Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 May 26 - लॉकर की चाबी खो गई… सोने की चिंता है, आत्मा की क्यों नहीं? | खोज और अंतस का हीरा!
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- 0:17प्रणाम मेरे सतगुरु जी महाराज, सॉरी बाबा जी आपको फिर से परेशान
- 0:31कर रही हूँ बाबा जी लास्ट ट्यूसडे।
- 0:41मैंने अलमीरा की लॉकर की एक बैग में रखे थे तो उसके बाद आज मुझे
- 0:52जरूरत पड़ी तो मैंने। की देने के लिए बैग खोला तो उसमें
- 1:03की नहीं मिले। समझे नहीं आ रहा क्या हुआ?
- 1:12मैं क्या कहूं बाबा जी प्लीज़। आपके लिए तो यह बहुत आसान काम
- 1:27कहाँ देखूं? बाबा जी वो मिल जाए, टेंशन भी हो
- 1:34रही है। सारी जो आती उसमें पड़ी लॉकर में
- 1:40किसी के हाथ न लग जाए। अरे हिम्मत पक्षना मेरे मालिक
- 1:48कृपा करना मैं नहीं बताऊँगा तुम माँ मिलो हीरो की ज्वेलरी की।
- 2:05सोने की इतनी कद्र करते हो और मैं तुमसे रोज़ कहता हूँ कि तुम्हारा
- 2:19परम हीरा तुम भूल गए हो। वह हीरा कभी गुम तो नहीं होता, वह
- 2:36तुम भूल जाते हो। सिर्फ अब भला ये चाबी इस बिटिया
- 2:44ने कहीं रखी है, बता दूंगा कोई बात?
- 2:56ऐसे ही तुम तुम्हारे भीतर का अनमोल खजाना भूल खजाना और उस
- 3:08अनमोल खजाने में रस की नदियाँ बहती हैं अमृत की।
- 3:18ऐसा रसास्वादन है उसमें कि शब्दों से वर्णित नहीं किया जा सकता,
- 3:32इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ कि उसको पियो।
- 3:38और तुम रोज़ बुद्धि से सोचते हो, कैसा हो, कब है यही पैच फँसा खड़ा
- 3:46है मैं कहता हूँ तुम्हारे अंदर सुनिए तुम सोचते हो कैसा हो, कब
- 3:56है? तो भला उसे तो उसी के तल पर जाकर
- 4:02पिया जाता है। अब मैखाने में जाकर ही तो तुम
- 4:06पियाओगे जब अभी तुम्हें शराब का पता ही नहीं है।
- 4:16तो तुम घर बैठे कैसे पिओगे तो मैखानी से शराब लाना होगा, फिर
- 4:24चाहे घर में बैठ के पी लो, अभी तुम्हें शराब का पता नहीं।
- 4:34यह बुढ़िया की चाबी आज गुम हो गई और इतना फीकर है कि सारी स्वर्ग
- 4:38उसमें पड़ी किसी के हाथ में लग जाए तो कोई बात नहीं।
- 4:43बेटा प्रायः कौन है यह एक वो हम दुस्ती या नाचती मैं ही तो हूँ सब
- 4:50जगह जिसके भी हाथ लगेंगे। ओह, मेरे ही हाथ लगे, तुम चिंता
- 4:59मत करो, मुझे याद आती है घटना हमारी शहर
- 5:15में बाहर की तरफ। जी जी एस काल जो होता था रोड पे
- 5:26पंजाब के अंदर डेक्लमेशन कंटेस्ट होते थे और सिर्फ भाषण ने कला
- 5:36सौंदर्य। चित्रकारी, गायन, कविता यानी
- 5:43आर्ट्स, कलाकारी, म्यूजिक, धवन, बंसरी ये सभी चीजें होती थी।
- 5:51मनोरंजन वाली बड़ा सुंदर प्रोग्राम होता था।
- 5:57और सारे पंजाब से बच्चों की टीम में आया करती थी तो निश्चित रूप
- 6:08से लड़के भी आते। लड़कियां भी आती और यही टीनेजर से
- 6:13आते सब। आपको पता है खड़ मस्ती करना उनका
- 6:18शोभा एक बार तो वह कैंटीन का ठेका उनके बच्चों का खाना पीना, सुबह
- 6:36चा देना, नाश्ता देना। फिर इतने बजे लंच, इतने बजे दोपहर
- 6:42की चाय और इतने बजे रात की डिन्नर फिर रात को दूध किसी ने पीना है
- 6:50तो पी लो, चाय पीनी चाय पी लो, काफी पीनी काफी।
- 6:59ऐसा कुछ मेंहो होता था और जो ठेका लेता था हलवाई उसका नाम था रणधीर
- 7:12सिंह धीरा। आज भी सोनी स्वीट हाउस के नाम से
- 7:16उसकी दुकान बड़ी मशहूर है। मिठाई वहीं से लिया करो।
- 7:26शुद्ध और साफ सुथरी थोड़ी महंगी भी हो तो चलेगी तो मैं एक सुर
- 7:38उसके पास बैठ जाती थी। तो जब वह ठेका लेता तो मुझसे
- 7:48पूछता, भईया अब मुझे तो अंग्रेजी बोलनी आती है, वह तो अनपढ़ था,
- 7:59कौन चार जमात पड़ा होगा? डिग्री विग्री उसके पास कुछ नहीं
- 8:05होती। जाली उसने बनवाई
- 8:21तो मैं करता हूँ, क्योंकि वहाँ कुछ प्रोफेसर्स अंग्रेजी वगैरह
- 8:28बोलते हैं बाहर से ही आते। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से आते है।
- 8:36कुछ अल्फाज़ अंग्रेजी के बोलते थे तो कन्वर्सेशन के लिए उसने मुझे
- 8:46रखा था कैश बॉक्स मेरे पास होता था गल्ला जैसे कहते थे।
- 8:56तो मैं बैठा हलवाइयों के पास देख रहा था, हलवाई दोपहर का भोजन पका
- 9:04रहे थे, सब्जी वगैरह, और मैं वहाँ बैठा देख रहा था, आराम से।
- 9:14इतने में जीजी कॉलेज का एक प्रोफेसर घबराए हुआ बैंकरों के
- 9:29नीचे देखने का हलवाई को कहा, उठो। क्यूँ क्या बात है मुहार सब उसका
- 9:37नाम था मुहार सा महार सब क्या बात है, सिक्स्थ है बस पगड़ी बात है
- 9:48क्या? तो मोटरसाइकिल की चाबी कम हो गयी।
- 9:57अच्छा तो फिर तो रणधीर सिंह धीरा बोला प्रोफेसर साहब आप इतने पड़े
- 10:08देखो आपको पता नहीं यह हलवाईओं के नीचे कैसे मिलेंगे, ये तो बेचारे
- 10:14यहाँ बैठे हैं। तुम जहाँ गए थे वहीं से तो
- 10:17मिलेंगे कहता मैं तो मोटरसाइकिल यहाँ से काफी दूर वहाँ ठहरा दिया
- 10:28था, उसके बाद मैं तो पता नहीं कहाँ कहाँ गया।
- 10:34इन चार्ज वो ही हुआ करता था पर उसको खुद ही नहीं पता वो कहाँ
- 10:41कहाँ गया था। यानी इतने बेहोशी में लोग फिरते
- 10:45है और पढ़ा लिखा था, प्रोफेसर था। लोगों को बढ़ाता था, बच्चों को
- 10:54बढ़ाता था यहाँ हमारे गांव में रहता था, गिर रहा वहाँ गांव
- 11:01लाइनों से बात तो जब वह खूब छक लिया, उसने सब मेज वगैरह उजाला तक
- 11:15के पतीलों के अंदर भी देख लिया। अब जिसकी कोई चीज़ गुम हुई हो तुम
- 11:26देखोगे उस वक्त तुम्हारा ऊँठ गम गुम हुआ है ना ऊँठ तो तुम ऊँठ भी
- 11:33पतीले में देखोगे, कहीं इसमें तो नहीं आता?
- 11:36इतना दिमाग खराब हो गया है। मैंने कहा महार साहब क्यों हरोडा
- 11:44में हो कहता मैंने जरूरी कम्स शहर में जाना है कुछ सामान लेने के और
- 11:53सारी मनेजमेंट मेरे पास। नहीं तो क्या हुआ?
- 11:58किसी का स्कूटर ले जाओ मांग के यहाँ से सभी के पास स्कूटर हैं।
- 12:05मैं कहता जी आपको क्या बताऊँ मैं यार मुझे जानता नहीं।
- 12:17स्कूटर तो है लेकिन मुझको थोड़ी सी संकोच होती है।
- 12:24मैं मंदवी चीज़ ले नहीं करता। मैं चीजों को मानकर नहीं लिया
- 12:29करता, अपनी ही चीजों का प्रयोग किया करता।
- 12:36इनका आदत तो छि है तो क्या गुम हो गया आपका कहती है मोटरसाइकिल की
- 12:45क्या भी गुम हो गया अच्छा कहाँ गुम हो गई अब मैं छेड़ रहा था
- 12:54उससे जानबूझकर। मुझे बता कि बता तो दूंगा ही, मैं
- 13:00उस तल पर जाकर क्या नहीं कंगाला जा सकता जब उस तल पर जाकर मैं
- 13:05तुम्हें तुम्हारा अस्तित्व बता देता हूँ।
- 13:11कि तो बोल मेरे। कितु बोल मैंरमावे कल बरसों मेरी
- 13:31चीज़ गवाची। हे ओह तेरे खोल मेरे मा वे कित
- 13:42बोल कित बोल मेरे मा वे कित बोल मेरे मा वे?
- 13:56कल परसों मेरी चीज़ गवाची है वो तेरे खोल मेरे माह की तो।
- 14:13ये मेरे प्यारे हकुम सूफी जगाया करते थे।
- 14:22सभी कलाकार गेंदबा की धरती को बर्तान में हर मित्तल गुरुदास मान
- 14:30हकुम सूफी अशोक मस्ती नाम और बहुत।
- 14:40मैंने कहा महारसप जाना जरूर है कहते हम मैंने कहा छै, सकूँ।
- 14:49इस दरवाजे से बाहर निकल जाओ दाईं तरफ।
- 14:55फिर भाई मुड़ जाना ठीक फिर सीधे चले जाना ठीक कितनी दूर चलूं बस
- 15:04तुम चली जाना? करीब 5000 कदम तो चलना अच्छा।
- 15:14वहाँ आपको सब नीचा भी पड़ी मिलेंगे।
- 15:21एक बार तो उसने ताली बजाई, अच्छा मुझे गौर से देखा, मैंने कहा ठीक
- 15:28ठाक हूँ तुम ज़रा देखो तो कोई शाम मानव की तरह होगा।
- 15:41अरे भाई साहब ये बताओ तुम यहाँ बैठो, ये अलवानियों को देख रहे हो
- 15:47सब जीवन और मेरी चाबी बाहर दूर, कम से कम भी।
- 15:57एक फर्लांग की दूरी पर गुम हुई है।
- 16:00तुम उससे अभी को बता रहे हो जहाँ बैठे तो मजाक नहीं है तो और क्या?
- 16:06मैंने कहा कई बार मुहर साहब मजाक भी ठीक हो जाया करते हैं, तुम
- 16:12देखो तो। अरे देखो नहीं कोई और उठा के ले
- 16:18जाएगा, फिर वो भागा जैसे जैसे बताया वैसे वैसे गया आगे जाके
- 16:26देखो उसने चाबी तो उठा ली। लेकिन जब वह चाबी लेकर मेरे पास
- 16:41आए तो आँख में आंसू थे, आंसू छलक रहे थे।
- 16:54आँखों से गिरते हुए आगे तो दाढ़ी थी, दाढ़ी में समा जाती हाथ जोड़
- 17:02लिए मुझे कहने लगे। मेरे शब्दों से आपको आगाज तो नहीं
- 17:07पहुंचा? स्वाभाविक है आदमी नास्तिक है और
- 17:16नास्तिक जानबूझ के नहीं है। सच में नास्तिक है क्योंकि उसने
- 17:21देखा नहीं परमात्मा। तो मैं ऐसे लोगों को कन्डेम नहीं
- 17:27किया करता। नास्तिक होना उसका स्वभाव है।
- 17:29अच्छा, जब तक तुमने परमस्त्रों को देखा नहीं तब तक तुम ये झूठ मत
- 17:40बोलना। कि परमात्मा है और तब तक लोगों को
- 17:45भी मत बताना कि राधे राधे करते रहो, परमात्मा मिल जाएगा तुमने
- 17:52अभी खुद नहीं पाया पांच नाम जपते रहो, तुम्हें परमात्मा मिल जाएगा
- 17:59कि तुम झूठ बोल रहे हो। इसका दंड तुम्हें 1 दिन में लिखा।
- 18:05करोड़ों लोगों को तुमने गुमराह कर दिया, आग की भट्टी में झोंक दिया
- 18:11तुमने पांच नाम लूँ और पता तुम्हें नहीं है तुम्हारे चेहरे
- 18:16से पता चलता है। महार साहब मेरे पांव छूने लगे,
- 18:25मैंने कहा नहीं अब बड़े हो ऐसा मत करो महार साहब कहने लगे नहीं, आज
- 18:34मैं छोटा हो गया, मैं बड़ा तो था। इसलिए सारी मनेजमेंट मुझे सौंप दी
- 18:43गई थी क्योंकि मैं सबसे ज्यादा इंटेलीजेंट भी था और सेनॉयरिटी
- 18:52वाइज भी था। लेकिन आज मेरी सेनॉयरिटी खाक में
- 18:59मिल गई। जब मुझे मेरी ही चाबी का नहीं पता
- 19:03और आप भीतर तंबू में बैठे हुए हैं, बंद तंबू में बता रहे हैं कि
- 19:08तुम्हारी चाबी वहाँ पड़ी शाम मानव साथ तुम लोगों को चैलेंज करते हो,
- 19:16जरूरी नहीं कि जब तुम कहो। तभी कोई चमत्कार दिखाए।
- 19:22चमत्कार सहसा होते हैं और मेरी ज़िन्दगी में ऐसे हजारों चमत्कार
- 19:29हैं, चमत्कार दिखाने के रहने होते हैं, चमत्कार समस्याओं को हल कर।
- 19:42अगर तुम कहो कि मैं तो 5,00,00,000 दे दूंगा, चमत्कार
- 19:45दिखा दूंगा क्योंकि जो चमत्कार तुम्हें दिखाने में चला हूँ, उसकी
- 19:52कीमत महज 5,00,00,000 ही है। क्या वह विराट के घर से आया है?
- 19:59और विराट की कोई कीमत होती है क्या?
- 20:06लेकिन तुम्हारे जैसे पता नहीं कितने लोग अंध श्रद्धा निर्मूलन
- 20:11ये ठीक है। पाखंडियों को तुम कंगाल पाखंडियों
- 20:17को तुम दंड दो। लेकिन ईश्वर नहीं है, इसकी घोषणा
- 20:24करना तुम्हारे बलबूते से बाहर है। घोषणा मत करो क्योंकि तुमने खोजा
- 20:34और संत कहते है जिन्हें खोजा तिन पर।
- 20:38उसकी भी एक शर्त है गहरे पानी, पैट गहरे उतर जाओ समुद्र में और
- 20:47खोजो मिल जाएगा मैं बापू राह पू धन ठहरा मैं बेचारा बोल रहा था।
- 20:57छर छर काँप रहा था गयो किनारे बैठ मैं किनारे पे बैठ गया मुझे तो
- 21:05पानी से डर लगा उतर जाऊंगा तो पक्का है कि मैं मर जाऊंगा, बोला
- 21:14तुमको किसने कहा कि पक्का है कि तुम मर जाओगे?
- 21:21इसलिये मैं कहता हूँ गुरू की आवश्यकता है परम आवश्यकता है गुरू
- 21:26की, क्योंकि उस पॉइंट ऑफ नो रिटर्न के पास से जाकर जब गुरु
- 21:34कहेगा जम्प। कूद जाओ, तुम देखोगे यार ये इतना
- 21:42गहरा समुद्र इतना गहरा कुछ बचने को कोई जगह नहीं पक्का है कि तुम
- 21:48मरोगे, इसलिए याद रखो शद को मेरे श्रोताओं।
- 21:56तुम किसी भी धर्म के अन्याय हो याद रखो जब भी तुम अपने अंत में
- 22:04जाओगे बहरमुखी होके तो अंत में नहीं जा सकते नाम जब से तुम
- 22:12बहरमुखी हो। नाम जब को छोड़कर जब तुम अपने
- 22:17अंतर समझोगे सारी शक्ति को संग्रहित करके और क्रिया योग को
- 22:26करोगे सारी धूल तुम्हारे चेतन में आ जाएगी भीतर की जमी हुई।
- 22:33और यह धूल छोटी नहीं, यह तो तुमने हिमालय पर्वत खड़ा कर लिया है,
- 22:40इतनी धूल है यह तो तुम्हारा हीरा छुप गया है और हीरे के ऊपर तुमने
- 22:51हिमालय पर्वत। जितना कीचड़ जमा लिया है धीरे
- 22:55धीरे धीरे धीरे कम होगा और यह कम होगा क्रियायोग करो खूब जमा की
- 23:04धूल आएगी ब्रेन में, चेतन मन में और वह इवैपरेट हो जाएगी कैथोडिश
- 23:10हो जाएगी। यह कैसा सिख होता है?
- 23:14क्योंकि तुमने भय को दबाया है, तुमने काम वासना को दबाया है।
- 23:21चलित ब्रह्मचर्य को पालन करें। तुम्हारे नीम हकीम खतराए जान ने
- 23:26कहा कि दबा लो इसको बाहर मत आने दो।
- 23:38किसी एक व्यक्ति का मेमना गुम हो गया था।
- 23:43प्यारा प्यारा मेमना था ये मेमने को बेचारे को क्या पता होता है?
- 23:52ये धर्मस्थल है या? ये कब्रिस्तान है या यह किसी कसाई
- 23:59की दुकान है? वो चला गया, किसी धर्मस्थल में
- 24:03पहुँच गया, गुरुद्वारा में पहुँच गया।
- 24:08वह ग्रंथी बैठ बैठ कर उसने देखा, अरे बड़ा प्यारा मेन ना है।
- 24:17ये पाठ करता करता उठा। उसने साथी को कहा ये ले जा अंदर
- 24:22और साथी ने देखा बड़ा प्यारा प्यारा समय मिला है।
- 24:32चल आज की सब्जी तो बनी, उसने तो अपना काम शुरू कर दिया।
- 24:40उसने तो कढ़ाई लगा दी, ढक्कन रख दिया।
- 24:49नीचे से आग जल रही सस्ते जमाने से चूल्हे होते थे आज के।
- 25:00इतने में जिसका मैम ना कमा जाता, उसने कहा और तो कहीं से नहीं
- 25:05मिलता। जैसे महार साहब चाबी को देख रहे
- 25:09थे, अरे भाई तू जब इस तट वो उसके नीचे गया ही नहीं।
- 25:15तो चाबी यहाँ कैसे मिल जाएगी? वो कहता आया तो मैं यहाँ तख्त
- 25:28पहुँच गया। यहाँ आपके टेंट में भी नहीं आया
- 25:33तो फिर जब आएगी ही नहीं, मोहर साहब तो चाबी मिलेंगे क्या?
- 25:38मैंने कहा शायद फिर भी। यही मन होता है तुम कहते हो, नहीं
- 25:46मिला तो चलो फिर प्रेमानंद के पास चलो और वह जैसा जानता है वैसा ही
- 25:56बताएगा ना। अगड़ बगड़ बम बाबो असीन बेपुरा सो
- 26:04यही वह बता रहा है अगड़ बगड़ बम बाबो असीन बेपुरा सो चाहे तुम
- 26:11डेरों में चले जाओ, राधास्वामियो में चाहे बी के में चले जाओ, चाहे
- 26:17नरंकार धर्म में चले जाओ। सब जगह ऐसा ही कुछ मिलेगा।
- 26:21अक्कड़ बब्बड़ बंबाबो 8090 पूरे सब अब की है जब कोई भगवान थोड़ी
- 26:29घुस जाएगी। मंजिल तक जाने के लिए कितने सुधार
- 26:36रास्ते होते हैं? उन्नति सुधा रास्तों पर चलकर ही
- 26:40मंजिल में ला करती तो हार साहब चाबी लिए मेरे पास आए, मेरे पांव
- 26:49में जुके नहीं, मुझे पांव के अंगूठे छू लेने दो, कोई बात नहीं।
- 27:02मेरे रोकने के बावजूद भी उन्होंने अपना तीसरा मित्र मेरे अंगूठे से
- 27:09लगाया और वैसे ही रोते हुए चले गए।
- 27:18शायद आज भी अगर वो जिंदा होंगे मुझे तो पता नहीं।
- 27:24तो उनको याद कराने पे घटना आ जाएगी।
- 27:26आँखें और कोई पता नहीं ऐसी चीजें, ऐसी घटनाएं ऐसे चमत्कार व्यक्ति
- 27:33के जीवन को बदल देते हैं जैसे ट्रेन का वो इंसिडेंट मेरे जीवन
- 27:38को बदल गया। सब कुछ बहा के ले गया।
- 27:41आज जो व्यक्ति। गैस्ट्रोइंटेस्टिनल सर्वे कर रहा
- 27:50होता। वह प्रवचन दे रहा है।
- 27:55अगर वह इंसिडेंट न हुआ तो क्यों? मैं तो मेडिकल की पढ़ाई कर रहा
- 27:59था। कोई पता नहीं बात गहरे में उतर गई
- 28:07हो बात कोई कमतर तो है नहीं, तुम चमत्कार की बात करते हो, हर घड़ी
- 28:14तुम्हारे आस पास चमत्कार हो रही है, लेकिन तुम्हारे पास देखने
- 28:18वाली आँख में कमी तुम्हारी आँख में है।
- 28:25हमारे पंजाबी में कहते हैं, उठ आ आप तो न जावे, फिट्टे मुँह गोड्या
- 28:30दे अरे उठा तो तुम से नहीं जाता और जो गोडे होते हैं घुटने।
- 28:43उनको तुम कहते हो फटे मूतेरे उठ नहीं सकता, मैं यही बात तुम्हें
- 28:54समझाता हूँ, तुम्हारा कुछ गुम हो गया है जिससे तुम यह संसार में
- 29:06भौमत्रे भरते हो न? कोई कहता है मुझे सबसे बड़ा अमीर
- 29:13बना दो, कोई झूठा लेकर करता है वो और वो झूठ बोलता है।
- 29:22पाखंड कहलारता है। वह कतरों गार्थ करके आया है, वह
- 29:31बदमाश है, उसने पता नहीं क्या कुछ किया है।
- 29:39सब गद्दार, लालच की हेराफेरी चोर डाकू बैठे।
- 29:48कल मेरे पास एक कमेंट आया, 1600 व्यक्तियों का समूह है बाबा हम
- 29:56डापू थे। शुक्र है अगर तुम भी कन्फेस कर
- 30:02लो। डार्किंग कन्विंस करते हैं और यही
- 30:09तो कहते हैं कन्फ़्यूज़न ऑफ़ एरर्स इस लाइक ए ब्रोम
- 30:14कन्फ़्यूज़न ऑफ़ एरर्स, इस लाइक ए ब्रोम दट स्विच अवे डर्ट एंड
- 30:20मेक्स दी सरफेस क्लीनर थान बिफोर? मान लो कि मैंने पाप किया है
- 30:29लेकिन किस किस को माने? पाप ही इतने किए हैं कि पाप बताते
- 30:37बताते प्राण पखेरु हो रहा है इतने की मोटू शाह।
- 30:43एनएसए को मोदी जी को मिलाकर इतने उपाय किए हैं इन्होंने कि कन्फेस
- 30:52करें भी तो क्या? क्या करें इतनी अधेर गर्दी मचाई
- 31:00है उन्होंने। लेकिन एक लंबी कतार होती है और उस
- 31:08कतारों को मैंने एक नाम दिया है। क्या मंद बुद्धि उनमें बुद्धिस्त
- 31:17होती? जैसे अग्नि मंद हो जाता है,
- 31:20तुम्हें भूख कम लगनी शुरू हो जाती है, हल्की आँच पर सब्जी बड़ी देर
- 31:27से होती है। ऐसे ही मंद बुद्धि होते हैं।
- 31:32इनकी बुद्धि मंद होती है जैसे चाहो इनको लगा।
- 31:38इब करोना का ढोल पीटने से क्या समझ लेकिन हमने पीटा मैंने नहीं
- 31:44पीटा इन्होंने पीटा अब करोना कैसे भाग जाएगा, जो दिखता ही नहीं
- 31:55लेकिन ढोल पीटा उठा उठा के। परांति उठा उठा के पटकी ये शायद
- 32:02इसके खटके से भाग जाए। नहीं भागा वो कितने प्रण लिल गया
- 32:12और हमने मैनेजर चुना था। और पुलवामा कांड के फ़ौरन बाद
- 32:21इन्होंने कहा था क्या शहीदों के नाम को एक वोट मिलेगा?
- 32:27मुझे देश के प्रति प्रत्येक व्यक्ति?
- 32:34चाहे हिंदू है मुसलमान सिख ईसाईं जीस माटी में भला है वो उसकी माँ
- 32:41है भेद तुम पैदा करते हो, मुसलमान है तो इंसान तो है।
- 32:51यहाँ का अन्न खाता है यहाँ की माटी का अन्न खाता है यहाँ की
- 32:56हवाएं उसके भीतर श्वास प्राणों का गुंजार करती है यही उसकी माँ है
- 33:06भेद तुम फैलातें हो मात्र। अपने बॉटलिंग के लिए और ध्यान
- 33:14रखना जैसे फोके आए थे उससे ज्यादा बिगड़कर फोके जाओगे क्योंकि जीतने
- 33:22बाद तुम साथ लेकर आए थे। अब कुछ और जोड़कर जाओगे, यूं ही
- 33:26तो नहीं। हिमालय जैसा कीचड़ हो गया, हर
- 33:32जन्म में तुमने कीचड़ छोड़ा है। हर जन्म में तुमने कीचड़ छोड़ा है
- 33:38और अंध बकते के मानते नहीं और नय मानने में संत का क्या नुकसान?
- 33:47कोई नुकसान नहीं, बस इतना है तो तुम्हारी तरफ़ देख कर तय आती हृदय
- 33:55रोग कि अगर ये मूड तय ना करें तो रस्ते पे आ जाएंगे, रस्ते पे आ
- 34:04जाएंगे। तो उस अपने ही भीतर बैठे आनंद का
- 34:07स्वाद चखने, फिर बाहर ताली थारी, खड़काने की जरूरत क्या है?
- 34:19फिर मोबाइल की टॉर्च जलाने की जरूरत क्या है?
- 34:27लेकिन मंद बुद्धियों की मुसीबत हुई है और मंद बुद्धियों की औकात
- 34:35हुई इतनी उन्हें कोई। मार्गदर्शन चाहिए।
- 34:41चाहे भेड़ हो, चाहे कुत्ता हो, चाहे बकरी हो चाहे मूर्ख बंधा हो,
- 34:55छाती चाहे 56 हो। और दिमाग चाहे नहीं हो, ऐसा
- 35:05व्यक्ति चाहिए। बस तुम समर्पण को सदा तैयार ही
- 35:14बैठे रहते हो। बस कोई तुमसे समर्पण करवाना चाहे
- 35:22अब अच्छा भला भूले हुए थे हम गजनबी ने लूटा था सोमनाथ का
- 35:27मंत्र, सोए हुए थे चैन से ओढ़े हुए कफन।
- 35:36यहाँ भी सताने आ गए किसने पता बता दिया याद करा दिया क्या हम लूटे
- 35:45थे कितने 1000 साल पहले कोई हमारी मूर्तियों को लूट गया था अरे भाई।
- 35:55क्यों जख्मों को घेड़ते हो? जो लूट गया वो लूट गया अब तुम याद
- 36:01क्यों करते हो? जश्न मनाते हैं बात तो ये है असल
- 36:10में जश्न पे खर्चा होगा 1000 का बताएंगे कृपया।
- 36:15बात ये है आपकी लोगों से कहेंगे कि देखो पेट्रोल कम, डीजल कम
- 36:29मिट्टी का तेल कम ईंधन हमारे देशों में होता नहीं है।
- 36:34होता नहीं है तो भाई तुम्हें किस लिए बैठाया है?
- 36:37तुम रेंज करो ना कोई बैंडामिक होता है तो तुम्हें चुनना है
- 36:45उसमें क्या व्यवस्था करें, कैसे करें जवाहर लाल?
- 36:50इसी बात के लिए तुम मर गए, अटैक आ गए।
- 36:5462 का जंग हुआ हमारे पास हिंदी चीनी भाई भाई का नारा था और उनके
- 37:00पास थी शैतानियत की बंदूक थी और मत्स्य तुम ने शैतानियत के बंदूक
- 37:06हैतान दी, हम हार गए, हारे ही पड़े क्योंकि भाइयों से कैसे
- 37:12जीतेंगे? जब हम गल बकड़ी जाती हैं, वह कोई
- 37:18हार नहीं थी। हार तो वह होती है जो पाकिस्तान
- 37:22से हमने जंगली 65 की हम लाहौर पहुँच गए और एक अंतर की जंगली।
- 37:30और शायद इतिहास में एक अकेली औरत है जिसने एक देश को बाइफरकेट कर
- 37:36दिया। दो में बदल दिया पैसा हमारा लगा
- 37:42इतिहास में पहली पहली स्त्री और पहला पहला ऐसा जंग जिसमें पिचानवे
- 37:481000 कैदी। जिनको बरयानी को आई बड़ी सेवा की
- 37:53उनके और साँझ को रेडी को पढ़ाता मैं मोहम्मद असलम पिता खन्ना उमर
- 38:05खलीफ। वहाँ का रहने वाला हूँ, खैरियत से
- 38:13हूँ? मेरे माँ बाप सुनते हों तो उन्हें
- 38:20आज़ाद ऐसी बेइज्जती की। ऐसे भी कराया जा सकता है आते हैं
- 38:35चुपके से अरे भाई तुम्हें सिर के ऊपर क्या बिठा दिया, तुम तो सिर
- 38:41पे ही मूतने लगे सोना मत कर 215 साल के।
- 38:50चांदी मत खरीदो, महंगी दातु मत खरीदो, हो सके तो शादी ही
- 38:54पोस्टपोन कर त्याग करो, त्याग करो का हमें सिखाने वाले मूल मंत्र।
- 39:12एक को छोड़कर आती हैं। यशोदा बेन को क्यों अनेक भुगतने
- 39:20के लिए, अनेक भोगने के लिए एक को छोड़कर?
- 39:27क्योंकि पता है एक से तृप्ति नहीं है मेरे रेडी।
- 39:31भीतर वास नहीं तो बड़ी बड़ी सारे संसार को भोगने की इच्छा है और
- 39:36सारा संसार घूम लिया इस व्यक्ति ने अभी जा रहा है, कोई मतलब नहीं,
- 39:43तेल फूंकेगा और कुछ नहीं करेगा, लोगों से कहता तेल बचाओ।
- 39:52गैस बचाओ अरे भाई तुमने तो शादी नहीं की लेकिन जिसके बेचारे के
- 39:57चार बाल बच्चे हैं वह खाना कैसे पकाएगा तुम तो भाग आए, ये बेचारे
- 40:07कहाँ भाग जाएंगे? ऐसा नहीं किसने सबको उठाया?
- 40:20कहाँ तक नाम गिनवाएं सभी ने हमको लोटा है।
- 40:34सभी हम को लूटा है लोगों से कहेंगे, तुम आप कैंट डाल।
- 40:46और खुद और राहुल गाँधी कहते है, 15,00,000 का सूट।
- 40:53वेब ब्लैक कलर का अरे मुँह ब्लैक होना चाहिए दोस्त तू कोट पेंट
- 41:02ब्लैक डाल ये। काम ब्लैक दंदा ब्लैक जे तुम अकल
- 41:21लतीफ है ते काले लिख न लिख फरीद कहते है अगर तेरे में थोड़ी सी भी
- 41:31अकल है। तो काले लेख ना लिख मत मार हरे न
- 41:37पंप पुलवामा के वह लोग जो तेरे देश की सुरक्षा कर रहे हैं, उनको
- 41:46मत आरडीएक्स में। हत्या करवाऊंगी।
- 41:54यह शहादत ने हत्या है। हत्या इट्स मर्डर फिर पहलगाम दर्द
- 42:08बढ़ता ही के आती हूँ तू दमक। ये आधे कच्चे वाले बोलते नहीं
- 42:16बल्कि पूरी पैंट वाले चड्ढाधारी बन जाता है और संख्या बढ़ती कैसे
- 42:24है? टीडी।
- 42:30हम ज़रा देखो ईडी से कैसे निपटा जाएगा?
- 42:38ये है जिसने चुनाव पलटा, जिसने एसआइ आर किया।
- 42:50उसी को ही अपना पर्सनल असिस्टेंट बना दिया और जो मार दिया गया उसकी
- 42:59तहकीकात तो करो इन्होंने मारा है शुभेंदु अधिकारी ने मारा है, तुम
- 43:09जांच पड़ताल करो। बिल्कुल घूस निकलेगी इसको मारने
- 43:16के लिए, क्योंकि वह सब राज्य जानता है और राज़ जानता है तो जब
- 43:28मैं गति निशीन होगा। हिंदुस्तान का पहला चीफ मिनिस्टर
- 43:34है। जो सरे आम रिश्वत लेता हुआ कैमरे
- 43:40में कैद हुआ। ज़रा देखो, तो देशवासियो, अब मुझे
- 43:48जगाने की आवश्यकता है, तुम इतनी गहरी नींद सोया करते हो?
- 43:57उसके फुटप्रिंट्स आज भी पड़े हैं। तुम कहो तो तुम ही कंगाल लो
- 44:04तुम्हें कोई न कोई दिखा देगा यह शुभेंदु अधिकार।
- 44:125,00,000 की रिश्वत लेता है, यह बोलते हैं फाइव ल्याक्स तो कम
- 44:19लेके आए, बाकी डेढ़ में का कोई बात नहीं यह कौन है?
- 44:28उस वक्त तो यह होता भी नहीं था। एआई।
- 44:34जब तुमने ये रिसोत्री तो मैं कहता हूँ बंगाल वासियों तुम अन्न खाते
- 44:44हो कि मल तुम इस व्यक्ति को सहन कैसे कर रहे हो?
- 44:53तुमने यह वीडियो देखी के मैं दिखाऊ और देखिये कमाल की बात है।
- 45:06सो इस व्यक्ति में कितनी बुद्धि होगी जो टांडे पांडे चुंगे ठुंगे
- 45:14लूले लंगड़े अपाहिज। अंधे अंधों को तो इसने शंकराचार्य
- 45:21बना का राम भद्राचार्य उर्लू का पठा।
- 45:24उसे कुछ नहीं पता उसे न्यूरॉन्ज में भरा हुआ है सब और वह ऐसे ही।
- 45:36व्याख्यान करता है वे गैरवे रंग के आठ टाँगें होती हैं।
- 45:42अंधा ऐसे ही तो व्याख्या करेगा और कैसे करेगा?
- 45:48लाल रंग के चार टाँगें होती हैं। मैं बंगालवासियों से पूछुंगा क्या
- 45:58तुमने यह दृश्य देखा नहीं? सारे बंगाल का खजाना इसके हाथ में
- 46:06दे दिया क्या तुम फिर भी। इसे प्रधान मुख्यमंत्री के रूप
- 46:15में दिखाओ। मैं तुमसे कहता हूँ अगर ऐसे ही
- 46:22लोग तुम्हारी गद्दियों पर बैठे हैं, तो 1 दिन मैं घोषणा करूँगा
- 46:26कि तुम टैक्स देना बंद कर दो। फिर अकल आ जाएगी सी जे आई को भी
- 46:35फिक्र फिर अकल आ जाएगी। सभी संस्थाओं को इलेक्शन कमीशन को
- 46:42भी अकल आ जाएगी। जब मैंने घोषणा कर दी नहीं, अभी
- 46:47नहीं करूँगा, करूँगा बिलकुल। कि बंद हो तुम टैक्स देना बंद
- 46:56करो। फिर ये आधे के छह वाले कहेंगे हम
- 47:01दोगुना टैक्स देंगे। मैं कहूंगा दोगुना नहीं तुम धासु
- 47:04को ना दो, लेकिन मेरे देशवासियों। अगर तुम्हें देश से इतना प्रेम है
- 47:10तो मैं 1 दिन कहूंगा कि तुम टैक्स देना बंद करो।
- 47:15तुम्हारे टैक्स से ही ये सारी हेराफेरी होती है।
- 47:19जब किसी अपराधी को तुम खून चिढ़ाते हो और तुम्हें पता है वह
- 47:25जिंदा होकर फिर कतलो अर्थ करेगा तो तुम।
- 47:28खून देने वाली अपराधी हो मत दो खून उसे जब तुम्हें पता है जब
- 47:37इसमें जान पड़ जाएगी और तुम उसको कत्लोगारत करते हुए देखोगे कोई
- 47:44हीरोइन ने पांडा मार दिया। कोई तुलसा ही प्रजापति मार दिया
- 47:48तो उसकी धर्मपत्नी मार दी। हज़ारों लोगों में रखवाती है,
- 47:58इसलिए मैं सीजीआई से कहता हूँ, तुम मुझे अनुमति तो दो इसके
- 48:03नारकों की। तुम अपनी भी अनुमति बाद में दे
- 48:08देना तुम्हारी अनुमति तो तुम्हारे जाने से बाद में तुम दो
- 48:14व्यक्तियों की अनुमति दे दो। नरेंद्र मोदी और अमित शाह तीसरे
- 48:24की बात में लिखेंगे हम एनएसए। कि उसने क्या गोल खला है ये
- 48:29पहलगाम में बाहर से यह जो चार व्यक्ति है यह संगीत है या
- 48:36मुसलमान? तुम किसी बात को किनारे से तो
- 48:40लगने दो। अरे जनता का व्यक्ति बोल रहा है।
- 48:47तुम ज़रा देखो इस व्यक्ति को तुमने देखा है ना 5,00,000 रिश्वत
- 48:52लेते हो उस वक्त और तुम्हें क्या वक्त है?
- 49:00और तुमने सारा ही गला सोंक दिया और इस व्यक्ति को तो फितरत पता
- 49:04नहीं कहाँ से लेके आए ये कहता जब मुझे परमात्मा ने बनाया तो मेरे
- 49:10भीतर ऐसा पुर्ज़ा जोड़ दिया। उस पुर्जे में ऐसा कुछ था कि मैं।
- 49:21छोटी इमेजिनेशन कर ही नहीं सकता। मैं इनका बहुत बढ़िया लेकिन मोदी
- 49:27जी आपको पता है स्पेस उतनी ही होती है।
- 49:31भीतर तो उसके लिए जीस स्पेस की जरूरत थी।
- 49:39वह एक पुर्जा निकालना पड़ा, मजबूरी थी भाई क्या करते, क्योंकि
- 49:45यह पुर्जा फिट करना था तो कौन सा पुर्जा निकाल लिया, वह शर्म वाला
- 49:52पुर्जा निकाल लिया, अब शर्म नहीं आती, तीन किलो गालियाँ निकाल 220
- 49:56किलो गालियाँ निकाल दो। इसके 76 मार दो भूगों के इसको
- 50:01शर्म है। बिलकुल साफ पता है 70,000 करोड़
- 50:09का एनसीपी पर यही व्यक्ति मेरे देशवासियों, इस ने एक।
- 50:19एक व्यक्ति ने एनसीपी ने 70,000 करोड़ का कपला किया।
- 50:24चक्की पीर सिंह पीर सिंह पीर सिंह नउस ने चक्की पीसी सीधा सब
- 50:32फार्मूला है यह है सारे भारतवर्ष को।
- 50:36संगीत बनाना चाहता है उसको भी पता है हमको भी पता है मेरे पास हुई
- 50:44ऑफर आई 1200 एकड़ ही में दे दें बाबा मैंने कहा जहाँ मैं बैठा
- 50:52हूँ। वह मेरी जरूरत से ज्यादा है।
- 51:00मेरा तेवर देखकर वो बात है, पता नहीं कहाँ पे मैं एड्रेस वगैरह
- 51:06नहीं पूछा करता, आप रोज़ आते हो? मेरे पास रिक्शा लेने के लिए
- 51:11अव्वल के तो मुझे पता ही नहीं चलता।
- 51:13बाद में लोग पूछते हैं। मैं आया था, आपको पता लगा बाबा
- 51:19मैंने कहा किसी को सुरत होगी तो पता चलेगा जो मदहोसी के उसपर आलम
- 51:25में खोया हुआ है उसको क्या पता लगेगा?
- 51:30कौन आया है कौन? मुझको तो उसके आनंद का तूफ़ान
- 51:37घेरने से हटे तो मेरी आँख खुले उसे कहते हैं हाथ पांव ते काम कर
- 51:46चीज़ अगर यह नजारा देखना तो तुम यहाँ पे देखो मेरे पास।
- 51:54कैसे मेरे हाथ पांव काम करता है और कैसे चीत निरंजन के साथ होता
- 52:00है। मैं तुम्हें दीक्षा भी देता हूँ।
- 52:03मैं तुम्हें सारी गाइडलाइन देता हूँ कि बैठ जाओ, शांति से बैठ
- 52:07जाओ। रिलैक्स यूरसेल्फ़ कंप्लीट्ली
- 52:12आराम से बैठ जाओ, आँखें बंद कर लो कहता हूँ सर ये क्रियाकलाप के
- 52:21अंदर मैं आनंद की मस्ती के कुमार में खोयार।
- 52:28कई प्रश्नों के जवाब आ जाएंगे आपको इस पर।
- 52:33हाथ काम से काम कर चीप निरंजन यह नजारा देखना हो तो यहाँ आता है
- 52:42कैसे सारा यंत्र काम करता है और कैसे मैं मदहोशी के उस आलम में
- 52:48खोया। तुम्हें प्रत्यक्ष शब्दों से
- 52:54समझने की आवश्यकता नहीं। प्रत्यक्ष प्रमाण मेरे पांव का
- 53:00अंगूठा भी नहीं हिलता, पर मैं सारा क्रियाकलाप दक्षता से कर
- 53:07देता हूँ, प्रवीणता से कर देता हूँ।
- 53:21तो पूछा है बेटी ने, मेरा तो सारा ज्वेलरी का खजाना ही भी तरह किसी
- 53:29गैर के हाथ में लग गया तू यही तो मैं तुम्हें समझाता हूँ, कोई बात
- 53:36नहीं चाबी तो मैं बता देता हूँ कहाँ है?
- 53:44जब मैं बोलता हूँ कि तुम्हारे भीतर एक ऐसा तल है और हजारों बार
- 53:50में मेरे शिष्य श्यामलाल का मोटरसाइकिल दो बार।
- 53:57दोनों बार मैंने ढूंढ के वहाँ वहाँ देखो वहाँ वहाँ खड़ा वहाँ
- 54:03देखो वहाँ खड़ा तीसरी बार मैंने कहा तुम चिंता मत करो, मैं ऐसा
- 54:11बरसूंगा सुबह आके तेरे घर पे देख जाएगा, सुबह आके 5:00 बजे कर
- 54:15देगा। ज़रा देखो तुम 10 मिनट के लिए बैठ
- 54:23नहीं सकते। एक व्यक्ति अगर 12 साल तक 14 साल
- 54:28तक एक कमरे में बिना हिलझुल के बैठा है और उस मस्ती के रस को पी
- 54:34रहा है, कहीं बाहर जाने की तमन्ना नहीं।
- 54:41तुम सारा कुछ मिलाकर भी एक बूंद नहीं पी पाओगे और मैं सारा समुद्र
- 54:47रोज़ पीता हूँ, हर पल पीता हूँ। अगस्त की तरह अब कितना फर्क है?
- 54:55यह कम से कम 25 साल पहले की बात है।
- 54:58मुहार प्रोफेसर मुहार वाली बात अगर वो चिंता हुई तो इस बात का
- 55:09प्रमाण करेंगे, लेकिन रणधीर सिंह तो आजीवत है।
- 55:13मुझे पता है क्योंकि मेरी शहर में तुम उससे पता कर सकते हो, वह
- 55:23बताएगा ओके हाँ, बिल्कुल ठीक मेरे सामने बताया और वहीं से मिली
- 55:32शादी। लेकिन इन चावियों को भूल जाओ।
- 55:39मैं तुम्हें इन चावियों के चमत्कारों को दिखाकर प्रभावित
- 55:42नहीं करना चाहता। मुझे श्रेय की कोई आवश्यकता नहीं
- 55:49श्रेय की तो इन्हें ऐसी आवश्यकता है जैसे जन्मो जन्मो से श्रेय के
- 55:53प्यासे। करना धरना कुछ नहीं तो चलो झंडी
- 55:57ही दिखा देते हैं वंदे भारत को करना धरना कुछ नहीं।
- 56:03चंद्रयान तीन पहुँच गया तो झंडी लेकर आ जाते हैं को पता है मान्य
- 56:09ग्रंथी जहाँ जाएंगे। जेहें जेहें चरण पड़े संतन के तहे
- 56:17तहे भयो विनाश अब देखिये बेचारा अमेरिका अच्छा भला था ये मैथिली
- 56:28कहती है अच्छा तो था सब कुछ, मैंने कहा फिर यहाँ क्यों आ गयी
- 56:32तू? तेरे को पता नहीं सब ठीक ठाक तो
- 56:37चल रहा था। मैंने कहा इतना प्यारा माहौल था,
- 56:41इसको तो लोग तरसते हैं योगी तरसते हैं इस प्यार भरे माहौल को, लेकिन
- 56:49बात तो ये है। यह बातों ही बातों में उलझा लेता
- 56:53है, ऐसा बोलता है मुझे पहली दफा पता चला कि मशरूम इतना तीखा होता
- 57:03है, हालांकि मैंने मशरूम खाये नहीं।
- 57:06कब मैं गरीब बनता मैं कहाँ से मशरूम दे के?
- 57:11जब रूटीन ने कहा तो छोड़ो मशरूम की बात, लेकिन वो उलझ गई और वो
- 57:22कहती किचंदा में दाग है, मोदी जी। उत्तरी तुमने ठीक कहा 1 दिन तुम
- 57:34भरल, भरल के रोओगी ना जाओ स्मृति इरानी की तरह और हाथ जोड़कर खड़ी
- 57:40हो और ये तुम्हारी तरफ झाँकेगा भी नहीं।
- 57:45उस दिन को याद कर सो ना मत रहो। 1 साल तक इधर मेरे पास उसी दिन
- 58:00व्यक्ति का फ़ोन आया, बाबा किसकी मानी?
- 58:03मैंने कहा जिसका तुम्हारा मन करता है मान लो।
- 58:07बाबा बातें तो तुम्हारी सत्य होती हैं, 17,000 प्वाइंट कहा तुमने
- 58:13गिरेंगे 15,000 प्वाइंट गिर गया तो मैंने कहा 15,000 प्वाइंट कभी
- 58:18ज़िन्दगी में गिरा है, नहीं गिरा तो अब जब मैंने कहा कि सोना
- 58:263,00,000 हो जाएगा। तो ये कहता खरीदो मत, ये साजिश है
- 58:31इनकी बलबूता नहीं है देश को चलाने का मूर्खता से, बस इन मूर्खों की
- 58:40कतारों से लोकतंत्र यही तो यही तो लोकतंत्र में खामी।
- 58:45अगर एक तरफ मूर्ख ज्यादा इकट्ठे हो जाएं तो बंटाधार हो गया।
- 58:49मुल्क का। आज ऐसा ही है।
- 58:54एक मूर्ख ज्यादा मात्रा में इकट्ठे हो गए और समझदार लोग थोड़े
- 59:01से। तो परड़ा इनका ही नीचे झुकेगा।
- 59:06यही लोकतंत्र की खामी है। लोकतंत्र का फायदा भी बहुत है।
- 59:12खामी भी है, लेकिन फायदा तो ये है कि चिल्लाते रहो, चिल्लाते रहो।
- 59:18रवीश कुमार की तरह अजित अंजुम की तरह।
- 59:26चिल्लाते हो प्रसून बारिश कौन सुनता है तुम्हारी?
- 59:37और इसके तो शर्म का पुर्जा निकाल लिया।
- 59:42शरम का पुरजा निकाल के वह है जो कल्पना छोटी नहीं कर सकते, वो फिट
- 59:46करते। अब ये कल्पना तो बहुत बड़ी करते
- 59:50हैं, इतनी योग्यता है नहीं, मैं पढ़ा लिखा हूँ मैं मैं कोई खास
- 59:59पढ़ा लिखा नहीं। हमारी शिक्षा दीक्षा है बस कभी
- 1:00:05कहते सब किए थे, कभी कहते भिक्षा मांगे थे, पता नहीं कब कब कब किए
- 1:00:11थे, पता नहीं कब एपस्टीन के आइसलैंड पे चले गए, कब छोटी
- 1:00:19बच्चियों के। लेग पीस खा लिए कोई पता नहीं।
- 1:00:22इसीलिए तो दिमाग इतना खराब हो गया।
- 1:00:26अच्छा भला गाना गया। उनके सारे लोग मारे गए जिन्होंने
- 1:00:32इसका अभिवंदन किया। तुम भी अभिवंदन कर लो।
- 1:00:41एक बार गया था, नाच के आया था बस इजराइल में यह तो नाच के आ गया।
- 1:00:48इजराइल और अमरीका दोनों तब के नाच रहे हैं।
- 1:00:55ईरान ने ऐसी वसूड़ी वोट दी याद रखेगा।
- 1:01:00उसको पता ही नहीं उसको पता ही नहीं था कि कोई नाच के गया है या
- 1:01:10वह अपनी मनहूसियत की। तिरंगे यहाँ छूट गया मैं वैसे
- 1:01:15राहुल गाँधी को कहूँगा कि तुम इस गद्दी पर मैं बैठ।
- 1:01:20गद्दी नया बेसिक बनवा लेना, इस गद्दी पर मत बैठना, इसको तो आग
- 1:01:26लगा दे। इसमें इसकी मनहूसियत की तरंगें
- 1:01:30हैं और मैं जो बात बोलता हूँ मजाक से नहीं बोलता हूँ।
- 1:01:36मैं उस संतों की खोजी हुई साइंटिफिक इन्वेंशन से खोजी हुई
- 1:01:48बातों से बोल रहा हूँ तज़र्बा है और अनुभव बहुत बड़ी चीज़ होती है।
- 1:01:56तुम इस व्यक्ति के पास भी बैठ जाओ, देखो ये बेचारा अच्छा बना
- 1:02:00था। अमित शाह किसकी संगत ने बिगाड़
- 1:02:04दिया? मोटू राम, अब पता है मेरे तो बाल
- 1:02:10बच्चे अभी तो रंड मुंड चुंड हैं। इसलिए तो लात मार के भगा दिया।
- 1:02:15उसने जब 3 साल कुछ नहीं हो तो उसने कहा भाग गया हरामखोर, यह
- 1:02:25क्या देता है मेरे अंगना में? त्यौहार क्या काम है?
- 1:02:32तुम हँसा मत करो, मुझे भी हँसी आ जाती।
- 1:02:38यह मनीष से ज्यादा से रखते हैं। एक को हम बहुशामी एक को छोड़ दिया
- 1:02:50बहुतों को भोगने के लिए, बहुतों को होगा भी।
- 1:02:55ये बिचारा पिट पिट के मर गया। मैंने कहा भाई मत बोला करो इसको
- 1:03:01मैंने भी तो बोलना छोड़ दिया ना देखो थोड़ा सा बोलता हूँ।
- 1:03:07इतने में ही टाइम टाइम पीसेस की हो जाती है, क्यों?
- 1:03:14क्योंकि तीन किलो निकालो, 300 किलो निकालो, इसके शर्म का
- 1:03:19पुर्ज़ा उस एआई स्पेशलिस्ट ने निकाल लिया है।
- 1:03:26इसके कल्पना का पुर्ज़ा है सर ये कहेगा देखो वो बना तो हुआ है
- 1:03:30तुम्हें दिखता नहीं क्या? अरे भाई है एम के वो देखो सामने
- 1:03:36और होगा रडा मतदान वहाँ ईंट भी नहीं होगी और ये कहेगा ये तो बड़ी
- 1:03:43सुन्दर सात में मंजिला इमारत है देखो कितनी सुन्दर लिफ्ट से लगी
- 1:03:50है। जगमगाहट हो रही है और होगा कुछ भी
- 1:03:54नहीं तो इसकी कोई गलती नहीं है। वह जो पुर्जा भगवान ने लगाया, वह
- 1:04:02कल्पना का कुछ ज्यादा ही लगा और शर्म का पुर्जा।
- 1:04:12बस करो अच्छा चलो बस कर सकता हूँ तो एक जिसकी मैं बात करता हूँ
- 1:04:22तुम्हारा भी कुछ हो गया है। तुम भी उसको ढूंढने की फिराक में
- 1:04:29रात दिन एक ही हो मौत का 1 दिन मोईन है नींद क्यों रात भर नहीं
- 1:04:36आती सारी दुनिया में कितने फिलेसेफर पर कितनी किताबें लिख
- 1:04:44दीं? बाबा नानक ने कहा फड फड गड्ढे तो
- 1:04:47दिए थे, फड फड हुए ख्वा नानक लिखे एक गलत है, बाकी चकण चार कितने
- 1:04:57शास्त्र बना दिए? लेकिन उसकी एक बात तुम्हें समझ
- 1:05:04नहीं आती। अगर एक बात तुम्हें समझा आ जाए तो
- 1:05:13बात बन जाए, तुम्हारा कुछ गुम हो गया है और क्या गुम हो गया है जो
- 1:05:21तुम्हें खुद से पता नहीं चलता। जैसे से बिटिया ने पूछा बाबा सारा
- 1:05:27माल वहाँ पड़ा है, जब नींद नहीं आती अब रात को 10:00 बजे मैसेज
- 1:05:39आया देख लिया। नहीं नहीं, फरियाद लगा दी कि इसकी
- 1:05:48चाबी बता दो कहाँ मैं चलो मैं तो सो गया, तुम्हारा भी कुछ खो गया
- 1:06:01है उसी खोए हुए वस्तु की तलाश में तुम बाबरे हो गए हो।
- 1:06:11कभी कहीं ढूंढ़ते हो, कभी कहीं ढूंढ़ते हो धन में ढूंढ़ते हो,
- 1:06:15गदियों में ढूंढ़ते हो, मान सन्मान श्रेयों में ढूंढ़ते हो,
- 1:06:20ऊंची ऊंची मंजिलें देखकर बड़े खुश होते हो लेकिन।
- 1:06:28भीतर का अंत तक खुश नहीं होता, बस ये बुद्धि तक खुशी सीमित रह जाती
- 1:06:33है। कहीं नहीं मिलता और मेरी आँखें
- 1:06:41बात सुनो, कहीं नहीं मिलेगा। चीजें जहाँ हुआ करती हैं वहीं
- 1:06:47मिला कर तू कल मिल जाएगी, चाबी बिलकुल नहीं जाएंगे, लेकिन बात तो
- 1:06:59ये है कि तुम ढूंढोगे क्या कब बाहर से क्लिंग नेसेस को छोड़ोगे?
- 1:07:08मैं तो यहाँ तक भी कह दिया कि तुम गुरु से भी नेह मत लगा के रख लेना
- 1:07:15यह भी वहाँ चलेगा तुम महावीर का शिष्य गौतम बड़ी सेवा करता था, एक
- 1:07:22पल दो नहीं होता था और महावीर ने कहा, यह तो पहुँच गया।
- 1:07:27सेवा करते करते पहुँच जाते हैं। लोग हनुमान जी सेवा करते करते
- 1:07:32पहुँच गए इसलिए तुम सूत्र जी से कहते हो?
- 1:07:35यह परमात्मा तक पहुंचने का एक मार्ग था।
- 1:07:40तुमने इसे हीनता में तब्दील कर दिया।
- 1:07:44सेवा से पहुंचे और सेवा से तो बहुत ही जल्दी पहुँच जाते हैं।
- 1:07:49हनुमान जी सेवा से पहुंचे बहुत देर तक पकड़ के लौट रहे हैं
- 1:08:09अपने घर को। फरीद और फरीद किसी वाण में बैठे
- 1:08:22तब कर रहे है, संकल्प बढ़ता जाता है और एक ऐसा वक्त आ जाता है।
- 1:08:30संकल्प का मतलब होता है चेतना। चेतना कतल जैसे कैसे बढ़ेगा?
- 1:08:37वैसे वैसे संकल्प कतल बढ़ेगा तो चेतना कतल इतना बढ़ गया चिड़िया
- 1:08:45शोर मचा रही थी और शोर से उसे ध्यान में बाधा बन रही थी।
- 1:08:53अभी थोड़ा सा कच्चा था तो फरीद ने कहा चिढ़ी और मर जाओ, मर गए ये
- 1:09:06क्या हुआ? यह संकल्प का कमाल?
- 1:09:12तुम संकल्प करते हो इस बुद्धि से जिसकी क्षमता बड़ी सीमित है।
- 1:09:18गायकर का संकल्प तो कहीं नहीं पहुंचोगे सागर का संकल्प करोगे तो
- 1:09:24क्षण भर में हो जाएगा। गायकर के संकल्प से कुछ नहीं
- 1:09:28होता। तुम सारे दिन गालियां निकालते हो,
- 1:09:30मेरा पड़ोसी मर जाए। पड़ोसी का बाल विवाह का नहीं
- 1:09:34होता, ऐसा मत करो तो गागर का संकल्प करोगे?
- 1:09:47किसी का कुछ नहीं बिगड़ता, बस तुम इतना सा सिंगर पकड़ते हो।
- 1:09:51क्योंकि यहीं तक पहुंचा है तुम्हारी कितनी पहुंचा है इनमें
- 1:09:56अचार्यों में सर लोगों में एक खान सर में कितनी सी अप्रोच है, कितनी
- 1:10:02सी गागर की गागर भरी हुई है लेकिन?
- 1:10:11मैंने कहा था विकास देव कृत्य से कि तुम अज़मेल की कथा मत कहो
- 1:10:18क्योंकि वह सागर की बात तुम गागर की बात करने वाले यूपीएससी की
- 1:10:24कोचिंग देने वाले आई ए एस की कोचिंग देने वाले सागर की बात मत
- 1:10:29किया करो। सागर की बात कहने का वही अधिकारी
- 1:10:33है। रामकथा के तेरी अधिका श्री रामकथा
- 1:10:46के तेरी अधिका। रि जिनको सत संगति, अति प्यारी
- 1:11:02राम कथा के तई अधिकारी, जिनको सतसंगति अति प्यारी।
- 1:11:09आधे लोग तो वासियाँ लेने लगते हैं, आधे लोग मेरी वीडियो को बीच
- 1:11:14में छोड़ देते हैं। बाबा इतनी लंबी नहीं सुनी जाए,
- 1:11:18810 मिनट की वीडियो डाला करो, मैंने कहा भाई 10 मिनट में तुम
- 1:11:23कैसे समझोगे? 10 मिनट तो मैं सांस लेने में
- 1:11:27गुजारती हूँ। ऐसा तुम कैसे समझोगे?
- 1:11:32बड़ी दूर की बात है, बड़े ढंग से समझानी होती है तो इसीलिए विवेचना
- 1:11:41करने वाला व्यक्ति तुम्हारे पास है नहीं, इसलिए शॉर्टकट के लोग
- 1:11:46बैठे हैं। पांच नाम ले जाओ।
- 1:11:48बस राधी राधी का इतिहास है इनके पास नहीं, नहीं, मैं सागर की बात
- 1:11:55करता हूँ, गागर से सोचोगे तो वह संकल्प बड़ा छोटा है, सागर का
- 1:12:03संकल्प चाहिए तो फरीद में सागर का संकल्प नहीं आया।
- 1:12:07गागर का संकल्प से ऊपर हो गया था। थोड़ा तो उसने कहा मर जा उछडियों
- 1:12:15अरे पाप हो गया, वृद्ध ने कहा तो उसने कहा जी जा उछडियों तो
- 1:12:21चिड़िया फिर चिंची करने लगी। जी गई ये कहानी है सुन ले बात कह।
- 1:12:27कहानी का मतलब है कुछ सत्य भी है इसमें और कुछ असत्य भी है इसमें
- 1:12:39जैसे कुनीन के ऊपर छूकर कोट कर दिया।
- 1:12:43ऐसा होता है कहानी। लेकिन चूक मत जाना सागर में
- 1:12:52तुम्हें सागर के संकल्प में तुम्हें ऐसा गर्जित होगा, फिर तुम
- 1:12:58जो चाहो जो मांगू ठाकुर अपने ते सोई सोई ते वै।
- 1:13:04जो बाहर तुम इतनी मशक्कत करके भी नहीं पा सकते और फिर भी तुम्हें
- 1:13:09नहीं मिलता कोई आज तक ऐसा राजा धरती पे हुआ जो जाता हुआ कह के कह
- 1:13:16के मैं तृप्त हुआ, लेकिन ऐसा संत सभी मिलेगा तुम्हें जो जाता वो
- 1:13:22कहेगा मैं तृप्त हूँ। राजा एक भी नहीं मिलेगा तुम्हें
- 1:13:28संत सभी मिलेंगे जो कहेंगे मैं थप दूंगा और आखिर में अर्जुन भी कहते
- 1:13:38हैं। नष्टो मोह मेरा मोह नष्टो मेरी
- 1:13:51भागदौड़ समाप्त हुई, समृद्ध लग्धा मुझे याद मुझे याद आया हू एमआइ पर
- 1:14:02ये मेंबर माइसेल्फ। मैंने याद कर लिया मैं कौन तो
- 1:14:11चिड़िया तो उड़ गई तो उसने हाथ पे हर्ष मारा बन गई।
- 1:14:17बात पहुँच गए वहाँ लेकिन नहीं पहुंची क्योंकि गुरु नहीं था।
- 1:14:23गुरु होता तो वहीं बैठा देता, बैठ जा अभी नहीं पहुंचा तो खुशी खुशी
- 1:14:31वहाँ से चला चलो घर जाके माँ को सुनाते हैं।
- 1:14:36खुशखबरी चल पड़ा, गर्मी के दिन थे, प्यास लगे।
- 1:14:43रस्ते में एक पन घटाया वहाँ एक स्त्री पानी भर रही थी।
- 1:14:52उसने कर देवी प्यास लगी है। राहगीर हूँ जाना अभी दूर है।
- 1:15:02मुझे पानी पिला दो थोड़ा उस स्त्री ने कोई बात सुनी अपना जो
- 1:15:10घड़े लेके आई थी उसको भर्ती कर दी।
- 1:15:13पहली की स्त्रियां घड़ा फिर छोटा घड़ा ऐसे कई पात्र होते हैं,
- 1:15:17इकट्ठा लेके जाती हूँ। बार बार चटकर कौन मारे बहुत दूर
- 1:15:21पड़ता है घर फरीद ने फिर कहा देवी पानी पिलाधों में प्यासा हूँ दूर
- 1:15:35जाना राहगीर पांच चार बार कहने से जब उसे स्त्री ने कान न धरा।
- 1:15:44तो गुस्सा आ गया, गुस्सा आ गया उसने थोड़ा सा गुस्से में पूरा
- 1:15:50तुम पानी पिलाती हो कि नहीं? उस स्त्री ने परट कर देखा आँखों
- 1:16:02में नूर झा ज्वाला दर्दक रही थी, वह स्त्री बोली।
- 1:16:11तुमने मुझे क्या समझा है? चिढ़ियो मर जाओ चिढ़ियो जी जाओ और
- 1:16:15मैं मर जाउंगी मैं जी जाउंगी मैं अपने पति की सेवा करती हूँ
- 1:16:22निष्ठापूर्वक। और यहाँ एक शब्द पाप अंडरड्राइव
- 1:16:29कर दो जब भी तुम कोई भी काम सेव भाव से करते हो यानी टोटली
- 1:16:38इन्सर्ट कंप्लीटली इन्सर्ट योरसेल्फ।
- 1:16:45इन दैट वेरी एक्शन उस करम में अपने आप को पूर्ण रूप से समाहित
- 1:16:54कर देते हो तो तुम समझोगे तुम्हें तुम्हारा लक्ष्य मिल गया।
- 1:17:07परमात्मा को पाने का यही प्रकाश है न राम राम करने से पहले राधे
- 1:17:13राधे न पांच न जब मरे जाओ कोई बात नहीं, किसी का कुछ नहीं बिगड़ता
- 1:17:19अपना ही गँवाओगे बस जीसको 60 70,00,00,000 लोगों को पीछे लगा
- 1:17:25दिया। उनकी ज़िन्दगी बिगड़ जाएगी और इस
- 1:17:30बिगाडने के जिम्मेदार तुम हो गए इसलिए टांडे पांगे छांगे मांगे ये
- 1:17:35सब अगले जन्म में ऐसे लोग पैदा होते हैं जो पिछले जन्मों में
- 1:17:39लोगों को गुमराह किया। ये पांच नाम ले जाओ जब।
- 1:17:49क्या नीतीश कुमार का बेटा हेल्त मिनिस्टर बन गया?
- 1:17:53ये सीधा चल के दिखा दे, मेरे को बिहार का कैसे संवारेगा?
- 1:18:01खुद का तो समर नहीं पाता, मोदी ऐसी फौज इकट्ठी करना चाहते।
- 1:18:081 दिन बारात निकले, शंकर की बार कोई टुंडा फूंका, कोई सिंघम वाला,
- 1:18:13कोई दाढ़ी पाती, कोई नग्न फर रहा है, किसी के लंगोट ही है, किसी के
- 1:18:18लंगोट भी नहीं हाँ हाँ हू हू दांत बाहर निकले हुए अरे भाई ये
- 1:18:23हिंदुस्तान है कि शंकर की बारात। मोदी ने आज आप भी वैसे ही है शंकर
- 1:18:34की भारत इकट्ठे कर ले नहीं, नहीं मोदी शंकर नहीं है मोदी तो शंकर
- 1:18:40की भारत को। तो इस मूर्ख के पीछे मत रखना।
- 1:18:45ये कहते है सोना मत लो, चांदी मत लो सोना अभी खैर मैंने ताजवा तो
- 1:18:53नहीं देखा, लेकिन थोड़ा सा नीचे आ गया था 140 के करीब आ गया था,
- 1:18:57लेकिन याद रखना यह ₹3,00,000 हो जाएगा मैंने।
- 1:19:03यह ₹3,00,000 हो जायेगा और चांदी ₹5,00,000 हो जाएगी।
- 1:19:07तुम ना लो नहीं लेना दो लेकिन सोना ₹3,00,000 और चांदी
- 1:19:13₹5,00,000 मेरी प्राणी वीडियो मैं एडिटर से कहूंगा कि वह प्रकाशित
- 1:19:18करता हूँ। यह तो तुम्हें पागल बना के चला
- 1:19:28जाएगा। इसको तो पता है कि 2000 अब 100
- 1:19:37साल पूरे हो गए। 47 में देश से समृद्ध हो जाएगा और
- 1:19:43मैंने कहा हुआ है। देश ऐसी गर्त में जाएगा कि तुम
- 1:19:48त्राहिमाम त्राहिमाम करते रहोगे। क्यों?
- 1:19:52अगर यह प्रधानमंत्री बनता रहा तो जीस ढंग से इन्होंने सब कुछ खरीद
- 1:19:58लिया और ज्ञानीश कमर जताता है इनको।
- 1:20:04जब 91,00,000 लोगों का पूरा का पूरा नॉर्वे उड़ा दिया तुमने अरे
- 1:20:14झटको तो लेकिन इतना तुम आते झटको। थोड़ा हलाल कर लो, थोड़ा भगवान का
- 1:20:32नाम ला इलाहा इल्लाह मोहम्मद उर रसूलल्लाह तुम्हें तो झटका ही मर
- 1:20:42दिया। इकानवे लाख 27,00,000 लोगों की
- 1:20:50अर्जियां पेंडिंग पड़ी हैं। सुप्रीम कोर्ट फंडिया सुप्रीम
- 1:20:56कोर्ट फंडिया मेरी इस वीडियो को ध्यान से सुनें या ये क्लिप हुई?
- 1:21:03लेकिन बात तो ये है कि तुम मुझे कह दे तो बाबा कब अच्छे दिन
- 1:21:07आएँगे? मैं कहता हूँ तुमने किया क्या?
- 1:21:13महात्मा गाँधी के पीछे हर घर का हर एक प्राणी बाहर आ गया था सड़क
- 1:21:20पे? तुम अभी सोच रहे हो कि बाहर जाएं
- 1:21:25कि न जाएं तो फिर ऐसी ही दुर्गति होने वाली है, क्योंकि यह झटके ही
- 1:21:31बैठा है। यह लाग है, ये नरभक्षीय है।
- 1:21:40जो गद्दी मशीन हमने किया है, ठीक है गलती से हो गया, तुम्हें नहीं
- 1:21:44पता ज़रा सोचो तीन किलो गाली मोदी को भी पता है आखिर इतनी भारी
- 1:21:52मात्रा में गोली काली निकालना? तो इतनी भारी मात्रा के लोग भी तो
- 1:22:00होंगे क्या समानकारी निकाल देता है तुम किसी चैनल पे जाकर देख लो,
- 1:22:08सवाई व्याख्याओं के चैनल पर इसका गुणगान होता मिलेगा।
- 1:22:16जो व्यसय नहीं खरीदा नहीं गया जो सिर्फ वो सच बोले व्यसय इन सब
- 1:22:29इसकी आरती उतारती नजर आए। एक को इस्री छोड़ा के अनेक को वो
- 1:22:39बना था तो वह स्त्री बोली फरीद की बात पे लौट आओ।
- 1:22:56तुमने क्या समझा है? मर जाओ, चिड़ियों जी जाओ,
- 1:23:00चिड़ियों क्या मुझे ऐसा ही सोच रखा है?
- 1:23:08मैं अपने पति की सेवा करती हूँ अनन्य भाग से सेवा।
- 1:23:20मैं चिड़िया नहीं हूँ जीसको तू श्राप दे देगा और मैं मर जाऊंगा,
- 1:23:26कुछ नहीं होगा मेरा तू दे के देख ले कहानी है मैं तुम्हें समझाता
- 1:23:33हूँ इनके भीतर का तत्वा देख लेना। अपने भीतर जाके तुम्हें वह तत्व
- 1:23:39मिल जाएगा साथ साथ मैं बोलता भी जाता हूँ नोट कर लिया करो तो कहा
- 1:23:49कि तुम मुझको चिड़िया मत समझ। लेना।
- 1:23:58मैं पति व्रता स्त्री हूँ, पति व्रता का मतलब संकल्प जो काम करते
- 1:24:07हो, पति बीमार रहता है, सेवा करता हूँ और तन मान धन से सेवा करता
- 1:24:14हूँ। पति सो जाता है तो मैं सो पति
- 1:24:23हुंकार भरता है तो मैं जग जाती हूँ कुछ दुखता पछता ना हो, कोई
- 1:24:30तकलीफ ना हो, कोई प्यास ना लगी। ऐसा संकल्प पूर्ण समुद्र जैसा जब
- 1:24:41हो जाएगा मैं वह पूरा भूड़न डरा गयो किनारे बैठ तुम गागर भरकर
- 1:24:49समुद्र में से। उतना सा संकल्प करके हर लोग
- 1:24:55निश्चिंत हो जाते हो, पैसा बंटूर लेते हो, रोज़मर्रा के काम चल
- 1:25:01पड़ते हैं। मैं मानता हूँ इस मोदी राज़ में
- 1:25:07शुद्ध काल आ गया है। ये कौन सा काल चल रहा है?
- 1:25:11अमृत काल चल रहा है बता दिया करो मेरे को थोड़ा मैं भूल जाता हूँ
- 1:25:17अब कल ही मेरे को इकया के द्रोपदी नहीं सो गई थी स्मद्र सो गई मैंने
- 1:25:25काफी अच्छा किया है याद। सुभद्रा कृष्ण की बहन थी यानी
- 1:25:34बलराम की बहन थी। रोहिणी की बेटी बलराम और सुभद्रा
- 1:25:43है। वो क्या हुआ?
- 1:25:44बहुत गहरी। कहानी है वो फिर कभी सुनाऊंगा तो
- 1:25:48सुभद्रा के गर्भ में था। अभिमन्य और अर्जुन सुना रहा था।
- 1:25:59अभिमन्यु के पुत्र के रूप में आए परीक्षित राजा और परीक्षित के
- 1:26:05बेटी के रूप में आई जन्मे तब तक हमारी जो व्यास है।
- 1:26:13ऋषि व्यास जो परासर के पुत्र हैं वो जीवंत है।
- 1:26:28तो तिह खत्म हो गई अगर तुम किसी भी काम को ऐसी इन्सर्टनेस से करते
- 1:26:39हो कि करताक हो जाता है, अब तुम्हें थीम बताता हूँ करताक हो
- 1:26:46जाए। कर्म ही बचे तो तुम वह पर्दा देख
- 1:26:57लोगे। जीस पर्दे का मैंने परसों गुणगान
- 1:27:00किया था, जिसके ऊपर अच्छी, बुरी सब फिल्मों चलती है, उसी के ऊपर
- 1:27:05तुम। मेरे हजूर जैसी शानदार फ़िल्म चला
- 1:27:10लेते हो, मुगले आजम जैसे और उसी परदे के ऊपर तुम बोर्न फ़िल्म चला
- 1:27:16लेते हो, लेकिन परदे का कुछ नहीं बिगड़ती।
- 1:27:19लोग मुझे पूछ लेते हैं कृष्ण ने? परमात्मा तत्व होके फिर क्यों
- 1:27:29बच्चे पैदा की उस ऊपर से भी था जिसके ऊपर भी जलता है जिसके ऊपर
- 1:27:38मेरे हज़ूर जैसी फ़िल्म भी चलती है?
- 1:27:40देखना मेरे हज़ूर बड़ी प्यारी फ़िल्म है।
- 1:27:44मुगल ए आज़म। अरे दिल जैसी फिल्मों चलती हैं
- 1:27:49पुरानी फिल्मों ये कलाकृति से भरी हुई फिल्मों।
- 1:28:05आदमी जन्म लेता है ओही सुबह उठना, दफ्तर जाना ओही जल्दी, जल्दी
- 1:28:15दफ्तर जाना ओही सारे दिन वास की झड़कें।
- 1:28:24वहीं फिर सांड को थके मांदेकर लौटा।
- 1:28:32वही सारा दो दूनी चार फिर सो जाओ, ऐसा ही व्यापारी है सुबह उठो,
- 1:28:40दुकान खोलो। सारे दिन मग्ज कपाई करो 20 ले ले
- 1:28:4821 ले ले ये कुछ तो होता है क्या? तुम इसलिए आए तो ये जो फिल्मों
- 1:29:03होती थीं, यह देखने में तुम्हें ऐसा लगता था जैसे फ़िल्म है
- 1:29:07सनसारी? इनमें अध्यात्म कूट कूट के भरा
- 1:29:12होता था। थोड़ा सा दिल को तबियत को उस तरफ
- 1:29:20ले के जाओ जीस तरफ से मैं बोलता हूँ।
- 1:29:24अपने रुख पे निगाह करने दो। अपने रूख पे निगाह करने दो खूब
- 1:29:43सूरत गुनाह करने दो। रुख से पर्दा हटाओ जाने आया आज
- 1:30:04दिल को। तबाह कर ने दो तुम अगर दिल को
- 1:30:15तबाह कर लो उसकी जाद में उस परवाने की तरह जीसको पता है जल
- 1:30:24जाऊंगा और मेरा राख भी न बचेगा। लेकिन फिर भी वो चलता है।
- 1:30:31रुख से ज़रा नकाब उठाओ मेरे हजूम रुख से ज़रा नकाब उठा मेरे हजूम
- 1:30:59जलवा जलवा। फिर एक बार दिखाओ, मेरे हयूर।
- 1:31:14कभी खो गए थे, किसी मेले में उसके साथ श्रद्धा से हुआ करते थे।
- 1:31:22लेकिन कभी कोई अभागा क्षण आया तो तुमने उसका दांव नहीं छोड़ा बस।
- 1:31:29तब से आदमी उसी में मिल जाने को दी जा।
- 1:31:40चाहत निगाहें मिलाने को जी चाहत दिलौजा लुटान को जी।
- 1:32:00चाहत है निगाहे मिला ने, को जी चाहता वो तो हम अच्छे से इश्क।
- 1:32:18कहती है दुनिया वो तो हम अच्छी से इश्क कहती है दुनिया वो तो हम
- 1:32:35उठाने को जी। चाहता है।
- 1:32:52किसी के मनाने में दो लज्ज़त बोपाई।
- 1:32:58किसी के मनाने में लज्ज़ हो पाई के फिर रूठ जाने को मन कर किसी के
- 1:33:09मनाने में लज्ज़त वह पाई के फिर रूठ जाने को मन करता।
- 1:33:19वो जलवा जो ओझल भी है सामने भी दखता भी है कुछ थोड़ी थोड़ी सी
- 1:33:27कभी सतौरी की झल मिलती है तुम्हें?
- 1:33:30वो जलवा जो ओझल भी है सामने भी। वो जलवा चुराने को जी चाहता है
- 1:33:38तुम्हारे जी तो उसे चुराना चाहता है लेकिन क्या करें?
- 1:33:42ये गलतियाँ अड़े हो जाते हैं। ये मान सम्मान, ये धन, व्यापार
- 1:33:51संपदा ये सोने की भूषण की। ये आड़े आ जाती हैं तुम्हें वहाँ
- 1:33:57तक पहुंचने नहीं देते जीस घड़ी मेरी निगाहों को तेरी दीद हुई जीस
- 1:34:08घड़ी मेरी निगाहों को तेरी दीद हुई।
- 1:34:12वो घड़ी मेरे लिए ऐश की तब ईद हुई जब कभी मैंने तेरा जान सा चेहरा
- 1:34:19देखा ईद हो याकिने हो मेरे लिए ईद हुई।
- 1:34:29ओह जलवा, जो ओह जलवी। वो जलवा जो ओझल भी है सामने भी वो
- 1:34:42जलवा चुराने को जी चाहता। वो जलवा चुराने चुराने को जी
- 1:34:54चाहता है जी चाहता। है।