Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Jan 26 - एकांत में मिलता है महारस! अगर हम एकांत में ही बैठे रहे तो संसार के काम कौन करेगा? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:21बाबा जी, प्रणब, काला सिंह जघोरिया आप कहते हैं बाबा?
- 0:48एकांत में मिलता है महारस अगर हम एकांत में ही बैठना शुरू हो जाए
- 1:04तो संसार के काम कौन करेगा? आप कहते हैं समूहों में, कम्यून
- 1:13में, संस्थानों में, संस्थानों में, ढेरों में, कुंभों में,
- 1:24परमात्मा नहीं। मिलता।
- 1:29आनंद नहीं मिलता, उत्तेजना होती है और उत्तेजना तथा आनंद का फर्क
- 1:39मैं बहुत विस्तार से समझा चुका हूँ उत्तेजनाएं आती हैं।
- 1:51जीवा से स्पर्श से, आँखों से, कानों से, इंद्रियों से आती है ये
- 2:10उत्तेजनाएँ। लेकिन इन सबसे पारी का अनुभव है
- 2:21कैसे कहते हैं, पगबिन चले सुनेबिन कानू उस आनंद को।
- 2:34किसी प्रकार के उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती, इंद्रियों की
- 2:44आवश्यकता नहीं होती। आप अलग अलग इंद्रियों से समित हो
- 2:51के हम आनंद लेंगे सुख। ले रहे हैं यहाँ तुम गलती खा जाते
- 3:00हो मात्र उत्तेजना है वो फल दो पल के और उसके बाद तुम रीत हो जाते
- 3:13हो। फिर तुम्हें वो ही पलटोपल का रस
- 3:23खींचता है और एक वक्त आता है कि तुम उसके आदि हो जाते हो।
- 3:30इसे ही संस्कार करें। सिगरेट पीने वालों को क्या मिलता
- 3:40है धुआं अंदर बाहर अंदर बाहर क्या मिलता है, फेफड़े गल जाते हैं
- 3:51ट्यूबरक्लोसिस हो जाता है, गला खराब हो जाता है।
- 3:58बहुत से अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
- 4:02प्राण वायु के बदले हम कार्बन डाइऑक्साइड मोनोऑक्साइड लेते हैं,
- 4:08जीवन घटता है और व्याधियों से युक्त होता है।
- 4:19ऐसे ही मुझे वह बनेगा कमी मत बनाना।
- 4:27मुझे उस वक्त समझ नहीं आया। बाद में विस्तार को रुक के बताया
- 4:32गया। दो व्यक्ति अगर इकट्ठा बैठेंगे।
- 4:37तो वह व्यक्ति नहीं रह जाएंगे, वह समय हो जाएंगे।
- 4:41कमल की बात कैसे? क्योंकि दो व्यक्तियों की करने
- 4:49आपस में छिड़ेंगे एक दूसरे आप ज़रा आजमा के देखना।
- 4:56समूह में जो आप फैसला करते हो दो व्यक्ति बैठ के जो आप फैसला करते
- 5:02हो, जब आप अकेले घर में जाओगे एकांत में और उस फैसले पर
- 5:08पुनर्विचार करोगे तो आपका फैसला बदल जाएगा।
- 5:18क्योंकि वह फैसला दो व्यक्तियों के किरणों के मिलाने से हुआ और अब
- 5:26आप अकेले हैं, आपकी अकेलों की करने हैं।
- 5:30आपका फैसला भी बदल जाएगा। दूसरे का फैसला भी बदल जाएगा।
- 5:35इसलिए समूह पागल होता है। जो अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता वह
- 5:44समूह भीड़ कर देती है। भीड़ कितनों की जान ले लेती है,
- 5:51कितनी दुकानें फूँक देती है, कितनी बर्बादी कर देती है?
- 5:59हम व्हीकल्स को फूंक देते हैं, आग लगा देते हैं, हमे क्या मिलता है?
- 6:03लेकिन भीड़ का समूह का सामूहिक तरंग है और सब मिलकर।
- 6:12आप पीला, काला, लाल, हरा, गुलाबी ये सब मिला लें तो क्या रंग
- 6:18बनेगा, अजूबा सा बन जाए? अब आइए बात आपके दो मंत्र में है।
- 6:45एक परमात्मा सही मंत्राव्य वही है, सही लक्ष्य वही है आनंद वाले
- 6:53न पुरुष आनंद को पाने के लिए। एक दूसरा सहयोगी हमें पैदा करना
- 7:03पड़ता है वो संसार क्योंकि भूख भी लगेंगी।
- 7:08जीस यंत्र के सहारे हम चल रहे हैं जीस गाड़ी पर हम बैठे हैं।
- 7:15और पेट्रोल भी मांगेगी, रिपेर भी मांगेगी और धन उपार्जन करना और उस
- 7:25रस के करीब जाना ये दो ही लक्ष्य जब तुमने अपने आप के पास जाना हो।
- 7:38तो अकेले हो जाना धार्मिक समूह यह शब्द ही करता है।
- 7:46धर्म का कभी समूह नहीं होता। धर्म अकेला है अकेला हुए बिना।
- 7:55धर्म मिलता नहीं, शहनाई गूंजेगी, आनंद की धर्म प्रकट होगा जब तुम
- 8:08अकेले हो जाओ साली झूठ। पश्चिम के कवि ने लिखा है लैट में
- 8:23लिव ऑन सीन, अन्नोन साली चुट, एंडनलीमेंट के लैट में डॉ स्टील,
- 8:34फ्रॉम दी वाडा, नटस्टोन टेल। मुझे अकेला रहने दो, मुझे इस तरह
- 8:49रहने दो कि मैं सभी को दिखूं लेकिन मुझे कोई पहचान ना पाए।
- 8:55अननोन पर्सन लेट मी लाइव अन्नोन। एंडन इवेंट लट में डाइ तुम कहते
- 9:04हो? राधे माँ से पूछा गया ये तुम्हारी
- 9:09अंतिम ख्वाहिश का है? राधे माँ कहने लगी मैं जब अमर हूँ
- 9:16तो मेरी आरती पर दो लोग लोग हो, मेरी आरती पर 2,00,000?
- 9:26ये ख्वाहिश है और मैंने जब इनकी तस्वीर देखी मैं
- 9:40इनसे कभी मिला नहीं। बाहर ही नहीं निकला।
- 9:46और माताओं के साथ ये नई नई माताएं पैदा हो गई हैं।
- 9:54कहते भक्तों को प्रसाद देती पहले खा ली थी फिर उल्टी की तरह उन्हें
- 10:00बाहर निकलते हैं फिर वो प्रसाद भाग्य ग्रहण करते हैं।
- 10:05कमाल हो गया। यह भी कोई प्रसाद हुआ?
- 10:12यह तो उल्टी हुई वमिटिंग हुई और उसकी इच्छा भी तो ऐसी ही होगी।
- 10:26जब मैं मरूँ तो 2,00,000 लोग अर्थी के पास क्या हो जाएगा,
- 10:31तुम्हें तो दिखता नहीं होगा तुम्हारे सब यंत्र फेल हो जाएंगे,
- 10:36ना कान सुनेंगे, नाक देखेंगे। तोपों की सलामी देने का कोई फायदा
- 10:43नहीं होता। मरने के बाद लोग सुनेंगे, लेकिन
- 10:48तुम कहाँ सुनोगे? तुम्हारे कानों से चेतना निकल गई।
- 10:58वह जो सुनता था, जिसके कारण वह गया कारण शरीर निकल गया, वह चेतना
- 11:10शरीर छूट गई, जिसके कारण तुम्हारे कान सुन पाते थे।
- 11:27तो अब इस फॉर्मलिशन को अच्छी तरह समझ लेना दोनों ही कामों को करना
- 11:34जरूरी है। परिवार पोषण के लिए पेट पालन के
- 11:40लिए धन कमाना भी जरूरी है। लेकिन धन ही नहीं कमाना है।
- 11:49यह एक आवश्यकता है। जरूरत इतने पागल मत हो जाओ कि
- 11:58जरूरत से ज्यादा कमा लो। इसीलिए संतो ने एक शब्द।
- 12:04अपरिग्रह जितना खा सकते हो पहन सकते हो पहनो खो इतना न जोड़ो के
- 12:16संदूकों को भर लो यहाँ। वीरे ने भी कहा पतंजलि ने भी कहा।
- 12:26नागार्जुन ने भी कहा, जब अपने भीतर जाना हो तो अकेले
- 12:44बैठ जाना। जब धन कमाना हो तो समूह में आ
- 12:50जाना। अब ध्यान से सुन रहे ना मेरी बात
- 12:58दोनों ही करना, किसी को मत छोड़ देना धन कमाना हो तो बाजार में आ
- 13:05जाना और जब तुम धन कमा लो सुफ्फिसिएंट ठीक आज के लिए इतना
- 13:12बहुत। तो दुकान बंद कर दो, घर पे आ जाओ,
- 13:20फिर उस रस को हुई हो, अपने भीतर उतर जाओ।
- 13:26यह रास्ता है अकेले का। यहाँ दो चल नहीं सकते और जो आपको
- 13:39भ्रम देते हैं कि मैं साथ चलूँगा। गुरु आपकी ऊँगली पकड़ के चलूँगा
- 13:43अंत तक साथ नहीं दूंगा और अंत तक जब तुम मर जाओगे तुम्हारी ऊँगली
- 13:49पकड़ के। सचखंड में ले जाऊंगा, यह झूठ
- 13:53बोलते हैं। शराब की दुकान पर लगा हुआ एक
- 14:01मिलाजम मैं अपने घर के सामने खड़ा था।
- 14:07बिलकुल सामने ही पांच फोटो निसार फैक्टरी की बिल्डिंग कोई झगड़ा हो
- 14:14गया। झगड़ा यानी मतभेद, झगड़ा तुम्हें
- 14:25करता है मतभेद अवश्य मनभेद नहीं होता।
- 14:37वह गुस्सा हो गया। शराब पिए होगा।
- 14:44आज कुछ ज्यादा पीली हो गई। मेरे घर के सामने से ही निकला
- 14:48करता था। सैकल के सत्य घटना मुझे याद आ गई।
- 15:03तो मुझे बहुत कुछ बोला तो मैंने कहा भाई रहने दे, चुप हो
- 15:18जा। अगर पीली है तो खरी क्यों करता
- 15:23है? इसका आनंद ले लुत्फ ले।
- 15:32लेकिन उसका जोश बढ़ता चला गया। वह तो गालियों के उधर कहते हैं,
- 15:40मैं आता हूँ तुम घर के बाहर एक हमने थड़ा बनाया था वहाँ पर खड़े
- 15:46रहना। भाग मत जाना अपनी गैलरी में मैंने
- 15:50कहा माता जीके साथ नहीं भागूंगा, तुम आ जाओ
- 16:06अरे तुम तो सिर्फ गाल ही निकालते हो, यहाँ तो मेरे शिष्य 44 थप्पड़
- 16:11मार जाते हैं मेरे। और मैं उनको पलट कर 1 दिन मारता
- 16:21और यह कोई स्वपन की घटना है, यह सत्य घटना है, वह व्यक्ति आज भी
- 16:28जीवंत है। यह बात अलग है कि शर्म की हमारी
- 16:35मेरे सम को नहीं आता और शीष में रहा तो मैंने कहा तुम आ जाओ भाई
- 16:53हमने सोना भी होता है कहता बस मैं ठेकों को ताला लगा के।
- 17:05साइकिल उठाई और आने लगा। मैंने देखा सामने से आ रहा है
- 17:10साइकिल चला के नहीं आया साइकिल हाथ में साइकिल को चलाए ही चलाए आ
- 17:18रहा है शराबी व्यक्ति साइकिल चला के नहीं आया।
- 17:23उसे पता कर जाऊंगा इम्बैलेंस हो जाऊंगा, अनबैलेंस हो जाऊंगा तो
- 17:32सैकल का सहारा लेके आ रहा है और शायद मुझे पीटने की तमन्ना से आ
- 17:38रहा है। कोई बात नहीं जी पटेले कहा तो कुछ
- 17:51है, नहीं तो आया थोड़ी दूर बाउंड्री काफी लंबी है।
- 18:01पांच फोटो फैक्टरी के। तो जब बाउंड्री में शुरुआत किया
- 18:07उसने सड़क के ऊपर सड़क बड़ी चौड़ी है।
- 18:10करीब 100 फुट के ऊपर पर लिप बार आ रहा है।
- 18:15मैं ओर लिप बार खड़ा हूँ, थड़े के ऊपर खड़ा हुआ देख रहा हूँ, उसको
- 18:21धूप से आ रहा है। वह कुछ मुझे देख रहा है आज जुनून
- 18:30है और ही भड़ास से निकालेगा। कल चमन था, आज एक सहारा हुआ देखते
- 18:58ही देखते। ये।
- 19:02क्या हुआ देखने वालों ने देखा है धुंआ?
- 19:19देखने वालों ने देखा हैं धुआं किसने देखा दिल मेरा जलता हुआ।
- 19:40कल चंद आज इस सेहरा हुआ। देखते ही देखते ये।
- 19:54क्या हुआ? मैं आते आते वहाँ विचार ज्यादा
- 20:10घूम रहे थे। पांच फोटो फैक्टरी के सामने गिर
- 20:18पड़ा। इनके शायद साइकिल इम्बैलेंस होगी।
- 20:25शराब पी रखी शराब पीने वाले की एक लक्षण बता देता हूँ।
- 20:41संत भी शराबी जैसा लगता है लेकिन उसकी बातों में बड़ी प्रमाणिकता
- 20:47होती है। बड़ी जागरूकता।
- 20:49बस यही फर्क है, खुमारी होगी, शराबी जितनी और चेतना होगी
- 20:57प्रबुद्ध व्यक्ति दोनों का मिक्सरिषण इसीलिए संतों ने एक
- 21:02शब्द बनाया मद्यहोशी। होश भी है और मद भी है, खुमार भी
- 21:15है, चेतना भी है वहाँ पर गिर पड़ा और गिर पड़ा तो घर उठाने उठाने तो
- 21:26मैं दौड़ा। और दौड़कर वह उसके पास गया।
- 21:34इतने में और आसपास के लोग आ गए और पास में ट्रांसपोर्ट थी, कुछ
- 21:40गोरखा था, पांच फुट फैक्टरी में बाहर खड़ा होता था, बह भागा।
- 21:47उसने उठाया इतने में मैं चला गया, वह मर चुका था प्राणविहीन काया
- 22:09सोचा था ये करूँगा वो करूँगा पता नहीं क्या?
- 22:14खैर, तमन्ना बिचारे की अधूरी दिल में रहती।
- 22:21ये कहानी मैंने क्यों सुना है? ये कहानी शराबी की कहानी नहीं है,
- 22:28यद्यपि है तुम भी जुनून लिए फिरते हो की हम ये करेंगे, वो करेंगे।
- 22:37महल डालेंगे 20 मंजिला 40 मंजिला 100 मंजिला दुबई भूल जाएगा इतनी
- 22:47ऊंची ऊंची मंजले होंगी तुम्हारे सपने हैं, कल्पनाएं।
- 22:53न जाने कौन सा पल मौत की अमानत हो?
- 23:06जुनून भारी है सब में कोई पठानी सूट पहनकर सलवार पहुँचकर समझता है
- 23:16कि मैं बादशाह हो गया। और कोई बादशाह हो भी जाता है तो?
- 23:21कहाँ भाषा होता? है रहता तो भिखमंगा ही है।
- 23:27बस अब बाहर का भिक्षा पात्र छूट जाता है, लेकिन नियत तो मांगने की
- 23:33ही रहती है तो राजा हुआ या भिखारी हुआ।
- 23:40ये राजनीतिक लोग हर चार 5 साल के बाद आपके पास वोट मांगने आ जाते
- 23:46हैं तो मांगने का मतलब अपिक्षुक ही होता है।
- 23:57जब तुमने परमात्मा के पास जाना हो, समी तो अकेले हो जाना।
- 24:05एक व्यक्ति की रेंज छह फुट से लेकर 36 फुट तक जाती है।
- 24:14और किसी किसी व्यक्ति की रेंज 60 फुट तक भी जाती है।
- 24:21एक अजूबा हमने देखा जल में रहकर मीन है प्यासे।
- 24:33कि तुम कमीन बना लेते हो, तुम संस्थान बना लेते हो, तुम ढेर बना
- 24:41लेते हो और पास पास भटके सत्संग सुनते हो क्या खाक सुनते हो
- 24:49तुम्हें ये पता ही नहीं होता। गुरु की आवाज के साथ तुम बैठे हुए
- 25:0010,000 लोगों की करने आपस में टुकरा के गोलमोल हो जाता है।
- 25:06खिचड़ी नहीं यहाँ अन्नकूट बन जाता है।
- 25:11इसीलिए तो तुम कुछ समझ नहीं सकते भीड़ में इसलिए मैं सदा ही कहता
- 25:20हूँ मेरी वीडियो को एकांत में अकेले में सुनना।
- 25:27रात को घर में सोते हुए अकेले में सुनना या किसी उद्यान में निकल
- 25:35जाना वहाँ एकांत में बैठकर सुनना जहाँ आपके आसपास कोई जीवित
- 25:44व्यक्ति ना हो। क्योंकि जीवित व्यक्ति के भीतर से
- 25:47तरंगे निकलते हैं। ज्यादा बेहतर होगा किसी पीपल की
- 25:52छाया में किसी वट वृक्ष के नीचे किसी नींव के नीचे।
- 26:02ये तीन ही वृक्ष मैं सुजष्ट करूँगा।
- 26:04त्रिवेणी कहते हैं, हमारे ऋषियों ने इनकी खोज की थी।
- 26:09जब ये तीनों की तरंगें मिल जाती हैं तो व्यक्ति जो 50 साल में
- 26:15पहुँच सकता है वह मात्र 5 साल में पहुँच जाएगा।
- 26:20जब ये तीनों की तरंगें इकट्ठी होंगी, इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ
- 26:25पेड़ लगाना हो तो त्रिवेणी लगाना पीपल बट नी कुछ ऐसा मिश्रण बनेगा।
- 26:40जो अध्यात्म का गुलजार होगा। ऋषियों की खोज थी अमर त्रिवेणी
- 26:55लगाना, त्रिवेणी लगाने के बाद। फिर समय अध्यात्म के लिए और कुछ
- 27:04नहीं लगाना पड़ेगा और त्रिवेणी की जो पहुँच होती है और करीब 150 फिट
- 27:11तक होती है। 50 गज के एरिया में जो भी व्यक्ति
- 27:18बैठा होगा धीरे धीरे कम होती जाएंगे।
- 27:22लेकिन वहाँ तक पहुंचे त्रिवेणी वट पीपर नीम।
- 27:37मैं कल भी कह रहा था और बहुत देर से।
- 27:46समझदार लोग आपको समझा रहे हैं वृक्षों को मत करना प्रकृति से
- 27:51पंगा मत लो क्योंकि प्रकृति तुमने नहीं बनाई, तुम प्रकृति के अधीन
- 27:57हो, इसको विनाश मत करो और उसका विनाश हम सभी सह रहे हैं।
- 28:08ये भविष्य मल्लिका को बताने वाले लोग कहते हैं कि तूफान आ जाएगा,
- 28:12प्रलय आ जाएगी, उल का पिंड बरसेंगे।
- 28:15अरे भाई बरसेंगे मुख्य कारण प्रकृति से छेड़छाड़ है।
- 28:20तुम्हारी भविष्य मल्लिका में क्या खाक लिखा है?
- 28:23तो मैं भी जानता हूँ। दो और दो, चार और तीन।
- 28:26कोई पागल अनपढ़ भी जानता है? दो और दो चार होते हैं।
- 28:31जब तुम खिलवाड़ करोगे, प्रकृति के साथ तो उल्का विंडी ही तो बरसेंगे
- 28:40या अतिवृष्टि होगी या अल्पवृष्टि होगी या वृष्टि ही नहीं होगी।
- 28:47बारिश ही नहीं आएगी, धूप तेज होगी, 1260 पे जाएगा, 70 पे जाएगा
- 28:58ग्लास, शेर पिघलेंगे, जल थल हो जाएगा, तुम क्या बताते हो भविष्य?
- 29:03मलिका में कोई खास चीज़ लिखी है? यही विज्ञान की बातें हैं।
- 29:08वे कुछ शरारती लोग थे जो जानते थे आने वाला व्यक्ति प्रकृति से भगा
- 29:14लेगा और ये कुछ होगा और हो रहा है और हम रुकने वाले नहीं हैं।
- 29:23मैंने पिछले परोसे बताया। मैंने सुना है अभी किसी सिर्फ
- 29:30व्यक्ति को हजारों एकड़ जमीन मिली है, किसी इंडस्ट्री को लगाने के
- 29:36लिए बिलकुल लगाओ लेकिन थपेड़ों को मत कटने देना।
- 29:48आज विष्णुई धर्म को जागृत होने की पुनः जरूरत जब कोई पेड़ काटने
- 29:55जाए, पेड़ के साथ लिपट के खड़े हो जाना, हमें काटो, पहले हमें काटो,
- 30:01फिर पेड़ को काटो, पेड़ मत काटने देना।
- 30:12क्योंकि पेड़ हमारा जीवन है और याद रहे अगर तुमने पेड़ को कटने
- 30:20दे दिया तो तुमने अपनी आने वाली वंशजों के साथ खिलवाड़ की।
- 30:29क्या उसको ऐसी हवा देख जाना चाहते हो जो जहर हो, प्रदुषित हो जो
- 30:38सांस के द्वारा प्राण वायु ना बने?
- 30:40लेकिन विश्व वायु बने क्या तुम अपने वंशीजों के लिए कमाते हो?
- 30:48इतनी मुश्किलात से तुम धन कमाते हो, चोरी छपोरी करते हो, झूठ
- 30:53बोलते हो, पाप करते हो, तुम चाहते हो कि वह ऐसी हवा में साँस ले,
- 31:01जीने का मज़ा हो फिनलेंड जैसे डिश।
- 31:08जो लगातार बहुत वर्षों से एक नंबर बन रहे हैं।
- 31:13किस चीज़ में दान में भी हैं और हरियाली में भी है मेरे पास स्वीन
- 31:20लड़के बहुत से शीशे मेरे पास आ जाते हैं।
- 31:25कहते बाबा चलो वहाँ है, चलो हमारे पास जमीन है, आपका आश्रम बना देते
- 31:32हैं, लगातार मुद्दों से एक नंबर प्यार है वहाँ हरियाली।
- 31:44यह कंजेशन है, समझदार मुल्क है, उनके नेता समझदार हैं।
- 31:56तुमने मूर्खों को गदियाँ सौंप रखी हैं और जब किसी देश का राजा मूर्ख
- 32:02होगा, वह देश का विध्वंस होना निश्चित है।
- 32:12राजा सुजवान होना चाहिए, प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना चाहिए,
- 32:21प्रकृति को बचाने वाला होना चाहिए।
- 32:23गंगा की सफाई का खाक करोगे हम हज़ारों कारखानों की।
- 32:31गंदगी गंगा में पड़ रही है। इन कारखानों के मालियों को जेल
- 32:45में रहेगा। क्या शराब ना बनेगी और कुछ चीजें
- 32:51ना बनेंगी? तुम घुट घुट कर कैंसराइट से मरने
- 32:58से तो बच जाओ, तुमने देखा कैंसर के बहुत से पेशेंट मेरे पास बात
- 33:08करते हैं, व्हाट्सएप पे उनका दर्द देखा नहीं जाता।
- 33:16दिन भर रात पैन, पैन, पैन, पैन दर्द, ये ज़िन्दगी और फिर पुतिन
- 33:28जैसे लो फिर जिनपिंग जैसे लो। फिर उन जैसे लोग कि उन 150 साल
- 33:39जीने की इच्छा रखते हैं। क्या खाक जिओगे तुम संत का दो पल
- 33:51का जीवन और तुम्हारे लाखों जन्मों का जीवन।
- 33:57दो पल का जीवन और तुम्हारा लाखों वर्षों का जीवन तुम व्यक्ति को
- 34:05अमर कर सकते हो, लेकिन याद रखो एक भीतर की अमर्ता भी होती है।
- 34:13बाहर से इस पंचभौतिक को अमर कर दोगे तो ये विशाल को संतो का वचन
- 34:20और संतो का अनुभव और मेरा खुद का अनुभव हम भीतर से वो तत्व है शरीर
- 34:28बदलने से तो वसंक्षी जी ऋणानी यथ। नवाणी घृणाति नरो प्राणी तथा श्री
- 34:37राणी बिहारी जिर न ने आईं से आती नमानी देंगे।
- 34:42जैसे शरीर के कपड़े बदल लिए वैसे शरीर बदल लिया।
- 34:461 दिन जाए। फिर कब तू क्यों हो थर थर से
- 34:55क्यों हो बाबन जब जी साग लिखा था तीन चीजों
- 35:08को बचा ले पवन गुरु कहने का डंक पवन गुरु पानी पीता।
- 35:19माता धरती महत्त्व ये तीन चीजों को बचा है माता, पिता और गुरु
- 35:28इन्हीं का हम समन करते हैं और तीनों को ही हमने।
- 35:42अंधा धुंध सपरे अंधा धुंध रे नदियाँ, तो मैरी लाखों मछलियाँ मर
- 35:54जाती हैं और फिर तुम कहते बाबा दुखी।
- 36:01जब इतने जीवों को तुमने मार दिया बेकसो तो दुखी फिर मैं होऊंगा,
- 36:15तुम ही तो दुखी हो, तुम ही तो हो। ये लोग कह देते हैं बाबा जब तुम
- 36:32कहते हो अकेला मैं सोखी हूँ तो हमारे अंहकार को ठेस लगती है।
- 36:36मैंने कहा लगनी चाहिए, ठेस लगेंगी तो परिवर्तन आएगा, ठेस लगेंगी तो
- 36:45तुम्हारे भीतर। कंपैरिजन उमड़ेगा और कंपैरिजन के
- 36:52साथ, फिर तुम मेरे जैसा बनना चाहोगे?
- 37:01मैं कहता हूँ कॉम्पिटिशन ही करना है तो संतो के साथ करना।
- 37:08संसारिक लोगों के साथ कॉम्पटीशन मत करना, धन के अंबार जोड़ लोगे
- 37:14और संघ संघ धन के दुख व्याचारक दुख का भी अंबार खड़ा कर लोगे।
- 37:21पैरेलल कॉम्पटीशन करना है? तो संसारिक लोगों से मत करना कि
- 37:29मैं प्राइम मिनिस्टर बन जाऊंगा। प्राइम मिनिस्टर से दुखी व्यक्ति
- 37:32कोई भी नहीं होता ट्रम्प से दुखी व्यक्ति तुम ढूंढ सकते हो किम
- 37:37उनसे दुखी व्यक्ति तुम ढूंढ सकते हो कुछ दिन से दुखी व्यक्ति तुम
- 37:41ढूंढ सकते हो इनके चेहरों की तरफ देखना।
- 37:50जैसे लड़की मर गई हो और अभी दबा के आए ऐसे थोबड़े हैं तुम देख लो
- 37:58ना गौर से जब मैंने ट्रंप को पहली बार देखा।
- 38:02मुझे पुत्र ने बताया, यह अमेरिका का प्रेसिडेंट है।
- 38:05पहली बार जब बना। मैंने कहा अरे या तो जेल से भाग
- 38:10किया है, इसका चेहरा तो देखो या जेल जाने की तैयारी कर रहा है।
- 38:17दोनों में से एक बात है, मेरी बात को शायद लोग समझेंगे नहीं।
- 38:25अपने आप को बंधन में डाल लेना। इससे बड़ी जेल क्या और मैं के 10
- 38:32फिट के कमरे में बैठा हूँ, मैं मुक्त हूँ बाहर जाने का जी ही
- 38:37नहीं करता मेरे लिए जेल नहीं। मैंने खुद अपनी जेल निर्मित की
- 38:48मेरी मर्जी जब जहाँ जा सकता हूँ लेकिन जेल जो वास्तव में जेल है
- 38:56उसको जब तुम चाहो तब बाहर नहीं जा सकते वो तो पक्की जेल वो तुम्हारे
- 39:03वश में नहीं। इसी को ही तो तुम मुक्ति कहते हो,
- 39:07इसी को ही तो तुम बंधन कहते हो, तुम तुम्हारी मान्यताओं के साथ
- 39:13बंधे हो तो जेल में हो तो तुम तुम्हारी मान्यताओं को तोड़ दी हो
- 39:21तो तुम मुक्त हो इतनी सी बात है। इसको आप गांठ बांध लो।
- 39:29जितनी मान्यताएँ उतनी बड़ी जेल। तिहाड़ जेल तो कुछ भी नहीं जितनी
- 39:35मान्यताएँ तुमने मान ली उतनी बड़ी जेल।
- 39:39और जितनी मान्यताएँ कम होती गई, उतनी जेल कम होती गई।
- 39:43फिर छोटी सी जेल और जेल में तो मैं भी बैठा हूँ।
- 39:47मैंने अपने आपको पहले से तैयार कर रखा है।
- 39:5210 फिट के कमर में बैठा हूँ और इतना आनंदित हूँ कि तुम्हें क्या
- 39:57बताऊँ। ये मैं तो बोलता हूँ तुम्हें दुखी
- 40:00करने के लिए तुम्हारे भीतर कॉम्पिटिशन की ज्वाला भड़क जाए।
- 40:09तुम भीतर संकल्प करो के हम भी सुखी होंगे।
- 40:15हम भी बाबा जैसे आनंद। मैं झूमते हुए बने हैं।
- 40:21कृष्ण सब कुछ करते हैं, 40,00,000 लोग मरवा देते हैं और ज़रा भी
- 40:27दिमाग में वो नहीं आता। प्रसन्न चेत हैं, वैसे ही
- 40:30बनसरियां बजाते हैं आनंद से युक्त।
- 40:42मधुवन मेरा धिका नाच रे। मधुवन।
- 40:53राधिका नाच रहे गिरधर की मुहरिया बाजरे गिरधर के।
- 41:11मुरली हवजोरे मधुबन में राधी का न छे रे?
- 41:24ऐसे कभी नाची हम राधी का तुम्हारे?
- 41:30ऐसे ही तुम्हारे भीतर बैठी राधा चेतना कभी नाची नहीं नाची तो इसको
- 41:38नचाओ आओ झूमो नाचो गाओ कृष्ण के संग।
- 41:48आओ मधुबन मेले चलूँ तुम्हे सितारों।
- 41:55पे ले चलो दिल झुम जा। बाहरों में।
- 42:18नेचलू। हाँ जो तुमको सितारों पे।
- 42:32सितारे बहुत हो पड़े, है सच कांड बाहुबली पकड़ के नहीं, जिंदा जी
- 42:39लेके जाऊंगा। हे चलो दिल झूम जा।
- 42:48मुर्दे के बाद क्या झूमेगा? दिल ही नहीं होगा मुर्दा भी कभी
- 42:53असर देखा तुमने? और अगर मुर्दा हँसने लग जाए ना तो
- 42:57तुम सब भाग जाओगे, देखो क्या नहीं जा रहा होगा?
- 43:03अगर मुर्दा सहसा हसने लग जाए, उठ के बैठ जाए तो तुम्हारी गति क्या
- 43:11होगी? ज़रा दृश्य को अपनी आँखों के
- 43:15सामने ले जाओ, मुर्दा सहसा उठ जाए, तुम लकड़ियां बांध रही हैं?
- 43:22और मुर्दा उठ जा, बैठ जा हँसने लग जाए तो तुम वहाँ टिकोगे तुम
- 43:31मैराथन की दौड़ से भी आगे निकलोगे, इतनी तेज गति से वो उससे
- 43:37आगे वो उससे आगे घर पे जाकर सांस रहोगे।
- 43:43तो सचखंड में मरने के बाद पगला गए हो, क्या आप मरे जगह पर लो अरे
- 43:56मरने के बाद तुम्हे सचखंड ले जाए। मरने के बाद हमारे एक यहाँ
- 44:01ब्राह्मण था, फरसे में मेरी मासी जी का बेटा था, दूर का अकेला था।
- 44:16शादी नहीं की हुई नहीं कोई काम धाम थोड़ा बहुत था बस।
- 44:24गुजर बसर हो जाता। दो वक्त का खाना मिल जाता वह वह
- 44:30मर गया तो समुद्र के पुजारी ने एक ट्रैक्टर जा रहा था गंदगी को
- 44:39उठाने वाला गटरों का। सब मलबा कूड़ा इकट्ठा करके जाते
- 44:44हैं। वह जा रहा था ट्रॉली वह उनसे बोला
- 44:50कि भाई बात सुनो ये लोग ₹50 उन जमाने में ₹50 बहुत होते थे, इसको
- 44:58जहाँ से उठाओ। और इस गंदगी की ट्राली में डालो
- 45:02और जाके शमशान में फेंक देना कोई न कोई तो कर ही देगा संस्कार तो
- 45:09मरने के बाद तुम्हारा क्या ख्याल है?
- 45:15उसकी गति नहीं होगी बिल्कुल। मरने के बाद लाज का क्या होता?
- 45:21तुम फूंक देते हो, भरसम बना देते हो, आजकल तो भरसम भी इतनी सी बनती
- 45:25है। शवदाह गृह इलेक्ट्रिक के हैं 800
- 45:35डिग्री सेल्सियस तापमान। इतनी सी बजती है रात हड्डी भी
- 45:40नहीं होती। मरने के बाद शरीर की गति क्या
- 45:49होगी? कुछ भी हो जाए तो तुम्हारे लिए तो
- 45:56पर्ल होगी। गीदड़ को शेर खाने लगा तो गीदड़
- 46:01कहने लगा देखो मेरे को मत खा जाना परला आ जाएगी शेर कहने का परला आ
- 46:09जाएगी तुम्हें खाने से परला कैसे तुम्हारी जैसे बहुत से गिदड़
- 46:14मैंने निकाल लिया। वो कहते हैं वो गीदड़ और होंगे।
- 46:20गिधड़ चालाक प्रण अगर तुमने मुझे खा लिया तो परिला आ जाएगी देख तू
- 46:29परिला लाना चाहता है, फिर तो तू भी नहीं रहेगा।
- 46:35तो मांस खाने वाला मोटे दिमाग का होता थोड़ा शाकाहारी बड़े महीन
- 46:43दिमाग के होते शेर कहने लगा क्या प्रमाण है कि परला आ जाएगी?
- 46:56कहते देखो मुझे भाई तुमसे डर लगता है।
- 47:00थोड़ा दूर निकल जाने दो फिर बताऊँगा तो तेरा क्या पता लगे तू
- 47:06राज़ भी गुलवा ले और फिर कहाँ जाए मुझे और खाये ना तो चोट फट पहुंचा
- 47:12दे, पंजे मार दे इतना ही बहुत। बेटा चल दूर चला जा, दूर चला गया
- 47:22और दूर चला गया और दूर चला गया। कहता बता भाई अब तो बहुत दूर चला
- 47:26गया है, तू कहता देखो मैं थोड़ा सा दूर और चला जाऊं, अभी मुझे पता
- 47:33है तू कितनी रफ्तार से चल सकता है।
- 47:36जब मैं पाऊंगा तो मेरे पास दौड़ के नहीं आ सकता तो मैं बताऊँगा
- 47:42कुछ ही आवाज़ में बताऊँगा शेर तो बड़ा उससे सुख हुआ।
- 47:49यह तो अजीब सी बात है एक गीदड़ को मैं खा जाऊंगा प्रला सारी दुनिया
- 47:55में आ जाएगी। तो बहुत दूर निकल गया ऊंची आवाज
- 48:00देके कहा कि बता दो भाई गीरतड़ कहने लगा शेर जी बात सुनो, जब
- 48:07तुमने मुझे ही खा लिया तो परले मेरे लिए तो आ गई ना?
- 48:12और इतना के के बाद? तो तुम मर गए, उसके बाद कोई ऊँगली
- 48:21पकड़े पकड़े ना पकड़े, ये किस मुर्ख ने कहा है कि अगला जन्म
- 48:25होता है पूछो इस्लाम से वो कहते नहीं होता अगला जन्म।
- 48:33आंधी दुनिया से ज्यादा इस्लाम और ईसाईयत हैं।
- 48:42लोकतंत्र के हिसाब से भी देखोगे तो लोकतंत्र के हिसाब से भी ये
- 48:48जीत जाएंगे। तुम्हारा सनातन तो छोटा सा है,
- 48:58तुम्हारे सनातन की कितनी सी संख्या है?
- 49:04तुम जानते हो दुनिया की आबादी 800,00,00,000 मानो।
- 49:16देखिए, लोकतंत्र को भी देखें तो दो 230,00,00,000 ईसाई हैं, सबसे
- 49:23बड़ा धर्म ईसाई और वह दूसरा जन्म नहीं मानता।
- 49:33उनसे जवाब देना तुम्हारे बाबा के मरने के बाद इन्हें पता है बात
- 49:40खत्म हो जाएगी तो हम मरने के बाद आएँगे।
- 49:45आपकी ऊँगली पकड़ेंगे। और सच्च कंडे में ले जाएंगे।
- 49:49इसलिए मैंने कल के वीडियो में डाला था।
- 49:52देखो जो मिलता है जीते जी मिलता है तुम धन कमाते हो जीते जी पद यश
- 50:00मान सम्मान जीते जी बुराइ अच्छाई जीते जी।
- 50:08बुरा भला करते हो जीते जी स्वर्ग नरक जीते जी मैंने किसी ब्राह्मण
- 50:14से बात हुई, उनका बात सुनी, गर्व प्राण का पाठ करा था।
- 50:19माताजी स्वर्गवास हो गया। मैंने कहा क्यों गपो बोलता है?
- 50:28मेरी एक बात का जवाब दे, यहाँ जिसने बात किया अगर वो नर्क में
- 50:37भोंगेगा तो यहाँ हॉस्पिटल्स में क्या भोग रहा है?
- 50:41यहाँ तो सुखी रहना चाहिए। हॉस्पिटल में क्यों दर्द भोग रहा
- 50:47है? यहाँ?
- 50:48कैंसरराइटर से मेरे पास शुरू हो जाते हैं बाबा दर्द भी होता है
- 50:54बाबा ये बिमारी मेरे बच्चे को घुमारी इसको बिमारी उसको बिमारी
- 50:59मेरे को बिमारी वो उसको बिमारी। ये क्या है?
- 51:03ये सुख के परिणाम है, ये पापों के परिणाम है।
- 51:09ये पुण्य के प्रमाण नहीं है और अगर पापों के परिणाम तुमने यहाँ
- 51:18भोग लिए हॉस्पिटल्स में। और तुम्हें तुमने देखा हॉस्पिटल
- 51:23में कितनी किताबें होती हैं? मेरी आंख में ऑपरेशन कराना था।
- 51:30सुबह से शाम तक इंतजार करना पड़ा। आँख तुड़वानी है तो इंतजार कर।
- 51:42ऐसा हाल हो गया है जो दर्द तुम यहाँ सहोगे वो किस पाप का फल है
- 51:48मुझे इसको और फिर कोई बाकी रह जाएगा नरक में भोगने के लिए ये
- 51:57तुम्हारी कल्पना है। ब्राह्मणों की चालाकी है
- 52:01ब्राह्मणों की दुकानदारी चलाने के फॉर्मूला और जो सुख तुमने जहाँ
- 52:07राजसी भोग भोग ली है, कोई बिचारा भूखों मर रहा है और कोई जहाजों पे
- 52:18उड़ रहा है। किसी के शरीर पे वस्त्र नहीं और
- 52:23कोई छः बार साड़ियाँ बदल रहा है। जो सुख यहाँ भोग रहे हों तो फिर
- 52:33स्वर्ग में क्या खाक भोगोगे? ये दोगलापन ये सनातन धर्म नहीं,
- 52:45हिंदू धर्म सीखाता है और एक तो मैं बात करता हूँ एक भाषा में
- 52:52हिंदू गली होती है। गुंडे को को, नीच को, ये गाली है,
- 52:59हिंदू हिंदू कहते है। अब ये बताओ कि मरने के बाद ये
- 53:11गुरु आएँगे तुम्हारी ऊँगली पकड़ेंगे तुम्हारी मान्यता ठीक कि
- 53:14उनकी मान्यता ठीक। वो कहते हैं कि दूसरा जन्म है फिर
- 53:21किसको मानोगे वो तुम्हें पागल कहेंगे तुम उनको पागल को।
- 53:26और लोकतंत्र के हिसाब से जनसंख्या उनकी तो मैं बता रहा था
- 53:30230,00,00,000 तो हैं यहाँ पर ईसाई 200,00,00,000 यहाँ पर 5657
- 53:40मुल्क हैं इस्लाम क्या? यह यहाँ पर इस्लाम के
- 53:48230,00,00,200 करोड़ ये इस्लाम के 430,00,00,000 इनका हो गया है तो
- 53:59लोकतंत्र के हिसाब से ही जीत गए ना?
- 54:05पर हिंदुओं की जनसंख्या कितनी तुम जानकर हैरान हो।
- 54:11हर सातवाँ व्यक्ति हिंदू है, छः व्यक्तियों को छोड़कर तो छः
- 54:18व्यक्ति ज्यादा होते हैं या एक व्यक्ति ज्यादा होते हैं।
- 54:22हर सातवाँ व्यक्ति हिंदू है। हिंदुओं की संख्या कितनी है?
- 54:27120,00,00,000 और शुक्रकारों के 120,00,00,000 आंकड़े में आ जाती
- 54:37है। तुम 120,00,00,000 होंगे नहीं।
- 54:41इसमें से 88% जनता वो है जो तुमने अतीत में ठुकराई हुई।
- 54:49ये दीन, हीन, पिछड़े, अति पिछड़े, दलित जिनको तुम हिंदू मानते हो,
- 54:56तुम तो बौद्धों को भी हिंदू मानते हो और तुम्हें जानकर हैरानी होगी
- 55:03बौद्ध धर्म हिंदू धर्म से थोड़ा सा ही कम है।
- 55:08अगर हिंदू धर्म 120 है 120,00,00,000 करीब करीब आधे बोध
- 55:13हैं 50,00,00,000 ये 50,00,00,000 बीच में से निकालोगे तो तुम्हारे
- 55:18हिस्से में आएगा ठन ठन गोपाल 70,00,00,000 अकेले बुद्धों को
- 55:25निकालकर। इनमें से जैन निकाल दो सिक्ख
- 55:29निकाल दो, पिछड़े निकाल दो, दलित निकाल दो, अति पिछड़े निकाल दो,
- 55:37बैकवर्ड निकाल दो, तुम बाद में बचोगे।
- 55:43अब क्या बताऊँ शर्म आते। 12% है हिंदू तुम इतना गर्व मत
- 55:54किया करो इतराया मत करो इतना तुम इतनी संख्या में नहीं हो लोकतंत्र
- 56:02तुम कहते हो कि हम। वोटों से जीते हैं।
- 56:05वोटों की गिनती तुम्हारी ज्यादा नहीं बस बात तो ये है डवाई मिनट
- 56:15अभी पिछड़े, दलित। ये थोड़े से अशिक्षित हैं और तुम
- 56:22पूरे प्रयास कर रहे हो की ये अशिक्षित रहे बाबा साहब अम्बेडकर
- 56:26न होते, मैं उस महान युग पुरुष की नमन करूँगा।
- 56:36ऐसे व्यक्ति कभी कभी आते हैं। जो धरती को स्वर्ग का सपना दिखा
- 56:44के चले जाते हैं और 1 दिन वो सपना साकार हुई जाता है।
- 56:50कोई कोई आता है, कभी कभी हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती।
- 56:56बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा भर पैदा तो नमन करो दलितों
- 57:05तुम उठो ये ब्राह्मण पुकार रहा है, मैं उ वैसा ब्राह्मण हूँ।
- 57:15मैं न्यायकारी ब्राह्मण हूँ, इंसान हूँ बस यही।
- 57:21अपराध में हर बार करता हूँ। आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ,
- 57:40आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ बस यही।
- 57:50अपराध में हर बार करता हूँ आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ।
- 58:06देखिए तीन बातों को याद रखना। भूखे भजन न होए, गोपा लो, ये लो
- 58:15अपने कंट्री में लो, सबसे पहले पेट भरा हो।
- 58:20मैंने एक दो बातें बताई। जब आप संसार में हो तो भीड़ में
- 58:26चले जाना जरूर। क्योंकि रोजगार कमाना भूखे से भजन
- 58:36ये लो अपनी और दूसरा, जब आपने अपने भीतर जाना तो सारे समूह को
- 58:45छोड़ दो, एकांत में चले जाओ। सबके घरों में नवास में कोई ना
- 58:50कोई जगह तो होगी आखिर सोते तो हो तुम चारपाई पे नहीं तो किसी बात
- 58:57बगीचे में निकल जाना वहाँ आराम से अपने भीतर उतरना, ये तो संसार के
- 59:06तेर के। इसके बाद भी अच्छी जाती है।
- 59:13बहुत गहरे चले जाओगे तो तुम्हें तुम बंधन में हो या तानाशाही में
- 59:21हो या के मुक्त हो, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 59:26गुरु नानकदेव तानाशाही में ही पैदा हुए मुसलम राज़ सारे गुरु
- 59:31तानाशाही में ही पैदा हुए मुस्लिम राज़ तो बाहर की तानाशाही से
- 59:39परमात्मा तक जाने का कोई बाधा नहीं आता, लेकिन वो।
- 59:46यात्रा अलग है। तुम सभी तो भीतर नहीं जाओगे।
- 59:49कोटिण में कोई एक चलत है कोटिण चलत एक अब पहुँच जाता है।
- 59:54आज मैं बहुत जनों की बात कर रहा हूँ, वो थोड़े से लोग हैं, चलेंगे
- 1:00:01भी थोड़े से पहुँचेंगे भी थोड़े से।
- 1:00:04लेकिन बहुजनों की बात है जिन्हें आज खाने को कुछ मिलता नहीं और
- 1:00:09मिलता है तो बड़ा एहसान होता है। गला।
- 1:00:13ये भी कोई बात है? करदाताओं के पैसे से हृदय गया
- 1:00:19अन्न पांच किलो अगर दिया जाता है तो कहता है कि मेरे नमक को हराम
- 1:00:23मत कर दिया। तुम्हारा नमक कहाँ से आ गया?
- 1:00:27तुम तो खुद ही बिकमंगे तुम्हारा नमक कहाँ से आ गया नमक के लिए तो
- 1:00:34जो आंदोलन किया गाँधी ने किया डाडी वॉच तुम्हारा नमक कहाँ से आ
- 1:00:41गया? उसकी दात तुम उसकी देन आज खा रहे
- 1:00:46हो और तुम बड़े स्याह श्रद्धान हो।
- 1:00:50तुमने पहले जो लोग राज़ के योग थे उनको ठुकराना शुरू कर दिया उनको
- 1:00:55बदनाम करना शुरू कर दिया कुछ बिकाऊ मीडिया को खरीद।
- 1:01:04समझदार व्यक्ति को जो अक्सफोर्ड केम्ब्रिज यहाँ से पड़ा, उसको
- 1:01:12पप्पू कहना शुरू कर दो, जिसने सब कुछ बनाया।
- 1:01:19देश गरीब था, अभी ताजा आजाद हुआ था और ताजा तुमने घर देखे होंगे।
- 1:01:24बच्चों के जब बच्चे अलग अलग होते हैं ना तो कोली चमचा प्लेट, थाली
- 1:01:32गलास तक नया लाना पड़ता है। हम नए नए आजाद हुए थे।
- 1:01:38किस चीज़ की? वो कंडीशन तुम्हें मिले नहीं,
- 1:01:43तुम्हें तो हरा भरा बाघ मिल गया और तुम्हें बातें आती हैं ना?
- 1:01:52हरा भरा बाघ मिल गया तुम्हें तुम्हें आरएसएस से पूछुंगा यह।
- 1:01:59गैर लाभकारी संस्था के पास इतना धन कहाँ से आया?
- 1:02:03कोई बात नहीं, हम हिसाब ले लेंगे जनता तुम्हें पता नहीं तुम किसी
- 1:02:16और उड़ान में फिर रहे हो। अटल बिहारी वाजपेयी की शाइनिंग
- 1:02:20इंडिया में? हम धरातल की बात को जानते हैं।
- 1:02:27146,00,00,000 हैं तो एक 2,00,00,000 लोगों की पुकार को
- 1:02:34सुनकर समझती हूँ कि हमारे साथ। वो बात मैंने कंप्लीट कर दी थी कि
- 1:02:45लोकतंत्र जो है वो ईसाईयत और मुस्लिम इन धर्मों के हिसाब से
- 1:02:54दूसरा जन्म तो कौन आएगा? आखिरी में जब दूसरा जन्म होते ही।
- 1:03:04तुम मानते हो? सरब के दूसरा जन्म होता है, जानते
- 1:03:08नहीं हो। मैं नहीं कहता कि दूसरा जन्म,
- 1:03:14लेकिन मैं जानता हूँ कि दूसरा जन्म होता है।
- 1:03:19तुम कहते हो दूसरा जन्म होता है तो तुम मानते हो कि दूसरा जन्म
- 1:03:24होता है और इसमें बड़ा विशाल अंतर है इसको तुम समझना बात को जीस दिन
- 1:03:32तुम उस तन पर जाकर जान लोगे कि दूसरा जन्म होता है तो बात कुछ
- 1:03:36अलग होगी। अब मैंने अपना सारा अध्यात्म का
- 1:03:42पूरा कोर्स पूरा कर लिया। मेरा ग्रंथ पूरा हुआ।
- 1:03:45ग्रंथ के बाद अब तो मैं छोटे छोटे प्रश्न अब तो मेरा शौक ग्रंथ तो
- 1:03:53मेरा पूरा जो मैंने बोलना था, जो मेरी थी।
- 1:03:58दर्शन शास्त्र नहीं, दर्शन शास्त्र नहीं अनुभव शास्त्र एक
- 1:04:05दर्शन से मैंने कुछ नहीं कहा। खोपड़िया से मैंने कुछ नहीं कहा,
- 1:04:10मैंने देख के कहा जो भी कहा। देखने से ही भ्रम मिटते हैं।
- 1:04:21संशय जब तक बना रहेगा, जब तक तुम बुद्धि से काम लोगे।
- 1:04:26जीस दिन तुमने आंख से देख लिया, उस दिन तुम्हारे संशय समाप्त हो
- 1:04:32जाएंगे। देखिए भूखों तो हम मरने।
- 1:04:36नहीं देंगे। ऐसा नहीं होगा कि सारी संपत्ति को
- 1:04:43तुम 124 सेठों के हाथ में दे दो, हम छीन लेंगे, वी वांट टु स्नेच।
- 1:04:58हम जरूरतों को छीनना जानते हैं। ध्यान रखना हम आगे हैं।
- 1:05:10अब भूखा कोई किसी पर नाजायज देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलेगा।
- 1:05:20राजनीतिक व्यक्तियों पे बिल्कुल नहीं चलेगा, सिर्फ वो ही लोग
- 1:05:27अपराधी होंगे जिन्होंने अपराध किया है।
- 1:05:33बलात्कार, हत्या। एस।
- 1:05:39जिन्होंने हत्याएं की हैं हमारे पास है नार को, कितने भी बड़े पद
- 1:05:48पे रहा हो। आखिर 1 दिन तो कड़ी बात था, हम
- 1:05:56फिर से दोहराएंगे। इतिहास के पन्नों को खोलेंगे।
- 1:06:05मैं कह रहा था देखने से सभी भ्रमण जाते हैं देखने से साहस आता।
- 1:06:16देखने से बल मिलता है शक्ति को जब तुम शक्ति को नकन आँखों से देख
- 1:06:23लेते हो तो सब झूठ विदा हो जाते हो।
- 1:06:32बाबा नानक ने कहा है। तर गए हो मेरे मन का संसार उधर।
- 1:06:54गए हो मेरे मन का संसार उतर गए हो मेरे मन का।
- 1:07:12संसार मन का संसा जब ते दरुल संपा।
- 1:07:29जब तै दर्शन पा ठाकुर ठाकुर ठाकुर ठाकुर ठाकुर।
- 1:07:49तुम सरनाई आयो ठाकुर तुम सरनाई आह उतर गयो मेरे।
- 1:08:09मन का संसार जब दर्शन हो जाता। है।
- 1:08:20उस्तत्व का? सही समर्पण उस वक्त होता है, उससे
- 1:08:30पहले तो शंकाएं बनी ही रहती हैं, संदेह बने ही रहते हैं, संदेह
- 1:08:40मुक्त नहीं होता, दर्शन से पहले संदेह विदा नहीं होता।
- 1:08:46तुम संशय ग्रस्त रहते ही और संशय आत्मा गणेश्यति भगवान कृष्ण कहते
- 1:08:52हैं संशय उस दिन खत्म होगा। जीस दिन तुम दर्शन करोगे उस स्थल
- 1:08:57पर जाकर की वह है उस दिन तुम भक्ति भी हो जाओगे उस दिन तुम
- 1:09:03ज्ञानी भी हो जाओगे। उस दिन तुम से दवि हो जाओगे और उस
- 1:09:07दिन तुम दार्शनी कवि हो जाओगे। ये है सच्चा दर्शन तीसरी बात पहली
- 1:09:18पेट भरा होने से भूखे भजन ये लो अपनी कंठी वाला।
- 1:09:31दूसरा जो किसी मार्ग पर चल रहा है उसके मार्ग को छेड़छाड़ मत करो,
- 1:09:38हिंदू है, मुसलमान है, सिख है, ऐसा ही है, पारसी है, योदी या
- 1:09:41खुशबू है, सबको उसके मार्ग पर चलने का अधिकार है।
- 1:09:49एकांत में बैठ जाओ। आनंद में बैठ जाओ और तीसरा
- 1:09:55स्वतंत्रता अगर तुम्हारे दिमाग पर भीड़ जा रहे हैं, डिक्टेटर बैठा
- 1:10:05रहा, वह तो और रात को 8:00 बजे आएगा?
- 1:10:16और नई ही बात कह देगा। समझदार व्यक्ति को राज्यपाल का पद
- 1:10:23खत्म, राष्ट्रपति का पद खत्म निर्वाचन आयोग के जीतने भी आयोग
- 1:10:30हैं। सिर्फ कानून के अलावा सब चुनेगी
- 1:10:38जनता क्यों की लोकतंत्र है तुमने नहीं चुना है तुम्हारे संविधानिक
- 1:10:52पथ? जो आज गरज रहे हैं उनके पास कोई
- 1:10:57क्वालिफिकेशन नहीं। जनता चुनेगी, जनता चुनेगी जनता ये
- 1:11:08संविधान बनाने में थोड़ी गलती हो गयी।
- 1:11:13जो अनपढ़ है वो अनपढ़ है। अनपढ़ का मुकाबला कभी नहीं हो
- 1:11:20सकता। बड़े के व्यक्ति के साथ पढ़ा लिखा
- 1:11:23व्यक्ति बड़ा सुझवान होता है, दयालु भी होता है।
- 1:11:28वह ऐसी मुड़ताई नहीं करेगा कि मैं राज़ कर लूँ।
- 1:11:32कहाँ मूर्खता की मनमोहन सिंह ने की मराज करूँ?
- 1:11:37जबकि उसके पास सब कुछ था इंटेलेक्चुअलिटी थी सभी समझ थी सब
- 1:11:48जानते थे वो। कहाँ राधाकृष्णन् ने कहाँ पढ़े
- 1:11:54लिखे लोगों ने कहाँ हिम्मत की के तानाशाह बन जाए कहाँ जौहर लाल
- 1:12:01हिम्मत की के तानाशाह बन जाए पढ़े लिखे लोग।
- 1:12:09एक क्वालिफिकेशन निर्धारित होनी चाहिए और वो कम से कम मास्टर
- 1:12:14डिग्री, कम से कम मास्टर डिग्री और झूठी नौ जो संस्था जो
- 1:12:21यूनिवर्सिटी झूठा सर्टिफिकेट डिग्री दे।
- 1:12:26शुड बी हैंग्ड अप? वह कोई भी यूनिवर्सिटी हो चाहे
- 1:12:34दशमी का सर्टिफिकेट ही नकली देंगे।
- 1:12:38दे शुड बी हैंग? ये कानून में व्यवस्था होनी चाहिए
- 1:12:43और पढ़ा लिखा व्यक्ति कम से कम मास्टर।
- 1:12:46वह ही इलेक्शन में खड़ा हो सकता है।
- 1:12:51नहीं तो सभी गधे, घोड़े मूर्ख सभी खड़े हो जाएंगे जिनके पास देले की
- 1:12:59अकल नहीं और फिर जैसा उनका दिमाग होगा, वैसे ही दुखों को चलाएं।
- 1:13:05मैंने कुछ ज्यादा नहीं कहा है। तुम घबराओ मत ऐसा चलने का आदेश
- 1:13:15भविष्य का देश बराबर में चलना है। 18 ट्रिलियन डॉलर हम चार पे अटके
- 1:13:22खड़े हैं, वो भी पता नहीं है के नहीं।
- 1:13:27जीस चीज़ को कम करना चाहते थे। सोना कितना था 18 में सोना मैंने
- 1:13:37₹30,000? आज ₹1,25,000 है, महंगाई कम है,
- 1:13:55खाने को रोटी क्या बात है? आज क्या है?
- 1:14:01तुम्हारी मूलभूत आवश्यकताओं कहाँ से कहाँ पहुँच गई?
- 1:14:05ये अच्छे दिन हैं। अच्छे दिन इन्हें कहते हैं।
- 1:14:10सड़ा दिल मोड़ दे सड़ा दिल मोड़। यार वदनीतया यार वदनीतया चंगा
- 1:14:31कैइन की तेया? बड़े दिन मोड़ दे साडा दिल मोड़।
- 1:14:55हमें तो वो ही चाहिए हमारे दिन भाई रामदेव सर ₹30 पेट्रोल और हम
- 1:15:12में इतनी हिम्मत नहीं कि हम इनकी गर्दन में हाथ डालने कॉलरों में।
- 1:15:19वैसे कॉलर इनके होते हैं, ये जानते हैं कि कॉलर में हाथ डालने
- 1:15:23वाले आएँगे इन सारे प्रपंच गर्वों ने इकट्ठा होकर देश को एक अन्ना
- 1:15:34हजारे बाद में शकल ने की। अरे तू भूखा मरना है यहाँ, मैं
- 1:15:43भूखा मर रहा हूँ 13 वर्षों से बैठा हूँ तो क्या भूखे मरने से
- 1:15:50मैं देश को नरक में घुमाता हूँ, ये तुमने अच्छा किया है?
- 1:15:59आरएसएस की शस्त्र शुरू से ही हमने ध्यान नहीं दिया।
- 1:16:04गाँधी को महाराज देखिए, जो बड़े काम करता है गलतियाँ भी उससे होती
- 1:16:08हैं तो तुम कर रहे थे भाई तुमने कुचर न पकड़ा।
- 1:16:14जो काम करेगा वह गलती भी करेगा। इंसान है तो इसका मतलब उसको गोली
- 1:16:21मार दे। जब तेरा हिसाब लिया जाएगा।
- 1:16:29सारी आरएसएस और बीजेपी को कहता हूँ।
- 1:16:33जब तुम्हारा हिसाब लिया जाएगा तो फाई फाई का हिसाब लिया जाएगा।
- 1:16:44ये कहाँ से आया है जी ईंट कहाँ से लगेंगे कैश कहाँ से आया, जमीन
- 1:16:49कहाँ से आई? लेके आओ कागज़ तुम का के जमाने
- 1:16:53वालो हम तुमसे का के जमाने चले। मारे दिन मोल से मारे दिन।
- 1:17:17यार बद नी त्या। बद नी त्या यार बद नी त्या चंगा
- 1:17:25काई नी त्या बड़े। दिन मोर दे।
- 1:17:39धन्यवाद।