Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Apr 25 - आप अपनी ऑडियंस क्यों नहीं बढ़ा रहे हैं? दीक्षा किन लोगों को मिलेगी? कौन सुनेगा मेरी वीडियो?
Transcript
- 0:01स्वामी आनंद गिरी बाबा जी आपने अपने ऑडिएंस की संख्या क्यों नहीं
- 0:14उड़ाई, जबकि इतना गहरा ध्यान? इतना गहरा तर्क, ऐसी आवाज और ऐसा
- 0:33गला उसके बावजूद की आपने अपनी ऑडिएंस।
- 0:46क्यों नहीं है बड़ा ये कैसा कारण? जब मुझे बोलने का आदेश हुआ तो
- 1:11मुझे कुछ हिदायतें दी गई। बाबा ने कहा कि हम।
- 1:23खुद ही भरवा लेंगे, जीसको सुनाना है, उसको सुनवा देंगे।
- 1:37जहाँ तक पहुंचना है, वहाँ तक पहुंचा देंगे।
- 1:44तुमने कोई अपनी तरफ से चेष्ठ नहीं करनी।
- 1:51और दीक्षा के बारे में जिसे हम कहेंगे उसे दीक्षा दे दो, जिसे हम
- 2:05कहेंगे नहीं, उसे दीक्षा मत दो। तुम्हें अपनी तरफ से कोई ऑडिएंस
- 2:19को बढ़ाने की जरूरत नहीं है। हम ही करेंगे जो भी करेंगे।
- 2:34उन हिदायतों में एक प्रिय भी थी कि आपने कम्यूट नहीं बनाना है।
- 2:44अकेले हो आप 35 वर्ष से अकेले ही रहना है।
- 2:54इकट्ठा नहीं करना है। यहीं से बोलना है यहीं से
- 3:01प्रसारित करने का हम इंतजाम कर देंगे और आपने?
- 3:11जो हम मैटर देंगे, उसके ऊपर बोलना है वैसा ही मैंने किया।
- 3:24जो प्रश्न आया उसका जवाब दिया। शुरू हो गया बोलना जब मैंने
- 3:36वीडियो डाली एनलाइटनमेंट। एनलाइटनमेंट के वीडियो पेपर मेरे
- 3:51पास बहुत से कमेंट हैं ऐसे ऐसे कमेंट आई बा कमाल कमेंट।
- 4:04मैंने बाबा से कहा बाबा ये तो सब पहुंचे हुए लोग हैं, इनके सामने
- 4:16बोलने की आवश्यकता क्या है? देखिए कमेंट ऐसे कमेंट।
- 4:26मुझे समझा रही हूँ यू अरे इन हैलू सेशन तुम्हें सुभना क्या तुम्हें
- 4:36भ्रम पड़ क्या? तो मैंने कहा बाबा ये तो सभी पूछे
- 4:43हुए हैं। मैं किसी के सामने बोलूं?
- 4:48लाखों लोगों ने सुना और इतने कमेंट आए, इतने फ़ोन आए ऐसा कभी
- 4:59होता है? कभी किसी के साथ हुआ है?
- 5:08मैंने कहा बाबा ये क्या देर कर दी है वही बोला खूब हो अक्षर बा
- 5:18अक्षर ये क्या हुआ? तो बाबा बोले आप अज्ञानियों के
- 5:31सामने बोलो, मैं इशारा समझ गया। जो पहुँच गए हैं उनके सामने बोलने
- 5:40की कोई आवश्यकता नहीं है, बस उनका इशारा।
- 5:45और मैं समझ गया यहाँ जो मुझे समझा रहे हैं वो पहुंचे हुए हैं और
- 5:56पहुंचे हुए को मैं कैसे पहुंचा सकता हूँ जो पहले हिस्से पहुंचे
- 6:02हुए हैं। उनको मैं क्या बताऊँगा व्हाट इस
- 6:06दी एनलाइटनमेंट और उसके बाद तो बहुत से धर्माचार्यों की कतार लग
- 6:18गई, एनलाइटनमेंट होता ही नहीं समझते समझते मैं समझ गया।
- 6:31यह भी समझाई जिन्होंने परमात्मा देखा नहीं, वह कहते हैं के होता
- 6:36नहीं मार्कस जिन्हें कर्म सिद्धांत का बताने में वे चार वाक
- 6:43हो जाते हैं। प्रणम कृतवा कृत्म विविध यदा
- 6:49जीवित, सुखी जीवित बस मैं बुतत देहस्य पुनर आगमनम कुतह तर्कबड़ी
- 6:56शांता है। बाबा ने दो हर्ष में बात खत्म कर
- 7:04दी। ज्ञानियों के सामने बोलो
- 7:10ज्ञानियों के सामने मत बोलो उनके दो अक्षर और मैं सब समझ गया ये
- 7:25कमेंट करने वाले। मुझे क्या मालूम था मुझसे पहले
- 7:30पहुंचे हुए इनको समझाने की आवश्यकता क्या है?
- 7:37कबीर फरीद से मिलें, कबीर फरीद से क्या बोलें और फरीद कबीर से क्या
- 7:45बोलें? दो अच्छा है और मैं सब समझ गया
- 7:59ज्ञानी के सामने मत बोलो, अज्ञानियों के सामने बोलो, जो
- 8:12सुनना चाहता है उसके समक्ष बोलो। फिर दौर शुरू हुआ मैंने धड़ाधड़
- 8:23काटरिंग शुरू कर दी है। मैंने किसी को नहीं कहा, शेयर करो
- 8:33कभी नहीं कहा। एक आध वीडियो जिसके बारे में कभी
- 8:41बोला नहीं गया था। जैसे अनाथनाथ इससे पहले कभी नहीं
- 8:48बोला गया था। 2500 वीडियोज़ में से मैंने नहीं
- 8:58कहा, शेयर करो नहीं कहा लाइक करो, अच्छी लगे, लाइक कर देते हैं लोग
- 9:07नहीं, अच्छी लगे, मुझे गाली निकाल देते हैं।
- 9:13लोगों ने माँ बहन की गाड़ियां क्या बताऊँ तुम्हे पहुंचे हुए
- 9:24लोगों ने कमेंट किए चुप हो जा काइरों ने डराया मूर्खों ने
- 9:40समझाया। लेकिन मैं भूकंप से परे नहीं हुआ
- 9:51बोलते चला गया, बात हुई, ठीक थी, पहले से पहुंचे हुए लोगों को क्या
- 10:03बताना? अब क्या बताएं?
- 10:06नानक फरीद को दोनों ही पहुंचे हुए हैं।
- 10:14इनके समक्ष बोलता हूँ सूरज को दिया खाना मैं चुप हो गया।
- 10:22अगर कोई ऐसे व्यक्ति का कमेंट आ जाता, मैं उसको ब्लॉक कर देता।
- 10:33जीतने लोग आए, ज़रा सा कमेंट में गड़बड़ाया मैंने ब्लॉक कर दिया।
- 10:45प्यास लगी है, पानी पी लो, नहीं लगी है तो सो जाओ, आराम से घर जा
- 10:59के विश्राम करो। ये कहानी थी आज तक मैंने जो बोला
- 11:12अपने अनुभव से बोला आँखों देखी, बोला सवाय उसके कुछ नहीं बोला।
- 11:28कुछ लोगों के बड़े कमेंट्स हैं। दूसरे ग्रहों को देखते हो एस्टर
- 11:35ट्रैवलिंग हाउ इज़ पॉसिबल? मैंने कहा आप मत सुना करो, आपको
- 11:50अच्छा नहीं लगता किसी ने बुलाया आपको?
- 11:53मैंने पीले चावल भेजे थे, क्यों सुन रहे हो और देखिए अगर प्यास
- 12:03नहीं जगी। आपने कभी देखा किसी के घर आप
- 12:07मेहमान बन के गए दूसरे घर में मेहमान बन के गए, तीसरे में गए
- 12:14सभी जगह पानी तो परोसा जाता ही आप कह देते हो नहीं पानी नहीं पी के
- 12:21आए हैं, चाय भी नहीं पी के आए हैं।
- 12:26पहले से ही तृप्त हो पेट भरे तो लंगर में पंगत में बैठाने का
- 12:36अभिप्राय भी क्या है और प्रयोजन भी क्या है?
- 12:43ये कहना था कुछ साधनों की भी कमी थी और कुछ बाबा ने कह दिया था
- 12:58नहीं कोई ऐड वगैरह नहीं लगाना है। जिसे भेजना है, हम भेज देंगे
- 13:05जीसको सुनाना है, हम सोना देंगे चिंता नहीं लेना तुमने तुमने
- 13:13सिर्फ बोला और बोलना हम बुलवाएंगे और आज तक बाबा बुलाएगी।
- 13:23हम बोले कैसे कैसे क्वेश्चन लोगों ने किया है?
- 13:32हमने कोई शास्त्र नहीं पढ़ा हमने कोई गीता।
- 13:38कुरान, कुरान, बाइपर ग्रंथ कुछ नहीं पड़ा, प्रश्न आता देखते और
- 13:48खुद ही भरवा लेता, आज भी ऐसा है, ऐड के चीज़ भी लगाऊ किसका प्रचार
- 14:02करूँ? और किसके आगे प्रचार करूँ, किनके
- 14:11पेट भरे हैं? जिन्हें प्यास नहीं लगी है,
- 14:15उन्हें कहूँ पंखत में बैठ जाऊं किनको प्यास नहीं लगी है?
- 14:25लोगों से तख्त जिनका शरीर त्राहि त्राहि पानी पानी नहीं करता
- 14:35उन्हें पानी ठूंस दो। भूख नहीं लगी।
- 14:41बैठा दूँ, जबरदस्ती के खाओ नहीं, ऐसा कुछ नहीं होगा, ना ही कुछ ऐसा
- 14:50सब्जेक्ट मैंने बोला जो व्यर्थ था, जो देखा वही बोला।
- 15:02जैसा खुद के अनुभव में आया वैसा बोला।
- 15:07उसे अतिरिक्त कुछ नहीं बोला। बोलना चाहिए जो जानते नहीं उसको
- 15:17बोलने का हर जगह। जो जानते नहीं तो क्यों बोलूं?
- 15:34अगर जो जानते नहीं वो बोलते हो तो अवश्य ही तुम्हारा उसमें कोई
- 15:39निहित स्वार्थ होगा अन्यथा बोला नहीं जाता।
- 15:46निहित सार्थ वाला व्यक्ति ही बोलता है जो प्रचार करता है,
- 15:55प्रसार करता है, करुणा, प्यार, मानवता बहाना है।
- 16:05अन्यथा तो अपना रंग जो बना है ऐसा कुछ ना अंत में कभी आया, ना ही
- 16:19मैंने किया। अपना कंटेंट छोड़ जाओ।
- 16:26बहुत जगह यह फील्ड है। यूट्यूब बंध भी हो जाए, भ्रष्ट भी
- 16:33हो जाए तो भी बहुत जगह ये कंटेंट सेव है क्योंकि बहुमूल्य अमूल्य
- 16:42है। ऐसा कुछ जो शास्त्रों में कभी कह
- 16:47नहीं गया जो घुंडियाँ जो गांठियाँ आज तक अनखोली थीं एंड सब्जी थीं,
- 16:58रहस्य थे जहाँ तक समझाये गए मैंने समझा दिया।
- 17:09आपने कहा ओडीएस क्यों नहीं उठाई? काहे जब किसी प्रकार का कोई प्रयो
- 17:19जंग नहीं, कोई लोह नहीं। कुछ लेना देना नहीं है तो ऑडिएंस
- 17:39को क्यों बढ़ाऊं? क्यों ऐड लगाओ ज्यादा रोग सुन लें
- 17:48नहीं। जब बाबा ने कह दिया जिसे सुनाना
- 17:53हम सुनाएंगे, जिसे नहीं सुनाना, उसे नहीं सुनाएंगे और जिसने नहीं
- 18:06सुनना। वह वापस से ही मुझपे चीज़ पटक
- 18:13देता। गालियों के बुखारों के साथ फिर
- 18:24ऐसी अवस्था में ओडीएस को बढ़ाने का अभिप्राय भी क्या है?
- 18:34नहीं अपने प्रश्न किसी और बात को समझ के या आज के तथा कथित बोलने
- 18:45वालों को देख के पूछ लिया होगा। कितनी कितनी ऐड्स लगती हैं, कितने
- 18:51कितने लोग बैठे होते हैं। मेरे अडेड करने वाले लोग सेवक हैं
- 19:03और जब मैंने बोलना शुरू किया, मेरे पास न फ़ोन था।
- 19:08ना ट्राई पोर्ट था, कुछ नहीं था सभी आप जैसे लोगों ने वही आकराया
- 19:19ना मेरी आवाज से, ना मेरा कॅन्टेंट था ना मैं कुछ।
- 19:28जानता था न, मैं बोलता था, बलवाने वाला बलवा देता था।
- 19:39उस वृहद इस शक्ति ने इस यंत्र का यंत्र की तरह इस्तेमाल किया है।
- 19:48और मुझे हरजा विद्या था, क्योंकि जिसका मैं मेरा कब का खत्म हो
- 20:00गया, वह दावा भी क्या करें, क्यों करें?
- 20:10प्रश्न तो आपने ठीक किया? संसार के हिसाब से आज के संसार के
- 20:17हिसाब से ठीक किया, लेकिन शायद जवाब तुम्हारे अनुकूल ना मिला हो।
- 20:27तुम भी चाहते हो। खैर।
- 20:32कि यह अमूल्य ज्ञान लोगों के पास पहुँच जिसने पहुंचाना पहुंचा दिया
- 20:42लोग करते हैं आज भी शेयर करते हैं लोग अपने प्रियजनों को।
- 20:52मैं कह तक जिसने सुन लिया, सुन लिया।
- 20:59नहीं सुना, नहीं सुना मेरी कोई सिर दर्दी नहीं सुनें।
- 21:07इसलिए प्रश्न तुम्हारा ठीक आज की दुनिया के हिसाब से ठीक मेरे
- 21:14हिसाब से ठीक नहीं। मैं जीस कारण से बोला, उसी कारण
- 21:21से बोला और फिर जो पहले पहुँच गए मेरे से।
- 21:28उन्हें मैं बताऊँ भी तो क्या बताऊँ।
- 21:32आज भी आज भी लोग आ जाते हैं कोई कोई बीच में से हाला के लोग जानते
- 21:39हैं, अब नहीं आते, विवाद नहीं करते हैं बस।
- 21:47विवाद करने से अच्छा मैं कहता हूँ तुम मत सुन।
- 21:54इससे ज्यादा स्पष्ट और सास बात क्या होगी?
- 21:59अब सुनते हैं क्यों हो मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचाई हुआ होगा
- 22:05आपने? मैंने कहा आपने सुना ही क्यों
- 22:10जिससे आपकी भावनाओं को ठेस पहुंची।
- 22:13मैंने आपके कान क्यों लगा दिया था?
- 22:17आपकी भावनाओं को ठेस आपके सुनने के कारण पहुंची।
- 22:24मैंने आपको नहीं सुनाया, आपको नहीं सुनना चाहिए था तो मैं कैसे
- 22:31जिम्मेदार हुआ? मेरी कोई जिम्मेवारी नहीं, ये था
- 22:37कारण। ना कछु लेना, ना कछु देना, ना कछु
- 22:50लेना, ना कछु देना। ना कछु ले ना ना कछु दे ना कबीरा
- 23:12मगन कबीरी में। मन्नड़ो लाग्यो मेरो राम फकीरी
- 23:27मैं फकीरी मैं मन्नड़ो लाग्यो मेरो राम।
- 23:48एक कारण था कुछ लिमिटेड लोग जिन्होंने सुना कुछ 1000 वो आज भी
- 23:57सुन रहे हैं जिनको लत लग गई। ये लत आज भी एडिक्शन है।
- 24:10जीसको उसने सुनवाना चाहा सो जानू जीस, देहु जनायु जो पहले से ही
- 24:17जाने हुए हैं उनको मैं क जनूंगा मैं कहें क्या?
- 24:27मैं तंबू नहीं लगाता, मैं ढोल नहीं पीटता।
- 24:31मैं होल ड्रिंक्स नहीं लगाता, जो सुने सुने नहीं सुने कि मैं
- 24:42तानाशाह थोड़ी हूँ। आपको भी कहता हूँ आप भी इस कूड़े
- 24:52में मत पड़ना यह आनंद की बहार तो मैं भी कभी नसीब हो के।
- 25:03और तब तुम पाओगे के प्रचार करने में प्रसार करने में वो मज़ा कहाँ
- 25:09है जो पीने में है पीने का मज़ा निराला है।
- 25:25जो पी लेता है वो इधर उधर नहीं डबता है खँसा पायो तार तलैया।
- 26:01ताल, तलैया, नमस्ते कॉल में कुछ ऐसा है हम सब आयो मानसरोवर।
- 26:27ताल तलैया क्यों डोले डोले, काहे डोले का जब मानसरोवर के बीच में?
- 26:50नहाने की जगह मिल गई सरोवर तालाब क्यों?
- 26:57डोलेगा मूर्खों का अगर ताल तलैया में डोलेगा।
- 27:15इसलिए जो भजा पीने में है वो बताने में नहीं है बताने में वो
- 27:31आनंद नहीं है। बात उसी की है जो पिया जाता है
- 27:42उसी को बताया जाता है, लेकिन बताने में वजह नहीं है।
- 27:47पीने में बड़ा मज़ा है, तुम्हें भी मिलेगा।
- 27:54लेकिन तुम तुम पीना बताने की चेष्टा मत करना बताने की चेष्टा
- 28:02अज्ञानी किया करते हैं, ज्ञानी पिया करते हैं।
- 28:16इंसानों को बताने का लाभ है भगवानो को बताने का कोई लाभ है?
- 28:26तुम बोलना, बोलना तो इंसानों के सामने बोलना भगवानो के सामने
- 28:33नहीं। जो भगवान जैसा सूख करे वहाँ हाथ
- 28:41जोड़ लेना है। पांव छू लेना मैं ऐसा ही किया
- 28:46करता था। जो कहता बाबा आओ शास्त्र अर्थ करे
- 28:51मैं पांव छू लेता हूँ। काहे शस्त्र करना, किसके बारे में
- 28:56शस्त्र करना, उसके बारे में धरती धरती जीतने एस्ट्रॉयड उसके
- 29:07अस्तित्व में आवारा घूम रहे हैं। जिसका तुम एक कण मात्रा भी नहीं
- 29:13बना सकते, उसके बारे में बहस करोगे?
- 29:19नहीं ऐसी मूर्खता मत करना, ऐसी मूर्खता मत करना बड़ा प्यारा है,
- 29:25वो बड़ा मीठा है वो। बड़ा आनंददायी हो, कोई बखान नहीं,
- 29:39धन्यवाद।