Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 May 25 - ॐ शांति का जाप क्यों नहीं? प्रकृति के पास जाकर शांति क्यों मिलती है?तुम कब से भटक रहे हो?
Transcript
- 0:03असली फकीरी का मजा! जिसको कोई किसी से गर्जना हो।
- 0:49गए! शांत भी हूं लेकिन वह शांति नीरस
- 1:29है। बताइए!
- 2:37लेकिन उन्हें पता नहीं कि तुम भी भीतर से कहीं ना कहीं कोई को ना?
- 2:46तुम्हारे पास भी एक दुख तेरा है। कहां चूक हो गई बाबा?
- 2:59बुद्धि वर्ली तुमने हृदय तुम्हारा प्रेम से भर गया।
- 3:03हमारे शब्द बताते हैं। और तुम्हारी वाणी बताती हैं।
- 3:11शब्दों के भीतर! सुनाई नहीं देते।
- 3:22लगता नहीं उसे वीणा के तार सगे हैं।
- 3:48नीचे उतर जाओ। रहस्यों में चले जाओ।
- 4:12वह! कब्रिस्तान की।
- 4:20कब्रिस्तान में ऐसा। कोई?
- 5:02अगर तुम यह उपाय नवी करोगे तो मृत्यु तुम्हें यह उपाय कर देगी।
- 5:08एक दिन तुम का परेशान में चले जाओगे और तुम वहां सो जाओगे।
- 5:13क्या निद्रा में मगन हो जाओगे? फिर तुम्हें कोई जगाएगा नहीं।
- 5:21सोए हुए थे चैन से ओढ़े हुए कफन। यहां भी शैतानी आ गए किसने पता
- 5:29बता दिया? होना चाहते हो?
- 5:49कोई कर्ज न हो, कोई फर्क ना हो, कोई मर्द ना हो, कोई गर्जना हो।
- 6:00गया। तुम फकीर का मजा नहीं उठा रहे
- 6:15क्यों? क्योंकि?
- 6:19तुम उसे तल पर नहीं पहुंचे जहां फकीर पहुंचता है।
- 6:26तो यहां कैसे पहुंच जाए? तुम निर्बोध होकर?
- 6:36निर्वसना भी हो जाओ। और लोग तुम्हारे पांव पूछते हैं,
- 7:04छूते हैं और हम बड़े मगन होते हैं, तुम रहते हो, वह मजा आ गया।
- 7:27खुशी कभी आती है, कभी नहीं आती, ताकती है, कभी नहीं टिकती लेकिन
- 7:31खुशहाली सदा टिकते रहे। तुम फकीर हो गए लेकिन कबीर ना हो।
- 7:46कबीर कहते हैं। कभी राम!
- 8:26कभी? राम!
- 8:36कभी कभी मोहब्बत? होता है।
- 9:51कैसे रहूं चुपके मैंने पी ही क्या है?
- 9:58हो सभी तक है बाकी। और जरा सी दे दे सके और जरा सी।
- 10:12मेरो है जोगी मरो! मारो!
- 11:03होता है तुमको राज क्या है मेरे सुरूर का?
- 11:12पता है तुमको राज क्या है मेरे सरूर का के सुरूर में छुपा रंग है
- 11:24गुरूर का। पता है तुमको क्या है राज मेरे
- 11:32सरूर का के सुरूर में जरा सा रंग है गुरूर का जो मैंने पी तो क्यों
- 11:44नशा? उतर गया हजूर का।
- 11:50जो मैंने पी तो क्यों नहीं? मुझे पूछते हैं कि कृष्ण भगवान की
- 12:25बातों में गुरु। कि वह आती हैं।
- 12:33कृष्ण भगवान के शब्दों में गुरुर की वो आती है।
- 13:39पता है तुमको राज क्या है मेरे इस गुरूर का?
- 13:48इस गुरुर में जरा सा रंग है। कि इस सुरूर में जरा सा रंग है
- 13:57गुरूर का। जो मैंने तो क्यों नशा उतर गया
- 14:03हुजूर का? जैसे तुम्हें तुम्हारे अहंकार में
- 14:14कितना मजा आता है? गुरूर है गुरूर है गुरूर है कबीर
- 14:58में। लेकिन वह गुरूर का ही का है।
- 15:01वह कभी भी कहा है। गोरख का है गुरु।
- 15:12और गोरख बताते हैं उसे गोरी तक पहुंचाने का रस।
- 15:19मेरो है जोगी मरो! मारो!
- 15:57मुद्दतों की प्यास आज एक जाम बन गई।
- 16:05ये खुशी की शाम शाम ईट काम बन गए। वो बात आम हो गई।
- 16:26जो बात हमने तुमसे वो बात आम हो गई।
- 16:46मुझ में और उसमें था। क्या?
- 17:12तत्वा मसीह श्वेत करता हूं। जो बात तुमने हमें थी, वह बात कम
- 17:21हो गई। कैसे रह?
- 17:28सकते और जरा सी और। पीने का बड़ा मन करता है।
- 17:54आज तो बस! मुझे दो घूट पिला दे साथिया।
- 18:30निरमोश तो हो जाओ। बिल्कुल जरूरी भी है।
- 18:37पर सुंदर! किसी पेड़ पौधे प्रपोज है, कोई
- 18:46टेंशन है। कल क्या होगा, कोई आकर कट के ले
- 18:49जाएगा। तुम आज में अभी मैं यहीं पर ठहर
- 19:43जाओ और देखो भोज है। सारी प्रकृति आज में चिंता है
- 19:47इसलिए नाराज है और शांत है और सुरीली है और मीठी है।
- 19:59बोले कोई? तुम तो सुबह उठकर गलियों के बौछार
- 20:13शुरू कर देते हैं। बस यही आनंद है जो भीतर से उद्गार
- 20:28फूटा झरना आनंद का इन्हीं शब्दों से व्याख्या।
- 20:36हो गई। दुनिया!
- 20:51मैं तन्हा! हो गए।
- 21:00तुम न जाने। किस जहां में?
- 21:16जाकर उसके आंचल में बैठ कर देखो। तो तुम्हें मिठी-मीठी लोरी सुनाई
- 21:28गई। समय पर होता है समय पर छुप जाता
- 21:56है। तुम्हारे ऊपर है!
- 22:19तुम अतीत में खुश रहते हो? बस एक है जिसमें होते नहीं, वह एक
- 22:29है आज अब अभी। अगर तुम भी ऐसा कर लो प्रकृति
- 22:34सारी ऐसे हैं तो मैं प्रकृति का मूल मंत्र बताता हूं आज मैं।
- 22:41प्रकृति का मंत्र। इन झीलों में नेहरू में समुद्री
- 23:19में। कोई कल की यादगिरी है।
- 23:26कोई बीते हुए कल के समझती हैं। उन्हें कोई आने वाले कल का फिक्र
- 23:30है हमने। फिर तुम रहते हो, हम दुखी क्यों
- 23:34हैं? सारी प्रकृति सुखी क्यों है,
- 23:38प्रकृतिहार गई, आज मैं ठहर गई। ना बीते कल ना आने वाले कल दोनों
- 23:48की कोई। खबर!
- 24:04देते हो या तो अतीत की स्मृतियों के काल में।
- 24:10आने वाले भविष्य की कल्पनाओं के काल में।
- 24:14और बस यह तुम्हारे हाथ में भी नहीं।
- 24:18तुम आज का धन्यवाद रुक जाते हो? जी कल दो कल तुम्हें कल की घर
- 24:30तुम्हें समझ जाते हैं। तुम आज के आज में तैर नहीं सकते।
- 24:35आज के अब मैं नहीं सकते। यही कमी है।
- 24:39यह तुम्हें मूल मंत्र बता देता हूं।
- 24:49प्रकृति से यही सीख लो सारी प्रकृति एक ही संदेश दे रही है।
- 24:53तुम्हें कभी इस प्रकृति के गोद में बैठा हूं।
- 25:00कभी इन झुमकी लहराती नदियों में। अपने पांव पसार लेना उनके किनारे
- 25:08बैठ जाना। कभी इन झड़ने झरनों के करीब पहचान
- 25:13तुम कल कल की आवाज तो पाओगे तुम जर-जर का संगीतमय!
- 25:40कभी बैठकर देखना प्रकृति की गोद में इसलिए तुम जाते हो, शांत हो
- 25:45जाते हो? प्रकृति तुम्हें हर पल एक मुख
- 25:50संदेश देती है। भूल जा!
- 26:01भूल जा! भूल जा भूल जा!
- 26:14जो चला गया उसे भूल जा। जो चला गया।
- 26:59कोई इंतजार कोई बंदगी। नकारा से हाथ उदास की आदमी ने
- 27:17बड़े जतन मगर उसके काम आशिकी। लूट नगर मेरे प्यार का हुआ दर बदर
- 28:23मैं तो इश्क़ कदर नखरा कहां बाहर का मुझे देख ले मुझे क्या मिला?
- 28:42जो चला गया। के आदमी ने बड़े जतन मगर उसके काम
- 29:35ना आ सके जतन बड़े। और शांति चाहिए।
- 30:56ओम शांति से नहीं चलेगा। पत्थर की छाया होती है, तुम्हारी
- 31:21छाया होती है। बस तुम वही शांति की तलाश में जो
- 31:34है नहीं। और आखिर तुम शांत हो जाते हो तो
- 31:39मरघट में चले जाते हो और तुमने जिंदगी में ओम शांति में गुजार
- 31:46दिया। मेरे पास बहुत लोग आते हैं।
- 32:15ऐसे ऐसे लोग भी ब्रह्मपाल लेते हैं।
- 32:17बाबा मुझे नजर लग गई। मैंने कहा।
- 32:28सब तृप्त हो जाता है, सब शांत हो जाता है।
- 33:09यहां भिखारी भी आते हैं। यहां स्वस्थ भी आते हैं।
- 33:23जिसको गुरूर है वह भी आते हैं। जिसका गुरु टूट गया।
- 33:52जाता है। और जब वह बिल्कुल बेचारे एक रस भी
- 34:05नहीं थे। तुम दुनिया के लिए जितना उसे
- 34:23इस्तेमाल किया जा सकते थे, उतना कर लिया।
- 34:27अब तुम जाओ! तुम ढूंढते हो शांति?
- 34:42लेकिन शांति जो तुम ढूंढते हो, तुम छुप गए मैं तुम्हें बताऊं तुम
- 34:53तलाश करो आनंद के। जो शांति तुम चाहते हो वह असली
- 34:59असली शांति आएगी। वह शांति आएगी जो किसी ठोस की
- 35:04प्रतिक्षाएं के रूप में आएगी। और हमेशा ही छाया किसी ठोस चीज की
- 35:11होती है यह तुम्हारी या किसी ईंट पत्थर की या किसी?
- 35:17इमारत की। उसके बिना शांति होती है।
- 35:24ऐसे ही तुम्हारी शांति ओम शांति ओम!
- 35:35शांति शांति करते कुछ ना मिलेगा। तुम रात हो जाओगे, तुम खाक हो
- 35:49जाओगे। यही कहता है कि व्यक्ति मुझे देख
- 35:53ले मुझे क्या मिला? जीवन बीत गया।
- 35:59रोता है तो उसे ऋषि कहते हैं कि जो चला गया उसे भूल जाओ जो वक्त
- 36:04गुजार दिया। उन शांति खाने में उसे भूल जाओ,
- 36:07वरना सुन सकेगा। तेरी सदा वह व्यक्ति तो गया।
- 36:14ये गुरु गलत ये मार्गदर्शन गलत इन्हें खुद ही शांति नहीं मिली।
- 36:18ये खुद ही तलाक लिए करते हैं। बाहर का मुझे देख ले मुझे क्या
- 36:49मिला तुम देख लेना सब धर्म के। आंगनों में बैठने वाले लोगों को।
- 36:57उन्हें क्या मिला पूछ लेना? मेरे पास यहां कुछ दिन पहले 85
- 37:03साल का बुद्ध। और तुम बेचैन न रहो।
- 39:32देखने वालों ने देखा है दुआ। किसने देखा दिल मेरा जलता हुआ?
- 39:53किसने देखा दिल मेरा जलता? देखते ही देखते यह क्या हुआ?
- 40:43मैंने पूछा कि फिर कब्रिस्तान का रास्ता बता दो किसी ने आपके घर का
- 40:49रास्ता बता दिया। मैंने कहा ठीक किया यह
- 40:52कब्रिस्तान! जहां तुम्हारी दुख दफन कर दूंगा,
- 40:55मैं तुम फिकर मत करो। और सच में मैं तुम्हारे दुख दफन
- 41:03करता हूं। दुखों को जला देता हूं।
- 41:09और दुखों को दफन करता हूं। मैं?
- 41:15समझा। तुम जरा गौर से लखनऊ।
- 41:53जितनी साथ ले जा सकते हैं उतनी बना ले।
- 41:57तो फिर बनाते क्यों? आपकी रस की बात को सुनकर मेरे काम
- 42:29खड़े हो गए। रहस्य के बारे में बोलना शुरू
- 42:37किया मेरे कान खड़े हो गए। चानक तोरे बाजे पायलिया।
- 43:12भीख के गीत सुनाए पायलिया। बजती है।
- 43:56वह भी योग्य है। वह योग्य नहीं रहता।
- 44:17कुछ लोग ऐसे ही होते हैं। जो कहते हैं उसके लिए अहंकार बन
- 44:25जाता हूं। चाहे धक करने का हो है तो कांटा?
- 44:37कांटा तो कांटा होता है, दर्द करता है।
- 44:44मैं तुम्हें बेदर्द करना चाहता हूं।
- 44:49मैं तुम्हें उसे पायलिया का भी जानना चाहता हूं।
- 44:53जो निधिवन में गूंजता है। तुमने कहा पुत्र सब है?
- 45:11शांति है मेरा! शांति के लिए उसे शांति के पास
- 45:22जाना होगा जो रस से भरी हुई है। मैं खाने योग्य नहीं होता।
- 45:37कस नहीं हो कि नहीं होता? रस के बिना से बेकार नहीं रस।
- 45:46और धर्म तुम्हें? शांति के लिए उसे रस में उतरना
- 46:00होगा जो तुम्हारे ही अंत में है। छोड़ना होगा तुम्हें बाहर का?
- 46:16जहां कोई शोर नहीं। वह आ रहे हैं।
- 46:46तू शोर मत कर। तेरे धड़कने की खटकहत भी शोर
- 46:57मचाते हैं। वह आ रहे हैं तो ठहर जाओ तो
- 47:01धड़कना बंद करते हैं। और तुम्हें जो बड़ा प्यारा लगता
- 47:08है। ओम शांति का अधिकार तुम्हें अपना
- 47:12प्यारा लगता है। बहुत शोर है।
- 47:21मिठास! टी नहीं तुम्हारी चेतन कभी ओम
- 47:35शांति का नाम। राधिका!
- 47:58राधिका नाचे रे गिरधर की मुरलिया बाजे गिरधर की मुरलिया बाजे।
- 48:17मधुबन में राधिका नाचे रे। उसे वन में जाना जहां मधु।
- 48:38टपकता है। जहां कान्हा?
- 49:08तुम पागल हो गए हो? क्या हो गया है तुम्हें इन लोगों
- 49:14को पागल खाना में बंद कर देना चाहिए?
- 49:18मुरली सुनते हैं। गिरधर की मुरलिया बाजे।
- 49:31मधुबन में राधे का नाच रे जब मुरलिया सुनते हो और तुम्हारे
- 49:41पांव रखते हैं राधा की तरह। बस ऐसे ही लोग हो तुम।
- 50:29किन्ही वालो के पीछे तुम दौड़ गए हो और उन वचनों ने महाते जग फैला
- 50:35लिया है। तुम रहते हो अलवर टू वर्ल्ड वह तो
- 50:39ब्रांच बिल्कुल ब्रांचेस हैं। तुम्हारी लेकिन झूठ की ब्रांचेस
- 50:43तो बहुत हो सकती हैं। बड़ी मां मस्कर ऐसा व्यक्ति आया।
- 51:04दिल की बेकरारी को करार आया। कि जिस जालिम ने तड़पाया।
- 51:17इस पर हमको प्यार आया। और उसी से हमें प्यार हो जाता है।
- 51:37क्यों क्योंकि तुम भटक रहे थे संसार में?
- 51:45हो गई तुम्हें जनों जनों हो गए तुम्हें भटकते हुए।
- 51:52बड़ी मुद्दत से दिल की बेकरारी को करार आया।
- 52:14ना तुम्हारे पांव में धड़कन होती है।
- 53:01जो बिल्कुल जो कौन रोकता है तुम्हारी स्वतंत्रता का प्रहार तो
- 53:05परमात्मा तक भी नहीं करता। और कौन कर सकता है?
- 53:13दो शब्द होते हैं, एक आता है अनंत की छह की तरह शांति और एक आता है।
- 53:25आनंद से विहीन शांति रस से विहीन शांति तुम्हारे धर्म तुम्हें यही
- 53:30ओम शांति का प्रचार देते हैं। यह प्रचार है अनुभव नहीं।
- 53:37और याद रखो जिसे अनुभव हो गया, वह शांत का वह कभी हो जाएगा।
- 53:46जिसने देखा वह चुप हो गया। संतों की वाणी में लिखा।
- 54:02जिसने उसे शांति को छुआ उसे टाल को एक थोड़ा सा नजर भर के देख
- 54:07लिया। प्यार की नजर से देख लिया।
- 54:10मुरलिया की तरह ना सुनो। उसे प्यार के संगीत की तरह सुना
- 54:15तो वह ठहर गया। वह मौन हो गया।
- 54:18वह व्याख्या में आ नहीं सकता। इसलिए वह हो जाता है।
- 54:22वह इतना विराट इसका इतना विस्तृत संत होना ही पड़ेगा।
- 54:28भाई तुम्हें तुम गणना भी तो नहीं कर सकते।
- 54:31तुम यह भी तो नहीं बता सकते, इतनी है आकाशगंगाहें कितने हैं
- 54:36ब्रह्मांड और कितने आकाश गंगा में कितने तारे हैं?
- 54:48इसको तो मुरलिया कहते हैं ओम शांति का जब करते-करते तुम अपने
- 55:00शांति को कम कर लेते हो। हम तो डूबे हैं सनम!
- 55:26भीतर चलें। तुमने प्रथम योग्यता पूरी कर ली।
- 55:31बेकार जब वे फर्ज में मर जा यह तुम हो गए हो।
- 55:36अब चलो अपने भीतर जहां शांति का ठिकाना है, वही तो मिलेगी जहां
- 55:43छैया है, वही तो आराम होगा। वही तो तीव्र धूप से तुम्हें राहत
- 55:49मिलेगी। वहीं पसीना नहीं आएगा।
- 55:51वही ठंडी हवाएं तुम्हें पुलकित कर देंगे और लोरी तुम्हें सुला
- 55:56दूंगी। दो घड़ी चैन की आनंद की नींद तुम
- 56:00सो जाओगे। गम भूल जाओगे।
- 56:32यह लिखते हैं। सुना होता है उसके प्रेम के रस के
- 56:54संग संग चलना होता। संग संग चलोगे।
- 56:57भीतर उतरोगे। वहां उद्गम स्थल में पहुंचाओगे
- 56:59जहां से ये मुरझा के उद्गम स्थल का आगाज होता है।
- 57:08और वहां पहुंच जाओगे। बड़े भटक लिए।
- 57:21दुख की आंख में बहुत जली बहुत भटका दिया।
- 57:26इन दुष्ट पंथ्यों ने चलो मेरे संग।
- 57:46तेरे पास गुजर जाता है। तेरे पास मेरा जाता हूं।
- 58:07दो घड़ी के लिए गम जाने किधर जाता है दो घड़ी।
- 58:21के लिए गम जाने किधर जाता है। नाथ शुरू हो गया तो परमात्मा की
- 59:06कृपा हो गई। बस इसमें हो जाओ, बिलियन हो जाओ।
- 59:12तुम पाओगे तुम अपने मित्र ही खिसकने लगे।
- 59:15सहज सहज गति से धीरे-धीरे खिसकते खिसकते आनंद भी बढ़ता जाएगा और
- 59:21तुम भी बढ़ाते जाओगे और गहरी और गहरी और एकदम उसे उद्गम स्रोत पे
- 59:27चले जाओगे, जहां से ये मुरलिया के धन उठाते हैं।
- 59:35तुम्हारी हिम्मत घाट में भी बड़ी शांति है, लेकिन यह जीवन है भाई
- 59:40वह मुर्दा है भाई! बस यही फर्क है, देख लो जो फर्क
- 59:47कितना होता है? यहां तुम जाते नहीं।
- 59:59तुम मर्दा हो जाते हो? शांति चाहिए।
- 1:00:14कोई फर्ज ना होगा, मरे हुए व्यक्ति का कोई फर्ज रह जाता है।
- 1:00:19फिर तो तुम्हारा फर्ज रह जाती है। उसे दफन कर दो से जला दो।
- 1:00:26कोई गरज होती है? हुजूर तुमको।
- 1:01:34सितारों ले चलूं। जाए ऐसी।
- 1:01:56बहारों में। ले चल!
- 1:02:11उन! बहारों में ले चलो।
- 1:02:41राधे राधे! श्याम मिला दे।
- 1:02:51गोविंद गोपाल हरे! राधे राधे श्याम मिला दे।
- 1:03:03गोविंद गोपाल हरे गोविंद गोपाल हरे राधे श्याम मिला दे।
- 1:03:20मेरी नैया पार लगा दे गोविंद गोपाल हरे।
- 1:03:33राधे श्याम मिला दे।