Latest / Baba ji Vijay Vats / 17 Apr 26 - परमात्मा का अनुभव कैसे करें? क्या आपने परमात्मा देखा है और मुझे दिखा सकते हैं?
Transcript
- 0:14बाबा जी, प्रणाम कुंज बिहारी श्रीवास्तव स्वामी विवेकानंद ने
- 0:40सभी गुरुओं से एक सवाल पूछा। किसी को उसका सही जवाब नहीं आ
- 0:49रहा, आखिर उसने विवेकानंद ने। रामकृष्णा परमहंस से पूछा बही
- 1:05सवाल मैं आपके सामने करता हूँ, क्या परमात्मा है आपने देखा है?
- 1:25क्या आप मुझे परमात्मा दिखा सकते हैं बस मुझे जीवन में और कुछ नहीं
- 1:37चाहिए। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, धन,
- 1:50वैभव, बल, प्रसिद्धि, मान, सम्मान कुछ नहीं चाहिए।
- 2:04मुझे सिर्फ इस बात का जवाब चाहिए कुंज बिहारी श्रीवास्तव लखनऊ।
- 2:24ये प्रश्न इतनी बार दोहराया जा चुका है कि इसका उत्तर उसी
- 2:35प्रारूप में देना व्यर्थ होगा। इस संवाद का जिक्र प्रत्येक
- 2:48बुद्धि में है। प्रत्येक ने यह संवाद सुना हुआ
- 2:55है, और तो मैं दूसरे तरीके से समझाती हूँ।
- 3:12जब मैं तुम्हें कहता हूँ तो समझाता हूँ तो इसका मतलब ये नहीं
- 3:19होता कि ये तुम्हें समझ में आ जाएगा।
- 3:22नहीं समझ में नहीं आएगा, इशारा जरूर करूँगा।
- 3:32जैसे मैं कहूँ वो रहा चंद्रमा और तुम मुझे कहो के नहीं यहाँ तो कोई
- 3:39चंद्रमा नहीं है यहाँ नहीं चंद्रमा में लिखा था चंद्रमा इसकी
- 3:45स्ट्रेट लाइन में देखना होगा। आँखों को ऊपर उठाना होगा फिर
- 3:54तुम्हें चंद्रमा दिख जाएगा। कुंज बिहारी तुमने पूछा परमात्मा
- 4:07है है। क्या तुमने देखा है हाँ मैंने
- 4:26देखा है क्या मुझे दिखा सकते हो? बिल्कुल दिखा सकते हो मुझे इस बात
- 4:43का जवाब तो है। सुगंध होती है, सुगंध होती है,
- 4:55हाँ होती है तो सुगंध के लिए कहाँ जाना पड़ता है, वहीं जाना पड़ता
- 5:09है। जहाँ फूल खिले होते हैं, गेंदा
- 5:15गुलाब मोतिया छमेले तो वहाँ जाते हैं लेकिन वहाँ जाकर भी।
- 5:30तुम्हें पता है कोई कोई व्यक्ति ऐसा भी होता है जिससे सुगंध का
- 5:36एहसास नहीं होता। उसके नासिक का यंत्र नहीं होता,
- 5:46सूंघने की शक्ति नहीं होती। थोड़ी सूक्ष्मता से समझा।
- 6:02क्या वह व्यक्ति जिसके पास ग्राण शक्ति नहीं, क्या वह मोतिया के
- 6:13फूलों की? पर महक से आनंदित हो पायेगा नहीं
- 6:27फूल तो है हाँ सुगंध भी है है। फिर वह व्यक्ति लुत्फ क्यों नहीं
- 6:38उठा पाता, क्योंकि वह घ्राण शक्ति नहीं है?
- 6:55परमात्मा है अन्यथा हम अपनी मगज का उपाय तो करते हैं अकारण और
- 7:11ध्यान रखना पुत्र परमात्मा के मिल जाने का कुछ लक्षण।
- 7:28जो बगीचों में चला गया, जिसने फूलों की सुगंध मान ली और उसके
- 7:37पास से नासिक का यंत्र ग्राण शक्ति भी है।
- 7:43बह के गांव। क्या सोभित है?
- 7:56लेकिन जिसके पास गृहण शक्ति नहीं है, क्या वो कह पायेगा नहीं पुत्र
- 8:12देखने के लिए आँख से आई सुनने के लिए कान?
- 8:24रस को चखने के लिए तीर्थ वर्ष चाहिए।
- 8:37स्पर्श करने के लिए त्वचा होनी चाहिए और सुगंध या दुर्गंध मानने
- 8:50के लिए ग्रहण शक्ति होनी चाहिए। जैसे हम दो आकाश गंगा में स्थित
- 9:08कोई तारामंडल को वैज्ञानिक देख लेता है।
- 9:18जेम्स वेव टेलीस्कोप के पर इससे पहले हेर्बल टेलीस्कोप ये और
- 9:25बढ़ती जाएंगी। समय का बस तुम्हारी देखने की
- 9:30क्षमता दूर तलक निकल जाएगी लेकिन तुम ब्रह्मांड का और छोड़ न होगे।
- 9:40यही उसकी विराटता है और हैरानी होती है हम लोगों को जब तुम इतनी
- 9:58वराट तत्व को आँखों से देखने की। तुम चेष्टा करते हो, उसे कानों से
- 10:15सुनने की। जीवाशी चक्र बुद्धि से सोचने की
- 10:24आज बहुत से तथाकथित ज्ञान। परमात्मा का व्याख्यान कर रहे
- 10:32हैं। उपनिषदों से गीता से या अन्य अन्य
- 10:38धार्मिक ग्रंथों से क्या वो कर पाएंगे?
- 10:46नहीं कर पाएंगे। निश्चित ही पुत्र उनका कोई नहीं
- 10:53तो स्वार्थ। जो इतनी दूर तक जिसकी बनाई हुई
- 11:10सृष्टि तुम्हारे आधुनिक टैली को उसका अंतिम छोर नहीं देख पाते,
- 11:22उसको तुम्हारी नगन आँखें कैसे निहारेंगे?
- 11:34और वो है, अन्यथा 14 वर्षों से एक स्थान पर बैठकर कभी तुमने सोचा एक
- 11:50व्यक्ति। जिसकी इच्छा होती है घूमने की
- 11:57फिरने की, हवाई जहाज में चढ़ने की विदेशों में जाने की, सुंदर,
- 12:02सुंदर, सिंधी से देखने अच्छा अच्छा पदार्थ खाने के।
- 12:16और वह न तो कुछ खाता है, कुछ न कुछ जो पदार्थ तुम्हें संसार में
- 12:32अमृत जैसा लगता है, वह उसे भी नहीं चखता।
- 12:39क्यों जहाँ तुम जाना चाहते हो जहाँ की सीनरी इस दृश्य को देखकर
- 12:58तुम आंदोलित होना चाहते हो? वह व्यक्ति वहाँ जाने की तमन्ना
- 13:09नहीं रखता। क्यों?
- 13:16पर से यही लक्षण है शब्दों के अर्थों को बांछ देना।
- 13:32शब्दों की रहस्य की परिभाषा नहीं होती।
- 13:39शब्दों का अर्थ अलग होता है। शब्दों का रहस्य अलग होता है।
- 13:47इस वेद को अच्छे से समझ लो। इसलिए मैं तुमसे एक बात करता हूँ
- 14:01नैया मझधार में और गहरे पानी में आज नहीं कल।
- 14:11इससे पहले जो आए वो विदा हो गए। मैं भी विदा हो जाऊंगा।
- 14:22आई ऍम नॉट एन एक्सेप्शन मैं कोई अपवाद।
- 14:38लेकिन तुम मेरे इन शब्दों का रिकॉर्ड रखना, गुरु बनाना, लेकिन
- 14:54गुरु को परखने की तरकीब समझो। जिसने उस परमात्मा के आनंद को कॉल
- 15:08किया वह संसार के सुंदर दृश्यों को देखना नहीं पड़ेगा।
- 15:19डिट्टे सब्यथाओं नहीं तू विजय है। क्योंकि उससे सुन्दर स्थान जहाँ
- 15:31वो पहुँच गया, परमात्मा की सृष्टि में कहीं भी ना व्यवस्थाएँ सुन्दर
- 15:43हो सकती हैं। पृथ्वी से ज्यादा सुंदर हैं,
- 15:49लेकिन स्थान जो तुम्हारे बेहतर है जो संतों ने ऋषियों ने देखा
- 16:03मोनियों ने देखा। उसे अच्छा स्थान तुम्हें सारे
- 16:12भ्रमण में कहीं नहीं मिलेगा। कायनात घूम तो डिटेल सभ्य था।
- 16:28तेरे जैसा कोई तो ये लक्षण समझ लो बेटा और तुम अपने लक्षण भी देख
- 16:39लेना जब तुम पहुँच जाओगे। तो तुम्हें एक मेज़रमेंट दिए जा
- 16:49रहा हूँ उसी मेज़रमेंट पर तुम अपनी कसौटी भी तो लेना किसी से
- 17:01पूछने की आवश्यकता नहीं है। तुम खुद ही अपना माप तोल कर सकते
- 17:14हो। मैं कहाँ पहुँच गया?
- 17:20उसका पैमाना है आनंद का रस अखंड। अखंड आनंद का रस जब तुम्हें मिल
- 17:41जाएगा तो तुम्हें किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- 17:51कि मैं कहाँ पहुँच गया हूँ बाबा आचार्य जी गुरूजी संत जी क्योंकि
- 18:05वहाँ पहुँच कर तुम तृप्त हो जाऊंगा।
- 18:13इस तृप्ति शब्द को सर्कल में ले लो आखिरी लक्षण है तृप्त तृप्ति।
- 18:29तरक्की जीस दिन तुम्हें तरक्की मिल गई, उस दिन क्या होगा?
- 18:42सभी भागदौड़ समाप्त हो जाएंगे। और ऐसा मौका हमारे ही बेहतर है
- 18:59जहाँ जाकर कोई भी मनुष्य मानव। उस मकान को पा सकता है और तृप्त
- 19:14हो सकता है। तृप्ति का अर्थ है जिसके बाद।
- 19:24तुम और पाने की चाहत न रखो, फुल्ली सैटिस्फाइड तो ये तुम
- 19:41सेल्फ मेजरमेंट का तरीका अपना लेना।
- 19:49किसी के पास पूछने मत जाना यहाँ सब डाकू लूटे रहे।
- 20:09पुत्र वो तुम्हारी जेब काटने को बैठे पुत्र वो बढ़िया सा मेकअप
- 20:17करेंगे, वो माथे पर दाढ़ी पर हल्दी लगाएंगे, पीला चंदन
- 20:27लगाएंगे। तो मैं गुमराह करेंगे, सिक्खी का
- 20:33केस में रख लेंगे, तिलक का त्रिपुंड भी सा डालेंगे।
- 20:42कृष्ण की व्यजयंती मानवी डालेंगे और मुकुट भी लगा लेंगे।
- 20:51अगर कोई ऐसा पाखंडी तुम्हें लिख जाए तो उसकी बात सुनना मत, कानों
- 20:58में अमली दे देना क्योंकि न जाने उसका कोई शब्द तुम्हारी किसी मन
- 21:12के अज्ञात कोने में छुपा रह जा एक छोटी सी कंकुरिया आँख में पड़
- 21:24जाती। तो तुम्हें सारा संसार दिखना बंद
- 21:29हो जाता है। एक कंकड़ी के कारण यहाँ तो लुटेरे
- 21:39यहाँ तो जीव कत्र है सरे आम बैठे हैं।
- 21:46मैं तुमसे कहता हूँ मेरे चले जाने के बाद किसी शास्त्र को गुरु मत
- 21:57मानना, जीवत गुरु के पास चले जाना।
- 22:08क्योंकि शास्त्र में से सुगंध नहीं आती के फूल में सुगंध नहीं
- 22:16आती। ब्लैकबोर्ड पे बनाया हुआ फूल का
- 22:21चित्र सुगंध नहीं देता। लेकिन धरती का सीना फाड़ के आया
- 22:28हुआ गुलाब मोतिया सुगंध बिखेरा करता है।
- 22:44किसी जीवंत गुरु के पास जाओगे। जीव तो फूल की तरह है उसमें से
- 22:52सुगंध आइक सुगंध आनंद की आइक उसके वस्त्र मैले हो सकते हैं।
- 23:11उसके वस्त्र पुराने हो सकते हैं, लेकिन उसके शब्दों में आनंद छलके,
- 23:27उसके शब्दों में रस बहेगा। तो जी वो तो गुरु मैं इसलिए कह
- 23:36रहा हूँ जो गुरु चले गए उनसे तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा इसलिए जब
- 23:57तक मैं हूँ। तब तक एक बार आके निहार लो।
- 24:06आखिर संत होता क्या है, कैसा है? फिर यह 2050, 100 साल की ज़िन्दगी
- 24:20वह बिना भोंके ही क्यों चला जाता है?
- 24:25बहुत से लोग मुझे पूछ लेते हैं बाबा 14 साल से कोई भोग न भोग
- 24:40क्या यह है पागलपन है? हम संसार में आए फिसले हैं।
- 24:49ईश्वर ने यह प्रकृति बनाई इसलिए भोकने के लिए ही तो बनाई है और आप
- 25:06परमात्मा की बनाई हुई सृष्टि को। बहुत दिन तो मैं कहता हूँ पुत्र
- 25:21जीसको वह परम भोग मिल गया यहाँ के सभी भोग छत्तीसों प्रकार के
- 25:30पकवान। यहाँ की सुगंध, यहाँ के द्रव्य,
- 25:40यहाँ के सुख, यहाँ सुख के साधन, संसार के सभी भोग क्षणिक।
- 25:55अखांटर नहीं है, यही तो चक्कर है तुम इन्द्रियों से एक बार भोक
- 26:06लेते हो। और बार बार तुम उसी भोग में फिर
- 26:13फिर से जाना चाहते हो। इंद्रियां चुक जाती हैं तुम चुक
- 26:20जाते हो लेकिन भोगने की लालसा नहीं मिटती।
- 26:30कुंज बिहारी जीस दिन भोगने की लालसा ही मिट जाए उस दिन मिटेगी
- 26:49जीस दिन वह विराट तुम्हारे भीतर दिख जाएगा तुम्हें।
- 27:00वह फिर अखंड आनंद का स्थान है जो तुम चौबीसों घंटे मानोगे, सदा
- 27:13दिवाली साद के और आठों पहर आनंद? कौन उठे?
- 27:28मेरे इस शहर की आधे लोग मेरे से नाराज हैं बचपन में जिनसे बैठा
- 27:37बात बात की सुख दुःख सांझी। आज वो आ जाते हैं द्वार पर, लेकिन
- 27:51मेरा अपनी मजबूरी है। मैं उन्हें वापस नहीं देता हूँ,
- 28:04वैसे भी तो मैं बात नहीं कर पाऊंगा, इतनी महत्वहोश के आलम में
- 28:10हूँ कि भला तुमसे गुप्त को कर पाऊंगा?
- 28:19नहीं कर पाऊंगा। जब मुझे बाबा ने भगवान शिव ने
- 28:33रात्रि को उठा के कहा कि बोलो मैंने बहुत तरले किया।
- 28:43हाथ पांव जोड़ें कि बोला कैसे जाएगा बाबा यह समुद्र के झरणों की
- 28:56तरह उलीच का हुआ आनंद का सागर। भला मुझे बोलने देगा बाबा कहते
- 29:09देखो होता तो सब में ही है लेकिन फिर भी वो बोल के गए अपार करूँगा।
- 29:21बुलवा ही दिया करती है। आदमी को तुम्हें करुणा जगानी
- 29:29होगी। दुखी मानवता के लिए तुम्हें बोलना
- 29:34ही होगा। तुम सारे दिन बोलना चाहते हो, कोई
- 29:49न भी मिले तो तुम अपने मित्र के पास सगे संबंधी के पास पड़ोसी के
- 29:58पास बत्तियां नहीं चले जाते। और एक मुकाम ऐसा भी आता है कि
- 30:10पड़ोसी तुम्हारे पास मिलने के लिए आए और तुम उसे इनकार करते हो।
- 30:20बहुत से लोग मुझे धमकी भी दे जाते हैं बाबा ये आज का ना मिलना,
- 30:32इंकार बड़ा भारी पड़ेगा। वो मूर्ख है, बुद्धू है बुद्दीन
- 30:45वो जानती नहीं मैं किस प्रेम के सागर में खोया हूँ भला वो मुझसे
- 30:56क्या बदल लेंगे? मेरे पास छीनने को है, जो
- 31:06बहुबोल्य हीरा है वह छीना नहीं जा सकता।
- 31:12द्रव्य छीना जा सकता है, द्रव्य चुराया जा सकता है।
- 31:19लेकिन जो द्रव्य से पार खुशी बना, तुम किसी की खुशी भी छीन सकते हो।
- 31:26नहीं छीन सकते हो भला तुम बोलो की खुशबों भी छीन सकते हो।
- 31:35नहीं तुम ज्यादा से ज्यादा फूल की गर्दन में उड़ चूके हो, फूल को
- 31:47तोड़ के ले जाओगे, काट पीट लोगे, एनालिसिस करोगे।
- 31:58लेकिन उसके भीतर से कटते बैठते फूल के भीतर से भी सुगंध होती है।
- 32:09तुमने कभी देखा तुम किताब प्राप्त करते हो जीवंत फूल को?
- 32:18मुर्दा मूर्तियों पे चढ़ा देते क्या फूल तुम्हें अभी शक नहीं
- 32:27देता हूँ मैं देता है अस्तित्व में यहाँ किसी बात की माफी?
- 32:40मैं 1000 बार बोला, मेरे पास आना, किसी फूल को छोड़ के मत लाना,
- 32:49लेकिन लोग फिर भी या तो मुझे सुनते नहीं या मुझे घूमते नहीं।
- 32:55फिर फूल ले आते हैं, माला बनाते हैं।
- 32:59कितने फूलों का वध किया उन्होंने और उससे मेरे आनंद में कोई
- 33:05बढ़ोतरी हो नहीं सकती। मैंने उस मकान को पा लिया है।
- 33:14जो सर्वोच्चम और सर्वोत्तम है तुम्हारे फूलों की माला की खुशबू
- 33:25मेरे भीतर की खुशबू को ज़रा भी नहीं उड़ा सकते हैं, लेकिन।
- 33:34तुमने एक पाप को मा लिया, तुमने कितने फूलों की गर्दन मरोड़ी
- 33:41होगी? किसी भी सिद्धि के लिए उपयुक्त
- 33:52साधन की? व्यवस्था करनी होती है।
- 34:00फूल 1 दिन के लिए सुबह उगता है, सूर्य जी ढले मुरझा जाता है और
- 34:10तुम्हें इतना भी सब्र नहीं आता। कि उसका 1 दिन का जीवन भी तुम छीन
- 34:18लेते हो। कितने खूंखार प्राणी हो तुम जैन
- 34:29मुनि? पांव को बचा के चलता है कहीं कोई
- 34:39कीड़ी ही मकौड़ी मेरी आँखों में शायद न आई हो मेरे बाहर से दबके
- 34:47मर जाए। उसने प्रयास तो किया।
- 34:57फिर भी कुछ जानवर मर जाएंगे। जोत में दिखते नहीं, लेकिन इस फूल
- 35:06ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा? और मैंने कोई शर्त नहीं रखी कि
- 35:15मेरे पास आओ तो फ़ोर लेके आओ, मैं तो कहता हूँ बस तुम ही आ जाओ वो
- 35:31तुम आ जाते हो लेकिन फिर आकर खाक नहीं होते।
- 35:43आ जाते हो तुम, लेकिन आकर खाक होना भूल जाते।
- 35:55फिर वह आना थोड़ी देर के लिए तुम्हें आनंदित कर जाता है,
- 36:03बिल्कुल अंतरंग क्षणों की तरह, फिर यहाँ से तुम चले जाते हो मान
- 36:14यही पड़ा रह जाता है। मुझे रोज़ मैसेज आते हैं, बाबा
- 36:25फिर से आने का मन करता है, मैं यही कहना चाहता हूँ तुम्हें जो
- 36:41तुम यहाँ सुगंध लेके गए हो। वो सुगंध तुम्हारे भीतर है कब तक
- 36:56संसार में परी भ्रमण करते रहोगे अपने घर से मेरे पास फिर यहाँ से
- 37:11अपने घर। इसलिए कोई 1020 कमरों का इंतजाम
- 37:18आपके खुद ही गोर भाई बना रहे हैं और उनसे ताकीद है कि आप किसी से
- 37:30पैसा मांग रहे हैं। तुम्हारे मैं समर्था हूँ तुम बना
- 37:35देना अन्यथा किसी को परेशान न करना और ऐसा ही वो करना।
- 37:54लेकिन मैं कभी जाकर उस साइट को भी नहीं देखा।
- 37:59वहाँ क्या हो रहा है, किसने क्या कर दिया?
- 38:06आज तो सुबह से शाम तक मित्रों के सर के ऊपर बैठे रहते हो।
- 38:14मज़दूरों के सिर के ऊपर बैठे रहता हूँ मैं तो कोई 1020 दिन बाद खुद
- 38:22ही कोई कह देता है तो हो गया ठीक है जो तो।
- 38:31सोइपलिका ये तुम्हारे ही रहने का ठिकाना है कुछ दिन के लिए तुम
- 38:43यहाँ मेरे सान्निध्य को आनंद को मानपाव है।
- 38:57थोड़ा सा आनंद लंबे खिचे जाएगा इंद्रियों की यह आदत है एक राजा
- 39:12हुआ उसकी सारी चेतना खाने में। वह जीवा के स्वाद से बंध गया।
- 39:26तुम अन्य अन्य इंद्रियों के स्वाद के साथ बंध जाते हो, किसी को
- 39:33घूमने का शौक? किसको सुन्दर संगीत सुनने का किसी
- 39:42को गाने का सुक कोई अंतरंग क्षणों में बार बार जाना चाहता है लेकिन
- 39:57इंद्रियां जवाब दे देते है, इंद्रियां थक जाती हैं।
- 40:04मेरे पास लोग आ जाते हैं बाबा हम पांच नाम क्यों नहीं जापें मैंने
- 40:10कहा बेटा इसमें थकावट होती है और तुमने जाना है।
- 40:20ऐसी रेफरेंस पेमेंट के पास जहाँ थकावट का नामो निशान नजर न आए
- 40:29जहाँ सब गुरस्ता खिले हुए कोई मुरझाया हुआ पत्ता भी ना हो तुम
- 40:37पांच नाम झपके। राधे राम करके कृष्ण कृष्ण करके
- 40:44थक जाओ यह इन्द्रियों से स्वाद लेने जैसा है क्योंकि तुम राधे
- 40:59राधे करोगे किस्से बताओ किस्से करोगे।
- 41:08जीवा से कर और लोग कहते हैं जीवा पवित्र हो जाएगा भला जीवा कभी
- 41:17पवित्र हुई है जीवा मास का एक टुकड़ा है 10 पांच ग्राम।
- 41:30इसका क्या अपवित्र होना और क्या पवित्र होना और तुम कहते हो के
- 41:41भगवान का नाम जपने से यह पवित्र हो जाएगी।
- 41:47यही भ्रांतियां तुमने पाल रखी हैं और यही भ्रांतियां बैरियर बन जाती
- 41:54हैं। तुम्हारे आनंद के राह में इनसे
- 42:04संभल के चलना, होशियार यार जानी होशियार यार जानी।
- 42:12ये रास्ता ठगों का यहाँ हर ईंट के ऊपर एक ठग बैठा है जिसने मेकअप कर
- 42:23रखा है यहाँ ज़रा नजर होगी तो माल दोस्ती।
- 42:34तुम्हारी कबीलदारी तो छोटी सी होगी, माँ बाप होगा, बेटा, बेटी
- 42:41होगी, पत्नी होगी, इनकी काबीलदारी तो बहुत बड़ी है।
- 42:51और इनकी कबीरदारी इनको पार नहीं होती है।
- 42:58यह बड़े कबीरदार तुमसे बहुत बड़े तो फिर ठगी मारने के सिवा और चारा
- 43:07करा जाता है। फिर किसी को अपना डायलीसिस भी
- 43:17कराना है। किसी ने अपनी पूजा भी करानी है,
- 43:23किसी ने अपना नाम भी बनाना है। किसने अपने अनुयायियों की संख्या
- 43:29भी बढ़ानी है? किसी को रुतबा भी चाहिए।
- 43:36किसी ने कुछ करके दिखाना इस संसार में आज तलक कोई यहाँ कुछ करके
- 43:47दिखा पाए। पांच सात बच्चे जन्म दे सकते हो,
- 43:56इतना सा कर सकते हो तो वह सम्राट खा लेता, स्वादिष्ट पकवान पकते और
- 44:10खाकर उल्टी वोमिटिंग कर देता। आधा घंटा ठहर जाता, फिर उसके लिए
- 44:18पकवान पकता, फिर वह उस पकवान को खा लेता।
- 44:23पहले वाले पकवान से अलग स्वाद होता या उसको जी भर के खाता?
- 44:35और तृप्त हो जाता। फिर थोड़ी देर बाद वह उस खाये हुए
- 44:46अन्न को फिर वोमिट कर देता उलटी कर देता।
- 44:50यही उसका शौक था। रोमन सम्राट विटैलियस बार बार
- 45:00खाता उसे खाने की लत थी और तरह तरह के स्वादिष्ट पकवान खाता जो
- 45:09एक बार खा लिया वह टेस्ट वीर नहीं खाता।
- 45:13सारे दिन खाता और उलटी कर देता बस यही तुम्हारी हालत है, तुम
- 45:26इन्द्रियों से भोग भोगते हो, फिर थोड़ी देर इंतज़ार कर।
- 45:36फिर इंद्रियों से भोगते हो, इंद्रियां सूख जाती हैं।
- 45:401 दिन तुम्हारी भोगने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं होती।
- 45:48मैं तुम्हें उस मुकाम पे ले जाना चाहता हूँ।
- 45:53जहाँ भोगने की प्रवृत्ति ही समाप्त हो जाए जहाँ भोगने की
- 46:00प्रवृत्ति समाप्त हो जाए। ऐसा ही नहीं वरन जहाँ जीने की
- 46:08इच्छा भी समाप्त हो जाए। जीवेशणा भी खत्म हो जाए।
- 46:14यह अंत स्थल का आंतरिक मुकाम है। फिर तुम अपनी इच्छा से जीना भी
- 46:24नहीं चाहते। फिर तुम सब कुछ कुछ विराट की
- 46:33इच्छा पर छोड़ देते हो और तुम अपनी इच्छा से कितनी देर जी पाते
- 46:41हो इतनी मशक्कत करके? तुम 100 साल से ज्यादा नहीं जी
- 46:51पाते और 100 साल का जीना तो वेद के ऋषियों ने मांगा है।
- 47:06शरद सतम जीवेद हे प्रभु मैं 100 साल तक हूँ।
- 47:22इंद्रियों से भौंकते भौंकते तुम थक जाते हो तुम गलत रास्ते पे नाम
- 47:29भी इंद्रियों से जपा जाता है। उस नाम का तुम्हें कोई पता नहीं।
- 47:41जो भीतर के अंतःस्थल के उस मुकाम से आता है जहाँ वह फूलों की सुगंध
- 47:49पड़ी है, वहाँ से भी एक नाम हो सकता है, लेकिन तुमने सब नकली
- 47:58नकली बना लिया। दिखावे तुम दिखाना चाहते हो होना
- 48:10नहीं चाहते, मैं तुम्हें कहता हूँ दिखावा बंद करो होना सीखो।
- 48:22और जीस दिन तुम होना सीख जाओगे परिपूर्ण त्याग उस दिन तुम पाओगे
- 48:30डिट्ठे सब व्यर्थ हूँ नहीं तो। मने मार्ग ठकन प मने मार्ग ठकन प
- 48:48मने पत्थों पर घट जा मने मगन चले पंथ मने धर्म सेति संवंथ।
- 49:00ऐसा नाम निरंजन होय जे को मन जानें मन कोय बहुत गहरे यार से
- 49:13थोड़ा शांति से सुनिएगा। जकजी साहब की चौदहवीं कौड़ी एक तो
- 49:24तुम खोपड़ी से मानते हो वो तुम्हारी मान्यता है एक ऐसा मुकाम
- 49:33है जहाँ जाकर। तुम्हें मानना पड़ता है इसको ठीक
- 49:42से समझो एक तो तुम शास्त्रों में लिखा गुरु से सुना।
- 49:57पढ़ा लिखा वह देखकर मानते हो, वह तुम्हारा अपना अनुभव है।
- 50:08बाबा बात करते हैं उस मानने की जहाँ पर जाकर तुम्हें मानना ही
- 50:15पड़ता है। कि वह है।
- 50:21तुमने पूछा पुत्र कुंज बिहारी, बस यहाँ पर आ जाओ जहाँ जाकर तुम्हें
- 50:32ये मानना पड़े कि यह है? मेरे कहने से मत मानो मेरे कहने
- 50:39से मानोगे तो गच्चा खा जाओ, मेरे कहने से मात्र दिशा ले लेना मेरे
- 50:52कहने से मार्ग। किधर जाऊं?
- 50:58क्या का रास्ते में आएगा क्या का मिलेगा ऊपड़ खाबड़ जमीन, मिलेंगे
- 51:05राजपथ मिलेंगे सुगंध मिलेंगे दुर्गंध मिलेंगे क्या होगा?
- 51:13क्या हैं उसकी निशानियाँ क्या हैं उसके लक्षण यह मुझसे पूछ लेना,
- 51:20लेकिन तुमने पूछा परमात्मा है, हाँ है तुमने देखा है बिल्कुल
- 51:31देखा है। और मैंने देख के ये पाया है के
- 51:42मैं ही परमात। अब यह बात तुम्हें कोई आचार्य
- 51:56नहीं बता पाएगा। अगर गुरु गोविंद सिंह ने कहा कि
- 52:05इन प्राखंडियों को जीवंत हुरों को मत बनाना तो उसका कारण।
- 52:11और आज उसकी बात सही हो रही है। गुरूजी की लोभी लालची वासना से
- 52:21भरे गुफाओं में कुकर्म करने वाले लोग।
- 52:30पाखंडी लालची जमीनों को इकट्ठा करने वाली कोई यहाँ से बड़े से
- 52:37बड़ा सम्राट सिकंदर भी ज़रा लेके नहीं गया जाने क्यों लो?
- 52:49महोबा किया करते। हैं जान?
- 53:01क्यों लोग महोबा किया? करते हैं।
- 53:11दिल के बदले में दर्द दिल दिया करते हैं, जाने क्यों लोग महोबा।
- 53:29किया करते तुम रोज़ गिनते हो? खुश होते हो इतने हो गए बैंक का
- 53:40बैलेंस, इतना बढ़ गया जमीन जायदाद डेयरी कितनी बढ़ती?
- 53:46प्रसन्न होते हो, लेकिन ये प्रसन्नता कितनी देर की एक बात को
- 53:56ध्यान में रखो, संतो ने अगर कहा कि अपग्रह जोड़ना नहीं, उसका मतलब
- 54:05था जब तुम जुड़ोगे तो उसके साथ चिपक जाओगे।
- 54:10अपने पास 5000 एकड़ जमीन हो गया तो पुत्र यहाँ से जाना तो होगा एक
- 54:25यह तो पक्का है। इसलिए मृत्यु के नाम से यह
- 54:33राजनीतिक बड़े से बड़े ऊंचे कर यह बड़े से बड़े डेरा पंथ मृत्यु के
- 54:41नाम से मृत्यु को कोई याद ना कराये।
- 54:50और बुध कहते हैं मृत्यु को याद करना ही परमात्मा का द्वार है,
- 54:57उल्टे नाम जपते जाना, वाल्मीक भय, ब्रह्म समान।
- 55:03राम राम करता करता मरा मरा करता रहा, मृत्यु जाता बे मरा और उस
- 55:12मृत्यु की याद ने रत्नाकर डाकू को वाल्मीकि बना दिया है।
- 55:19अगर 5001। इकट्ठा किया है।
- 55:25ये मूछों का वट यही रह जाएगा। आग में धू धू करके जल जाएगा तो
- 55:37पुत्र 5000 एकड़ छोड़ना ही पड़ेगा।
- 55:45इसलिए संतों ने कहा ज्योतिन क्योंकि संघ कुछ नहीं जाएगा।
- 55:51जरूरतें पूरी जरूर करना। यह शरीर एक साधन है।
- 55:59परमात्मा तक पहुंचने का रथ है व्हीकल इसको शक्ति देते रहना और
- 56:09इसकी जरूरतें पूरी करते रहना बस। और अपनी साधना पर निरंतर गति शील
- 56:19रहे तो अगर 5000 एकड़ इकट्ठा किया तो जब छोड़ना पड़ेगा तुम्हारे हाथ
- 56:27का अरे में क्या अब तुम्हारी दशा देखने को?
- 56:41वहाँ सच और झूठ की पहचान होती है कि जो जोड़ा था उससे कम प्रसन्न
- 56:57हुए थे। संत कवि, सच्चा संत, कवि जोड़तन।
- 57:07जुड़ जाए। बात अलग है लेकिन उसका मोह नहीं
- 57:13होता। पल भर बाद छिन जाए तो कोई गेम
- 57:20नहीं और अन्य भी आए तो कोई निराशा।
- 57:34मने मार्ग ठाक न पा मेरे कहने से मत मानना जो मैंने बताया सुबह उठा
- 57:46क्रिया जो करो, सैर भी हो जाए। थोड़ा शरीर हरकत में आ जाना, हेवी
- 57:58व्यायाम मत करो, यह मसल दिखाना भी एक प्रकार की वासना है।
- 58:12यह स्त्रियाँ अपनी बॉडी शेप को फिगर को क्षति जो भी क्षति कर
- 58:20देते हैं। मैंने पूछा यह क्या होता है?
- 58:27कहती कि ये फिगर इंटरनेशनल फिगर है।
- 58:31इसमें क्या होता है? बस ये अच्छी लगती है और इससे छती
- 58:38चौबी छती के अंदर जिंदगी बर्बाद हो जाती है।
- 58:43वक्त निकल जाता है। आज 6 दिन पाछे गए गुरु से किया ना
- 58:50हे जो भीतर का गुरु बैठा है, उससे मिलान नहीं हुआ, अब पछताए होतका
- 58:58जब चिड़िया चौक गई अब 5000 एकड़ ठगी ठोरी मार्क।
- 59:06इधर उधर के बांध बना के इकट्ठा तो कर अब पुत्र जाना पड़ेगा छोड़ कर
- 59:181 दिन। पड़ेगा जाना क्या भक्त?
- 59:26क्या जमात 1 दिन पड़ेगा जाना क्या भक्त क्या ज़माना कोई ना साथ
- 59:43देगा? सब कुछ यही रहेगा होंगे यही
- 59:53झमेले। यही झमेले होंगे यही झमेले।
- 1:00:14जब भी आओगे इस संसार पर ऐसा ही कुछ।
- 1:00:24तो मेरी बात को मत मानना, किसी शास्त्र की बात को मत मानना, किसी
- 1:00:28गुरु की पैगम्बर की बात को मत मानना, ये कृष्ण कह के गए,
- 1:00:33अष्टावक्र कह के गए इसलिए मत मारना तो खुद जाकर देख कर मारना?
- 1:00:46तो ये आचार्य ही लोग क्यों बैठे हैं, जो उपनिषद के कठिन शब्दों को
- 1:00:55श्लोकों को श्रुतियों को समृतियों की विवेचना करके?
- 1:01:01सरलाकृत व्याख्या कर रहे हैं। यानी एक गांव में किसी ने सोचा कि
- 1:01:16यह जो रुपए हैं, यह कहीं तो बनते ही होंगे।
- 1:01:22और अगर अपूर्ण ही घर में टकसाल लगा ले तो इतनी मशक्कत करने की
- 1:01:29जरूरत क्या है? सुबह उठते हैं, बाजार से सब्जी
- 1:01:35खरीदते हैं, कहीं से दूध ले के आते हैं।
- 1:01:39गांव में सारी चीजें एक ही दुकान पे मिल जाती हैं।
- 1:01:42कपड़ा भी वहीं मिल जाता है। दूध भी वहीं सब्जी वहीं मसाला।
- 1:01:46वहीं तो ऐसा ना करें। क्या यह नोट छापने वाली टकसाल ही
- 1:01:57लगा लें? आइडिया तो बहुत बढ़िया है।
- 1:02:04उसकी बुद्धि तो खिल गयी जैसे आचारों की बुद्धि खिल जाती है।
- 1:02:10अच्छे भरे आई ए एस की नौकरी कर रहे हो।
- 1:02:16देखते हैं दूसरा आसान है रास्ता, जबकि उससे ज्यादा मुश्किल रास्ता
- 1:02:22ही कोई नहीं। अपने स्वयं के अहंकार की बलि चढ़ा
- 1:02:27देना। इससे मुश्किल रास्ता भी कोई होगा।
- 1:02:31इसलिए तो तुम अपने भीतर उतर नहीं पाते।
- 1:02:34क्योंकि तुम्हारी बनाई हुई इमेजेज देखती हैं, वो तुमने दानवीर कर न
- 1:02:43होने की इमेज बनाई, लेकिन भीतर जाके पता चला कि तुम तो डाकू हो।
- 1:02:50इमेज टूट गई। तो वह सामान लेके आया पूछ्ताछ की
- 1:03:00और घर पे नोट छापने शुरू कर दी। पता तो था नहीं उसे तो उसने कहा
- 1:03:09कुछ नए करते हैं, मोदी जी की तरह कुछ नया करते हैं।
- 1:03:17मोदी जी कहते हैं कि मुझे जब प्रभातियों ने बनाया तो मेरे जो
- 1:03:22इट स्पेशलिस्ट थे, उन्होंने एक यंत्र फिट कर दिया कि मैं छोटी
- 1:03:29सोच सोच ही नहीं सकता। मैंने कहा, भाई।
- 1:03:34बड़ी सोच सोचने का फायदा भी क्या होता है?
- 1:03:40तुम छोटा काम सही कर लो, वह छोटा काम से ही होता होता।
- 1:03:46बड़ा काम सिद्ध हो जाएगा। बड़ी सोच का, कल्पना का स्वप्न का
- 1:03:51क्या फायदा? वह तो मातृ कल्पना है और आज देखो
- 1:03:56सारा भारतवर्ष कल्पना के आगोश में समा गया है।
- 1:04:00जिद्दार देखो मूर्खों की कतार लाठी उठाई चली जा रही है।
- 1:04:06इनकी हालत में रोना आता है। जीस दिन जन्मे होंगे माँ बाप ने
- 1:04:16पकौड़े बांटे होंगे तो उसको पता तो सानी।
- 1:04:23उसने 15 किलो छाप दिया। उसने कहा कुछ नया करते हैं लोग।
- 1:04:31अपना नाम यहाँ छोड़ने के लिए कुछ नया कर गुजरते हैं तो उस वनी ने
- 1:04:4015 का नोट सौंप दिया। उसने कहा अब ये तो नकली है।
- 1:04:50अपूर्ण बाजार में जाता है और वहाँ पर ये नोट चला के आता है।
- 1:05:00तो वह एक दूसरी दुकान पे गया। उसको कहने लगा भाई चेंज मिलेंगे।
- 1:05:12वो कहते हाँ कितने चाहिए वो कितने जी ₹15 दे दो, चेंज कर दो।
- 1:05:24उस बनी ने 15 का नोट पकड़ा। भीतर चला गया।
- 1:05:33अपना गल्ला खोला, थोड़ी देर में बाहर आया और लाकर उसने दो नोट थमा
- 1:05:47दिए। 115 के नोट में बनिया ने सोचा 110
- 1:05:56का होगा, एक पांच का होगा के चल ले भाई ये 7.5 सात के दो नोट हैं।
- 1:06:10ऐसे ही तुम्हारे आचार्य नकली उसने छाप दिया 7.5 सात की नकली से कोई
- 1:06:27भी त्रुतरा नहीं है अपने उस रसा रंग में अन्यथा झूम रहे।
- 1:06:36किसको गरज सी ऐसा व्यक्ति भी आईएस की कुर्सी को लात मार देता है?
- 1:06:43यहाँ बुद्ध सिंहासन को लात मार देते हैं।
- 1:06:53तुम्हारी कुर्सी तो क्या है? ये तो नौकरी है अपना मालिकाना हक
- 1:06:58कपिलवस्तु छोड़ के आ जाते है हीरे जवारा मोती मणियाँ जीसको तुम
- 1:07:08तरसते हो। बहुत उसको लात मार देते हैं,
- 1:07:15लेकिन ये भी नकल करते हैं। उसने 15 का छाप दिया।
- 1:07:18उसने सड़े सह सह के दो छाप दिए। नकली ही उसके नकली ही उसके जो
- 1:07:29शब्द पड़े उपनिषद में वह शब्द है। और शब्दों का सर नर्स कर दिया बस
- 1:07:39चेंज कर दिया 15 का नोट चेंज करके 7.5 सात के दो कर दिया।
- 1:07:47किसे कहते हैं होशियारी और होशियारी?
- 1:07:53खुद को ही मात देती है। तुम ही नुकसान कहोगे वह वक्त जाया
- 1:07:58हो गया जो तुमने होशियारी के अंदर खपा दिया।
- 1:08:05सोच सोच न हो गई जे सोच। तुम बुद्धि से अर्थ करते हो नहीं
- 1:08:20वहाँ जाकर उस आनंद को चखो मैं तुम्हें दिखावे बाजी में उलझाना
- 1:08:30नहीं चाहती। मैं तुम्हें ऑथेंटिसिटी देता हूँ,
- 1:08:37प्रमाणिकता तुम प्रमाणिक हो जाओ, तुम नकल न करो।
- 1:08:48तुम कुछ बनने की चेष्टा न करो, तुम होने की चेष्टा करो और जब तुम
- 1:08:54उस मकान पे पहुंचोगे क्रिया योग करोगे न कुछ करने में बैठोगे, कोई
- 1:09:00शास्त्र नहीं पढ़ना, कोई धार्मिक पुस्तक अलमारी में बंद कर दो।
- 1:09:09कोई जाप नहीं, कोई पाठ नहीं, कोई पूजा नहीं, कोई श्योर श्योर पूजा
- 1:09:14नहीं, कोई भगवान को प्रसाद नहीं भगवान को सिखाते हैं भगवान तृप्त
- 1:09:21हैं भाई। तो उसको भोग लगाओगे।
- 1:09:31मन के बहलाने को बाले भी ख्याल अच्छा है।
- 1:09:36हमने देखी है गणित की हकीकत लिख। दिल के बहलाने को बाले भी ख्याल
- 1:09:43अच्छा है। भगवान को भोग लगा दो फिर आप करो
- 1:09:48भगवान कभी आते हैं खाने क्यों पगला गया इसलिए हिंदू धर्म?
- 1:09:59मैंने पहले भी कहा हिंदू धर्म मानने वाला।
- 1:10:05कभी नहीं पहुंचेगा। कारण कल्पना से परमात्मा तक जाने
- 1:10:11का कोई रास्ता है ही नहीं और हिंदू धर्म कल्पना से यथार्थ तक
- 1:10:18जाने का एक प्रयास है, जो कभी संभव नहीं होता।
- 1:10:26शब्दों के अर्थ करके दो भाषियों की तरह जैसे अंग्रेजी को हिंदी
- 1:10:32में और हिंदी को फ़्रेंच में बदल देंगे।
- 1:10:35बस वो ही काम करते हैं ये आचार्य ये दो भाषियों और इससे ज्यादा ये
- 1:10:48वो फूल है जिसमें कोई सूरत नहीं जो खुद उस मकान पे पहुँचकर सुगंध
- 1:10:56साथ ले के नहीं आता। तुम किसी की नकल मत कर।
- 1:11:07गुरु गोविंद सिंह ने कहा क्योंकि माखन शाह लुबानु इन गुरुओं के ही
- 1:11:12फेर में उलझ गया था और सच्चे गुरु से चूक गया था तो गुरु गोविंद
- 1:11:18सिंह ने कहा गुरु मान्यव ग्रंथ यहाँ से तुम मार्ग ले लेना।
- 1:11:23यह रस्ता ठीक था क्योंकि जीवंत गुरु के भीतर वासनाएँ होंगी,
- 1:11:31बेकार होंगे, विचार होंगे, वो 1000 तरह के सिडेंटल रचेगा
- 1:11:38तुम्हें लुक। और तुम लूटते ही चले जाओ और फिर
- 1:11:48तुम्हे किसी दिन होश आएगी, तब तक वक्त बीत गया होगा, उम्र ढल गई
- 1:11:58होगी। ये मोतियों जैसे दांत गिर गए, हो
- 1:12:05गए। सब कुछ के होश में आए तो क्या
- 1:12:17हुआ? सब कुछ लुटा के होश में आये तो
- 1:12:28क्या हुआ दिन में अगर चिराग। जलाये तो क्या हुआ?
- 1:12:45सब कुछ लूट के होश में आये तो क्या हुआ?
- 1:12:54जी जो तुम जीने का तरीका पूछने जाते हो, आचार्यों से अगर कोई
- 1:13:01किसी ने कोई कामयाब हो गया हो तो मेरे से जरूर मिले, क्योंकि इनको
- 1:13:10जीने का खुद ही सुलिका नहीं। ये तुम्हें क्या खाक जीने का
- 1:13:20सलीका होता है? संत को?
- 1:13:25इसलिए सदा दिवाली सादगी और आठों पर आनंद।
- 1:13:30ये है जीवन का तरीका सलिका आनंद से हर घड़ी हर पल भरे रहे।
- 1:13:39यह तो उस जीवन का सलिका नहीं नूरोंज को ठसाठस भर लेना,
- 1:13:45वोकबुलरी को प्रगाढ़ कर लेना। अनेक भाषणों का अज्ञाता हो जाना
- 1:13:57यह समझदारी नहीं होती, यह तो तुमने वक्त गंवा दिया।
- 1:14:04कबीर जब पढ़ते नहीं, कागद, कलम, छुओ नहीं, लेकिन उस स्तर तक
- 1:14:12पहुंचा। जहाँ जाकर तुम्हें मानना ही पड़ता
- 1:14:18है कि परमात्मा है तुमने पूछा, मैं शब्द के जवाब दे रहा हूँ, तुम
- 1:14:30इन शब्दों से चिपट बचाओ। तुम थ्रोटिकल बात को सुन लेना,
- 1:14:36मार्ग की तरह और मार्ग की तरह एक रस्ते की तरह सुनकर उसको
- 1:14:42इम्प्लॉयमेंट करना, प्रैक्टिकल क्रियायुक्त करना, न कुछ करने में
- 1:14:49बैठना देखना। न कुछ करने का मतलब न कुछ करना।
- 1:14:55नथिंग टूटो जो होता है होने को। स्वास्थ आएगी आने को विचार आएँगे
- 1:15:05आने दो। किसी ने कुछ कहा था उसका रिएक्शन
- 1:15:12आएगा, आने दो, बेकार आएँगे, विचार आएँगे, विषय आएँगे आने दो लेकिन
- 1:15:23तुम उसी तल पर स्थिति प्रग्र हो। तुम टस्य मस न हो, जिसने यह साध
- 1:15:32लिया एक साधय सब सधय उसने सब साथ लिया।
- 1:15:41तुम सब साधने में लग जाते हो। यह भी जोड़ लूँ, वह भी जोड़ लूँ।
- 1:15:50अब कल ही मेरे पास एक देवी का मैसेज आया है।
- 1:15:57आप किसी तरह बाबा एक मास्टर जी बोलते हैं?
- 1:16:03वो बिल्कुल आप जैसे शब्द बोलते हैं, क्या मैं उसको सुन लिया
- 1:16:07करूँ? मैंने उसे कोई जवाब नहीं दिया।
- 1:16:13अगर मेरे ही जैसा बोलता है तो फिर फैसला क्या है?
- 1:16:23कुछ अलग बोलता है और अगर तुम मुझे सुनता है चलोगे नहीं तो फिर वो तो
- 1:16:35शास्त्रों को पढ़ने जैसी बात है। तुमने मुझे सुन लिया और मान लिया।
- 1:16:42और मानकर बैठ गए और किया कुछ फिर तुम कहीं नहीं पहुँचो चाहे
- 1:16:53तुम्हारा गुरु, खुद कृष्ण राम सुनो।
- 1:17:00खुद वशिष्ट क्यों न हो, खुद जाग्य बल का क्यों न हो?
- 1:17:04खुद गार की क्यों न हो तुम नहीं पहुँच पाओगे, खुद मरना होता है और
- 1:17:15मरना खुद होता है। मने मार्ग ठक न पा।
- 1:17:24उस तल पर चले जाओ, जीस तल पर तुम्हें मानना ही पड़ेगा इस तल पर
- 1:17:33खोपड़ी के तल पर तुम देखा सुनी कहीं पढ़ी लिखी।
- 1:17:44मानोगे? लेकिन संत कहते हैं लिखा लिखी की
- 1:17:51है नहीं देखा देखी बात यह लिखा घोड़ी की बात ही है।
- 1:17:59यह तर्जमा करने की एक्सप्लनेशन करने की बात ही नहीं, यह तो सीधा
- 1:18:05सीधा दर्शन है, दर्शन को कभी एक्सप्लेन करना होता है तुम सुंदर
- 1:18:12दृश्य देख लेते हो हमारे मुख से क्या निकलता है आह?
- 1:18:19बड़ा सुन्दर है क्या तुम उसकी तरमीन भी करते हो?
- 1:18:23आगे एक्सप्लानेशन भी करते हो नाउ इट इस सुफ्फिसिएंट टु से मने
- 1:18:35मार्ग थाक न पा अगर तुम उस तल पर चले गए जहाँ तुम्हें मानना ही
- 1:18:42पड़ा। तो फिर दुनिया में तुम्हें कोई
- 1:18:45ताकत रुकावट नहीं डाल सकती। मन में मार्ग ठक न पा कोई रुकावट
- 1:18:54खड़ी नहीं कर सकता। तुम्हारे रास्ते पे तुम्हें कोई
- 1:18:57कहेगा राधे राधे करो तुम कहोगे ठीक?
- 1:19:01तुम्हें कोई कहेगा पांच नाम करो, राम राम करो, तुम कहोगे ठीक तुम
- 1:19:06उससे झगड़ोगे तुम उससे शास्त्रार्थ भी नहीं करोगे।
- 1:19:16अब कल ही मुझे 1 मिनट। सुभाष चंद्र बोस के बारे में मैं
- 1:19:23कुछ उस अंकित नाम के कोई व्यक्ति जाली ही आई दी होगी।
- 1:19:34सही कौन बनाता है बाबा आप गलत कह रहे हो?
- 1:19:451966 में ताशकंद में यह जो फोटो रिलीज की गई, यह सुभाषचंद्र बोस
- 1:19:55की थी। आपके मुख से ऐसी बातें शोभा नहीं
- 1:20:02थी। मैंने नीचे देखा आप मुझसे ज्यादा
- 1:20:10जानते होंगे सुधार करने के लिए धन्यवाद।
- 1:20:20ऐसे लोगों को मैं ब्लॉक नहीं करता।
- 1:20:26क्योंकि मैंने भी अपनी आँखों से सुभाष चंद्र बोस की लाश में देखी
- 1:20:33इसलिए पक्का मैं भी नहीं। मुझे भी इन्फॉर्मेशन मिली थी
- 1:20:40दूसरों के द्वारा। कि 9 अगस्त की बम आर्गुमेंट में
- 1:20:44नागासाकी पर जो बम गिराया गया उसमें सुभाष चंद्र बोस शहीद हो
- 1:20:50गए। बट आई एम नॉट कन्फर्म।
- 1:20:59यह एक कहीं कहाई बात थी। इसलिए मैंने उसका जवाब दिया अरे
- 1:21:07भाई आप जानते होंगे लेकिन अगर ऐसा है ज़रा सोचो सुभाष चंद्र बोस की
- 1:21:19पुत्री भी थी अनीता बस सुभाष चंद्र बोस।
- 1:21:28जब जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रिया गए तो ऑस्ट्रिया की एक लड़की एमीली
- 1:21:37उनकी पर्सनल सेक्रेटरी बन गए। वो दोनों में प्रेम नहीं हो गया।
- 1:21:48उन दोनों ने शादी कर दी। अमेदी का देहांत 1996 में हो गया
- 1:21:54था। उन दोनों से एक पुत्री भी हुई।
- 1:22:01अनीता। उसको अनीता बॉस कहा गया।
- 1:22:12ज़रा सोचो अगर 66 में सुभाष चंद्र बोस जीवित थे तो क्या कभी अपने
- 1:22:25बच्चे की? अपनी पत्नी की जान, कुछ चोरी
- 1:22:34चुपके कोई पत्र, कोई सूचना, किसी के जरिए खुश मैं जाती पूछना।
- 1:22:51मन नहीं करता आदमी का और सुभाष चंद्र बोस भीतर से बड़े नरम थे।
- 1:22:58उनके भीतर हृदय में खून बहता था। मानवता के प्रति वो क्रूर नहीं
- 1:23:06थे। रिवाज नाटक क्रुवर प्रश्न 45 का
- 1:23:196621 वर्ष बिना चिट्ठी पाती बिना वहाँ गए छुपछुपा के चले जाते?
- 1:23:30कभी याद नहीं आती बच्चों की याद नहीं आती यहाँ लोग मारे जाते हैं
- 1:23:38मुझसे मेरी घरवाली मेरी पुत्री पुत्र से मिलने नहीं देती तड़पते
- 1:23:44हैं सारी सारी रात अपने बच्चों की याद किसे नहीं आती?
- 1:23:50उनसे मोह होता है। ये सवाल है कि मैं अगले पड़ाव में
- 1:23:57बोलेंगे। अगर जीवित होते तो जब जंग हुई
- 1:24:061965 की लाल बहादुर शास्त्री। मेरी नग्न आँखें प्रत्यक्षदर्शी
- 1:24:15हम यहाँ सीमा पर जाकर देखकर आया करते थे।
- 1:24:20हमारे तो पास में ही बाधा बड़ा। तो क्या किसी का मन नहीं करता?
- 1:24:37अपनी धर्मपत्नी को चिट्ठी पाती लिखते हैं, अपने बच्चे को चिट्ठी
- 1:24:41पाती, लिखते हैं कुशलक्षेम पूछे। दूसरी बात कभी आपने ध्यान नहीं
- 1:24:51किया? कुछ अफवाहें ऐसी फाइलिंग और ऐसा
- 1:24:58नहीं है कि झूठा मीडिया नहीं था तब भी था।
- 1:25:05सुभाष चंद्र बोस छिपते क्यों कर रहे थे?
- 1:25:10सुभाष चंद्र बोस जैसा वीर व्यक्ति मैंने जिंदगी में कभी देखा नहीं।
- 1:25:16हिटलर भी उससे कमतर था। इतना वीर तो हिटलर भी नहीं था
- 1:25:26अन्यथा खुद ही अपनी कनपटी पर। रिवॉल्वर रख कर मरता नहीं बहादुर
- 1:25:34लोग ऐसे नहीं मरा बहादुर लोग अपनी मौत मरते हीटर ने खुदकुशी कर ली
- 1:25:48जब उसने देखा मुसुलनी का ये हाल किया गया मुसुल नहीं उसका।
- 1:25:56मैंने बहुत लोगों से सवाल पूछा कि सुभाष चंद्र वो छिपते क्यों कर
- 1:26:01रहे थे? अपराधियों की तरह क्या उन्होंने
- 1:26:03कोई वार क्राइम किया था? क्या उनके ऊपर कोई इंटरनेशनल
- 1:26:07कोर्ट ने वार क्रिमिनल घोषित कर दिया था?
- 1:26:10उनको? जाके ब्रिटिश हकूमत के साथ इंडिया
- 1:26:19हकूमत का कोई एक करारनामा हुआ था कि अगर सुभाष चन्द्र बोस जीवंत
- 1:26:26मिल जाए तो हमें सौंप दें। नहीं मैं ही तो था इकरार करने
- 1:26:31वाला और कौन था ऐसा कोई इकरार नहीं हुआ ना।
- 1:26:37लिखत ना मौखिक कि अगर सुभाष चंद्र बोस जिंदा मिल जाएं तो वह।
- 1:26:47ब्रिटिश गवर्नमेंट को सौंप देंगे। नहीं कोई इकरार नहीं हुआ ऐसा अगर
- 1:26:52किसी व्यक्ति के पास ऐसा सबूत है सरकार में बैठा हुआ व्यक्ति तो
- 1:26:57मैं देनदार हूँ, उस व्यक्ति का ये सब कागजात मेरे हाथों से गुजरे
- 1:27:01हुए है। वह क्यों छिप कर रहा था?
- 1:27:12इतना बहादुर वीर ना तो उसके ऊपर कोई इनाम था, ना की प्रतिबद्धता
- 1:27:21थी, ना की कमिटमेंट थी। ब्रिटिश गवर्नमेंट के साथ ना बहो।
- 1:27:28इंटरनेशनल कोर्ट के द्वारा वॉर क्रिमिनल घोषित किया गया था।
- 1:27:32अगर इनमें से कोई भी बात हो तो मेरे से संपर्क करो, ऐसा कुछ नहीं
- 1:27:41हुआ। वह वॉर क्रिमिनल नहीं था।
- 1:27:47और अगर वॉर क्रिमिनल थे तो वह आईएनए के सभी लोग थे।
- 1:27:53इंटरनेशनल और में इंडियन नेशनल कांग्रेस और इंडियन नेशनल।
- 1:28:05सुभाष चंद्र बोस की इंटरनेशनल आर्मी के ऊपर चले थे।
- 1:28:13मुकदमे जिनको लड़ा था बड़े बड़े वकीलों ने।
- 1:28:18उनमें से जवाहरलाल भी थे और जवाहरलाल।
- 1:28:25तेज बहादुर सप्रू, आसफ़ अली, कैलाश नाथ काटजू, भुला भाई देसाई
- 1:28:35और बरसों बाद जेल की कोठणियों में बंद।
- 1:28:42वकालत का चौगा उतार चूके जवाहरलाल ने फिर से दोबारा वकालत का वो
- 1:28:52चौगा पहनकर उन्होंने पैरवी की है। जवाहरलाल नेहरू जी की जीत?
- 1:29:02जब जीत गए थे आईएएनए के वृद्ध जो देशद्रोह का बनाया था मुकदमा तो
- 1:29:11उसमें सुभाष चंद्र बोस का नाम भी था।
- 1:29:17और सभी मुक्त हो गए थे, फिर छुपने की बात क्या थी, कौन सा डर था?
- 1:29:24उनके मन में कोई डर नहीं था। ये अफवाह उड़ाई हुई थी।
- 1:29:32वरुण उनका देहांत हो गया था। ताशकंद में जब लाल बहादुर
- 1:29:42शास्त्री ने 10 जनवरी को में से याद 11 जनवरी को सुबह तो मेरे
- 1:29:50कानो ने खबर सुनी के प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया श्री श्री लाल
- 1:29:57बहादुर शास्त्री। यह खबर मेरे कान सुना सके।
- 1:30:15वहाँ गए थे समझौता ताशकंद समझौता कर, लेकिन उनका मृत शरीर ये वापस
- 1:30:21आया तो ज़रा देखो वहाँ जो व्यक्ति।
- 1:30:35आपको दिखता है सुभाष चंद्र बोस जैसा वो एक दो भाषियथा उसका नाम
- 1:30:47निकोलस था वह सुभाष चंद्र बोस जैसी।
- 1:30:55नई नक्श थे उसके हाँ हाँ दिखती थी लेकिन सुभाषचंद्र बोस नहीं थे और
- 1:31:04वो भी आपने तो तस्वीर देखकर ही देख लिया।
- 1:31:09ऐसी ही एक तस्वीर इंदिरा गाँधी की मृत्यु के वक्त।
- 1:31:13श्रद्धांजलि देते हुए सुभाष चंद्र बोस की बताई गई पांव की तरफ खड़े
- 1:31:20हैं। इंदिरा गाँधी के पार्थिव शरीर के
- 1:31:25परिणाम किए हैं उसकी शक्ल बिलकुल। तो हमने तो देखा ही नहीं।
- 1:31:32मैंने तो अपने आप से देखी। उनकी शक्ल बिल्कुल सुभाष चंद्र
- 1:31:41बोस से मिलती थी लेकिन सुभाष चंद्र बोस ने वो तो इंडिया की
- 1:31:45तस्वीरें नई दिल्ली की जहाँ इंदिरा गाँधी का पार्थिव।
- 1:31:58लेकिन ऐसे कमेंट करने वाले लोग खुद को ज्यादा समझदार दिखाने की
- 1:32:08प्रवृत्ति के कारण ऐसे ऐसे कमेंट किया करते हैं, लेकिन मुझे कोई
- 1:32:15एतराज नहीं है। क्योंकि मैं भी जानता हूँ कि
- 1:32:21मैंने भी सुनी सुनाई बात कही। जहाँ तक बात है देखा देखी
- 1:32:28अध्यात्म की वहाँ पर तो मैं सीधा अंगूठा लगा देता हूँ।
- 1:32:36क्योंकि मैं आश्वस्त नहीं भी सवस्थ वह है और मैंने देखा है और
- 1:32:50तुम भी उसे देख सकते हो इसी बात तुमने कही, पुत्र।
- 1:32:56क्या तुम मुझे दिखा सकते हो हाँ यही बात बिल्कुल दिखा सकता हूँ,
- 1:33:01मैं भी दिखा सकता हूँ कोई भी संत दिखा सकता है, लेकिन तुम बताओ
- 1:33:10मुझे क्या वह वेकन देख पाए। जब राम कृष्ण ने कहा ठीक है, देखो
- 1:33:22और हालांकि विवेकानंद जैसा साधक मिलना दुर्लभ है, ऐसा शांत था,
- 1:33:28साधक था मनसा वाचा कर्मणा वह दिन भर रात साधना करता था।
- 1:33:35और ऐसा शानदार शिष्य डॉ। जब वह अपने भीतर भीतर और और और
- 1:33:50बहुत गहरा कुआं है। और तुम्हें लगता है कि मैं मरूँ
- 1:33:56कहूँ, बस यही डर तुम्हें वापस ले आता है, इसलिए मैं तुम्हें साहसी
- 1:34:05बनाना चाहता हूँ, क्योंकि मैं जानता हूँ जैसे जैसे तुम भीतर
- 1:34:11जाओगे। बड़े साहस की जरूरत पड़ेगी।
- 1:34:16पग पग पर मृत्यु के साथ सामना होगा तुम्हारी प्रत्यक्ष खड़ी
- 1:34:24होगी मृत्यु मुँह बाय और तुम भय खा जाओगे।
- 1:34:31इसलिए मैं तुम्हें साहसी बनाना सीखाता हूँ।
- 1:34:36यह साहस तुम्हें काम पड़ेगा, बिल्कुल अंतिम वेला में जाकर
- 1:34:41तुमने कह तो दिया, ऐसा तो रोज़ मेरे पास कॉमेंट्स आते हैं।
- 1:34:47बाबा हमें दिखा सकते हो, बिल्कुल मैं किसी को भी दिखा सकता हूँ।
- 1:34:56ऐसा ही सोचा था नरेन्द्रनाथ ने और निरंदनाथ तो वाकई बड़े शानदार भी
- 1:35:05वासु थे। मो।
- 1:35:06मुखु थे पर महात्मा तक पहुंचना चाहते थे, लेकिन उन्हें भी नहीं
- 1:35:13पता था की ये मृत्यु? ऐसे विकराल रूप में मुँह बाएं
- 1:35:18सामने खड़ी मिले, मृत्यु के भय से डरे डरे सहमे समय कांपने लगे तुझे
- 1:35:28रामकृष्णा ने देखा कि पूरा शरीर थर थर कांप रहा है।
- 1:35:33ऐसे में कोई मिसहैपनिंग भी हो सकती है।
- 1:35:36इस थर्राहट में हार्ट की गति रुक जाए, सांस की गति रुक जाए।
- 1:35:44तुम गए इसलिए सच्चा गुरु सही गुरु जल्दी जल्दी तुम पर शक्ति बात
- 1:35:52नहीं करो। तो नरेंद्रनाथ यानी विवेकानंद
- 1:36:00पत्ते की तरह कांपने हुए और इतना कांपने लगे।
- 1:36:04मजबूर होकर रामकृष्णा पर मन को हाथ उठाना पड़ा।
- 1:36:11मेरे माँ भाभी हैं भाई, बहन, भैया दया की भीख मांगने लगा, प्राणों
- 1:36:17की भीख मांगने लगा। वह सुर भी साधक, मुमुक्षु, सच्चा
- 1:36:23मुमुक्षु परमात्मा को पाना चाहता था।
- 1:36:27तुम्हें अभी बहुत रास्ता तय करना होगा।
- 1:36:33ऐसे ही आनंद के खजाने खुला नहीं करता।
- 1:36:40ये वो खजाना है जिसकी चाबी साहस के हाथ में है।
- 1:36:45साहसीवन। इसलिए मैं हर बात में तुम्हें साथ
- 1:36:50सीखाता हूँ इसलिए मैंने राजनीति का यह पन्ना छेड़ा।
- 1:36:59तुम्हारी बुद्धि कहती है राजनीति की क्या आवश्यकता है?
- 1:37:03नहीं, मेरा मसला कुछ हो रहा है। मैं तुम्हें राजनीति के बहाने
- 1:37:07साहसी बनाना चाहता हूँ। मेरा लक्ष्य तो वही है अर्जन के
- 1:37:18तीर के समान चिड़िया की वो आंख। और वहाँ मैं जानता हूँ पहुंचने के
- 1:37:26लिए एक ही चीज़ की आवश्यकता होती है वो होती है मिटने का साहस, मर
- 1:37:32मिटने का साहस, इसलिए मैं जब उठता हूँ तुम्हें साहस का उदय होता है।
- 1:37:47साहस जरूरी नहीं है, बल्कि अनिवार्य भी है सिर्फ एक ही
- 1:37:57क्वालिफिकेशन, साहस, मरने का साहस और जब तुम।
- 1:38:05मरने का साहस जुटा पाओगे तो क्रांति घटित हो जाएगी।
- 1:38:12इसलिए गौरख कहते हैं मरो हे जोगी मरो मरो हे, जोगी मरो, दुश्मन कहा
- 1:38:23करते हैं कि तुम मर जाओ। लेकिन यहाँ संत कहते हैं हमारे
- 1:38:28गुरु है जोगी मरो मरो मरण है मिट् ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मर घोर
- 1:38:40अतीत। पर हम साहस की आवश्यकता होगी और
- 1:38:47अगर तुम संसार में मरे मरे जिए तो फिर तुम्हें मरने का सलीका नहीं
- 1:38:55आता। मरने का भी सलीका होता है, साहस
- 1:39:00से मरा जाता है। तो सुभाष चंद्र बोस इतने कार्य
- 1:39:07नहीं थे, उतना ढेर भुल व्यक्ति। मैंने कभी धरती पे देखा ही नहीं
- 1:39:15है छुपता भरे अपनी जान को बचाता हुआ यह हो ही नहीं सकता इट इस नॉट
- 1:39:19पॉसिबल। और फिर क्यों छपेगा?
- 1:39:27वह तो आके प्रकट हो जाता उसे तो आजादी चाहिए थी आजादी मिल गयी अब
- 1:39:31चढ़ा दो वसूली पे कोई बात नहीं वह छिपता फरेगा अपनी जान बचाने के
- 1:39:37लिए तुमने उसकी। ज़िन्दगी की कुर्बानी को राख में
- 1:39:42बदल दिया। इन संघियो में ये खुद तो कायर है।
- 1:39:52दूसरा व्यक्ति इनसे ज्यादा साहसी न दिखे इसलिए कल तो किसी व्यक्ति
- 1:39:58ने। सुभाष चंद्र बोस को भी देशद्रोही
- 1:40:01बताते हैं। ये देशप्रेमी की परिभाषा ये करते
- 1:40:10हैं कि जिन्होंने अंग्रेजी हकूमत के पांव चाटे, तलवे चाटे जैसे आज
- 1:40:17मीडिया चाट रहा है। इन्होंने परिभाषा ही बदल दी।
- 1:40:30मेरे द्वीतविलोक सुनिंदने नालिका फिर?
- 1:40:43आंख सगी देना मेरे। गीत भी लोग सुने देने देखा फिर?
- 1:41:03आंख। सधी देने मैं दर्द नुकाबा कै।
- 1:41:18बैठा मैं दर्द नुकाबा। कहें बेटा रब न रखदिता पी राधा रब
- 1:41:38न रखदिता। पी राधा।
- 1:41:46की पुच्छ देओल फकीरा उन्होंने परिभाषा में पत्र।
- 1:42:01विकास का नाम विनाश अगर तुम सच में देशप्रेम में हो तो तुम्हें
- 1:42:18इतनी समझ नहीं आई मिस्टर मोदी यह देशप्रेम है क्या?
- 1:42:2512 सालों से लोग तुम्हें गालियां निकालते हैं और तुम्हें मालूम है
- 1:42:31कि ऐसा नहीं कि तुम्हें मालूम है तुम रोज़ कहते हो, मुझे तीन किलो
- 1:42:37गाली पड़ती है, फिर तुम अगर सच में देश प्रेमी होते ना।
- 1:42:46तो देशप्रेमियों की यही शिनाख्त होती गति से चिपते बैठे रहो, नहीं
- 1:42:54रहा सही मोहब्बत तो छोड़ दो। मैं एक बात कहूंगा सिर्फ़।
- 1:43:07मोदी जी, अगर आप में रत्ती भर भी देशप्रेम होता, इतनी गालियां
- 1:43:17सुनने की नौबत न होती। प्रथम बार जब किसी ने गाली निकाली
- 1:43:23थी, तुम उसको जेल की कोठरी में कैद न करते।
- 1:43:29तुम भगवान राम की तरह अपनी सैलरी भेजते हैं, ये लोग इतने परेशान
- 1:43:34क्यों हैं? ये नोएडा के मजदूर मजदूर हैं।
- 1:43:43कोई छह बार सूट बदलना नहीं चाहते। कोई मशरूम खाना नहीं चाहते, कोई
- 1:43:51जहाजों पे घूमना नहीं चाहते। ये काहे का धर्म मचाई है?
- 1:44:00मिस्टर मोदी मैं तुम्हें सही परिभाषा बताता हूँ देशप्रेम की
- 1:44:09तुम आरएसएस वालों ने परिभाषाएं बदल दी।
- 1:44:17तुम नाम बदलने में दक्ष हो। जो पांव चाटता है उसको तुम
- 1:44:25देशप्रेमी कहते हो, जो तुम्हारे मौके पर खरी खरी सुनाता है, उसको
- 1:44:33तुम देशद्रोही कहते हो उस पर यूएपीए लगाकर।
- 1:44:38जेल की काल होठियों में बंद कर देते हो तुम में इतनी सहनशक्ति भी
- 1:44:44नहीं है। राजा को बड़ा विशाल हृदय रखना
- 1:44:48पड़ता है। तुम जानती भी हो ऐसे नहीं के बहरे
- 1:44:53हो गूंके हो, सोचते नहीं। अगर सच में कोई ऐसा प्रधानमंत्री
- 1:45:04होता जिसने ऐसे कांड कतलो गारत के न किए होते, मेरे शब्दों को ठीक
- 1:45:09से समझो। अगर सच में कोई ऐसा प्रधानमंत्री
- 1:45:13होता, तुम्हारा कुर्सी से झपटना इस बात का परिचायक है कि तुमने
- 1:45:18कोई क्राइम किया है और तुम गद्दी से झपट के उस क्राइम को दहशतगर्दी
- 1:45:28के साथ बलपूर्वक दबाना चाहते हो? सब कुछ खरीद खरीद के चुनाव आयोग
- 1:45:35ज्ञानेश कुमार तुमने खरीद लिया राजीव कुमार तुमने खरीद लिया
- 1:45:45न्यायपालिकाएँ तुमने खरीद ली बाढ़ में जाए मीडिया वो खरीद लिया
- 1:45:53तुमने? कोई अखबार तुम्हारी इच्छा के बिना
- 1:45:56वायर कैसे अखबार तुम्हारी इच्छा के बिना छप नहीं सकते, लेकिन इन
- 1:46:05शेर पत्रकारों को हमारा साधु। तुम्हारी ही जीत होगी आखिर में
- 1:46:16सत्यमेव जयते इनके सारे धन के आगम रोक दिया लेकिन फिर भी ये ऐसे शेर
- 1:46:32हैं जो चल रहे हैं। और तुम कौन पढ़ रहे हो तुम क्या
- 1:46:38देख रहे हो? आज तक तुम क्या देख रहे हो?
- 1:46:44वही चैनल जो इसके खुदते हैं, अडानी के हैं, अंबानी के हैं,
- 1:46:49जिनको लूट के इसने सारी संपदा दे दी, अब कोई क्या करेगा?
- 1:46:55तुम कहते हो भाई इसके कौन सा बाल बच्चे हैं, ये काहे को बेईमानी
- 1:47:00करेगा? इसका मन ही बेईमान हो गया।
- 1:47:05वह मित्र के लिए भी बेईमानी कर लेगा।
- 1:47:10देखो स्त्री अपनी थी, वो छोड़ दी। भाई अपने थे वो छोड़ तो दिल दिल
- 1:47:24की बात है भाई दिल आ गया तो परी वे बेकार हो जाती है, दिल गद्दी
- 1:47:32पर आ जाए तो दिल गद्दी पर आ जाए तो परी भी बेकार हो जाती है।
- 1:47:39अडानी पर दिला के अंबानी पर दिला के तुम्हारी सारी सोचें धूल धूल
- 1:47:49स्रित होगी घर तो गवार में लिपट गईं दफन जमीन दो शो में।
- 1:47:58सब कुछ खरीदने के बाद कल ही शायद हंगरी में सत्ता परिवर्तन हुआ है।
- 1:48:09अब तेरा क्या होगा काली अगर ये कतलो गारथ न किये होते?
- 1:48:18तो कोई दिक्कत नहीं थी। छोड़ देते।
- 1:48:22मसला तो ये है के गद्दी छूट जाने के बाद जो बम्बू फंसेगा, बस उसका
- 1:48:31डर है। खुद ही कहने वाले के जीस चौराहे
- 1:48:36पे चाहे मुझे बला लेना खुद ही चौराहे में आने से डरते हैं
- 1:48:50इज़राइल हमारा कभी दोस्त नहीं हुआ और मैं तो एक बात सतह ही कहा करता
- 1:48:57हूँ। एक एक बल्ब को समाप्त कर दो।
- 1:49:03आज समझ आया कि हिटलर सही था, जिसने जिहुदियों की नस्लोजात
- 1:49:11मिटानी चाहिए इतना समझदार व्यक्ति आज समझाया कि उसकी सोच कितनी गहरी
- 1:49:18थी। उसने क्यों ठूंस ठूंस के मारे?
- 1:49:24उसने क्यों इलेक्ट्रिक चैंबर गैस चैंबर के अंदर भून दिए?
- 1:49:29यहूदी आज समझाया कि वो व्यक्ति बड़ा दूर अंदेशी था।
- 1:49:39तुम्हें पता है, हिंदू धर्म के अलावा विश्व में विश्व में विश्व
- 1:49:47में छोड़ो। मैं तो बहुत से अन्य ग्रहों पर भी
- 1:49:51गया हूँ। मूर्ति पूजा कहीं भी नहीं होती,
- 1:49:56एक यही मूर्ख मुल्क है। जहाँ मूर्ति को भगवान माना जाता
- 1:50:07है, खुद तराशा है और नाम भगवान रखा है।
- 1:50:21इजराइल में गौ मास के सिवा कोई मास निकाय इसका मतलब अगर हमारे
- 1:50:32प्राइम मिनिस्टर इजराइल जाते हैं वहाँ गौ मास मिलता है और कुछ
- 1:50:37समझता है। तो खाना साथ में लगे मूर्ति पूजक
- 1:50:47को वो ऐसी गंदी निगाह से देखते हैं कि जैसे गोली की तरह वो आर
- 1:50:54पार हो जाएंगे और तुम तो करते ही मूर्ति पूजा।
- 1:51:00कभी उस मंत्र कभी मंत्र बना दिया लेकिन बात कुछ और है भाई बात है
- 1:51:10इनके पास रग दबी पड़ी है, वो रग है पिस्टन फाइल।
- 1:51:19इतना सच्चरित्र मानव जब पर्दा उखड़ गया तो पोल खुल जाएगी।
- 1:51:30बस अपनी इमेज को जो बनाई थी वह मुश्किल इतने वर्षों में वो ढह
- 1:51:36ढहा कर डेरी हो जाएगी। डर इस बात का है कांपती है रूह इस
- 1:51:47कारण से और कोई कारण इतनी गालियां।
- 1:51:58अब दे रहे हो तुम जौहरलाल को अगर जौहरलाल को किसी ने गाली दी होती
- 1:52:03एक भी जवाहरलाल ततक क्षण रिसाइन देकर परे हो जाते और लाल बहादुर
- 1:52:13शास्त्री ने तो? रेलवे दुर्घटना होने के बाद किसी
- 1:52:17ने कहा नहीं, नैतिक दायित्व लेकर रेजिग्नेशन कर दिया।
- 1:52:25मेरे कार्यकाल में ये घटना हुई। सो आई ऍम रेस्पोंसिबल फॉर दट, सो
- 1:52:30आई रिसाइन। कहाँ से लेके आओगे इतनी छाती 32
- 1:52:41छाती थी इसकी इतनी छाती कहाँ से लेके आओगे नैतिक बल इसे कहते हैं।
- 1:52:54झिंडोरे पीटते रहना मगरमच्छ के आंसू बहाते रहना, माँ को गाली
- 1:52:59निकाल दी क्यों निकाल दी भाई जवाहरलाल की माता को गाली किसी ने
- 1:53:06नहीं निकाली सिर्फ तुमने ही राहुल की माता को गाली निकाली।
- 1:53:16कांग्रेस के बाद शर्म आनी चाहिए थी।
- 1:53:21देश के लिए शहीद हुआ व्यक्ति बहुत मान्यता फिर रहा था तुम्हारी तरह
- 1:53:30और धनु ने नापा। मानव बम बन कर विस्फोट कर दिया
- 1:53:37उसका क्या? सोनिया गाँधी खुद अपनी इच्छा से
- 1:53:43विधवा उसको विधवा बनाया गया, उसका सुहाग उजाड़ के।
- 1:53:51जैसे तुमने 26 लोगों को भेजवा बना दिया, उनके सौहार् उजाड़ के और
- 1:53:58तुमने बातों ही बातों में बात निपटा दी।
- 1:54:01कोई पकड़ा नहीं गया, क्योंकि कोई गुस्सा ही नहीं होता।
- 1:54:07चार लोगों के स्कैच जारी करती है वो कौन सी?
- 1:54:11कौन थे जो पुलवामा में हमारे शहीदों को हमारे रक्षकों को मार
- 1:54:16गए? पता नहीं कौन है जो गुस्सा का है।
- 1:54:24घर में यह जिम्मेदारी किसकी है? मिस्टर अमित शाह तुम गृह मंत्री
- 1:54:30हो। इस देश की सरहद को कोई छू नहीं
- 1:54:38सकता। जीस देश की सरहद पे निगबान हैं
- 1:54:44आँखें तुम सो जाते हो तुम अगला चुनाव लड़ने में व्यस्त होते हो।
- 1:54:52तुम शतरंज के मोहरे बजाने में व्यस्त होते हो।
- 1:54:57ऐसे कैसे कोई कुछ जाएगा और फिर तुम्हारे सिक्योरिटी गार्ड्स क्या
- 1:55:01कर रहे हैं? तो कसूर किसका कांग्रेसियों का
- 1:55:08कसूर है? जिसका दायित्व है उसका है कसूर।
- 1:55:12दायित्व तुम्हारा है। क्या तुम सपना देख रहे हो कि
- 1:55:16कांग्रेस राज़ कर रही है? अरे भाई 12 सालों से तुम ही हो।
- 1:55:31मन्ने मार्ग ठकना पा उस सतल पर पहुँच जाओ जहाँ जाकर तुम्हें
- 1:55:40मानना पड़ेगा आँखों देखी तुम कैसे नेगेलेक्ट कर पाओगे।
- 1:55:47जो सूर्य तुमने देख लिया चमकता हुआ खुली आँखों से तुम उसको
- 1:55:54इग्नोर कैसे कर पाओगे यही बाबा कहते हैं मने मार्ग ठाक न पा।
- 1:56:03वहाँ पहुँच जाओ जहाँ तुम्हें मानना पड़ेगा कि हाँ है, फिर तुम
- 1:56:10भी राम कृष्ण पर मानस की तरह कह सकोगे।
- 1:56:12हाँ वो है, मैंने देखा है तुमने देखा है, देखो।
- 1:56:20मने पथस्यों पर गठित जब तुम्हें मानना पड़ेगा देखकर तो तुम इज्जत
- 1:56:29के साधु इस घर में प्रवेश करोगे जीसको अल्लाह का घर कहते हैं
- 1:56:35जीसको खुदा का घर कहते हैं। जीसको वह गुरु का घर कहते जीसको
- 1:56:42गुरु द्वार कहते मने मगना चरले पंथ जीसको मानना पड़ गया देखकर।
- 1:56:57वह जगह जगह बोखता नहीं करता जैसे इस देवी का कमेंट आया हो।
- 1:57:03मैं मास्टर जी को सुन लूँ भाई मेरे से क्या पूछना है?
- 1:57:10मैं कोई तुम्हारे ऊपर सुप्रीम लीडर लगा हूँ, मैं तानाशाह भी
- 1:57:15नहीं हूँ। मैं तुम्हारी देख रेख भी नहीं
- 1:57:18करता मुझे क्या मतलब तुम चलोगे इस राह पे तो पहुँच जाओगे, तुम किसी
- 1:57:28को सुनो ना सुनो मुझे क्या मतलब है?
- 1:57:35इसमें मेरी परमिशन की कोई भी तो जरूरत नहीं है।
- 1:57:39तुम जब चाहे चुपके से खस कर सकते हो, हाँ, चुपके से आ नहीं सकते,
- 1:57:45मुझे सुन सकते हो, चुपके से तुम दीक्षित नहीं हो सकते।
- 1:57:57मन्ने फ़तसों पर गठजाय मन्ने धर्म सेति संबंध।
- 1:58:03फिर सच्चे धर्म के साथ हमारा संबंध बनता है जब तुम्हें जहाँ
- 1:58:08जाकर तुम्हें मानना पड़ता है। वहाँ सच्चे धर्म के साथ सच्चा
- 1:58:16संबंध जुड़ जाता है। अगर तुम्हें जोड़ना नहीं पड़ता
- 1:58:20अभी तो तुम्हें धर्म के साथ संबंध जोड़ना पड़ता है।
- 1:58:26फिर बाबा कहते हैं कि धर्म के साथ संबंध स्वतः ही जुट जाता है।
- 1:58:33फिर तुम्हें मानना पड़ता है उस जगह पे पहुंचा ऐसा नाम रंजन होय
- 1:58:44किसको नाम कहाँ है? बाबा जी को मन जाने मन को है।
- 1:58:52जीसको मानना पड़ गया वो ही जानता है कि वो क्या है जहाँ गया शब्दों
- 1:59:01की बात है, शब्दों में समझानी पड़ रही है।
- 1:59:05मुश्किल तो है। लेकिन आशा है तुम समझे जाओगे।
- 1:59:15ये इशान की तरह है इसको ऊँगली की टाग के ऊपर मत ढूंढने लग जाना।
- 1:59:22चंद्रमा को इसकी स्ट्रेट लाइन में देखना तुम्हें चंद्रमा दिख जाएगा।
- 1:59:33बाबा कहते हैं मत भोंकते भरो इधर उधर मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा,
- 1:59:38चर्च मत कर जा कर ये तुम्हें भटकाएंगे फिर क्या करो?
- 1:59:49बाबा कहते हैं अपने ही भीतर उतर जाओ, जहाँ भी बैठे।
- 1:59:59हो? बन खोजन जा काहे मेरे बन खोजन जा।
- 2:00:25सरबगयापी सदा अलेपा ह सरबगयापी सदा अलेपा तो है।
- 2:00:42संग समां तो है संग समां। तेरे ही भीतर है तेरे संग ही समं
- 2:00:56रायबो काहे? बन को जनजा काहे?
- 2:01:13धन्यवाद।