Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Feb 25 - सत्य बोलना क्यों जरूरी है? ज्ञान चक्षु प्राप्ति के लिए बर्बरीक का सिर काटना क्यों जरूरी था?
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- 0:04सूक्ष्म के लिए एक शब्द आज का विचार शूद्र वह जो अपने आप को
- 0:18शरीर मानता है। और ब्राह्मण वह जो अपने आप को
- 0:27शरीर और मन से परे जानता है, फिर सुनिए शब्द को शूद्र, वह जो अपने
- 0:38आप को शरीर मानता है। ब्राह्मण वह जो अपने आप को शरीर
- 0:45और मन से पार जानता है। पहला प्रश्न शुरू करें।
- 1:01प्रियदर्शी बाबा आप कहते हो सारा अस्तित्व है।
- 1:12भगवान कृष्ण भी यही कहते हैं। सभी संत भी यही कहते हैं।
- 1:22अगर सब कुछ कृष्ण है तो कृष्ण शिशु पाल कंस का वध क्यों कर देते
- 1:33हैं? 40,00,000 लोगों को महाभारत के
- 1:45युद्ध में मरवा देते हैं कृष्ण ये कैसा भगवान हुआ?
- 2:07यह जानता हूँ अभी कि यह सब मैं हूँ कंस भी मैं हूँ शिशु पाल भी
- 2:17मैं हूँ पांच पांडव भी मैं हूँ। छठा पांडव जो अवैध पंक्ति से हुआ
- 2:28वो भी मैं हूँ और सो कौरव भी मैं हूँ और 101 वां कौरव भी मैं हूँ
- 2:43इतने लोगों को क्यों मरवा देते हैं जब वो जानते हैं कि ये सब मैं
- 2:47ही हूँ? सुंदर सवाल है जब वह बड़ा शर्ल है
- 2:59इतना कठिन जवाब नहीं की इतना कठिन कर के में था।
- 3:10यह शरीर तुम हो पूरा ज़रा सोचो इस शरीर को गैंगरीन हो जाए?
- 3:21शरीर का ये ऊँगली गलता गलता, यहाँ तक गल जाए।
- 3:27और डॉक्टर कहे कि अगर यह नहीं कटवाया तो सारा शरीर निकल जाएगा।
- 3:35उस वक्त मुझे क्या करना चाहिए? सभी कहोगे आप नहीं कटवाओगे?
- 3:49तो सारा शरीर गल जाएगा खत्म आचार का और इससे अच्छा है जो बचता है
- 3:56उसे तो बचा लो जो कटता है, उसे काट दो यही भगवान कृष्ण कहते हैं
- 4:05बहुत से प्रश्न थे गीता के संबंध में।
- 4:10सबको एक ही झाड़ू से इकट्ठा कर लेता हूँ।
- 4:13मैं सभी प्रश्नों का जबाब आ जाएगा।
- 4:26यदाजदा ही धर्मस्य गलाने रूबावती भारत जब कोई मेरे शरीर का अंग गल
- 4:32जाता है। और ऐसा लगता है कि सारा शरीर ही
- 4:39खलचाएगा अभ्युत्तानम अधर्मश्य तथा आत्मम सजमे हम पृत्रानय साधु नाम।
- 4:53बिना गले शरीर को बचाने के लिए बिना शाय के दुष्क्रितान धर्म
- 5:00संस्थापनार्थाय उस बच्चों के शरीर को बचाने के लिए शंभवामी जुगे
- 5:09जुगे। मैं उस डॉक्टर का काम करता हूँ जो
- 5:14उस सड़े हुए अंग को काट देता है, इसीलिए कृष्ण इसे धर्म की
- 5:28संस्थापना करते हैं। दूसरे अर्थों में।
- 5:35जो वो कटनी योग्य है, उसे काट देते हैं, जो बचाने योग्य है उसे
- 5:41बचा लेते हैं। बस यही है सारी गीता का उपदेश।
- 5:52तुम क्या कहते हो? कंस को बचा लेना चाहिए तो निरपराध
- 5:58छोटे बच्चे। जन्म लेते ही दीवार के ऊपर टकरा
- 6:03के मार देना, ये ठीक था काम उसका। रुक्मणी जिससे प्रेम करती है,
- 6:15शिशु पाल से नहीं करती, कृष्ण से करती है और कृष्ण को पाती बहती है
- 6:23मुझे निकाल लो यहाँ से और कृष्ण ले जाते हैं, उस शिशु पाल गालियां
- 6:31निकालता है। लोगों की दूसरों के सीरों को हरण
- 6:35करने वाला, बलात्कारी, पाखंडी, भ्रष्ट चोर क्या समाज के ऐसे अंग
- 6:49को विचाल लेना चाहिए? कृष्ण वही काम करते हैं, जो अंग
- 6:59गला ही हुआ है, उसको काट दो, सीधा सा फॉर्मूला है कृष्ण का और अब
- 7:06दूसरी बात पे आ जाए हैं क्योंकि यह सारा अंग सारा शरीर सारा
- 7:13अस्तित्व कृष्ण का है। जब ये बांह कटेगी तो दर्द कृष्ण
- 7:24को भी होगा, क्योंकि ये सारा शरीर कृष्ण का है, ऐसा नहीं है।
- 7:34के कृष्ण बच जाएंगे, दर्द से नहीं, उसका एक अंग गया।
- 7:40वह इस हाथ से काम लेने योग्य नहीं रहेगा।
- 7:47दुख कृष्ण को भी भौंकना पड़ता है, लेकिन यह जानते हुए कि यह सारे
- 7:55शरीर को गला देगा, डॉक्टर की तरह उस गले हुए अंग को कटवाना ही शुभ
- 8:04होगा। इसलिए वो वध कर देते हैं या वध
- 8:10करवा देते हैं। अब कृष्ण ने कांसका और शिशु पाल
- 8:17का वध खुद क्यों किया और कौरवों का वध अर्जुन से क्यों करवाया?
- 8:25ये बड़ा लंबा चौड़ा प्रश्न है। प्रश्न ठीक है।
- 8:28इसका जवाब मैं किसी अन्य वीडियो में दूंगा।
- 8:31वीडियो पहले ही बड़ी लम्बी हो जाती हैं।
- 8:33आप सुन नहीं पाते मैं एवरेज व्यूड डायरेक्शन देखता हूँ।
- 8:38करीब करीब आधा होता है जब आपको पूरी वीडियो में रस आने लगा।
- 8:47और लोग हैं जीस वीडियो को आप आधा सुनते हो, उसको चार चार बार सुनते
- 8:56हो। जब आपको रस आने लगा है तो मैं और
- 9:05बड़ी वीडियो डाल दूंगा। फिक्र मत करो।
- 9:10इस सागर में जल की कोई कमी नहीं है।
- 9:16इस अमृत खान में अमृत की कोई कमी नहीं है।
- 9:19बराबर है इसका प्रतीक कण। अमृत से युक्त है और यह असंख्य है
- 9:32असीम है कभी खत्म नहीं होगा कभी कम नहीं होगा।
- 9:42इसलिए उपनिषद कहते हैं। पूर्ण श्य पूर्ण मादा है, पूर्ण
- 9:48में से पूर्ण को निकाल लिया जाए। पूर्ण मेवा विशिष्ट पूर्ण ही बचता
- 9:53है, कुछ घटता नहीं रोज़ बोल दूँ? मैं न बढ़ता है, न घटता है।
- 10:02यह वो खान है और अजूबी खान है। तो आपके दो प्रश्न हो गए कंस को
- 10:22क्यों मारा? शिशु पाल को खुद क्यों मारा?
- 10:25क्या पांडवों को खुद नहीं मार सकते?
- 10:28कुरवों को खुद नहीं मार सकते थे, बिल्कुल मार सकते थे।
- 10:37और तुम्हें क्या पता भीतर से ये लड़ाई किसने लड़ी?
- 10:46तुम्हारे पास वो अंतर नाइन नहीं है।
- 10:50जिसके पास अंतर नयन दिये थे भगवान कृष्ण ने जिन्हें आज आप बाबा के
- 11:03नाम से संबोधित करते रहो। खाटू श्याम।
- 11:12उनको अंतर शक्षु मिल चुका था। उसकी इच्छा थी कि मैं सारे
- 11:18महाभारत के युद्ध को अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ तो कृष्ण ने
- 11:22कहा इन आँखों से तुम नहीं देख सका हुआ है बर्बिक।
- 11:32भीष्म का पुत्र था भीम का अगर तुम वास्तव में देखना चाहते हो तो मैं
- 11:42तुम्हें ज्ञान जक्षु देता हूँ वहाँ से दिखेगी तुम्हें असलियत।
- 11:49तो हमारे पास भी ज्ञान चकशू है और बिना ज्ञान चकशू के बड़े आराम से
- 11:57बोला जा सकता है। परमात्मा नहीं है, बोल देते हैं
- 12:02मार्कस नीचे चार वक्त। हिटलर, स्टालिन, माओ, बढ़िया हमसे
- 12:16बस अंतरक्षु का अभाव है। यही बात कृष्ण कहते हैं, बरब्रीक
- 12:23कौन बरब्रीक अगर तुम वास्तव में देखना चाहते हो तो दो आँखें हैं।
- 12:30एक तो वो जिन आँखों से तुम देखते है, एक तो वो और उन आँखों से जो
- 12:41तुम देखते हो वो चर्मचक्षुत्र उसके लिए काम करना होगा।
- 12:47अब ये तो कहानियों हैं जो तुमने बना दी के सिर काट लिया, सिर को
- 12:54ऊपर लटका दिया। ये सब कहानियों हैं और प्रतीक हैं
- 13:00सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स दट्स कॉल्ड अब्रेविएशन।
- 13:11ये तो सिंपल सा है। कृष्ण कहता अगर तुम सच में देखना
- 13:16चाहते हो तो मैं भी कहता हूँ नास्तिको लोग कहते हैं परमात्मा
- 13:21नहीं है तुमने चर्म जक्षू से देखा।
- 13:27अगर वास्तव में देखना चाहते हो तो ज्ञान सक्षों से देखो, दूसरे
- 13:31जक्षू भी हैं बहुत से लोग कहते हैं हमें दे दो ज्ञान सक्षम कोई
- 13:42आएगा उसे मिल जायेगा और मिला है। मिला है।
- 13:47ज्ञान कक्षु पहुंचे हैं तो बरबरी कहता है प्रभु मेरी अंतिम अभिलाषा
- 13:59यह है जो तो मैं नहीं लड़ूंगा चलो तुम्हारे कहने से और मैं जानता
- 14:06हूँ। जीस तरफ कृष्ण है यानी सत्य है।
- 14:11वो सर्व जीत होगे, लेकिन मेरी इच्छा पूरी कर तुम बताओ क्या
- 14:20इच्छा है बरबिक इच्छा है कि मैं इस महाभारत में दुनिया का एक
- 14:27महत्त्व इवेंट गटने जा रहा है। मैं उसको अपनी आँखों से देखना
- 14:33चाहता हूँ फ्रम दी वेरी फर्स्ट डे पहले दिन से ही देखना चाहता हूँ,
- 14:41ठीक है, नकली नकली देखना चाहती हो कि असली असली देखना चाहती हो यह
- 14:51प्रश्न पूछा। कृष्ण बरब्रिक्स तो हमारे
- 14:56शास्त्रों में उन्हें मिलेगा। मैं उस युद्ध के मैदान में था,
- 15:05इसलिए मैं हिम्मत कर पाऊंगा यह बात बोलने की मैंने पहले भी कहा
- 15:12था। भगवान राम के वक्त भी मैं था,
- 15:17कृष्ण के वक्त भी मैं था और मैं साक्षी हूँ इन बातों का बहुत से
- 15:24लोग भाग जाते हैं, बंद कर देते हैं चैनल को अब यह बकवास हमसे
- 15:29सुनी नहीं जाएगी, मैंने कहा मत सुनो।
- 15:35अच्छी अच्छी बात सुनो जो सुनाते हैं मेरी बकवास को मत सुनो, कहता
- 15:43भी कौन है तुम्हें बस कमेंट मत करना।
- 15:48क्योंकि कमेंट करने के युग जब तुम हो जाओगे तब तुम मेरी बात को समझ
- 15:52जाओगे, कमेंट नहीं करोगे तो भरप्रीत ने कहा मैं सचमुच जो
- 16:05युद्ध के भीतर हुआ वो देखना चाहता हूँ।
- 16:13तो फिर बरब्रिक तुम्हें अंतर चक्षुओं की जरूरत पड़ेगी जो मैंने
- 16:22अर्जुन को दिए। अंतर चक्षु उसके लिए क्या करना
- 16:28होगा? उसके लिए तुम्हें अपना सर देना
- 16:37होगा, हम भी रोज़ कहते हैं। जेतो प्रेम मिलन की चाह।
- 16:52शी सुतलीधर घर मेरे हाँ शी सुतलीधर।
- 17:08घर वर आ घर वर हाँ हाँ हाँ जेतों प्रेम मिलन की चार।
- 17:27यही कृष्ण ने कहा सच में जो घटा वो देखना चाहते हो हाँ नकली नकली
- 17:35नकली फूलों का क्या देखना होता है, वो तो हमने ही बनाया, आज सब
- 17:44कुछ चीजों तुम देख रहे हो। नकली नकली बनाया हुआ है मानव
- 17:49खोपड़ी की एजाद जो कभी 10 मिनट के लिए अपने भीतर नहीं गए आई गेस की
- 17:57कुर्सियां संभाले रहे वो तुम्हें गीता का व्याख्यान देंगे,
- 18:01उपनिश्चित में व्याख्यान देंगे। और देश जल रहा है वो उठने का साहस
- 18:13नहीं करेगा। फिर वो कहेंगे ये मुझे मार
- 18:18डालेगा। लेकिन कृष्ण को मृत्यु का वह नहीं
- 18:22होता तो कृष्ण बाँचने वाले को मृत्यु का वह नहीं होना चाहिए।
- 18:31डर के भागने वाले भगोड़े हैं। ये ज्ञान इनकी खोपड़ियों से आता
- 18:37है अंतस्थल से नहीं आता मेरे एक एक शब्द को सुन लेना और तुम रहो
- 18:46जुंगुल खबकते हो। फिर तुम्हें चीज़ देना होगा।
- 18:58शहर से बरबरीक तैयार हो गया, ठीक है, चीज़ ले लो देखना चाहता हूँ
- 19:07सत्य में क्या बता? कृष्ण के होते हुए युद्ध कैसा
- 19:12हुआ? बड़ा मजेदार होगा, यह देखना अपने
- 19:16आप में विलक्षण सत्य है। कृष्ण ने अंतःशक्षु दे दिए उसका
- 19:29सिलसिले लिया। यह सिंपल है, प्रतीक है।
- 19:37सचमुच में सिर नहीं काट लिया, सचमुच में गणेश का सिर भी नहीं
- 19:42काटा था। ध्यान रखना ये तुम्हारे शास्त्रों
- 19:46के गप्पे हैं, जो भीतरी सत्यात्मक ज्ञान नहीं रखते, वो तथ्यात्मक
- 19:54ज्ञान दे देते हैं। बनावटे ना गणेश का सर कटाव, इसलिए
- 20:04मैं रोज़ कह देता हूँ तुम समझते नहीं और सूंड वाला पूछ वाला कह
- 20:08देता हूँ तुम गुस्सा कहाँ जाते हो?
- 20:13तुम्हारे जैसे सुंदर पुरुष हैं गणेश तुम से ज्यादा विलक्षण पुरुष
- 20:20हैं तुम से ज्यादा बुद्धिमान तुमने उसके सूट लगा दिया, वो लिया
- 20:25बिगाड़ दिया, एक दांत तोड़ दिया वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि
- 20:31समप्रभा। मेरा बिगनम करो मैं देव सर वकार
- 20:35ये शु सर बता रोज़ ठग लेते हैं ब्राह्मण लोग आपको ये चार मंत्र
- 20:43बोल के होता हुआ था, कुछ नहीं, ज्ञान व्यान कुछ नहीं।
- 20:58हम कह देते हैं सीस क दानी वाकई सीस क दानी था, अब तुमसे एक और
- 21:08बात बताता हूँ यह सीस के दानी अद्भुत होते हैं।
- 21:25जो अपना सिर नहीं दे सकता, वह प्रेम गली में न आए जो सी सतली पे
- 21:34धर न सके वह प्रेम गली में आएगा नहीं आना चाहिए दूर ही रहो तुम इस
- 21:41महफिल से। ये मैखना है या खुद ही अपना गला
- 21:50काट के अपनी हथेली पर रखना होता है तुम्हें इन बातों का मतलब शायद
- 21:56समझ न आए। यहाँ ज़िन्दगी का सवाल होता है।
- 22:23होईशा उनका ख्याल आ गया, वो ही ज़िन्दगी का।
- 22:40सवाल लग गया, वही जिंदगी का सवाल लग गया।
- 22:59शान का ख्याल आ गया। जब उसमें मिलने का मन हो तो
- 23:14ज़िन्दगी का सुवाल पैदा हो जाता है।
- 23:17क्यों? क्योंकि शीष को जड़ाना होता है
- 23:22शीष देते ही तुम खत्म हो जाओगे। यही तो मसला है अहंकार का।
- 23:29इसलिए तो अहंकार मर नहीं सकता। अहंकार को पता है और बहुत से लोग
- 23:34मुझे प्रश्न कर देते हैं। बाबा ऐसी मुक्ति का क्या करना?
- 23:39ऐसे आनंद का क्या करना जिसका लुप्त हम नहीं ना उठा सके?
- 23:43हम ही ना रहे तो मुक्ति से लेना क्या मैं कहता हूँ तुम्हारा कुछ
- 23:51और स्वरूप भी है जो वास्तव में तुम हो?
- 23:56ये नकली में को छोड़ना पड़ेगा। क्या तुम नकली में को छोड़ने को
- 24:01राजी नहीं है? क्या तुम प्लास्टिक के फूल असल
- 24:07फूलों के ऊपर करवान नहीं कर सकते? बस मैं वो प्लास्टिक के फूल
- 24:14मांगता हूँ। जिनकी सुगंध अपनी नहीं है, जो
- 24:19फैक्टरीस में बने हैं, तुम्हारी फैक्टरीस में बने हैं और मैं उस
- 24:26प्रेम की बात करता हूँ जो ईश्वर की दरगाह से आता है।
- 24:34उस प्रेम के लिए क्या तुम इसके मानव गणित प्रेम का बलिदान नहीं
- 24:40कर सकते, फिर तुम योग्य नहीं हो यू हैव नट था ए।
- 24:51तो फिर तुम्हें संसार में मौज करनी चाहिए।
- 24:53धन कमाओ, पदवी कमाओ आई गेस बनो पीसी एस बनो, सीएम बनो, पीएम बनो,
- 24:59कुछ बनो यह सिर कटाने वालों का रास्ता है, जो घर बार अपने चले
- 25:09हमारे साथ। जिसकी क्षमता है अपने घर को आग
- 25:14लगा देने की, वो हमारे साथ चला है और कबीर कहते हैं, जीस घर को तुम
- 25:24आग लगाओगे वो घर तुम्हारा नहीं है, तुम नहीं।
- 25:28नकली घर को आग लगानी पड़ेगी। तुम्हारी कल्पनाओं को फना कर देना
- 25:35होगा। कल्पनाओं को पाखंडों को, धारणाओं
- 25:39को, जो गलत है क्या तुम नकलनकल को नहीं छोड़ सकते?
- 25:49अगर छोड़ सकते हो छोटी सी हिम्मत है कोई बहुत बड़ी हिम्मत भी नहीं
- 25:54है ये ठीक कि चिपका हटे जन्मो जन्मो पुरानी है, जीरा कपेगा हीरा
- 26:04कपेगा। यह डर डर के जाएगा सूखे पत्ते की
- 26:12तरह डरोगे लेकिन छोड़ने का जज्बा होना चाहिए तो फिर छोड़ पाओगे
- 26:22निगाहें उस। अखंड धारा पर होनी चाहिए आनंद की
- 26:27अखंड धारा फिर तुम आसानी से छोड़ पाओगे तो वरब्री कहने लगे बिलकुल
- 26:37सहर्ष फिर ले लो भगवान। मैंने सत्य सत्य देखना है क्या
- 26:45हुआ, भगवान ने अहंकार ले लिया, सिर नहीं लिया, ये तुम्हारी
- 26:57कहानियों हैं न सिर गणेश का लिया गया न सिर श्याम बाबा का लिया
- 27:10गया। ये प्रतीक है।
- 27:14तुम श्रद्धानुसार उपयोग कर सकते हो।
- 27:17मैंने तुम्हें पहले भी कहा है, इन्हें खंडित करने की आवश्यकता
- 27:22नहीं, क्योंकि अरबों लोगों की श्रद्धा का केंद्र हो गया है।
- 27:28ये चीज़ कटा। फिर उसको तोड़ने की आवश्यकता भी
- 27:32नहीं है। श्रद्धा तो पत्थर के ऊपर भी हो
- 27:37सकती है। अन्य घड़े पत्थर के ऊपर मूर्ति के
- 27:42ऊपर भी हो सकती है। पूरे अवतार के ऊपर कृष्ण के ऊपर
- 27:47भी हो सकती है। शीश कटे श्याम बाबा के ऊपर भी हो
- 27:51सकती है लेकिन ये प्रतीक है ध्यान रखना, लेकिन वास्तविकता देखना
- 27:59चाहता हूँ अगर कोई भी वास्तविकता देखना चाहता है पहली शर्त है।
- 28:07जो घर वाले आपनू चले हमारे साथ प्रेम ना बाड़ी उपज है, किसी खेत
- 28:15कल्याण में नहीं होता, प्रेम प्रेम ना हार्ट बिका है, किसी
- 28:21वानिया की दुकान पे भी नहीं मिलता।
- 28:24राजा पर्जा जहीरुज शीश दे ले जाए यहाँ कोई भेद नहीं है कि ये राजा
- 28:32है, ये पर्जा है राजा को सिर न देना पड़े नहीं ऐसा कुछ नहीं है,
- 28:38शीश देना पड़ेगा कोई भी है पर्जा है जा राजा।
- 28:47कृष्ण ने शीष ले लिया बरबरीक ने जो आज की शाम बाबा कहलाए उन्होंने
- 28:58सारा दृश्य देखा कृष्ण को पता था। जब हम जीत जाएंगे तो ये शोर
- 29:09मचाएंगे को नहीं आ जाता आजादी हमने दिलाई आजादी हमने दिलाई
- 29:16आजादी हमने दिलाई तो फिर कौन था भाई ये बता दो?
- 29:27फिर ये चुप हो जाते हैं। डिंढोरा पीटने वाले चुप हो जाते
- 29:33हैं। इस प्रश्न पर ये कह रहे हैं कि
- 29:42बाबा तुम संगियों को रगड़ते बहुत हो नहीं, मैं संगियों को नहीं
- 29:47संगियों में बहुत ही अच्छे अच्छे लोग बैठे हैं।
- 29:53गंदे नाले में पानी तो होता ही है न, बिना पानी के गंदा नाला होता
- 30:00नहीं। बिना पानी के वो जलेगा कैसे?
- 30:04शुद्ध लोक भी हैं। लेकिन बीच में गंदगी घुल गई है।
- 30:10इस गंदगी को दूर कर दो स्वच्छ जल निकल जाएगा।
- 30:18मैं संगियों का विरोध नहीं करता, मैं दुष्टों का विरोध करता हूँ,
- 30:22गंदगी का विरोध करता हूँ। शंखियों का व्रोध नहीं करता
- 30:29शंखियों में जो गंदगी फैल गई, संघ की शाखा तो गंगा की तरह निर्मल थी
- 30:39लेकिन क्या करे कोई जब गंदगी मिल जाये?
- 30:44बस आज वैसी ही दशा हो गई है। इस गंदगी को अलग करना होगा।
- 30:50संघ का निर्माण जैसा संघ था वैसा करना होगा।
- 31:03सिस दे दिया, पता था बाद में लड़ेंगे मैं कहने लगा मैंने मारे
- 31:10इतने ज्यादा तो भीम नहीं मारे थे। इसमें कोई शक भी नहीं।
- 31:17गदा के प्रहार से सभी महारथी मारे गए थे।
- 31:22और सबसे बड़ा महारथी भीम ने ही मारा था दुर्धन जो उसकी जड़ था।
- 31:29सुई के एक लोक के बराबर जगह नहीं देना, तुम पांच गाव मांगते हो।
- 31:41झगड़ा हो गया। वो कहते हैं, मैंने मारा, मैंने
- 31:45मारा, मेरे कारण जीत है, मेरे कारण जीत है।
- 31:52कृष्ण तो जानते थे, एक व्यक्ति साक्षी की तरह बैठा दिया गया था।
- 31:59वो कहते हैं आप शांत हो जाओ, झगड़ा मत करो, अब काहे झगड़ा करते
- 32:05हो? एक व्यक्ति है जो साक्षी है हमारे
- 32:10भीतर, वो एक साक्षी है, ज़रा मेरे इशारों को समझ लिया करो।
- 32:21मैं बात जब संसार की करता हूँ, उसमें इशारे भीतर के भी होते हैं।
- 32:27हमारे भीतर भी लगातार एक साक्षी बेटा हमारे कर्मों को निहार रहा
- 32:31है। वो आँखें हैं जो बराबर हमें देखती
- 32:35हैं क्या कर रही हैं? क्या मन में चल रहा है, क्या बाहर
- 32:40बोल रहा है, निकाल रहा है? दांत भीतर से आ रहा है कि इसको
- 32:48मार दूँ। पीस दूँ इसको दांतों के तरह लेके
- 32:52ये दोहरे मुख वाले लोग। तुम्हारे भीतर एक सक्षित व बैठा
- 32:56हुआ तुम्हें लगातार तुम्हारी सभी गतिविधियों पर प्रहरी बन कर बैठा
- 33:01है। उसे परमात्मा कहते हैं।
- 33:08कृष्ण कहते हैं झगड़ा मत करो, झगड़ा काहे करना है?
- 33:13एक व्यक्ति है जिसने देखा सब कुछ वास्तविक देखा, मैंने उसे कहा था
- 33:19असल असल देखना नकल नकल वो कहता है मैंने असल असल देखना क्या हुआ तो
- 33:27फिर चलो उससे ही पूछ लेते हैं। चले गए।
- 33:34श्याम बाबा के पास बरबरीक के पास मैं उस महादेवता को प्रणाम करता
- 33:44हूँ, महादानी को प्रणाम करता हूँ, मेरा सिर झुक जाता है।
- 33:52महादानियों के आगे शीश से झुकते हैं झुकाए नहीं जाते सभी पांडव जो
- 34:02हेकड़ी मार रहे थे, कृष्ण कहते साक्षर हो, श्याम बाबा के पास
- 34:08लेके। इसने अंत्य चक्षुओं से देखा है।
- 34:14बताओ बरबरीक तुमने युद्ध में क्या देखा बरबरीकोठला कृष्ण के चरण
- 34:25पकड़ लिए हे महाबली। तुम मुझसे पूछते हो नहीं, मैं
- 34:35तुमसे नहीं पूछता हूँ। इन मित्रों की भ्रांति का शमन
- 34:44करना है निवारण करना है भ्रम का। और तुम एक अकेले व्यक्ति हो
- 34:54जिन्होंने देखा ये झगड़ रहे हैं। आप युद्ध फिर कहते हैं, अगर मैं
- 35:05झूठ ना बोलता तो? अर्जुन कहते अगर मैं बांध न चला
- 35:11तो भीम कहते सभी मैंने मारा गदा युद्ध में सभी मार दिया।
- 35:22बापू ढलते उसकी करीब 90 से ऊपर महारती उसने मारे भीम ने अकेले
- 35:31भीम ने। अब एक सत्य को तो तुम जानते हो
- 35:41क्योंकि तुम्हें अंत ही चक्षु मैंने इसे ले लिया था।
- 35:49सच पूछो तो बरबरीक मैंने ये दृश्य देखने के लिए ही तुम्हें बुलाया
- 35:53था। और तुम्हें मैं वरदान देता हूँ अब
- 36:01ये वरदान सुनिए जो कृष्ण देते हैं, क्योंकि मेरे कहने से तुम आए
- 36:08आहूत हुए, तुमने सिर का बलिदान दिया, तुम ज्ञानी हुए।
- 36:14यह तुम्हें फल मिल गया, लेकिन मैं खुश हूँ तुम्हारी आज्ञाकारिता पर
- 36:28मैं तुम्हें वरदान देता हूँ कि तुम करयुग में परमात्मा के समान
- 36:36पूजे जाओगे। यह कृष्ण का वरदान था।
- 36:42बरबरीक को श्याम बाबा को मेरे कहने से आहुत हुए, मैंने बुलाया
- 36:47तुम्हें, क्योंकि तुम सपष्ट आदमी थे।
- 36:50निष्पक्ष थे। और बरबरीक ने कहा कि यही था, मैं
- 36:56लड़ूंगा, किसकी तरफ से लड़ोगे? बरबरीक बरबरीक कहने लेकिन जो पक्ष
- 37:03कमजोर होगा और महाबली था महारथी था, जो कमजोर पड़ता दिखेगा, उसकी
- 37:10तरफ से लड़ूंगा, ये तो कोई बात नहीं फिर तो फैसला कैसे होगा?
- 37:16जब दोनों तरफ से तुम लड़ोगे तो फैसला कैसे होगा?
- 37:20अब तुम ऐसे करो तुम बैठ ही जाओ तुम्हारी अंकाक्षा देखने की, हम
- 37:29पूरी कर देता हूँ, ज्ञान चक्षु तुम्हें दे देता हूँ तुम बैठ जाओ।
- 37:34दिव्य दर्शन करते रहना, देखते रहना क्या हुआ, किसने किया बताओ
- 37:45श्याम बाबा क्या हुआ तुमने पूरा महाभारत अपनी लगन आँखों से देखा,
- 37:52अंतः से देखा, सत्य सत्य देखा क्योंकि वह साक्षी।
- 37:57असत्य नहीं देखता, वह सत्य देखता है, जो हुआ
- 38:11श्याम बाबा चरणों में गड़ पड़े हे महाबली तुम ही तुम नजर आए हर तरफ
- 38:21तुम ही नजर आए। जहाँ मैंने देखा तुम्हारा ही
- 38:26सुदर्शन चक्र नजर आया। दुष्टों की बलि लेता हुआ तुम्हारा
- 38:32ही चक्र नजर आया तुम ही काल रूप में मुझे दिखे तुम्हारे सवाल और
- 38:41कोई भी नहीं था। और बिलकुल सत्य दिखा उसके सिवा
- 38:52कोई है भी नहीं। मैं बहुत बार बोला आपसे तुम जब
- 38:58अपने अंतिम तल पर जाओगे, ईश्वर करे ऐसा हो।
- 39:02नदरी मोक दवार तुम पे नजर हो खुदा करे कि कयामत हो और दुआ है वो
- 39:12कयामत जो तुम्हारे अहंकार के लिए कयामत का रूप बन के आती है, उस
- 39:17कयामत की बात करता है, ये सलाम। वो कयामत जब अहंकार का सर्वनाश हो
- 39:26जाता है अहंकार का सर्वनाश बलिदान वो दो जिसमें तुम्हारा अहंकार बलि
- 39:32चढ़ जाए बकरे का मेमणा नहीं। तुम गलत डगर पे चल रहे हो,
- 39:42धार्मिक कहलाते हो धार्मिक हो, नहीं, तुम ही तुम थे, हे चक्रधारी
- 39:58तुम ही तुम थे और कोई दूसरा था भी नहीं।
- 40:04मैंने जो देखा उससे हत पर रह गया। मेरी अंतिम आकांक्षा अंतरिम कक्षा
- 40:10पूरी हुई। सभी कृष्ण के चरणों में गड़बड़
- 40:19है। हमारी समझ गलत थी।
- 40:26प्रभा हमें क्षमा करो, यह है युद्ध लड़ा।
- 40:32कृष्ण और ध्यान रखना तुम क्या डरते हो?
- 40:40जीस तरफ से एक कृष्ण लड़ते हैं। वह कभी हार्ता ना?
- 41:02कृष्ण असत्य की तरफ से लड़ते ही नहीं हैं और असत्य हमेशा हारता
- 41:08है, झूठा हमेशा हारता है इसलिए सभी ऋषियों ने पतंजलि हो, महावीर
- 41:15होबुद्ध हो। सबसे पहले का झूठ मत बोलो, जो झूठ
- 41:19बोलेंगे वो मरा जाएगा, लेकिन क्या करें?
- 41:27हमारे मुख्य सत्ताधारी तो बोलते ही झूठ हैं।
- 41:33छात्र कभी बोलते ही नहीं। जो बोलते हैं, झूठ ही बोलते हैं
- 41:38तो फिर क्या करें? तो पतंजलि ने कहा सबसे पहला यम
- 41:42नियम आठ अंगों में पहला सबसे पहला सत्य अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य,
- 41:51प्रियंका, सत्य। ये पहली कसौटी है।
- 41:55अगर तुम झूठ बोला तो तुम मत चलो इस राह के ऊपर तुम्हारे ऊपर इतना
- 42:07विश्वास होना चाहिए कि तुम जो बात कह दो वो सत्य हो, यही महावीर
- 42:13कहते हैं, सत्य अहिंसास्ते ब्रह्मचर्य पृग्रह।
- 42:19आए तो ब्रह्मचर्य के नाम पर बहुत लोग खिल्ली उठाते हैं।
- 42:23खासतौर से पश्चिम में हो ही नहीं सकता।
- 42:26यार ये नहीं हो सकता तो तुम हार जाओ, तुम करते हो, रोज़ गर्त में
- 42:33गिरते ही हो, तुम्हें कौन रोकता है?
- 42:42अगर चिड़ी चोंच भर पानी पी सकती है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि
- 42:46हाथी भी चोंच से संतुष्ट हो जाता है।
- 42:52हाथी तो वही मन पिएगा। तुम तृप्त होते रहो, कामवासना में
- 43:02तो मैं कौन कहता है तुम्हें कोई रोकता भी नहीं तो पतंजलि हूँ,
- 43:08महावीर हूँ सत्य अहिंसा अस्ते ब्रह्मचर्य अप्रग्रह।
- 43:13बुद्ध हो सत्य, अहिंसा, स्त्री, ब्रह्मचर्य, ग्रह और कोई ऋषि हो,
- 43:18सत्य से शुरू करेंगे और सत्य भाषण से शुरू करो और सत्य अस्तित्व तक
- 43:28पहुंचाओ। इस शब्द को याद कर लेना लेकिन लो।
- 43:34सत्य भाषण से शुरू करो, सत्य बोधना शुरू करो और अपने सत्य
- 43:42अस्तित्व तक पहुँच जाओ। यह है यात्रा सारी अध्यात्म की,
- 43:49फिर बोलेंगे। सत्य भाषण से शुरू करो, सत्य
- 43:55अस्तित्व तक पहुंचाओ ऑथेंटिकली बट यू अरे हूँ अरे यू ऑथेंटिकली
- 44:05प्रमाणिकता पे सच में तुम क्या हो शब्दों में नहीं।
- 44:12ये जो आचार्य बोलते हैं ना ये नहीं इनको तो खुद पता नहीं, इनके
- 44:15उरे से ही पता लग जाता है। मुझे लोग कहते हैं बाबा अब कैसे
- 44:21पहचान लेते हैं हम तो बोलते भी कुछ नहीं तुम्हें बोलने की जरूरत
- 44:26भी नहीं होती। हम औरा देखकर ही पहचान जाते हैं
- 44:31और कोई भी सब है वो औरत देखकर पहचान लेता है कि तुम क्या हो,
- 44:36कैसे हो उनके आगे तुम्हारा झूठ तुम बोल तो दोगे लेकिन चलेगा ना?
- 44:45भीतर से वो हँसेंगे, बाहर से तुम्हारी बात सुनेंगे।
- 44:53कान सुनेगा जिएगा हँसेगा तुम्हारी मूर्खता पे के कहाँ आ गए हो क्या
- 44:59बातें करते हो? भ्रम टूटा, सत्य के बिना भ्रम
- 45:23टूटता, फिर झूठ झूठ तो तुम होई, यू आर इल्यूज़ इन इटसेल्फ तुम खुद
- 45:33में ही झूठ हो। तुम खुद में ही भ्रम हो, वो ही
- 45:37मैं कहता हूँ। ब्रह्म, सत्यम जगत सत्यम ब्रह्मम
- 45:42ब्रह्मम मिथ्या इल्ल्यूजन मिथ्या है।
- 45:49ये भ्रम तुम्हारा गलत है कि तुम शरीर हो, तुम मन हो?
- 45:54लेकिन इन शब्दों को शब्दों से मत मिटा देना जैसे आचार्य बहुत बात
- 46:00आचार्यों के शब्द मैं क्यों कहूंगा?
- 46:04इनको बहुत से मूर्ख सुन नहीं है, इसलिए आचार्य का नाम लेता हूँ।
- 46:18खुद को ज्ञानी मानते हैं और खुद को ज्ञानी बताते हैं, है नहीं।
- 46:29उस साक्षी के आगे भला कोई बच सका है जब जब ये भीतर जाएंगे।
- 46:37तब तक पाएंगे। मैंने झूठ बोला और इसलिए मैं कहता
- 46:41हूँ, अंत समय में तुम बड़े रहोगे, बड़े पछताओगे।
- 46:46एक मौका था, चूक गया फिर याद आएगा बाबा याद आएगा।
- 46:58जब जब बाहर आए और फूल मुस्कुराए। मुझे तुम याद आये, मुझे तुम याद
- 47:26आये जब जब भी चांद निकला। और तारे मुस्कुराए मुझे तुम याद
- 47:45आए मुझे तुम। या ना?
- 47:57फिर याद करोगे ठप? एक प्यार और वफा के।
- 48:10तस्वीर मानता हूँ तस्वीर क्या तुम्हें मैं तकदीर मानता हूँ?
- 48:30हो देखी नजर में खुशियां या देखे हम कैसा है?
- 48:45गहरे से लेना इन शब्दों को। ये साक्षी के शब्द हैं।
- 48:51देखी नजर में खुशियां। मुझे तुम याद आए मुझे तुम याद आए।
- 49:13तू ही है कराने वाला, तू ही खुशी देने वाला, तू ही गम देने वाला।
- 49:20देखी, नजर में खुशियाँ और देखें हमके सारे मुझे तुम याद आए।
- 49:38मुझे तुम याद आए। दोनों ही स्थितियों में तेरी
- 49:46मर्ज़ी तेरा पाणा मीठा लागे तू जो करता ठीक करता ये स्थितियों में
- 49:54तुम संभव रखना सीख जाओ। तो गए गए उस मुकाम पे जिसकी तलाक।
- 50:02अब ना कोई तरह ना मैंने नहीं बनाया।
- 50:15मैंने अपनी मर्ज़ी से कुछ नहीं किया।
- 50:18सब तेरी मर्जी से हुआ। अपना कोई तरह नाम मैंने नहीं
- 50:30बनाया तुमने मेरे। लबों पे।
- 50:38हर। एक सुर।
- 50:40सजाया जो बोले तुमने। बोले तुमने मेरे लबों पे।
- 50:51हर एक सुर सजाया। मैं कुछ नहीं बोला कभी।
- 51:02जब जब मेरे तराने। दुनिया ने गुनगुनाए मुझे तुम याद
- 51:21आए मुझे तुम याद आए। जब जब मेरे तराने दुनिया ने
- 51:38गुनगुनाए, मुझे तो याद आए। मुझे तो याद आये जब जब बाहर आये
- 52:01और फूल मुस्कराये। मुझे तुम।
- 52:09याद आए मुझे तुम याद आए तो श्याम। बाबा ने कहा है प्रभु तू करता है
- 52:20जो करता है यही बाबा नानक ने कहा। कौन संत है जिसने ये नहीं कहा
- 52:28लॉजी कहते हैं जो करता है वो ठीक करता है और भले के लिए करता है
- 52:33लेकिन तुम नहीं मानते मत मानो जितनी देर तलक तुम नहीं मानोगे
- 52:40तुम्हारा अहंकार नहीं मानेगा उतनी देर तलक तुम्हारा दुख दूर नहीं हो
- 52:44पाया। तो परिणाम भी भुगत रहे हो तुम मैं
- 52:48अच्छी तरह से देख रहा हूँ। जीस घड़ी तुमने हर होनी अनहोनी को
- 52:59उसके चरणों में रख दिया तेरा पाणा मीठा लाग?
- 53:06बस उसी घड़ी तुम सुख की सांस ले पाओगे, उससे पहले किसी का कुछ
- 53:12नहीं। बिगाड़ते किसी का क्या बिगड़
- 53:16जाएगा? तुम नास्तिक रहो तुम अस्तिक रहो
- 53:20कौन तुम्हें आस्तिक बनाने आता है? ये तो फालतू के लोग हैं।
- 53:24जो कहते हैं हिंदू धर्म से इसाई बन के इसाई से मुसलमान बन के बनने
- 53:28दो भाई तुम्हारा क्या लेते हैं? ये कोई महंगे, कभी थोड़ी हैं जो
- 53:38पैसों में राम कथा सुना देंगे। ये बापू हो?
- 53:43जब महंगे कवि हों, ये बिकाऊ माल है और नानक बिकाऊ माल नहीं होते
- 53:48कबीर बिकाऊ माल नहीं होते ये वैश्य ही जैसे हैं पैसा दो बस आगे
- 53:58मैं क्या कहूं तो बना लो मंच पे। नग्न होने को तैयार है।
- 54:07बना परमात्मा का भी पैसे से मिलता है ये अकल इनको भी आई होती तो ये
- 54:17महंगे कवि की जगह शांत न हुए होते।
- 54:22बस एक ही कदम दूर थे। कभी संत से एक कदम दूर होता है,
- 54:32थोड़ी छलांग भर लेनी होती है, कभी ज्यादा दूर नहीं होता कभी न सब
- 54:36मंजिलें तय कर। बड़ी ऊंचाइयों को छू लिया।
- 54:39अब आखिरी में जल पे आ के ठहर गए। इसे ही कहते हैं भगवान योग भ्रष्ट
- 54:46जी योग भ्रष्ट लोग हैं। बड़े ऊंचे उठे लेकिन आखिर में आके
- 54:52गर्क हो गया अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल।
- 54:58पैसे कमाने के लिए कर लिया। अजीब रोग है, भगवान को पैसे में
- 55:07भेजते हैं, ये किशोरियाँ भगवान को पैसे में भेजती है।
- 55:11फीस लिखी हुई है 10,00,000 लगेंगे।
- 55:1620,00,000 50,00,000 लगेंगे और हम इन्हें सम्मानित करते हैं तो
- 55:26ध्यान रखना मूड ही तुम्हें सम्मानित करेंगे।
- 55:32ज्ञानी तुम्हें सम्मानित नहीं करेगा।
- 55:37ज्ञानी तो सत्य को सम्मान देता है।
- 55:39सदा राधे राधे जपने वालों को कभी सम्मान नहीं देता।
- 55:46पैसा लेके प्रचार करने वालों को कभी सम्मान नहीं देता।
- 55:50ज्ञानी तो नहीं देता। मूड लोग सम्मान देते हैं जरूर
- 55:55बेला शक ये मूर्खों की भीड़ तुम बैठे हो देखोगे कहाँ नहीं मिलती
- 56:00तुम्हें मैं ज्यादा तो ना बोलूं तो अच्छा है ये ऊपर वाले भी कहने
- 56:12लग जाते हैं बाबा। आगे माते चलो श्याम बाबा चरणों
- 56:23में गिर पड़े हैं। जब देख लेता है कोई तो चरणों में
- 56:28करना ही पड़ता है, कहना ही पड़ता है।
- 56:33स्मृति लब्ध हो मिल गई नष्टो मोहा मेरा इलूशन नष्टो हुआ मैं तेरी
- 56:49शरण में आया। और तेरी शरण आने वालों के पाप तू
- 56:55दूर कर देता है एहम तुम सर्व पापे भव, मोक्ष, श्यामी मासपुर चहा तो
- 57:04अनन्य भाव से मेरी शरण पकड़ ले, लेकिन तुम तो पैसे के शरण में हो।
- 57:11तुम तो महंगे कवियों की शरण में हो, तुम तो जिनके खोपड़ियाँ
- 57:17लफसाजी से भरी पड़ी है, उनके शरण में हो तुम तो जो झूठे वायदे करते
- 57:22हो उनकी शरण में हो तुम पदवीयों की शरण में हो, मान प्रतिष्ठा की
- 57:31शरण में हो किस किस की शरण तुमने नहीं गई?
- 57:34एक उसको छोड़कर और कृष्ण कहते हैं, लोग मेरी शरण में आ जाते हैं
- 57:41सर्वधर्माण पर तज्ञा सभी धर्मों का प्रत्याग कर के सभी धर्मों का
- 57:49प्रत्याग कर के जहाँ धर्म का यार मत कर लेना, क्षमा करना मुझे।
- 57:54सभी धर्म जो तुमने बनाए वो हैं तो संप्रदाय, धर्म तो स्वभाव को कहते
- 57:59हैं जो तुम वास्तव में हो। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
- 58:04पादरी, यहूदी जो भी हो तुम पारसी। जो भी तुम में हो कृष्ण सच में यह
- 58:12कहते हैं सब सब तुम्हारे धर्म के ऊपर प्रहार करते हैं, अब तुम अर्थ
- 58:16कोई और लेते हो, बच जाते हो और न बचो तो प्रचार कैसे होगा?
- 58:22बचना पड़ता है, पापी पेट का सवाल है।
- 58:31तुम क्या हँसते हो, तुम्हें क्या मिल गया?
- 58:40सभी धर्मों को छोड़कर? एक मिर्च शरण में अच्छा अहम तो हम
- 58:45सर्ब पापे भव मोक्ष श्यामी मा सू च।
- 58:50गंगा की शरण में मत जाओ कुंभ की शरण में मत जाओ, मूर्तियों की शरण
- 58:57में मत जाओ, वे पत्थर हैं इन मूर्ख गुरुओं की शरण में मत जाओ
- 59:07यह ज्ञानी। कृष्ण कहते हैं, सिर्फ मेरी शरण
- 59:12में आ जाओ वह अलग, वह है निरंकार जिसका कोई आकार नहीं जो देखा नहीं
- 59:23जा सकता, जो छुआ नहीं जा सकता और सब कुछ वही है उसकी शरण में आ जा।
- 59:32इन सभी मान्यताओं को छोड़ दें। ये मान्यताएँ हैं जिन्हें तुम
- 59:36धर्म कहते हो। किसने कुछ मान रखा है, किसने कुछ
- 59:42मान रखा है लेकिन सभी ने मान रखा है।
- 59:46सभी मान्यताओं को ढेर ढेरी कर दो, अपनी आह से तलवार से काट दो, जैसे
- 59:52रामकृष्णा ने अपनी ही माता को अपनी ही तलवार से काट दिया।
- 59:56ये कल्पनाएँ हैं कल्पनाओं की तलवार उठाओ और काट दो कोई बहुत
- 1:00:03मुश्किल मामला नहीं है। अहंकार तुम्हारी मान्यताएँ हैं,
- 1:00:08सच में नहीं है। तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ने वाला।
- 1:00:13तुम तो वो तत्व हो जो कभी मरते नहीं नय।
- 1:00:16नम छिद्दन्ती शास्त्रण नय नम दाहती पाब का नय चैन मुक्ले धनते
- 1:00:23आपो? बहन नहीं मरता मैं ना मरोन मृ
- 1:00:29संसारा, मोहे मिला जिलाबन हारा कैसे कैसे शब्दों ने कैसे कैसे
- 1:00:36इंगित किया उस परमात्मा को और तुम ऐसे मूड हो?
- 1:00:42एक भी नहीं उतरी भीतर। सभी ऊपर से गुजर जाती हैं।
- 1:00:49हरि हर असल प्रश्न तो रह गया, अब क्या करें?
- 1:00:55अब फिर दूसरे पर बचने में बोलेंगे।
- 1:01:00प्रश्न तुम्हारे काम का है। हजारों सवाल इस तरह के आए हैं।
- 1:01:08जवाब देना जरूरी हो गया है मेरी पत्नी।
- 1:01:23किसी और लड़के से बात करती है। प्रश्न सुन न दूं ताकि अगर कोई
- 1:01:34आशिक हो तो वह मेरी अगली वीडियो जरूर सुन ले।
- 1:01:41मेरी पत्नी किसी और लड़के से बात करती है।
- 1:01:46मुझे शक है कि उस पर कोई तंतक्रिया की हुई है।
- 1:01:55सगाई के वास्ते वो लगातार कमजोर होती जा रही है।
- 1:01:59नाम नहीं बताऊँगा, फिगर मत करो कांपो मत माफ़ कीजिए ये सवाल
- 1:02:08संसारिक है, कृपया मदद कीजिए। नाम लिखा है शहर लिखा है मेरी
- 1:02:24पत्नी और मेरी फोटो भेज रहा हूँ, कृपा करो, मार्गदर्शन करो।
- 1:02:33अगली वीडियो में इसका जवाब दूंगा क्योंकि इस तरह की।
- 1:02:37बताना ज़रा 3600 अड़तालीस प्रश्न हैं बहुत तेज से प्रश्न देवता और
- 1:02:45हम अरे बाबा और तो सभी बोल देते हैं, आपने कभी नहीं बोला और हमें
- 1:02:53तसल्ली आप पे है? आप जवाब दो इस बात का मुख्य
- 1:02:59प्रश्न से दूर मत रहो हमारी गुत्थियां आपके पास खोलती हैं,
- 1:03:04आकर क्या किया जाए अगले प्रवचन में जवाब दूंगा आपको।
- 1:03:16श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरा। हिनाथ नारायण वसुदेव पितु मात
- 1:03:48स्वाम। पित्त महत, स्वामी सखा हमारे
- 1:04:03हेनाथ नारायण वासु देवा। लोग कहते हैं 1 मिनट के लिए
- 1:04:17कीर्तन छेड़ दिया करो, हम नाच लिया करेंगे, नाच लो।
- 1:04:22श्री। कृष्ण गोबिंद, हरे मुरारी।
- 1:04:30श्री? कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ
- 1:04:36नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारा।
- 1:04:48या न वासुदेववा पितु मा सॉन्ग।
- 1:05:09पितमात स्वामी सखा हमार पितमात स्वामी सखा हमार पितमात स्वामी
- 1:05:21सखा हमारे हेनाथ नारा। यन वासु रेव, श्री कृष्ण गोविंद,
- 1:05:32हरे मुरारी श्रीनाथ, नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:05:44मुरारी। हरे हैं मुरारी हरे मुरारी हरे।
- 1:06:03हरे हरे श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी केनाथ नारा येन वासुदेव
- 1:06:17श्री कृष्ण गोविंद। हरे मुरा पितुमात स्वामी सखा हमार
- 1:06:26पितुमात स्वामी सखा हमार हेनाथ नारा जन वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:06:38गोविंद। हरे मुरारी इनाथ नारायण वासुदेव
- 1:06:50व।