Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Sep 25 - पांचों की पांच इंद्रियां संसार के लिए हैं, तो फिर परमात्मा का एहसास कैसे होगा?
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- 0:06ईश्वर है तो दिखाई क्यों नहीं पड़ता है?
- 0:19हमारे पास पांच इंद्रिय हैं। त्वचा से दिखाई नहीं पड़ता।
- 0:31कानों से दिखाई नहीं पड़ता, आँखों से सुना नहीं जाता, जीव से देखा
- 0:40नहीं जाता है, सभी का अलग अलग काम है और ईश्वर इंदिरा तीर्थ।
- 0:54जो अनुभवी इन्द्रियों से हो सकते हैं, वो संसारित है।
- 1:05ऐसा समझो कि पानी गर्म है। क्या तुम पानी को देख कर बता सकते
- 1:14हो कि ये गर्म नहीं, उसको छू कर ही बता पाओगे?
- 1:26ये तो बहुत गर्म है। पानी में नमक है, समुद्र है।
- 1:36क्या तुम बिना टेस्ट के बता सकोगे कि समुद्र का पानी नमकीन है ये
- 1:48पांचों अंतरियाँ? आँखें सुनने का काम नहीं करती,
- 1:55काम देखने का काम नहीं करता है। जीवा स्पर्श का काम नहीं करती, ये
- 2:03सब के अलग अलग काम करते हैं और ईश्वर इन सबसे पार है।
- 2:12ईश्वर न देखा जाता, न स्पर्श किया जाता, न सुना जाता न स्वाद जखा
- 2:23जाता। नहीं सूंघा जाता जैसे गर्म पानी
- 2:36को देख के नहीं पता चलता। समुद्र के पानी को देखकर के नमकीन
- 2:49हर चीज़ के लिए एक काबिलियत का होना जरूरी है।
- 2:56एक छठी दिव्य है दिव्य दर्शन कहते हैं ये चरण जक्ष्य हैं।
- 3:05हमारे और दिव्य जक्ष्य उनसे पिया जाता है।
- 3:16इसलिए मैं सदा ही बोला ईश्वर देखा नहीं जाता, ईश्वर अनुभव भी नहीं
- 3:25किया जाता, ईश्वर पिया जाता है और पीकर फिर उसका जो स्वाद है निराला
- 3:33है वो बताया नहीं जाता। सूरत कलारी बही मतबारी मदवा पी गई
- 3:43बेनतुल है ईश्वर इन्द्र अतीत है, इसलिए उसका इंद्रियों से अनुभव
- 3:59होता है। ईश्वर को जानने के लिए क्षति
- 4:04इंद्र ही चाहिए जैसे दिव्य जक्षु का कृष्ण कुमार मेरी आँख का पर्दा
- 4:14कर गया, सब अँधेरा हो गया। आपका काम देखने का है।
- 4:25ऑपरेशन कराया, निगाह वापस आई, परसों रोज़ बाथरूम जा रहा था,
- 4:38दीवार से टकरा के। दरवाजा दिखाए और क्या हुआ?
- 4:51ऊपर के दो दांत टूट गए, आंख के भी चोट पहुंची।
- 5:07आंख फूट गयी, दांत टूट गए, चूकना टूट गया फिर भी आप कहते हो की मैं
- 5:13सूखी और सुन्दर शौक आंख फूट गयी। चूकना टूट गया।
- 5:27दांत टूट गया। फिर भी ज़रा देखो ऐसा कौन हो
- 5:35नहीं, इसके बावजूद भी सुखी किसी को तलाशना है तुमने?
- 5:51और आंख फूट गई। मैंने धन्यवाद किया।
- 5:57क्यों दूसरी ने फूटी एक तो है? तुम्हें धन्यवाद देना सीखना होगा
- 6:14कुछ लूट जाए, कुछ पिट जाए ले के तो तुम कुछ आए।
- 6:22हर स्थिति में हर परिस्थिति में तुम्हें धन्यवाद देना होगा, वो
- 6:29धन्यवाद मध्यम बनेगा। तो मैं किनारे लगाने का से पार
- 6:35करने का कल मुझे 1 मिनट मिल गया। मैं डॉक्टर के यहाँ गया था दांतों
- 6:50को दुखाने के लिए मुझे कैसे दी हुई शक्ति से देख लेते है, मैंने
- 6:59सारी आँखें मूंदे रख दिया है। सब कुछ देव शक्षु से देखता हूँ
- 7:07देव शक्षु सिर्फ परमात्मा को देखने के काम आते हैं, संसार ही
- 7:11करता हूँ जहाँ जो चीज़ प्रयोग होती है।
- 7:18वहीं उसका प्रयोग करना चाहिए। देवचक्षु होते हैं परमात्मा ये
- 7:28चक्षु होते हैं संसार के दृश्यों को।
- 7:40तीसरा प्रश्न अगर तुम गाँधी जी थे तो तुम ने भगत सिंह को बचाया था,
- 7:51सुन्दर सौर, बढ़िया। जब देश गुलाम था, तुम्हारे बाप
- 8:03तुम्हारे दादा थे या की तुम नॉन बायोलोजी अरे थे, बाबा थे पक्का
- 8:14पक्का। तो वो गुलाम थे या आज़ाद गुलाम थे
- 8:28तो आज़ादी दिलैना का ठेका अकेले गाँधी के तुम्हारा कोई कर सकता।
- 8:40भगत सिंह की माफी और गाँधी माफ़ करा सकते तो करा देते।
- 8:46जेल में बंद हुआ व्यक्ति कह सकता है कि दूसरी जेल वालों को छोड़
- 8:50दो। वह तो खुद ही जेल में बंद है।
- 8:55सारा देश गुलाम है, गाँधी कोई अलग नहीं रह जाते, गाँधी भी गुलाम है।
- 9:068 अगस्त की रात को जब हमने कहा क्विट इंडिया मोमेंट।
- 9:129 अगस्त को सब धर लिए गए जेल में बंद गाँधी को भी धर लिया गया।
- 9:23कस्तूरबा और गाँधी आधा खान महल के भीतर कैद कर लिया।
- 9:35कस्तूरबा बहुत बीमार चल रहे थे। एस्थमा की उमारित और भी कई रोग
- 9:41थे। उसमें जेल के भीतर देखते ही देखते
- 9:50गाँधी के हाथों में सुर बने रहना चाहते हैं।
- 10:01ऐसे प्रश्न पूछने का कोई अर्थ नहीं होता तुम्हारे बाप दातों ने
- 10:09कुछ क्यों नहीं किया थे ना कोई नॉन बायोलोजी?
- 10:22तुम कहते हो की मैं बड़ी खुशनसीब हूँ जिसने आजाद भारत में जन्म
- 10:31लिया तो इस खुशनसीबी के लिए तुम्हारे पिता और तुम्हारे दादा
- 10:38की कोई जिम्मेदारी? आजाद भारत को कराने में तुम्हारे
- 10:45बाप दादा की कोई जिम्मेदारी नहीं थी और भगत सिंह को अगर फांसी की
- 10:50सजा सुना दी गई थी तो तुम्हारे बाप दाताओं की कोई जिम्मेदारी
- 10:55नहीं थी? पर उन्होंने कोई कुछ नहीं किया।
- 11:02अकेले गाँधी नहीं मुक्त होना था, सारा देश मुक्त हुआ और अकेले
- 11:10गाँधी की जिम्मेदारी तुम्हें तय नहीं करना था तो मुझे ये बताना
- 11:17चाहिए। के हमारे बाबा दादाओं ने
- 11:20स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान दिया?
- 11:24चरण पकड़े, पेंशन ली, भाग गए, माफी मांगी, छाती डांटकर खड़े हो
- 11:34गए। अपनी पीढ़ी के नीचे हाथ मारो
- 11:48खरीदा जे तिन मरण मुखिया तिन न मरे कुम खरीदा जे तिन मरण मुखिया।
- 12:03ते ना ना मारे को प्लीज़ कहते हैं अगर तुम्हें कोई मुक्की मरे तो
- 12:12उनके घूसों में मत मरो। आप पनरा कर जाइए, पैर से ना देख
- 12:18चूने उनके घर जाओ और उनके पांव को चूने।
- 12:23एक ये भी है नैतिकता से कहते है काले अक्षरों को मत लिखो,
- 12:39जिम्मेदारी सभी की बराबर थी, गाँधी ने बैरिस्ट्री का कोट पैंट
- 12:46उतार दिया लंगोटी बाट। गाँधी के पिता दीवान थे।
- 12:53अंग्रेजों के जमाने में दीवान की हैसियत होती थी।
- 12:56चीफ मिनिस्टर के खिलाफ़ उन्होंने कोट पैंट त्याग दिया तुम्हारे
- 13:05तुम्हारे वह बतादेने क्या त्याग? थोड़ा कुछ है कम अगर है फरीदा ये
- 13:24तुम अक्ल लतीफ हैं काले लिखना लेख आप न रहे गिरवान में है सिर निमा
- 13:36कर देख। अपनी पीढ़ी के नीचे सोटी मार के
- 13:42देख लो तुमने क्या किया, क्षेत्रपाल मूर्ति बनाते हैं और
- 13:54निठल्ले निकमे उस मूर्ति के भीतर। गलतियाँ कुछ संस्थाओं का काम दे
- 14:08ही रह गया। बरगलाना लोगों को करना कुछ नहीं
- 14:17किया भी कुछ नहीं, ना वापस तो नहीं किया ना खुद?
- 14:25महज कल्पना के सब जवाब दिखाने से विकास नहीं न करते, न ही
- 14:33प्लास्टिक के फूल फैक्टरी में बनाकर उनमें सुगंध आया करते।
- 14:44फूल तो धरती पाडकर ही खिला करते हैं, जिनमें सुगंध आती है।
- 14:55ऐसी बात मत कर बैठी इतिहास। अकेले गाँधी की जिम्मेदारी तो हम
- 15:05सब की जिम्मेदारी थे। इतने करोड़ लोग क्या कर रहे थे
- 15:12भाई आजाद हिन्द खोज में? तुम भर्ती मत हो जाना, ये सबर्कर
- 15:25का कथन है, ये देश को आजाद कराने के लक्षण है।
- 15:35तुम कुछ नहीं कर सकते हो, तुम इतना ही कर सकते हो।
- 15:39जो बोलेंगे उसको जेल में डाल दोगे।
- 15:41जब मार दोगे और सुराग भी नहीं निकलने दो, इतना ही कुछ तुम कर
- 15:51सकते हो, वो तुम कर रहे हो। बहुत से भविष्य वक्ताओं ने
- 15:59भविष्यवाणी की। 2025 में ये हो जाएगा परला हो
- 16:05जाएगा 2000 आपने क्यों नहीं कुछ बोला?
- 16:20मैं तुम्हें सीखाता हूँ, खुद को जानू तुम हो अगर तुम भविष्य में
- 16:29होने वाली घटनाओं को जानना चाहते हो तो जिन्होंने भविष्यवाणी की
- 16:34उनके चैनल पे चले जाओ यहाँ कच्चन टेल ले रहे हो।
- 16:42ठीक है, जो आप मिलेंगे ठीक है, अगर पहुंचना चाहते हो तो बड़े
- 16:51प्रेम से लेके जाओ अगर सवाल करना चाहते हो।
- 17:04तो फिर तुम लेज़ी पर्सन हो आलसी कुछ गंवाना नहीं चाहते बस जीवों
- 17:11के लपा लेते हो यहाँ चैनल पर क्या कर रहे हो?
- 17:17कितनी बार बोला? अपना भी समय खराब करते हो, देखो
- 17:21तुम्हारा समय कितना बहुमूल्य है। लोगों का समय भी खराब करते हो,
- 17:31किसी और प्रश्न को उठा ले मत आया रोहित शर्मा फिर कितनी बार का है?
- 17:38फिर आ जाते। अगर तुम अपने आप को जानना चाहते
- 17:52हो, सब लूट पिट जा रहे हैं, लेकिन तुम्हारा आनंद बचा रहा है अगर ये
- 18:03सीखना चाहते हो तो आ जाओ मेरे पास।
- 18:08भविष्य में क्या होगा, कैसे होगा? अगर ये सीखना चाहते हो तो भविष्य
- 18:13मल्का बताने वाले लोगों के पास चलेगी ना?
- 18:16दो टूक बात है तुम अभी तक नहीं समझ पाए मुझे बोलने को बोलते
- 18:22बोलते 5 साल से ज्यादा हो गए। करीब 10,000 लोगों को मैं ब्लॉक
- 18:30कर चुका हूँ, लेकिन तुम्हें समझी फिर भी नहीं आती।
- 18:42उसका एक कारण है कि तुम दुखी ही रहना चाहते हो।
- 18:49तुम सुखी हो ना ही मेरे से पूछते हो तुम कहते हो मैं सूखी हूँ
- 18:58बिलकुल सूखी दांत टूट गया, दांत में नहीं आँख फूट गई तुम्हारे
- 19:07सामने आँख में। चूकना टूट गया।
- 19:13चूकना में प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत होती है।
- 19:18क्या फिर तुम प्रेमानंद को कहते हो के के शौर्य से कहते हो के ठीक
- 19:32कर दे। तुम बाबा से कह दो की ठीक है,
- 19:39देखिए ये प्रश्न मैं बोलता हूँ निक्शल रूप से तुम्हारे प्रश्न
- 19:48बोल रहा हूँ अन्य से मैं छुपा जाता है इन प्रश्न मेरा इन कटु
- 19:54प्रश्नों को। आपके सम्मुख रखने का मतलब है मैं
- 19:59स्पष्टवादी हूँ सत्यवाद आपने गाली भी निकाली तो मैंने कहा आपने गाली
- 20:05निकाली, मैं छुपाता नहीं, मीडिया की तरह मैनस्ट्रीम।
- 20:14मैं छुपाटन जो तुमने कहा वो बहुत मैं बताती हूँ, ज़रा भी नहीं
- 20:19छुपाया, मैं कोई प्रशंसा करे, कोई निंदा करे, कोई चौली करे, कोई बात
- 20:28नहीं, उसका मेरे पे असर नहीं होता।
- 20:32तुम्हारी स्तुति मेरे तक नहीं पहुंचती, तुम्हारी निंदा मेरे तक
- 20:37नहीं पहुंचती, तुम्हारी क्रोध का ताप तुम्हारी गाली का ताप मुझे तक
- 20:46नहीं पहुंचता। मैं तुम्हें यही सीखाना चाहता हूँ
- 20:56शुरू से बोल रहा हूँ अगर सीखना हो तो ठहर क्या?
- 21:01लेकिन क्या करें कई चैनलों से जखाई मार मुर के यहाँ आते हैं,
- 21:06पता तो होता नहीं मैंने क्या बोल दिया कुछ।
- 21:13जो दिमागों में सड़ांध घुसी होती है वो आके मेरे सामने परोसते थे
- 21:17हो, येलो शुरू से सुनो, मैं क्या बोल रहा हूँ फिर सुन लो।
- 21:28बार बार सुन लो रोज़ कहता हूँ भाई मत सुनो मुझे मत सुन ये बुला रहे
- 21:37हैं इनके पास चले जाओ, पांडा लगाए बैठो।
- 21:42यहाँ तक कि शिविर लगाए बैठे हैं, शिविर में पर्चे काटते हैं।
- 21:48पैसे मांगते एक प्रोफेसर मेरे पास आ गया है कभी कुछ बोला उलट उलट
- 22:01मैंने कहा देवी तुम क्या हो? क्या काम करती हो मैं प्रोफेसर?
- 22:12मैं तुम्हें बोलता अच्छा नहीं लगता, नहीं बकवास मैंने कहा मत
- 22:20सुना करो क्यों सुनती हो तुम कसूर मेरा के तुम्हारा?
- 22:29और फिर अगर तुम बोलती हो प्रोफेसर 30 मिनट का पीरियड कितने कुछ लेते
- 22:40हो ₹1,75,000 में? और मुझे क्या दिया था गालियों के
- 22:49सिवा ऊछे ऊछे कमेंट के सिवा मुझे कुछ दिया था तुम खुद तो 30 मिनट
- 23:05बोलने का। 1,75,000 लेती हूँ और मैं तुमसे
- 23:11कुछ मांगता नहीं और तुमसे कहता नहीं कि मुझे सुनो अब देखिए ये
- 23:15बात अजीबोगरीब है ना? या तो बुद्धि तुम्हारे में नहीं
- 23:19है या कुछ मैं ही पागल हूँ हम दोनों में से एक बात तो है।
- 23:27इतनी बार कहने के बावजूद भी अगर आदमी अपने दिमाग की सड़ाध बिखेरता
- 23:33फेरे तो इसमें कोई निहित कारण है। पुत्री कोई निहित कारण है, कोई
- 23:43राग दुख गई। किसी दुखती रग पे हाथ डाल दिया
- 23:48होगा और कोई कारण होता है ऐसे रिएक्शन नहीं आया करते एक बतिया
- 23:55बोल रही मैं नहीं थी तब। नहीं तो गाँधी वध जैसा पुण्य कर्म
- 24:03मैं अपनी शुभ आदतों से करती हूँ। वह इसी विचार में ही तो तुम्हें
- 24:18मारा बहस हुआ करती थी। और विनायक कहा करते थे मोहन
- 24:35तुम्हारी अहिंसा की फलस्वी चले गए, ये तो अहिंसा करनी होगी,
- 24:46शस्त्र उठाने होंगे, चाकू तीखे करवाने होंगे।
- 24:57मीनकन्या दो तिहाई जमीन का मालिक, सब पावर उसके पास सब पोज उसके पास
- 25:07सब सोल थे उसके पास उसके विरुद्ध। सशस्त्र विद्रोह नहीं हो सकता।
- 25:17तुम दिमागी गड़बड़ाहट में सोच रहे हो, मैं जमीनी हकीकत को देख रहा
- 25:22हूँ नहीं चलेगा, सशस्त्र विद्रोह को चल दिया जाएगा।
- 25:29और असल में गांधीवाद का कारण यही बना, सशस्त्र विद्रोह किया।
- 25:38दो उम्रकैद की सजा हुई। कितनी बार माफी मांगनी पड़ी?
- 25:52उसका अहंकार टूट गया। खबरकर का मेरी फेलसफी फेल हो गई।
- 26:01इसकी फेलसफी जीत गई। बर्दाश्त न कर सका अहंकार का
- 26:09टूटना। और तुम शिखर कहते हो, गाँधी वध की
- 26:18योजना साबरकर सदन में बनी उसे लोग कहते तुम कहते हो मैं गाँधी हूँ
- 26:32नहीं हूँ नहीं था। और फिर तुम्हें किसी ने कहा की
- 26:37तुम मानो तुम ना मानो कोई तुम्हारे ऊपर तलवा रखी है मत मानो
- 26:45और फिर क्या गाँधी ने तुमसे मांगा?
- 26:51तुम तो गद्दी के ऊपर उछल के बैठ जाते हो और छोड़ते नहीं।
- 26:55गाँधी को गद्दी मिल रही थी, फिर भी नहीं बैठा।
- 27:02गाँधी ने तुमसे क्या मांग लिया? ये नोटों के ऊपर गाँधी हटा दो और
- 27:09जो ये सेशन करती है उसके बदले में ये गाँधी वाला नोट लेते है।
- 27:17उस नोट के ऊपर गाँधी की तस्वीर होती है।
- 27:19मत लिया करो अगर इतना ही गाँधी से तुम्हें द्रोव है और गाँधी का नोट
- 27:26मत लिया करो। और मैंने तुमसे क्या मांगा मैं था
- 27:36या हूँ गाँधी सिर्फ बताया मेरा अनुभव है तुम मत मानो पहली बात और
- 27:49मान भी लोगी तो मैंने तुमसे मांग क्या लिया?
- 27:54कि मैं गाँधी हूँ, मुझे ये दे दो सम्मान तो मुझे विजय वत्र का ही
- 27:59बहुत मिल रहा है। इतना सम्मान मिल रहा है शायद।
- 28:10गाँधी के भक्त इतना सम्मान मिला, जीते थे, लठ ही गाने पड़े न तो
- 28:21सम्मान चाहिए, तुम जीवन जीने का डांगी नहीं देखता।
- 28:30यहाँ तक कि मैं भोजन भी नहीं करता, जाजू में सैर नहीं करता,
- 28:37बाहर के दृश्य नहीं देखता, किसी से बोलता चलता नहीं, तुमसे मांगता
- 28:46क्या हूँ मैं? तुम यहाँ आ जाते हो, तुमसे कोई
- 28:49फीस नहीं ले जाते, क्या गाँधी ने तुमसे मांग लिया?
- 28:56उसने कहा मुझे राष्ट्रपिता घोषित कर दो, तुमने किया।
- 29:02उसने कहा मुझे महात्मा कह दिया तुमने तुमसे।
- 29:07मांगा उसने तुमने ही किया ना उसे गद्दी मिल सकती थी, वो नहीं ले
- 29:17अपनी छाती पे हाथ रख के बताना अगर तुम्हें गद्दी मिल रही हो तो तुम
- 29:21क्या नहीं तुम्हारी सभी बातों का जवाब?
- 29:28अगर त्याग दोगे तो तुम बोलने की हिम्मत कर लो अगर बिक जाओगे थोड़े
- 29:36से पैसे में या किसी राज्यसभा के सेट में या गवर्नर के सेट में?
- 29:44फिर तुम गाँधी का गाँधी का नाम मत लेना बोलने कहा तुम्हें तो ही है
- 29:55अगर तुम्हें गद्दी मिलती हो और तुम्हें नै लो कौन रोकता था गाँधी
- 30:00को बैठ जाती? लेकिन जिसने हंस पा लिया भीतर काम
- 30:16वह कोई की कालमा पसंद नहीं करेगा, जो आनंदमय हो गया वह इंद्रियों के
- 30:27स्वाद नहीं जाएगा। हिंसकाइयो मानसरोवरु मानसरोवरु।
- 31:10फिर क्यों बोले तुम्हारी आदत है राजनीतिज्ञों की तरह मुद्दों से
- 31:18भदगाने के लिए लेकिन मुझे ना उठा सकोगे।
- 31:22मेरा मुद्दा एक ही है। तुम कैसे सुखी हो जाओ?
- 31:26तुम कैसे आनन्दित हो जाओ अगर नहीं होना चाहते?
- 31:32तो मैंने तुम्हारे गले में फांस नहीं डाल रखी है।
- 31:38जो होना चाहते हो वहाँ चले जाओ, ताल तलैया।
- 31:54एक प्रश्न रह गया।
- 32:07वैसे तो मैंने धन्यवाद कर दिया। आप कहते थे कि आपने सब भोग होक अब
- 32:15ये जो दांत टूट रहे, आँख उठ रही है, ये सब कहाँ से आ रहे है मेरे
- 32:23भोग खत्म, ये सब वो कर्म हैं। तो मैं दीक्षा देते वक्त तुम्हारे
- 32:30उठा ले, मेरे अपने कर्म मेरे अपने कर्म होने तो बंद हो गए।
- 32:4028 अक्टूबर उन 150 के बाद जब मैंने जान लिया।
- 32:48कर्म करने वाला मैं नहीं कर्ता मैं करतार को एकुंकार सतना।
- 32:57करतारपुर निर्भय, अकाल मूरत यूनिसेपन गुरप्रसाद।