Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 May 26 - गुरु गोरखनाथ के दोहे "थान, मान और अटलता" का अर्थ! कुंडलिनी जागरण और चेतना का महत्व!
Transcript
- 0:13चैतन्य श्री बाबा जी चन्दस्पर्श एक दोहा गुर गोरखनाथ का कृपया
- 0:36इसका। रहस्यत्मक विवेचन करने का कष्ट कर
- 0:47थान मान गुरु ज्ञान बेध बोध सिद्धा पर ग्राउंड।
- 0:58चीतन वाला ब्राह्मण वह नाथ की कृपा अखंड क रह लाजवाब शब्द।
- 1:17गौरख के वाण इतने तीखे हैं की वो हृदय के अंत स्थल को चीर के पार
- 1:28भटकता है। आपकी सभी भ्रांतियों को खंड विखंड
- 1:38कर देते हैं थान मान गुरु ज्ञान वेधा बोध सिद्धा पर ग्राम जो
- 1:53स्थिति स्थैर्य। वह अटलता से मान प्राप्त करता है।
- 2:02गुरु के ज्ञान को ग्रहण करता है। कुंडली वेद किए हुए को बोध
- 2:11प्राप्त करता है और सिद्धों से। पर गमिता अर्थात नृलिप्तता वह
- 2:22चेतन स्वरूप गुरु का बालक भ्रम में नहीं बहता।
- 2:31क्योंकि उस पर गुरू की अखंड कृपा रहती है।
- 2:39आइए इसके गहरे अर्थों में उतरने की चेष्टा कर।
- 2:57ज़रा सोचिएगा आप दसवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं और दसवीं कक्षा में
- 3:13हिसाब पढ़ाने के लिए तुम्हें मैथ पढ़ाने के लिए इतिहास का।
- 3:21टीचर रख दिया जाए तो क्या गति होगी?
- 3:27समाज इतिहास का टीचर जो सारे आंकड़े तो जानता है।
- 3:41लेकिन इतिहास के जानता है कब क्या हुआ था, कौन राजा बना था?
- 3:52वह गणित का फॉर्मूलेशन नहीं जानता।
- 3:59और गणित बड़ा गहरा फॉर्मूलेशन मांगता है।
- 4:08यह कोई इतिहास की रट्टा फिकेशन तो है गणित फॉर्मूलेशन।
- 4:20अगर सही फॉर्मूला लग गया तो सही चाबी लग गई।
- 4:25तारा भूल जाएगा, लेकिन अगर आपको गणित बढ़ाने के लिए इतिहास का
- 4:39एमए। या एमए पीएससी डी भी रख दिया जाए
- 4:47तो क्या वो तुम्हें मैं आज ऐसा ही हो रहा है?
- 4:59ऐसे आचार्य गीता का ज्ञान तुम्हें दे रहे हैं।
- 5:09जो बड़े तो है, प्रशासनिक सेवा करने का डिग्री तो है, यूपीएससी
- 5:16का कॉम्पिटिशन है, आईएएस की कुर्सी पर है, लेकिन मन के भीतर
- 5:25लोभ। वासनो को पूरा करना कायर है,
- 5:33कमजोर है और तुम्हें सिखाने के लिए है गीता गीता का वह हीरो।
- 5:50कृष्ण, जो रणक्षेत्र में कहता, मैं सारथी बैठूंगा और सबसे आगे रथ
- 5:58के ऊपर आसीन होगा अर्जुन तीर बाद में तेरे को लगेगा पहले मुझे।
- 6:10सारथी होना कोई मामूली बात नहीं होती।
- 6:14सारथी होने का मतलब है किसी भी प्रहार को पहले खुद झेलने की
- 6:22क्षमता। तो कृष्ण मृत्यु से न डरने वालों
- 6:33में से और उसका कारण है कि उन्होंने अपने भीतर का वो अमृतत
- 6:40जान लिया और अगर कृष्ण कहते हैं कि मैं बनूँगा साथ।
- 6:50तो बिल्कुल अपनी योग्यता के अनुरूप कहते हैं, लेकिन अगर कोई
- 6:59व्यक्ति कायर हो, मृत्यु सटलता हो, भले ही उसके नूरॉन्ज।
- 7:07सूचनाओं से भरे पड़े हो, भले ही उसकी वाक्य शक्ति बड़ी गहरी हो,
- 7:19लेकिन अगर वह मौत से डरा तो फिर कहाँ कृष्ण को समझा पाएगा?
- 7:27तो? कृष्ण का तो मूल दत्त भी यहाँ से
- 7:32शुरू होता है नैनम चदंती शस्त्रण और शस्त्र से डरने वाला व्यक्ति
- 7:43तुम्हें निर्भय होना कैसे सीखा पाएगा?
- 7:48ऐसा ही आज पाखंडी रोक अपनी वासनाओं को पूरी करने के लिए अन्त
- 8:03शंट में सीखा है। यह गीता का ज्ञान नहीं है, कतई
- 8:13गीता का ज्ञान सीखना कोई भी सीख सकता है और ध्यान रखना इसके लिए।
- 8:26किसी प्रकार की कॉम्पिटिशन सूचनाओं के मुकाबलेबाजी के जरूरत
- 8:37नहीं होती। बाहर का ज्ञान।
- 8:46और अंत का ज्ञान अंत बाहर का ज्ञान सीखना तो तुम्हें सोचना
- 8:54अवश्य भीतर के ज्ञान तक पहुंचना है तो सूचनाओं की ज़रा भी जरूरत
- 9:02नहीं। मात्र इतनी ही सूचना होनी चाहिए
- 9:08कि वह तुम्हारे भी अपने भीतर उतर जाओ, वह तुम्हें मिल जाएगा।
- 9:17उसमें ढेर सारी सूचनाएं और सभी विषयों की जानकारी।
- 9:25दिल कोलकाता लाजिम नहीं, लेकिन ऐसा ही आज अगर हो रहा है तो कौन
- 9:40गलत? शिष्य तो गलत नहीं है, शिष्य कभी
- 9:47गलत नहीं होता। समझे ना बात जैसे जो बच्चा जन्म
- 9:53लेता है? कसूर श्रद्धा ही माँ बाप का होता
- 10:00है, जो बच्चे को पैदा करती है अन्यथा बच्चे को अगर पैदा न किया
- 10:15तो बच्चे के गले में जीवन को चलाने की मुसीबत न पड़ती।
- 10:23शिष्य भी बच्चे की तरह है। शिष्य को पता नहीं होता जैसे
- 10:34बच्चे को पता नहीं होता कि मैं कौन से घर में जन्म ले रहा हूँ
- 10:38क्योंकि उसकी कोई सहमति नहीं होती।
- 10:43गरीब भी बच्चा पैदा करता है और अमीर और बहुत अमीर भी बच्चा पैदा
- 10:53भी बच्चा पैदा करता है। बिल गेट्स भी बच्चा पैदा करता है।
- 11:00बड़े बड़े राजा भी बच्चा पैदा करते है।
- 11:03और उसमें बच्चे की सहमति नहीं होती और गरीब से गरीब भी बच्चा
- 11:08पैदा करता है। कबीर जस उस समय भी बच्चे की सहमति
- 11:14है तो शिष्य और बच्चे का। कोई कसूर नहीं होता।
- 11:28शिष्य गुरु की वोकबुलरी गुरु की बोलचाल की दक्षता, गुरु के बोलने
- 11:40का ढंग। से प्रभावित उसे कतई नहीं पता
- 11:51होता कि जीस समाज को गुरु बोल रहा है अंततः।
- 12:00क्या वह मुझे अमृतकुंड में ले जाए?
- 12:06वह इन बातों से बिल्कुल अनभिज्ञ और अगर कोई तीक्षण बुद्धि का घोर
- 12:19घनी। वकबुलरी से शब्दकोश से युक्त
- 12:26तिक्षण अंदाज में तर्कों के हिसाब से बोलना शुरू कर दे तो आपकी
- 12:32खोपड़ी खोपड़ा जचेगा क्योंकि 99 में 599% वह मैंने कम बता दिया।
- 12:42व्यक्ति बुद्धि में ही विराजमान होते हैं, बुद्धि के नीचे तलपे
- 12:47उतरते हैं और अगर उतरते हैं तो वह निद्रा अवस्था में उतरते हैं सो
- 12:57सो। तो तुम गाड़ी में बैठे हो सो सो
- 13:01कौनसा स्टेशन चला गया तुम्हें कोई पता नहीं ऐसा ही तुम्हारी निद्रा
- 13:08में, यद्यपि निद्रा में तुम उस तल के करीब होते हो।
- 13:16जीस तल पर। तुम ध्यान में जाते हो, समाधि में
- 13:21जाते हो और यहाँ जाकर तुम्हारी सारी समस्या, सारे समाधान, दुख,
- 13:28दर्द, तकलीफ हो जाते हैं, लेकिन सोये सोये अगर तुम गाड़ी में
- 13:36गाड़ी के हलुरे खाते खाते। अपने गंतव्य के स्टेशन तक पहुँच
- 13:42गए तो तुम्हारी हाथ कुछ नहीं लगेंगी।
- 13:50कौन सा स्टेशन गुजरा? वह जंक्शन था, यह आम छोटा स्टेशन
- 13:56था। तुम्हें ज़रा भी नहीं पता चलेगा।
- 14:01ऐसा ही तुम बाहर जाते तो हो लेकिन सो सो तुम्हें पता नहीं तुम
- 14:15बुद्धि के तल पर विराजमान शिष्य का अर्थ है जिसने अभी सीखना है।
- 14:25और शिष्य का एक दूसरा अर्थ भी है जिसमें सीखने की इच्छा भी है।
- 14:35आता भी नहीं। उसे कुछ इच्छा भी है सीखने की।
- 14:44उसे ही शिष्य कहते हैं। सीखने की इच्छा से जो अगर शिष्य
- 14:56सीखने की इच्छा से युक्त ना हो तो उसके पल्ले कुछ नहीं पड़ने वाला।
- 15:06गोरू के पास तभी जाना चाहिए अगर आपके पास सीखने की इच्छा है।
- 15:16पहला पॉइंट दूसरा पॉइंट। गुरु के पास जाना अगर सीखने की
- 15:25इच्छा दूसरा उस गुरु के पास जाना जो आपको सिखाने की क्षमता रहता
- 15:35है। इस श्लोक में।
- 15:44गुर गोर्खनाची हमें दो बातें समझाते हैं।
- 15:51पहले तो यही कि जब तक सीखने की इच्छा ना हो तब तक तुम गुरू के।
- 16:00पास मत जा। दूसरा जब सीखने की इच्छा पैदा हो
- 16:05जाए तो योग्य गुरु को तलाशना ऐसा गुरु मत तलाशना जिसने सदा संसार
- 16:18ही सीखा हो। वह तुम्हें अध्यात्म नहीं सीखा
- 16:23पाएगा और ये दोनों अलग रास्ते नहीं।
- 16:33संसार और अध्यात्म सिर्फ अलग ही नहीं है।
- 16:39बल्कि विपरीत रास्ते उलट संसार को सीखने के लिए हमें बाहर जाना होता
- 16:50है और परमात्मा का रस। हमें अंत में उतरना होता है।
- 17:00बाहर का सब कुछ छोड़ यही मैंने आपसे प्रथम शब्द बोला था कि अगर
- 17:10मैथ को सिखाने वाला व्यक्ति की जगह।
- 17:15आपको हिस्टरी के सिखाने वाला टीचर मिल जाए तो क्या आप मैथ्स में
- 17:21निशाना तो हो पाओगे? नहीं, बस यही है इन आचार्यों की
- 17:29हकीकत कुछ ईमानदार होते हैं, कुछ बेईमान।
- 17:38ईमानदार व्यक्ति जैसे हमारे सर लोग वो कहते भाई देखो हमारे से आई
- 17:49एस का सीखलो यु पीएससी का सीखलो और कॉम्पिटिशन के।
- 17:56जो सारी सूचनाएं हैं, हमारे पास अनुभव नहीं, वो हमसे सीख लो दे
- 18:07अरे वर्क ऑनेस्टीचर्स वो बहुत ईमानदार।
- 18:13अध्यापक एक अध्यापक बेईमान अध्यापक होता है।
- 18:23वो आचार्य प्रशांत जैसा है। देखिये मैं कभी बोलने में अंधकार
- 18:32में नहीं रखा करता। मैं स्पष्ट स्पष्ट बोल दिया करता
- 18:38हूँ अब इनकी जिंदगी में गर झांक जाए तो शुरू से लेके इन्होंने दिन
- 18:50रात पढ़ाई की कठोर परिश्रम। बहुत अच्छा की कठोर प्रश्न करके
- 18:59इन्होंने पूरे श्रद्धा और विश्वास से अपनी।
- 19:10शक्ति की पूर्ण आहुति देकर यूपीएससी क्लियर किया, नौकरी भी
- 19:17लग गई, लेकिन यहाँ आकर कोई भी व्यक्ति यूपीएससी को पास कर के।
- 19:29वोकबुलरी बहुत हो जाती है, सभी दिशाओं में उसे मौखिक ज्ञान हो
- 19:36जाता है। अनुभव विज्ञान में तो बाहर का तो
- 19:42चलेगा, लेकिन गीता में कैसा चलेगा?
- 19:48गीता तो भीतर का अध्यय अष्टावकर गीता में कैसा चलेगा?
- 19:58कैसा चलेगा उपनिषद में? क्योंकि उपनिषद हो की गीता
- 20:06अष्टावकर गीता। दे अरे नॉट दी सब्जेक्ट्स ऑफ आवर
- 20:12मैएंड वो हमारे बुद्धि के विषय बुद्धि के विषय तो आपने सीख लिए
- 20:22यूपीएससी में क्लियर कर लिए आप चुने गए।
- 20:28अब वहाँ लोग जगा। ऐसे लोगों को देख कर जिनको आता
- 20:35जाता तो कुछ नहीं। वो इनसे भी भद्दे है या कुछ जानते
- 20:40तो है। तो वो कहेंगे राम राम, राधे राधे
- 20:48तो इनके मन में आएगा। जब ऐसा व्यक्ति गुरु बन गया,
- 20:53मुझसे ज्यादा कमा रहा है तो भीतर एक कुंठा पकड़ ली।
- 21:02क्योंकि अभी उस स्तर पर उतरे नहीं जहाँ पर पहुंचने के बाद कुंठा का
- 21:11सांप दस्तक कोई शस्त्र काटता नहीं।
- 21:21कोई आग, कोई गरमाइश वो चिंता की हो या आग की गरमाइश तुम्हें जलाते
- 21:28हो, कोई समस्या नहीं। अब इन्हें दुख होता है इस बात को
- 21:42कि जब प्रेमानंद इतने लाखों लाखों लोगों को अपने चरणों में जुगाड़
- 21:50सकते हैं और कबीर जैसे लोग इतने प्रसिद्ध हो गए तो हम क्यों नहीं?
- 21:59हम तो भला सब कुछ जानते हैं, बस ये वैसा है।
- 22:06जैसे इतिहास को पढ़ा हुआ व्यक्ति ये समझे कि हम कैसे नहीं मैच पढ़ा
- 22:12सकते, ज़रा तुम सोचो क्या वह पढ़ा पाएगा?
- 22:25बस ऐसा ही ज्ञान आज गोरख देने चले हैं आपको ये मैंने थोड़ी भूमिका
- 22:33बना दी आपको थानम मानम गुरु ज्ञानम।
- 22:42बेरधाम बौद्ध सिधाम पर ग्राम जो स्थित ठहरा अकंप।
- 23:01वह अटल जो टलतन ये शब्द तीन हैं, लेकिन इनके मतलब थोड़े थोड़े भी
- 23:09हैं। स्थिति होती है अवस्था जैसे हम
- 23:18चौके मार के बैठे। स्थैर्य होती है, भावना अटलता
- 23:31अटलता होती है। समकता स्वभाव जिसे कहते थे।
- 23:41अटल ये तीनों के अगर फूल अर्थ देखे जाएंगे तो यक्ष्रा मिलेंगे
- 23:49आपको स्थित शरीर से सथैर्य। अपनी भावनाओं से और अटलता अपने
- 24:05कल्पनों से अपने संकल्पों से यद्यपि तीन शब्द एक जैसे प्रयोग
- 24:14कर लिए। आपके हिंदी जानने वाले काहे के
- 24:18करीब करीब एक ही अर्थ होता है, लेकिन एक अर्थ होता है स्थान बदल
- 24:25गए एक शरीर का स्थान है, एक मनुष्य का स्थान है, एक चेतना का
- 24:29स्थान स्थिति शरीर की होती है। स्थैर्य मन का होता है और अटलता
- 24:43यह आत्मा की होती है कि तीन स्थितियां आपको उसे समझ गई।
- 24:52स्थिति फिर समझ लीजिए। शरीर की हम चौंकड़ी मार के बैठ के
- 24:58सिद्धासन में बैठ के पद्मासन में बैठ के सिद्ध हो गए।
- 25:05धैर्य यह भावना मन दौड़ता है। हमने उसको सिद्ध कर लिया किसी भी
- 25:12उपाय। तीसरा शब्द है इसका अटलता अटलता
- 25:18स्वभाव हमारा स्वभाव वहाँ पहुँच जाना जहाँ हम मिलजुल सकते ही
- 25:24नहीं, वो है हमारी अस्तित्वगत सिद्धि।
- 25:35से मान प्राप्त करता है जो स्थिति शर्य व अटलता से मान प्राप्त करता
- 25:45है गुरु के ज्ञान को ग्रहण करता है।
- 25:55अब देखिए यह शब्द मेरे समझे गुरु के ज्ञान को ग्रहण करता है अगर
- 26:07आपने हिसाब पढ़ाने वाले। उसने टीचर के ज्ञान को ग्रहण कर
- 26:14लिया। जो वास्तव में है तो हिस्टरी, तो
- 26:21फिर क्या वह ज्ञान सही होगा? गुरु के ज्ञान को ग्रहण करता है
- 26:32ज्ञान तो वो देता। अलाउद्दीन खिलजी गबाये थे।
- 26:39पानीपत का युद्ध कब हुआ था, कौन जीता था, किस किस के बीच हुआ था,
- 26:47सारी कहानी वह जानता है, लेकिन आपको पढ़ा रहा है मैथ।
- 26:54मैथ एक फॉर्मूलेशन है। कैलकुलेशन 2+2 इस इक्वल टु फोर
- 27:04गुरु के ज्ञान को आप ग्रहण करो। लेकिन अब आइए।
- 27:16कहना क्या चाहते है मतलब सही गुरु के ज्ञान को प्रश्न करो, मैथ
- 27:26पढ़ना है तो मैथ के टीचर से सीखो जो मास्टर डिग्री ली है।
- 27:34जो डॉक्टरेट है उससे सीखो। मैं जो इतिहास का विशेषज्ञ है,
- 27:47उससे अगर आप मैथ का फॉर्मूला सीखने चले गए तो सीखा तो देगा।
- 27:57लेकिन सीखने वाला वहाँ भ्रमित हो जाएगा।
- 28:03गुरु से ज्ञान को सीखो, इसके गहरे शब्दों में अगर जाएंगे।
- 28:11तो वो ही अर्थ आएगा जो मैंने आपको समझा दिया औचार्य प्रश्न आज सारी
- 28:18दुनिया को मूर्ख बना नहीं चला है और इसने कभी खाली लम्हों का आनंद
- 28:27नहीं उठाया। एवेरी टाइम ही वास् बीज़ी एंड
- 28:34बीज़ी कभी पढ़ने में बीज़ी है, कभी कॉम्पिटिशन में बीज़ी है, कभी
- 28:45नौकरी लगने में बीज़ी है। कभी इस बात में बीज़ी है कि अरे
- 28:51मूर्ख ज्यादा को मारे हैं। इन्हें ज्यादा श्रेय मिलता है।
- 28:55मैं क्यों नहीं? और आर बीज़ी ने से सभी कामों में
- 29:02तुम व्यस्त हो जाती हो। और यहाँ एक अखबार मिला जो आपको
- 29:09गोरख रहा। देखिए गोरख को मैं आखिर में क्यों
- 29:12लेके आया? इसलिए के गोर्ख जो बोलते हैं उसकी
- 29:17धार बड़ी पेनी गुरु के ज्ञान को ग्रहण करता है।
- 29:27सही गुरु के ज्ञान को ग्रहण करता है सही गुरु को जो उस विषय में
- 29:38दक्ष है वह सही गुरु है। जो उस विषय में दक्षिण ही है,
- 29:47उससे अगर आप ज्ञान लोगे तो उसके ज्ञान देने के निहित स्वार्थ हो
- 29:55सकते हैं। उसने धनी इकट्ठा करना, श्रेय
- 30:01इकट्ठा करना। उसने कुछ इदारें बनाए, संस्थाओं
- 30:12के हाथ मजबूत करो, क्यों मजबूत करो भाई कोई लकवा हुआ अब मैं घर
- 30:18बैठा हूँ, 14 वर्षों से मैं घर। मैं तुम्हारे बीच नहीं आता, मैं
- 30:27तुम्हें नहीं कहता कि चलो चलते हैं वहाँ बताएंगे आपको ठंडे इलाके
- 30:34में ऋषिकेश चलो कहीं भटकाता नहीं। सुबह 5:05 पर मेरी रिकॉर्डेड
- 30:45वीडियो आपके पास आ जाती है, आप सुन लेती हो?
- 30:50मैं आपको इतना भी नहीं भटकाता, यह तो आपकी पैरेड होगी।
- 30:59जैसे आप मिलिट्री में करते हो, दाएं पाएं, आगे जा पीछे जा, मैं
- 31:07कहता हूँ घर आराम से बैठो, सुबह उठो, नृत्य कर्म करो, स्नान करो
- 31:15और वीडियो को जब चाहे। सही गुरु से ज्ञान प्राप्त करो।
- 31:25ये शब्द छोटा मत समझे ना इसके ऊपर आपकी आनंद की रसदार 100% टिक्की
- 31:35हुई। अगर आप यहाँ चूक गए तो फिर आप
- 31:40चुभते ही रहोगे, क्योंकि पहला स्टेप गलत उठना जाना है।
- 31:46पश्चिम पहला स्टेप उठ गया पूर्व की तरफ तो भला के आप।
- 31:54जहाँ जाना है वहाँ पहुंचोगे कैसे जाना है?
- 31:59बॉम्बे पहला कदम उठ गया लाहौर की तरफ़ तो बॉम्बे कैसे पहुंचोगे?
- 32:08बस ये बिलकुल ऐसा ही। आइए हम अगले शब्द को बांटते हैं
- 32:20थानम मानम गुरु ज्ञानं वेधाम बोधाम सिद्धांत परग्रामम चेतन
- 32:29बाला ब्राह्मण बहे? नाथ की कृपा अखंड कर है, गुरु के
- 32:39ज्ञान को ग्रहण करता है और किस गुरु के ज्ञान को ग्रहण करता है
- 32:47एक एक शब्द को। गहरे हृदय में उतर जाने देना, मैं
- 32:52भी थोड़ा धीरे बोल रहा हूँ ऐसे तीक्षण शब्द किसी और गुरु ने
- 33:05बोलेंगे नहीं जो हृदय को वैध जाए। और जिनमें रस कूट कूट के भरा हो
- 33:15और ज्ञान भी कूट कूट के भरा हो। ये कहते जिसकी जिसकी कुंडला नींद
- 33:22जागृत हो गई है, ऐसे करो उसे ज्ञान प्राप्त करो।
- 33:28फिर अगर कोई व्यक्ति ऐसे कहते। की कुंडलनी होती ही नहीं और ध्यान
- 33:37रखना साइंटिफिक मैएंड या मेडिकल पढ़ा हुआ या तार्किक व्यक्ति
- 33:46बुद्धि से जिसने ज्ञान को इकट्ठा किया वह है, तो सूचनाएं।
- 33:53लेकिन वो कहेगा कुंडली वुंडली कुछ नहीं होती है देर इस नो एनलाइटन
- 34:00में अब यहाँ से भेद पढ़ना शुरू हो जाएगा यहाँ से।
- 34:11रेलवे की लाइन्स दूरी पकड़ना शुरू हो जाएंगी।
- 34:16अब तक पैरेलल चल रही थी, अब यहाँ से एक लाइन उतर गई, दूसरी लाइन
- 34:24उतर गई, गाड़ी नहीं चल सकेगी। गुरु के ज्ञान को ग्रहण करना किस
- 34:32गुरु के ज्ञान को ग्रहण करना जो कुंडली वेद किए भूगों से बोध
- 34:39प्राप्त करता है जो एनलाइटन हो चुका है।
- 34:47ज़रा देखिये। आचार्य प्रशांत जैसे लोगों से
- 34:54गीता महा गीता उपनिषद का ज्ञान ग्रहण करना बिल्कुल ऐसा ही है,
- 35:02जैसे मार्क से उपनिषद के वेग वचन सुनना।
- 35:09श्रुतियाँ सुनना, स्मृतियाँ सुनना, गीता ज्ञान तो कृष्ण ही दे
- 35:21सकता है या जो कृष्ण के उस सतर्क पर चलाकर?
- 35:28जहाँ अमृत बरसता है तो ये कहेंगे ना तो अमृत है क्योंकि कुंडलिनी
- 35:37जागरण ही नहीं होता। देर इस नो एनलाइटन तो फिर ये
- 35:44कहेंगे कोई लक्ष्य वक्ष नहीं। सारा माजरा ही खत्म हो गया और जब
- 35:54लक्ष्य विहीन हो जाता है व्यक्ति तभी तो वह आत्महत्या करता है।
- 36:04उसकी जीवन का रस पाने का लक्ष्य हो गया, किसी ने उसके जीवन के रस
- 36:13पाने के लक्ष्य को छीन लिया उगाड़ दिया फेंक दिया जीवन का एक
- 36:21लक्ष्य। ध्यान से समझ लो हृदय में उतर
- 36:25जाने इन मूर्खों की बातों में मकाओ ये पढ़े लिखे मूर्ख हैं पढ़े
- 36:35लिखे अज्ञान निहे तो स्वार्थ है। बहुत से लोग जिसे पानी की
- 36:48युक्तियों में लगे हैं उसको इन्होंने छोड़ दिया है।
- 36:54किसी बड़े प्रयोजन हेतु और ध्यान रखना।
- 37:01बड़े प्रयोजन हेतु तो बुद्ध ने भी कपिल वस्तु का साम्राज्य छोड़ा
- 37:09था। अगर उस कैटेगरी में भी ये आ जाते
- 37:14हैं तो धन्य थे। मैं स्वयं इनके पांव पोजता।
- 37:24लेकिन पता तो बाद में चला कि इन्होंने छोड़ा तो कपिलवस्त लेकिन
- 37:33आगे बड़ा कपिलवस्तु का साम्राज्य दिखाई पड़ा तो छोटा।
- 37:40भूत को आगे कोई बड़ा समरग्य नहीं दिखाई पड़ा।
- 37:45भूत के आगे अंधेरा होता है, भूत को तो इतनी भी चिंता नहीं होती कि
- 37:53सांझ का खाना मिलेगा नहीं मिलेगा। बुध का कोई टाइम टेबल नहीं होता।
- 38:01सुबह उठ के हमने चाय पीना, नाश्ता, फिर लंच करना, फिर चाय
- 38:08पीना, दोपहर की फिर रात्रि का डिन्नर करना और फिर बिछु न कोई
- 38:15परसो जाना। उसका तो कोई टाइमटेबल नहीं।
- 38:21वह कौन सी भीतर की कसक थी जिसने बुद्ध को कपिलवस्तु जैसा सिंहासन
- 38:32छोड़ने पर विवश कर दिया? निश्चित ही ये लोभ था निश्चित ही
- 38:42आचार्य का भी लोभ था, लेकिन एक ने कुछ संसार को छोड़कर संसार का ही
- 38:54पाना चाह। दूसरे ने कुछ संसार को छोड़कर
- 39:02संसार के पार का कुछ होना था। देखिए सब थोड़े गहरे हैं, यह गोरख
- 39:08हैं। गोरख को व्याख्यात करना थोड़ा
- 39:11मुश्किल पड़ता है। एक ने संसार को छोड़कर बड़े संसार
- 39:21को पाने के लिए छोड़ा। एक ने संसार को छोड़ा भरा पूरा
- 39:27था, हीरे थे, मोतीमणियां थी जो हर रात थे, गद्दियाँ थी।
- 39:38बड़े से महल बंगले थे आपके शहर जितना कपल वस्तु था उसका मालिक
- 39:48था। वो अकेला हज़ारों दास दासियां थे।
- 39:56राजा कोई मामूली सो नहीं होता है। मामूली तो तुम्हारे मिनिस्टर भी
- 40:02नहीं होते और राजा तो सर्वा सर्वे होता था।
- 40:07उस काल के राजा आज कल के राजा में जमीन आसमान का।
- 40:15उस वक्त के राजा के विरुद्ध जिंदाबाद मुर्दाबाद नहीं होता था।
- 40:20उस वक्त के राजा बस सब कुछ होते थे।
- 40:26प्रजा आंख मूंदकर उनके सभी फैसलों को सिर पे रख लेती थी।
- 40:33मानते थे। संसार को छोड़ा बड़े संसार को
- 40:39पाने के लिए यह तो आचार्य हो गया संसार को छोड़ा संसार से पार की
- 40:48चीज़ पाने के लिए या बुद्ध हो गया संसार में?
- 40:55सुख बुद्ध निकले हैं सुख के पार, आनंद की तलाश एक लाइन बदल गई,
- 41:11लाइन सीधी नहीं चली। एक व्यक्ति बड़ा संसार पाना चाहता
- 41:18है। एक व्यक्ति संसार को छोड़कर आनंद
- 41:23पाना चाहता है। यहाँ बदल गया सारा चेतन बाला
- 41:31ब्राह्मण बहे। गौरव कहते हैं, जिनकी कुंडलिंग
- 41:38शक्ति वेधित हो गई है, जिनका मूलाधार का वह केंद्र जागृत हो
- 41:47गया। जहाँ से वो शक्ति ग्रहण करते हैं,
- 41:53चेतना ग्रहण करते हैं और जो कभी थकता है उसे लोग कह देते हैं,
- 42:03बाबा कितनी सिंचाई से क्या हो? मैं कह देता हूँ कि इतनी सी चाय
- 42:11तरफ हृदय की धड़कन चली है। फेफड़ा सही से स्वास्थ्य लेता रहे
- 42:21क्योंकि ये दो चीजें जीवन को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक।
- 42:31लेकिन यह जो मैं बोलता हूँ दो 2 घंटे बोलता हूँ और सारा दिन भी
- 42:40बोलता हूँ कभी किसी की समस्या आ गई, कभी किसी की कोई समस्या आ गई।
- 42:47कोई कहता है बाबा मैं इस कष्ट से और खाती हो, तुम इतना हम तो रोटी
- 42:59पूरा पेट भर के खाएं तब कहीं जाकर उठ सकते हैं।
- 43:07अन्यथा हम उठ भी नहीं सकते। हम तो मर जाएंगे।
- 43:11तो यह शक्ति कहाँ से आती? तो यह शक्ति वहाँ से आती जो
- 43:17कुंडालनी जागृत हो गई क्योंकि कुंडालनी शक्ति और चेतना का अथाह।
- 43:27भंडार है समुद्र है वहाँ से आती है शक्ति तो जब मैं बोलता हूँ तो
- 43:37फिर बुद्धि से नहीं बोलता, क्योंकि बुद्धि में वह शक्ति है
- 43:44जो मैंने भोजन किया। भोजन क्या है?
- 43:49वही थोड़ी सी चा है, उससे मेरा हृदय पंप करता है।
- 43:58न्यूरोन्ज़ को फेफड़ों को स्वास्थ लेने के लिए बस यह एक ढांचा चलता
- 44:05है। और बोलने की क्षमता रहती है,
- 44:09लेकिन बोलने की शक्ति और चेतना तो किसी अन्य तल से आती है, ये आज
- 44:18तुम्हें फर्क मैं समझा रहा हूँ क्योंकि आज गौरव का ये शब्द।
- 44:29चेतन बाला ब्राह्मणबः नाथ की कृपा अखंडित रहे।
- 44:39वेधाम बोध सिधाम परक्रम। ज्ञान ग्रहण करो, ऐसे गुरु से करो
- 44:54गौरख को कोई ऐतराज़ गौरख सिर्फ अपना अनुभव बोलते हैं।
- 45:03गौरख तुम्हें मोल्ड करने की इधर उधर करने की कोई इच्छा नहीं रखते,
- 45:13लेकिन वह सिर्फ अपना ज्ञान अनुभव बताते, बिल्कुल आपको फोर्स नहीं
- 45:21करते। कि गोरख की बात अब सुनकर मानो ही
- 45:26मानो किसी की भी बात लेकिन गोरख कहते हैं कि ज्ञान अगर प्राप्त
- 45:33करना है, अंतः का रस का प्याला पीना है तो।
- 45:41जिसकी कुंडली जागृत हो गई उससे ज्ञान लेना है क्योंकि वही
- 45:50तुम्हें पीला। सकेगा वो कुट फुला दे सकिया दो,
- 46:01कुठ पीला दे बाकी बाकी मेरे तेरे और दे।
- 46:23दो कुट फिला दे साकिया बाकी मेरे तेरोड़ दे दो कुट फिला दे।
- 46:40सर की लेकिन जो खुद। कहता है कि शराब पीओ ही मत, वो
- 46:48तुम्हें क्या खाक फैलाएगा? उसने शराब का नशा जाना जैसे राजा
- 47:00सोमी तेरे। या तो कहते शराब मत पी लेना तो
- 47:07अगर शराब पीओगे तो तुम्हें शराब का नशा आएगा और एक आयाम खुल
- 47:15जाएगा। दूसरा आयाम कहीं खुल ना जाए।
- 47:21जैसे राजनीतिक व्यक्ति को दुष्कर्म कर देता, फिर मीडिया
- 47:26रखता, प्रचार के लिए दबाने के लिए दब के टक्कन ला देओ, मुस्के ना
- 47:34निकले बार वो कहानी आती रह गई थी। मेमणा गुम हो गया था।
- 47:43उसके दरबार में पहुँच गया। वो पढ़ रहा था गुरवाणी इधर से वो
- 47:51मेमणा आ गया। अपने साथी से कहा कि तू इसे ब्लड
- 47:55दे। उसने ब्लेट के वो चढ़ा दिया।
- 48:02अब वो बनने लगा मिर्च मसालों की खुशबू आई देखेगी के तो इतने
- 48:09ढूंढ़ती ढूंढ़ती वो रेला की मालकिन आ गए कि चलो गुरूजी से पता
- 48:16करते हैं। उसने देखा खुशबू आ रही थी और उसने
- 48:26ये भी देखा के बाबा जी यहाँ कोई लैला तो नहीं आया।
- 48:31मेरा मेमना गुम हो गया। उसने कहा ये तो काम खराब है, ये
- 48:39तो खुशबू बड़ी आ रही है तो वेद खुल जायेगा।
- 48:46वह उठ के जा नहीं सकता। अखंड पाट के ये सब होता है कि
- 48:52अपना स्थान नहीं छोड़ना होता तो बैठा बैठा वो।
- 48:57टुक पड़ता है? जीदा गुवाचा मेमणा आँखों चा दरबार
- 49:10दब के टकन ला देओ। मुस्क ना निकले बा?
- 49:25वो कहते है मुस्क ना निकले बा, पता लग गया भाई जिसका गुम हुआ था
- 49:32वो हमने चढ़ा दिया है। तो कहीं पता न चल जाए कि गमों को
- 49:45भलाने के लिए कुछ होता है तुम सारी उम्र इन गमों को साथ ले लेते
- 49:53मर जाओ। यह इनकी भीतरी तकनीक है तो उस तरह
- 50:02की सारी चीजों को प्रतिबंध शराब मत पियो।
- 50:16तीन व्यक्ति मेरे सामने बैठे शराब पी रहे थे।
- 50:20मैं अक्सर शराबियों के बीच में ही मेरा जीवन कट रहा है।
- 50:24बहुत ही लोग शराब पीते हैं। उनमें से एक व्यक्ति कहने लगा जब
- 50:32पैग डालने लगा वो कहता है मैंने तो नाम लिया।
- 50:39तो बाकी लोग बोलने लगे कि तुमने तो नाम लिया है तो नहीं पीते ये
- 50:43तेरे सामने बैठा है भईया, इसने तो नाम भी नहीं लिया, ये शराब भी
- 50:50नहीं पीता। एक छोटी सी बात तुमसे कहूं अपने
- 50:57जीवन की। मेरे एक ढक्कन शराब का घर में पी
- 51:02लो, तो तुम एक बोतल पिओगे और तुम्हें जानकर हैरानी होगी एक
- 51:09ढक्कन शराब, यह मुझे इतना बेहोश कर जाता है कि मैं मूर्छित अवस्था
- 51:18में। एक ढक्कन ऊपर का तुम हैरान की मत
- 51:22मानो एक बार ये गलती में कर बैठ ठंडी लगी हुई थी।
- 51:27जुकाम था तो एक यहाँ पर मुझे अशोक भईया कहने लगा आप ऐसा करो, थोड़ा
- 51:34ब्रांडी ले लो एक ढक्कन उसने बुला दी मेरे को।
- 51:38सर जी मैंने वो पी लिया। वो ब्रांडी असली थी, जो फौज में
- 51:47मिलते हैं। उनका एक बड़ा भाई फौजी था।
- 51:51वो ले के आया करता था तो मैं तो। वो बाबलबड़ी वाली बात करता है
- 52:02बोलता भाई तेरे को तो चढ़ गई, चल मैं छोड़ के आता हूँ घर छोड़ नहीं
- 52:07चला गया और घर मेरा फर्स्ट फ्लोर पे सेकंड फ्लोर पे था, तीसरी मंजल
- 52:14पे रहता था। तो कौड़ियों के ऊपर चढ़ने लगा तो
- 52:19मुझे वो कहने लगा शौक था उसका ना भैया चलो पांव रखो ये सीढ़ियाँ
- 52:25हैं। मैंने कहा सीढ़ियाँ तो हैं लेकिन
- 52:29ये सीढ़ियाँ भाई ऊपर क्यों जा रही हैं?
- 52:34कहते रहे भाई। तेरे एक ढक्कन चढ़ गया, इब शराब
- 52:42माफ़ के वो बात अलग है, छूटती नहीं है का फिर मुँह को लगी।
- 52:53यहाँ पीने से एक एक ढक्कन पीने से इतनी चढ़ गई।
- 52:58फिर उसने तगड़ा था वो उसने मेरे को उठाया और उठाकर मेरे कमरे में
- 53:07जाके लेटा दिया। उसने कहा अभी आज भैया को।
- 53:12आज ज्यादा चढ़ गई हमें तो चढ़ते नहीं।
- 53:15हम तो आंधी बोतल पी लेते और इसको एक ढक्कन चढ़ गई।
- 53:26अगर ऐसा हो तो शराब पिए ही गए। आप मनाही करते हो तो आप उसको
- 53:36सुप्रयश करते हो और ध्यान रखना जो चीज़ आप सुप्रयश करते हो, वह भीतर
- 53:44इकट्ठी होती चली जाती है। 1 दिन वह जब हमला करेगी।
- 53:50तो आप चारों खाने चित्त हो जाओगे। इसलिए जब व्यक्ति कई बार इतना
- 54:01जबरदस्त तूफान उठता है कि जीसको रोका गया था।
- 54:08ब्रह्मचर्य के लिए जबरदस्त पालन किया जाता।
- 54:14वह रेप के केस में मर्डर कर बैठता था।
- 54:21यह अति का परिणाम। अति सर्वत्र वर्जेत एक्सेस ऑफ
- 54:32एवरीथिंग इस बेक जब तुम काम को दबक या तो उसको ट्रांसफॉर्म करो
- 54:44तो ठीक करो को दबक। या तो उसको करनामी ट्रांसफॉर्म
- 54:50करो तो ठीक ऐसे ही तुम्हारे मोह के बंधन, इसको ट्रांसफॉर्म करो।
- 55:01आप ऊर्जा है सभी में ऊर्जा रखती है।
- 55:05मुर्दे में ऊर्जा नहीं होती, मर जाता है तो मुर्दे में यह कोई
- 55:10जिसे विकार कह तो नहीं? आता ना काम, ना क्रोध, ना लोभ
- 55:14मोहंकार कुछ नहीं आता मद, ना मच्छर ना भय जीते जी आते हैं सारे
- 55:23विकार। क्योंकि जीते जी ऊर्जा होती है,
- 55:28ऊर्जा के ही सारे प्रतिरूप है। मुर्दे में कुछ भी नहीं होता।
- 55:44अब यहाँ थोड़ा सा पॉइंट आपको समझा।
- 55:49मुर्दे में ऊर्जा ही नहीं होते और अगर जीवित व्यक्ति ऊर्जा से भरा
- 55:59भी पड़ा हो और वासनों से मुर्दा हो जाए चित्त उसका।
- 56:07मुर्दा हो जाए वासनाओं से पर्दा उसका श्राप हो जाए तो फिर वह आपकी
- 56:16ऊर्जा ट्रांसफॉर्म हो जाए ने दो तरीके आपको बताए थोड़े गहरे हैं
- 56:23क्योंकि गौरख ऐसी ही बातें करते हैं।
- 56:27गौरख कहते हैं कि जैसे मुर्दे में और जानी होती और कोई बेकार भी
- 56:33नहीं यहाँ से वो एक सूत्र को पकड़ के तुम्हें देते हैं।
- 56:41सूत्र वो। के जैसे मूर्ता ऊर्जा विहीन होता
- 56:46है, उसमें कोई विकार नहीं होता। इसी तरह अगर तुम एक फॉर्मूलेशन
- 56:53अपना लो जीते जी मूर्ता हो जाओ तो तुम्हें कोई विकार नहीं सिखाएगा।
- 57:00ये अद्भुत चमत्कारी का प्रयोग है जो सिर्फ गोरखी से मरो हेजोगी मरो
- 57:15मरो हेजोगी मरो मरो मरण है मीठा बड़ा प्यारा।
- 57:21निरादा है अद्भुत है शिलाय ऐसी मरो मरने का भी ढंग है मुर्दे की
- 57:33तरह मत मरो ऊर्जा विहीन हो के मत मरो मरो लेकिन ऊर्जा संपन्न हो के
- 57:40मरो। ऐसी मरनी मरो जब तुम बाहर के सारे
- 57:47विचारों से जो शक्ति तुमने इन्वेस्ट कर रखी है सभी चीजों में
- 57:56वहाँ से खेंच लो अपनी शक्ति को। इकट्ठा करो और उस शक्ति को साथ
- 58:02लेके बेहतर यही ब्रह्म मुहूर्त में बताया ब्रह्म मुहूर्त का यही
- 58:11मतलब होता है उस वक्त शक्ति संग्रहित होती है सारी रात की।
- 58:16चेतना भरपूर होती है, वही वेला है जब तुम अंत के भ्रम तक पहुँच सकते
- 58:22हो। बड़ा आसान है सुबह सुबह पहुंचना
- 58:25ये इसको अमृत वेला कहा क्या यह वह वेला है जो तुम्हें अमृत से?
- 58:36हम मृत बना देता है, फिर तुम मरते हो ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मर गोरख
- 58:45ढीठा अभी तो तुम इस ढांचे को ही गोरख समझ रहे हो।
- 58:54गोरख कहते हैं ऐसी मरणी मरो जिसे मरणी मर गोरखत तुम्हें असली गोरख
- 59:04दिख जाए अभी तो ये नकल है इट्स इमिटेशन इट्स इल्लुसिओन ऑफ गोरख।
- 59:15तू बड़ी सुंदर ढंग से खत्म करते हैं, बात समझाते हैं, आपको गौर
- 59:24कहते हैं कि तुम? मुर्दा मत हो तुम शक्ति को पूर्ण
- 59:36रख के मुर्दा हो जाओ और जब तुम्हें मुर्दा होकर कौन मरेगा,
- 59:48तुम्हारा भ्रम मरेगा। तुम्हारा अहंकार मरेगा तुम्हारा
- 59:53ताजात में मरेगा तुम्हारी छिपकहटी मरेगी तुम्हारी क्लीनिंगनेससेस
- 1:00:01मरेगी और तुम वहाँ से मुक्त होके मुक्त होना है फ्रम दी
- 1:00:07क्लीनिंगनेसनेस। और मुक्ति का कोई अर्थ नहीं होता।
- 1:00:14यहाँ कोई नागपुर का संतरा नहीं होता।
- 1:00:21मुक्ति का अर्थ। रिमूवल्स ऑफ ऑल दी क्लीनिंग नेसेस
- 1:00:33सभी चबकहटों से फट जा। निश्चित ही आपने वहाँ शक्ति निहंत
- 1:00:43कर रखी है फिर वो मुक्त हो जाएगी जैसे आपने मुट्ठी बांध रखी है।
- 1:00:49तुम्हें पता है इस मुट्ठी के बंधने में तुम्हारी शक्ति लगी हुई
- 1:00:54है नहीं पता। पता होगा इस मुट्ठी को बांधने में
- 1:01:03तुम्हारी शक्ति लगी हुई है और अगर तुम इस शक्ति को हटा दो, ते खुल
- 1:01:09जाएंगे क्या हुआ शक्ति मुक्त हो गई रिलीज दी पब।
- 1:01:18इसे ही मुक्ति कहते हैं। तुम्हारी वस्तुओं में शक्ति का
- 1:01:25निहेत होना इन व्यस्त होना और तुम्हारा उस शक्ति को वहाँ से हटा
- 1:01:36लेना। यही मुक्ति का सही व्याख्यान है
- 1:01:44मुक्ति कोई ऐसा नहीं है के सत्यखंड पहुँच जाऊं, यह तो
- 1:01:50दुकानदारों के सिर्फ। आपको लूटने के बहाने हैं।
- 1:01:59उन्हें पता नहीं के धन के अलावा एक परम धन भी होता है, इसलिए गलती
- 1:02:11खा जाते हैं। इसलिए छोड़ते हैं आय की कुर्सियां
- 1:02:18कि वहाँ ऑपर्च्युनिटीज़ अरे मोर तो वहाँ चले चल हंसा उस देश।
- 1:02:32समुद्र जहाँ मोती गुर कहते हैं कि जीते जी मुर्दे जैसे हो जाओ
- 1:02:50मुर्दा। काम में ग्रस्त नहीं होता, ना ही
- 1:02:55क्रोध आता है। तुम उसको उठा के आदमी फेंक देता
- 1:03:00हो तुम उसको उठा कर गहरे गड्ढे में दबा देते हो, दफन कर देता हो
- 1:03:08वह बेचारा कुछ होला। उसने कोई रिएक्शन किया कोई उसका,
- 1:03:17वो होता है कि हाय मेरी बिल्डिंग मेरी संस्था कोई उसको अहंकार होता
- 1:03:30है कि अरे तुम मुझे क्यों दुबारा? मुझको लकड़ियों पे क्यों रख रहा
- 1:03:38है? सत्व को समझने की चेष्टा करना मैं
- 1:03:42धीमा बोला, लेकिन बात आपके हृदय के गहरे स्थल में उतर जाए, इस ढंग
- 1:03:50से बोला। मुर्दा हो जाओ, उस तरह मुर्दा हो
- 1:03:58जाओ के आपके भीतर काम, क्रोध, लोह, मोह, अहंकार, मधु, मत्सर, भय
- 1:04:06न रहे, और शक्ति से चेतना से तुम भर।
- 1:04:14यह बड़ी विपरीत स्थिति है। बुद्धि की पकड़ में नहीं आती,
- 1:04:21बुद्धि से समझाई नहीं जाती, लेकिन समझाने वाली चेष्टा अवश्य किया
- 1:04:27करते हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसा अमृत रस कभी पिया नहीं।
- 1:04:34जब पिया तो बांटने की इच्छा बढ़ जाती है और किसी शर्त पर नहीं
- 1:04:42बांधते, वो शर्त पर नहीं बांटते, वो वो बे शर्त लूटा करते हैं।
- 1:04:50वो बेशर्त लुटाया करते हैं तो संत जब पी लेता है तो वह यह भी जानता
- 1:05:01है कि अगर मैं सो हाथों से इकट्ठा करके 1000 हाथों से बाटूंगा।
- 1:05:09तो यह बढ़ेगा जो चाहो धन रहे बढ़ता तो धन वालो वनो दानु कुंए
- 1:05:17से जलना निकलेगा तो सड़ जाएगा सब पानी यह एकपरा नहीं कहावत है
- 1:05:25लोभियों ने इसे दान को। प्रेरित करने हेतु प्रयोग किया।
- 1:05:31लेकिन इसका अर्थ कुछ और चेहरे मत रहो।
- 1:05:36बांटते चले जाओ, प्रेम की गंगा को बहाते चलो।
- 1:05:46प्रेम। की गंगा बहते चलो राह।
- 1:05:56में। आए जो दीन दुखी, राह में।
- 1:06:05आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते
- 1:06:23चलो। ज्योत से ज्योत जलाते चलो ज्योत
- 1:06:34से ज्योत जलाते चलो। प्रेम की गंगा?
- 1:06:43बहते चलो। ज्योत से ज्योत कैसे चलेगी वही जो
- 1:06:51कहा है गोरख ने बेदाबोध सिद्धा पर ग्राउंड।
- 1:07:03जिसकी कुंडलिनी जागृत हो गई। चेतना अथाह समुद्र से जुड़ गई,
- 1:07:09शक्ति अथाह समुद्र से जुड़ गई। ऐसे गुरु से तुम शिक्षा ग्रहण
- 1:07:19करो। तो ज्योत से ज्योत बुझे दिये से
- 1:07:27अगर बुझा दिया लगेगा तो याद रखना रोशन नहीं हो सकेगा, बुझा ही
- 1:07:37रहेगा। कितना ही चेष्टा कर ले।
- 1:07:42नाम दान देने वाले या शब्दों में वोकबुलरी के धनी शब्दों के धनी
- 1:07:53देखिए आईएएस की कोचिंग दें यह उनका फील्ड।
- 1:08:01हमें कोई आपत्ति नहीं होती। सर खान बोलते हैं, विकास दीप भी
- 1:08:09करती बोलते हैं लेकिन एक बार ऊ बोलना शुरू कर दिया था।
- 1:08:19अजामिल की कथा परमात्मा के बारे में बोलते हैं तो मैं एक बात समझा
- 1:08:28दो वह बुद्धि से पराखी चीज़ तो बुद्धि की समझ में आती है।
- 1:08:39ना बुद्धि से व्याख्या होती हो, काहे कष्ट करते हो, इस शक्ति को
- 1:08:49अपनी फील्ड में व्यय करो और ध्यान रखना जो शिष्य तुम्हारे पास आये।
- 1:08:57वह परमात्मा के प्रति कुछ जान ना नहीं।
- 1:09:02उन विचारों ने तो यु पीएससी करियर करना है, उनको कोई मतलब नहीं,
- 1:09:10भगवान है नहीं है। आजा मिल की कथा कह भी दोगे तो उसे
- 1:09:16कोई फर्क नहीं पड़ता। दट।
- 1:09:19इस वेरी इंटरेस्टिंग सब्जेक्ट वो कहानी है प्यारी है लेकिन उन्हें
- 1:09:25ना भी समझाओगे तो कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि ये उनके कोर्स में
- 1:09:30नहीं आता। तो ज्यादा अच्छा है तुम भक्त को
- 1:09:38और शक्ति को ऐसे विषयों में मत खराब किया करो, यही मैं समझता
- 1:09:49हूँ। अब मुश्किल तो ये है कि साँप के
- 1:09:53मुँह में कोण करला छोड़े तो कलंक की खाये तो कोण ही अब आचार्यदशी
- 1:10:06स्थिति में विकास दिव्य कीर्ति तुम मत आना।
- 1:10:10ये तो बेचारे भटक गए गए जनता को ठीक कर लेंगे, पैसा भी इकट्ठा कर
- 1:10:19लेंगे। लकवामारी संस्था का हाथ मजबूत हो
- 1:10:25जाएगा। अच्छे डोले हो जाएंगे, शक्ति बल
- 1:10:30संपन्न हो जाएगा, लेकिन ध्यान रखना यह तुम्हारी बुद्धि की शक्ति
- 1:10:40बड़ी छोटी है। वह भीतर का चेतन योग शक्ति, जिसे।
- 1:10:50गोरखनाथ का कुंडलनी शक्ति जिसकी जागृत हो गई उससे ध्यान लेना
- 1:11:02बाकियों के वास्तु ज्ञान के नाम पर।
- 1:11:06झूठ हुआ करता है ऊपर से तुम कुनिन के सुगरकोट कर देते हो पहले पहले
- 1:11:15मीठा लगता है, लेकिन याद रखो जब सुगरकोट खत्म होगा तो भीतर से
- 1:11:23कड़वी कुनिन आएगा। और सादक चलता है उस रस के लिए जो
- 1:11:32अंत में बड़ा प्यारा फल देता है। मीठा फल मरो मरण है मीठा।
- 1:11:45लेकिन फल तो कड़वा मिलता है, ऊपर की परत नकाब उतर जाता है, भीतर का
- 1:11:52फल मिलता है। कड़वा कुणी थू कर देते हो, यह कोई
- 1:11:57ज्ञान भी नहीं था। इसीलिए हमें आगाह करते हैं गौरख।
- 1:12:05जिसका चेतन और शक्ति का वह कुण्डलनी शक्ति जाकर तो हो गया
- 1:12:18सिर्फ उससे ही। दीक्षा शिक्षा लेना दूसरे किसी से
- 1:12:27नहीं लेना, ये तुम्हें तुम्हारे हित की बात बताती हूँ, फिर भी तुम
- 1:12:35अगर गौरख को ना पढ़ो तो गौरख तुम्हें नहीं।
- 1:12:42गोरख को सुनकर भी गोरख को न मानो तो गोरख तुम्हें नहीं कहेंगे मुझे
- 1:12:48मानो गोरख अपना अनुभव बताने का अपना फर्ज समझते हैं।
- 1:12:56अदा करके चले जाने। तो मैं नहीं कहेंगे दे आर नॉट
- 1:13:02डिक्टेटर्स वो कोई तानाशाह प्रवृत्ति के नहीं है, बड़े
- 1:13:09अहिंसक है। बुद्ध की तरह महावीर की तरह चेतन
- 1:13:19बाला ब्राह्मण बहे। जो चेतन हो गया।
- 1:13:25गुरु के दीपक से अपनी दीपक की लौह जलाकर उसे कोई भ्रम नहीं होता।
- 1:13:33उसका इल्ल्यूज़न समाप्त हो गया। इल्ल्यूज़न क्या था इल्ल्यूज़न था
- 1:13:39कि यह? गोरख है यह गोरख नहीं है यह तो एक
- 1:13:49पंचभोतक तत्व का पुतला एक ढांचा घर है मेरा।
- 1:13:58मैं इसके भीतर बैठा हुआ। तुम्हारा भ्रम क्या था?
- 1:14:05यह घर में हूँ और उस घर में सारे और जे भावनाय विचार यह मैं हूँ।
- 1:14:19यही भ्रम था। मात्र यही भ्रम था तो गोरख
- 1:14:26तुम्हें बड़ा प्यारा फर्मरेशन देते हैं, मुर्दे की तरह हो जाओ
- 1:14:36उल्टा काम है। लेकिन मुर्दे की तरह शक्ति और
- 1:14:40चेतन विहीन मत हो जाओ, हो जाओ, मुर्दे की तरह चेतना और शक्ति से
- 1:14:51शून्य मत हो जाओ। अब बड़ी दुविधा खड़ी हो।
- 1:14:56तो कहते हैं कि रिएक्शनेरी रूप से ये सब रिएक्शन हैं, काम हो, क्रोध
- 1:15:03हो, लो हो मोह अंकार मधु मकसद है व्हेर ऑल दीज़ अरे रिएक्शन्स,
- 1:15:14ऊर्जा के रिएक्शन हैं। कभी आपको आपने दबाए थे?
- 1:15:22आज ये उखड़ रहे हैं। जो चीज़ दबाई जाती है वह लुप्त
- 1:15:27नहीं होती, ध्यान रखना, वो उखड़ती है वक्त पा करमो का वक्त और जो।
- 1:15:35कुंडलिनी जागरण होने वाले गुरु से अपने दीपक की भाँति जला लेता है।
- 1:15:45वह नाथ की कृपा अखंड तरह है। उसकी कृपा क्या हुई?
- 1:15:53उसमें एक ज्योति थी। बुजे दिए तो तुम भी हो गुरु में
- 1:16:00और तुम में कोई बहुत फर्क नहीं। फर्क है सिर्फ ज्योति का, बाकी
- 1:16:08दिया भी वही, ईंधन भी वही भाति भी वही।
- 1:16:14तो एक चीज़ का अभाव है तो शिष्य और गुरु में बस इतना ही फर्क होता
- 1:16:20है। दिया तो शिष्य भी होता है, सब
- 1:16:27वैसा ही होता है। एक चीज़ की कमी है ज्ञान रूपी।
- 1:16:38लो नहीं होती, ज्ञान रूपी लो गुरु के भीतर होती है और आती है
- 1:16:47कुंडलिनी जागरण के बाद यह कैसे आए?
- 1:16:55यह आईबी दवा के क्रिया योग यह बाबा का फार्म बोला है।
- 1:17:021976 में मुझे जब मैं शिव मंदिर में बैठा हुआ था तब मुझे बाबा ने
- 1:17:11ये बताये। कि अब तुम्हारा साधना काल शुरू,
- 1:17:18अब तुम यह दबा के किया करो और मैं 2000 क्रियाएं करता था सुबह कभी
- 1:17:26शाम को भी, लेकिन सुबह जब करता था ठंडी हवा में।
- 1:17:321:02 बजे तक मैं गौशाला मंदिर के इर्द गिर्द पानी के किनारे नहर के
- 1:17:38किनारे भरी हरियाली में वहीं घूमता रहता हूँ।
- 1:17:44कैसे जगेगी लो वह लो तो भीतर है। बाहर के गुरु की कोई आवश्यकता
- 1:17:52नहीं बाहर के गुरु को सिर्फ आवश्यकता इन चार अक्षरों के लिए
- 1:17:58है कि वह मिलेगा काहे? रे बनु।
- 1:18:09खोजने जा रहे काहे सर्बव्यापी सदा अले प ह सर्ब।
- 1:18:30व्यापी सदा हलवा तोह संघ समाज काहेरे।
- 1:18:48बन खो जनजा गुरु। का इत्ता सा काम है तुम्हें बता
- 1:18:56देना कि बन में भी जाओगे तो वो ज्योति तुम्हारे साथ जाएगा।
- 1:19:08तो फिर तुम यहीं बैठकर उस ज्योति को देख लो अपनी बुझी ज्योति भीतर
- 1:19:16की उस ज्योति से प्रज्वलित कर लो, तुम भी।
- 1:19:27ज्योति स्वरुपा हो जाओगे और तुम्हारी भी भ्रम अभी तुम्हें
- 1:19:38भ्रम है, जब तक ज्योति जली नहीं। जब तक दिया तो है, ईंधन भी है,
- 1:19:46बाती भी है लेकिन ज्वाला नहीं हूँ, ज्योति नहीं हूँ तुम ज्वाला
- 1:19:53जी, देवियों के टक्कर मत मारना जाके वह कुछ नहीं है।
- 1:19:57पातर हैं, मूर्तियां हैं। और कुछ नहीं मूर्खों ने तुम्हें
- 1:20:06भटकाने के लूटने के ढंग बना लिया मिलता उन्हें भी कुछ नहीं क्योंकि
- 1:20:18अगर। रस न मिला तो फिर क्या खाक मिला?
- 1:20:30आनंद का रस न मिला तो फिर कुछ भी न मिला।
- 1:20:38रस को चूक गए। इस सामान के जामे में आके तो समझो
- 1:20:46कुछ कमा के नहीं चले। जैसे आए थे वैसे ही चले कबीर।
- 1:20:57रस को पाकर जाते हैं, आए हैं सो जाएंगे राजा रंग का फकीर एक सिंघा
- 1:21:08से चढ़ चढ़े कबीर सिंघा से चढ़ के चलते एक बंधे जात ज़ंजीर तुम जैसे
- 1:21:15आए थे वैसे ही। लिप्तताओं में क्लिंगिंग मैसेज
- 1:21:20में जंजीरें हैं जे उनमें बंधे बंधे चले जाओगे, तुम फिर फिर से
- 1:21:27आओगे, लौटकर आना ही पड़ेगा आनंद का भरस न पाया।
- 1:21:36तू चाहे सब पार्टी फिर भी तुम सोने सोने रेक उदास लपते चेहरे
- 1:21:49बुझे हुए दीपक की तरह जालो जाओगे क्योंकि वो दिये कि लोग।
- 1:21:56जगी नहीं होगी। एक तू ना मिला एक तू ना मिला।
- 1:22:22सारी दुनिया मिले भी तो क्या है? मेरा दिल ना खिला मेरा दिल ना
- 1:22:40खिला। सारी बगिया खिले भी तो क्या है?
- 1:22:52एक तू न मिला रस्न? मिला।
- 1:23:01तो सुख के साधन, सारे पदार्थ और सुविधाओं के साधन सब तुमने इकट्ठे
- 1:23:08कर लिए बेकार हैं व्यर्थ हैं निरर्थक हैं।
- 1:23:27तू से लिपट के जो रो लेते हम तू से लिपट के जो रो लेते हम।
- 1:23:48आंसू नहीं थे यह मोती से कम तुझसे लिपटके जो रो लेते हम।
- 1:24:07आंसू नहीं थे। ये मोती से कम तेरा दामन नहीं।
- 1:24:24तेरा दामन में फिर ये आंसू ढले भी तो क्या है?
- 1:24:37एक तू ना मिला? सारी दुनिया मिले भी तो क्या है?
- 1:24:50एक तू ना मिला धरती हूँ मैं और। तू है गगन धरती हूँ मैं और तू है
- 1:25:11गगन होगा कहाँ तेरा मेरा? मिलन धरती हूँ मैं और तू है गगन
- 1:25:31होगा कहाँ तेरा मेरा मिलन? लाख बहरे यहाँ लाख बहरे यहाँ
- 1:25:51प्यार दिल में पले भी तो क्या? है एक तू ना मिला तकदीर कि मैं
- 1:26:11कोई भूल हूँ। डाली से बिछुड़ा हुआ फूल तकदीर कि
- 1:26:27मैं कोई बोलूं? डाली से बिछुड़ा हुआ फूल हूँ 713
- 1:26:44नहीं, 713 नहीं। संग दुनिया चले भी तो क्या है?
- 1:27:02एक तू ना मिला तू ना मिला सारी दुनिया।
- 1:27:13मिले भी तो क्या है? एक तू ना मिला तू ना मिला।
- 1:27:34धन्यवाद।