Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 May 25 - शिव और शंकर में क्या फर्क है? चेतना का संचार कहां से होता है? Very Deep Theme | Must Listen |
Transcript
- 0:05बाबा जी, प्रणब, शिव और शंकर में क्या फर्क है?
- 0:23जैसे। ब्रह्म और ब्रम्हंड ब्रह्म और
- 0:32ब्रम्हंड विषय थोड़ा सा गहरा। है।
- 0:43कोलाहल से दूर चले जाइए। एक कांत में बैठकर मेरी वीडियो को
- 0:51श्रवण कर ले तो समझ में आए कि अन्यथा गहरी बात है, ये मात्र
- 1:00शब्द नहीं। मात्र तर्क या नहीं?
- 1:06जो आपको कहीं भी समझाया जाएगा। जहर का बिलरी नहीं शाब्दिक ज्ञान
- 1:19नहीं जो आप कहीं। भी बैठ के समझ लो।
- 1:26नहीं तो घोर। चुप्पी में मौन वातावरण में ही
- 1:32सुनना होगा तो आपको समझ में आ जाएगा क्योंकि हम शुरू।
- 1:37करते हैं शिव? तुम्हारे अंतश कब वो।
- 1:45तत्व तत्व मशीष शेर करता वह तत्व। जिसकी मौजूदगी में सब।
- 2:05कुछ होता है। तुम्हें सुनाई पड़ता।
- 2:13है। तुम कहो कि कान सुनते हैं,
- 2:21तुम्हें दिखाई पड़ता है तुम कहो कि।
- 2:26आँखें देखते हैं तुम्हें स्वाद का।
- 2:33पता चलता है। तुम कहोगे जी भा से स्वाद का पता
- 2:39चलता है, तुम सोच लेते हो। तुम कहोगे बुद्धि के कारण।
- 2:50हम सोचते। है लेकिन आपने कभी?
- 2:59ख्याल नहीं किया ये बल्ब जग रहा है, पंखा चल रहा है।
- 3:11एयर कंडीशन चल। रहा है ये सभी यंत्र?
- 3:19है और इन सभी। यंत्रों के पीछे।
- 3:28एक शक्ति है, वह मात्र एक शक्ति है।
- 3:33अगर हम विद्युत की सप्लाई को रोक दें।
- 3:40तो ये सारे यंत्र ठहर जाएंगे, चाहे पानी की मोटर हो।
- 3:47पंखा हो एयर कंडीशन रूम सब ठहर जाएंगे।
- 3:57तो मुझे बताओ सुनने वाला। कौन कान?
- 4:08आँखें सोचने वाली बुद्धि स्वाद। लेने वाली जीव।
- 4:19एक शब्द आता है बीन पग चले सुनें बीन कान्हा।
- 4:38संतों ने आपको। सत्य बताने में कोई कोर।
- 4:42कसर बाकी नहीं छोड़ा और। आप।
- 4:48हैं क्या पुण्य समझूँ? इसमें कोई कोर।
- 4:53कसर बाकी नहीं छोड़ता है। जैसे आप आम आता हो कि हमने नहीं
- 4:58समझे। शिव वह तत्व है जिसके।
- 5:09कारण सुनाई पड़ता है दिखाई। पड़ता है और भी काम।
- 5:14करती है। जीवा स्वाद ले पाती है।
- 5:19त्वचा सपर्श का एहसास करती। है एक हवा।
- 5:24का झोंका आपके पास से निकला गर्मी का दिन थे और हवा का ठंडा झोंका
- 5:32आपको शीतलता दी क्या? तुमने कभी सोचा शीतल तक?
- 5:43स्पर्श तो त्वचा ने महसूस। किया, लेकिन महसूस किसके?
- 5:52कारण किया उस तत्व के कारण अगर वह तत्व ना हो।
- 6:02तो क्या तुम देख पाओगे सुन पाओगे समझ पाओगे स्वाद ले पाओगे।
- 6:19स्पर्श का एहसास कर। पाओगे।
- 6:23बोल भाव के सभी यंत्र बेकार हो जाएंगे।
- 6:30अगर वो तत्व ना हो। अगर ये विद्युत ना हो।
- 6:35अकेला पंखा नहीं रुकेगा। तुम्हारा मोटर पंप भी रुक।
- 6:40जाएगा। एसी भी रुक जाएगा सब रुक।
- 6:43जाएगा। बल भी रुक जाएगा।
- 6:48इसलिए जब वह चेतना शरीर से निकल जाती।
- 6:54है। जीसको शिव कहते हैं।
- 7:12वह उसका फैलाव बाकी रह। जाता है अब यहाँ थोड़ी सी समझने।
- 7:18वाली बात है शिव कौन? और शंकर कोण आपने?
- 7:27प्रश्न पूछ लिया और मैंने। पहली बार सुहाव दे रहा।
- 7:32यद्यपि मुझसे 1000 बार पहले पूछ लिया गहरा विषय है, मैंने कहा
- 7:43आपको बड़े ध्यान से सुनना पड़ेगा। जब वह।
- 7:50चेतना निकल गई तो एक तत्व बचा वह। तत्व बचा जो सर्वव्यापक है।
- 8:12सब जगह विद्यमान है। यही डिफ्रेन्शिएशन आपके।
- 8:21मार्गदर्शकों से होनी चाहिए। शरीर से निकला कौन?
- 8:36तुम आय तक यही समझते। होगे शरीर से देही?
- 8:39निकला लेकिन देही की औकात क्या देहीत मात्र एक कूड़ा कबाड़ा है
- 8:52वासनाओं का, विचारों का, कल्पनाओं का।
- 8:55योजनाओं का, अभिप्साओं का मैं मेरे का संबंधों का मोह का देखी
- 9:09तो सभी तुम्हारी। स्मृतियां पिछले जन्म की इसमें।
- 9:13संग्रहित है। लेकिन याद करो।
- 9:19मैंने एक परोचन में तुम्हें। बताया था कि देही के साथ एक।
- 9:22छोटी सी छेप न? वह भी सफर करती है।
- 9:32और दे ही सफर। करता है इस चेतना के।
- 9:35सहारे अब ये बात तुम। समझना चाहोगे दिमाग से लेकिन?
- 9:39दिमाग से समझ आएगा नहीं, यही समस्या है संत पुरुषों के।
- 9:49तुम चाहते हो हर चीज़। को समझ लेना।
- 9:56पर मैं तुम्हें कहता हूँ सब कुछ यह समझ में।
- 9:59आएगा नहीं। जब संत उस अधरी शाहतों को देख
- 10:07लेता है। तो पटक देता है सब कुछ।
- 10:14सब कुछ छोड़ देता। है।
- 10:17पहले दफ़े उसने देखा। कि मैंने समझाता मैं कर।
- 10:23रहा हूँ। और पहली दफ़े।
- 10:26उसने अपनी नगन आँखों से। उसकी ही।
- 10:29स्वयं की आँखों ने देखा कि करने वाला मैं नहीं हूँ कोई और।
- 10:39संत का ये भ्रम? टूटा तो उसे समझाया वास्तविकता
- 10:46क्या। है और जैसे ही ये भ्रम।
- 10:50टूट गया कि। करने वाला मैं नहीं।
- 10:55आपका कोई कर्म ना बनेगा। आज।
- 11:01तक यही जंजाल तुम्हें संसार। में आने जाने को बाध्य।
- 11:05करता है तुम आ रहे हो जा रहे हो कर्मभोगों को भोग रहे हो?
- 11:13बीज बो रहे हो? अपने अपने वक्त पे।
- 11:16अंकुरित होते हैं, फल देते हैं, वो फल आपको खाना पड़ता है।
- 11:23खट्टा है मीठा है। नुकीला है जख्म करता है।
- 11:27आराम देता। है।
- 11:28जो भी कुछ आपने भेजा वही आपके। सामने आ जाता है।
- 11:37सहज। ही शब्दों से फिर इसे।
- 11:39आगाज़। करें।
- 11:46एक तो यंत्र यह। पंखा।
- 11:49ये ऐसी। ये बल्ब ये मोटर पंप एक यंत्र है।
- 11:55हमारे कान, आंख, नाक, नाक से स्मेल लाती।
- 12:00त्वचा वगैरह। वगैरह, लेकिन ये तब तक।
- 12:08काम करती हैं जब तक। के।
- 12:14इनमें चेतना का संचार होता है। अब वो चेतना का संचार होता कहाँ
- 12:24से है इस प्रश्न को सोचना। यही प्रश्न तुम्हें उलझाए हुए
- 12:36हैं। यही दर दर की ठोकरे।
- 12:38खाने पर विवश करता है। यह।
- 12:43चेतना का संचार कहाँ से होता है? मुझे पता है तुम कहोगे चेतना का
- 12:53संचार होता है आत्मा से बिलकुल। ठीक है, तो क्या?
- 13:01जब शरीर से निकलती है। जिसे तुम आत्मा कहते हो।
- 13:10तो संचार तो बंद हो गया। ये पुर्जे भी रुक गए, लेकिन कोई
- 13:17बाकी बचा। भीतर ये सोचने।
- 13:22का विषय है नहीं मैं। समझा देता।
- 13:24हूँ। यह तुम्हारी समझ में आएगा कि गहरा
- 13:27है प्रश्न। जब चेतना निकल।
- 13:34जाती है देही के साथ? जो चेतना का छोटा सा अंश है।
- 13:39वह तब तक बना। रहता है जब तक के।
- 13:42तुम्हारा देही पूर्ण रूप से गलतान।
- 13:49और। इस चेतना को कहते हैं।
- 13:51शंकर और यह चेतना का। अंश जहाँ से शक्ति।
- 14:03लेता है वो है शिवा। हमारे भीतर दो तत्व हैं।
- 14:13एक शिव, एक शंकर शंकर। तुम्हारे दे ही के साथ।
- 14:19रहता है और शिव? ब्रह्मांड में जमाया हुआ है।
- 14:28ईशा वास्य में तुम सर्वम जगत। के नाम जगत।
- 14:34ये कोई तर्क का विषय। तो है नहीं।
- 14:42और बहुत से व्यक्ति बिना देखे। बिना अनुभव।
- 14:46किये खुद भी ठगे जाते हैं। तुमको भी ठग।
- 14:52लेते। हैं तुम्हारा समय खराब करने ठगी
- 14:54है तुम्हारे साथ। चेतना के दो अंश हैं।
- 14:58तुम्हारे हुए सर एक। जो स्वाभाविक रूप से शुरुआत।
- 15:04से तुम्हारे संग है। जिसे हम देही कहते हैं, देही के
- 15:08संग। चेतना की एक बूँध।
- 15:12वह भी सर्वज्ञ है एक उसके पार। वो विराट जो अखंड दिगदगंतर।
- 15:29दूरदराज अखांड़ सभी स्थान पर फैला।
- 15:34हुआ है। महेश यह।
- 15:41जो देही के साथ चेतना। की एक बूंद है।
- 15:45यह है शंकर। मैं आगे खोलूंगा, शांति रखो, दो
- 16:05तल हैं जो। सर्वज्ञ।
- 16:07हैं जो सब कुछ जानते हैं। जिनसे पूछा जा सकता है।
- 16:16मैंने बहुत बार। अपने प्रवचन में।
- 16:20कहीं सेब कहीं शंकर। का इस्तेमाल किया।
- 16:28चाहे शंकर से पूछ लो। चाहे शिव से पूछ लो।
- 16:38शंकर तुम्हारे। देही के संग चिपका हुआ।
- 16:41है वहाँ से सीधी एक डायरेक्ट? कनेक्शन जाती है।
- 16:48अब ये तुम्हें समझाने के लिए इसको सच उसमें तार।
- 16:53फिट करके ना बैठ जाए। देही?
- 16:58के साथ जो चेतना की। छोटी सी बूंद है वह।
- 17:02सीधी शंकर से मिलती है। पुरुष।
- 17:10देही के साथ जो चेतना की बूंद है। वो जहाँ से शक्ति को प्राप्त करती
- 17:15है। वो समुद्र की चेतना।
- 17:21और देही के साथ जो। चेतना है वो है तुम्हारी वो चेतना
- 17:29जो तुम्हारी निजी चेतना है निजी। एक निजी।
- 17:32है एक सार्वभौमिक दो चेतना है। किसी ने इसको।
- 17:39आत्मा और परमात्मा का नाम दिया, लेकिन कोई समझा नहीं सका।
- 17:44ठीक से। समझा तो शायद मैं भी न सकूँगा,
- 17:51लेकिन ढंग है शायद। मेरे कहने से आप समझ।
- 17:53जाओ बहुत से संतों ने। दो आत्मा और परमात्मा चेतना के दो
- 18:01सत तो लिया है। और फिर कह।
- 18:04सकते हैं। आत्मा ही परमात्मा है, लेकिन।
- 18:08वो है कैसे इसका विस्तार? नहीं करते।
- 18:15आत्मा वो है जो आपकी देही के साथ। चिपती हुई एक छोटी सी आत्मा चेतना
- 18:20की कण उसे हम आत्मा कह देते हैं। उसे हम।
- 18:25शंकर भी कह देते हैं। फार्मूला उसका भी जैसे एच टू वो
- 18:32का होता। है बूंद का।
- 18:34वैसे ही इस। चेतना की कण का बूंद।
- 18:38का? बी फॉर्मूलेशन वही है सर्वज्ञ।
- 18:41है तो आप चाहे। इससे पूछ लो।
- 18:48वही गुण है इसमें। इसका केमिकल फॉर्मूलेशन भी हेच।
- 18:53टू ओह है। जो जो गुण।
- 18:57समुद्र के उस पाणी। में है वो वो गुण तुम्हारी।
- 19:04इस चेतना के भीतर है। इस कण में।
- 19:10क्योंकि उसी चीज़ की एक बूंद का ये एक अंश है समुद्र।
- 19:14का गहरी बातें हैं। थोड़ी से आराम से सुन ले दे ही
- 19:29मैंने कहा दे ही तो निर्जीव है। जड़ जड़ क्यों कहता?
- 19:35हूँ मैं। क्योंकि इसमें सारी वाश में वाश
- 19:38में कोई प्राण नहीं। होते सारी।
- 19:44समृतियां समृतियों में कोई प्राण। नहीं होते हम उसे यहाँ?
- 19:53थोड़ी से ढंग से समझ लेना। जो पर्दे के ऊपर आप।
- 19:59स्क्रीन के ऊपर फ़िल्म देखते। हो?
- 20:06उसमें क्या प्राण होते हैं? क्या क्षेत्रों में प्राण होते
- 20:11हैं? नहीं होते ना लेकिन?
- 20:16जीस वक्त यही दृश्य फिल्माया। गया था।
- 20:21किसी एक्टर के ऊपर किसी एक्ट्रेस के ऊपर किसी भी लाइन।
- 20:24के। ऊपर।
- 20:28तब। उसमें जान थी कि नहीं?
- 20:30थी। तुम कहोगे बिल्कुल।
- 20:33ठीक तो ओरिजिनलिटी क्या हुई? जहाँ फ़िल्माया गया वो
- 20:39ओरिजिनलिटी। जब ये फ़िल्म फ़िल्म आई।
- 20:45गई और फ़िल्म आई तो एक बार। की।
- 20:49उसके बाद सकरीन के ऊपर तो चाहे लाख भर।
- 20:52देख लो आप जब। फ़िल्म आई गई तो प्राण।
- 20:57थे। उन सभी छात्रों के भीतर जो इस
- 21:02फ़िल्म को फिल्मा रहे थे। एक बार ये चित्र खींच लिया गया
- 21:07सारी। फ़िल्म फिल्मा दी गई डब्बे में
- 21:10बंद कर दी गई। फिर ये कहीं भी फिल्मा लो जाके।
- 21:18ये डब्बे के संग संग जाएगा। ऐसे ही है अगला जीवन, तुम ये
- 21:25डब्बा साथ। लेके जाओगे।
- 21:30इसको दे ही कहते हैं अब जो जो डिब्बे।
- 21:34में बंद है फ़िल्म क्या ये स्वयं प्राण है?
- 21:40देखिए, मैं सिर्फ आपको उदाहरण दे रहा हूँ, इनसे चपत मत जाना समझ
- 21:46में। अगर बैठ जाए तो बैठा।
- 21:48लेना। जब यह फ़िल्म फ़िल्मायी गयी।
- 21:53तो जिन के ऊपर फ़िल्माएगी। वो प्राणी थे।
- 21:57उनमें प्राण था, उनमें चेतना थी, जीवन था।
- 22:02लेकिन फिल्माने के बाद जब वो स्मृतियाँ बनके हमने।
- 22:08बक्से में बंद कर ली, फिर। कहीं भी ले गए फिर?
- 22:13किसी भी थिएटर। में जाके फ़िल्म आई हमने।
- 22:16तो क्या वो क्षेत्र प्राणमय थे? तुम कहोगे नहीं थे क्या?
- 22:24इन क्षेत्रों में तुम कुछ छेड़छाड़ कर सकते हो।
- 22:27तुम कहोगे नहीं? क्या इसे बदल सकते हो?
- 22:31नहीं क्यों? क्योंकि इनमे प्राण।
- 22:38तुम्हारे। भीतर जो सारी इस देही।
- 22:43को बनाने वाला तुम्हारी बात नहीं उनमे प्राण नहीं, तुम्हारी
- 22:48कल्पनाएं इनमे प्राण नहीं। है तुम्हारी सारी।
- 22:57व्यवस्थाएँ आगे की। तुमने जो पीछे कर्म किए।
- 23:01उसकी समृद्धियां ये सभी क्षेत्रों की माफिक आपके भीतर फिल्मों की
- 23:10तरह इस। डब्बे में बंद हैं।
- 23:15जिसे हम देही कह देते। हैं।
- 23:18चेतना का ज़रा। भी अंश नहीं है इसमें।
- 23:23सभी प्राणहीन हैं, मैं धीरे धीरे बोल रहा हूँ।
- 23:31ताकि आपके भीतर ये सारी। चीज़ उतर जाए।
- 23:39न वासनो में कोई प्राण तुम कहते हो वासनो बड़ी तंग करते है, मैं
- 23:44तुम्हें कहता हूँ मैं प्राण नहीं हूँ तंग कैसे करते है।
- 23:51तुम कहते हो विचार। बड़ा तंग करते हैं, मैं कहता हूँ
- 23:53विचारों में प्राणी कैसे? तंग करते हैं।
- 23:56मैंने कल के ही प्रवचन में कहा मीरा कहती है जे मेरो मन बड़ो
- 24:03हरानी, जो मद मारती हाथी। मेरा मन बड़ा हराम है।
- 24:13जैसे शराब के मद में। अंधा हुआ हाथ ही दौड़ रहा है।
- 24:22उसे पता नहीं कौन मेरे पांव के नीचे आ जाएगा।
- 24:28मीरा कहती है। जो मन हरामी मैं उसको प्राणवान
- 24:33समझती हूँ। समाधि से पहले मैं उसमें प्राण
- 24:42समझती थी। पता तो अब चला कि यह है मात्र।
- 24:48श्वेत सक्रीन के ऊपर चलती हुई। फ़िल्म है।
- 24:55इनमें प्राण तो ज़रा भी। नहीं किसी वक्त फिल्माई गई थी, आज
- 25:04सिर्फ तुम देख। रहे हो यू कैन सी ओनली इसको बदल
- 25:09नहीं सकते। आज इसमें कुछ भी परिवर्तन?
- 25:16नहीं हो सकता। मेरा मन भरो भरा मेरा कहती है मैं
- 25:28इन। चित्रों के जंजाल में उलझी फिरती
- 25:31रही जब केन में प्राण नहीं थे। अब तुम चित्रों से उलझी फिरते रहो
- 25:42चित्रों ही। से उलझ जाते हो।
- 25:44सच पुचो। मेरे पास रोज़ कॉमेंट्स आती हैं
- 25:50बाबा ब्रह्मशिर का पालन क्या कर? तो क्या हम?
- 25:55रेजिनेश की फलस्वी अपना ले। मैंने कहा वो बेचारा मर गया
- 25:58छोड़ो। उसका क्या है और बात खुद करता है।
- 26:07बंगेडी खंगेडी। और खुद अपनी बात नहीं करता जो 90
- 26:12मिलीग्राम रोज़। की अडायज फॉर्म लेता है।
- 26:19जबकि उसकी मेडिकल डोस पांच। मिलीग्राम है श्रीमान ओशो जी।
- 26:28रोज़ 90 मिलीग्राम डाय जी पाम। साल्ट लेते थे जो।
- 26:36जीपम फैम्ली के साथ कनेक्टेड है लोरा जीपम डाय जीपम अल्प्रा जीपम
- 26:44एटिज़ोल जोपम। एक ही साल्ट हैं, सारे रिकमेंडेड
- 26:58डोस हैं इनकी पांच। मिलीग्राम लेते थे।
- 27:03ये 90 मिलीग्राम 100 मिलीग्राम भी ले लेते थे।
- 27:08यानी जो एक। गोली लेनी चाहिए वो ये।
- 27:1018 गोली लेते थे। क्या इन्होंने डाई जुबान का
- 27:25इस्तेमाल मरिजुयाना भंग? एलएसडी की तरह नहीं किया?
- 27:38क्या इन्होंने जो। बोला क्या वो फिक्स?
- 27:47समाधि से बोला। अब इसके ऊपर विचार।
- 27:52करेंगे हम थोड़ी देर के बाद। इसके अलावा यहीं नहीं।
- 27:58रुके ओशो जी महाराज। रोज़ का 30 सिलिंडर नाइट्रस
- 28:07ऑक्साइड जिसे लिडाफिंग गैस कहते हैं उसको इन हेल करते थे।
- 28:1890। क्षमा करना।
- 28:2030 सिलेंडर लाफ़िंग गैस कहीं। ऐसा तो नहीं द लाफ़िंग बुद्धा
- 28:31बोलकर? उससे पहले।
- 28:35लाफ़िंग गैस का इस्तेमाल। कर लिया।
- 28:37अरे हंसो मत भाई। लाफ़िंग बुद्धा का प्रमोशन करने
- 28:46के लिए आपको। कहते हैं हंसो तुम हंसो भाई।
- 28:51क्या इस जाली हँसने से? तुम सच में हँस पाओगे।
- 28:59एक, यही कबाड़ा है, जो उसे छोड़ गए अपने भीतर बात।
- 29:08को पूर्ण नहीं किए। बात को उसके अंतर मित्तल।
- 29:12पे नहीं ले के। गए यही गलती खा गए।
- 29:19बस तुम शुरू करो गली निकालना शुरू कर दो कुछ भी।
- 29:24शुरू कर दो बोलना। तो भीतर से कचरा।
- 29:27निकलना शुरू हो जाएगा। हो जाएगा, खाली हो जाएगा, सब कुछ
- 29:35नहीं हो पाए। अचेतन इतना भरा पड़ा है।
- 29:41यह खाली नहीं। होगा।
- 29:47इतने जन्मों की धूल इकट्ठी। की हुई।
- 29:50तुम्हें पता है। तुम्हारे कितने जन्म हो गए?
- 29:55और। प्रत्येक जन्म में।
- 29:57हर पल तुमने कुछ जोड़ा। कुछ धूल फांसी और आज।
- 30:04उन धूलों का हिमालय बन गया। तो तुम क्या सोचते हो ये तुम्हारी
- 30:10अग्रण बगड़म करने से निकल जाएगी? ये बहारी मारने से ये कोई वो धूल
- 30:18तो है नहीं ये तो। हिमालय पर्वत बन गया।
- 30:20इतने जन्मों से तुम इकट्ठा कर रहे हो।
- 30:25बस यहीं गलती खा गए हो। कथोरसिस्ट करो बिल्कुल ठीक है।
- 30:32लेकिन मैं तुम्हें एक बात बता देता हूँ।
- 30:36के थॉरसस करने से तुम्हे थोड़ी सहायता।
- 30:38मिलती है मुझे लोग कह देते हैं बाबा।
- 30:41अगर क्रिया योग न करें। तो मैंने कहा थोड़ी सी।
- 30:43सहायता मिल जाती है क्रिया योग से।
- 30:47क्रिया योग से फर्श के ऊपर हम झाड़ू चला।
- 30:50देते हैं। वो धूल इकट्ठा हो जाती है।
- 30:55बस इतना फर्क पड़ता है। क्रिया योग से भीतर का धूल इकट्ठा
- 31:04हो के। चेतना में आ जाता।
- 31:05है चेतन और। चेतन में जो चीज़ आ गई वो है
- 31:09एकस्क्रिट हो अब यहाँ तुम मार खाते हो।
- 31:13समझो आप बात को। जब भीतर की धूल अचेतन से उड़के
- 31:23क्रिया योग के द्वारा या किसी भी चीज़ के।
- 31:26द्वारा या समझ लो आप। ने।
- 31:29सक्रिय साधना बता दी। डायनामिक प्रोसेसर तो वह ब्रेन
- 31:36में आ गया। चेतन में।
- 31:38वह क्या होगा? वहीं?
- 31:44तो परीक्षा की घड़ी है। अब जो भीतर का अगर वासनाय आपके
- 31:50क्षेत्र। में आ गई और।
- 31:52फिर अगर आप इसके साथ चिपट गए तो क्या होगा?
- 31:58उलझ गया वहाँ ज़ोर दिया के नहीं दिया ये छोड़ो।
- 32:07लेकिन लोग समझ नहीं पाए। खुद का चरित्र भी ऐसा ही रहा।
- 32:17जीस व्यक्ति। का संबंध सैकड़ों स्त्रियों से।
- 32:26रहा हो उससे तुम सीखोगे। क्या भगवान कृष्ण कहते हैं?
- 32:37के श्रेष्ठतम व्यक्तियों को? अपना आचरण ऐसा रखना चाहिए।
- 32:42के उनके पीछे लगने वाले। उनके शिष्य उनका अनुकरण करने में
- 32:48गर्व महसूस करें। खैर, भगवान कृष्ण की बात के ऊपर
- 32:58अपनी मत आओ, क्योंकि उन्होंने जितना बड़ा उपकार दिया, इस संसार
- 33:04में आपसोस भी नहीं सकते। 16,001।
- 33:10100 स्त्रियों को स्त्रीयानी राजकुमारियों।
- 33:13को। जो उठा ली गई थी आसपास के
- 33:17क्षेत्रों से और राजकुमारियों को उठा के ले के आए।
- 33:22और अपनी जेलों में ठूंस। दिया नरका सुर के द्वारा बोम्मा
- 33:25सुर के द्वारा। उन पर अत्ताइजार होते थे।
- 33:31बस खाने को रोटी। मिल जाती थी।
- 33:41गोल वर्कर की तरह जनता को इतना बेहाल कर दो कि वह बस रोगियों।
- 33:48से ही तरफ हो जाए। इतना एक व्यक्ति को इतना दे दो।
- 33:54पूरे हिंदुस्तान की संपदा एक व्यक्ति को दे दो।
- 33:58ताकि लोग भिक्षा पात्र उठाए रहें और जब भूख लगे और जीस एक व्यक्ति
- 34:04के पास। है।
- 34:06वह बांटे लोगों से आशीर्वादते। हैं कि जीते रहो यही तो हो रहा है
- 34:15आज और क्या हो रहा है? सबका नंबर आएगा।
- 34:25समझ रहे हो आप सबका नंबर आएगा तुमसे सब छीन लिया।
- 34:31जाएगा एक व्यक्ति को दे दिया जाएगा।
- 34:41फिर तुम कैसे गुलामी करोगे, तुम्हारी भूख तुम्हें गुलामी करवा
- 34:45देगी? मैं थोड़ा धीरे बोल रहा हूँ।
- 34:49ताकि तुम्हें एक एक शब्द। भीतर उतर जाए, हमारा सब बंद हो
- 34:55जाएगा। और तुम्हें पेट भरने के लिए गड
- 35:02बनाना पड़ेगा। आज 80,00,00,000।
- 35:04जनता को मिलता है, बाकी रहे कितने गईया बता?
- 35:08दो। बहुदा परसेंटेज तो आज आ।
- 35:14गई। और।
- 35:16जिसकी खाई है उसकी भरी तो यह शीघ्र ही 140,00,00,000 में भी
- 35:28तब्दील हो जाएगी। तुम घबराओ मत।
- 35:311 दिन यह दृश्य। तुम अपनी आँखों से देखोगे अगर तुम
- 35:36आँखें मूंदे बैठे रहे तो। जागने की वेला बहुत पहले गुजर
- 35:42चुकी है। जो वेला तुमने गवा।
- 35:44दिया। पॉलीमर ओह कहते।
- 35:50हैं कि अगर कोई तानाशाही। शुरू में ही नहीं।
- 35:55दबा दी जाती तो वह। फिर नहीं दबाई जाये।
- 36:00प्रथम चरण पे ही उसको। दवा देना शुभ है।
- 36:06अब। थोड़ा सा मैंने विषय बदल लिया,
- 36:07लेकिन घबराओ। में मैं चौंकूंगा नहीं।
- 36:18एक छोटी सी बात। राष्ट्रपति है, उपराष्ट्रपति है
- 36:22गवर्नर। है, प्राइम मिनिस्टर है।
- 36:28सारी कैबिनेट सारी विधायिका, सारी कार्यपालिका, न्यायपालिका।
- 36:38सारा इलेक्शन कमीशन तुम जानते हो ये कौन है कौन है?
- 36:49ये तुम्हारे सेवा का है। बट तुम्हारी जुबानों को लगाम।
- 36:57ही इतनी। लगा दी गई।
- 36:58तुम्हारी जुबानों के ताले इतने भारी लग गए कि तुम बोलना भी चाहो
- 37:04तो वो तालों का भार। इतना कि तुमसे बोला ही नहीं जाता।
- 37:12और शब्दों में तुम लिख। जाते हो लोका तंत्र काहूँ है
- 37:15लोकतंत्र जब एक व्यक्ति कहता है के प्रधानमंत्री जी तुमने हमारे
- 37:22बच्चों की वैक्सीन बाहर कब भेज दी?
- 37:28तो उसको उठा के जेल में। पटक दिया जाता है।
- 37:30ये न्याय है और न्याय व्यवस्था बोलती नहीं है, ना न्याय व्यवस्था
- 37:40अंधी है, ना बहरी है। सब पता है उसे।
- 37:46तो मैं ये कहता हूँ। क्या न्याय व्यवस्था को स्वच्छ?
- 37:49संज्ञान नहीं लेना चाहिए। या कोई छोटी बात थोड़ी ये थी?
- 37:58तानाशाही का प्रथम चरण तानाशाही। का प्रथम चरण अगर।
- 38:05उस वक्त। डी ऑर्डर कहते हैं, अगर।
- 38:07उसी वक्त नहीं। दबा दिया जाता तो वह।
- 38:12चिंगारी को उसी वक्त दबा दो नहीं तो।
- 38:15भीषण आग बन जाएगी फिर तुम्हारी। काबू से बाहर हो जाएगी और
- 38:18तुम्हारी काबू से बाहर नहीं। वो तो फिर फायर ब्रिगेड के भी
- 38:23काबू से बाहर हो जाएगी। और ये किसी।
- 38:28के लिए भी शुभ नहीं। होगा।
- 38:30भला हिटलर के लिए शुभ? हो हिटलर ने 2,50,00,000।
- 38:33सात में को मार। दिया।
- 38:35उसके लिए शुभ रहा। किसको फायदा हुआ ज़रा बताओ।
- 38:40मुझे ज़रा सोच के बताना। किसी भी डिक्टेटर के काम के कारण
- 38:46आज तक धरती से किसी को फायदा हुआ है, कोई डिक्टेटर ऐसा आया।
- 38:51और मुसलमान नहीं हो। आज जो बैठे हैं।
- 38:59उनमें से कोई इस शानदार परमात्मा की क्रियेशन को।
- 39:06उजाड़ने वाले। कुछ मातृगणित के लोग होते।
- 39:11हैं। और जिसके हाथ में सत्ता आ जाती है
- 39:16वह चाहता है क्योंकि वेतर का लोफ। ये कहता है कि तुम।
- 39:28संसार पे राज़ कर। सकता है ये सब।
- 39:32तेरे इशारे से बोले तेरे इशारे से खड़े हैं आदमी जब उंठा ग्रस्त हो
- 39:39जाता है। तो उसे समझ।
- 39:41नहीं होती कि मैंने करना। क्या?
- 39:44इस। कुंठा।
- 39:45से ग्रसित होकर वह ऐसा। काम करता है।
- 39:49मैंने कर भी बोला। था।
- 39:57सारे सोए पड़े हैं। क्यों अपना तो ठीक से चल रहा है?
- 40:03हमने क्या लिया, बोलेंगे कौन? क्या?
- 40:08गाँधी का ठीक नहीं चल रहा। तुम गाली देना सीख गए, किसी ने
- 40:19सीखा दिया, मुझे पता है। लेकिन तुमने कभी तुम तो जब जन्मे
- 40:26भी नहीं थे। और ये जो सीखा रहा है ये भी नहीं।
- 40:33ये जो सीखा रहा है। इसके जन्मने से पहले।
- 40:36उसकी मौत हो गई थी। इसने गाँधी देखा, गाँधी ने क्या
- 40:43किया जानता नहीं। बस।
- 40:46इसने क्योंकि गाँधी से ऊंचा। उठना है तो इसने गाँधी की और
- 40:53जवाहरलाल नेहरू। की और जीतने भी आज तक।
- 40:56बड़े हो गए उनकी लकीरों। को छोटा कर देना मैं खुद की
- 40:58लकीरों को बड़ा नहीं कर सकता। यही होता है तानाशाह।
- 41:03जो खुद की। लकीरों को बड़ा नहीं कर सकता।
- 41:05दूसरों की लकीरों को छोटा। करने में लग जाता है और यह
- 41:09रचनात्मक नहीं है, यह विध्वंसत्मक होता है।
- 41:16तुम बड़े बन के दिखाओ। भाई?
- 41:22तुम बड़े बन के दिखाओ। इतिहास की बड़ी लकीरों को छोटा।
- 41:29कर देने से तुम बड़े थोड़ी हो। गए और 1 दिन बगावत।
- 41:37तो होनी है। क्योंकि वह एक न्यायकारी
- 41:42व्यवस्था? है।
- 41:43मैं थोड़ा सा। और उधर चला जाता।
- 41:45हूँ। कई बार कई बार इधर रह जाता हूँ।
- 41:48एक न्यायकारी व्यवस्था जहाँ पर है।
- 41:50जो 1 दिन हिसाब तो सबका होता। है।
- 41:54बस ये ठीक है जिसने पाप किए होते हैं मार्कर्स।
- 41:58जैसे व्यक्तियों ने वो कह। देते हैं।
- 42:00नहीं हैं बर्मा। बिल्कुल उस कबूतर की तरह जिसके।
- 42:05सामने बिल्ली खड़ी हो। उसे पता है खा जाएगी तो कबूतर।
- 42:11सोचता है आँखें बंद कर। लेता है बिल्ली नहीं है।
- 42:15बिल्ली नहीं है के कहने से एक्सीलरेक्शन का सिद्धांत नहीं
- 42:18बदल जाएगा। बिल्ली नहीं है।
- 42:23के कहने से परमात्मा नहीं हो जाता।
- 42:27उसका वजूद समाप्त नहीं होता। वह सदा है सदा रहेगा।
- 42:35तुम्हारे कुछ बोलने से तुम्हारे कुछ कहने से।
- 42:39उसका होना। समाप्त नहीं होता।
- 42:44खैर। मैंने दो चेतना के हंश कहे।
- 42:47एक वह जो सर्वव्यापक। अब देखिए इसको।
- 42:51समझने की चेष्टा मत करना मैं तो मैं।
- 42:54बार बार तुमसे कहता हूँ। समझ में जो आ जाए।
- 43:01वह कानून नियम। तुम ये समझ सकते हो कि लव
- 43:08ग्रैविटेशन कैसे काम? करता है।
- 43:11तुम लव ग्रैविटेशन को पैसा नहीं कर सकते, तुम ऐसी व्यवस्था नहीं
- 43:17कर। सकते कि आम लगे।
- 43:20और जब पक जाए तो वह नीचे। न गिरे वह ऊपर।
- 43:25आसमान में चला। जाए, ऐसी व्यवस्था नहीं।
- 43:27तुम कर सकते हो। तुम ऐसी व्यवस्था नहीं कर।
- 43:32सकते के सूरज के गर्द? पृथ्वी घूमना छोड़ दे।
- 43:38या उलट दिशा में। घूमना शुरू कर दे या चंद्रमा
- 43:42घूमना। बंद कर दे या गृह।
- 43:43तारे, नक्षत्र ये सब घूमना बंद कर दे।
- 43:46तुम ऐसा कुछ नहीं कर। सकते तुम सिर्फ ये जान।
- 43:50सकते हो कि इतनी गति से चलते हैं अंडाकार चलते हैं।
- 43:56इतनी। देर का दिन होगा इतनी।
- 43:58देर की रात होगी ये। तुम नियमों को पड़ताल कर।
- 44:01सकते हो और उनकी पड़ताल करके तुम उन्हीं के सिद्धांतों की।
- 44:06बनियाद के ऊपर कोई नई। चीज़ पैदा कर सकते।
- 44:11हो ये तुम्हारे बस में। है।
- 44:15लेकिन मटेरियल कहाँ से लाओगे? मटेरियल?
- 44:21कहाँ से लेके आओ ये जो चिड़िया उड़ रही है ना आसमान में?
- 44:27नस्त्रेदम ने कहा था। लोहे की।
- 44:30चिड़िया आसमान में उड़ेंगे। ये चिड़ियों का मटेरियल?
- 44:37कहाँ से लेके आओगे? यह।
- 44:40फलाद कहाँ से लेके आओगे? यह सामान कहाँ से लेके आओगे यहीं
- 44:45से उठाओगे? उसी की क्रियेशन में से।
- 44:49उठाओगे। ज़रा ज़रा उसी के।
- 44:51क्रियेशन में से उठाओगे। तो?
- 44:57क्षेत्र में के दो स्वरूप। मैंने आपको बताया है।
- 45:00अगर क्या आप को समझाने। के लिए समझ तो नहीं पाओगे आप?
- 45:05क्योंकि सीधा। ससवाल मैं ही कर देता हूँ, तुम
- 45:09मुझे कह दोगे। तुम्हारे।
- 45:11दिमाग में नम दिया है, लेकिन मैं ही।
- 45:13प्रश्न कर देता हूँ। तुम मुझे बड़े आराम से ये प्रश्न
- 45:17कर सकते। हो व्हेन यू अरे सीइंग?
- 45:20ईसा वास्य में दम सर्वम यथ की जगत याम जगत परमात्मा जगत।
- 45:25के कण कण में व्याप्त। है।
- 45:28तो फिर जब वो व्याप्ति ही है, तो यह है।
- 45:30चेतना का स्वरूप। बूंद कहाँ से आ गई बस?
- 45:34यही डिफाइन नहीं किया जा। सकेगा, मैंने तुम्हें पहले बता
- 45:37दिया। इसको कोई भी डिफाइन नहीं।
- 45:42कर सकेगा। मैं तुम्हें एक सत्य बात बताऊँ।
- 45:47बोला तो मैंने बहुत बार। और जब मैंने पहला।
- 45:51प्रदर्शन कहा था। मैंने कहा।
- 45:53था। अगर।
- 45:54इससे सीख जाओ तो बड़ा। अच्छा है।
- 45:56दूसरा प्रवचन मुझे न बोलना। पड़े।
- 46:00लेकिन मुझे दूसरा प्रवचन बोलना। पड़ा।
- 46:04और फिर एक अंत हीन श्रृंखला शुरू हो जाएगी, आचार्यों।
- 46:07की तरह वो तुम्हें समझा कुछ नहीं, आज सुन लो।
- 46:1310 साल बाद सुन। लेना मेरी बात 1000 साल बाद सुन
- 46:16लेना। आज से पहले जीतने आए।
- 46:21वो तुम्हें कुछ नहीं समझा सके। आज के बाद जो।
- 46:25आएँगे वो तुम्हें कुछ नहीं। समझा पाएंगे?
- 46:27मैं खुद तुम्हें कुछ नहीं समझा पाऊंगा।
- 46:33यही विडंबना है तुम ज़रा सोचो। तुम मुझ का एक बाल नहीं बना।
- 46:45सकते बना सकते हो? मैं तो नहीं।
- 46:48बना सकती यही तुम्हारी। नकामी है।
- 47:05यही आकर तुम। असहाय हो जाते हो तुम लाख क्षति।
- 47:11फैलाओ, लेकिन यहाँ आकर तुम। असहाय हो जाते हो उसके।
- 47:15नियमों के आगे तुम्हारा। ज़ोर नहीं उछलता और नियम।
- 47:21ऐसा कि स्टालन भी मरता। है।
- 47:24मसौली तो बड़े गंदे। हिसाब से मरता है और मसौली की
- 47:28मृत्यु देख के। तो होटल कहते थे तो खुद ही मरता।
- 47:31हूँ तो मसौली जब मरता है। तो उसका जो हुशर किया गया।
- 47:41उसके मुँह के अंदर गांद डाला गया। जी ते जी और वह दृश्य मैं तुम्हें
- 47:49बकरा नहीं कर सकता ऐसा बुरा दृश्य मसूर नहीं।
- 47:55तानाशाहों के अंत ऐसे ही? हुआ करते हैं अब मुझे।
- 48:00लोग कहते हैं कि तो योला उठा लेंगे।
- 48:01मैंने कहा कोई उठा नहीं देगा तो। अब।
- 48:05अब झोला को उठाने देगा। अरे भाई, एक संरचना है न्यायिक
- 48:18एक। संरचना है जो हमारे न्याय।
- 48:22नए धीशों की कुर्सी। के ऊपर बैठे जब उनका बीड़ा गर्क।
- 48:28हो जाता है और ये श्वेत जुल्फों। वाले उनके कारणों में बताने।
- 48:34शुरू कर देते हैं वह। गिट्ठा सा स्वच्छ छिड़ गया 40।
- 48:38दिन में मैं घोषणा कर दूंगा। और फिर उन्होंने घोषणा कर।
- 48:43दी और फिर घर जाके। कोटो तरफ तो।
- 48:46उनको एक लफाफा मिल गया। यू आर नॉमिनेटेड बाय दी
- 48:55प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया शर्म की बात नहीं।
- 49:00बताने। वाले के लिए जिसने ये।
- 49:04खेल खेला उसके। लिए भी क्या तुम छाती?
- 49:06को इतना बुरा करना चाहते हो? परमात्मा के विशाल फैलाव।
- 49:13जितनी छाती करना चाहते। हो 56 केय रखना चाहते हो?
- 49:20तुम्हें कोई शर्म आती है? बोलते हुए तुमने?
- 49:23किया क्या आज तक? एक काम बनाओगे?
- 49:29मैं इन श्वेत जुल्फों वाले से अपना नाम भूल जाता हूँ बार बार
- 49:33ऊंट पटांग सा नाउ। तो ऐसा एक्टिंग किया।
- 49:44मैं हैरान हो गया। मैंने कहा अरे तुम्हें तो एक्टर
- 49:47होना चाहिए, अच्छा खासा पिसा कुमार है।
- 49:57मुझे पता है साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट डालने की चेष्टा।
- 50:02है ये और कुछ भी। आप पर साइकोलॉजिकल प्रेशर डालने
- 50:08की व्यवस्था? है ये कहानियों सुना सुना?
- 50:13ऐसे कैसे हो सकता है न्याय की व्यवस्था और ऐसा चरित्रार्थ किया?
- 50:20उसको फ़िल्म स्क्रीन के आगे। के न्यायिक व्यवस्था हार गई।
- 50:27और देखिए अब तो वो रिटायर हो गए बेचारे 6 साल के लिए।
- 50:31कहते हैं मुँह बंद कर दिया। और कमाल की बात है ये जो आज
- 50:37कुर्सी। पे बैठे हैं।
- 50:40वो कोई संज्ञान नहीं लेते। ओके, चलो आकर बात साफ करो।
- 50:48ये तुम्हारी। न्यायिक व्यवस्था के ऊपर एक बट्टा
- 50:51लगा रहा है। व्यक्ति कलंक है ये।
- 50:54ये काला धब्बा लगा रहा। है न्याय बालका के ऊपर।
- 50:57तुम्हें स्वतः से संज्ञान नहीं लेना आता तुम्हारे अंदर पावर है,
- 51:01भाई। तुम।
- 51:04अपनी पावर का इस्तेमाल करो। इसको बनाओ।
- 51:06ये कैसे बोल रहा है इसको ये पावर किसने दी?
- 51:13मैंने तुमसे पहले कहा था ये। जो पंखा चल।
- 51:16रहा है ना? किसी पावर से।
- 51:17चल रहा है। ये पंप चल रहा।
- 51:21है। पानी ऊपर ले।
- 51:22के जाता है। यह किसी शक्ति से चल रहा है।
- 51:26तो बिना शक्ति के तो यह भी नहीं चल सकता।
- 51:30यह श्वेत जुल्फों। वाला इनका नाम क्या है?
- 51:33हाँ पुष्पेन्द्रपुरशेश मैं तो बड़ा हैरान हूँ।
- 51:43और करते का हक? इन्हें उस भीतर के आनंद।
- 51:48का? एक।
- 51:48बूंद का रस नहीं आया कारण तुम्हें मैं बता देता हूँ तुम कोई भी
- 51:53अत्याचार। करते हो कोई व्यक्ति बलात्कार?
- 51:56करता है। कोई व्यक्ति अपराध करता है।
- 51:58कोई व्यक्ति गुस्सा आता है, कोई व्यक्ति कुछ भी करता है, उसकी बेक
- 52:02में एक ही। चीज़ होती है क्या?
- 52:04उसने उस आनंद का रस अस्वादन नहीं किया।
- 52:13तो वह बलात्कार भी करेगा, कतलोकार्थ भी करेगा।
- 52:18हम कृष्ण के ऊपर उँगलियाँ। उठा देते हो?
- 52:2616,100। राजकुमारियों को चंगुल से
- 52:32छुड़ाया। फिर जब उन्होंने हाथ जोड़े।
- 52:37कि समाज हमें स्वीकार नहीं करेगा। हमारे घरवाले तक हमें स्वीकार।
- 52:41नहीं करेंगे। अब प्रभु।
- 52:42ये तो और भी काम खराब हो गए। कम से कम हम पेट।
- 52:47पालन तो कर लेते। हमारा शरीर तो चलता रहेगा, अब तो।
- 52:52हमें भूख से मरना पड़ेगा तो कृष्ण बोले नहीं।
- 52:55भूखा कैसे मरना पड़ेगा? वो थे समाज सुधारक।
- 53:0216,100। राजकुमारियों को अलग से सब बना के
- 53:07दिया खुद राजा। अलग से सबको रखा गया।
- 53:11सबके खाने पीने की व्यवस्था की गई।
- 53:15रहने की व्यवस्था की गई। सुंदर जन्म की गुजरी उनकी।
- 53:23नरक से बाहर। निकले, जंजीरें तोड़ दीं कृष्ण
- 53:26इससे बड़ा समाज सुधार की। जिंदगी में कभी तुमने कभी?
- 53:29देखा? क्रिश्चियन से बड़ा कृष्ण?
- 53:32के महत्त्व को जो जो गहरा खंगालते जाओगे तुम पाओगे।
- 53:39बहुत से लोगों को शर्म आती है इस। प्रश्न से मैं कहता हूँ तुम शरमाओ
- 53:43मत, मैं तुम्हें वास्तविकता बता देता हूँ, तुम शर्म क्यों करते
- 53:47हो? कुछ ऐसा नहीं किया कृष्ण ने।
- 53:56कृष्ण ने कुछ ऐसा नहीं किया जो मर्यादा के वक्त।
- 53:59हो? ऐसे मर्यादाओं में तुम जाओगे तो
- 54:04खुद मर्यादा पुरुषोत्तम। भगवान राम की स्त्री धर्मपत्नी
- 54:11सीता भी राम से संतुष्ट नहीं थी राम।
- 54:17ने जो सीता के संग की आप। दशम भी ना करे।
- 54:23और इतनी दुखित हो गई सीता के आखिर में राम?
- 54:26की वरिसभ में कहना पड़ा। कि ये लो आपके बच्चे।
- 54:31संभालो और माँ धरणी को। कहा कि तू हट जा।
- 54:37क्यों? क्योंकि?
- 54:38इस व्यक्ति ने इतना। अत्याचार किया है कि अब?
- 54:44मेरे मेरे। पास इसके सिवा कोई रास्ता?
- 54:47नहीं है। तू फट जा और मैं तेरे में।
- 54:48समझ जाउं कहानियों हैं लेकिन इनका मतलब तुम समझते हो साझीदार शी
- 54:56कमिट सुसाइड। और राम ने जब देखा भगवान।
- 55:00राम ने कहते तो वास्तव में नास्त। हो गया कई बार अपराधी।
- 55:08व्यक्ति के अपराध बताने से। उसको अपराधबोध हुआ करता है।
- 55:13इस बात को आप ठीक से सुनेंगे। कई बार।
- 55:16अपराधी व्यक्ति के अपराध को बता देने से उसके भीतर अपराधबोध पैदा
- 55:21होता। है कि हाँ, मैंने गलत।
- 55:23किया उसके सामने जब सीता ने। सुसाइड कर लिया।
- 55:29तुम चाहे कुछ भी बेहतर हो। अपराधबोध से भगवान राम आ।
- 55:34गए। हमसे मैं मैं उसे।
- 55:36आज भी। भगवान कहता हूँ।
- 55:38क्योंकि सिर्फ यही काम नहीं है और बड़े।
- 55:41काम किए, जिनके कारण। उन्हें पुरुष उत्तम मर्यादा में
- 55:47नाम दिया गया। इस एक काम के आगे।
- 55:53उनसे मर्यादा पुरुषोत्तम। की डिग्री नहीं छीनी जा।
- 55:56सकती। ये ठीक है।
- 55:58एक व्यक्ति के साथ न्याय। शम्भू के साथ भी अन्याय।
- 56:01हुआ। थोड़ा सा हम।
- 56:05इस पहलू को भी। छू लें।
- 56:09अगर सभी जनता की शक्ति को। एक व्यक्ति को दे दिया जाए तो
- 56:15क्या होगा? उसने इतने जीवों की।
- 56:18संरचना की क्या इसलिए की। सभी की प्रोस्पर्टी यही।
- 56:24तो महात्मा गाँधी ने कहा। जब जार्ज पंचम ने कहा आपके कपड़े
- 56:28कहाँ हैं प्रभु? मिस्टर गाँधी बहरा रोड और।
- 56:36यही तो कहा है कि प्रभु हो तो। आपने सब ने।
- 56:40छीन लिए मेरे कपड़े। मैं तो कुछ थोड़ा सा।
- 56:46लंगोट डाले भी। हूँ मेरे तो हिंदुस्तान।
- 56:49के कपड़े आपने लेडीज। आज ये नहीं हो रहा।
- 56:52क्या यही तो हो रहा है? आज सारी जनता का छीन लिया जा रहा
- 57:00है और एक व्यक्ति को दिया जा रहा है तो जार्ज पंचम को जो।
- 57:06महात्मा गाँधी ने। सामने खड़े होकर बात।
- 57:08की थी। उस ढ़ाई हड्डी के।
- 57:12आदमी ने वहीं आज। कुछ हो रहा है?
- 57:17तुम्हारा छीन। जा रहा है सबका?
- 57:22और तुम सोये करो। ये शिकंजा कसता, कसता कसता तुम्हे
- 57:30पता है ये। और थोड़ा सा बटन होता।
- 57:34जाएगा और यह जो व्यक्ति। पुष्पेंद्रपुरश्रिस्ट हो जाता हूँ
- 57:41नाम याद कर दिया नाम ही बड़े ऊंट भगवान रख लेते हैं।
- 57:49इतने लंबे, लंबे नाम, एक चीनी नाम बढ़िया है शीन।
- 57:54चीन। बढ़िया से निपट जाता है।
- 57:57एक न। अरे भाई ऐसे नहीं दुनिया चला
- 58:07करते। तो फिर वो एक को ही बना देता
- 58:11बाकियों को बनाने की जरूरत क्या थी जरूरी?
- 58:15है उसने इतनी दुनिया पे सब दांतलि मची पड़ी।
- 58:21जो जीसको चाहे मार के खा जाए। क्यों जीसको चाहे काट के खा जाए?
- 58:28जिन वृक्षों के ऊपर तुम। डिपेंड हो उनको काट देते।
- 58:37हैं, फिर चिल्लाते हो गजब की गर्मी है।
- 58:39मारे जा रहे हैं। नेक्स्ट फिर पीके जाएंगे, बाढ़ आ
- 58:42जाएगी, प्रलय आ जाएगी, ये तो ठीक है, आ जाएगी लेकिन।
- 58:45तुम रोकते क्यों नहीं? अभी तो तुम्हारे हाथों में हैं
- 58:50अभी। तो ग्लेशियर पिघले नहीं भाई।
- 58:5350 साल बाद। कहते हैं गंगा का शत्रि इतना ऊंचा
- 58:56हो जाएगा, सब डूब जाएगा। तो तुम।
- 58:59इतना ऊंचा होने क्यों देते हो? ये पागलों की बात ही।
- 59:04है ना 50 साल बाद? इतना ग्लैक्सर पी।
- 59:08लेगा। गंगा इतनी उफान?
- 59:10पे होगी कि सारा कुछ डूब जाएगा। सारा उत्तराखंड हो जाएगा तो तुम
- 59:16डूब। नहीं कौन सकते हो?
- 59:23कल पूछ रहा था। मेरा सेक्शन छोटा सा बच्चा।
- 59:27बाबा फिर क्या होगा? फिर हम कुंभ का।
- 59:29मेला कैसे बनाएंगे? मैंने कहा घर बैठे ही बन।
- 59:33जाएगा बेटा चिंता मत कर। हाँ, घर बैठे ही कुंभ हो जाएगा और
- 59:39क्या? सब जगह।
- 59:41कुंभ भी बन जाएगा। दो चेतना के अंश।
- 59:50मैं तुम्हें फिर कहता। हूँ समझू में नहीं आएगा।
- 59:53एक वह है, तो एक। ही समझाने के लिए एक वह है जो ईशा
- 59:59वासमेदम सर्वम या तकीं जगत याम जगत।
- 1:00:02ये अनुभव की बात नहीं है। ये खोपड़ी की बात है।
- 1:00:06अगर आपको। खोपड़ी के ढंग से समझाऊं तो बड़े
- 1:00:09मज़े से। कब का समझा?
- 1:00:10देता। और तुम्हारी समझ में भी आ।
- 1:00:13जाता है क्योंकि मैं जानता। हूँ आज अगर किसी संस्था।
- 1:00:19को मैंने इकट्ठा कर लिया, बना लिया।
- 1:00:22कोई 10 20,000। एकड़ जमीन इकट्ठी कर ली।
- 1:00:28कल को मैं ना रहूँगा, जमीन तो रहेगा तो किसी।
- 1:00:34और के नाम पे। हो जाएगी।
- 1:00:36फिर मैं क्या करूँ? मैं उस रजिस्टर।
- 1:00:41को बदल, थोड़ी दूंगा आपके पटवारी के रिश्वत, देखें ये नहीं हो
- 1:00:46सकता। आज इकट्ठा कर लूँगा, माँ।
- 1:00:51लिया। क्या ये व्रत की व्यर्थ का पागलपन
- 1:00:56नहीं? कि तुम्हारी जायदादों को दान के
- 1:01:01नाम पर खींचने के नाम। पर डाका मारकर तुम्हें गुमराह
- 1:01:05करके अपने नाम करवा दूँ। फिर 1 दिन वो आएगा तो?
- 1:01:13जब यह चेतना जो देही? के साथ है बाहर निकलेगी।
- 1:01:17और ये हाथ ऐसे। जड़ हो जाएंगे।
- 1:01:22फिर मैं क्या करू? लेकिन काश वो दिन तुम्हें याद
- 1:01:28आता। है।
- 1:01:30वो दिन तुम्हें याद नहीं। आता?
- 1:01:34तो एक चेतना का अंश। जो देही के साथ है, फिर?
- 1:01:37तो कल तुम ये भी कह सकते। हो जब कुछ।
- 1:01:39स्थान ही नहीं बटा। बिन नामे नाहीं को थाम।
- 1:01:44जेता कित्ता तित्ता? नाम ही नाम है और कुछ नहीं है।
- 1:01:49तो फिर ये दे ही। कहाँ से आ जाएगा?
- 1:01:53अरे भाई के दिमाग की बातें नहीं है, समझो मैं नहीं आती।
- 1:01:58यह तो बस जीस तरह से। समझाने की चेष्टा हम करते हैं, उस
- 1:02:04तरह से किसी न किसी तरह इसको। आप उलटपुलट करके समझ लो, बस।
- 1:02:10हाँ, समझ लो। जैसी आवश्यक।
- 1:02:16कहते है ना बस हंसलो। हँसी शुरू हो जाएगी काक।
- 1:02:20शुरू हो जाएगी। भीतर तो।
- 1:02:21लड़की की भी शादी करनी है। फलां का भी तलाक हो गया।
- 1:02:29इसका भी ये हो गया उसका। भी ये हो गया, मेरे पास वो जाएगा।
- 1:02:34बहुत कहने के बाद भी। फ़ोन आ।
- 1:02:36जाते मैं पूछता हूँ क्या? हुआ नाम नहीं लिया।
- 1:02:45होता है उन्होंने मेरे से तुम्हारी भाषाओं को।
- 1:02:55बाबा फिर वो दाद कर। दो ना मेरी कुड़ी बात वो बिमारी
- 1:03:01रहती है उसका कद नहीं बढ़ता। अब मैं उसको खींच के बढ़ा दूंगा
- 1:03:05बता। जैसा हरेक कैरेक्टर है उसमें।
- 1:03:10डीएनए है वैसा हो जाएगा। मैं कहा बाबा क्या करेगा?
- 1:03:16लेकिन तुम्हारे भीतर इतनी अंधभक्ति भर दी है ना इन लोगों ने
- 1:03:21कि तुम कहते हो। सब बाबा करते हो बाबा कुछ नहीं कर
- 1:03:27सकता, बाबा तो खुद ही रोटी। नहीं खाता।
- 1:03:33तुम्हारी भी। छीन लेगा अरे तुम उसकी?
- 1:03:37तरफ मत लेके जाओ भाई। सारी बातें उसकी तरफ।
- 1:03:44तो दो चेतना के रूप हैं। एक तो वह जो विश्वव्यापी है।
- 1:03:53एक वह है, बस। किसी तरह समझ रहे।
- 1:03:56हो ये है जो दही के साथ। रहता है या उस।
- 1:04:02फूसे की तरह है जैसे आपके पावर हॉउस से कोई बिजली आई।
- 1:04:10और आपकी ट्रांसफार्मर तक आ गई। ट्रांसफार्मर से उसका कनेक्शन
- 1:04:15आपके। घर के अंदर आ गया।
- 1:04:17लेकिन घर के अंदर भी एक फ्यूज होना।
- 1:04:20चाहिए जीस फ्यूज से उस बिजली को आपके घर के भीतर तक।
- 1:04:25पहुंचाया जाए। और अगर वो फ्यूज निकल।
- 1:04:28गया। तो फिर सब चीजें आपके।
- 1:04:31लिए बेकार हो जाएँगी या ट्रांसफार्मर में बेकार।
- 1:04:35या घर के सारे पंखे। भी नहीं चलेंगे कुछ नहीं।
- 1:04:37चलेगा और बाहर का आपका 132 केवी का वो भी बेकार।
- 1:04:44सब बेकार हो जाएगा यह। जो चेतना है उस।
- 1:04:48प्यूज का काम करती है। यह।
- 1:04:50चेतन का फूज निकला। तो सब बंद।
- 1:04:53बाहर का भी बेकार भीतर का भी बेकार वैसे बिजली सब नहीं है सब
- 1:05:00घरों में बिजली होगी। लेकिन तुम्हारे घर में नहीं होगी
- 1:05:03क्योंकि फूज निकल गया ऐसा ही था होता।
- 1:05:07है। जीस घर का।
- 1:05:08फूसे निकल जाता है, वो फूसे ही तो हो जाता।
- 1:05:10है बाकी। के रूम का तो चलता है ना क्योंकि
- 1:05:14उनका तो फूसे है इसको ऐसे समझने का प्रयास।
- 1:05:18करो इसको तारिक ढंग से। नहीं तो मैं समझा।
- 1:05:21सकूंगा ना तुम समझ? सकोगे क्योंकि बुद्धि वो यंत्र।
- 1:05:24नहीं है। प्याली मैं कभी सुंदर नहीं गागर
- 1:05:28में सागर नहीं आया। करता।