Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Jan 25 - SHIV SUTRA जरूरतों और वासनाओं को कम करते जाओ! मानवता के लिए खास उपदेश! How to Live Life?
Transcript
- 0:19आज प्रश्न भी कई हैं और कई प्रकार के प्रश्न भी हैं।
- 0:33शुरू करते हैं। हम मुख्य प्रश्न से शिव सूत्र 13
- 0:40का श्लोक 19/5 जरूरतों वासनाओं को कम करते जाओ, जरूरतों वासनाओं को
- 0:58कम करते जाओ, वहाँ तक जाओ जहाँ वासनाओं और जरूरतें कम से कम हो
- 1:07जाए। और फिर वहाँ पहुँच जाओ, जहाँ
- 1:13वासनाएँ और जरूरतें दोनों समाप्त हो जाती हैं बड़ा शानदार प्रश्न।
- 1:21है। शिव सूत्र का क्रांतिकारी।
- 1:29सूत्र उससे पहले छोटे छोटे एक आध क्वेश्चन ले लेते हैं।
- 1:41किसी मित्र ने पूछा है अमेरिका से?
- 1:48बाबा हम क्या करें? ट्रंप जीत गए हैं और इन्होंने जो
- 1:59नीतियां बनाई हैं, अब हमें वापस जाना पड़ेगा।
- 2:08आप इस सारे प्रकरण को थोड़े से शब्दों में हमारे लिए कैसे
- 2:14व्याख्याय कर सकोगे? एक प्रश्न तो ये है।
- 2:24साथ साथ मैं इसका जवाब भी देता रहता हूँ।
- 2:28फिर मूल श्लोक प्राण पूछा है हम क्या करें?
- 2:42तुम वापस आ जाओ क्यों क्योंकि फिर तुम्हें बुलाया जाएगा मतलब मतलब।
- 2:57फिर काम आदमियों को करना पड़ेगा। हसो मत।
- 3:06तुम अपनी जीवन जानते हो, तुम किस तरह वहाँ रोज़ी रोटी कमाते हो।
- 3:13मैंने शब्द बोला कि काम काम आदमियों को करना पड़ेगा।
- 3:22तो क्या अब आदमी काम नहीं करते? तुम अपने आप को आदमी समझते हो दिन
- 3:32भर रात तुम झूठे रहते हो दूसरे देश की तरक्की के लिए।
- 3:40और वो देश तुम्हें बाहर निकाल देता है।
- 3:42निकलो अगर थोड़ी सी भी आया बाकी है ना तो वापस आ जाओ, इस मूर्ख को
- 3:51पता नहीं है ये अमेरिका की तरक्की के अंदर।
- 3:58सदा से आप जैसे लोगों का योगदान रहा है।
- 4:03जब काम करना पड़ा न आदमियों को तो इनकी अकल ठिकाने आ जाएगा।
- 4:10फिर ये आपको बुलाया करेंगे, मिन्नत कर करके बुलाया करेंगे
- 4:16ज़रा ये भी तुम्हे शब्द? अगर कोई मुल्क किसी मूर्ख को
- 4:24राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री चुन ले तो ये गलती हो जाती।
- 4:31है अक्सर हो जाती है। मुझे पहले पहले जब ट्रंप की फोटो
- 4:40दिखाइए, मुझे तो पता नहीं था क्योंकि मैं तो एक कमरे की चार
- 4:48दीवारी में हूँ, अपने आपको कैद कर रखा।
- 4:52है। जी कहने लगा बाबा देख रहे है ये
- 5:01कौन है, आप इसे पहचानते है? शान चकल से आप फिगर से ओरा से बता
- 5:12देते हो तो ज़रा देखना जब कौन है। मैंने कहा यह व्यक्ति ऐसा लगता है
- 5:25इसकी फिगर से ये या तो पागल है या जेल से भागा हुआ।
- 5:33है। या जेल में जाने की तैयारी कर रहा
- 5:38है। तीनों में से कोई बात है आप ज़रा
- 5:42कोर्स इसका मुखड़ा देखना महोदय ट्रम्प का समझदारी जैसी कोई बात
- 5:50नहीं लगेंगी। मैं क्षमा भी नहीं मांगूंगा,
- 5:58क्योंकि क्षमा उस चीज़ के लिए मांगी जाती है जिसमें रत्ती भर भी
- 6:05गुंजाइश होती है गलती की मैं जहाँ गलत नहीं हूँ।
- 6:11100% रही। यह मूर्ख राष्ट्रपति है।
- 6:19अब देश ने चुन दिया है तो चुन दिया है, तुम क्या कर सकते हो तुम
- 6:26वापस आ जाओ। जननी और जन्मभूमि तो स्वर्ग से भी
- 6:34महान है अपनी जन्मभूमि में आ। जाओ यही आज का सूत्र कहता है।
- 6:50जरूरतों और वासनाओं को कम करते जाओ।
- 6:56ये आध्यात्मिक सूत्र है। शिवसूत्र जरूरतों और वासनाओं को
- 7:03कम करते जाओ, कम करते करते। इतनी कम कर लो कि बस थोड़ी सी रह
- 7:14जाए और फिर वहीं पहुँच जाओ जहाँ ना तो कोई जरूरत है ना कोई बात।
- 7:21नहीं। ये बड़ा गहरा सूत्र है इसकी
- 7:26व्याख्या करते करते। मैं आपके प्रश्नों का जवाब देता
- 7:29रहूँगा। हँसी बो खेली।
- 7:35बो लरी बोतियाँ ये बाबा गोरखनाथ का इतना सुंदर शब्द।
- 7:47हँसी वो खेली वो लरी वो ध्यान हँसेंगे खेलेंगे और ध्यान भी करते
- 7:54जाएंगे। ज़िन्दगी इतनी ही मजेदार होनी
- 7:58चाहिए। पूछा है मित्र ने धेया प्रशात?
- 8:10हम क्या करें बाबा तुम वापस आ जाओ जब आदमियों को काम करना पड़ा, मैं
- 8:20तुम्हें आदमी नहीं समझता। क्योंकि मुझे ये समझ नहीं आया आज
- 8:27तक और तुम्हें सच कहता हूँ। मुझे ये समझ नहीं आया कि लोगों का
- 8:34अमेरिका जाती क्यों है? आप जाने के लालायित हो।
- 8:41जीभ में से लारें गिरती हैं। लेकिन मुझे समझ ही नहीं आया कि
- 8:48कोई अमेरिका में जाता क्यों है? मेरा सारा परिवार वहाँ बैठा है,
- 8:56लेकिन मुझे आज तक नहीं समझाया कि वहाँ लोग जाते क्या हैं?
- 9:05मैं बताऊँ वहाँ लोग काम करने को जाते हैं यहाँ पर काम है, नहीं जब
- 9:16तुम यहाँ आ जाओगे ना तो यहाँ अपना काम खुद खोज लेना।
- 9:22हर जगह काम मिल जाता है। खोजने वाला शरीर इस देश को और
- 9:30ट्रंप कहता है मैं अमेरिका को फिर से महान बनाऊंगा।
- 9:36अमेरिका का भी महान था। अमेरिका कभी महान था जो कभी गिर
- 9:49गया हो और फिर से जो महान बना हो ऐसा कभी नहीं।
- 9:54हुआ अमेरिका जनमान्त हुआ है, मेरी बात को ध्यान से समझ।
- 10:01लेकिन महान कभी नहीं हुआ और भारत, हिंदुस्तान धनहीन तो हुआ गरीब तो
- 10:15हुआ लेकिन महान था। और कभी महान हो जाएगा तो अगर
- 10:25हमारे उच्चतम। लोग उच्च पदवी पर बैठे हुए लोग।
- 10:34इसे विश्वगुरु बनाना चाहते हैं तो सोच गलत नहीं है।
- 10:39काम गलत हूँ, ये बात अलग है, सोच गलत नहीं है।
- 10:45हम विश्व गुरु थे। हम सोने की चिड़िया थे।
- 10:50कभी किसी देश को हमारे सिवा सोने की चिड़िया का खिताब मिला है,
- 10:57इतिहास में नहीं मिला ना? बहुत पुराने मुल्कों में इंडिया
- 11:02है, ईजिप्ट है, ईरान है, चाइना है, चाइना को नेता ऐसे मिले और
- 11:13लोग ऐसे मिले और जरूरतें थी, भुखमरी थी।
- 11:20उन लोगों ने मेहनत की और मेहनत का परिणाम है जो आज चाइना 18
- 11:32ट्रिलियन डॉटर की अर्थव्यवस्था है।
- 11:39हिंदुस्तान कहाँ गच्चा खा गया हिंदुस्तान मूर्खताओं में
- 11:44मूर्खताओं में गच्चा खा गया, जहाँ के सीजेआई कागज के गणेश की
- 11:53प्रतिमा की मूर्ति की पूजा कर रहे।
- 11:56हैं। वहाँ अक्ल घास चरने चली गई, यह
- 12:03साफ हो जाता। है।
- 12:09चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट इनके कंधों के ऊपर।
- 12:16न्याय करने का भार है, दायित्व है और सरे आम लोगों को दिखाते हैं
- 12:24पत्थर की या कागज़ की गणेश की मूर्ति की आरती उतारते हुए सपरवार
- 12:34तो वहाँ साफ हो जाता है। कि इनकी अकल घास छरने गई है और
- 12:44इनको अगर हमने कुर्सी पे बिठाया तो इनमें अकल थी नहीं।
- 12:54उनसे लोग पूछ लेते हैं। देश खुशहाल हो जाए, सोने की
- 13:02चिड़िया बन जाए सूत्र क्या है आपके?
- 13:04पास सूत्र तो मैं बहुत वार बोल चुका हूँ धर्म नाम के इस पचिड़े
- 13:16को। संविधान में समाप्त कर दो एक धर्म
- 13:22है जिसने हुलिया बिगाड़ दिया हो। इस प्यारे प्यारे भारत।
- 13:28का इस धर्म नाम के मल ने। हिंदुस्तान का हुल्ल्य भगा दिया
- 13:41और कुछ किताबें ऐसी जिन्होंने मानव और मानव के विषय में खाई
- 13:49पैदा कर। दिया।
- 13:54मन्नू स्मिथ उच्च नीच तो होता है। जैसे सवस्थ आदमी होता है और बीमार
- 14:04होता है, पूर्ण अंगों के साथ व्यक्ति पैदा होता है और अपाहिज
- 14:09पैदा। होता है।
- 14:11वैसे कम बुद्धि और कम ज्यादा बुद्धि वाले भी पैदा।
- 14:14होते हैं। यह समानता असमानता प्रकृति
- 14:20प्रदत्त है, लेकिन मुश्किल वहाँ पेश आती है जहाँ सवस्थ।
- 14:30लोगों में बंटवारा हो जाता है। एक कहे मैं श्रेष्ठ हूँ और दूसरे
- 14:39को कहे कि तुम श्रेष्ठ हो, तुम नीच हो, तुम पांव में बैठे रहो,
- 14:49आदमी और से कहे। कि तुम क्षुद्र हो, जबकि स्त्री
- 14:57के बिना यह संसार नहीं चलता। भगवान शिव का अर्ध नारीश्वर रूप
- 15:03देखना इस बात को इंगित करता है कि न आदमी के बिना, न इत्री के बिना।
- 15:11संसार नहीं चलेगा। दोनों ही जरूरी हैं और एक पक्ष ने
- 15:19दूसरे पक्ष को कमजोर और नीच की उपाधि देने में कोई कसरखोर बाकी
- 15:30नहीं छोड़ी। व्यक्ति व्यक्ति को पांव की जूती
- 15:38सुन रहा है। मैं ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और
- 15:42तुम सुद्रा मैं पुरुष और तुम स्त्री।
- 15:50इन असमानताओं में देखिये मैंने पहले शब्द बोला कि प्रकृति
- 15:57प्रदत्त असमानताएं सहज हैं, उस सहजता का सम्मान होना चाहिए, अगर
- 16:06कोई व्यक्ति जन्मजात अपाहि जो हुआ।
- 16:10तो उसके साथ मृदुता का व्यवहार होना चाहिए, उसका रिजर्वेशन भी
- 16:17होना चाहिए, उसको एक्स्ट्रा सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
- 16:23जो चल नहीं सकता उसके लिए व्हीलचेयर तो उपलब्ध करवानी
- 16:27पड़ेगी। ये प्रकृति प्रदत्त असमानता है
- 16:34कोई काम बुद्धि वाला जम गया तो उसको वैसा ही काम दे दो भाई
- 16:40चपरासी लगा दो, कोई ज्यादा बुद्धि वाला जन्म गया अल्बर्ट अस्टिन तो
- 16:45उसको वही काम दे दो रिसर्च। ये प्रकृति प्रदत्त चीजें हैं।
- 16:52इसमें मनुष्य का कोई योगदान है जैसी जैसी बुद्धि और शरीर कईयों
- 16:59के शरीर क्रिस्टन होते हैं, कईयों के शरीर सुडोल होते हैं तो सुडोल
- 17:04व्यक्तियों को शारीरिक काम दे दो। और कृषक तनु व्यक्तियों को थोड़ा
- 17:11सा कम प्रश्रम मुकाबला काम दे दो। ये थी सही व्यवस्था और कभी अगर
- 17:20ऐसी व्यवस्था आ जाए इस संसार। में तो वो।
- 17:25वो होगा रामराज। उसको कहना चाहिए रामराज जो
- 17:37प्रकृति का बेचारा मरा हुआ है, उसके साथ आम व्यक्ति जैसा व्यवहार
- 17:46गलत। स्त्री के साथ पुरुष जैसा व्यवहार
- 17:50करते हैं क्योंकि स्त्री की शारीरिक संगरचना वैसी नहीं है
- 17:56जैसे पृष की है। स्त्री महीने में 7 दिन बीमार
- 18:02रहती है या कमजोर रहती है या बीमार रहती।
- 18:06है। लेकिन पुरुष के साथ ऐसा नहीं
- 18:09होता। पुरुष तो पूरा महीना पूरा साल
- 18:16तंदुरुस्त रहता है। तो स्त्री की बनावट ये है प्रकृति
- 18:22मेरी बातों को समझाना, अच्छी तरह से मैं बड़ा खोल खोल के समझा रहा
- 18:26हूँ। प्रकृति प्रदत्त असमानताएं उनके
- 18:36साथ बर्ताव मृदुता से होना चाहिए, उनको एक्स्ट्रा फसिलटीज़ मिलनी
- 18:46चाहिए। अब कोई लकड़ा है नहीं चल सकता,
- 18:49उसको बैसाखी देनी पड़ेगी, कोई बिलकुल नहीं चल सकता, उसको
- 18:54व्हीलचेयर देनी पड़ेगी। स्त्री को उसके ढंक के पुरुष को
- 19:00उसके ढंक के काम देना पड़ेगा। बलवान को उसके ढंके।
- 19:05और कमजोर कोस के ढंके जो शक्तिशाली मस्तिष्क रखता है, उसको
- 19:11वही रिसर्च के और जो कमजोर मस्तिष्क रखता है उसको वही भाई
- 19:16पानी पुनी पीला दो। और क्या है?
- 19:18लेकिन जीवनयापन सभी का होना चाहिए।
- 19:24ऐसी होनी चाहिए व्यवस्था लेकिन व्यवस्था को हमने बिगाड़ दिया।
- 19:33अगर प्रकृति प्रदत्त देखिए इसको ईश्वर प्रदत्त मत कहिए यहाँ गच्चा
- 19:40खा गए हम हिंदुस्तानी हमने प्रकृति प्रदत्त चीजों को ईश्वर
- 19:46प्रदत्त बना दिया ईश्वर ने पदार्थ की संरचना करके वह साक्षी होके
- 19:55बैठ। गया।
- 19:59काम चलाते हैं नियम प्रकृति। का?
- 20:03प्रकृति भी बनाई परमात्मा ने अब समते जाना है इस बात को प्रकृति
- 20:10नियमों के अधीन चलती है और परमात्मा नियमों में नहीं चलता।
- 20:14परमात्मा सिर्फ साक्षी। है।
- 20:20एनर्जी आती है वहीं से। बनाता है वह नियम बनाए, उसने
- 20:30पदार्थ बनाया उसने प्रकृति ने निर्माण कर दिया कमजोर का और
- 20:38प्रकृति ने निर्माण कर दिया बलवान का।
- 20:41तो पहली बात तो ये समझ लेना कि बलवान व्यक्ति का दायित्व बनता।
- 20:46है। कि वह निर्बल व्यक्ति की सहायता
- 20:50करे गिर गया है कोई वृद्ध, कोई अशक्त, कोई अपाहिज।
- 21:00तो पास से गुज़रने वाला बलवान व्यक्ति का दायित्व बनता है।
- 21:05बाद में कोई और काम करे, पहले उसको उठाए फिर अपने काम पे जाए
- 21:15ऐसा संसार चाहिए था, आज क्या हो गया?
- 21:20भेद धीरे धीरे बढ़ते गए, धीरे धीरे बढ़ते गए।
- 21:28आज क्या हुआ एक व्यक्ति इतना अमीर हो गया।
- 21:40कि वो अपने संदूकों को भर के रखता है।
- 21:43संदूक छोड़ो कमरों को भर के रखता। है।
- 21:48पैसों को कमरे में भर के रखता। है।
- 21:52और एक इतना कमज़ोर है अभी। जनवरी के पहले सप्ताह की बात है।
- 22:06अक्सर मेरी जो टीम है तो थोड़ी सी मृदु कोमल हल्दर।
- 22:17उनको मैंने काम दे रखा है कि तुम बस स्टैंड पर जाओ, रेलवे स्टेशन
- 22:21पर जाओ, वहाँ देखो कोई गरीब आदमी जिसके सिर्फ छत नहीं है बिना कंबल
- 22:29के। सोया पड़ा।
- 22:34है। उसके ऊपर कम्बल डाल के आओ रजाई
- 22:39डाल के आओ जिनके पास है उन्हें काम सौंप देता हूँ और मुझे पता है
- 22:45किसके पास है तो वो जाते हैं। हर साल यही काम करते हैं सुबह
- 22:53पशुओं को। पंछियों को कीड़ों को यथाशक्ति
- 23:00थोड़ा थोड़ा डालते रहो, तुम्हारे थोड़े से घटता नहीं, उनका काम चल
- 23:06जाता। है।
- 23:10ऐसे ही चलता है संसार। और ऐसे पड़ती है प्रकृति से प्रेम
- 23:16की व्यवस्था, ये सब प्राकृतिक प्रणीय हैं, ये बोल नहीं सकते,
- 23:22बता नहीं सकते। इन्हें भूख लगी है, इन्हें प्यास
- 23:27लगी है, इशारे जरूर कर सकते हैं। जिसका इशारा आप समझो या न समझो,
- 23:37भूख तो सभी को लगती है। इनको भोजन भी दो, पानी भी दो
- 23:41गर्मियों में तो रात को। वो व्यक्ति गए, उन्होंने कंबल डाल
- 23:52दिया जिसके पास समर्थ थी। रजाई की रजाई महंगी बहुत आती है,
- 24:00कम्बल ₹200 का आ जाता है, रजाई ₹1000 के आती है तो वो रजाई
- 24:05बांटने लगे? बांटते बांटते बांटते देर हो गई,
- 24:11सर्दी घनी थी, बहुत ठंडी थी उस दिन तो उन्होंने देखा एक आदमी
- 24:19सड़क के एन किनारे पर सोया। पड़ा।
- 24:25उन्होंने रजाई थी रजाई। डंक दी और चले गए आगे जिसके पास
- 24:32कंबल था, कंबल डाल रहा था, रजाई रजाई डाल रहा था और जब कंबल और
- 24:38रजाई बांट के वापस आए फिर उन्हें पता चला कि जीस व्यक्ति के ऊपर
- 24:44रजाई डाली गई। वह सर्दी से पहले ही मर चुका था।
- 24:51ये हाल है हमारे हिंदुस्तान का और सिर्फ हिंदुस्तान का ही नहीं,
- 25:01अमेरिका जैसे समृद्ध मुल्कों में भी ऐसा होता है।
- 25:05तुम ये मत समझना। वो समृद्ध है वहाँ ऐसा कुछ नहीं
- 25:08होता है वैसा भी होता है बस सिर्फ खबरें बाहर नहीं आती और वहाँ
- 25:12इक्का दुक्का होता है यहाँ प्रचुर मात्रा में होता है।
- 25:17एक व्यक्ति का घर का कमरा भरा पड़ा है।
- 25:22एक व्यक्ति भूख से मर रहा है। एक व्यक्ति के अलमारी में 50
- 25:30प्रकार के गर्म कपड़े पड़े हैं और एक आदमी ठंड से मर जाता है।
- 25:37ये भेद ये परमात्मा ने नहीं बनाया ये भेद।
- 25:43इंसान की पैदाइश है फिर जिन्होंने कमरे भर लिए, उन्होंने मीडिया
- 25:52खरीद लिया। मीडिया प्रचार करता है कि पिछले
- 25:57जन्म में इसने कोई पाप किया होगा तो ठंड से मर गया, कोई पाप नहीं
- 26:02किया। पाप किया होगा तो प्रकृति पर दत्त
- 26:07कमी आयेगी कोई लंगड़ा, लूला, अंधा ये है प्रकृति पर दत्त कोई
- 26:14मंदबुद्धि, कोई शरीर से विकार, कोई कमजोरी के से।
- 26:21यह प्रकृति प्रदत्त है, लेकिन भूख से मरण, सर्दी से मरण, छत के न
- 26:31होने से मरण, यह प्रकृति प्रदत्त नहीं है यह मानव प्रदत्त।
- 26:37है। तुमने बाँट लिया है, लेकिन बराबर
- 26:45नहीं। बराबर नहीं बाँटा तुमने किसी को
- 26:52ज्यादा यानी बंटवारा नहीं हुआ। छीना झपटी हुई है।
- 26:58दूसरे शब्दों में मैं कहूँ। अविश्वास पर आ जाओ संत मत के
- 27:08हिसाब से अगर चले ये तो मैंने संसार मत के हिसाब से आपको बताया
- 27:15कि आप वापस आ जाओ, यहाँ काम कर लो, काम ही तो वहाँ करना है।
- 27:19काम ही तो यहाँ करना है, वहाँ की रोटी कोई विशेषता नहीं रखती,
- 27:28बल्कि सच पूछो तो यहाँ जब अमेरिकन गेहूं आया था लाल रंग का।
- 27:37हमसे चलाया नहीं क्या? हुआ।
- 27:4266 में लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गई।
- 27:5065 में अनाज की कमी हो गई है। ये हमारे देश का इतिहास है, इसको
- 27:55गौर से सुन लें। बहुत शार्ट शब्दों में आपको
- 27:59बताऊँगा। ज़्यादा वक्त मेरे पास भी नहीं है
- 28:03और ज़्यादा वक्त आपका भी नहीं लूँगा।
- 28:06और यह मेरा मुद्दा भी नहीं है। लेकिन अब पूछ लिया है तो मैं
- 28:11थोड़ा सा इसको बता दूंगा तो 65 में यहाँ पर अमेरिकन गेहूं आया।
- 28:1964 में 27 मई को मृत्यु हो गई। मैं दोपहर को जा रहा था सड़क पर
- 28:28और तब टेलीविजन थे नहीं थे रेडियो था।
- 28:32रेडियो में से खबर आ रही थी कि हमारे।
- 28:38प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया है।
- 28:45चलते चलते सड़क के ऊपर मैंने खबर सुनी तो खबर उस दुकानदार ने ऊंची
- 28:50लगा दी थी कि सभी सुन सके। उसके बाद शास्त्री जी आए।
- 28:59खाने को अनाज नहीं था तब तो देश के पास नहीं था।
- 29:04आज देश के पास तो बहुत है, व्यक्तियों के पास नहीं है, जो
- 29:08भूखे मर जाते हैं। अमेरिका से हमें अनाज मंगाना
- 29:17पड़ा। और अमेरिका इतना नखरेबाज है, उसके
- 29:24अंदर दया धर्म जैसी कोई चीज़ नहीं है।
- 29:27मेरे भाई बहन यहाँ आते हैं, वो एक शब्द बोला करते हैं मेरे से वहाँ
- 29:34करीब 7080 मेंबर्स हैं। हमारे और यहाँ जब यहाँ से गए तो
- 29:40बड़ प्रेम थे उनकी भाषा में यहाँ लहू लाल है तो मैं पूछता हूँ तो
- 29:51बहनें कहती हैं, भाई कहते हैं भाई बात ये है।
- 29:56अमेरिका में जाकर खून सफेद हो जाता।
- 29:58है। बस इन दो अक्षरों से मैं समझ जाता
- 30:02हूँ खून सफेद हो जाता है, प्रेम नहीं रहता, यहाँ खून लाल होता।
- 30:11है। वहाँ सफ़ेद हो जाता है।
- 30:18इसी बात से मैं सब समझ लेता हूँ डॉडरों का क्या करोगे?
- 30:25न तो कोई सदा के लिए यहाँ रहता है और न जो कमाया वो साथ लेकर जाता
- 30:32है। फिर क्यों यहाँ नफरत के बीज बोके
- 30:36जाते हो न तो साथ जाता है तुम्हारे न तुम श्रद्धा के लिए
- 30:42यहाँ रह पाते हो फिर तुम एक दूसरे की गर्दन काटने पर लगे क्यों?
- 30:51फिर सिर्फ महज 1020 साल 50 साल राज़ करने के लिए तुम आपस में
- 30:56रडाते क्यों हो लोगों? को।
- 31:01कोई धर्म का नाम लेके कोई जाति का नाम लेके कोई धन और निर्धनता का
- 31:06नाम लेके अब यू। ये क्यों कहना पड़ा?
- 31:13एक शगुफा था ट्रंप का उसे पता था कमी वहाँ कोई नहीं मैं फिर से देश
- 31:22को महान बना। दूंगा।
- 31:25अब जो वोट डालने वाले हैं वो भी मूर्ख है।
- 31:29महानता कब ये ये सदा से ऐसा ही नीच रहा है?
- 31:37मेरी धृष्टता को क्षमा की जगा मैं सहज लफ़ाज़ बोल रहा।
- 31:45हूँ। किसी प्रकार के आवेश में नहीं।
- 31:50अमेरिका सदा से ही दूर तो मुल्क रहा।
- 31:53है। तुम्हें नहीं पता सब जरूरत की
- 31:59चीजें जब विदेशों से मंगाता। है।
- 32:03और सब विनाशक संयंत्र खुद बनाता है कि जिससे जीवन मिले वो तो हमें
- 32:11दे दो। कणक हमें दे दो, खाने पीने की
- 32:18चीजें हमें दे दो, लेकिन हथियार विनाशक यंत्र मैं दूंगा तुम्हें।
- 32:25यानी मारने का बंदोबस्त मैं करूँगा।
- 32:27दुनिया को ओपेन हाइमर ने परमाणु विस्फोट क्या किया कि उसने दुनिया
- 32:39के रातों की नींद छीन ली? किसी को डरा कर जीना कोई बहादुरी
- 32:48नहीं होता। एक प्रकार से यह कायरता का सबूत
- 32:54होता है या निर्दयता? का?
- 32:57दोनों में से एक है या तो वह व्यक्ति निर्दयी है या कायर।
- 33:04और तुम पूछते हो कि बाबा मैं क्या करूँ?
- 33:06मैं तुम्हें कहता हूँ तुम वापस आ जाओ, मैं जानता हूँ तुम कितनी
- 33:09मेहनत करते हो, मैं यहाँ से गए हुए लोगों को जानता हूँ।
- 33:14उसमें से मेरा परिवार भी है। जी तोड़ हार्ड तोड़ मेहनत करनी
- 33:20पड़ती है। मेरे भाई का पांव गाड़ी में चढ़ते
- 33:28हुए जब उसकी विंडो बंद होने लगी तो उसमें फंस गया तो सूज कर ऐसा
- 33:38हो गया। लेकिन उसके बावजूद भी उसे काम पर
- 33:43जाना पड़ा। ये कोई जीवन है?
- 33:50जो व्यक्ति दुख सुख में भी आराम नहीं कर पाता वो कोई जीवन समझते
- 33:57हो तुम उसको? तो मैंने ये शब्द तो प्रयोग किए।
- 34:03जब तुम काम करने वाले वहाँ से आ जाओगे तो भूल जाओ कि गोरे काम कर
- 34:10सकेंगे ये तुम्हें मैं भीतर की बात बताता हूँ।
- 34:17गोरे भागकर यहाँ इन देशों में आ जाएंगे गोरे मेहनत नहीं कर सकता
- 34:24मेहनत तो अमेरिका से जो बाहर के लोग हैं वो ही कर सकते हैं और
- 34:30उन्होंने ही अमेरिका को स्टैंड किया।
- 34:33उन्होंने ही अमेरिका को समृद्ध किया।
- 34:36अब इस मूर्ख को यह नहीं पता कि अमेरिका को जो महान तुम कहते हो,
- 34:43वह बना कैसे, महान तो है नहीं, वैसे अमीर है, सिर्फ धनपति
- 34:50सुविधाएं हैं, तो वो कैसे बना? वो बाहर के लोगों के परिश्रम से
- 34:56बना। बाहर के लोगों ने प्रश्न किया,
- 35:02तुम लोगों ने जाके प्रश्न किया तो अमेरिका आज यहाँ तुम वापस आ जाओ,
- 35:08इनका हाल देखना तुम 1 साल में इनकी भूतनी भूल जाएगी।
- 35:14ये कहते हैं तुम्हें निकालेंगे मैं कहता हूँ तुम कहो के हम
- 35:17निकलेंगे, नौकरियां अमेरिकन को देंगे दो फिर बाहर भी वो धोयेंगे
- 35:31काम भी वो करेंगे, उन्हें तो आदत है।
- 35:35के 7 दिन में वैसे भी वो 5 दिन काम करते हैं, 2 दिन मौज उड़ाते
- 35:40हैं और जो 5 दिन काम करते हैं वो भी ढ़ाई दिन ही करते हैं।
- 35:47वो काम धाम नहीं करते, काम के नाम पर वो आराम ही करते है।
- 35:53काम तो तुम लोग कर। जाओ।
- 35:56तुम देखो ज़रा थोड़ा सा मेरी बातों में सत्यता देखो।
- 36:01मैंने अच्छी तरह से अमेरिका को देखा है और उसके भीतर की बात को
- 36:06जान पहचान कर बोल रहा हूँ। सभी मुल्कों ने मिलकर।
- 36:12अमेरिका को सम्पन्न करती हूँ सम्पन्न हुआ है।
- 36:16सिर्फ महान नहीं हुआ महान बनना तो बहुत और बात होती।
- 36:21है। महानता क्या होती है इसका स्वाद
- 36:25अमेरिका आज तक नहीं चख सका। महानता चखि तो कुछ मुल्कों ने
- 36:30चखी। महानता चखी, हिंदुस्तान ने चखी,
- 36:36महानता चखी, चाइना ने चखी और समृद्ध भी हुआ और मान भी हुआ।
- 36:42ईरान ने चखी ईजिप्ट ने चखी युनान ने चखी, ये थे महान।
- 36:53ये तो कल के उठे हुए लोग जो आपने ही जाकर आबाद कर दिया उनके प्रयास
- 37:03से अमीर हुए हैं। सिर्फ महान नहीं हुए महान तो ये
- 37:08हो भी नहीं सकेंगे। क्योंकि जिनकी बेस कमजोर होती है
- 37:13ना उसके ऊपर बहु मझला इमारत खड़ी नहीं हो सकती।
- 37:20अमेरिका की नीम बहुत कमजोर है, उथली उथली सी है।
- 37:25जैसे हम 100। मझला इमारत की नीम दो तीन फुट की
- 37:28डालते हैं। लेकिन इन पुराने मुल्कों की
- 37:32ईजिप्ट है, ग्रीक है, हिंदुस्तान है, चाइना है, इनकी नींव बड़ी
- 37:43गहरी है, बहुत गहरी नीम है, इनके ऊपर कितनी मंजिलें इमारत डालते
- 37:49रहो। ढाते रहो डालते रहो महान ये हैं
- 37:54ये हुए हैं इन्होंने महानता का स्वाद चखा है अमेरिका में कभी आय
- 38:02तक महानता का स्वाद नहीं चखा। बता दो वैज्ञानिक पैदा हुए होंगे।
- 38:09महान व्यक्ति कोई पैदा नहीं हुआ महान तुम कहते कैसे हो ये सूत्र
- 38:18महानता की तरफ इशारा करता। है।
- 38:23इसीलिए मुझसे पूछो हो तो मैं कहता हूँ तुम वापस आ जाओ।
- 38:27वो तुम्हें भेजें ना भेजें वो तुम्हें डीपो करे ना करे, तुम खुद
- 38:32ही वापस आ जाओ, इनकी इनकी भूतनी भूल जाएगी।
- 38:38अब ये शब्द सुन लो, इनके अर्थ सुन लो तुम्हें समझ आ जाएगी इस मूर्ख
- 38:45बंदे के पीछे मत चलो। ये जानता नहीं मेरी नींव कितनी
- 38:49कमजोर है। तो मैं कह रहा था।
- 38:56कि जब पहली बार मैंने इसकी फोटो देखी, मैंने कहा या तो ये जेल से
- 39:01भाग गया या ये पागलखाने से भाग गया पागल है।
- 39:07या ये पागलखाने या जेलखाने में जाने की तैयारी कर रहा है।
- 39:11आप इसके चेहरे को बॉडी लैंगुएज को और को अच्छी तरह से देख लो।
- 39:18अमेरिका वासियों को इसका खौफ हो सकता है।
- 39:21हम लोगों को इनका कोई खौफ नहीं। हम वहाँ चालू होकर बोलेंगे, हम
- 39:32पूर्ण शक्ति से बोलेंगे और सत्य बोलेंगे।
- 39:36अमेरिका में महानता नाम की कोई चीज़ नहीं हुई आज तक।
- 39:42और अगर कभी अमेरिका महान् होगा तो तुम लोगों के कारण होगा।
- 39:49अब हम सूत्र बोलें, जरूरतों वासन को कम करते जाओ, वहाँ तक जाओ।
- 40:05जहाँ वासनय और जरूरतें कम से कम हो जाएं और फिर वहाँ पहुंचे जाओ
- 40:15जहाँ जरूरतें और वासनय दोनों ही ना बचें।
- 40:19ये शिव का सूत्र है अत्यंत प्यारा सूत्र है।
- 40:25ये हैं महानता के लक्षण जो व्यक्ति डिपेंड हो जाता है
- 40:32स्वावलम्बी जिसकी जरूरतें कम कर लीं जीस व्यक्ति ने वासनाओं पर
- 40:43लगाम लगा दी। जरूरतों को कम कर लिया।
- 40:47जरूरी नहीं है कि छे बार कपड़े बदलने किस किसने, कौनसे वेद ने
- 40:51कहा कि छे बार कपड़े बदलो और उससे व्यक्ति महान हो जाएगा।
- 40:58महान होने में छे बार कपड़े बदलना कोई जरूरी नहीं होता।
- 41:05सात बार साड़ियाँ बदलने से कोई महान नहीं होता, अमीर हो जाता है,
- 41:09ये ठीक फजूर खर्चीला हो जाता है। ये ठीक महंगी चीजें खाने से कोई
- 41:18महान नहीं होता। महंगी चीजें खाने से ये होता है
- 41:23कि वह। पैसे वाला है।
- 41:26बस इतना ही आइए हम सूत्र बोलें इस सूत्र को समझने से पहले एक छोटा
- 41:41सा काम करो। अपने बचपन में लौट जाओ।
- 41:52बचपन में लौटने से क्या होगा? बड़ी उम्र के सभी लोग कहते हैं
- 42:00बचपन बड़ा प्यारा था। क्यों तुम भी कहोगे कभी थोड़े से
- 42:10व्रत हो जाओगे तो तुम भी कहोगे बचपन बड़ा।
- 42:14प्यारा था। बचपन बड़ा प्यारा था उसको इस
- 42:24सूत्र के साथ कनेक्ट कर बचपन में जरूरतें कम थी।
- 42:36बचपन में वासनय नाममात्र थी। अब तुम्हें जानकर बड़ी हैरानी हो
- 42:44गई कि जरूरतें भी तुमने बढ़ाईं वासनाएँ भी तुमने बढ़ाईं मेरी
- 42:58बातों से आश्चर्यचकित मत हो। प्रोसपर्टी का सपना देखने और
- 43:06दिखाने वाले लोगों उनमें ऐसे ही लोग होते हैं।
- 43:13आई विल मेक अमेरिका ग्रेट अगेन आई विल मेक जर्मनी।
- 43:20ग्रेट अगेन हिटलर ने भी ये कहा था ये शब्द होते हैं राजनीतिज्ञों
- 43:35के। पावर लेने के लिए सत्ता भरने के
- 43:40लिए यह सच में हो जाएगा। यह तुम देखोगे आगे आगे आगे देखिये
- 43:49होता है क्या इब्त दाई इश्क हर होता है?
- 43:54क्या? देखना और मेरा कम कम हो जाता है।
- 44:03तुम भी देखना हम तो आखिरी पड़ाव पे हैं शायद देख पाएं, न देख पाएं
- 44:14ईश्वर की मर्जी है। लेकिन तुम जरूर देखोगे कोई महान
- 44:20वाहन नहीं बनेगा, गर्क जाएगा। ये ठीक है क्योंकि अहंकार आदमी को
- 44:29सदा गर्क आता है ऊँचा तो उठाता है त्याग।
- 44:35ऊँचा तो उठाती है नम्रता मिठ तनिमि नान का गुण चंगे ये थे महान
- 44:43लोग जो एवरग्रीन शब्द जीवन को जीने के लिए तुम्हे दे गया और तुम
- 44:53इन्हें इस्तेमाल नहीं करते अपने जीवन में।
- 44:58तो जब तुम लौटोगे अपने बचपन में, तो तुम पाओगे जरूरतें कम थी और
- 45:06जरूरतों के साथ वासना भी नहीं थी, धीरे धीरे शरीर विकसित होता क्या?
- 45:14बस नहीं उठती, चली गईं, जरूरतें बढ़ती चली गईं।
- 45:23प्राकृतिक रूप से कम बढ़ीं, कृत्रिम रूप से तुमने ज्यादा बढ़ा
- 45:29दिया मेरे एक एक शब्द को गौर से समझना।
- 45:34अगर एक बार ना समझाए तो फिर कहूंगा बार बार सुन प्राकृतिक रूप
- 45:41से कम बढ़ी कृत्रिम रूप से तुमने ज्यादा बड़ा वासनाएँ भी बढ़ती
- 45:53हैं। जरूरतें भी बढ़ती।
- 45:56हैं। लेकिन इतनी नहीं बढ़ती प्राकृतिक
- 46:01रूप से जितनी तुमने तूल दे दी, जितनी तुमने बढ़ा दी और ये सूत्र
- 46:07वही कहता। है।
- 46:10समय के साथ शरीर का ढांचा परिवर्तन होने के साथ।
- 46:17प्राकृतिक रूप से कुछ तुम्हारी वासनाएँ बदल जाती हैं, इच्छाएं
- 46:22बदल जाती हैं, शोक बदल जाते हैं, जरूरतें थोड़ी सी ज्यादा हो जाती
- 46:29हैं। मैंने शब्द प्रयोग किया, थोड़ी सी
- 46:34ज्यादा। अगर दो मीटर के अंदर पहले कुर्ता
- 46:41पजामा बन जाता था। आज पांचवीं बार बनता है।
- 46:47उसी बात मैंने कब कहा कि आप छः बार कपड़े बदलो, आप सात बार
- 46:52साड़ियाँ बदलो। और लोगों को चिढ़ाऊँ क्या हमने ये
- 46:58सात बार साड़ियाँ बदलीं? आपके जेब में ढाका मार के बदली और
- 47:05कमाल के लोग हैं, हम भी हम नहीं सारा सारे मुल्क, सब जगह पूँजीवाद
- 47:13ने। हाहाकार मचा रखा है।
- 47:18एक व्यक्ति पूरे मुल्क को चला रहा है और तुम्हें पता नहीं वो कौन
- 47:22चला रहा है उसको खोजो वह कौन व्यक्ति है जो मुल्क को चला रहा।
- 47:30है। उसको खोजो और उसके पर काट।
- 47:34दो ताकि वो उड़ न सके। क्या होगा?
- 47:44जब उसके पर कट गए, वो धड़ाम से नीचे गिर पड़ेगा।
- 47:52और इतनी संपत्ति है विश्व में अकेले इंडिया की बात नहीं करो शिव
- 47:59का ये सूत्र विश्व व्यापी। है।
- 48:04इतना धनमाल है धरती पे। कि न कोई भूखा सोयेगा, न कोई
- 48:11नंगा, न कोई सर्दी। गर्मी से न कोई बिना छत के मरेगा,
- 48:21न वासना ही हमने इतनी बढ़ा दी। हम सो सकते हैं 10/10 के कमरे में
- 48:32मैं मैं सो रहा हूँ मेरी तरफ देखो इंसान हूँ तुम्हारे जैसा इंसान
- 48:39हूँ क्षमा करना तुम सारे दिन दुखड़े भौंकते रहते हो।
- 48:46और मैं चौबीसों घंटे मेरे भीतर दिवाली मनती रहती है, इसको किसी
- 48:52तंज की तरह मत लेना। मैं हकीकत बोल रहा हूँ।
- 48:58सदा दिवाली सादगी और आठवां पहर आनंद।
- 49:04मुझे कोई परिस्थिति आके विचलित नहीं करती।
- 49:08क्यों? क्योंकि मैं इस शिव के सूत्र के
- 49:12आखिरी पहरे पे पहुँच गया हूँ तुम भी मेरे ही जैसे हो।
- 49:22मेरे में कुछ भी विनयता नहीं है जो तुम में न हो, ऐसा कुछ भी नहीं
- 49:28है। मेरे में बदला क्या है?
- 49:32बदला है सिर्फ जरूरतें बात सुनाएं।
- 49:40वासना को धीरे धीरे कम करो, यह मूर्ख लोगों की बातें हैं कि वासन
- 49:52हम से चपट जाते हैं, हम वासनो से नहीं चपटते हैं, मैं उल्टी बात
- 49:57कहता हूँ। वासना तुम्हारा कुछ नहीं पकड़
- 50:00सकती। आसमान में जाते हुए बादल तुम्हारा
- 50:05क्या लिंक है? सिर्फ माहौल को सर्द या गर्म कर
- 50:11देंगे, तुम्हारा कुछ नहीं लेंगे इन वासना को तुम पकड़ते हो।
- 50:20ये सहज प्राकृतिक रूप से उठना स्वाभाविक है, लेकिन भोगने के लिए
- 50:27पकड़ते हो। तुम यू अरे रिस्पांसबल फार तुम
- 50:34इन्हें पकड़ते हो तो तुम भोगते हो।
- 50:38तुम बहुते हो तो परिणाम अति और तुम्हें नहीं पता एक बार की वासना
- 50:47भोगी हुई उसका फल क्या निकलता? है।
- 50:56तुम तैश में आके क्रोध में आकर हत्या कर देते हो, अब मिनट तो
- 51:04सारे दो लगे गोली चलाती आदि उम्र के भोगना कितनी देर पड़ेगा, पूरी
- 51:13ज़िन्दगी भोगना पड़ेगा। काम कितनी देर हुआ?
- 51:18सिर्फ 2 मिनट का काम था त्याश आया वेतर का क्रोध उबार और तुमने
- 51:27रिवलवर की गोली दाग दी आदि उम्र के बोंगा सारी उम्र।
- 51:33बस ऐसे ही तुम्हारे कर्म वासनाएँ हैं वासनाओं को तुम भोग लेते हो,
- 51:40उसके परिणाम नहीं जानते, परिणाम बाद में आते हैं।
- 51:44जब परिणाम आते हैं तो तुम रोते हो तो मैंने क्या कहा?
- 51:53वासनाओं को कम करो। यह सूत्र बोल रहा है कि सूत्र
- 51:58जरूरतों को कम करो। कोई आवश्यक नहीं है कि तुम छह बार
- 52:04कपड़े बदलो। मैं फिर कहूंगा वही।
- 52:07बात। कोई आवश्यक नहीं है कि तुम सात
- 52:11बार साड़ियां बदलो। है तो लोगों को चिढ़ाने की बात
- 52:14है। यह तो बनावटी सम्मान लेने की बात
- 52:21है। जब के कपड़े बदलने से कभी सम्मान
- 52:23मिलता, न चरित्र बदलना। होगा।
- 52:31मिठत नीमी नान का गुण चंगेय तत सारे धर्म सिखाते हैं, किसी न
- 52:39किसी ढंग से के झुक न सीखो। मुसलमान नमाज़ नम नमन नमन से
- 52:48नमाज़ पढ़ा। तुम नमस्ते करते हो, तुम
- 52:54मूर्तियों के आगे झोंकते हो, कोई किसी प्रकार झुकता है, कोई किसी
- 53:02प्रकार झुकता है, यह सिखाया गया था संत पुरुषों महान पुरुषों ने
- 53:07हमारे। कि अगर ज़िन्दगी में मिठास लेके
- 53:12आनी है तो नम्रता को ज़िन्दगी का पर्याय बना लो, नम्र रहो न सीखो,
- 53:24नम्रता मीठियों पर लेके आएगी। और असहजता कटुता कड़वे पर ले के
- 53:39आई नमन करना सभी ने सिखाया। कोई भी धर्म हो लेकिन तुमने।
- 53:52नम्बर होना सीखने के बजाय तुम अकड़े शरीर झुका तुम नी झुकड़े और
- 54:04यह न झुकना अहंकार के बढ़ने का प्रतीक कारण बना और।
- 54:10अहंकार का बढ़ना। तुम्हारे दुख के बढ़ने का कारण बन
- 54:14गया शर्त तुम्हें रोज़ समझाती हैं ये बात सहजता में अगर झुकोगे तो
- 54:25झुकने से क्या मिलेगा तुम्हें? अपने भीतर उतरोगे झुकना अपने भीतर
- 54:31जाना भी तो भीतर उतरना भी तो नमनता से होता है वो नमाज़ पढ़ के
- 54:37हो जाओ, दंडवत करके हो जाओ, प्रणाम करके हो जाओ, निर अहंकारी
- 54:45हो के हो जाओ। झोकोगे तो फलोगे वृक्ष के भी जब
- 54:56फल लग जाते हैं और देखना जब ज्यादा फल लग जाते हैं उतना ही
- 55:02ज्यादा झुक जाता। है।
- 55:04मैंने ऐसे वृक्ष भी देखे हैं जिनकी टहनियां धरती से लग जाती।
- 55:11हैं। और मैंने देखा फल इतना लदा हुआ
- 55:17था, के गुच्छे ही गुच्छे नजर आ रहे थे फलों के।
- 55:25वह वृक्ष झोंकता है, जिसके मीठे फल जीतने अधिक लगते हैं।
- 55:36तुम अपने गुणों को न देखो, जिसने गुण देखे।
- 55:42उसने छाती फला ली। तुम देखो अवगुणों को, जिन्हें दूर
- 55:47करना है गुण तो तुम्हारे में आ गए उनको देख के छाती मत फेलो, वो तो
- 55:56आ गए दूर करना है अवगुणों को। अब गुणों को दूर करने से फल
- 56:06लगेंगे, गुच्छे मीठे फल लगेंगे और जो जब तुम्हारा वृक्ष झुकेगा
- 56:13टहनियां तो तुम्हें जो आनंद आएगा वो भोग में नहीं आता।
- 56:24ओगनो विखे सा ही बाते कोई न मेरी था।
- 56:38ओह, गनबे खे साहिबा ते कोई न मेरी थाम जे तेरोम शरीर दे ओह तू
- 56:54हदगुना? जे तेरोम शरीर दे हो तो वधगुणा हो
- 57:09तो वधगुणा रखे चरना दे। कोल मेरा वालिया, वालिया, मेरा
- 57:26वालिया मेरा वालिया सायया। रखें चरना देखो मेरा वाले आ
- 57:41साईंया। जीसको खत्म करना है, उसकी तरफ
- 57:48देखो, अपने अवगुणों को देखो। और परमात्मा से कहता है यह भक्त
- 57:57कि मेरे अवगुण तू न देख, क्योंकि मैंने मेरे अवगुण देख लिए, जीतने
- 58:05मेरे शरीर के रोम हैं, उससे ज्यादा मैंने गुनाह किया है।
- 58:14ओह गन वे खेसा ही बातें कोई ना मेरी था मेरा मुकाबला कोई नहीं कर
- 58:22सकता जे तेरोम शरीर हृदय। हो तुम बदगुणों जीतने शरीर में
- 58:32रोम हैं, मेरे उससे ज़्यादा मेरे गुणों हैं, लेकिन हे पर वर्दीकार
- 58:42हे रहम मेरे अवगणों की तरफ मत देखा।
- 58:50अपनी रहमतों की तरफ देख कह दूंगा साफ हसर में पूछेगा अगर खुदा ये
- 58:59बात कहीं और की थी ढाल कहीं और रह गया, कह दूंगा साफ हसर में पूछेगा
- 59:05अगर खुदा। लाखों गुनाह की है तेरी रहमत के
- 59:10ज़ोर पर, तू रहूं करीम है और मैं गुनहगार हूँ गुनाह होना स्वभाव है
- 59:23मेरा ह्यूमनिस्टो एरर्स। ये पूतला गुनह से बना इसका रोवां
- 59:34रोवां गुनहगार तो गुनह की तरफ मत देख तू ऐसी ही काबिलियत पैदा कर।
- 59:43कि मैं मेरे गुनाहों को देखूं, तुम ना देख तुम मेरे में काबिलियत
- 59:50पैदा कर कि मैं मेरे गुनाहों को देखूं और जब तुम देखोगे अपने
- 59:58गुनाहों। को तो तुम।
- 1:00:00पाओगे? कि तुमसे बड़ा गुनाहगार और कोई है
- 1:00:04नहीं बुरा जो खोजने में चला बुरा न मिले हो कोई जो दल खोजा अपनों
- 1:00:18मुझसे बुरा न कोई। तुम पाओगे कि मुझसे बुरा कोई
- 1:00:22नहीं। जब तक तुम देखते नहीं कि मुझसे
- 1:00:27बुरा कोई नहीं, तब तक तुम लोगों को कहते रहोगे।
- 1:00:32उसने फलां बुराइ की, उसने फलां बुराइ की।
- 1:00:36और ध्यान रखना ये बात कहने वाले कि उन्होंने ये बुराइ की उसने ये
- 1:00:41बुराइ की। उन्होंने खुद का दिल नहीं खंगाला
- 1:00:46होता है। जिन्हें खुद को खंगाला होता है।
- 1:00:52वो तो ये कहते हैं कि मेरे जितना। गुनाहगार कोई भी नहीं है जीतने
- 1:01:00रोम हैं शरीर के, उससे ज्यादा हैं गुनाह, लेकिन तू मत देख मेरे
- 1:01:07गुनाहों की तरफ तुम मुझे वल्ल सीखा कि मैं अपने गुनाहों को कैसे
- 1:01:15देखूं? और गुनाहों को देख कर पहचान जाऊं
- 1:01:19कबीर की तरह जो दर खोजा अपनों तो मुझसे बुरा न।
- 1:01:26कहें। जीस दिन तुम ये खोज लोगे।
- 1:01:33तुम्हारी वासनाएँ धीरे धीरे गिरना शुरू हो जाएँगी यह बात एक वासना
- 1:01:41के लिए नहीं सभी वासनाओं के लिए। है।
- 1:01:48धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे। उनके परिणामों को चख के वासना के
- 1:01:54परिणाम कभी भी शुभ नहीं होता। कड़वे फल जीभ को मिठास का स्वाद
- 1:02:02नहीं दिया करते हैं। उनके टेस्ट वर्स बताएंगे या कड़वे
- 1:02:06हैं। कड़वे हैं भोग कड़वे हैं खाने से
- 1:02:18पता चल जाएगा मुझसे लोग पूछ लेते हैं क्या करें बाबा, यह तो हमें
- 1:02:23भोग ने भी नहीं देता। है।
- 1:02:25यही तो मैं कहता हूँ तुम्हें इतना तो भोग लो।
- 1:02:32कि शरीर बच जाए, वो भोग नहीं है वो जरूरत।
- 1:02:36है। और शिव कहते हैं जरूरतों को पूरी
- 1:02:40करो और कम से कम जरूरतों को पूरी करो।
- 1:02:46जरूरतों को कम कर लो। अभी इन दोनों का मैं संबंध बता
- 1:02:50दूँ थोड़ा सा। दोनों का संबंध है बड़ा गहरा
- 1:02:53संबंध है क्योंकि मैं जानता हूँ मैंने अनुभव किया है जरूरतों को
- 1:03:03कम करोगे। सबसे बड़ी जरूरत क्या है खाना?
- 1:03:11तो मरना नहीं चाहते, अमर होना चाहते हैं, थोड़ा सा कमज़ोर कपड़ा
- 1:03:19पहन लोगे, लेकिन खाओगे मटन। पनीर खाओगे मांस, मछली, बिरयानी,
- 1:03:41दूसरों को मार के खा जाना। पशुओं का स्वाभाव तो हो और पशुओं
- 1:03:50की तो जरूरत। है।
- 1:03:52उसका भीतरी ढांचा प्रकृति ने बनाई ही ऐसा है आपको पता है कि शेर के
- 1:04:00भीतर का। जीआइ टी सिस्टम
- 1:04:02गैस्ट्रोइंटेस्टिनल सिस्टम 810 फिट का होता है।
- 1:04:07सारा कुल मिला के और मानव का जीआइ टी सिस्टम 2530 फुट के गृह।
- 1:04:16होता है। ये इतना ज्यादा लेंग्थी क्यों
- 1:04:20बनाया गया? क्योंकि यह मांस के लिए नहीं
- 1:04:25बनाया प्रकृति की तरफ देखो प्रकृति ने तुम्हें किस चीज़ को
- 1:04:32खाने के लिए तैयार किया है शेर की आंकड़ियाँ जेआईटी सिस्टम 810 फुट
- 1:04:40का है। क्योंकि शेर पचा पचाया भोजन खाता
- 1:04:44है, मांस वह पहले से पच चुका है। किसी और जानवर ने व्यक्ति ने
- 1:04:51मेहनत कर ली। उसके सिस्टम ने मांस में डाल
- 1:04:55दिया। अब उसको बचाने की कोई आवश्यकता
- 1:04:57नहीं है। वो सीधी एनर्जी है।
- 1:05:01लेकिन मनुष्य को या जितनी देखिये आप जीआईटी सिस्टम देख के पहचान
- 1:05:08सकते हो कि ये शाकाहारी है, प्रकृति से मांसाहारी पैदा किया
- 1:05:13या शाकाहारी पैदा किया, जिसका जीआईटी सिस्टम छोटा।
- 1:05:17है। और मांसाहारी प्रकृति ने पैदा
- 1:05:20किया, जिसका जीआईटी सिस्टम लेंग्थी और प्रकृति ने शाकाहारी
- 1:05:26पैदा किया। अब ज्यादा इसमें बहस बाजी की
- 1:05:29जरूरत ही नहीं होती। परकृति की तरफ तुम क्यों नहीं
- 1:05:34देखते? तुम शास्त्रों में उड़ जाते हो ये
- 1:05:41तेज दाने अन्न के जीवा भाजे ना कोई किसे किसने कहा तुम्हें इन
- 1:05:48चीजों पर बहस बाजी करने के लिए तुम जीआईटी सिस्टम देख रहे हो पता
- 1:05:54चल जाएगा। सिंपल सी प्रकृति की प्रक्रिया को
- 1:05:58देख लो, वासनाओं को कम करो, जरूरतों को कम करो, मैंने अपनी
- 1:06:09जरूरतें घटा लीं। मैं अगर कमजोर कपड़ा डालूंगा,
- 1:06:19उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ठंडी के लिए गर्मी के लिए वैसे ही
- 1:06:25वस्त्र पहनूंगा, उस पर कोई बहुत खर्चा नहीं होता।
- 1:06:34भोजन को कम से कम खा लूँगा। जरूरी नहीं है कि मटन बिरयानी ही
- 1:06:40खाना है। मैं सिंपल तीन बार दूध ले लेता
- 1:06:44हूँ। अपने उदाहरण मैं इसलिए देता हूँ।
- 1:06:48क्योंकि मैं अपने अनुभव से बोलता हूँ, हर चीज़ को इसलिए खाने के
- 1:06:54मामले में भी अपने अनुभव का ही प्रयोग करता हूँ जरूरतों को कम से
- 1:07:02कम कर दिया और मैं कुछ नहीं। करता।
- 1:07:06न बिस्कुट, न स्लाइस पीस रोटी वगैरह तो छोड़ ही दो फल फ्रूट को
- 1:07:11तो छोड़ ही दो जुइस वगैरह को तो छोड़ ही दो पानी पीना पड़ता है,
- 1:07:18वो भी कभी कभी नहीं तो दूध के अंदर पानी होता है।
- 1:07:24एक शेर भर दूध पी लेना। सात 800 ग्राम दूध पी लेना दट।
- 1:07:29इस सुफ्फिसिएंट फॉर मी और बरसों दर बरसों मैं लगातार एक ही तरह का
- 1:07:39यखा न खा रहा हूँ। अभी तो अभी तो पागल नहीं हुआ हूँ
- 1:07:50अभी ठीक ठाक हूँ कल का कोई भरोसा अभी पागल नहीं हूँ अभी अस्वस्थ भी
- 1:07:59नहीं और आपको बताऊँ। मैं जल्दी जल्दी अस्वस्थ होता भी
- 1:08:05नहीं अस्वस्थ तुम तब होते हो जब तुम इस मेन सिस्टम को अवगाड़ देते
- 1:08:14हो। अब इसको थोड़ा सा ढंग से समझ लेना
- 1:08:21साइंटिफिक भाषा का प्रयोग करूँगा। तुम्हारे भीतर शरीर को निरोग करने
- 1:08:29की शक्ति है, ऑटोमैटिकली प्रकृति ने दी वह तुम्हें निरोग बनाए रखती
- 1:08:39है। इसलिए बंदर के उदाहरण मैं दूंगा।
- 1:08:48बंदर सुबह सुबह खा लेता है जितना खाता।
- 1:08:50है। पेट भर के खा लेता है।
- 1:08:54बस। एक बार उसके बाद सारा दिन बंदर
- 1:08:59कुछ नहीं खाता है। जो बंदर सारा दिन खाते हैं वो
- 1:09:05बीमार हो जाता है। जो बंदर अपनी प्रकृति के हिसाब से
- 1:09:10सुबह सुबह खाता है वो एक बार खाता है।
- 1:09:14बीच में कभी कभार कोई एक आध चीज़ देगा वो खाद।
- 1:09:19बहुत कम खुराक है बंदर की कभी देखना मनुष्य की खुराक को देख कर
- 1:09:26तुम हैरान रह जाओ। क्या इतने बड़े बड़े थाल भरे होते
- 1:09:32हैं और फिर उतनी ही गोगोड़ें निकल जाती हैं?
- 1:09:39प्रकृति का वो सिस्टम व्यक्ति को पशुओं को निरोग बनाए रखता है,
- 1:09:47लगातार काम करता है। क्या होता है जब तुम जरूरत से
- 1:09:52ज्यादा खा लेते? हो?
- 1:09:56वह सिस्टम वह शक्ति जिसने तुम्हें निरोग रखना था, वह शक्ति लग जाती
- 1:10:03है भोजन को पचाने में अगर तुम ज्यादा भोजन ना करते।
- 1:10:10तो वो काम करती तुम्हें निरोग रखने के लिए तुम्हें मैं मूलभूत
- 1:10:14सूत्र बताता हूँ। इस सद्गुरुओं के पीछे मत लग जाना
- 1:10:19ये डायटिशियन है ये सिर्फ थोड़ी सी बात करके इन्हें मैं दूसरे
- 1:10:25नंबर के मूर्ख कहता हूँ। आध्यात्मिक व्यक्ति।
- 1:10:30सारे दिन ऐसी ही बातें करता रहा। सुबह नीम की गोली खा लो, हल्दी की
- 1:10:40गोली खा लो क्यों खा ले भाई कभी किसी पशु को?
- 1:10:47नीम और हल्दी की टैबलेट सुबह सुबह खाते देखा है।
- 1:10:51क्यों नहीं खाते हो? क्योंकि इनके भीतर का सिस्टम पेट
- 1:10:56को साफ कर देता है ऐन वक़्त पर और पूरा पेट साफ होता है उनका यह
- 1:11:02समझा क्या रहे हैं उन्हें? फिर खुद के जब हैमरेज हो जाता है
- 1:11:11तो ये हॉस्पिटल में भागते। हैं।
- 1:11:15इनका मंतव्य कुछ और है हमारे शरीर के भीतर।
- 1:11:23निरोग करने की जो क्षमता। है।
- 1:11:28वह हमें लगातार निरोग बनाए रखती है।
- 1:11:35जब तुम उस शक्ति से भोजन पहुंचाने का काम लोगे तो भोजन पच जाएगा।
- 1:11:43उतनी शक्ति में रोग रखने पे लगती उतनी शक्ति तुमने भोजन बचाने पे
- 1:11:48और उसके भोजन की आवश्यकता नहीं थी।
- 1:11:53आज व्यक्ति इतना हल्का काम करता है और आगे आगे और भी हल्का होता
- 1:11:59जाएगा। बाहर उठाने का काम करेनो ने संभाल
- 1:12:03लिया। कंप्यूटर्स ने संभाल लिया।
- 1:12:08आज व्यक्ति कुर्सी पर बैठ के काम करता है, कल को वो भी छिन जाएगा।
- 1:12:15सब काम कंप्यूटर करेंगे। तुम कुर्सी पे बैठने या लेटने के
- 1:12:22योग्य रह। जाओगे फिर क्या होगा?
- 1:12:28प्रकृति तुम्हें तंदरुस्त रखने के लिए ने रोग रखने के लिए खुद काम
- 1:12:34करती है। ये प्रकृति का खुद का सिस्टम है।
- 1:12:39कोई चीज़ ऐसी नहीं जो प्रकृति ने स्वतय तुम्हें न दी हो।
- 1:12:46मेरी इस बात को फिर सुन लेना कोई सिस्टम ऐसा नहीं जो प्रकृति ने
- 1:12:53तुम्हें निरोग रहने के लिए नहीं दिया।
- 1:12:55हो? सर्क्युलेशन ऑफ ब्लड अपने आप चलता
- 1:12:58है, तुम दिल को धड़काते नहीं प्यूरीफिकेशन ऑफ ब्लड तुम्हारी
- 1:13:05इच्छा से नहीं चलता, तुम श्वास नहीं।
- 1:13:07लेते। न छोड़ते हो।
- 1:13:12नींद खुद आती है। सूर्य छुपते ही तुम्हारे भीतर
- 1:13:19मेलाटोनिन सेराटोनिन नाम के ही हार्मोन से पैदा होने शुरू हो
- 1:13:23जाते हैं और मैलाटोनिन साल्ट 1 घंटे के बाद व्यक्ति को सलाह
- 1:13:30देता। है।
- 1:13:33इसलिए जैनियों में। यह प्रथा थी कि सूरज छुपने से
- 1:13:38पहले पहले खा लो, क्योंकि जैसे सूरज छिपा सूरज के छपने से अंधेरे
- 1:13:44से एक संबंध है इस हार्मोन के पैदा होने का मेलाटोनिन और
- 1:13:51मेलाटोनिन तुम्हारी अच्छी नींद के लिए।
- 1:13:56काम करता है। सराटोनियन तुम्हे प्रसन्न नींद के
- 1:14:00लिए काम करता है। ये दोनों पैदा होते हैं।
- 1:14:05साँझ ढकते ही सूरज छपते ही सारे अंदाजा मात्र प्रकृति ने की।
- 1:14:12तुम क्या करते हो? तुम सिर्फ मैं पालते हो, मैंने
- 1:14:20किया करते वरते तुम कुछ नहीं तो शिव का ये सूत्र कहता है दो चीजों
- 1:14:29को कम करते जाओ। ये ये नहीं कहता, एकदम से छोड़
- 1:14:33दो, कम करते जाओ जरूरतों को घटाते जाओ अगर आज तुम तीन बार खाना खाते
- 1:14:41हो वैसे तो तुम बकरी की तरह सारे दिन चरते ही रहते हो और फिर।
- 1:14:51तुम्हारे तथाकथित आचार्य के गोगड़े देखना मैंने पहले भी कहा
- 1:14:56था गोगणों से आदमी पहचान में आ जाता है।
- 1:15:06वह स्नाई भी इनकी नजर आ जाती हैं। विचार भी इनकी नजर आ जाती हैं।
- 1:15:12तंदुरस्ती भी इनकी नजर आ जाती है। ये नाचेंगे, झूमेंगे, लेकिन इनकी
- 1:15:18गोगढ़ दिखेगी। साफ़।
- 1:15:21बड़े भद्दे लगेंगे जैन मुनियों को देखना?
- 1:15:27जितना डिसिप्लिन जैन मुनियों में होना चाहिए, जीतने अंगुली भर वो
- 1:15:32खाते हैं, उस हिसाब से इनका पेट नहीं बढ़ना चाहिए।
- 1:15:36लेकिन आप देखो ज़रा जन्म पेट भरे हुए हैं, खाते ही जाते हैं,
- 1:15:43बेशुमार खाते जाते हैं। क्यों?
- 1:15:46क्योंकि भोजन का काम क्या है? इन्होंने जाना नहीं, भोजन का काम
- 1:15:53है तुम्हें शक्ति प्रदान करना है। काम करने से जो तंतु टूटते हैं,
- 1:15:59टिशूज टूटते हैं, उनकी रिपेयर। करना है।
- 1:16:05हार्ट बीट को फेफड़ों की गति को बराबर कायम रखना और सारे शरीर की
- 1:16:12संरचना को चलाईमान रखना भोजन का काम है।
- 1:16:16वो कैलोरीज देते हैं। तुम्हें कितना खाना है?
- 1:16:23उसकी एक लिमिटेड जरूरत होती है, लेकिन तुम उसे कई लोग तो 1010
- 1:16:30गुणा खा जाते। हैं।
- 1:16:32ऐसे ऐसे पदार्थ तुम खाते पीते हो, शाम को शराब पीते हो, एक शराब, एक
- 1:16:38किस्म का तेजाब होता है। तेजाब में अगर तुम अपनी हड्डी को
- 1:16:43डाले रहोगे तो 3 दिन में वो गड़ जाएगा।
- 1:16:47तुम रोज़ पीते हो? उसे क्या असर होगा?
- 1:16:52तुम्हारे भीतर अगर माइक्रोस्कोप लगाकर देखा जाए।
- 1:16:56तो सारा छलनी बना हुआ है तुम्हारे भीतर शराब पीने वालों के भीतर
- 1:17:03तुम्हें पता ही नहीं शराब की जरूरत क्या है।
- 1:17:07शराब भोजन का अंग नहीं होना चाहिए, लेकिन तुम पीते हो क्यों
- 1:17:14पीते हो? नशे के लिए जबकि शिव कहते हैं कि
- 1:17:21तुम खुद नशा हो, तुम खुद नशा हो। यू अरे यूर सेल्फ और तुम ढूंढ़ते
- 1:17:31हो शराप में। उस नशे तक पहुंचने के लिए अपने
- 1:17:39भीतर उतर जाओ। किसी शराब की जरूरत नहीं पड़ेगी,
- 1:17:48फिर तो तुम और मांगोगे। अभी तुमने भीतर जाने की कवायद ही
- 1:17:54शुरू नहीं की। शिव कहते हैं, जरूरतों को कम करो,
- 1:18:01वास्तविक जरूरतों को पैदा करो। वास्तविक की जरूरत नहीं है छह बार
- 1:18:09कपड़े बदलना सात बार साड़ी बदलना बार बार कह रहा हूँ वास्तविक की
- 1:18:15जरूरत नहीं है ₹5000 गज की कीमत की मीटर की पोशाक पहनना, हीरे
- 1:18:22जड़ित पोशाक पहनना। वास्तविक जरूरत नहीं है।
- 1:18:28कृतयम जरूरत है जैसे तुम जरूरतों को बढ़ा चिढ़ा कर पूरी करते हो।
- 1:18:36अब इन शब्दों को समझ लेना आखिरी शब्द हैं।
- 1:18:38मेरे जैसे तुम जरूरतों को बढ़ा चिढ़ा कर पूरी करते हो।
- 1:18:45वैसे तुम वादसनाओं को बढ़ा, चिढ़ा के पूरी करते हो और ये बाबा लोग
- 1:18:54अब क्या बताऊँ, आज निरोग करने की औषधियाँ बेचते बेचते तुम्हारे
- 1:19:02अंगों को बढ़ाने की दवाइयाँ बेचने शुरू कर देते हैं।
- 1:19:06अंदर। खाते हैं।
- 1:19:09पैसे तो सही उससे कमाते हैं। ये तुम्हारी यौन रुचि का दुरूपयोग
- 1:19:18करते हैं। कुछ तो तुम्हारी वासना ही तुम्हें
- 1:19:24टिकने नहीं देतीं। और कुछ ये तथाकथित योगी रोग योग
- 1:19:31सिखाने वाले रोग तुम्हारी वासनाओं को बढ़ाने में कोई कोर कसर बाकी
- 1:19:37नहीं छोड़ता और ये कहते हैं कि हम ऐसा राष्ट्र बनाएंगे।
- 1:19:44जो देश में नाम कर देगा। देखिए देश विदेश में नाम के लिए
- 1:19:52भीतर ओझ की जरूरत होती। है।
- 1:19:55तुम ये मत भूल जाना। स्वामी विवेकानंद शिकागो में
- 1:20:00बोलिए। और उनके प्रत्येक शब्द के भीतर
- 1:20:04ओझलकता था, उठने लगे थे। उठने का वक्त था सुनने वालों का
- 1:20:12शिकागो में, लेकिन जब उसने कहा माई अमेरिकन ब्रदर्स एंड
- 1:20:17सिस्टर्स। तो उसकी सुरीली आवाज को सुनकर सभी
- 1:20:21बैठ गए। यह ओज का प्रभाव था और तुम लोग
- 1:20:29अंगों को बढ़ाने की दवाई देके तुम खाक के योगी हो, तुम अगर न जन्म
- 1:20:37थे तो ज्यादा अच्छा था। तुम्हारे जीवन पर ही धिक्कार है,
- 1:20:43इससे ज्यादा शब्द मैं नहीं बोल सकता।
- 1:20:45मेरे पास है ही नहीं, मैं बोलूं तुम लोगों की यौन इच्छाओं का
- 1:20:54व्यापार। करते हो?
- 1:20:57फिल्मों बनाने वाले। ऐसे ऐसे दृश्यों को बनाते हैं जो
- 1:21:03तुम्हारी यौन इच्छाओं को भड़काते हैं।
- 1:21:08और शिव क्या कहते हैं जरूरतों को और वासनाओं को कम करो, ऐसे उपाय
- 1:21:13करो, जिनसे वासनाएं कम हो तो कैसे होंगे?
- 1:21:18जो यौन इच्छाओं को भड़काते हैं, वहाँ जाओ ही मत।
- 1:21:28लेकिन तुम्हारे तो आज मोबाइल भरे पड़े हैं।
- 1:21:33ब्लू फ़िल्म उससे? जिनको हमने चुनकर भेजा है मेंबर
- 1:21:44ऑफ़ पार्लियामेंट या मेंबर ऑफ़ असेंबली।
- 1:21:47बहुत बारगी वो लोग ब्लू फिल्म्स देखे हुए पकड़े गए हैं।
- 1:21:52दिनभर जैसे इन्हें शोक है इन्हें सारे दिन।
- 1:21:57इनके सिर में कामदेव गुजा रहता है।
- 1:22:02इस देश को ढीढ़ क्या करेंगे? रोज़ किसी ना किसी के ऊपर कोई
- 1:22:08व्यवहार का रेप का केस लग जाता। है।
- 1:22:11ये लाख बचने की चेष्टा करते हैं और इनके सुप्रीमो इन्हें बचाते
- 1:22:16भी। ऐसे लोगों को मत चुनो जो दुष्टों
- 1:22:24को बचाने और दुष्टों को बढ़ाने में रूचि रखते हैं।
- 1:22:30सही राजनीतिकों का चयन करो। जो मेहनती हैं, जो ईमानदार हैं,
- 1:22:38जो साहसी हैं और जो मुसीबत आने पर स्टैंड ले सकते।
- 1:22:49हैं। वे म्याने नहीं लगते, बकरे।
- 1:23:00जो गलत के ऊपर अक्शॅन लेने में गुरेज नहीं करता और ठीक को
- 1:23:06पुरस्कृत करने में गुरेज नहीं करता तो जो इससे उल्टा करता है
- 1:23:12उनको गदियों से। उतारता हूँ।
- 1:23:16अब रह गई बुनियादी। बात।
- 1:23:20जब तक ये पूँजीवादिता को बढ़ावा संसार भर में चलता रहेगा तब तक
- 1:23:32असमानता और पाप फैलता। रहेगा।
- 1:23:38अब इन शब्दों को आप गौर से फिर सुन लेना, असमानता, सामान की
- 1:23:48असमानता, द्रव्यों की असमान वितरण।
- 1:23:53पाप है। तुम्हारा भूख से मर जाना उसका
- 1:24:02कारण पाप नहीं। सामाजिक असमानता वितरण प्रणाली यह
- 1:24:09पाप। है।
- 1:24:11और जो इसको बढ़ावा देता। है वह पाप कर रहा है।
- 1:24:16जो तुम्हें नंगे बदन रखता है बेहब बाप है जो तुम्हारे सर को छत नहीं
- 1:24:23दे सकता बेहब बाप है ऐसे व्यक्ति को चुनना और मैं प्रार्थना।
- 1:24:32करूँगा। पूरे देशवासियों से कैसे व्यक्ति
- 1:24:39की तलाश करूँ? जो बरशाली हो, साहसी हो, जिसके
- 1:24:45भीतर उमंग हो, जो देश को बनाने की क्षमता रखता हो?
- 1:24:52और कम से कम मौसम में जुनून हो। ऐसे व्यक्तियों को आप सर्वोच्च
- 1:24:59पदवी पर बैठाओ चुनना आपने साहस होना चाहिए, बराबरी होनी चाहिए,
- 1:25:09खुद के शरीर की तरफ ध्यान न दें। हाँ, खुद को निरोग जरूर रखें,
- 1:25:19लेकिन जीस जनता ने उसे इतनी ऊंची पद्विदी है उसका बराबर ख्याल रखें
- 1:25:28ऐसे व्यक्ति को। सबसे उच्च कुर्सीद व्यर्थ की
- 1:25:37व्हाट्सएप, फेसबुक या ये मूर्ख मीडिया जो शब्द फैलाता है उनके
- 1:25:44ऊपर यकीन न करो, खुद देखो। कि जीस व्यक्ति को ये ठीक कह रहे
- 1:25:51हैं वो क्या? वो ठीक है और जीस व्यक्ति को ये
- 1:25:55मूर्ख कह रहे हैं कि वो मूर्ख है तुम्हें भी भेजा दिया है परमात्मा
- 1:26:00ने फिर अगर मूर्ख लगे तो ठीक फिर अगर श्रेष्ठ लगे तो ठीक उसे ही
- 1:26:08चुन लेना। मैं किसी की वकालत नहीं करता।
- 1:26:12मैंने गुण बताया, साहसी हो, मुकाबला कर सके ईमानदार।
- 1:26:19हो? शरीर और मन से बलिष्ट हो, भगोड़ा
- 1:26:25न हो, यह शब्द भर से सुन रहा। भगोड़ा न हो क्योंकि जो भाग गया
- 1:26:34वो तुम्हारी समस्याओं से भी भाग जाएगा।
- 1:26:41तो ठीक लगे तो गृहस्थ व्यक्ति को। जो लकड़ी नून तेल, गैस सिलिंडर,
- 1:26:52आटा इसके भाव जानता हूँ, जो भाव ही नहीं जानता हूँ उसको क्या पता
- 1:27:00लगेगा? किसकी कीमत बढ़ गई, किसकी कट गई?
- 1:27:06तुमने किसी व्यक्ति को 5 साल के लिए अपने जीवन की पूरी व्यवस्था
- 1:27:11सौंप दी है। कितने सस्ते में मत सौंपो कितने
- 1:27:17सस्ते में मत बिको तो वह चाहे तो तुम्हें भूखे मार दे और वह चाहे
- 1:27:23तो तुम्हें दलील कर दे। और वह चाहे तो तुम्हें जेलों में
- 1:27:26बंद करता। इतने कमज़ोर नंबर सत्ता तुम्हारे
- 1:27:33हाथ में है। लोकतंत्र तुम्हें खुशनसीबी से मिल
- 1:27:38गया इस लोकतंत्र का फायदा? उठाओ।
- 1:27:44अपने तंत्र को अपने लोक मत के हिसाब से चलो सही उपयोग करो बेको
- 1:27:51मत अब सूत्र के आखिरी शब्द भी हम आएँगे।
- 1:28:00वासनाओं को जरूरतों को कम करो। कम करो जितनी जीवन के लिए आवश्यक
- 1:28:08है पेटू मत बनो, स्वाद के लिए मत खो सेहत के लिए खो कम करते करते
- 1:28:19करते करते। उतना कम कर दो, जितनी वास्तविक
- 1:28:25तुम्हारी जरूरत है वासन और जरूरत। है।
- 1:28:32फिर तुम पाओगे कि तुम अपने भीतर उतरना शुरू हो गए, यह एक सफल
- 1:28:39प्रयोग है। इसको आजमा के देखो भोजन आपका जीवन
- 1:28:46का दर्भाता है। मैंने पहले भी बहुत बार कहा है
- 1:28:52जीस व्यक्ति के चरित्र को देखना, उसकी थाली को देख लेना उसकी थाली
- 1:28:58में रखा क्या है? तो मैं उसका चरित्र बताती हूँ, चल
- 1:29:02जाएगा ज्यादा देखने के हीरो उतने उसके पेट को देख।
- 1:29:07लेना नहीं, नहीं ऐसा मत करना। ये कहते है गर्भवती का पेट तो आगे
- 1:29:16ही होता है नहीं, वो तो औरत होती है, उसका तो काम ही है।
- 1:29:20वो तो जननी है, उसने तो जन्म देना है एक जीवन को वो गलत नहीं कह रहा
- 1:29:28हूँ मैं उसने तो तुम्हें भी जन्म दिया है।
- 1:29:34जरूरतों और वासनाओं को कम करते जाओ।
- 1:29:39कम करते करते कम इस सतह पे ले आओ कि बस उससे कम नहीं गुजरा होता।
- 1:29:47वहाँ रुक जाओ। तुम्हारा मंतव्य पूरा हो जाएगा और
- 1:29:54ये कहते हैं शिव कि तुम उस स्तर पर पहुँच जाओगे।
- 1:30:00जहाँ न वासना ही रहती हैं, न जरूरतें रहती हैं, ये बहुत गहरी
- 1:30:05बात है। अब ये बात कहने वाली तो है नहीं,
- 1:30:11ये बात तो है, अनुभव करने वाली बात है।
- 1:30:17कह के सिर्फ तुम्हें समझा देता हूँ वह पहुँच जाओगे जहाँ न तो
- 1:30:21तुम्हारी जरूरत बचेगी और न ही तुम्हारी वासना बचेगी।
- 1:30:30श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:30:48गोविंद हरे मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेव?