Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Jun 25 - ध्यान और क्रिया योग से जानो सनातन का रहस्य! ईश्वर कैसे चुपचाप कर्मों का हिसाब करता है?
Transcript
- 0:01सूरजकुमार परमात्मा की लाठी बेअवाज़ है आवाज़ बिल्कुल नहीं
- 0:17होगी। लेकिन उसकी चोट तुम्हारी
- 0:25अंतरात्मा तक की जड़ें हिला देती है वापिस क्या है?
- 0:36सूरज कुमार। इसका अर्थ थोड़ा गहरा है।
- 0:54प्राचीन समय की बात है एक राजा के साथ पुत्रिय हुआ करते थे।
- 1:07सातों पुत्रियां जो राजा कहता उसके हुक्म को मानता हूँ लेकिन एक
- 1:17पुत्रें। नहीं मानती प्रहलाद राजा कहता मैं
- 1:26मालिक हूँ, देखो सारी जनता मेरी आगे गुहार लगाती है, मुझसे मांगती
- 1:33है। सभी पुत्रियां कहती हैं, हाँ,
- 1:37पिताजी ठीक है तुम्हारी। बात।
- 1:40ये सभी ही तो मांग रहे हैं तुम्हारे दरबार में आके एक पुत्री
- 1:48के तुम्हारे जिसने उन विराट हाथों को देख लिया।
- 1:56वह नहीं मानेगा कि मेरा पिता कुछ करता है।
- 2:05पिता मुझे क्षमा करें, तुम कुछ करते भी नहीं, क्या सच्चाई है?
- 2:23आगे करने के हिसाब से देखा जाए तो माँ करती है पहले दिन से बच्चे को
- 2:31संभालना। परवर्ष करती है, मलमुत्र करती है,
- 2:41सब करती है जीसको तुम करने में गुरेज करते हो।
- 2:45ऐसे पिता हिरण्यकश्यप की तरह निर्दयी भी होते हैं।
- 2:55और क्रूर भी होते हैं। अच्छा तब भी नहीं करते हैं तो
- 3:05उसने छः पुत्रियां को सात पुत्रियां।
- 3:11बड़े अमीर घरानों में शहंशाह हूँ, बादशाह हूँ के साथ उनकी शादी की
- 3:20और साथी पुत्री जो कहती थी नहीं तो नहीं करते।
- 3:28मैंने पहले भी कहा था ये बात। और फिर कहता हूँ जिसने उन बराट
- 3:33हाथों को देख लिया वही ऐसी जरूरत कर सकता है अन्यथा सभी चरण पकड़
- 3:42लेते हैं। बिलकुल ठीक चरण चुम्बक होना बड़ी
- 3:47आसान बात है। क्या कह दो कि वह जानता ही इतना
- 3:55सौभाग्यशाली वो जिसने बाबा नानी की तरह वो अज्ञात हाथों को देख
- 4:01लिया जब विराट। इसलिए मैं कहा करता हूँ कि तुमने
- 4:10उसके विस्तार को बचाकर मूर्तियों में समेट दिया।
- 4:20मैं गोशाला मंदिर जाया करता था, वहाँ एक नहर हुआ करती, वहाँ घूमता
- 4:25फिरता रहता था। वहाँ एक जमींदार बेचारा निकली हुई
- 4:35धूप, उसके सारे कपड़े, लतपथ पसीने से चेहरे पर झुर्रियां।
- 4:47मुशक्कत करके आता और जब पानी पीता नहर में से वह नहीं देखता था,
- 4:54डिस्ट्रिड वाटर है या क्या है वह पी लेता हूँ क्या सूझ जाती हूँ
- 5:03हम? नहीं पी सकते ऐसा फन?
- 5:10तुम मुझे अक्सर कहता, पंडित जी ने अगर मुझे कभी परमात्मा भेजा है,
- 5:17मैं उसे घसा घसा के इतना सा कर दू इतना सा मैंने कहा वो तो कर ही
- 5:23रखा है। पंडितों ने पुजारियों ने कितना
- 5:33विराट और लड्डू को पहले बना दिया सूट्स ये गसा गसा के छोटा सा कर
- 5:42दिया। तुम क्या करोगे?
- 5:46उत्तरखंड ने कर दिया परमात्मा की लाठी पे आवाज होती
- 6:01है? घाव बड़ा गहरा होता है, चमड़े पर
- 6:12उसके निशान नहीं होते, लेकिन अंतः में उसके बड़े गहरे घाव छोड़ जाता
- 6:19है। भाई।
- 6:29छोटी उम्र में एक बच्चा मेरे पास आया, बड़ी सेवा करता हुकम मानता
- 6:45जाओ, वहाँ से ये ले आओ वहाँ से ये ले आओ ले आता।
- 6:48पांव दबाता रहता हूँ। मैंने कहा भाई दुखते नहीं हैं।
- 6:53जब दुखेंगे तो दबा देना। जरूरत हुई तभी लेकिन हम तो उलटे
- 7:01लोग हैं। हम तो श्रद्धा में भी खिलाते हैं
- 7:08तो उसको खिलाते हैं जो खाने के बाद तुम्हें गालियाँ निकाले,
- 7:14हमारे यहाँ दुर्गा मंत्र में मैं अक्सर कहानी सुनाया करता हूँ एक
- 7:18पंडित हुआ करते थे पेट पे हाथ मार रहे पांव पे पांव रखा हुआ।
- 7:27गालियाँ कर्रा दुष्ट ने बहुत भोजन खिलाद किया।
- 7:31पेट दुःख रहा है और तुमने बड़ी श्रद्धा से अपने पिताजी को माल
- 7:42कूड़े खिलाये थे। कितने अंधे श्रद्धालु हो गए मंदिर
- 7:53से बाहर चार हड्डियों को दिया एक बिगाड़ी बैठा उसके बस पीने को दूध
- 8:02नहीं। भिखारी कवच्या पास बैठ और तुम
- 8:08शंकर भगवान पे दूध जड़ा रहे हो। यह कैसी जड़ता है?
- 8:21यह अध्यात्म है या जड़ता है? यह जड़ता है।
- 8:28अगर तुम में ज़रा भी मानवता होती, ज़रा भी तुम अध्यात्म कहते तो यह
- 8:34दूध तुम उस गरीब को बुला देते और खाली है चले जाते उस पत्थर को दूध
- 8:40पिलाने का कोई फायदा नहीं वो कहाँ पीता है?
- 8:45वो तो नालों में से गुजर जाता है और तुम बड़े अत्याचारी लोग हो।
- 8:54तुम इस गरीब को नहीं खलते, जिसकी आंचड़ियाँ भूख से मर रही हैं।
- 9:02कुपोषण के कारण जिसकी हड्डियाँ बाहर निकल आईं।
- 9:06उसको नहीं देते। वो दूध डोलू भर के लेके आते हो और
- 9:11हर हर हर हर बम बम बम गिरा देते हो उसके ऊपर मैंने बाबा से कहा
- 9:20बाबा ये क्या मुड़ता है? बाबा कहते हैं जड़ता के यही लक्षण
- 9:29होते हैं। ज़रा देखिए बाहर बैठा है जिसे भूख
- 9:39लगती है। इस पिंडी को तो भूख भी नहीं लगती
- 9:46इसके ऊपर तुम महाकालीश्वर में चले जाना, ऐसे पागल मिलेंगे तुम्हें
- 9:53बड़े कीमती द्रव्य सुगंधित पदार्थ।
- 10:02वे शर्ते हुए स्नान करवाएंगे, कवि केसर का, कवि चंदन का, कवि घृत
- 10:08का, कवि दूध का और कवि गंगा जल का और उच्चारण करेंगे।
- 10:19ओम तरमबकम राजामह सुगंध पृष्ठ पर धनमं उर्वरक में वंधाना मृत्यु
- 10:32मोक्ष माँ मृता ओम। बिखैर जागे सब कुछ इन द्रव्यों की
- 10:43जरूरत पत्थरों को तो न थी, इन सुगधित पदार्थों की जरूरत इन
- 10:51पत्थरों को तो न थी। तुम्हें जड़ से हटकर चेतन की खोज
- 11:01करनी थी और तुमने उस चेतन को छोड़कर जो भूख के मारे बेचारा
- 11:09साँसिक रहा, तुमने उस पत्थर के ऊपर चढ़ा दिया।
- 11:16फिर तुम कहते हो बाबा दुखी हैं अपने कर्मों के कारण बुखला जिसे
- 11:24तुमने आध्यात्मिकता समझा, अध्यात्मिकता नहीं, वो जड़ता है।
- 11:32अध्यात्मिकता तो तो होती। अगर तुम्हें बाहर बैठा वो गरीब
- 11:35दिख जाता और तुम कहते आप पहले पियो, कोई बात नहीं।
- 11:40भगवान के घर तो सब है, वह तो भूखा होता भी नहीं।
- 11:45दरअसल मैं वह इतना तड़पता है कि उसे भूख नहीं लगती, जीसको भूख
- 11:51लगती है, उसे तम पिलाते हैं। तो इस जड़ता का फल क्या होगा?
- 12:00तो फल तो परमात्मा देता है। तुम्हारे कामो का तुम्हें जड़ता
- 12:06है, तो फल वैसा ही मिलेगा। तुम्हें चेतनता है तो फल वैसा ही
- 12:11मिलेगा। तुमने उस भिखारी को न देखा तुमने
- 12:23द्वार पे आये उस भूखे को न देखा जो अपनी कुटिया को छोड़ के
- 12:27तुम्हारे द्वार पे अपने पेट के भुख लिए हुए है दो रोटी मांगता है
- 12:36ये रोटी तुम्हारे कठोर दान पर। पड़ी पड़ी सूख जाएँगी सांज तलक
- 12:41लेकिन तुम इस गरीब को नहीं दोगे मैंने देखी है शादी व्यवहार
- 12:49समारोह जहाँ न जाने कितने मनों तनो चावल, भात, रोटी खराब हो जाती
- 13:00है। और तुम कूड़ा दान में फेंक देती
- 13:02हो, लेकिन अगर कोई भिखारी तुमसे मांगने आ जाए तो तुम उनसे कहते है
- 13:07चलो चलो कहाँ से आ जाते है तुम्हारे ही बनाए हुए है भाई ऊपर
- 13:15से थोड़ा टपके है। परमात्मा की लाठी बे आवाज होती
- 13:23है, आवाज तो नहीं होती, परिणाम बड़े भयानक होते हैं।
- 13:35प्रश्न बहुत अच्छा पूछा पुत्र। बा कमाल का प्रश्न तो बचपन में
- 13:44मेरे पास हो आता मुझे कहता उस्ताद मुझे उस्ताद मैं करोड़पति हो के
- 13:50मरना चाहता हूँ मैं कहा मरना चाहती हूँ करोड़पति हो के तो जीना
- 13:56चाहिए। अभी तुम जी रहे हो कितने मज़े से
- 14:00कहते हाँ जी तो रहा हूँ और मरना चाहते हो करोड़पति हो गया हाँ
- 14:08मैंने कहता सास दो हो जायेगा और हो गया?
- 14:17करोड़पति हो गया और मर गया क्या हुआ, क्या सिला निकला?
- 14:40और फिर गीत। गुनगुनाते फिर अच्छा सीला दिया
- 14:46तुने मेरे प्यार का अच्छा सीला दिया तुने मेरे प्यार का।
- 14:58यार ने ही लूट लिया घर यार का अच्छा सिला दिया तुने मेरे प्यार
- 15:11का यार ने ही लूट लिया। घर यार मैंने तुमने मांगा ही यही
- 15:25था पत्र के करोड़पति हो जाऊं घर में रोटी ना थी पिता बहिसक।
- 15:35कोई कारीगर भी न था। विशाल भाव मुश्किल बस पेट भर देता
- 15:42है इनके और मैं करोड़पति हो के मरना चाहता हूँ।
- 15:45अक्सर विरोध का आकर्षण होता है इसलिए तुमने देखे जो करोड़पति हो
- 15:53जाते हैं। वो चुटिया मुंडवा लेते हैं और
- 15:59स्वीत वस्त्र धारण करके अन्नशीले वस्त्र पहनने शुरू कर देते हैं।
- 16:03जी अनमनी हो जाते हैं। विपरीत का बड़ा आकर्षण है
- 16:09परमात्मा। बड़ा समय था जो उसने विपरीत बनाए
- 16:12मेल फीमेल। विपरीत का बड़ा आकर्षण है।
- 16:34मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा ये विपरीत क्यों बनेगा भगवान ने?
- 16:39मैंने कहा, उसकी सृजना ही ऐसी विपरीत के बिना पूर्ण नहीं होती।
- 16:44ये देखिए अर्ध नारीश्वर शिव अधूरे हैं पर्वती के बिना और पर्वती
- 16:51आधुरिक शिव के बिना अगर पुरुष ही पुरुष होते तो तुम क्या करते?
- 16:59अगर स्त्रियाँ ही स्त्रियाँ होती तो तुम क्या करते?
- 17:05इसलिए उसने विपरीत बना दिया। बड़ा समझदार कलाकार है वो, वह
- 17:11चित्रकार है तो अजीबो गरीब और उसने विपरीत बना दिया।
- 17:17खाये रहो विपरीत यह द्वन्द है। जो इस द्वन्द से बाहर आ गया उसे
- 17:28ही महावीर कहते हैं कुछ समझे मेरी बात को?
- 17:38जो विपरीत के आकर्षण से बाहर आ गया वह लिबरेट हो गया।
- 17:53परमात्मा की लाठी पे आवाज होती है घाव तो जारा नहीं होता बाहर का।
- 18:00भीतर छेद जाता है। रोमा रोमा असहनीय दर्द से क्राहते
- 18:10हो तुम भीतर सातवीं पुत्री को किसी गरीब व्यक्ति से ब्याह दिया
- 18:20गया। जो खेतों खलिहान में मजदूरी का
- 18:24काम करता था, उसकी छोटी सी चौपड़ी खुद देख के आये और तो कुछ नहीं है
- 18:33इसके पास बस ताजा कमाता ताजा खाता।
- 18:42उस गरीब के साथ ब्यादि बाकी छों के छों और राजघराने में ऐश करती
- 18:50जैसे तुम ऐश करती हो। सोने की पुशाके पहनती है जब पास
- 19:09से गुजरती है तो हाथी सूंड हिलाता नमस्कार, बैरे बड़े अदू से झुक
- 19:18जाते हैं। लेकिन वो गरीब के तो जोपने में
- 19:25कोई भी नहीं था। बस एक बूढ़ी सास ससुर स्वर्गवास
- 19:34हो गया था। बचपन में एक सास, वृद्धा और कोई
- 19:41नहीं। और गरीब सो बाहर चला जाता सांझ तक
- 19:52वो बेचारा, दिहाड़ी मजदूरी बाल ढोता सांझ जो दो पीसे मिल जाते।
- 19:59उसे घर का राशन पानी चला लेता। पुराने जमाने की बात है 1 दिन
- 20:11वहाँ से गुजर रहा कोई व्यक्ति उसने देखा उनकी छत बारिश का
- 20:17महीना। बारिश से ज्यादा हो रही थी और
- 20:22देखा कि छत टपक रही है। सारी छत टपक रही है।
- 20:32उसे दया आई, वृद्धा औरत बैठी। वो कभी इधर हो जाती, कभी उधर हो
- 20:41जाती। छाता भी तो नहीं था उसे वो देखा
- 20:50ना क्या? वो रात चुपके से आया और घने से
- 21:05सिक्के चांदी के कुछ सोने की शर्तियां।
- 21:12वहाँ फेंक गया अमीर बहुत किसी किसी अमीर के पास जिगर भी होता
- 21:19है, अन्यथा जी अमीर जिगर के बिना ही होते हैं।
- 21:30यह जिगरा होना बहुत बड़ी बात है, बड़ी क्षति होना।
- 21:37यह तो हाथी की बहुत होती है जीसको हम मूर्ख कहते हैं भैस उसकी बड़ी
- 21:43होती है, 356 होती है, क्षति का होने की बड़ी बात नहीं है, जिगरा
- 21:49होना चाहिए। पर छाती जाए कमजोरी चले बात इस
- 21:57जिगरे की। मैं चांदी सोने के सिक्के घर आ
- 22:11गया, चुपके से आवाज भी न आए। सुबह जब उठी वृद्धा सबसे पहले
- 22:17उठती, अब शादी हो गई थी तो बीच में से छोटी सी कपड़े की ही दवार
- 22:27खींच ली थी। इसे सिस्टर चार कहते हैं।
- 22:35सबको पता है शादी के बाद क्या होगा?
- 22:40और आज तो तुम ओपेन करते हो। प्री वेडिंग पोस्ट वेडिंग प्री
- 22:47प्री वेडिंग पहले प्रोपोज़ कर दो। पहले ये कर दो फिर वो कर दो फिर
- 22:53वो कर दो फिर वो कर दो ये कितने का दिन होते हैं तुम्हें और फिर
- 23:00विदेशों में करो फिर वहाँ करो तुम जैसे नहीं मनाते रहोगे कुछ काम
- 23:06धंधा भी करोगे अरे ऐसे मत करो। तो सुबह उठी वर्धा उसने उसने
- 23:22थोड़ी सी उठाई। बारिश ही पहले तो डर गयी ये क्या
- 23:29है उसने पुत्र को जगाया। अब आयी पुत्र।
- 23:34बेशुम था उसका नाम बेशुम ये देखो क्या है वो जल्दी से उठ के आया
- 23:46हाँ माँ आता हूँ जल्दी से उठ के आया देखा।
- 23:55जल्दी से उस पोटली को खोल उसकी रस्सी खोली कई गांठें बँधी थीं,
- 24:04रस्सी को खोल के अच्छी तरह से उसका मुख खोला और देखा तो सोने और
- 24:09चांदी की। मोहर ए अशरफ के सिक्के मैं तो
- 24:16बड़ा खुश हूँ और अश्य मिश्रित सुख के साथ उसके भीतर जन्नाटे उठने
- 24:23लगे। ये क्या हुआ ये कौन ते गया?
- 24:33पुरीश ने कहा तुम सबर रखना, अगर सबर है तो देन रोज़ बदल के आता
- 24:43है, रोज़ वो पुराना सूरज ढल जाता है और रोज़ सूरज।
- 24:51उगता है वो नया होता है। तुम्हें नहीं पता तुम समझते हो वो
- 24:55पुराना कल वाला है नहीं वो क्या मौत कभी भी मिल सकती है लेकिन
- 25:08जीवन का ना मिलेगा मरने वाले सोच समझ ले।
- 25:16कल को फिर ये पल न मिलेगा एक बार ये पल आज से छूटा की ज़िन्दगी छूट
- 25:23गई इसलिए सोच समझ के कदम उठाना यह आखिरी कदम।
- 25:35मोत तू जग चाहो 1000 तिर के लेकिन जीवन मरे हुए को जीवन देना बड़ा
- 25:45मुश्किल यही बुद्ध ने कहा देव व्रत से अब इसको तुमने मार दिया,
- 25:50अब इसको चिंता करो। की ये तो मैं न कर सकूंगा।
- 25:54फिर जब तुम जिंदा नहीं कर सकते तो मौत ही क्यों थी?
- 26:01क्यों मराई से बस मूर्खतरे के लोग ऐसे ही होते हैं?
- 26:11अपनी गलतियों के लिए भर देते हैं और उन लाशों का बना लेते हैं
- 26:18सीढ़ी और ऊपर चढ़ बैठते हैं और कहते हैं आह देखो देखो मैं राजा
- 26:24हो गया नहीं। यह राज़ खून से सना हुआ है।
- 26:35यह राज़ आशीर्वाद से नहीं आया। भीतरी आशीर्वाद से नहीं आया यह
- 26:44राज़ कितने रोहों को तड़पा किया यह राज़ ने।
- 26:50इसमें बड़ी दर्द की दास्तानी छिपी हुई और बस ये शब्द वहीं एगज करता
- 26:57है जो तुमने पूछा बेटा कि परमात्मा की लाठी बेआबाज होती है,
- 27:06दर्द घना होता है। बाहर चोट का कोई निशान नहीं होता।
- 27:15परमात्मा का विधान बड़ा सीक्रेट है इसलिए तो लिख के नहीं बताएगा।
- 27:20तुम्हारे संविधान तो लिखे होते हैं, वह स्वबाजी हुआ करती है,
- 27:25उसके संविधान लिखे नहीं होते हैं। उसके संविधान तो बस लागू होते
- 27:30हैं, सिर्फ़ तुम्हें बुद्धि दी है, तुम समझ लो समझने के लिए
- 27:36बुद्धि है, जो समझ गया वह आनंदित हो जाएगा।
- 27:46यह अपना मार्ग बदल लेगा। अक्सर रत्ना के डाकू वाल्मीकि हो
- 27:53जाते हैं और आनंद की लहरों की गिफ्ट में सदा ही मदहोशी के आलम
- 27:58में खोए रहते हैं। जब्त जननी महा सीता उनके आश्रम
- 28:02में। निवास करती है और अपने बच्चों को
- 28:05भगवान राम के बच्चों को पालती है। अगली माल एक क्षण में ब्राह्मण हो
- 28:13जाता है। वह ब्रह्म के उस स्थल को छू लेता
- 28:16है जहाँ आनंद ही आनंद है। तुम कहो ए जे तो गो रहने दे।
- 28:21इसको तो लटका देना चाहिए, बिलकुल लटका देना चाहिए, उसका विधान काम
- 28:30करेगा। तुम न्यायाधीश मत बनो, इस जरे का
- 28:40हिसाब होगा। अगली माल बख्शा नहीं जाता।
- 28:43और न ही बख्शी जाते हैं। रत्नाकर ध्यान रखना इस बात का जो
- 28:49तुम आज हो गए, उसका फल आज मिलेगा। आज तुम संत हो गए, जो तुमने कल
- 28:56किया उसका फल तुम्हें भक्त न पड़ेगा।
- 29:00इसलिए ये कहानी है। मैं इसे कहानी कहता हूँ।
- 29:06कृष्ण को राम का किया हुआ छल से बाली का वध ज़रा नामक व्याग्र के
- 29:14हाथों मर के चुकाना पड़ा। हालांकि राम का अगला जन्म कृष्ण
- 29:19ने। बस ये कहानी है तुम्हें समझाने के
- 29:26लिए और संतो ने जाना कि तुम कहानियों के बड़े शौकीन हो तुम
- 29:34आशिक हो कहानियों के इसलिए कहानियों में ही तुम्हें समझाना
- 29:37ठीक समझाओ। इसका मतलब ये था कि तुमने किसी
- 29:43कर्म में कोई भी युग में कोई भी छल से धोखे से किसी को मारा तो
- 29:50ठीक कर्म करना तुम्हारा अधिकार, लेकिन फिर तुम्हें चुकाना भी
- 29:56पड़ेगा। इसके लिए तैयार भी रहना यहाँ
- 30:08अन्याय नाम की कोई चीज़ नहीं होती।
- 30:10भगवान के दरबार में बिलकुल निष्पक्षता और अन्याय।
- 30:17यहाँ न्याय का साम्राज्य है तो उस बेटे ने देखा इतना सामान लेकिन ये
- 30:34कोई फेंक गया कोई तो होगा जीसको हमारे दर्द पे दर्द मंदी आयी
- 30:42होगी। जीसको भीतर से उमड़ा होगा गहरा
- 30:52दुख हमारे अभावों को देखकर को फिर ऐसा करना।
- 31:01अब ये छोटी सी कोटिया है। ये जमीन तो उन दिनों जमीन तो आम
- 31:05हुआ करती थी। बड़ी जमीन के ऊपर हम अपना महर बना
- 31:11लेते हैं। ये तो पैसे बहुत है फिर खुद भी लग
- 31:16गया। मजदूर था और भी मजदूर अपने
- 31:18साथियों को ले आए, उसने कहा यहाँ खोदो नीम।
- 31:23बड़ा सा महल बनाना है, कहती आपके पास पैसा कमाया, कहता वह बोर
- 31:30विराट हाथों पर रहा, महक दिख गया कौन था पता नहीं कौन था जीसको मैं
- 31:39जानता नहीं। वह अज्ञात है और उसके हाथे बड़े
- 31:43वराठ हैं। पर तुम्हे यकीन नहीं होता सिर्फ
- 31:50और जिन्होंने देखा जिन्होंने सोंखी उसकी खुशबू जिन्होंने देखी
- 31:57उसकी परछाई। और तुमसे कह कह के चले गए कि वह
- 32:03है हम इसपे मुहर लगाते हैं कि वह है और हमने अपनी आँखों से उसे
- 32:12देखा, तुम चूक मत जाना इन लोगों और लालचों में फंसकर।
- 32:18तुम दुखों की निर्मित मत करते रहना, सारी उम्र तुम हमारी बात को
- 32:24भी थोड़ा सा गौर से सुन लेना, किन्हीं एकांत लम्हों में बैठकर
- 32:28हमारी बातों पर भी विचार करना और पाओगे।
- 32:31ये सत्य है जो हमने बोला अन्यथा हमें बोलने की आवश्यकता विज्ञा
- 32:36थी। कबीर काहे बोलता है मस्ती में गुन
- 32:43बनाते हैं, अपना काम करते हैं शाम जब तक रोटी पानी जल जाता है और
- 32:51आवश्यकता भी क्या है? और तुम तो 100 पुस्तों की सोच
- 32:56लेते हो और कुछ ऐसे मूर्ख हैं जिनकी तो पुख्ता ही नहीं होती, जो
- 33:00बस इकट्ठा करी जाते हैं। तुम्हें क्या पता तुम्हारी आज के
- 33:08बाद तीसरी चौथी पीढ़ी आगे कोई संतान ही नहीं होगी रती सर की
- 33:12तरह। फिर क्या करोगे?
- 33:14फिर किसी अंगीरा ऋषि की संतान होगी, उसके ऊपर तुम स्टैम्प
- 33:18लगाओगे। मेरे भाई की कोई औलाद नहीं थी।
- 33:26डॉ। रमेश मासी जी का बेटा था।
- 33:34उसका बहुत बार वो खुद भी आ जाता है, फ़ोन भी करता है भाई मैं अपनी
- 33:39परछाई का इंतजार कर रहा हूँ मुझे मेरा साया नहीं मिल रहा है बड़ा
- 33:49दुखी हूँ। रुपये तो अरबों खरबों आ गए लेकिन
- 33:54याद तो वो दिन आते हैं जब हम लिफाफे के अंदर सुबह का और शाम का
- 33:59आटा लेके आते थे। वो कितने सुखा दक्षिण थे आज सब है
- 34:07लेकिन मुझे मेरी छाया कहीं नजर नहीं आती।
- 34:13मेरी छाया नहीं है। मेरे पुत्र के मृत्यु के ऊपर उसका
- 34:23फ़ोन आया कौन विजय भाई बोल रहा हाँ भैया रमेश अरे तुम ये क्या कर
- 34:30रहे हो मैं अपनी परछाई को? मरा जा रहा हूँ, मुझे मेरी परछाई
- 34:35नहीं मिलती और तुम हो कि ये क्या कर रहे हो?
- 34:39मैंने कहा मैं कुछ नहीं किया ये करने वाला विराट तुम भी जानते हो,
- 34:47तुम तो मानते हो तो 1 दिन जान भी जाओगे।
- 34:53लेकिन मैं कौन हूँ करने वाली इतनी धरती पर इतने लोग मरते हैं क्या
- 34:58मेरे कहीं से मर जाते हैं? नहीं वहीं चला रहा है।
- 35:10किसने जन्माया, हम तो सिर्फ एक स्टैम्प लगाने वाले हैं क्या
- 35:22करोगे? अगर ऐसा हो गया तो अरबों खरबों तो
- 35:25होंगे हिमालय पर्वत जैसे ऊंचे। सोने के भंडार तो होंगे लेकिन
- 35:33नस्ल खो जाएगी। फिर क्या करोगे?
- 35:42कहाँ सो पीढ़ियों की बात सोचने वालों, क्या तुम इतने अंतर्दर्शी
- 35:46हो? क्या तुम इतने दूर अंदेशी हो?
- 35:51कि तुम आने वाली घटनाओं के जानते हो कि 100 पीढ़ियाँ तुम्हारी होगी
- 35:56या कि अगली पीढ़ी तक नहीं चलेगी ये कोई नहीं जानता, बस तुम पागल
- 36:03हुए अंधे अंधे से जोड़ने की फिक्र करते हो।
- 36:08भोगने की फिक्र करते हो। पता तुम्हें नहीं होता।
- 36:12अगले क्षण का महल कूद गया और खोदा जा रहा था।
- 36:24उसने कहा, ऊंचा महल बनूँगा, पैसे बहुत हैं, थोड़ी सी गहरी।
- 36:30नींव को खोदे ना मजदूर था, खुद जानता था मजदूर सेठों से ज्यादा
- 36:39समझदार होते हैं। इस मसले में वो सर्जन कर सकते
- 36:42हैं। गहरी नीवें जैसे ही खोदी।
- 36:49तो टर्न की आवाज़ है, हैरान रह गया, उसने बुलाया भीष्म हाँ, ये
- 37:01सोना तुमने आवाज़ सुनी तो मैंने भी थोड़ा और घगा लो इसको।
- 37:09और दो कसियां मारी गईं। कुदालियां फेरी गईं तो भीतर से
- 37:13मटके निकले, मटके ही मटके निकले। सोने के स्वर्ण का भंडार वह गरीब
- 37:25जीसको राजा ने भिखारी को सौंप दिया।
- 37:31आज इतना बड़ा अमीर हो गया था कि खुद की जायदाद संलतन खड़ी कर ले।
- 37:39बड़ा सा महल बना दिया गया। मटके ही मटके सभी दिशाओं में दबे
- 37:44पड़े थे। बड़ा सा महल खड़ा कर लिया गया।
- 37:59अब सेट हो गया गरीब से सेट होना उसके हाथ में है विराट के हाथ।
- 38:10यद्यपि जब तुम अंतरिम छोर पे जाओगे, तुम्हें पता चलेगा कि सेठ
- 38:14भी वही हुआ, गरीब भी वो था, गरीबी भी उसने होगी और अमीरी भी उसने
- 38:21होगी, हमने कुछ नहीं होगा, हम थे ही नहीं, अंत में यही तुम पाओगे।
- 38:28पिछले प्रवचन में मैंने बोला। पूछा किसी वक्त ने कि अंत में
- 38:34क्या दिखता है? जो व्यक्ति चुप हो जाता है, मैंने
- 38:38कहा अंत में दिखता है कि तुम और नहीं बस यही है तुम्हारी आखिरी
- 38:45दर्शन तुम नहीं हो। और जब तुम नहीं हो फिर काहे को
- 38:53तुम जोड़ोगे किसके लिए जोड़ोगे फिर भूख लगेंगी तो आज के लिए दो
- 39:01फल का चाहिए। सांझ को जीते रहेंगे तो सांझ के
- 39:07लिए ले लेंगे, कोई बात नहीं। बुद्ध ऐसे ही हो जाते हैं।
- 39:12बुद्ध ने देखा ये तो मूर्खता है यह पिता मेरा कोई ज्यादा समझदारी
- 39:19की बात नहीं करता है। यद पर राजा होना कोई गौरव की बात
- 39:23नहीं होती। मुड़ लोग भी राजगद्दी पर बैठ जाया
- 39:27करते हैं। उसके भीतर से कसक उठती, कसक उठती
- 39:36कि कुछ है जैसे मैं खो रहा हूँ, वो पता नहीं कि है क्या?
- 39:43लेकिन फिर जब मर ही जाऊंगा और सब मर ही जाते हैं।
- 39:47तो वो कसकोर गहरी हो गई कि जब मर ही जाना है तो समझो कि मर ही गए
- 39:55फिर क्यों ना जाए भीतरी कसक को देख लिया जाए कि ये है क्या?
- 40:01ये काँटा सा चुभ के आ रहा है। तो उसने आंधी रात को छोड़ दिया।
- 40:08घर कहानी है कि जब वापस आए तो यशोधरा ने पूछा मैं क्षत्रानी थी,
- 40:18मुझसे पूछ के नहीं जा सकते थे? ऐसी गायों की तरह भाग गए या कोई?
- 40:25तरीका है भागने का मैं तुम्हारी अर्धांगणी रानी तुम मुझे बता के
- 40:34नहीं जा सकते थे तुम्हें इतवार न था हम वो क्षत्रानियाँ हैं जो
- 40:43बलिदान होने के लिए। युद्ध क्षेत्र में तुम्हें खुद
- 40:48तलवार सौंपती हैं, चतराणी के जाओ जब मार दो दुश्मन को या मर जाओ
- 40:56क्या तुम्हे यकीन वो थोड़ा सा शांत रहे।
- 41:04और श्रोता ने पूछा कि जो तुम्हें वहाँ मिला यहाँ नहीं मिल सकता था।
- 41:11क्यों गए भाग्य? बुध बोले मैं अज्ञानी था जैसे
- 41:19गुरुओं ने समझाया कि घर छोड़ने से मिले।
- 41:24मैं खुद तो उस अनंत को जानता नहीं था उस अज्ञात को मैंने कभी देखा
- 41:31नहीं था तो राह जैसा सुझाया राहगीरों ने राह दर्शकों ने तो
- 41:40मैं छोड़ के चल दिया। यहाँ मिल सकता था वो तो बाद में
- 41:44पता चला मैं अज्ञानी जहाँ तक बात तुम्हें बतानी की थी ये शोध्रा
- 41:51तुम आज कुछ भी कर अगर मैं तुम्हें बता देता हूँ और तुम मुझे ये जाने
- 41:59न देते। मैं पिता को कहती थी, आज तक मैं
- 42:09जेल में रहा। इतने वर्ष मैंने जेल में बता दिए।
- 42:13जेल ही तो थी सब सुख आराम थे जहाँ।
- 42:21सो दो धन ने मेरे पिता ने मुझे सब दिया, लेकिन मैं कहीं जा न सकता
- 42:25था और जहाँ स्वतंत्रता नहीं, वह झेल ही तो होती अगर मैं तुम्हें
- 42:38बता देता घर छोड़ के जा रहा हूँ। तुम अपने हृदय पे हाथ रख के बताओ
- 42:45तो मुझे जाने देती। यशोधरा ने मुँह लटका लिया, उसका
- 42:50मन तो कह रहा था नहीं जाने देती तेरी कादर पकड़ के, हम यहाँ रख
- 42:56देते, बैठ गद्दी तेरी है। सो 2 दिन छोड़ देता हूँ मैं कल को
- 43:04रिटायर होने वाला आज ही रिटायर होता हूँ, दुबारा राइ क्लिक करता
- 43:08हूँ, भागने नींद नहीं करते, अब कैसे भाग पाओगे तुम?
- 43:18कई राजा लोग कहते थे हमारा क्या, हम तो भाग जाएंगे, मैंने कहा अब
- 43:22कोई भाग नहीं देखा तो ही नहीं। आप कैसे भाग जाओगे?
- 43:30भाई अब नहीं कोई भाग नहीं देगा उधर जाओ छै।
- 43:45राजाओं के घरों में शादीशुदा थी लड़कियां किसी के कुछ, किसी के
- 43:50कुछ वह अनंत हैं और उसकी लीला भी अनंत हैं।
- 43:54उस विराट के हाथ भी अनंत हैं। वह राजा को रंग और रंग को राजा
- 44:03बनाने में क्षण भर भी नहीं लगाता। उसकी लीला ही ऐसी है।
- 44:12हमारे हरियाणा में एक गीत गाते हैं, भजन है लगता तो ऐसा जैसे
- 44:18गाली निकाल रहे हैं। अब सुना दूँ थोड़ा सा तू आस पर?
- 44:24अरे भगवान रे तेरी माया का अरे गाल नहीं निकालो, अरे भगवान रे,
- 44:32तेरी माया का कोनी रे पा। राजा ने कंगाल बना दे और निर्घल
- 44:50नै धंधेरा राजा ने कंगाल बना दे। मेरा धन ने धन दे रहा है रे भगोने
- 45:04रे। बस आगे निकलूंगा तो लगता जैसे
- 45:10गाली निकाल देंगे, लेकिन उसका गुणगान?
- 45:16उसकी शलागाह इतना विराट शब्दों में नहीं समा सकता, समझ में नहीं
- 45:27समा सकता हूँ इतना बराठ धीरे धीरे सभी राजा कमजोर होते चले गए कुछ
- 45:34होने। पड़ोसियों ने लूट लिया, कुछ
- 45:37इकट्ठे होकर आक्रमण कर दिया, बंदी बना लिए गए और सब उजड़ गए, सब के
- 45:45सब उजड़ गए, राजा भी गरीब हो गया, बेटियों को कहाँ तक खिलाता?
- 45:55उसका खुद भी राज़ किसी ने हड़प लिया और वह बन बन पागलों की तरह
- 46:02डोल रहा था जो अक्सर ऐसा कहते हैं कि हम रणकेशब कहते हैं कि मैं हूँ
- 46:11परमात्मा। मेरा नाम लो, परमात्मा का नाम मत
- 46:15लो, मैं सर्व व्यापक हूँ, मैं सर्वज्ञ हूँ, मैं सर्वशक्तिमान
- 46:22हूँ, मेरा ही नाम लो, किसी दूसरे का नाम न लो, वो पागल है।
- 46:29उसको यथार्थ का ज्ञान ही वह अज्ञानी है।
- 46:31यूँ कहना चाहिए और जब अज्ञानी का ज्ञान होता है तो वो समझ जाता है।
- 46:39उसकी सभी धारणाएं धूल दूषित हो जाती हैं।
- 46:44ऐसा नहीं है कि एक सभी हिरण्यकस्बों की।
- 46:48धारणाएं धूल दूषित हो जाती हैं। वो फिर मसोलनी हो, हिटलर हो,
- 46:58चंगेज हो। चंगेज में कितने लोग मरे और जब
- 47:06उसका खुद का बेटा मेरा जवान? ऐसी चूड़ी छाती इसके जब घोड़े से
- 47:15गिरा वो मर के घोड़े के ऊपर बैठे बैठे मर गया, देखिये उसकी करामत
- 47:24और नीचे उसका बेजान छुरी गिरा। तो चंगेस उसकी लाश से सब से लिपट
- 47:31के बहुत रोया चंगेस जिसने कभी हार में मानी थी बड़ो, बड़ो को धूल
- 47:44चटा देता है वो। और बड़ो बड़ो को वो अपने अस्तित्व
- 47:54तक पहुंचा भी देता है। ये उसके खेल है तेरे जैसे।
- 48:11तेरे जैसे लाखों। तेरे जैसे लाखों लाखों इसमा देने
- 48:38खाये रहा न नाम? मोनिषा नरे बंदे रहा न न
- 48:53मोनिशानरे बंदे। झूठी।
- 49:01तेरी। शान रे मत कर तू अभी माँ तेरे पास
- 49:17हैं ही रे मोती। तेरे पास हैं हीरे मोती मेरे मन
- 49:34मन दिल में ज्योति। अब देखिए कौन धनवान हुआ बताओ तेरे
- 49:47पास हैं हीरे मोती मेरे मनमन देश में ज्योति तुम्हारे बाहर के
- 49:59मंदिरों में ज्योति जलती। है।
- 50:02और भूले शाह कहते हैं कि मेरे मन के अंदर में ज्योति जल रही है।
- 50:17कौन हुआ धनवान रे? बंधे धनवान कौन हुआ बताओ बताओ
- 50:31जवाब दे देना। कौन हुआ धनवान रे बंधे?
- 50:43मत कर तू अभिमान कौन हुआ धनवान रे बंदे बस ज़रा थोड़ा सा इस बात का
- 50:54जवाब दे देना जिसके पास हीरे, मोती जो है रात है वो।
- 51:01धनमान है या जिसके भीतर वो रस बरसा के हीरे, मोती जो है रात
- 51:09जिसके लिए व्यस्त हो गए वह धनमान है बस ये मुझे सोच के।
- 51:18जिसके खजाने भरे पड़े हीरे, मोती, जोरा, माणिक, मोतियों से बेहद
- 51:26धनवान या जिसके हृदय में ये ज्योति समा गई, जिसके हृदय में ये
- 51:30ज्ञान उत्पन्न हो गया, जिसकी वासना ही खत्म हो गई।
- 51:38हीरे, मोती, जुहातों को इकट्ठे करने की वासनाएँ जिसकी खत्म हो
- 51:42गईं और वह रस टप कपड़ा नहा लिया। उस तीर्थ में जब भीतर अपेक्षाएं
- 51:53खत्म हो गईं। भीतर कुछ जोड़ने की इच्छा खत्म हो
- 51:59गई। द्वंद न रहा वह निरीक्षेत्र
- 52:04व्यक्ति, वह धनवान या तुम्हारे पास सब कुछ धनवान जिसके पास सब
- 52:09कुछ है वो तो और जोड़ना चाहेगा, वो धनवान नहीं।
- 52:14तो जिसके पास विषय वासनाएं हैं, वह और भोगना चाहेगा और और भोगना
- 52:20बताता है कि अभी तृप्ति आएगी, अनिश्चित ही वह धनमान होगा।
- 52:27जीसको तृप्ति आ गई क्योंकि वह और नहीं मांगेगा।
- 52:32यह मन मांगे मोर। वह और नहीं मांगेगा और जिसने और
- 52:37नहीं मांगा सच में तो वही धन्यवाद है निष्पक्षता से अपने भीतर उतर
- 52:43जाना कोई देखने वाला नहीं होगा और तुम्हें अपने आप को निरीक्षण करना
- 52:51क्या अभी तुम्हें और चाहिए। अगर तुम्हारा मन कहता है कि हाँ
- 52:58मुझे और चाहिए तो तुम गरीब हो, तुम्हारे हाथ में भिक्षा पत्र है,
- 53:02अभी हो सकता है वो हाथ में ना दिखे लेकिन दिन के भीतर है दिल
- 53:10में तुम्हारी भिक्षा पात्र ही है। और अगर देखना भाई तर उतर कर तुम
- 53:17ये जानो कि कोई मेरे पास न आए, मैं अकेला ही काफी हूँ।
- 53:32कोई आहट न हो, कोई मुझे पहचानेगा कोई मुझे जाने न मैं ऐसा दफन हो
- 53:47जाऊं कि पता न चले यहाँ किसकी मजार है, तुम तो चाहते हो कि
- 53:52हमारी मजारों के ऊपर लिख दिया जाए।
- 53:57अलेक्जैंडर पोप इस तारीख को मरा ये यादगारें हमारे हाथ में अभी
- 54:06ठूठा है, इन्हीं चीजों को इंगित कर रही हैं।
- 54:14तुम चाहे वार्षिक भिक्षा पत्र नहीं पकड़े हो, लेकिन हृदय से अगर
- 54:19तुम चाहते हो कि बस एक बार और अभी कोई राजनेता पर वचन दे रहा था।
- 54:28हसो मत ये प्रवचन नहीं होते इनके लिए।
- 54:32अभी हमने 15 साल और राज़ करना है। मैंने कहा अच्छा भूख इतनी है
- 54:36क्या? इतनी भूख 15 साल यानी कोई जल्दी
- 54:45नहीं उस रस को पीने की जीसको पीकर व्यक्ति ठहर जाता है।
- 54:52जीसको पीकर व्यक्ति मौन हो जाता है वह जो मैंने कहा अंत में जो
- 54:58देख लेता है व्यक्ति वह देखता है, मैं नहीं हूँ और फिर जब तुम
- 55:04देखोगे कि तो मैं नहीं हूँ। तो तुम चुप हो जाओगे, तुम्हारी
- 55:09मूर्ति बंद हो जाएगी यह जो तुम लगाते हो, यह क्रिया करनी नहीं
- 55:18पड़ेगी तुम्हारी जीवा तालों से चिपक जाएगी, खिचड़ी तुम्हें लगानी
- 55:24नहीं पड़ेगी, लग जाएगी। तुम तुम तो खेचरी लगाने का अभ्यास
- 55:29करते हो, लेकिन खेचरी लग जाया करती है।
- 55:33उस स्थल पर जाकर जब तुम देखते हो, कहीं तुम नहीं हो, वह है सिर्फ वह
- 55:41है एको, अहम देखते हो या नास्ते। बस एक ही है, ओह मैं हूँ कब तू
- 55:49है, मैं भी तुम्हें तू भी तुम्हें रत्ता पेंद नगर न आया?
- 56:06कोई वेद नहीं दिखता, वेद की दीवारें घर जाती हैं, ये होता है
- 56:13वहाँ जाके अंतरिम छोर पे जाके अभी तो तुमने राज़ करना है।
- 56:27तो वह राजा भटकने लगा भटकता भटकता पूछने लगा कि मेरी बेटी वो कोई
- 56:35जानता है कहाँ है बा? मुझकर स्वराज खोज पाया खोजता,
- 56:43खोजता पहुंचा एक बड़ा सा महल। और भिखारियों की तरह राजा खड़ा कई
- 56:50दिनो से भूखा सब छिन गया था। कुछ भी न बचा था वृद्ध चेहरे पर
- 57:00झुर्रियां कहींनों से नहाया नहीं, वस्त्र बदले नहीं।
- 57:05मैले कुचैले वस्त्र और पता चला ये महल, ये मेरी बेटी का है, कहीं
- 57:15मैं ब्रह्मित्र नहीं हूँ? जब गया बेटी को सामने देखा, बेटी
- 57:21ने पिता को सामने देखा। तो बेटी उसके चरणों में झुकने
- 57:29लगी। राजा उसके चरणों में झुक गया।
- 57:36नहीं पुत्र क्षमा कर तो मुझे मैं खुद को समझता था भगवान।
- 57:45लेकिन भगवान का तो आज पता चला जब मार पड़े मार के बिना भगवान का
- 57:51पता भी नहीं चलता है, इसलिए मैं तानाशाहों से कहता हूँ कि तुम
- 57:57तानाशाही कर लो, बिल्कुल आज तुम्हारे हाथ में सत्ता है।
- 58:03तुम चाहो तो उसका सदुपयोग कर सकते हो।
- 58:07तुम अपनी शक्ति से किसी घिरे हुए को उठा भी सकते हो और तुम अपनी
- 58:12शक्ति को किसे को चलते हो को घरा भी सकते हो।
- 58:15धक्का दे के इस शक्ति को प्रयोग करने के दो ढंग हैं।
- 58:22लेकिन याद रखो यह बादशाहत सदन ही रखे यह चमचे कि चांटे के पांव को
- 58:35चूमने वाले। यह तुम्हारा प्रचार प्रसार करने
- 58:44वाले भाट पिछले जमाने में राजा भाट रखते थे।
- 58:54जब कोई दूसरे देश का बड़ा राजा आ जाता तो अपने वंशावली की वर्णन
- 58:59करते हो। आप देखते हैं ज़रा।
- 59:02आपने देखा होगा रामायण में महाभारत में वंशावली के गुणगान
- 59:09होते हैं। बाटों के द्वारा ये पैसे देकर
- 59:12होते हैं, भाट खरीदे जाते हैं, फिर ये बताते हैं इस वंश में फला
- 59:17हुआ। इस वंश में फला हुआ उसका इतना
- 59:20शौर्य था, वो इतना दानी था, सब बताते हैं ये भाटों का काम है तो
- 59:27पैसे देकर ये भाट खरीद लिए जाते हैं।
- 59:30हृदय से नहीं आती ये प्रशंसा, ये खरीदारी से पैसों से आती है
- 59:35प्रशंसा पुत्री नेचरण छुए नहीं पिताजी तुम इस हाल में कैसे?
- 59:49उसने कहा पुत्री मैं अपने बापू का फल।
- 59:54उसके दरबार में देना ही पड़ता है, जो हमने किया।
- 1:00:00यद्यपि तुम मानोगे नहीं? मैं अच्छी तरह से जानता हूँ,
- 1:00:04तुम्हें मानना भी नहीं चाहिए क्योंकि तुमने जब तक वह तल देखा
- 1:00:08नहीं तब तक मानना तुम्हारा व्यर्थ भी होता है, वैसे भी।
- 1:00:14तुम्हारे मन का कोई अंश का एक कोना भूलता रहेगा।
- 1:00:17नहीं नहीं वो है नहीं क्योंकि तुमने देखा नहीं अब जी रोग मैं
- 1:00:22रोज़ बोलता हूँ, जो कहता है लेने देने का कोई हिसाब नहीं।
- 1:00:26चार बात कहता है बस हम भूत से देहस पुनर आगमनम को कहा।
- 1:00:33यदा जीवेत, सुखी जीवेत ऋणम कृतवा कृत्म विवेत अब जैसे सुख और दुःख
- 1:00:43इसके हाथ में अब ये बीते जनमों की बातें हैं।
- 1:00:51अगर आज ही होता तो मैं उससे पूछता कि सुखी होना और दुखी होना
- 1:00:55तुम्हारे हाथ में द्रव्य सब हो, लेकिन फिर तुम सुखी न हो तो फिर
- 1:01:02क्या करोगे तुम? लेकिन तुम्हारी माँ नहीं होता है,
- 1:01:06तुम कहते हो कोई लेना देना नहीं होता ठीक?
- 1:01:09मार्क किस कहते हैं? परमात्मा नहीं होता ठीक नीचे से
- 1:01:12ही कहता नहीं होता ठीक हिटल से कहते हैं मार दो कतर कर दो
- 1:01:18झोतियों को ठीक और कर भी देते हैं और तुम शायद यह सोते होंगे।
- 1:01:28इतने लोगों को करोड़ों लोगों को मार के एक बंदा खुद सुसाइड कमिट
- 1:01:33कर ले तो बस ठीक है, लेकिन ठीक कहाँ है भाई?
- 1:01:40जिन अंधों को रंग देखना नहीं आता, उन्हें रंगों की पहचान क्या?
- 1:01:47तुम्हें पता ही नहीं तुम्हारे पास हाथ नहीं है, अगला जन्म नहीं
- 1:01:50होता, पीछे कोई जन्म नहीं होता। ये ईसाईयत और इस्लामियत की धारणा
- 1:01:55हो सकती है लेकिन यह सनातन की धरना नहीं है।
- 1:01:59सनातन सत्य है। सनातन सत्य को बोलता है, सत्य को
- 1:02:03जीता है, सत्य को अनुभव करता है और सत्य का ही व्याख्यान करता है।
- 1:02:18सब। हिरण्य का का तानाशा होना मिट
- 1:02:23जाता है एक क्षण में मैं रोज़ कहता हूँ, जो एक जल की बूँद
- 1:02:30निर्मित नहीं कर सकता, वह सारे ही संसार का मालिक होने का दावा जरूर
- 1:02:35करता है जो एक जर्रा। धरती का बना नहीं सकता जर्रा
- 1:02:41सिर्फ जर्रा जो एटम तुम्हें नेस्त नाबुद कर दे।
- 1:02:47वह दावे करता है कि मैं चक्रवर्ती सम्राट हूँ।
- 1:02:52सिर्फ दावे कर लेने से स्टाम्प लगा देने से तुम उसके मालिक नहीं
- 1:02:57हो जाते। अब हम अंतिम बात पे आ जाए।
- 1:03:12अब देखिए इस सुर का सिद्धांत। व्यक्ति मुझसे कहते हमें पदार्थ
- 1:03:21चाहिए। उन्हें पदार्थ मिल गया, पदार्थ
- 1:03:27मिल गया। करोड़पति की चाहत करके मरने वाले
- 1:03:30व्यक्ति दोनों चाहतें पूरी हो गई, करोड़पति भी बन गया।
- 1:03:35और जीवन भी छीन लिया और अंत समय में उसने बड़ी कोशिश की।
- 1:03:40थोड़ा सा जीवन और दे दो बाबा मैं जीवन नहीं मिलता, तमन्ना एक ही
- 1:03:49पूरी होती है। सभी तमन्नाएँ नहीं पूरी होती।
- 1:04:02या तो फिर करोड़पति ही बन जाते या फिर जीवन को ही चुन लेते जीवन छीन
- 1:04:10गया मेरे पास एक वाणी काया करता था, वो कहते सब लूट गया, क्या मैं
- 1:04:19फिर से नहीं रो पाऊंगा? आढ़त की दुकान थी।
- 1:04:22प्राणी लॉटरी बेचने पे आ गया था। मुझे कहता क्या मैं फिर से अमीर
- 1:04:28हो पाऊंगा? मैंने कहा तुम मैं अमीरी होकर शुभ
- 1:04:31होगा कहता कुछ लगता है अभी पूरी नहीं होगी।
- 1:04:41तो परमात्मा के हाथ में क्या है? तुम पदार्थ मांगोगे तुम अपने चैन
- 1:04:48से तुम अपनी शक्ति से तुम अपने सामर्थ्य से जुटा लोगे, आचार्यों
- 1:04:52के कहने पर जुटा लोगे, बिलकुल ठीक पदार्थ तुम्हारे आसपास होंगे।
- 1:05:01तुम्हारे कमरे सोने की सम्पत्तियों से लदे होंगे और तुम
- 1:05:05वो सोने की सम्पत्तियों के बीच में बैठे हो गए।
- 1:05:11तुम्हारे बच्चों की शादियां होंगी सोने के पोशाकों में।
- 1:05:19यह संभव है खाने के 3600 प्रकार के भोजन होंगे।
- 1:05:27ऐसा एक वणिक का मेरे पास और भी आया था।
- 1:05:33तुम्हारे पास साधन सब सुख होंगे। लेकिन एक चीज़ अगर नहीं होगी,
- 1:05:46पदार्थ होंगे, रोटी होगी, 3600 प्रकार के भोजन होंगे, तुम्हारे
- 1:05:53मनपसंद होंगे। लेकिन उसके हाथ में क्या तुम
- 1:05:59कहोगे उसके हाथ में कुछ नहीं, तुम गलती हो।
- 1:06:03उसकी एक दृश्य फैक्टरी भीतर काम कर रही थी।
- 1:06:11उसने जो तुम्हें दंड देना, मैंने पहले भी बताया उसकी करेन्सी है
- 1:06:15दंड देने की। या पारितोषिक देने की सुख और दुख
- 1:06:22इसके पास यही है। पूंजी यही चलते हैं इसके डॉलर
- 1:06:28कहते हैं इसको कृपया कहते हैं इसको रूबर कह लो इसको पॉन्ट कह लो
- 1:06:32इसको दीनार कह लो इसको कुछ भी कह लो।
- 1:06:36ये करेंसी है परमात्मा की। क्या सुख और दुख मैं तुम्हारे पास
- 1:06:44हाथ में नहीं है और बोलते हैं चारवाक यदाजीवेत सुखी जीवेत।
- 1:06:55सुख इसके हाथ में नहीं पदार्थों को छीन लेना, ऋण लेकर मुकर जाना
- 1:07:02यह तुम्हारे हाथ में है, जिससे लिया उसको कोटो में घसीट लेना यह
- 1:07:09तुम्हारे हाथ में है, लेकिन बेटा। थोड़ा अर्थ अलग है।
- 1:07:20अब तो घबरा के ये कहते हो कि मर जाएंगे अगर मर के भी चैन न पाए तो
- 1:07:24किधर जाओ छीन के भी अगर तुम्हारी रातों की नींदें हराम तुम्हारा
- 1:07:30पेट न भरे, तुम वैसे ही दौड़ते रहे तो दौड़ तो अभी बची रही।
- 1:07:35और दौड़ में कभी कोई सूखी हो सका है तो मैं तुम्हें कहता हूँ कि
- 1:07:44सुख तुम्हारे हाथ में नहीं है, सुख परमात्मा के हाथ में और ये जो
- 1:07:50कहते हैं चार वाग यदा जी वे सुखी जीवे।
- 1:07:54ऋणमकृत व गीतमबित भस्मभूतस्य देहस्य पुनर्आत्मानम् कुत जो मर
- 1:08:02गया, जिसने ऋण दिया, जिसने ऋण लिया दोनों ही भस्म जाते कभी वापस
- 1:08:07आता देखा बिल्कुल तर्क हमारा ठीक है, तुम तर्कों से ज़िन्दगी जी
- 1:08:13सकते हो। लेकिन जिंदगी को जीत नहीं सकते।
- 1:08:18जी सकते हो जी सकते हो कल्पनाओं में, लेकिन कल्पनाएं वास्तविक
- 1:08:24नहीं होती। तुमने बड़े मज़े से कह दिया कि ऋण
- 1:08:36उठा लो, घी बिलो पी लो। शराब पी लो कोकड़ खा लो लेकिन बात
- 1:08:47सुखी है तुमने कहा यदा जी वे सुखी जी वे ये सुख तुम्हारे हाथ में है
- 1:08:54क्या? ये सूखे तो तुम्हारे हाथ में
- 1:08:59नहीं, तुम्हारे आस पास 3600 प्रकार के भोजन पड़े हैं, जिन
- 1:09:07भोजनों के लिए तुम दर दर भीख मांग रहे थे, चोरी कर रहे थे, यारी,
- 1:09:13मक्कारी, लुटेरी डाका ये सब कर रहे थे।
- 1:09:22लेकिन परमात्मा ने क्या किया तुम्हे पदार्थ दे दिए 3600 प्रकार
- 1:09:25के भोजन दे दिए। अब देखो वो भोग कैसे भुक्ताता है
- 1:09:31तुम्हारी भोग चैन ले। तुम्हारी भूख छीन ली।
- 1:09:41बाहर 3600 प्रकार के भोजन पड़े हैं और तुम्हें कहा जाता है ये खा
- 1:09:46लो, तुम कहोगे नहीं उल्टी की तरह मन क्या खा पाओगे?
- 1:09:55तुमने पदार्थ चाहा तुम्हें पदार्थ दे दिया, लेकिन भूख तुम्हारी छीन
- 1:10:01ली, क्या करोगे जनाब? उसने जो दंड देना है वो भुगता
- 1:10:09लेगा, तुम लाख कोशिश करो। ये सब पकवान तुम्हारे व्यर्थ हो
- 1:10:16जाएंगे। अगर भूख नहीं है तो तुमने गद्दे
- 1:10:22मांगे, बड़े डनलप के पिल्लोज मांगे, सब मिल गया, तुमने वाहन
- 1:10:29मांगे, जहाज मांगे, हेलिकॉप्टर मांगे, सब मांगा, तुम्हें मिल
- 1:10:33गया। इतना उसी ने क्या किया?
- 1:10:38तुम्हारी शांति छीन ली, तुम अशांत हो गए, पड़े रहो इन डेवलप के
- 1:10:45मूल्यों से सब साधन दे दिए ये बिछुने दे दिए मखमली।
- 1:10:58नींद छीन ली फिर क्या करोगे जिन बिछुनों पर मखमली बिछुनों पे तुम
- 1:11:13पांव रखते हो तुम्हारे पांव नीचे ऊपर होते हो।
- 1:11:18तुमको हाँ बड़ा मज़ा आया और वो तुमसे नींद छीन लेता है तुम कितनी
- 1:11:27गोली बिखालो नींद नहीं और गोली से खाई हुई नींद।
- 1:11:34उतनी गहरी मात्रा में तुम्हें फैशन या करेगी आनंदित नहीं कर
- 1:11:41पाएगी तुम्हें वो नकली नींद है उससे बढ़िया नींद तो मैं रोज़
- 1:11:47कहता हूँ कि तुम क्रिया योग करो और क्रिया योग करने के बाद
- 1:11:51तुम्हें नींद आएगी। उसे योग निद्रा कहते हैं।
- 1:11:54और बड़े बड़े योगी लोग से योग निद्रा को तरसते हैं और योग
- 1:11:58निद्रा को कैसे पाया जाए ये आज के शिविर लगाने वाले लोग बड़े बड़े
- 1:12:05होल्डिंग से लगाते हैं। लेकिन बाबा मुझे एक प्रसाद रूप
- 1:12:10में। 1976 का वज़न आज भी मुझे याद है।
- 1:12:17शंकर के मंदिर में मैं बैठा मस्त गुनगुना रहा था।
- 1:12:29हाँ, बरसा वीत गए। हमको मिले बिछुड़े बिजुरी बनके।
- 1:12:57गगन पे चमकी बीते समय। की रेखा मैंने तुमको देखा, इब
- 1:13:15तड़पुके इस बिरहन को? आया चैन ज़रा सा फिर भी मेरा मन
- 1:13:39प्यासा। मेरे ने सावन वादों फिर भी मेरा
- 1:13:56मन प्यासा। फिर भी मेरा मन प्यासो अरे राम।
- 1:14:18श्रीराम, श्रीराम, श्रीराम। तड़प, तड़प के इस बिरहन को तड़प
- 1:14:48तड़प के इस बिरहन को। आय चैन ज़रा सा आह फिर भी मेरा मन
- 1:15:10प्यार सा। कृष्णा हर हर।
- 1:15:41खाने को भोग सामग्री दे दी, भूख छीन ली, सोने को मखमली गद्दे दे
- 1:15:49दिए नींद छीन ली, उड़ने को जहाज दे दिए चैन छीन लिया।
- 1:15:59यह परमात्मा का हिस्सा खत्म और तुम मारते हो पदार्थ सूख के साधन।
- 1:16:13और चाहते हो सुखी होना अब इन दोनों बातों में बड़ा फर्क है।
- 1:16:24तुम मांगते हो परमात्मा से सुख के साधन।
- 1:16:32और चाहते हो सुख साधन तो तुम्हें मिल गए तुम्हें मांगना चाहिए सुख
- 1:16:45फिर साधन खुद ही पैदा हो जाएंगे फिर तो तुम।
- 1:16:52अकबर की तरह सड़क बनाने वाला उस सड़क के ऊपर सो गया।
- 1:16:58रोड़ी के ऊपर बड़ी गहरी नींद दोपहर की गर्मी थी पर वृक्षों की
- 1:17:06इच्छाओं करे वो ऐसा सो रहा था। ऐसा मकन जैसे कोई संत जैसे कोई
- 1:17:14कबीर अपने भीतर की उस गहराई में उतर के उस अमृत का स्वार्थ चखरा
- 1:17:25डॉक्टर ने कहा। तुम सेट हो जाओगे तो भी राजा हो
- 1:17:31जाओगे तो भी तुम सुखी जीवन की शांति, जीवन की कल्पना तुम्हारे
- 1:17:41भीतर से हटा नहीं सकोगे। फिर तुम्हें गद्दे मिल गए, फिर
- 1:17:48तुम नींद मांगोगे। तुम्हें पदार्थ मिल गए, खाने को
- 1:17:55तुम भोग मांगोगे और भोग उसकी नियामत है, नीयत उसकी नियामत है।
- 1:18:06आनंद उसका रस उसका उसके नियामक है रसोवैसा वह खुद उतरता है तुम
- 1:18:17मांगते हो साधनों की यही कमी रह जाती है तुम में।
- 1:18:23अगर तुमने साधनों को न मँगा होता और ये आचार्य लोग तुम्हें हड़काते
- 1:18:29हैं, बड़े बड़े तर्क देंगे। इनके तर्क लाजवाब है।
- 1:18:35मैं दाद देता हूँ इनके तर्कों के लेकिन तर्क सत्य नहीं होते।
- 1:18:42तर्क कल्पना भी होता है और तुम कल्पनाओं के जाल में सत्य को
- 1:18:50खंगालने की चेष्टा करते रहते हो। आज जन्म आजीवन और सत्य मिलता
- 1:18:57नहीं। तुम्हें जीस सुख की कामना की थी।
- 1:19:02गद्दे मिल जाएंगे, नींद बड़ी आएगी, भोजन मिल जाएगा, क्या बात
- 1:19:07है और जहाज मिल जाएगा, बड़ी शिकारें होंगी, चमचमाती है
- 1:19:16हेलीकॉप्टरों का जहाँ चाहे चले जाएंगे।
- 1:19:21लेकिन वो रोग ही ऐसा लगा देता है। फिर क्या करोगे जनाब कहीं
- 1:19:35तुम्हारे मांगने में मूर्खता तो नहीं?
- 1:19:40बहुत वर्ष पहले की बात है। मुझे कहते है अगर हम मांगेगे
- 1:19:43नहीं। कुछ करेंगे नहीं तो हमारा पेट
- 1:19:46फ़ोन भरेगा। तर्क बिल्कुल ठीक जीसको उस पर
- 1:19:51यकीन नहीं होता। वो ऐसे ही तर्क कहा करता है और
- 1:19:54ऐसे ही मुझे गालियां तक मिलते हैं।
- 1:19:59तुम नास्तिकता फैला रहे हो और इन्हीं बातों के ऊपर?
- 1:20:03ईशा को लटका दिया गया था। तुम नास्तिकता फैला रहे हो?
- 1:20:07इन्हीं बातों के लिए को जहर पीने पे आमदा कर दिया गया था।
- 1:20:11तुम नास्तिकता फैला रहे हो? तुम यूथ में नास्तिकता फैला रहे
- 1:20:15हो, जबकि वह सत्य वचन बोलते हैं, बाबा नानक कहते हैं उसको छोड़ दो।
- 1:20:23ये नहीं कहते कि कर्म करना बंद करो।
- 1:20:26यहीं तुम्हारी गलती रह जाती है। वो कहते हैं उस पर छोड़ के कर्म
- 1:20:31करो कर्मण्य वादी का रस्ते माप बोले सूखा दाचन है तुम कर्म तो
- 1:20:36करो भाई, वो तो अधिकार है तुम्हारा।
- 1:20:41लेकिन इसका फल क्या हो ये तुम्हारे हाथ में नहीं है,
- 1:20:47तुम्हें घाटे में पड़ सकता है, लेकिन तुम कर्म करना छोड़ दोगे
- 1:20:51क्या? और तुम उनको टांग देते हो?
- 1:21:00तो मेरे पास एक वक्त ये आएगा, मैं काम ना करूँगा फिर ऐसा काम नहीं
- 1:21:05करते थे। कोई काम नहीं करता और ऐसा कहते
- 1:21:12हैं खुद वो दे देगा। अगर मुझे भूखा मारना चाहता है,
- 1:21:14भूखा मार देगा यही महावीर कहते हैं, संत अक्सर इसी कहते हैं।
- 1:21:21जिन्होंने वो अज्ञात विराट हाथ देख ली है वो इसी प्रवृत्ति का हो
- 1:21:25ही जाएगा। उसे क्षण हो जाएगा।
- 1:21:30जिसने नहीं देखा वो तर्क करेगा, बिलकुल तर्क करेगा, जिसकी आवाज़
- 1:21:35में तर्क हो या कैसे हो जाएगा? कैसे हो जायेगा?
- 1:21:41एक छोटा सा अनु तुम्हारी सारी संसार को खत्म कर दे, ये कैसा हो
- 1:21:46जायेगा तुम्हारी समझ में तो नहीं आती एक अणु अणु की तरह पार्टिकल
- 1:21:54की तरह बाहर भी करो, तरंक की तरह भी करे, ये कैसा हो सकता है?
- 1:21:58हाउ इट इज़ पॉसिबल? तो यहाँ बहुत कुछ पॉसिबिलिटीज़
- 1:22:01हैं एनलाइटनमेंट के वक्त जब मैंने देखा कि ये सारा ठोस है और ठोस
- 1:22:12सत्य वह मिटता गया, एक पारदर्शी जगत उसके भीतर मेरा।
- 1:22:19और फिर सब खत्म टाइमलेसनेस सिर्फ आनंद की एक आनंद की एक महिमा सारा
- 1:22:29जगतगा रहा है वाजेनाथ अनेक असंखा कीर्ति वावनहारी।
- 1:22:36कितने राग परिसो के कितने गावण हारे कितने राग हो रहे हैं, कितने
- 1:22:44गाने वाले हैं, कितने तेरे महिमा मंडन हो रही है, कितना विराट है
- 1:22:48तू? और तुम तर्क करते हो तर्क।
- 1:22:58कमर कोई कहता है तर्क से पर्चा नहीं, इनको अपना पर्चा पता नहीं,
- 1:23:10खुद का पर्चा नहीं पता, दूसरे का निकाल देंगे।
- 1:23:15यह है ठगने की एक कला है और पारंपरिक कला आज की नहीं, ये
- 1:23:21पारंपरिक है। लोग मुझे कह देते हैं कि ये जो
- 1:23:26कहते हैं एक पुराने जन्म के कर्म तुम्हें गरीब बनाते हैं।
- 1:23:30एक हिसाब से ये सत्य भी है। और एक हिसाब से ये गलत है।
- 1:23:37खैर वीडियो बड़ी लंबी हो जाएगी। हम मुख्य बिंदु पर आ जाये,
- 1:23:46तुम्हें पदार्थ वो दे देगा। पदार्थ को खुला छोड़ रखा है उसने।
- 1:23:52और तुम पदार्थों को इकट्ठा करोगे, आखिर में पाओगे भूख भूख सुन गई और
- 1:23:59भूख के बिना पदार्थों को कैंसर में मरोगे भूख बनाने के भीतर
- 1:24:06फैक्टरी है सारे और गंध भूख के लिए।
- 1:24:10अलग अलग हार्मोन और पैदा करते हैं।
- 1:24:13350 तरह के जुइसेस पैदा होते हैं। हमारे लिवर के फैक्टरी में भूख
- 1:24:20लगनी बंद कर देगा। फिर कोई कहेगा इतना स्वादिष्ट है
- 1:24:27तुम्हें लगता होगा? मुझे तो उल्टी की तरह के के कितना
- 1:24:31हो रहा है? गदम गदम बिस्तर होंगे, मखमली और
- 1:24:39नींद में नहीं आएगी क्योंकि उसने तुमसे मुख मोड़ लिया।
- 1:24:54वो जब तक तुम्हें देखता है जब तक उस की नजरें ना तुम पे रहती है,
- 1:24:58तुम्हें नींद बखूबी आती है, भूख भी खूब लगती है।
- 1:25:05जब से तुने? निगाह फेरी है, दिन है सोना तो
- 1:25:20रात अँधेरी है, चांद भी। अब नजर नहीं आता, अब सितारे भी
- 1:25:39काम निकलते। अब सितारे भी कम निकलते हैं।
- 1:25:51मेरी याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर।
- 1:26:15गद्दे मिल गए, नींद छीन ली उसने निगाह फेर ली, उसने नजरें एना एक
- 1:26:22न रही। इसे ही कहते हैं रहमू करीम के
- 1:26:31इनायत, इनायत और तुम अगर दूसरों का।
- 1:26:43चैन छीनोगे तो वह तुम्हारा चैन छीन लेता हूँ, उसके पास एक ही
- 1:26:48हथियार है। मैंने लाकबर कहा बाबा कहा करते
- 1:26:54हैं जो अति तानाशाह होते हैं परमात्मा उनको सबसे बड़े से बड़ा
- 1:27:00दुख क्या देता है उनकी आँखें छीन लेता है।
- 1:27:04और मैंने आज देखे बहुत से सूर्यदा सीखूंगा, क्योंकि फिर ये तिल में
- 1:27:08ला जाते है। वो निर्देश जारी करते है जब पखंडी
- 1:27:20है, झूठे है। परमात्मा की मार इन पे पड़ी है
- 1:27:28संबले आज भी नहीं फिर फिर फरमान जारी करते हैं मोत्त्यमूर लग पूछ
- 1:27:40लेते हैं बाबा कि मेरी टाँगड़ी क्यों तोड़ दी?
- 1:27:44मैंने कहा तुमने इसका दुरुपयोग किया होगा तो टांगड़ी तोड़ दी
- 1:27:48तुम्हारी वो चाहे मैं हूँ चाहे तुम हो उसकी नजरों में अभेद है
- 1:28:00इसलिए वह जो मूर्ति बनी थी। वह नजा ने क्यों बदला दी?
- 1:28:05वह ठीक थी, वह उसको अपना पराया नजर नहीं आता।
- 1:28:11अब पता नहीं तुम्हारे विचार बदलते हैं, तर्क बदल जाते हैं।
- 1:28:14न्यायालय में जो मूर्ति थी देवी की उसके हाथ में तराज़ू था बराबर।
- 1:28:21और आँखें बंद थीं। यह कौन?
- 1:28:23यह शत्रु है या मित्र है, बस यह भूल जाता है।
- 1:28:26भाई न्याय की कुर्सी पर बैठा अगर डर गया तो उसको न्याय का
- 1:28:34न्यायाधीश होने का कोई हक नहीं। न्याय की कुर्सी पर बैठा हुआ
- 1:28:42न्याय करे, अन्याय न करे। अगर उसने अन्याय किया तो उसने
- 1:28:51अपने अधिकार का दुरुपयोग किया। डरना नहीं है, न्याय के कुर्सी पर
- 1:28:56बैठे हुए न्यायधीशो तुमने डरना नहीं है।
- 1:29:01सत्य तुम्हारे साथ है और जनता तुम्हारे साथ है।
- 1:29:04तुम डरते क्यों हो तुम बेबाकी से अपने फैसले सुनो।
- 1:29:09यह गणित के लोग हैं, जनता इनसे निपटे लेगी, आज नहीं कल निपटे
- 1:29:14लेगी। हाँ, मैंने पिछली वीडियो में
- 1:29:19बोला। कि ये मात्र जो कहते हैं कि सी 20
- 1:29:22का खेल है। इनकी कुल संख्या 18% है।
- 1:29:25अब पता चल जाएगा। अब इन्होंने बता दिया है कि हम
- 1:29:31कराएँगे मृदम, समारी कराएंगे अब देख लेना कितने?
- 1:29:39ये सबको अपना समझे बैठे और लात भी मार दी।
- 1:29:42इनपे पेशाब भी कर दिया इनके स्वतंत्र टैक्स भी ले लिए इनको
- 1:29:48पांव की जूती भी समझ लिया। इनके बर्तन भी अलग रख दिए आए तक
- 1:29:52वो सो है सारा तुम्हारा। स्त्रियों के साथ गलत व्यवहार उन
- 1:30:00दिनों में तुम भीतर अलग से बैठ जाओ।
- 1:30:03तुम अछूत हो गई तो ये जनाब ये तुम्हारे भाई कैसे रह गए?
- 1:30:11ये कैसे रह गए तुम्हारे भाई तुम क्या समझते हो मुझे आया एक।
- 1:30:18फ़ोन बाबा फिर तुम तुम तो हिंदू हो और ब्राह्मण भी हो, शुद्ध हो
- 1:30:23और ब्रह्म तक भी पहुंचते हुए तुम क्या लिखाओगे मैंने कहा मैं
- 1:30:27दिखाऊंगा, मैं मनुष्य हूँ, मैं मानव हूँ, मैं इंसान हूँ, मेरा
- 1:30:31धर्म है, ये और सत्य है, ये मेरा धर्म है, बाकी तो तुम्हारे सब
- 1:30:36ओढ़े हुए लबादे हैं। आ गए दो मेरे पास अगर मैं जिंदा
- 1:30:42रहा मैं लिखाऊंगा मैं इंसान यद तुम देखो तो और गलती से मत लिख
- 1:30:47देना मैं कौन हूँ मैं चेक करूँगा तुम क्या लिख रहे हो, मैं
- 1:30:55दिखाऊंगा इंसान। तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
- 1:31:05तू हिंदू बनेगा, न मुसलमान बनेगा, इंसान की ओलाद है इंसान बनेगा।
- 1:31:17तो हिंदू बनेगा न? मसल मान बनेगा, इंसान की औलाद है,
- 1:31:26इंसान बनेगा तो हिंदू बनेगा न मसल मान बनेगा।
- 1:31:35श्री कृष्ण गोवें हरे मुरारि ए नाथ नारायण वसुदेव श्री कृष्ण
- 1:31:51गोविंद हरे मुरारी। हेनाथ नारा एन वासुदेव ऋतुमात
- 1:32:04स्वामी सखा हमारे। पितुमातृ स्वामी सखा हमार हैं
- 1:32:20नाथनारा यन वासुदेव श्रीकृष्ण भविंद्र।
- 1:32:32हर मुरारी नाथ नारायण वासुदेव। श्री कृष्ण।
- 1:32:51हारे मुरारी।
- 1:33:12स्वामी सखा हमारे। पितृमात, स्वामी सखामह
- 1:33:38हेनाथनारायण वासुदेव हिनाथनार। यन वासुदेववा श्री कृष्ण गोविन्द
- 1:33:52हरे मुरारी ए नाथलारायण वासुदेववा श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी।
- 1:34:11वसुदेव व हो। धन्यवाद।