Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Jun 25 - XY CHROMOSOME का रहस्य! क्या स्त्री परमात्मा को नहीं पा सकती? पुत्र के बिना मुक्ति नहीं? True Meaning of Love.
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- 0:00स्वामी संदेह है भारतीय मेरा प्रश्न बड़ा अटपुटा है प्रभु मैं
- 0:17पशु का अनुयायी हूँ, व्रत हूँ, उनसे चिन्हित हूँ।
- 0:28नहीं जानें। और तो से प्रश्न पूछ नहीं हो सका
- 0:35आपसे पूछने की जरूरत कर रहा हूँ आपसे दीक्षित हूँ।
- 0:47आपने कहा शास्त्रों में जो चीज़ लिखी है वह सत्य तो है कुछ कुछ
- 1:02लेकिन वह ऐसी है जैसी जलेबी के भीतर का रस उसे खोले।
- 1:08कौन? मेरा प्रश्न अटपटा है क्या पुत्र
- 1:21के बिना गृहस्थी व्यक्ति की? वास्तव में गति नहीं होती क्षमा
- 1:34करना अगर मैंने कुछ गलत पूछ लिया हो तो क्षमा करना, लेकिन मेरे
- 1:43जवाब अवश्य देते हैं। संदेह है भारती हमने तो यहाँ भी
- 1:51संदेह ही खड़ा कर दिया। अब मैं क्या जुबा आप नमस्कार
- 2:05जिन्हें हम भूलना चाहें। वो अक्सर ज्यादा आते हैं।
- 2:13भला हो इस मोहब्बत का वो क्यों करिया था, यही तो मैं बताना ही
- 2:21नहीं चाहता था और यही तुमने पूछ लिया क्योंकि इस प्रश्न का जवाब
- 2:28देने से। सारे पुराण सती साबित होते इसलिए
- 2:37मैं इनकी जलेबी के भीतर है। बिल्कुल है लेकिन बिगाड़ते गाड़
- 2:46लिए गए। पानी तो गंदे नाले में भी होता
- 2:49है। सोन लेकिन कीचड़ के साथ गंदगी के
- 2:53साथ लिवडा तिवडा हुआ पानी डिस्टर्बड वाटर में भी होता है।
- 3:03पानी को मुख से भी निकलता है शीतल शाम।
- 3:07उज्वल क्लीन लेकिन पानी पानी का भेद होता है।
- 3:19अगर मैंने तुम्हारे इस प्रश्न का जवाब दे दिया तो ग्रंथ भरे पड़े।
- 3:29फिर हर कोई प्राणों में लिखी हुई बात का अर्थ पूछेगा और गडबड हो
- 3:37जाएगी। रस तो है पुत्र।
- 3:54लेकिन तुम्हें तुमने मुझे सुन के में डाल दिया अब थोड़ा मुझे
- 3:58विश्राम लेने दो, इस प्रश्न का जवाब मैं देना चाहता हूँ।
- 4:11इस प्रश्न का जवाब बिल्कुल ऐसा होगा जो मेरी इच्छा के बगैर
- 4:15तुम्हें उस प्रश्न का उत्तर दिया जाए।
- 4:21ऐसा होगा। ऊसामी संदेह भारती शायद ओशो ने
- 4:39तुम्हें नाम संदेह भारतीय दिया, इसका कारण भी यही रहा।
- 4:44तुम बाल की खाल उदड़ते हो मुझे भी बाल की खाल।
- 4:58क्या वक्त ही पुत्र के बिना गति नहीं होती?
- 5:00सांसारिक व्यक्ति की दुनियादारी गृहस्थ व्यक्ति की बहुत से सत्य
- 5:11ऐसे हैं जो हमारे अचेतन में छिपे पड़े हैं।
- 5:15इसके एक एक शब्द को सुनेंगे कृपा करके इस प्रवचन के।
- 5:19एक एक शब्द को गहराई से सो लेना ना समझ पड़े तो रिवाइंड कर लेना।
- 5:28हमारे अचेतन में ऐसे ऐसे शक्ति छिपे पड़े हैं।
- 5:36उनसे निकली हुई आभा जैसे हीरे के बीच में से आभा निकलती है पड़े
- 5:41हैं अचेतन में लेकिन उनसे निकली हुई आभा हमारे चेतन तक पहुंचती
- 5:47है। पर हमें समझ नहीं आता ये आ कहाँ
- 5:50से रही ऐसे बहुत से सत्य हैं। जी नहीं, हम छोड़ देते हैं।
- 6:01हम कहते नहीं ये बकवास है, लेकिन तुमने कभी सोचा नहीं यह बकवास है।
- 6:10यह कहने वाला हमारा क्षेत्र मन है जो हमें इसी जन्म में मिला है।
- 6:16ध्यान रखना अचेतन पीछे से आता है। चेतन इसी जन्म में मिलता है।
- 6:22पहली बार इसलिए चेतन को उस चेतन के बारे में ज़रा भी नहीं पता जो
- 6:29जन्मो जन्मो से हम देही के साथ संग्रहित करके लेके आए हैं।
- 6:35और उस अचेतन में हीरा पड़ा है। उसकी चमक हमारे चेतन तक आई।
- 6:43मैंने बहुत सी बातें आपको ऐसे बताई जो सत्य हैं लेकिन उसका अर्थ
- 6:48आपको पता नहीं वो उस हीरे की तरह है।
- 6:53जो उसकी चमक हमारे चेतन में आती है।
- 6:57कहीं कहीं लगता है कि ऐसा है तो? लेकिन पता नहीं ऐसा है क्यों है
- 7:06तो लेकिन है क्यों यह नहीं पता होता।
- 7:24वास्तव में पुत्र के बिना गृहस्थी व्यक्ति का कल्याण अब ये प्रश्न
- 7:34पुत्र तुने बहुत गहरा पूछ लिया। मैं से और ढंग से घूमा, फिरा के
- 7:41तुम्हें उत्तर दूंगा, उत्तर दूंगा इसका मैं समय समय पर एक बात कहा
- 7:52करता हूँ कि हमारे ऋषियों ने जो बातें बोलीं जब जला दिया गया
- 8:00हमारा सारा खोजों का इतिहास। यूनिवर्सिटी में तक्षशिला में और
- 8:15भी सभी यूनिवर्सिटी में विश्वविद्यालय में तो वहाँ से
- 8:21परंपरा चली। कब लिखना बहुत कम है कानों से कां
- 8:29उसे श्रुतियां कहते थे हम या फिर दिमाग से दिमाग उसे हम स्मृति
- 8:38कहते थे। तो आपको बहुत सी चीजें ऐसी
- 8:42मिलेंगे जो किताबों में दर्ज नहीं है।
- 8:45इसलिए किताबों में जकाई मारने की चेष्टा मत करना लोगों की
- 8:50स्मृतियों में है या स्तृतियों में है सुनी सुनाई पाती।
- 8:59स्मृतियों में हैं, हम कहेंगे हाँ याद तो आता है किसी ने कुछ कहा था
- 9:05श्रुतियाँ और स्मृतियाँ ज्यादा सटीक लेखनी गड़बड़ हो सकती है।
- 9:13लेखनी को जब हम गलाम थे, बहुत से लोगों ने बदला होगा।
- 9:17शब्दावली चेंज की होगी और शब्दों का क्या?
- 9:21शब्द तो सिर्फ कोमा बदलने से उसके अर्थ बदल जाते हैं।
- 9:24रोको मत जाने दो, रोको मत जाने दो हमारे भीतर चेतन में।
- 9:38ऐसी गहरी परंपराएं जन्मो जन्मो की भरी पड़ी, लेकिन हमारे चेतन को
- 9:46ज्ञात हो, क्योंकि अचेतन पीछे से आया एक चेतन है और ये शरीर है जो
- 9:55आपको इस जन्म में मिला। तो ठीक कहते हैं चारबाग बस में
- 9:59भूत से देह से पुनर आगमनम पुता वही शरीर फिर नहीं आता और वही
- 10:09ब्रेन भी फिर नहीं आता। यह जो चेतन मन है यह आपको एक दफ़े
- 10:21अभी मिला है जब शरीर छोड़कर जाएंगे हम उस पुराने अचेतन के साथ
- 10:33इस जन्म का चेतन साथ लिखें। वह भी अचेतन ही हो जाएगा।
- 10:38मिक्सेशन हो जाएगी, वह बन जाएगा। हमारा प्रारब्ध थोड़ा गहरी है।
- 10:44बात बार बार सुन लेना ना समझाये इसलिए बहुत सी चीजें।
- 10:54हमें कानों से कानों तक पहुंचाई गई यादास्तों से यादास्तों तक
- 11:01पहुंचाई गई, लेकिन दर्ज नहीं मिलेंगे।
- 11:05बस उसका कारण था हमारी गुलामी या चोरी कुछ लोग चोरी करते हैं।
- 11:14लिकन मूर्खों के ये निपटा कि चोरी तो करते हो इस चोरी में भी
- 11:20तुम्हें अक्ल भी चाहिए नकल मरने के लिए मैं दसवीं कक्षा में पढ़ता
- 11:29था मेरे साथ के विद्यार्थी ने। सारा पेपर नकल कर लिया और रोल
- 11:35नंबर भी नकल कर लिया। अब परिणाम क्या होगा आपको पता है
- 11:39अच्छी तरह से और नकल मारने के लिए भी अकल चाहिए।
- 11:44उसने रोल नंबर भी मेरा ही रख लिया।
- 11:49इतनी भी अकल नहीं। अचेतन में पड़ा हीरा हमारे
- 11:57संस्कार हैं जो हम साथ लेकर आए स्मृतियां भी हैं जो हम संघ लेकर
- 12:03आए। कुछ स्मृतियों में बहुत से हीरे
- 12:06छपे पड़े हैं। और उन हीरों की चमक हमारी चेतना
- 12:13में आती है। हमें शक पड़ता है कि कुछ है,
- 12:17लेकिन जानते नहीं हम क्योंकि चेतन ये चेतन हमें पहली बार मिला है
- 12:22समते जना शांति से। कहीं से आई यह बात के पुत्र के
- 12:39बिना और पुत्र के बिना और पुत्र के आगे पौत्र के बिना गृहस्थी
- 12:47व्यक्ति का कलाम नहीं होता, संत तो कर लेगा।
- 12:56टू नो दायसैल अपने आप को जानकर संत और मुक्त हुआ।
- 13:01बुद्ध को कोई आवश्यकता नहीं, महावीर को कोई आवश्यकता नहीं।
- 13:04नानक को कोई आवश्यकता नहीं क्यों? क्योंकि उन्होंने अपने आप का
- 13:10ध्यान दिया। अब ये दूसरा फॉर्मूला था।
- 13:13बिल्कुल उलट। इसे समझना थोड़ा मुश्किल लगेगा।
- 13:32धीरे धीरे तो बोल रहा हूँ जो बोला हुआ वो तुम्हारे भीतर समझ में उतर
- 13:38जाए। जैसे बहुत सी चीजें स्त्रियों के
- 13:47पास सिर्फ संस्कारित रूप से विद्यमान मैंने आपको बहुत बार कहा
- 13:55तीन 4 साल का था, मैं जब माता नहलाती थी।
- 14:01उसके बाद तो बच्चा खुद ही कोशिश करता है मैं अपने आप न लूँगा, तुम
- 14:06हट जाओ पांच 6 साल के बाद बच्चा खुद न नहीं।
- 14:09लगता? तो माता मुझे नहलाती और ठंडा पानी
- 14:19डालती गुप्तांग पे। लेकिन माता को भी नहीं पता।
- 14:22इस बात को मेरे को तो पता ही कहाँ है लेकिन उसकी।
- 14:29बात उस ये चीजें संस्कारित रूप में माता के दिमाग में पीढ़ी दर
- 14:35पीढ़ी स्मृति के रूप में चली है श्रुतियाँ ग्रुप में चली है।
- 14:41बच्चों का पुषण ऐसा करना है इसलिए बेहतर व्यवस्था माताएं जो पुराने
- 14:46जन्म की जानती थीं, आज की नहीं जानती।
- 14:50आज तो बच्चे पालते हैं मेड पालते। हैं।
- 14:53बच्चों को उनमें ना उनकी छाती से बातें से उभरता है।
- 15:00नम मत आता है कुछ भी तो नहीं आता। रूखा सूखा रह जाता है बच्चन और
- 15:07रूखा सूखा बच्चा क्या करेगा रूखा? सूखा बच्चा क्या कम करेगा और
- 15:16राजनीतिज्ञ बन जायेगा। जीतने भी बड़े राजनीतिज्ञ या
- 15:24जीतने भी बड़े धन कमाने वाले। नोबेल पुरस्कार विजेता।
- 15:37उनके जीवन को तुम पाओगे तो उन्हें प्यार नहीं मिला, मोहम्मद तो नहीं
- 15:43मिला, बात से शल्य नहीं मिला, कुछ अधूरा रह गया माता की तरफ से या
- 15:49पिता की तरफ से महान बने लेकिन कुछ अधूरा रह गया।
- 15:57दोनों के प्यार की आवश्यकता होती है।
- 15:59बच्चे को ममतव भी चाहिए, वात शल्य भी चाहिए, वात शल्य देगा।
- 16:05वत्स जिसके पुत्र हो तुम और ममतव देगी माता।
- 16:15दोनों को होना आवश्यक है। इसलिए जोड़ा बनाया गया और बंधन
- 16:20बांध लिया गया और कहा गया कि साथ ही जन्म का बंधन है।
- 16:23इसके भीतर बड़े गहरे राज़ थे अगर तुम मनुष्य को उसकी उच्चतम स्थिति
- 16:33में ले जाना चाहते हो। तो हमें गुरुकुरों की तरफ फिर
- 16:36वापस सिमरना। होगा वहाँ बड़ी सुंदर प्रणाली
- 16:42छिपी पड़ी है भीतर स्मृतियों के रूप में भीतर संस्कारों के रूप
- 16:54में कुछ ऐसा छिपा पड़ा। जिसकी चमक तुम्हारे क्षेत्र में
- 16:59आती है। लेकिन तुम्हें पता नहीं चलता लगती
- 17:02अच्छी अब थोड़ी सी और बात बता जिसे तुम प्रेम कहते हो, प्रेम जब
- 17:23होता है अपने शुद्ध तुम रोग में बढ़ा।
- 17:26प्यारा होता है होता है, प्रेम हुआ, उसकी कृपा हुई लेकिन तुम उस
- 17:39प्रेम को संभाल नहीं पाते। प्रेमी लोग दुखी मत।
- 17:45हो? मेरी इस सुव्यवस्था को ठीक से सुन
- 17:48लें। प्रेम वह जो आपको मुक्त करे, आप
- 17:59मुक्त करने की बजाय प्रेमी को शादी के बंधन में बांध लेते हैं।
- 18:04फिर वह बंधन हो जाता है, जो चीज़ बंधन देती है, उससे नफरत हो जाती
- 18:11है। आपको जो चीज़ उन्न मुख्यता देती
- 18:18है, स्वतंत्रता देती है, उससे प्रेम रहता है आपको।
- 18:24काश प्रेमियों ने प्रेम करने के बाद अपनी अर्धांगणी को स्वतंत्रता
- 18:32भी दी होती जैसे मिलने से पहले तुम स्वतंत्र थे, दोनों वैसे ही
- 18:39मिलने के बाद भी स्वतंत्र रहो। वही स्थिति तुम्हारी मानसिक
- 18:44बरकरार रहे। आखिर तक तो यह प्रेम बढ़ता ही
- 18:48जाएगा, बढ़ता ही जाएगा और 1 दिन मुक्ति का कारण बन जाएगा, क्योंकि
- 18:53परम प्रेम मुक्त करता है। सच पूछो तो आज स्त्री पति से
- 19:05प्रेम नहीं करती, नफरत करती मेरे पास हजारों स्त्रियों ने आती काम
- 19:13है कि हमारा पति मर जाए तो हम ऊपर से ड्रामा कर लेंगे।
- 19:19भीतर से प्रसन्न होंगे। ये चौंकाने वाले सत्य हैं।
- 19:29वैसे चूड़ियां फोड़ लेंगी, हाथों बा मचा देंगे, कुशल भी होती है।
- 19:34स्त्री कुछ तो कराए बाड़े पे भी जाते हैं।
- 19:40रोने पीटने के लिए 1000 उन स्त्रियों ने मुझे कहा है अगर
- 19:48हमारा पति मर जाए तो एक तो ये बंधन छूट जाए, एक करवाचौथ वगैरह
- 19:56से बंधन। है।
- 19:59जो चीज़ तुम ड्रामेबाजी से करना चाहते हो, सर्कस करके करना चाहते
- 20:04हो, क्या वो हृदय से नहीं मांगे जा सकते हैं?
- 20:09जरूर ही भूखे मरना है और भूखे भी कहाँ मरते हो?
- 20:14तुम व्रत नहीं होता वो व्रत होता है सारे दंग।
- 20:18तुम अपनी मन मुताबिक सेब केला फला फला फला भर लेते हो पेट और अभी
- 20:24रोटी वाकी रह जाती है अभी एहसान वाकी रह जाता है तुम्हारे लिए
- 20:29भईया मुझे हज़ारों ने कहा अगर हमारा पति मर जाए और देखो ये हर
- 20:40साल। करवाचौथ के दिन अपने पति की लंबी
- 20:48आयु के लिए व्रत रखती हैं। पता नहीं मन्नत भी मानती है।
- 21:01थोड़ी सी मात्रा बची होगी जो सच में अपने पति की दीर्घायु की
- 21:06प्रार्थना हृदय से करती है अन्यथा पति बोझ है ना?
- 21:11पत्नी भी बोझ है बशर्ते के वो एक दूसरे को स्वतंत्रता न दें।
- 21:21स्वतंत्रता प्रेम से आती है और प्रेम बड़ा प्यारा।
- 21:27है। जब तुम्हें प्रेम हुआ था, उससे
- 21:31पहले की स्थिति में अगर तुम चले जाओ बंधन बंधने के।
- 21:34बाद। तो तुम सदा ही जो पहले दिन तड़पती
- 21:40तुम्हारी भीतर प्रेमी के प्रति वही आखिर तक बरकरार रहेंगी और ऐसा
- 21:47ही हुआ उन सदियों में आखिर तक उन पुरुषों ने स्त्रियों को बंधन में
- 21:54नहीं बांधा। और।
- 21:59जब वह पुरुष मर गया, मिस्त्री ने समझा, अब तो जीने का कोई फायदा
- 22:07नहीं, वह गया जो मुझे स्वतंत्रता दे सकता था जो मुझे प्रेम दे सकता
- 22:13था। अब इसके साथ ही मैं जल जाऊं।
- 22:15यह आकस्मिक घटना नहीं रह गई होगी। बाद में जब प्रथाएं सत्य जब
- 22:21अप्रथाओं के रूप में ढल जाता है तो वह विकृत हो जाता है।
- 22:26पहली स्त्री जो सती हुई होगी, उसको किसी ने कंपेर नहीं किया
- 22:31होगा। वह प्रेम के कारण सती हुई होगी
- 22:34क्योंकि इस पुरुष ने इतनी स्वतंत्रता दी, इतना प्रेम किया,
- 22:42कोई बाधा नहीं पहुंचाई। केस के जाने के बाद सब अंधकार में
- 22:51हो गया। संसार अब जीने का कोई अर्थ भी न
- 22:56बचा। इन बाभावेशों के कारण वह जलती हुई
- 23:03चिता में खुद स्वेच्छा से बैठ गई होगी।
- 23:07वो थी सती। आज तुम शक्ति नहीं करते हो, आज तो
- 23:10तुम हत्या कर देते हो स्त्री को तो राजा राममोहन राय ने ठीक किया
- 23:17लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इसमें कुछ सत्य नहीं छपाता सत्य तो था।
- 23:23लेकिन ये सभी के लिए नहीं था। सभी ने तो परंपराएं मान।
- 23:29सत्य -1 के अंदर प्रेम -1 के अंदर और तुमने जब प्रेम को व्यवस्था
- 23:35बना लेते हो। तब मुश्किल पैदा होती है, फिर
- 23:43समाज की धारणाएं पैदा हो जाती है। यह विकृत हो गया।
- 23:55अब आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी अगर किसी के पुत्र ना हो बड़ा
- 24:04दुखी होता। पहले तो पुत्र ही ना हो तो दुखी
- 24:10होता है फिर पुत्र के बाद पुत्र के ना हो, वो बहुत दुखी होता है।
- 24:21कारण क्या है? ये सब बातें हमारे क्षेत्र में
- 24:25छिपी पड़ी हैं, एक बीज के रूप में और उन बीजों से आभा प्रकट होती
- 24:31है, हमारे क्षेत्र में जाती है। न चाहती हुई भी इस प्रवचन को
- 24:40जरूर। सुनु।
- 24:45ये लाखों साल पुरानी व्यवस्था आज फिर वापस आई।
- 24:56आप देखना कभी अपनी असली चंदगी में देखना जो आपको अपने पुत्र से
- 25:03प्रेम होता है। उससे कहीं ज्यादा आपको पौत्र से
- 25:08प्रेम होता है। कारण क्या है?
- 25:10जबकि जन्म तो आपने पुत्र को दिया, अब समझो इसकी राज़ क्या है?
- 25:19पुत्र से प्रेम इसलिए नहीं हो पाता कि पुत्र बंधन का कारण होता
- 25:22है। उसका मल्लमूत्र भी करना, उसको
- 25:26स्नान भी करना वह कुछ दुख तकलीफ में आ जाए उसको इलाज भी करना।
- 25:37कब सोना, कब जागना, कब नहाना धोना, पढ़ाई करवाना, पालन पोषण
- 25:43करवाना। फिर उसके बाद इसका करियर बनाना
- 25:49यानी पुत्र बाप के ऊपर एक बंधन के रूप में आता है।
- 25:57समझ रहे हो नहीं मेरी बात तुम समझ रहे हो ठीक डेक्कन पौत्र दादा के।
- 26:04जीवन में कोई बंधन नहीं लेकर आता। पुत्र को परवरिश करना और अपने
- 26:12पांव पे स्टैंड करना जिम्मेवारी पिता की और जो जिम्मेवारी होती है
- 26:18उससे बाप इतना प्रेम नहीं कर सके। लेकिन दादा की कोई जिम्मेवारी
- 26:22नहीं होती है। इसलिए दादा का प्रेम बड़ा प्यारा
- 26:26होता है निस्संदेह सरल, तरल, स्वच्छ सब अपने पुत्र के प्रति।
- 26:42इसका कारण वही है। पुत्र का कोई बोझ नहीं होता दादा
- 26:46का, इसलिए पुत्र के ऊपर सिर्फ प्रेम बरसता है दादा।
- 26:51का? क्योंकि बंधन कोई नहीं पोत्र आता
- 26:58है खेलता है कूदता है चला जाता है।
- 27:01और दादा प्रेम पर सहता है ये भार पालने का भार पढ़ाई का भार, करियर
- 27:11का भार तुम्हे इतना वक्त ही नहीं मिलता कि तुम बच्चे को प्रेम कर
- 27:17सको, लेकिन दादा के पास बहुत वक्त है।
- 27:20इसलिए जो बच्चे दादा या नाना के पास पड़े।
- 27:25अभी इस रहस्य को वो बड़ी प्यारी जो बच्चे अपने दादा के पास पड़े
- 27:34या अपनी नाना के पास पड़े दादा दादी नाना।
- 27:40और बड़े प्रिय हुए महान भी हुए। उसका कारण कैसा?
- 27:49नाना दादा के ऊपर दोहता या पौत्र भोजन?
- 27:54हैं, पिता के ऊपर बोझ होता। है।
- 28:02और बोझ प्रेम को कहा जाता है। ये है भीतर की।
- 28:18अब समझो बात को, ये तो हो गयी बोझ की बात यहाँ से हमने शुरू कर लिया
- 28:23था यहाँ समझा गया आपको अगर कोई हो तो पूछ लो घड़ीसू राम की पत्नी कह
- 28:30रही थी, घड़ीसू राम से? कह रही थी सुनु ये ते मैं हूँ,
- 28:41मैं ही सुनु जो तेरे काट गई और कोई और सी होती ना तो कब की भाग
- 28:50गई होती मैं सुन रहा था, मैंने कहा ठीक कह रही है तू?
- 28:56बेड़ी सुराम तू सुन ले तुने इसको बंधन बहुत दिए होंगे अन्यथा ये
- 29:05बातें ये नहीं कहती थी। कि तो मैं ही सुनूं जो काट गई और
- 29:10सी होती है ना तो कब की बागी है? ठीक कहती है।
- 29:17तुम्हें क्यों याद आती है तुम्हारी माशूका की जो जिसके साथ
- 29:22तुम 1 दिन भी बंध गई? बस थोड़ा सा स्वाद चख लिया होता,
- 29:28बंध जाती है ना तो तलाक लेने के बाद तुम्हें याद नहीं आती।
- 29:34क्योंकि जब बंध जाता है वह बाहर हो जाता है।
- 29:40तुम्हें याद आती है वह या गाय तो सब खत्म हो जाती है।
- 29:45अगर सच में तुम्हें तुम्हारी माँ को काँट गया फिर वो भूतनी लगने
- 29:50लगेंगी। प्रेतनी तुम्हारे सिर पर।
- 29:54ये तो मिली नहीं इसलिए तुम गाते हो?
- 29:58सब गीतकार फेल हो जाते हैं। सब महंगे कवि फेल हो जाते हैं।
- 30:07ये महंगे कवि हैं कि इनको इनकी माशूका नहीं।
- 30:17अभी तो कुछ है यौन छुआ रह गया प्रेम की झलक तो पाते हैं अगर तुम
- 30:31प्रेम को बांधने में। तत्पर हो जाओगे तो प्रेम इतना
- 30:37नाजुक है, कलियों जैसा को कुचला जाएगा, प्रेम बंधनों में आकर
- 30:46कुचला जाता है, प्रेम को बंधन हीन रखने की चेष्टा कर।
- 30:50तो प्रेम पल्लवित होगा। पुष्प पल्लवित और बढ़े और बढ़ता
- 30:57हुआ ही उसमें सुगंधा आएगी और तुम्हारे नासा को सुगंधित कर
- 31:02जाएगी। जो तुम्हारे ऊपर बोझ होता है,
- 31:16उससे तुम कभी प्रेम नहीं कर सकता ये साक्लोजी का, ऋषियों का, आज की
- 31:22साक्लोजी मैं नहीं जानता क्या ये पढ़ाई नहीं?
- 31:27ऋषियों की साइकोलॉजी। भी मैं नहीं पढ़ा हूँ, मैंने
- 31:31अनुभव किया है क्योंकि मैं मन के बाहर गया व्यक्ति हूँ और मन की सब
- 31:36अवस्थाओं को अच्छी तरह से जाग जाग के अनुभूत करके गया हूँ अपने भीतर
- 31:42इसलिए बेहतर तरतीब बार मैं तुम्हें सारी चीज़ बता सकता हूँ।
- 31:49जाग से बाहर गया हूँ मन से परे मन की सब स्थितियों को भलीभाँति
- 31:55तुम्हें बता सकता हूँ तुम्हारे साइकिएट्रिस्ट न बता सकेंगे
- 32:03क्योंकि वो किताबों की तुम कहते कागज की लेख।
- 32:07और मैं कहता आँख खम देखी, मैंने खुद अनुभव किया है।
- 32:16जो भी प्राणी या जो भी वस्तु आपके लिए भार बन जाती है वो तुम्हारा
- 32:23प्रेम का कारण नहीं रहती इसलिए बुध छोड़ देती हूँ।
- 32:28बुद्ध के लिए। सारा ढांचा बेकार हो गया था छोड़
- 32:32देते हैं क्या पुत्र के पुत्र के पत्नी के राज्य सिंघाशीन के पिता
- 32:41के हीरे जोहरात का जनता? क्या ये सिंहासन सब बोझ लगने लगा
- 32:49था? और ध्यान रखना जो चीज़ तुम्हें
- 32:53बोझ लगेंगी उससे तुम्हारा मन मुक्ति चाहेगा।
- 32:59ऐसा ही बुद्ध के ऊपर हुआ होगा। तुम तो ढूंढ़ते हो।
- 33:04कब मिल जाए खजाना, कब मिल जाए ऐसी गद्दी हम बैठ जाएं छलांग लगा के
- 33:08और तुम तो वोट भी मांग लेते हो, क्या मैं ही बैठाये रखो, लेकिन
- 33:13बुध ऐसा नहीं है। बुध उसकी सत्यता को पहचान जाते
- 33:18हैं। के सब हैं लेकिन कुछ भी नहीं है।
- 33:28सबके रहते लगता है सब के रहते। लगता है ऐसे कोई नहीं है मेरा।
- 33:58कोई नहीं है। मेरा सूरज को सुने निकला।
- 34:18सूरज को छूने निकला तो आया हाथ अंधेरा।
- 34:40कोई नहीं। लगता है कोई नहीं है मेरा कोई।
- 35:14नहीं। प्रेम के बिना तुम्हारा कोई कुछ
- 35:25नहीं, सब बेगाने होंगे, सर्कस करेंगे, अक्टिंग करेंगे हम
- 35:30तुम्हारे अगर प्रेम हो जाए तो सच में तुम्हारे हो जाएंगे।
- 35:36चलिए राजनीतिज्ञों से मैं कर रही। हूँ ये जो भैय ये जो दंड जो दान
- 35:45ये सांव। चाणक एक नंबर का मूर्ख।
- 35:57चाणक्य अर्छालु व्यक्ति? था जिसने धनानंद को कह दिया कि
- 36:01मैं चोटी नहीं बांधूंगा जब तक तेरे सामरज्य का बदन मैं करूँगा
- 36:05और कर के लिया उसने परम अर्शालु व्यक्ति अगर आज तक धरती पे कोई
- 36:12हो। वेधवता के रूप में है चाणक्यवाह
- 36:16और तुम उसे महान नीती कार्य में मैं उसे सबसे बड़ा मूर्ख मानता
- 36:24हूँ, इस बुद्धि का उपयोग किसी और जगह दिया होता इस टैलेंट का उपयोग
- 36:29कहीं और किया होता कहाँ किया होता प्रेम में किया होता।
- 36:37प्रेम वो रसायन है, जो आमूलचूल पर वर्तन कर देती है और मानवता के
- 36:48इन्हीं अभागे क्षणों में प्रेम को भूल गए।
- 36:58तुमने कभी देखा है? पानी में नमक घुल जाता है और पानी
- 37:07के समुद्र में पानी की मूंद में ले जाती है?
- 37:13ये घुलने मिलने का बड़ा फर्क है। प्रेम के बिना तुम घुल जाते हो और
- 37:21प्रेम से तुम मिल जाते हो, फिर ढूँढना मुश्किल हो जाता है।
- 37:26फिर तो तुम उसका अंग ही हो जाते हो।
- 37:39हाँ हाँ देखता हूँ तो जो सनातन धर्म में अंतिम संस्कार के वक्त
- 37:48अपने पुत्र से ही अंतिम क्रियाकपाल क्रिया कराने का
- 37:58प्रावधान था, उसके भीतर एक बड़ा वैज्ञानिक रहस्य था।
- 38:06क्षमा कीजिएगा यह थोड़ा समय। थोड़ा सा लीक से भरे हो तुम
- 38:15क्योंकि शक्ति को नहीं छोड़। सकता हूँ मैं?
- 38:18अगर मैं चूक गया तो सत्य ही चूक गया।
- 38:25पुत्र ही क्यों? पुत्री क्यों नहीं?
- 38:30अब समझो इस बात को ऊपर के क्रियाएं तो मैंने बहुत बार बताया
- 38:37कि तुम बड़े मोहग्रस्त से संतान के साथ कैसे पालन पोषण करते हो?
- 38:48मेरी बातों को गहरे में मत रे ना कृपा करके मैं पहले ही हाथ जोड़
- 38:52लेता हूँ, ये बातें आपके अंदर तक जा सकती हैं, लेकिन पहले ही मैं
- 39:00क्षमा प्रार्थी हूँ आप प्रश्न पूछने वाले नहीं, प्रश्न नहीं ऐसा
- 39:03पूछ। रही।
- 39:06उत्तर तो मुझे देना ही पड़ेगा और सटीक उत्तर ही मैं देना चाहता हूँ
- 39:12अन्यथा आज जोड़ लेता हूँ। नहीं पता मुझे अब देखिये।
- 39:21किसी व्यक्ति को मारने का ढंग में जाता है यहाँ बैठे मार सकता हूँ
- 39:26मैं तुम्हारी मजाइलें यहाँ से बैठे मार देती हैं।
- 39:29लेकिन निशाना फिर भी अचूक नहीं होता, लेकिन मेरा निशाना कभी नहीं
- 39:33चूकता। हमारे पास तंत्र की ऐसी क्रिया
- 39:37नहीं है, लेकिन बात तो ये है कि किसी को मारने का भीतर भाव भी तो
- 39:42उठे, वो भाव छिन गया। जब से देखा है तुम्हारे नैनो में
- 39:52बेगाना कोई नजर नहीं आता है, जिसने अपना फैलाव देख लिया है,
- 40:00किसी को मारी काफी लेकिन फिर भी जिसने अपना फैलाव देख लिया, वो भी
- 40:05दूसरे को मारते हैं। बिल्कुल अंतिम क्षणों में मारते
- 40:10हैं कृष्ण ने कंशु कुमार राम ने बाली को मारा, राम ने रावण को
- 40:19मारा या प्रबुद्ध से? फिर भी इन्होंने मारा सब हदें
- 40:25क्रॉस कर गए। प्रेम तो छोड़ो नफरत की भी हदें
- 40:30क्रॉस करके वो कोई अच्छा इंसान होगा।
- 40:40ब्राह्मण ब्राह्मण था, लेकिन ऐसा भी क्या ब्राह्मण के अपने वंश?
- 40:45का ही नाश कर दे। कुंभकर्ण महाबलि उसने मरवा दिया
- 40:51अपना पुत्र इन्द्र जी तो उसने मरवा दिया अपना छोटा पुत्र उसने
- 40:55मरवा दिया। ये भी कहा कि ज्ञानपन हुआ?
- 41:04यह तो दुष्टता और मूडता होगी। यह तो बदला लेने की ऐसी घनी भूत
- 41:15भावना होगी कि अपने अपने वंश को ही उजाड़ दो।
- 41:19नहीं ये गलत, यहाँ में रावण को गलत मान।
- 41:26रावण ने ठीक किया गप्त किया रावण कहता सीता राम से देखो बच्चों का
- 41:31कोई मशहूर नहीं है फौजों को। क्यों रौम तू सीधा मेरे सामने हम
- 41:39दोनों ही लड़ लेते हैं। बच्चों का कोई शौक नहीं है।
- 41:46जो फैसला होगा देखा जाए तू जीत जाए तो सीता को ले जाना और तू
- 41:52नहीं जीते तो ठीक। सीता मेरे पास है।
- 41:59इसलिए मैं रावण को यहाँ आकर गलत कहता हूँ।
- 42:04दुश्मनी रावण के साथ मरवाया जा रहा है अपने भाई को कुंभकरणों से
- 42:12नाराज हो रहा है अपने पुत्र को इंद्रजीत को इतना बलिशाली धरती।
- 42:17पे नहीं आज तक वो। उसको मरवाई दे रहा है अरे तू सीधा
- 42:23जा तेरे साथ है उसका जो भी बैरभाव है।
- 42:31उससे साफ़ था चुकता कर उसे कहा चलो आओ मैदान में।
- 42:37हम आपस में ही लड़ लेते हैं और होना भी यही चाहिए था।
- 42:42एक व्यक्ति की दुश्मनी वंशों को क्यों पूरा?
- 42:44करे हम प्रसंग पे वापस आ जाए। प्रेम की क्वांटिटी पर निर्भर
- 42:56करता है। अगर सिर्फ तुम उसके शरीर से
- 43:00सम्मोहित हो, मैंने एक स्त्री को पूछ लिया, एक आदमी को पूछ लिया की
- 43:04तुम उसी स्त्री को प्रेम करते थे, इतना गुणगान करते थे, भगवान करते
- 43:09थे, शादी ले के आ गए, अब तलाक के लिए क्यों?
- 43:16कहता भाई मुझे अकल ही माथा फोड़ लिया माथे पे मरा अकल ही मुझे
- 43:21हवाई मैंने कहा क्यों कहता मैं उसकी हँसी पे मरता था हँसती थी ना
- 43:28सुन्दर बड़ी लगती थी इसीलिए शादी की थी सर।
- 43:32तो मैंने कहा आप क्यों तलाक ले रहे हो?
- 43:34कहते दांत निकल गए। बस तुम्हारा प्रेम ऐसा ही होता
- 43:44है। तुम किसी कारण से बंधने को तैयार
- 43:52होते हो। मुस्कुराते अच्छी लगती थी।
- 44:02लेकिन जो स्त्री सती हुई होगी, वो किसी अन्य कारणों से सती हुई
- 44:09होगी। शुद्ध प्रेम था उसने उसको आजादी
- 44:13दी थी। उसको बांधा नहीं था, उसकी आत्मा
- 44:16को मुक्त किया था। इसलिए तुम्हें जो गुरु से प्रेम
- 44:19होता है, वह अवर्णणीय प्रेम होता है, अविकक्षण प्रेम होता है बस
- 44:26टूटने से। क्योंकि।
- 44:29निस्वार्थ एक प्रेम है गुरु तुमसे कुछ मांगता नहीं।
- 44:33यद्यपि तुम बिना मांगे हो सब दे देते हो, लेकिन तुम्हें बांधता
- 44:40है, यद्यपि बिना बांधे तुम उसके चरणों में दास हो जाते हो।
- 44:49काश यही कला राजनीतिज्ञों में पैदा हो जाए।
- 44:54संतों में तो ये जन्मजात होती है। तुम उससे पैदा कर लो।
- 44:59राजनीतिज्ञों फिर तुम्हे वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 45:02ये तुम्हे अद्भुत फार्मूला मैंने बता दिया क्षति की चुड़ाई को मत
- 45:06गुणाओ। प्रेम की क्वालिटी और क्वांटिटी
- 45:12को पैदा करो। जनता से प्रेम करो, विद्रोह मत
- 45:17करो भाई भाई को लड़ाओ मत फिर तुम देखो तुम्हें कोई हेलाने वाला है
- 45:21ही नहीं। पुत्र पुत्री अग्रणी दे दे ये
- 45:42बड़ा की डांस प्ले। अब मैं संशयग्रस्त नहीं।
- 45:48बता दूंगा तुम्हे। पुत्र ही अग्नि क्यों दे आए?
- 46:01तो मसला बड़ा टेढ़ा है। माँ बाप मर जाते हैं, कमरे में
- 46:05पता ही नहीं सर क्योंकि एक बच्चा अमेरिका में सेटल है, एक कनाडा
- 46:09में सेटल। है, माँ बाप अकेले हैं।
- 46:16मर भी जाए तो पता नहीं चलता। 1010 दिन तक लाक्ष सड़ती रहती है
- 46:22आसपास जब बदबू घनी हो जाती है तो दरवाजा तोड़ा जाता है, देखा जाता
- 46:27है मरे पड़े बदबू और जवानी चले गए।
- 46:40विषय पे आ के जब अंतिम संस्कार होता है गहरा है, गहरा है, बहुत
- 46:49से लोग अग्रि से बकवास कह के छोड़ने चाहें, बड़े मज़े से छोड़
- 46:53सकते हैं मैंने कभी ना कहा मुझे सुन।
- 47:04बस मैं एक ही बात कहता हूँ, मेरे सुनने से अगर तुम निर्भर होते हो
- 47:08तो सुनो। क्योंकि निर्भर होना प्रेम होना
- 47:11है। जो व्यक्ति तुम्हें निर्भर और
- 47:14निर्भोज कर देती है उससे तुम्हें लगाव हो जाता है, प्रेम हो जाता
- 47:17है। इसलिए गुरु से प्रेम होता है
- 47:22इसलिए मैं रोज़ छाटा छाटी करता हूँ।
- 47:28मुझे कोई फिक्र नहीं होता। मैं किसके बारे में बोल रहा हूँ?
- 47:31बस सिर्फ ये फिक्र होता है कि मैं सत्य के बारे में बोल रहा हूँ।
- 47:37किसके बारे में बोल रहा हूँ, कोई फिक्र नहीं क्या बोल रहा हूँ सत्य
- 47:42के बारे में बोल रहा हूँ बस यही फिक्र होता है अगर मुझे बिल्कुल
- 47:47लगेगा मेरी अनुभूतियों में से गहरा प्राणों में से निकलेगा के
- 47:52नहीं कोई जाप करने से नहीं मिलती है वो खुशी।
- 47:57परमौन शब्दों में कोलाहल से कैसे मिल सकता है?
- 48:03बताओ मुझे जिसकी तलाश है वो है परमौन और जिसके द्वारा तुम ढूंढना
- 48:11चाहते हो वह है कोलाहल शोर। नाम चाहे कोई भी हो, अल्लाह हो,
- 48:17वह गुरु हो, राम हो, राधा हो, रहीम हो, शोर से कैसे मिलेगा?
- 48:28हर चीज़ समान चीज़ को खसती। यही लाभ रेव्यूटेशन का सिद्धांत
- 48:41विपरीत चीज़ रेपेल करेगी। जैसे आपने मैगनेट देखा साउथ और
- 48:46नॉर्थ को पास लेकर आओगे, धकेलेंगे रेपेल करेंगे।
- 48:52अगर साउथ से उल्टा लेकर आओगे, नॉर्थ के सामने साउथ लेकर आओगे तो
- 48:56खीच लेगा नॉर्थ को नॉर्थ से लेकर आओगे, रेपैल करे जो खींचने को
- 49:08तैयार। है, उसे तुम खीच लोगे।
- 49:16जो खींचने को तैयार नहीं है उसे खींच न पाओगे तो वो रिपलशन हो
- 49:20जाएगा। पुत्र ही क्यों, अग्नि से एक कारण
- 49:27तो मैंने पहले ही बता दिया। फिर बता।
- 49:28देता हूँ संक्षेप में। कि तुम सारी उम्र बंधन में रहते
- 49:34हो, जो कमाते हो, धन, वैभव, वस्तुएँ, पदार्थ, जमीन, जायदाद सब
- 49:43अपने बच्चों में वितरित कर देते। वो ही बच्चे जिनके लिए तुम रातो
- 49:52रातो जागे, जो बीमार हो गए, तुम्हारी रातो की नींद छीन गई,
- 49:58तुम भी जागे तुम कहाँ? कहाँ लिए फिर जिन।
- 50:06बच्चों के लिए तुम राते गंवाई? उन बच्चों से तुम्हें भाव होता
- 50:14है। और उन बच्चों के ऊपर तुम्हारा
- 50:20उपकार होता है तो इसलिए सनातन धर्म में बड़ा अद्भुत भार उड़ाता
- 50:26हूँ बच्चा तो बैठा है अमेरिका। और आग लगाएगा पड़ोसी जिसके साथ
- 50:32उनकी बनती भी नहीं है। ठीक वो प्रक्रिया जो सनातन ने
- 50:41खोजी थी, वह मर गई। क्या थी प्रक्रिया जीस, बच्चे के
- 50:49ऊपर तुमने? हमने ही अपने खून से बक्सा, गुलों
- 50:53को रंग हमने ही अपने खून से बक्सा, गुलों को रंग हम ही शरीर
- 51:00के जश्न वारा न हो सके और हमारे ही मरण्य के ऊपर यह शरीर की अंतिम
- 51:08क्रिया में शामिल नहीं हुआ। वैसे भीतर वह मनस्य बना रहे और जब
- 51:21तुम्हारा अपना ही बच्चा तुम्हारा कपाल क्रिया तुम्हारा सिर फोड़
- 51:24देगा, वो एक बांस दे देते हैं हाथ में आज तो आज तो सिर्फ।
- 51:28कर्मकांड रह गए हैं, लेकिन पहले जमाने में सच में सिर फोड़ देते
- 51:32थे। मैंने मेरे पिता का सिर फोड़ दिया
- 51:35था, कपाल तोड़ दिया था मैं नहीं की थी क्रिया अपने पिता का सिर,
- 51:46कपाल क्रिया। छोड़ दिया मर ही गया जला ही देना
- 51:50है। इसके बाद जल ही रहा है।
- 51:54क्या होता था आत्म तो मरते हैं, वह तो देखते हैं अच्छा इसके हैं
- 52:01इसके लिए मैं ज्यादा था रात रात भर बीमार।
- 52:05हुआ इसको दवाई दिला के लाया, टीएन गई से और कहाँ कहाँ नहीं भोंका?
- 52:10और आज ये मेरे सर को तोड़ रहा है उसके लिए अभी सर सेरा है उसका वह
- 52:15है मुँह टूट जाता है और जो। भी हम क्रियाएं करते हैं घर के
- 52:25अंदर उसके। मिश्र को बाहर मारते हैं।
- 52:27चला के चल। कपड़ों को बाहर मारते हैं चला के।
- 52:34उससे उसके भीतर दुख होता है, वैराग्य होता है, मोह टूट जाता
- 52:39है। सब मोह को टूटने की व्यवस्थाएँ
- 52:41थीं जो हमने की जीस चारपाई पर सोता था आई तो डबल बैंड दिए नहीं
- 52:46जाते बहुत महंगे। 10 ₹10,00,000 के डबल बैट, पांच
- 52:545,00,000 के गद्दे बिछा रखे थे। ऐसे कैसे दान दोगे तुम?
- 52:59पहले चारपाई होती थी, वो चारपाई हम देते थे।
- 53:01ले जाओ भाई बिस्तर दे देते थे ये भी ले जाओ।
- 53:06उसका सारा सम्मान हम दे देते थे जीस जीस से उसका लगाव था उसका
- 53:11चश्मा उसकी घड़ी सब दे देते थे बस उसे धीरे धीरे लगता कि अब इनका
- 53:20मुँह है नहीं ये ऐसे ही थे। मुझे समझने में गलती हो गई।
- 53:26धीरे धीरे मोह को तोड़ने की व्यवस्थाएँ बनाई थी।
- 53:29सनातन मर तो गया है, वापस तो नहीं आएगा तो यही कहना बेहतर होगा करना
- 53:35बेहतर होगा कि इसको आराम से प्रकृति इसका मुँह टूट जाए और
- 53:40आराम से प्रकृति इसको नवग्रह उपलब्ध करवा।
- 53:45दे। और प्रकृति का ये सिद्धांत है।
- 53:49अब मुसलमान क्यों भरते है? आज इसाई क्यों भरते है या आसमान
- 53:54में? ये मुझे सुनते है।
- 53:56सूक्ष्म में इनमें सबसे ज्यादा मात्रा की इनकी इस्लाम की या
- 54:00इसायियत की क्यों हिंदू बहुत कम होते है, बहुत कम होते है।
- 54:05से बहुत कम होते हैं क्योंकि उन्होंने मुद्दा ही खत्म कर दिया।
- 54:11उन्होंने व्यवस्थाएँ ऐसी बनाईं। समझदार लोग थे, बहुत गहरे से देखा
- 54:16था व्यवस्था। को।
- 54:19तो आज आपको सूक्ष्म रोगों के रूप में यही रोग मिलेगा।
- 54:24वहाँ पर मैं दफन हूँ वहाँ पर मैं दफन हूँ इनका नाम पूछो तो ऐसे ही
- 54:30कुछ निकला। इशा कर लाओ निकाह जॉन फर्नांडिस,
- 54:42क्या है यह? यही कुछ मिलेगा और इनकी भाषा
- 54:49अंग्रेजी हिंदी नहीं है। सूक्ष्म जो भाषा होती है वह हमारी
- 54:55भाषा अलग है, जो हम अलग दूसरे घणो पर जाकर भी उसी चीज़ का उपयोग
- 55:00करते हैं जो सभी जगह कॉमन है। जैसे हँसना सभी जगह कम है, रोना
- 55:05सभी जगह कम, दर्द की अभिव्यक्ति एक सब जगह कम है।
- 55:10ऐसे ही असेंशिएशन होती है। हम उनके जरिए इनसे संवाद करते हैं
- 55:16तो ये शब्दों को नहीं पकड़ते, थोड़ा सा गहराई से बोलो।
- 55:19ये शब्दों को नहीं पकड़ते शब्दों के भीतर की भावनाओं को पकड़ते हैं
- 55:24क्योंकि तुम शब्दों को पकड़ते हो शब्दों के भीतर जो लिपटते बढ़ के
- 55:29आती है चीज़ उसे ये पकड़ती है रोहन अब समझाती है बात।
- 55:35में। और जो शब्दों को भी पी जाये मेरे।
- 55:40और जहाँ से अमृत से लपड़ के ये चीज़ आई उसको भी पी जाते है वो ही
- 55:46है सच्चा शरावत तो यहाँ हो जाता है तुम शब्दों को जिसे शरावत कहते
- 55:56है इसीलिए तो दूसरे दिन तुम कोई ना कोई कमेंट।
- 55:58किए रखते हो? फिर वो शो के बारे में आपने।
- 56:02ऐसा क्यों बोल रहा है? चिद देखो प्रमाणित अधिकार दे दो
- 56:05बस मैं समझ जाता हूँ 5 साल बेकार गए बाबा तेरे 5 साल बेकार गए इस
- 56:12बंदे के ऊपर वैसे ही मग्ज़ खपाइयो।
- 56:18समझते देर नहीं लगती और फिर अंगूठा लगाते भी देर नहीं लगती।
- 56:21चल। तुम तो ब्लॉक।
- 56:22हुए किसी और गुरुपद लाश लो भाई नहीं लगी है प्यास यह प्यास
- 56:30तुम्हे लगी हो, मेरे पास वो पानी नहीं है ऐसा।
- 56:37कुछ हो रहा। जो मेरे शब्दों को भी पी जाए और
- 56:44जो शब्दों के पीछे लेबड के आता है अमृत का रस तुमने देखा होगा।
- 56:53उस रस को भी पी। बा हजूर, तुमको सितारों में ले
- 57:09चलूँ दिल जो। जाए।
- 57:18ऐसी बाहरों में ले चलूँ आओ अजो तुमको सितारों पे।
- 57:37ले चलो दिल जुंजा ऐसे बहारों में ले चलूँ आओ अजूरा।
- 58:01जो शब्दों को पिए सिर्फ भाई शराब नहीं वह शब्दों को खंगालेगा अपने
- 58:11सेंसर से कैंची से उसको काटेगा, पीटेगा और कमेंट?
- 58:14करेगा? इसलिए ऐसे लोगों को ब्लॉक करते
- 58:19वक्त मेरा अंगूठा कामता नहीं। इसको भी क्या बोल क्यों इसका वक्त
- 58:27जाया कर शायद इसको कोई और मिल जाए इसके हिसाब?
- 58:34तो इसको परिणाम क्यों न कर लें? और प्रणाम कर लेता हूँ मैं मुझे
- 58:45बेड़ों की गिनती की ज़रा भी आवश्यकता नहीं है मुझे?
- 58:48चाहिए प्यासे क्योंकि मेरे पास है पानी प्यासे लोगों की कामना है
- 58:55मुझे। चित्त में शब्दों को समाहित करने
- 59:04वाले लोग कृपया मुझसे दूर रहे, रोज़ गए हो फिर भी कुछ दिलावर लोग
- 59:11आ जाते हैं, सासी लोग आ जाते। हैं।
- 59:16मैं समझ जाता हूँ ये प्यासे हैं और बहुत कहने के बाद भी वो टिके
- 59:21रहते हैं, बने रहते हैं मेरे हर प्रयोग के पीछे भी।
- 59:37वो खरे उतरते हैं इसलिए बने रहते हैं आज।
- 59:42तक तार्किक व्यक्ति मेरे शब्दों को पी जायेगा और ये रूहें।
- 59:54ये मेरे भाव को पी जाएंगे। इनको बड़ी अच्छी लगती है इसलिए
- 59:58करोड़ों की मात्रा में खड़ी है। इंतजार करती है कब हम जाके सुनें
- 1:00:09और तुम्हारे पास दोनों चीजें उपलब्ध हैं, ये तो शब्दों को नहीं
- 1:00:12सुन सकते। ये सिर्फ भाव को सुन सकते हैं।
- 1:00:17वह भीतर से निकली हुई शब्दों के पीछे की चीज़।
- 1:00:26और तुम जो श्रावक है? बिल्कुल, इन सूक्ष्म रोगियों की
- 1:00:33तरह वो पीता है जो ये सूक्ष्म रोगियों पी जाते हैं।
- 1:00:40शब्दों को एक तरफ धकेल देता है जैसे संतरा होता है, उसका रस
- 1:00:46निकाल ले, रस भी लेते हो और फूल को गिरा देते हो।
- 1:00:51उसको तुम दिमाग में भूसा बना के भरते नहीं।
- 1:00:55ये जो लोग कमेंट करते हैं रम्मन ने तो ऐसा कह दिया, रामकृष्णा ने
- 1:01:03तो ऐसा कहा। था रस गया।
- 1:01:11फलूदा सिर में रखे बैठे हैं। क्या करोगे इसका?
- 1:01:14जब पशुओं को खाने के काम आएगा तुमने क्यों सहेज रखा है
- 1:01:21न्यूरॉन्स में? लेकिन क्या करें मजबूरी है?
- 1:01:28इन्हें रस भी ना आता है तो यह तो सूक्ष्म रोहे पिएगी पर मैं तुमसे
- 1:01:35बहुत बार मैं जब बोलता हूँ, मैं जब बोलता हूँ तो मेरे सामने कोई
- 1:01:41आदमी नहीं सुन। रहा होता तुम तो जब सुनोगे सुबह
- 1:01:455:05 पे सो। लेकिन ये अभी सुन रही है।
- 1:01:51मुझे इनके लिए बोलता हूँ जो मेरे सामने है तो मैं तो तुम्हारे लिए
- 1:01:59तो मैं कल बोलेंगे कैसा है उसका तो स्केडुयूल लगेगा।
- 1:02:08हमारे कंट्रोलर जो हैं एडिटर जो हैं वो लगाएंगे, लेकिन जिनके लिए
- 1:02:13लाए वो समझता हूँ मैं वो मेरे सामने खड़े हैं, मैं इनके लिए।
- 1:02:18बोलता हूँ। और अगर तुम मुझे नहीं पता तुम कौन
- 1:02:20सुनोगे कितने सुनोगे। जो सुनेगा, सुनेगा, लेकिन जो सुन
- 1:02:25रहे हैं अभी मैं तो उनके लिए बोलता हूँ या फिर उनके लिए बोलता
- 1:02:31हूँ जो कल को आएँगे, अंधेरे में कुछ नहीं होगा, कोई सच्चा गुरु
- 1:02:36नहीं होगा किसको? तलाशेंगे।
- 1:02:44प्रिय चार शब्द उनके लिए अमृत सिंह जी उन्हीं का काम करेंगे
- 1:02:49इसलिए मैं कहता हूँ हजारों स्थानों पे इसको शब्दों को बचा के
- 1:02:54रखना क्योंकि प्रबल नहीं होंगे इस काल।
- 1:02:58में। इस काल में बहुत कुछ।
- 1:03:03खत्म भी हो। जाएगा।
- 1:03:05लेकिन तुम इसको किसी ना किसी तकनीक से जगह जगह पे हर जगह बचाए
- 1:03:10रखना, खास तौर से तुम्हें बता दूँ कि ये जो एस्टरॉइड गिरेगा ये
- 1:03:19दक्षिण एशिया। और जापान के भीतर का जो इलाका है
- 1:03:25वहाँ गिरेगा करीब 3500 किलोमीटर इसका डायमीटर।
- 1:03:28होगा। ये गिरेगा 20 अप्रैल 2138 को शाम
- 1:03:34को 4:00 बजे के आसपास मंगलवार का दिन होगा।
- 1:03:41सूर्य अपनी संक्रांति में आने को होगा, जिसे हिंदू नव वर्ष कहते
- 1:03:45हैं। हिंदू नव वर्ष कहते हैं सूर्य मेघ
- 1:03:51संक्रांति में आने को होगा, बस नभे ही होगा या पहुँच गया होगा।
- 1:03:57ऐसी कुछ ग्रहों की स्थिति होगी। मुख्य सूर्य आपको बता।
- 1:04:01दिया। अगर आप सभी ग्रहों की व्यवस्था को
- 1:04:05पूछना चाहती हैं तो मैं आपको बता दूंगा बाद में, लेकिन यह सभी के
- 1:04:09लिए जरूरी नहीं है। सूर्य की संरचना मैंने बता दी कि
- 1:04:15सूर्य होगा मिक संक्रांति। में।
- 1:04:21जैसे क्षेत्र में नवरात्र शुरू होते हैं उसके बाद मेघ का सूर्य
- 1:04:27आता है तब वो मेघ का सूर्य जब आएगा 20 अप्रैल को आएगा।
- 1:04:384:00 बजे के आसपास आएगा तब ये जो होगा ऊपर से एक एस्ट्रॉयड करेगा,
- 1:04:46उसकी लम्बाई छुड़ाई होगी। डायमीटर के हिसाब से 3500 3500
- 1:04:50किलो गिरेगा जापान से। साउथ।
- 1:04:56एशिया। इतना डायमीटर।
- 1:05:02होगा उसका अब हिसाब तुम लगाते रहना भोगौल में इतना पड़ा नहीं जब
- 1:05:12फरमाई। जैसे उसने बता दिया, वैसे तुम्हे
- 1:05:15बता दिया, अभी हिसाब तब तुम लगाते रहना अभी बहुत साल पड़ेंगे।
- 1:05:29जो तुम पे भार बनता है, उससे तुम कभी प्रेम नहीं कर सकोगे बल्कि।
- 1:05:35उससे तो तुम दूर जाओगे इसे ही ईरशा कहते हो इससे जिससे तुम नफरत
- 1:05:45करते हो तुम ज़रा देखना तुम उसकी शक्ल को गौर से पूरा कभी देखते भी
- 1:05:50नहीं क्यों ईरशा के कारण तुम उसकी?
- 1:05:55शक्ल को अच्छे से नहीं देखते। ये रिपलशन का कारण है?
- 1:06:03प्रेम का कारण है जीसको तुम प्रेम करते हो उसकी आँखों के पलकों की
- 1:06:12बालों को भी गन लेते हो, इतनी बार नहीं।
- 1:06:17ऐसा भी होता है इसे ही प्रेम कहते हैं।
- 1:06:27मैंने बताया जब अंतिम संस्कार में आत्मा इतने वर्ष से जी श्री
- 1:06:36संस्कारित हुई छपटी मोह हुआ लेकिन आखिर में वो मोह तोड़ना भी है।
- 1:06:45अर्चना ने ये जान दिया। था।
- 1:06:48आगे की भी व्यथा प्रसार है। यात्रा बाकी है तो कैसे तोड़ें?
- 1:06:55ये सब उपाय थे कब आ जाओ तुम? पुत्र ही क्यों?
- 1:07:02और इसको थोड़ा सा साइंटिफिक रूप से हम समझ ले।
- 1:07:07आप सभी ने देखा होगा कि बाप का प्रेम पुत्री से ज्यादा होता है
- 1:07:15और माँ का प्रेम पुत्र से ज्यादा होता है।
- 1:07:17कारण? तुम्हें पता भी नहीं चलता दीज़ आर
- 1:07:22ऑल क्रोमोसॉमी के फ़ैक्ट्स माता में स्त्री में सिर्फ एक्स
- 1:07:30हार्मोन। होते हैं क्रोमोसोम।
- 1:07:35और पुत्र में एक क्रोमोसोम बायी होता है।
- 1:07:41वह बाइक रोम मासुम माता की तरफ खींचता है।
- 1:07:43उसे यह खिचाव ही माता को बातें शल्य के ऊपर के ऊपर प्रेरित करता
- 1:07:51है। अब तुम्हें बेहतर का इफेक्ट नहीं
- 1:07:53पता है, लेकिन संतो ने बहुत पहले खोज।
- 1:07:56लिया था। पुत्र में होते हैं वाया क्रोमोसन
- 1:08:04और माँ में सब एक्स होते हैं। टोटल सब पेयर्स 23 के देश पेयर्स
- 1:08:09एक्स पुत्र में एक पैर का एक बाय होता है।
- 1:08:17इसके कारण माता माँ पर पूत पिता पर घोड़ा माँ को पुत्र से ज्यादा
- 1:08:29और बाप को। पुत्री से कहो कहा क्योंकि बाप के
- 1:08:31भीतर एक वाय और पुत्री के भीतर सभी एक है।
- 1:08:39ये है क्रोमोसोमिक कारण अट्रैक्शन का ये सब व्यवस्था क्रोमोसोमिक
- 1:08:47है। तुम्हें पता नहीं शब्द जो मैंने
- 1:08:51घुलने और मिलने की बात। कही।
- 1:08:55घुल तो एनएसीएल पी जाता है पानी में लेकिन मिल सकता है सिर्फ बूंद
- 1:09:02वाटर। हेच टू ओह, क्योंकि वह तो उसका
- 1:09:05रूप ही होता है ना? हेच टू ओह तो एक बार समुद्र में
- 1:09:09गया, फिर तुम ढूंढ के दिखा देना उसे।
- 1:09:13लेकिन एनएसीएल तो तुम कभी भी उसे सुखा के फिर से बाहर ला सकते हो,
- 1:09:19घोलने का और मिलने का ये फर्क है पुत्रिक लेकिन देखिए सिर्फ बाप के
- 1:09:29लिए कहा। गया।
- 1:09:30येस? माता को अगणी बेटी दे सकती है।
- 1:09:42ओके एक्स क्रोमोसोम है, एक्स क्रोमोसोम से एक्स क्रोमोसोम आग
- 1:09:46लगा सकता है। रिपलशन नहीं होगी, माँ।
- 1:09:54लेकिन पिता को पुत्र ही अग्नि दे इसका क्रोमोसोमिक कारण पिता के
- 1:10:02भित्र हैं वाय और पुत्र के भीतर पे है वाय इसलिए पिता के लिए और
- 1:10:09पिता। के नाम पर ही सारे वंशी चलते हैं,
- 1:10:15तुमने कभी कोई वंश देखा? पंडों के पास चले जाना तुम या कोई
- 1:10:21बुद्धियों के बुद्धियों की व्यवस्था नहीं थी या पंडितों की
- 1:10:26व्यवस्था थी? पंडित यानी सच में जो ज्ञानी थे?
- 1:10:31कहीं तुम्हारी दादी का नाम नहीं होगा, कहीं तुम्हारी दादी की
- 1:10:34पच्चीसवीं पीढ़ी का नाम नहीं होगा लेकिन व्यवस्था के भीतर जो उनके
- 1:10:40पास रिकॉर्ड होगा वो सब आपकी 25 पीढ़ियों का आदमियों का होगा।
- 1:10:48आपका बाप दादा, परदादा सड, दादा और आगे सब माता।
- 1:10:54का कहीं कोई रिकॉर्ड? है क्यों?
- 1:10:57इसका कारण? सिर्फ वाय क्रोमोसोम का हिसाब रखा
- 1:11:04जाता है। वाय क्रोमोसोम।
- 1:11:05इसलिए तो परमात्मा ने इतनी अल्प मात्रा में दिया 23 पेयर्स में एक
- 1:11:11पैर का एक इतना कम मात्रा में क्यों प्राय इसका गहरा रहस्य।
- 1:11:22ये मैं आपको नहीं बताऊँगा इसको बताऊँगा तो फिर फिर तो आग लग
- 1:11:27जाएगी समझ लो ये नहीं बताऊँगा इतना सा बता दिया बस यही आप समझ
- 1:11:35गए। मुझे पता है पुत्र इसीलिए चाहिए।
- 1:11:43बाएँ क्रो मौसम जब बाएँ क्रो मौसम को फंकेगा मुँह।
- 1:11:51टूट जाएगा पूरी तरह से। इसलिए तो बढ़ाना।
- 1:11:56था मेरा वंश। इसलिए बेटी को वंश को, बेटी के
- 1:12:03वंश को हम अपना वंश नहीं समझते। हम शुरू से ही कहते हैं ये तो
- 1:12:07बेगानी अमान्यता है बेगानी घर चले जाना है।
- 1:12:11यह कोई सामाजिक व्यवस्था नहीं है। यह साइंटिफिक व्यवस्था है।
- 1:12:17ऋषियों की खोज। पुत्र को पुत्र ही चाहिए, दादा का
- 1:12:32प्रेम प्रेम अपनी परपोती से ज्यादा हो सकता है।
- 1:12:42लेकिन वह बंधन नहीं बनेगा। वह तो पोते के लिए वबन्तन नहीं
- 1:12:45बनेगा, पोती के लिए वबन्तन नहीं बनेगा, उसका प्रेम निस्वार्थ
- 1:12:50होगा, लेकिन आपको क्रोमोसोमिक व्यवस्था समझा रहा हूँ।
- 1:12:56मैं के पुत्र के बिना गति क्यों नहीं?
- 1:13:02मैं पहले ही बहुत बार क्षमा मांग चुका हूँ।
- 1:13:06मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं। यथासंभव मेरे पास मुद्दा है, मैं
- 1:13:11उसका प्रयोग करता हूँ। मैं हिचक नहीं करता और मैं कुछ
- 1:13:17मांगता नहीं उनसे। कोई फीस नहीं रखता।
- 1:13:22मैं अपनी बस कुछ उनसे दानपूर्ण जरूर करवा देता हूँ।
- 1:13:29वो किसी भी डंक का करवा। मेरे पास आ जाते हैं ऐसे लोग।
- 1:13:37जैसे मैंने आपसे बताया वो व्यक्ति आ गया जिससे मैंने कहा तुम्हारे
- 1:13:42दो पुत्रों में वो आज मेरा दुश्मन बन बैठ पता, नहीं तो वही जानता
- 1:13:48है। वह तो अपने पुत्र तक का दुश्मन हो
- 1:13:53गया, बाकी तो छोड़ो। पुत्र?
- 1:14:12बाई को जब बाई आग लगाएगा तो सब खत्म हो जाएगा, क्योंकि उसने सारी
- 1:14:18अपेक्षाएं ही पुत्र से की थी। वंश वृद्धि वही करेगा।
- 1:14:23कितना भी कर लो तुम्हारे अचेतन में ये भरा पड़े है और सत्य है।
- 1:14:30तो मन को बहला सकते हो चेतन। को।
- 1:14:33हम बहला लेते हैं, हमारे पास भी आ जाते हैं फिर हम उनके मन को बहला
- 1:14:39लेते हैं, कोई बात नहीं भाई अब जब नहीं हुआ तो नहीं हुआ तो तुम अपने
- 1:14:45आप को थोड़ा सा शांति से रखो। और कोई वाय भी नहीं है।
- 1:14:58साइंस में आज सेपरेशन विधि आ गई है।
- 1:15:00एक्स और वाय की लेकिन वो कामयाब कितनी है ये तो साइंस ही है।
- 1:15:08उसकी भी कोई तकनीक है? लेकिन है बड़ी वृद्धि अब इसमें
- 1:15:12वक्त जाय न करता हुआ वीडियो तो बहुत लम्बी हुई जाती है।
- 1:15:19पुत्र के बिना गति नहीं होती, गति ऐसा है पर तुम ठहरे रहोगे।
- 1:15:25क्योंकि तुम्हारा सारा मोह हो तो पुत्र में उड़ जाता।
- 1:15:33सारी व्यवस्था तुम्हारी आधार शिला पुत्र पर है, चाहे तुम प्रेम अपनी
- 1:15:40पुत्री से ज्यादा करते हो, वह क्रोमोस्मी की व्यवस्था है।
- 1:15:46लेकिन तुम्हारे वंश की व्यवस्था टिक्की है।
- 1:15:49तुम्हारे पुत्र पर श्री कृष्ण की वन्शावली देख लो, मिल जाएगी राम
- 1:15:58की वन्शावली देख लो सभी संत पुरुषों की वन्शावली देख लो, ये
- 1:16:02पागल थे क्या? इन्होंने बनशावलियों को पुत्रों
- 1:16:07के रूप में सहेज के रखा पुत्रियां के रूप में क्यों नहीं रखा ये
- 1:16:12मनोहर शत्रुपा से पुत्रियां तो तीन हुई थीं, पुत्र दो थे।
- 1:16:17अब उनकी बनशावली को क्यों नहीं बचा के रखा गया?
- 1:16:21पुत्र की ही वंशावली को क्यों बचा के रखेगा?
- 1:16:24इसके भीतर बड़े साइंटिफिक गहरे कारण थे।
- 1:16:27अब सब तो नहीं बोल सकूंगा। मैं बहुत सी चीजें तो ऐसी हैं जो
- 1:16:32फिर मैं बोलने से ज्यादा चुप रहना ज्यादा ठीक समझू पर ये बस ऐसी ही
- 1:16:37हैं जो मैं बता सकता। था।
- 1:16:40जानते सब मैं और भी जानता हूँ मैं मैंने आपको बता दिया कि पुत्र के
- 1:16:46बिना नहीं होगा कल्याण, लेकिन। इसको आप हृदय को तोड़ मत।
- 1:16:52लेना फिर इसकी दूसरी व्यवस्था है। दूसरी बात था क्या महावीर के
- 1:17:05पुत्र होता है, नहीं होता है? नहीं हुई, पुत्री हुई लेकिन वो तो
- 1:17:10जीते जी खुद ही पहुँच गए। अब उनको कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:17:14कबीर को कोई फर्क नहीं पड़ता। हालांकि उनके पुत्र हुआ।
- 1:17:18नान के दो ही पुत्र हुए बुद्ध के भी पुत्र हो गया।
- 1:17:22पुत्री नहीं हुए लेकिन इन बाहरी व्यवस्था से कोई लेन देन में वो
- 1:17:26तो जो मुक्त ही हो गया उसके पुत्र हों या सारी पुत्रियां हों, कोई
- 1:17:30फर्क नहीं पड़ता। बात मैं साधारण जनकी कर रहा हूँ
- 1:17:36समाज। समाज के।
- 1:17:41आम व्यक्तियों की ये दीज़ आर एक्सट्रॉर्डिनरी पर्सन्स इनको मैं
- 1:17:47समाज में गिनता नहीं। ये तो समाज को तोड़ चूके हैं, ये
- 1:17:51तो क्रांति का ही। इनके ऊपर ये व्यवस्थाएँ डरती नहीं
- 1:17:59जिसने अपने आपे को जान दिया, उसके पुत्र हो या पुत्री हो, वह तो
- 1:18:02मुक्त हो गया, उनका वंश चले, चले ना चले कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- 1:18:11शायद मैंने पिछले दिनों में एक कहानी सुनाई थी।
- 1:18:14मेरे। दादाजी रामचंद्रन जी और उसके
- 1:18:19पिताजी शाल्गराज थोड़े से पैसे देने थे।
- 1:18:23वो उलझे गढ़े थे। वो सारी कहानी कंगाल लेना, तुम
- 1:18:29सुन लेना। और कैसे खंगारे खड़े थे और कैसे
- 1:18:33इस उम्मीद में थे कि मेरा कोई आगे वंशावली में से निकले तो मेरा
- 1:18:40उधार करें, अब कोई जागेगा तो उधार करेगा।
- 1:18:44सोया व्यक्ति उधार क्या करेगा? तुम सोते हुए कोई पुण्य कर सकते
- 1:18:48हो। नहीं कर सकते ना?
- 1:18:51हाँ जब कोई जागेगा तभी तो शुद्ध लेगा ना तो एक जागा जब मैंने देखा
- 1:18:59तो उसने बड़ी दाय नहीं है, आप मुझे जानते हो?
- 1:19:02मैंने कहा नहीं मैं तो दादाजी को भी नहीं देखा है।
- 1:19:05शालग्राम जी को कैसे देखूंगा? मैं तुम्हारे पढ़ता हूँ।
- 1:19:12पुत्र मेरे ये अड़चन है, मैं अटक गया क्या कहूँ?
- 1:19:17इसको कहते थे पितृ ऋण। मैंने वो उतारा वो सारी कहानी आप
- 1:19:22उस वीडियो में सुनें। मित्र नहीं होते हैं ये मैं अपने
- 1:19:27ढंग से बोलता हूँ क्योंकि ये तुम्हारी मान्यता है मान्यता रूप
- 1:19:31मान्यता के रूप में मत लेना तुम जागना जाग के देखना शायद तुम्हारा
- 1:19:37भी कोई पुत्र पित्र इसी इंतजार में।
- 1:19:40बैठा हो ये कब तुम उसको मुक्त करो?
- 1:19:44यह व्यवस्था मानने की नहीं है। यह व्यवस्था जानने की है।
- 1:19:49तुम जानो तुम्हारा दिव्यचिक शुभ होल है और तुम देखो कहीं तुम्हारा
- 1:19:54भी तो कोई बुजुर्ग कहीं हड़क नहीं गया है।
- 1:19:58यह संसार में अड़चने की बड़ी संभावना है।
- 1:20:04तो ये जो हमने बोला ये बोला भी ठीक बोला पितृ ऋण दे वरुण ये वैसे
- 1:20:16ही नहीं बोला था। इसके पीछे कोई कारण था वो कारण
- 1:20:21यही था। स्त्री स्त्री को निगलेक्ट किया
- 1:20:29गया। बिलकुल जबकि स्त्री शक्ति रोपणी,
- 1:20:34ये बिलकुल ठीक। है।
- 1:20:37की करोड़ों करोड़ों में से कोई एक स्त्री?
- 1:20:41एनलाइटन हो जाती। है।
- 1:20:45बाकी दिल के बहलाने को गाले ये ख्याल अच्छा है मैं आपको कितना ही
- 1:20:50कह दूँ। प्रयास करके तो कोई मल्ली बाई जैन
- 1:20:56धर्म में भी पहुँच जाती। है।
- 1:20:59और जैन धर्म इतना कमजोर कि मलीबाई का नाम रख दिया मलीनाथ क्योंकि
- 1:21:07उनकी एक धारणा थी और धारणा ये आदमी पहुँच सकता है।
- 1:21:12भाई पहुँच तो स्त्री बीत सकती है, बस उसको एक जन्म और लग जाएगा।
- 1:21:19जब तुम सारा सम्मान तैयार करके बिल्कुल ऐट द जंक्चर पॉइंट खड़े
- 1:21:24होगे, छलांग लगाने के लिए तो घर ही तो बदलना है।
- 1:21:31तुम भीतर से जब तैयार हो गए तो छलांग तो इस जन्म में भी लग सकती
- 1:21:38है। गुरु महत्त्व होना चाहिए।
- 1:21:42गुरु के पास तकनीकें बहुत होती है मास्टर्स उसके पास सभी प्रकार की
- 1:21:49तकनीकें हैं, वो है असंभव को संभव बना देता।
- 1:21:54है। लेकिन अगर तुम ये समझो कि
- 1:21:58तुम्हारे पास कोई मास्टर ऑफ मास्टर्स नहीं है तो भी तुम्हारा
- 1:22:03अगर तुम बिलकुल उस जंपिंग बोर्ड पे खड़े हो गए तो एक जन्म ही तो
- 1:22:08लगेगा मुक्त तो तुम हो गए क्या मुक्ति करनी है तुम्हारे बैरा
- 1:22:14करें, तुम्हारे ये मोमूक्षण है। पानी पीने की तमन्ना ने प्यास से
- 1:22:22होने की तमन्ना ने बिरहा की आग में जलने की तमन्ना मुक्त उसने
- 1:22:28करना है अभी तो तुम भोगने को राजी हो, भोगने से के नहीं, वो काम
- 1:22:34नहीं मत करो। जब वैराग्य हो जाए तुम्हें हर
- 1:22:38चीज़ दिखे लेकिन दिखे लेकिन आकर्षित न क्रय कुछ भी तुम्हें
- 1:22:46आकर्षित न करे उसे कहते हैं वैराग्य और वैराग्य से उठती है
- 1:22:52मुमुक्षा। वैराग्य एक तरह की तकलीफ दे पुजीश
- 1:22:56न तो मैं अपना पता लग गया कि मैं ज़ंजीरों से जकड़ा हूँ, फिर अब इन
- 1:23:02झुंझुरों में तो नहीं रह सकते हैं तो इनको तोड़ें कैसे?
- 1:23:06वह होती है मोमुक्षा मोमुक्षा मुक्त होने की इच्छा।
- 1:23:13और जब तुम्हारी इच्छा होगी मुक्त होने की तो तुम रास्ता खोजोगे,
- 1:23:17इन्वेंशन कोई ना कोई इन्वेंशन करोगे और इन्वेंशन कहाँ से उठेगी
- 1:23:22नेसेसिटी से नेसेसिटी इस दी मदर ऑफ इन्वेंशन तो तुम खोजोगे और
- 1:23:31खोजोगे तो। भटक भटक के तुम्हें कोई न कोई
- 1:23:34गुरु मिल जायेगा और तुम मुक्त तभी हो गए जब तुम्हें सही मार्गदर्शन
- 1:23:42मिलेगा। सच्चा गुरु ही तुम्हें मुक्त कर
- 1:23:45सकता है। इन पाखंडों में राधे राधे करते
- 1:23:50हो, राम राम करते हो, ये तो तुम कभी नहीं पहुँच सकोगे मेरे से,
- 1:23:54मैं लिख के देने को तैयार हूँ इनको कुछ मिला नहीं है मैं बेबाक
- 1:24:01इसलिए तो बोलता हूँ इन्होंने खुद कहा नहीं।
- 1:24:06देखा? यह सिर्फ स्टिमुलेशन के कारण बोले
- 1:24:10जा रहे हैं, इसलिए इतना ऊंचे ऊंचा बोलते हैं की तुम बस और कुछ मत
- 1:24:17करो। जरूरत ही नहीं है, वह है।
- 1:24:28राधा उस किशोरी की तो बात ही मत करो।
- 1:24:38वह कुपित हो गई तो क्या करेगी? क्या करेगी भाई?
- 1:24:43उसे कह दो, कुपित हो जाए? फिर वो राधा ही क्या जो कुपित हो
- 1:24:47जाए? मूर्खों, राधा परम चैतन्य, राधा,
- 1:24:53चेतनता का प्रेम का प्रारूप राधा। क्रोधित हो ही नहीं सकती, राधा
- 1:25:02कुपित हो ही नहीं सकती। जो कुपित हो सकती है, वो चेतना
- 1:25:08निर्लेप होती है। उल्लू निर्लेप का अर्थ क्या है?
- 1:25:13ना वो कुपित होती है और ना ही वो किसी के संग चलती है, वह
- 1:25:20न्यूट्रल? है।
- 1:25:21निर्लेप का मतलब क्या लिप्त नहीं होती, वो तो गुस्सा भी नहीं होगी
- 1:25:26वो हाँ तुम गुस्सा हो सकते हो राधे राधे करने वाले और तुम
- 1:25:32गुस्सा होके किसी का क्या उखाड़ दोगे कुछ नहीं कर सकते हो राधे
- 1:25:37राधे करने वाले की शक्ति खुद ही वो मार लेते हैं अपने आप।
- 1:25:42राधे राधे करने से तुम अपनी शक्ति व्यय कर लेते हो।
- 1:25:45तुम एनर्जी लेसनर की पोज़ीशन में पहुँच जाते हो जबकि तुमने उसी
- 1:25:49शक्ति को इकट्ठे करके अपने भीतर की उस अवस्था तक पहुंचना था जहाँ
- 1:25:54तुम यू कैन डू एनिथिंग? यह उल्टा पाठ तुमको किस मूर्ख ने
- 1:26:00पढ़ा दिया समझ सको तो समझो मैं तुम्हें समझाने के लिए नहीं आया
- 1:26:09हूँ। मैं उनको समझाने के लिए आया हूँ
- 1:26:12जो मुझे सुनना चाहती। हूँ।
- 1:26:16और जो कमेंट कर देते हैं उनको तो मैं कह देता हूँ भाई तुम आए ही
- 1:26:19क्यों थे तुम्हें बुलाया किसने था?
- 1:26:22मत सुनो, मैंने तो तुम्हें कहा ही नहीं, तुम मुझे सुनो इसलिए
- 1:26:28तुम्हें उपलब्ध नहीं हूँ आपके लिए मैं सदा अनुपब्ध रहता हूँ नहीं तो
- 1:26:34बाहर पांडाल न लगा लूँ। मैं नई दाढ़ी को पीली कर सकता हूँ
- 1:26:39हैं भाई दाढ़ी तो है, मैं माथे को नहीं कर सकता हूँ, मैं मेकअप नहीं
- 1:26:45कर सकता हूँ बहुत करता हूँ, राम जी का रोल किया, बहुत मेकअप करते
- 1:26:51थे, बड़े मुकुट लगाते थे, लेकिन हमें पता है नकली से।
- 1:26:58तो तुम्हारे नकल से हमें कुछ लेना देना नहीं है।
- 1:27:02मैं कहता हूँ इस नकल को लोगों की ज़िन्दगी मत बनने दो, यही यही आप
- 1:27:10गलती कर रहे हो इसे। को मैं पाप कहता हूँ।
- 1:27:17वह किशोरी तो कभी नहीं व्यथित होती।
- 1:27:22वह तो कभी क्रोध की अग्नि में जलती नहीं और चेतना शांत होती है।
- 1:27:27सत्य चित आनंद वह क्यों कुपित होगी?
- 1:27:30अगर कुपित होगी तो वो चेतना नहीं? वो रहे तुम राधा राधा करने वाले
- 1:27:36तुम कुपित हो जाओ, तुम कुछ नहीं किसी का उखाड़ सकते हैं इससे
- 1:27:42ज्यादा मैं था कोई चालीसों वर्ष हो गए मुझे बहुत देखो।
- 1:27:52फिर ये जवाब नहीं देते कमाल की बात से अरे कुछ तो बोलो लेकिन
- 1:28:01क्या बोल रहे हैं, कुछ नहीं बोल सकते इनके पास सत्य तो है ही नहीं
- 1:28:05इधर से पढ़ लिया, उधर से पढ़ लिया, उससे पढ़ लिया, उससे सीख
- 1:28:08लिया। दूसरों का ज्ञान है, कागद का लिखा
- 1:28:11हुआ बोलते हैं, खुद का कुछ है ही नहीं वायक्रो मौसम वायक्रो मौसम
- 1:28:24तो एक तो मैंने पहले बताया कि उससे तुम्हारा मुँह टूटता था।
- 1:28:28मैं इन्हीं के लिए इतना रात रात भर जागा हूँ रातें काली की बीमार
- 1:28:35ये हुए तड़पा में मुझे पता था कि मेरी खोपड़ी फोड़ देंगे खोपड़िया
- 1:28:42को फोड़ देंगे। और मैंने अपने पिताजी के खोपड़ी
- 1:28:46को अच्छी तरह से फोड़ा। भाई जल्दी से चले जाएं, मुक्त हो
- 1:28:54जाएं जैसे वो कगार के ऊपर थे, किंतु मैं शांत स्वभाव ऐसे ही
- 1:29:02नहीं हुआ करता। नॉन रिएक्टिवनेस में तो आ ही गए
- 1:29:06थे पुत्र ही क्यों चाहिए? यही प्रश्न था ना बेटा पुत्र
- 1:29:17चाहिए क्योंकि पुत्र मैं बाये। पर हूँ सुन।
- 1:29:22स्त्री में बाह है, एक भी नहीं हुए तुम्हारे प्रश्न गहरे में
- 1:29:30थोड़ा सा विस्तार से बोल दूँ। वैसे तो डेढ़ घंटे की वीडियो पहले
- 1:29:33हो चुकी है। क्या करें स्त्री क्या करें?
- 1:29:44आपकी बातों को हमने समझ लिया लेकिन इससे क्या करें?
- 1:29:49ये जो शरीर लोग हैं इनमे तो वाय या एक्स का मतलब भी नहीं पैदा
- 1:29:54होता। इनमे तो शरीर ही नहीं है।
- 1:29:57ना वाय है ना एक्स? इनमें तो शुद्ध चेतना है या
- 1:30:01संस्कार हैं या वो पोटली है जिसे सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर कहते हैं,
- 1:30:09लेकिन। इनके लिए मैं थोड़ा सा बता दूँ।
- 1:30:11ये जो तंत्रिक लोग थे ये अपने साथ स्त्री को क्यों रखते थे?
- 1:30:19इसका कुछ फायदा ये भी था जब शरीर से बाहर चले जाएं तो नेगेटिव
- 1:30:23पोस्ट के कारण स्त्री उनके अंगूठों को हाथ लगाकर वो वापस आ
- 1:30:27जाएंगे। पहला तो ये स्त्री का फायदा?
- 1:30:30था। दूसरा स्त्री को फायदा क्या?
- 1:30:34था। इसको आप समझना आगे तुम हिसाब खुद
- 1:30:39लगाते जाना ज्यादा है। साहब के नाम में जानकारी है
- 1:30:44स्त्री अगर वाय के या वाय क्रो मौसम बड़ा होता है, यह परमात्मा
- 1:30:52की एक तरफ से नियामत है। अगर स्त्री वाय के समीप बैठेगी
- 1:31:03तुमने देखा? भगवान शंकर ने पार्वती को अपने
- 1:31:06अंग से लगा दिया अर्ध नारी स्वर्य बना लिया तो पार्वती का भी कल्याण
- 1:31:13हो गया। क्योंकि स्त्री वायक रोमोसोम की
- 1:31:19मौजूदगी में ही पहुँच सकती है। ये तंत्र का बहुत गहरा रहस्य है।
- 1:31:30इसको शायद ही तुम पचा पाओ। स्त्री से ये फायदा था कि स्त्री
- 1:31:37के अंगूठों को टच करना नेगेटिव पुस्टवक से बाहर चले गए हो तो तुम
- 1:31:42झट शरीर। में आ जाओगे।
- 1:31:46दूसरा, अगर स्त्री के तुमने देखा कभी चुम्बक।
- 1:31:51चुम्बक के साथ लोहे को रगड़ दो थोड़ी देर में लोहा भी चुम्बक हो
- 1:31:57जाएगा तुम कभी आजमा के देख अगर स्त्री पुरुष के सांनिध्य में भी
- 1:32:06बैठ जाए वह जो मल्ली बाई पहुंची ना।
- 1:32:10वो ऐसे ही नहीं पहुँच गई। अब तुम लिख लो मेरी ये बात ये
- 1:32:15बीके वाले एक व्यक्ति भी अपने अंत से में नहीं जा सकेगा।
- 1:32:18क्यों सब जगह एक्सेंट एक्स ही एक्सेंट वाय की समिधि ही नहीं है।
- 1:32:28या। ये जो स्त्रियाँ हैं जो जैन धर्म
- 1:32:32में अब ये बड़े गहरे रहस्य हैं, अब शायद लुप्त हो गए हैं, लुप्त
- 1:32:37प्रायः हो गए हैं तो इसलिए मैं बोल रहा हूँ तो आप इसो, इसको
- 1:32:42श्रुति के द्वारा स्मृति में रख लेना, लिख लेना आज तो कोई?
- 1:32:49इसको जलाएगा नहीं, वो वक्त चले गए।
- 1:32:52जब बख्तियार अल्लाह ने जला दिया था सब कुछ।
- 1:32:57फिर जी ने। आज वो वक्त नहीं है।
- 1:33:03आज कौन जगाया था? तो लिख के रख लो इसको।
- 1:33:10वाय की उपस्थिति में ही घटित होता है जो कुछ होता है मैं कोई कसीदें
- 1:33:23नहीं घट रहा हूँ वाय की प्रशंसा में।
- 1:33:30मैं सत्य का प्राकट्य कर रहा हूँ, व्हाई की उपस्थिति में अगर मल्ली
- 1:33:37व्हाई बैठी पुरुषों के सांनिध्य में इसलिए आपने देखा होगा?
- 1:33:42बहुत से नगा साधु और साध्वियां इकट्ठे में बैठी होती हैं।
- 1:33:51अब इनको चाहे नहीं पता मैं जानता हूँ नहीं बताये, लेकिन उनसे
- 1:33:57पुरुषों का भी थोड़ा सा फर्क पड़ेगा।
- 1:34:02शरीर से बाहर हो जाए, स्त्री मदद करें।
- 1:34:06स्त्रियों को फर्क पड़ेगा कि स्त्रियों का क्रोमोसोम वाई का
- 1:34:10सांनिध्य मिलने के कारण इनकी चेतना बढ़ेगी।
- 1:34:13सिर्फ एक वाय क्रोमोसोम ही ऐसा है जिसके कारण चेतना बढ़ती।
- 1:34:18है। इसलिए अगर किसी ने कहा।
- 1:34:22स्त्रियाँ नहीं पहुँच सकती तो वो किसी तल से बोला गया था।
- 1:34:26झूठ तो नहीं था लेकिन स्त्री पहुँच सकती है।
- 1:34:32वाय। प्रमोशन की मौजूदगी में पहुँच
- 1:34:34सकती है। अब इन शब्दों को लिख लेना शायद
- 1:34:38आने वाली पीढ़ियों को जरूरत पड़े। और मेरे इस प्रवचन को बचा लेना
- 1:34:47जिन्होंने कहा दिगंबरों ने नहीं पहुँच सकती।
- 1:34:54किसी कारण से कहा और श्वेत अंबरो ने कहा, वह भी किसी कारण से कहा।
- 1:35:01बिल्कुल ठीक है एक्स अकेली अगर स्त्री अकेली बीके बैठी हूँ तो
- 1:35:071,00,00,000 साल में भी नहीं पहुँचेंगे।
- 1:35:08सवाल ही नहीं पैदा होता और अगर सिर्फ साथ में यहाँ बैठी हूँ तो
- 1:35:12नहीं पहुँचेंगे ये लिखवा? लो आप।
- 1:35:16अपने हृदय में भी रख लो। आपको पुरुष का सांनिध्य रखना ही
- 1:35:21पड़ेगा इसलिए स्त्री की मेंटालिटी ऐसी बनाई वह समर्पण करती है,
- 1:35:33लेकिन करेगी किसको? उसको भावनात्मक रूप से समर्पित
- 1:35:42रूप से बनाया गया करेगी। किस को पुरुष को करेगी और पुरुष
- 1:35:48में क्या है पुरुष में वायक उत्सव में ये बात बड़ी गहरी है।
- 1:35:51बोलने को मैं तत्पर तो नहीं था, लेकिन क्या करें?
- 1:35:55स्वामी जी ने प्रश्न ही ऐसा पूछ लिया।
- 1:35:59मैं आपसे ये पूछूं कि क्या उसने तंत्र के बारे में मैंने सुना है
- 1:36:02कि बहुत बोला, उसने बोला नहीं ये बात खैर चलो किसी कारण से ये संत
- 1:36:09लोग भी छुपा लेते हैं। छुपाने को मैं भी राजी था लेकिन
- 1:36:13आपने उगाड़ लिया अब इसको। जानते कि मैं बोलना चाहता हूँ
- 1:36:18बोलेंगे जाने के उपरांत तो। बिल्कुल नहीं बोलेंगे।
- 1:36:24एक्स और व्हाई की मौजूदगी ध्यान करने वाली स्त्रियों से मैं ये
- 1:36:30कहूंगा कि कृपा करके आपके लिए। आपकी मौजूदगी में पुरुष होना
- 1:36:39चाहिए। 5710 फुट दूर हो जाए कोई बात
- 1:36:42नहीं, लेकिन पुरुष अगर जल्दी पहुंचना चाहते है तो उसके पास
- 1:36:47चाहे स्त्री न भी हो, कोई बात नहीं हो तो भी कोई बात।
- 1:36:50नहीं। वादा नहीं पहुंचाई।
- 1:36:55न हो तो भी चलेगा इसलिए पुरुष भाग्य इसलिए कोई भागी भागने ही
- 1:37:02नहीं दी। सन्तों ने कहा नहीं, तुम्हें कोई
- 1:37:06जरूरत। नहीं, तुम मत भागो।
- 1:37:09क्योंकि फिर वहाँ जाकर भी तुम्हें पुरुष के बाह की जरूरत।
- 1:37:13उसके अब अब हम मूल पे आ जाए स्रोत पे क्योंकि बहुत लंबी हो गई
- 1:37:18वीडियो। इससे ज्यादा तुम सुन भी नहीं
- 1:37:20सकोगे लेकिन इसको दो तीन बार में सुन अब आध्यात्मिक रूप से बाएं
- 1:37:27क्रोमोसोम की संरचना अकेले भाई की एक्स की नहीं।
- 1:37:32संग रचना इस तरह की होती है कि उसमें से चेतना निकलती है।
- 1:37:40सिर्फ अब ये चेतना तुम कहो की वैज्ञानिक तो होती नहीं,
- 1:37:45वैज्ञानिक तो बहुत कुछ नहीं होती। वैज्ञानिक तो कुंडलिया पे नहीं
- 1:37:49देख। वैज्ञानिक तो चक्र भी नहीं देख
- 1:37:51पाए। वैज्ञानिक तो आत्मा को भी नहीं
- 1:37:53देख पाए इसलिए सब कुछ नहीं है। ये मान ले नहीं माना जा सकता
- 1:37:58क्योंकि ये है विज्ञान तो कहता है परमात्मा भी नहीं है विज्ञान
- 1:38:03छोड़ो ये श्याम मानव कहता है भगवान नहीं, ये तो मानव है।
- 1:38:09नास्तिक लोग कहते हैं भगवान नहीं है मार्कर्स कहते हैं, आंधी से
- 1:38:14ज्यादा दुनिया तो वैसे ही नास्तिक है ओपेन रूप से और जो बाकी के हैं
- 1:38:20वो भी तो नास्तिक हैं क्योंकि खोजने का प्रयास नहीं करते।
- 1:38:24कोई तो रहे हैं वो धन खोल तो रहे हैं पदवी।
- 1:38:27खोल तो रहे हैं मान प्रतिष्ठा तो कहाँ से द्यात्मिक हो गए वो कहाँ
- 1:38:32से आस्तिक हो गए? आस्तिक तो यहाँ एकाध व्यक्ति कोई
- 1:38:36निकलता है, कोई महावीर जैसा, कोई बुद्ध जैसा कोई नानक जैसा कोई
- 1:38:42कबीर जैसा कोई मेरा जैसे कोई दया। कोई कोई व्यक्ति निकलता है और वह
- 1:38:55अपनी कुटिया में बैठ जाता है। क्यों चाहिए पुत्र?
- 1:39:03मैंने अपने ढंग से जो बोल सकता था बोल दिया।
- 1:39:10अब इससे ज्यादा नहीं बोल पाऊंगा। इससे ज्यादा खतरा इससे तुम बहुत
- 1:39:16कुछ समझ आओगे मैं समझता हूँ थीम मैं नहीं बोलती पुत्र नहीं होता
- 1:39:24सेपरेशन भाई। एक्स वै का सेपरेशन करते देख।
- 1:39:28या कुछ और भी सिद्धांत हैं जो भगवान कृष्ण ने बनाए थे?
- 1:39:35अब देखो पांडवों की पुत्री हुई नहीं क्योंकि ये सारी चीजें तब थी
- 1:39:43अब हराने की बात नहीं है कि कृष्ण के।
- 1:39:4816,108 रानियों में से रानियों ही गिनवा सभी के 10 मित्र थे।
- 1:39:56उत्तरी एक थी चारुमती बरूकमणी से थी कारण क्या हुआ?
- 1:40:03कारण यही के कृष्ण चाहते थे कि सभी।
- 1:40:05मुक्त हो जाए। ये भीतरी व्यवस्थाएँ और पुरुष
- 1:40:11शरीर के बिना मुक्ति करीब करीब नेक्स्ट इम्पॉसिबल नहीं करीब करीब
- 1:40:17इम्पॉसिबल है। इसलिए कृष्ण ने सिर्फ उत्तरों को
- 1:40:24ही जन्म। दिया।
- 1:40:26अभी दृष्ट ने तो पुत्री न होने के लिए कि एक तो हो जा शराब भी दे
- 1:40:32दिया स्त्री जाति लेकिन उसे मूलभूत संग्रामक व्यवस्था का पता।
- 1:40:41नहीं था। वह इस हिसाब से मूड था।
- 1:40:46इस हिसाब से कहता हूँ कृष्ण को पता था क्योंकि वह अध्यात्म है।
- 1:40:52उन्हें लड़के होने का राज़ भी पता था कि मेरे पास जो भी आया, जो भी
- 1:40:59आया एक भी व्यक्ति बता दे। जिसने मेरे से बच्चा मांगा और
- 1:41:05उसकी पुत्री हो गई, क्या हुआ? क्योंकि मैंने वो जो छू मंत्र है
- 1:41:13वो उसमें चला दिया, वो छू मंत्र को वही मैं फॉर्मूला।
- 1:41:20भेजता। हूँ।
- 1:41:23मेरे पास कोई भी आए उसको मैंने पुत्रों की व्यवस्था ही की।
- 1:41:29मेरे खुद के पुत्री नहीं है, देखो मेरे पुत्र के पुत्री।
- 1:41:34नहीं है क्या हुआ है? ये कुछ है ऐसी व्यवस्था ऐसा नहीं
- 1:41:41कि पुत्री। गलत होती है, लेकिन हम जो काम
- 1:41:43करते हैं उसका मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक है।
- 1:41:49हम इसको बैलेंस नहीं करना चाहते। एक्स वै को हम बैलेंस नहीं करना
- 1:41:54चाहते। हमारा मुख्य मोटो ही कुछ हो रहा
- 1:41:57है। हमारा मोटो है टु बी इस वर्चुअल।
- 1:42:02ये स्पिरिचुअलिटी कैसे आ जाए इनमे ये अपना अंतरिम लक्ष्य कैसे पाले?
- 1:42:08बस हमारा मोटो। ही है।
- 1:42:12इसलिए हम अपने ढंग से चलते हैं। अगर पुत्र चाहेगा की मेरी पुत्री
- 1:42:17हो जाए वो उसकी स्वयं की इच्छा है।
- 1:42:23लेकिन मैं तुमसे एक उदाहरण सिर्फ कृष्ण की देता हूँ कि उसकी एक
- 1:42:27बेटी हुई चारो मति। बाकी सभी पुत्र भाई पांडवों के
- 1:42:32सभी पुत्री पुत्री हुई ही नहीं। क्या था कि सब उस वक्त यह
- 1:42:39फॉर्मूला आम था और शायद जो बहुत पुराने शास्त्र पढ़ें या उनको कोई
- 1:42:46पन्ने पुण्य मिल जाए, उनमें शायद आपको यह फॉर्मूला मिल जाए।
- 1:42:51मेरे पास यह है फॉर्मूला कुछ विशेष व्यक्तियों को देवी चला।
- 1:42:58बिलकुल गुप्त तो मैं यहाँ से कुछ लेके जाऊंगा ही नहीं छोड़ के तो
- 1:43:02सब जाऊंगा और सही पूछो तो मैंने सब छोड़ दिया है क्योंकि भरोसा जब
- 1:43:1072 साल का हो गया तो मैंने बाबा से 72 साल ही मांगे।
- 1:43:1572 साल का हो गया। तो तब से ही मैंने सब जो बहुत
- 1:43:21गुप्त चीजें हैं, वो बतानी शुरू कर दे।
- 1:43:24कोई किसी को, कोई किसी को, कोई किसी को ये जरूरी नहीं कि सब कुछ
- 1:43:28पुत्र को ही बताया हो, लेकिन पुत्र को सब कुछ करीब करीब पता
- 1:43:32है। बाकी लोगों को भी पता।
- 1:43:35है। पुत्र को इसलिए पता है कि वो सदैव
- 1:43:40उपलब्ध है। मेरे।
- 1:43:41पास ये कारण है मुख्य और कोई कारण नहीं है।
- 1:43:44कोई मोह की व्यवस्था इसमें नहीं है, वो सदैव उपलब्ध है।
- 1:43:50इसी कारण से। इसलिए स्वामी जी मैंने आपके
- 1:43:53प्रश्न को उत्तर दे दिया। आपको जचे तो ठीक नहीं जचे तो ठीक?