Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Jan 26 - कर्म का सच्चा मार्ग: लालच बनाम निस्वार्थ सेवा | बाबा जी (Punjabi Version)
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- 0:00रामकृष्णा परमहंस कैस्त्रंजी कमाई नु हाथ लांदई कंबल लगे धंस यानी
- 0:13कि ईश्वरीय उन्नतिंदर संकेसी। भी एक कमाई जली है।
- 0:21ऐसे कुछ बहुत लोकायुक्तियाँ बधुमा से खून मिला है।
- 0:29जी दे करके ऐश पैसे दे अब आप करके वो लोग दुखी है जिसने इकट्ठा कर
- 0:36लिया। के तनु बन रहे है ते ओह एक वारी
- 0:42प्राणी सुहाने से खोल ले अः राम किशन पर मानसो ऐसे विवेकानंद
- 0:50गुरु। विवेकानंद भी शायद मेरे ख्याल से
- 0:551893 से शिकागो जो बोले थे, अब ये आसिफ वासिफ की तिरोंग में जन्म
- 1:03होयस ते ओदा पाण्ड़े ऐसे। हदय राम पाण्जा उदय कुडको सेठ आ
- 1:15गया ओसमानची ₹1 की बड़ी ₹1 की एक पैसे की पड़ी थी साड़े जमाने जैसा
- 1:23न एक पैसा मिलता है खर्चे वास्ते बैठ लो साडे जमने।
- 1:31वो मैं 10,000 पिया तनुधन रास मणि दामंदर सी जड़ी के सुधर जाती तो
- 1:48समुद्र सी। थोप झरना दी है, बंदा भी अंदरों
- 1:53के है तो ओस ओस मंदिर दे विच कोई पुजारी नहीं अंदर से भी रानी
- 2:01रासवणि सुधरे पैसा बहुत सी तो भी ऐस मंत्र से कोई मत्था टिकने ही
- 2:07नहीं अंदर से। फिर ऐसी झड़प पुयारी पद है।
- 2:14वो रामकृष्णा पर मंथ ने स्वीकार के तय वड्डे पाई ने राम ने फिर उद
- 2:23डेथ हो गई उद डेथ तो बाद ऐसा सी नाम गदाधर।
- 2:29गधाधर अः पूजा करने लग गया पूजा की करदस ही ए मतलब फकीर बंदर जब
- 2:39मर्ज़ी टल खड़काने लगे अंदर रात में उठ के जीरापुर जब मर्ज़ी ए।
- 2:46पूजा करने दी टाइम हम दा सवेरे ए सुत्ता पे हम दा मौज न तेरा कोई
- 2:52टाइम टू मी सी पूजा ये तो मर्ज़ी प्यार कर लेता चूरी पहले हम खा के
- 2:58देख लेता भाई ठीक है क्यों को ठीक पे भाई अच्छा ठीक है चिशक्कर ठीक
- 3:05है? जे कट व धंधा था ओर पान था, एक एक
- 3:10शिकायत भी हुई। वे कैसा पुजारी है?
- 3:13ये पहले युठी करने दो माता नुकी खोउवा मेरी माता में नुव एक नहीं
- 3:21वो चूर्य बनाम दी पहले खुद खा के देख लें।
- 3:24बिखाण दे योग भी एक में ओही में कर दे पहले वेस्तलम जब मिठा कटे
- 3:32है तो मानो ही नहीं जंगा लगना। ये तो मेनू ही नहीं जंगा लगे वो
- 3:39नु के अंदर अभी ₹10,000 तन में तुमको।
- 3:4110,000 की रकम और दो एनी होने से बी जेड़ा मंदिर प्राणी राश्मनी ने
- 3:50बनाया और जतिन मंदिर बना ले 10 ₹1000 उकंते भी करना किया।
- 4:06मेनू समद दी विच पे द दर्शन करवा दे उकेंद भी इतना मुश्किल है इतना
- 4:15मेन्यू ही मेन्यू डिस्टर्ब ना करी तू आई ना अंदर?
- 4:22के ये मतलब देख कर दे वो नहीं ऐसे लेता मुश्किल है।
- 4:38सिर्फ ये मैं तो चुप करके ऐड दे दूंगा उंकड़ा पता लग जाए तू चुप
- 4:47करके कुछ इस वाली तो मैंने हल्के के दरवाजे से ओढ़चो, पर्दा,
- 4:53चक्के, बरसो और भी एक बारी ओपोसिटीओन।
- 5:00उरे लाल चाग है मंच लाल चाग आते ओस ने ओकंदा भी ठीक है सोच सोच के
- 5:11ठीक है पर क्यों पैसे में ना बाच नहीं?
- 5:16भी सैर भाई वो बंदा थोड़ा सा कब है कह रही मैं पर्दा उगाड़ा से
- 5:24उठते मुश्किल हो गई पैसे लूँ मैं वाच पहले दिनों में देखूंगा अभी
- 5:30तू दर्शन कर पाने और। पर्दाचक्या एक चुप करके बला ले वो
- 5:39समाधि छपिया से समाधि छपाई दा वो तो दर्शन करवाता भी आगयी
- 5:49उनीपेख्या बस देख के तो आप भी मूर्ध हो गया।
- 5:53खत्म होगी कहानी उस बात सेठ जेड है, उस सेठ भी एनलाइटन हो गया थी
- 5:59दो 3 साल तो बाद फिर उस तो बाद जब उठिया राम किशन उ पैसे दे गया।
- 6:13उन उद कोली कोण कोणु जीडी जगा से उतेला कोता नहीं रोना ये पेगा भी
- 6:19अंतर मंदिर से दाँध रह गया उसे वो कित्ते टिके ही ना मूरखा बंगु ओह
- 6:29अंदर, कदे उत्तर कदे उधर। जो में पुत्रयाचू हुआ हूँ बे, ये
- 6:36सही है भाई राम किशन को कहने लग गया और ले ले स्वादस यार ले ले
- 6:48पता लग गया। ओनली मेरे क्रीब्रेन और अफद से
- 6:53शांत होना चाहिए। फिर वो अपने अंत सुनो माँ के नाम
- 7:01से जेडी जेडी जो पहुँच गया था ना वो स्नो माँ के नाम से दी माँ आ
- 7:08गई। यानी वो थे पहुँच गया।
- 7:29हृदयराम नु हृदयराम नु और निखारता पंचायत सका।
- 7:38प्रति जा के पाण जा सिउगा शायद मेरे ख्याल से रामेश्वर दयाल दा
- 7:44मुंडा। रमेश्वर, दयालुता, प्राशिका मेरे
- 7:53को तेरा कोई काम नहीं मेरे को तो निर्मोही निर्लोभी व्यक्ति ही कट।
- 8:00तो वो चला गया, मतलब वो उतनी छोटी जी उमर की मौत हो गई फिर वो तो
- 8:05बात क्योंकि प्राण ऊर्जा थी, वो प्राण ऊर्जा था, सरोध खीच लाया
- 8:14उसने। ऊप बंदा पहुँच गया, ज़रा पैसे ले
- 8:20के गया दो तीन सातों तो पांच बस उन विश्वास हो जाए परमात्मा है,
- 8:33हाँ जी बहुत बड़ी है तनु विश्वास ही नहीं होगा।
- 8:38फिर टाइम में कल दी प्रश्न छुप गया से भी एने ने जीने नुकसान की
- 8:42था मार्क के स्वर्ग ने झूठ बोल के मार्क से कोई लग गया थोड़ी सी
- 8:49अंदाज ही लाई थी ना उन्हें प्रशांत वर्ग अंदाज ही लाई अंदर
- 8:55ना प्रेमानंद बोलता ने देखे थोड़ी।
- 9:02कि जे एन एन विख्याम दा ते ए थोड़े ही बोलते थे।
- 9:08कोई ऐसे मुकाम से ए ज्यादा ही नहीं कहते जीतने एक गली बैठ के
- 9:13आनंद लेन होता। त्र चाल चलो तो पता लग गया दे
- 9:20विक्की बोलियाँ दे, आठ क्षण बोलियाँ दे एवे कुश्ती डेथ हो गई,
- 9:32थोड़ी देर मिनाबादी होगी थोड़ी से मिनाबाद तो ओह व्यक्ति पहुँच गया
- 9:37झिड़े से। एनु अप्पा डिस्क्रैब तो नहीं कर
- 9:43सकते बी सन्त्नु एस वस्त्र चु बेखण या रिक्शू तले के वखाण ये
- 9:51ठीक है या ज़ुरम है नहीं कुछ कम से कम मैं।
- 9:59लेकिन ऐना जरूर है कि वो वंदा कीड़ा मरा हर गहरा हूँ वो अपनी
- 10:04आत्मघलानी करके भरा जीस तरह मैं समझ कि मैं अपने मम्मा नु या अपने
- 10:13चाचा नु भी एस दृष्टि से। तो एजड़ी है न चीज़?
- 10:24परमात्मा विश्वास करना सहज व्यक्ति ताँ परमात्मा से अविश्वास
- 10:31ही करूँगा। सब तो मुश्किल सब तो शानदार तोप
- 10:39है परमात्मा दा बी ओह अपना विश्वास तनू देदे के ए, आउगा टुडे
- 10:45पुण्य गरमा दूँ, पुण्य कर्मापनु केने जदयश बिना लोभ हज में गाँधी
- 10:51जी ने कितना बिना लोभ किसी चीज़ में?
- 10:55स्वार्थ साफ ही हो गया ना ये स्वार्थ हेमता ही थी।
- 11:04बिलकुल जब उसने किया, जवाहरलाल ने भी किया, उसको पटेल ने भी किया
- 11:11बापू तो उसी। तुसी अपना पैंट पुट पालो, तुसी
- 11:17बैठो तो तुसी यहीं बैठो। तकलीफ की है तो यहीं अपनी जी पा
- 11:23के बैठो कि का कर ले, दुनिया तो नहीं जानती है भी, तुसी राज़
- 11:29करूँगा तो लोकता मनोबल बहुत उच्चारण हुआ।
- 11:34राज़ विच आनन हंकार है और हंकार सारी पाप का मूल है फिर वो बंदे
- 11:42तो पाप कराऊंगा, पाप कराऊंगा तो व्यक्तित्व जड़ा उड़ेगा और
- 11:49गांधीजी अजय पहुँचेंगे। गाँधी जी कहते है, एनलाइटन पर ऐसे
- 11:54में जो आनी शुरू हो गई थी, वि नहीं अपना बल नहीं लेना बल किसी
- 12:00भी तरह दे, बल राजनीतिक है बल ओह तन दे बल ओह पद दे बल ओह सम्मान
- 12:08दे। बल ओह किसी बुड्ढे आदमी नल अः जड़
- 12:14है ओह गठबंधन है किसी बड़े आदमी नल के में भी अपना मेल मिलाते है,
- 12:20किसी भी तरीके का बल आत्म नहंकार। जेड़ा संत व्यक्ति है वो जेड़ा
- 12:32संत तक पहुँच ना जंदे चंदे वो व्यक्ति बाल नू इकट्ठा ना करे,
- 12:40जरूरत तो ज्यादा ना इकट्ठा करे, ऐसे वास्ते सारी संतानी चीज़ बहुत
- 12:44मुश्किल है खतरे। जे।
- 12:51आज न कमाया कि कल पोख्ता रोज़ लगनी है, फिर चलो मैं भी कट लूँगा
- 12:58मेरे बच्चे, आनुवा पीढ़ियाँ वंशवलिया की।
- 13:05एस। इन दी बेस्ट ऑप्शन जड़ी मैं खुद
- 13:09जीस चीज़ ने अपनाया वो एसी बी आई विल मैरी आफ्टर एनलाइटनमेंट बस ये
- 13:18बेस्ट ऑप्शन है कोई कह दे ना भाई, शादी करनी चाहिए कि नहीं करनी
- 13:22चाहिए ये मेरे को एक। भी तो नू मैरिज करनी चाहिए भैया
- 13:28कोई तकलीफ नहीं कृष्ण 16,000 राजपुत्रियनु राजकुमारियाँ जेल
- 13:38चुरा के लाते हैं, फिर समर्थ को नहीं दोष गुसाएंगे समर्थ बंदे नू
- 13:43दोष नहीं लगता। क्योंकि उन्हें पता होता है भाई ए
- 13:47यंत्र करिए अंदर जो मैं नहीं कर रहा लेकिन गाँधी अजय पहुंचा नहीं,
- 13:56हरदाराम भी नहीं पहुंचा और करी पर वो पहुँच गया थी वो अपने
- 14:02रामकृष्णा परम। पूरा पूरा दिन समझ लीजिएगा।
- 14:08मेरे विकल्प से बातचीत तोतापुरी लेके आये थे, किसी भी चीज़ में
- 14:17जोड़ना पतंजलि भी एक शब्द। वो जोड़ने से बहुत लंबी
- 14:26प्रोसेसिंग आंधी है, जो खोलने, ते जोड़ना, किसी शास्त्र को कंशास्त
- 14:34करना भी जोड़ना। जी मैं अपगुर वाणी कंठस्थ कर ली
- 14:40लोक गीता छोटे छोटे बच्चा नु छः 6 साल देख बच्चा नु गीता कंठस्थ
- 14:45कराके पैसे कमांड दी कोशिश कर रहे हैं माँ बाप छोटी छोटी बच्चियां
- 14:52अजब भागवत पुराण दा अः यड़ी कथा। एक पाप है, पाप है अभी छोटे बच्चे
- 15:01नु अर्थ ही नहीं पता होता कंठस्थ करके शबद था फिर तो सिर्फ आप ही
- 15:07पढ़ लो जाने सच्चा बोलन था। अधिकारी बंदा वही है।
- 15:16जिसने उष्णु वेख लिया, जिसने उष्णु वेख लिया।
- 15:23सच्चा अधिकारी और है प्रश्न बोलना चाहिए था, मैं क्यों का ने यह पाप
- 15:28कुमारी मैं क्यों का? ने रियाला पाप कुमारी एनलाइटनमेंट
- 15:34कैनट बी ट्रांसफर्ड। पर्सन टु पर्सन वो पर्सन अचीवमेंट
- 15:41है। गद्दियाँ नहीं गद्दियाँ तक उसी
- 15:44ट्रांसफर कर सकते है पैसा तो उसी ट्रांसफर कर सकते है पर
- 15:50एनलाइटनमेंट उसी ट्रांसफर नहीं कर सकते।
- 15:54एनलाइटनमेंट तक पर्सनल अचीवमेंट है थोड़ी मैं तुने भी शादी कराणी
- 16:04चाहिए कि नहीं कराणी चाहिए थी? एक प्रश्न ही बेकार है क्यों
- 16:10बेकार है? मैं कह रहा हूँ वो सब से पूछो
- 16:14पहले मेरी बिलकुल सही सोच से एक्यूरेट और मेरी जिंदगी जो है
- 16:21सारे निर्णय परमात्मा देखलो हमसे तो ट्रैन का इंसिडेंट है मैं त।
- 16:32उदय खरगोश कट गया ये कोई पुन करम थोड़ी सी लेकिन पिछले जनम भी
- 16:40करोड़ों व्यक्तनु आज़ाद क्रांति वो भी निर्लोबता, अधिक शानदार
- 16:48परमात्मा ने तो। क्योंकि वो था अंदर भी जानता है।
- 16:53दोनों को लो भी या नहीं। बंदर के होश ने रखा भी नहीं, गर्द
- 16:59में शिकार भी नहीं करता तुसी एक तार वाला पा सकते हो।
- 17:03भाई पटेल नु क्यों नहीं बनाया जवाहर लाल नु?
- 17:07क्यों बनाया उदय? दी ज्वार लाल छोटीया रिहासतानो
- 17:13में दिया से नहीं मिला सी पटेलों का गृह मंत्री बनाया कि जवाहर लाल
- 17:18नाजुक उपला चपलासी उन्हें ऐनी बहुत के ऐनी अमीरी के बावजूद
- 17:25उन्होंने जेल। शानदार शाही गलियाँ से, रात में
- 17:32काट सकत है ओह उसने ठंडियाँ कोठरियां से बचे अपनी जेल।
- 17:47बिना खान परतु जाह्जा तिनते से खाना वो व्यक्ति जो जाह्जा चंदा
- 17:53खा सकता थी वो सुनु जाह्जा देता। उर्जा खाना प्या बस ये सब तो बड़ी
- 18:01चिड़िया है उस्ती त्याग से। वो से कपड़े लांड्री से तो के आते
- 18:11थे लोग कहते थे पैरिस तो के आते ही पैरिस तो के आते ही पैरिस
- 18:17लांड्री नाम दी होती थी उधर नाम सी पैरिस लांड्री जमा।
- 18:22पने थे एप्पल एक्शन बॉम्बे शो शो। स्टोर ना के पैर से लेकिन वो अमीर
- 18:32है ना ही ये मोतीलाल कूड़े वो जिंदगी जीते।
- 18:45जीना भी तू इसी फंसी होगी पर उसने अपने तर्क का नाल सिद्ध कर्त भी
- 18:50नहीं फंसी तो योग ही नहीं बनता, ये तो बरी होना चाहिए, है ना?
- 18:55समझदार बंदा से वो पैसा बहुत कम आया, वो पैसा होने दे बावजूद कोई
- 19:02बंदा। केलां देवी से जा के रात में कट
- 19:07के फिर तो मैं नहीं समझता कोई त्याग हो वो लोग बोल सकते है
- 19:13जिन्हाने अंग्रेजों के पैर छू ले ये आप में रात में शानदार मिलन।
- 19:20₹60 पेंशन लेती बिल्कुल बोल चल गया और लोग होने से मदर भी रख
- 19:25सकते है पर एक त्याग कुछ नहीं बंदनी कितनी भी मैंने और सड सड के
- 19:36मरे। वो है ना दुखी से जानते जानते आज
- 19:49ये पूरे नहीं गए विचार नीय गल ये होती है अभी त्याग ये है।
- 19:58जेमे अपनी संस्थामा विच अपनी संस्था विच थे।
- 20:02अः आचार्य प्रशांतिक संस्था की फर्क है वे खनन में लगभग कोई फर्क
- 20:07नहीं बड़ा फर्क है विशाल फर्क अपने सारे सेवा पावन और कम कर दे
- 20:15प्रशांत दे सारे। चिड़िया ओह पगार वास्ते कम कर दी,
- 20:22ये ही बहुत बड़ा फर्क है राज़ कर्ण वास्ते में तो करना हरदी
- 20:28जगाते थे देश दियाँ बेड़िया कटण वास्ते नीयत व्यकता परमात्मा
- 20:35परमात्मा नीयत व्यकता? कामनी वेखला परमात्मा किस निय्यत
- 20:41नलकम कितना गया ए वेखला एक परमात्मा ने निय्यत विकी और वो तो
- 20:48निय्यत संसार जग ज़ाहिर भी हुई। उन्होंने कहा नहीं, नहीं, उसने आप
- 20:52दी गली नहीं आने देती। वो गंदा तो से मेरी गल छेड़ो भाई,
- 20:56मेरा काम तो पूरा हो गया मेरा सही काम बाकी रह गया ओह एम् बोल देसी
- 21:01तो उन्होंने समझ नहीं आती। आखिरी दिन भी उन्होंने पटेल है
- 21:04क्या? अभी मेरा एक काम बाकी रह गया।
- 21:08पटेल के अंदर बापू की रह गया वो गंदा।
- 21:14बी। आखिर च उनमें आजदस दे, राज़ खोल
- 21:17दे मैं शहीदों के मरना चाहता था, मैंने कोई गोली मार दी और नाथूराम
- 21:24गोडसे ने भगवान ने अब इच्छा भी पूरी की थी।
- 21:28फिर मैं ऐसे ना मेरे को गोली मार दे।
- 21:37पर कोई परमात्मा। और ओसता फल बंदे तो निमज्ञा नहीं
- 21:57ओता फल उन्हें परमात्मा तो भी निमज्ञा परमात्मा फल बिना मन के
- 22:03दिया करता है बस चुप करो निक्की करो, दरिया से सेठ दो, खोल दो।
- 22:11तो डे पुण्य कर्म आप भी फलीभूत होण गए जे कते शराब दे नशे से हुई
- 22:18किसे खेत खलेयांज बीजोय खेत खलियांज कोई बीज खलारती जान ना
- 22:24उसे याद ना रखो पर वो उगण गए थे। उन्नत वृक्ष वर्णन।
- 22:34परमात्मा देव ए कर्म होने चाहिए, दे संसार देश जिद्दी अपेक्षा न
- 22:43होवे उसे अपनी तरफों तन मन जी तन है।
- 22:56किसी भी सर्दी चल रही है सर्दी चल रही है, सर्दी से विचकली मेनू
- 23:05नहीं, न लग रही सर्दी मेनू ये लग रही है वे मेरे ही बच्चे।
- 23:11कोई बस स्टैंड पे पे कोई रेलवे स्टेशन पे ठिठर है उन पैर के
- 23:23ठेलते हुए। रेलवे स्टेशन के बंदे गए हैं।
- 23:34ओथे तुसी के दो कम्बल दे के आओ दो किशनु कह देने एक किशनु कह देना
- 23:40जी जी जी ने स्मर्ता सी बस स्टैंड पे बैठो चार दी दुकानें दे देती
- 23:45कोई बैंचते बंदा सोचता होगा ऐसे हुंडवी मैं क्या देना?
- 23:50वो भी लकी ते फ़ोन का, मैं शुरू हो गया हूँ तू सी जाओ वो 15 1500
- 24:07रुपए। ₹100 का कंपनी लेता हूँ ₹1500 की
- 24:13र जाई लेके मैं कही चाहे तो दो मंदाकी से क्या हो सारी उम्र
- 24:17वास्ती चालू की तो ये एक सड़क फिलॉसफी है, ये मेन मुख आधार है
- 24:26व्यक्ति का कर्म करो। लोक केन्द्र मैं के ना अकरमण्य न
- 24:32रो अकरमणि रात में सोन बड़े होई अन्य ऐसा परमात्मा का विधान ही
- 24:39दिने जागते जागते कर्म करो पर कर्म जड़ी है वो लोभ देकार न करो
- 24:46कर्म अपने। कर्तव्य थे हिसाब मेरा कर्तव्य
- 24:52की, थोड़े बच्चे उसे बच्चा नु पालने बच्चों के प्रतिक नाओ,
- 24:58थोड़े कर्मपथनम कोई मतलब सहायता चाहिए कोई दवाई।
- 25:10माँ बाप वृद्ध हो गए है, उननू सहायता करो यानी कर्तव्य कर्मानू
- 25:16पछाड़ के ऊ में ही कर्म करो वक्त बेले वक्त दे जे लोग थोड़ी ना
- 25:23ज़रा भी संपर्क नहीं रख दे। उना दे गाँधी नाल के से
- 25:29रिश्तेदारी से हमेशा ही बाहर जा पहला पढ़ने चला गया लंदन।
- 25:38परंतु बाद साउथ अफ्रीका चला गया उठों दी नीतियां छीनने सी।
- 26:05मैं कही कोई अच्छी गर्ल थोड़ी है कोई साउथ अफ्रीका के बीच गड्डी
- 26:13क्यों काला बंद रहा है तो उसमें बार सीट दे कोई अच्छी गर्ल थोड़ी
- 26:18है तुझे हस दे क्यों? हसें हैं।
- 26:22अभी गाँधी दी मुखालफत करनी है, बस उन्होंने मुखालफत करनी है।
- 26:28चाहे किसी राहुल गाँधी से कह दे उन्हें मैं सुने ब्याह कर रखे है।
- 26:31मैं कहती अगले दी पर्सनैलिटी है राख रूवा लीबेंचर हुआ उसी के लेना
- 26:36है, नगला तोड़ा, तोड़े तोड़ा के तोड़े देश न होने के बिगाड़े है
- 26:40दसू। बगड़िया तो मुद्द ही नहीं है।
- 26:45सारंदा गिट्ठा करके एक नुफराई अंदर ऐसे वो की दुष्टता की है।
- 26:53एक बंदा सरे आम चुठ बोल के 140,00,00,000 बंद रहा चुठ बोल
- 26:57के। मैं रोजगार दूंगा 2,00,00,000 मैं
- 27:04जीरा है वो वारदात ले के आऊंगा तो डी जे जो 1515 लगता आई जाण बिलकुल
- 27:10करार कितना उन्हें क्या प्यार दे दो जब मैं ना ले के आऊ मैंने चुरा
- 27:14ही झगड़ा कर दो। के दिल ने नहीं कम करनी है।
- 27:20बिलकुल साफ साफ बोला। दो अच्छा फिर 2,00,00,000 रोजगार
- 27:25भी दूंगा फिर अच्छे दिन आएँगे। सारी जनता ने अपने अधिकार दे भी
- 27:33चल लेना, वो बुलंद जरूरत ना कर सके।
- 27:37ये अच्छे दिनों दे के। उसे बोल न सको निर्भयतापूर्वक ये
- 27:43अच्छे दिन थे यानी ए नन, पता नहीं यह सीधा भी ऐसे ही पाप कर रहे है।
- 27:52यह पाप तीनों पता लग जाए। मैं पाप कर रहे है तो फौरन पाप
- 27:56करना चढ़ दूंगा। बस पापिनु पता ही नहीं होता है,
- 28:02मैं पाप कर रहे है ऐस वासी ए पुण्य वी पापिनु याद कराए जावे कि
- 28:08तू ए पाप कर रहे है ए पुण्य।