Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Feb 26 - लीला क्या है? अंतिम सत्य: मैं नहीं हूँ, मेरा कुछ नहीं है। Part - 2
Transcript
- 0:14सुभाष चंद्र कल के प्रवचन से आगे। कल मैंने आपसे कहा जैसे जैसे आप
- 0:37बाहर की वस्तुओं का मोह छोड़ेंगे, आप अपने भीतर उतरते चले जाएंगे।
- 0:53और सृष्टि का सत बाहर नहीं है तुम्हारे भीतर है, अंततः तुम बाहर
- 1:06जाके सभी कुछ स्वाद चख लो। सुख तो मिलेगा, रस नहीं मिलेगा और
- 1:21उपनिषद में लिखा है रसो वह रस रूप है।
- 1:32ध्यान रखना खुशी, सुख और रस यह एक ही बात नहीं होती है लक आप इसे
- 1:43समझे के सुख और रस एक ही चीज़ के दो नाम है नहीं।
- 1:51सुख खुशी ये अलग रस अलग जैसे ही आप अपने अंतश में जाओगे, अंततः आप
- 2:09पाओगे। एक ऐसा सत्य कि तुम ही नहीं हो,
- 2:24इसलिए संत कहते हैं, पहले तैयारी करके जानो और यह तैयारी है।
- 2:33अपने आप को मिटाने इगोलेसनेस अपने आप को मिटाने की तैयारी करके जाना
- 2:46क्योंकि वहाँ जब तुम पहुंचोगे तो अंतिम पड़ाव तुम्हें मिलेगा।
- 2:53कि तुम नहीं हो और यह शौक एकदम से तुम सहन ना कर पाओगे।
- 3:03इसलिए यह यात्रा बड़ी धीमी होती है।
- 3:10क्षने क्षने शनि शनि अपने भीतर उतरो, रोज़ तुम्हारा अहम घटे रोज़
- 3:20तुम्हारा ईगो मिटे, कम से कम तर होता चला जाए और फिर आखिरी पड़ाव
- 3:30पे तुम पाओगे? कि जो कहता था मैं ही हूँ उसे पता
- 3:42चलेगा कि मैं नहीं हूँ, मैं नहीं हूँ और मेरा भी कुछ नहीं है जब
- 3:54मैं ही नहीं हूँ। तो मेरा कुछ कैसे हो सकता है?
- 4:02जब घर का मालिक ही नहीं है तो घर मालिक का कैसे हो गया?
- 4:11यह अंतत है। तुम्हारे सम्मुख यह प्रकट होगा
- 4:19अंतिम सत्य तुम नहीं तुम्हारी सारी चालबाजियां तुम्हारी सारी
- 4:29सयानपें कलवरनेस चतुराइया। आखिर में जड़े के जरिए रह जाते
- 4:38हैं और परमात्मा बहुत डाइमेंशन से तुम्हें धखलाने की चेष्टा करता है
- 4:47कि तुम्हारे जाव कुछ नहीं, तुम्हारा किया हुआ प्रयास।
- 4:52व्यर्थ हो जाता है, लेकिन तुम किसी ना किसी तरह से अपने आप को
- 4:59बचाने की चेष्टा में लगे रहते हो, तुम जमीन इकट्ठी करते हो।
- 5:10ऐसा कथा करते हो? मान सम्मान पदकियों डिग्रीज़
- 5:18अच्छी नौकरी खाने के अच्छे, बढ़िया साधन, अच्छी अच्छी
- 5:27वस्तुएं। स्वाद लेना चाहते हो तुम इस
- 5:31सर्जनों का? लेकिन संत कहते हैं कि यह स्वाद
- 5:40कड़वा है और कड़वा स्वाद। थूकना पड़ता है आप घर में अंततः
- 5:57तुम पाओगे कि तुम नहीं हो इसीलिए तुम्हारा भी कुछ नहीं है तो इसे
- 6:08शुरू से ही थोड़ा थोड़ा रोज़। अपने आप का ईगो और अपने आप का
- 6:18अधिकार गटाते रहना तुम नहीं हो, तुम्हारा कुछ नहीं है।
- 6:26ये दोनों बराबर घटते जाएंगे और घटेंगे तब जब तुम अपने अंतर में
- 6:33उतरोगे। बाहर बने रहे, तो फिर बाहर तो
- 6:39चिपकाते हैं फिर आज दान में है, कल मित्र में होंगे।
- 6:54परसों चौथ पड़ोसी में हो जाएगी, फिर अन्य अन्य जगहों पर वितरित हो
- 7:03जाएगी। ऑल दीज़ आर क्लिंगर नेसेस ये सब
- 7:09चपकाते है। और जैसे ही कोई साधक पाता है कि
- 7:21मैं नहीं हूँ तो मेरा भी कुछ नहीं है, तो ज़रा सोचिए फिर कौन रहता
- 7:30है? कोई तो है।
- 7:36परमात्मा तब तक गैर मौजूद रहता है जब तक तुम रहता है एक रहेगा, तुम
- 7:48रहो या परमात्मा दोनों नहीं। मेरी माँ गली अति सांकरी ता में
- 8:01दोनों समाज ऐसी सांकरी गली है। वो जब मैं था, तब हरि नहीं।
- 8:14जब हरी है मैं ना प्रेम गली अति सा करे ता में दो न सहा इतनी
- 8:28संकीर्ण है प्रेम की गली। उसमें से दो गुजर नहीं सकते, एक
- 8:35ही गुजरेगा। जब तक तुम गुजरते हो तब तक
- 8:41परमात्मा अपना रास्ता तुम्हारा छोड़ देता है।
- 8:44ठीक तुम गुजरो। लेकिन जब तुम कहते हो नहीं अब मैं
- 8:55तो ना गुजरूँगा यहाँ से तो फिर परमात्मा गुजरता है वहाँ से प्रेम
- 9:01गली अतिशंकर ता में दो न समाए अगर तुम्हें आज तक परमात्मा नहीं मिला
- 9:08है। उसका यती का कारण है, के उस शंकरी
- 9:15गली में तुम्हारा मैं गुजरता रहा हूँ इसलिए परमात्मा को आने का
- 9:22मौका ही नहीं मिला क्योंकि दो वहाँ से गुजरते हैं तुम ही गुजर
- 9:27गए। जन्मो जन्मो तक तुम ही उस संकीर्ण
- 9:32गलियों में गूंजते चले गए, वह नहीं गुजरा।
- 9:42यही कारण है। सूरज को।
- 9:51छूने निकला था, आया हाथ अंधेरा। सूरज को चुने निकला था आया हाथ
- 10:22अंधेरा। कोई नहीं है मेरे।
- 10:35तुम्हारे संग संग कोई नहीं चलेगा ये गलती मत खा जाना ये जो रोज़
- 10:42गुरु तुम्हे आदेश देते हैं, अंतकाल में तुम्हारे साथ आएँगे।
- 10:48ध्यान रखना वह गली इतनी सकरी है कि दो उसमें चल नहीं सकते।
- 10:55तुम और तुम्हारा गुरु संग संग नहीं चलते इसलिए ये झूठे हैं।
- 11:04प्रेम गली अति सा करी उसमें दो चल ही नहीं सकती या तो फिर तुम ही
- 11:10चलोगे और या तो फिर तुम्हारा गुरु ही चलेगा ना अंतकाल में तुम्हें
- 11:19होश रहेंगी। बिल्कुल ऐसा है जैसे मोदी कहें कि
- 11:232047 में विकसित प्राप्त हो जाएगा।
- 11:30उस वक्त 97 साल के होंगे मोदी? कांपते हुए हाथ?
- 11:40लड़खड़ाते हुए जोबाँ क्षीण बुद्धि भला कैसे गद्दी पर बैठे रहेंगे?
- 11:55तब तक? लेकिन बस?
- 12:01टालने के लिए बहाने और कुछ भी नहीं।
- 12:09गुरु भी ऐसे ही टालते हैं। आएँगे अंतिम बेला में हमारी
- 12:16अंगुली पकड़ेंगे। जो अंगुली हम यहाँ जला देते हैं
- 12:22या दफन कर देते हैं और तुम्हें सच खंड में ले जाएंगे।
- 12:29देखिए इन झूठी बातों पे यकीन मत करना।
- 12:40सुख अगर ज़िन्दगी में तुमने नहीं पाया तो ज़िन्दगी के बाद तो सुख
- 12:46होता ही नहीं। सुख मिलेगा तो जीत ही मिलेगा, फिर
- 12:52अगले जन्म में सुख पा सकोगे। लेकिन शरीर से बाहर हो के मर के
- 12:58कभी कोई चैन नहीं पा सका। कभी कोई सुख और करार नहीं पा सका।
- 13:07सरेआम सफेद झूठ बोलते हैं जो लोग। अगले जन्म में फिर फिर वो ही सब
- 13:22कुछ होगा, वो ही तुम होगे, वो ही तुम्हारे गुरू होगे और वो ही
- 13:29तुम्हारी बददमी होगी। यही समझाने वाले होंगे, लेकिन तुम
- 13:37भूल गए होंगे कि पिछले जन्म में भी इसने वायदा किया था।
- 13:45काश तुम अपने पिछले जन्मों को जांच कर पाओ तो पाओगे।
- 13:51कितनी बार इन गुरुओं ने तुम्हारे साथ छल और धोखा किया?
- 14:02कभी कोई नहीं आता है कभी कोई आ नहीं सकता है मन के बहलाने को
- 14:12ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है। तुम्हें धोखा देने के लिए तुम्हें
- 14:22बुद्धू बनाने के लिए लूट सूट करने के लिए तुम्हारा सामान माल हड़पने
- 14:31के लिए। यह तजबीज अच्छी है।
- 14:48एक बात को ध्यान से समझ लेना अगर तुम जीते जी सुख नहीं ले पाए हो।
- 15:01तो मुर्दा मुर्दे में तो इतनी सेक्टिवनेस भी नहीं होती।
- 15:08इतनी चेतना भी नहीं होती कि वह सुख का अनुभव भी कर सके।
- 15:14मुर्दा जड़ है, मुर्दे में चेतना नहीं होती, ऊर्जा नहीं होती।
- 15:23अगर सोखा आएगा भी, मुर्दे के आसपास सोने के भंडार लगा दो,
- 15:30मुर्दा उससे प्रसन्न नहीं होगा। मूर्दे के आसपास तुम 3600 प्रकार
- 15:35के भोजन रख दो, मुर्दा उससे उठ के।
- 15:39आपके भोजन की थाली की तरफ नहीं पड़ेगा, क्योंकि मुर्दा है न
- 15:44चेतना है न शक्ति फिर भला कैसे ले पाएंगे ये तुम्हारी ऊँगली पकड़ के
- 15:53सच गढ़ तक ये तुम्हें लूटने का। ढंग है और तुम इतने बुद्धू हो कि
- 16:06बरसों बरसों तक तुम नहीं, अपनी पीढ़ियों को भी कहते हो, इसी धर्म
- 16:15में आना। ऐसा पागलपन मत करना, सुख और शांति
- 16:26और आनंद सच खंड जीते जी। इस ज़िन्दगी में ही पाया जा सकता
- 16:37है क्योंकि यह है ज़िन्दगी चेतन है मुर्दा होकर क्या कोई खाक पा
- 16:49सकता है? मुर्दा होके तो शक्ति भी नहीं
- 16:57रहती। सुख को मानने की चेतना भी तो नहीं
- 17:02रहती। सुख को अनुभव करने का यंत्र भी तो
- 17:08बेकार हो गया। कौन रहेगा वही आएगा जो मरण धर्मक
- 17:18उध ही है? वही गौरव आएगा तुम्हें ऊँगली पकड़
- 17:24के लेके जाएगा और सभी धर्मों ने रोज़ नए नए पागलपन शुरू किए।
- 17:38अभी कल ही मेरे पास एक व्यक्ति आए।
- 17:41डी जे जे एस बाबा। आप हमें दीक्षा दे दो, मैंने कहा
- 17:48इंतजार कर लो शायद 10 5 साल बाद तुम्हारे गुरु उठ जाए, कहता नहीं
- 17:57उठेगा बाबू। कैसे राजनीतिज्ञों की गद्दी होती
- 18:06है आज नहीं कल कल छोड़ेंगे गद्दी वैसे ही रोज़ इनके जो मालिक हैं।
- 18:22जो आज चलाते हैं हमारी संस्था को रोज़ कह देते हैं।
- 18:26बस सब्र करो, धीरज रखो, प्रतीक्षा करो, इंतजार करो, आएँगे कभी कोई
- 18:35नहीं आया है। मैंने पहले भी कहा।
- 18:42साल पहले भी कहा 2 साल पहले भी कहा, 3 साल पहले भी कहा और इता भी
- 18:49कहा अगर कहीं आशुतोष उठ जाएं तो पहला काम ये करना के गाँधी चौक
- 18:58में। यहाँ गाँधी चौक है, मेरे शहर में
- 19:02वहाँ ले जाती, मेरी गर्दन काट दे और अभी तक मेरी बात सत्य है और
- 19:11ध्यान रखना भविष्य में भी मेरी बात सत्य है, यह कभी नहीं उठेगा।
- 19:19लेकिन एक परंपरा तुमने गलत डाल दी, बस उससे थोड़ा धक्का लगता है।
- 19:27कहीं ऐसा ना हो कि तुम अपने बुजुर्गों को ऐसे शीर्ष महल में
- 19:32रखना शुरू कर दो। इनकी तो बड़ी कृपा है हमारे ऊपर।
- 19:39हम तो इनको नहीं फूंकेंगे फिर हर घर शमशान घाट बन जाएगा।
- 19:47घर, घर, शमशान घाट और ऐसी बेवकूफियां तुमको सिखाई किसने?
- 20:08पिरामिड बनाने वाले मिस्र के भी तुम से ज़्यादा समझदार थे।
- 20:14वो मुर्दो को उनकी कवर में दफन तो कर दिया करते थे, वो भी आज दफन है
- 20:21हजारों सालों से लेकिन उठा कोई बिन।
- 20:29ऐसे ही मैं कितना भी बोलता चला जाऊं लेकिन आपको मर्दों की पूजा
- 20:36में आनंद आता है और तुम्हें ये नहीं पता कि आशुतोष वास नाट
- 20:42एनलाइटन पर्सन उसने खुद को जाना नहीं था।
- 20:50उसका मोह है। इस शरीर के साथ सडन हार्ट अटैक
- 20:55आया, वो वह लुढ़क गया। वो डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित
- 21:02कर दिया। ध्यान से समझना।
- 21:05डॉक्टर अगर किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर देता है तो यह
- 21:10डॉक्टर की जिम्मेदारी है और डॉक्टर मूलभूत चीजों को देखकर मृत
- 21:17घोषित करता है, जिसका ब्रेन डेड है ही।
- 21:20इस डेड सीधा सा हिसाब है। ब्रेन डेड मीन्स टोटली डेड कमांडर
- 21:34मारा गया तो सेना भी मर गई। लेकिन तुम्हें मैं क्या समझाऊं और
- 21:44रोज़ क्या समझाऊं और 111 ही बात क्या समझाऊं?
- 21:52समझने वाले तो पहले दफ़े ही समझ जाते हैं।
- 21:59कल ही मेरे पास किसी व्यक्ति से मैं बात कर रहा था एक व्यक्ति का
- 22:07लेक्चर पर रहा था की 2026 में कल की अवतार आ जाएगा।
- 22:20और वो राजस्थान से होगा। माहौल बन रहा है, भूमिका तैयार की
- 22:29जा रही है। और त्रेता युग में राम थे, द्वापर
- 22:43में कृष्ण थे, क्योंकि त्रेता युग में और द्वापर युग में।
- 22:53जो झंझट थे वो सीमित थे, त्रेता में कोई कोई व्यक्ति दुखी था, कोई
- 23:03कोई व्यक्ति राक्षस था जैसे रावण वगैरह और द्वापर में।
- 23:13दो परिवारों का झगड़ा था। गौरव पांडा लेकिन अब जो आएँगे कल
- 23:20के अवतार वो सारे संसार का झगड़ा है।
- 23:25आइटम प्रत्येक संसार का प्रत्येक देश।
- 23:32एक दूसरे से झगड़ रहा है। यह मैं की अतिशोक्ति हो गई।
- 23:38मैं की अतिशोक्ति होने से ही झगड़ा उत्पन्न होता है।
- 23:42जब कोई कहता है कि मैं सर्वोपरि हूँ तो वह सारी दुनिया को निशा
- 23:49दिखाने की चेष्टा करता है। लेकिन किसी की चेष्टा कभी कामयाब
- 23:58नहीं होती, क्योंकि मैं एक है जो सदा से मौजूद है कल भी था, आज भी
- 24:07है और कल भी है। उस समय के ऊपर अधिकार कर लेना
- 24:18बड़े अहंकार की निशानी है। कल की अवतार आएँगे और वो कह रहे
- 24:28थे कि मैं घोषणा करूँगा। 2026 में करूँगा कौन सा वक्त कौन
- 24:40सी तारीख को कल के अवतार आएँगे वो किसी?
- 24:50मित्र बंधु ने मेरे पास क्लिप भेजा, मैंने कहा भाई पलक पांवड़े
- 24:56बिछाओ कल के अवतार आने वाले हैं, तुम्हारा कल्याण होगा क्योंकि
- 25:07सारे देश? आपस में लड़ रहे हैं इस धरती पे
- 25:14कभी शांति हुई है आज तर्क यह धरती जब से पैदा हुई है तब से अशांति
- 25:23है कारण अलग अलग होते हैं। वो कारण चाहे व्यक्ति दुखी हो,
- 25:31चाहे परिवार दुखी हो लेकिन झगड़ा और लड़ाई और युद्ध, इस धरती ने
- 25:38हजारों लाखों की तादादों में देखे हैं और लड़ाई सिर्फ में की होती
- 25:45है। देखते हैं कब घोषणा करेंगे?
- 25:55नाम भूल गया मैं शायद मनोई पड़ी है यहाँ तक मुझे याद आता है मेरे
- 26:03एक शिष्य ने बताया मुझे। कि मैं और यह मनोज तिवारी डीजेएस
- 26:11में कई साल तक सेवा करते रहे। मर्दों से क्या पा सकते हो तुम?
- 26:26भला मुर्दों से कभी कुछ मिला है और वहाँ से ये आ गए घर आ गए कोई
- 26:39शस्त्र पढ़ लिया होगा, कोई छोटी मोटी सावधना भी कर रही होगी।
- 26:47कौन किसे रोक सकता है? साधना करते हुए
- 27:00और वो कहते हैं कि मेरे पास गणपति जी आते हैं।
- 27:08मैंने कहा भाई ये गणपति जी फिर उसके पास जाते हैं।
- 27:14तो मेरे पास भी रोज़ आके पांव दबाते है, यह क्या मजाक है?
- 27:22जब ज्यादा थक जाता हूँ तो कभी गणपति से कह देते है आओ गणेश जी
- 27:30तुम आ जाओ। गणपति बप्पा मोरया, वकरकुण्डई
- 27:36महाकाय सूर्यकोटि समप्रवाह, निर्विघ्नम कुरु में दे सर्वकारी
- 27:44सर्वदा अगरगन्यम। सबसे पहले ये पूजे जाते हैं और
- 27:57सबसे पहले मैं इसी से ही टांग दबाता हूँ।
- 28:02खा खा के पेट मोटा किया हो लंबो धर्म जैसे पेट में डेढ़ साल का
- 28:10बच्चा हो। सूट बढ़ा रखी है।
- 28:21कभी कभी हनुमान जी नहीं आते तो इनको कह देता हूँ कि आ जाओ भाई,
- 28:26पांव तो दुखते हैं कोई घर तभी तो में कुछ है नहीं, ना ही टहलता
- 28:31हूँ, ना ही बाहर कमरे से बाहर नहीं निकलती हूँ।
- 28:38तो फिर पांव का क्या कसूर है? भाई टिश्यूज़ जो भी होंगे दुखेंगे
- 28:43भी तो गणपति मोरिया को बुला लेते हैं गणपति मोरिया।
- 28:55जब पेट हो मैंने सुना है गणपति मोरे चंडीगढ़ के किसी बस स्टैंड
- 29:06पे खड़े थे टिकट लेने के लिए। जब सांस लेते थे, बीच में खड़े
- 29:17थे, सांस लेते थे तो सारी आगे की लाइन हिलते थे, अब पेट ही इतना
- 29:26मोटा है। वो अगरीवाले ने कहा है भाई तू
- 29:35आदमी है क्या हैवान है, ये क्यों धक्के मार रहा है?
- 29:44गणपति मौर्या बोले। और क्या धक्का मार रहा हूँ भाई?
- 29:47सांस भी नहीं लेना क्या अरे जीने नहीं दोगे क्या?
- 29:56और जब भी आते हैं पांव दबाते दबाते मेरे से एक शिकायत भी करते
- 30:00हैं। अरे बाबा यहाँ के लोग कैसे हैं?
- 30:05मैं और भी लोगों में जाया करता हूँ, वहाँ के लोग ऐसे ही नहीं
- 30:09हैं। मैंने क्या क्या हुआ?
- 30:14कहते हैं पहले तो खूब अच्छी तरह से मुझे हलवा पूड़ी खिलाते हैं,
- 30:20प्रसाद खिलाते हैं, गाजर पाक खिलवाते हैं।
- 30:26और न जाने कितने प्रकार के और बड़े बड़े सीजेआई तक मेरी पूजा
- 30:34करते हैं, आरती गाते हैं और अचानक पता नहीं क्या हो जाता है इतनी
- 30:41पूजा करने के बाद। जैसे ही मैं थोड़ा सा अकड़ में
- 30:46आता हूँ वजह उठाते हैं और भटक देते हैं नहर में और नहर भी नहीं
- 30:51होती, गंदा पानी होता है भला ही ये कैसे बंधे बनाये भगवान है।
- 30:59मैंने कहा छोड़ो इनकी बातें तुम आज पांव ज्यादा दुख रहे हैं थोड़े
- 31:03से। तुम इधर ध्यान करो, ये तो ऐसे ही
- 31:09रहेंगे भाई तुम मत पूजा करवाया करो, तुम क्यों करवातें हो?
- 31:14जो पूजा करवाएगा, उसे चित्र भी तो खाने ही पड़ेंगे ना?
- 31:19ये दोनों चीजें जकसा हुआ ही करते हैं।
- 31:23जो मान चाहेगा उसे अपमान भी मिलेगा।
- 31:28जो मान पाने की कामना करता है, उसे अपमान के लिए तैयार रहना
- 31:33चाहिए। तो छोड़ दे गणपति क्या लेना तुने
- 31:40बप्पा मौर्य? तुमने लेना क्या है जब इन्होंने
- 31:47तुझे खूब अच्छी मलाई खिलाई। खवा के हलवा पूड़ी खिला के बाद
- 31:52में फेंक ही देने हैं। गंदे नाले में इंकार कर दिया कि
- 31:57मैं नहीं पूजा करवाऊंगा। कहते बाबा मानता नहीं है ये इंसान
- 32:06पता नहीं जानवरों से भी ज्ञापित है।
- 32:09कोई जानवर ऐसी हरकतें नहीं करता। अब बेचारा मेरा चूहा है, वो आराम
- 32:19से बैठा रहता है। कुछ भी तो नहीं करता तुम ऐसे ऐसे
- 32:26पागलपन में उलझे हुए हो, अब कोई क्या करे, कहाँ से सीख के आये हो
- 32:34ये बाहर के शास्त्रों से बाहर के? बाहर के मार्गदर्शकों से मत सीखना
- 32:45पितर की बातें अंत से ही सीखी जाती हैं और अंत से ही सीखी जानी
- 32:54चाहिए। तुम्हारे जीवन की बात शास्त्र
- 32:58कैसे बता पाएंगे? शास्त्रों में अपने काले लेख लिखे
- 33:05तुम्हारे जीवन की बात उनमें है ही नहीं।
- 33:09तुम्हारा जीवन अगर देखना है तो जीवन के पास जाना होगा और जीवन
- 33:17तुम्हारे भीतर है। जीवन तुम्हारे अंतः सुनें, अपने
- 33:22भीतर उतरना होगा, लेकिन तुम डरते हो, क्योंकि जैसे ही तुम अपने
- 33:33भीतर उतरोगे। तो तुम्हें तुम्हारे किए हुए पाप
- 33:46याद आएँगे। दब जाते हैं गहरे अब चेतन में।
- 33:51अचेतन में गहरे दब जाते हैं। कल मैंने समझाया था आपको जब तक
- 33:58तुम बाहर इसीलिए तुम बाहर घूमते हो तुम्हारा अंत से कहीं न कहीं
- 34:04जानता है अगर मैं भीतर उतरा। तो मेरे किए हुए पाप मेरे सामने
- 34:09आएँगे, फिर मैं उन्हें जवाब कह। लो
- 35:02घटा सी छा गई। जैसे भीतर जाओगे वो भोली दास्तां
- 35:11लो फिर याद आ गई अरे भाई मैंने उसको मारा था मैंने उसको षड्यंत्र
- 35:18करा के चालबाजी करके। राजनीतिक रोटियां बचा के उसको
- 35:24मारा था, फिर प्रूफ मिटाए थे फिर उसको मारा था, फिर उसको जो जान था
- 35:28उसको मारा था। सब चीज़ याद आएगी क्योंकि सब
- 35:33रिकार्डर है तुम्हारे भीतर सुपरसेन्स्टिव कंप्यूटर के भीतर।
- 35:41तुम्हारा किया हुआ महीन से महीन काम और बड़े से बड़ा काम सुंदर
- 35:47है, तुम्हें उन्हें क्रॉस करना होगा, यही दिक्कत है।
- 35:56मुझसे पूछो दिक्कत क्या है? तुम खंगाल न पाओगे।
- 36:01दिक्कत ये है कि जैसे ही तुम भीतर उतरोगे वो की हुई यादें,
- 36:11स्मृतियां तुम्हारी रूबरू आके खड़ी हो जाएं और तुम उन्हें देख
- 36:18के घबराओगे। तुम्हें पुराना भक्त याद आ जाएगा,
- 36:24स्मृतियां सामने आ जाएंगी। तुमने क्या किया था जैसे आज ही
- 36:28किया हो, ऐसा आ जाएगा और तुम थर्रा हो गए।
- 36:33तुम कप हो गए और तुम कब करना चाहते नहीं, तुम थर्राना चाहते
- 36:38नहीं क्योंकि तुम्हारी छाती बड़ी है 56 इंच की छाती है तुम्हारी है
- 36:51नहीं, लेकिन बोलते हो सिर्फ। कभी किसको मिचा नहीं दिया।
- 37:01दर्जी के शिव दर्जी जानता है कितने क्यों नहीं जाते तुम अपने
- 37:11मित्र ये अड़चन है जो मैंने बताई तुम्हे?
- 37:20तुम्हें अपनी पुरानी की हुई करतूतें याद आती, जिससे तुम रो
- 37:27बरो वो नहीं सकते फिर तुम भाग जाते हो बाहर।
- 37:35फिर तुम कहते हो कहीं दूर चल गम की दुनिया से दिल भर गया ढूंढ लें
- 37:42अब कोई घर न आओ फिर फिर तुम बाहर आ जाते हो संसार में जेहलकदमी
- 37:47करने लग जाते हो भीतर जाना इसलिए मुश्किल है तुम्हारे।
- 37:53कोई संत बड़े आराम से भीतर चला जाता है, इसलिए संतो ने कहा
- 37:58महावीर ने कहा बुध ने कहा पतंजलि ने कहा ओके हिंसा मत करना क्योंकि
- 38:07हिंसा करोगे, अपने भीतर जा ना पाओगे।
- 38:11झूठ बोलोगे वो झूठ बोलोगे तुम्हारे सामने आएँगे हर उनका
- 38:17जवाब तुम्हारे पास तो कुछ है नहीं यह भीतर का अस्तित्व तुमसे जवाब
- 38:23मांगेगा बाहर के बंदे को तो तुम किसी ना किसी तरह लपेट लोगे, उसका
- 38:29ध्यान तो तुम इधर उधर कर दोगे। लेकिन भीतर का ध्यान तुम इधर उधर
- 38:33नहीं कर सकते। भीतर तो एक ही उपाय है कि वहाँ से
- 38:37भाग चलो फिर फिर बाहर की दौड़ लगा लो।
- 38:41तुम्हारे भीतर ना पहुंचने का मात्र ये कारण अति तुम्हें तुमने
- 38:48इतने पाप किए हैं। इसलिए तुम सुख की तलाश में हो,
- 38:57तुम अंतस का चैन चाहते हो तुम बेचैन हो तुम अंतस का रिष्ठ चाहते
- 39:06हो तुम थक गए हो? यू आर टू मच टायर, बट यू वॉन्ट
- 39:16रेलक्सेशन तो कोई गणेश की पूजा करता, कोई शंकर की पूजा करता, कोई
- 39:24दुर्गा की पूजा करता, कोई राम। राम की पूजाकर्ता को कृष्ण की
- 39:29पूजा करता ये बचने के उपाय हैं मात्र तुम्हारी पूजाएं के किसी
- 39:41तरह अपने किए हुए कर्मों को रूबरू न करना पड़े, खाली वक्त तुम रह ही
- 39:47नहीं सकते। क्यों?
- 39:50क्योंकि खाली वक्त में तुम अपने अंत में उतरने लग जाते हो और अंत
- 39:58में उतरोगे। लो फिर याद आ गई नजर के सामने।
- 40:20घटा सी। छा गई।
- 40:26ओह घर दो बाबा। वो धूल की आंधियां, तूफान
- 40:30तुम्हारे सामने से गुजरेंगे और तुम जवाब ना दे पाओगे कैसे कहोगे
- 40:38उससे कि मैंने नहीं किया क्योंकि वह वह तो तुम ही होगी सर।
- 40:45तुम अपने आपको जवाब देने से डर जाओगे, घबरा जाओगे।
- 40:53मैं अपने आप से घबरा गया हूँ। मैं अपने आप।
- 41:11से। घबरा गया हूँ।
- 41:18मुझे है ज़िन्दगी। दीवाना कर दे मुझे है ज़िन्दगी
- 41:35दीवाना कर दे। मैं अपने आप।
- 41:42से। घबरा गया वह।
- 41:50जाकर तुम अपने आप से घबरा जाते हो, कोई दूसरा नहीं तो मैं घबराहट
- 41:55देता हूँ क्योंकि तुम्हारे अतीत के किये हुए पाप हमारे सामने आते
- 42:01है। सारा जबड़ा ये है और कोई गुरु
- 42:09तुम्हें बताएगा नहीं, बड़ा मुश्किल मामला है, कोई भीतर जाए
- 42:15तो बताये। जो जाएगा वह बताएगा असली दिक्कत
- 42:22क्या है? असली दिक्कत ये है और तुम वहाँ
- 42:26कहते हो ये जिंदगी मुझे दीवाना करता है, पागल अपना दे।
- 42:39इसलिए तुम अपने भीतर नहीं उतर सकते।
- 42:41धीरे धीरे धीरे धीरे तुम अपने भीतर उतरते चले जाना उतरते चले
- 42:53जाना रोज़ रोज़ एक कदम रोज़ एक कदम और वो बहुत दूर है।
- 43:00क्यों? क्योंकि तुम बहुत दूर निकल आए हो,
- 43:06वह तो वही है। दादू दूजा को नहीं, दूजी मन की
- 43:12दौड़ दौड़ मिट्टी सन से गया वस्तु ठोर की ठोर।
- 43:16वह तो वहीं बैठा है। लेकिन तुम उससे बहुत दूर निकल आये
- 43:21हो, ये गलती तुम्हारी तुम रास्ता भटक गए हो और फिर जब तुम उससे दूर
- 43:29चले गए हो तो तुम्हे ही तो वापस कदम उठाने होंगे और उतने ही उठाने
- 43:34होंगे जीतने तुम दूर निकल गए हो। धीरे धीरे तुम उसके पास पहुँच गए,
- 43:46धीरे धीरे रोज़ एक एक कदम घबरा मत जाना, होसला बनाये रखना, सच्चे
- 43:55गुरु का सनी रखना। घबराहट आएंगी, लेकिन गुरु से
- 44:05इमदाद माँगना कंपना मत, हौसला मत छोड़ना, धैर्य रखना और प्रतीक्षा
- 44:16रखना। कि अच्छे दिन आएँगे धीरज खूब मत
- 44:25आया करती है अच्छे दिन सुबह शाम कभी कभी सबेर हुआ करती है लेकिन
- 44:33हुआ करती है। 1 दिन तुम बाहर चले जाओगे और जैसे
- 44:43जैसे तुम भीतर जाओगे पैरलली तुम्हारा अहंकार भी कम होता
- 44:51जायेगा। तुम्हारा भीतर जाना और अहंकार का
- 44:56कम हो जाना ये कोइंसिडेंस नहीं है बल्कि पैरलल इन्सिडेंट्स हैं।
- 45:07कोइंसिडेंस में और पैरलल इंसिडेंट में यमुनासमान का फर्क होता है।
- 45:15जैसे जैसे तुम अपने भीतर उतरे वैसे वैसे पाओगे तुम अहंकार शून्य
- 45:21होते चले गए रोज़ घटेगा अहंकार और रोज़ तुम अपने भीतर जाओगे।
- 45:29जैसे किसी ठब के अंदर बाल्टी डुबो दी जाए।
- 45:33जितनी बाल्टी भीतर जाएगी, उतना ही पानी बाहर बिखरेगा।
- 45:39ऐसे ही अहंकार तुम्हारे चेतन में से बाहर वातावरण में निकल जाएगा।
- 45:49का फूल बन के उड़ जाएगा, वाष्प बन के उड़ जाएगा हवाओं में और 1 दिन
- 45:56तुम वहीं पहुँच जाओगे जहाँ कबीर कहते है जन खोजा जन पानी गहरे
- 46:10पानी। मैं पूरा भुडन डरा गयो किनारे बैठ
- 46:17भूल जाओ तुमने कभी पाप किये थे? ह्यूमनिस्ट एरर्स सभी पाप करते
- 46:26हैं सभी से पाप होते हैं। और गुरु से सहारा मांगना अपने
- 46:40भीतर उतरने के लिए उतरते चले जाना जूं जूं तुम अपने भीतर उतरोगे
- 46:47पहली बात तो तुम्हारा आनंद गहरा होगा।
- 46:52और दूसरी बात आनंद के गहरे होने से तुम्हारा अहंकार मत जायेगा।
- 46:58अहंकार कम होगा, आनंद गहरा होगा और तुम ज्यादा गहरे चले जाओगे।
- 47:03ये तीन चीजें होंगी धीरे धीरे तुम अपने भीतर से।
- 47:15फिर एक मैंने कल भी कहा था कि तुम पाओगे जिसे तुम कहते थे कि मैं ही
- 47:25हूँ पाओगे कि मैं नहीं। पाओगे के मैं नहीं हूँ तो मेरा भी
- 47:34कुछ नहीं है और मौत तुम्हें यही दखाया करती हैं।
- 47:38मौत का पहला पड़ाव ये है भीतर की मौत का पहला पड़ाव ये है वो बाहर
- 47:45की मौत के बिल्कुल समान अर्थ ही होता है।
- 47:49बाहर की मौत भी तुम्हें दिखा देती है कि तुम्हारे यहाँ कुछ नहीं था
- 47:54जो तुमने कमाया वह तुमने कुछ नहीं कमाया देखो आज सब छूटा जाता है
- 48:02कितने प्यार से महल खड़े किए थे। कितने प्यार से ये विमान खरीदे
- 48:11थे? कितने प्यार से ये संस्थाएँ चलाई
- 48:15थीं जो आज हम छोड़ चले हैं? भीतर भी यही घटता है एक पर पर
- 48:23जाकर। जैसे मृत्यु के क्षण में बाहर
- 48:26तुम्हारा खुश नहीं रहता, ऐसे ही भीतर तुम्हारा खुश नहीं रहता और
- 48:31तुम भी खुश नहीं रहते। एक पल ऐसा आएगा उसे आत्मबोध कहते
- 48:38हैं। वहाँ तुम्हारा कुछ नहीं होगा और
- 48:43वहाँ तुम वही नहीं होगे इसे इगोरसनेस कहते हैं, और जब तुम्हें
- 48:52पता चला कि मैं ही नहीं हूँ ऐट दी सेम मोमेंट बिल्कुल उसी क्षण में
- 49:01तुम पाओगे। कि मैं नहीं हूँ।
- 49:05इसका मतलब जिसे।