Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 May 25 - ध्यान में क्या करें? मन क्या है इस पर काबू कैसे पाए? अपने अंतस में उतरने के लिए रामबाण मंत्र!
Transcript
- 0:01आस्थाओं के व्यथाओं के व्याधियों के भटकाओ के के मूल में क्या है?
- 0:22आपदाओं के व्यथाओं के व्याधियों के भाटकाओं के मूल में क्या है?
- 0:40और इस पर विजय पाने का मूल मंत्र क्या है?
- 0:49बाबा जी आज कृपा करके हमें मूल मंत्र समझा दें कि हम कैसे इस पर
- 0:55काबू पाएं। करण सिंह लीजिए ध्यान से सुनना
- 1:08छोटी सी वीडियो बनाऊंगा और इसे संजो कर रखना हृदय में।
- 1:21आफतों के भटकाओं के सुविधाओं के तुम्हारे कोई भी क्ले कष्ट
- 1:32व्याध्यों के मोद में है मानव। इसके मोल में मन है मन ही है कारण
- 1:52एक मात्र कारण दूसरा कोई नहीं। इसका हल क्या है?
- 2:05तो लीजिये आज इसका रामबाण हल मैं आपको बताता हूँ।
- 2:17अब गौर से समझे ना सभी जीवंत प्राणियों में मन है मनुष्यों में
- 2:35मन है। मनुष्य शब्द बना ही मन से मनुष्य,
- 2:42मन, शब्द जो मानसी युक्त है, वह मनुष्य, वह मानव।
- 2:57इसका उपाय क्या है? मन एक उलझन है।
- 3:05मन एक गहरी गुंडी है जो सुलझाई नहीं जा सकी आपसे।
- 3:16कितने गुरु आये चले गए आपने सुना बड़ी शांति से सुना बड़ी गहराई से
- 3:25सुना, लेकिन उसको इम्प्लिमेंट नहीं कर सके तो आज आपको एक मंत्र
- 3:31बताता हूँ मैं। मन का स्वभाव है भटकना और अगर मन
- 3:42भटके ना तो फिर आपको कुछ नहीं कहता।
- 3:52इसका उपाय ध्यान से समझे मन भटके तो भटकने देना जैसे कोई दूर कहीं
- 4:08आग लगी। हम उसको बुझाने की कोशिश करते
- 4:13हैं। कहीं दूर हमें आग की लपटें दिखाई
- 4:20पड़ती हैं, बस हम इतनी ही दूर हैं।
- 4:22मन से आग लग जाती है हमें। उसकी लपटें दूर आकाश में दिखाई
- 4:36पड़ती हैं। क्या हम उनको भझाने की चेष्टा
- 4:39करते हैं? नहीं करते तो हम जानते हैं यह हम
- 4:47इतनी दूर हैं, हमारे पास कोई साधन नहीं।
- 4:51कि हम इसको बुजा दें। पहली बात मन भटकता है, मन का
- 5:03स्वभाव है भटकना, इसको भटकने तो तुम कहोगे।
- 5:13यह उच्छृंखल हो जाएगा, यह स्वच्छंद हो जाएगा नहीं होगा, यह
- 5:20उच्छृंखल और स्वच्छंद तब होगा जब तुम इसको अपनी शक्ति दोगे,
- 5:28तुम्हारी शक्ति के बिना। यह उश्रृंकल और स्वच्छंद नहीं हो
- 5:34सकता तो पहली बात इसको भटकने दो। मन का दूसरा नाम भटकन है और तुमने
- 5:48पूछा भटका। भटकाव मन ही का दूसरा पर्यायवाची
- 5:54है भटकता है भटकने दो तड़पता है तड़पने दो।
- 6:07जो करता है करने दो मान को समझो बात को तुम कहाँ फंसते हो इसके
- 6:14जाल में अब इसकी तरकीब क्या है आपको फंसाने की वो समझ लो तुम
- 6:23इसके जाल में फंस जाते हो। इसको भटकने से रोकने के लिए तुम
- 6:37इसमें इंटरफेरेंस करते हो, मन में घुस जाती हो।
- 6:46मन को शांत करने की चेष्टा करते हो ये चेष्ठों को बंध कर दो।
- 6:54मन भटकता है इसे भटकने दो। पहली बात।
- 7:05मन को से रोको मत दूसरा दूसरा प्वाइंट है इसके पीछे मत चलो
- 7:14अनुसरण मत करो अनु करण मत करो, मन तुम्हें कहता है, बड़ी दूर।
- 7:25यहाँ तो दुख है आओ कहीं और चलें आओ कहीं ऐसी जगह चलें जहाँ हमें
- 7:41कोई जानी ना कोई पहचानी ना। बिल्कुल अनजान बे पहचान कोई भलाई,
- 7:54ना कोई रुलाई ना कोई पूछे ना वहाँ चले जाएं मन कहेगा।
- 8:05दूसरा मैंने क्या बताया इसका मूल मंत्र इसके पीछे मत लगो।
- 8:13तुम्हारी शक्ति के बिना ना ये बह सकता है ना ये कहीं जा सकता है
- 8:22अगर कहीं जाएगा। तो तुम्हारी शक्ति के संग जाएगा।
- 8:27अगर तुम इसको शक्ति नहीं दोगे तो मन में कोई शक्ति नहीं जो तुम्हें
- 8:32कहीं ले जाएगा। ये तुम्हारी ही दी हुई शक्ति है
- 8:39जिससे मन भटकता है। मैंने आपको एक उदाहरण दी थी।
- 8:45कि हम साइकिल चला रहे हैं। अचानक हमने साइकिल चलाना, पैडल
- 8:53मारना बंद कर दिया तो पैडल मारना। बंद करते ही साइकिल रुकेगा नहीं।
- 9:08थोड़ी दूर तक जो तुमने बैटल मारने में पहली शक्ति लगाई, उस शक्ति के
- 9:17सहारे यह साइकिल थोड़ा चल गई। चलेगा और जब तुम्हारी दी हुई
- 9:25शक्ति समाप्त हो जाएगी तो यह वही गिर जाएगा।
- 9:33ये साइकिल की बात नहीं कर रहा हूँ मैं ये मैं तुम्हारे मन की बात कर
- 9:38रहा हूँ। मैंने जब भी ऐसा उदाहरण दिया,
- 9:42सैकल के लिए नहीं दिया, तुम्हारे मन के लिए दिया तुम्हारा मन ऐसी
- 9:47सैकल है जिसका पैटल तुमने मार दिया और फिर अचानक तुम्हारी समझ
- 9:52में आया कि नहीं इसको पैटल नहीं मारना, इसको शक्ति नहीं देना।
- 9:58तो तुम शक्ति देना बंद कर दिए, तुमने पेटल मारना बंद कर दिया, तो
- 10:05तुम अभी भी डर रहे हो की ये चलेगा, चलेगा, चलेगा तो सही,
- 10:11लेकिन थोड़ा सा चलेगा। जितनी शक्ति तुमने पैडल मारने में
- 10:17लगा दी इससे पहले बंद करने से पहले उतनी दूरी तक तो ये चलेगा।
- 10:26तुम इसी मुगालते में रह जाते हो कि मैंने तो पैडल बंद कर दिया, ये
- 10:32गिरा क्यों नहीं? तो ठहरों थोड़ा सा धीरज रखो,
- 10:38तुम्हारी दी हुई शक्ति से ही चल रहा है तुमने पैडल मारना बंद कर
- 10:45दिया यह पर्याप्त है इट्स सुफ्फिसिएंट।
- 10:52जैसे ही तुम्हारी लगाई हुई शक्ति तुमने पैडल मारना बंद किया और
- 10:58तुम्हारी लगाई हुई शक्ति इसको थोड़ी दूर तक घसीटेगी फिर शक्ति
- 11:05समाप्त हो जाएगी और इसकी कोई औकात नहीं।
- 11:09सायकल अपने बल के ऊपर कभी नहीं चल सकता।
- 11:13ऐसा ही तुम्हारा मन, तुम्हारा मन अपनी शक्ति के बल पर नहीं चल
- 11:18सकता, यह घरेगा अवश्य करेगा। इससे कोई शक्ति नहीं चलाने वाली।
- 11:26तुम्हारे सिवा। तुम चलाओगे तो चलेगा नहीं तो नहीं
- 11:32चलेगा ठीक पहला बात ये भटकता है भटकने लो जहाँ जाता है जाने दो
- 11:44तुम इसको स्वतंत्र छोड़ दो। तुम इसकी पहरेदारी चौकीदारी मत
- 11:51करो, जाने दो, इसे भटकने दो, तुम इसकी कोई सुध सार न लो।
- 12:07क्योंकि यह भटकेगा? यह जाएगा तुम्हारी शक्ति से जाएगा
- 12:12और जब तुम इसका निरीक्षण करोगे तो तुमने इसको शक्ति दी।
- 12:17अब इसे समझाना। बहुत से लोग इसका निरीक्षण करने
- 12:20लग जाते हैं। तुम्हारा निरीक्षण का बल इसको
- 12:25शक्ति प्रदान करता है। तुम इसकी तरफ देखोगी मत।
- 12:30मन भटकता है भटकने दो भटकता है, भटकने दो और दूसरा इसका।
- 12:45अनु करण मत करो, इसके पीछे मत लो, ये कहेगा बड़ी बोरियत है।
- 12:53यहाँ कोई मन को बहलाने वाला नहीं है।
- 12:59आओ कहीं चले कोई हिल स्टेशन यहाँ वैसे भी गर्मी है।
- 13:09है। थोड़ा वक्त बीत जाएगा तो घड़ी के
- 13:14लिए सुकून आएगा। मन अपनी दलील देता है।
- 13:22और बड़ी सुंदर दलील होती है, बड़ी गहरी क्योंकि मन ने सदा से
- 13:26तुम्हारे साथ चालाकियाँ की और चालाकियाँ इसकी रास आ गई।
- 13:32तुम इनके पीछे लगे हो तो इसको चालाकियाँ भागे और दूसरा क्या है
- 13:39इसके पीछे मत लगो। इसका अनुकरण इसका अनुसरण मात्र
- 13:44करो, वहीं थोड़ी देर में ठहर जाएगा।
- 13:54गिर जाएगा मन। जैसे मैं उदाहरण दिया करता हूँ कि
- 14:03गंधला पानी है उसको कांच के ग्लास में पाके एक नुक्कड़ में रख दो
- 14:11थोड़ी देर और आराम से सो जाओ। रात को सोते वक्त इस गंदले पानी
- 14:18को शीशे के गला में डाल के अलग से रख दो।
- 14:26कोई छेड़छाड़ नहीं सारी रात तुम सोओगे सारी रात पानी ठहरा रहेगा
- 14:32और सुबह तुम पाओगे, माटी अलग हो गई, नीचे बैठ गई।
- 14:36और शुद्ध जल ऊपर आ गया। दोनों अलग हो गए।
- 14:40क्यों अलग हो गए क्योंकि तुमने कोई छेड़छाड़ नहीं की?
- 14:46अगर तुम गजोल मारते रहते और फिर इसको गजोल मारके देख लो तो यह
- 14:52पानी फिर गंधा हो जाएगा। इस गंधलेपन को ही तुम कहते हो
- 14:59भटकन इस गंधलेपन से ही तुम तंग हो, बदहाल हो और गंधला बनाया
- 15:09तुम्हीं ने। इसमें गचोल डालकर बार बार हाथ
- 15:15गचोल मार देते हैं, हिला देते हैं उसको बैठी हुई माटी फिर पानी में
- 15:25घुल जाती है, फिर पानी गंधला हो जाता है तो पहली बार भटकता है।
- 15:32तड़पता है जाने दो जहा जाता है इसको रोको मत, दूसरा इसके पीछे मत
- 15:41रखो, यह कहेगा चलो बाजार चले, एक गुलाब जामुन खाएंगे, एक बंगाली
- 15:50रसगुल्ला खाएंगे। इसको कोई जवाब न दो, तुम जवाब
- 15:58तलबी करने में लग जाते हो। ज़रा समझना बात को भटकता है भटकने
- 16:05दो बोलता है बोलने दो। कुछ तुम्हें सुझाव देता है देने
- 16:11दो उस सुझाव को ना इंकार को ना स्वीकार करो ना उसके पीछे लग कर
- 16:20बाजार में जा के रसगुल्ला खो ना इसको डांटों डपटों।
- 16:28भला विचारों से कोई डांट डप करता है?
- 16:32खुद ही के विचार है, खुद ही की शक्ति से उत्पन्न हुए हैं।
- 16:40इनको डांट लगाने का मतलब खुद से लड़ना हो गया, खुद की शक्ति से
- 16:46टकरा न हो गया। बात कह रहे है थोड़ी समझना, इसको
- 16:51भटकने देना और इसके पीछे भी मत लगना, ये तुम्हें कहेगा चलो
- 16:57फ़िल्म देखना बहुत दिन हो गए, अच्छी लगी।
- 17:02ये फ़िल्म बहुत बढ़िया मजेदार फ़िल्म है।
- 17:052 घंटे 3 घंटे आराम से कट जाएंगे। वैसे भी गर्मी है, एयर कंडीशन में
- 17:12बैठेंगे, बड़ा मज़ा आएगा, मजेदार गाने सुनेंगे तो इससे ये मत तो हो
- 17:20कि नहीं जाएंगे या जाएंगे फिर जाएंगे, देखेंगे नहीं।
- 17:25नो रिप्लाय इसे कहते हैं, सरता ना जवाब देना, ना पीछे लगना, ना तर्क
- 17:37वितर्क करना। जैसे कुछ हुआ ही ना हो कहीं दूर।
- 17:44आग लग गई। उसको बचाने की चेष्ठा ना करो,
- 17:48कहीं दूर कोई बोल रहा है पता नहीं किस्से बोल रहा है।
- 17:56इसको समझाने की चेष्ठा मत करो, इसके पीछे भी मत लगाओ।
- 18:03तीसरा सबसे अहम इसको कोई सुझाव मत दो नो सुजेशन टु माइंड सुझाव तुम
- 18:19सुझाव देते हो देखो। तब मैंने तुम्हारी बात मानी।
- 18:23अब हम कल ही तो जा के आए। अभी 10 5 दिन ही तो हुए हैं, अभी
- 18:30तुम रुको देखेंगे, करेंगे, सोचेंगे जाएंगे ऐसा कुछ मत करो।
- 18:39इसको सुझाव मत दो, इससे कोई कमिट मत करो, क्योंकि यह मात्र एक
- 18:45विचार है और यह विचार तुम्हारी शक्ति से बना है और इस विचार में
- 18:53कोई ताकत नहीं है। जो तुम्हें थर्रा दे, तुम्हें
- 18:57भटका दे तुम्हारे जीवन को अशांत कर दे, तुम शांति के भंडार हो,
- 19:06तुम अपनी अवस्था में स्थित रहो इसको भटकने दो जहाँ जाता है।
- 19:15थोड़ी देर में चौक जाएगा क्योंकि इसके पीछे की शक्ति तुम देना बंद
- 19:19कर दोगे। तुम इसका निरीक्षण मत करो।
- 19:22कहाँ जाता है, क्यों जाता है, देखिए कहाँ जाता है कहीं नहीं
- 19:27जाता ये तुम्हारी शक्ति से ही जाता है जहाँ जाता है।
- 19:36भटकता भटकने दो भटकाता तुम भटकाओ मत तुम्हें भटकता तो तुम इसके
- 19:46पीछे मत रखो। तीसरा इसको सुझाव मत ये कहेगा चलो
- 19:54पिक्चर देखे मत कहो के हफ्ता पहले तो देखे वही तो फ़िल्म है, ये
- 20:03अच्छी नहीं है या अगली फ़िल्म देखेंगे नो रिप्लाय कोई जवाब
- 20:08नहीं। मूढ़ता के कभी जवाब दिए जाते हैं,
- 20:13यह तो एक पागलपन है और पागलपन का तुम क्या जवाब दोगे?
- 20:19और तुम्हारे ही अपने विचारों का पागलपन है, यही तुम्हें सारा दिन
- 20:24रात उलझाये रखता है। और देखो तुम्हारी ही शक्ति है,
- 20:30बड़े मज़े की बात है, दुनिया समझ नहीं पाती, अपनी ही शक्ति से यह
- 20:35तो लड़ने बैठ जाते हैं, यह समझाने बैठ जाते हैं।
- 20:46जब वो भटकते है तो डांट डपट करते हैं।
- 20:49क्यों जाते हैं वहाँ? नहीं तीनों में से कुछ नहीं करना
- 20:55भटकता है। भटकने दो इसको डांट डपट मत करो,
- 21:02इसका अनुकरण मत करो। ये कहेगा चलो वहाँ चलो वहाँ चलो
- 21:06बड़ा आनंद आया था तुम इससे जवाब भी मत दो आया होगा ये भी मत कहो
- 21:17अगर तुमने ज़रा सा भी हस्तक्षेप कर दिया उस पानी की तरह।
- 21:22अगर तुमने ठहरे हुए पानी में थोड़ी सी अंगुली भी फराह दी तो
- 21:26गचोल बज गया फिर पानी गंधला हो जाएगा समझना तुम इस पानी को ठहरे
- 21:35ही रहने देना। ये कोई भी उपद्रव करता है करने
- 21:41देना ये कहेगा खाली क्यूँ बैठे हो राधे राधे जपनों इसे ये मत कहो कि
- 21:48क्या होगा इससे नहीं गुरूजी तो कहते हैं इससे कुछ नहीं होगा,
- 21:55इसको जवाब मत दो, ये कहेगा राधे राधे करो तो चुप रहो।
- 22:01ये कहेगा थोड़ी कमाई हो जाएगी चलो थोड़ी दुकान खोल लेते हैं, एक
- 22:06घंटा पहले यहाँ पड़े पड़े क्या करते हो?
- 22:10कोई जवाब मत दो नो रेस्पॉन्स नो रिप्लाय मन का स्वभाव भटकना
- 22:22भटकेगा स्वभाव है भाई बच्चे का स्वभाव उछल कूद करना उछल कूद
- 22:28करेगा तो करने दो ना उसे उछल को क्या रोकते हो?
- 22:36तुम्हारे ही विचार हैं, तुम्हारी ही शक्ति से उत्पन्न हुए मुर्दे
- 22:39में विचार रहता है, क्योंकि मुर्दे में शक्ति ही नहीं है।
- 22:46मुर्दे में शक्ति ही नहीं तो विचार कैसे रहेगा?
- 22:49तो इसीलिए मुर्दे में कोई हलचल नहीं होती, न विचारों की होती है,
- 22:53न शरीर की होती है। ऐसे ही तुम जीवंत हो और जीवंत में
- 22:59लहरें उठेंगी वो जीवंतता के कारण उठेंगी।
- 23:04वह तुम्हारी शक्ति है। इसमें अंतर्निहित की हुई इसको
- 23:10भटकने लो कितनी देर भटकेगा? नहीं भटकेगा ये?
- 23:15थोड़ी देर में बस रुक जाएगा। जितना तुमने शक्ति दिया इसको उतना
- 23:19ही भटक पाएगा। ये समझना उससे ज्यादा नहीं
- 23:28भटकेगा। जैसे ही तुम्हारी दी हुई शक्ति
- 23:32समाप्त हुई, यह ठहर जाएगा उस साइकिल की भांति।
- 23:38जिसका पैडल मारना तुमने थोड़ी देर पहले बंद कर दिया था और उस पैडल
- 23:44के द्वारा दी हुई शक्ति जब समाप्त हो जाएगी वह रुक जाएगा, गिर जाएगा
- 23:49ऐसे ही तुम्हारा मन गिर जाएगा फिर तुम नहीं कहोगे बाबा मन तंग करता
- 23:55है। मन तंग करता है, तुम्हारी इच्छा
- 24:00से तंग करता है, तुम तंग होना चाहते हो या तुम अज्ञानी हो,
- 24:04तुम्हें मन का पता नहीं तुम्हें मन का स्वभाव अच्छी तरह से आश्रम
- 24:10के लिए ना मैंने तुम्हें सरल भाषा में तुम्हारी भाषा में समझा दिया
- 24:14है। भटकता है भटकने दो झगड़ता है किसी
- 24:24के साथ झगड़ने दो तुम इसको देखो भी मत ये झगड़ा कर रहा कर रहा
- 24:30सपने संजोरा संजोरा। ना इसमें हस्तक्षेप करो ना इसको
- 24:36कोई सुझाव दो, ना इसके पीछे लगो। ये तीन नियम हैं भटकना, इसका
- 24:45स्वभाव ये भटके का अनुसरण मत करो। अनु करण मत करो, इसके पीछे मत
- 24:52रखो। ये कहे फ़िल्म नहीं जाना तो चलो
- 24:59अपन तीर्थ यात्रा करते हैं। अपन भाई जी जाते हैं तुम कोई जवाब
- 25:07न देना, कुछ न देना माँ शांत। सुझाव बना दो क्या करोगी वहाँ
- 25:17जाके मक के गया गल मुकदी ना तीर्थ गया।
- 25:31गदा मुख दी ना पावें सो सो नमाज़ कराइए, हाँ सो सो गोते लाइए ये
- 25:48समझाने की चिंता मत करो, इसके आगे प्रवचनकर्ता मत बनो।
- 25:55यह बोलता बोलता रहेगा तुम ना इसका अनुसरण करो ना इसको झिड़को ना ही
- 26:06इसको सुझाव दो आज नहीं कल चले जाएंगे आज वैसी भी तबियत अन्ना
- 26:14साज़ है। कुछ मत कहो तुम शांत बने रहो,
- 26:18समझा आ गया तुम्हें इसको प्रैक्टिकल करो पहले दिन तुम्हें
- 26:27शांति मिल जाएगा, हो सकता है बन भटके क्योंकि संस्कार बहुत
- 26:33पुराने। लेकिन अगर तुम्हे फॉर्मूलेशन आ
- 26:38गया ठीक से तो तुमने कंट्रोल की चाभ भी अपने हाथ में ले ली ये
- 26:47चलता है तुम्हारी शक्ति से और तुम इसका निरीक्षण करके।
- 26:54इससे झगड़ा करके इसकी बातों का जवाब देके इन्हें सुझाव देके इसका
- 27:00अनुसरण करके, इसका अनुकरण करके, इसको झिड़क के शक्ति देने के
- 27:07अलावा और कुछ भी नहीं करते हो, ये सब इसको शक्ति देने का साधन बन
- 27:12जाते हैं। अपने मन पर कभी ख्याल मत करो
- 27:17लोगों ने, तुम्हारे ऋषियों ने समझाया कि इसको देखते रहो नहीं
- 27:25देखो इसको देखोगे तो इसको शक्ति दोगे, समझो बात को तुम्हारा देखना
- 27:33इस। की शक्ति का कारण बनता है क्योंकि
- 27:36तुम हो जीवन तुम हो चेतना यह है मृत विचार मृत ही होते हैं सदा
- 27:45मैं नहीं जानता किस मनहूसवेला में तुम्हें ये सब कपड़ा आएगा।
- 27:52और जीस मन के कारण तुम आज तक भी दुखी हो उसका हल तुम्हें मिल नहीं
- 27:56पाया तो किसी मनहू शिक्षण में किसी मूड मार्गदर्शक ने तुम्हें
- 28:06कहा होगा। इसके साक्षी बने रहो नहीं, इसके
- 28:10साक्षी मत बने रहो। इसके साक्षी बनने का अर्थ इसकी
- 28:16गति को शक्ति देना है क्योंकि तुम हो चेतना और चेतना की ये डिमॅंड
- 28:24करता है विचारों को चलने के लिए चेतना चाहिए।
- 28:30सायकल को चलने के लिए पैडलों की शक्ति चाहिए, विचारों को चलने के
- 28:37लिए चेतना की शक्ति चाहिए और तुम हो चेतना तुम।
- 28:43अगर इसकी तरफ़ देखोगे इसके साक्षी बनोगे।
- 28:47तो इसको चेतनता की शक्ति तुम दोगे तो फिर ये तुम प्रश्न मेरे से मत
- 28:56कर के मन भटकता है। मन भटकेगा।
- 29:03तुम इसके साक्षी हुए तो मन भटकेगा।
- 29:08तुम इसकी तरफ देखे तो विचार चेतन हो गए, विचारों को चलने में मदद
- 29:18की तुमने अब ये बड़ा उल्टा लगेगा तुम्हें क्योंकि श्रद्धा की तरह।
- 29:24गुरु ने तो तुम्हें यही समझाया, इसका निरीक्षण करो कहाँ जाता है,
- 29:28कहाँ जाएगा वही है विचार कहाँ जाएगा जब जाओगे तुम जाओगे इसको
- 29:34पीछे यह तुम्हें कहीं नहीं लेके जाता यह चलती भर्ती तिरंगे मात्र।
- 29:43ये कहाँ जाएंगे तुम्हारे बिना तुम ही इसको कहीं लेके जाओगे इसके
- 29:51पीछे लग के इसकी कोई औकात नहीं है ने जो सिखाया उसे भूल जाओ।
- 29:59ये गलत सिखाया कि इन्हीं मनहूल शिक्षणों में।
- 30:03कि निमूड़ लोगों ने ये सिखाया तुम्हें के मन को देखो, अनवरत
- 30:10देखो, नहीं देखो भाई, देखने से ही इसकी शक्ति बढ़ती जैसे सूरज के
- 30:19उगने से तुम्हें प्रकाश होता। मन ठहर जाएगा, निर्जीव हो जाएगा।
- 30:29यह निर्जीव तो सदा से है, तुम इनमें अपने प्राणों की शक्ति को
- 30:35सींचते हो और यह तुम्हें भटकाता है।
- 30:41तुम्हारे से ही शक्ति लेकर तुम्हारे ही आनंद तथा मौन की
- 30:47शांति को समाप्त करता है। हमने ही अपने खून से बख्शा।
- 30:52गोलों को रंग हम ही शरीर के जश्ने बहारा न हो सके।
- 30:58थैरी 1 मिनट। हाँ अच्छा सूक्ष्म का प्रश्न है
- 31:08बड़ा सुन्दर है। ये कहते है अगर मन को शक्ति न
- 31:11देंगे तो काम कैसे करेंगे? मन को शक्ति देना तो आवश्यक है।
- 31:21अन्यथा फिर मन काम कैसे करेगा? हाथ पांव कैसे लाएगा दिनचर्या
- 31:26कैसे करेगा अपना काम धम, कैसे करेगा व्यापार का ऑफिस का ठहरों?
- 31:33तुम गलत समझते हो, मैं तुम्हें ध्यान की यात्रा बता रहा हूँ।
- 31:39जब तुम ध्यान में बैठो तो तुम ऐसा करो, मैं तुम्हें संसार में विचरण
- 31:45करने का फॉर्मूला नहीं ले रहा हूँ।
- 31:48समझना इसको मैं वही पर के करता हूँ जो पहली बात मैंने कही वो जब
- 31:54तुम ध्यान में बैठो तो ऐसा करो, मन नहीं भटकेगा।
- 31:59थोड़ी देर भटकेगा, भटकने का इसके पीछे मत चलो इसको समझाओ बजाओ न
- 32:05ठहर जाएगा मन को ठहराने का एक फॉर्मूला है, लेकिन मन को ठहराने
- 32:10का फॉर्मूला है। संसार में मन ठहरे से बात नहीं
- 32:14बनेगी, संसार में तो तुम्हें। मन से काम लेना होगा, बुद्धि को
- 32:19जलाना होगा, कुछ याद करना होगा, कुछ समझना होगा, कुछ पूछना होगा,
- 32:29यह तो मन की आवश्यकता है। तो मैंने ये बात बताई अपने अंत
- 32:36में जाने के लिए। उस परमात्मा तत्व तक पहुंचने के
- 32:40लिए उस आत्मा तत्व तक पहुंचने के लिए मैंने सिंसार की बात यहाँ
- 32:44नहीं कही तुमने फिर भी सिंसार को बीच में फंसा लिया तो मैं इसका
- 32:48जवाब देता हूँ। चलो हम इसको दो हिस्सों में बांट
- 32:52लेते हैं, ये जो मैंने पहले कहा। यह तो उस अवस्था के लिए है जब तुम
- 33:00सब कामों से मुक्त होकर ज्ञान में बैठते हो तो तुम्हारा मन भटकता
- 33:03है। तुम्हारा सभी का प्रश्न भी यही था
- 33:08अब तुमने एक नया प्रश्न भी दिया, इसका जवाब भी मैं दे दूंगी।
- 33:12ये बिलकुल सही वक्त पे किया हुआ सही प्रश्न है।
- 33:16तो फिर क्या संसार में भी ऐसा करे नहीं?
- 33:19संसार में ऐसा करोगे तो तुम निद्रा में चले जाओगे।
- 33:25ये सिर्फ अपने अंतर में जाने के लिए एक फॉर्मूला और राम वाण
- 33:32मंत्रा। तुम जो कहते हो मन जाता नहीं भीतर
- 33:39मन रुलाता है मन सुझाव देता है मन भटकता है उसके लिए यह फॉर्मूला
- 33:47अगर तुम ये कहते हो कि संसार में अगर मन को शक्ति न दें तो फिर
- 33:51क्या होगा? संसार में तो भाई मन को शक्ति
- 33:54देनी पड़ेगी। कंप्यूटर चलाना है।
- 33:58मन को शक्ति देनी पड़ेगी। ये दो आयाम हैं।
- 34:01तुम समझो दो, उस बात को तुम दोनों को यक मिक्क कर देते हो।
- 34:05यही तो चुनौती है तुम खिचड़ी बना देते हो, हर चीज़ का अन्नकूट बना
- 34:11देते हो और फिर अन्नकूट लाके संतों के माथे में ठोंकते हो कि
- 34:16दो इसका जवाब अन्नकूट का जो सब कुछ बीच में मिला दिया मूली इसमें
- 34:23बैंगन इसमें प्याज इसमें पकौड़ा इसमें बेसन, इसमें लस्सी इसमें।
- 34:33सब मिला दिला दिया देगी मर्जी इसमें ठोक दी नुम नमक इसमें डाल
- 34:37दिया पाल किसमें क्या कुछ नहीं इसमें डाला तुमने और सारा इकट्ठा
- 34:44करके अनकूट बना दिया और फिर गुरु के माथे मर दिया।
- 34:47दो जवाब इसको इसका जवाब नहीं होगा अनकूट का कहीं कोई जवाब होता है?
- 34:55संसार और स्वय यह फॉर्मूला था स्वय तक पहुंचने का।
- 35:03अब इसको यहीं पर छोड़ दो। अब संसार में आ जाओ, संसार में
- 35:08जाने के लिए बिल्कुल उलट काम करेगा।
- 35:14क्या जब तुम रात को नींद से जगे फ्रेश उठे तो तुम बिलकुल उनिद्र
- 35:23अवस्था में हो, तुम्हारा शरीर ठीक से काम भी नहीं करता, धीरे धीरे
- 35:28शरीर में जान आएगी। तुम रोज़मर्रा के काम करने शुरू
- 35:31कर दो फिर तो शक्ति देनी पड़ेगी सभी यंत्रों को तुम्हें अन्यथा ये
- 35:37काम कैसे करेंगे, कैसे कंप्यूटर चलाएंगे, कैसे दौड़ लगाएंगे, कैसे
- 35:43दुकान को खोलेंगे, कैसे झाड़ू बाहरी पोछा करेंगे?
- 35:48कैसे खाना बनाएंगे? नहीं?
- 35:50फिर ये कुछ नहीं कर सकेंगे। संसार की बातों को संसार तक ही
- 35:54सीमित रहने को तुम खिचड़ी खुद बनाते हो और खिचड़ी का कोई जवाब
- 36:00नहीं होता। जवाब होता है एक एक चीज़ का।
- 36:05परमात्मा तक जाने के लिए वह फार्मूला जो मैंने बताया उसको याद
- 36:09रख लो। आप अब दूसरे प्रश्न का जवाब संसार
- 36:12में क्या करें? संसार में मन को शक्ति दो, वहाँ
- 36:20मन से पूरी शक्ति खींच लो। और जहाँ मन में पूरी शक्ति उडेल
- 36:26दो इनसर्ट यूरसेल्फ़ कंप्लीट्ली नहीं बोला मैंने ये दो रास्ते आ
- 36:34गए संसार में जब तुम हो काम कर रहे हो इनसर्ट यूरसेल्फ़
- 36:41कंप्लीट्ली। दूसरा संसार आ गया बड़ी शुद्धतम
- 36:52तरीके से, बिना किसी गलती के। तुम काम कर सकोगे।
- 37:01संसार में कोई गलती नहीं होगी तुमसे, क्योंकि तुम्हारी सारी
- 37:06शक्ति उस काम के भीतर लगी हुई है। इसलिए जो परिणाम उस वक्त काम करने
- 37:15में आएगा जब तुम कंप्लीटली उसमें? डिसोलवे हो जाओगे, अपने आप को
- 37:21झोंक दोगे तो उससे बेहतर परिणाम कभी नहीं आएगा।
- 37:28ये संसार की बात है, वो परमात्मा की बात है, दोनों बातों को फिर
- 37:33अलग से समझ लो, उसमें टोटली तुमने अपनी शक्ति को खेंच लेना है।
- 37:42विचार मुर्दा है, तुम्हारी शक्ति खींचने से मुर्दा हो जाएगा उस
- 37:47साइकिल जीसको थोड़ी सी शक्ति मिली हुई थी वो गिर जाएगा, तुम्हारे
- 37:51विचार गिर जाएंगे और तुम निर्विचार अवस्था में पहुँच
- 37:55जाओगे। ये तो था अपने भीतर जाने के लिए
- 37:59फॉर्मूला अब बाहर आने के लिए फॉर्मूला समझ लो वहाँ से शक्ति
- 38:05पूरी खींची थी यहाँ पर पूरी शक्ति उड़ेर दो बिलकुल उलट क्योंकि
- 38:13संसार और परमात्मा। विरोधी दुरों पर हैं।
- 38:17दोनों एक साउथ के छोर पर है जैसे दो धागे के दो छोर हैं एक साउथ
- 38:24में है एक नॉर्थ में है, यह दूसरा छोर है, वहाँ से सारी शक्ति खींची
- 38:32यहाँ पर सारी शक्ति। लगा दो, झोंक दो कंप्लीट्ली 11 भी
- 38:39न बचे 100 डिग्री पर आ जाए फिर तुम उभल जाओगे, ऐसी नक्षणात हो
- 38:50जाओगे तुम इतनी प्रवीणता से तुम्हारे काम निपटेंगे और इतनी
- 38:55शुद्धतम सटीकता के साथ। परिणाम आएँगे।
- 38:59क्या तुमने कभी सोचा ही नहीं होगा अगर तुमने अपनी पूर्ण शक्ति को
- 39:05इसमें झोंक दिया? काम में, संसार में तो सटीक
- 39:10परिणाम आएगा, बिना किसी गलती के शुद्धतम अवस्था में परिणाम आएगा।
- 39:18लेकिन तुम्हारा तुम तो मन को कई डाइमेंशन में फिला देते हो, इधर
- 39:29भी देखो उधर भी देखो अपनी दुकान पे ग्राहक उन्हें भी अटेंड करो।
- 39:35सामने तुम्हारे दुश्मन की दुकानें वहाँ भी देखो, वहाँ ग्राहक
- 39:39ज्यादातर नहीं आगे फिर क्या करोगे?
- 39:42वे ज्यादा आगे तो रोक पड़ोगे जलने की सेवा तुम्हारे पास रास्ता है।
- 39:51इधर सेवकों से भी देखो नौकर चाकरों पर भी ख्याल रखो।
- 39:56क्या हो रहा है? क्या नहीं हो रहा है?
- 39:58तुम अपनी शक्ति को सारे डायमेंशन में फला देते हो।
- 40:02यही है घूमन गेरी जिनको चक्रवाड़ा कहते हैं, इस संसार का चक्रवाड़ा
- 40:09है। यहाँ भी फंसो वहाँ भी फंसो यहाँ
- 40:14भी फंसो सब डाइमेंशन में अपनी शक्ति को ढेल दो, नहीं यहाँ भी
- 40:20तुम गलत हो, वहाँ भी गलत थे यहाँ भी गलत हो।
- 40:24संसार भी तुम्हें ठीक से चलाना नहीं आता।
- 40:28वह से पूरी शक्ति को खींचना है और यहाँ पूरी शक्ति को झोंकना है।
- 40:35काम करते वक्त अपनी पूरी शक्ति को झोंक दो, पूरी शक्ति को इन व्यस्त
- 40:41कर दो, इसमें फिर देखो परिणाम कितना बेहतर आता है?
- 40:48जो काम तुम 8 घंटे में खत्म करते हो वो काम तुम 4 घंटे में बढ़िया
- 40:53ढंग से खत्म कर दोगे। शुद्धतम बढ़िया परिणाम आएँगे।
- 40:58इसके दोनों चीज़ों का मैंने बता दिया परमात्मा में जाना हो शक्ति
- 41:05पूरी खींच लो मन से। इसके पीछे मत लगो, इसको सुझाव मत
- 41:11दो। इससे लड़ो मत और अगर संसार में
- 41:14आना है तो पूरी की पूरी शक्ति अपने काम में झोंक दो।
- 41:20फिर कहीं भटको मत एक स्थान पर जैसे कुंड सेंट्रेशन होता है।
- 41:25कॉन्वेक्स रेंस सूरज के आगे करें और एक बिंदु बन जाता है धूप का और
- 41:35वह आग लगा देता है पेपर को बस ऐसे हो जाओ तुम ऐसी कॉन्सेंट्रेशन में
- 41:41आ जाओ आग लग जाए पेपर को। इतनी एकाग्रता हो, काम में इतनी
- 41:49व्यस्तता हो कि तुम खो जाओ, फिर न तुम बचो न सामने कोई बचे बचे तो
- 42:01सिर्फ काम बचे कर्म बचे। ना देखने वाला बचे ना करने वाला
- 42:12बचे कर्म बचे नाचो तो नाचने वाला ना बचे देखने वाला ना बचे नृत्य
- 42:26बचे, नृत्य बचे, नाच बचे। कर्म बचे न करता बचे न साक्षी बचे
- 42:37अब बड़ी पोरट बात लगेंगी तुमने यहाँ भी ज़रा आजमा कर दो, करने
- 42:45वाला न बचे देखने वाला भी न बचे। कर्म बचे, कर्म बचे, सिर्फ कर्म
- 42:51बचे, फिर तुम देखो कितनी दक्षता, कितनी निष्पक्षता और कितना सुंदर
- 43:01परिणाम आता है, इसे आजमा कर देखो जब।
- 43:07तुमने इन क्षणों में होना है जिन क्षणों को तुम कहते हो बिलकुल
- 43:23बिहेल में आए हुए हैं। तुम खाली हो, कुछ नहीं कर रहे,
- 43:31फुर्सत के क्षण उनको ध्यान के लिए प्रयोग करो और जब तुम अपनी शक्ति
- 43:39को लगाते हो, वो फुर्सत के क्षण नहीं है।
- 43:45वो तुम्हारी व्यस्तता के क्षण हैं और जब तुम व्यस्तता के क्षण में
- 43:50आओगे तो अपनी पूरी शक्ति को झोंक दो, व्यस्त हो तो पूरा हो जाओ।
- 43:55ए व्यस्त हो तो भी पूरा हो जाओ, दोनों का सार एक टोटली हो जाओ ए
- 44:02व्यस्त हो जाओ तो टोटली हो जाओ। व्यस्त हो जाओ तो टोटली हो जाओ
- 44:07फिर देखना परिणाम कितना सुन्दर आएगा।
- 44:12श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हिनाथ।
- 44:24नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी।
- 44:44हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद रे मुरारी हे नाथ
- 44:54नारायण वासुदेव भितुमात स्वामी। सखा हमारे पितुमात स्वामी सखा
- 45:11हमारे हेनाथ नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविन्द।
- 45:20अरे मुरारी, हे नाथ नारायण, वासु, रिया, धन्यवाद।