Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Dec 25 - गोरखनाथ का सूत्र! | दृष्टा ही दृश्य है! | अनहद नाद, क्रिया योग और ध्यान का संगम! Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:12गौखवाणी का अगला सूत्र लेते हैं वेदकतेब नथानी बानी।
- 0:26सब ढंकी तल आनी गगन शिखर में शब्द प्रकाशा तह।
- 0:33भुजा अलखबिकानी। यहाँ से समझाऊंगा तो मैं कोरखनाथ
- 0:52की वाणी में मार्ग कम है मंजिल के बाद ज्यादा है।
- 1:07इसलिए अष्टा भकर को एक्सपेरिमेंटल रूप से व्यवसायित किया।
- 1:17इन्होंने अष्टा भकर सीधे बोलते हैं कहे जनक।
- 1:26अपने आप तक पहुंचने के लिए उन्हें करना कुछ नहीं है।
- 1:36गोरख भी बिलकुल ऐसा बोलते है लेकिन बड़े मज़े की बात है कि
- 1:42गोरख प्रैक्टिकल भाषा बोलते है। अष्टमक मंजिल की बात करते हैं,
- 2:04मंजिल का नुहार बतलाते हैं। वह मंजिल रहस्यपूर्ण है, वह शब्द
- 2:15बड़ा प्यारा है। वह मन को मोह लेता है, यष्टावक्र
- 2:29की भाषा है परमात्मा तक पहुंचने के लिए।
- 2:40कुछ यत्न नहीं करना बल्कि परमात्मा ऐसा है।
- 2:54परमात्मा ऐसा है ऐसा व्याख्यान करते हैं अष्टवक्र जैसे मुमताज़
- 3:01महल ऐसा है। चार मीन हरे हैं, ऐसे बेल बूटियां
- 3:12हैं, हरे पत्ते हैं, तनी हैं, लाल फूल हैं।
- 3:24यह मंजिल की व्याख्या हो गई सीधे सीधे मंजिल की बस उसकी बिल्कुल
- 3:36कॉपी करते हैं, कृष्णमूर्ति। कृष्णमूर्ति कहते हैं, ओब्सर्वर
- 3:47इस ओब्सर्वर जो ऑब्जर्व किया जाता वो ही ओब्सर्वर है।
- 3:57दृष्टा ही दृश्य है, बीच का दर्शन गुम कर देते वो।
- 4:03थोड़ी गहरी बात है। ध्यान से सुन अष्टावक्र कहते हैं,
- 4:10पथलेस पाथ ओब्सर्वर इज़ ओब्सर्वर जो देख लिया जाता है।
- 4:22वह और जो उसको देखता है वह दोनों एक ही है।
- 4:29यानी ऐसा कह दे कि मार्ग और मंजिल दोनों एक ही हैं।
- 4:34कोई भेद नहीं है इस सूक्ष्म। डेफिनिशन है अष्टवक्र सिर्फ मंजिल
- 4:51है अष्टवक्र की इसलिए वो कहते हैं जनक से हे राजा।
- 5:02तू बात करता है कि इस जन्म में मैं परमात्मा को उपलब्ध हो जाऊ
- 5:09परंतु कैसी मूर्ता की बातें कर रहा है?
- 5:19नहीं, ऐसा नहीं है। घोड़े के एक टॉप से दूसरे टॉप तक
- 5:25पांव रखने में जितना समय लगता है और कितना लगता है दो चार पल रखते
- 5:31हैं इतनी देर में? मैं तुम्हें परमात्मा तक पहुंचा
- 5:39सकता हूँ। बिलाशक वैसे अष्टवकर ने ये ज्यादा
- 5:43कह दिया, जैसे कोई कहे के सोए हुए व्यक्ति
- 6:05को कहाँ सोया है? ये कितनी देर में पता चल जाता है
- 6:15ये प्रश्न को गौर से समझना सोए हुए व्यक्ति को मैं कहाँ सोया हुआ
- 6:25हूँ? ये कितनी देर में पता चलता है?
- 6:29मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा कब मिल लेगा इस जन्म में मिल जाएगा
- 6:38यह अभी एक दो जन्म और लगेंगे तो मैं उनकी इस प्रश्न को।
- 6:49गहराई समझ के मैं कह देता हूँ हाँ इससे जन्म में हो जाएगा, जबकि मैं
- 6:59जानता हूँ तुम जन्मो की बात करते हो, एक कपल, मुझे नहीं पता था
- 7:05पहले। अगले पल क्या होने वाला है मैं
- 7:14नहीं जानता था और वह उतरा बिना बताए उतरा।
- 7:29सोए हुए को मैं कहाँ सोया हूँ? इस प्रश्न को गहराई से अंत में ले
- 7:37जाना ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी ये मगज कपाई कराने
- 7:46वाले संतों से। दूर रहकर खुद भटका हुआ दूसरों को
- 8:00भटकाने के सिवा और दे भी जा सकता है।
- 8:03मजबूर है। तुम अच्छे भले जानती हो, मेरे इस
- 8:15प्रश्न का जवाब तुमने सोच लिया होगा तीन देर में सोए हुए को मैं
- 8:25कहाँ सोया हूँ? ये पता चलने में कितना भक्त रखता
- 8:31है? एक जन्म लग जाता है, दो जन्म लग
- 8:33जाता है या 5710। जन्म तो बिल्कुल ऐसा ही जवाब है
- 8:50अष्टा वक्तर का? अष्टावक्र कहते हैं, एक पल में तू
- 8:58जग सकता है बात वो ठीक है। तुम जीतने साल के हो गए।
- 9:0715 20304000। आज तक जब भी जगे है तो जागने के
- 9:16बाद मैं कहाँ सोया हूँ कितनी देर के बाद पता चला है बताओ क्या
- 9:24प्रश्न जरूरी है हृदय में? तुम कहो बाबा अच्छी बाते करते हो,
- 9:34पलक फूलते ही उठते हैं। पता चल जाता है मैं कहूं।
- 9:52बस इतनी सी देर लगती है यही बात जनक को कहते है स्टॉक तू कहता है
- 10:00इस जनम में जैसे सोए से जगने में। वक्त लगता है कितना लगता है अब
- 10:12इसका क्या जवाब देवोगे और अचार्य प्रशांत जैसे लोग आग को बोल बोल
- 10:20कर थक जाएंगे, मर जाएंगे, समझा नहीं पाएंगे क्यों?
- 10:27क्योंकि वो। जवाब देंगे।
- 10:29बुद्धि से बुद्धि काम आती है। संसार में अध्यात्म में ज़रा भी
- 10:46बुद्धि का काम नहीं है, बल्कि गौर कहते हैं कैसे सुन तो?
- 11:06बुद्धि ज्ञान तक पहुंचने में देरी का कारण बनती है।
- 11:12हे संतो, बुद्धि, ज्ञान तक पहुंचने में इससे बड़ी बाधा कोई
- 11:22नहीं। यह साधन नहीं है।
- 11:28वरुण बाधा है यहीं हम गाच्चा खा जाते हैं संत में और दार्शनिक में
- 11:40बस यही भेद है। इसके अलावा और कोई भेद नहीं।
- 11:55तुम्हें इसी भ्रम में रखा गया और गौरख तुम्हें इसी भ्रम से आजाद
- 12:04करना चाहते हैं। बहुत जन्म बीते मेरे मत हो ए जन्म
- 12:17तुम्हारे लिख अगर तुम कभी भी ऐसा कर दो।
- 12:28किसी मोड़ पे आके बुद्धि को छोड़ दो बुद्धि से पार हो जाओ बात पल
- 12:39भर की है अगर कहीं इत्तेफ़ाकन तुम्हारे भाग्य जग में।
- 12:54तो तुमने कितने भी बात किया मेरी बात को सुन इत्तेफाकन भाग्य से
- 13:09तुम्हारी आंख खुल रहा है। तो सोया मैं कहाँ हूँ?
- 13:18फिर यह पता लगाने के लिए वक्त कितना लगता है?
- 13:24बिल्कुल तुम सभी कहोगे जगते ही पता चल जाएगा।
- 13:28मैं अपने घर में हूँ या कहीं और आया हूँ?
- 13:35ज़रा भी तैरने लग गई यहाँ तक आकर स्तब्ध ठहर जाते हैं, लेकिन गौरव
- 13:50बहुत। प्रैक्टिकल व्यक्ति हैं।
- 13:53लोग कहते हैं सिन्हा सिर्फ मंजिल का गुणगान कर देना ये तो पता चल
- 14:03ही जाएगा। कहीं ये लोग का कारण ना बन जाए।
- 14:07ज्यादा सुमित है। बात ठीक हुई, कहीं ये जल्दबाजी कि
- 14:18जब मैं अभी पहुँच सकता हूँ एक एक शब्द को ध्यान से सुनें कहीं ये
- 14:24जल्दबाजी कि जब मैं अभी पहुँच सकता हूँ?
- 14:30तो फिर क्यों देर करूँ? अभी क्यों न पहुंचाऊं फिर तुम
- 14:34जल्दबाजी में क्या करना होगा? बुद्धि से पार जाना होगा।
- 14:50बुद्ध से बाहर जाने में क्या करना पड़ता है?
- 14:59रिलैक्स यूरसेल्फ़ अब मैं आपको छोड़ दूंगा कंप्लीट्ली मैं यहाँ
- 15:04जब दीक्षा देता हूँ, सबसे पहले कहता हूँ आराम से बैठ जाओ, अपने
- 15:09आपको छोड़ दो। घटना उस पल भी घट सकती है बिलकुल
- 15:18उस वक्त, लेकिन ऐसी घटना घटने वाले आज तक ही यहाँ पर मेरे पास
- 15:26मात्र तीन व्यक्ति ही आए। जिनकी घटना घट गई।
- 15:30बाद में मुझे बताया, मुझे पता चल गया जब मैंने कहा छोड़ दो अपने आप
- 15:38को एंड कंप्लीट्ली बी इन रेस्ट। मृत हो जाओ, आरआइपी रेस्ट इन पीस,
- 16:04तो आज तक हजारों लोग आए हैं। अरे बातें सुनी।
- 16:11लेकिन तीन व्यक्ति तत क्षण मेरी बात पर श्रद्धा तो थी तभी आए ऐसे
- 16:18कौन आता है तो मार्ग मैंने बता दिया, श्रद्धा उनके भीतर थी,
- 16:27बरसों से पुकार रहे थे, बुला लो बाबा।
- 16:33और जब मैंने बुलाया तो श्रद्धा अपार थी।
- 16:39100% श्रद्धा बस ऊपर से मार्ग ही बताना, इसका जिक्र मैंने कल किया।
- 16:50मार्ग मैंने बता दिया छोड़ दो, अपने आप को बिलकुल छोड़ दो, कुछ
- 17:08नहीं होगा, तुम मरोगे नहीं। मैं गारंटी देता हूँ और तीन
- 17:19व्यक्तियों ने संपूर्ण रूप से छोड़ दिया, यह था रास्ता श्रद्धा
- 17:27लेके आये थे, रस्ता उनके पास नहीं था।
- 17:34उलझे हुए थे। किसी ने का विपश्य न करो, किसी ने
- 17:43का नाम जब्त करो अगर श्रद्धा परिपूर्ण है अब यहाँ समझना।
- 17:56अगर श्रद्धापरे हुए तो गुरु जब बोलेंगे जब बोलेंगे जैसा बोलेंगे,
- 18:02तुम वैसा ही कर लो तो बात बन गयी। श्रद्धा आवश्यक है लेकिन अधूरी
- 18:14है। मार्ग भी सही होना चाहिए अन्यथा
- 18:22तुम फ्लाइट तो लोगे बॉम्बे की पहुँच जाओगे।
- 18:28ऐसा ही तुम्हारे साथ होता है। व्हीकल सही है, व्हीकल सही चल रहा
- 18:43है, जाना है बॉम्बे रास्ता पकड़ लिया लाहौर का बस तुम एक छोटा सा।
- 18:57आंख में कनक पड़ जाता है सारा जहान दिखना बंद हो जाता है।
- 19:07यह सूत्र सबसे पहले तो। ध्यान से सुन ये तुम्हारे काम की
- 19:16बात है, मैंने तो हो लिया मैं तुझे हो न बांटने में लगा हूँ।
- 19:27अगर तुम ग्रहण करने को तैयार हो तो अन्यथा मेरे सभी प्रयास व्यर्थ
- 19:33हो जाएंगे। ऐसा मत समझो कि जब तुम उस अनंत रस
- 19:45में डूबोगे तो तुम ही धन्य हो जाओगे।
- 19:50गुरु भी संग संग धन्य हो जायेगा और गुरु ही नहीं तुम्हें नहीं पता
- 19:56समस्त ब्राह्मण नाच उठेगा। समस्त भ्रमण में उत्सव मनेगा, गीत
- 20:06गाये जाएंगे, सुरेले मात्र तुम ही प्रसन्न नहीं होगे।
- 20:20वर्ण सारा अस्तित्व झूम उठेगा, उजड़े हुए बाग गुलशन खिजा से निकल
- 20:32के वीजा में आ जाएंगे। कमी कहा रहती मार्ग पता है तो
- 20:48श्रद्धा नहीं है, श्रद्धा है तो गर्त गुरुओं पे मेल होता है।
- 21:01शब्द भी सही हो। तुम जान सको कौन से शब्द की बात
- 21:06हो रही है और सुरती भी सही लगे। तुम्हारी श्रद्धा भी तो मिलन हो
- 21:14जाता है। ईद मन जागती है।
- 21:28अष्टावक्र बात करते हैं, मंजिल की मंजिल का बखान करते अष्टावक्र
- 21:33थकते हैं। गौरख ज्यादा समयदार है, इसलिए
- 21:41मैंने कहा गौरख को? परिभाषित करना सबसे मुश्किल है।
- 21:55आइए इनके शब्द को लेते हैं। थोड़ा आँख से दिख नहीं रहा।
- 22:01लेंस का प्रयोग करना पड़ रहा है। वेदकतेब न पानी बानी वेदकतेब न
- 22:13खानी बानी सब ढंको तल आन कहते तुम कैसे मित्तो के वेदों प्राणों
- 22:23उपनिश्चितों? ग्रंथों को पढ़ने से वह मिल जाएगा
- 22:31शब्दों को ध्यान से तुम क्या समते हो वेद कतेब ना आनी बानी।
- 22:46समझ से मिल जाएगा। गोरखनाथ कहते हैं यही बात है
- 23:02समझने की तो श्रेष्ठ ही न करम स्वाद कभी समझे जाते हैं या लिए
- 23:10जाते हैं। स्वाद को समझने चलोगे तो चूक
- 23:17जाओगे, रस पीने की चीज़ है, समझने की चीज़ नहीं।
- 23:29और तुम्हारा दर्शन शास्त्र समझने समझाने में लगाए, इसलिए कोई भी
- 23:39दार्शनिक न कभी पहुँच पाया, न कभी पहुँच पाएगा तो दर्शन।
- 23:48दार्शनिक जिसे तुम फिलॉसोफी कहते हो बात है बुद्धि की और गोर्ख
- 23:57कहते हैं कि बुद्धि अर्जन, वेद कतेब ना खानी पानी।
- 24:09सब ढंको तल, आनी ये तो वरन ढक देता है उस आनंद के रस को।
- 24:25बुद्धि साधन नहीं है, बुद्धि बाधा है।
- 24:32अगर एक शब्द हुई तो हमारे भीतर उतर गया हूँ मैं क्यों कहता हूँ
- 24:39कि मेरे शब्दों को बस सुन लिया करो?
- 24:44किसी खामोश लम्हे में मेरे शब्द तुम्हारी निरोहन में भीड़ हैं जो
- 24:50मैं बोलता हूँ किसी मोन लम्हे में क्षणवय।
- 25:08तुम्हारा भाग्य जग जाए और तुम अपने आप को प्रयास की स्थिति में
- 25:17छोड़ दो जाने अनजाने। जैसे आमतौर से यह घटना अनजाने में
- 25:24घटती है जानकर तो फिर बुद्धि वातावन जाती है।
- 25:32वह अपने आपको पूर्णतः छोड़ने में ही व्यस्त हो जाती है।
- 25:40अनासुरती घटती है उबट अप्रयाक रिलैक्स यूर सेल्फ कंप्लीट्ली तो
- 25:51अभी तो तुम निरंज को भरोगे मुझे पता है अभी तो वहाँ से उस तल से।
- 26:02वह जो वाणी लिबड़ के आती है अभी तो तुम उस रस को पियोगे, वह भी
- 26:11बड़े मजेदार है तेरे दामन से। उन हवाओं को सलाम।
- 26:33ये वो हवाएं हैं जो अपने देश से लिवड़ते बढ़के आती हैं।
- 26:42चल हंसा उस देश जो तुम्हारा अपना है, अभी तुम परदेश में बैठ और
- 26:56परदेश में बैठ के तुम वो ले गए हो।
- 27:14गोरख कहते हैं, यह भ्रम मत पा लेना कि वह समझने में मिल जाएगा।
- 27:27वेद कतेब नखानी पानी वह बानी। वेदों कदेबों के पढ़ने से नहीं
- 27:39मिलता रस, बल्कि जो आपकी समझ में आ गया तो समझ लो।
- 27:52तुम चूक गए उससे मुझे लोग कहते हैं कि समझ नहीं आया बाबा मैं
- 27:57कहता हूँ धन्यवाद। जब लोग कह देते हैं कि बाबा समझ
- 28:04में आ गया तो मैं कहता खुश नहीं, लेकिन समझ जाता हूँ कि ढका गया।
- 28:14दिल न टूट जाए इसलिए खामोश रहता हूँ वेद कतेब न खानी वाणी।
- 28:33सब ढंकी पल आनी गगन शिखर में शब्द प्रकाश्य पहली बात तो अच्छी तरह
- 28:47वो समझ लो। बोलने में तो ऐसे ही आएगा क्या
- 28:58करें भाषा सीमित है तुच्छ, तुच्छ भाषा में सब आतन?
- 29:15और तुम्हारी झगड़े भाषाओं के झगड़े, शब्दों के झगड़े और गौर
- 29:26कहते की रस मिलेगा तप जब तुम निहि शब्दता में चले जाओ।
- 29:37सारा जहान पुकार रहा है आज चरम अमावस्या का शिखर है।
- 29:54धर्म को बताने वाले लोग अंधकार में डूब जाएं जब।
- 30:01तब अमावस्या की काली रात ही होती है।
- 30:07आज वो मौसम आ गया। रोज़ ये चैनल नहीं खुल रहे हैं,
- 30:17कुछ मैं भी आग लगा ही देता हूँ। जब कमेंट्स आ जाते हैं तो मैं
- 30:25कहती हूँ तुम्हारी तुम तो बहुत बड़ गया अपना चैनल खोलो, अच्छी
- 30:30कमाई है क्यों? रोजगार मांगते फिर जाओ, धंधा
- 30:37बढ़िया है डॉलर आएँगे। कम से कम परिवार का पेट तो भर
- 30:42जाएगा कुछ भी बोल दो अज्ञात की बात है यहाँ सब चलेगा क्योंकि
- 31:00देखा किसी ने है। वह पीने की चीज़ है देखने की चीज़
- 31:11नहीं है पिया जाता है। और सभी आज शब्द बोल रहे हैं और
- 31:27सभी आज कह रहे हैं मुझे सुनो मुझे सुनो राजनीति हुई अगर कोई व्यक्ति
- 31:40ये बात कहें। तो जचती है बात वह बुद्धिमान
- 31:44लोगों का काम बुद्धि के कुछ स्वरूप गणना दू पहले होता है
- 31:51अंधबुद्धि, बस, बुद्धि और तीन जैसे अंधा।
- 31:59अंधे को कोई पता नहीं हरा रंग क्या पीला क्या गेरुआ क्या लाल
- 32:04क्या काला क्या नहीं कुछ पता नहीं।
- 32:12एक मंद बुद्धि थोड़ी जगनी शुरू होगी।
- 32:20पहली बुद्धि। अंधा था, आँख थी ही नहीं फिर मंद
- 32:27बुद्धि, थोड़ी थोड़ी रौशनी। अब मैंने आँख का परीक्षण कराया,
- 32:29पर्दा गिर गया, एकदम से अँधेरा हो गया, पर्दा गिर गया, दिखना बंद हो
- 32:37गया। ये बुलवर्कर खींच रहा था गुमशाला
- 32:45में एक खूंटी के ऊपर एक छोर लगा दिया और दोनों पांव दीवार से लगा
- 32:52के पूरा खींच के लगा देखो कहाँ तक खींचता है जितनी सीमा थी वहाँ तक
- 32:59खींच गया। फिर खूंटी के ऊपर से निकल गया।
- 33:03एक और देखिए मेरी आंख पे रखा दोनों आँखों से देखना बंद अंधकार
- 33:16आ गया मैं अपनी आंख को टटोल रहा हूँ नीचे।
- 33:28शायद 1977 छिहतर की बात है, जहाँ तक मुझे ऐसा ही कुछ होगा तो मुझे
- 33:40कहने लगे मेरे साथ मेरे मित्र से। क्या ढूंढ रहे हो भैया?
- 33:47मैंने कहा आंख आंख आंख गिर के ही है बाहर अब वो तो आँखों वाले थे
- 34:03वो कहते नहीं भैया कोई आँख नहीं करी आँख।
- 34:07कोई चोट लग गई है आँख तो यहाँ नहीं है, मत ढूंढो है ही नहीं तो
- 34:13वो तो जानते थे, देखते थे कोई ढीला वगैरह बाहर नहीं गिरा, लेकिन
- 34:18मैं यकीन कैसे करूँ? मैं ढूंढता रहा।
- 34:29एक आंख वाला था मेरा मित्र रंधीर सिंह धीरा जिसका नाम मैंने लिया
- 34:36जीसको मैंने कहा 85 में दर्शन होते ही कि मैं गाँधी था विश्लेषण
- 34:44में। उसने मुझे साइकिल पे बैठाया
- 34:50डॉक्टर के पास लेके डॉक्टर ने अपने दूरबीन से देखा, मतलब देखो
- 34:56बात या आंख तो गयी बच फिर मैंने कहा बच तो गयी है।
- 35:02लेकिन डॉक्टर साहब मुझे दिखता नहीं है।
- 35:05बिल्कुल अंधकार उससे कोई नस दब गई होगी।
- 35:13एक नस का ही तो खेल है, परमात्मा चाय है।
- 35:22तो बड़े बड़े पहलवानों की रडक निकल जाए।
- 35:24एक क्षण में उसे सब रगों का पता है।
- 35:28पंडित केशाराम को रग का पता था, हमें नहीं पता लगा।
- 35:32आज पर वो उस रग को दबाते थे और कोई ज्यादा चोट नहीं दबाते थे।
- 35:43वृद्ध व्यक्ति से हल्के से दबा देते और बच्चे की चीख निकल जाती
- 35:48है। पता नहीं कहाँ से दबाते काक के
- 35:51बिस्तर से दबा देते सेंस की चीज़ है जहाँ जहाँ भी भगवान ने बाल दिए
- 35:57हैं। समझ लेना वो निशानी है।
- 36:01परमात्मा की यह पोषण सेंसिटिव है तो काँख में भी बाल देय हम
- 36:09सुंदरता के लिए इन्हें काट देते हैं।
- 36:14काट दो या रख लो। लेकिन इनके भीतर ईश्वर ने कोई
- 36:22चीज़ है, जो डाली है वो कभी बात करूँगा, लंबा हो जाएगा।
- 36:27प्रश्न गगन मंडल में शब्द प्रकाश है।
- 36:41गौरख कहते हैं, शब्दों को जपना मत शब्दों तक पहुंचना है।
- 36:52शब्द जपने के लिए नहीं है, शब्द मंजिल है।
- 37:01यह एक आहट है तुम्हें बताने के लिए कि यहाँ मौजूद हूँ मैं यहाँ आ
- 37:11जाओ अंडर दी नाग इस बात की खबर अन्य दी नाग।
- 37:23उठता है नाभि के गहरे तल से कुंडलनी के पास से और जाता है
- 37:35सुसुमना नड़ी के द्वारा ब्रम्हरन्द्र में।
- 37:41गगन मंडल में शब्द प्रकाश झा इसलिए अगर तुम ब्रह्मांड में
- 37:49पहुंचो, ब्रह्मांड में जानो तो सीधा सीधा ऊपर मत पहुंचाना, ये
- 37:57कोई राजस्थानी। अगर कोई बताए यहाँ ध्यान करो तो
- 38:03मत करना क्योंकि यह रास्ता पहले नीचे जाना पड़ता है, जैसे जड़
- 38:14पहले जाती है, नीच जैसे जैसे जड़ गहरी होती है।
- 38:20वैसे वैसे वृक्ष ऊपर उठता है और जितनी जड़ें गहरी हैं उतना वृक्ष
- 38:25ऊपर शब्द बताने की चेष्ठाये बड़ी उलटी पुलटी बात है।
- 38:40लेकिन संत भी धन्य तुम्हें बताने के लिए एडी जोटी का ज़ोर लगा देते
- 38:46हैं पता है शब्दों से मिलेगा नहीं, ये भी पता है कि मोन से भी
- 38:58तुम्हें कैसे मिलेगा। सब से थोड़ी सी तुम समझ तो पाओगे
- 39:04बात को और समझ को पाते ही कुछ बताया जा सकता है तो बोलना ज्यादा
- 39:14श्रेष्ठ कर है मौन होने के लिए। संत को बोलना पड़ता है, किसी को
- 39:25चुप कराना हो तो बोलना पड़ेगा प्लीज़ बी साइलेंस कीप साइलेंस।
- 39:40तो संत जानते हैं, पहुंचना तो मुँह तक है, लेकिन बताना तो
- 39:49शब्दों से ही पड़ेगा और तुमने शब्दों को ही पकड़ लिया।
- 39:58सारे मूर्ख बनते शब्दों में उलझें और शब्द क्योंकि अध्ययन तक
- 40:05पहुंचाते हैं और अज्ञान लड़वाता है, झगड़वाता है, खून खराब करवाता
- 40:11है और आज यही कुछ तो हो रहा है। जीस विश्व में।
- 40:17एक कण भी तुमने बनाया नहीं, इस विश्व का एक अणु भी बनाने की
- 40:24योग्यता तुम में नहीं है। उसको तुम अपनी मलकियत समझे रहो।
- 40:31यह धोखा है या मुड़ता है। मौन है हमारी वंजन गगन मंडल में
- 40:43शब्द प्रकाश गुटता है। इसका मूल उदगम स्रोत है भीतर नाभि
- 40:50के पास। गौरख प्रैक्टिकल कैसे छुओगे यह जो
- 41:07शब्द तुम्हें आनंद के रूप में सुनाई पड़ता है इसको धागे की तरह।
- 41:17एक तरकीब बना लेना। इसको पकड़ लेना इसका उदगम स्रोत
- 41:24कहाँ है? मूल उदगम स्रोत कहाँ है, कहाँ से
- 41:30प्रकट होता है यह उठता है यह और फिर जाकर सुनाई कहाँ पड़ता है?
- 41:38तो आप पाओगे मूल उदगम स्रोत तो नाभि के पास है कुंटन के पास और
- 41:48यह शब्द अनहतनाथ रस है। मेरु दंड में से होता हुआ सबसे
- 42:01सबसे कीमती हमारा हिस्सा जो शरीर का है वो मेरु दंड है।
- 42:06क्यों? उसमें से एड़ा पिंगला?
- 42:08और शु सुमना, तीन मुख्य नाड़ियां और बाकी 72,000 नाड़ियां जा रही
- 42:13है। कुल उस नाड़ी के पास पहुँचना कैसे
- 42:23है? क्रिया योग ऊंचे ऊंचे करो 1 दिन।
- 42:28तुम धीरे धीरे उसके करीब जाना शुरू हो जाओगे।
- 42:33थोड़ी प्रश्न बीच में ले जी, नाद प्रकट हुआ नहीं बाबा फिर क्या
- 42:41करें? फिर क्रिया योग करो।
- 42:44इससे नाद को प्रकट होने में सहायता मिलेंगे।
- 42:50और ध्यान रखना नाद अगर प्रकट नहीं हुआ तो गोरख कहते हैं, फिर
- 43:01मुश्किल है, आसान से आसान रस्तली है।
- 43:08बाकी तो मग्ज खपाई है जखाई है, ये है बड़ा ईज़ी वे हम दिल्ली जा रहे
- 43:18थे। नए साल का दिन था 31 दिसंबर रात।
- 43:28को दिखाई। कुछ नहीं पढ़ रहा तो ड्राइवर कहने
- 43:39लगा कुछ नहीं दिख रहा। मैंने कहा तुम ऐसे करो ये जो पीली
- 43:46बजती है ना पीला रंग बड़ा शानदार होता है।
- 43:51जो गेरुआ वस्त्र बनाया यह एक निशानी लक्षण है।
- 44:01यह धुंध में भी दिख जाता है। अगर पीली लाइट हो तो सफेदनी
- 44:05दिखेगी। नीली नहीं दिखेगी हरी नहीं दिखेगी
- 44:13यह पीली लाइट, दिखेगी पीली लाइट अगर तुम लगा दो तो तुम्हें पीली
- 44:19लाइट चमकती हुई दिख जाएगी। सफेद नहीं दिखेगी इसी के परिणाम
- 44:28स्वरूप। इन्वेंशन की गई और पीली बत्ती
- 44:33लगाई गई तो पीली बत्ती वाला ट्रक जा रहा था।
- 44:37मैंने कहा धीरे धीरे इसके पीछे लगा ले तब तक सुबह हो जाएगी और
- 44:45सुबह होते थोड़ा सा कुछ। चार्ज ना हो जाएगा।
- 44:54ऐसा ही किया इनके जब यह रुक जाए तो तुम लोग जाना कुछ बात है कि
- 45:00आगे से कुछ आ रहा है। अंधे को ऐसे ही चलाया जाता है।
- 45:11अगर तुम घोर धुंध एति चांडण हुदियाँ गुरुबेन कोर अँधेर।
- 45:24जी शो चिंता उगवाईं तेसूर जचड़ 1000 एकती चाणन हो गया गुरुबिन
- 45:38कोर अंधार। कोई तकनीक जिसने खोज ली वह गुरु
- 45:52गोरख तो तकनीकों के मास्टरमाइंड हैं।
- 46:01सरलतम विधि आपको बता रहे हैं गगन मंडल में शब्द प्रकाश।
- 46:09प्रकाशित होता है वहाँ जाके सुनाई पड़ता है लेकिन इसका उदगम न भी
- 46:15सतल के पास है न भी सतल से ये चलता है सुशूमना के संग संग चलता
- 46:30यह ब्रह्मरत्र में प्रगट होता। इसे गगन मंडल कहते हैं।
- 46:34परम महेंद्र को जो हमारे सर के बीचों बीच होता है छोटी के पास।
- 46:56गगन मंडल में शब्द प्रकाश प्रकाशित होता है, वह सुना ही
- 47:05पड़ता है अब जब बड़े मज़े की बात है आँखों से तुम सूँघ नहीं सकते
- 47:12जयंति नहीं। जीवा से तुम देख नहीं सकते कानों
- 47:20से तुम सख नहीं सकती, टेस्ट नहीं कर सकते ये अपने अपने केंद्र हैं
- 47:32रस्ते। कानों से सुन सकते हो, देख नहीं
- 47:38सकते, चमड़ी भी देख नहीं सकती। ये सारे औजार हैं अलग अलग तरह के
- 47:51हमारा शरीर भी इन औज़ारों का घर है।
- 47:55उपकरण ही उपकरण भरे पड़े। गोरख कहते हैं, सबसे इजी वे और
- 48:13गोरख तो यहाँ तक कहते हैं, बस वे ही यह है।
- 48:20अगर तुम यहाँ से चूक गए तो फिर बाकी साधनाएं तो बड़ी मुश्किल
- 48:24हैं। इसलिए सबसे पहले इसका प्रकाश
- 48:30किया। उन्होंने गगन मंडल में शब्द
- 48:36प्रकाश। पहली बताई बात बुद्धि समझने की
- 48:43चेष्टा मत करना, बेद कतेब समझाने की चेष्टा करेंगे उलझमा ते जाना
- 48:54समझना बुद्धि से होता है और दर्शन में।
- 48:59बुद्धि रुकावट बनती है जी पहली बात समझा कि वह अनुभव में आता है,
- 49:09वह पिया जाता है, रस को पीना होता है, चखना होता है, अनुभव करना
- 49:15होता है। एक्सपीरियंस की बात है ये।
- 49:20यह देखने की बात नहीं, रस देखा नहीं जाता, समझे रस कभी देखा नहीं
- 49:26जाता। रस के परिणाम देखे जाते हैं।
- 49:30मीरा को रस के लिया मेरा ने तो लक्षण प्रकट हुए नाचने लगे।
- 49:40नानक ने रस पिया तो गाने लग गए। कबीर ने रस पिया तो सुरती लगने
- 49:48लगे, बात रस की है और रस की ही बात कर रहे हैं।
- 50:00गौरव। रस का उदगम क्या है?
- 50:07नाभी क्षेत्र कुंडल में वहाँ से उठती है रस्कीदार।
- 50:20सुशमना के बीच में से होती हुई मेरु दंड जैसे रेड की हड्डी कहते
- 50:25हो वहाँ से होती हुई तुम्हारे परमरद्र में यह प्रकट होती है
- 50:32तुम्हें सुनाई पड़ता है इसलिए जिनको परमरद्र में।
- 50:38यह सुनाई पड़ता है लगता है तो मैं कानों से सुनाई पड़ता है क्योंकि
- 50:43यंत्र कान ही सुने कानों से सुनता नहीं है।
- 50:47प्रकाश तो यही होता है लेकिन कान क्योंकि यंत्र है सुनने के तो
- 50:52आपको लगेगा के कानों से। बाएं से सुनता है, दाईं से सुनता
- 50:57है नहीं, यह गगन मंडल में शब्दों प्रकाश है सही इसका प्रकाशित होने
- 51:04का सुन ब्राह्मणन्द्र है गगन मंडल है खोपड़ी के बीच।
- 51:13तहे बूझ अलख वे नाशे जिसका दर्शन नहीं होता, जो देखा नहीं जा सकता
- 51:24अलख लख जो लखा न जा सके, बूझा न जा सके।
- 51:35गोरख कहते हैं, वेदों के चक्कर में मत पड़ जाना, वेद तो सिर्फ
- 51:45गुणगान करते हैं, उसका रस का बखान नहीं पिया नहीं जाता खोपड़ी में।
- 51:55इकट्ठा किया जा सकता है। इससे तुम भ्रमित हो जाओगे कि मैं
- 52:00जानता हूँ जानते वांटते तुम कुछ नहीं पहले नीचे उतरो, ना भी सतल
- 52:14के पास उस अमृत कुंड को जगाओ। कैसा जग क्रिया योग से नहीं तो
- 52:22कुछ भी न करो, जग जाएगा कुछ न करने से ध्यान की चोट भी जगाने
- 52:34में सहायता करेगी अगर थोड़ा सा तीव्र गति से।
- 52:38इस घटना को घटाना चाहती हूँ तो क्रिया योग से ऊंची अपने
- 52:43स्वास्थ्य को छोड़ो। प्राण वायु प्राण शक्ति कोरोना
- 52:52में कितने लोग मर गए? प्राण शक्ति के बिना?
- 52:59लंबे लंबे सांस लेके ऑक्सीजेनेटेड कर लो अपनी सारी बॉडी को यह चोट
- 53:09पड़ेगी तुम्हारी कुंडली पर इससे कुंडली जल जाएगी।
- 53:15और जब श्वास छोड़ो के श्वास लो के नाक से श्वास लो और मुख से छोड़
- 53:20दो, नाक से श्वास लो, मुख से छोड़ दो, बस ऐसा ही करना है, उल्टा
- 53:27नहीं करना है, मुख से श्वास लेना और नाक से छोड़ना यह गलती मत कर
- 53:32बैठना। नाक से सवस्थ लो, मुख से छोड़ो,
- 53:43यह उस नाद को जगाने में सहायक। नाद जगेगा।
- 53:55उदगम सतल नाभि के पास रस वहीं मौजूद है और वहीं से कनेक्शन होता
- 54:03है। रस आता है रस के समुद्र के पास से
- 54:09और वहीं है फ्यूज़ लगा जो तुम्हारी चेतना को चेतना के सागर
- 54:17के साथ जोड़ता है। पहली बात आज की समझ ली ना नाद
- 54:32सबसे आसान और सरल साधन है। अगले पल भी तुम जाग सकते हो।
- 54:45जन्मों की बात मत किया करो, मैं उलझ जाऊं क्या?
- 54:51जिसने पाया ये तो पाया कि जन्मों से मैं भटक रहा था।
- 55:00लेकिन यह नहीं पाया कि जन्मों में पहुंचा पहुंचा तो पल में ना अतीत
- 55:12की स्मृतियों में भटकको ना भविष्य की योजनाओं में भटकको।
- 55:24सिर्फ वर्तमान में वर्तमान में हो जाओ, वर्तमान में ठहर जाओ।
- 55:34यह सूत्र आज का। गगन मंडल में शब्द प्रकाश शाह तह
- 55:42बूझ वहाँ बूझता वहाँ समझ आता वहाँ बूझ अलख बेनाशी।
- 55:53जो दिखता नहीं देखा नहीं जा सकता वो वहाँ जाकर उसका पता लगता है।
- 55:58यहाँ प्रकट होता है उठता तो मूल केंद्र तो इसका मूल उदगम केंद्र
- 56:05तो इसका नाभि शत्र के पास कुंडल नहीं।
- 56:10लेकिन सुशकुमना अनाड़ी के द्वारा मेरु दंडमय से होता हुआ यह रस
- 56:16जाता है ब्रहम्रंत्र में प्रकट होता है और जब ब्रहम्रद्र में
- 56:21प्रकट होता है तो गोर्ख कहते हैं कि वहाँ वह जो देखा नहीं जाता जो
- 56:28बूझा नहीं जाता। बुद्धि के द्वारा या किसी अन्य
- 56:32इंद्री के द्वारा वह वहाँ जाकर बूझ लिया जाता है।
- 56:40गगन मंडल में शब्द प्रकाश या बूझें अलख विनाशी।
- 56:48वह अविनाशी तत्व वह जो देखा नहीं जाता अदृश्य वहाँ जाकर बूझ लिया
- 56:57जाता है कि वह क्या है और भूजा का मतलब वहाँ पिया जाता है प्रकट
- 57:06होता है। कुंडली के पास पिया जाता है भरम
- 57:12रंत्र में और जब भरम रंत्र में तुम पियोगे तो कुछ लक्षण आएँगे
- 57:19ऊपर से टपकेगा रस। तो खीच लिए मुद्रा लगा के उसे पी
- 57:24जाना ऐसा कुछ मत करना नहीं पीओगे तो वो टपकेगा खुद ब खुद टपकेगा
- 57:30तुम्हारी रस पे जी भाग रसना उसको पी जाएगी।
- 57:45आज का सूत्र है बुद्धि, परमात्मा को पाने में बाधा है शास्त्र,
- 57:59वेद, कुरान, कुरान। ग्रंथ वाइबल गीता अष्टवक्र गीता
- 58:09उपनिषद यह सर्प रुकावटें हैं तुमने देखना है रस को अपनी
- 58:19ज़िन्दगी के भीतर बरसते हुए। और तुम ढूंढ़ते हो शास्त्रों में
- 58:30यही मूढ़ता कितने जन्मों से तुम कर रहे हो?
- 58:38गौर कहते हैं, इसको त्याग दो बड़ा शानदार सूत्र है।
- 58:44सबसे पहली चोट जहाँ लगनी चाहिए बिलकुल ठिकाने पे चोट लगी सबसे
- 58:56पहले कहते हैं कि बाहर को चोट दो। ऐसे प्रकट होगा जहाँ से उठेगा
- 59:12सुष्मना में से निकल के बरमरद्र में प्रकट होगा और वहाँ तुम पी
- 59:19जाओगे, वहाँ सारा भेद खुलेगा, भेद क्या खुलेगा?
- 59:23या फिर अगले वाक्य में? लंबी हो गई है।
- 59:27बड़ी प्रकट मत तो प्रकट नहीं करता, पिया जाता है वो समझा जाता
- 59:47नहीं। इसलिए हम समझाने की चेष्टाएं तो
- 59:55करते हैं क्या करें राशि ही इतना प्यारा बांटने को मन करता इता बरस
- 1:00:07रहा है फालतू। इतना फालतू हो गया कि गागर भर गई
- 1:00:19और कबीर कहते हैं एक गागर छलक रही है अब मैं इस अमृत का क्या करूँ?
- 1:00:29मैंने तो बहुत पी लिया। पीता ही चला जा रहा भलो भयो मोरी
- 1:00:40गगरी फूटी गगरिया भर गई छलकने लगी बड़ा अच्छा हुआ।
- 1:00:53अगर ये गगड़िया सिर पे ही रखी रहती भर जाती तो इसे सिर्फ मैं
- 1:01:00पीता लेकिन गगड़िया भर के छलकने लगी तो फूट गई।
- 1:01:09उसी को कहते हैं कबीर। भलो भयो मेरी गागर फूटी, यह बरसने
- 1:01:19लगी या छलकने लगी ती भर गई तो फिर और कहाँ?
- 1:01:23रस उसमें जगह ही नहीं है और रस को समान तो फिर संत क्योंकि करुणा
- 1:01:31माना होता है। संत चाहता है, अब वैसे भी तो बिखर
- 1:01:36जाएगा क्यों न इसको औरों को खिला दो तो उसकी भीतर की इच्छा?
- 1:01:51बांट दूँ उसी क्षण में कोई संत कहता है तुम सौहातों से ले ले और
- 1:02:011000 हाथों से बांट ले इतना बाट इतना बाट क्योंकि वो बांटने से
- 1:02:06गठता नहीं। उसी का सामान उसी का माल उसी के
- 1:02:15पास रह जाता है जाता कहाँ है? यही तो तुम्हें भ्रम अटकाए है,
- 1:02:23तुम सारी उम्र या एक जेब से निकाल के दूसरी जेब में रख देते हो।
- 1:02:34अंबार लगा देते हैं, लेकिन भूख तो जितनी है, उससे ज्यादा नहीं खा
- 1:02:42सकते। क्या करोगे?
- 1:02:45वस्त्र पहन लोगे? फिर धन तो ज्यादा आ गया, फिर क्या
- 1:02:51करूँ? फिर सोनी के वस्त्र पहन लो फिर
- 1:02:56फिर तुम दिखावा करने पे उतर जाओ और ये तुम्हारे सबसे दयनीय स्थिति
- 1:03:03है जब व्यक्ति। पदार्थों का इस्तेमाल जिससे जीवन
- 1:03:13नहीं मिलता अब सोने की पोशाकें पहनने से उस रस का ज़रा भी संबंध
- 1:03:25नहीं है। तुम नंग धड़ंग भी हो जाओ।
- 1:03:31महावीर की तरह तो भी वह मिल जाता है, क्योंकि ये भीतर की बात है,
- 1:03:39बाहर कोषाकों की बात नहीं है, इसे किसी ही बार बदलते रहो।
- 1:03:50पशाकि बदलने में दिखावा करने में यकीन मत करना और ऐसे लोगों का संग
- 1:03:57त्याग देना क्योंकि ये लोग अपनी भ्रांतियों को तुम्हारी खोपड़ी
- 1:04:06में घुसेड़ देंगे। तुम भी भ्रांत हो जाओगे, इसलिए
- 1:04:14मैं कहता हूँ साधु की संगत तो तुम्हें रंगत लाएगी ही, साधु की
- 1:04:22संगत तो तुम्हें रंग लाएगी। संगत रंगत अब खेलती ही है।
- 1:04:29सत्संग में जाओगे तो सत का स्वाद चखोगे असत।
- 1:04:37संग में जाओगे तो झूठ का विष भी पीना पड़ेगा।
- 1:04:44और झूठ का विषय जब तुम पी लेते हो तो तुम दुखी होते हो और मैं दुखी
- 1:04:52नहीं हूँ। इसको प्रचारित प्रसारित करने के
- 1:04:56लिए तुम पोशाकें पहनना शुरू कर देते हो, इसलिए जिसने सोने की
- 1:05:01पोशाक की पहननी शुरू कर दी, समझ लेना वह अंत से दुखी है, दिखावा
- 1:05:10करके तुम्हे वरवाना चाहता है और सबसे बड़ा पाप है तुम लूट लो, तुम
- 1:05:19सारी दुनिया की दौलत इकट्ठी कर लो।
- 1:05:23इससे व्यवस्थाएँ बिगड़ जाएंगी। ईश्वर ने एक अकेले व्यक्ति के लिए
- 1:05:30यह संसार नहीं बनाया है। मनुष्य ये जो पुरुषार्थ करने में
- 1:05:35लगा। कि सारी दुनिया कुछ चंद लोगों की
- 1:05:41गुलाम हो जाए। यह प्रयास मूड़ता भी है और पाप भी
- 1:05:47है। मूड़ता इसीलिए कि तुम्हें कुछ
- 1:05:51नहीं मिलेगा। सवाई चौकीदारी के सवाय बोझ गए सिर
- 1:05:56पे। बाहर रखोगे तो बोझ भी तो उठाना
- 1:05:58पड़ेगा और सिर पर रखा हुआ बोझ तुम्हे दुखी करेगा।
- 1:06:09कब तक दोगे इसको? लेकिन आदमी की ये अभिलाषा।
- 1:06:20सारे संसार का धन कुछ गिने गिने चुने लोगों के पास है, पेट सब के
- 1:06:29लगा है सबको तलाश है उस अंतर के रस्की जिसका वखान कर रहे हैं
- 1:06:37गोरख। क्यों नहीं सब को उस रस तुम्हारा
- 1:06:44कुछ ही जायेगा नहीं अगर तुम वो बांट दो, इतना सा बांट दो कि उसे
- 1:06:53ज़िन्दगी की जीने की सुविधाएं तक मिल जाएं।
- 1:06:57तो तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। चिढ़ी चौंच भर ले गई नदी न कट दे
- 1:07:04क्या कट जाएगा तुम्हारा? क्योंकि सारा समुद्र तो तुम अकेले
- 1:07:09भी नहीं सकते। दूसरों को भी प्यास लगी है।
- 1:07:18दूसरों को भी भूख लगती है, इसलिए लोभ को मोह को पापों की जाननी कहा
- 1:07:28गया। तुम लोभ करते हो अकेला मेरे हाथ
- 1:07:35में। सारी सत्ता आ जाए।
- 1:07:37कितनी दुष्टता है कि मेरे इशारे पर दुनिया नाचे, क्या मिल जाएगा
- 1:07:47तुम्हें फल दो पल के मेहमान हों यहाँ।
- 1:07:551 दिन विदा होना पड़ता है। यह सत्य सब जानते हैं, लेकिन इसे
- 1:07:59मानते नहीं। जीस दिन हृदय ने यह सत्य मान लिया
- 1:08:04उस दिन तुम बुद्ध की राह पे चल पड़ोगे फिर तुम बांटोगे नहीं।
- 1:08:13फिर तुम छोड़ ही दोगे कि कोई पिए ना पिए मैं छोड़ चला हमें भूख
- 1:08:19लगेंगी, हम मांग लेंगे, मिल जाएगा ठीक नहीं, भूखे रह लेंगे लेकिन
- 1:08:28तलाश उसकी है यहाँ से तो जी भर गया।
- 1:08:33इसमें तो कुछ है नहीं। सार संसार नाम है लेकिन है तो
- 1:08:40असार नाम संसार है सार सहित लेकिन है तो संसार का घर।
- 1:08:51संशा ही संशा है इसको संभालने की संशा फिर उसको छोड़ के चले जाओगे,
- 1:08:57इसकी संशा क्या बनेगा ये संशाएं तुम्हें ले बैठेंगी तो ऐसा कर्म
- 1:09:07करो। कि किसी का कुछ ना बिगड़े।
- 1:09:15तुम ही भी पुण्य लगे, पाप ना लगे और भी अपनी मंजिल को तय कर सकें।
- 1:09:24इसलिए बाबा नानक का सिद्धांत बड़ा शानदार है।
- 1:09:28वो कहते हैं, देखो। तुम्हें कर्म तो करना ही होगा,
- 1:09:34कर्म किए बिना मन से रह नहीं सकता तो फिर कर्म करके खेती करो या जो
- 1:09:42भी काम धाम है, कंप्यूटर चलाओ, कोई व्यवस्था करो।
- 1:09:49किसने कोई चुन लिया है तुमको? तुम्हारे झूठों से प्रभावित
- 1:09:55होंगे। पाखंडों से प्रभावित होंगे तो फिर
- 1:10:02उसका गला थोड़ी दबाना है। तुम्हें कुछ मिलेगा नहीं, उसका
- 1:10:12जीवन खतरे में आ जाएगा। तुम्हें चारों तरफ से पाप और
- 1:10:16संताप ये दोनों चीजें मिलेंगे तो संत कहते हैं ऐसा कर्म क्यों नहीं
- 1:10:25करते? कि फल भी मिल जाए, वट वृक्ष की
- 1:10:33तरह छाया भी मिल जाए, यह संत मत है।
- 1:10:42फल भी मिल जाए और छाया भी मिल जाए।
- 1:10:45आने वाला यात्री घड़ी दो घड़ी विश्राम भी कर रहे छाया के तले
- 1:10:50बैठ के संत मत यह कहता है, और मन मत यह कहता है कि इकट्ठा कर लो।
- 1:11:06जरूरत के वक्त काम आता है, यह मनमती है।
- 1:11:12यह वही व्यक्ति कह सकता है जिसने उस आगाजकर्ता के पद्य चिन्ह देखे
- 1:11:19नहीं जिसने उस सृष्टता के। आहट सुन ली कभी किसी क्षण में उसे
- 1:11:29सतोरी कहते हैं, वो ऐसा धंधा नहीं करेगा।
- 1:11:34दोनों तरफ से ही पाप और संताप गिर लेता।
- 1:11:40दूसरों का माल एक व्यक्ति के पास इकट्ठा कर दोगे।
- 1:11:44यह मनुष्य की क्रूरवृत्ति का परिचायक है।
- 1:11:51तुम नामों को बदलने के चक्कर में मैंने ये सुना है कल मनरेगा का
- 1:12:00नाम बदल कर कुछ और श्री राम जी रख दिया।
- 1:12:08किसी को क्या फर्क पड़ेगा? क्या श्री राम जी रखने से लोगों
- 1:12:13के पेटों को भूख नहीं लगेंगी? कंठ प्यासे नहीं हो गए।
- 1:12:25हिंदू धर्म हिंदू राष्ट्र बनने से सोना बरसने लगेगा।
- 1:12:31ऊपर तो मुस्लिम राष्ट्र बनने से क्या सोना बरसने लग गया?
- 1:12:37ईसाई बड़े समयदार कौन? दो तिहाई धरती पर राजकीय ईसाई के
- 1:12:46शिक्षक जोड़ा नहीं और अपने मुल्क को सारी धरती को ईसाई राष्ट्र
- 1:12:54घोषित कर सकते थे नहीं किया। समझदार थी मूड व्यक्ति ऐसे कृत्य
- 1:13:04किया करता है डरा दो या लोभ दे दो, खरीद लो या मारने की धमकी दे
- 1:13:12दो या मार ही दो। तुम्हारी पल पल का हिसाब तुम्हारी
- 1:13:20सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर में रिकॉर्ड होता है, तुम किसी को
- 1:13:25मारो या उसकी जो राज़ जानता है उसको मारो मर तुम भी 1 दिन जाओगे,
- 1:13:35फिर तुम्हारी आने का। धरती को नुकसान ही हुआ ना ऐसे
- 1:13:41व्यक्ति तो नहीं जन्मे तो अच्छा नहीं होगा, अच्छा होगा लेकिन यदा
- 1:13:51कदा ऐसे व्यक्ति टपक पड़ते। मैंने सुना गाँधी का नाम हटा
- 1:13:57दिया, मैंने कहा बहुत शुभ किया, भगवान राम को तो गाँधी भी मानते
- 1:14:04थे और तुम सारी उम्र कहते रहे, यह तो मुसलमान के अल्लाह को मानता,
- 1:14:10लेकिन मौत सत्य को बाहर उगलवा देती।
- 1:14:15जब गुड़ से ने तीन गोलियां मारी और एक आज खोल दूँ, सावर करने मारे
- 1:14:20चौथी गोली चार लगी थी तो चौथी गोली का हिसाब इन्होंने क्यों
- 1:14:26नहीं मांगा? मैं नहीं जानता, प्रत्यक्ष प्रमाण
- 1:14:28था। गाँधी के शरीर को चार गोलियां लगी
- 1:14:33थी। पता नहीं कहाँ चूक होगे एक सावर
- 1:14:37करने अब घोड़ा हो गया आदत है इसलिए हाफ पैंट पहनते हैं।
- 1:14:48चड्डी का फायदा भी होता है। भागने में सहायता देती है।
- 1:14:51पूरी पैंट अटक सकती है, किसी वक्त भागने में बाधा बन सकती है।
- 1:15:00तो तुम सारी उम्र कहते रहे, आज भी कहते हो।
- 1:15:03पक्षपाती था, मुसलमानों का पक्ष लेता था।
- 1:15:07तो मृत्यु सारे पर्दे वार देते हैं ज़िन्दगी में तुमने क्या माना
- 1:15:13तो देखिये तीनों बार राम ही आया हे राम हे राम, हे राम अल्लाह तो
- 1:15:23एक बार फिर मुसलमान तो इस बात को। आक्षेपित कर सकते हैं, हिंदू नहीं
- 1:15:30कर सकते और गाँधी को एतराज भी क्या होगा?
- 1:15:37भगवान राम के नाम पे रख दूँ। किसको आपत्ति है?
- 1:15:44बिल्कुल आपत्ति नहीं। हिंदू राष्ट्र है।
- 1:15:49मुसलमानों को हमने पाकिस्तान दे दिया और बंटवारा ऐसे ही तो हुआ था
- 1:16:02और बंटवारा हुआ था 8218 के हिसाब से।
- 1:16:06अब तो मैं वो कभी समझो तो समझाऊंगा 8218 सभी चीजें ऐसे ही
- 1:16:14बांटी गई थी। खैर, अभी हिसाब देने का वक्त नहीं
- 1:16:17है और हिसाब देने की मेरी नीयत भी नहीं होती।
- 1:16:25ज़माना ही ऐसा आ गया। अब कल सुब्रमण्यम स्वामी कह रहे
- 1:16:29थे उषा कि तुम इतने नाराज क्यों रहते हो?
- 1:16:36मोदी से कहते इसको हमने रल मिल के चीफ मिनिस्टर से प्राइम मिनिस्टर
- 1:16:42बनाया था। लेकिन यह तो लड़कियों को छेड़ता
- 1:16:46है हैलो भाई वो मेरी गागर फूटी या गागर फोड़ता है वहाँ भी सैतानियात
- 1:17:02करता था गुजरात में हमने कहा मुल्क को सुधार देगा।
- 1:17:07तो हमने इसे प्राइम मिनिस्टर बना दिया देश का चीफ मिनिस्टर से और
- 1:17:16वहाँ भी ये लड़कियों को छेड़ता था।
- 1:17:21यहाँ भी लड़कियों को छेड़ता बाज नहीं आया तो मैंने कहा उल्लू के
- 1:17:26पट्ठे? दोष किसका?
- 1:17:31जब तुम्हें पता था ये लड़कियों को छेड़छाड़ करता है तो इसको छोटी
- 1:17:36ताकत से सुप्रीम ताकत क्यों देनी थी?
- 1:17:41तुम्हें पता नहीं सरेआम गुंडागर्दी खुद भी करेगा और अपनी
- 1:17:45चमचों को भी करवाएगा। फिर सारा कसूर तुम्हारा तुमने
- 1:17:52इकट्ठे होके तुम कहते हो हमने इकट्ठे होके इसको सीएम से पीएम
- 1:17:57बनाया और जानते थे कि यह लड़कियों से छेड़छाड़ करता है।
- 1:18:05नहीं जाने कितनी स्त्रियों को इसमें छेड़छाड़ समितियों कभी कहते
- 1:18:14कंगना को बुला लेता। पता नहीं क्या करता हमको अचार
- 1:18:18डालना होता है, कंगना का अचार डालना होता है क्या?
- 1:18:24जो करना होता है तुम्हे भी पता है मुझे भी पता है मैं कोई मोदी जैसा
- 1:18:32भगोड़ा तो हूँ नहीं कोई ज़रा देखो कहता है विकास कर दो, मैंने कहा
- 1:18:41भाई तुम देशवासी हो, इसकी बातों पे मत जाना।
- 1:18:45विकास जब घर में ही विकास को नहीं पैदा कर पाया तो देश में विकास
- 1:18:51कहाँ पैदा कर देगा? तुम में इतनी अकल नहीं है
- 1:18:54मंदबुद्धि हो क्या? लेकिन मंदबुद्धि का ये अंधबुद्धि
- 1:19:01जब। तुम थोड़े लक्षण देख लिया करो
- 1:19:04भगवान कृष्ण कहते हैं लक्षण देख लिया करो अमानितम दंभितम हिंसा
- 1:19:09शांति राजवं आचार्य को पासनम सौचम सैरम आत्तम विनकर लक्षण देख लिया
- 1:19:16करो। जब छेड़छाड़ करता है गुजरात में
- 1:19:19तो यहाँ आकर क्या ये फूल बाटेगा? यहाँ आकर गंदगी खिलारे और देखो
- 1:19:26खिलारे एपस्टोन कांड खोलने में भगोड़ा भाग जाता है यहाँ मुल्क
- 1:19:34में जब भी कोई ऐसी कांड होनी होती है, यह बाहर होता है, इसे पता है
- 1:19:41दुनिया मुझे छोड़ेगी नहीं। फिर यहाँ से झोला उठा के जाने
- 1:19:44थोड़ी देखे, पहले ही निकल लो। जहाज साथ में ही है ही वहीं रख
- 1:19:51लेंगे अपना टापू वगैरह खरीद लिए हैं और मुल्कों की इसलिए सैर करता
- 1:19:57रहता है तो बहुत से मकान। मुसलमान हो, हिंदू हो, कोई फर्क
- 1:20:04नहीं से कोई फर्क नहीं, वहाँ रह लेगा।
- 1:20:06इसके मकान वकों बहुत खरीद लिए होंगे, इसकी फिक्र मत करो।
- 1:20:15तुम देखो कभी भी कोई ऐसा कांड हुआ, ये यहाँ मिला बाहर।
- 1:20:22सदा बाहर होता है, क्यों डरपोक है?
- 1:20:26पता है मेरी पोल खुलेगी और मैं कहता हूँ देखिये हमें शादी तुम
- 1:20:31कबीरदार आदमी हो ये तो रांड चुंड मुंड है।
- 1:20:41जिसने अपनी ही घरवाली को जीते जी विधवा के समान कर दिया हो, वह
- 1:20:49किसी को क्या देवाल है तुम सोच सकते हो भला तो व्यक्ति भला ही
- 1:20:56करेगा समझ का? त्याग के नाम पर आपदा को अवसर में
- 1:21:00डाल लेना यह शैतानियत की निशानी है, इंसानियत की नहीं।
- 1:21:11जब तुम्हें पता था यह बदमाश एक नंबर है और लड़कियों से छेड़छाड़
- 1:21:15करना। इसका शौक है इनकी धर्मपत्नी भी
- 1:21:20कहती है वो बेचारी मासूम मोदी दे लारे ब्याह भी ग्वारे क्या ब्याह
- 1:21:33किया जब सात फेरे? में किया हुआ वायदा एक भी नहीं
- 1:21:37पाया। इसलिए मैं कहता हूँ रुंड मुंड
- 1:21:42चुंड ये योगी आदित्यनाथ हो या ऐसा ऐसा आरएसएस के रुंड मुंड चुंड ही
- 1:21:47होते हैं। इन्हें दाल चीनी।
- 1:21:53नमक तेल आटा इनका भाव क्या पता लगेगा जब ले के ही नहीं आना पड़ता
- 1:21:57रोंड मुंड चंड है? भिक्षा पत्र में मांग लेंगे, बस
- 1:22:03खा लेंगे और मांग लेने के नाम पे शरारतें करते हैं, धनी लोगों के
- 1:22:08पास पैसा जमा कर देते हैं, वो इनकी पूंजी है।
- 1:22:11जितना मांग लेते हैं, मिल जाता है।
- 1:22:15कहते हैं हमें जनता ने चुना, फिर जनता ने चुना तो 10,000
- 1:22:201,25,00,000 बिहारी स्त्रियों को 10 एक ₹1,00,000 10 या ₹10,000
- 1:22:29क्यों दिया गया? जनता ने वोट डाला या पैसे ने वोट
- 1:22:35डाला, गरीबी ने वोट डलवाया, गरीबी ने 10,000 तुम दिए थे और गरीब को
- 1:22:45तो शुरू से ही समझाया गया है अगर सरकार मुफ्त में।
- 1:22:49तेल बांटती हो तो कोई पात्र ना हो तो जूती में डलवा लेना मुस्तगा
- 1:22:55माल छोड़ना मत ऐसी जनता का रसूख है तुमने भूखे पहले कर दिए,
- 1:23:02भिक्षा पात्र हाथ में ही है, अब तुम्हें पता है सब बिकाऊ माल है।
- 1:23:08बिकाऊ उम्र है तो खरीद लो और खरीदने के बल पे सब खरीद लिए
- 1:23:15जाएंगे लेकिन भ्रांति में हो। तुम सब कहाँ खरीदे जाते हैं?
- 1:23:29जीस मालिक का है वो कहाँ खरीदने देता है?
- 1:23:34वह अपने वक्त पर धर्म से घरा देगा, कोई नहीं मारेगा ऐसे पापी
- 1:23:41पुरुष को मारता भी कौन है सत्त पुरुष को ही लोग मार के जाते हैं,
- 1:23:47उनसे ही आपत्ति होती है। अब मेरे जैसों को ही आपत्ति का
- 1:23:51कारण बनेंगे। जो सत्य बोलेंगे उसी को मारोगे
- 1:23:55तुम क्योंकि झूठ को उगाड़ देते हैं हम और तुम से जबरदस्त नहीं
- 1:24:02होता रण मुंड चुंड इन लोगों को कभी भी।
- 1:24:07तो अमित शाह से मैं कहूँगा देखो तुम कबीलदार हो इन चुंड मुंड रंड
- 1:24:15लोगों के बीच में तुम अपने आपको निकाल लो बाहर।
- 1:24:25पता नहीं कब का हर वर्ष गया और फिर दुनिया ये जनता जब देखेगी।
- 1:24:35पोल उखड़ गई, सब झूठ था, गुब्बारा था, फूल गया था लेकिन फूला था
- 1:24:42अपने दम पे नहीं, फुटबॉल की तरह नहीं।
- 1:24:48ठोस नहीं था। हवा के कारण पूरा था, मात्र हवा
- 1:24:53थी। जिसने फुला दिया वो हवा निकल गई,
- 1:24:59इसलिए मैं कहता हूँ इन्हें भागने मत देना तो ये भागने की पहले ही
- 1:25:03चेष्टा। चेष्टा के भाग ही जाते हैं।
- 1:25:06पूछ तो सकते नहीं हम सीधा सा जवाब में हम तो चुने हुए प्रतिनिधि
- 1:25:14कहाँ चुने भाई? लोगों ने चुना कि 10,000 नहीं
- 1:25:18चुना। लोगों ने चुना कि 10,000 ने चुना
- 1:25:23और 10,000 ने चुना कि अडानी ने चुना क्योंकि वो 10,000 अडानी ने
- 1:25:29दिए और अडानी ने क्यों दिए? क्योंकि 1200 एकड़ जमीन बिहार के
- 1:25:35पास ₹1 1 साल के। फटी पाई दे दी क्या बात भाई यहाँ
- 1:25:44कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जो एक रूपया नहीं दे सकता, दो रूपया नहीं दे
- 1:25:48सकता, 100 रूपया देने को तैयार में बैठा हूँ मुझे दे दो अनीता।
- 1:26:01छीन तो हमले छीनेंगे, ऐसे नहीं, हिंसा से नहीं।
- 1:26:08हिंसा तो एक बूंद भी खून की अगर बह गयी तो फिर हमारी क्रांति क्या
- 1:26:13हुई? बिलकुल खोल नहीं बहेगा और
- 1:26:17तुम्हारी? ये श्वेत जुल्फों वाले इनका नाम
- 1:26:20भूल जाता हूँ मैं बार बार नाम ही अव्वल से है बताइए श्वेत जुल्फों
- 1:26:29वाले, ताली बजाते फिरेंगे, ले दिए हमें आजादी बिना खड़ग हो गया ढाल
- 1:26:34मैंने कहा फिर उठाई कहाँ भाई जिसने उठाई।
- 1:26:38उसने तो आठ बार माफी मांग के भारत के वीरों का मनोबल करा दिया तो
- 1:26:46भारत के लोगों की गरिमा गिर गई। इमोशन जो थे भीतर के वो गिर गए जब
- 1:26:53कमांडर ने ही समर्पण कर दिया। तो जो पीछे लगने वाली भीड़ है वो
- 1:27:01तो समर्पण कर ही देगी सिपाहियों में तो उसमें तो कमेंटर देखना
- 1:27:06होता है, क्या आज्ञा देता है? कमेंटर कहते है समर्पण कर दो
- 1:27:11सरेंडर तो सारे पाकिस्तानियों ने सरेंडर कर दिया।
- 1:27:16और इंदिरा गाँधी के मार्शल फील्ड फील्ड मार्शल मान किसान ने जगजीत
- 1:27:23संगरोणा ने 93,000 पाकिस्तानी फौजियों को कैद कर लिया और यहाँ
- 1:27:31हमारे यहाँ कैद रहे शाम को। कमी उसने भी नहीं छोड़ी।
- 1:27:38ऐसे मलाई लगा लगा के उसने पाकिस्तान को शाम को रेडियो पर
- 1:27:43प्रसारित हो। मैं मोहम्मद यूनुस खान बाप का नाम
- 1:27:49मोहम्मद अली खान यहाँ का बाशिंदा है।
- 1:27:57मेरी ख्वा तीन से बलिदान से कह देना मैं कुशल हूँ, खैरियत से
- 1:28:04हूँ? मेरी तरफ से कोई फिक्र ना करे,
- 1:28:13ऐसा मजाक उड़ाया उसने। वाकई ही शेर दिल निकली वो और हम
- 1:28:21बच्चे थे और ऐसी बातें अच्छी लगती थी तो हम शाम को यह जरूर सुनते
- 1:28:28थे। 10 पांच लोग रोज़ और देखिए 93,000
- 1:28:34कितने दिनों में पूरे हो गए, भले ही घर से खिलाना पड़ गया।
- 1:28:38एक बात तो तय हो गयी जो पाकिस्तान कहता था कि भूखे मर जाएंगे ये उस
- 1:28:45पाकिस्तान को ये गलतफहमी निकल गई। कि खुद क्या भूखे मरेंगे,
- 1:28:49तुम्हारे फौजियों को भी बिरियानी खिला रहे हैं, देख लो यह भ्रम हटा
- 1:28:57दिया इंदिरा ने ठीक है, कुछ कुकर्म भी होते हैं, सुकर्म भी
- 1:29:06होते हैं। कभी गाड़ी एक पांव पे नहीं चलती,
- 1:29:11दोनों ही होते हैं। तुम ऐसी बातें कहते हो कि बाबा अब
- 1:29:18प्रश्न आया है, इलाज क्या करेंगे? क्योंकि हम वोट डालेंगे अगर पैसा
- 1:29:24नहीं भी लेंगे। उनका तर्क ठीक है।
- 1:29:28पैसा ले लिया। बाबा बिलकुल ले लिया, क्यों ले
- 1:29:30लिया? क्योंकि अगर नहीं भी लेंगे तो भी
- 1:29:34जी तो ये जाएंगे आएगा तो मोदी बिलकुल ठीक है तो हमने बाबा पीसा
- 1:29:40ले लिया। मैंने पूछा बिहार की एक शिक्षा से
- 1:29:43तुमने पीसा क्यों लिया? कहती वैसे तो हमने मांगा नहीं था
- 1:29:481,25,00,000 स्त्रियों के खाते में 10,000 रूपया था तो हम क्या
- 1:29:54ना कहें, मुफ्त का माल है रखना पड़ा वो रखना पड़ा तो ये सौगंध
- 1:29:59उठा गए कि देखो अब नमक खाया है हैरान।
- 1:30:04अब तुम नमक हराम मत बन जाना तो ये बात तो हिंदुस्तानी अपने आप को सब
- 1:30:10कुछ बर्दाश्त कर लेगा, नमक हराम नहीं बर्दाश्त करेगा।
- 1:30:13हिंदुस्तान के लोग ऐसे हैं और इसे नब्ज़ पक ले कि देखो नमक हराम मत
- 1:30:21बन जाना। तो कोई भी नमक आराम नहीं बना।
- 1:30:24सही जीते है लेकिन जीते है अडानी के पैसे से जाने मोदी के पैसे से
- 1:30:32ये पैसा जो अडानी के पास है, इसके ऊपर जेपीसी बढ़ानी चाहिए।
- 1:30:37व्हेदर इट इस ऑफ अडानी ऑर इट इस ऑफ मोदी?
- 1:30:43नहीं, जेपीसी तो सभी चीजें पर बैठानी होगी और हम बैठाएंगे भाई
- 1:30:48सोहराबुद्दीन केस, जस्टिस लोया कांड और जीतने भी कांड हैं क्या?
- 1:30:54क्या गण हो कहाँ तक नाम? गिनवाए सभी ने हमको लोटा है नाम
- 1:31:09बदलने से क्या होता है? नाम तो बदले शिव बटालवी ने, मैं
- 1:31:17दर्दनों का वाक है बैठा। दर्द का नाम उसने का बर कर दिया
- 1:31:26ना मैं दर्दनों का वाक्य बैठा रब न रख देता।
- 1:31:34पीड़ा, पीड़ा, दर्द को कहते। भीतर की दुख को मैं दर्द नु कबा
- 1:31:43के बैठा रब न रख देता पीड़ा दा की पुछतियों हाल फकीरा दा अगर ऐसा ही
- 1:31:54करना है नाम तो फिर ऐसा करो। विकास का नाम ही विकास विनाश रख
- 1:32:00दो, विकास का नाम विनाश रख दो, हमने तो विकास कहा था, हमने तो
- 1:32:07विनाश कहा, अच्छे दिनों का नाम बुरे दिन रख दो।
- 1:32:16तुम कहते हो देशभक्त हैं, अगर देशभक्त हो वास्तव में तो एक छोटी
- 1:32:22सी उदाहरण दे दूँ, देशवासियों, सुनोगे?
- 1:32:29अगर वास्तव में देशभक्त होते तो इंडियन रेलवेज की जगह अडानी
- 1:32:34रेलवेज़ न लिखा होता। अब देख लो किसके भक्तों इंडियन
- 1:32:41रेलवेज की जगह इंडिया इंडिया से प्यार करते होते, तो इंडियन
- 1:32:45रेलवेज को अडानी रेलवेज में क्यों बदलते?
- 1:32:48यह देशप्रेम की सूचना है या अडानी?
- 1:32:52प्रेम की सूचना है, बस इतना कम ही है।
- 1:32:56एक लक्षण ही बहुत होता है बर्बाद गुलस्ता करने को बस एक ही उल्लू
- 1:33:10काफी है हर्षा पे उल्लू बैठा है, अंजाम गुलस्ता क्या होगा?
- 1:33:21क्या होगा? खुद भी मरेंगे, हम तो डूबे ही हैं
- 1:33:27सनम, लड़कियों को छेड़ते ही रहेंगे।
- 1:33:31वहाँ कहते हैं, एपिस्टीन कांड में भी जनाब का नाम था कोई पूरी पूरी
- 1:33:35साहब है। ऐसे ही नंग मलंग।
- 1:33:38व्यक्तियों को दुष्ट लोगों को अपनी भर्ती कर लेते हैं, न रख
- 1:33:44देता रब न रख देता बेड़ांदा हत्यारों को तुम बहादुर कहते हो।
- 1:33:58वीर सावरकर कौन मानेगा? आने वाली घड़ियाँ आने वाली
- 1:34:07पीढ़ियाँ इस बात पर हैरानी प्रकट करेंगी कि ऐसे।
- 1:34:13विकृत मानसिकता के लोग कभी भारत में पैदा हुए जो नाम बदल कर ये
- 1:34:21चाहा कि विश्व का नाम अमृत रख दो और विश्व में ला दो और कहो नहीं
- 1:34:27नहीं अमृत बांटा है मरे हो तो अपने भाग्य से मरे हो।
- 1:34:33हमारे अमृत पीने से थोड़ी मरे हो, अमृत काल चल रहा है भाई और विस्को
- 1:34:41अमृत का नाम दे दिया है रब न रख देता पीड़ादा कियो खुश देओ।
- 1:34:49नाम। हाल फुकीरंदा साडे नदियों बिछड़े
- 1:34:55नीरंदा।