Latest / Khushei Ki Duniya / अधूरी धुन/Incomplete Melody🎶
Transcript
- 0:00सो है गाइस युअर हूँ इस कम दोस्त खुशी इस बेक अगेन विथ अनँद्अर लव
- 0:04स्टोरी फॉर ऑल ऑफ़ यू गाइस आई नो यू गाइस मेस में वो क्या है ना
- 0:08यार छुटियाँ चल रही है तो थोड़ा वही खेल कूद कज़िन्स वगैरह के साथ
- 0:14वक्त कब निकले जा रहा था, पता ही नहीं चल रहा था।
- 0:17फिर मुझे एकदम से याद आया कि। और कहानी डाले तो बहुत वक्त हो
- 0:22गया सो देन आई हाड टु यू नो टेक आउट सम टाइम तो बेक और पता है
- 0:27आवाज़ भी इसीलिए ऑलमोस्ट बैठने वाली है बिकॉज़ हम पूरे इतने
- 0:30हंगामा करते हैं तो चलो ऊपर मार्च की जो कहानी है वो मेरी जिसका नेम
- 0:40अक्चवली वो मेरी बेस्ट फ्रेन्ड का नाम है।
- 0:42प्रियांशी सो आई विल डेडिकेट दी स्टोरी यू नो टु हर मतलब पता नहीं
- 0:50ज़िन्दगी में तुम्हे सच में प्यार मिले ना मलेश पर मेरी कहानी में
- 0:55तुम्हारी कहानी पूरी जरूर होगी। तुम अपने कानो में लगा लो दुनिया
- 1:01से थोड़े से दूर हो जाओ और चलो सुनाती हूँ तुम्हे।
- 1:05प्रियांशी की प्रेम कहानी प्रियांशी अपने हेक्टिक
- 1:11स्केडुयूल, अपने करियर वगैरह को लेकर काफी परेशान रहती थी।
- 1:15लेकिन उसके लिए इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात थी।
- 1:19उसका अकेलापन वो एक पी जी में अकेली रहा करती थी और उसके पास
- 1:25वक्त बिताने के लिए कोई था ही नहीं।
- 1:28अपनी जिंदगी में इतना खालीपन होने के बावजूद पूरे दिन अपना।
- 1:32स्केडुयूल मेंटेन करना अपना काम करना।
- 1:36लेकिन शाम को जब थक हार कर वो अपने रूम में जाती तो सोचती यार
- 1:40मेरे पास भी यू नो एक ऐसा इंसान होना चाहिए जिसे दिन खत्म होने पर
- 1:45मैं अपने दिन की हर एक छोटी बड़ी सारी डीटेल्स दे सकूँ।
- 1:49कब ऑफिस में मुझे किसकी कौन सी बात बुरी लगी?
- 1:52या कोई ऐसा इंसान जिसके लिए कभी मैं लंच बना दूँ, कभी वो मेरे लिए
- 1:56लंच बना दे, कभी वो मुझे पिक कर ले, ऑफिस से या कभी मैं उसे पिक
- 2:00कर लूँ? लेकिन ज़िन्दगी में उसके पास ऐसा
- 2:03कोई भी इंसान नहीं था। उस छत वाले कमरे में वो अकेली रहा
- 2:08करती थी उसके पीजी में। जीस कॉलोनी में रहती थी।
- 2:11वहाँ ज्यादातर लोग पी जी में ही रहा करते थे।
- 2:14उसके बगल वाला कमरा जो था वो खाली था।
- 2:16काफी वक्त से पहले जहाँ वो लड़की रहा करती थी, थोड़ा बहुत बात करके
- 2:21उससे टाइम पास तो हो जाता था। अब प्रियांशी के पास वो दोस्त भी
- 2:24नहीं रही थी। ज़िन्दगी में थकार कर बस।
- 2:28कभी फ़ोन चला लिया करती कभी इंस्टाग्राम क्योंकि और कुछ उसके
- 2:32पास था ही नहीं। करने को अपनी जिंदगी में बहुत
- 2:35अकेली थी वो, लेकिन अब उसकी मुसीबतें थोड़ी और बढ़ गई जब उसका
- 2:42ये अकेलापन उसके दिमाग पर हावी होने लगा, उसे होने लगी नींद ना
- 2:47आने की बिमारी। काफी कोशिश करने के बाद कुछ
- 2:50डॉक्टर्स से सलाह लेने के बाद भी शायद उसका मर्ज कोई दवाई नहीं।
- 2:55कोई इंसान होने वाला था लेकिन वो इंसान उसे अभी तक तो नहीं मिला
- 2:59था। काफी परेशान रहने लगी थी क्योंकि
- 3:03पूरे दिन ऑफिस का काम करना। कभी कुछ कभी कुछ खुद के लिए बहुत
- 3:07सारी चीज़े करना हो उसके बाद अगर तुम्हे नींद न आए तो उसकी जो
- 3:11इर्रिटेशन होती है न वो अलग लेवल की होती है क्योंकि आई ऍम ऑल्सो
- 3:15एंजोमिक पर्सन एंड एंजोमिक पर्सन तो आई नो बहुत गुस्सा आती है जब
- 3:19सिर्फ। यू नो पड़े रहते हो तुम और सीलिंग
- 3:22को देखते रहते हो, तुम्हारे दिमाग में हजारो थॉट्स रहते है।
- 3:26तुम ओवर थिंकिंग कर डालते हो मतलब बस तुम नाम बोलो सारी चीज़े
- 3:31तुम्हे बस बुरी लगनी पड़ती है चिड़चिड़ापन हर चीज़ प्रियांशु
- 3:35अपनी ज़िन्दगी के इस दौर से गुजर रही थी वो चाहती थी की उसकी
- 3:39ज़िन्दगी। फन लविंग हो जाए लेकिन ऐसा कुछ भी
- 3:43नहीं था। पहले जब वो लड़की उसके बगल वाले
- 3:46रूम में रहा करती थी, छत भले ही उनकी अलग थी, अलग घर थे वो बट छते
- 3:51एकदम काइट ऑफ मिल रही थी तो कभी वो उसकी छत पे आ जाया करती।
- 3:54कभी ये उसकी छत पे काफी अच्छा वक्त कट जाता था उसके साथ।
- 3:591 दिन वो अपनी सी प्रॉब्लम में करवटें बदले जा रही थी।
- 4:04फिर उसने सोचा की कुछ देर छत पर ही टहल वो छत पर टहल ही रही थी की
- 4:10एक पलंग वहाँ साइड में पड़ा था। उसने वो उस पर लेट गई और सिर्फ
- 4:14आसमान को देखती रही, लेकिन आज कुछ अलग था कहीं से।
- 4:19गिटार की हल्की हल्की आवाज आने लगी।
- 4:22एक प्यारी सी पर अधूरी सी उधम थोड़ा गौर किया तो उसके बगल वाले
- 4:28जो छत थी उसके कमरे में से वो आवाज आ रही थी।
- 4:31वो चौंक गई की उस कमरे में कोई आ गया, कहीं ना कहीं खुश भी थी की
- 4:36शायद कोई। वही लड़की लौट आई हो या फिर कोई
- 4:39और जिससे अब शायद उसकी दोस्ती हो जाए, क्योंकि ये अकेलापन उससे
- 4:43झेला तो नहीं जा रहा था। खुश थी और उस गिटार की धुन में कब
- 4:48उसे नींद आ गई उसे पता नहीं चला। इतनी रातों से वो ढंग से सो नहीं
- 4:53पाई थी और इसे गिटार की अधूरी ही सही।
- 4:57पर धुन से उसे नींद कब आई पता ही नहीं लगा।
- 5:00खुश थी वो सुबह ख़ुशी खुशी में जब वो ऑफिस गई उसका पूरा दिन मूड
- 5:04अच्छा था, लेकिन दिल में सिर्फ एक सवाल कौन आया होगा बगल वाले रूम
- 5:09में? क्या कोई लड़की होगी या कोई लड़का
- 5:12या कोई कॉलेज का लड़का कैसा दिखता होगा?
- 5:17लंबा होगा या छोटी हाइट होगी या कैसा दिखता होगा ना या एरोगेंट तो
- 5:23नहीं होगा। हजारों ख्याल थे उसके दिमाग में
- 5:26उस वक्त पर जवाब एक का भी नहीं था।
- 5:30यही सब सोचते सोचते ऑफिस का वो दिन गुजर गया।
- 5:33शाम को भागते हुए अपने पी जी पहुंची।
- 5:36की देखूं तो सही की आखिर आया कौन है?
- 5:40जब वहाँ पहुंची तो देखा कि रूम पर लॉक लगा पड़ा था।
- 5:43अब पता नहीं कौन था या कौन थी पर इंतजार के अलावा वो कुछ भी नहीं
- 5:49कर सकती थी तो बस जाकर बैठ गई अपने रूम में और इंतजार करने लगी
- 5:55उस गिटार की धुनकर। वापस से रात हुई और रात होने के
- 6:00साथ ही वो गिटार की धुन वापस आने लगी और प्रियांशी के चेहरे पर एक
- 6:05बड़ी सी स्माइल कि चलो ये धुन तो वजी अब जाके मुझे नींद आ जाएगी
- 6:10लेकिन आज से नींद से ज्यादा इम्पोर्टंट ये जानने लग रहा था कि
- 6:14आखिर ये धुन बजा कौन रहा है? और ये धन अधूरी सी क्यों है ये सब
- 6:19सोचते सोचते वापस से छत पर गई वो इस बार उसे वो इंसान दिखा भी एक
- 6:25बड़ा प्यारा सा लड़का था। उम्र शायद उसी के बराबर की होगी।
- 6:31उसे देखने पर प्रियांची ने उसकी तरफ एक वेव किया।
- 6:35और वो कोई वेव नहीं किया। उसके तरफ तो प्रियांशु को बड़ा
- 6:39अजीब लगा की यार इसको तो मैंने हाई बोला इसने कुछ बोला ही नहीं,
- 6:44कोई नहीं जाके, पलंग पे लेट गयी वापस से उस धुन में वापस से कब से
- 6:50नींद आई उसे बिलकुल पता नहीं चला था।
- 6:53फिर से वो सो गयी थी। बिना उन नींद की दवाइयों के खुश
- 6:58रहने लगी थी। अब वो होगा इंट्रोवर्ट या फिर
- 7:02शायद उसे मेरा वेव करना दिखा नहीं होगा, यही सब सवाल सोचते सोचते
- 7:07अगला दिन भी ऑफिस से गुजर ही गया था।
- 7:10शाम को वापस से वहाँ पहुंची पी जी।
- 7:12लेकिन वो लड़का अभी भी वहाँ नहीं था।
- 7:15अब कुछ दिन यही सिलसिला चला। वो लड़का गिटार बजा था और
- 7:19प्रियांशी कब सो जाती उसे पता नहीं चलता था।
- 7:23हाँ कभी कभार वो देखती की वो एक डायरी भी लिखता था लेकिन उत्सुकता
- 7:29बहुत थी उसे जानने की आखिर ये लिखता क्या है और उस धुन की भीम।
- 7:34ये आखिर ये धुन अधूरी सी क्यों लगती है?
- 7:39पर यही सब ख्यालों में हर रात उसकी आँख लग जाती और सुबह जागती
- 7:44तब तक वो सामने वाला गायब हो जाता।
- 7:47कुछ दिन ऐसे ही क्यूरियोसिटी में गुज़रने के बाद 1 दिन प्रियांशु
- 7:51ने देखा। की वो लड़का तो अपने रूम में चला
- 7:53गया, धुन बजाने के बाद, लेकिन उसकी वहाँ रह गई और आज इत्तेफ़ाकन
- 7:59सोये भी नहीं थे। प्रियांशु उसके धुन सुनने के बाद
- 8:02क्योंकि आज बहुत कम बजाने के बाद ही वो अंदर चला गया था।
- 8:06अब प्रियांशु को वैसे करना तो नहीं चाहिए था।
- 8:10लेकिन कहते है की बच्चो को जीस चीज़ की मना की जाती है।
- 8:15वो उस चीज़ को ज्यादा करते है तो प्रियांजी के दिल ने भी उसे कही
- 8:19दफा मना किया की नहीं किसी की डायरी नहीं पढ़ते है, लेकिन वो
- 8:25अपनी क्यूरियोसिटी में सब भूल चुकी थी।
- 8:27भाग कर उसने वो छत तटाव दी। और सीधा पहुंची दूसरी छत पे हलके
- 8:34से उसने प्यार रखे और जाकर वो डायरी उठा कर ले आई।
- 8:39अब उसने सोचा की थोड़ा सा पढ़ लेंगे, वापस रखेंगे क्योंकि वो
- 8:42इतना मिस्टीरियस इंसान जो था ना उसे उसका नाम पता था ना वो क्या
- 8:47करता है? कब आता हैं?
- 8:49कब जाता हैं ये गिटार के धुन अधूरे क्यों?
- 8:52उस दिन मेरी वेव का उसने रिप्लाय क्यों नहीं किया?
- 8:54हजारों सवाल थे उसके दिमाग में और जवाब तो लेना था ना उस सबका तो
- 8:59उसने वो डायरी के फाइनल वाला जो लास्ट पन्ना था जो उसने शायद अभी
- 9:03अभी ताजा तरीन लिखा था खोल दिया तो उसपे।
- 9:08जो लिखा था उसे देखने के बाद प्रियांज की आँखें बड़ी हो गयी।
- 9:12वहाँ लिखा था हाई मैं थोड़ा सा इंट्रोवर्ट हूँ।
- 9:17तुम्हारी उस वेव का उस दिन रिप्लाय बेक नहीं किया, उसके लिए
- 9:21सॉरी मुझे समझ ही नहीं आया की करना क्या चाहिए अगर मैं रिप्लाय
- 9:25बेक करता और फिर तुम बात करने आ जाती।
- 9:27तो मेरे पास तो कोई बात ही नहीं थी ना तुम्हे बोलता क्या?
- 9:32तो बस इसलिए उस दिन तुम्हे इग्नोर कर दिया उसके लिए आई ऍम वेरी सॉरी
- 9:35ब्य दी वे हाई आई ऍम अनुराग, तुम्हे शायद वैसे तो मुझे देखा ही
- 9:42होगा पर तुम मेरे बारे में जानती नहीं हो ऐसे उम्मीद है।
- 9:46की तुम ये डायरी पढ़ोगी तो जरूर वैसे किसी की डायरी पढ़ना इस नॉट
- 9:51राइट हाँ और ये लिखने के बाद कुछ भी नहीं था।
- 9:55आगे प्रियांशु पढ़ते ही एकदम से चौंक गई की वो इतना लम्बा चौड़ा
- 10:00मैसेज उसी के लिए छोड़ के गया था। अब धीमे धीमे प्रियांशु ने भी एक।
- 10:06निकाली अपने पास से और उसपे लिखा हाई आई ऍम प्रियांशी, अनुराग एंड
- 10:13देखो वैसे बुरा तू लगा था तुमने वेव बेक नहीं किया था, लेकिन कोई
- 10:18बात नहीं। मैं समझ सकती हूँ तुम इंट्रोवर्ट
- 10:21कहाँ मुझ जैसे है एक्स्ट्रा वर्ड जो किसी को भी देख के।
- 10:24कुछ भी बात करने लग जाते हैं तुम्हें तो एन्क्साइटी अटैक आ
- 10:27जाते हो अगर मैं उस दिन तुमसे बात करने आ जाती और उसने पूरी रामायण
- 10:31लिख के उसकी छत पे डाल दी। उसके बाद कुछ देर बाद अचानक से ही
- 10:36गिटार वापस से बजने लगा और प्रियांशी सो गयी।
- 10:40जैसे मानो अनुराग ने उसे वक्त दिया हो।
- 10:44वो नोट पढ़ने का और उसके बाद अपनी धुन को कंप्लीट करने के बाद उसे
- 10:49वापस बुला दिया। उसने नेहा जी को ये बताया, जेस्चर
- 10:54काफी पसंद आया था, वो सो गयी अगले दिन ऑफिस गयी काफी खुश थी वो उसे
- 11:00खुद नहीं पता था इवन ऑफिस में उसके कुछ।
- 11:03कॉलीग्स पूछ रहे थे आज तुम बड़ी खुश लग रही हो, क्या बात है?
- 11:07कोई बात है क्या हम प्रिया जी ने क्या बताती की मेरा नेबर मुझे ऐसा
- 11:12लगता है की मुझे सुनाने के लिए डेली एक धुन बजाता है ताकि मैं सो
- 11:17जाऊ। अभी उसकी थिंकिंग भी हो सकती है।
- 11:20हो सकता है उसे गिटार बजाना पसंद हो।
- 11:23कुछ भी हो सकता है ना यार होने को।
- 11:25लेकिन अब धीरे धीरे इन्हीं चीट्स में उनकी बातें होने लगी।
- 11:301 दिन प्रियांशी ने चिट फेंकने के बदले खुद वो जाके उसकी छत पे बैठ
- 11:35गई। वहाँ कुर्सियां पड़ी थी और हर दिन
- 11:39की तरह अनुराग वो चिट उठाने आया। लेकिन प्रियांशु को वहाँ पाकर
- 11:44एकदम से चौंक गया। तुम यहाँ उसने बोला की यार चिट्स
- 11:50पे भी तो इतनी बाते करते हो आओ आज आमने सामने बैठ के बाते करते हैं
- 11:55वो इंट्रोवर्ट्स सा लड़का और कहा प्रियांशु इतनी एक्सट्रोवर्ट्स
- 11:58लड़की की क्या ही बताऊँ? पूरी रात बैठकर वो बातें ही करते
- 12:04रहे। हाँ, ज़्यादातर बातें प्रियांशी
- 12:06ने की थी, लेकिन सुनने के लिए भी तो क्षमता चाहिए थी तो अनुराग में
- 12:12काफी थी। उसने पूरी रात उसकी बातें सुनी।
- 12:16वो सारी बातें उसे बोल पाई। जो बातें शायद उसने कभी किसी से
- 12:19नहीं कही थी। कभी किसी की बात उसे इतनी बुरी
- 12:23लगी थी की वो रात भर आकर बस रोती रही थी तो कभी शायद किसी का उसके
- 12:27लिए कॉफ़ी उसे बहुत अच्छा लगा था, जिसके लिए वो पूरे दिन स्माइल
- 12:31करती रही थी। कोई छोटी से छोटी बात से लेकर कोई
- 12:34बड़ी से बड़ी ट्रेजेडी भी उसने ऐसे ही बता दिया।
- 12:38अनुराग को और अनुराग ने सुनी भी। पता है कभी कभी क्या होता है ना?
- 12:43हमें किसी से सलाह नहीं चाहिए होती है।
- 12:47हमें बस चाहिए होता है कि कोई बस बैठकर हमारी बातें सुन ले।
- 12:51वो बातें जो शायद हम खुद से भी दोहराने में डरते हैं।
- 12:55वो बातें जो दीवारें भी ना सुन ले, हम ऐसा सोचते हैं।
- 13:00पर वो बातें हमें किसी से तो कहनी होती है, उन बातों को सुनने वाला
- 13:05कोई चाहिए? सलाह तो हर कोई दे जाता है, लेकिन
- 13:09कोई बैठ कर हमारी बातें इत्मीनान से सुने।
- 13:12ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं जो शायद अब प्रियांशु को मिल गया था।
- 13:16अनुराग के रूप में क्नॉइस अब वो हर रात आते, बाते करते और उसके
- 13:22बाद प्रियांशी जाकर सो जाती और उसके लिए अनुराग वो धुन बजाता और
- 13:27ये सिलसिला कुछ वक्त तक चला। लेकिन 1 दिन प्रियांशी के दिल में
- 13:31एक सवाल था की आखिर धुन इतनी अधूरी सी क्यों लगती है?
- 13:36तो उसने सोचा की अब। अगली बार जब अनुराग मिलेगा तो
- 13:40उससे बात जरूर पूछेगी। जब अगली बार वो मिली अनुराग से तो
- 13:44उसने पूछा भी की आखिर अनुराग ये धुन इतनी अधूरी सी क्यों लगती है?
- 13:49ऐसा लगता है जैसे कुछ तो मिसिंग है।
- 13:52अनुराग ने कहा हाँ मिसिंग था दरअसल।
- 13:57आज इस धुन को पूरा करने का वक़्त आ गया है तो प्रियांशु को समझी तो
- 14:01नहीं पर उसने कहा चलो पहले ये पूरी धुन सुना दो मुझे उसके बाद
- 14:06अगला सवाल कराया जाएगा तुमसे और ये कहकर पहली बार अनुराग ने वो
- 14:11धुन पूरी की थी वो धुनम जाकर। जो पहले ही उसके कानों को इतना
- 14:17सुकून देती थी, अब जाकर वो धुन से एक अलग फीलिंग में डाल रही थी।
- 14:22जैसे किसी का पहला प्यार इतनी खूबसूरत हो गई थी।
- 14:26वो धुन पूरी होने के बाद कुछ थोड़े बहुत शब्द भी आ गए थे।
- 14:30उसमें जो नराग गा कर प्रियांश को सुना रहा था।
- 14:35उसके बाद उसने बोला बैठ जाओ यहाँ पे वो बैठे।
- 14:39इसके बाद अनुराग एक केक लेकर आया था तो उसने कहा आज मेरा बर्थडे है
- 14:45शी वास् लाइक अरे यार पहले बताना चाहिए था ना, हम बाहर जाते, अच्छे
- 14:49से सेलिब्रेट करते, थोड़ा पार्टी शार्टी देते लोगों को तो अनुराग
- 14:52ने कहा नहीं। मुझे ना सिर्फ उन लोगों के आस पास
- 14:57रहना पसंद है जिन्हें मेरी कंपनी पसंद है, जिन्हें मेरी पड़ी है।
- 15:02इस दुनिया में हम हजारों लोगों को दिखाने के लिए अपने इमोशन्स को
- 15:06छुपाते हैं। हँसते रहते हैं लेकिन ऐसे बहुत कम
- 15:10लोग रहते है ना जिनके साथ हम हम होते हैं।
- 15:13बहुत कम ऐसे लोग होते है जिनके साथ तुम बेफिकर होते हो।
- 15:18तुम्हे अपनी कोई भी हैबिट ऐसी नहीं लगती है की सामने वाला वो
- 15:21देख कर हमें जज करे। तुम हँस सकते हो।
- 15:24खुल के पता है ये बहुत अनडरेटेड चीज़ है लेकिन हम हर किसी के
- 15:29सामने ना अपना रियल सेल्फ बिलकुल भी नहीं होता है।
- 15:32हम इवन हँस भी नहीं पाते हैं जिनसे हम कंफर्टब्ल नहीं होते
- 15:35हैं। ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जिनके
- 15:38साथ हम हम होते हैं। दी वे वी अरे हसना रोना, कुछ भी
- 15:43बातें बोल देना, वो सिर्फ कुछ स्पेशल लोगों के साथ होता है।
- 15:47वो बांड जो अनुराग का प्रियांशु के साथ था शायद ये दो।
- 15:52ऐसे इंसान थे जो अपने अकेले बन के मारे थे।
- 15:55कहीं ना कहीं इनकी डेस्टिनी इन्हें एक दूसरे के पास लेकर आई
- 15:59थी। कहीं ना कहीं प्रियांशी का, वो की
- 16:03बिमारी का होना भी अनुराग का आना। ये सब कुछ किस्मत थी जो उनके
- 16:10प्यार को। बढ़ाने वाली थी।
- 16:13अनुराग ने प्रियांशी के साथ अपना बर्थडे केक काटा।
- 16:16उसके बाद उसने प्रियांशी को एक लेटर दिया और कहा कि इस लिखावट
- 16:22भरे नोट से ही हमारी शुरुआत हुई थी।
- 16:24सो मैं चाहता हूँ अब अगर हमारे बीच दोस्ती के अलावा कोई रिश्ता
- 16:28बने तो वो। इसी लिखावट भरे नोट से भरे
- 16:32क्योंकि पहली बात मैं बहुत हूँ और तुम्हारे सामने नहीं बोल पाऊंगा
- 16:38और दूसरी बात की ये हमेशा तुम अपने साथ रख सकती हो तो उससे
- 16:42बेहतर क्या ही होगा? ने भी कहा वैसे यार मुझे अभी
- 16:46पढ़ना है, तुम जान कर आओ, मैं कैसे हूँ?
- 16:48उसने कहा नहीं घर जाके पढ़ लेना तो उसने बोला ठीक है ओके चलो बाय
- 16:51अभी मैं जा रही हूँ और वो बोल कर अपने रूम में चली गयी बिकॉज़ उसे
- 16:55वो लेटर पढ़ना था, वो गयी और उसमें अनुराग ने अपनी सारी
- 16:59फीलिंग्स लिखी थी। वो वेइट् कर रहा था अपने बर्थडे
- 17:02का पर ऐसा नहीं था की वो प्रियांजी को पहले से नहीं जानता
- 17:07था। एक बार उसने अक्चवल में लिखा था,
- 17:11उस नोट में की शायद तुम मुझे नहीं जानती थी पहले से, लेकिन मैं
- 17:15जानता था मैं जानता था तुम्हे एक बार शायद जीस क्लिनिक पर तुम गई
- 17:21थी अपने इन्जोमिया के चक्कर में वही मैं भी था अपने डिप्रेशन के
- 17:24चक्कर में और। मुझे उन्होंने यही सलाह दी जी
- 17:29शायद तुम्हे दी थी की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन तुम्हारा
- 17:32अकेलापन है। मेरी कोई भी दवाई उसे दूर नहीं कर
- 17:35सकती। फिर मैंने तुम्हे देखा वहाँ पे और
- 17:39पता नहीं क्यों बस एक कनेक्शन सा महसूस हुआ उसके बाद सॉरी बट मैंने
- 17:45थोड़ा बहुत। तुम्हारे बारे में पता लगाया,
- 17:49थोड़ी बहुत इंस्टा आइडी वगैरह से और पता चला की तुम यहाँ रहते हो
- 17:53और इत्तफाकन ये कमरा मुझे मिल गया।
- 17:56पी जीके रूप में तो बस उस गिटार की अधूरी धुन को पूरा करना भी
- 18:01तुमसे जुड़ा था। मैंने सोच लिया था की इस धुन को
- 18:04पूरा उस दिन करूँगा। जीस दिन मेरे अंदर की फीलिंग्स
- 18:07पूरी हो जाएंगी जो की तुम्हे देखने के बाद हो गयी थी।
- 18:12हाँ उस दिन तुम्हे देखकर तुमसे वेव ना करना बहुत बड़ी इडियटिक
- 18:16बात थी लेकिन मैं एकदम सर सहम गया था की क्या बोलूं मैं?
- 18:22क्या तुम्हे पता तो नहीं चल जाएगा?
- 18:24क्या तुमने मुझे उस दिन क्लिनिक में तो नहीं देखा था?
- 18:26हजारों सवाल थे रिमार्क में प्रियांशु ये सब पढ़ने के बाद और
- 18:32उसकी फीलिंग्स को जीस हिसाब से उसने लिखा था जितनी खूबसूरती से
- 18:36शब्दों में बनाया था उसने वो बहुत खूबसूरत था।
- 18:41बाद उसमें लिखा था क्या तुम क्या तुम हमेशा मेरे साथ रहोगी?
- 18:47क्या इस अकेलापन को हम मिलके हरा देंगे?
- 18:51जी भागते हुए वापस से वहाँ गई और अनुराग वहीं बैठा था।
- 18:57पेपर में लिखे रहने के बावजूद क्नॉइस?
- 18:59अपनी फीलिंग्स को उसने फिर से बयां किया, प्रियांची के सामने
- 19:04क्या तुम हमेशा के लिए ऐसे ही रहोगी?
- 19:07मेरे साथ और प्रियांची की आँखों में आंसू से शायद जितनी वह
- 19:13एक्स्ट्रोवर्ड दुनिया के लिए थी, वह उतनी थी नहीं उसकी रियल सेल्फ।
- 19:18सिर्फ अनुराग जानता था कितनी छोटी छोटी बातों पे वो रोने लग जाती थी
- 19:23जो दुनिया के सामने इतना टफ दिखाती थी खुद को और कहा कोई भी
- 19:28बड़ी बात हो जाए वो सोचती हाँ हाँ हो जाएगा, लेकिन अपने रूम में आकर
- 19:321000 दफा सोचती हूँ उसके बारे में ऐसी थी वो और अनुराग को पसंद थी।
- 19:39जीस दिन हमें वो इंसान मिलेगा ना जो सच में हमारी केयर करेगा उसके
- 19:44सामने ना कोई भी चीज़ और मैटर ही नहीं करेगी।
- 19:47कोई भी चीज़ उसके सामने सिर्फ तुम मैटर करोगे जैसे तुम हो इसीलिए
- 19:54तुम जैसे हो वैसे रहो। दुनिया को जो बोलना है बोलने दो
- 19:59इट जस्ट डोएसन्त मैटर और तो प्रियांशु ने अनुराग का प्रपोजल
- 20:06एक्सेप्ट किया एंड दे लिव्ड हैप्पिली एवर आफ्टर।
- 20:10इसी के साथ ये कहानी तो यहीं खत्म होती है और मेरा गला भी।
- 20:15बिकॉज़ यार मैं क्या बोलूं? मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे जुकाम
- 20:18होने वाला है और मेरे आधे वर्ड्स ही गायब हुए जा रहे हैं।
- 20:22अब मैं क्या बोलूं यार चलो जाने दो चलो फिर मिलती हूँ तुमसे अगली
- 20:27कहानी में और अगर किसी को कोई भी बात करनी है तो यू कैन ऑलवेज कम
- 20:32अप टु मी ऐट के हेच यु। अंडरस्कोर एस हेच इ आई अंडरस्कोर
- 20:38पर बाकी सब ठीक रहो, खुश रहो मिलती हूँ तुमसे अगली कहानी में
- 20:44टिल देन टेक केयर एंड बाई बाई।