Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Nov 25 - 5 साल हो गए, अभी तक नहीं पहुंचे? - आज जान लो असली कारण! तरंगों का महागूढ़ विज्ञान! Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:02कर पूरी राय आप अक्सर एक शब्द को दोहराया करती है।
- 0:16श्रद्धा विश्वास शुरू। याद यहाँ बिना न प्रश्न बाबा
- 0:36ईश्वर की कृपा हो ना विश्वास बनी नहीं।
- 0:48तो हम जैसे लोगों को परमात्मा तक पहुंचना कैसे संभव हो पाएगा?
- 1:04और आपने एक दलित व्यक्ति को प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया के रूप
- 1:17में क्यों सुना? प्रश्न थोड़ा गहरा है, शांत मन से
- 1:38सुनने का प्रयास करें। परमात्मा की कृपा से श्रद्धा पैदा
- 1:51होती है और संत आपकी श्रद्धा को समय समय
- 2:07पर परखते रहते हैं। आपने देखा होगा अतीत में भी जो
- 2:19व्यक्तियों ने थोड़ा सा। शंका भाग उठाया वो।
- 2:27उसके बाद मैंने उन्हें अपने चैनल से जुड़ने की कोई मदद नहीं की।
- 2:41मैंने अपने पास नहीं बुलाया, क्यों?
- 2:46मेरे कोई पर्सनल रंजिश नहीं है क्योंकि श्रद्धा वो धागा है।
- 3:00रहमान धागा प्रेम का मत तोड़ो झटका।
- 3:09टूटे तो फिर नहीं मिले, करलो लाफ ऊपर है श्रद्धा वो धागा है।
- 3:23जो गुरु बड़ी मुश्किल से पैदा करता है, एक दूसरी तरह की श्रद्धा
- 3:33है, जिसे परमात्मा उत्पन्न करता है, सहज ही सहज वह उसकी दांत है,
- 3:43वह तुम्हें बिना मांगे मिल गई। परमात्मा ने तुम्हें श्रद्धा
- 3:49क्यों प्रदान की? या तो वही जाना है, लेकिन एक
- 3:56श्रद्धा गुरु उत्पन्न करता है। अब इस बात को ध्यान से समझ लेना।
- 4:07रहीम ने कहा है इसको चटका के तोड़ना देना रही मन धागा प्रेम का
- 4:18प्रेम और श्रद्धा समान अर्थक शब्द हैं विपरीत अर्थक ने।
- 4:28जिसमें श्रद्धा उत्पन्न हो गई, उसमें प्रेम बचपन हो गया।
- 4:33प्रेम के बिना श्रद्धा उत्पन्न नहीं होगी।
- 4:37प्रेम के बिना तर्क उत्पन्न होगा। श्रद्धा के बिना प्रेम उत्पन्न
- 4:44नहीं होगा। श्रद्धा के बिना तर्क उत्पन्न
- 4:47होगा इसलिए रहम रहम रहमान बहुत प्रेमी व्यक्ति हैं, समझदार भी
- 4:58हैं। वो जानते हैं कि अगर ये धागा किसी
- 5:07वजह से टूट गया तो हम जोड़ तो लेंगे उसे लेकिन जोड़ने से जो
- 5:16गांठ पड़ जाएगी। वह लड़के की है।
- 5:24जब आप पूरे धागे पर हाथ करोगे तो वह गांठ लड़के की रहीमान धागा
- 5:35प्रेम का मत तोड़ो। झटका।
- 5:42अगर कोई मुझसे उस आनंद तक पहुंचने का एक और एक मात्र ढंग पूछ ले तो
- 5:53मैं कहूंगा श्रद्धा। श्रद्धा ही वो कीमियां हैं रसायन
- 6:05है जो आपके न्यूरॉन्स में ऐसे हार्मोनिक करियर करता है।
- 6:14जो आपको अंत में जाने में सहायक ही नहीं होते वर्ण तुम्हें अंत तक
- 6:23पहुंचा दिया करते हैं। इन शब्दों को ध्यान से सुनें।
- 6:30श्रद्धा तुम्हारे ब्रेन के न्यूरॉन्स में तत्वों में कुछ ऐसे
- 6:36रसायन पैदा करता है, तब्दीली करता है कि वह सिर्फ तुम्हें अपने अंत
- 6:44में उतरने को सहायता नहीं करते मात्र वरना अंत तक उतार ही देते
- 6:50हैं। श्रद्धा वो की में टूटे तह फिर
- 6:57नहीं मिले कर लो लाखों उपाय। इसलिए जब श्रद्धा एक बार टूट गए।
- 7:09तो मैं अच्छी तरह से जानता हूँ बा मुश्किल हजारों साल नरगिस अपनी
- 7:22बेनोरी फिरोती है। बड़ी मुश्किल से होता है।
- 7:28चमन में गीता भर बैठा मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूस होते हैं,
- 7:47मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूस होते हैं।
- 7:52यह वो नगमा है जो हरसाज में गाया नहीं जाता।
- 8:02बहुत से लोगों ने मुझे बहुत से प्रश्न पूछे थे।
- 8:06उन सारे प्रश्नों का जवाब इन थोड़े से अलफाज़ों में मैंने दे
- 8:13दिया। श्रद्धा अगर बन जाए तो फिर उसे
- 8:23बिखेर मत देना बिखेरोगे तो किसी का कुछ नहीं लोगे।
- 8:38जो व्यक्ति क्रोध करता है तुम सदा ही ये समझे कि क्रोध करके दूसरे
- 8:46का नुकसान करता है। आज वो बात गलत सिद्ध हो गई।
- 8:55क्योंकि क्रोध के क्षणों में तुम्हारे भीतर एड्रिनलिन काटी साल
- 9:01नामक अरमान से पैदा होते हैं और ये हार्मोन जहर है पॉइज़न।
- 9:11तुम्हारी रगों में पॉइज़न दौड़ने लगा।
- 9:13ग्रोथ के कारण नुकसान कैसे हुआ? तुम सदा से ये समझते रहे हो कि
- 9:28क्रोध करके हम दूसरे का नुकसान करेंगे।
- 9:32लेकिन नुकसान हुआ कहाँ बजाय नुकसान उसके नुकसान तो तुम खुद का
- 9:40कर बैठे। बहुत से लोग अपने बच्चों तक से
- 9:53प्रेम नहीं करते, हालांकि प्रेम भीतर से उमड़ता है।
- 10:00मैंने एक अरबपति व्यक्ति से पूछा, तुम अपने बच्चों को इतना प्रेम
- 10:06करते हो ये मुझे मालूम है। लेकिन बच्चे को शो क्यों नहीं
- 10:12करते? बाबा बच्चा बिगड़ जाएगा।
- 10:20अगर मैं ज्यादा लाड करूँगा तो बच्चा बिगड़ जाएगा।
- 10:26देखिये तुम्हारी सोच पर किसने पहरे बिठाते हैं।
- 10:40उससे किसी ने पूछ लिया बाबा बच्चे क्यों पैदा करने चाहिए?
- 10:53और आप कभी कभी कह देते हो की बच्चे मत पैदा करो।
- 11:01कृष्ण ने बच्चे पैदा किए, बेन तहा बच्चे पैदा किए, महावीर तक ने
- 11:08बच्चा पैदा किया, बुध ने किया, नानक ने किया कबीर ने किया जिन
- 11:16संतों को हम मानते हैं संत। वह पलटू हूँ या भी कहाँ हूँ, सभी
- 11:25ने बच्चे पैदा किया है आई मैं तुम्हें अंतरंग गहराई हूँ मैं ले
- 11:35चलो। बच्चे का हँसना खेलना बच्चे का
- 11:49केलकारी मारकर हमारे पुराने बुजुर्ग कहा करते थे जीस घर में
- 12:00बच्चे की केलकारी नहीं गूंजती, वह जिंदा जी शमशान है।
- 12:11कई प्रश्नों के जवाब आ जाएंगे। धीरे धीरे सुनते रहना कारण क्या
- 12:17है? बच्चे की किलकारी सुनकर तुम्हारे
- 12:23भीतर ऐसे रसायन उत्पन्न होते हैं। किसी भी प्रकार से आनंदित तुम हो
- 12:31ही नहीं सकते जो बच्चे की अपने बच्चे की कलकारी सुनते हैं,
- 12:41क्योंकि गृहस्थ व्यक्ति में तो अपना पराया भी है।
- 12:47जब कोई उस तल पर पहुंचेगा जहाँ अभेद बुद्धि प्राप्त होती है,
- 12:54वहाँ तो अपना पराया खत्म हो जाएगा, सब अपने ही होंगे, लेकिन
- 13:02उस तल की बात करता हूँ। जीस स्थल पर बहुत आयत संख्या बैठी
- 13:10है आज लिव इन वगैरह के नए नए। बुद्धियों की खोजें हैं तो एस्केप
- 13:34एस्केप फ्रॉम बैंडेज बंधनों से बचने के लिए।
- 13:42लेकिन ध्यान रखना मंत्रों से बच जाओगे, तुम ये तो संभव नहीं है।
- 13:51हाँ, किलकारियों की गूंज से जो तुम्हारे मनुष्य में रसायन
- 13:57उत्पन्न होते थे, उनसे वंचित रह जाओगे।
- 14:03तुम्हारा ब्रेन निर्भर तो रहेगा, लेकिन भूल गए तुम के ऋषियों ने
- 14:15अगर ये परंपरा चलाई और ऋषियों तक ने शादी करके विषय पैदा किए वो
- 14:22कोई मूर्ख नहीं थे। बाखूबी ब्रह्मचर्य को साध सकते
- 14:28थे। नानक ने फिर भी बच्चे पैदा किया।
- 14:35कबीर ने फिर भी बच्चे पैदा किया। कारण?
- 14:43क्योंकि वो जानते हैं कि बच्चे की गलकारी जीस घर में गूंजेगी और जब
- 14:52तुम्हारे कानों के यंत्र के द्वारा तुम्हारे ब्रेन के नेरों
- 14:57को छुएगी तो रासायनिक परिवर्तन होगा।
- 15:03और इन रासायनिक परिवर्तनों से जो हार्मोन उत्पन्न होंगे वो किसी भी
- 15:11चीज़ से तुम्हें नहीं मिल सकता है।
- 15:17संभोग से भी नहीं। आज तुम जिन बंधनों से बच के जाते
- 15:28हो, लिव इन में रहो, भगोड़े हो जाओ, बंधन से बचने के उपाय हैं।
- 15:45लेकिन एक बात को सदा ही ध्यान में रखना सिक्के के पहलू दो होते है
- 15:54तुमने एक पहलू को अगर बचाने की चेष्टा में सिक्का फेंक दिया।
- 16:03तो तुमने दूसरा पहलू भी फेंक दिया फेंकेंगे तो दोनों फेंकेंगे
- 16:11रहेंगे तो दोनों रहेंगे। जा घाट प्रेम ना संज।
- 16:23सुघट जान मसान जैसे खाल, लोहार की सांस लेत बिन प्राण और अगर
- 16:37तुम्हारे भीतर श्रद्धा का संचार नहीं हुआ।
- 16:45तो फिर तुम्हारा ये सारा ढांचा शमशान की तरह है, पथरीले पहाड़ों
- 16:57की तरह है, इसलिए पत्थर दिल इंसान।
- 17:03पथरीले पहाड़ों की कंधराओं में चले जाते हैं।
- 17:14तुम्हें एक बात समझा दूँ। याद रखना अगर तुम्हें बाहर जाकर
- 17:2110 साल में मिलेगा तो घर बैठकर तुम्हें 5 साल में मिल जाएगा।
- 17:33बुद्ध को भूख लगती है, महावीर को भूख लगती है।
- 17:42कहने वाले कहते हैं कि 12 साल तक 12 साल छः महीने तक महावीर भूखे
- 17:48रहेगा। यह बात।
- 17:54ऐसा संभव नहीं। ऐसा संभव तभी है अगर ये सारा
- 18:04ढांचा समाधि में चला जाए। फिर उसको अन्न की जल की जरूरत
- 18:11नहीं होती। रामकृष्णा पर मंच को जो समाती लगी
- 18:168 दिन की पहली बार तोतापुरी ने कहा कि गर्दन काट दो इसकी कथक
- 18:26काली माँ की। तोतापुरी कहता हूँ काली माँ, ये
- 18:34माँ है मेरी उस इनका फिर ठीक है, फिर बाहर आ जाओ, जब तक तुम्हारी
- 18:47मान्यताएँ हैं। तब तक के श्रद्धा से बन नहीं
- 18:53होंगे और गुरु प्रत्येक चेष्टा करता है के तुम्हारी मान्यताओं के
- 19:03पत्थर जो इस झरने के ऊपर रखे हुए हैं, जो इस झरने को बाहर।
- 19:12एक्सप्लोर करने से रोकते थे। उनको किसी ना किसी तरह से हटा
- 19:19दिया गया। जो अन्तश में पहुँच गया वह इस
- 19:29शक्ति को भली भांति जान लेगा। प्रेम विहीन व्यक्ति श्रद्धा
- 19:38विहीन व्यक्ति तर्क युक्त व्यक्ति जा घट प्रेम न संचरय सु घट जान
- 19:45मसान श्मशान में पड़े हुए मुर्दे के समान।
- 19:56जिसमें प्राण नहीं है। प्राण कब आएँगे?
- 20:04तुम कहते हो मूर्ति में प्राण प्रतीक्षा कर दिया यह प्राण है
- 20:09क्या? यह प्राण श्रद्धा है, यह वो
- 20:22अज्ञात अदृश्य करनी है जो तुम्हें आँखों से दिखाई नहीं पड़ते।
- 20:31इसको देखने के लिए श्रद्धा की आंख।
- 20:35तो ही दो ही तखाई पड़ेंगे। जातेजाते इस एक और प्रश्न को साथ
- 20:44ले चलें बाबा। हम सारे तन घोर परिश्रम करते हैं,
- 20:55शारीरिक, मानसिक और इतना थक जाते हैं कि दो कदम चलने की भी शक्ति
- 21:08नहीं रहती। फिर हम जैसे तैसे गिरते पड़ते घर
- 21:15पहुँच जाते थे और बच्चा हमें देखते ही हमारे से चिपट जाता है।
- 21:27मासूम, निरपराध। वह बालक तुम्हारी गोदी में आने को
- 21:36आतुर है, दिन भर से इंतजार में है और तुम जैसे ही गाय चौखट पर ही
- 21:46तुम्हारे संग लिपट जायेगा। प्रश्न को गौर से सुनें बाबा जैसे
- 22:03ही हम उस बच्चे को हृदय से लगा लेते हैं, दिन भर की सारी थकावट
- 22:10दूर हो जाती है। हम चाहे बिल्कुल चूर चूर हो गया।
- 22:17कृपा करके बताने का कष्ट करें। यह मोहर का चिपकाहट है या कुछ और
- 22:31यह मानसिक। हॉर्मोनल प्रक्रिया है, जो आज तक
- 22:40शायद किसी ने व्याख्या नहीं की। आज तुमने पूछ लिया तो मैं बता
- 22:44देती हूँ निर्भ्राध व चाइनों सैंट।
- 22:55समझिए। इनोसेंट होने के लिए क्यों कहा?
- 22:59ईसा मसीह ने ओनली दे विल एंटर इन माइकॉफ्ट सिंगरम हू विल बी
- 23:05इनोसेंट जस्ट लाइक ए। निर्प्राध बच्चे का सिर्फ़ मन ही
- 23:16इनोसेंट नहीं है। जो मन इनोसेंट होता है, उसके शरीर
- 23:30की तरंगें भी आसानी तरंगें बिखेरती हैं।
- 23:38क्योंकि ये सारा ढांचा यूनाइटेड है अगर बूढ़ा व्यक्ति इनोसेंट
- 23:50जस्ट लाइक ए चाइल्ड हो जाए विज्ञान तब इतना।
- 24:00फला फूला नहीं था। आज विज्ञान फल फूल गया है, लेकिन
- 24:07फिर भी इस गहरे रहस्य को खोज नहीं पाया।
- 24:11संतों ने खोज लिया था। अगर बूढ़ा इनोसेंट मन हो जाता है,
- 24:23व्हाट विल हैपन देन इनोसेंट होते ही तुम्हारे भीतर जो न्यूरोस हैं?
- 24:36वो अद्भुत रास साइन ज़नमाना शुरू कर देते है।
- 24:42दे विल क्रिएट केमिकल हार्मोन और वो केमिकल हार्मोन हमारे शरीर में
- 25:03फैल जाएगा। क्योंकि यह हालत नक से शिखा तक
- 25:15ब्लड को सर्क्युलेट करता है। 1 मिनट में 72 कार।
- 25:25और जो मान इनोसेंट हो गया उसके ब्रेन ने हार्मोनल प्रोसेसर के
- 25:34द्वारा जो अद्भुत हार्मोन पैदा किए।
- 25:39वो ब्लड में मिल जाएंगे और ब्लड विल सर्क्युलेट इन हॉल ऑफ दी
- 25:44बॉडी। और तो हमारी थकावट दूर हो जाती है
- 25:52क्योंकि सारे शरीर में घूमना है उसमें।
- 26:00इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ अगर तुम माँ बाप हो और तुम्हारे स्त्री
- 26:09क्यों रोती है अगर उसके बच्चा न हो क्यों यह?
- 26:16मान्यता चली कि जीस स्त्री की कोख हरी नहीं होती, वह मलेक्षिनी होती
- 26:28है। क्यों उसको ताने सुनने पड़े?
- 26:35आज हम चुक गए सब्र हिस्सों से, क्यों वह स्त्री क्या क्या
- 26:49अलंकारों से अलंकृत कर दी गई? जिसकी गोद हरि नहीं हुई और परासन
- 26:59जमाने में जब गोद हरि हो जाती थी तो हम जश्न मनाया करते थे।
- 27:04गोदभराई होती है तो इन रस्मों को हम भूल गए।
- 27:10इनके कारण भी हम भूल गए। वो तो पुराने जमाने की बात है अरे
- 27:15भाई पुराने जमाने में ही तो अमृत बरसा करता था।
- 27:25आज के जमाने में तो तर्क बुद्धि के तर्क का जहर भी खड़ा करता है।
- 27:32और बुद्धि का तर्क तुम में पैदा करता नफरत विभाजन झगड़ा लड़ाई
- 27:42पहले संयुक्त परिवार क्यों हुआ करते थे आज एकल परवार क्यों हो गए
- 27:48और एकल परवार छोड़ो। आज तो मियाँ भी भी इकट्ठे नहीं
- 27:52रहते। क्या हुआ ऐसा ट्रांसफॉर्मेशन
- 27:59बिटवीन दी सोशल सोसाइटी व्हाट हैप्पेनेड ये हुआ?
- 28:10कि हमने ऋषियों के खोजे को अद्भुत रत्न खो दिए जो उन्होंने अपने
- 28:20अंतस की गहराइयों में जाके पाई थी।
- 28:27आज हम कहते हैं हमें कोई डिस्टर्ब न करे वो ज़माना ऊर था कि हमें
- 28:39कोई डिस्टर्ब न करे से लोग भाग जाते थे जब तुम घर में शाम को
- 28:49परखते हो। दिन भर बॉस की गालियां पड़ीं।
- 28:56मेरे पास शिकायतें आ जाती है। आज बॉस में बड़ा काम था, मैंने
- 29:03कहा तुम चिंता मत किया करो, घरवाली से लड़के आया होगा हाँ।
- 29:13तो जब वो गुस्सा हो तो हम ताड़ी मार के ऐसा करो अच्छा आज फिर
- 29:20झगड़ा हो गया देखो। 4 दिन में झगड़ा करना बंद कर
- 29:29देगा। जब वो क्रोध में आए, तुम ताली मार
- 29:33के हंस न तुम्हें नौकरी से निकाला नहीं जाएगा, क्योंकि नौकरी तो
- 29:42सरकार की तो कहने अच्छा फिर आज ही झगड़ा हो गया।
- 29:49बीबी के साथ। वो 4 दिन में बदल जाएगा।
- 29:55ये सूत्र दे रहा हूँ तुम्हें इनोसेंट, बच्चा, इनोसेंट मन लिए
- 30:02सिर्फ इनोसेंट मन ही नहीं होता। इनोसेंट मन काज़ ए लॉट ऑफ
- 30:11हार्मोन्स वैल्यूएबल हार्मोन उसके सारे शरीर में भी करेंगे।
- 30:25थोड़ी देर बच्चे के समीप जरूर बैठा।
- 30:31क्योंकि बच्चा हूँ ही, वो अमूल्य हीरा है।
- 30:37अगर यहाँ तुम संत की संगत में नहीं बैठ सकते या वक्त उपलब्ध
- 30:46नहीं होता। तो तुम्हारे घर में एक संत है और
- 30:50वो संत है बच्चा बच्चे के पास बैठ जाया करो।
- 30:56छोटे बच्चे के पास उसके रोम रोम से आसानी तरंगें सहजता से बह रही
- 31:05हैं गंगा के प्रवाह। वो तुम्हें निरब्बार निरबोज और
- 31:20तुम्हारी सारी थकान को दूर कर देंगे।
- 31:22तुम ये आजमा के देखना। बहुत से लोगों ने मुझे प्रश्न
- 31:27किया। मैं वेला आने पर हर प्रश्न का
- 31:33जवाब देने का कोशिश जरूर करता हूँ।
- 31:40आज प्रसंग आ गया श्रद्धा, प्रेम तुम्हारी सभी थकावटों को दूर कर।
- 31:52तुम खिलखिला के तुम्हारे प्राण हँसते हो आज हँसी जैसे गायब हो
- 32:02गई। हाँ, सो जा।
- 32:14तो आंसू भरा। आंसू जा तो आंसू भरा।
- 32:32मुद्दतें हो गई, मुस्कुराए आज सोचा तो आंसू।
- 32:55मुद्दतें हो गई, मुस्कुराए आज दुनिया।
- 33:06ऐसी हो गई। कि तुम्हें मुस्कुराने के कारण
- 33:11बाहर देखते। तनाव, सोच, फिकर, चिंता इनसे घेरा
- 33:26व्यक्ति। मैं क्यों नहीं बाहर जाता?
- 33:33प्रत्येक व्यक्ति के भीतर लाशहानी तिरंगे निकल रही है।
- 33:39मैं भलीभाँति जानता हूँ कि जब तक व्यक्ति अपने उस अंतःस्थल को छूता
- 33:46नहीं। हाँ, सानी तरंगे नहीं पैदा होंगे।
- 33:50ल सानी तरंगे नहीं पैदा होंगे और मुझे कोई काम भी नहीं है।
- 33:57डरता नहीं हूँ मैं वे अर्थ में क्या तुम गटर के भीतर छलांग लगाते
- 34:04हो? किसी कारण से ही गटर के भीतर
- 34:08छलांग लगाओगे। तुम्हारा बच्चा गिर गया तो तुम
- 34:11कूद पड़ोगे तो बाहर जाने से मैं डरता नहीं हूँ बाहर जाने का मैं
- 34:18परिणाम जानूं इसीलिए तुम्हें? कई बार मुद्दों बीत जाती है तो
- 34:26मैं बुलाता ही नहीं। पांच 5 साल से लोग कह रहे बाबा हद
- 34:38हो गई, अब तो बुला लो कब से सुन रहे हैं तुम्हें?
- 34:52उसका कारण क्या है? क्यों जब तुम आते हो दो 4 घंटे
- 34:56में तुम्हे उपलब्ध नहीं होता दो 4 घंटे क्योंकि तुम लासानी तरंगों
- 35:05में से कहीं से भी आये हो लासानी तरंगों से भर के आये हो?
- 35:14बाहर सब जगह लासानी तरंगें और मैं यहाँ बंद कमरे में एक कमरे में
- 35:21अपने आसानी रंगों से बैठा हूँ, तुम आते हो, यहाँ बाबा जाने को मन
- 35:25नहीं करता, मैं जानता हूँ। मुझे भीतर से करुणा आती, दया आती।
- 35:35काश तुम भी इस फार्मूला को जान लेते लेकिन मजबूर हो क्या करें?
- 35:47लोग मुफ्त में ही रोड इंस्पेक्टर बने रहते हैं।
- 35:51कोई काम धाम नहीं, बेरोजगारी है। अरे अच्छा ज़माना है भाई
- 35:57बेरोजगारी है तो बढ़िया है, खाने को टुकड़ों भलो और ले लो को हरी
- 36:04नाम भीतर बैठ जाओ। दो ठू का खा लो जैसा मिलता, रूकी
- 36:10सूखी खाये के ठंड और पानी पी देख बराई झोपड़ी मत ललचा वह जी अडानी
- 36:17के पास इतना हो गया, पानी के पास इतना हो गया।
- 36:21डालमिया के पास इतना हो गया सिंघानिया के पास इतना हो गया
- 36:26क्यों सोचती हो? तुम अपने आनंद की फिक्र किया को
- 36:38जब तक तुम अपने आनंद की फिक्र नहीं करते, तुम अंत समय गोता
- 36:43लगाने के योग्य नहीं होते। पहले चाहत पैदा होती है, पहले
- 36:53बनो, प्रारब्ध पाछे बनो शरीर पहले चाहत पैदा होती है, फिर तुम भीतर
- 37:02डुबकी लगाते हो। इसे ही मीरा कहते हैं बिरहा की।
- 37:06आग प्रीत के दुख। नगर झिंडोरा बीट पी।
- 37:31जो मैं है सो जान की। प्रिये दुख।
- 37:52नगर ढिंढोरा फेत की? चाहत तब बन होगी जब तुम्हें कोई
- 38:20कमी नजर आए। अभी तुम्हें कमी महसूस हुई नहीं
- 38:30और मैं क्योंकि शरीर वृत है। यह मकान ढहने को है।
- 38:3774 में साल में चल रहा है शरीर कितनी देर और जी ये टीसी टूटने को
- 38:44है घिस गई। इसलिए तुमसे एक बात बता दो, मेरे
- 38:56पास लोग आ जाते हैं, मैं देखता हूँ शून्य कितनी देर हो गई 5 साल
- 39:05हो गए बाबा आपको सुनते हो? फिर भी तुम्हारे कलेजे में अंतस
- 39:23में आनंद का रस क्यों नहीं बरसा? आज ये भी रहस्य खोल दूँ?
- 39:36तुम यहाँ से आसानी तरंगों को पी के जाते हो, मैं सदा ही तुम्हें
- 39:43कहता हूँ कि यहाँ दीक्षा लेने के बाद 7 दिन तो कमरे से बाहर मत
- 39:48करना। बस नहाना धोना, नित्य गर्म करना,
- 39:52खाना खाना और कह देना कभी 7 दिन की छुट्टी दे दो मेरे को पहले से
- 39:59ही छुट्टी लेके आना ऐसे नहीं थे घर चले थे हम, मैं यहाँ के लोगों
- 40:04को क्यों नहीं भुलाता? के यहाँ तो खाना खाने आएँगे या
- 40:09हाथ पांव धोयेंगे चलो बाबा जी से मिला नहीं इसलिए गिद्दड़ भाग
- 40:17लोगों को मैं बुलाता ही नहीं लेकिन तुम्हें आते देर लगेंगी और
- 40:23अगर कोई बहुत दूर से आ रहा। तो मैं उसको वे वक्त भी वक्त दे
- 40:28दूंगा, तुझे पता है इसके भीतर आग सही लगी है तो इतनी दूर से आया
- 40:37फ्लाइट लेके आया आग गहरी है तो मैं वे वक्त भी तुम्हें वक्त दे
- 40:43दूंगा। तो फिर तुम्हारी इन आसानी रंगों
- 40:50को पीने के बाद भी ये हालात क्यों है?
- 40:55तो मैं आज इस रस को खोलता हूँ तुम मुझे सुनने के बाद।
- 41:04किसी दूसरे चैनल पे गए होंगे और वो व्यक्ति लासानी रंगों से भरे
- 41:12पड़े प्रत्येक व्यक्ति की आवाज के साथ उसकी हुंद प्रजेंस की किरणें
- 41:21लेपुट झपट के आती। मेरे जहाँ से तुम आसानी तरंगों को
- 41:29पी के गए, दूसरे चैनल पे चले गए और लाशानी तरंगें बिखेर रहा, वह
- 41:40व्यक्ति तुमने पी लिया। यह बिल्कुल वैसा हो गया जैसे नहा
- 41:45के तुमने गटर में छलांग लगा दी, फिर क्या कहें बाबा मुझे सुनने के
- 41:56फौरन बात ध्यान में बैठ जा मुझे सुनने के फौरन बात।
- 42:02क्रिया योग या क्रिया योग करते करते मुझे सुन और फौरन बाद ध्यान
- 42:09में बैठ जाओ। यह एक सीधा सरल मार गया।
- 42:14इसमें कोई वर्ड फेयर टेड मेड नहीं है।
- 42:20तुम क्यों नहीं पहुंचे? इसका कारण मैंने आज खोला।
- 42:29मुझे सोना नहा लिए। तीरथनामा जयते सुपावय उस विराट की
- 42:39कृपा हुई। तुमने मुझे सुना में कभी कहा मेरी
- 42:46वीडियो को शेयर कर दो क्योंकि यह परमात्मा की कृपा का मसला है
- 42:54इसमें आई डू नॉट इंटरफेयर इन। मैं कोई अड़चन नहीं बाधा नहीं
- 43:04डाला करता, वह जिसे चाहेगा सुना देगा।
- 43:07बहुत से लोग मेरी वीडियो आते ही सीक्रिप्त कर देते हैं क्योंकि वह
- 43:14नहीं चाहता कि ये। अपने भीतर के तीर्थ में स्नान
- 43:18करें। फिर जिसने सर्जना की, अगर वह नहीं
- 43:23चाहता, तो मैं कौन होता हूँ? उसकी सर्जना में बाधा बनने वाला
- 43:33मैं? अगर कहूंगा तुम्हें तो मेरे
- 43:39राजनीतिक चैनल पर जाकर कहूंगा फिर तो मैं कहूंगा खूब सब्सक्राइब
- 43:44करो, गांव भर को पूरे गांव भर को डोलो आप घर घर जाओ, सब्सक्राइब
- 43:51करो आज देश। बदतर हालत में जा रहा है।
- 43:58दिन भर दिन और प्रत्येक व्यक्ति की आंत्र की इच्छा होती है कि मैं
- 44:03कैसी हुक्मरान बनूँ। प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती
- 44:09है। तुम किसी मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति
- 44:13को भी कह दोगे ना? बस गधे के सिवा कि प्राइम
- 44:19मिनिस्टर बनना है, वो कहेगा हाँ बिल्कुल बनना है, गधा नहीं, वो
- 44:26कहेगा पहले से बोझा बहुत है। तो फिर इसका हल क्या है?
- 44:37इसका हल है कि न होई न अगर गटर में छलांग लगाना ही है तो स्नान न
- 44:46करो, क्योंकि वो स्नान करना बेकार हो जाए।
- 44:53मुझे सुनो हिम्मत क्यों भक्त को गंवाते हो?
- 45:04जननी जने तो भक्त जनें या दाता या सुर नहीं तो जननी बांझ रहे।
- 45:13काहे गवा बे नूर? अगर मुझे सुनना है तो कुछ बातें
- 45:21भी समझ लो अगर तुमने मुझे सुनकर दूसरे चैनल पर जाना है।
- 45:32तो याद रखो, मैं भली भांति जानता हूँ।
- 45:37जब बाबा ने कहा और कोई नहीं है बोलने वाला तो मैं उसी दिन समझ
- 45:41गया था जब कोई बोलने वाला है नहीं तो उस तल पर पहुंचा नहीं तो उस तल
- 45:47पर पहुंचा नहीं तो आसानी करके निकलेंगे नहीं।
- 45:58और तुम आसानी तिरंगों को पीकर यहाँ से जाओगे।
- 46:02दूसरे चैनल में तो फिर मेरे पास घंटे 2 घंटे खराब करने का अर्थ
- 46:10क्या हुआ? ज़रा भी तो अर्थ नहीं है अब यह
- 46:15सब्सक्राइब करो। मेरे चैनल से किसी और चैनल जीसको
- 46:20तुम चाहते हो उसे सुन लिया करो इसीलिए मैं दूसरे धर्मों से बहुत
- 46:30से लोग मेरे पास रोज़ कहते हैं बाबा आप दीक्षा दे दोगे, यहाँ तो
- 46:34कुछ मिला नहीं। आपकी बातें लड़ गई, बिच्छू की तरह
- 46:40डस गई दर्द भरी है। मैंने कहा देखो अगर 35 वर्षों से
- 46:49तुम लासानी रंगों को पी रहे हो, एक ढेरे में बैठ कर।
- 46:55तो मैं तुम्हारी तरंगों को हल नहीं कर सकूंगा।
- 46:58फिर मैंने जो लाखों व्यक्तियों का उद्धार करना वो कुछ कुछ
- 47:04व्यक्तियों तक सीमित रह जाएगा। आखिर डिटैजेंट पाउडर उतनी ही
- 47:12मात्रा में चाहिए। जीतने कपड़े गंदे हैं।
- 47:19फ़िल्म में लाखों व्यक्तियों के मल को धोने के बजाए तुम कुछ
- 47:27इन्हें गुने चुने? व्यक्तियों का मल भू।
- 47:32यह ठीक नहीं होगा, समझदारी भी नहीं होगी, इसलिए मैं कहता हूँ
- 47:42देखो अगर परिवर्तन नहीं होता अब यहाँ पीछे हमारे दो गाड़ियां भरकर
- 47:48आ गई हैं। किसी ने समझा होगा कि ये भी डेरा
- 47:54है। दीक्षा मच रही है।
- 47:58जाओ ले आओ उसने तो भला किया होगा, संख्या बढ़ जाएगी, लेकिन उसको
- 48:04क्या पता यहाँ मामला कुछ और है, यहाँ संख्या नहीं बढ़ाई जाती।
- 48:14यहाँ चेतना बढ़ाई जाती है तो हमारे स्वयंसेवकों ने पूछा बाबा
- 48:26की वीडियो सुनी ना कोई क्रियायोग किया नहीं, ध्यान किया हाँ।
- 48:40नाम जपते हैं तो मेरे पास रहते रहते सुनते सुनते ये भी आधे बुध
- 48:52तो हो ही गए हैं, फौरन पहचान लेते हैं।
- 48:58उन्होंने कहा आप जाओ। आपको दीक्षा नहीं मिलेंगे, हम
- 49:04संख्या बल नहीं बढ़ाना है, हमने चेतना की प्रबुद्धता को बढ़ाना है
- 49:13टु इन्क्रीज़ दी लेवल ऑफ कॉन्शसनेस।
- 49:19नट टु इन्क्रीज़ दी काउंट काउंटिंग नहीं बढ़ानी होगी।
- 49:30वो चले गए, बेचारे किसी ने बेच दिया होगा ऐसे व्यक्तियों को मत
- 49:38भेजा करो। ऐसे व्यक्ति अगर आ जाएंगे तो
- 49:45तुम्हें पता जो सो व्यक्ति मेरे पास आकर मुझे सुनने वाले व्यक्ति
- 49:55यहाँ आकर। जब मैं उनके माथे पर हाथ लगाऊंगा,
- 50:01सहजता से वो अपने भीतर चले जाएंगे, उन्हें भी अनुभव होगा और
- 50:08जो 10 जगह के ऊपर टिक कर मार के आए उन्हें कुछ नहीं होगा।
- 50:12फिर वो कहेंगे बाबा क्या होता है, इससे कुछ नहीं होता।
- 50:17बात ठीक है उनकी 10 जगह पे तुम लासानी रंगों को इकट्ठा करके न
- 50:25जाने कहाँ कहाँ के दाग, जिद्दी दाग जिससे सर्फ एक्शन ही हो सकता
- 50:31है। मैंने कोई पीसा नहीं लिया भाई से
- 50:38आजकल बड़े बुद्धिमान लोग हैं बाबा, ये तो एडिटेड है ये
- 50:52बुद्धिमान लोग हँसी आती है मुझे हरकतें इंसान पर।
- 51:01गलतियाँ तो खुद करे और दोष दे भगवान पर बामुशकल कभी श्रद्धा का
- 51:12हीरा जन्म लेता है। तुम खुद की श्रद्धा को तो खराब
- 51:17करते ही हो, तुम्हें कोई अधिकार नहीं है कि तुम दूसरे की श्रद्धा
- 51:22को भी समाप्त करो। मैंने कभी किसी के चैनल पर जाकर
- 51:27कोई कमेंट नहीं किया। अगर इतना ही तुम्हें ज्ञान है।
- 51:33बहुत व्यक्ति कमेंट किए एनलाइटनमेंट पे मैंने कहा भाई
- 51:36अपना चैनल खोलो, तुम मेरे से पहले यू आर एनलाइटन क्यों नहीं भला कर
- 51:44देते लोगों का एक जगह पे बैठ जाओ, धंधा अच्छा है।
- 51:53बेरोजगारी घनी है तो बाबा बन जाओ, तकलीफ क्या है?
- 52:00बहुत से लोग बाबा तो बन गए कैन्टेंट मेरे चैनल से ही चुरा
- 52:05लेते मैं रोज़ देखता हूँ तो मुझे। मेरे एडिटर लोग कहते हैं कि बाबा
- 52:14आपका कंटेंट ही चुरा लिया गया। मैंने कहा देखो भाई पापी पेट का
- 52:19सवाल है चुरा लेने दो इन्होंने विचारों ने बचे बालने।
- 52:32यह तो जीने तक की तमन्ना मस्त और तुम कमेंट करते वक्त ये नहीं
- 52:40देखते कि जो व्यक्ति तुम्हारे लिए ही कर रहा है फॉर युअर फ्रीडम।
- 52:55उस व्यक्ति को अगर तुम मार दोगे, गिरा दोगे, बोलना बंद करा दोगे तो
- 53:00फिर तुम्हारा बला कौन करेगा? तुम हो भी घर ठीक हो भी नहीं अपने
- 53:11पांव पे कुल्हाड़ी मारना। अच्छा नहीं होता बा मुश्किल अगर
- 53:21किसी के भीतर श्रद्धा उत्पन्न होती है, मुझे सुन के भी तो कौन
- 53:25सा श्रद्धा उत्पन्न होती है मुझे सुनने से घड़ी दो घड़ी के लिए।
- 53:33तेरे पास के मेरा वा तू गुजर जाता है।
- 53:46तुम रात को जाते हो ना सुसूबती कतल थोड़ा सा वक्त गुजर जाता है।
- 53:53चिंता हिंता में कोई चिंता नहीं होती सुसुक्ति के उस स्थल पर जाने
- 53:57से और मैं क्योंकि अपने उस स्थल पर जहाँ तुम सुसुक्ति में उसके
- 54:04करीब होते हो वहाँ से बोलता हूँ तो थोड़ी देर के लिए तुम आसानी
- 54:08रंगों को पीकर मदहूसी के आलम में खो जाते हो।
- 54:16तेरे पास आके मेरा वक्त गुजर जाता दो घड़ी के लिए।
- 54:30गम जाने जाने किधर जाता है तेरे फसा के मेरा वक्त गुजर जाता है।
- 54:48ज़रा सोचो। रात का वक्त अगर नींद न होती तो
- 54:53कैसे गुजर पाता? और आज तुमको रात को 1:30 बजे
- 54:59जगाने के लिए पंचबोतक शरीर चले फिरते हैं।
- 55:04मट्टी का पुतला। कैसे नचत कैसे नचत है डर वो फिरत
- 55:20है माटी का कुतारा। कैसो न छत।
- 55:34इसका एक ही हल है मत समय को बर्बाद करो, उसे नहाने का कोई
- 55:43फायदा नहीं तुम गंदा में डुबकी लगा लो।
- 55:46और फिर जाके गटर में छलांग लगा दो, फिर गंगा छीनान का कोई लाभ
- 55:53नहीं होगा तुम्हें, इसलिए मैंने कल बिल्कुल साफ साफ आपसे कहा कि
- 56:03अगर तुम्हारे पास फर्स्ट प्राइऑरटी।
- 56:10साधन है। एक कोने में बैठकर अपने अंत में
- 56:17उतरने के शरीर का निर्वहन करने के योग्य तुम्हारे पास साधन है।
- 56:27तो फिर तुम मेरे राजनीतिक चैनल को मत सुनना, ये कूड़ा है, बिलकुल
- 56:36कूड़ा है। राजनीति में सूअर, लोटा कोटा करते
- 56:42हैं। अब मैं आया हूँ तुम्हारी करुणा के
- 56:48कारण और तुम संतों की करुणा को भी लोग समझ लेते हो गाँधी को गाली
- 57:01निकालने वालों को। मैं रोज़ ही तुम्हें कहता हूँ, ये
- 57:10तो कुदरती गाँधी फिर आ गया तो देख लिया कि गाँधी का हुसर क्या करती
- 57:19है? ये जनता जिनकी एक खिचड़ी नहीं
- 57:24मरी। वह कुर्सी के ऊपर दुबक के बैठ के
- 57:30और याद रखो ये छोड़ेंगे नहीं कुर्सी तुम कहते हो 2047 में
- 57:39विकसित राष्ट्र बन जाएगा। 2047 में कहीं ऐसे तो नहीं?
- 57:48अगर ऐसे ही चलते रहे तो कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति अंदाजा लगा
- 57:54सकता है कि हम नॉर्थ कोरिया से भी बदतर स्थिति में हों।
- 58:02जहाँ सिर्फ सांस लेने की भी आजादी थोड़ी थोड़ी है, ज्यादा नहीं
- 58:10बोलने की आजादी बिल्कुल जो सरकार कहेगी जी है जो सुबह उठते ही।
- 58:20किम जोंग उन की गाथा पढ़नी पड़ेगी।
- 58:25अगर नहीं पढ़ोगे तो मार दिए जाओगे।
- 58:36देश उस राह पे चल गुजरा है और कुछ लोगों की विविशा ग्रंथि इस कदर
- 58:45सड़ गई है भर गई है कि वो कहते हैं कि हमें तो हिंदू राष्ट्र ही
- 58:53चाहिए। मैं कल भी बोला था अखंड भारत
- 58:58बनाने का सपना देखने वाले लोगों तुम काम तो ऐसे कर रहे हो।
- 59:04कल्पना तो हिंदू राष्ट्र की अखंड भारत की देख रहे हो माना लेकिन
- 59:10कर्म निर्धारित करते हैं, कल्पना ही नहीं।
- 59:16कर्म निर्धारित करते हैं। भगवान तुम्हारी कल्पनाओं को नहीं
- 59:20देखता, भगवान तुम्हारे कर्मों को देखता है, कर्मों का ही दंड और
- 59:24कर्मों का ही पुरस्कार। कल्पनाओं का तुम्हें कोई दंड नहीं
- 59:35मिलता, जब तक के तुम कल्पनाओं को साकार करने में जुट नहीं जाते।
- 59:41अखंड भारत की कल्पना करने वाला वो नाथूराम गोडसे जो लटक गया
- 59:45तुम्हारे लिए? क्या तुमने चलो उसकी ही इच्छा
- 59:51पूरी कर दो? गाँधी की बात छोड़ो, गोडसे की ही
- 59:59बात पूरी कर दो उसने तुम्हारे लिए शहीदी की उसका ही सपना साकार कर
- 1:00:06दो। लेकिन तुम्हारी करम क्या है कि
- 1:00:09देखो आज मैं तुम्हें दिखा दूँ यह भी आईना आज तुम हिंदू राष्ट्र
- 1:00:17बनाने चले हो, सारे भारत में हिंदू ही तो नहीं रहते?
- 1:00:27कल को सीख निकलेंगे अपना झंडा, निकालेंगे कहेंगे खाली स्थान दो
- 1:00:33निकाला भी था। यह तो इंदिरा कोई ज्यादा बढ़िया
- 1:00:41राजनीति नहीं समझता हूँ मैं उसे। वहीं तो प्रेम से बैठकर टेबल के
- 1:00:50ऊपर ऑन दी टेबल मसले हल हुआ करते हैं ना के रास्ते में किलो गाढ़ने
- 1:00:59से रास्ते में तुम बॉर्डर की तरह तुम तारें बिछा दोगे या कोई हस।
- 1:01:08यह तो मूर्खों का हल है, अनपढ़ों के अशिक्षितों का हल है सिख शेतों
- 1:01:16का हल है ऑन द टॉप टेबल सिख है भिंडरांवाले।
- 1:01:26शस्त्र जुटाये लेकिन क्यों जुटाये ये भी तो देखो आज तो तुम हिंदू
- 1:01:37राष्ट्र को और तुम्हारी संख्या कितनी कितनी पता है?
- 1:01:4312% हो तुम अगर 12% लोक। हिंदू राष्ट्र की डिमॅंड करेंगे,
- 1:01:52कल को सीख निकलेंगे, क्या करोगे? फौज लगाओगे, फौज में से हुई है और
- 1:02:01फौज अपने ही बच्चों या अपने ही पिता माता के ऊपर फायरिंग करेगी।
- 1:02:08कभी सोचा दिमाग है कि भूसा भरा है कि गाय का गोबर भर लिया तुमने के
- 1:02:15मूत्र पीते हो, रोज़ ओक लगाकर अगर नहीं है तो छोड़ दो कुर्सी क्यों
- 1:02:23देश का विभाजन कर रहे हो? तुम गाँधी की बात छोड़ो, मैं कहता
- 1:02:29हूँ गोडसे की बात ही मान लो गोडसे कहता, अखंड भारत का सपना लिए मर
- 1:02:36गया, वो लटक गया तो तुम गोडसे के अनुयायी हो तो उसके ही सपने को
- 1:02:43साकार कर दो और यह साकार करने का तरीका नहीं है।
- 1:02:47कल्पना रही होगी तुम्हारी, लेकिन कर्म तुम्हारे कल्पना में तुम
- 1:02:56साधु बन सकते हो कर्म में तुम हत्यारे हो जाओ तो तुम्हें साधुता
- 1:03:02का फल नहीं मिलेगा, हत्या का फल मिलेगा।
- 1:03:07कल को सीख निकलेगा वो कहेगा खालिस्तान दो कैसे प्रतिरोध
- 1:03:15करूँगा इसका कल को मराठा निकलेगा, कल को तमिल निकलेगा।
- 1:03:27फिर जैन निकलेगा। फिर बुध कहेगा धरती को पाडो बुद्ध
- 1:03:34की प्रतिमा निकलेगी। यह देश बुद्ध का है और तुम बड़े
- 1:03:40गर्व से कहते हो जब बाहर जाते हो कि मैं उस देश से आया हूँ।
- 1:03:45जहाँ बुध बढ़ गाँधी जन्मे, किस समूह से कहते हो ये दोगलापंथी
- 1:03:52तुम्हें ले डूबेगी, ये दोगलापंथी तुम्हें ले डूबेगी।
- 1:03:58हम तो डूबे हैं सनम, आपको भी ले डूबेंगे।
- 1:04:02लेकिन इन बेचारी जनता ने क्या किया है?
- 1:04:05इन्होंने कोई अपराध नहीं किया, इनको क्यों डबोते हो संघ में कल
- 1:04:13को तमिल कहेगा हमें और तुम उसे राष्ट्रनी दोगे, वो लाठी खेंच
- 1:04:21लेंगे। भाई लाठी उनकी भी अब है खालिस्तान
- 1:04:33दोगे हिंदू रस्त्र दोगे, तमिल रस्त्र दोगे, मराठा रस्त्र दोगे
- 1:04:40जैनियों को बुद्ध को किसको किसको रस्त्र दोगे तुम?
- 1:04:44ये खंड खंड करने की तरकीब है। या अखंड तुम कारिदास हो।
- 1:04:50जीस शाखा पर बैठे उसे ये काटने कौन आए कौन समझाये?
- 1:05:04अगर ये है थोड़ी बुद्धि तो सोचना क्या तुम्हारी कल्पना और तुम्हारे
- 1:05:13कर्म वास्तव में मेल खाते है या नहीं विपरीत।
- 1:05:20इन टोपीधारियों को तुमने भेज दिया, जो 20 किलोमीटर पैदल चलने
- 1:05:25पर थर्मामीटर मुँह में लगा लेते हैं और वह एक शेर था जो 3500
- 1:05:31किलोमीटर चला और काशीबाई में बरसती हुई।
- 1:05:35बर्फ़ के अंदर वह घंटों खड़ा रहा। और उसे बुखार क्या उसे तो अभी भी
- 1:05:46गर्मी लग रही थी ऐसे साहसी व्यक्तियों की आवश्यकता है हमें।
- 1:05:55ऐसे कायरवक्तियों के नहीं के यहाँ पर कोई कांड कराने से पहले विदेश
- 1:06:00निकल गए। यह धंधा ज्यादा दिन चलने वाला है।
- 1:06:06नहीं मुझे मत सोना अगर गटरों में छलांग लगानी।
- 1:06:18या फिर उन्हें ही सो लेना? रस का बड़ा साफ मैंने तुम्हें
- 1:06:24बताया अगर तुम ना समझो तो फिर मैं क्या करूँ?
- 1:06:31मैंने कहा भोग लो ताकि भोग का। निचोड़ निकलाए रस निखलाए के भोग
- 1:06:40में है नहीं मैं कहता हूँ दूसरे चैनलों को सुन लो खूब सुनो तब तक
- 1:06:48सुनो जब तक निचोड़ ना निकल आए इससे आनंद नहीं मिला जाओ ढेरों
- 1:06:55में। जपुना ज्योत नरंजन ओं उंकार मैंने
- 1:07:08कब रोका, मैंने कहा ओर शरखड़ी ज़ोर से गुम।
- 1:07:15जल्दी फल आ जाएगा, भोग भी भटकना भी एक रास्ता है कच्चे कच्चे मत
- 1:07:27उठाना इन डेरों से मैं रोज़ कहता हूँ मेरे पास रोज़ ऐसे प्रश्न
- 1:07:32मैसेज आ जाते हैं। फ़ोन जाते हैं।
- 1:07:35बाबा तुम्हारी बातें तो लड़ गईं, क्या आप हमें अपना लोगे?
- 1:07:45तुम देखो 75 की उम्र हो गई 3540 वर्ष तुम्हें हो गया ज्योत निरंजन
- 1:07:53एक अंका। और वो ही लोग जैसे मैं बोल रहा
- 1:08:01हूँ आगे मत बताना क्योंकि आगे बता दिया तो हमारी दुकानदारी खत्म,
- 1:08:07हमारे पास कौन आएगा? तुम ही बता दोगे जो निरंजन हो माँ
- 1:08:11उनका। कार सो हम सतनाम मुझे ये बताओ अगर
- 1:08:25आ गई बताने से पाप लगता है। तो तुमने करोड़ों व्यक्तियों को
- 1:08:31नाम नाम दे दिया, लाखों को दे दिया, तुम्हारा तो बाल भी नहीं
- 1:08:41कंगा तुम्हारे बाल को बांगा कर सकता है, हवा कर सकता है।
- 1:08:48तो तर्क तो बताओ अगर आगे ये बता देंगे तो पाप लगेगा और तुमने वही
- 1:08:59ज्योत निरंजन ओंकार लाखों लोगों को बता दिया, तुम्हें पास नहीं
- 1:09:05लगा। क्या बात तुम पाप प्रूफ हो क्या
- 1:09:13वाटरप्रूफ की तरह सिम प्रूफ हो तुम?
- 1:09:20लेकिन जब कोई मूर्ख बनता है तो चणक्य कहते हैं कि उन्हें मूर्ख
- 1:09:26बना लेना चाहिए। बस यही नीती तुमने पकड़ ली है इसी
- 1:09:32नीती पर तुम काम कर जाओ और तुम चाणक्य को कोई ज्यादा बढ़िया आदमी
- 1:09:37समझो, दुनिया का गंदे से गंदा व्यक्ति चाणक्य हुआ है।
- 1:09:43खैर, चाणक्य पर कभी फिर बोलेंगे। वीडियो लंबी हो गई।
- 1:09:48करीब करीब अपने वक्त पे आ गए। मसला सही ये है कि अगर दूसरे ही
- 1:09:59बता देंगे तो फिर वो तुम्हारे पास आकर गोलक में माथा क्यों फेकेंगे
- 1:10:09और तुम्हारे पास देने को है क्या? और ध्यान रखना तुम दूसरों का
- 1:10:18नुकसान तो जो कर रहे हो वो तो कर रहे हो।
- 1:10:21इस वक्त में हीरे, मोती, जवाहरात अपने भीतर जो तुम्हारी छिपे हैं
- 1:10:27उनको देखा जा सकता था। तुमने अपना नुकसान पहले कर लिया,
- 1:10:32जैसे क्रोध और काम वासना से लिपटा हुआ व्यक्ति अपना नुकसान पहले कर
- 1:10:38लेता है। दूसरे का नुकसान तो उसके ऊपर
- 1:10:43डिपेंड करता है। बुध के ऊपर तुम गुस्सा खाते हो।
- 1:10:47बुध कहते ठीक है, मैं तुम्हारा गुस्सा नहीं लेता, फिर अगर जिसके
- 1:10:54ऊपर गुस्सा किया वह गुस्सा नहीं करता तो तुम्हारे पर ले क्या रह
- 1:11:01जाता है इतना सा मुँह रह जाता है। तुमने सोचा था दुखी होगा उछलेगा
- 1:11:08लेकिन वो तो चुप हो गया, वो तो हमेशा तुम थूक जाते हो, वो पूछ
- 1:11:15लेते हैं। बुध कहते हैं ये तो मैं समझ गया
- 1:11:20कुछ ऐसा है जो शब्दों में आता नहीं।
- 1:11:24गुस्सा भरा पड़ा। तुम्हारे कुछ और भी कहना है बनते
- 1:11:32वह विनम्र आवाज़ उसके हृदय को चीख जाती है।
- 1:11:39वह रात भर सो नहीं पाता। की याद में तेरी जाग जाग के हम
- 1:11:55रात भर कर बटें बदलते। हर घड़ी दिल में तेरी अल्फत के धी
- 1:12:18में चिराग। जलते हैं याद में तेरी जाग जाग के
- 1:12:33हम रात भर कर बैठें। बदलते हैं।
- 1:12:44जब से तुने निगाह फेरी है। हे परमात्मा, परमिता परमात्मा।
- 1:13:00जब से तुने निगाह फेरी है। दिन है सोना तो राहत।
- 1:13:08अँधेरी ओह अमावस्या की राह। पूर्णमा का चाँद है, लेकिन नजर
- 1:13:20नहीं आता। अमावस्या की रात नजर आती है है
- 1:13:26पूर्णमा की रात। जबसे तुने निगाह।
- 1:13:34तेरी है दिन है, सुना तोरा तंधेरी है, चाँद भी अब न।
- 1:13:52नहीं आता अब सितारे भी कम निकलते याद में तेरी।
- 1:14:11जाग जाग के हम रात भर बकें बदलते हैं हर घड़ी दिल में।
- 1:14:30तेरी उल्फत के धीमे धीमे चिराग जलते।
- 1:14:50श्रद्धा विश्वास उपनों या ब्याम बिनाना पक्षम अगर श्रद्धा उत्पन्न
- 1:15:02हो जाए मुझे मत सुनना पॉलिटिकल चैनल पे।
- 1:15:12जाके मुझे सुनना मत बस अंगूठा लगा देना, सब्सक्राइब कर देना मैं समझ
- 1:15:19जाऊंगा यू वांट टु फॉलो मी तुम मेरे संग हो तुमने ऊँगली पकड़ा दी
- 1:15:32है मुझे। और मैं अंगुली जीते जी पकड़ा करता
- 1:15:36हूँ मरने के बाद ऊँगली पकड़ के सच खंड न कभी आया न किसी ने देखा ये
- 1:15:44पंडितों की तरह लूटने के बहाने है मर कर कभी सच खंड मिला।
- 1:15:52बुध को मिला जीते जी आनंद मिला मरकर मरकर किसने देखा और जो मरकर
- 1:16:00मैंने वो देखा, यमराज आई फला आई ये आई सुनी सनी कहानियों लोगों के
- 1:16:06व्यूज इकट्ठे करने भाई बेरोजगारी घनी कृषि को मटाने के प्रयास में
- 1:16:17मैं जो चला। बहुत दूँ, बहुत दूँ।
- 1:16:29बहुत दूर चला तेरी दुनिया से हो के मजबूर।
- 1:16:48चला मैं बहुत दूर बहुत दूर चला। तेरी दुनिया डेक्कन वापस आ गया
- 1:17:15बच्चे की मासूम आवाज़, नहीं जाना कहीं ये लोक।
- 1:17:27मुझे तुम्हारी मासूम में इस पर तरस रहा है क्या हो गया क्या होगा
- 1:17:35इन रोते बिरखते हुए बच्चों का और मैं वापस चला आया तुम्हारी।
- 1:17:53तुम कृपा करके अगर नहीं सुनना तो मैं कोई डिक्टेटर नहीं हूँ।
- 1:18:01आई ऍम नॉट गोइंग टु बी डिक्टेटर नेवर।
- 1:18:13मैं तुम्हें तुम्हारी गल की फांस छुड़ाने आया अगर लाभ उठा सको तो
- 1:18:21उठा लो नहीं उठाना तो मैं तुम्हें मजबूर नहीं करू।
- 1:18:31तुम स्वतंत्र हो, मैं तुम्हारी स्वतंत्रता में किसी भी तरह की
- 1:18:36बाधा नहीं बनना चाहता, लेकिन कृपा करो तुम्हें अगर कोई बात जचती
- 1:18:48नहीं। तो अपना चैनल खोल वहाँ बोलो जैसे
- 1:18:57मैं कभी किसी के चैनल पे जाके कोई कमेंट नहीं करता।
- 1:19:03मैंने जब पाया तो कमेंट करने का क्या अर्थ रह जाता है?
- 1:19:09फिर मैं अपना ही चैनल खोल लूँ। सत्य बतलाऊ जो मैंने देखा, जो
- 1:19:14मैंने अनुभव किया वो मैं बतलाऊ क्योंकि दूसरों से दूसरों के चैनल
- 1:19:19पर जाकर कमेंट करने में वो आता नहीं, मैंने इतना कंटेंट बिखेरा।
- 1:19:26लोगों ने कहना शुरू कर दिया त्राहिमाम त्राहिमाम अरे बाबा ये
- 1:19:32हीरे मोती ज्वारथ बिखेरने के लिए होते हैं, लुटाने के लिए होते
- 1:19:37हैं, बिलकुल लुटाने के लिए होते हैं क्योंकि हमारे लिए ये व्यर्थ
- 1:19:43और जिसके लिए जो व्यर्थ हो जाता है।
- 1:19:46वह फिर फेंकने के लिए हो जाता है कि मैं तो दूर चला था, लेकिन अभी
- 1:19:58उस पर वर दिगाना कुछ काम और लेना था।
- 1:20:03आठवीं बार मुझे बचाया गया। और हर वक्त मैंने देखा कि उसने
- 1:20:10कोई काम लेना था। अभी अपने इसी यंत्र से तो कोई
- 1:20:19दुविधा नहीं। क्या दुविधा है अपने ही यंत्र से
- 1:20:22अगर वो खेल खेले? तो मुझे क्या इतराज है भला, ज़रा
- 1:20:30भी तो इतराज नहीं, क्योंकि जब मैंने ईनाम दिया नहीं है मेरा कुछ
- 1:20:40तो मैंने जीने की कामना करूँगा। न मरने की कामना करो बस व्यर्थ हो
- 1:20:48गई जब काम खत्म हुआ राम की तरह अब कूद गए सरू के गुप्त घाट।
- 1:21:00वैसे ही जयंतियां बेकार हो गई। अब कोई काम तो लेना नहीं, पूरा
- 1:21:04ग्रंथ पूरा कर दिया तो चलो गंगा तेल चलते हैं त्रिवेणी संगम में,
- 1:21:13चलते हैं यह शरीर किसी के। भूखे मगरमच्छ के या किसी प्राणी
- 1:21:23के पेट भरने के काम आएगा। इसे काहे सात में लकड़ी में
- 1:21:29दफनाना है, राख बनाना है नहीं, इसका कोई मूल्य नहीं है, यह राख
- 1:21:36है। मात्र ₹6 छह आने का मूल्य है इसका
- 1:21:45उसके लिए काहे हजारों रुपए लाखों रुपए खराब करना है तो राम बड़े
- 1:21:53समझदार हैं। करुणा भान।
- 1:21:57ये इंद्रियां इनके लिए व्यर्थ हो गईं तो राम ने इन इंद्रियों को
- 1:22:02त्यागना ही उचित समझा। बस आपसे हाथ जोड़कर ये रिक्वेस्ट
- 1:22:09है अगर आपको भला नहीं लगता। और अगर आपने पा लिया है वो आनंद
- 1:22:21जीस रस में सराबोर हुआ मैं चौबीसों घंटे दीपावली और होली
- 1:22:26मनाता रहता हूँ। तुम या तो मनाओ पियो, उसको अपने
- 1:22:32किसी एकांत में जाके या अपना चैनल खोल लो।
- 1:22:38लेकिन कृपया करके और भी लोग हैं और भी लोग हैं, उनकी भी इच्छाएं
- 1:22:45हैं, उनको भी आनंद चाहिए। उनके आनंद में खलल न डालें, यह
- 1:22:53मेरी करवध प्राप्त हो। एक प्रश्न फिर रह गया, आपने दलित
- 1:23:01व्यक्ति को प्रधानमंत्री के लिए क्यों चुना?
- 1:23:05क्योंकि यह तुम्हारी मान्यता है और मैं मान्यताओं को तोड़ने चला।
- 1:23:14ये शूद्र है, ये ब्राह्मण है, ये वैश्य है, ये क्षत्रिय है, ये
- 1:23:18हिंदू है, मुसलमान है, सिख है, ईसाई है, योगी है, पादरी ये सभी
- 1:23:26तुम्हारी मान्यताएँ हैं। और मैं सभी मान्यताओं को तोड़ने
- 1:23:34के लिए आया हूँ तुम्हारे लिए होगा ललित मेरे लिए दलित नहीं है।
- 1:23:44मैंने सिर्फ दलित होना नहीं देखा। मैंने मेरिट बेसिस के ऊपर इतना
- 1:23:52समझदार व्यक्ति जिसके प्रधानमंत्री पद को एक्सेप्ट करने
- 1:24:00से प्रधानमंत्री की कुर्सी धन्य हो जाएगी, उसको सुना है?
- 1:24:07जो न्याय की क्षमता रखता है, जो भारत के संविधान का एक एक अक्षर
- 1:24:17कंठस्थ ही नहीं है, बल्कि प्राणस्थ है।
- 1:24:22इसके प्राणों में समाया हुआ है। न्यायकारी?
- 1:24:27कभी किसी प्रकार के विवाद में नहीं फंसे।
- 1:24:34कभी इनके ऊपर कोई आरोप नहीं लगा। यहाँ तो जेल में जाने वाले सात
- 1:24:40सात कतलों के लोग को तुम बिहार का उपमुख्यमंत्री बना देते हो, ज़रा
- 1:24:51सोचिए कि अगर तुमने हत्यारों को गद्दियाँ देनी शुरू कर दी तो क्या
- 1:25:01लोग हत्याएं करना शुरू नहीं कर देंगे?
- 1:25:04फिर हत्याओं की होड़ लग जाएगी और फिर यह अखंड भारत का निर्माण तुम
- 1:25:12ऐसे करोगे? थोड़ी अक्ल पैदा करना सीखो अगर
- 1:25:20नहीं है। तो उधारी मांग लिया करो अगर कोई
- 1:25:29कतल करके आया तुमने उसके गले में अलंकारों की भारत रत्न से
- 1:25:37सम्मानित कर दिया। अलंकारों की बरसात करनी शुरू की।
- 1:25:41फूल बरसानी शुरू कर दिए। ऐसा भारत तुम बनाना चाहते हो?
- 1:25:45अखंड यही कृष्ण कहते हैं, लक्षणों को देखो और लक्षण ऐसे।
- 1:25:58थार में कुचलते हुए व्यक्ति को तुमने आज तक नहीं कहा कि छोड़ दो
- 1:26:03गृह मंत्रालय अगर तुम कातिलों को उप मुख्यमंत्री बनाओगे तो क्या
- 1:26:12जनता इतनी सोई हुई है? नहीं जनता सोई।
- 1:26:20जनता विश्राम कर रही है। याद रखो जब झंझटूंगा इन्हें ये
- 1:26:29सोए हुए शेर हैं। ये जग जाएंगे और सोया हुआ शेर जब
- 1:26:35पूर्ण। शक्ति से सम्पन्न हो के उठता है
- 1:26:39तो जब वो दहाड़ मारता है तो दसवें दिशाएं कप जाया करती हैं।
- 1:26:46वो सामान आज्ञा है। धन्यवाद।