Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Dec 25 - भारत में स्त्रियों की नाभि खुली क्यों रखी जाती थी? ढकी क्यों नहीं? नाभि केंद्र का रहस्य! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:12बाबा जी प्रणाम उर्मिलजीत कौर हमारे भारत में स्त्रियों की ना
- 0:27भी। खुली क्यों रखी जाती थी, डंकी
- 0:34क्यों नहीं जाती थी? कृपया इसके रहस्य को
- 0:45विस्तारपूर्वक समझाने का कष्ट करें।
- 0:54नाभी विज्ञान शायद रह गया है, किसी ने पूछा नहीं होगा चलिए।
- 1:12आज नाभी विज्ञान पर वीडियो बना देते है।
- 1:19नाभी हमारे जीवन का केंद्र है, माता के साथ और नाल के द्वारा
- 1:34गर्व में जुड़ा रहता है। बच्चा जब माता के कोख से बाहर आता
- 1:43है तो माता से संपर्क उसका टूट जाता है।
- 1:56औरतों की नाभि खुली क्यों रखी जाती थी?
- 2:01औरतों की ही नहीं, मर्दों की नाभें भी खुले रखी जाती थी।
- 2:13मैं सदा ही कहा करता हूँ कि हमने। रहस्यों को बुला लिया है।
- 2:23कर्मकांडों को फिर भी हम दोहराए जाते हैं गर्भ अवस्था में
- 2:35स्त्रियों की नाभि। खुली रहनी चाहिए।
- 2:40इसलिए जो भारतीय परिधान था वह पेटीकोट, साड़ी और ब्लाउज का था।
- 2:52कारण का था ब्लाउज से। और पेटी कोट पहनने से ना भी खुली
- 2:59रह जाती है, ना भी न भी और ना भी में से बच्चा।
- 3:21उन तरंगों को खींच लेता था। जो तरंगे उसके लिए आवश्यक है वो
- 3:31हमारे वातावरण में मौजूद है। आज की स्त्रियां जो पंजाबी परिधान
- 3:39है। ज्यादा गहरे परिधान हैं, जो
- 3:46मुसलमान परिधान हैं, उनमें सारा शरीर ढाप लिया जाता है, ना भी
- 3:55खोली। बच्चे आसानी रंगों से महरूम हो
- 4:11जाते हैं। न भी हमारे जीवन का केंद्र है,
- 4:17प्राण ऊर्जा का केंद्र है सेंटर ऑफ कान्शस्नस एंड एनर्जी इस नाभ्य
- 4:29को अगर खुल रखोगे। तो इस नाभि केंद्र एक ऐसा यंत्र
- 4:36है जो अगर बच्चा गरब में होगा तो वह ऑटो स्टॉप एंड ऑटो ओपन सिस्टम
- 4:51लगाये। यह विज्ञान आपको शायद हो।
- 4:55किसी ने पूछा नहीं आज तक बच्चे को आसानी रंगों की जरूरत है तो बच्चा
- 5:06बड़ा हो के बुद्ध बनेगा? अगर बच्चे को आसान तरंगे नहीं
- 5:20मिली घर में या स्त्रियों ने गर्भवती होने के दौरान अपनी नाभि
- 5:27को ढक लिया तो वह बच्चा जुल्म करने वाला बच्चा होगा।
- 5:41पागल दिमाग का होगा अहंकार ही होगा, दुष्ट प्रवृत्ति का होगा
- 5:55क्यों? क्योंकि उसमें आसानी तरंगें गई
- 5:59हैं, अब इसको फिर समझ लीजिए। जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है
- 6:06तो ना भी खुली रखें। जैसे ही बच्चा गर्भ में प्रवेश
- 6:19करेगा वो ऑटो सिस्टम खुल जाएगा। इसको वैज्ञानिक ने आज तक खोजा
- 6:26नहीं, मैं आपको बता देता हूँ। कभी खोज लिया जाएगा।
- 6:32सनातन में बड़े गहरे राज़ छिपे हुए हैं।
- 6:37बस आज उल्लू बुधु मूर्ख वचन, जय सिया राम कहने वाले, जय श्री राम
- 6:44कहने वाले इनको आंतरिक विज्ञान का कुछ पता नहीं।
- 6:50बस ये सिर्फ हिंदू राष्ट्र मांगने पर और उसके नियत कारण होते है।
- 6:57राज़ करना है, हुक्म देना है। नानक कहते हैं कि हुकुम देना मत
- 7:06सीखो, हुकुम मानना सीखो और जो बच्चा लासानी रंगों से युक्त
- 7:13होगा, वह हुकुम मानना नहीं चाहेगा, हुकुम देना चाहेगा।
- 7:20इसलिए जीतने भी तानाशाह पैदा हुए हैं।
- 7:25अब इस बात को आप ध्यान से समझ लेना उनकी माताओं ने गर्भ के
- 7:32दौरान ना भी खुली नहीं छोड़ी होगी, ना भी को ढक लिया होगा।
- 7:44मैं स्त्रियों से कहना चाहूंगा कि गर्भ के दौरान वह भारतीय संस्कृति
- 7:51के हिसाब से कपड़े पहनें। ब्लाउज पेटे को शर्ट्स और साड़ी
- 7:57के पल्लू को। ऐसा मत करें जिससे ना भी ढक जाए।
- 8:04जैसे हम साड़ी के पुलों को ऊपर से ले जाते हैं।
- 8:07ना भी ढक गए एक कपड़ा भी व्यवधान बन गया।
- 8:17लेकिन गर्भवती स्त्रियों को ना भी खुली रखनी चाहिए क्योंकि बच्चे को
- 8:26आसानी तरंगों की जरूरत है और उस वक्त हमारा ऑटो सिस्टम।
- 8:33आसान तिरंगों को वातावरण में से खींचने का कौन होता है?
- 8:41जो भी तानाशाह बने बस उन्हें पता नहीं था।
- 8:45ज्ञान का इस ज्ञान को इस वीडियो को खूब फैलानो।
- 8:53और इस वीडियो को संभाल के रखना क्योंकि आज तक ये किसी ने बोला
- 8:57नहीं। मैंने भी किसी शास्त्र में नहीं
- 9:01पढ़ा, सिर्फ मुझे शिव ने बताया इस नाभ्य के केंद्र का सारा रहस्य।
- 9:14इसलिए जितना हो सका मैं आपको बताऊँगा।
- 9:21विज्ञान भैरव तंत्र में भी आपको यह कुछ नहीं मिलेगा।
- 9:27आसानी तरंगें तो मैं। शुद्ध और स्वच्छ बनाते हैं आचरण
- 9:35शुद्ध व्यवहार शुद्ध खान पान शुद्ध तुम्हारा मन बदल जाएगा।
- 9:42सारा आसानी रंगों के आते ही। किसी को दुख देने का जी नहीं
- 9:51करेगा। तुम्हारा गर्भवती स्त्रियां अक्सर
- 9:58दयालु हो जाती हैं, कारण भावुक हो जाती हैं।
- 10:05कारण अस्थानी तर? बच्चा आसानी तरंगों को पीता है और
- 10:15आसानी तरंगें न भी क्षेत्र से निकल कर जाती है।
- 10:23यह सिस्टम सिर्फ तभी तक होता है जब तक।
- 10:27स्त्री गर्भवती होती है। अब ज्यादा बच्चे पैदा करने के
- 10:31कारण हुए तो मैं बता देता हूँ। स्त्री जब गर्भवती होती है तो उसे
- 10:37अपूर्व प्रसन्नता भीतर से मिलती है।
- 10:41बच्चा कोई भी हो। वह मेल हो, वह फीमेल हो, कोई फर्क
- 10:47नहीं पड़ता। इसलिए स्त्री बार बार गर्भवती
- 10:53होना चाहती है या मैं आपको आंतरिक जी समझाता हूँ क्योंकि स्त्री को
- 11:02यह नियम तो पता नहीं। उसकी खोपड़ी तो अनपढ़ है।
- 11:08प्रकृति का नियम ये है कि जब बच्चा अगर मय होगा तो वह वातावरण
- 11:15में से आसानी तिरंगों को खींच लेगा और आसानी तरंगें वृहद
- 11:22सुखप्रद होती है। बड़ी मस्ती का आलम होता है आसानी
- 11:28तरंगों में बड़ा आनंद होता है आसानी तरंगों में सुसंस्कार होते
- 11:37हैं आसानी तरंगों में खुशी होती है बिना किसी कारण के।
- 11:43स्त्रियां खुश रहेंगी। जो गर्भवती हो उनका मिजाज़ अक्सर
- 11:49बदल जाएगा। डॉक्टर्स कहते हैं हार्मोन के
- 11:54बदलने से यह सब होता है नहीं, हार्मोन के बदलने से नहीं होता।
- 12:02आसानी रंगों के पीने से होता है। हार्मोन के बदलने से भी कुछ
- 12:07प्रक्रियाएं होती होंगी। लेकिन असल कारण मैंने आपको समझाया
- 12:16ना भी में से आसानी रंगों का उस ऑटो सिस्टम का ऑन होना।
- 12:23अगर हम पंजाबी परिधान में गर्भवती इस स्त्री को छोड़ देंगे।
- 12:32पंजाबी परिधान हमारे ऐसे हैं जो सारे शरीर को ढांक लेते हैं।
- 12:38ये सलामी परिधान ऐसे हैं। जो सारे शरीर को पैर तक को ढक
- 12:42लेता है, जितना शरीर को तुम ढक लोगे, आसानी तरंगे तुम्हारे भीतर
- 12:55बचा लेंगे सकेगा। और वह बच्चा बड़ा हो के तानाशाह
- 13:00बनेगा क्योंकि गर्भ में उसको पोषण नहीं मिला।
- 13:08उन तरंगों का पोषण नहीं मिला जो उसको दयालू, सत्यवादी तपस्वी।
- 13:22मर्यादित शुभकर्म करने वाला वीर दूसरों की सहायता करने वाला इन
- 13:31गुणों से संपन्न कर देता, साहसी बना देता है।
- 13:39जिन स्त्रियों ने गर्भवती होने के दौरान नाभि को खुले नहीं रखा,
- 13:50निश्चित ही उनका बच्चा कार्य पैदा होगा।
- 13:54भगोड़ा पैदा होगा, उसका कोई कसूर नहीं है।
- 13:58कसूर माता का है, माता का भी कोई कसूर नहीं है।
- 14:02हमने शिक्षाओं को छीन लिया। मैं काले ने अगर सबसे बड़ा जुर्म
- 14:06किया हिंदुस्तान पर सनातन पर तो वह यही जुर्म किया कि हमारे
- 14:12ऋषियों ने जो ये खोजें इस तरह की की थी।
- 14:16रहस्यत्मक खोजें उन्हें गुरुकुरों को खत्म करके कॉन्वेंट स्कूल
- 14:25खोलती है आज तुम कहते गुरुकुरों को फिर खोलो यह बकवास।
- 14:35ये सिर्फ बाबा लोग ठग लोग अपनी दुकानदारियों के लिए कहते हैं तुम
- 14:41गुरुकुरों का बाहर से तो प्रबंध कर दोगे, लेकिन वो गुणवत्ता कहाँ
- 14:46से लेके आओगे रहस्य कहाँ से लेके आओगे जो खो गए में काले के कारण?
- 14:54वो टीचर कहाँ से लेके आओगे? आज तुम्हें अध्यापक मिलेंगे।
- 14:59वेतन भोगी गुरु नहीं मिलेंगे। लेकिन यह रहस्य तो गुरु जानता है।
- 15:07मुझे अक्सर लोग कह देते हैं आप ऐसी ऐसी बातों का?
- 15:12चार्ज क्यों नहीं रखते? आप स्पेशल एक बैच क्यों नहीं
- 15:16बनाते? मैं उनसे क्या कहूं?
- 15:21वो बेचार है, धन ही उनके लिए सब कुछ है।
- 15:28बांटना तो जैसे उन्होंने सीखा ही। इसलिए परिधान राजस्थानी परिधान
- 15:39सर्वोत्तम है। राजस्थान में फिर भी आज गुरुकुल
- 15:47की परंपराएं बसी हुई भगवान राम। कभी देखना आप भगवान राम पर रामायण
- 16:01बनाने वाले लोग भगवान राम का बाहरी पहरावा ऐसा दिखायेंगे
- 16:07जिसमें ना भी खुली रहेंगी। देखना आप बस वो सिर्फ नकल करना
- 16:13जान। यह जो पटके का रिवाज बनाता है ना
- 16:19तो आज कांग्रेसी अपना पटका डाल देते है, बीजेपी वाले अपना पटका
- 16:26डाल देते है। यह पटका भगवान राम भी उड़ते थे।
- 16:33लेकिन आप देखना उससे ना भी खुली रहती थी।
- 16:38ये फटका डालते हैं ढेर सर्व कपड़े पहन के ऊपर से फटका सिर्फ सूचना
- 16:47के लिए कि मैं भाजपा हूँ, मैं कांग्रेस हूँ।
- 16:53तो मैं कहता हूँ तुम गुरुकुल बना दोगे, लेकिन गुरु कहाँ से रहोगे?
- 17:05गुरु नहीं मिलेंगे तुम्हें, तुम्हें मिलेंगे अध्यापक
- 17:09वेतनभोगी। अच्छा आय को सुनने वाले भी लोग खा
- 17:21जाते हैं। बाबा आप फिश क्यों नहीं रख लेते?
- 17:26एंटी फिश क्यों नहीं रख लेते? आप सार्वजनिक क्यों करते हो?
- 17:31ऐसे ऐसे गुप्त रहस्यों को जो हमारे ऋषियों ने खोजे थे हमारे
- 17:39ऋषि पश्चिम के साइंटिस्ट बस ये समझलो।
- 17:48के प्रायवासी, पश्चिम के साइंटिस्ट, अनुसंधानकर्ता और
- 17:56हमारे विषय अनुसंधानकर्ता इनवेंटर तुम गुरु कहाँ से लेके आओगे जब
- 18:15तुम मुझ तक को रोकते हो, तुम्हारी मनोवृत्ति ही ऐसी है।
- 18:21वो लोग कहाँ गए? कहाँ गए वो लोग जो निशुल्क वांटा
- 18:33करते थे? जिन्होंने कृष्ण को, राम को और
- 18:41सभी आने वाले गुरुकुलों में गरीब सुदामा हो वो अमीर कृष्ण हो सबको
- 18:50बराबर बांटा। जानबो कैसे लोग थे जिनके प्यार को
- 19:08प्यार मिला? हमने तो जब कलियाँ मांगी कांटो का
- 19:25हार मिला। जान वो कैसे लोग थे जिनके प्यार
- 19:42को क्या मिला तुम वेतन भोगी। अध्यापक ले आओगे विलासक जमीन पर
- 19:55बच्चों को बैठा दोगे विलासक अपने गुरुकुलों को शहर की भीड़भाड़ से
- 20:04बहुत दूर ले जाओगे। विलासक।
- 20:11लेकिन वह जो रहस्य को जानता है गुरु वो कहाँ गया वो कहाँ से खोज
- 20:19के लाओगे? रामदेव जैसे लोगों को लगा दो, जो
- 20:24वक्त का नाजायज फायदा उठाते हैं। योग सिखाते वक्त कहते हैं रौंग
- 20:31कूप खुले रखा, पर यह भी सांस लेते हैं और फिर खुद ही जीन्स को बेचने
- 20:39लग जाते हैं। ये दोहरे चरित्र वाले लोग आपका
- 20:43क्या खाक भला कर पाएंगे? खो गए हुए रोक किन में लोभ नहीं
- 21:00था, बस लोभ हीन व्यक्ति ही। निशुल्क वाँच सस्ता वेतनभोगी
- 21:12व्यक्ति तो वेतन बढ़ाने की मांग करेगा, भत्ते बढ़ाने की मांग
- 21:17करेगा। वो लोग हो गए।
- 21:27आज सूचनाओं से भरे हुए लोग बैठे हैं।
- 21:32जिन तुम आचार्य कहते हो, जिन तुम सर कहते हो तब सूचनाओं से युक्त।
- 21:43लोग तो थे लेकिन एक दूसरा तल भी उन्होंने छुआ था जो सूचनाओं को
- 21:53छोड़कर सूचनाओं से पार होकर अपने अंतस्थल पर जाकर उस आनंद को पीकर
- 22:01बाहर आता है। सूचनाएं कहीं गायब नहीं हो जातीं।
- 22:07आप रात को सोते हो तो क्या तुमने जो सूचनाएं जो तुम्हें इकट्ठी की
- 22:16और रात भर की नींद के बाद तुम भूल जाते हो नहीं?
- 22:21आइंस्टाइन भी रात को सोते है और सोने में ऊर्जा एकत्रित करते हैं,
- 22:31आनंद लेते हैं, फ्रेश होते हैं, सुबह उठते हैं, तो क्या अपना
- 22:37फॉर्मूलेशन में भूल जाते हैं? आज मातृसूचनाओं वाले लोग बचे हैं,
- 22:48जिन्हें आप आचार्य कहते हो, जिन्हें आप सर कहते हो, इसीलिए
- 22:54मैं कहा करता हूँ जीस समय ये सर, लोग, आचार्य लोग?
- 22:58गीता पर स्टॉप कर गीता पर उपनिषद पर व्याख्यान करना शुरू कर दें और
- 23:10कहें के जुड़ो हमारे संग आचार्य के संग गीता के रंग।
- 23:20मन लोभी मन लालची मन, चंचल मन चोर ये चोर है अब अगर मार्क्स को तुम
- 23:30उपनिषद की बातें समझाना शुरू करोगे।
- 23:34माओ को तुम गीता की बातें समझाने की चेष्टा करोगे तो वह उसका अर्थ
- 23:41का अनर्थ कर लेगा। तुम बात किस्से कर रहे हो, ये
- 23:46देखो पहली बात तो। गीता की व्याख्या करने वाली अर्थ
- 23:55क्योंकि गीता व्याख्यात करने का वो ही हक रखता है।
- 24:03मैंने बहुत बार कहा जहाँ से गीता बोली गई वहाँ पर जो चला गया हो।
- 24:12जो वहाँ गया नहीं वो गीताओं को व्याख्या करने का हक नहीं रखता।
- 24:18प्रसंग चल रहे हैं, प्रवचन चल रहे हैं सुनने वाले बहु संख्या में
- 24:25सुन रहे कारण कारण हैं एड्स। ये जो धन मांगते हैं, संस्था को
- 24:34दान कीजिए। संस्था को पोलियो नहीं हो गया, उस
- 24:39धन से ये एड्स लगाएंगे, एड्स आपको प्रभावित करेंगी और आप ज़्यादा
- 24:46मात्रा में सुनोगे। इन लोगों को बस यही है मलबे का।
- 24:51बस आखिरी बात ये समझ के जो हम कमाएंगे वह कूड़ा है, करकट है,
- 25:04कूड़ा करकट घर से बाहर फेंकने के लिए होता है।
- 25:08घर में स्टोर करने के लिए नहीं होता और अगर कोई सर कोई आचार्य
- 25:16कूड़ा करकट को न्यूरोन्जों में भर ले तो फिर उसका क्या उपाय है?
- 25:22कोई उपाय नहीं, वह आपको प्रसन्नता नहीं दे पाएगा।
- 25:28वह आपको आनंद के सागर में गोते नहीं करा पाएगा।
- 25:35बस आप गीता के भाष्य समझ जाओगे। गीता के शाब्दिक अर्थ तुम्हें पता
- 25:43चल जाएगा। गीता का रहस्य।
- 25:47का अर्थ तुम्हें समझ नहीं आएगा और आनंद मिलता है रहस्यत्मक अर्थ को
- 25:55पीने से। इसलिए तुम देखोगे, लाखों करोड़ों
- 26:01लोगों की कथा गीता को सुनेंगी। उनमें से मार्कस भी होंगे।
- 26:08उनमें से चार बात भी होंगे, उनमें से माओ भी होंगे।
- 26:15उनको भी आप गीता सुनाओगे लेकिन तुम भूल जाते हो।
- 26:21माओ अपने ढंग से गीता को व्याख्याहित सुनेगा।
- 26:26तुम कहोगे कुछ और उसकी समझ में आएगा कुछ और पहले तो व्याख्यायत
- 26:37करने वाले मूड मूड मैं उसे कहता हूँ जो कृष्ण के उस स्तर पर नहीं
- 26:45पहुंचे। जीस तल को कृष्ण कहते हैं स्तिथि
- 26:49प्रज्ञा हो जा अर्जुन उस तल को बिना छुए गीता का एक लफ्ज़ भी
- 27:00व्याख्यात नहीं हो सकता। तुम तो पूरी गीता 18 अध्याय के 18
- 27:05बोल देते हो। यहाँ 6677 साल के बच्चों को गीता
- 27:11कंठस्थ कराई जाती है। यह उल्लुओं का देश बन गया है।
- 27:18ऋषियों का देश आज मूडों उल्लुओं का देश बन गया है।
- 27:25और उल्लुओं का ही नहीं, उल्लू के पत्थरों का देश बन गया है।
- 27:30छोटे छोटे बच्चों को पूजा जाता है।
- 27:33किन कारणों से उन्होंने कुछ न्यू रौंज में भर लिया है कूड़ा उस
- 27:40कूड़े का मूल्य तुम डाल रहे हो और कूड़ा सुनोगे।
- 27:44तो तुम भी कूड़ा ही इकट्ठा करो, तुम्हारे न्यूरोन्ज़ भी कूड़े से
- 27:51ही भर जाएंगे तुम आचारों को सुनो, इन छोटे आचारों को सुनो मूर्खों
- 27:59को सुनो सदगुरुओं को सुनो। गीता किसी ने न पढ़ी हो कोई और
- 28:07जानें लेकिन भीतर की गीता के उस तल को छुआ हो, दैट इज़ सफीशियंट
- 28:16असल तो गीता कितनी बार ही पढ़ो तुम बे अर्थ है?
- 28:23जब तक गीता जहाँ से बोलेंगे, उस तल को न छोड़ो।
- 28:30अगर तुम उस तल को छोड़ो तो गीता फिर तुमने पढ़ी के नहीं पढ़ी, इस
- 28:37कोई मायने नहीं रखती, न भी पढ़ी हो गीता।
- 28:42लेकिन उस तल पर तुम चले गए। अब कबीर तो बिल्कुल अनपढ़ है और
- 28:50रमन तो अनपढ़ है, फिर क्या उस तल पर नहीं जा सकते?
- 29:02एक बात समझ लो। जितनी कोलेक्शंस तुम बाहर से
- 29:08करोगे, सूचनाओं के ध्यान से सुनना, बात को उतना ही भीतर जाना
- 29:16मुश्किल हो जाएगा। बाहर की सूचनाओं को इकट्ठा करना
- 29:21बंद कर दो आज जो तुम। 24 में से 1010 घंटे मोबाइल के
- 29:29सामने बैठे रहते हो। टेलीविजन पर इन झूठ बोलने वाले
- 29:36लोगों को सुनते हो तो तुम्हारे भीतर संस्कार झूठ के इकट्ठे हो
- 29:41जाते है और तुम 1 दिन खुद ही। फेक हो जाते हो, खुद ही झूठ हो
- 29:48जाते हो क्योंकि तुम झूठों को सुनते हो, इसलिए मैं कहता हूँ
- 30:03हमारी सबसे ऊंची गद्दी पर बैठा हुआ व्यक्ति झूठ बोलता है।
- 30:11और झूठ बोलने वाला कहेगा शेर आया शेर आया, शेर आया तुम भागोगे,
- 30:18कितनी बार भागोगे? कितनी बार तुम दीये जलाओगे?
- 30:21कोरोना को भगाने के लिए कितनी बार तुम मोबाइल की लाइटें जलाओगे?
- 30:26कोरोना को भगाने के लिए? इट्स नॉट दी साइंटिफिक।
- 30:30वे वह झूठ बोलता ही चला जाएगा क्योंकि तुम झूठ को सम्मानित करते
- 30:39चले जाओगे, सत्य को अपमानित करते चले जाओगे तो फिर यह देश 1 दिन
- 30:46झूठों का देश बन जाएगा। और दूसरे मुर्ख जो थोड़ी समझ रखते
- 30:50हैं वो तुमसे किनारा करने लगेंगे। हमारे देश से अगर बहुत से देशों
- 30:58ने किनारा कर लिया है, उसका एक कारण यह भी है मिस्टर झूठा,
- 31:03मिस्टर झूठा नाथ? न तो इनका कोई चरित्र है, रोज़
- 31:13इनके चरित्र पर अंगुली उठते हैं, न इनके पास कोई उपाधि है।
- 31:22अगर वलो प्रयोग से भय के कारण। इसी प्रिंटिंग प्रेस से ऊनी बस्ती
- 31:28से एमए बीए की डिग्री ले ली। वह वास्तविक डिग्री थोड़ी हो जाती
- 31:34है, मैं डॉक्टर की डिग्री ले सकता हूँ मैं मास्टर डिग्री ले सकता
- 31:42हूँ बैचलर ले सकता हूँ? मैं कोई भी डिग्री ले सकता हूँ,
- 31:48दर्द खाके या खरीद के तो उससे क्या मैं डॉक्टर बन जाऊंगा?
- 31:56क्या मैं फिलोसोफर बन जाऊंगा? क्या मैं इनवेंटर बन जाऊंगा?
- 32:03यह देश आज मूर्खों का देश बन गया है क्यों?
- 32:08क्योंकि हमारे पथ पर दर्शक झूठे हैं, मूर्ख हैं, गलत रास्तों का
- 32:18आपको मार्ग बता रहे हैं। राधे राधे करते रहो।
- 32:25इसलिए हिंदुस्तान में कोई काम का इन्वेंटर पैदा नहीं होता, क्योंकि
- 32:36यहाँ मगज तो राधे राधे करने में ही खप हो जाता है, मगज की एनर्जी।
- 32:46तो राम राम करने में ही खप जाते हैं और इन्वेंशन करने के लिए
- 32:51एनर्जी चाहिए। मेंटल एनर्जी, मेंटल एनर्जी तुम
- 32:56राम राम करने पे गवा देते हो, जाप करने पे गवा देते हो।
- 33:02रामचरित मानुष का पाठ करने में गंवाते थे।
- 33:04वो कितनी मूलताएँ हमने नहीं चिपकार की श्री गुरु ग्रंथ साहब
- 33:12का पाठ करने में देखिये ग्रंथ साहब पाठ करने के लिए नहीं होते।
- 33:22गीता भी पाठ करने के लिए नहीं होते, उपनिषद भी पाठ करने के लिए
- 33:27नहीं होते। गीता भी समझने के लिए उपनिषद करन
- 33:31साहब समझने के लिए नहीं होते बल्कि सुनकर।
- 33:41हृदय में उतारने के लिए होते हैं। तुम इनको सोने से उस अंतःस्थल को
- 33:48छू सको। फिर गलत साहब, कारवार अगर खोपड़ी
- 33:54में उनकी तुके बठाल मात्र। अगर उपनिषद के शलोक श्रुतियां या
- 34:01गीता के श्लोक को बिठा दिया तो उससे कुछ नहीं होने वाला।
- 34:06सिर्फ तुम्हारी खोपड़ी भर जाएगी। फिर खोपड़ी तुम किसी से भरो, गीता
- 34:12से भरो या सूचनाओं से भरो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 34:18दोनों ही बाधाएं हैं तुम्हारी न्यूरोज में चाहे गीता के श्लोक
- 34:25भरे हों, चाहे बात साइन का, कामसूत्र भरा है, राम राम भरा है,
- 34:35राधे राधे भरा है। के गाली गलोच भरा है।
- 34:38इससे ज़रा भी फर्क नहीं क्योंकि दोनों ही बाधाएं हैं, न्यूरोन्ज़
- 34:48से संपर्क तोड़ना होता है। बुद्धि को छोड़कर बुद्धि से पार
- 34:56जाना होता है बुद्धि से पार जाओगे तुम बुद्धि का मोह छोड़ के फिर
- 35:04बुद्धि में क्या भरा पड़ा है ये मायने नहीं रखता।
- 35:12क्योंकि इसको छोड़कर तुम उस अंतःस्थल में जाने के योग्य हो
- 35:17जाते हो। इस शब्द को गहरा है फिर से सुन लो
- 35:27बुद्धि के नेरोन में क्या भरते हो ये मायने नहीं रहता।
- 35:33आनंद को पाने के लिए हमें बुद्धि को छोड़ना पड़ेगा।
- 35:42फिर हम उसके पास पहुँचेंगे रहस्य जिसे कहते हैं रस का खजाना है जो।
- 35:51अमृत कुंड जैसे कहते जैसे अब समझना बात समझ में आएगा भूत
- 36:03परमात्मा को पाने के लिए तख्तों, ताज धीरे गहरात।
- 36:11जमीन, जायदाद, घर, बार, पुत्र, स्त्री, पिता, सेवक, दास, दासियां
- 36:20सब छोड़ देते हैं। उन्होंने महल छोड़ दिया।
- 36:29महल में क्या पड़ा था, ये याद है उनको इतने हीरे जवारात लोकर में
- 36:38पड़े हैं। इतने माणिक मणियां मोती युक्त
- 36:46सिंहासन को छोड़कर आया। मेरा छोटा बच्चा 6 दिन का यशोदा
- 36:52पत्नी सेवक सेविकाएँ सारा महल अटारी यह छोड़ के आये हैं क्या
- 37:01उन्हें पता है मैं क्या छोड़ के आया हूँ।
- 37:06पल भर के लिए दो पल भर के लिए एकांत में बैठना और सोचना बुध ने
- 37:14जब महलों को छोड़ा तो क्या उन्हें याद रहा कि मैं क्या छोड़ के आया?
- 37:24अगर उन्हें याद रहा कि मैं क्या छोड़ के आया हूँ तो बुध ने फिर घर
- 37:30पे ही बैठे रहना ज्यादा उचित था। बुध घर न छोड़ते अगर याद ही रह
- 37:36गया तो लेकिन नहीं बुध को याद नहीं रहता।
- 37:43ऐसे ही तुम खोपड़ी से दूर हो जाओ जैसे बुध ने घर छोड़ दिया।
- 37:49ऐसे ही तुम खोपड़ी में क्या है? इस खोपड़ी में गुरु ग्रन साहब की
- 37:58तुके हैं। गीता के श्लोक हैं।
- 38:04उपनिषदों की स्मृतियां, वेदों की स्मृतियां यह मत सोचना क्योंकि
- 38:13आखिर हम उस आनंद तक पहुंचने के लिए इस सारे संग्रहालय को छोड़ना
- 38:20पड़ेगा। फिर तुम्हारे घर में क्या है?
- 38:26तुम्हारे तख्तो ताज में क्या है जो बुद्ध ने छोड़ दिया?
- 38:35अगर किसी को याद रह गया तो फिर उसने छोड़ा ही।
- 38:43अगर कोई आचार्य आज कहता है। तख्ती लगा के बैठ जाता है
- 38:48भूतपूर्व प्रशासनिक सेवाधिकारी आईएएस तो समझो उसने ही छोड़ा तो
- 39:02फिर ये भी बात समझ में आएगी। कि अगर छोड़ा नहीं तो फिर वहाँ
- 39:08पहुंचा भी नहीं जहाँ ये सब पदवियां छोड़कर जाया जाता है।
- 39:15जहाँ सब सूचनाएं छोड़कर जाया जाता है तो फिर साहेब वहाँ पहुंचे।
- 39:25अगर बुद्ध को जाग रह जाए एक जैन मुनि मेरे पास है, अक्सर आज आया
- 39:31करते थे, अब कई सालों से आए हैं, पता नहीं हैं कि नहीं उससे बात
- 39:43में बोलते। मैं बड़े अमीर खानदान से हूँ।
- 39:49हम चार भाई, बहन और प्रत्येक भाई बहन के हिस्से में एक अरब की
- 39:57प्रॉपर्टी आती है। मैंने उनसे कहा मुन्नी जी बेहतर
- 40:07होगा आप मुन्नी का लबादा उतार दो। अब घर ही वापस चले जाओ।
- 40:17उन्होंने अपनी जो पूंछ से लिए करते है ना साथ में जो डंडे के
- 40:20आगे पूंछ लगी होती। वो उठाई, इधर उधर किया घबरा गए।
- 40:31मुझे कहते क्यों? स्वामी जी?
- 40:33मैंने कहा, जीस व्यक्ति को याद है की मेरे हिस्से में एक अरब की
- 40:39संपत्ति आती है। उसने छोड़ा क्या कहा होगा तुम्हें
- 40:48कभी याद रहता है तुम कितना पेशाब करके आये पेशाब तुम्हारे लिए
- 40:54विजातीय द्रव्य हो जाए, मल मूत्र तुम्हारे लिए विजातीय द्रव्य हो
- 40:58जाए, हिसाब किताब ना रहे। ऐसे ही हीरे ज्वाला मोतीमणियां
- 41:05तख्तो ताज स्त्री पुत्र पिता सेवक दास दासिय जनता जमीन जायदाद ए
- 41:15बुद्ध के लिए बेकार हो गई। मल्ल मूत्र के समान त्यागनी योग्य
- 41:21हो गए थे। ऐसी ही जब तुम्हारी अवस्था हो जाए
- 41:27तो तुम बुद्ध होने के योग्य हुए योग्य हुए।
- 41:31अभी बुद्ध हुए यह प्रथम पड़ाव है। पहला स्टेप तुम्हें बताया।
- 41:40उस अंतःस्थल को छूने के लिए लाजिम है।
- 41:48हम कितने के मालिक हैं उस मालिकाना हक को छोड़ना होगा।
- 42:01हम तो अपने हक को लेने के लिए अदालतों में पहुँच जाते हैं।
- 42:09हम तो अपने ही बच्चों को बेदाब लिखा देते हैं, बिना कुछ के।
- 42:20मैं अक्सर माँ बाप से पूछता हूँ, कहते हैं वो जायदाद मांगते हैं,
- 42:26मैंने कहा तुम पैदा ही ना करते हो यू अरे रेस्पोंसिबल फॉर युअर
- 42:34करेशन? तुम्हारी उत्पत्ति के लिए तुम ही
- 42:38तो जिम्मेदार हो। बच्चे ने कब कहा बच्चे की रजामंदी
- 42:43कब हुई? और फिर अगर तुम्हारे पास नहीं है
- 42:48तो तुम माफी के योग्य हो। गरीब हो, बच्चा भी समझ जायेगा
- 42:52क्या करे? चलो अपन को जीवन मिल गया है इतना
- 42:56ही काफी जैसे तैसे गुज़ारा कर लेंगे।
- 43:02होते सोते अगर तुम बच्चों को कुछ नहीं दोगे और बच्चे के मन में ये
- 43:08हो जाएगा कि मेरे साथ परशल्टी हुई तो तुमको नकार।
- 43:16फिर तुम बच्चे पैदा न करो, बिलकुल तुम्हें कोई नहीं पूछेगा, तुम से
- 43:23कोई जायदाद मांगेगा नहीं, जब तुम पैदा ही नहीं करोगे।
- 43:33इसलिए खोपड़ी में क्या भरा है? हर लोग याद रख सकते हैं।
- 43:44प्रशासनिक सेवा अधिकारी याद रख सकते हैं।
- 43:48मैंने आईएएस की कुर्सी छोड़ दी, लेकिन याद रखना।
- 43:53ये जो बोलेंगे गीता के बारे में वह गलत होगा, मन घडंत होगा।
- 44:02इनके व्याख्यानों पर अमल मत कर देना, बतंग जाओगे, ये तो बुधु
- 44:09हैं। और बुद्धूओं को पैदा कर रहे हैं।
- 44:14अपने पर वचन दे देखकर आज बहुत से लोग जो मूड हैं, ऐसे ही बाबा ने
- 44:22मुझे नहीं कह दिया कि उठो मैं रस के प्यारे को पीता पीता कहा के
- 44:28बाबा। किसी और की जिम्मेदारी लगाता हूँ।
- 44:35बाबा ने कहा, अगर कोई और बोलने वाला होता, अगर कोई उस स्तर पर
- 44:43जाने वाला होता तो मैं तुम्हें कष्ट नहीं देता था।
- 44:51तुम्हें कष्ट देना मेरी मजबूरी है, दूसरा कोई है कि नहीं?
- 44:56उस दिन मेरे लिए सारे चैनल बेकार हो गए।
- 45:01मैंने समझ लिया सोच लिया नहीं समझ लिया सब बोलने वाले उल्लू हैं और
- 45:07उल्लू बना रहे हैं। उल्लू उल्लुओं को ही तो जन्म दे
- 45:10सकता है। उसके भीतर उल्लू का ही तो स्पर्म
- 45:15है। उल्लू मछली पैदा नहीं कर सकता,
- 45:20उल्लू उल्लू को ही पैदा करेगा, इसलिए मैं कहता हूँ।
- 45:28क्षमा प्रार्थना सहित कृपया आप न बोले तो ज्यादा अच्छा रहेगा
- 45:35तुम्हारा खंडाया हुआ ये गंध मार्क्स का चरवा का निक्से का
- 45:45मक्से का। खिढ़ाया हुआ ये गंध बुध आकर साफ
- 45:50करेंगे। वो सफाई सेवक कर्मचारी के भांति
- 45:56काम करेंगे। तुम्हारी गंदगी पहुंचने के लिए कब
- 45:59से घूर रहा हूँ मैं 5.5 वर्ष हो गए, मुझे बोल देखो।
- 46:06में सफाई अभियान शुरू कर इन मूर्खों के बिछाये हुए गंदगी को
- 46:13मैं अपनी बुहारी से झाड़ रहा हूँ और बहुत से लोग तो ऐतराज भी करते
- 46:19हैं, मुझे गालियां भी निकालते हैं, कॉमेंट्स भी करते हैं।
- 46:26तो मैं कहता हूँ भाई जब तुम पहुँच ही गए हो फिर कसूर तुम्हारा है ना
- 46:33तुमने मुझे सुना क्यों मैंने तुझे कब आमंत्रित किया था?
- 46:40तुम आए ही क्यों ये तो दोस्त तुम्हारा है।
- 46:46मैं बांटने के लिए बोल रहा हूँ, उनके जिनको प्यास लगी है, जिनको
- 46:54भूख लगी है, तुम्हें भूख नहीं लगी थी, प्यास नहीं लगी थी, तुम
- 46:59शब्दों को एकत्रित करने के लिए मेरे पास आए हो।
- 47:06तो फिर ऊपर से कमेंट भी कर रहे हो।
- 47:10मैंने अपना अनुभव एनलाइटनमेंट का वीडियो डाला और हजारों कॉमेंट्स
- 47:18बनाए। बाबा तुम मूर्ख बना रहे हो लोगों
- 47:23को, मैंने कहा तुम मूर्ख मत बनाओ भाई मूर्ख बनना तो तुम्हारी चॉइस
- 47:32है ना तुम मुझे मत सुन ये गप है बाबा, मैंने कहा फिर तुम अपने कान
- 47:39बंद कर लो। मत सुनो गपको बाबा से मैंने कहा
- 47:45ये तो ऑलरेडी बुद्ध है ऑलरेडी एनलाइटन पर्सन तो बाबा कहते है
- 47:54तुम अज्ञानियों के लिए बोलो। ज्ञानी के हम गुरु हैं।
- 48:04मूर्ख के हम दास बस मैं समझ गया जो मूर्ख हैं वो अपने आप को
- 48:16ज्ञानी बताने की चेष्टा करें। मैं अपना अनुभव कोला मैं गाँधी था
- 48:23और लोग मुझसे ही सवाल पूछना शुरू कर दिया तुमने फिर भगत सिंह को
- 48:29बचाया क्यों? मैंने कहा तुम्हारे बाप लादे या
- 48:33तुम नॉन बायोलोजी कर? तुम नामदेव की तरह नॉन बायोलॉजिकल
- 48:41हो क्या उनका कोई फर्ज नहीं था? सिर्फ गाँधी का ही फर्ज था और
- 48:52बहुत से लोग तो सिर्फ गाँधी के ही बारे में बोले जाते हैं।
- 48:57क्या ये जीवन का कोई और लक्ष्य बाकी नहीं रह गया है?
- 49:03क्या इस ज़िन्दगी का कोई और मंतव्य नहीं है?
- 49:07मैं रोज़ कहता हूँ आओ, मैं तुम्हें तुम्हारा मंतव्य दिखाता
- 49:13हूँ, घड़ी तो घड़ी के लिए है। आओ हजूर, तुमको सितारों पे ले चलो
- 49:33दिलझुं। समझा ऐसी बाहरों में ले चलूँ आओ
- 49:48हजूर क्या? मिलेगा गाँधी जी।
- 49:59क्रिटिसिज्म से क्या मिलेगा? तुम्हे अंत से तुम्हारा अंत
- 50:07प्यासा है, पानी का आनंद के उस रस का प्यासा है क्या और कोई?
- 50:18दुनिया में काम नहीं होता, बस गाँधी जी का क्रिटिसिज्म ही रह
- 50:24गया है यही तुम्हारा लक्ष्य है फिर तुम चीखते चिल्लाते मर जाओ
- 50:34हाय मैं गया हाय मेरा गया। और मौत तो 1 दिन आइक घनी गयी,
- 50:45थोड़ी रही, घनी गयी, थोड़ी रही वो भी बीती जाए, एक पलक के खातिर है।
- 50:57काहे उम्र का वाह, अब थोड़ी सी उम्र बाकी रह गई, अब तो संभल जाओ,
- 51:08अब असली मकसद भी पूरा कर लो, बाल भी सफेद आने शुरू।
- 51:20लेकिन मैं तुम्हारी तकलीफ को सुनता हूँ तुम्हे रस का वो बूंद
- 51:29कभी पिया बस यही तुम्हारी तकलीफ। तुम संभोग के क्षणों में दूर से
- 51:36उस रस को देखा और तुम इतने ही आनंद को ज़्यादा से ज़्यादा देखे
- 51:41हो सीखें और यही कुछ कर सकते हो, मैं दावे से कह सकता हूँ।
- 51:51जो अपने उस परमात्मा के तल तक नहीं गया वह ओशो की तरफ होगा ही
- 51:59होगा। उसकी खोपड़ी महाविद्वान होगी,
- 52:05क्योंकि वह एमए है और फिलॉसोफी की एमए है।
- 52:11दक्षिण शास्त्र के बाल की खाल निकाल लेगा।
- 52:15लेकिन शब्दों से तर्कों से तर्कों से तुम्हारी बातों का कोई जवाब
- 52:28नहीं है। लेकिन चरित्र के नाम पर तुम शो न
- 52:30हो। चरित्र के नाम पर तुम सिर्फ लिबरल
- 52:35सेक्स फैला के जाओगे और लिबरल सेक्स से बड़ी गंदगी इस संसार में
- 52:41कोई होती नहीं, वो ही हो सो फैला दे अब पछता रहे है।
- 52:48अब मेरे प्रवचन में जब पास आके बैठते हैं तो जर ज़रा आंसू बैठते
- 52:53हैं हाय मैं चुप हाय मुझे जहर का इंजेक्शन लेकर खुद ही मरना पड़ा।
- 53:06लोग दुनिया चरित्र पहले देखते हैं, हमारी ऊंची गद्दीओं पे बैठने
- 53:13वाले लोग कहते हैं के कपड़ों से पहचान लिया जाता है हाथ तो इसका
- 53:19मतलब लोग पहले चरित्र देखते हैं, चरित्र सात्विक कर खो।
- 53:27अगर तुम लोगों को अनुकरणीय संदेश देना चाहते हो तो तुम्हें अपने
- 53:35चरित्र को साफ सुथरा रखना होगा, चाहे तुम पहुँच ही गए हो।
- 53:47तो हम ना भी विज्ञान पे आ जाए, अब आपको पहला स्टेप तो समझ में आ गया
- 53:55होगा। ऐसे छोड़ दो खोपड़ी को तुम खोपड़ी
- 54:01से चिपके रह जाते हो। अगर मैंने कोपरे को छोड़ दिया फिर
- 54:07मेरे फलावर का क्या होगा? इन्हीं से तो मुझे धन आता है।
- 54:11इन्हीं से तो संस्था का धन बढ़ता है और धन तुम्हारा जीवन हो गया
- 54:18है, तुमने कोई और जीवन नहीं देखा। जो जीवन रस से भरा हुआ।
- 54:26है। स्पष्ट संकेत है इंगित करता है
- 54:30तुम्हारा बोलना कि तुमने किसी और जीवन को निहारा नहीं अगर उस जीवन
- 54:40को तुमने पिया होता। तो फिर तुम ऐसी बेतुकी बातें ना
- 54:46कह सर की बातों का, आचारों की बातों को काटने वाले बहुत से लोग
- 54:55आजान हैं, क्योंकि ये गलत है। बुद्धि तर्क से चलती है और तर्क
- 55:02से काटी भी जाती है। बुद्धि दोधारू तलवार इधर फेंको तो
- 55:08भी काटेगी, उधर फेंको तो भी काटेगी और बहुत से लोग बुद्धि से
- 55:16पैसा कमाके उपाधि कमाके नाम कमाके फॉलोअर्स कमाके।
- 55:22धन इकट्ठा कर लेंगे, नाम इकट्ठा कर लेंगे, प्रतिष्ठा इकट्ठी कर
- 55:30लेंगे, लेकिन याद रखो कौन से लेवल विल लूज़ उसको बढ़ा जैसे आए थे
- 55:42वैसे ही। हाथ झाड़ के चले जाओ एक मानस जीवन
- 55:48बेकार हो गया, बुद्धि की खोपड़ी के नेवांस में भरने के कारण बेकार
- 55:59हो गया। तो एक स्टेप तुम्हें समझा दिया
- 56:05बुद्धि को इस तरह छोड़ देना। जीस तरह बुद्ध ने राजमहल छोड़ा,
- 56:12रात्रि को छोड़ा कि कोई देख ना ले, दबे पांव आहट करके छोड़ा।
- 56:17तुम्हें पता है बुद्ध ने अपने जूते?
- 56:21उतार दिए थे। जब राजमहल को छोड़ा क्यों कहीं पग
- 56:30ध्वनि यशोधरा को जगा न नंगे पांव से लगे थे।
- 56:41बुद्ध ने जो मोजे बूट पहन रखे थे, उतार दिए थे दबे पाण गए, अपने
- 56:49पुत्र को निहारा, यशोदरा को निहारा, घूख सोई हुई थी श्री
- 56:55शक्ति में। निहार की आँखों में आंसू आए हैं।
- 57:04विक्षोभ का तीव्र वेग आया है थोड़ी देर होए बच्चे की याद में
- 57:12रोए ये शोध के। बिशोह से रोए यह एक लव मैरिज थी।
- 57:22यशोदरा बुद्ध की बुआ की बेटी थी। सगी बुआ की अमिता की बेटी थी
- 57:31सुदोधन के बेटे बुद्ध। गौतम और सुद्धोधन की बहन अमिता की
- 57:41बेटी यशोदरा बुआ, मामा के बेटे बेटी से सगे भाई बहन समझ लो तुम।
- 57:54लेकिन लव मैरिज से और कहते हैं प्यार और युद्ध में सभी जायज होता
- 58:04है, वहाँ कोई मर्यादा रहती है? तो बुद्ध ने कहा कि मेरी शादी
- 58:18यशोधरा से करवा दो आना जाना रहता था क्योंकि बुआ थी, शुद्ध ने
- 58:24अमिता से बात की और शादी हो गयी। देखिये अपनी प्रेमिका को छोड़ के
- 58:30जाना कितना मुश्किल होता है। याद करो उन लम्हों को तुम तो डरते
- 58:37हो कहीं प्रेम का भीषण न जाए कहीं प्रेमी मुझसे दूर न चले जाए और वो
- 58:46पल को याद करके देखो चलचित्र के मैं उपहार देता हूँ सारे।
- 58:53लकीरों को जब बुद्ध ने अपनी प्रेमिका अपनी धर्मपत्नी को छोड़ा
- 59:03होगा अपने प्रिय पुत्र को अकेला पुत्र राहुल उसको छोड़ के गए
- 59:10होंगे वो पल कैसा होगा? दर्द नाक लेकिन कितना भी दर्द नाक
- 59:19न हो एक बेहतर घोर व्यथा थी वो व्यथा उसे खेंच रही थी कुछ और है।
- 59:33जो मुझे अभी तक मिला नहीं प्रेमिका मिल गई, बेटा मिल गया
- 59:37राय दरबार में जन्मा ही हूँ, लेकिन फिर भी क्या है जो नहीं है
- 59:45मेरे पास? बस उसकी तड़प जब्त करना जगे।
- 59:53तुम अध्यात्म में मत प्रवेश करना, मैं तुम्हें रोज़ कहता हूँ यहाँ
- 59:59लोग मुझसे प्रश्न पूछ लेते हैं, मैं उससे हाथ जोड़ के कहता हूँ कि
- 1:00:06मत पूछा करो प्रश्न। ढ़ाई 3000 लंबी लंबी वीडियो क्या
- 1:00:12सुननी हैं तुमने नहीं सुनी हैं मैं अच्छी तरह जानता हूँ अगर
- 1:00:18तुमने एक भी वीडियो ढंग से सुनी होती हैं, तो तुम्हें अगली वीडियो
- 1:00:25सुनने की आवश्यकता कहाँ थी? जो व्यक्ति अपने भीतर पहुँच जाता
- 1:00:31है वो फिर से किसी ग्रंथ को पड़ता है क्या?
- 1:00:39लेकिन तुम फिर भी प्रश्न पे प्रश्न छोड़े चले जाते हो?
- 1:00:44कोई कुछ पूछ लेता है, कोई कुछ पूछ लेता है।
- 1:00:47यह स्पष्ट संकेत है कि तुमने वो आंतरिक तर्क छुआ नहीं।
- 1:00:52मेरा बोलना बेकार हो जाता है। तुम्हें पता है मुझे कितना दर्द
- 1:00:57होता है उस वक्त। जीस अमृत के प्याले को में छोड़
- 1:01:04के आया था और कितना मुश्किल होता है उसको छोड़ना जीसको पीने के लिए
- 1:01:10तुम आतुर हो जिसकी एक बूंद चख लो, इसके लिए तुम आतुर हो।
- 1:01:17अंतरंग क्षणों में तुमने दूर से देखा और तुम बार बार उसे देखने की
- 1:01:22अभिलाषा को पाले जा रहे हो। मैंने तो पिया है वो मैं कैसे
- 1:01:29छोड़ दू? उसको यही निशानी है।
- 1:01:36जिसने पी लिया वह चुप हो गया, वह फिर छोड़ नहीं सकेगा, उसे बोलेंगे
- 1:01:46तो सिर्फ तुम्हारी शक्लो सूरत देख कर बोलेंगे, दयावश बोलेंगे।
- 1:01:54करुणा वश बोलेंगे तुम्हारे ये बिगड़े हुए थोवड़े देखकर बोलेंगे
- 1:02:01तुम्हारी ये मूड पर नालियाँ, मान्यताएँ देख कर बोलेंगे और करे
- 1:02:09भी क्या बुध रोए बहुत। हीरे ज्वारतों का महत्त्व त्याग
- 1:02:19जा सकता है। लिंग प्रेमिका का प्रिय पुत्र का
- 1:02:25मोह त्यागना बड़ी मुश्किल होता है, क्योंकि ये जीवंत होते हैं
- 1:02:29हीरे ज्वारत्व। जीवंत नहीं, वो तो जड़ होते हैं
- 1:02:36लेकिन प्रेमिका को छोड़ना, पुत्र को छोड़ना, वो विक्षोभ का लम्हा
- 1:02:44कितना लम्बा हो गया होगा, कितना दुखद और पीड़ाग्रस्त हो गया होगा।
- 1:02:50इसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते। ऐसी अवस्था में चोरों की भांति
- 1:02:57बुद्ध ने सब छोड़ दिया। किसके लिए प्यास लगी थी?
- 1:03:03कुछ है जो अभी पाने को शेष रह गया।
- 1:03:11कुछ है जो अभी पाया नहीं गया, इसलिए सब छोड़ के चला जाता हूँ
- 1:03:21देखता हूँ वो है क्या जो मुझे काटे की तरह भीतर भीतर।
- 1:03:27खोखला कर रहा वो प्यास बुझेगी किस पानी से बाहर की प्यास के लिए तो
- 1:03:35पानी मेरे पास बहुत है खाने के लिए 3600 प्रकार के भोजन मेरे पास
- 1:03:44लेकिन ये प्यास है कि मिटती ही नहीं।
- 1:03:47बस जीस दिन तुम्हें ये असली प्यास होती है जीस दिन तुम्हें ऐसी
- 1:03:53प्यास लगे तब तुम मेरे पास आने पर यह है मेरा तर खुला है खुला ही
- 1:04:01रहेगा तुम्हारे लिए। कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे
- 1:04:15तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे। तब तुम मेरे पास आना प्ले मेरा
- 1:04:33दिल खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए।
- 1:04:44तुम्हारे लिए देखिए वीडियो बहुत लंबा हो गया है और तुम मैं जानता
- 1:04:53हूँ 40 मिनट से ज्यादा नहीं सुन सकता है, मैं वीडियो को यहीं
- 1:05:01समाप्त करता हूँ। लेकिन इसका अगला भाग मैं कंटिन्यू
- 1:05:05रखता हूँ। एडिटर्स से कहूंगा कि इसको दो
- 1:05:12भागों में बांट दे क्योंकि प्रश्न अभी ओरमल जीत का भाग्य रह गया है
- 1:05:18ना भी विज्ञान? वह तुम्हारी खोपड़ी की खुजलाह है
- 1:05:24भाई मुझे खुजलानी ही पड़ेगी, मैं क्या करू मुखसा तो तुम्हारे भीतर
- 1:05:32जगी खोपड़ी में खारिश हो रही है। इसे मटाना ही पड़ेगा और तुम इसको
- 1:05:45हीरे, मोती जौहरात से भी ज्यादा अधिमान देते हो तो मैं क्या करू?
- 1:05:52मुझे तुम्हारे प्रश्नों के जवाब मजबूरी में देने होते हैं।
- 1:05:59अन्यथा इनकी आवश्यकता नहीं। मैं जो बोल सकता था वह सिरे तक
- 1:06:07बोल दिया है। जो बोला नहीं जा सकता वह मैंने
- 1:06:16बोलने की। अंतिम चेष्ठ तक बोल दिया है लेकिन
- 1:06:21फिर भी तुम प्यार से हो तो मैं क्या करूँ?
- 1:06:29मुझे तुम्हें इस विज्ञान का रहस्य भी समझाना पड़ेगा।
- 1:06:37फिर ये अगली वीडियो में सुन लेना तुम क्योंकि इतनी तक भी तुम आ गए
- 1:06:43तो धन्य भागी हूँ मैं रे रे नैना। भादो फिर भी मेरा मन प्यासा
- 1:07:09प्यासा। फिर भी मेरा मन प्यासा मेरे नै
- 1:07:28सावन बा? फिर भी मेरा मन प्यासा फिर भी
- 1:07:44मेरा मन प्यासा। बरसा भी तो गए हमको मिले।
- 1:08:07बरसोगी तो गए हम को मिले बिछुड़े, बिजौरी बनके।
- 1:08:24गगनपे चमकी भीते समय की रेखा मैंने तुमको देखा।
- 1:08:50तड़प के इस बिरहन को आया चैन। ज़रा सा तड़प तड़प क इस विरहन को
- 1:09:17आया चैन। ज़रा सा फिर भी मेरा मन प्यासा
- 1:09:36मेरे नैना। सावन आना फिर भी मेरा मन प्यासा
- 1:09:52फिर भी मेरा मन प्यासा। घुंघरों की छमछम बन गई दिल का गम
- 1:10:13घुंघरों की छमछम। बन गई दिल का गम, डूब गया दिल
- 1:10:30यादों में उभरी बेरंगी। लकीरे देखो ये तस्वीरें हो सोने
- 1:10:52महल में। नाच रही अब तक एक रखशा फिर भी
- 1:11:10मेरा मन प्यार सा। प्यासा, प्यासा, प्यासा।
- 1:11:33प्यासा मेरे नैन। धन्यवाद।