि खाली रह गया। तुम पूछोगे कि आपको क्या पता है?
- 37:27पूछना जायज भी है, क्योंकि मैंने कोई राज़ थोड़ी किया है लेकिन
- 37:31मैंने राज़ किया है। तो तब काम आते हैं हमारे पिछले
- 37:39जन्म जब उन तलों पे पहुंचा व्यक्ति अपने पिछले जन्मों में
- 37:44जाता है तो कभी तुम भिखारी भी रहे हो कंगाल भी रहे हो नंग धड़ंग बदन
- 37:53से चलते थे पांव में जूता। नहीं होता था।
- 37:57बरसों बरसों तक नहाते नहीं थे, पेट भूखा रहता था।
- 38:06कृष्ण तनु रहते थे, बीमार रहते थे और कभी ऐसे भी मोके आए कि तुम
- 38:13शहंशाह रहे हो, तुमने हुक्म चलाया।
- 38:19वहीं से उठाए जाते हैं अनुभव अब इन बातों को गौर से समझ लेना
- 38:29प्रबुद्ध लोग अनुभवों को उठाते हैं।
- 38:32आप देखो कि प्रबुद्ध लोग बड़े ज्यादा अनुभवी होते हैं।
- 38:36जबकि उन्होंने इतना कुछ किया नहीं होता।
- 38:39सिर्फ वो बस बैठे होते हैं। बुद्ध ने क्या किया?
- 38:43पीपल के पेड़ तले बैठे रहे। लेकिन ज्ञान कितना है?
- 38:50इस जन्म में तो ज्ञान है नहीं। 29 वर्ष तक तो।
- 38:56वह महल के भीतर ही करीब करीब कैद रहे।
- 38:58जेल खाने की तरह बाहर गए ही नहीं। 29 वर्ष के बाद भाग गए घर से, फिर
- 39:06भी कोई ज्यादा चले नहीं, बस जाकर थोड़ा सा पेड़ के नीचे बैठ गए।
- 39:13तो यह अनुभव कहाँ से आया? राजकुमार थे, लेकिन राजा नहीं थे।
- 39:22ध्यान रखना इतना अनुभव कहाँ से आता है?
- 39:27प्रबुद्ध पुरुषों के पास पिछले जन्मों के अनुभवों से वो सीख
- 39:31जाते। हैं।
- 39:33वो सीख जाते हैं के विचारों में कुछ नहीं है कहाँ से सीखाना पिछले
- 39:41जन्म के अनुभवों से सीखते हैं वो। इसी बल के ऊपर मैंने तुमसे ये कहा
- 40:02सब कुछ पा लोगे संसार का, फिर भी खाली रह जाओगे, तुम्हारा पेट भर
- 40:11जाएगा, जिसे कहते नीयत नहीं भरेगी।
- 40:15वो नीयत इसी को कहते हैं। तुम तृप्त नहीं होगे।
- 40:22तृप्ति क्यों नहीं होती? क्योंकि जीस चीज़ की जरूरत है वो
- 40:26नहीं तुम्हें बैठी और मैंने बहुत बार कहा है।
- 40:30जरूरत है तुम्हें आनंद की उस रस की जीसको उपनिषदों ने।
- 40:36रसो वैसा परमात्मा कुरा स्वरूप कहा है।
- 40:42वो तुम्हें मिला नहीं और जब तक वो मिल नहीं जाएगा तब तक तुम्हें कुछ
- 40:49भी मिल जाए, तृप्ति होने को नहीं है, ठहरेगा नहीं मन।
- 40:54तुम्हारा प्रश्न बड़ा अजूबा है और शानदार भी है, लेकिन इसका जवाब
- 40:58मैं बहुत बार दे चुका हूँ। चलो क्योंकि ये बुनियादी प्रश्न
- 41:04है, तुम जितनी बार भी पूछोगे मैं इसे बताऊँगा बताया है।
- 41:15तुम समझे नहीं तो फिर पूछोगे मैं बखूबी जानता हूँ कि इतना आसान
- 41:20नहीं है मतलब? जन्मो जन्मो का एक?
- 41:30रोग तुम लिए फिर रहे हो वह। इतनी जल्दी से।
- 41:35टूटने वाला है। नहीं टूटेगा, धीरे धीरे टूटेगा,
- 41:42लेकिन टूट सकता है अगर तुम तोड़ना चाहो तो।
- 41:54प्रक्रिया फिर से समझा दूँ, आराम से बैठ जाओ, सुख आसन में बैठ जाओ,
- 42:00कहीं भी बैठ जाओ, अपने घर में शांत स्थल में बैठ जाओ, शरीर को
- 42:08ढीले छोड़ दो। सुख आसन में बैठ जाओ।
- 42:18तुम दीवार के साथ पीठ लगा सकते हो।
- 42:24कमजोर है शरीर तो आस पास सरहने रख सकते हो, सपोर्ट रख सकते हो?
- 42:31लेकिन आरामदायक मुद्रा में बैठे हुए हैं।
- 42:35शरीर को ज़रा भी तकलीफ न हो शरीर बिल्कुल भी अच्छा न करे।
- 42:42तुम्हें शरीर में किसी प्रकार की हलचल न हो।
- 42:49क्योंकि शरीर की प्रत्येक हलचल तो मैं पहुंचने में थोड़ी सी बाधा
- 42:57बनेगी, फिर तो आराम से बैठ जाओ। शरीर को मन को ढीले छोड़ दो
- 43:06रिलैक्स, युअर बॉडी एंड माइंड। अक्सर लोग मुझे पूछते हैं बाबा हम
- 43:13यह करते हैं, लेकिन जीतने विचार पहले चलते थे, चलते फिरते, कामगार
- 43:24करते, उससे ज्यादा विचार चलते हैं, बैठे बैठे।
- 43:30एक दम से तेज हो जाते हैं विचार भावनाओं भी तेज हो जाती हैं।
- 43:38बड़े बड़े पुराने किस्से याद आते हैं इरशा, द्वेष, नफरत, प्रेम सब
- 43:44आता है, मन और तेज चलता है। विचार उतने ही चलते हैं जीतने तुम
- 43:52चलते फिरते हुए विचार चलते। थे।
- 43:55हुआ क्या? जब तुम बैठ जाते हो कुछ नहीं करते
- 44:00तो तुम्हारा ध्यान और किसी तरह नहीं होता।
- 44:02तुम तुम्हारा ध्यान सिर्फ विचारों की तरफ होता है।
- 44:06तो वह तुम्हें लगते हैं कि ज्यादा चलने लगे, चलते तो उतने ही है।
- 44:12चलो उनको चलने दो, आगे की प्रोसेसर है उनको रोको मत दो
- 44:19बातें मैंने बताई ना तो दमन करो ना उसके संग जाओ।
- 44:30उसको सुप्रस भी न करो उसके साथ एनतंगले भी मत हो वासना आई, विचार
- 44:38आया, कुछ आया जब तुम बैठ जाओगे, आराम से शीतल।
- 44:47छोड़ के अपने आप मन को भी छोड़ दोगे तो मन तेजी से घूमता हुआ नजर
- 44:54आएगा। शोर मचाएगा, कुछ भी आ सकता है,
- 44:58वासनाएँ भी आ सकती हैं, गाली भी आ सकती है।
- 45:02राधे राधे भी आ सकता है। जो तुमने भर लिया है ना भीतर वो
- 45:06ही बाहर आएगा। याद रखना इस सूत्र को याद रख लेना
- 45:11मेरे जो तुमने राधे राधे किया है वो तुम्हारे अचेतन को भरेगा।
- 45:20फिर लोगों को अक्सर ये। महात्मा लोग गुमराह करते हैं,
- 45:26इतना ज्यादा नाम जप लेते हैं, वो चाहे राम राम हो, कृष्णा कृष्ण हो
- 45:32या कोई भी हो। फिर वो कहते हैं कि अब तो भीतर से
- 45:37राधे राधे ही आना शुरू हो गया तो कहते हैं ये अनदनाद है।
- 45:48यह वो जाप है जिसे अजपा जाप कहते हैं।
- 45:52ये तुम्हें जपना नहीं पड़ेगा। अब वो शुरू हो गया।
- 45:55तुम गलती में हो तुम्हारा अचेतन इतना भर गया है देखो तुम इतना
- 46:03खाते जाओ, इतना खाते जाओ, इतना खाते जाओ।
- 46:06इतना खाते जाओ कि पेट उसको बर्दाश्त करने से इंकार करते हैं
- 46:14तो क्या करेगा भीतर का ऑर्गन उसको बाहर उलटी करेगा।
- 46:18बस ये जिसे तुम अजपा जब कहते हो इट इस जस्ट ए वोमिटिंग।
- 46:25यह अगर इतना तुम करोगे राधे राधे राम।
- 46:31राम? इसकी जरूरत तो कोई है नहीं।
- 46:35इट इस फौरन मटेरियल यह वीजाती या द्रव्य है, तुम्हारे लिए इसकी
- 46:40जरूरत नहीं है। तो जब बाहर निकलेगा तुम जहाँ
- 46:50जाओगे चलते फिरते बैठते उठते भीतर से वो ही आएगा जो तुमने जबा है जो
- 46:56नाम मुझे पांच नाम है। सिद्धि वगैरह कुछ नहीं है।
- 47:00गलती में मत पड़ना बहुत से लोग हमें भरमाते हैं, वो मूर्ख होते
- 47:05हैं। वो तो तुम्हारे अजपा जाप शुरू हो
- 47:08गया। कोई अजपा जाप नम की कोई चीज़ नहीं
- 47:10होती। आनंद नाद होता है।
- 47:12अजपा जाप कुछ नहीं होता। अजपा जाब।
- 47:17तो ये वो है जब तुम किसी पहाड़ों में गए होंगे।
- 47:21वहाँ जाकर तुम आवाज़ देना, ये परीक्षण करना, एक ऊंचे से बोलना
- 47:28राम तो उससे टकरा के आवाज़ आयेगी। राम राम, राम, राम, राम राम।
- 47:35छः सात बार जितना तुमने भीतर फेंका है नाम मैं साइंटिफिक वे
- 47:42बता रहा हूँ तुम्हे वो जब बाहर निकलेगा वो पहाड़ियों से टकरा के
- 47:48वापस आती हुई आवाज़ जैसा होगा। और कोई अजपा जाप नहीं है।
- 47:53वो वोमिटिंग है ये उल्टी आ गयी तुमको भीतर जब्ता तो है नहीं, नाम
- 48:00को जपाने का कोई साधन नहीं है अभी रोटी रोटी हजम हो सकती है, नाम
- 48:06हजम नहीं होता, ये कोई खाने की चीज़ थोड़ी है।
- 48:12तो रोटी को बचाने के लिए हमारे सारे ऑर्गन हैं, पाचन तंत्र है,
- 48:17हमारा लिवर जुइसेस पैदा करता है, बाल जूस पैदा करता है, पैंक्रीआस
- 48:24है। और भी इतना सब सिस्टम में हमारा
- 48:31गैस्ट्रिक जूस होता है, सारी इंटेस्टाइन हैं, समाल है, लार्ज
- 48:37इंटेस्टाइन हैं। ये सारी मशीनरी खाने को पचाने के
- 48:43लिए है इसलिए खाना तो पच ही जाएगा।
- 48:47लेकिन खाना भी अगर तुम ओवरफ्लो खाते ही रहोगे, खाते ही रहोगे तो
- 48:52फिर वो क्या करेगी? प्रकृति उसको बाहर फेंक देगी।
- 48:55दट। इस वोमिटिंग तो ये जो तुम्हारे
- 48:58अजबबा जब शुरू होते है ना इस भ्रम में मत रहना ये गुरु लोग अपनी
- 49:04नाकामियों को छपाने के लिए। तुम्हें नए नए नाम दे देते हैं
- 49:08क्योंकि इन्होंने टग्गी मारनी होती है, सीधा बोलता हूँ देखो भाई
- 49:16ये कुछ ना कुछ ऐसा गढ़ लेंगे जिससे तुम टिके रहो।
- 49:21इनके ढेरों में इनके आश्रमों में। अजपा जाप नाम की कोई चीज़ होती
- 49:27नहीं। वो वोमिटिंग होता।
- 49:30है। जैसे तुमने पहाड़ों से बोला टकरा
- 49:35के वापस आएगा जितना बोलोगे वो सब बाहर आएगा।
- 49:39जरूरी प्रक्रिया है ये जो तुमने भर लिया अपने अचेतन मन में वह
- 49:45बहुत। आएगा, हर हालत में आएगा।
- 49:49इसे ही कहते हैं। प्रोसेसर ऑफ एम्पटिनेस तुमने अपने
- 49:54अचेतन को खाली करना है। खाली कैसे होगा ठहरने से तुम ठहर
- 50:00जाओ, आराम से बैठ जाओ कुछ नहीं करना।
- 50:03करने ही से तो भरा है ये तुमने कोई काम किया, कोई वासनाओं को
- 50:10पूरा किया, कोई राधे राधे राम राम किया करने से ही भरा है ये अब नय
- 50:16करने से विपरीत दिशा में नय करने से ये खाली होगा और हमने खाली
- 50:21करना है। हमारा लक्ष्य है।
- 50:28ये चीजें तुम्हें भटका रही हैं और तुम्हें भटकन किस चीज़ के तुम
- 50:33कहते हो? मन बोलता है, यही तो बोलता है मन
- 50:37जो तुमने भर लिया, वही तो मन बोलता है, पहाड़ थोड़ी बोलते हैं।
- 50:44तुमने बोला पहाड़ों से टकराया वो छः सात बार फिर रिपीट होके
- 50:48तुम्हें ही सुनाई पड़ता है कौन बोल रहा है तुमने ही बोला टकरा के
- 50:55रेपुटेशन होता है तुम्हारे पर ही बुछार होती है उसकी तुम पर ही
- 50:59गिरता है वो। यह एक्शन रिएक्शन का सिद्धांत भी
- 51:05है। तो वो जो जिसे तुम कहते हो अजपा
- 51:14जाप वो अजपा जापनी है परमात्मा की देन अजपा जापनी है वो तो तुम्हारी
- 51:18देन है। अनाथ, अनाथ परमात्मा की देन है
- 51:21उसमें तुम कुछ नहीं करते। वो सहसा जब शुरू होगा तो अपने
- 51:26भीतर से शुरू। होगा।
- 51:29उसकी बात तो हम बहुत कर चूके और जरूरत पड़ेगी तो और भी करेंगे,
- 51:36तुम बैठ जाओगे। कुछ नहीं करोगे तो उसे नहीं करने
- 51:41में भीतर जो भरा तुमने ही भरा वह बाहर आएगा।
- 51:50कैथोसिस कह लो वोमिटिंग कह दो कैथोसिस हिस, जस्ट लाइक ए
- 51:54वोमिटिंग। जो तुमने जमा किया है उसको भी कह
- 52:01सकते हो आप उल्टी। भी कह सकते हो तो।
- 52:05सब उल्टी करनी पड़ेगी वो कूड़ा? है।
- 52:09उसको निकल जाने देना, भीतर रख के क्या करोगे?
- 52:11उसका यही तो आपको तंग करता है, जब आपको उल्टी आने का होती है ना?
- 52:18तो आप कहते है ना जीव मत ला रहा है, ऐसा ऐसा लगता है जैसे
- 52:23मोमेंटिंग होगी बस ये तुमने जो इकट्ठा किया ना, यही तुम्हें
- 52:29घबराहट देता है। यही तुम्हें तंग करता है।
- 52:34ये उलटी जैसी प्रक्रिया है। जो तुमने भर ली है ऊंट पटांग जो
- 52:39खा लिया है पचा है नहीं नाम कभी पछता नहीं याद रखना भोजन पच जाता
- 52:45है फिर सुन लो भोजन पच जाता है क्योंकि उसको पचाने के सारे यंत्र
- 52:54लगे हैं। पैंक्रीआस है, लिवर है, पीता है,
- 53:00स्टमक है और सारे इन्टेंस्टाइन वगैरह है।
- 53:09सारे यंत्र है, लेकिन नाम को बचाने के लिए कौन सा यंत्र है,
- 53:13मुझे बताओ? कोई यंत्र नहीं है, वह उल्टी
- 53:17होगी। वह मन होगी।
- 53:20तो इस केथर से इसको मैं उल्टी कहता हूँ, वह मन कहता हूँ तुम
- 53:26अजपा जब कह सकते हो दिल के बहलाने को गाल, ये ख्याल अच्छा है।
- 53:32हमने देखी है जन्नत की हकीकत, लेकिन अब तुमने प्रश्न कर दिया
- 53:41देखो कल को मेरे पास बहुत सेगमेंट आए थे और कमेंट इतने सड़े, सड़े
- 53:50होंगे? इसका हिसाब कोई क्योंकि देखिए
- 53:53उल्टी में कभी खुशबू आई उल्टी में बदबू ही करती है तो मैं सब में
- 54:02जाता हूँ कीजिए उल्टी करेंगे करने दो और वोमिटिंग में बदबू ही आएगी
- 54:09दुर्गांध ही आएगी। तो आएगी तो ऐसा कुछ होगा क्योंकि
- 54:17इन्होंने इतना प्रयास किया है इनके अहंकार को ठेस लगती है।
- 54:20अरे 35 वर्ष ये तो बेकार कर दिए इस आदमी ने।
- 54:24हाँ भाई बेकार कर दिया है, इसलिए बेकार कर दिए है कि तुम सुपाच्य
- 54:31भोजन कर सको। तुम ऐसा कुछ गृष्ठ भोजन न करो जो
- 54:36तुम्हारी प्रकृति के विपरीत पड़ता है।
- 54:41नाम पचने का कोई साधन भीतर नहीं है।
- 54:44भोजन पचने का है इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ नाम जाप मत करो।
- 54:49कोई कितना ही बकवास करता है उनको खुद पता नहीं।
- 54:53है। खैर आगे।
- 54:54चले आप बैठ जाओ ये सब निकलेगा पहाड़ इसको निकलने दो अब जैसे
- 55:00उल्टी होती है तुम ना तो उसका पीछा करते हो तुम बस वो कर देते
- 55:05हो कैथर सेस अब ये जो विचार निकलेंगे।
- 55:10ना तो इनको दबाना है दबाओगे तो भी ये दबेंगे नहीं याद रखो, उल्टी
- 55:15दबाने से कभी दबती है नहीं दबती वो फिर आएगी आधे घंटे के बाद फिर
- 55:21आ जाएगी और ना ही। उसके पीछे लगने की चेष्टा करो।
- 55:34उलटी में ऐसा क्या होता है कि तुम पीछे लगो।
- 55:36दुर्गन्ध होती है उसमें उसको फिर से उठाओ के पिओगे क्या कहा तुमने?
- 55:44मजेदार काम कर रहे। हो?
- 55:48लोगों ने तुम्हें समझाया क्या है? ये ज्ञानी थे या अब दर्जे के
- 55:54मूर्ख? थे।
- 55:57बस एक बात साफ है कि इन्होंने जाना नहीं था मैं।
- 56:03इनके लिए और। कुछ नहीं बोल सकता।
- 56:06अज्ञानी थे जाना नहीं था यह क्षमा करने योग्य है।
- 56:13अब तुम सही रास्ते पे आ जाओ और अगर तुमने उससे कुछ पा लिया है तो
- 56:19वहाँ डटे रहो मैं तुम्हारी आजादी को।
- 56:26छीनने वाला कौन होता? है सिर्फ़ मेरे भीतर तुम्हारे
- 56:31प्रति करुणा भाव है, मैं तुमसे कुछ मांगता नहीं, मेरा कुछ
- 56:38प्रयोजन नहीं। मैं बाहर नहीं निकलता कि तुम पाम
- 56:42सोओगे। मैं कोई फेरी नहीं लगाता कि तुम
- 56:45दर्शन करोगे, मेरे मुझे कुछ नहीं चाहिए।
- 56:49मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो, मैं जैसा हूँ बस प्रसन्न हूँ बड़ा और
- 56:59मुझे इससे अतिरिक्त और कुछ चाहिए भी नहीं।
- 57:03मुझे तुमसे कुछ भी ना चाहिए मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो।
- 57:21मुझे मेरे हाल में छोड़ दो, मेरा दिल अगर कोई दिल नहीं।
- 57:39उसे मेरे सामने तोड़ दो, उसे मेरे सामने तोड़ दो, मुझे तुमसे कुछ भी
- 57:58न। जाही, मैं भरा पूरा आनंद का समझ
- 58:04रहा हूँ, मुझे कुछ नहीं चाहिए, आई वांट नथ्थिंग नथ्थिंग किसी से भी
- 58:14कुछ नहीं चाहिए। क्योंकि पर्याप्त है, मैं अपने आप
- 58:21में पर्याप्त हूँ, सब तमन्नाएँ सब अंकाक्षे सभी वासनाएँ सभी दौड़,
- 58:32धूप सब। मटके मज़े में हूँ मौज में हूँ।
- 58:38पर मैं शांति में हूँ, आनंद में हूँ 4:00 बजे से पहले तो मैं गुगु
- 58:45बना रहता हूँ मुझे बहुत लोग कहते हैं बाबा ये तो सुबह 4:00 बजे उठ
- 58:52जाते हैं ब्रह्म मुहूर्त में। आपका ब्रह्ममूर्त शाम को होता है।
- 58:57मैंने कहा हाँ भाई, मेरा तो जब भ्रम जागता है, भीतर से वही
- 59:03ब्रह्ममूर्त होता है, मैं तो उससे पहले आनंद में मग्न होता हूँ।
- 59:10आपकी भाषा में मैं क्या मैं गुग्गु होता हूँ?
- 59:13उससे पहले कुल्लू। उल्लू का तो 4:00 बजे से पहले आप
- 59:19मेरे पास मत आओ, लोग सुबह सुबह फ़ोन कर देते हैं बाबा ऐसे ही था
- 59:24ना वो मैं कर रहा था ये कुंडलनी और जग गई देख ना ज़रा आपके साथ ये
- 59:30मिलते हैं भाव के नहीं मिलते अरे भाई तुम कौन हो?
- 59:34कहाँ से आये हो ज़रा देख तो लो आगे कौन आदमी बैठा है तुम झखाई
- 59:42बुखाई वाले आदमी सभी को समझते हो हम तो पैग पे न वाले आदमी हैं
- 59:47मस्ती का खजाना, हम तो पीते ही रहते हैं 3:04 बजे से पहले हमें।
- 59:54होश नहीं आता और तुम्हें भी चाहता हूँ कि तुम ऐसे बन जाओ।
- 1:00:04मैं भी तुम्हारी तरह तड़पता था। इन वक्तों के लिए इस इस पोज़ीशन
- 1:00:11के लिए आज। जब मैंने यह स्थिति ग्रहण कर ली
- 1:00:16है, अब मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए, मैं तुम्हें कुछ दे सकता
- 1:00:20हूँ। अगर तुम्हें चाहिए तो नहीं चाहिए
- 1:00:27अपने घर मस्त रहो। अपने हार पर मस्त रहो, मैं कोई
- 1:00:37क्रिकेट नहीं हूँ, मैं किसी की गर्दन पकड़ कर नहीं बैठा हूँ
- 1:00:43तुम्हारे ऊपर कुछ सोपता नहीं हूँ नहीं नहीं मेरे लिए तुम परम
- 1:00:48स्वतंत्र रहो मेरे लिए तुम। शुद्ध बुद्ध आनंद आत्मा तुम मस्त
- 1:00:58हो, तुम जो चाहो वही करो, मेरी बात अच्छी लगती है, सुन लो नहीं
- 1:01:05अच्छी लगती जिसकी अच्छी जिसकी जिसकी।
- 1:01:14क्षमा कर, हाँ, सुन रहा हूँ मैं। जिसकी शिक्षा में आपको दम लगता है
- 1:01:25उसके पास मान लो ये थोड़ा प्रश्न है, लेकिन गया है।
- 1:01:29यह इसके बाद मैं इसके बाद मैं बाद में करूँगा।
- 1:01:35अगर मेरी बात अच्छी लगती है तो मान।
- 1:01:37लो। अगर इस किसी और की बात अच्छी लगती
- 1:01:41है तो उसे मान लो मैं तो ज़रा भी नहीं कहता वहाँ ना जाओ वहाँ ना
- 1:01:45जाओ। मैं सिर्फ उनसे कहता हूँ वहाँ न
- 1:01:49जाओ, जो मुझे सुनते हैं, जो मुझे नहीं सुनते।
- 1:01:53मौज से न सुनें देखिए, दुखी होने के लिए भी तो तुम स्वतंत्र होना
- 1:02:02बेड़िया पहनने के लिए भी तो तुम स्वतंत्र होना।
- 1:02:06और आजाद होने के लिए भी तुम स्वतंत्र हो।
- 1:02:09अगर तुम चाहते हो कि मैं जेल में जाना चाहता हूँ, मैं तो पाप
- 1:02:12करूँगा तो कौन रोक सकता है तुम्हें तुम पाप करो, चोरी करो,
- 1:02:21डाका मारो, कतल करो, कुछ करो। यह तुम्हारी स्वतंत्रता है और इस
- 1:02:27स्वतंत्रता के ऊपर कोई तानाशाही आपत्ति कर सकता है कम से कम कोई
- 1:02:35संत तो नहीं करेगा मैं सिर्फ तुम्हें बुलाता हूँ पुकारना हूँ।
- 1:02:43जो सुनने के इच्छुक हैं सुन लें जिनको सुनने में कोई रस।
- 1:02:48आया? अच्छा है, बैठ जाओ जीसको सुनने
- 1:02:52में कोई रस नहीं आया उसको जहाँ रस आता है वहाँ चला जाए, कोई भी तो
- 1:02:59आपके ऊपर बंधन न लगा सकता हूँ। मैं कभी लगाता हूँ, मेरी कोई
- 1:03:05ट्रेंड कमिटमेंट्स नहीं है तो जब आप बैठोगे विचार निकलते चले
- 1:03:15जाएंगे, निकलते चले जाएंगे, जो कूड़ा करकट भर लिया।
- 1:03:18जब उल्टी पूरी हो जाती है तो आपको शांति बढ़ जाती।
- 1:03:23है। आपने ये गटर मटर खा लिया है चाउ
- 1:03:28में चुंगे हाँ, पिज़्ज़ा पिज़्ज़ा पता नहीं क्या कुछ चल पड़ा है
- 1:03:36हमारे जमाने में, तो नूडल हाँ ये कुछ डर लिया है तो नहीं निकलेगा
- 1:03:43सब बाहर। तुम आराम से बैठे रहो।
- 1:03:56तुम उस पानी की तरह जैसे रात को सो गए थे, वैसे तुम आराम से बैठे
- 1:04:04रहो देन मैं भी उस पानी की एग्ज़ैम्पल को याद रखना तुम।
- 1:04:09गंदले पानी को कंच के ग्लास में भर के एक तरफ़ रख दो।
- 1:04:16रात भर पड़ा रहने दो, सुबह पाओगे माटी नीचे बैठ गई शुद्ध जलपरा के
- 1:04:23ऐसे ही दिन में ध्यान के वक्त ऐसे ही बैठो।
- 1:04:28तुम छेड़ा छेड़ी ना करो, उस पानी के साथ नहीं तो फिर गंधा हो
- 1:04:32जाएगा, फिर नीचे बैठ जाएगा, ऊपर शुद्ध चला जाएगा, तुम कहते हो,
- 1:04:42तुम्हारा मन चलता है चलेगा? साइकिल उतना चलेगा, मैं उदाहरण
- 1:04:47दिया करता हूँ तुमने साइकिल को चलाना बंद कर।
- 1:04:51दिया। जब तुम आराम से बैठ गए ना, तो
- 1:04:56समझो तुमने अपने मन को शक्ति देनी बंद कर दी।
- 1:05:02लेकिन जब तुम साइकिल चलाना छोड़ देते हो, पैडल मारना छोड़ देते हो
- 1:05:08तो भी साइकिल थोड़ी दूर तक चलता है।
- 1:05:13वो काहे चलता है क्योंकि तुमने उसमें इन्वेस्टमेंट झोंक रखी है,
- 1:05:19थोड़ा सा बल तुमने झोंक रखा है। और जितना बल झोंक रखा है उतनी दूर
- 1:05:24तक तो भी वो चलेगा, लेकिन घबराना नहीं है।
- 1:05:32धीरे धीरे पक्का है तुम देख लो साइकल के साथ प्रयोग कर लो, धीरे
- 1:05:37धीरे एक वक्त ऐसा आएगा, रोल ढो रोके।
- 1:05:41वो घेरा होता होता वो घर जाएगा, ऐसे ही तुम्हारा मन गिर जाएगा तो
- 1:05:47मैं बराबर एग्ज़ैम्पल दे रहा हूँ, हर चीज़ का ऐसे ही तुम्हारा मन
- 1:05:51गिर जाएगा और जो मन आपको कल तक तंग करता था वो जब गिर गया तो फिर
- 1:05:57तंग कैसे? करेगा?
- 1:06:00यही दुखड़ा है न तुम्हें? तुम कहती हो कि अगर मन बोलता है
- 1:06:06तो नरक है, मन नहीं है यानी चुप है तो स्वर्ग है तो फिर तुम्हें
- 1:06:15स्वर्ग जाएगा। छोटा सा सूत्र और तुम कहाँ उलझे
- 1:06:23हुए हो व्हेर अरे यू गोइंग ये हेवन का सपना दिखाने वाले तुम्हें
- 1:06:31हेलमे देख लेते हैं चलो करो। तुम्हारा मन पहले ही चलता है, तुम
- 1:06:42साइकिल को पहले ही दौड़ाए जा रहे हो।
- 1:06:45ऊपर से कहते हैं पैडल थोड़ा सा तेज भाई, जीतने तेज पैडल मारोगे,
- 1:06:50यहाँ कुछ जाना है क्या? यहाँ कोई मंजिल नहीं है।
- 1:06:58ध्यान में रखना अष्टावक्र को उपनिषदों को पागल कुत्ते ने नहीं
- 1:07:04काटा है, जो कहते हैं कुछ नहीं करना, तुम ही हो परमात्मा जो कबीर
- 1:07:12कहते हैं तुम्हारे भीतर ही है। तुम ही हो कबीरा मन निर्मल भयो,
- 1:07:26मल दौड़ कबीरा मन निर्मल भयो, जू गंगा को नीर अगर तुम।
- 1:07:38प्रयास विहीन हो जाते हो उसे निर्मल कहते हैं।
- 1:07:44फिर क्या होगा जब तुम प्रयास को छोड़ दोगे फिर क्या होगा?
- 1:07:49फिर नीचे माटी बैठते जाएंगे, उसे ही शांति कहते हैं बुद्ध जैसे
- 1:07:56लोगों की। माटी नीचे बैठ गई है सुधे जल ऊपर
- 1:08:00आ गया, पाछे पाछे हरी फिरे, कहत कबीर कबीर आज तक।
- 1:08:09तुम उसे बजते थे, फिर वह तुम्हें बजता है।
- 1:08:14अगर बाबा नानक भी कहते हैं ना सब नाचियां का इकदाता सो मैं भी शरण
- 1:08:20ना जाई, वह तुम्हें याद करता है, ये बात को कहने का ढंग है, कबीर
- 1:08:27का अलग है, बाबा नानक का अलग है। कबीर कहते हैं।
- 1:08:34कि निर्मल मन जब हो जाएगा यानी पुरुषार्थ विहीन हो जाएगा।
- 1:08:39देखिये ये परमात्मा तक पहुंचने का रास्ता है।
- 1:08:42जानकर बहुत से आचार्य इसके ऊपर आपत्ति उठाएंगे।
- 1:08:47यद्यपि खुद वो गीता का विमरण करते हैं, खुद वो उपनिषद की व्याख्या
- 1:08:52करते हैं। लेकिन मैं कहता हूँ परमात्मा का
- 1:08:54रास्ता है, संसार से बिल्कुल उलट है, संसार मिलेगा।
- 1:08:59प्रयास से धन तो बिना प्रयास के भाई नहीं कमाया जाता और गद्दियाँ
- 1:09:05भी नहीं मिलती बिना प्रयास के सम्मान भी नहीं मिलता, नॉलेज भी
- 1:09:10नहीं इकट्ठी होती। ये सूचनाएं भी प्रयास से इकट्ठी
- 1:09:13होंगी। ये सब जो बाहर का संसार है ये
- 1:09:17प्रयास के बिना इकट्ठा नहीं होता, लेकिन वो जो अपने भीतर का अंतर से
- 1:09:23है, जिसे मैं आनंद कहता हूँ वो प्रयास से मिलता है।
- 1:09:30और कबीर यहाँ अपप्रयाश की बात करते हैं, कबीरा मन निर्मल।
- 1:09:35भयो। जू गंगा को नीर जब तुम प्रयासहीन
- 1:09:41अवस्था में हो जाते हो तो तुम निर्मल हो जाते।
- 1:09:43हो? तुमने पैडल मारने छोड़ दिया तुम
- 1:09:48संवासनाओं के। से मुक्त हुए।
- 1:09:52कोई वासना तुम्हारे पैडल को नहीं मारती, तुम्हें जीवन के लिए
- 1:09:57प्रेरित नहीं करती। कोई वासना ये बनो, वो बनो, वो बनो
- 1:10:01नहीं, कुछ नहीं करती, तुम आराम से बैठ जाते हो।
- 1:10:065656 हरी फिरें उसका फल क्या निकलता है?
- 1:10:11हरि तुम्हारे पीछे पीछे कहते हैं, कह त कबीर कबीर हरि तुम्हें भजते
- 1:10:17हैं यही बाबा नानक कहते हैं, सबना जिया का एक दाता सो में विसर न
- 1:10:24जाई। वह मुझे याद रखे, वह मुझे बजता ही
- 1:10:28रहेगा। ये दोनों एक ही बात है।
- 1:10:31कहने का ढंग अलग है, तुम तंग हो, मन की दौड़ से कौन तंग नहीं?
- 1:10:42लेकिन बात तो ये है। के सच्चा मार्गदर्शक मिले तो मन
- 1:10:48ठहरे अब मिल जाते हैं जूठे पखंडी लालची लबादे ओढ़े हुए क्या करे
- 1:11:06कोई। हम माथा पिट लेते हैं, ये लोग
- 1:11:12दर्शन देते हैं, रात को डेढ़ डेढ़ बजे क्यों जगाते हो भाई?
- 1:11:17मेरे पास रोज़ ही लोग आते हैं। बाबा नींद के लिए कोई दवा बताता
- 1:11:24हूँ? फिकरों के मारे लोग पहले ही।
- 1:11:28नींद ठीक से नहीं आती, आधा अमेरिका गोली खाके सोता है और आधे
- 1:11:34को गोली के साथ भी नींद नहीं आती क्यों तुम मारने पे तुले हो
- 1:11:40मनुष्यता को मानवता को क्यों उसका चैन छीनने पे तुले हो अगर ये?
- 1:11:47अज्ञानी हैं बेचारे तो तुम तो तरस खाओ कुछ लोभी व्यक्ति कभी तरस
- 1:11:58नहीं खाता। कामिंग, लोभी, क्रोधी, अंकारी यह
- 1:12:04तरस नहीं खाते। लोग।
- 1:12:07इनका अपना निहित स्वास्थ्य होता है।
- 1:12:10ये कभी बाज नहीं आएँगे। तुम्हें ही बाज आना पड़ेगा।
- 1:12:21बाज आए इस महब्बत से उठा लो पान दान अपना तुम्हें ही कहना पड़ेगा
- 1:12:29ये है सारी प्रोसेसर। कुछ।
- 1:12:35राजनीतिक बात चल रही थी तो मैं बता दूँ कि राजनीति में वही
- 1:12:43व्यक्ति जाता है जो जल्दी से धन कमाना चाहता है, पद भी कमाना
- 1:12:48चाहता। है।
- 1:12:49और कमा भी लेता है। कोई कमा लेता है कोई छोटी पदवी
- 1:12:54कमा लेता है, लेकिन छोटी पदवी कमाई बड़ी पदवी कमाई थोड़ा धन
- 1:13:00कमाई ज्यादा धन कमाई छोटी कार ले ले बड़ी कार ले ले।
- 1:13:09संतुष्टि नहीं मिलती पेट भर जाता है, तृप्ति नहीं मिलती और बात है।
- 1:13:23मसला है तृप्ति का। तुम जो कहते हो के बाबा।
- 1:13:30ये मन ठहरता। नहीं।
- 1:13:34मन ठहरेगा, तृप्ति के। बाद।
- 1:13:38जीस क्षण तृप्ति हुई उसी क्षण मन पूर्ण रूप से ठहर जाएगा और फिर
- 1:13:43चलेगा नहीं ये निशान नहीं बताता हूँ।
- 1:13:48संत उसे कहते हैं जिसका मन एक बार ठहर गया और पक्का ठहर गया, पॉइंट
- 1:13:54ऑफ नो रीडर, वह फिर उसी दशा में वापस नहीं आएगा।
- 1:14:01एक बार ठहरा की पक्का ही ठहर गया। उसे संत कहते हैं।
- 1:14:08और असंत उसे कहते हैं एक बार मन ठहर जाता है थोड़ी देर ठहर के फिर
- 1:14:12मन चलने लग जाता है तो रात को तुम ठहर ही जाते हो घोर नेतरा में
- 1:14:17सुबह उठ के फिर वही कूड़े कबाड़े चलो दफ्तर चलो भाई, फिर कंप्यूटर
- 1:14:24के आगे मगज का भाई करो। फिर बॉस की झड़कें खाओ और बॉस को
- 1:14:29ऊपर से झड़क पड़ती है, वह भी तंग है।
- 1:14:32आप भी तंग हो। दुकानदार भी तंग है, ग्राहक भी
- 1:14:36तंग है, सारी दुनिया तंग है, भाग रही है, भागने के कारण तंग है, इस
- 1:14:42भागदौड़ को छोड़ो। आराम से बैठ जाओ, आराम से बैठ
- 1:14:48जाओ, ये कूड़ा कचरा निकलेगा, इसको निकलने दो उस क्षण तुम साक्षी
- 1:14:54बैठो, बने रहो साक्षी का मतलब बस कुछ नहीं करना।
- 1:15:03देखना भी नहीं है क्योंकि देखने का स्वभाव तुम दृष्टा हो कुछ लोग
- 1:15:12ये काम कर लेते हैं कि चलो दृष्टा ही बन जाओ, साक्षी ही बन जाओ नहीं
- 1:15:18भाई नहीं नहीं। फिर तुमने साक्षित्व को भी काम
- 1:15:22बना? लिया।
- 1:15:24साक्षित्व भी पैदा नहीं करना है। साक्षी तो तुम हो वो तुम्हारा
- 1:15:29स्वभाव है, और दृष्टा तुम्हारा स्वभाव है।
- 1:15:33यू आर ऑब्सर्वर वो तुम्हें दिखेगा।
- 1:15:39साक्षी भी नहीं बनना है वह भी हल्का प्रयास है और जब तक देखें
- 1:15:46काँटा अगर थोड़ा सा भी चुभ जाए रडकता तो वो भी है सो ज्यादा चुभ
- 1:15:53जाए वो भी लड़केगी थोड़ी सी चुभ जाए वो भी लड़केगी।
- 1:15:59तो साक्षी भी बनना नहीं है, दृष्टा भी बनना नहीं है।
- 1:16:03बड़े विस्तार से बड़ी गहनता से बड़ी सूक्ष्मता से मैंने तुम्हारी
- 1:16:08बात का जवाब दिया है। अगर तुम संसार में जाओगे सब कुछ
- 1:16:14कमा लोगे। लेकिन फिर भी संतोष नहीं आएगा।
- 1:16:17वहाँ तो ठहराव है नहीं, इसलिए संसार में जाओ अगर तुम्हारी इच्छा
- 1:16:23है, लेकिन जब वापस आओगे तो मेरे अनुभव को सत्य पाओगे वहाँ से नहीं
- 1:16:30मिलता। जब तुम्हें आनंद मिलेगा अब आखिरी
- 1:16:36शब्द। है।
- 1:16:38मैंने कहा था जब सुख मिलता है तो उत्तेजना घनी होती।
- 1:16:44है। और जब आनंद मिलता है तो उत्तेजना
- 1:16:50हीन की अवस्था आ जाती। है।
- 1:16:53स्टिमुलेशन उत्तेजना समाप्त हो जाती।
- 1:16:59है। ये निशानी है सुख और आनंद की।
- 1:17:02मुझे लोग बहुत पूछ लेते हैं बाबा सुख और आनंद हमें तो यकसाने लगते
- 1:17:06हैं, हम तो महत्त्व सुख को आनंद समझते हैं नहीं।
- 1:17:12महत सुख महत स्टिमुलेशन है और आनंद स्टिमुलेशन नहीं है।
- 1:17:20नॉन स्टिमुलेशन है फर्क बड़ा साफ कर दिया मैंने, अब तुम धीरे धीरे
- 1:17:27समझ जाओगे इस बात को। नॉन स्टिमुलेशन पोज़ीशन के भीतर
- 1:17:35जब तुम आ जाओगे और तुम्हें रस लगेगा वो रस रस जब तुम चखोगे आज
- 1:17:43तक तुम्हें चखा नहीं, मैं पक्का कह सकता हूँ क्योंकि जिसने कभी भी
- 1:17:48एक बूंद भी चख ली। वह फिर सुकीत बना नहीं करेगा, रस
- 1:17:55उसके सारे सुकी तमन्नाओं को बसम कर।
- 1:17:58देगा। वह सब आग लगा देगा सुख के साधन।
- 1:18:02को बहुत है रस। और उसे मैं कहता हूँ, आनंद।
- 1:18:10उसे संत पुरुष आनंद का नाम देते हैं।
- 1:18:17श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हिनाथ नारायण वसुदेव श्री कृष्ण
- 1:18:35गोविंद हरे मुरारी हिनाथ नारायण। वासुदेव मात स्वामी सखा हमारे
- 1:18:57पितुमात सोनी सखा। हमारे हिनाथ नारायण वासुदेव, श्री
- 1:19:16कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हरे मुरारी श्रीनाथ नारा जन
- 1:19:36वासुदेव श्रीकृष्ण गोविंद। हरहे मुरारी हे नाथ नारा यन
- 1:19:50वासुदेव धन्यवाद।