Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Dec 24 - अध्याय 2.12 - तुम इस गीता के श्लोक से समाधी प्राप्त कर सकते हो! कौन देता है दीक्षा?
Transcript
- 0:05भगवान कृष्ण बोल रहे हैं। नैत विवाह हम जातून आसम नैतूनने
- 0:16में जनादी पह। नै चैवना भविष्यमहं सर्वे वेमतः
- 0:30परम। अर्जुन हर प्रकार से कोशिश करता
- 0:39है कि किसी की तरह युद्ध न हो टल जाए।
- 0:49अर्जुन के तर्क बिल्कुल ठीक मालूम पड़ते है।
- 0:56लेकिन ठीक है नहीं। कृष्ण की दृष्टि में कृष्ण जिन
- 1:04चक्षुओं से देखते हैं वो चक्षु अर्जुन के पास हैं।
- 1:17कृष्ण कहते हैं, मैं तो कभी ऐसा था कि तुम नहीं थे, मैं कभी ऐसा
- 1:27था कि मैं नहीं था और न कभी ऐसा था।
- 1:32के राजा जन्म तुम्हारे भाई बांधव के भी समद्रण कृपाचार्य नहीं थे,
- 1:41वरना कभी ऐसा होगा कि ये सब नहीं रहेंगे।
- 1:47बड़ा प्यारा स्वीट है चलो। भगवान कृष्ण कहते हैं, सारी गीता
- 1:57का अर्थ और मैं प्रत्येक श्लोक में आपको सारी गीता के अर्थ ही
- 2:03समझाता हूँ। श्लोक एक होता है, समझा देता हूँ
- 2:09सारी गीता को। शायद कोई श्लोक तुम्हारे हृदय के
- 2:16भीतर उतर जाए। ऐसा कोई बेला नहीं था।
- 2:24जब तुम नहीं थे, मैं नहीं था। ये सभी सामने खड़े हुए लोग नहीं
- 2:31थे और ऐसा कोई बेला नहीं होगा जब ये सब नहीं होंगे।
- 2:39कल भी थे, आज भी हैं, कल भी रहेंगे।
- 2:47अगर तू इन्हें शरीर समझता है, अब ध्यान से समझने वाली बात है, अगर
- 2:54तू इन्हें शरीर समझता है तो तो भी ये रहेंगे बड़ी प्यारी बात है।
- 3:09कैसे रहेंगे? शरीर तो मर जाएगा और अगर तू
- 3:15इन्हें आत्मा समझता है तो भी ये रहेंगे क्योंकि आत्मा कभी मरती
- 3:21नहीं अब इसके अर्थ? इस शब्द के अर्थ जीतने अनर्थ हुए।
- 3:34शायद किसी श्लोक का इतना अनर्थ नहीं हुआ।
- 3:41कृष्ण अच्छी तरह से जानते हैं। के यहाँ कुछ भी नष्ट नहीं होता।
- 3:51कृष्ण की प्रकृति है और कृष्ण का ही सारा आपका सहारा है।
- 3:57आप ज़रा समझिये बड़ी गहरी बात। है।
- 4:09कृष्ण कहते हैं, सिर्फ स्ट्रक्चर बदलता है, मूलभूत चीज़ नहीं
- 4:18बदलते। जैसे जब तुम जन्मे थे तब छोटे थे।
- 4:30तुम्हारा रंग रूप तुम्हारा नए नए नक्श कुछ और था बड़े होते गए तुम
- 4:42बढ़ते गए नए नक्श बदल दिया। स्ट्रक्चर बदल गया, फिर जवान हुए
- 4:58सुदृढ़ हो गए। पल से युक्त हो गए जवानी लसके
- 5:05मारने लगी। शरीर बलिष्ठ हो गया।
- 5:14तुम कुछ और प्रकार के लगने लगे जैसे तुम बच्चे थे, वो तुम ही थे
- 5:21और जैसे तुम किशोर थे वो तुम ही थे।
- 5:26और जैसे तुम जवान हुए ये भी तुम ही थे और फिर तुम प्रौढ़ हुए, वो
- 5:32भी तुम ही और फिर तुम वृद्ध हो जाओगे वो भी तुम ही होगे और फिर
- 5:39तुम मर जाओगे वो भी तुम ही होगे। लेकिन कृष्ण कहते हैं क्या बदलता
- 5:45है? स्ट्रक्चर बदलता है।
- 5:52जब माँ के गर्भ में थे तो एक अनोखे समान थे।
- 6:00माँ के गर्भ से बाहर आए। तो कुछ स्ट्रक्चर देखने योग्य
- 6:05बना। माँ के गर्भ में थे तो देखने
- 6:08योग्य भी नहीं थे। गर्व से बाहर आये तो कुछ देखने
- 6:16योग्य बने तुम्हारे शरीर का ढांचा तुम्हारे नैन तुम्हारे नक्ष।
- 6:25तुम स्त्री हो, तुम पुरुष हो और बड़े होते चले गए।
- 6:35अंगों का स्ट्रक्चर बदलता चला गया, ऐसे तुम जवान हो गए।
- 6:43ऐसे तुम फ्रॉड हो जाओगे और ऐसे ही तुम वृद्ध हो जाओगे और वृद्ध होने
- 6:48के बाद तुम मर जाओगे। क्या बदला?
- 6:56सेल्फ स्ट्रक्चर बदला ढाँचा बदला। और कुछ नहीं बदला।
- 7:06कृष्ण कहती है कि तुम रहोगे मतलब क्या है इसके कहने का तुम खाक हो
- 7:18जाओगे। राख हो जाओगे, लेकिन तुम रहोगे वो
- 7:28बात जो आज फिजिशियन करते है मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉर कैन बी
- 7:38डिस्ट्रॉइड? तुम बेटर हो?
- 7:43अगर तुम अपने आप को शरीर समझते हो तो और यह कभी भी नष्ट नहीं होता।
- 7:55भौतिकी कहती है कि शरीर नष्ट नहीं होता।
- 7:59स्ट्रक्चर नष्ट होता है। सर गौर से समझने वाली बात है।
- 8:09पानी स्ट्रक्चर बदल लेता है, जब पानी फ्रीज़ होता है।
- 8:17तो सॉलेट बन जाता है बर्फ़ बन जाता है पानी अपनी साधरण अवस्था
- 8:23में तरल है लिकुर है और पानी जब हम हेट देते हैं और 100 डिग्री के
- 8:30बाद वाष्प बन जाता है तो वाष्प बन के उड़ जाता है।
- 8:33गैसेस में हो जाता है। यह रूप बदलता है पानी, लेकिन है
- 8:43तो पानी रूप तीन बदले कभी ठोस हुआ, कभी तरल था, कभी गैस हुआ।
- 8:56लेकिन क्या वो तीनों एक थे या अलग अलग थे?
- 9:04तुम कहोगे तीनों एक थे, बस यही कृष्ण कह रहे हैं, तुम्हारा
- 9:10स्ट्रक्चर बदलता है। तुम्हारा स्ट्रक्चर मरता है, तुम
- 9:16ऐसा करो, तरल मरा, लिकुड़ मरा तो ठोस बना और लिकुड़ मरा तो गैस बना
- 9:29तो क्या बदला रूप बदला? पानी नहीं बदला, पानी वो ही रहा,
- 9:45पानी का स्ट्रक्चर बदला कभी ऐसा था कि जीस पत्र में डाल दोगे वैसा
- 9:53ही हो जाएगा। जब वो लिक्विड था और कभी ऐसा था
- 10:03कि वह गिलास में बंद ही नहीं होगा उड़ जाएगा ऊपर और कभी ऐसा कि ठोस
- 10:10हो जाएगा तुम्हारे गिलास का आकार नहीं लेगा।
- 10:15लेकिन तीनों रूपों में पानी, पानी अपना स्वभाव नहीं खोता।
- 10:27पानी अपने मूलभूत रूप में सुधार रहेगा।
- 10:30एच टू ओह। तो कृष्ण कहते हैं कि ऐसा कोई
- 10:38बेला नहीं था कि तुम नहीं थे, मैं नहीं था।
- 10:43ये राजा लोग नहीं थे, ये सामने खड़े लोग नहीं थे।
- 10:51ऐसा कोई भी समय नहीं था और न ही कभी ऐसा होगा।
- 10:59अगर तुम इन्हें शरीर मानते हो तो जो भी स्ट्रक्चर मरेगा, इनके भीतर
- 11:06का तत्व नहीं मरेगा, एलिमेंट नहीं मरेगा।
- 11:13एटम नहीं मरेगा। इनके भीतर का मालिक नहीं मरेगा।
- 11:22ढांचे बदल बदल जाएंगे, मूलभूत तत्व नहीं मरेगा।
- 11:30अगर तुम इन्हें शरीर समझते हो तो और अगर तुम इन्हें आत्मा समझते हो
- 11:39तो फिर तो ये रूप भी नहीं बदलेगा। फिर तो स्ट्रक्चर भी नहीं बदलेगा।
- 11:47फिर तो अचल है, अटल है, आत्मा का कोई रंग नहीं, कोई रोक नहीं, कोई
- 12:02ढांचा नहीं, आत्म तो बस एक। प्रजेंस है, एग्ज़िस्टन्स है,
- 12:12आत्मा है, जो कभी मरता नहीं, तत्व कभी नहीं मरता तो फिर आत्मा में
- 12:24और पदार्थ में फर्क क्या हुआ? आत्म ढांचा नहीं बदलता पदार्थ
- 12:32ढांचा बदल लेता है। यही पर आत्मा ढांचा नहीं बदलता और
- 12:45पदार्थ ढांचा बदल लेता है। तुम कभी बच्चे थे?
- 12:52कभी बड़े हुए किशोर हुए, जवान हुए प्रौढ़ हुए, वृद्ध हुए मर गए।
- 12:59ये सब तुम्हारे ही रूप में है, लेकिन प्रश्न कहते है कि यह?
- 13:09मूलभूत रूप से कभी मरता नहीं। न तो पदार्थ मरता है और न ही
- 13:18आत्मा मरती है। ये दोनों बातें बड़ी प्यारी हैं।
- 13:26कृष्ण कहते हैं, यहाँ कुछ खत्म किया ही नहीं जा सकता, इट्स नॉट
- 13:33पॉसिबल टु डिस्ट्रक्ट बैलेंस नहीं किया जा सकता।
- 13:38समाप्त नहीं किया जा सकता मेरी चरस्ती में कुछ भी।
- 13:44विनाश नहीं होता, विनाश होता है। ढंग से समझ लें ना बात को तो
- 13:50स्ट्रक्चर का विनाश होता है, ढांचे का विनाश होता है और तुम
- 13:58ढांचा हो नहीं। अभी तो समझा रहे हैं कृष्ण।
- 14:04कि अगर तुम इन्हें ढांचा समझते हो तो ढांचा भी तो नहीं मरेगा।
- 14:11ढांचा अपने मूलभूत रूप में सजा बना रहेगा।
- 14:16मैं शब्द कहा करता हूँ कौन जाने जीस जमीन पे है तुम चल रहे हो।
- 14:22वो तुम्हारी ही पहले जमीनों की जन्मों की मिट्टी हो, कोई जानता
- 14:32है तुम 1 दिन मिट्टी हो जाओगे, आज तुम ढाँचा हो कल तुम्हारा ये
- 14:39ढांचा नहीं रहेगा। लेकिन तुम रहोगे अगर तुम अपने
- 14:48आपको शरीर समझते हो तो भी तुम रहोगे तुम जीस जमीन पे चल रहे हो
- 14:59कौन जाने? वो तुम्हारे पिछले जन्मों की धूल
- 15:02हो, तुम्हारे पिछले ढाँचों की धूल हो।
- 15:061 दिन तो धूल बन ही जाओगे ना? कृष्ण कहते हैं, कोई ऐसा वेला
- 15:18नहीं था जब तुम नहीं थे जब मैं नहीं था।
- 15:24जब वे राजा लोग नहीं थे सभी थे, लेकिन अलग अलग ढांचो में थे।
- 15:35कल ढांचा कुछ और था। आज कुछ और है और कल कोई और बदल
- 15:40जाएगा। ढांचा बदलता है।
- 15:45भीतर का मूलभूत तत्व नहीं बदलता। अगर तुम अपने आपको शरीर समझते हो
- 15:51तो लेकिन शरीर तुम हो नहीं। कृष्ण के समझाने का ढंग है।
- 16:09तुम शरीर हो नहीं कृष्णन चाहते तो पहले दिन शक्तिपात करके उसे अपना
- 16:23स्वरूप दिखा सकते थे। कृष्ण दिखा देते हैं कि तुम कौन
- 16:30हो, फिर भी तो दिखाना ही पड़ा। मुझे लोग प्रसन्न कर देते हैं।
- 16:39आप कहते हो कि कृष्ण ने शक्तिपात किया तो ये शक्तिपात पहले क्यों
- 16:44नहीं कर दिया? बिल्कुल ठीक है, एक किसान जमीन के
- 16:52बीच बीज बोता है, लेकिन सीधा जमीन में फेंक देता है।
- 17:03किसान जीस जमीन में बीज बोता है। उस जमीन को पहले फ्लो करता है,
- 17:11उसके बीच में फल फेरता है, फिर पानी लगाता है, फिर खाद बचाता है,
- 17:19फिर बीज फेंकता है, फिर बीज फेंकता है और बीज फेंकता है तो
- 17:25बीज अंकित होता है। सीधा ही बीज फेंकेगा तो अंकित हो
- 17:34जाएगा, लेकिन वो बात नहीं बनेगी जो ब्लो करने से विधि वक्त।
- 17:47उसका पौधा बढ़ेगा, उसका झाड़ बढ़ेगा।
- 17:50जहाँ एक के 1000 दाने होने थे, वहाँ 1000 दाने नहीं होंगे।
- 17:57कोई फले फुलेगा कोई नहीं फले फूलेगा, उस शिष्य को तैयार होने
- 18:03में देर लगती है। और कृष्ण अच्छी तरह से समझते हैं
- 18:09के पहले ही मुकाम पर मैं शक्तिपात करूँगा तो व्यर्थ हो जाएगा।
- 18:15अभी इसको तैयार करना होगा और यह सारे गीता तैयारी की गीता है।
- 18:25कब यह योग्य हो जाए? कब वो वेला आ जाए?
- 18:31वह सेंसिटिव क्षण आ जाए जब उस क्षण में मैं इसके ऊपर शक्तिपात
- 18:37कर सकूँ, बिल्कुल अलग अंदाज गीता का यह अंदाज।
- 18:44तुम्हें कहीं नहीं मिलेगा, जितना की व्याख्याएं मिलेंगे, गीता के
- 18:52रोगों का सटीक अर्थ मिलेगा, लेकिन शब्दों का अर्थ मिलेगा, शब्दों का
- 18:58रहस्य नहीं मिलेगा। अर्थों के भीतर भी रहस्य होते हैं
- 19:06और तुम सिर्फ अर्थों तक ही सीमित रह जाते हो, इसलिए गीता तुम्हारे
- 19:11भीतर उतर नहीं पाती। गीता मूल में तुम्हें कहाँ ले के
- 19:16जाएगी? वहाँ तक तुम पहुंचते नहीं, अधूरे
- 19:20रह जाते हो। ऊपर ऊपर रह जाते हो, उसके अंतरिम
- 19:24तर छोर पे जा नहीं पाते हैं, उनसे पूछ लेते हैं लोग कि आप जब।
- 19:46फेंक सकते हो? अपनी शक्ति को शिष्य के ऊपर तो
- 19:53फिर फेंकते क्यों नहीं? बिल्कुल ऐसे ही जैसे जमींदार,
- 19:59किसान? फेंक सकता है।
- 20:03बीज को भूमि के अंदर लेकिन फेंकता नहीं।
- 20:10वह पहले जमीन को तैयार करता है, बीज फेंकने के योग्य हो जाती है।
- 20:15जब जमीन तब बीज फेंकता है। शक्तिपात करने से पहले गुरु भी
- 20:26शिष्य को तैयार करता है। वह जमीन को तैयार करने जैसा है।
- 20:36अब मैं कहता हूँ कि दीक्षित हो जाओ।
- 20:40जीसको मैं दीक्षा दूंगा ही विल सर्टन्ली बी एनलाइटन वह निश्चित
- 20:48रूप से ज्ञानी हो जाएगा, एनलाइटन हो जाएगा, प्रबुद्ध हो जाएगा,
- 20:56समाधि से युक्त हो जाएगा, संबोधि को प्राप्त हो जाएगा।
- 21:03हाउ यू कैन से कॉन्फिडेंटली? तुम इसे विश्वासपूर्वक कैसे कह
- 21:09सकते हो? क्योंकि मैं सारी प्रणाली को
- 21:11जानता हूँ, इसलिए विश्वासपूर्वक कह सकते है।
- 21:18मैं दीक्षा देख के स्पष्ट कह देता हूँ, तुम मुक्त हुए तुम्हारी
- 21:23जिम्मेदारी खत्म है सब सब मैं करूँगा तुमने एक कृपा करने मेरे
- 21:32करने में वादा मत डालना, मैं बीज फेकूं फेकने देना।
- 21:37मैं खाद फेंकूं फेंकने देना, पानी लगाऊं लगाने देना, बस तुम रोड़ा
- 21:45मत अटकना, तुम जो कर सकते हो, इससे ज्यादा और कुछ नहीं कर सकता।
- 21:55इतनी कृपा करना तुम रौकना मत। जब मैं कहूंगा कि तुम शक्तिपात के
- 22:06योग्य हुए, तब शक्तिपात कर तुम बहुत से लोग उनसे पूछते हैं बाबा,
- 22:15अगर तुम शरीर में ना रहे तो? तो कोई बात नहीं शरीर के द्वारा
- 22:23शक्तिपात होता भी नहीं, मैं तुम्हें समझाती हूँ, शक्तिपात
- 22:30होता है, आत्मा की चेतना की एनर्जी को फेंक देना।
- 22:36और उसका विनाश कभी नहीं होगा। वह तो मैं सदा ही रहूंगा।
- 22:43मेरा शरीर तो रोज़ बदलता है। आज से 4 साल पहले जिसने दीक्षा
- 22:50ली, आज 4 साल के बाद मेरा शरीर 4 साल बदल गया।
- 22:55जो चार वर्ष पहले था वो न रहा, बदल गया और कभी ऐसा भी हो सकता है
- 23:05कि यह शरीर न रहे, शरीर का ढांचा ही न रहे तो मैं तो रखूँगा।
- 23:17और वचन मैंने दिया है तुम्हें मैं तुम्हें मुक्त करूँगा।
- 23:26ये वचन मेरा है, ये वचन शरीर का नहीं है, ये बात अलग है कि तुमने
- 23:33शरीर से सुना। मेरे लब बोले फड़फड़ाए लेकिन बोला
- 23:39तो मैं उसका उदगार मेरे लबों ने किया।
- 23:51मेरे कंठ ने वो शब्द प्रकट किए। लेकिन बोला तो मैं और बोलने वाला
- 23:58तुम्हें दिखता नहीं, अगर वो बोलने वाला तुम्हें दिख जाए तो तुम बिना
- 24:06शट्टी बात के वहाँ पहुँच जाओगे जिसकी मैं बात करता हूँ।
- 24:16जिसकी मैं बात करता। हूँ।
- 24:22तुम सब्र के उस छोर पे पहुँच जाओगे जहाँ तुम्हें किसी चीज़ की
- 24:29आवश्यकता नहीं रहती। ध्यान रखना।
- 24:33मैं शब्द जो प्रयोग कर रहा हूँ वह आवश्यकता पर हूँ वहाँ वासनाओं का
- 24:40तो सवाल नहीं है, वहाँ आवश्यकताएं भी मिट जाती हैं।
- 24:43वहाँ तुम्हें किसी चीज़ की जरूरत नहीं रहती है।
- 24:51अगर तुम्हें बोलने वाले का पता चल जाए कि यह जो इस शरीर के भीतर
- 24:57माटी के भीतर बैठा हुआ जो बोल रहा है, वह कौन है?
- 25:05फिर तो गीता बोलने का कुछ मतलब भी नहीं रह जाता।
- 25:11गीता बोलने का कुल मतलब ही इतना है कि तुम्हें पता चल जाए कि ये
- 25:16बोल कौन रहा है। बस इतना सा मतलब है और अगर तुम
- 25:23सहज में समझ जाते हो, देख लेते हो कि बोलने वाला कौन है?
- 25:31तो गीता सुनना और कहना बेकार हो गया फिर कोई आवश्यकता नहीं तो मैं
- 25:42जब कहता हूँ कि जो दीक्षित हो जाएगा।
- 25:52वह एनलाइटन हो जाएगा। 1 दिन जरूर एनलाइटन हो जाएगा।
- 26:05सर्टन्ली ही विल गोट एनलाइटनमेंट मैं इतने विश्वासपूर्वक कैसे कह
- 26:16पाता हूँ? जैसे विश्वासपूर्वक कृष्ण कह पाते
- 26:19हैं, जैसे विश्वासपूर्वक कृष्ण कह पाते हैं।
- 26:26पर तुम समझ नहीं पाती। मैंने कहा अगर तुम्हें पता चल जाए
- 26:29कि बोल कौन रहा है तो तुम न तो मस्तक हो जाओगे जैसे कृष्ण कहते
- 26:40हैं, नन्या चिंतित तो मॉम। जो अनन्य भाव से मुझको भजता है,
- 26:47वह मुझे कौन है मुझको, क्या तुम जानते हो उसे?
- 26:52क्या तुम सच में उसको बाज लेते हो?
- 26:57कृष्ण तो बोल गए, कृष्ण तो कह गए। अनन्या सिंचन तो मॉम ये जनाह परू
- 27:08पास्ते तेशाम नित्या भक्ता नाम योग खेमा भाव में हम अहम मैं उसका
- 27:18सारा भार। अपने ऊपर वहन करता हूँ।
- 27:24योग अक्षमं वाहमं हम वह कौन है जो बोल रहा है क्या कृष्ण शरीर है?
- 27:36अगर शरीर हैं तो वो तो गए। उनको तो ज़रा नाम के बेहेरिये ने
- 27:45तीर विश्व भुजा तीर मार दिया और शरीर तो गया कृष्ण का तो फिर
- 27:53कृष्ण ने जो वचन दिए वो कहाँ गए? कृष्ण कहते हैं, सर्वधर्माण
- 28:00प्रत्यक्षमा में कम शर्म व्रत हम तो हम सर्व पाप्य भमोक्ष स्वामी
- 28:05मा पुच ये मान कौन है? ये क्या शरीर है?
- 28:13फिर शरीर तो चला गया। क्या जब तक वो रहा तब तक ही उनका
- 28:18वचन सिद्ध था? नहीं, बड़ा प्यारा शब्द है कल ही
- 28:28मेरे पास एक प्रश्न आया। ओशो क्यों कह गए?
- 28:34मेरे जाने के बाद मेरी सब विधियों बेकार हो जाएं।
- 28:39मुझे कल सवाल आया है, मैंने कहा क्यों कि कृष्ण के तल से बोल रहे
- 28:51ओशो समझते हैं? कि जब ये मेरा ढांचा नष्ट हो गया
- 28:56तो मैं तो रहूँगा और मैं रहूँगा तो जिसे तुमने मैं को जाना, ओशो
- 29:07को जाना, मैं तो खराब हो गया। तो इस खाक के जरिए तुमने जो बोलता
- 29:15हुआ लब देखा था वह तो गया तुम रोए बहुत ही चल्लाए बहुत गुरु के जान
- 29:24पे तुम बड़े विलाप करते हो लेकिन गुरु कहाँ जाता है?
- 29:28गुरु कहीं नहीं जाता। तो मुझे कल प्रश्न आया कि ओशो कह
- 29:35गए कि मेरे जाने के बाद मेरी बताई हुई सभी विधियों बेकार हो जाएँगी,
- 29:40बिल्कुल ठीक कहते हैं क्योंकि जब वो ही ना रहे तुम्हारी दृष्टि में
- 29:47जो ओशो थे। जब वो ही ना रहे तो फिर उनकी
- 29:53विधियों कह रहे उनके वचन कह रहे उनके दिए गए विश्वास कहाँ रहेंगे?
- 30:01नहीं रहेंगे। वो तुम्हें एक दूसरा आयाम दिखाना
- 30:06चाहते हैं जो आयाम तुम कभी नहीं देख पाओगे।
- 30:13ओशो की कृपा के बिना ये शब्द समझ लेना जीस तल से ओशो ये शब्द बोल
- 30:22रहे हैं तुम समझ ना पाओगे। बहुत सी बातें हैं जो संत बोलते
- 30:27हैं, तुम समझ ही नहीं पाते क्यों? क्योंकि तल बदल जाता है।
- 30:33तुम जीस तल से बात समझ सकते हो, उसी तल से समझ सकते हो, उससे पार
- 30:39के तल की बात नहीं समझ सकते। तुम शब्दों की भाषा समझते हो और
- 30:46यह भाषा शब्दातीत है। कोपशू जब ऐसा बोलते हैं जब कृष्ण
- 30:53जब ऐसा बोलते हैं, यदा जदा ही धर्म से गलाने भक्ति भारत।
- 30:59अभ्युत्थानम अधर्मस्य तथा आत्मानम सरजाम्यहम पित्रा नय साधु नाम
- 31:06विनाशाय से दुष्कर्म धर्म संस्थापनार्थाय संभवा में जोगे
- 31:12जोगे मैं वक्त वक्त पर फिर जन्म लेता हूँ प्रकट।
- 31:22जब जब जरूरत होती है, घोर अंधकार छा जाता है, काले मेघ आसमान को ढक
- 31:30लेते हैं और बरसते हैं। अमावस्या की काली रात में खड़कती
- 31:41हुई ये बजरिया तुम्हारे हृदयों को कपा जाती है।
- 31:47हाथ को हाथ नहीं दिखता मचंद है न तारे हैं, कुछ भी तो नहीं है।
- 31:57और उस घनेरी रात के भीतर तुम्हें कुछ भी तो नजर नहीं आता तो संत
- 32:09कहते हैं कि मैं फिर फिर आता हूँ जब ऐसा माहौल बन जाता है।
- 32:22जब अधर्म अपना पिसारा कर लेता है, जब राजनीति ठगी पे उतर जाते है,
- 32:32जब संत लवाजा पहन के। बैठ जाते हैं।
- 32:40असंत संतो की भाषा शुरू कर देते हैं, जदा जदा ही धर्मस्य गला
- 32:48निर्भक्ति। भारत वह धर्म की गलानी होती है जो
- 32:54उन्हें करना चाहिए, जो उनके करने योग्य हैं।
- 33:00वह कोई भी नहीं करता। अपना अपना दायित्व ना राजनीतिज्ञ
- 33:06संभालना है अपना दायित्व, ना ही धार्मिक लोग संभाले हैं अपना
- 33:14दायित्व तो वो घोर अंधकार की वेला होती है।
- 33:22जब राजनीतिज्ञ भ्रष्ट हो जाएं, तुम्हारे कर का पैसा स्वयं के सुख
- 33:31साधन पर लगाते रहें या किसी विशेष व्यक्ति को बांटते रहें।
- 33:38तो घोर अंधकार की वेला आ गई और जब ठग मूरख मूर अज्ञानी, जो खुद ही
- 33:49को जानते नहीं, वह धर्म का लवादा पहनकर तुम्हारे सामने आ जाते हैं
- 33:55और प्रचार करते हैं। तो समझ लो वह काली वेला आ गए तो
- 34:03इस वेला में कृष्ण कहते हैं क्या करने के लिए मैं अवतरत होता हूँ?
- 34:09पित्रा नय साधू ना जो बेचारे कुछ समय के नहीं इन ठगी ठोरियों को?
- 34:17जो समझते नहीं इन लबादों को जिनकी नजर इतनी पैनी नहीं है रित्रा
- 34:26नायक साधु नाम विनाशाये के दुष्क्रितान और इन लबादे पहनने
- 34:34वाले। विनाश करने के लिए दंड देने हेतु
- 34:42धर्म संस्थापना अर्थाय किसका क्या धर्म बनता है किसको क्या करना
- 34:48चाहिए यह बताने के लिए? संभवामी युग युग है।
- 34:56मैं युग युग में प्रकट होता हूँ, लेकिन मैंने पहले भी कहा कि तुम
- 35:05फिर उसी मोर मुकुट धारी कृष्ण की कामना करते हो कि वो आएगा, हम
- 35:10पहचान लेंगे नहीं नहीं वो नहीं। वो पहचान में आएगा ही नहीं
- 35:16क्योंकि अबकी मोर मोकटर नहीं होगा भाई अबकी वंसरिया नहीं होगी अबकी
- 35:26कुछ और। होगा।
- 35:33अबकी देह धारी वैसा नहीं होगा जैसा तुमने कल्पित कर लिया।
- 35:41बस इसी मूर्खता के कारण तुम लूटे जा रहे हो।
- 35:48कृष्ण के नाम पर बहकाने वाले बहुत हैं आज।
- 35:51नए नए धर्म खड़े कर ये कृष्ण के नाम राधा के नाम पर कितनी ठगियाँ
- 35:58चल रही हैं? ये मूड लोग तुम्हें भरवाएंगे, ये
- 36:07खुद तो तबाह हुए ही हैं, क्यों? क्योंकि इन्होंने अपना आप नहीं
- 36:12जाना और जिसने अपना आप नहीं जाना तो मनुष्य के जामे का मतलब क्या
- 36:18था? मनुष्य के जामे का मतलब तो यही है
- 36:24कि सब प्रकार के जो इसको अंग दिए गए थे।
- 36:28वह सर्व को अपने आप को पहचानने के लिए सटीक बैठते थे।
- 36:35ये जो अंग दिए गए थे मानव के चौले को यह अपने आप की खोज करने में
- 36:44बिल्कुल निपुण है। परमात्मा ने सारी विधान बड़े
- 36:54सुंदर ढंग से बुलाया। मैं कल यही कह रहा था।
- 36:58कोई दीक्षा लेने के लिए बाहर से कैनेडा से आए थे तो मैं कह रहा था
- 37:01देख। 90 डिग्री अगर परमात्मा इन चार
- 37:09उंगलियों की जगह जब पाँचवें भी यहीं खड़े कर देता तो हम।
- 37:14कोई काम नहीं कर सकते। थे।
- 37:17ना लिख सकते थे। ना पढ़ सकते थे।
- 37:20ना इतने तीव्रता से काम कर पाते। बहुत से काम बाधित हो।
- 37:27जाते हैं अब। पशु लिख सकता है।
- 37:30नहीं लिख सकता, उसको खुर दे दिया गया।
- 37:35लेकिन यह जो सटीक। व्यवस्था बनाई।
- 37:38परमात्मा 90 डिग्री। क्या दिमाग होगा उसका?
- 37:44संरचना बनाने वाले का क्या दिमाग होगा?
- 37:47तुम कह देते हो कि बस। नियम ही पर्याप्त।
- 37:51हैं कैसे मानने के नियम ही पर्याप्त हैं।
- 37:58फिर ये 90। डिग्री का क्या नियम के अंतर्गत आ
- 38:00गया? यह 90 डिग्री जो।
- 38:04बनाई या नियम के अंतर्गत आ गई जो भीतर की व्यवस्था या बाहर की
- 38:10व्यवस्था बनाई परमात्मा ने। यह प्रकृति ने ही बना।
- 38:17दी। जो शुगर का।
- 38:22लेवल जो ब्लड प्रेशर का लेवल 80120 कर दिया।
- 38:29और 200 हो जाने। पर तुम कपने लगते हो।
- 38:34क्या यह प्रकृति ने? स्वयं ही बना लिया।
- 38:39इतनी सुंदर व्यवस्था प्रकृति ने खुद ही बना ली।
- 38:45तरह तरह के रंग। रंग के भांति भांति के ये जानवर
- 38:49कितने प्यारे लगते हैं? कलगी है सर के ऊपर।
- 38:53कई जानवर तो ऐसा दिल करता है। पक्षियों को कि देखते ही रहे,
- 38:59इतनी सुंदर व्यवस्था है। उनकी इतनी सुंदर रचना है कि
- 39:05इन्हें निहारते ही रहे। नहीं, मैं कहता हूँ कि परमात्मा।
- 39:14है। तुम मानते हो कि यह नियम ही
- 39:23पर्याप्त? है।
- 39:26शरीर ही पर्याप्त है तो। शरीर को इतनी।
- 39:32ऐक्युरेसी देने वाला कोई नहीं है। ये पदार्थ और।
- 39:39पदार्थ के भीतर इतनी महान संरचना को बनाने वाला ज़रा भी इधर उधर हो
- 39:45जाए, उत्सुक हो जाए। तो हो गया काम?
- 39:54मैं दिमाग की बात करता। हूँ साइंटिस्टों के लिए जब मैं
- 39:58बताया करता हूँ साइंटिस्टों को ठीक है, बताओ?
- 40:04इतने महीन। संगरचना अगर थोड़ा सा इधर उधर हो
- 40:08जाए तो हिल जाता है तो हमारा सब ढाँच।
- 40:13कोई कारीगर है। जो इतनी सुंदर मूर्ति बना के यह
- 40:18मूर्ति स्वयं ही इतनी सुंदर बन गई।
- 40:24तुम कहोगे, बुध ने कहा। कि ईश्वर नहीं है, बिलकुल ठीक
- 40:27कहा। बुद्ध उस तल?
- 40:31तक नहीं पहुंचे। मैं पहले ही बताया था।
- 40:36उस तल तक। आकर रुक गए।
- 40:40जहाँ सर्जना थी, सर्जक नहीं था। और प्रश्न उस तल पर।
- 40:48चले गए। जहाँ संरचना थी और उसको बनाने
- 40:52वाला सृजक भी था। इसलिए बुद्ध धर्म ठहर।
- 40:57नहीं सका। भारत में।
- 41:01क्योंकि भारत में चेतना इतनी उच्च स्तर को छू चूके थे।
- 41:08ये बुध के ठहरने की कोई जगह नहीं। थी, पंडितों ने नहीं।
- 41:13भगाया और यहाँ की चेतना का इतना उत्थान दे कर खुद ही चले गए।
- 41:24खुद ही चले गए बुध। कि जहाँ चेतना का इतना उत्थान है,
- 41:29जो बात मैं करता हूँ, जहाँ मैं रुक जाता हूँ, जो उससे आगे चलते
- 41:34हैं। मैं सिर्फ संसार पे।
- 41:38रुक गया, नियम पे रुक गया के नियम ही पर्याप्त हैं लार्ज अरे
- 41:44सफिसिएंट लेकिन ये नियामक को खड़ा करते हैं।
- 41:51वहीं दुविधा बढ़ गई बहुत। अच्छी तरह से समझ।
- 41:55गए यहाँ नहीं चलेगा मेरा धर्म। और बुद्ध चले गए यहाँ से।
- 42:03जहाँ चल सकता था वहाँ बुद्ध ने अपना धर्म फैलाया, चेतना के इतने
- 42:12उच्च स्वर। चेतना के इतने।
- 42:17उच्च स्वर जहाँ पहले से ही विकसित हों।
- 42:22वहाँ बुद्ध का ये तल के नियम ही पर्याप्त हैं।
- 42:26नहीं चलेगा। कृष्ण कहते हैं, नियामक आवश्यक है
- 42:36और कृष्ण कहते हैं नियामक में अहम् तोआम सर्वपाप भी हो अन्यन्य
- 42:44चिंतन तो मान। धर्म संस्थापना।
- 42:50अर्थाये शंभवामी युगे युगे। मैं आता हूँ यह जो मैं बोल।
- 43:00रहा है। यह कौन है?
- 43:03बड़ा गहन विषय है। बार बार इस वीडियो।
- 43:08को आपको सुनना पड़ेगा, इसलिए? मैंने कहा कि।
- 43:12इस श्लोक को जितना विकृत किया गया, बहुत से श्लोक को विकृत किया
- 43:17गया। अपने ढंग से उसके अर्थ किये गए।
- 43:21लेकिन ये अर्थ अपने ढंग से किये गए अर्थ हैं सही अर्थ नहीं है।
- 43:29ना किवा हम? जात नायम न तुम ने मैं जनादीपह
- 43:36ना? चैब न?
- 43:39भविष्यमह। सर्वे व्यहमत रहता।
- 43:47ऐसा कोई काल नहीं। था।
- 43:50कि अर्जुन, जब तुम। नहीं थे।
- 43:55और ऐसा कोई काल नहीं। था जब।
- 43:58मैं नहीं था। और।
- 44:01ऐसा कोई काल नहीं। था जब ये सामने खड़े हुए राजा और
- 44:05ये फौज नहीं थी। इसको दो दृष्टियों से।
- 44:11देखा जा सकता है। तीसरी दृष्टि तो।
- 44:16आत्मा की आ जाती है। आत्मा का तो ना?
- 44:21ढांचा है ना बदला जा सकता है। उसको तो एक तरफ रख।
- 44:28दीजिए। लेकिन जो ढांचा है?
- 44:31वो शरीर का है। और शरीर पांच तत्वों।
- 44:36से बना। एक तो इसकी वो दशा।
- 44:39है। जब ये पांचों तत्व जुड़े होते हैं
- 44:43तो वह तो शरीर कहलाता कैसे आज हम हैं।
- 44:49यह धातुओं का पदार्थों का वह रूप है जो कि बंधा हुआ है।
- 44:56अपना कार्य कर रहा है। और जिंदा है, हम इसे।
- 45:01जिंदा कहते हैं। और एक वो होगा।
- 45:08जब। ये शरीर बिखर।
- 45:09जाएगा। मिट्टी मिट्टी में मिल जाएगा।
- 45:15वायु, वायु, अग्नि। अग्नि में।
- 45:19आकाश, आकाश। में।
- 45:22जल जल में मिल। जाएगा।
- 45:27पांचों तत्वों। अपने अपने तत्वों में मिल जाएंगे।
- 45:34तो क्या व्यक्ति मर जाएगा? नहीं, कृष्ण कहते मर नहीं।
- 45:38जाएगा, सिर्फ उसका कनेक्शन चेतना से कट जाएगा।
- 45:50कृष्ण कहते हैं दो ही। चीजें हैं।
- 45:54शरीर और शरीर शरीर पंचतत्वों का बना है।
- 46:03और शरीर इनसे। जुदा है तो कृष्ण।
- 46:07कहते हैं ना तो। शरीर मरता है।
- 46:12माँ शरीर मरता है। इसका अर्थ गलत कर दिया तुमने?
- 46:19शरीर तो। कभी मरता नहीं यानी आत्मा तो कभी
- 46:22मरती नहीं। शरीर भी कभी नहीं।
- 46:26अम्रता। ज़रा सोचो।
- 46:32तुम्हारे घर में सारी। फिटिंग है बिजली की?
- 46:36बल्ब भी हैं पक्का भी। है।
- 46:40एसी भी है। हीटर भी है रेफ्रीजिरेटर भी है,
- 46:45ओवन भी है ट्यूब। भी है बल्ब।
- 46:48भी है। सब कुछ है बिजली का सामान है।
- 46:54और एक दूसरे से जुड़े। हुए कनेक्शन है।
- 46:59लेकिन वो बिजली कहाँ से? लेता है।
- 47:04सभी यंत्रों को। चलने के लिए शक्ति कहाँ से ग्रहण
- 47:08करते हैं ये सारे? चाहे बल्ब हो चाहे।
- 47:13ट्यूब हो चाहे। पंखा हो?
- 47:17चाहे हीटर हो, गीजर हो या एसी हो। पानी की मोटर हो।
- 47:24यह चलने के लिए अपना काम करने के लिए शक्ति की से लेते है।
- 47:32तुम कहोगे जी शक्ति। तो?
- 47:35मेन स्विच से आती। है।
- 47:39हमारे ट्रांसफार्मर से। आती है सीधी तार।
- 47:43वो जुड़ जाती है हमारे मेन स्विच में।
- 47:49और अगर तुम्हारे कोई मेन। स्विच को काट जाए तो तो सारे
- 47:56यंत्र का यंत्र भी टूट जाएंगे नहीं।
- 48:04सारे यंत्र वैसे ही रहेंगे, लेकिन काम करना बंद करते हैं।
- 48:12बंद भी रहेगा ट्यूब। भी रहेंगी।
- 48:14पानी की मोटर भी रहेंगी। गैजर, हीटर सब कुछ रहेगा।
- 48:20लेकिन अगर कोई कनेक्शन काट देता है, मेन स्विच से ट्रांसफार्मर
- 48:25का। तो फिर क्या होगा?
- 48:31फिर। ये कोई भी काम नहीं।
- 48:32कर पाएगा? लेकिन क्या?
- 48:38जिसके कारण ये। सारा कुछ चलता था पंखा गेंजर हीटर
- 48:44एसी क्या। वो भी खत्म हो जाएगा।
- 48:48तुम कहोगे नहीं? क्योंकि और घरों को।
- 48:52भी? वह कनेक्शन ही।
- 48:55बिजली देता है। उस।
- 48:58ट्रांसफार्मर से। ही बिजली सप्लाई होती अगर
- 49:03तुम्हारा कोई काटा है। ट्रांसफार्मर से।
- 49:08मेन स्विच तक का। तो तुम्हारे जो यंत्र।
- 49:13हैं। ये काम करना बंद कर देना है हृदय।
- 49:17मस्तिष्क लिवर बाउल, स्टमक जीआईटी सिस्टम, यूटीआइ सिस्टम सारा
- 49:25सिस्टम बाहर भीतर का काम करना बंद कर देगा।
- 49:29क्यों कनेक्शन कट गया? जो चलाता था।
- 49:36शरीर को वो पावर कट गई, वो पावर नहीं मिले, सब बंद हो जाएगा।
- 49:46बालव रौशनी देना बंद कर देंगे एसी।
- 49:49ठंठक देना बंद। कर देगा हीटर गर्मी देना बंद कर
- 49:53देगा। क्योंकि कनेक्शन कट।
- 49:58गया। वो कनेक्शन आता।
- 50:03कहाँ से था? वो कनेक्शन आता।
- 50:07था। ट्रांसफार्मर से वो ट्रांसफार्मर
- 50:11से कनेक्शन आता था। थर्मल प्लांट से थर्मल प्लांट में
- 50:21उत्पादन होता था बिजली का। वहाँ से।
- 50:27पावर हॉउस को बिजली आती पावर हॉउस से ट्रांसफार्मर में जाती और
- 50:31ट्रांसफार्मर में तुम्हारे घरों में आती।
- 50:34यही व्यवस्था है ना, लेकिन अगर तुम्हारे कनेक्शन कट जाए,
- 50:41ट्रांसफार्मर का कनेक्शन तुम्हारे मेन स्विच से कट जाए तो तुम्हारे
- 50:47शरीर का कोई भी काम नहीं करेगा जैसे तुम्हारे घर के बिजली का
- 50:51सारा ठप हो जाएगा कौन? ऐसे ही सारे शरीर।
- 50:57चलते है। एक ही बिजली घर।
- 51:01से उत्पादन होता है बिजली का, पावर का।
- 51:06और वो आगे डिस्ट्रीब्यूट हो। जाता है।
- 51:10तो बिजली आती कहाँ से? है।
- 51:12पावर हॉउस से ये पावर हॉउस कौन है?
- 51:17ये पावर हॉउस हो? तुम।
- 51:22कृष्ण कहते हैं, तुम। हो पावर हॉउस।
- 51:29एक मायने में जब। व्यक्ति हम कह देते हैं, वह मर
- 51:32गया। तो वह मरता नहीं।
- 51:36है उसका। सिर्फ कनेक्शन।
- 51:38टूटता है अपने उजारों से और तुम याने पावर।
- 51:48और ये औज़ार, ये दो चीजें हैं यह औज़ार गतिमान तब तक रहते हैं जब
- 51:58तक के इन औज़ारों का कनेक्शन उस पावर हॉउस के साथ रहता है।
- 52:04जब कट गया तो ये ठहर जाते हैं। कृष्ण कहते हैं कि तुम।
- 52:10यंत्र नहीं हो। तुम शरीर नहीं हो।
- 52:17तुम शरीर हो और शरीर का भी मर्दन है।
- 52:27तुम बिजली के पुंज। हो तुम पावर के पुंज हो, इसलिए
- 52:31उसका नाम दिया गया सर्वशक्तिमान, तुम सर्वशक्तिमान हो, एनर्जी के
- 52:38पुंज हो, सर्वव्यापक हो सब जगह हो।
- 52:42तुम्हारी बिजली तो कहीं होती है, कहीं नहीं होती।
- 52:47और सर्व। ज्ञाता हूँ तुम्हें सब मालूम है
- 52:52यह चेतना के गुण हैं। यह चेतना के गुण है, चेतना सब
- 52:59जानती है, इसलिए सर्वज्ञ है। चेतना सब जगह मौजूद है बिन नामे
- 53:05ना ही कोठाओ या चेतना के बारे में बात की है बाबा ने?
- 53:11ये चेतना के बिना। कोई स्थान नहीं है, जो हो सब जगह
- 53:16चेतना है और किसका स्मरण करो बाबा ने कहा।
- 53:22उसी चेतना का स्मरण करो। जो चेतना।
- 53:28सर्वव्यापक है सब जगह है। उपनिषद में कहा।
- 53:33गया। ईशा वास्य मिदं सर्वम यत किंच जगत
- 53:39याम जगत ये ईशा शब्द। परमात्मा के लिए प्रयोग किया गया।
- 53:46है। ईसा वत्स मिदं।
- 53:47सर्वम जप्त किंच जगते। आम जगत।
- 53:51यह पावर सब। जगह मौजूद है बिन नामे नाहीं
- 53:56कोठाओ ये नाम शब्द नाम? ये तुम्हारा वो नाम नहीं है राधे
- 54:04और राम। यह वो है जो सब।
- 54:07जगह है तुम्हारी राधा कहाँ है तुम तो राधा को जागते हो ये पर।
- 54:13भाषा ही बदल। गई तुम्हारी राधा सब जगह मौजूद है
- 54:18नहीं। जो सब जगह मौजूद है, उसे याद करने
- 54:22की जरूरत क्या है? उसको पुनरुक्ति।
- 54:26करने की आवश्यकता क्या है? लेकिन तुम पुनरुक्ति करते।
- 54:32हो बाबा कहते हैं, पुनरुक्ति मत करना।
- 54:36समर्ध शब्द याद। करना क्या याद करना।
- 54:40यह याद करना बिन ना में नाहीं कोठा कोई हिस्सा नहीं जहाँ मैं
- 54:50मौजूद नहीं। ऐसा कोई हिस्सा नहीं।
- 54:57जहाँ। मैं मौजूद।
- 54:58नहीं। सब जगह मैं हूँ सब जगह मैं हूँ
- 55:04इसलिए ऋषियों ने जब उदघोष किया आखिरी पॉइंट पे जा के चरम बिंदु
- 55:10पे जा के जब उदघोष किया तो क्या किया?
- 55:13अहम् ब्रह्मस्मा सर्बम खलबिदम ब्रह्म।
- 55:20एम आत्मा क्रमः मैं ही परमात्मा हूँ।
- 55:26मंसूर ने क्या कहा? अनल हक मैं।
- 55:30ही खुद खुदा हूँ। और वो खुदा जो सब जगह मौजूद है।
- 55:36कोई ऐसा। था।
- 55:37नहीं जहाँ मैं नहीं हूँ। बेननामे नाही कोठा।
- 55:44जेता कित्ता? तेता नाउ जो सारा पसारा है, ये
- 55:50वॉटेवर इट इज़ वॉटेवर एडजस्ट। एक्सिस्टेंस इस।
- 55:56गॉड एंड आई ऍम दी गर्थ यह सारा पसारा परमात्मा है और मैं
- 56:08परमात्मा हूँ। यानी मैं सर्व व्यापम हूँ।
- 56:13तो ये तीनों गुण? सर्वव्यापकता, सर्वज्ञता और
- 56:17सर्वशक्तिमता ये तुम हो ये जानना है ये स्मरण करना है, ये याद करना
- 56:25है किसी तरह से तुम्हारा कनेक्शन टूट गया है।
- 56:30उस कनेक्शन को पुनः। जोड़ना है।
- 56:35बस इतना सा काम करना। है।
- 56:39हो तो तुम ही सब जगह, लेकिन इस। भूल के बादल ने तुम्हारे।
- 56:46सूरज को ढक। लिया।
- 56:49उस भूल का बादल। हटा देना है जीसको हम इल्यूसन
- 56:54कहते हैं जिसे हम माया कहते हैं, जिसे शंकर ने माया कहा बादल कहा।
- 57:02यह बादल सूरज को ढक लेता है। बादल के ढक लेने।
- 57:07से सूर्य समाप्त नहीं होता। बादल के ढक।
- 57:12लेने से सूर्य लुप्त हो जाता है कुछ देर के लिए।
- 57:18ढक लिया जाता है। माया के द्वारा।
- 57:23भ्रम के द्वारा। इल्यूज़न के द्वारा ढक लिया जाता
- 57:26है। सूर्य का अस्तित्व नष्ट नहीं
- 57:29होता। लेकिन सूर्य तो रहता।
- 57:36है। सत्य सदा है और तुम सत्य हो।
- 57:42आध सच जुगाद सच एबी सच नानक हुस्से भी सच कोई?
- 57:49ऐसा वेला नहीं। जब मैं नहीं था तुम नहीं थे ये सब
- 57:54नहीं थे राजा लोग ये फौज। ऐसा कोई बेला नहीं था और ऐसा कोई
- 58:01बेला नहीं होगा जब ये नहीं रहेंगे।
- 58:08शरीर और शरीर। दो शब्द बोलेंगे इस हाथ में।
- 58:14शरीर आत्मा। वह पावर हॉउस?
- 58:20है वहाँ से बिजली की सप्लाई आती है।
- 58:27ओह, शरीर या। तुम्हारा तंत्र?
- 58:32यह जब उससे कनेक्ट। हो जाता है तो उसके सारे अंग काम
- 58:37करना शुरू कर देते हैं और जब। डिस्कनेक्ट हो।
- 58:40जाता है तो कोई भी अंग काम नहीं करता और देखिए वह पावरहाउस से
- 58:46नगड़ता है नगड़ता है। लेकिन तुम्हारा शरीर।
- 58:51घटता भी है, बढ़ता भी है। जब तुम जन्मे नहीं।
- 58:56थे तुम किते थे? माता के गर्भ में तुम।
- 59:00किते थे दूरबीन के द्वारा भी देखे जा सकते थे।
- 59:07नग्न आँखों से नहीं। देखते थे।
- 59:10फिर तुम बड़े। पोषण हुआ।
- 59:14अंडाणुओं का तुमने जन्म लिया, तुम कितने थे?
- 59:18यही तीन पांच किलो के फिर बढ़ते चले गए।
- 59:26तुम्हारा स्वरुप बदलता चला गया। अब कृष्णम कहते है जो।
- 59:31बदलता है वो तुम हो नहीं। तुम वो हो जो बदलता।
- 59:37नहीं किसी भी काल में। जो ना नष्ट होता।
- 59:43है जो इम्मोर्टल है। और जो अनचेंजेबल है जो बदलता भी
- 59:50नहीं, जो मरता भी नहीं वो तुम हो, लेकिन तुम्हारा शरीर।
- 59:57तो बदलता है। माता के गर्भ में तुम सिर्फ अणु
- 1:00:00होते हो। स्पर्म का एक।
- 1:00:07क्रोमोसोम और अंडाणु एक कितने कितने?
- 1:00:12होते हैं। दूरबीन से देखे जाते हैं।
- 1:00:17वहीं हो ना तुम? जब कोई और हो, कोई और हो तो बता
- 1:00:20देना। तो माता के।
- 1:00:24गर्भ में गए सिंचित हुए। नौ।
- 1:00:27महीने तक। बड़े बड़े हुए।
- 1:00:31फिर तुम इस संसार में आ गए। तुम कित्ते थे?
- 1:00:37जब गर्भ में प्रवेश किए तो कित्ते थे?
- 1:00:42फिर यहाँ की ही। खुराक खा के तुम बड़े हो गए
- 1:00:46कित्ते हो गए? खेल ले जोगे हो गए?
- 1:00:50फिर वो बड़े हो गए, किशोर हो गए। फिर और बड़े हो गए।
- 1:00:55जवान हो गए। फिर तुम्हारी शादी हो गई।
- 1:00:59रोज़ बदलता जाता है। ये ढांचा ढांचा रोज़ बदलता है।
- 1:01:04क्या तुम वहीं रह गए? और कृष्ण यही तुम्हें।
- 1:01:08समझाना चाहते हैं इस। बदलते हुए।
- 1:01:12ढांचे से तुम चिपके हुए हो, ये रोज़ बदलता है और तुम कहते हो ये
- 1:01:16मैं हूँ। कृष्ण कहते हैं, जब तुम।
- 1:01:21पेट में थे। तो तुम कैसे थे?
- 1:01:27संसार में आए तो कैसे? थे।
- 1:01:30बड़े हुए कैसे थे किशोर हुए जवान हुए।
- 1:01:37प्रौढ़ हुए वृद्ध। हुए और।
- 1:01:40लाठी लेकर चलने। लगे हाथ पांव कापने लगे लेकिन
- 1:01:44तुम? लिप्त नहीं छोड़ते।
- 1:01:47तुम ऐसे ही चिपके रहते हो इसके साथ कि तुम।
- 1:01:51इसको। छोड़ते तुम कहते हो ये मैं हूँ 1
- 1:01:57दिन ये घर जाता है फिर क्या तुम मर जाते हो?
- 1:02:01कृष्ण कहते नहीं। इस शरीर के।
- 1:02:05ढांचे के बिखरने के बाद भी तुम नहीं मरते।
- 1:02:10और जब ये ढांचा। बना नहीं था।
- 1:02:12माता के गर्भ में भी नहीं गया था तो कहाँ था?
- 1:02:17तुम्हें पता है कि तुम। दो चीजों के सेमिस्रण से बने हो।
- 1:02:22माता के अंडाणु से और पिता के शुक्रणु से।
- 1:02:28तो आधे तो तुम। माता के अंडाणु में पड़े थे।
- 1:02:34और आधे तुम पिता? के शुक्रणु में पड़े थे।
- 1:02:38ये तुम थे। संयोग बिसात?
- 1:02:44ये दोनों मिल गए। और अगर ये दोनों।
- 1:02:49ना मिलते। तुम्हारे पिता अपने सुक्रणु को
- 1:02:52नाले में बहा देता और तुम्हारी माता के।
- 1:02:56अंडाणु पीरियड्स के द्वारा नाली में बह जाते हैं।
- 1:03:01तो तुम कहाँ होते भाई बताओ कहाँ होते इन?
- 1:03:08दोनों के मिलने से ही। तुम बने हो ना?
- 1:03:12और अगर ये दोनों ना। मिलते हैं।
- 1:03:15तो फिर तुम कैसे बनते? हैं।
- 1:03:20प्रश्न कहते हैं तुम। हो नहीं।
- 1:03:24तुम्हें भ्रम पैदा हो। गया कि मैं हूँ।
- 1:03:28फिर ज़रा बताओ तुम दोनों का? मिलन हुआ अंडाणु का और शुक्रणु का
- 1:03:36फिर तुम बनी। अगर ना मिलते तो तुम बनते नहीं
- 1:03:41बनते फिर तुम। माता के गर्भ में।
- 1:03:44सिंचित हुए तुम बड़े हुए, तुम बाहर आए रोज़ तुम्हारा प्रारूप
- 1:03:50बदल रहा है लेकिन एक चीज़ है जो नहीं बदलती क्या नहीं बदलती
- 1:03:55तुम्हारी लिप्तता नहीं बदलती? तुम चाहे शुक्राणु और।
- 1:03:59अंडाणु थे तो भी तुम कहते थे मैं हूँ।
- 1:04:06जन्म लिया तो भी तुम। कहते हो मैं हूँ बड़े।
- 1:04:09हुए तो भी कहते। हो मैं हूँ।
- 1:04:13वृद्ध हुए कांपने लगे। तो भी तुम्हारी लिप्तता इसके साथ
- 1:04:17खत्म नहीं हुई। और तुम 1 दिन मर।
- 1:04:21गए। मर गए तो लिप्तता फिर भी खत्म
- 1:04:26नहीं हुई। कृष्ण कहते हैं।
- 1:04:29फिर भी इस शरीर के। साथ वो है।
- 1:04:34तो हिंदुओं ने एक बड़ा। अनोखा तजरबा निकाला, वो दफनाते
- 1:04:38नहीं। वो समूल जड़ से नष्ट।
- 1:04:44कर देते हैं। जला दो इसको और जो रहती बचती
- 1:04:51हड्डियों। बसम बहादुर चल ना रहेगा।
- 1:04:56वहाँ। न बजेगी वहाँ सर क्यों किया गया
- 1:05:01ताकि ये जो तुमने शुरू से लेकर अंत तक।
- 1:05:06अपनी चिपकाहट। शरीर के साथ छोड़ी नहीं।
- 1:05:11यह तुम छोड़ दो। हिंदुओं की सारी व्यवस्था इसके
- 1:05:14ऊपर है कि तुम इस शरीर के साथ लिप्तता छोड़ दो और अंत में भी वह
- 1:05:20प्रयास करते हैं तुम्हें जलाते हैं।
- 1:05:24शरीर को जला देते। हैं, हड्डियों को बहा देते हैं,
- 1:05:27बसों को भी बहा देते हैं। फिर तुम कहाँ चले जाते हो फिर
- 1:05:32तुम? यहीं रहते।
- 1:05:33हो। वो जो इकट्ठा हुआ था, जैसे इकट्ठा
- 1:05:40हुआ था, वैसे ही बिगड़ गया। लेकिन कृष्ण यहीं तुम्हें।
- 1:05:45समझाएंगे। बाद में जा के।
- 1:05:49अगले अध्याय में यही। बात होगी कि तुम?
- 1:05:53वास्तव में कौन? हो यह तो ढाँचा था तुम्हें समझा
- 1:05:57दिया। और इसके साथ तुम।
- 1:06:00बराबर चिपटे हुए थे जब से तुम्हें होश आई।
- 1:06:06तब से तुम चिपटे हुए। हो?
- 1:06:08उससे पहले तो होश ही नहीं थे और जब तक मरते हो तुम कहते हो, अरे
- 1:06:12मैं गया मैं मर गया अरे बुलाईयो भाई डॉक्टर के हमारे डॉक्टर के ही
- 1:06:19हुआ करते थे। उसके एक सेहत को अटैक।
- 1:06:23आ गया। उसने दाखिल कर लिया।
- 1:06:28तो डॉक्टर टीएन गई थोड़े। से मज़ाकिया किस्म का वो हंसते
- 1:06:32रहते मजाक किया कि सेठ जी इब तू बच्चा को नहीं, अच्छा तो बाहर आ
- 1:06:39गया वो किस किसी को देख लेता उसको कहते आ भाई।
- 1:06:46गले लग जा मैं चालू मैं भी जा रहा था अभी।
- 1:06:52बच्चा ही था। बच्चा किशोर था 1617 साल की उम्र
- 1:06:57का। अरे, बेटा, गले लग जा।
- 1:07:02मैं चल गया, मैं ताऊ के। तो मैं चले रामगढे चले।
- 1:07:11आखिर तक तुम्हें बुद्धि। नहीं आती।
- 1:07:15कि तुम हो कौन? तुम अपने आपको शरीर ही सुमित्र
- 1:07:19हो। और कृष्ण इसे?
- 1:07:22शरीर की लिप्तता से तुम्हें मुक्त करना चाहते हैं सारे गीता का अर्थ
- 1:07:27यही है कि तुम इस लिप्तता को भूल जाओ और गीत गाने लगो।
- 1:07:33इस गीत गाने का नाम ही गीता है। दिल।
- 1:07:39सुलगने लगा। आशक।
- 1:07:47बहने लगे, दिल सुलगने लगा। अश्क।
- 1:07:59बहने लगे। जाने।
- 1:08:05क्या क्या हमे? लोग।
- 1:08:12गहने लगे। मगर रोते रोते हँसी आ गई है
- 1:08:31ख्यालों में आके। वो जब मुराये।
- 1:08:43जब। याद आए।
- 1:08:50बहुत याद। आ?
- 1:08:55वो जब याद आए बहुत याद आया। गमे।
- 1:09:08ज़िन्दगी के अँधेरों में। चिरागए।
- 1:09:19मोहब्बत जलाये बुझाए। जब याद।
- 1:09:33आए बहुत याद आए आहे। रास्ते हंस दिए।
- 1:09:54थाम कर। दिल लुठे हम किसे के लिए।
- 1:10:05कई। बार।
- 1:10:08ऐसा भी धोखा हुआ है। चले आ।
- 1:10:18रहे हैं वो नजरें झुकाए। जब याद।
- 1:10:29आए बहुत। ज्यादा।
- 1:10:37गमे। जिंदगी के अंधरों में हम।
- 1:10:48चिराग ए। मोहब्बत जलाये बुझाएं।
- 1:10:59जब। याद?
- 1:11:02आए बहुत ही याद। श्री कृष्ण।
- 1:11:12गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:11:27श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव वित्तमात
- 1:11:41स्वामी सखा हमारे। विथ मात स्वामी सखा हमारे अनाथ
- 1:11:54नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद हरे मुरारी।
- 1:12:07ए नाथ। नारायण वसुदेव व ए नाथ नारायण
- 1:12:17वसुदेव। धन्यवाद।