Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Dec 24- समाधी तक पहुँचने की सबसे बड़ी रुकावट क्या है? समाधी प्राप्ति के लिए कौन सा मार्ग अपनाएं?
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- 0:04ओम नमो नारायणाय बाबा जी प्रणब बाबा जी, मुझे नहीं पता।
- 0:20कि मैंने कौन से पुण्य कर्म किए थे, जो मेरे को आपका सत्संग मिला,
- 0:32बस बाबा जी मेरे पर एक कृपा अवश्य करना।
- 0:39कि जीस गलती के कारण मैं अपने पिछले जन्मों में चूक गया वो गलती
- 0:48इस जन्म में मैं ना करूँ मुझे संत सेवा देना बाबा।
- 1:09सुंदर भाव है और ये भाव जब उत्पन्न होते हैं।
- 1:19तो उस व्यक्ति की अंतःस्थिति को संत अच्छी तरह से जानता है।
- 1:29कहीं ना कहीं इसने अमृत की वह झलक देखी होगी।
- 1:40पी नहीं होगी, देखी जरूर होगी, उसे ही जैसे सटोरी की घटना कहते
- 1:48हैं। किसने सटोरी को देख लिया वो 1 दिन
- 1:56आएगा? जो कभी पी भी लेगा।
- 2:03सारी दुनिया एक अनुभव के लिए झड़प रही है।
- 2:16तुम जानकर हैरान हो गए। कि दुनिया तो अलग अलग रास्तों पर
- 2:22चली है। एक ही अनुभव के लिए सारी दुनिया
- 2:28कैसे फिर रही है? बिलकुल एक ही अनुभव के लिए फिर
- 2:33रही है और मस्ती का स्वार्थ। वो आनंद की झलक सुगन्ती की फुहार
- 2:52मदहोशी का वो। मस्ती से सर्व और हुआ तुम्हारे
- 3:05प्राण ऐसा व्यक्ति ही ये कामना कर सकता है की जो गलती।
- 3:19मैंने अपने पिछले जन्मों में के बाबा कहीं ऐसा ना हो कि मैं इस
- 3:27जन्म में फिर दोहरा दूँ नहीं दोहराओगे।
- 3:38मैंने कहा तुम अवश्य पहुंचे जाओगे, लेकिन जो काम करने वाला एक
- 3:45तुम्हें दिया है, बस उसे करते रहना, उससे भूमि तैयार हो जाएगी।
- 3:56और बीज बोने के लिए भूमि का तैयार होना आवश्यक होता है।
- 4:06तुम गुरु से उस अमृत रस का डिमॅंड करते हो।
- 4:15और गुरु तुमसे सिर्फ एक डिमॅंड करता है के योग्य हो जाओ, पीने के
- 4:24पीला तो वह देगा उसके पास पेनाने को सुराइयां नहीं हैं।
- 4:36जाम नहीं उसके पास उसके पास तो समुद्र भरा पड़ा है, जिसकी तलाश
- 4:44में तुम फिर रहे हो, जिसे खोज रहे हो वह तो पूरा पूरा मयखाना नहीं
- 4:52है। वह तो समुद्र है, वह तो उस अमृत
- 4:59का खजाना है तुमने कहा पुत्र की जो मैंने अतीत में गलतियाँ की।
- 5:12कहीं ऐसा ना हो कि इस जन्म में भी मैं उस गलती को दोहराता हूँ।
- 5:25कितने जन्मो से व्यक्ति एक ही गलती करता है, दूसरी गलती वो करता
- 5:30ही नहीं? कौन सी गलती है वो तुम समझ गए
- 5:37होगे और वो गलती तुम फिर से मत कर लेना।
- 5:45क्या गलती करता है इंसान जीस गलती के कारण?
- 5:52वो उस अमृत रथ को कण कण में होते हुए भी पी नहीं पता क्या है वो
- 6:01बाधा जो उसे रोक देती है जो उसको वो पीने नहीं देती?
- 6:13वो गलती है भ्रम तुम किसी न किसी तरह इस भ्रम की स्थिति से बाहर आ
- 6:25जाओ। यह गुरु चाहता है और ये जो आजकल
- 6:33गीता के प्रवचन चल रहे हैं। कृष्ण भी यही चाहते हैं कि अर्जुन
- 6:41इस भ्रम की स्थिति से बाहर आ जाए, लेकिन कृष्ण यह भी जानते हैं।
- 6:51कि मेरे बोलने से यह हल न हो पाएगा।
- 6:56मैं कितना ही बोले चला जाऊं और कृष्ण बोलते चले जाते हैं, हल
- 7:01नहीं होता। कृष्ण जानते हैं जब तक।
- 7:08इस अमृत का एक पैग इसको पला नहीं दूंगा।
- 7:17मैं तब तक ये स्वाद नहीं जाने का उस समर्थ का?
- 7:26गुरु को आखिर में पिलाना ही पड़ता है और बस एक गुरु हेतु में पीला
- 7:34सकता है। समुद्र ही तो बांट सकता है अपने
- 7:42विशाल जल को। उसके पास है, वह बाँट सकता है।
- 7:53कृष्ण जानते हैं कि अर्जुन खुद से ना पी सकेगा, इन शब्दों में उलझ
- 8:00जाएगा। तुम भी शब्दों में उलझ जाते हो।
- 8:07इसके तो एक पैग लबों से लगाना पड़ेगा और जब ये उसको गट के जाएगा
- 8:18भीतर। तब जीस खुमार को ये महसूस करेगा
- 8:27बस फिर तो डिमैंड बढ़ती ही जाएगी। एक बार पलानी पड़ती है।
- 8:32गुरु शब्दों से शुरू करता है गुरु।
- 8:41लेकिन वह जानता है, भलीभाँति जानता है।
- 8:47शुरू तो मैंने शब्दों से किया है। थोड़ा थोड़ा हवाओं का वो रस इसके
- 8:54भीतर प्रवेश करेगा, लेकिन बात तो उसी दिन बनेंगे।
- 9:03जीस दिन मैं उसका पैक इसके होंठों से लगा दूंगा और यह भीतर गले के
- 9:11भीतर गटक जाएगा। उसे उस दिन स्वाद आएगा इसका उस
- 9:18दिन मज़ा चक्केगा ये। उससे पहले तो बातें हैं, थोथी
- 9:24बातें हैं, शब्दों की बातें हैं, लेकिन ये भी कीमती है, इससे प्यास
- 9:32जगती है, प्यास घनी होती है इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ।
- 9:40के संत पुरुषों के शब्दों को सुनते रहना।
- 9:46कई बार सुनते सुनते भी उसका रस अचानक पी लिया जाता है तो हमें
- 9:55पता भी नहीं चलता। कब तुम्हारे लहों से गुरु ने वो
- 10:02प्याला डाल दिया, भीतर उड़ेल दिया और तुम्हें गले से नीचे उतर गया
- 10:11तो बाबा ने कहा सुनिए दुख पाप का नाश सुबह शाम।
- 10:19इस मस्तानी आवाज़ को इस आनंद से भरी हुई खुशबू निभा आवाज़ को जो
- 10:29टकरा किया आती है उस मखाने के साथ।
- 10:36उन हवाओं से लेबड़ी हुई ये शब्दावली को तुम चूम लेना तेरे।
- 10:45दामन से जोआएं? अन्हव को सला झूम लूँ मैं उस जुबा
- 11:08को जीस प्याज। तेरा नाम।
- 11:19सबसे अच्छी सुहा। तेरे सबसे रंग।
- 11:31तेरी शान तुझपे दिल कुरवा। ए मेरे उन हवाओं को।
- 11:50तो समुद्र के इस रस को छू के आती है टकरा के आती है।
- 12:01ये समुद्र के आनंद से टकरा के आती है उन्हें पी लेना।
- 12:08उन्हें सलाम करना और गटक जाना। संत की आवाज बहुत गहरे तलों से
- 12:19आती है और संत चाहता भी है। कि तुम किसी न किसी तरह इसे पी लो
- 12:33तो तुम्हारे भीतर महमुक्षा का जन्म होगा।
- 12:38जब तुम इसको पीओगे तो संसार के मोक पदार्थों से तुम्हें।
- 12:46सुख नहीं मिला। इस वाणी को सुन के जितना आनंद
- 12:52मिलता है वो तुम्हें संसार में किसी भी पदार्थ को भोगने से नहीं
- 13:00मिलता। इसलिए संत कहता है।
- 13:08के संत का संघ करना, उसके करीब बैठ जाना।
- 13:14आचार्य उपासनां शोचम स्तैरेम आत्तम विनिग्रह संत के समय पे बैठ
- 13:25जाना। और लहराती हुई हवाएं जो तुम्हारे
- 13:33वतन के दामन से आती हैं, तुम्हें भी छू लेंगी और तुम भी निहाल हो
- 13:43जाओगे। चूम लेना उन हवाओं को देखो कहीं
- 13:52चूक ना जाना तुमने कहा बाबा जो अतीत के जन्म में मैंने गलती की
- 14:06एक कृपा करना। के इस जन्म में वह गलती ना करो।
- 14:12हाँ ठीक कहा तुमने, लेकिन पुत्र जमीन तो तैयार तुम्हे ही करने
- 14:24होगे। आनंद के बीज होयेगा गुरु बिलक्षक
- 14:35गुरु जानता है, मेरे बोलने से कोई एकाध बिरला पहुंचेगा।
- 14:46सभी न पहुँच पाए। किसी एक के कंठ में उंडेल दी
- 14:54जाएगी ये मद ये शराब और वह नशे में बेसुध हुआ हुआ।
- 15:05कुमारी में झूमेगा नाचेगा? गायेगा और तुम कहोगे यह पागल हो
- 15:13गया है मीरा को तुम दीवानी कहते हो कबीर को तुम पागल कहते हो।
- 15:25नाचते हुए चैतन्य को तुम पागल कहते हो तुम कहते हो इन्होंने होश
- 15:32गवा दी है, तुम ठीक कहते हो क्योंकि जैसे तुम होश समझते थे।
- 15:43वह होश इनके भीतर अब नहीं रहा। वह होश मदहूशी में बदल गया।
- 15:52होश भी है लेकिन उस में खाने की शराब पी ली है, वो भी बीच में।
- 16:02मिल गया है तो तुम ठीक कहते हो और गुरु जानता है कि मेरे बोलने से
- 16:14सभी उस तल को ना छू पाए। किसी को समझ आएगा।
- 16:22किसी को समझ नहीं आएगा और जिन को समझ नहीं आएगा उनकी संख्या ज्यादा
- 16:29होगी क्योंकि वो समझा नहीं जाता। उसे तो पीना होता है।
- 16:39और तुम्हारे संस्कार हैं हर चीज़ को समझने के और तुम अनादि काल से
- 16:47यही गलती दोहराते चले आ रहे हो जीसको समझा नहीं जा सकता जीसको
- 16:56पिया ही जाता है। जो पीने से ही समझ में आता है
- 17:04उसको तुम समझने की चेष्टा में संलग्न हो, ये कभी हो नहीं सकेगा।
- 17:12तुम पीने की कोशिश नहीं करते, तुम समझने की कोशिश करते हो?
- 17:18चूक जाते हो इसलिए बहुत जनम बीते मेरे माधव ए जनम तुम्हारे लेख तुम
- 17:33ये जन्म मेरे लेखे तो कर दो। शुभाशीष है तुम्हे अहम् तोम सर्वे
- 17:45पा विभू मोक्ष श्यामी माँ सुच्या मैं तुम्हे सभी दुखों से मुक्त
- 17:52करता हूँ। लेकिन पुत्र भूमि तैयार करने से
- 18:01चूक मत जाना, बस एक ही काम तुम्हें मैंने सौंपा, बाकी तो
- 18:09सारे काम, तुम्हारे बोझ सब मैंने उठ लिया है।
- 18:18अन्य न्यास चिंतितुमान ये जनहाँपुर उपासते तेशाम नित्या
- 18:26भुक्ता नाम योग आक्षेम वहा में हम मैंने वहन कर लिए तुम्हारे सारे
- 18:34बोझ। जरूरतें, अभाव, कष्ट, क्लेश सब
- 18:42मैंने पोट लिया है, लेकिन तुम एक काम करना मेरा समझ के करना।
- 18:54मुझे आवश्यकता है तुम भूमि को तैयार कर लेना जब मैं हूँ बीज को
- 19:06गहराने के लिए तुम्हारी भूमि मुझे तैयार व तैयार मिले।
- 19:14उसमें हल चला दिया गया हो, उसमें पानी लगा दिया गया हो, उसमें खाद
- 19:22बिखेर दी गई हो। बीज तो मैं फेंक ही दूंगा, बीज की
- 19:31चिंता मत करना। इतने जन्मों में तुमने एक ही गलती
- 19:38की है, वो गलती ये की है कि तुमने अपने आपको शरीर से समझा।
- 19:50मन समझा विचार समझा भावनाई समझा जो तुम थे नहीं, लेकिन फिक्र मत
- 20:00करो मैं बोल बोल के जब हट गया। और तुम्हारी समझ में फिर भी ना
- 20:13आया तो मैं तुम्हें वो पीला दूंगा, वह जाम उठाऊंगा।
- 20:24तुम्हारे लब से लगा दूंगा तुम मुझसे गटक जाना।
- 20:31और गटकने के बाद फिर तुम्हें मुझे बताने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी की
- 20:38यह कैसी है। इसका स्वाद कैसा है?
- 20:45फिर तुम्हें उस आनंद को पीना है। हर घड़ी, हर पल उसी में खोए रहना
- 20:52है। कृष्ण जानते हैं अर्जुन को मैं जब
- 20:59गीता बोल रहा हूँ अर्जुन उसे समझ नहीं पायेगा।
- 21:06शब्दों से कभी कोई समझ सका। शब्दों की मेहनत बेकार हो जाती
- 21:13है। कितनी ही सुरेली आवाज हो, कितनी
- 21:20ही गहरी हो, लेकिन तुम्हारे हृदय में नहीं उतरती वो और गुरु?
- 21:27बखूबी जानता है कि जब मेरे शब्द काम ना कर पाए तो मेरा पैमाना तो
- 21:36काम कर ही जाएगा, यह उसके पास अंतिम उपाय फिर तुम्हें पिलाएगा।
- 21:48और फिर तुम झूम उठोगे ऐसे मदहोश हो जाओगे ऐसी खुमारी चढ़ेगी तुम
- 21:59पर कि तुम सब भूल जाओगे। दो।
- 22:08कुट फिला दे सकीय दो कुट फिला दे। दो।
- 22:36कुठ फिला दे? बाकी मेरे तेरे होड़ दे।
- 22:51दो कुट। पीला दे शाकी।
- 22:57के दो भूट जो पिलाएगा गुरु उसके लिए तैयार हो जाना।
- 23:03बस यही मैं कहता हूँ, तमन्ना तो बहुत है तुम्हारी तुम्हारे शब्दों
- 23:11में झलक है मुँह मुखशा तुम पीना चाहते हो?
- 23:23ये शब्द तुम्हारे बताते हैं कि तुम चाहते हो पीना और मैं उड़ेलना
- 23:31जानता हूँ तो फर्क कहाँ है कमी कहाँ है थोड़ा सा पीने के लिए
- 23:40तैयार हो जाओ। क्योंकि जब तुम होश गँवाओगे
- 23:48मदहोशी के उस आलम में चले जाओगे तो तुम्हें तुम्हारी सुधबुध खो
- 23:54जाएगी, तुम्हें तुम्हारा भी पता नहीं चलेगा।
- 24:03ऐसे मस्त हो जाओगे किस्से क्या कह पाओगे, कुछ नहीं कह पाओगे, सिर्फ
- 24:13चुप हो जाओगे। तुम जब मौन में उतर जाते हो इसे
- 24:21पीकर और कौन है जो मून में नहीं उतरता, इसे पीकर जो पी लेता है,
- 24:29वह मौन में उतर ही जाता है और कोई उपाय भी तो नहीं है लेकिन।
- 24:40तुम पीने के लिए तैयार हो जाओ, भूमि को तैयार कर लो बीज मैं बो
- 24:48दूंगा, उसकी चिंता ना करो, तुम मेरा एक काम कर दो।
- 24:57तुम अपनी भूमि को तैयार कर लो, भूमि को हाल जोत लो, भूमि में
- 25:07पानी लगा दो, भूमि में खाद बचा दो बीज दो में।
- 25:15बिखेर ही दूंगा, बीज तो अंकुरित हो जाएगा और पौधा बनेगा, पेड़
- 25:23बनेगा पर लगेंगे, फूड लगेंगे और तुम आनंद से जोमोगे ये फिक्र मत
- 25:33करो। फिकर करो तो सिर्फ ये करो अतीत
- 25:38में तुमने जो गलती की गलती ये की तुमने तैयारी नहीं की पीने की
- 25:49गुरु तो तब भी था, गुरु तो आज भी है।
- 25:54गुरु कभी कहीं जाता नहीं है। आज भी गुरु तुम्हें फैलाने को
- 26:00तैयार बैठा है। बस तुम पीने के लिए थोड़ा तैयारी
- 26:04कर लो और जैसे ही तुम्हारी तैयारी होगी।
- 26:12मैं पैग तुम्हारे लब से लगा ही दूंगा, उसकी चिंता मत करना वो
- 26:20फिक्र मेरे पे छोड़ दो पेला मैं दूंगा ओठों से मैं लगा दूंगा।
- 26:31बाकी सारा काम मैं खुद कर लूँगा तुमने सिर्फ एक काम करना है,
- 26:40तुमने पीने की तैयारी कर लेनी है बस जैसे ही तुमने पीने की तैयारी
- 26:50कर ली। उडेलने वाला तो बैठा है, पिलाना
- 26:56वाला भी बैठा है और पिलाने वाले के पास भरे जाम भी पड़े हैं और वो
- 27:03जाम कभी खत्म नहीं होता है, वो जाम मैखाने से नहीं आते हैं।
- 27:12वो जाम तो मेखानों के समुद्र से आते हैं, वो कभी कम नहीं होते और
- 27:20कभी खत्म नहीं होते बाकी सब मैं उठ लूँगा, मेरे बच्चे।
- 27:32तुम सिर्फ तैयारी किये रखना मैं आऊंगा तुम्हारे द्वार पे और तुम
- 27:41मुझे तैयार मिलो और तुम पाओगे मेरे हाथों में जाम।
- 27:52और उस जाम को मैं तुम्हारे होंठों से लगा दूंगा।
- 27:59तुम उसे? गठित जाना और मुझे बतलाना मत इसका
- 28:05स्वाद कैसा? कबीर ने कहा।
- 28:09जों गूंगा गुड़ खाई के कहे कौन मुख स्वाद कहा भी नहीं जाता उसका
- 28:16स्वाद तुम कहने की चेष्टा भी मत करना और मैं अगली बात भी बता दूँ
- 28:23अगर तुमने कहने की चेष्टा भी की तो तुम कह ना पाओगे।
- 28:29तुम पर मौन में उतर जाओगे जहाँ कोई कोलाहल नहीं, कोई शोर नहीं,
- 28:41कोई आवाज नहीं, ऐसा मत हो। ऐसा मधुर वातावरण है, वहाँ का
- 28:53मदहोशी के आलम में तुम उसके पास बैठे बैठे पर मॉल में उतर जाते
- 28:59हो, तुम तैयारी पूरी रखना। जैसे ही मैं आऊं तो मैं तैयार
- 29:13पाऊं, तुम इंतजार करते पाओ कि बस मैं आऊंगा और वो जाम तुम्हारे
- 29:25होंठों से लगा दूंगा तुम गटा गट पीर जाना।
- 29:31इतना सा काम तुम कर लेना बाकी काम मैं कर लूँगा सब मेरे पे छोड़ दो
- 29:42अहम तो हम सर्व पापे भ्यौ मोक्ष श्याम माँ सुचार तू फिकर न कर।
- 29:50तू चिंता न कर मैं तुम्हें वो जाम दिलाऊंगा जिससे जाम को पीकर सूती
- 29:58बूती खो देता है हाथ में। सुध विसरा गयो मोरी रे।
- 30:21सुध विसरा गयो मोरे वो कला। इक।
- 30:39ब सुरीवाला सुद बिसराग ओह मोरी रे?
- 31:01माखन चोर व नन्द किशोर जो कर गयो मन के।
- 31:15चोरी रे शुध विसरा गयो मौत अरे वो काला।
- 31:34इक। बां सूरी वाला ओह काला।
- 31:43इक। बां सूरी वाला।
- 31:49धन्यवाद।