Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Dec 24 - सूक्ष्म शरीर की इन्द्रियां! नकारात्मक रूहों से बचाव के अचूक उपाय! शून्यता का मार्ग!
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- 0:09कल के प्रसंग से आगे जब तुम उस फूल शरीर में होते हो, हमारे मन
- 0:23में इच्छा उठती है। और उस इच्छा को तुम बल दे देते
- 0:36हो, बल देके उसे कार्य रूप में परिवर्तित कर देते हो।
- 0:48जैसे तुम्हारे मन में इच्छा हुई की कुछ खाये तुम गए किसी होटल में
- 0:56खा लिया, कुछ ऐसा ही सूक्ष्म शरीर के भीतर।
- 1:05इच्छा उठती है। ध्यान से समझें ये शब्द बड़ी गहरी
- 1:12समझ से आपको सुनने पड़ेंगे सूर्य शरीर में रहते हुए आपके भीतर
- 1:21इच्छा उठी? आपने वो क्रियान्वित कर दिया
- 1:31लेकिन सूक्ष्म शरीर में जब आपने देह छोड़ दी इच्छा उठेगी।
- 1:40इच्छा उठेगी तो आप उसे मूर्त रोक नहीं दे, सकोगे क्यों?
- 1:46क्योंकि हमारे पास सोल इंस्ट्रूमेंट्स नहीं हैं।
- 1:50ये सोल इंस्ट्रूमेंट्स सोल शरीर के पास आंखें हैं।
- 1:58सूक्ष्म के पास भी आंखें हैं। पांच ज्ञानेन्द्रिय है हमारे और
- 2:07पांच कर्मेन्द्रीय है हमारे अब इसको अच्छे तरह से समझ लेना पांच
- 2:18ज्ञानेन्द्रिय है। पांच कर्मेन्द्री हैं।
- 2:25सूक्ष्म के पास पांच कर्मेन्द्रीय नहीं है।
- 2:29एक कर्मेन्द्री हैं क्या रह गया ज्ञान निंद्रिय रह गई ज्ञान
- 2:38निन्द्रिय रह गई। और चारों मान, चित्त, अहंकार और
- 2:47बुद्धि इनका संग्रह है सूक्ष्म शरीर जिसे मैंने दे ही कहा अंतः
- 2:58करण। चर्तुष्ट है +5 ज्ञानी इसे कहते
- 3:07हैं देही या सूक्ष्म शरीर तो सूक्ष्म शरीर में क्या कुछ होता
- 3:14है। हमारे विचार, हमारी भावनाओं,
- 3:27वासनाएं, अतृप्त वासनाएं, अनुभव, संस्कार।
- 3:39पिछले जन्म की समृद्धियां, प्रारब्ध कर्म, अंतः कर्ण चतुष्ठ
- 3:54के साथ यह सब कुछ होता है। ज्ञानेन्द्र भी होते है, शूल शरीर
- 4:03देख सकता है। सूक्ष्म भी देख सकता है फूल शरीर
- 4:12संकल्प ले सकता है सूक्ष्म भी ले सकता है।
- 4:23पूछा है मुझे कि यह जो आप चेतना की उचाई नीचाई लेवल ऑफ कॉन्शसनेस
- 4:36का यह क्या है? बस यहीं से बात शुरू करूँगा।
- 4:45मेरे काम का प्रश्न यही है, जिसके ऊपर सारा अध्यात्म टीका है।
- 5:00जैसे हम पाजिटिविटी कहते हैं। पत्थर में पाजिटिविटी नेगलिजबल
- 5:09है, है तो सही लेकिन नेगलिजबल है और परमात्मा में पाजिटिविटी यानी
- 5:16संकल्प पूर्ण है। परमात्मा तो इतना संकल्प कर ले कि
- 5:21एको हम बहुत श्याम हो जाता है, संकल्पपूर्ण है शत प्रति शत
- 5:29संकल्प है परमात्मा और जड़ में पत्थर में संकल्प है तो।
- 5:37लेकिन नेगलिजबल है नगण्य है, मात्रा कोई नहीं है।
- 5:42उसके शून्य से थोड़ा सा ऊपर संकल्प जितनी पाजिटिविटी होगी,
- 6:00तुम्हारे में उतना ही कॉन्शसनेस लेवल ज्यादा होगा।
- 6:08जितनी पॉज़िटिविटी कम होगी, उतना ही कॉन्शस्नस लेवल कम होगा और
- 6:18जितनी नेगेटिविटी होगी तुम्हारे भीतर।
- 6:23कॉन्शसनेस लेवल कम होगा और साथ में ये जो मैंने गानाए आपके विचार
- 6:31समृतियां प्रारूप, आपके संस्कार, आपकी अपूर्ण वासनाएं जो रह गईं।
- 6:44अगर ये ध्वन सात में कहें तो वह व्यक्ति बन जाता है शैतान जिसे हम
- 6:51भूत प्रेत पिशाच चंडार ये कहते हैं शैतान यही है नेगटिविटी।
- 7:02थोड़ा यहाँ में खोल दो विस्तार से एक छोटी कहानी में सुनाया करता
- 7:08हूँ, एक सब्जी विक्रेता अपनी रेढ़ी के ऊपर सब्जी बेच रहा था एक
- 7:18नौजवान आया। 3540 के करीब उम्र होगी।
- 7:28पूछा ये टमाटर क्या भाव मटर क्या भाव, आलू के अभाव सब बताता गया
- 7:33गोभी के अभाव? बोलो क्या चाहिए या कितना चाहिए
- 7:42और कितना ठहर जाओ मैं सोच लूँ। ग्राहक आते गए, जाते गए, आते गए,
- 7:49जाते गए लेकिन वो सोचता रहा यह सोचने की स्थिति।
- 7:57निर्णय न करने की स्थिति आलू लो के प्याज लो के टमाटर लो के कौन
- 8:06सी सब्जी लो गोभी लो क्या लो निर्णय न करने की क्षमता?
- 8:19नेगेटिविटी का उदाहरण है ये, जो क्वेश्चन कहते हैं ना, अगर तुने
- 8:26फैसला न लिया तो तेरा विनाश हो जायेगा।
- 8:30शंस्य आत्मा पिनशती। तो ग्राहक आते गए, जाते गए, एक
- 8:39स्त्री आई। उसने सब्जी विक्रेता से कहा, भाई
- 8:44इतने टमाटर डाल दो, इतने मटर, इतने आलू, इतने प्याज़, थोड़ा सा
- 8:50धनिया डाल देना। बस पैसे दिए और चली गए।
- 8:55वो जाने ही वाली थी तो सब्जी विक्रेता ने पूछा, उससे अभी
- 9:01नौजवान बोलो, इतनी देर हो गई तुझे खड़े खड़े क्या चाहिए तुम्हे?
- 9:08मैंने आगे भी जाना है और कैसे ठहरू मैं सोच रहा हूँ।
- 9:15तो वह जो स्त्री आई थी आखिर में वो कहने लगी, अरे भाई तुम आगे चले
- 9:22जाओ। इसकी सोच कभी पूर्ण नहीं होगी, ये
- 9:28कोई फैसला नहीं ले सकेगा। मेरे पिताजी ने आज से 8 साल पहले
- 9:35इसके पास मेरी शादी का प्रस्ताव रखा था और इसने कहा था कि ठहरों
- 9:42मैं सोच लेता हूँ और मेरे तीन बच्चे हुए हो गए।
- 9:49ये आज तक सोच रहा है। ये नेगेटिविटी का उदाहरण है।
- 9:58अगर तुम अपने आप को जांच सकते हो किसी को बताना मत, खुद जांच लेना
- 10:04किन कर्तव्य विमूढ़ हो जाते हो, क्या करूँ, क्या ना करूँ?
- 10:09जैसे ही अर्जुन हो गया हो तो उस मसले के आगे तुम्हारी निर्णयात्मक
- 10:21शक्ति कमजोर है। तुम सिंचाई में रहोगे।
- 10:26मसला बड़ा है। पॉज़िटिविटी कम है, तुम सोचते
- 10:31रहोगे और कृष्ण कहते है कि शंच आत्मा का विनाश होता है।
- 10:38फैसला लेने की प्रवृत्ति होनी चाहिए, ये फैसला ना लेने की
- 10:46प्रवृत्ति है। नेगेटिविटी से आती है जो
- 10:54पोस्टिविटी से भरे होते हैं, जिनकी पोस्टिविटी 70809090 से भी
- 11:01ऊपर चली जाती है। उन्हें हम देवता कहते हैं।
- 11:08कल भी मैंने बताया, जब हम देवताओं का आह्वान करते हैं तो देवता आते
- 11:14हैं उनके आने मात्र से। हमें शक्ति मिलती है पॉज़िटिव हम
- 11:26निर्णय लेने में सक्षम हो जाते हैं।
- 11:32किसका प्रभाव हुआ? उन आसमानों का प्रभाव हुआ जिनको
- 11:39हमने बुलाया आवाहन किया। उनके भीतर पॉज़िटिव थी और अगर
- 11:51दुर्भाग्य से कोई अहम मसला तुम सोच रहे हो पास से कोई नेगेटिव रो
- 11:59गुजर गए। तो तुमने बहुत बार देखा होगा
- 12:04फैसला लेते लेते, तुम रुक जाते हो, सारा वो खराब कर देते हो।
- 12:09पास से गुजरती हुई तो मैं फिर उसी अवस्था में तिंग कर्तव्य वमूल मैं
- 12:14क्या करूँ? फैसला नहीं ले पाते ये दोनों का
- 12:20फर्क है। भूत प्रेत पिशाच जंडाल इनमें
- 12:30नेगेटिविटी होती है। इतना तो इतना ये जन्म कहाँ लूँ
- 12:36इसका फैसला भी नहीं कर पाते। कुछ प्रकृति इन्हें गर्व उपलब्ध
- 12:42नहीं करवाती है और कुछ ये फैसला ले नहीं पाते।
- 12:49लेकिन बुद्ध जैसे लोग जो पाजिटिविटी से भरे पड़े हैं, वह
- 12:54फैसला तो ले लेते हैं लेकिन सर्कमस्टेंस उनके अनुकूल नहीं
- 12:59होते हैं। वो सिर्फ जन्म वहीं लेंगे जहाँ
- 13:06उन्हें लगता है कि अपन ठीक बैठ जाइए।
- 13:11ओरेसी जब उन्हें लगेगा वो जन्म ले लेंगे।
- 13:16ध्यान रखना वक्त का पैमाना। यहाँ अलग है जहाँ बुद्ध है वहाँ
- 13:22अलग है लेकिन वो कहीं और नहीं है। ये जो लोग गिनाये गए हैं, सत्यकंठ
- 13:28है, सतलोक है, पितृलोक है। भूत प्रेतों का लोक है, कहीं नहीं
- 13:37है, अन्य यहीं है, इसी डाइमेंशन में है।
- 13:44जैसे थ्री डी फोर डी टू डी हैं तो यहीं है लेकिन हम देख नहीं पाते।
- 13:59सूक्ष्म शरीर में ये सभी चीजें होती हैं जो मैं मैंने आपको बताती
- 14:05हूँ। सूक्ष्म शरीर में भी देवताओं में
- 14:12भी उपासना होती है। दुष्ट आत्माओं में भी वासना होती
- 14:18है? लेकिन उनमें इतना बल नहीं होता,
- 14:23संकल्प नहीं होता, वो ज़रा से डर के कारण भाग जाएंगे।
- 14:32लेकिन देवता नहीं भागेंगे क्योंकि उनके भीतर पॉज़िटिव भी है,
- 14:39सहनशक्ति है, ठहर सकते हैं। वो देवता, तुम्हारा कोई काम नहीं
- 14:48संवारते। लेकिन जिससे काम सिमर जाए वो चीज़
- 14:53तुम्हें दे देते हैं, वो लहर दे देते हैं क्या?
- 14:58विधेयकता पॉज़िटिविटी, सकारात्मकता, साहस, हौसला।
- 15:10और जब तुम्हारे भीतर हौसला होगा, साहस होगा, विधायिका होगी तो
- 15:17फैसला ले लिया जायेगा। फैसला अगर तुम नहीं लेते तो
- 15:24निर्णय की स्थिति में रहते हो तो समझो।
- 15:29कि नेगटिविटी कहीं ये न हो जाए, कहीं ये न हो जाए इरादे बांधता
- 15:37हूँ, सोचता हूँ तोड़ देता हूँ इरादे बांधता हूँ सोचता हूँ तोड़
- 15:45देता हूँ। कहीं ऐसा न हो जाए कहीं ऐसा न हो
- 15:52जाए। ये नेगेटिविटी के निशान है।
- 15:58अगर तुम्हारा भी मन ऐसा ही करता है तो तुम्हारी वितरण नेगेटिविटी
- 16:05है। ये जो ओसीडी के पेशेंट्स है।
- 16:09इन्हें मैं कहता हूँ कि आप क्रिया योग किया करें, उससे मुझे कुछ
- 16:15नहीं मिलेगा, तुम्हारा सारा शरीर ऊर्जावान हो जाएगा, प्राण शक्ति
- 16:24ज्यादा बढ़ेगी। ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा बढ़ेगी।
- 16:29और कल ही मैंने 1,00,000 पढ़ा था। किसी बड़ी यूनिवर्सिटी ने ये खोज
- 16:33की है कि इंटेक ऑफ ऑक्सीजन इस गुड फॉर युअर हेल्त मेंटल हेल्त बॉडी
- 16:46हेल्त। और सभी भीतर के ऑर्गन्स तो
- 16:50उन्होंने क्रिया योग की हिमायत की थी कि क्रिया योग आपको करना
- 16:54चाहिए। लम्बा साँस खींचना और छोड़ जनों
- 17:01से। बहुत कठिनाई प्रक्रिया नहीं है।
- 17:06सांस तो हम वैसे भी लेते है के 2030 मिनट का वक़्त रख लो।
- 17:13सुबह दोपहर जब आपका मौसम अनुकूल के तो घूमो, पैदल भी चलोगे, उसका
- 17:19भी फायदा है, हल्के हल्के कदमों से सांस भी लेते है।
- 17:22चले जाओ लंबे लंबे। छोड़ते चले जाओ, बस इतना सा वक्त
- 17:28तुम्हें रूपांतरित कर देगा और तुम देखोगे पॉज़िटिविटी आएगी तुम्हारे
- 17:35मित्र का अचेतन मन खाली होने लगेगा।
- 17:40तुम हल्के होने लगोगे। तुम हल्के होने लगोगे, इसका मतलब
- 17:46दे ही हल्का होने लगेगा और हमारा लक्ष्य है देही को गला देना, देही
- 17:53को शून्य कर देना। जीस दिन देही शून्य हो जायेगा तुम
- 17:59तो सदा से हो साक्षी रूप में विद्यमान हो।
- 18:06तुमने पैदा नहीं होना है तुमने पैदा नहीं होना है, इन शब्दों को
- 18:13अच्छी तरह समझ लो, तुमने अपने आप को खोजना भी नहीं है।
- 18:23क्या करना है तुमने ये जानना है कि मैं सदा से हूँ आदि में भी मैं
- 18:32था आज भी मैं हूँ। कल भी मैं रहूँगा आज सच जुगाद सच
- 18:41है भी सच नानक खुशी भी सच के अनुभव से आए हुए शब्द हैं
- 18:57पोजिटिविटी को बढ़ाते चलो। नेगेटिविटी को घटाते चलो
- 19:07कॉन्शसनेस लेवल का ऊंचा होना तुम्हें पत्थर से भगवान बना दे।
- 19:13जीस दिन 100% कॉन्शसनेस लेवल हो जाएगा।
- 19:19उस दिन तुम परमात्मा हो। कृष्ण में सिर्फ कॉन्शसनेस लेवल
- 19:26है और इस कॉन्शसनेस लेवल के 100% होने के कारण ये कहते हैं कि मैं
- 19:36वह जो पहुँच जाता है अंतिम ₹100। ऋषि वह जो उदघोष करता है अहम
- 19:44ब्रह्मस्व यह 100% कैन्सेस्नस का प्रतीक है।
- 19:57अनल हक मैं खुद खुद हूँ। मन सुबह कहता है 100% सबूत है
- 20:08कान्शस्नस का मरे मरे से कहीं ऐसा ना हो जाए, घर से बाहर ना निकलो।
- 20:18फिसल ना जाऊ, कोई छुरा न कँपते डरते रहते हो कँपते रहते हो,
- 20:29मृत्यु से हर वक्त डरते हो यद्यपि मृत्यु 1 दिन आएगी, डरते रहो।
- 20:37जिसके लिए सारे जन्म तुमने दुखी किए हैं, उसके डर में तुमने अपना
- 20:45जीवन नर्क बना लिया। मृत्यु आएगी, मृत्यु आएगी।
- 20:50सारा जीवन लोग कपते कपते गुजार देते हैं।
- 20:54वो जीते कहाँ हैं, जीते नहीं। और बस मरते हैं, क्योंकि मृत्यु
- 21:00का भय मरना ही तो है, साहस को जगाओ, मरना 1 दिन है तुम्हारे
- 21:11चाहने से तुम्हे मर नहीं होते। एक तल पे तुम अमर हो शब्दों को
- 21:20पकड़ते जाना जो थोड़े से अलग जान पड़े ये भीतर की बात करता हूँ मैं
- 21:27जब मैं कहता हूँ एक तल पे तुम अमर हो तो ये मैंने तुम्हारे अंतस की
- 21:32बात कर दी। जो तुम वास्तव में हो रेली यू आर
- 21:39एक तल पर तुम सर्वव्यापक हो सब जगह तुम्हारा ही फैलाव, तुम्हारा
- 21:44ही पसारा है एक तल पर तुम सर्वशक्तिमान हो ओम्निपोटेंट।
- 21:53जो तुम हो वास्तव में तो इसलिए न तो विश्व में फैलना है, तुम्हारा
- 21:59साम्राज्य विश्वव्यापी नहीं करना है।
- 22:02तुम ऑलरेडी विश्वव्यापी हो। ऑलरेडी विश्व में तुम्हारा
- 22:07साम्राज्य है, चक्रवर्ती सम्राट हो, तुम तुमने बनना नहीं है।
- 22:12मार काट करके तानाशाही करके लोगों को मार के ये तो फिर तुम बहुत
- 22:18हरीणात्मक हो जाओगे क्योंकि ये कर्मों का फल तुम्हे भोगना पड़ेगा
- 22:25आज दबाओगे कल दबोगे आज मारोगे? कल डरो के फौजिटिविटी को बढ़ाने
- 22:44के लिए क्रिया योग बड़ा उत्तम साधन है।
- 22:47कुछ नहीं बिगड़ता स्वास्थ्य तो हम वैसे भी लेते हैं बिना स्वास्थ्य
- 22:51के तो हम जी भी नहीं आ सकते तुम अगर भोजन खाते हो खाते तो हो ना?
- 22:58अगर थोड़ा पौष्टिक खा लिया करो ये पिज़्ज़ा बर्गर ये चाउ में चुंगी
- 23:04या ना खाओ तो अच्छा ना रहेगा ये मांस मिट्टी खाते हो, ये तुम्हारा
- 23:14पेट है या कब्रिस्तान है? कब्रिस्तान में मुर्दे दफ़न होते
- 23:18है और तुम भी मुर्दे, मुर्दे, मुर्दे, बकरे सब कुछ खा जाते है।
- 23:27चीन वाले तो मुर्दा साप खा जाते है, कुत्ते खा जाते है तो मैं
- 23:32पूछता हूँ कि पेट है या कब्रिस्तान है?
- 23:35कब्रिस्तान में दफन होते हैं तुम जानबूझकर परमात्मा ने 3600 प्रकार
- 23:43के भोजन तुम्हें दिए हैं खाने के लिए, लेकिन तुम खाते हो कुत्ते
- 23:48भले सुवर। ये नेगेटिविटी को पैदा करते हैं
- 23:57और ध्यान रखना नेगेटिविटी मूड़ता को पैदा करती है और मूड़ता से
- 24:03अहंकार पैदा होता है और अहंकार से विनाश हो जाता है।
- 24:11अहंकार को जन्म देता है। अहंकारी व्यक्ति फैसला नहीं ले
- 24:17पाता है, अहंकार का जन्म जाता है और तुम्हें विनिष्ट कर देती है।
- 24:24शंशात्मा विनिष्ट हमने आज इतनी मूर्ताओं को अपना दिया है जिनके
- 24:36पास शरीर है थूल शरीर और उनका थूल शरीर भूखा है।
- 24:42हम उनको भोजन नहीं देते हैं। हम पित्रों के नाम के ऊपर पंडितों
- 24:47को भोजन करते हैं जो पहले से ही। भारे पेट है इनकी तोंद देखना आप
- 25:00भूखों को भोजन नहीं देते, हम हम पंडितों को भोजन देते है।
- 25:06ये मूर्त का प्रमाण है, बुद्धिहीता का प्रमाण है।
- 25:12मानव जाति को हम क्षुद्र कह के नकारते हैं, स्त्री को हम अपवित्र
- 25:18कह के नकारते हैं। हमारे तो महान पुरुष भी ऐसे हुए
- 25:24हैं। जो स्त्री को नकारते थे, पांव की
- 25:29जूती है, आज भी ऐसा ही है। कल मेरे पास एक प्रश्न हो गया।
- 25:43आरएसएस के चीफ मोहन भागवत ने कहा, तीन बच्चे पैदा करो।
- 25:48आपका क्या विचार है? बाबा खैर, यह अलग सा प्रसंग है,
- 25:52इसके बारे में अलग से बोलेंगे, लेकिन मैं तो सूक्ष्म में तुम्हें
- 26:01यही कहना चाहता हूँ अगर तुम्हें शादी बंधन लगता है तो मत करो।
- 26:09अगर शादी तुम्हें बनता नहीं लगता, कबीर की तरह नानक की तरह तो मज़े
- 26:15से कर सकते हो। व्यक्ति व्यक्ति से बेनेता होती
- 26:23है। कृष्ण इतनी शादियाँ करके भी
- 26:26बांधते हैं और तुम अगर एक शादी करके बंधते हो तो मत बंधो क्योंकि
- 26:36बंधन से मुक्त होने के लिए ही तो तुम यहाँ हो और शादी को भी अगर
- 26:43तुमने बंधन बना लिया। तो फिर बंधन के ऊपर और बंधन गांठ
- 26:50और गहरी गोल हो जाएगी शादी अगर बंधन ऐसी लगती है तो मत बंधन।
- 27:02अगर शादी बंधन जैसी नहीं लगती, कृष्ण की तरह लगती है, कबीर लोई
- 27:08की तरह लगती है, नान की तरह लगती है तो मज़े से तुम शादी कर सकते
- 27:16हो जो तुम्हारे ऊपर डिपेंड करता है।
- 27:19तुम्हारा प्रश्न है। जवाब मुझसे मत मागो, कई आचार्य
- 27:23जवाब देते हैं इन बातों का, लेकिन वो मूर्ख है अगर तुम्हें शादी
- 27:29बंधन लगती है, तुम मत करो उन्हें अपनी मर्जी पे छोड़ दो।
- 27:35तुम्हें उनसे पूछना चाहिए कि तुम्हें क्या लगता है कोई कृष्ण
- 27:39भी तो हो सकता है? लोग पूछते हैं अचार्य से शादी
- 27:46करनी चाहिए कि नहीं? बड़े बड़े व्याख्यान दे देते हैं,
- 27:52लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ कि तुम सोचो तुम्हारी ज़िन्दगी का सवाल
- 27:56है। बस एक बात मैं तुमसे कहता हूँ कि
- 28:00अपनी स्वतंत्रता को विचार या रखाना समाज की बनाई हुई धारणाएं
- 28:09हैं। समाज के बनाए हुए नियम हैं, कानून
- 28:13हैं, व्यवस्थाएँ हैं। यह समाज के ऊपर राजनीति ने बनाए
- 28:20हुए है। राजनीति में कानून तो बिल्कुल सही
- 28:24चलता है। अगर किसी को मारोगे तो कानून अपने
- 28:29हिसाब मांगेगा। लेकिन ऐसा नहीं है कि तुम्हारे
- 28:33गले के ऊपर आकर। कोई तानाशाह व्यर्थ से फिर तो
- 28:43तुम्हारी आजादी खत्म हो गई। संक्षिप्त रूप से समझना यह
- 28:49संसारिक प्रश्न नहीं है जो मैं बोल रहा हूँ आध्यात्मिक प्रश्न
- 28:53है। यू अरे?
- 28:56इन सर्च ऑफ़ लिबरेशन और मैं भी लिबरेशन की बात करता हूँ, जिसे
- 29:01मैं आजादी कहता हूँ, आजादी कहीं भी जाने की आजादी है, कुछ भी करने
- 29:11की आजादी। जो स्वतंत्रता की परिभाषा में आता
- 29:18है स्वछंदता की प्रभाषा में कि तुम कुछ भी करते करो, बंदरों की
- 29:23तरह उछलकूद या नहीं कल ही मुझे एक व्यक्ति पूछ रहा था कोई आईटी का?
- 29:33क्षमा करना कोई एआई का व्यक्ति उसने खुदकुशी कर लेता है, आपका
- 29:42क्या विचार है? मैंने कहा, प्रश्न बढ़ा है, लेकिन
- 29:46तुम्हें संक्षिप्त रूप से मैं बता देता हूँ।
- 29:51ये जो कानून तुमने बनाए हैं, सब कार्ड देने योग्य हैं।
- 29:57क्यों? जो कानून आपसे अनुचित मांग करे वह
- 30:08अपनाने योग्य नहीं है? और तुम्हारे पास कोई व्यवस्था
- 30:13नहीं है, ऐसी तुम कितनी ही छानबीन कर लो।
- 30:17तुम्हारे पास कोई व्यवस्था नहीं है कि तुम सर्च कर सको के सत्य
- 30:21क्या है? अब से 5 मिनट पहले कोई व्यक्ति
- 30:25मारा गया। तुम सही सही नहीं बता सकते कि
- 30:29किसने मारा और क्यों मारा? इतिहास लिखने वाला एक अंग्रेजी का
- 30:38राइटर उसने 30 साल की अपनी मेहनत बर्बाद कर दी थी।
- 30:42उसके घर के पिछवाड़े के अंदर एक कतल हो गया था।
- 30:46और 5 मिनट के बाद उसने जिससे पूछा, सबका जवाब अलग था।
- 30:51उसने आकर 30 साल का अपना लिखा हुआ इतिहास जला दिया।
- 30:57कहा कि 5 मिनट पहले कतल हुआ उसका मुझे पता नहीं और 1000 वर्ष का
- 31:05मैं इतिहास देख रहा हूँ। इतिहास को लिखने या पढ़ने की
- 31:14चेष्टा मत करना, इतिहास को बनाने की चेष्टा करना मूर्ख इतिहास को
- 31:22खंगालते हैं। समझदार प्राणी इतिहास बनाते हैं।
- 31:32अगर समझदार हो तो इतिहास खंगाल लेना।
- 31:41मूर्ख हो तो फिर इतिहास खंगालना, मस्जिदों की खुदाई करना, मंदिरों
- 31:47की खुदाई करना। कुछ न हाथ लगेगा जीवन बेकार हो
- 31:52जाएगा, वैसे भी जीवन तो बेकार कर ही देते हो और मैं तुम्हारी
- 31:59मूलभूत जरूरत बेता हूँ मूलभूत जरूरत तुम्हारी क्या है
- 32:06इंडिपेंडेंस। स्वतंत्रता स्वतंत्रता नहीं,
- 32:12ध्यान रखना स्वतंत्रता और स्वतंत्रता में जमीन आसमान का
- 32:18फर्क है। स्वतंत्रता होती है।
- 32:22तुम अपनी मन मर्जी के मुताबिक बैठ सको जा सको, आ सको।
- 32:28स्वछंद होता है, किसी को मार सको, किसी को काट सको, किसका गला दबा
- 32:33सको, किसी पर टैक्स ज्यादा लगा सको, यह स्वछंद पावर हाथ में आने
- 32:40का मतलब नहीं। तुम किसी की भी गर्दन दबा दो।
- 32:47यह स्वच्छंदता है और स्वच्छंद व्यक्ति को ताकत नहीं देनी चाहिए।
- 32:53मेरे एक एक शब्द को गौर से सुन लेना, मैंने पहले भी कहा था।
- 33:03तुम किसी को सर्वोच्च पदासीन दे रहे हो, सारी शक्ति उसे दे रहे
- 33:07हो, सारा खजाना उसे दे रहे हो, यहाँ तो 70,000 करोड़ रुपए का
- 33:12घपला करने वाला हो, जैसे प्राइम मिनिस्टर कहता है कि ये घपलेबाज
- 33:17है। 2 दिन बाद वह महाराष्ट्र का वित्त
- 33:21मंत्री बन जाता है। सारे दोष उसको मुक्त कर दिए जाते
- 33:28हैं। क्या हुआ भाई?
- 33:30दो? 3 दिन में इसने गंगा स्नान कर
- 33:32लिया। ऐसी राजनीति नहीं होनी चाहिए और
- 33:39ऐसे राजनीतिक भी नहीं होनी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके इनको भटक दो
- 33:50तो वो मुझसे पूछ रहा था कि ये इसके बारे में क्या कहोगे आप?
- 33:56मैंने कहा आप नए नए कानून रोज़ बनाते हो, एक कानून पास कर दो
- 34:03सिर्फ संसद में। क्या जो भी झूठ बोलेंगे उसको 20
- 34:12साल की सजा कैद थी। फिर प्राइम मिनिस्टर झूठ नहीं
- 34:17बोलेंगे कि मैं 2,00,00,000 रोज़गार दूंगा, प्राइम मिनिस्टर
- 34:22झूठ नहीं बोलेंगे कि मैं तुम्हें 15,00,000 का दूंगा।
- 34:27प्राइम मिनिस्टर झूठ नहीं बोलेंगे के अच्छे दिन आएँगे, महंगाई कम
- 34:32होगी और अगर तुम झूठ नहीं बोलोगे झूठ बोलने की सजा 20 साल कैद है।
- 34:42अभी तो मैं खौफ नहीं हूँ। और देखिये अगर तुम ये कानून लेके
- 34:47आते हो संसद में बशर्ते के सत्तापक्ष लेके आये इस कानून को
- 34:54विपक्ष के पास तो है ही नहीं मर्दा वो तो तो विपक्ष आपके साथ
- 34:59होगा के बिल्कुल ठीक है, विपक्ष तो पहले से तैयार है वो तो।
- 35:05दस्तकत कर ही देगा मुझे विश्वास जो झूठ बोलेंगे उसको टांग दिया
- 35:14जाएगा और यहाँ तो ऐसे प्राइम मिनिस्टर हैं जो कहते हैं अगर
- 35:18इसका फल सही न पोसतेव आए तो मुझे टाँग देना चुराहे में टाँग देना।
- 35:24लेकिन हम उसे चिराहे में टांग नहीं सकते क्योंकि फोर्स ही इतनी
- 35:28है उसके पास कैसे टांग एक चीज़ को बचाए रखना।
- 35:37मैं इतना तू बोल रहा हूँ कि तुम्हारी आजादी बच सके।
- 35:45शादी के सूक्ष्म बंधनों से बचने वालों, तानाशाह के स्टूल पाशो से
- 35:55बचो उसके स्टूल बंधन हैं, वो बिल्कुल ही तुम्हें मार देगा,
- 36:04भूखा मार देगा। क्या करूँ?
- 36:07आज नहीं जागोगे खैर मैं तो मैं तो रोटी नहीं खाता, मैं तो अन्य नहीं
- 36:11खाता मेरे पास तो मैं कुछ भी न करूँ तो मेरे पास तो भगजजन जो
- 36:19मुझे एक सेहर दो चाहिए वो शाम तक मिल जाएगा।
- 36:24मुझे अपनी कोई परवाह नहीं है। बाल बच्चे अपनी मेहनत मजदूरी करके
- 36:29कमा खा लेते हैं। मुझे फिक्र है सिर्फ तुम्हारा है
- 36:37और संत भी वही होता है जो दूसरे के लिए जीता है।
- 36:47जो अपने लिए जीता है अपने लिए तो पशु भी पेट भरता है, दूसरों के
- 36:59लिए जीना ही जीना है अगर तुम तृप्त हो गए हो।
- 37:06तो दूसरों के लिए जीना शुरू करो। अगर तुम अभी तृप्त नहीं हो, तृप्त
- 37:13हो तो फिर तुम अपनी तृप्तता पहले पूरी करो।
- 37:18अधिमान खुद को दो। तो मैंने कहा सिर्फ एक कानून पास
- 37:25कर दो। ज्यादा कानूनों को पास करने की
- 37:28जरूरत नहीं, जो झूठ बोलेंगे उसको 20 साल की सजा होगी।
- 37:38वो चाहे साधारण व्यक्ति है, गरीब है, अमीर है।
- 37:42सियासतदान है, सीएम है, पीएम है, जो झूठ बोलेंगे उसको 20 साल की
- 37:52सजा तुम आज पूछ नहीं सकते क्या हुआ मिस्टर प्राइम मिनिस्टर क्या
- 37:59हुआ आपके भाइयों का? लेकिन ये हिंदुस्तान है।
- 38:05अगर अमेरिका में ऐसा हुआ होता तो उसका कालर पकड़ के खींच लेते हैं।
- 38:15अमेरिका के कानून अगर हिंदुस्तान पे लागू हो जाए।
- 38:19तो हिंदुस्तान को अमेरिका बनते देर नहीं लगेंगी।
- 38:23वहाँ के लोग लेज़ी हैं तुम्हें पता नहीं अमेरिका के लोग लेज़ी
- 38:31हैं और काम करना भूल ही गए हैं जैसे भारत के लोग।
- 38:39बड़े मेहनती हैं। हमारे बच्चे बड़े मेहनती हैं।
- 38:44ये आपको 110 साल में सोने की चिड़िया फिर बना देंगे।
- 38:51बस एक कानून पास कर दो, झूठ न बोलें वो चाहे नियारों में ग्वाहि
- 38:58देने। अगर किसी ने झूठी गुवाहि दे दी
- 39:05झूठी निकल आई तो उसको 20 साल की सजा पता कैसे लगेगा?
- 39:17मैंने पिछले प्रवचनों में बहुत बोला है।
- 39:21नार्को टेस्ट अनिवार्य कर दो नार्को टेस्ट की व्यवस्था कर रहा
- 39:29हूँ। प्रत्येक व्यक्ति शपथ लेने से
- 39:34पहले वो चाहे सीएम की है। पीएम की है, किसी विभाग की है, वह
- 39:44गृह मंत्रालय है, वो रक्षा मंत्रालय है, वह वित्त मंत्रालय
- 39:49है, शपथ लेने से पहले। उसे गुजरना होगा।
- 39:58नार्को टेस्ट में से नार्को या इसी तरह के और टेस्ट होते हैं।
- 40:03एक दो उन टेस्टों में से गुजरना होगा जिससे पता चल जाएगा।
- 40:09कहीं ऐसा तो नहीं कि ये पांच 400 व्यक्ति कतल करके आया हो?
- 40:15और नकाब ओढ़ बैठा हो और भेड़िए ने नकाब ओढ़ लिया हो।
- 40:23शरीफ का अगर ऐसा है तो तुरंत उसका पता चल जाएगा।
- 40:31फिर दुष्ट को और शक्ति देना अपराध है।
- 40:34मेरी इस बात को गौर कर लेना। मैं किसी विशेष तल से बोल रहा हूँ
- 40:40और किसी विशेष आफत की आहट को महसूस कर रहा हूँ, तुम आज से ही
- 40:49संकल्प ले लो। मैंने कुछ गलत कहा, हम कहानियों
- 40:57में सिखाते हैं, झूठ बोलना पाप है, वो कहानियों चाहे ये
- 41:01सांस्कृतिक हो, सामाजिक हो या फिर अध्यात्मिक हो, अध्यात्म में हम
- 41:08बल देते हैं कि झूठ बोलना पाप है। अध्यात्म का पहला शब्द है वह
- 41:14पतंजलि हों, महावीर हों या बुद्ध हों क्या सत्य अहिंसा अस्त,
- 41:20ब्रह्मचर्य अपनेग्रह सबसे पहला शब्द सत्य यानी झूठ मत बोलो।
- 41:29और तुम ऐसे भरखुरदार हो मैं तुम्हें कहता हूँ, नेताओं, मुल्क
- 41:36के रखवा लो, मुल्क के खैर ख्वाहो तुम आज तक एक क़ानून नहीं पास कर
- 41:44सकते कि जो झूठ बोलेंगे, टांगा जाएगा।
- 41:54और टांगा जाएगा 20 साल के लिए भीतर बस इतना काफी है फिर किसी की
- 42:03जरूरत नहीं पड़ेगी किसी को बहकने की।
- 42:07जिसमें जो काम करने की समरधा होगी, वह वही करेगा।
- 42:12आज तो झूठ का कॉम्पिटिशन हो गया है।
- 42:15वो कहता है हम तो 2000 देंगे। मइयो को दूसरा कहता है हम तो 2100
- 42:20देंगे और 2100 वाला जीत जाता है और देते हुए तो कुछ भी नहीं पता
- 42:24नहीं देंगे कि नहीं देंगे और तुम अगर पांच किलो।
- 42:32और राशन देकर सर जिंदा रखना चाहते हो तो गोल वर्कर की परछी आ गई है
- 42:37कि जनता को इतना लाचार बना दो के उसके हाथ में कटोरा ही रखो।
- 42:44बस उसमें शिक्षा न आए, उसमें बुद्धि न आए, उसमें चेतना न बजे।
- 42:54जब शिक्षा नहीं होगी, चेतना नहीं होगी कि मेरा अधिकार क्या है,
- 42:58संविधान पढ़ा नहीं होगा। 90% लोगों ने संविधान नहीं पढ़ा,
- 43:05मैं आपको बता दूंगा। 90 तो मैंने शायद काम कैसे दिया?
- 43:1199% लोगों तक में अभी संविधान पूरा नहीं पढ़ा।
- 43:171% लोग ही है जिनका काम है। मुझे हैरानी होती है।
- 43:23कई बार मैं वकीलों के पास जा, पूरा संविधान हमने भी नहीं पढ़ा
- 43:28कर लो बात। जजेस को भी गिनाना पड़ता है कि
- 43:37फलाने क्लॉज के इस अनुच्छेद के इसमें लिखा है ये कानून, ये तो
- 43:46हालत है हमारे हिंदुस्तान का एक कानून पास कर दो, मैं चिल्ला
- 43:53चिल्ला के कह रहा हूँ। तुम कहते हो हिंदुस्तान गरीब है।
- 44:00अगर 10 साल में हिंदुस्तान अमेरिका को पीटना सुंघा दे तो
- 44:10मुझे संत मत कहना। हिंदुस्तान भारतीय लोग बड़े
- 44:18परिश्रम में है, बस एक ही कमी है, झूठ बोलते हैं यथा राजा तथा प्रजा
- 44:25ऐसा मत करो जब राजा ही झूठ बोलता है।
- 44:36तो प्रजा क्या करेगा? जब बाप झूठ बोलेंगे तो बच्चा क्या
- 44:40करेंगे? अध्यापक झूठ बोलेंगे तो स्टूडेंट
- 44:44क्या करेंगे? तो कृपा करो इस देश में बामुश्कन।
- 44:511000 वर्ष के बाद ये बेचारे इतने लोगों की कुर्बानियों के बल के
- 44:59ऊपर हैं। ये स्वतंत्रता हमने प्राप्त किया
- 45:03है। इसको बचाये रखना हमारी मुख्य
- 45:10आवश्यकता है। क्या तुम चाहते हो कि फिर आ जाएं
- 45:13होम फिर आ जाएं अंग्रेज फिर आ जाए मुगल फिर आ जाएं तानाशाह तुम ये
- 45:19चाहते हो आजादी से बड़ी कीमत है और तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं।
- 45:29और ये अध्यात्म का मार्ग आजादी का मार्ग है।
- 45:34अगर तुम आजाद ही नहीं हो, तुम्हारे पास इतना नहीं है कि तुम
- 45:40पेट भर सको तो फिर तुम्हें क्या सूझेगी आजादी की?
- 45:48हम अपने भीतर की बेड़िया कैसे तोड़ पाओगे?
- 45:51इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, पहले ये तीन बच्चों की जो बात कहते हैं
- 45:56ना, इनसे कह दो हम कर देंगे, तीन बच्चे पैदा कर देंगे मोहन भाग से
- 46:02कह दो कि हम तीन बच्चे पैदा करेंगे लेकिन उन तीन बच्चों की।
- 46:07पर वर्ष हम करेंगे खर्चा तुम दोगे पर वर्ष हम करेंगे खर्चा तुम दोगे
- 46:19साधन तुम महिया करोगे। बीमार हो जाएंगे दवाई आपको देने
- 46:24पड़ेगा इनके भूख का इंतजाम आपको। पढ़ाई आपको करानी पड़ेगी, जन्म हम
- 46:32दे देंगे, पोषण हम कर देंगे, लेकिन अगर तुम कहो कि सुबह से शाम
- 46:38तक इनके लिए टकरें मारते रहे तो यह काम मत करना।
- 46:43मित्रों। दूसरों को पालते पालते तुम्हारी
- 46:50आजादी स्वयं के खत्म हो जाएगा और तुम आजादी के लिए ही पैदा हुए हो।
- 46:57बाहर की आजादी आदतों में मिल गई। अब भीतर की आजादी चाहिए।
- 47:01बहुत सी संगले फंसी खड़ी हैं भीतर उन्हीं संगलों का, मरोल तोड़ता
- 47:06हूँ, उन्हीं घाटों का हर रोज़ खोलता हूँ और अगर राजा।
- 47:15इन घाटों को बढ़ाने में सहायता करें।
- 47:18तो कैसा राजा? वह तो मूर्ख है।
- 47:25मेरी बात को ध्यान से समझना संकटकाल ज्यादा दूर नहीं है।
- 47:35अगर तुम ना सुधरे अगर तुमने ये एक कानून पास न किया कहीं भी किसी
- 47:42मोड़ पे किसी ऑफिस में। किसी जगह पे वह न्यायालय हो या वो
- 47:54कोई भी स्थान हो जिसने झूठ बोला? सार्वजनिक रूप से जो अहित कर है
- 48:03उसको टाँग दिया जायेगा तो तुम पाओगे।
- 48:13के हिंदुस्तान सोने की चिड़िया बन गई।
- 48:16फिर बन गए ये जो हिंदुस्तान के गुण कहते हैं पायन जैसे लोग चीन
- 48:22से आया था आज कहाँ चीन 18 और कहाँ हम चार?
- 48:34और जहाँ का फहयान आके गुणगान करता था कि हिंदुस्तान वाकई सोने की
- 48:40चिड़िया यहाँ जैसे कनक के ढेर पड़े होते हैं ना?
- 48:43मंदिरों में ऐसे सोने के सिक्कों के ढेर पड़े होते थे।
- 48:52क्या तुम चाहते हो वो वक्त फिर आ जाये चाहते हो तो मेरा ये काम कर
- 48:57लो हम तो व्रत हो गए हम तो वो उम्र पार कर गए तुम्हारी जैसी तुम
- 49:05में जोश है। हम में होश है, हम तुम्हें बता
- 49:10सकेंगे, हम मैप हैं तुम्हारे लिए तुम्हें रास्ता बता सकते हैं
- 49:15सिर्फ मैं तो 12 साल से बाहर नहीं निकला, मैं तो जैसे ही चलना ही
- 49:21भूल गया। कुछ शरीर कमजोर हो गया क्योंकि एक
- 49:29ही तरह का एक शेर दूध पी के सारे दिन में 12 वर्ष तक नमक नहीं
- 49:34खाया। मैंने इतना कमजोर हो गया शरीर की
- 49:45किसी को मुझे धक्का देने की जरूरत नहीं है, मैं खुद ही गिर सकता
- 49:48हूँ। चलने की कोशिश मैं खुद ही कर सकता
- 49:53हूँ इतना कमजोर है शरीर लेकिन तुम्हारे लिए बोलता हूँ यह प्राण
- 50:04कब निकल जाए पता नहीं। क्योंकि आखिर कमजोर होते होते
- 50:09होते 1 दिन निश्चय भी हो जाएगा, उच्चर्य निद्रा भी आ जाएगा।
- 50:21लेकिन तुम्हें मैं इतना बता दूँ कि यह अध्यात्म का मार्ग।
- 50:27ये जो मैं बोल रहा हूँ ये आध्यात्मिक बात ही बोल रहा हूँ,
- 50:33पहले रोटी को बचा लो, रोटी को बचा लो, बेटी को बचा लो, आज तुम्हारी
- 50:41बेटी भी खतरे में है, बेटी को सम्मान देना सीखो।
- 50:48रोटी बचा लो और आजादी बचा लो आजादी बच जाए रोटी तो बचा लेंगे
- 50:59बेटी तो बचा लेंगे आजादी के ऊपर खतरा है आज।
- 51:08मैं बहुत बार कहा करता हूँ कि मिस्टर प्राइम मिनिस्टर अगर हिंदू
- 51:13खतरे से बाहर आ गया है तो फिर बेरोजगारी की बात करते है और अगर
- 51:19अभी खतरे में है तो फिर चलो। जब खतरे से बाहर हो जाएगा तो बात
- 51:25कर लेंगे। अगर हिंदू खतरे से बाहर आ गया है
- 51:33तो कोई रोजगार की बात कर ले, कोई महंगाई की बात कर ले।
- 51:39कुछ काम धंधे की बात कर लें। ये सभी जवानी इतनी जवानी जापान के
- 51:46पास हो और धूम मचा दे इतनी जवानी इटली के पास हो, धूम मचा दे सबसे
- 52:00ज्यादा जवान देश है। और सबसे ज्यादा बिकमंग हम हैं।
- 52:05ज़रा देखिए हमारे यहाँ कड़े ये सीना फुला के कह देते हैं कि
- 52:1280,00,00,000 लोगों को पांच किलो अनाज देते हैं, पांच किलो अनाज
- 52:17जरूरत है इसका मतलब वही आगे। कि हाथ में टूटे पकड़ा तो ये
- 52:26डरेंगे कि अगर ये ना आया तो हम भूखे मरेंगे नहीं, नहीं तो हम
- 52:30भूखे नहीं मरोगे। जो जन्म गया है उसका हिंदुस्तान
- 52:35की प्रॉपर्टी में बिल्कुल हिस्सा है बराबर।
- 52:41अगर ये ना दें तो छीन लेना भूखे मत मैंने क्या कहा अगर ये जो
- 52:52छुपाए बैठे हैं ट्रंको में अगर ये ना दें।
- 52:58तो भूखे मत मरना, छीन लेना तुम में इतनी ताकत तो है, तुम जवान
- 53:07मुर्ख हो, तुम भूखे मर जाओ बड़ी शर्म की बात है।
- 53:19हत्याग करके भूखे मर जाओ जैसे सबर कर मर गए, वो खुद से मर गए, वो
- 53:27हड़ताल करके मर गए, नहीं कुछ कर। इस मसले पर उन्हें वीर कहा जा
- 53:39सकता है। चलो सुसाइड कर लिया।
- 53:46उसे संथारा भी कहते हैं। जैन धर्म के लोग आजादी को बचा
- 53:53लेना। पेट तो भर ही जाएगा और आजादी कैसे
- 54:00बचेगी की कोई हाल नहीं। आज मैं देखता हूँ दुनिया में क्या
- 54:05हाल है सब जगह जो फरेब। झूठे दावे, मुकदमे ये जो तुम्हारे
- 54:13मुकदमे चलते हैं। इनमें से 80% मुकदमे झूठ जीतेगा,
- 54:22सत्य हार जाएगा, फैसला आएगा लेकिन फैसला आएगा तुम्हारे मरने के बाद।
- 54:33सब मिलीभक्त है। इस वक्त जरूरत है मुख्य न्याय की
- 54:43शक्ति की जो गिरते हुए, मरते हुए लुढ़कते हुए।
- 54:52हिंदुस्तान को बचा ले, हिंदुस्तान की व्यवस्था को बदलो झूठ बोलने की
- 55:01जो तुम्हें संस्कार पड़ गया है, आदत पड़ गई है।
- 55:08इसको प्रतिबन्ध करो और सभी मुल्कों में झूठ नहीं बोला जाता।
- 55:14झूठ बोलना बहुत बड़ा अपहृत है, इसलिए तरक्की कर रहे हैं।
- 55:21यह झूठ बोलना सामाजिक, राजनीतिक। मान्यता प्राप्त है।
- 55:30तुम झूठी डिग्रीयां बाँट रहे हो कल ही मैंने देखा है इतनी झूठी
- 55:33डिग्रीयां बाँट रहे हो चल भाई तुम तुम क्यों हंसते हो, वो तो बहुत
- 55:41पुरानी बात है। झूठ बोलना तब है फिर सब पुरानी
- 55:49बातें उगाही जाएँगी, नॉक को टेस्ट किए जाएंगे।
- 55:55ये डिग्री असली है, नकली है, यूनिवर्सिटी भी उछाली जाएँगी।
- 56:04जिन्होंने वो झूठी डिग्रियां हजारी के मैंने कल ही देखा एक
- 56:10आदमी तरह तरह की डिग्रियां पहुँच रहा था, मैंने कहा भाई ये तो पहले
- 56:15से हमें मालूम है तुम नई बात क्या कहते हो?
- 56:25इन्हीं के तो हम सताए हुए हैं, सूक्ष्म शरीर तरंगें इनके भीतर
- 56:38भरी होती हैं। वो तिरंगे अगर लासानी तिरंगे हैं
- 56:45तो कॉन्शसनेस लेवल लो है। उन्हें ही हम दुष्ट कहते हैं।
- 56:50उन्हें ही हम बुरी आत्माएं कहते हैं।
- 56:55अगर कॉन्शसनेस लेवल ऊँचा है, वह व्यक्ति पाप नहीं करेगा।
- 57:00बुद्ध का कैन्सेस्नेस लेवल ही ऊँचा हो गया।
- 57:05वह भक्ति पाप नहीं करेगा। अगर पाप करेगा तो बिलकुल सही।
- 57:14जो अधिकारी है दंड देने का उन्हें ही दंडित किया जायेगा।
- 57:21व्यर्थ लोगों को दंड नहीं किया जाएगा।
- 57:24भगवान राम रात को खुद पहरा देते थे।
- 57:26वेश बदल के मेरी जनता में कौन दुखी कौन सुख है, खुद ही जांचा
- 57:34करते थे। कितने लोग सुखी है, कितने लोग
- 57:37दुखी है और क्यों दुखी है? उनका मसला हल करते थे।
- 57:46ये जो आत्माएं हैं शुद्ध आत्माएं और अशुद्ध आत्माएं।
- 57:52संकट काल में अगर तुम इन्हें पुकारना हो तो मुझसे पूछा है क्या
- 57:57ये सहायता कर सकती हैं? यह सहायता तो कर सकती है लेकिन उस
- 58:01तरह नहीं जैसे आप समझते हो ये तुम्हारे पास आएँगे और इनके पास
- 58:07आने से जैसे बगीचा तुम्हारे पास आ जाए।
- 58:12सुगंधी यानी पॉजिटिविटी का संचार होगा तुम्हारे भीतर।
- 58:16और पाजिटिविटी तुम्हें से विहीन कर देगी।
- 58:20तुम सही मार्ग पे फैसला ले सकोगे फिर तुम्हें समझाएगी की नहीं राधे
- 58:25राधे करने से कुछ नहीं होता बात ठीक है जाना तो हमने परमौल में है
- 58:31शोर को मचाया क्यों? जागरण करें?
- 58:36जाना तो हमने पर मौन में है, चुप्पी में और चुप से ही शुरू
- 58:41करना होगा। फिर इन लोगों को दण्डित करना
- 58:47होगा। या तो प्रूव करो।
- 58:53के शोर से कैसे मिलता है महा आनंद नहीं ये नहीं कर पाएंगे मैं पक्का
- 59:00कहता हूँ तुमसे क्योंकि जिसने जान लिया अनुभव से जान लिया इनको दंड
- 59:09मिलना चाहिए। गलत चीजों का प्रसार करने वाला
- 59:16व्यक्ति यही लोग हिंदुस्तान को नरक बना रहे हैं।
- 59:22इनसे पूछा जाए कि सिद्ध कर हम सिद्ध कर सकते हैं?
- 59:29मौन से मिलता है, ठहराव से मिलता है भाग दौड़ के खत्म होने से
- 59:36मिलता है, चैन मिलता है, सुकून आता है, आनंद आता है लेकिन राम
- 59:42राम से राधे राधे से नहीं मिलता। तुम सिद्ध करो कैसे मिलता है?
- 59:51सिद्ध करो अगर हो जाएगा तो हम मान लेंगे हम आपके शिष्य हो जाएंगे
- 59:55नहीं, आपको दंडित करे, फिर इनकी धरन टिकाने आएगी।
- 1:00:06पूछा है? ये जो बुरी आत्माएं यानी जिनमें
- 1:00:14नेगेटिविटी भरी पड़ी है, उनसे बचने का उपाय देखिए।
- 1:00:18एक माला आपको बताता हूँ। बाजार से मिल जाएगी आपको?
- 1:00:26लाल चंदन की माला आपने देखा होगा हमारे बहुत से ऋषि लाल चंदन का
- 1:00:35टीका लगाया करते थे, कई तो लेपन कर लिया करते थे पीला चंदन ने
- 1:00:43हल्दी ने। लाल चंदन की लाल चंदन की माला
- 1:00:51बाजार से ले लो उसको अपने पूजा रूम में रख लो।
- 1:00:57भगवान शंकर का एक मंत्र ओम नमो भगवते रुद्रार फिर बोल देता हूँ।
- 1:01:05ओम नमो भगवते रुद्राय इसकी दसमाला 15 दिन तक शाम के वक्त प्रदोष
- 1:01:17कार्य में है। उसके बाद इसे गले में धारण कर लो।
- 1:01:27बड़ी से बड़ी नेगेटिव रो आपके पास तो आएगा आ तो सकती हैं ये
- 1:01:38ट्रांसपेरेंट बीच में से निकल जाती हैं आपके।
- 1:01:47ये सॉलिडिटी को कवर कर सकती है, लेकिन जो बदबू आएगी इनके पास से
- 1:01:55दुर्गंध आएगी। नेगटिविटी आएगी, इसको ये फौरन
- 1:01:59पैरेलल कर देंगे। माथे के ऊपर लगाने का प्रयोजन यही
- 1:02:03था जो हम बिल्कुल तीसरे नेत्र के ऊपर लगाते थे, क्योंकि तीसरे
- 1:02:10नेत्र के ऊपर अगर लगा ली जाये सबसे ज्यादा जरूरी है तीसरा नेत्र
- 1:02:14बजाना। तीसरे, नृत्य को बचाना सबसे
- 1:02:21ज्यादा जरूरी है और वह सबसे ज्यादा सेंसिटिव है।
- 1:02:25अगर हम अपने तीसरे नृत्य को बचा सके, तिलक का यही महत्त्व था।
- 1:02:32स्त्रियों को जो बिंदी लगाई गई थी उसका यही महत्त्व था।
- 1:02:35आप भूल गए? आज इसे याद कर लो लंबा तिलक लगाओ
- 1:02:41पूरा तीसरा नेत्र ढक जाएगा अगर तुम्हें पता ना हो तुम्हारा तीसरा
- 1:02:47नेत्र कहाँ है तो बहुत लोग बैठे हैं जो तीसरा नेत्र बता देंगे।
- 1:02:52अभी अकाल नहीं पड़ा है। बिल्कुल उसी स्थान के ऊपर लाल
- 1:02:56चंदन का टीका लगाएं। ये नेगेटिविटी आपको छू भी ना पाए
- 1:03:05और शरीर के लिए लाल चंदन की माला अपने गले में दर्शन कर रहा हूँ।
- 1:03:16ये भगवान शंकर रुद्राक्ष धारण करते हैं।
- 1:03:21कृष्ण भगवान वैजयंती माला धारण करते हैं तो अपने शरीर के हिसाब
- 1:03:25से धारण करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति कुछ न कुछ धारण
- 1:03:30किया रहता है। ये पगड़ी का इसलिए चलाया गया था
- 1:03:37ये ढक लेता है। हमारे तीसरे नृत्य को स्त्रियाँ
- 1:03:48बिंदी लगाएं, थोड़ी सी बड़ी करके लगाएं, सिर्फ सांकेतिक नाक करें।
- 1:03:55आज तो बिंदी बिल्कुल सांकेतिक बनके रह गई है।
- 1:03:57सांकेतक बड़ी सी बिंदी लगाएं ऊंची सी ताकि तीसरा ने तक पूरा ढाका जा
- 1:04:03सके। लाल रंग की बिंदी लगाएं और हो सके
- 1:04:14तो तुम लाल चंदन का भीतर कर लिया करो।
- 1:04:19फार बैठे रहे तो ये अचूक साधना है।
- 1:04:24सारे शरीर में से अगर तुम्हें कुछ बचाना पड़ेगा तो तीसरे नेत्र को
- 1:04:28जरूर बचा लेना सबसे ज्यादा सेंसिटिव और सबसे ज्यादा।
- 1:04:34तरंगों को खेंचने वाला एक यही केंद्र है।
- 1:04:40अगर तुम इसको बचा लोगे तो फिर तरंगें आपके आसपास जरूर हैं।
- 1:04:47गुजरती रहेंगे, लेकिन आपके भीतर प्रवेश नहीं करेंगे।
- 1:04:55नेगेटिविटी को इन गलत रूहों की नेगेटिविटी को भीतर प्रवेश करने
- 1:05:00के लिए तीसरे नेत्र का मार्ग तय करना होता है।
- 1:05:06तीसरे नेत्र को ढक लो। ये सूक्षम व्यवस्था थी।
- 1:05:11आज हम भूल गए और इस राह पे नहीं चलते और राजनीतिज्ञों में उलझ गए।
- 1:05:20हम क्या करे और प्रत्येक व्यक्ति क्या करे?
- 1:05:24जरूरत है उससे धन की जरूरत है तो? धन कमाता है।
- 1:05:33कुछ जिम्मेदारियां बहुत हैं। शोक बढ़ गए।
- 1:05:38अब ये कथावाचक जहाज से कमाते हैं। थोड़े दिनों में हेलिकॉप्टर
- 1:05:46प्रदाय करें। और हेलिकॉप्टर का खर्चा आपको पे
- 1:05:50करना होगा, उतनी फीस बढ़ जाएगी। आप तो बुद्धू हो, कितनी फीस मांग
- 1:05:55रहे हो और कथा ही तो है। कहानी सुना के पूरे हो जाते हैं,
- 1:06:02फिर कुछ दिनों के बाद दिखते हैं कि ये ये ₹15,00,000 का बैग ये सब
- 1:06:10तुम्हारी हरामी कि तुम्हारे मूड का कितनी मुशक्ला से तुम पैसा
- 1:06:16पैदा करते हो या मुशक्ला से नहीं करते तो चोरी मार के करते हो, ठगी
- 1:06:21करके करते हो? लेकिन ठगी करना कोई आसान नहीं है।
- 1:06:25ठगी का पैसा? ज्यादा व्हाइट होता है।
- 1:06:28तुम्हें पता नहीं किसी वक्त समझाऊंगा तुम्हें क्योंकि ठगी
- 1:06:34करने से तुम्हारी आत्मा दूषित होती है।
- 1:06:37तुमने बहुत बड़ा मुआवजा दे दिया। धन के बदले में आत्मा को भेज
- 1:06:43दिया। राजनीतिक रोज़ बिकते हैं पैसे के
- 1:06:48बदले मैंने कहा क्या करोगे साथ लेके जाओगे और क्या और आज भी साथ
- 1:06:53लेके जाएगी इतना पैसा क्या करना है आत्मा क्यों बेच दी तुमने?
- 1:07:00लेकिन ऐसा चल रहा है क्या करें धंधा?
- 1:07:09लालचंदन की माला ओम नमो भगवते रुद्राय की 10 या 11 माला कर लिया
- 1:07:17करो रोज़ प्रदोष काल में शाम के वक्त।
- 1:07:23दीपक जला लो जलाना है तो नहीं तो मत जलाओ कोई बात नहीं पूजा रूम
- 1:07:27में एकांत में बैठ जाओ, उसके बाद इसको गले में धारण कर लो।
- 1:07:3815 दिन तक ये करो अगर ज्यादा कर सकते हो तो 30 दिन कर लो।
- 1:07:46क्या होगा इससे? वह रूह आपके पास से गुजर जाएगी,
- 1:07:51लाल चंदन के बीच में पोजिटिविटी छोड़ जाएगी और भगवान शंकर के पास
- 1:07:56इतनी पोजिटिविटी है बेअंत बेइंतेहा जीसको पुकारो की बुवाई
- 1:08:03का। इस पोस्टिविटी को तुम हर वक्त
- 1:08:11ध्यान रखो और ध्यान रखना। ये पोस्टिविटी ऐसी है कि स्नान
- 1:08:16वगैरह करने से ये खत्म नहीं होती, ये बनी है रहती है ये जो लोग पूछ
- 1:08:21लेते हैं जो मैं रुद्राक्ष देता हूँ, दीक्षा के वक्त बाबा इसको
- 1:08:25उतार देना नहीं, नहीं ये उतारना नहीं है।
- 1:08:28या किसी भी स्थान पे चले जाओ इसको उतारने है इसको धारण किए रखने ये
- 1:08:32कब्ज की तरह काम करेगी। आप और लालचंद्र लगाके स्त्री है,
- 1:08:39पुरुष है, कोई भी है आपको एक राहत खाके जा रहा हूँ लालचंद्र का
- 1:08:47टीका। हमारी सनातन की शोगा है आप
- 1:08:53कलाकारी कर सकते हो, लेकिन लाल चिन्दन सीधा जरूर लगा लो तीसरा
- 1:08:57नैत्य जरूर कर लो, फिर मीनाकारी कुछ करते रहो, कोई बात नहीं, उससे
- 1:09:03कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मेकअप करने की तुम्हारी
- 1:09:07आदत है, लोग तो दाढ़ी को भी बीड़ा कर लेते है।
- 1:09:12क्या जब भगवान ने सफेद कर दी तो सफेद दिखाओ?
- 1:09:21दिखावा किस चीज़ का करते हो? एक तुझे हो गया इस बात को आप पर
- 1:09:38ले बांध लो लालचंदन की माला गले में हर वक्त रखो जाप करने के बाद।
- 1:09:46लेकिन पंडित से न किसी से करवाना, खुद करना सिंपल सा मंत्र है ओम
- 1:09:52नमो भगवते रुद्रा है खुद करो ऐसे पंडित लोग नहीं करते दूसरा
- 1:10:03लालचंदन की तिलक। स्त्री हो मैं उससे पहचान भी आई
- 1:10:12कि तुम हिंदुस्तानी हो, तुम हिंदुस्तानी हो, ये कोई भी
- 1:10:20व्यक्ति डाल सकता है, कोई जरूरी नहीं है कि ईसाई नहीं डाल सकता,
- 1:10:23मुसलमान नहीं डाल सकता, नहीं, नहीं, कोई भी व्यक्ति।
- 1:10:26ये मानव मात्र के लिए है, नेगेटिविटी से बचने के लिए है।
- 1:10:32जो भी नेगेटिविटी से ये धर्म वगैरह मत इसमें फंसाया करो।
- 1:10:38धर्म वर्म जी तुम्हारे चक्कर है, हमारी नहीं है हम आज़ादी की बात
- 1:10:44करने वाले। हम गांठों को खोलने वाले तुम्हारी
- 1:10:54गलत मान्यताओं को ध्वस्त करने वाले जाती पाती, धर्म वगैरह के
- 1:11:01ऊपर कोई विश्वास नहीं करता। हमारे लिए मानस की जात सब एक का
- 1:11:06पहचान, बहुत सारी मानस की जाति एक ही है, हम तो मानस की जाति छोड़ो,
- 1:11:13हम तो जीव व मात्र को ईश्वर का ही प्रारूप के सारूप मानते हैं।
- 1:11:20अस्तित्व के चरणों में नमस्कार है जो उसने हमें यहाँ इस सुंदरता की
- 1:11:28दिव्यता के दर्शन देने में सहायता की।
- 1:11:34माँ बाप भी इसलिए पूजनीय थे उन्होंने इतने सुंदर जगत को।
- 1:11:40दर्शन करने के लिए आपको जन्म दिया।
- 1:11:44बाला, पूसा कुछ तो किया ही है आजादी को बचाए रखना बाहर की फिर
- 1:11:57भीतर की आजादी को बचाना ये गोल गांठे जो तुम्हारी पड़ गई है ये
- 1:12:02मैं रोज़ काट रहा हूँ। ये भीतर की गोल गांठे हैं तुम
- 1:12:06बाहर की गोल गांठे बचा के रखना, इन दुष्टों से अपनी आजादी को
- 1:12:12सुरक्षित रखना और कैसे थोड़ा सा जागरूक हो जाओ आगे आपत्ति काल सिर
- 1:12:21पे है। एक व्यक्ति अगर शासन करेगा तुम पर
- 1:12:26सारी संपदा को हड़प के तो वह तुम्हारी गर्दन काट लेगा मेरी
- 1:12:33वार्निंग को गहरे से लेना यह मत समझना कि मैं तो भगत हूँ भगत हो
- 1:12:40ठगत हो सब रगड़े जाओगे। अपनी आज़ादी को हम हर गिज मिटा
- 1:12:52सकते नहीं अपनी आज़ादी को हम। हर गिज में टा सकते नहीं सिर कटा
- 1:13:07सकते हैं, लेकिन सिर झुका सकते नहीं सिर कटा सकते हैं, लेकिन।
- 1:13:20सिर झुका सकते नहीं अपनी आजादी को हम हर गिज मिटा सकते नहीं बाहर की
- 1:13:33आजादी को खबरदार तुम पहरेदार बनकर बाहर की आजादी को बचाना।
- 1:13:38जो चीज़ तुम्हें बाधित करना चाहती है, उससे सावधान मुकाबला करना
- 1:13:47उसका और भीतर की आज़ादी को हम तोड़ें, हम बताएंगे भीतर तुम कैसे
- 1:13:53गुलाम हम रोज़ बताते हैं कितने सालों से बोल रहा हूँ।
- 1:13:59सभी पुराने प्रवचनों में इन गलत मान्यताओं को तोड़ा गया है।
- 1:14:07ये भरपूर कोशिश करते हैं। फिर फिर बचाने की कोई और रास्ता
- 1:14:11ढूंढ लेते हैं। ढूंढ लेने तो कोई बात नहीं।
- 1:14:16लेकिन हम अपने अनुभव की बात करते हैं, वहाँ ये लाचार हो जाते हैं।
- 1:14:21इनके पास कोई तोड़ नहीं होता हैं। गुस्सा बड़ा होता हैं, दांत बड़े
- 1:14:27किटकिटाते हैं ये मुझे करीब के हर हफ्ते में दो फ़ोन जरूर आते हैं।
- 1:14:32बाबा तेरे को मारते हैं, मरे मरे हैं भाई।
- 1:14:36कब के मरे? तुम क्या मार दोगे, मरे हैं वैसे
- 1:14:41ही मरे हैं। मैं तो खुद ही तो मर गया, जो ईंधन
- 1:14:47ही नहीं डालता, शरीर में वो मरा ही हुआ है, तुम कब मारोगे?
- 1:14:53तुम के लिए मरना है तो मार दो, जो नाथूराम ने किया था मैंने कहा अब
- 1:14:59दो ढ़ाई साल में बूढ़ा मर जाता, तुम क्यों 39 साल के जवान अपनी
- 1:15:04जवानी को खराब किया तरसतर है? जहाँ तक आजादी की बात है, शादी भी
- 1:15:20एक बंधन लगे तो मत करना, लेवन में रह लेना, ये तुम व्यक्ति व्यक्ति
- 1:15:26पर डिपेंड करता है। इट वेरीस फ्रॉम बॉडी टु बॉडी है।
- 1:15:31माइंड टू माइंड अगर तुम्हें बंधन लगता है तो मत करना अगर तुम प्रेम
- 1:15:37हो गया है तुम किसी के साथ रहना चाहते हो तो उसको तो ज़माना भी
- 1:15:41चाहे तो रोक नहीं पायेगा अगर तुम इकट्ठे रहोगे।
- 1:15:45लैला मजनू को कौन कर सकता है अलग हील रांची को कौन कर सकता है अलग?
- 1:15:50वो तो साथ रहेंगे, साथ मरेंगे, साथ जीएंगे।
- 1:15:53उनकी तो बात छोड़ो, तुम्हारी जिनको प्रेम नहीं हुआ है वो देखना
- 1:16:00बर्दाश्त कर सकते हो तो करो, नहीं कर सकते तो शादी मत करना अगर बंधन
- 1:16:07लगे शादी। तो मत कराना और ये जो तीन बच्चों
- 1:16:12की बात कहते हैं, इनको कहो कर लेंगे, हम तो साथ कर लेंगे लेकिन
- 1:16:20तुम्हें पालने पड़ेंगे, बिमारी शुमारी ख्याल तुम्हें करना
- 1:16:24पड़ेगा। इनके सारे खर्च बहन जरूरतें
- 1:16:36श्रीमान जी तुम्हें पूरी करनी पड़ेगी।
- 1:16:42ये नहीं कि हम बच्चे जन्म हैं और तुम वापस में लड़वा के मार दो।
- 1:16:47ये काम नहीं चलेगा भाई, ऐसा कहना है तो अपने शिष्यों से कहो,
- 1:16:54आरएसएस के लोगों से कहो कि तुम साथ साथ बच्चे पैदा करो और फिर
- 1:17:00उनकी कमाई का साधन करो और ऊपर से बेरोजगारी, ऊपर से चीजें महंगी
- 1:17:05देखो पर दम निकलता है कि नहीं भक्तों का?
- 1:17:08निचोड़ लिए जाओगे। नींबू की तरह ऐसा ही तुम जनता के
- 1:17:12लिए कर रहे हो। इस वक्त तो खबरदार बिल्कुल बच्चे
- 1:17:17पैदा ना करना अगर तुम्हारे गुंजाइश है तो एक बच्चा पैदा कर
- 1:17:25लेना। गुंजाइश है तू भूखे मर्तों को
- 1:17:34प्यासे मर्तों को अगर बच्चा नालायक है तो वह भी पानी नहीं
- 1:17:40देगा और अगर पड़ोसी लायक है तो वह भी पानी से देगा याद रखना।
- 1:17:51एक बच्चे से ज्यादा बच्चा, वो भी अगर तुम पाल सकते हो तो और शादी
- 1:17:59के बाद यहाँ तक मैं तुम्हे बतरा था अगर बंधन लगे तो बिलकुल मत
- 1:18:03करना। कल पूछा कृष्ण ने आप ब्रह्मचर्य
- 1:18:08की बातें करते हो, बाबा कैसे निभेगा?
- 1:18:11मैंने कहा कुछ नहीं होगा। ये काम इतना बड़ी है कि जिससे
- 1:18:19पैदा करवाना है, करवा ही लेगा। फिर जापान की तरह।
- 1:18:26देश कहेगा कि बच्चे पैदा करो पर वर्ष हम करेंगे पैसा हम देते हैं,
- 1:18:34इलाज फ्री है। ऑस्ट्रेलिया में मेरे मित्र के
- 1:18:38यहाँ दो बच्चे हुए थे। सारी देख रेख।
- 1:18:44सारे मेडिकल फ्री सुबह शाम आके नर्स देख के जाती है।
- 1:18:52घर छोड़ के जाती है आने जाने का सब खर्चा खाने पीने का सब खर्चा
- 1:18:59डेलिवरी की सारी रकम आपको पता है कोरोना के अंदर।
- 1:19:05अमेरिका में घर बैठे चार $4000 पहुँचाए गए।
- 1:19:11क्यों ये हमने कहा है ऑर्डर हमारा है, घर में बैठो इसलिए हम ही
- 1:19:19क्षतिपूर्ति करेंगे। यहाँ तो कोरोना में खुद मांगते
- 1:19:24फिरते हैं, भाई दे दो। प्राइम मिनिस्टर, लीफ ऑन देखो,
- 1:19:38इतने इतने बड़े घपले हो रहे हैं, इतने इतने कर्ज माफ़ हो रहे हैं।
- 1:19:43और किसान अगर कर्ज माफी की बात करते हैं तो भाई उन्हें थोड़ा
- 1:19:47बहुत टिकाओ ये देश एक है या अनेक है, क्यों नहीं जाने देते?
- 1:19:54उनको दिल्ली पैदल जाते हैं तो क्यों नहीं जाने देते?
- 1:19:59क्यूँ कीले लगाई हैं? और कमाल की बात है, कोई जस्टिस
- 1:20:05इसके ऊपर ध्यान नहीं देता। फिर ये क्या है?
- 1:20:09परतंत्रता है ऐसे नहीं, आज तुम परतंत्र हो गए हो एक ढंग से।
- 1:20:20और आने वाला वक्त साक्षात परतंत्रता ले के आने वाला है।
- 1:20:25उसे उसके लिए सावधान कर रहा हूँ। मैं भीतर की परतंत्रता से हम
- 1:20:31मुक्त करना चाहते थे लेकिन क्या करें बीच में टपक पड़ी है ये बाहर
- 1:20:36की परतंत्रता तो बोलना पड़ा है। बोलेंगे वक़्त वक़्त पे बोलेंगे
- 1:20:43जैसी जैसी जरूरत हो बोलेंगे मुझे कह देते हैं लोग बाबा आपको शोभा
- 1:20:47नहीं देता क्यों नहीं शोभा देता? किसी मृते को बचाना शोभा नहीं
- 1:20:51देता। अरे हद करते हो तुम?
- 1:20:57इतने पागल मत बनो, इतना मूड मत बनो, खुद बचो और दूसरों को बचाओ
- 1:21:03परतंत्रता से बच्चे की बात शादी की बात मैंने तुम्हें बता दी है
- 1:21:18ना शादी करोगे ना कमिट करोगे। ना झगड़े झूठे होंगे, ना कोई केस
- 1:21:27करेगा, ना कोई भरण पोषण का केस करेगा।
- 1:21:32अगर बच्चे पैदा करोगे तो शर्त पहले देश के लिए बच्चे पैदा
- 1:21:38करेंगे, अपने लिए नहीं करेंगे। तुम बताओ तुम्हें जरूरत है तो हम
- 1:21:43कर देते हैं लेकिन उसका सारा भरण पोषण सारी पढ़ाई लिखाई पूरा का
- 1:21:51पूरा उसे जुकाम भी होता है तो तुम्हें इलाज करना पड़ेगा।
- 1:21:55सिर में दर्द है तो इलाज तुम्हें करना पड़ेगा।
- 1:22:00अगर भरण पोषण देखो अपने दिमाग पे बिलकुल बोझ मत ले के आना, ये भी
- 1:22:04परतंत्र का हो? आज तुम इतने पहलुओं से परतंत्र हो
- 1:22:08गए हो, की तुम्हें खुद ही नहीं पता, इसलिए तुम बहुमृत करते हो,
- 1:22:12पागलों की तरह हर मोर्चे पर तुम परतंत्र हो।
- 1:22:18भव आरती को समाज को, राजनीति को, अध्यात्म को, तुम जी कैसे रह रहे
- 1:22:24हो? कल एक ब्राह्मण का फ़ोन आया, बाबा
- 1:22:32क्यों मारते हो? कुछ तो इस मोड़िया ने मार दिया
- 1:22:37महंगाई बहुत रोजगार है नहीं। और कुछ हम मंत्र पड़े हैं तो हम
- 1:22:44मार दिया बाबा नहीं मत करो, मैं कहा अभी देखो बात ये है के ना करो
- 1:22:53सत्य तो बोलना ही पड़ेगा मूड़ियों ने मार दिया तो सुल्ट लो मूड़ियों
- 1:22:59को क्यों बिठाते हो? ये तुम्हारा ही बैठाया हुआ है और
- 1:23:05कौन तो फेंक दो मूडियों वाली ठंडी।
- 1:23:15और देखो जहाँ तक मंत्र पढ़ने का सवाल है कहाँ तुम ठीक पड़ते हो
- 1:23:18हमारे यहाँ पर? हनुमान मंदिर में ब्राह्मण मंत्र
- 1:23:26पढ़ रहा था गायत्री मंत्र क्या बोल रहा था ओम भुर वह?
- 1:23:33वो तितर बितरी हो गया। थोड़े दिनों में सब कुछ रात को
- 1:23:39गल्ला कोई आके लूट के ले गया। तितर तितर बितर हो गया।
- 1:23:48ऐसे तो मंत्र पढ़ती हो या कोई भी कोई।
- 1:23:54शादी फेरे होते हैं क्या टल्ली गड़का के टल्ली गड़का के और शादी
- 1:24:04के वक्त भी टल्ली गड़काते हो? कोई जरूरत नहीं है शादी की फेर की
- 1:24:08कोई जरूरत नहीं है। देखिये जो कानूनी प्रोसेसर है,
- 1:24:16अपने बाल दैन को लेके जाइए। कोर्ट में पेश होइए कानून तो फिर
- 1:24:22भी कराना पड़ेगा तुम्हे कोर्ट में हाजर भुजिये सही मान्यता प्राप्त
- 1:24:30हो जाती है। जो संविधान से मान्यता प्राप्त
- 1:24:33है, तुम्हारी पंडित की नहीं है, कोई पता नहीं यह नकली हो, एआई ने
- 1:24:37बना ली हो, वहाँ जाकर आप रजिस्टर्ड खराब किया हो, शादी कोई
- 1:24:46पैसा नहीं लेते हो। और शादी कराने की हमारी मूढ़ताओं
- 1:24:54को शोषण करते हैं लोग मैंने सुना था दोदो, पांचपांच लाख रुपए फेरे
- 1:25:00के शुरू हो गए तो तुम ठीक कहते हो।
- 1:25:07कुछ तो मुड़िये ना मार दिया भाई बेरोजगारी और कुछ महंगाई और ऊपर
- 1:25:15से तू मुड़। हरिदर को आज मानत हरिदर को?
- 1:26:48विनती कारत हों रखीं मन तोर का तो हरे घर।
- 1:27:24जोगी तुम्हारे तार का मैं हूँ जोगी हमर और नजर।
- 1:27:43कब हो गई? सुन मेरे व्याको न मन का बा आज
- 1:27:58मन? हरिदर शनि को आज मन चढ़ बात हरिदर
- 1:28:14शनि को आज। बिन गुरु ज्ञान कहाँ से पांव बिन
- 1:28:32गुरु ज्ञान कहाँ से। दी जो दान हरि गुण गान दी जो दान
- 1:28:55हरि गुण गान। सब गुने जान पे तुम राजा, तड़पती
- 1:29:12हरिदर सैनिकों। आज मन ताड़ पात हरिदर्शन को आ
- 1:29:30मोरे तुम बिना। बिगड़े सर काज बिनती करत हो रखी
- 1:29:50हो लाज। मन तड़पा तू हर दर सन को आ।
- 1:30:11श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरा ह। नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद
- 1:30:37हरे मुरहारि। हेनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:30:51गोविंद हरे मुरारी अनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:31:03पितमातु स्वामी सखा हमारे पितमातु।
- 1:31:14स्वामी सखा हमारे एनाथ। नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:31:29गोविन्द हरे मुरारी केनाथ नारायण। वासुदेव व श्रीकृष्ण गोविन्द हरे
- 1:31:46मुराईनाथ नारायण वासुदेव। धन्यवाद।