Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Dec 24 - क्या भूत प्रेत, देवी देवता, जिन्न होते हैं? क्या गुरु दीक्षा वापिस ले सकता है?
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- 0:09कल के प्रवचन में मैंने कहा कि देवी देवता, भूत, प्रेत, पिशाच के
- 0:24जीन वगैरह। कुल देवता पितर जिनका श्राद्ध
- 0:37करते हो आप प्यार से कुछ नहीं मांगते हैं।
- 0:48यह लोभियों के बनाए हुए स्वयं और स्वयं के परिवार के पोषण के लिए
- 1:00चालाकियां हैं। ये बुजते लोग हैं, कायर हैं।
- 1:07परिश्रम नहीं कर सकते तो इन्होंने ये चालाकियां इजाद कर ली।
- 1:14वो सीधी पड़ गई आप मानने लग गए देवी देवता देवता का मतलब ही है
- 1:23दाता दे लंदा धगप्पा। जुआ जुगंतर खाई खा तुम खाते रहो,
- 1:32वो दाता है, उसके पास विशाल भंडार है तुमने बनाया कुछ नहीं मैंने
- 1:37बहुत बार कहा, उसने बनाया और उसी का दिया हम खा रहे हैं।
- 1:44कभी भी परमात्मा को कुछ देने का संकल्प मत करना।
- 1:52यू आर अनेबल टु डू सो अगर ऐसा करोगे तो सिर्फ तुम्हारे अहंकार
- 1:58का प्रतीक ही होगा। इनका उपयोग कर परमात्मा के आगे हम
- 2:13सदा भिखारी बने रहे हैं भी और शक्ति को स्वीकार करने में हर जगह
- 2:22परमात्मा के दर के भिखारण। इनका उपयोग करो।
- 2:43ये शक्ति है एनर्जी, इनको कुछ हम दे सकते हैं, यह सोचना भी पाप है।
- 2:55तुम देवताओं को कुछ नहीं दे सकते। तुम पित्रों को कुछ नहीं दे सकते
- 3:03कुल देवताओं को कुछ नहीं दे सकते जो सदा ही तुम्हारे माँ बाप दादा
- 3:11दादी बनकर तुम्हारा पोषण करते रहे तुम्हारे बुर्की बुर्की तुम्हारे
- 3:15मुख में डालते रहे। अब आज तुम उन्हें कल आओगे जबकि
- 3:19उनके शरीर ही नहीं खाने का संत पुरुषों ने ये विधान बनाया था।
- 3:28किसी और कारण से लोभियों ने इसे डाल लिया किसी और कारण से।
- 3:34संत पुरुषों ने प्रधान बनाया था कि जैसे हम अपने बुजुर्गों के जो
- 3:40की उनकी जायदाद संभाले हैं तो एहसान वश उनको याद करके ये 15 दिन
- 3:50बनाए गए। उनको याद करके सबसे पहले तो हमें
- 3:55शरीर दे के गए जिसका कोई मोल नहीं फिर हम अपनी वरासत दे के गए तो
- 4:06उनका एहसान हम कैसे भूलेंगे? यह ऋषियों ने 15 दिन मनाया था।
- 4:15और 15 दिन बनाये थे कि तुम अपने पूर्वजों का आभार व्यक्त कर सको।
- 4:27उनकी याद में जब तुम याद करोगे उन्हें।
- 4:33तो उनके अहसानों से अनुग्रहीत हो जाओगे, अश्क आँखों से बहेगा उनको
- 4:40याद करके उनकी कुर्बानियां, रातों रातों की नींद उन्होंने खराब की।
- 4:47तुम्हारे लिए तुम बच्चे थे। माँ ने तुम्हें पाला रात को 20
- 4:58बार तुम पेशाब कर देते थे सर्दी का दिन, सर्दी की रात और माँ खुद
- 5:07गीले में सो जाती थी। तुम्हें सूखे स्थान पर सुलाती थी,
- 5:14तुम 1 दिन ज़रा ये करके देख रहा हूँ, तुम्हें पता चल जाएगा वह माँ
- 5:23जो तुम्हें नौ महीने अपने पेट में तुम्हारा वार्ड होती है।
- 5:28तुम ऐसा करो। पांच किलो की ईंट, तीन किलो की
- 5:31ईंट होती है और पेट से बांध के 124 घंटे लटका के दिखा दो हमारी
- 5:40आंसड़िया बाहर आ जाएंगी, ये माँ का बड़ा है।
- 5:47माँ बाप पितर के अनुग्रह के लिए बनाए गए थे, दिन उनको कुछ देने के
- 5:57लिए नहीं, उनका एहसान मंदी के दिन थे।
- 6:03कौन को याद करो तुम ना भी याद करोगे।
- 6:07तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि आज तो सारा सिस्टम ही भ्रष्ट हो
- 6:12गया है। भूखों को भोजन कराना ना के
- 6:20ब्राह्मणों को क्या प्रथा से? अगर ब्राह्मणों ने अपनी चालाकी से
- 6:32क्योंकि लिखने पड़ने वाले ब्राह्मण थे, ये शब्द ब्राह्मण
- 6:37लिख दिया और उनके पेट पहले ही भरे हुए है।
- 6:43यहाँ दुर्गा मंदिर में मैं सुनाया करता हूँ एक ब्राह्मण।
- 6:47ज्यादा खीर खरादी को ज्यादा भक्त होगा।
- 6:50माँ बाप का उस दिन थोड़ा सा ज्यादा अनुग्रह उमड़ता है।
- 6:56श्राद्ध वाले दिन तो कहता है एक कूड़ा और ले लो देसी घी का तो बस
- 7:04पेट भर का। गले तक आ गया बस एक और खा लो कुछ
- 7:12स्वाद भी लगता था देसी घी के मालपुड़े भू खा गया और दुर्गा
- 7:22मंदिर के कमरे में रहा करता था बागीचे के पास।
- 7:27वहाँ लेटा पेट पर आग मैंने कहा क्या हुआ?
- 7:34पंडित जी कहता उस दुष्ट ने पति भोजन करवा दिया है।
- 7:44पेट सांस नहीं ले रहा गना गना दुख रहा है तो चूरन देखा तुम चूरन मैं
- 8:00चूरन ले आया बगैची के चूरन पड़ा रहता था।
- 8:04सुरन ले आया और कागज़ में पुड़ियां में बांध के सुरन और
- 8:11सातवें पानी का ग्लास हैलो पंडित जी ये ले लो।
- 8:16पेट को सांस आना शुरू हो जायेगा और घना घना दर्द कम हो जायेगा।
- 8:21ठीक हो जायेगा। मुझे कहते हो पंडित जी हे
- 8:28ब्राह्मण देव अगर इतनी ही जगह होती तो मैं एक बूढ़ा और न खा
- 8:32लेता उनको तुम और खिलाते हो, नीयत है अभी खाने की।
- 8:42पेट घना घना दर्द करने लग गया है, लेकिन नियत नहीं भर गया।
- 8:49ये चूर्ण खाने के लिए जगह ही नहीं है।
- 8:52अगर होती तो एक पूड़ा और खा जाता। देवताओं के नाम पर आपने देखा होगा
- 9:03ये आजकल भीख मांगने वाले कोई काली का रूप, कोई दुर्गा का रूप, कोई
- 9:11शंकर का देवताओं के रूप धार के भीख मांगते हैं।
- 9:26सत्यो को विकृत कर लिया गया। देवी देवता एनर्जी हैं, शक्ति
- 9:37हैं, ये जो आपके पूर्वज हैं, जो चले गए वो दे ही हैं समझना बात
- 9:44को। उनमें से 90 से लेकर 99% तक
- 9:57प्रकृति सात के साथ गर्व दिलवा देती है।
- 10:03ये जो रस्म चौथरा होता है, मैंने कल भी बताया।
- 10:09ये बहुत अतिरिक्त आत्मा है जो जल्दी से जाती है।
- 10:13मुझे घर मिल जाए क्यों तड़पती भरती है घर के लिए तो प्रकृति
- 10:21उनकी तड़पने को देख कर उन्हें। चौथे दिन ही गर्व उपलब्ध करवा
- 10:24देती है। अब 13 दिनों के बाद भोग डालते हो
- 10:31और कुछ आत्माएं अभी मोह वर्ष फिरती रहती है।
- 10:36घर में ये मेरा कमी था, ये मेरी फ्रेंड थी, मेरी धोती थी मेरा
- 10:41तिलक। मेरा जनेऊ उनसे चिपटी रहती हैं।
- 10:4813 दिनों के बाद प्रकृति उन्हें गर्व उपलब्ध करवा देती है।
- 10:52मैक्सिमम 13 दिन देखने वालों ने ऐसा देखा है।
- 11:01मैंने भी ऐसा ही देखा है। बहुत सी आत्माएं तो तत्व क्षण
- 11:07शरीर के बिना वो रह नहीं सकती। क्यों शरीर को अपना होना माना है?
- 11:12उन्होंने अब कुछ न कुछ तो चाहिए जिसे अपना होना मान ले।
- 11:19तो शरीर की तरफ बड़ी गहरी होती है और प्रकृति उनकी तरफ को भाँप लेती
- 11:24है। मैंने ऐसे ऐसे केस देखे हैं।
- 11:28इधर से शरीर छूटा, आग लगाई या दफन किया और अगले ही 24 घंटों में
- 11:36प्रकृति उन्हें नया गर्व उपलब्ध करवा देती है।
- 11:41मैंने बाबा से पूछा ये 24 घंटे बाबा ने मुझे बताया कि इतनी तड़पन
- 11:49में थी ये अगर इनको प्रकृति गर्व न देती, प्रकृति तुम्हारे लिए काम
- 11:55करती है, प्रकृति तुम्हारी सेविका है।
- 12:01तो इतनी तड़प थी शरीर को, ये मैं समझता था जैसे तुम सभी समझते हो
- 12:08अगर बहुत ज्यादा ऐसा व्यक्ति कोई मर जाए जो इरशालू स्वभाव का है,
- 12:16देश रखता है। नफरत फैलाता है, वह शरीर को मैं
- 12:23समझता है। मैं शरीर हूँ और शरीर की
- 12:27संपत्तियों को गद्दियों को, धन को मकान को जायदाद को मैं समझता है
- 12:35मेरी समझता है। ऐसा व्यक्ति तड़पेगा तुम इधर
- 12:41तोपों की सलामी देते होगे और वो घर ढूंढता फिर रहा होगा।
- 12:46हाय मेरा घर कहाँ गया तो प्रकृति ऐसे आमतौर से राजनेताओं को अगले
- 12:53ही दिन गर्व मईया फरा देता है। तोपों की सलामी तो आप बाद में
- 13:01देते हो, वो पहले ही घर में घुस जाते हैं।
- 13:05जा के प्रकृति उन्हें छटपटाते हुआ देख नहीं सकती।
- 13:09प्रकृति बड़ी दी। इसका उपयोग करना।
- 13:21ये भ्रांतियां और ये भ्रांतियां डर पैदा करते हैं।
- 13:27ये बनाई गई थीं उनके प्रति अनुगृहीत होने के लिए बस याद करो,
- 13:33पता है वो है तो है नहीं। खत्म तो उसी दिन हो गए थे जीस दिन
- 13:38घर से आपने जाके उन्हें दफन कर दिया था या दहन कर लिया था दफन और
- 13:46दहन के बाद बस उनका वजूद तुम्हारे लिए खत्म फिर कभी वर्ष भर में दिन
- 13:55आएगा। वर्ष भर में 1 दिन अपने बुजुर्गों
- 14:01की स्मृति में आएगा। जो भी अपने प्यारे जिनके साथ कुछ
- 14:08सुनहरे पल भी बताए, कुछ कटु पल भी बताए।
- 14:15तो उन कटु फूलों की याद आएगी मैंने ऐसा क्यों किया?
- 14:18अपराधबोध पैदा होगा और प्यारे सुनहरे फूलों की भी याद आएगी।
- 14:25काश वो हमारे बीच बैठे होते आज एक छत्रछाया की तरफ।
- 14:33अगर छोटा बच्चा आपका कोई चला गया और न जाता और प्यार भरी मुस्कान
- 14:40खो गयी आज उसको याद करके ये अनुग्रह के आंसू में आएँगे
- 14:51तुम्हारी आँखों से। इसलिए ये 15 दिन ऋषियों ने एक
- 14:58कैथोड से के लिए बनाया था। तुम्हारा अचेतन खाली हो जाए।
- 15:04अचेतन में बहुत सी ज्यादा उसकी भरी पड़ी है हर वर्ष शरद के दिन।
- 15:12उसे याद करोगे और जो दमित की हुई चीजें उनके रहते, आप उन पर गुस्सा
- 15:20हुए और सब कैथल से सो जाएंगे, तुम्हारा अचेतन खाली हो जाएगा।
- 15:27वे तो था ये। बना लिया लोग ने अपने लिए और तुम
- 15:36अब डरने लगे, अगर नहीं करेंगे तो वो नुकसान करेगा क्योंकि इन्होंने
- 15:42डरा दिया। मेरे पड़ोस में एक मित्र रहा करते
- 15:55थे। उनको आकर किसी ने कहा कि तुम्हारे
- 16:04बुजुर्ग रात को मुझे सपने में मिले और क्या है कि उनके शरीर के
- 16:11ऊपर डोती तो थी, कुर्ता नहीं था। तो मैंने कहा ताऊ ये कुरता कहते
- 16:23भी वो फट गया, नंगले बदन हो मुझे ठंडी लगती है, देखे को कभी ठंडी
- 16:30लगती है सी तुषण। सम शीतोष्ण न सर्दी लगती है, न
- 16:38गर्मी लगती है। लेहि का वस्त्र जो है, उसको ठंडी
- 16:42लगती है, ये हमारे वस्त्र हैं। भगवान ने कहा वासांक्षी जीरण यथा
- 16:48विवाह है और इस शरीर को हम छोड़कर इन वस्त्रों को छोड़कर चले जाते
- 16:52हैं। इन वस्त्रों को ठंडी लगती है।
- 16:55इनके भीतर रहने वाले देही को नहीं लगती तो कहते ताऊ के धोती तो
- 17:04बांटी थी कमीज़ नहीं था। पंडित जी पूछने लगे क्या फिर कहते
- 17:17कह रहे ऐसे बेटे को कह देना मुझे कमीज सिलवा देगा और देना तो
- 17:27ब्राह्मण को होता। था।
- 17:31तो उसने कमीज सिलवा दे। की तो उसने शरारत थी, निग था निग
- 17:41लोग भैया मानते नहीं उनको शरारत वगैरह तो पंडित जी ने अगले शरारत
- 17:51में। गया।
- 17:55उस इनिंग के पास शाम नहीं था। आरा चलाते थे।
- 18:00कहता देखो बात ये तुम्हारी बुजुर्ग रात को दिखे हमेशा फिर
- 18:07जैसे मेरे पिताजी कोई कमीज नहीं थी कहता फिर क्या कहा उन्होंने?
- 18:15कहना क्या था? पहले इनकी दशा सुन ले तब बोलो
- 18:19कहता है वो नंगे जलन होता है ना तो सिर पे साफा था, अब साफा भी
- 18:25इनका 21 गज का होता है और बिल्कुल नगद में कुछ है रहा दो।
- 18:36चादरा दो, बनयान दो अंडरवेयर दो और 21 गज की पगड़ी दो ये सब मांग
- 18:49रहा था कहता मुझे मुझे शर्म भी आती है।
- 18:54नगद और मुझे ठंडी भी लगती है। गर्मियों में गर्मी भी लगती है।
- 19:02मेरे बच्चों से बोलते हैं, ज्यादा कोई बात नहीं।
- 19:11उसे पता था। बुलाएंगे तो मेरे को सारा सामान
- 19:14तो मुझे ही मिलेगा, वो नहीं करो वो पंडित अब पंडित जी ने तो कर
- 19:20दिया अपना एक कमिट दे दिया बस ठीक है, उसने कुछ नहीं किया श्राद्ध
- 19:30मैं मानता ही नहीं तो पंडित जी ने पूछा उनसे?
- 19:35आपने कुछ किया नहीं क्या बात आपको कैसे पता चला?
- 19:40वो नहीं तो बोल रहा था, आपने किया होता तो मुझे ये बोला दे, कह देखो
- 19:48बात यह हमने नहीं किया, इसमें कोई शक नहीं, बाड़ में जाए उसका चादर।
- 19:57हरता है नंगा हरता है भौंकता रह हमने क्या लिया उसे मर गया हमारे
- 20:05लिए मर गया बाग यहाँ से लट्ठू उठा लिया।
- 20:15पढ़ लीजिए आगे आगे हर पीछे एपिसोड नहीं घर तक सांस नहीं लिया उसने
- 20:26ऐसे ऐसे कबाड़े चलते हैं और तुम पे विश्वास कर लेते हो तुम वहाँ
- 20:30पे लोग वृक्षों से पूछते हैं मैंने आपको बताया मैं गोशाला जाता
- 20:37था मेरे साथ एक। भगत हो लिए अब भगत ने जंड का
- 20:44वृक्ष प्रणाम किया दंड व तो मैंने कहा क्या कर रहे हो?
- 20:48ये क्या है? कहते हैं जंड देवता है, मैंने कहा
- 20:52बाकी लेवता है, ये देवता है। मैंने कहा ऐसी की तहसीस के
- 21:00हरामखोर के वो तो कहाँ पीने लग गया?
- 21:05मैंने कहा तू को कांपता है, अरे बुरा गला, मैंने कहा क्या पतूर
- 21:12रहा है? अरे वाह वाह क्या बताऊँ?
- 21:18तेरा तो कुछ बिगाड़ नहीं सकता, मैं क्यों अब तेरा क्या
- 21:23बिगाड़ेगा? तुने तो बोल दिया लट्ठो मेरे
- 21:30मारेगा? मैं अपने भय से डर रहा हूँ,
- 21:36तुम्हें तो कुछ नहीं कहेगा। ऐसी ऐसी तुम्हारी मान्यता है,
- 21:45मेरे लट्ठ मारेगा तुमने क्यों सुना मेरी वो है, उसने तो कह दिया
- 21:53तुम्हें कुछ नहीं कहेगा वो क्योंकि तुम मानते ही नहीं।
- 21:58मैंने कहा अगर मानने और ना मानने का सवाल है, फिर तुम गलती में हो,
- 22:02फिर तुम मत मानो, अगर यत में डराते हैं, कंपन देते हैं, फैलाते
- 22:09हैं तो ऐशो को मारना क्यों तुम मूर्ख हो क्या?
- 22:21ऐसी तुम्हारी मान्यताएँ हैं। इन सभी मान्यताओं को वैज्ञानिक
- 22:28रूप से सॉल्व करता है। जीतने भी।
- 22:33सूक्ष्म रूही हैं सूक्ष्म। शरीर जीने का आदित्य।
- 22:40विशाल डिफैन करने तो ये जो सारी देही जो अभी ओशन में मिली नहीं
- 22:50है, बूंद अभी समुद्र में समाई है। अभी समुद्र के साथ एक आकार नहीं
- 22:57हुई तो वो देही है वो चाहे बुद्धि क्यों न हो।
- 23:01बुद्ध अभी तक समुद्र में समय नहीं कबीर गए, नानक गए, मीरा गई, लेकिन
- 23:09बुद्ध अभी उष्णु लभ में समाये हैं।
- 23:17अभी उनकी करुणा की एक वासना, करुणा भी एक वासना अभी उनकी करुणा
- 23:26की वासना उन्हें एक और के रूप में जन्म लेने के लिए बाधित कर रही
- 23:32है। जन्म लेंगे फिर मुक्त होंगे,
- 23:40थोड़े से कर्म हैं, बही खाता छूट गए हैं सिर्फ जन्म लेने के लिए,
- 23:47फिर जन्म लूँगा, थोड़ा सा और उद्धार कर दूंगा इस जन्म में वक्त
- 23:51से पहले चढ़ गए। करीब साढ़े 7 साल की उम्र और थी
- 23:57इनकी महात्मा बुद्ध की 80 साल की उम्र के करीब इनको लोहार ने
- 24:09वायुनेस फूड दे दिया था। गलती से।
- 24:16साढ़े सात वर्ष की इनकी उम्र और बच्ची थी।
- 24:23अब ये और जी लेते हैं। साढ़े सात वर्षों ने उसमें पूरा
- 24:28कर जाती है। लेकिन खुद ये शरीर चाहते तो न भी
- 24:34छोड़ते क्योंकि जो उस स्तर पर पहुँच जाता है वो जानता है कि
- 24:43दर्द हो रहा है, विषैला है, शरीर है।
- 24:48चलता रहेगा ना छोड़ते कोई बात नहीं लेकिन छोड़ दिया इस करुणा के
- 24:56वश के और मानवता का कल्याण कर जाऊंगा ये भी भावना बड़ी शुभ है
- 25:05लेकिन है भस्म। वाइल्डली, इसको एक्सप्लेन मैंने
- 25:15कर दिया जो देही देही का? मैंने विशाल रूप से आपको डेफिनिशन
- 25:21दिया जो देही अभी समुद्र में समाई नहीं, यानी बूंद।
- 25:29समुद्र में समाई नहीं, जिसे कबीर कहते हैं बोध सामान्य समन्ध में
- 25:36और लास्ट प्रक्रिया है। संबोधि समाधी हो गई, संबोधि नहीं
- 25:43हुई वो भी होनी बाकी है। दंड स्वरूप में नहीं ठहरे हैं,
- 25:53ठहरे हैं करुणा स्वरूप में और अभी भी करुणा कर रहे हैं इनको बुलाओगे
- 26:04ये आपके पास से गुजर जाएंगे निहायत।
- 26:08निहार रथ आनंद देने वाली रूह है, आपको कार है बुद्धं शरणं गच्छा
- 26:19संगम शरणं गच्छां। ये आपके पास से गुजर जाएंगे।
- 26:27विकट परिस्थितियों में आप इनको जाप करो, ये आपके पास से गुजर
- 26:39जाएंगे। पास से गुजर जाना ही काफी है।
- 26:43वो आपको पोजिटिविटी दे जाएगा। आप जीस नेगेटिविटी के कारण
- 26:48समस्याओं से ग्रस्त थे। पोजिटिविटी के कारण आपको कोई न
- 26:55कोई रास्ता मिल जाएगा। पोजिटिविटी रास्ता दिखाती है,
- 26:59नेगेटिविटी भटकाती है। रास्तों से अगर आज की घड़ी देखा
- 27:09जाए तो सर्वश्रेष्ठ करुणा की मूर्ति।
- 27:15जो देही है सारे विश्व में धरती की बात करता हूँ।
- 27:23इस प्लेनेट में सब बुद्ध हैं? अब तीन बार बोलिए बुद्धं शरणं
- 27:32गच्छा। दमम शरणम गछम, संगम शरणम गछम बस
- 27:46भाव होना चाहिए। समर्पण का शरणम का मतलब समर्पण।
- 27:58बुद्धं शरणम गच्छा धमम धर्म संगम इनकी शरण में जाता हूँ।
- 28:09इनकी संघम में 131 लोग हैं। बुद्ध और बुद्ध के साथ 131 लोग
- 28:19संघ में 132 लोगों का जमावड़ा तुम्हारे पास आएगा।
- 28:34तुम्हें रास्ता मिल जाएगा। इतनी पॉजिटिविटी से भरे हुए संघ
- 28:40के साथ जब भगवान बुद्ध कर्णों से युक्त आपके पास से गुजरेंगे
- 28:46ठहरेंगे थोड़ी देर। तो आपको पॉज़िटिव कैसे भरना है कि
- 28:50सबसे बड़ा मंत्र आपको देखिये। बहुत से लोग मुझे कह देते हैं आप
- 28:58हिंदू धर्म में हो। आप बौद्ध धर्म का प्रचार करते हो
- 29:02नहीं नहीं, मैं किसी धर्म में मैं प्रचार करता हूँ।
- 29:08रौशनी का तमसो माजो दुर्ग। मैं अंधेरे से प्रकाश की ओर ले
- 29:15जाओ। मैं किसी धर्म का प्रचारक नहीं
- 29:22हूँ, ज़रा सोचो। दिया, किसी धर्म का प्रचार करता
- 29:28है, दिया मुसलमान के घर भी रौशनी फैलाता है।
- 29:34ईसाई के घर भी रौशनी फैलाता है। हिंदू, सिख, यहूदी कोई भी हो उसके
- 29:45घर रौशनी फैलाता है। अमीर हो, गरीब हो भिखारी हो
- 29:51खानदानी श हो राजा हो, रम को हो उसका धर्म क्या वो फैलाता है धर्म
- 30:01को रोशन को? ऋषियों ने यही मांग की।
- 30:08ऋषियों ने किसी धर्म विशेष का प्रचार करने की मांग की।
- 30:12यही प्रमुख हिंदू धर्म को फैला दे, मुसलमान को फैला दे।
- 30:22ऋषियों ने कहा हम सो मा जो तर्को मैं।
- 30:25अंधकार से प्रकाश की ओर लेज़र और जो संत होगा सही वो ऐसे ही
- 30:36निर्विकार निर्भेद मांग करेगा। मृत्यु और माँ मृत्यु से अमृत की
- 30:49ओर रचा, किसी धर्म का मैं प्रचार करू, दीए की तरह प्रकाश का प्रचार
- 30:59करू, प्रकाश को फैलाने वाला हूँ। तमस की बखिया उधेड़ने वालों बुरी
- 31:09तरह से जहाँ मैं जाता हूँ अंधकार का नाश अंधकार भाग जाता है मुझे
- 31:21देखते हैं। तो कोई हिंदू ना सोचे, कोई बुद्ध
- 31:27ना सोचे, कोई सीक ना सोचे, बहुत बोलता हूँ जप कोई ईसाई ना सोचे,
- 31:39धर्म के प्रचार के तुम हो। धर्मांतरण तुम करते हो, लेकिन मैं
- 31:43कोई धर्मांतरण नहीं करता। मैं प्रकाश फैलाता हूँ, दिये का
- 31:50स्वभाव दिये का धर्म प्रकाश फैलाना ही होता है आज मेरे
- 31:58व्हाट्सएप पे। एक पूरा प्यारा संदेश है किसी
- 32:05बेटी ने मुझे एक संदेश भेजा है बाबा जी मुझे पहचाना प्रश्नवाचक
- 32:20चिन्ह। 2022 के सेकंड अक्टूबर आपने मुझे
- 32:30आपके घर में बुलाकर शिक्षा दिया दिया होगा।
- 32:41मस्तों को क्या पता कौन दीक्षा लेगा और हम ये ही चाहते हैं कि
- 32:48तुम भी हमारी तरह मस्त हो जाओ। अगर हम तुम्हें यहाँ आने की इजाजत
- 32:52देते हैं, बुलाते हैं तो सिर्फ इसलिए कि तुम देख लो कि ऐसा भी
- 32:56हुआ जा सकता है। व्यर्थ ही भटकते मत फिरो दीक्षा
- 33:03दिया होगा, बिटिया ठीक कहती होगी इसके कुछ दिन बाद आपने मुझे ब्लॉक
- 33:12कर दिया, कर दिया होगा ऐसा पाप तो मैं करता ही रहता।
- 33:20अवश्य कोई छेड़छाड़ की होगी, कोई ऐसे मैसेज किए होंगे जो बिल्कुल
- 33:29तर्क से बाहर होंगे, जो तर्क में आ ही नहीं सकता, कुछ तो हुआ होगा।
- 33:36दिमाग तो मेरा मुझे थोड़ा सा पागल ही लगता है, लेकिन फिर भी इतना
- 33:42पागल नहीं कि मैं ईटे मारने लग जाऊं कर दिया।
- 33:46वो ब्लॉक अक्सर मैं कर देता हूँ, लेकिन उसके पीछे कोई कारण होता
- 33:54है। मुझे भयंकर झटका लगा लगा होगा।
- 34:02फिर 1 साल तक रोज़ आपके प्रवचन सुनती रहे, क्या जरूरत थी?
- 34:10लेकिन सुनती रहे तो ठीक। मैं ब्लॉक कर दिया।
- 34:13सुनने का अधिकार तो मैं नहीं जीसको भी मैं ब्लॉक कर देता हूँ।
- 34:18सुनने का अधिकार तो नहीं छीनता? आप बड़े मज़े से सुन सकते हो।
- 34:23बहुत से लोग जो मेरी जानी दुश्मन हैं, उनकी तरफ से मेरी तरफ से तो
- 34:28वो मेरे प्यारे हैं, मेरे अंश हैं।
- 34:33लेकिन उनकी तरफ से जानी दुश्मन हैं वो मेरे, वो भी मुझे सुन लेते
- 34:40हैं। नकल करने वाले जो अपने चैनलों पे
- 34:43डालना होता है वो भी यहाँ से ले जाते हैं, सुन के और बाद में
- 34:48अनसबस्क्राइब कर देते हैं। ऐसा होता ही रहता है।
- 34:52आम बात है एक सार्थक रोज़ में आपके प्रवचन सुनती रही पर 1 दिन
- 35:00आपने प्रवचन के अंदर संकेत दिया। संकेत पता नहीं इनके लिए था कि
- 35:06नहीं? हाँ, मुझे तो याद नहीं भाई, 2000
- 35:09वीडियो में क्या बोल गया? मैं तो रोहित से पूछता हूँ कौन सी
- 35:13वीडियो थी? अरे भाई अगर इतनी ना पी हो तो
- 35:22आपके आपको कैसे पिला पाऊंगा? आपको पिलाने के लिए मुझे पहले
- 35:31इकट्ठी भी तो करनी होती है। इससे पहले के जाम ढल जाएं।
- 35:40सुराही को खुद भरना होता है इसलिए 4:00 बजे तक मैं इंतजार करवाता
- 35:47हूँ। ये थोड़ा भर लेने दो, तुम आओ पर
- 35:53पूरा हो के जाओ और 4:00 बजे के बाद मैं बताता हूँ कभी कभी पहले
- 36:01पूरा भर जाता है ये। तो तुम्हें भला लेता हूँ तो हो
- 36:09गया होगा भाई कोई बात नहीं 1 दिन अपने प्रवचन के अंदर संकेत किया
- 36:19कि मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकता कह दिया होगा, लेकिन उसका
- 36:23पहलू कुछ और भी रहा होगा। पता नहीं मुझे याद है अवश्य कहाँ
- 36:31होगा तुम कोई चोट थोड़ी हो गया उसके बाद मेरा दिल टूट गया।
- 36:45ठीक टूट गया होगा ऐसा पाप तो मैं बहुत बार कर चुका और आपको सुनना
- 36:55बंद कर दिया, बहुत भला किया यही मैं कह रहा हूँ वर्ष भर पहले जब
- 37:01मैंने ब्रो किया था। तभी सुनना बंद कर देता है।
- 37:06ब्लॉक करने का मतलब है कि तुम्हारे तर्क, तुम्हारे प्रश्न
- 37:16इतने उलझे हुए हैं के वो तर्कों में समाहित नहीं होते हैं।
- 37:24आपके प्रश्न अगर तर्कों में समाहित हो जाए।
- 37:26तो मैं आपको ब्लॉक ना करूँ, आपके प्रश्न तर्कों से बाहर होते हैं।
- 37:33जिनको मैं तर्कों से इशारों से भी नहीं बता सकता तो मजबूरी में मैं
- 37:39तुम्हें एक ऑप्शन देता हूँ कि कृपया करके देखो, ये बहुत से लोग
- 37:43बैठे हैं कोरोना मान। किसी के भी शर्त में चले जाओ।
- 37:48मैंने कुछ बुरा किया देवी अगर बुरा किया तो उखाड़ दो, मैं तुमसे
- 37:59कहता हूँ देवी अगर मैंने कुछ बुरा किया तो उखाड़ो ना जनता के सामने।
- 38:05ये ऐसे मैसेज करने का अभिप्राय क्या है?
- 38:10ऐसे लिखते हैं मेरा दिल टूट गया और आपको सुनना बंद कर दिया।
- 38:19यह भी होता है क्या? अरे भाई होता है क्या हो गया?
- 38:27सूरज भी जिसके किसी के ऊपर नाराज होता है।
- 38:31अरे भाई सूरज नहीं नाराज होता नाराज तो मैं भी नहीं हुआ, लेकिन
- 38:39तुमने समझ लिया तो ये मेरा कसूर तो नहीं है?
- 38:43मैंने ब्रो किया है। मैं बोलता हूँ और अगर आप मुझे कुछ
- 38:56ऐसा सुनाना शुरू कर दें, बहुत से ऐसे पहुंचे हुए लोग आ जाते हैं।
- 39:04जो कहते हैं नहीं, बाबा नहीं, ऐसा नहीं होता तो मैं उनको ब्लॉक कर
- 39:07देता हूँ कि भाई ये तो पहले से पहुंचे हुए लोग हैं, कुछ ऐसा ही
- 39:13हुआ होगा। भाई मुझे सत्य बदलने की चेष्टा से
- 39:19युक्त मेरा शिष्य। अगर कोशिश करने लगे तो मेरे पास
- 39:26ऑप्शन क्या है? बताऊँ तो भाई तू तो पहले से
- 39:31पहुंचा हुआ है, तुझे गुरु की जरूरत नहीं है।
- 39:35तू कृपा कर तू लोगों को समझा। इसलिए मैं ब्लॉक कर कोई कारण रहा
- 39:44होगा देखो हाँ पागल तो हूँ थोड़ा थोड़ा हूँ, लेकिन इतना नहीं हूँ
- 39:52कि मैं बाठा मारना शुरू कर दूँ कई लोगों को।
- 40:02स्वप्न आ जाते हैं और स्वप्न ऐसे लगते हैं जैसे सत्य हो, क्योंकि
- 40:07जो दिन भर सोचते हैं वही सपने में आ जाता है तो मैंने अपनी बुद्धि
- 40:11से सोचा तुम स्वतंत्र हो, सोचने का मैं कैसे रोक सकता हूँ?
- 40:19मैंने कुछ बुरा भरा कहा हो ब्लॉक? और मैं सूरज तो हूँ नहीं, मैं तो
- 40:28गुरु हूँ, सूरज तो कभी भी बंद नहीं होता भाई, तुम्हारे लिए यहाँ
- 40:36अँधेरा हो जाता है तो तुम सूरज को गालियां मत निकालना।
- 40:40और सूरज कहीं और जांच न करेगा। धरती घूमती है सूरज नहीं उगता
- 40:49मेरा प्रकाश तुमने लेना बंद कर दिया कोई कारण रहा होगा तो कोई और
- 40:57ले रहा है। मैं बोल तो रहा हूँ लगातार देवी
- 41:04तुम तो 2 साल पहले की बात कर रही हो, मैं तो 2 साल से लगातार बोली
- 41:09चले जा रहा हूँ तुमने सुनना बंद कर दिया बिल्कुल ठीक किया।
- 41:19बस छोड़ा था। सर फिसली अगर पहुँच गई हो तो घर
- 41:22बैठो, लोगों को समझाओ सत्य की बात मत आओ अगर नहीं पहुंची है तो बहुत
- 41:30पहुंचे वो लोग पांडार लगाए बैठे हैं, उनकी शर्ट में चले जाओ।
- 41:35यही तो ऑप्शन है। मैंने बताओ तो मैं गलत क्या किया?
- 41:40कुछ कारण तो दो, कोई तर्क तो दो ऐसा भी होना है क्या?
- 41:47हाँ हो गया होता क्या तो मैंने सुना है।
- 41:57एक अंबानी नाम का आदमी था, वो कपड़े का व्यापार करता था, अंबानी
- 42:04सेठ के बाद नहीं। अंबानी नाम का आदमी था वो।
- 42:06यह सच्ची बात है उसका नाम अंबानी। मुकेश अंबानी के बारे में जानना
- 42:10चाहते हैं मुकेश अंबानी? भारत के सबसे अमीर?
- 42:13व्यक्ति है कपड़े के गट्ठर बेच के आते।
- 42:14हैं, इंडस्ट्री के अध्यक्ष हैं। छोटी सी दुकान भी थी दुकान में आ
- 42:18जाता है कोई ग्राहक। जो तेल गैस।
- 42:20ग्राहक जो आपको पता है कि मोल तोल तो होता है।
- 42:23काम करती है अगर आप पुराने जमाने के बाद और मैं भी पुराने जमाने का
- 42:27आदमी बोल सकते हैं। मुकेश अंबानी का जन्म कहाँ हुआ
- 42:30था? रिलायंस इंडस्ट्रीज क्या करती है
- 42:32मुकेश अंबानी? तो ग्राहक उसके पास आ गया।
- 42:35अंबानी के परिवार से शस्त्र जमा न था।
- 42:37या फिर आप कोई और अंबानी के बारे में जानना चाहते हैं?
- 42:39तो आप उनका प्रूष ने एक सूट पसंद कर लिया।
- 42:42आपके अंबानी के बारे में। अधिक से।
- 42:44अन्य जानकारी अंबानी एक। सूट पसंद कर लिया और कई लोग हैं,
- 42:49जिनमें। हाँ ये ये क्या भाव?
- 42:51मुकेश अंबानी के पिता थे और उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज की
- 42:54स्थापना की थी। मुझे उम्मीद है।
- 42:56कितने गज्जे चाहिए? ये उपयोगी होगी।
- 43:00ठीक है तो मैं बेबी आपको ₹3 बार आने लगा दूंगा।
- 43:10गाज के ₹3 बारानी सस्ते ज़माने की बात कर ₹3 बारानी तो भाई ज्यादा
- 43:16है। स्त्रियो को कोई कपडा बताता है कि
- 43:20मैं ₹3 बारानी में कोई धरती बताती है।
- 43:24मेरी कीमत क्या खरीदार पे? और विक्रेता पे डिपेंड करता है और
- 43:31आपस में जहाँ सहमति हो जाती है वो भाव बन जाता है तो कपडा नहीं
- 43:36बताता मैं कैसे भाव को हूँ, कोई भी चीज़ नहीं बताती क्या किस भाव
- 43:41की है ग्राहक बताता है। या बेचने वाला वज़न बताता है?
- 43:48दोनों में सहमति जहाँ हो जाती है वो भाव है।
- 43:53कहती ₹3 बारहण तो भाई ज्यादा हैं मैं तो भाई इसके ₹3 पूरे दूंगी
- 44:02पूरे ₹3। बाराने नहीं ये बहुत ज्यादा है तो
- 44:05बाराने तो बहुत होते थे उस ज़माने में उस ज़माने में तो एक पैसा ही
- 44:11बहुत होता था ये तो बाराने कटा दिया तो उसने थान एक तरफ़ा ये
- 44:19एक्टिंग वेक्टिंग तो करते है ना? अब वो देख रही देखती रही उसकी तरफ
- 44:25इसने तो ध्यान एक तरफ रख दिया क्या हुआ कहता भाई नहीं पड़ता पर
- 44:33चल तू ऐसा कर तू ₹3.25 ले ले। तुष अंबानी ने सूट उठाया सूट
- 44:45उठाके कैंची का ट्रक लगाया अब सुनने वाली बात है तोस कैंची का
- 44:56ट्रक लगाया, पर कहते देख बा सुन अब मत बोल ना तेरी।
- 45:01ना मेरी अब तू 3.25 कह रही है मैं ₹3 बाहर आने कह रहा हूँ ना तेरी
- 45:07ना मेरी ये ले साढ़े तीन उसके घरवाली चिल्लाए अरे कम्बख्त चादर
- 45:21बाट दिया अपना। तो कई देवीयों को ऐसा सुपन आता
- 45:29है, देवताओं को भी आता है ना तेरी ना मेरी ये ना साढ़े 3:00 बजे वो
- 45:36अपना जो डाल रखा था ना चादर, सोते वक्त वो तो घरवाली सिलाई।
- 45:46अरे मूर्ख महंगा हो गया, तुने अपना छात्र में पड़ दिया वो हो हो
- 45:54उठा जल्दी से डका अपने आप को ऐसी कल्पनाओं में बहुत से लोग खोए
- 46:01रहते हैं। इसमें मेरा तनिक भी कसूर नहीं है।
- 46:07अब सुनने वाले भी ज़रा जज कर ले, अगर मेरा कोई कसूर हो तो बता दे
- 46:13मैं बोलता हूँ किसी को अच्छा नहीं लगता, वो मुझे छोड़ के चला जाता
- 46:18है ना मुझको कोई आपत्ति होती है उसमें?
- 46:22तो फिर अगर मैं किसी को ब्लॉक कर देता हूँ उससे क्या करती है?
- 46:26और मुझको जब चाहे छोड़ सकता है मैं जब चाहूँ उसे छोड़ सकता हूँ,
- 46:31दोनों स्वतंत्र हैं भाई कोई किसी को बांधने की एक्स्ट्रा ना करे ये
- 46:36गुरु और शिष्य का। कुछ रिश्ता ही ऐसा है।
- 46:44अवश्य दीक्षा दी होगी, लेकिन देवी मैंने दीक्षा को तोड़ दिया।
- 46:52तुम्हारी तरफ़ से एक वर्ष लगा तुम सुनती रही अच्छी बात लेकिन मेरा।
- 47:00मेरा ब्लॉक कर देना इस बात की सूचना है कि मैं तुम्हारा भार
- 47:08नहीं उठा सकता असमर्थ हूँ, मेरा कसूर थोड़ा ही है अगर कोई मैं एक
- 47:17क्विंटल बोझ लेके नहीं चल सकता भाई।
- 47:21तो मैं इसमें कोई पापी थोड़ी ना कह लूँगा लेकिन टीट ऐसा किया गया
- 47:28है इस देवी के द्वारा जैसे मैंने कोई गुनाह किया आगे बड़ी मजेदार
- 47:37बात और भी लिखते हैं। अनब्लॉक कर दिया।
- 47:57आज भी सूरज भी किसी के ऊपर नाराज होता है क्या?
- 48:04सूरज तो नहीं होता नाराज? लेकिन इधर से नाराज हो जाता है
- 48:09अँधेरा हो जाता है, अमेरिका की तरफ से ना हो जाता है अमेरिका से
- 48:15नाराज हो जाता है इधर हो जाता है अमेरिका वाले समझते रहे है नाराज
- 48:19हो गया भारत वाले समझते रहे है नाराज हो गया नाराज तो मैं किसी
- 48:25पे नहीं हूँ। मैं रौशनी भी खेलता जाऊंगा।
- 48:36दीप से दीप जलाते चलो। दीप से दीप जलाते चलो प्रेम की
- 48:53गंगा बहाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो।
- 49:05राह में आए जो दिन दुखी राह में आए जो दिन दुखी सबको गले से।
- 49:22लगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो।
- 49:33थोड़ा सा आगे सुन लो लेकिन इस तरह के ना तुमसे मेरी कर वध प्रार्थना
- 49:41है। कहीं ना कहीं तड़प से रह गए।
- 49:49ये गांठ जो बंट गई अवश्य ही किसी कारण से बंधी होगी।
- 49:54वो कारण से खुद जानती है। वरना कोई किसी तरह की कोई गुस्सा
- 50:05होने वाली बात तो नहीं है। देखिए यहाँ पांडा लगाए बैठे हैं
- 50:10भाई, किसी के पास कोई आज मैं कोई मैं सारी दुनिया को कैसे संभाल
- 50:18सकता हूँ? पर दुनिया को संभालो, इन सारे
- 50:26पागलों को कैसे सुना सकते हो? आगे शब्द क्या लिखती हैं समझ रहा।
- 50:36आज भी इस दर्द को लेकर आप मेरे दिल में हो बाजीराव कमर आहिष्मति
- 50:48बाबा पुत्र तुम्हें तुम्हारी मंजन मिले।
- 50:59मैं ऐसी प्रार्थना करता हूँ, लेकिन मैं तुम्हारा बोझा उठा के
- 51:05चल नहीं सकता। आई ऍम अनेबुल टु डू सो नाम नहीं
- 51:11बताए मैंने। मैं भी तो 1 दिन चेतना के
- 51:20सर्वोत्तम स्तर पे पहुँचोगे 1 दिन अब ये देखिए ये सबसे बड़ा प्यारा
- 51:27है। आखिर असलियत सामने आ ही गई।
- 51:35जाताजाता आदमी अपनी असलियत बिखैर जाता है, मैं भी तो 1 दिन चेतना
- 51:43के सर्वोत्तम स्तर पर पहुंचूंगी तब मुलाकात होगी।
- 51:55बिटिया तुम सर्वोत्तम चेतना के सर्वोत्तम शिखर पर कभी नहीं
- 52:02पहुंचोगे। ये मेरा अभिशाप नहीं है।
- 52:09एक सत्य है क्यों? क्योंकि मन में मैल रखने वाला
- 52:18इच्छा, द्वेष, नफरत रखने वाला व्यक्ति परमात्मा के कृत पटक भी
- 52:24नहीं सकता। तुम चेतना की सर्वोत्तम ऊंचाइयों
- 52:27को छूने की बात करती हो, भूल जाओ। वहाँ जाकर ईशा और बदला लेने की
- 52:36भावना उससे मिलों पहले छूट जाती है।
- 52:40देवी तो वहाँ अभी पहुंची नहीं है, अभी बोल रही हो।
- 52:51लेकिन तुम्हारा मनसूबा फेल हो जाएगा अगर तुमने ये बरकरार रखा
- 53:02इसको छोड़ दो तुम बच्ची हो, मेरे लिए बच्चों के समान ही हो।
- 53:13मैं तुम्हें ये राह दिखाऊंगा, गुरू था, लेकिन आज नहीं, लेकिन
- 53:22फिर भी दीपक तो राह ही दिखाता है। चेतना के सर्वोच्च शिखर पे 1 दिन
- 53:31तो मैं पहुँच जाउंगी, वहाँ मुलाकात होगी, बिल्कुल मुलाकात
- 53:34होगी रोज़ मिलते हैं हम कबीर, नानक कृष्ण कैश जंगल में अकेला
- 53:45है, मुझे जाने दो। खूब गुजरेगी, मिल बैठेंगे दीवाने
- 53:51तो आना कोई बात नहीं, लेकिन मेरी एक बात सुन लेना कृपा करके इस वैर
- 54:02भाव को त्याग तो? अगर उस चेतना के उच्चतम स्तर पे
- 54:08पहुंचना चाहते हो, चेतना का उच्चतम स्तर इस भावना को लिए लिए
- 54:18नहीं मिलेगा देव ये छोड़ना है नफरत ईशा द्वेष जे आग जननी।
- 54:28ये लड़ाई झगड़े, ये भेद बुद्धियां ये राजनीतिज्ञों का काम है
- 54:33बेटियां ये साधकों का काम नहीं है।
- 54:41अच्छा किया मैंने ये प्रश्न क्यों लिया?
- 54:43कोई कारण हाँ जाने कुछ लोग। दिल में आग लगाए बैठे हो, बस वो
- 54:55इससे प्रेरित हो जाएं तो इससे कोई सबक ले लें कि इस आग को जितनी
- 55:01जल्दी हो सके बजा दे और अगर तुम शरीर को मुझे मैं समझती हो।
- 55:10तो मुझे हफ्ते में दो बार मारने की धमकियों आती है।
- 55:18कोई नहीं आया। हम इंतजार करेंगे क्या मतलब?
- 55:28खुदा करें कि कयामत हो और वो आए वो आए नहीं हैं।
- 55:36बड़े सालों से धमकियों मिलती हैं और अब तो कुछ ज्यादा ही मिलनी
- 55:40शुरू हो गई। पता है मुझे कारण।
- 55:46जब दुकानदारिया बंद होगी लोगों की महंगाई पहले ही बहुत है।
- 55:50भाई रोजगार है और ऊपर से इस धंधे को चौपट में करूँगा तो फिर वो
- 56:03धमकी ही देंगे और बेचारे क्या करेंगे उनकी मजबूती।
- 56:09तो मैं कह देता हूँ भाई ठीक सही है, लेकिन मैं अपना कर्तव्य
- 56:13निभाता रहूँगा। तुम तुम्हारा कर्तव्य निभाता रहो
- 56:22देवी तुम्हें मैं आगाह करता हूँ अगर सुनना बंद कर दिया है।
- 56:31तो मैं मजबूर हूँ तो मैं कुछ नहीं कह सकता, शायद कभी कोई सुन ले।
- 56:40नाम तो मैंने दिया नहीं, लेकिन ईश्वर का।
- 56:47खुदा करे कि कयामत हो और तू आए खुदा करे कि कयामत हो और तू?
- 57:06हाय ईश्वर करे ये बात। तेरे तक पहुंचे इस आग को लिए लिए
- 57:14मरना अगर उस चेतना के सर्वोत्तम शिखर पर पहुंचना चाहती हूँ।
- 57:25अभी भी मैं अपने भूतपूर्व गुरु का दायित्व निभाऊंगा तो तुम्हें एक
- 57:35रास्ता दिखा देता हूँ बिटिया इस वेद बुद्धि को काट दो, किसी के
- 57:40प्रति विधा रखो। ये अग्नि दूसरों को बसम नहीं
- 57:46करेगी नफरत की आँख ईशा और बदले की आँख नहीं, तुम्हारा भाव ऐसा है की
- 57:52वहाँ मुलाकात होगी होगी ईश्वर करे वहाँ मुलाकात होए लेकिन हम कैसे
- 58:01कबीर से मिलते हैं? नानक से मिलते हैं।
- 58:05दादू समझते हैं वैसे ही तुमसे भी मिलेंगे तुम्हें अभी तो मिलने की
- 58:20बात है। अभी तो सर्वोच्च चेतना के स्तर पर
- 58:25पहुँचने की बात है पहले पहुंचो तो।
- 58:29उसका रास्ता बता दे रहा हूँ भटक गई हो दो वर्ष हो गए मुझे दुख है
- 58:36दो वर्ष से ये अहिंसा की आग जल रही है और ध्यान रखना अहिंसा की
- 58:41आंख में तुम जलती हो बेटे मुझको तो पता भी नहीं चलता।
- 58:47सुबह होती है शाम होती है पीए पीए तुम्हें ज़िन्दगी तमाम होती है
- 58:56कौन जाने तुम कहाँ बैठी वेस्ट बंगाल में बैठी जल रही हो मेरे
- 59:06लिए? और ये आदत तुम्हारे दिल में है,
- 59:12अफसोस है और ऐसी कामना करता हूँ कि तुम तक ये वीडियो पहुँच जाए।
- 59:23इतना सा आन से जरूर पहुँच जाए और साधकों से।
- 59:29श्रोताओं से निवेदन करूँगा ये पीस काट के अवश्य दे दे, शायद एक 2
- 59:37मिनट का पीस वो सुन ले और इच्छा को छोड़ दे।
- 59:46क्योंकि ईशा से बदले की भावना से आग से ये खुद ही चलेगी।
- 59:52पुत्री मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, मैं इसी शब्द पे बोल रहा
- 1:00:06हूँ पुत्री नैनम दहती पावका। मुझे तो कोई आग जलाती नहीं और ये
- 1:00:16जो मारने की धमकी देते हैं नैना छिद्दन्ती शस्त्र कोई शस्त्र मुझे
- 1:00:26काट नहीं सकता। और तुम ज्वाला में जल रही हो नैनम
- 1:00:31बहुत ही पांव का यही भगवान कृष्ण का शब्द आज साकार कर दे रहा हूँ
- 1:00:41मैं चैनम। पानी जैसे सुखा नहीं सकती वायु
- 1:00:53जिसे सुखा नहीं सकती पानी जिसे गला नहीं सकता वो अगर वो अमर
- 1:01:01अध्याह है कोई क्लेश। जी हाँ, सब दूरियां मिट जाती हैं,
- 1:01:09सब भेद मिट जाते हैं देवी याद रखो, भेद पहले मिटाने होते हैं
- 1:01:17उसके सुशील में प्रवेश तब कर पाओगी जब तुम?
- 1:01:26इस आग से मुक्त हो जाएगा। जब अहंकार मिलेंगे चेतना के शिखर
- 1:01:36को 1 दिन मिलेंगे, नहीं मिलेंगे देवी अगर तुम ऐसी रही अफसोस।
- 1:01:44ये इच्छा दफन किए किए विदा हो जाओगी शंशा से लेकिन ऐसा मत करना
- 1:01:52मैं तुम्हें कहता हूँ इस आग को दफन कर दो, तुम खुद दफन मत दो तो
- 1:02:001 दिन अवश्य मिलेंगे। और गल बकड़ी डाल के मिलेंगे अपनी
- 1:02:07ईद वहीं होगी तुम देखना लेकिन एक शर्त है इस ईर्ष्या की आँख को
- 1:02:14बोला दो प्रेम की आँख को जलाओ मानवता के प्रति अस्तित्व के
- 1:02:21प्रति। अगर जला दिया तो ईद मनेगी, अवश्य
- 1:02:29मनेगी। अगर न जलाया तो मैं दावे से कहता
- 1:02:33हूँ कभी ईद नहीं होगी देवी तुम जलती रहोगी, बनती रहोगी, राख हो
- 1:02:40जाओगी। ईद न बनेंगे।
- 1:02:48ये शब्द भगवान कृष्ण के नैनम चिरंती शस्त्र हण नैनम, दोहती पर
- 1:02:59न चैनम, गलेगन द्यापू न सुस्यती मरुथा।
- 1:03:08ये सत्य है, है भी सच नानक कोसी भी सच आध सच जुगाद सच है भी सच
- 1:03:18नानक कोसी भी सच। श्रद्धा के लिए सत्य है ये
- 1:03:26तुम्हारी इच्छा मैं पूरी क्लियर लेता हूँ, बस इस इच्छा की आँख को
- 1:03:32निकाल दो मत जलो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
- 1:03:41सदा दिवाली सादकी और आठों पहर आनंद मत जलो मैं तो आनंद की
- 1:03:47कुमारी में झूम रहा हूँ। गंगा का पानी बहुत दूर निकल चुका
- 1:03:53देव गंगा के कितने पानी ने समुद्र में प्रवेश कर लिया?
- 1:03:59तुम्हारी आग अभी जल रही है बुझा दो इसे मत जलाये रखो, राख इस तरह
- 1:04:11भी हो जाएगी और देवी क्या भला न होगा कि दूसरी तरह से राख हो जाओ
- 1:04:17प्रेम में राख हो जाओ। परवाने की तरह क्षमा में जलकर राख
- 1:04:22हो जाओ। हृदय की ज्वालाओं से राख मत हो,
- 1:04:29इस बात को हृदय में संजो लेना, ये कीमती लगा मुझे।
- 1:04:37आज का ये मैसेज इस देवी का मुझे कीमती रहा इसलिए बोला मत जरो
- 1:04:48इच्छा बदले की भावना, द्वेष ये तुम्हें ही जगाएगी।
- 1:04:54जो करता है उसे ही जलाती है। दूसरे को कभी नहीं जलाते हैं।
- 1:05:02दूसरा जो सर्दी में बैठा हूँ, आग की गर्माहट का आनंद तो ले सकता
- 1:05:07है, जलता वही है जो आग में ईंधन बन जाता है।
- 1:05:12तुम ईंधन मत बनो, देवी। हमें तो यही था गुरु हमें तो यही
- 1:05:36था गुरु। गमे यार है हमसे दो गमे यार है
- 1:05:54हमसे दो। वो ही वो जिसे हम ने किस किस यत्न
- 1:06:08से निकाला था इस दिल। सेदु उछलकर कयामत की चला गया
- 1:06:34उछलकर। कयामत की छला गया होई शा अंग का।
- 1:06:53खाया लग गया। वो।
- 1:06:59ही जिंदगी का सवाल गया, वो ही जिंदगी का।
- 1:07:13सवार आ गया, वे शान का ख्याल आ गया।
- 1:07:33अभी तक तो हो तो पे था अभी तक तो हो तो पे था।
- 1:07:53मोहब्बत का एक सिलसिला बहुत शादम थे हम।
- 1:08:12भूलाकर अचानक ये क्या हो गया? बहुत शादमाते।
- 1:08:31हम उनको बुलाकर अचानक ये क्या हो गया के जहरे।
- 1:08:48फिरंगे मला लागया के चेहरे पिरंगे मला लागया।
- 1:09:09होई शान उनका ख्याल आ गया वही ज़िन्दगी का।
- 1:09:28सवाल गया, ईशान का ख्याल लग गया। श्री कृष्ण गोबिंद हरमुरारी।
- 1:10:06नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी नाथ ना?
- 1:10:24रहा न वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी अनाथ नारायण, वासुदेव।
- 1:10:46प्रीतुमात स्वामी सखा हमारे प्रीतुमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:11:04हे नाथ नारा यन वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:11:24हे नाथ नारायण वासुदेव हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:11:38गोविंद। हर मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव
- 1:11:51पितुमात स्वामी सखा हमारे। पितमात स्वामी सखा हमारे हेनाथ
- 1:12:08नारायण वासुदेव। स्वेतृष्ण गोविंद हरे मुरारी ए
- 1:12:29नाथ नारायण वासुदेव। धन्यवाद।