Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Feb 25 - क्या दुनिया का अंत हो जाएगा? ध्यान के सर्वशक्तिमान तल! Meditation Juncture Point
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- 0:03परमबोज बाबा जी को मेरा पुन कई दिलों से मेरे मन में एक प्रश्न
- 0:12घूम रहा। है।
- 0:15सोचा कि आपसे पूछ। लूँ।
- 0:19मुझे यूट्यूब पर एक वीडियो मिला जिसमें भविष्य मल्लिका किताब में
- 0:26क्या लिखा है वह बताया गया था। उसमें बताया गया है कि 2000।
- 0:3325 की शुरुआत में। जैसे ही शनि मेन राशि।
- 0:36में प्रवेश करेगा। वैसे ही दुनिया का अंत होना शुरू
- 0:43हो जाएगा और अधिकांश मानवता समाप्त हो जाएगी पूरी दुनिया की
- 0:51आबादी। में से सिर्फ 40।
- 0:53लाख लोग ही बच गए। मन बड़ी दुविधा में।
- 0:58है। जब दुनिया समाप्त ही हो जाएगी,
- 1:02फिर कर्म करने में मान्य नहीं लगता है।
- 1:05कृपया मार्गदर्शन करें। भविष्य मलका में क्या लिखा है?
- 1:25क्या नहीं लिखा है इस बात के ऊपर ज्यादा?
- 1:32कोर मत करें। लोग कहते है ज़माना बदलता है
- 1:42अक्सर मर्द वे है जो ज़माने को बदल।
- 1:47देते है। जब दुनिया।
- 1:53का अंत होगा हो जाएगा। अभी से तुम चिंता।
- 1:58क्यों रहने लगे तुम? तुम्हारे राहों पर चलते रहो।
- 2:09दुनिया रहेंगी तो जी। लेना दुनिया मिट जाएगी।
- 2:17तो मर जाना। हर्ज़ा अभी क्या है?
- 2:26मैंने अपने 2023 24 की विश्व की थी।
- 2:34लेकिन कोई भविष्यवाणियां। सत्य हैं ऐसा हमने।
- 2:41कैसे हो? ओके, मैंने अपने एक।
- 2:46पिछले प्रवचन में? आपसे कहा था कि अहिल्या।
- 2:57पत्थर की शिला से अहिल्या कब? बन जाएगी।
- 3:02यह भगवान राम आएँगे। तृता योग में।
- 3:06और भगवान राम जब छुएंगे अपने पांव?
- 3:11से इस शिला को? तो यह अहिल्यापूर्ण है जागृत होकर
- 3:18स्त्री बन जाएगी अहिल्या, क्या हुआ?
- 3:26निश्चित था, बिल्कुल निश्चित था। सतयुग के बाद द्वार पर फिर रहता
- 3:34है। फिर कजूका ये चक्र है।
- 3:45लेकिन शतानंद बाधित हो गया। और।
- 3:51सतानंद को समझाया किसी संत ने। कि तुम उस मुकाम पे चले जाओ
- 4:04यद्यपि वो मुकाम कहने में बड़ा। शरल है मैंने बहुत बार।
- 4:08बोला है। उस जंक्चर पायक पे।
- 4:11पहुँच जाओ। लेकिन तुम उलझने को तैयार।
- 4:17हो उलझाने। वाली बातें तुम्हें बड़ा मुग्ध।
- 4:20करती है सुलझाने। वाली बातें तुम्हारी समझ में।
- 4:25आती है। तो किसी संत ने उसे।
- 4:30कह दिया कि उस जंक्चर। पॉइंट पे चले जाओ उस जंक्चर।
- 4:35पॉइंट पे। पहुँचकर थोड़ा सा नीचे जाओगे।
- 4:40तो तुम सर्वशक्तिमान हो जाओगे और देखिये यह।
- 4:49काबिलियत प्रत्येक मानव में है, जिसने मनुष्य शरीर धारण कर लिया
- 4:57है। गौर से समझ लेने जिसने मनुष्य
- 5:03शरीर धारण कर लिया है। वह प्रत्येक व्यक्ति में यह
- 5:09काबिलियत। है।
- 5:13इसलिए मनुष्य शरीर का इतना। महत्त्व है।
- 5:18अन्यथा कोई कारण मनुष्य जीतने। पाप करता है मनुष्य जीतने।
- 5:26विनाश करता है बेवजह से खिलवाड़ में अब हिटलर?
- 5:35ने इतने व्यक्ति गैस चेम्बर्स में भून दिए।
- 5:38किसी ने उसका क्या जुनून था? और यह जुनून बहुत शुरू।
- 5:49से चलता रहा है। और यह जुनून आज।
- 5:53भी है, परमात्मा है इंसान। की तरह व्यक्ति को जन्म।
- 6:02देता है, लेकिन वह। इंसान रहन को तैयार नहीं।
- 6:09वह हिंदू, मुसलमान, सिख, इसाई, यहूदी, पारसी।
- 6:14ये हो जाना चाहता है। और मैं आपसे एक बात।
- 6:18कहता हूँ, लिख लो, लिख लो। जब तक धर्म को।
- 6:27इस प्लानेट्स तुम खत्म नहीं करते जो व्यक्ति कहता है।
- 6:36वह इंसान नहीं, मैं हिंदू। जो व्यक्ति कहता।
- 6:41है। मैं इंसान नहीं मुसलमान।
- 6:43सिख हूँ ईसाई हूँ पादरी। कानूनन उसको दंडित किया जाए।
- 6:57अभी तो तुम धर्म के नाम पर पूजा करते हो?
- 7:04तो धर्मांध लोग पैदा? होते है।
- 7:09धर्म को एक कानूनी अपराध। जब तक मान्यता तुम।
- 7:14घोषित नहीं करोगे तब तक? ऐसे पागल।
- 7:16दुनिया में जनमते रहेंगे और दुनिया का विनाश करते रहेंगे।
- 7:23कितनी लड़ाईयाँ हुई धर्म के नाम पर?
- 7:26इस प्रति और कितने स्वार्थ? साधे गए।
- 7:31धर्म के नाम पर। इस प्रति पर।
- 7:38दो। टके का व्यक्ति नहीं होता।
- 7:40पागल होता है मूर्ख होता है। और धर्म के नाम।
- 7:44के ऊपर राजगति बिगड़ जाता। है।
- 7:47क्या मजाक है सत्य आनंद?
- 8:03उस मुकाम पर पहुंचा गौतम ऋषि ने अपने ही धर्मपत्नी।
- 8:11को। बेकसूर धर्मपत्नी को श्राप दे
- 8:14दिया कि जा। तो शिलावत हो जा और उसका पुत्र
- 8:23स्वतंत्र। उपाय सोच रहा था कि।
- 8:27अब क्या किया जाए तो? किसी संत ने समझाया।
- 8:38सतयुग का अर्थ। जब संत प्रचुर मात्रा में।
- 8:41उपलब्ध है और जब संत। थोड़े रह।
- 8:52गए आज ही रह गए। और त्रयता।
- 8:59जब संत और। भी आते रह गए और।
- 9:03कलयुग जब संत अपनी कोशरी। के भीतर बैठे।
- 9:08नजर ही नहीं पांडाल लगाए। बैठे हैं।
- 9:13नकली संत प्रचार कर रहे हैं परमात्मा के नाम के ऊपर।
- 9:20और और चीजों को पाने की लालसा रखते हैं।
- 9:26व्यापार कर रहे हैं। पहले संत कभी व्यापार करता है।
- 9:36जो व्यापार करे वो संत। रहे।
- 9:40संत व्यापार नहीं और संत व्यापार। करेगा तो गड्ड मड्ड हो।
- 9:46जाएगा। ये बाबा नानक ने व्यापार किया और
- 9:53मोदी खाने के। ऊपर 1 दिन भिणक लग गई।
- 9:58और तौले जा रहे हैं, तगड़ी से 123।
- 10:0045121313। उलझ गए 13 मेरा।
- 10:10क्या है? मेरा कुछ नहीं।
- 10:1213। वो दिख गई असली।
- 10:19और टूट गए भ्रम सतोरी की पहली बार।
- 10:23घटना घटी संत व्यापार ऐसा गड वर्ड।
- 10:27करेगा? संत व्यापार नहीं कर सकता।
- 10:34कबीर के पास कोई आ। जाते हैं।
- 10:37ऐसा कर ये राजा की बेटी की शादी है।
- 10:42ये कम्बल पहले से बोलते है। ये चादर पहले से बोलते है तो कबीर
- 10:50कहते देखो भाई। जो जैसे जैसे आया है।
- 10:54वैसे वैसे उसका। तुम कहीं और से बना।
- 10:59लो ओह कबीर जी ये राजा का? फरमान है तो कबीर कहते है किसी।
- 11:11का भी फरमान। मेरे पास जैसे जैसे ग्राहक आए
- 11:16हैं। वैसे वैसे मैं उनका काम करूँगा।
- 11:20यहाँ राजा के फरमान। सुनाने की जरूरत नहीं है।
- 11:23मैंने कोई अपराध नहीं किया। है।
- 11:31तो फिर वो साम, दान, दंड, भेद। फिर दान करते हैं मेहनताना दुगना
- 11:39ले लेना 10 गुना ले लेना। अति आवश्यक है, लेकिन।
- 11:45कबीर कहाँ काबू में आते? हैं।
- 11:50तुम समझौता। करो।
- 11:53तुम पुरस्कार दो, तुम कीमत ज्यादा तुम दंड का वेह दिखाओ।
- 12:00लोग दिखाओ कबीर जैसे लोग। काबू में आने को नहीं।
- 12:10और यहाँ तो तुम्हारे आज के महात्मा।
- 12:12है तुम्हे योग? के नाम पर तुम्हारा वियोग।
- 12:16करवा देते है परमात्मा। कहकर आते है।
- 12:21योग परमात्मा से जोड़ दूंगा लुत्फ।
- 12:25उठाओगे। अन्यथा शरीर को टेड़े मढ़े करने
- 12:29की आवश्यकता। है विज्ञान?
- 12:34कभी मुर्गे बन। गए, कभी मछली बन गए।
- 12:38मतस्य आसन कभी हाल, आसन, उत्तानपाज आसन, कशीब शासन आदमी
- 12:48हो। अरे, पांव के बाल।
- 12:51खड़े हो जाओ। भीतर के आंतों को हिलाना।
- 12:58उसने सब परफेक्ट जन्म दिया। है ये?
- 13:03सर्कस अगर नहीं भी करोगे। तो चलेगा।
- 13:12लेकिन आपके गुरु आते हैं योगाचार्य बनकर और कहते हैं कि
- 13:20ऐसा। बहुत ये देखो खुला बहुत है।
- 13:25यहाँ से वायु गुजरती है। हमारे शरीर में प्रति सेकंड के
- 13:30भीतर प्रति जगह। रोम है छोटे छोटे रोम कुंभ।
- 13:37उनमें से हवा गुजरती है। शरीर के लिए बड़ी लाभकारी।
- 13:46और वही व्यक्ति वक्त पाते। है थोड़े ज्यादा।
- 13:51लुक सुनने शुरू हो जाते। है तो फिर वो।
- 13:55वही जीन्स बेचना शुरू कर। देते है फटे हुए जीन।
- 14:01बड़े सदगुरु आते है। महाकाल का डर दिखाते।
- 14:07हैं। महाशिवरात्री के ऊपर पूजन
- 14:11करवातें। हैं।
- 14:12घंटे बजवाते हैं और फिर। व्यापार।
- 14:23करना शुरू कर देते है। ऑनलाइन अपने बिज़नेस बेचने शुरू।
- 14:30कर देते है, लेकिन कबीर? ऐसा नहीं करते कबीर?
- 14:39कैसे है भैया तेरे को? मैं पूछ लेता।
- 14:43हूँ। इसके बाद जिसका नंबर है।
- 14:47अगर वो कह देगा कि चलेगा पहले राजा।
- 14:50का काम कर दो। तो मैं कर दूंगा, अन्यथा तुम्हीं
- 14:55जाके पूछो। इतना कष्ट, मैं भी मैं अपने मस्ती
- 15:00में बैठा हूँ। भजन गुनगुना रहा हूँ।
- 15:04तुम्हारा क्या लेता? हूँ।
- 15:08जैसा पहले आए। वैसा पहले काम कर जाएगा।
- 15:14कबीर को कोई लोग नहीं। और तुम चाहते तो हो कबीर ही।
- 15:23तुम चाहते तो हो फकीरी। लेकिन तुम?
- 15:28फकीरी वो चाहते हो जिसके। भीतर राजशाही की खुशबू है।
- 15:39गरीबी। की फकीरी तुम नहीं चाहते?
- 15:43तुम फकीरी चाहते हो अमीरे की? और तुम उलझ जाते हो।
- 15:56तो उस सतल पर। पहुंचे शतान।
- 16:00जिसका मैं अक्सर जिक्र। किया।
- 16:05तुम्हारी बाहर की इच्छाओं को, वासनाओं को, तृष्णाओं को,
- 16:09कल्पनाओं को। तुम्हारे।
- 16:12स्वप्नों को तुम्हारी भीतरी कल्पनाओं को।
- 16:17मूर्त। रूप देने के लिए दो।
- 16:20आयाम है। बाहर का आयाम और भीतर का।
- 16:26आयाम तुम बाहर के आयाम। पर भी चल सकते हो।
- 16:33वह तो भेड़ों का। झुंड चल रहा है।
- 16:35कॉम्पिटिशन ही कॉम्पिटिशन। तो भेड़ो के झुंडके साथ लग जाओ,
- 16:46तुम भी कॉम्पिटिशन। करो।
- 16:48वह दौड़ रहे। है तो वह दौड़ने लग जाओ।
- 16:55और उनसे आगे बाज़ी मारलो तेज तेज दोनों।
- 17:02तो तुम्हारी वासनाएँ तुम्हारी इच्छाएं, तुम्हारे लालच, तुम्हारे
- 17:06प्रलोभन। तुम्हारी।
- 17:10कल्पनाएं पूरी होंगी। एक तो।
- 17:12बाहर से वह तो सारा। संसार कर रहा है।
- 17:19अब कलयुग है। समझाने वाले बचे नहीं।
- 17:30यह आवश्यक। भी है।
- 17:35क्योंकि धर्म के एक पांव। रहता है।
- 17:40सतयुग में चार पांव। द्वापर में दो पांव तीन।
- 17:48पांव रेहता में दो पांव। और फिर कलयुग में एक।
- 17:56पांव। ये सब आपके शास्त्रों में लिखा
- 18:03हुआ है इसकी एक्सप्लनेशन करनी। शुरू मत कर देना बस सिर्फ ये समझ
- 18:11लेना कि धर्म लगातार लूज़ हो रहा है धर्म।
- 18:17यानी स्वयं को पाने की कला। जैसे जैसे योग पलटेगा बदलेगा।
- 18:29अपने आप। को पाने की इच्छा अपने आप को।
- 18:33पाने की कवायद कम होती। जाएगी।
- 18:40बस यही मतलब था शास्त्रों में। वो धर्म का एक पांव रह जाता है
- 18:47कलयुग। में।
- 18:50बस कोई कोई। बिरला गुरु तेग बहादुर।
- 18:55किसी झोंपड़ी के भीतर अकेले बैठे हैं।
- 18:59मस्त। कोई कबीर ना कछु।
- 19:04लेना ना कछु लेना, कबीरा मकर कबीरी।
- 19:12तुम भी ऐसी ही कबीरी। चाहते हो लेकिन मुश्किलात।
- 19:17तब पैदा। होती है जब तुम कहते हो।
- 19:20ये कबीरी अमीरी के साथ। आनी चाहिए ये दुविधा उत्पन्न कर
- 19:26लेते। हो तो तुम्हारे सद्गुरु कहते हैं
- 19:33के पहले अमीर अमीर होकर फिर कबीर। और जो व्यक्ति ऐसी बात सोचेगा।
- 19:44वह तुम्हें उल्लू बना रहा है क्योंकि जहाँ सीधे सीधे।
- 19:49छलांग लग सकती है, वहाँ मोड़ घोड़ करने का फायदा।
- 19:56क्यों? उलझा रहे हैं ये लोग।
- 19:59कोई निहित स्वार्थ है इन लोगों? का?
- 20:04और वो निहित स्वार्थ। क्या है ये स्वय को?
- 20:08पाए। नहीं और तुम्हें चाहते नहीं।
- 20:11कि तुम स्वय को हो। तो ये प्रत्येक आये हुए व्यक्ति
- 20:18को अपना। ग्राहक समते है।
- 20:20तुम जल्दी करो। ये बाणा पहन लो और ये लो मैं
- 20:24शक्तिपत कर देता हूँ, यहीं बैठ जाओ।
- 20:30ऐसे व्यापारियों की दुनिया कलयुग। में पैदा होगी सच्चा संत
- 20:38मार्गदर्शक। कहीं कहीं मिलेगा इसलिए धर्म का?
- 20:44एक पांव होगा। उस वक्त सतयोग था।
- 20:50चार पांव। थे, सहज सुलभ थे।
- 20:55मार्गदर्शक कोई शिविर का आयोजन। कोई फीस नहीं, कोई एंट्री फीस
- 21:03नहीं, बस आपने प्रश्न किया। प्रश्न बताई और उन्होंने तरीका।
- 21:11बताया तो सतानंद उस मुकाम। पर पहुँच गए उसे जंक्चर।
- 21:17पॉइंट गए। तो उस।
- 21:19जंक्चर पॉइंट पे बहुत। से रास्ते है मैंने आपको।
- 21:22पहले भी बताया था। बहुत।
- 21:26सी सड़कें फटती है वहाँ से बहुत। से मार्ग निकलते है वहाँ से कोई
- 21:32गिनते नहीं है। उनके।
- 21:36असंख्य रास्ते हैं अगर। उन सभी रास्तों को आप।
- 21:45छोड़ दोगे? थोड़ा सा नीचे आ जाओगे वहाँ पर
- 21:54आप। जो सोचोगे वो हो जायेगा।
- 22:03तुम्हें प्रयास करने की आवश्यकता नहीं नी प्रयास अब प्रयास।
- 22:09जो तुम चाहते हो? वॉटेवर यू डिमैंड व्हाटएवर यू।
- 22:18डिमैंड। देखिये मैं थोड़ा सा।
- 22:22ज़ोर से बोला ये सब। तुम जो चाहते हो, वह तुम्हें वहाँ
- 22:31से मिल। सकता।
- 22:31है। संसार में जो चाहते हो वह।
- 22:38नहीं मिल सकता। तुम चाहते हो मैं जैज।
- 22:40बन जाऊं बन जाओ। लेकिन डॉक्टर।
- 22:43तो नहीं बन सकोगे? नहीं बन सकू।
- 22:48तुम चाहते हो, मैं डॉक्टर। बन जाऊं बन जाओ।
- 22:51इंजीनियर क्यों नहीं बन सकोगे नहीं बन सके।
- 22:58तुम चाहते हो मैं? इंजीनियर बन जाऊं तुम प्रेम
- 23:02निश्चित तो नहीं? बन सकोगे नहीं बन सकूँ।
- 23:06तुम चाहते हो मैं पीएम बन जाऊं और पीएम बनकर आनंद से।
- 23:11रहूँ शांति। पूर्व करूँ हो सकेगा नहीं।
- 23:16पीएम बनकर 2000। बोझ वर्जन रोज़।
- 23:20आपको घेरने के प्रयास होंगे। देखो आज क्या कुछ।
- 23:24नहीं हो रहा। कोई कहता ईबीएम हटाओ कोई।
- 23:28कहता मोदी कोई हटाओ कितने झंझट। बड़ा।
- 23:35सेट होने में कितने झंझट है सेट हो के देखना फिर पता चलेगा।
- 23:41आज जामनगर की रिफाइनरी। के भीतर हड़ताल हो गई।
- 23:47उससे निपटों जाके ये। फंक्शन तो बाद में निपटा।
- 23:54लेंगे। अगर ये रिफाइंडली बंद होगी।
- 23:56तो मुश्किल हो जाएगा। संत जितना मग्न होता है।
- 24:03घोड़े बेच के सोता। है।
- 24:08तुम्हारा पीएम तुम्हारी नजरों में बड़ा है।
- 24:14परमात्मा की नजरों में पड़ा ना? परमात्मा की नजरों में वो बड़ा
- 24:20जिसकी इच्छाएं में अटके तुम्हारी। नजरों में तुम्हारे शेठ बड़े।
- 24:32सारी। धरती का एक नंबर खजाना के पास
- 24:35इसके पास लेकिन। परमात्मा की नजरों में वो बड़ा।
- 24:39नहीं परमात्मा। से बड़ा कौन हो सकता?
- 24:44है, वह तो सबका मालिक। है।
- 24:51उसकी धरती पर ही तो आपने सभी फैक्टरीज़ लगाई।
- 24:56यहीं से सब लिया और यहीं। छोड़ जाओगे तो?
- 25:04आप समझते हो कि फलां सुखी? है, लेकिन सुखी नहीं होता।
- 25:10सच में पूछो तो सुखी। एक ही व्यक्ति।
- 25:13होता है। आपको सत्य बतला रहा।
- 25:21हूँ उमा कहूँ, मैं अनुभव अपना। ओमा कयूं में अनुभव, अपना सत हरि
- 25:29भजन जगत सब। से।
- 25:34एक ही व्यक्ति सुखी होता। है।
- 25:39जिसने अपना आपा उस प्रभु के हाथ में सोती है।
- 25:44बस अब तू चला। और ये कहता कब है?
- 25:50जब वो देख। लेता है कि।
- 25:51चलाने वाला तो पहले भी वो ही है। जब वह देख लेता है।
- 25:57बाबा नानक। कि उसका ही है।
- 26:02तो फिर कोई भी किसी तरह। की आपत्ति नहीं होती तेरा कहने
- 26:06में लेकिन ध्यान रखना ये तेरा जो भीतर से।
- 26:11आता है। यह कुछ देखने के पश्चात।
- 26:14आता है तुम्हारा तेरा बिना देखे आता है।
- 26:21नानक का तेरा कुछ देखने के बाद। आता है।
- 26:26नानक देखते हैं आँख ऊपर उठाते हैं अरे ये तो खेल।
- 26:30ही सारा मालिक का है। ये तो रचना।
- 26:35ही सारी उसकी है। मेरा यहाँ कुछ।
- 26:41वहाँ। से स्वर्ग प्रस्फुटित होते हैं।
- 26:46131313 कहते तो तुम भी हो 1313, लेकिन वो नकली होता है, वो
- 26:53दिखावटी होता है, वो बनावटी होता है।
- 27:01बाबा नानक को भरोसा हो जाता है और मैंने पहले भी कहा भरोसा।
- 27:09सुनी सुनाई बात से नहीं। होता लिखा लिखी।
- 27:19की है। नहीं देखा देखी।
- 27:21बात देखने से होता है। आँखें बड़ी बहुमूल।
- 27:28है। दर्शन बड़ा बहुमूल।
- 27:31है। जब तक दर्शन नहीं।
- 27:34होगा तब तक तुम। सच्चाई को देख न।
- 27:39पाओगे और जब तक सच्चाई को देख न। पाओगे?
- 27:43फिर चाहे सुन लो फिर चाहे। छू लो फिर चाहे सारी।
- 27:49ऐंद्रियों से उसको जांच परख लो लेकिन जब तक तुमने आँखों से नहीं।
- 27:55देखा? तब तक शंका बनी।
- 27:58रहती है। लाख?
- 28:00तुम्हारे जीवन में। चमत्कार होंगे लेकिन तुम उनको।
- 28:05कोइंसिडेंट कह के डालते हो? इट्स वी अरे कोइंसिडेंट?
- 28:11हो गया होगा। लेकिन इट्स नॉट ए रूल।
- 28:16ये अपवाद है। तो बाबा नानक सच में देख।
- 28:23लेते है उसका ही है। मैं तो व्यर्थ में अपने।
- 28:32आपको फंसाए बैठा हूँ। तो भीतर से उदघोष निकलता।
- 28:37है। और ये?
- 28:45बनावटी नहीं होता ये दखावटी। नहीं होती।
- 28:50ये सच्चा भीतर से उठा। हुआ उदघोष होता है।
- 28:54उदगार आते हैं भीतर से। यह नहीं होते यह वास्तविक होते
- 29:00हैं। शतानंद उस जगह पहुँच।
- 29:10गए। अब ये बड़े उलट उलट मसले।
- 29:17हैं। और मनुष्य?
- 29:22चाहता है कि मैं समझ। जाऊं मेरे पास रोज़।
- 29:26ऐसे व्यक्तियों के। प्रश्न आ जाते है, रोज़ प्रश्न आ
- 29:33जाते है। और मैं उनके कोई जवाब।
- 29:37नहीं देता क्योंकि उनके जवाब है नहीं।
- 29:42क्योंकि उनके प्रश्नों में एक। मूल बात होती है।
- 29:45कि हमें समझाओ। क्या समझाऊं?
- 29:48कि गागर में सागर समायेगा? कैसे?
- 29:53तो मैं चुप हो जाता हूँ। क्योंकि गागर में सागर समाह।
- 29:59ही नहीं हो सकता। इसलिए मेरा बोलना व्यर्थ।
- 30:02है। तो मैं उनका कोई प्रश्न का जवाब।
- 30:05नहीं देता। और फिर वो भद्रपुष जिद करते है,
- 30:14मुझे गालियां भी निकाल देते। है।
- 30:25फिर बोलना क्यों शुरू किया? फिर प्रश्नों का जवाब मेरा प्रश्न
- 30:29तो जवाब दे नहीं। सकते।
- 30:33मैं कुछ नहीं करता। मैं जानता हूँ प्रश्न व्यर्थ।
- 30:39पर अब तुम भी घाघर में कभी सागर सुनाया।
- 30:42है तो ये उसको नहीं। सोचना चाहिए जो ऑपरेशन करता।
- 30:48है। तो फिर जब उलट उलट बोलना शुरू कर
- 30:53देता है। तो सब ब्लॉक कर देता है।
- 31:02ब्लॉक करने का अर्थ सिर्फ। ही है कि वह ऐसे।
- 31:07मूर्खतापूर्ण प्रश्न न करें। सुनने का अधिकार तो मैं।
- 31:12छीन नहीं सकता। सुने मज़े से सुने लेकिन जैसे
- 31:17मैंने पिछले प्रवचन में कहा। के अंधा है।
- 31:21ये हरे को पीला भी कह दे तो कह देगा।
- 31:25पर मैं कहाँ तक साबित। करूँगा।
- 31:26इसको अंधे को कभी रंगों के बारे में साबित किया जा सकता है।
- 31:33अंधों को समझाऊंगा कैसे? के नहीं, ये हरा नहीं है ये नीला
- 31:38नीला नहीं पीला है, सफेद है। काला है समझा।
- 31:42सकता है कोई नहीं समझाया। जा सकता।
- 31:47क्यों? क्योंकि बेसिक बुनियादी उसमें
- 31:52प्रतिभा। नहीं है।
- 31:54यंत्र नहीं है, जिससे। रंगों को पहचान सके।
- 31:59कौन सा यंत्र आँखें नहीं तो प्रश्न।
- 32:05पूछ लेते हैं लोग? और गालियां भी निकाल देते हैं।
- 32:14और ऐसे ही चलता रहता है। तो?
- 32:19बस मैं उनके कमेंट करने के अधिकार को छीन लेता हूँ।
- 32:24बस तुम सुनते जाओ तुम्हारे। प्रश्न ऐसे ही बेहूदे होंगे, जब
- 32:30तक तुम आँखें ना पालोगे जिससे तुम्हें आंख मिल गई।
- 32:36उस दिन तुम पछता। गए।
- 32:40मैंने तो वृथ में ही क्रोध किया। मैंने तो वृथ में ही अपने खुद के
- 32:49तंतू जलाये। मैंने वृथ में ही रातों को
- 32:52परेशानी झेली। बाद में पता चलेगा।
- 33:01तो सतानंद उस स्थान पर पहुंचते हैं जहाँ से बदला जा सकता है सब।
- 33:08कुछ इसलिए मैं कहता हूँ बुद्ध। जहाँ पर ठहर।
- 33:14गए और उससे आगे जहाँ। उन्होंने।
- 33:17कहा। कि 14 प्रश्नों के जवाब मैं नहीं
- 33:20दूंगा बस वो इसीलिए। के आगे समज से।
- 33:25बाहर हो जाती है बात। और तुम जिद करोगे के।
- 33:29समझाओ। ये बुद्ध देवता जी समझाओ।
- 33:35और बुद्ध बखूबी। जानते हैं कि नहीं समझाया।
- 33:38जा सकता तुम्हारे। आज के साइंटिस्ट्स तक कह।
- 33:43देते हैं इस नॉट। ओनली अननोन बट।
- 33:45ऑल्सो अननोनबल तो बुद्ध नहीं जानते होंगे।
- 33:51वह न जाना जाता। है और जब जाना नहीं जाता तो
- 33:54समझाया कैसे जाता? है।
- 33:59इसलिए बुद्ध ने कहा देखिये इन 14 प्रश्नों का जवाब मुझसे मत मांगिए
- 34:03सबसे पहला तो इलाज। आप।
- 34:05का कीजिये। अगर आपके पांव पे।
- 34:09या हाथ। पे या किसी जगह कैंसर है।
- 34:15और आप खुद से। कहें जाके के मुझे बताओ कि मैं
- 34:19शरीर नहीं हूँ। मेरे शरीर के कैंसर है।
- 34:27मुझे ये। समझाओ कि मैं शरीर कैसे नहीं हूँ,
- 34:32तो बुध थोड़ा सा सहज चलते। है।
- 34:39बुध कहते पहले तुम इस कैंसर का इलाज करो।
- 34:43बाद में सीख लेना। निश्चित।
- 34:46रूप से इंद्राया, तुम नहीं। हो लेकिन ये जो।
- 34:52कष्ट का कारी दिन है कैंसर तो बहुत।
- 34:56लंबे चलेगा और तुम पता नहीं कब समझोगे।
- 34:59कब नहीं समझोगे, थोड़ा सा कैंसर का इलाज कर लो?
- 35:07तुम्हारे पेट में दर्द होता है। तुम।
- 35:10डॉक्टर से कहते हो मुझे समझाओ ये पेट मैं नहीं इसलिए दर्द मुझे
- 35:17नहीं हो रहा। पेट को हो रहा है।
- 35:19और पेट। में हूँ नहीं तो डॉक्टर।
- 35:22कहेगा देखो भाई। पहले।
- 35:24तुम दर्द से छुटकारा तो पालो, वह तो बड़ी लंबी प्रोसेसर।
- 35:28है। वह तो पता नहीं है तुम्हे कब पता
- 35:32चलेगा तुम पहले इस त्रासदी से निजात तो पाओ, इस दर्द से छुटकारा
- 35:39तो पाओ तो? बुद्ध अपनी जगह बिलकुल।
- 35:41ठीक है। और वो भैया भी जानते।
- 35:44हैं। कि इससे आगे भी कुछ।
- 35:49मुकाम है। राहतें और भी हैं फसल की राहत के
- 35:57सिवा। और भी दुख हैं जमाने में।
- 36:06मोहब्बत के सिवा। वो तो अच्छी तरह से।
- 36:10जानते हैं। लेकिन बुध किश्तों में आपका इलाज।
- 36:16करते हैं। बुध कहते हैं एक पुणव।
- 36:22पहले। तुम दुखी हो।
- 36:25इस दुख का इलाज। कर लो जीवन दुख है रोग से ग्रस्त
- 36:31त्रस्त किसी। ने तुम्हारी भावनाओं को आहत।
- 36:36कर दिया। किसने तुम्हारे विचारों को तोड़
- 36:39दिया? किसने तुम्हारे शरीर के शरीर के
- 36:42ऊपर? आघात कर दिया।
- 36:45ये तुम पहले इस समस्या। का इलाज कर लो दूसरी।
- 36:50समस्या बाद में। देखेंगे अभी बात मत करो।
- 36:54तो बुद्ध अपनी जगह ठीक। है बुद्ध का ये अपना।
- 36:56फार्मूला है। ढंग बड़ा प्यारा है।
- 37:00हे चलो किस्तों में इलाज। कर रहे हैं लेकिन इसका।
- 37:07अर्थ ये नहीं कि आगे। कोई दुनिया नहीं है आगे।
- 37:11दुनिया है। कबीर बोले नानकुंभ है।
- 37:18जिसके हाथ में सौप दिया। नानक ने उसको देखा ही।
- 37:22होगा ना जिसके हाथ में सौप। दिया मीरा ने कबीर ने।
- 37:30उसको देखा ही होगा उसकी कोई लाश लश्क, कोई वेव।
- 37:37कोई तरंग, कुछ देखी होगी। कुछ।
- 37:47लश्क देखी होगी। बिजली की रात को लश्क को दी होगी।
- 37:53अंधेरे में अमावस्या की रात। में।
- 37:57भरे काले मेघों के बीच। और।
- 38:02कुछ नजर नहीं आता होगा। आपको और।
- 38:05जैसे ही वो बिजली के लश्कर। आपको अगला रास्ता साफ दिखाई पड़
- 38:10गया आपने वो रास्ता? देख लिया।
- 38:17आपको पक्का पता चल गया की रास्ता है।
- 38:21बस इसे ही कहते हैं, सतौरी ऐसा नहीं है कि बुध सतौरी।
- 38:28नहीं मिली थी। बिल्कुल।
- 38:32सतौरी के बिना समाधि होती। है।
- 38:38लेकिन बुद्ध किस्तों में इलाज करते है जैसे डॉक्टर।
- 38:41आपसे कहे की देखो भाई। ये शरीर?
- 38:45तुम नहीं हो या बाद। का मसला है।
- 38:48ऐट दी प्रेसेंट मूवमेंट। तुम्हारी तकलीफ है पेट दर्द।
- 38:54उसका इलाज कर लो। मैं आपको एनर्जेसिक दे देता हूँ,
- 38:59ऐंटी स्पोस्मोटिक दे देता हूँ मैं ड्रॉप वेरन दे।
- 39:03देता है। मैं ट्रेमाडोल दे देता हूँ, मैं
- 39:06इंजेक्शन। दे देता हूँ।
- 39:09उससे तुम दर्द से निजात। बचाओगे?
- 39:13फिर बाद में देखेंगे। ये शरीर मैं हूँ।
- 39:16के नहीं। बुद्ध का।
- 39:17अपना फॉर्मूला और बड़ा सुन्दर। फॉर्मूला लेकिन कबीर का अपना
- 39:23फॉर्मूला। कबीर कहते जड़ से उखाड़ता जो चस
- 39:30चस। कर रहा है कैंसर का।
- 39:32फोड़ा। वो पांव, वो पेट ऑर्गन व।
- 39:40शरीर का कोई भी यंत्र। तो नहीं वे झटक देते हैं आपको।
- 39:51एक झटके से झड़प। देते हैं आपकी मान्यताओं को?
- 39:56बुद्ध थोड़े सहज बस इतना सा। फर्क है।
- 40:05तो श्रद्धानंद उस स्थान पर। पहुँच गए।
- 40:08अब बड़े मज़े। की बात है।
- 40:13इसलिए बहुत से लोगों ने। इस संसार।
- 40:16को एक रंग में चखा। भूल गए वो सब नियमों?
- 40:24को कायदे कानूनों। को प्रकृति के नियमों को।
- 40:28सब चीजों को भूल गए। वो कहने लगे यह कुछ भी नहीं।
- 40:31यह परमात्मा का खेल है। आप।
- 40:35खेल खेल खिलाड़ी आप खेल। नहारा हूँ।
- 40:41सब खेल भी खुद है। खिलाड़ी भी खुद है।
- 40:45जिसके साथ खेल रहा वो भी खुद है सब वो ही वो है, रंगमंच भी उसका।
- 40:53एक्टर भी वो जो मरता वो भी वो जो मारता वो भी वो।
- 41:01दुश्मन भी वो मित्र भी। जिन लोगों ने बहुत गहरे में जाके
- 41:07देखा, उन्होंने यही पाया कि यह संसार एक रंगमंच।
- 41:14है एक स्टेज है। उस इस रंगमंच के ऊपर अभिनेता
- 41:21अभिनेत्रियों आती हैं। विलेन आते हैं अपना।
- 41:27कार्यकाल पूरा करते हैं। रोल निभाते हैं और चले जाते हैं।
- 41:32तो जिन्होंने बहुत गहराई। से ये चीज़ देखी उन्होंने।
- 41:35ये शब्द कहा आपने? सुना भी होगा, पड़ा भी।
- 41:39होगा। तो वहाँ जाकर बदला जा सकता है सब
- 41:47कुछ मैं। के।
- 41:57पढ़ लिखकर शास्त्रों से नहीं बोल। रहा।
- 42:03मैं ये जानता हूँ वहाँ। जाकर सब बदला जा सकता।
- 42:09है। और वो कहने लगे।
- 42:12की होगा तो चलो जब। भगवान राम आएगा।
- 42:16लेकिन ये तो पूरा का पूरा योग पड़ा है और पहले द्वापर आएगा।
- 42:20कृष्ण। आय।
- 42:22फिर। त्रेता आएगा भगवान राम कब आएगा
- 42:26बड़ी मुश्किल हो जाएगी, फिर अब क्या?
- 42:30किया जाए। फिर अब योग को ही पलट दिया।
- 42:34जाए और। वहाँ जाकर कोई भी चीज़।
- 42:37असंभव नहीं होती। यहाँ जो तुम बोदियाँ बांध।
- 42:41कर ऊपर रस्सी लटकाकर पड़ते हो। सारी।
- 42:45सारी रात मेहनत करते हो। कितने कॉम्पटीशन में लड़ते हो,
- 42:51कितने दुखद स्थितियों में होते हो और फिर भी तुम?
- 42:58योग्य। नहीं, एलिजिबल नहीं हो पाते।
- 43:02यह रास्ता बड़ा कठिन। है।
- 43:06संसार में आपको। सुख मिलता नहीं क्योंकि सुख।
- 43:08है या। बिलकुल ऐसे है जैसे रेगिस्तान
- 43:12में। बालू को निचोड़कर आप ये आशा।
- 43:16रखो कि इनमें से तेल निकल। जाएगा।
- 43:18नहीं निकलेगा एक तो। तिलों में ही निकलेगा।
- 43:24तो आप बाहर बोतियों को बांध लेते हो, मैं भी ऐसा ही।
- 43:27करता हूँ। रात रात को जागना एक।
- 43:31कुंडे में अपनी। बड़े बालों को बांध लेना रस्सी के
- 43:35साथ। और रात को और।
- 43:38जब नींद आए तो गर्दन हिलोरा। खा जाए और दर्द हो और जाग खुल
- 43:44जाए। और बातें।
- 43:50क्या हो कॉम्पिटिशन करके भी आज आप देखते हो?
- 43:58रागे राजस्थान कोटा। के अंदर कितने बच्चे न।
- 44:00सुसाइड कर रहे है। क्यों बच्चों को मार?
- 44:04रहा है। ये कॉम्पिटिशन तुम्हारे प्यारे
- 44:11बच्चों को? जिनको बुर्की बुर्की दे के।
- 44:14पाला। जिनका मल मूत्र आपने किया?
- 44:20साफ सर्दी की सर्द रातों। में जब बच्चे ने बिस्तर घिरा कर
- 44:28दिया। माँ उस गीले बिस्तर की तरफ हो और
- 44:33बच्चे को। सूखे वस्त्र।
- 44:35पर डर रहा। इस अवस्था में बच्चे आपने पाले और
- 44:42वो बच्चे सिर्फ। आपके एक पागलपन के कारण।
- 44:47पंखे से लटकी जाती। है।
- 44:52क्यों? क्योंकि तुम उनके दिमागों पर बोझ
- 44:55बन। जाते हो?
- 44:59तुम जैज नहीं बन सके। तो तुमने कहा कोई?
- 45:03बात नहीं। मैं अपने अंश को जैज बना दूंगा।
- 45:10तुम आईपीएस से ना बन। सके।
- 45:14तुम बड़े अफसर नहीं बन। सके तो?
- 45:17तुमने कहा, कोई बात नहीं मेरे। अधूरे सपने को मेरा बच्चा पूरा।
- 45:22करेगा और तुम उनकी। गर्दन दबा देते हो कि चलो
- 45:28कॉम्पिटिशन करो। और देखो फर्स्ट आना पड़ेगा।
- 45:37फर्स्ट आना। पड़ेगा नहीं तो पिटाई होगी तो
- 45:44बच्चा क्या करेगा बच्चा? फांस ले लेता।
- 45:51है। इधर खाई है, इधर पढ़ाई होती नहीं।
- 45:59जो कि तुमसे ज्यादा होशियार। बैठे और।
- 46:04इधर घर वाले कहते हैं हम पिटाई करेंगे।
- 46:10तो बच्चा क्या करता है? एक आखिरी ऑप्शन है उसके।
- 46:13पास सभी के पास आखिरी। ऑप्शन होता है जगडू राम।
- 46:23कहने लगा अपने बेटे रगडू। राम से।
- 46:33अगर अब के भी तू तीसरी कक्षा में पास।
- 46:39नहीं हुआ। सात।
- 46:41बार हो गए तो जग्गू राम बोला अगर रगडू।
- 46:46राम अब के भी तू आठवीं बार भी तीसरी।
- 46:49कक्षा में पास नहीं हुआ। तो तुम मुझे अपना बाप।
- 47:00मत कहना मैं इतना। दुखी हो गया हूँ तरफ।
- 47:04से तीसरी कक्षा में आठवें साल है तेरा।
- 47:11अगर आपके भी पास ना। हुआ तो उसके बाद मुझे।
- 47:15अपना बात मत कह रहे तो जगडू रहूं तो?
- 47:23चुप हो गया कह के। अपना काम थम।
- 47:27और रगडू राम के। पेपर भी हो गए।
- 47:30और रिसाल्ट भी आ गया तो पता चला कुछ।
- 47:36दिन बाद पता चला दो 4 दिन बाद जगडू राम को पता लगा।
- 47:43के रगडू राम के रिसाल्ट। आ गए।
- 47:49तब घर आया। अरे।
- 47:51रगडू तुने बताया नहीं तेरा रिसाल्ट क्या?
- 47:55है तो रगडू राम बोला देख जगडू। तुने अपने को बाप कहने का अधिकार
- 48:06खो दिया। है।
- 48:11जगड़ू। राम तुने अपने आपको बाप?
- 48:14कहने का अधिकार खो दिया। है, बॉस में अब के भी नहीं।
- 48:22हुआ। सतानंद पहुंचा उस स्थान पर संकल्प
- 48:29किया युग अब यहाँ। सोचने वाली बात है, युग।
- 48:37के। पलटने से कितने लोगों की?
- 48:40घटनाएं परिवर्तित हो गई। जो घटनाएं पहले होनी।
- 48:45थी। बाद में हो जाएं जो घटनाएं बाद
- 48:49में। होनी थी पहले हो जाएं।
- 48:51कितना अफरा तफरी मचा होगा? कितनी घटनाओं का आदान प्रदान हुआ
- 48:58होगा? जिन्होंने होना था दो बाद।
- 49:07में। और हो गई दो युग।
- 49:11पहले तो बड़ी मुश्किल हो रही है सत्यानंद भगवान राम।
- 49:24भगवान राम आए पहले आए भगवान राम पहले आए त्रेता।
- 49:34वहले आए द्वापर बाथ में आए हालांकि दो ही पहले आता है त्रि।
- 49:38बाथ में आता। है।
- 49:42वहाँ ऐसा है। मैंने पहले भी कहा था।
- 49:47बाबा नानक भी वहाँ जाकर आपको। समझाने की चेष्टा करते।
- 49:51हैं जो मांगू ठाकुर अपने से। सोई सोई देव ये सिर्फ वजन मात्र
- 49:58नहीं। यह एक सत्य है।
- 50:04बाबा तुम्हे चेताते है कि उस। स्थान पे पहुँच जाओ।
- 50:10क्यों रोगियों को बांध कर रात को पढ़ते हो?
- 50:14क्यों दुखी होते? हो वहाँ।
- 50:18पहुँच जाओ जो अपने। ठाकुर से मांगोगे।
- 50:21वही कुछ मिल। जाएगा वहाँ स्वर्ग है, वहाँ बहुत
- 50:28आनंद है, खुमारी की हवाएं मदहोश। कर कर जाती।
- 50:33है और तुम? झूम झूम उठते हो वहाँ।
- 50:38सैलाब है आनंद का। प्यादे भरे पड़े।
- 50:47तो बाबा। कहते हैं क्यों दुखी?
- 50:49होते हो? पर ऐसा नहीं कि बाबा तुम्हें कहता
- 50:53है। कबीर तुम्हें कहते हैं नहीं।
- 50:57वो खुद भी कहाँ पड़े? कागज कदम छूओ नहीं।
- 51:03और कहाँ नानक? पड़े और उनके शब्दों के ऊपर।
- 51:08आज। तुम्हे पीएचडी का खाता मिल।
- 51:10रहा है। तुम्हारी डिग्री कागज की आज
- 51:14पीएचडी की कबीर के दोहों। पे हो रही है।
- 51:17बाबा की जपजी साहब पे हो रही है। जो पढ़े नहीं थे।
- 51:25तुम्हारी भाषा नहीं पढ़े थे। जो उस 70 पर चले गए थे जहाँ सब
- 51:30कुछ। किया जा सकता है।
- 51:34एव्रीथिंग इस पॉसिबल? अगर कोई व्यक्ति नेपोलियन कहता है
- 51:37इम्पॉसिबल बॉडी इस नॉट। फाउंड इन मैं डिक्शनरी।
- 51:40तो वह मू रख रहा है ये शब्द, सही। तो हैं लेकिन।
- 51:46इस तल पर जाकर सही। हैं जीस तल पर शतानंद पहुँच।
- 51:51गए। बाहर बैठे बैठे।
- 51:54ये शब्द। सही नहीं है बाहर तो।
- 51:59इस लिए नेपोलियन या नेपोलियन जैसे लोग जो कहते है इम्पॉसिबल वर्ड इस
- 52:05नॉट। फाउंड इन मैं डिक्शनरी मैं हूँ तो
- 52:08मुमकिन है। मैं ना?
- 52:09रहूँगा तो मुमकिन नहीं होगा। संसार ठहर जायेगा।
- 52:15ये मुरतापूर्ण। बात है।
- 52:20हाँ, बदलता है, मर्दबू। है, जो जमाने को बदल देते है।
- 52:27लोग कहते हैं, ज़माना बदलता है। अक्सर।
- 52:32वो एक मुकाम है। जहाँ पहुँच गए शैतान, वो आपके
- 52:35भीतर है। ध्यान की अतुल गहराइयों में।
- 52:43ऊ। जंक्चर पॉइंट मिलता है आसान।
- 52:45तो नहीं है जितना आसानी से मैं बोल देता हूँ आसान उतना कह।
- 52:53बहुत जन्मो से व्यक्ति भटकता। है।
- 52:57और यही मानव जीवन की वृक्षणता। है।
- 53:04इसी जीवन में मिलता है वो जंक्चर पॉइंट और किसी।
- 53:08पशु पक्षी में नहीं मिलता। न जलचर, न सलचर, न नवचर।
- 53:13बस सिर्फ मानव को। इसलिए मनुष्य के जामे को सर्व
- 53:18उत्कृष्ट। बताया गया है।
- 53:20देवता भी। तरसते हैं इस जामे के।
- 53:22लिए। क्यों?
- 53:26क्योंकि इस जामे में उस स्तर पर पहुंचा जा सकता है सिर्फ इस जामे
- 53:30में उस स्तर पर पहुंचा सकता है। अब आप देखिए, आप अपना कीम।
- 53:34कितना कीमती वक्त खराब कर रहे हो? बाहर से क्या इकट्ठा करोगे?
- 53:42अगर। मांगना ही है तो भीतर।
- 53:44जाके मांगो। एक पंथ दो कार वहाँ ऑप्शन बड़ी
- 53:48होगी। फिर वहाँ जाकर आप जो।
- 53:52चाहे मांग लो, कोई ऑप्शन आपसे छीनता थोड़ी है।
- 53:58ना स्वर्ग मांग लो। माँ का पर्व भी है।
- 54:02वह धन मांग लो। वहाँ विद्या मांग लो, समान सम्मान
- 54:09गद्दियाँ मांग लो, माँ सुख चयन मांग।
- 54:12लो माँ जो चाहे मांग लो सब मिल जाए और इतनी।
- 54:18मशक्कत भी नहीं करनी पड़ेगी। कुछ भी नहीं करना पड़ेगा।
- 54:23यू हैव टु डू नथ्थिंग? ध्यान में बैठ जाओ।
- 54:26और भीतर की गहराइयों में पहुँचते चले जाओ, पहुँचते चले जाओ वक्त लग
- 54:31सकता। है।
- 54:33लेकिन जब पहुँचोगे तब फाप। गए।
- 54:39बड़े ऑप्शन हो गए। राहें दिखेंगी।
- 54:43फटती हुई सब तरफ़ से मार्ग। दिखेंगे।
- 54:51और आप? जीस मार्ग को जाओ चुन।
- 54:53लेना। वहाँ भी मिल जाएगा, लेकिन वो
- 55:00मुकाम का आपको पता नहीं। और सच पूछो तो बाहर।
- 55:04मुक्ति नहीं मिलती बाहर तो बंधन ही बंधन मिलते हैं रोज़ आप बंधनों
- 55:08को। इकट्ठा कर लेते हैं।
- 55:11और अगर मुक्ति मिलती है तो भीतर मिलती है।
- 55:15सत्यकंठ भीतर, सतलोक भीतर, ब्रह्मलोक।
- 55:18भीतर सब लोक भीतर। ये बाहर बतलाने वाले सिर्फ आपको
- 55:23उलझा देते हैं। इनको खुद ही पता।
- 55:27नहीं होता। तो उस सतल पर सतानंद।
- 55:33पहुँच गए और सतानंद ने जाके संकल्प।
- 55:36किया ये युगों को बदलते। थे।
- 55:39भगवान राम पहले आएँगे। और कृष्ण बाद में आएगा और ऐसा ही
- 55:43हुआ। कितनी घटनाओं का असर पड़ा?
- 55:50होगा। कितनी घटनाएं जो पहले होनी थी बाद
- 55:55में होंगी एक युग बाद? में।
- 55:58और कितनी घटनाएं जो बाद में उन्नति एक युग पहले इसलिए?
- 56:04तो शतरंज ने किया था। कि एक युग पहले मेरी माता शिला से
- 56:10माँ। बन जाए अहिल्या गौतम के।
- 56:15श्राप से मुक्त हो जाए। और देखिए वो भी कैसा श्राप?
- 56:19होगा वह व्यक्ति अंतःस्थी कितनी गहराइयों में पहुँच गया होगा।
- 56:25जिसने इतना बड़ा कबाड़ा कर। दिया प्रकृति जीस बात को मानने
- 56:30में बाध्य है और पूरी बाध्य है। और तोड़ना पड़ा जाकर श्रद्धानंद।
- 56:35को उस स्थान पर। गहराई की बात है, इन बातों को तुम
- 56:47आचार्यों के पास जाकर। सीखने की चेष्टा मत कर।
- 56:51वो इनका भी अर्थ और से। और निकाल लेंगे जैसे गीता।
- 56:55का? अष्टावक्र गीता का महा गीता।
- 56:57का उपनिषदों का अर्थ निकालते। हैं।
- 57:02ये तो बस। इनके पास ऐसे ही शब्द।
- 57:04हैं शब्दों की धार। से खोपड़ी से जवाब दे देंगे और
- 57:10अनुभव के नाम पर इनके पास शून्य। तो वहाँ जाकर।
- 57:15बदल दिया सब कुछ बदल। दिया।
- 57:20घटनाएं जो बात में। होनी थी।
- 57:22पहले जो पहले होनी थी बात में। उलट पुलट।
- 57:26हो गया, ऐसा हो सकता है। कौन?
- 57:33जाने कौन बदल दे भविष्य। मलका की तुम्हारी इन बातों।
- 57:38को घबराने की आवश्यकता। है फिर अगर।
- 57:41होगा तो हो जायेगा। तुम्हारे हाथ बस में क्या और अगर
- 57:46तुम पलटना। चाहते हो तो मैं तुम्हे बदला
- 57:48दिया। उतरो उतरो अपने भीतर।
- 57:53शायद दांव लग जाए। तुम उस जंक्चर पॉइंट पे पहुँच
- 57:59जाओ। फिर।
- 58:00वहाँ जाके चुनाव कर लेना। फिर रास्ता ढूंढ लेना इस रास्ते
- 58:07जाना है हमने वहाँ बड़े। ऑप्शन?
- 58:15तो भविष्य मिल्का की बातों से। डर मत।
- 58:19ये सत्य है। मुझे भी बतलाया गया था।
- 58:26मुझे भी बतलाया गया था। 20 अप्रैल 2100 अड़तीस अब ये
- 58:37तारीख? ही बदला दी मैंने आपको।
- 58:39बहुत बार मैंने आपको विवेचना भी की इसकी बशवाणी।
- 58:43में बोला इस तारीख। से प्रलय शुरू हो जाएगा।
- 58:48लेकिन अभी तो इसमें। 100 वर्ष पड़े हैं।
- 58:59अभी इसमें 100 वर्ष पड़े हैं। और आप कहते हो 2025।
- 59:05में कोई नहीं कह सकता। कौन उस स्तर पर चला?
- 59:11जायेगा और इसको बदल देगा। यह।
- 59:16कोई उस स्तर पर नहीं। पहुंचेगा ये, ऐसे के ऐसे।
- 59:20ही रह जाएंगे। कोई नहीं कह।
- 59:23सकता भविष्य अज्ञात के गर्भ में छिपा।
- 59:26हुआ है। और कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र है और
- 59:30प्रत्येक व्यक्ति क्षमता से युक्त है।
- 59:34तो तुम्हें घबराने की कोई आवश्यकता।
- 59:36नहीं। तुम चाहो इसे बदल सकते हो।
- 59:43उस जंक्चर पॉइंट पे। उतर जाओ।
- 59:46फिर तुम जाके फिर वहाँ। पर सैकड़ों असंख्य मार्ग मिलेंगे।
- 59:54मनपसंद का तुम मार भी चुन लेना और कितनी घटनाएं उन पर असर पड़ता।
- 1:00:09है इन चीजों? का?
- 1:00:12मैं आपको छोटी सी बात बताता हूँ। मेरे चैनल कंट्रोलर, जो रोहित आज
- 1:00:21बता रहा हूँ। ये बीटेक की परीक्षा?
- 1:00:26के अंदर फिर। कभी कभी आते थे मेरे।
- 1:00:32पास बाबा बीटेक की। परीक्षा में फिर हो गया।
- 1:00:41घर में इतने अमीरी ना। थी, गरीबी थी।
- 1:00:47अब आपने पढ़ाया था। और फैल हो।
- 1:00:52गया। मैंने कहा कोई बात नहीं, तू चिंता
- 1:00:59मत कर रिसाल्ट। घोषित हो गया था।
- 1:01:05फैल हो गया। दो सब्जेक्ट्स में और बुरी तरह से
- 1:01:19उस स्थान। पर जाकर बात तो।
- 1:01:23बिल्कुल छोटी सी थी। घटनाओं को बदला।
- 1:01:30और एक नया। कानून आ गया, इतने ग्रेस मार्क दे
- 1:01:33दो। सभी को और।
- 1:01:37सभी की मोज़ लग गई और रोहित की भी मोज़ लग गई।
- 1:01:42पास हो गया। बीटेक की डिग्री मिल गई।
- 1:01:45अगर फैल हो जाता। शायद आगे।
- 1:01:49पढ़ना मुश्किल हो जाता। घरवालों ने यहाँ तक बड़ी।
- 1:01:52मुश्किल से पढ़ाया था तो वो ग्रेस मार्क सिर्फ रोहित।
- 1:01:59को नहीं मिले और बहुत से लोगों को मिले।
- 1:02:05बहुत से लोग उससे। लाभान्वित हुए।
- 1:02:08इसलिए मैं कहता। हूँ।
- 1:02:09यहाँ कोई कुछ स्टेबल नहीं है इस मसले।
- 1:02:12में। ये होगा ही कोई।
- 1:02:19भी व्यक्ति उस स्तर पर जा सकता है।
- 1:02:21और कौन? जाने कौन कहाँ बैठा है।
- 1:02:25कौन कहाँ बैठा क्या कर? रहा है और यह।
- 1:02:28सृजना तो बहुत। बड़ी है विराट।
- 1:02:32इसकी अनना गणना कुछ है? अनंत अनंत अनंत केस मेरे पास आए।
- 1:02:44इस सोमवार तक मेरे पास हजारों ऐसे केस आये।
- 1:02:54और मैंने उन्हें बदल। दिया बदल दिया।
- 1:03:01मेरे लिए बाएं हाथ का। खेल।
- 1:03:02था। फिर मुझे बाबा ने समझाया कि ऐसा।
- 1:03:08मत किया करो। ऐसा करने से उथल पुथल।
- 1:03:15पैदा हो जाएगा। तो मैं रुक गया।
- 1:03:21कोई कहता काजू। मांगा दो ये लो कोई कहता शराब की
- 1:03:26बोतल, मंगा लो ये लो। अब जो शाम।
- 1:03:29मानव भर के कहते है। 1,00,00,000 मिल जायेगा
- 1:03:3110,00,00,000 मिल जाएंगे। यहाँ आपको सैकड़ों हजारों लोग मिल
- 1:03:36जाएंगे, जिन्होंने अनपेक्षित वक्त पर मुझसे अनपेक्षित वस्तु।
- 1:03:43की मांग। की और उन्होंने कहा जल।
- 1:03:47अब कोई सोच सकता है? पंजाब।
- 1:03:49में 84 के अंदर कर्फ्यू लगा हुआ बाहर निकलने नहीं देते।
- 1:03:54और हम मित्रगण बैठे। हैं किसी स्कूल के ऊपर।
- 1:04:04और कोई व्यक्ति मुझे कहता है कि आज से।
- 1:04:06दो ऐसे करो शराब पीने का जी करते। है शराब ठेके बंद।
- 1:04:11घर बाहर निकलने नहीं देते। बाहर फौज खड़ी है, हम सभी।
- 1:04:16दोस्त एक दूसरे से छिपते छुपाते। सही?
- 1:04:20पूछो तो बाहर जो खड़े। होते थे।
- 1:04:22उनको हम चाय पानी पिलाते खाना कराते, ठंडा पानी पिलाते गर्मी।
- 1:04:26का दिन था जून का। महीना था तो वो।
- 1:04:30भी हमें आने जाने दे देते। तो हम सारे।
- 1:04:33इकट्ठे हो के बैठ जाते कहता शराब दे दो, मैंने कहा ये लो।
- 1:04:40कहाँ से आई? शराब तो अच्छे भले आदमी।
- 1:04:44को नहीं मिलती क्योंकि करफ्यू लगा हुआ है।
- 1:04:47और ठीक है और मैं शराब पीता नहीं। कहाँ से आए बंद ढक्कन?
- 1:04:57क्या हुआ? मैंने कहा था तुम मांगो वहाँ।
- 1:05:03हम राम राम करने के। लिए बैठते थे और अचानक से उसने
- 1:05:08प्रश्न कर। दिया।
- 1:05:12और 2025 व्यक्ति बैठे। है।
- 1:05:13किसी ने कह दिया ले। डूब मांगा दो।
- 1:05:16तीन किलो ले डूब आ गए। मुझसे।
- 1:05:21पूछने लगे मित्र कहाँ से? आए।
- 1:05:24मैंने कहा ये नजर मल। सत पर दाबड़ा स्वीट कॉर्नर से आए।
- 1:05:29उन्होंने जाके तसल्ली। अब तो वो।
- 1:05:33स्वर्गवास हो गए है। सत पर।
- 1:05:36उनसे पूछा की यहाँ पंडित। जी आये थे।
- 1:05:39विजय शर्मा आये थे कब? आये थे।
- 1:05:42बस थोड़ी देर पहले क्या ले के गए। लड्डू ले के गए तीन पैसे देंगे।
- 1:05:54अब ये आपकी। बातें समझ से बाहर हो।
- 1:05:57जाएंगी शाह मानव? जैसे व्यक्ति ऐसे ही।
- 1:06:00पैदा नहीं हो जाते। हर चीज़ को।
- 1:06:03खोपड़ी से समझने की चेष्टा। करता है।
- 1:06:07और उनको बस इतनी बात नहीं पता कि यह।
- 1:06:10विश्व इतना विराट है। और वह रचिता इतना।
- 1:06:15विराट है और इतना समय से परे है कि तुम उसका एक जर्रा।
- 1:06:20भी नहीं समझ सकते कोई। बना कैसे तुम बात।
- 1:06:23करते हो विराट को? समझने की।
- 1:06:27समझ नहीं सकते एक जर्रा। कैसे बना बना के दिखा दो।
- 1:06:33बता दोगे? इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन?
- 1:06:35है, लेकिन बना के दिखा दो यहाँ मुश्किल हो जाती है मेरे एक मित्र
- 1:06:45थे। 1 दिन मेरे पास कंपटी कंपटी है
- 1:06:52ऐसा है। कोई मसला है नाम नहीं फैलाता मैं।
- 1:07:01ऐसे काम गलत। तो हो जाएगा।
- 1:07:04वो तो किसी कीमत पे भी नहीं है क्योंकि ये बड़ी गोपनीय बात है तो
- 1:07:11केस चल रहा है। अगर मेरे।
- 1:07:14विरुद्ध हो गया तो मैं मेरा। सब कुछ ध्वस्त हो जाएगा।
- 1:07:21जीवन दाव को लग जाएगा। मैंने कहा, कोई बात नहीं, तुम
- 1:07:26चिंता मत करो। मेरे लिए खेल हुआ करता था जिन
- 1:07:34चीजों को। तुम देखने के लिए एक।
- 1:07:36बार तरसते हो यहाँ कितने? ही लोगों ने कितनी कितनी बार
- 1:07:41देखी। किसी ने कह दिया मेरा।
- 1:07:44मोटरसाइकिल गुम हो गया। वहाँ से उठा लो।
- 1:07:47फिर मोटरसाइकिल गुम हो गया वहाँ से उठा लो।
- 1:07:51बाबा सुबह नंबर। क्या आएगा ये आएगा लगा लो खोली
- 1:07:59किताब, खुला भंडारा और तुम एक बात के लिए तरसते हो और आज ये मूर्ख
- 1:08:08लोग। बाबा बागेश्वर।
- 1:08:11जैसे। मैं जानता हूँ उनके।
- 1:08:13पास कुछ नहीं। ये लोगों को मूर्ख।
- 1:08:17बना रहे हैं, लेकिन मेरी इच्छा भीतर की को।
- 1:08:25छुपाने की नहीं। और किसी ने मेरे से शराब।
- 1:08:29मांग ली। किसी ने काजू बादाम मांग लिया,
- 1:08:31किसी ने भुजिया मांग ली, किसी ने दाल मांग ली।
- 1:08:34सर्दी के भीतर आइस। क्रीम मांग ली बिलकुल ठंड।
- 1:08:41ये कौन मांगेगा? आइस क्रीम फिर वहाँ बैठे बैठे,
- 1:08:45क्या मैं इतना सामान साथ? लेके चलता हूँ।
- 1:08:47कोई दुकान हूँ क्या? मैंने कहा ये कार ऐसा होता।
- 1:08:57है। लेकिन ये उस स्तर पर।
- 1:09:01जाकर होता है। उस स्तर पर।
- 1:09:06सब बदला भी जा सकता है। उलट पुलट।
- 1:09:09भी हो सकता है और किसी को पता भी नहीं चलेगा।
- 1:09:13तो भविष्य मल का की ये? चीज़ क्या लिखा है?
- 1:09:18लिखा तो ये भी है मैंने पढ़ा है। कि 20 अप्रैल 2100।
- 1:09:2736 में। अड़तीस या 36 मैं?
- 1:09:32भूल गया हूँ थोड़ा। यहाँ से शुरू हो।
- 1:09:35जाएगा विनाश। कुछ टेरॉइड आके टकरायेगा।
- 1:09:44पृथ्वी के साथ और सब। समाप्त हो जाएगा बस।
- 1:09:48कुछ करोड़ की वादी। बची तो इन बातों से घबराने की
- 1:09:54आवश्यकता नहीं है। क्योंकि एक बात साफ।
- 1:09:58है कि कुछ भी मर। जाए।
- 1:09:59आप नहीं मरो। आपकी।
- 1:10:02होत नहीं मरेगी आपका स्वयं नहीं मरेगा।
- 1:10:05आप। जो हो वह न मरेगा।
- 1:10:10बाहर का कुछ भी है वो भी न मरेगा बस उसके प्रारूप।
- 1:10:15बदल जाएंगे, इतनी गर्मी उत्पन्न होगी।
- 1:10:20कि पानी बाघ बन जाए। आग लग जाएगी सब तरफ वनों के वर्ण।
- 1:10:28बसुम हो जाएगा ओह दृश्य तुम देखना पाओगे, लेकिन मेरे देख ले, वो अभी
- 1:10:37होने को नहीं। लेकिन मैं इस बात की पुष्टि भी
- 1:10:42नहीं कर। सकता।
- 1:10:44क्योंकि सभी व्यक्ति योग्य हैं, आप भी योग्य हैं आप बदल सकते हैं
- 1:10:52अगर कोई व्यक्ति। स्वर्ग का निर्माण कर सकता।
- 1:10:58है तो कोई स्वर्ग से घरा सकता है। तो कोई उसको स्वर्ग में।
- 1:11:03बीच में लपका भी सकता है। ये कहानियों है सिर्फ बताने के
- 1:11:09लिए इनके अर्थ बड़े घर है। की तुम जो चाहो कर सकते।
- 1:11:13हो और ये बहुत बड़ी। प्रेरणा आपके प्रेरणात्मक।