Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Sep 25 - Explanation of - कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर, न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर।
Transcript
- 0:03कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगें खैर ना काहु।
- 0:14से दोस्ती। ना काहु से बैस।
- 0:25बाबा इस दोहे का रहस्यत्मक अर्थ सुलझाने का कष्ट करें शिलादेवी
- 0:33टेरा तुस कबीरा बाजार में सबकी मांग एक है।
- 0:48ना काहु? से दोस्ती।
- 0:50ना काहु से प्यार संसार के परिप्रेक्ष्य में देखेंगे
- 1:06पुरस्कार है के संसार के प्रति सदा।
- 1:13द्यादू भाव बनाए रखो संसार के। प्रति कुपित।
- 1:19मत हो क्योंकि संसार आईना है परमात्मा का, जिसके पास आँखें
- 1:33हैं। इस आईने में परमात्मा की तस्वीर
- 1:39देख सकता है संसार के कण कण में परमात्मा विद्यमान ईशा वास्मिदम
- 1:56सर्वभम यथकैंच जगतयाम जगत। सारे जगत के।
- 2:06कण कण में सर्वव्यापक होकर वह परमपिता परमात्मा आरूण है।
- 2:21सच है। इसलिए संसार के प्रति दयालु बने
- 2:30रहो। यहाँ तुम कोपिक।
- 2:36होते हो? तो एक अर्थ में सम्मिलना के तुम।
- 2:42परमात्मा के प्रति ही। क्योंकि इसके।
- 2:46सिवा? यहाँ कुछ भी तो नहीं है, लेकिन
- 2:54इसके गहरे अर्थ देखें थोड़ा। को बदले।
- 3:02अपने भीतर जाए उस स्थल पे तो इसका अर्थ थोड़ा सा और हो जाता है।
- 3:18कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगें खैर हम सबके भीतर।
- 3:29एक तल पर वह सबकी खैर मांगने वाला पर्व पिता परमात्मा सजन हारा।
- 3:41कृपा का सागर। रहमो करीम एक तल पर वह विराजमान
- 3:57है सब के विराजमान है। सब के हजों में वह स्थित है।
- 4:14और वह सबकी खैर मांग रहा है। बड़ा प्यारा शब्द है।
- 4:22अगर परमात्मा खैर न मांगता तो यह संसार टिका हुआ नहीं रहता।
- 4:32कब का सर्कैटर हो जाता है धोल दूसरे हो जाता है खंड विखंड हो
- 4:38जाता है एक ही कारण है। तो इसका।
- 4:44प्रतीक तंतु आपस में घुसा हुआ है। वह कारण?
- 4:49यही है। कि वह।
- 4:53संसार में। हर जगह विद्यमान है, धागे की तरह
- 5:00माला के मनकों को अपने भीतर समाये हुए।
- 5:10बस ये धागा दिखता है। लेकिन इस।
- 5:17धागे के बलबूते। पे सारी माला।
- 5:19कड़ी रहती है धागा बड़ा मजबूत है तुम्हारे माला के धागे।
- 5:27तो शायद कमजोर क्यों? लेकिन परमात्मा?
- 5:33का धागा बड़ा मजबूत है, वह गलता नहीं रोकता, नहीं जलता नहीं कटता।
- 5:43इसी के बारे में। भगवान कृष्ण कहते हैं, नैनब चंदन
- 5:47तीर्थ। नै नुम उदाहती पावका नै?
- 5:53चैनम क्लेदिन। त्यापू न शोषित मरु कहा अपनी
- 6:05सृष्टि को बना कर सर्जन हरा सृजन करता अपनी।
- 6:11सृष्टि में ही समाहित। हो गया।
- 6:14और अगर ऐसा न होता तो यह सजना कब की स्केच हो जाती?
- 6:22खंड बिखंड हो जाती बिखर जाती 2 दिन।
- 6:29साथ रहते। और तितर बितर हो।
- 6:37जाता है, टूट गई है। माला मन।
- 6:50के बिखर गए। 2 दिन रहकर सा।
- 7:02न जानी। किधर गए हो गई है?
- 7:11माला मन के। बिखर गए तो दिन रह कर सा।
- 7:23न जाने। किधर गए?
- 7:32वह सर्जन करता। खुद ही दागे की तरह गूंसा हुआ है
- 7:40संसार के भीतर, अन्यथा इतना भारत कौन उठाता?
- 7:47मनुष्य में इतनी क्षमता नहीं। की वह एक क्विंटल बोझ को उठाए।
- 7:58वह कितना जहर डूबा है। इस सर्जना का कितना भार है?
- 8:06लेकिन उसे ज़रा भी आपत्ति नहीं घूम रहा है।
- 8:15चल रहा है अपनी गति से। और प्रसन्न नानक विद्या कर विचार
- 8:28मैं हँसता ही रहता है। प्रसन्नता उसका स्वभाव है।
- 8:39इसलिए गुरुक। ने कहा हँसी भौ खेली भौ जरी भौ।
- 8:47जैसे। के पास जैसा होकर ही।
- 8:49जाना वैसा ही हो जाना होता है। वह प्रसन्न है तो गंभीर गंभीर हो
- 8:57के वहाँ मत जाना नहीं पहुंचोगे। हस्ते फैलते।
- 9:03जाना गीत गाते जाना, मुरली बजाते जाना आनंद।
- 9:14से मुदित मन। प्रसन्न मद्रा।
- 9:22नाचते खाते हैं और तुम पाओगे, ज्यादा देर नहीं लगेंगी।
- 9:33वह मुरलीधर तुम्हारे नेत्रों के सामने खड़ा है, बस तुम एक सूत्र
- 9:41अपना लो। संसार के प्रति देवबान क्योंकि।
- 9:46उसके सिवा कुछ है नहीं। क्रोध किसपे करोगे बुरा कौन?
- 9:56अच्छा कौन वो ही तो है। तो कबीर कहते हैं, कबीरा खड़ा
- 10:07बाजार में सबकी मांग रखा वह। तो सबकी।
- 10:13खैर मांगता है और मांगता। ही नहीं।
- 10:16खैर करता है। दादा बनकर पिरो लेता है।
- 10:22सभी मानव मन के ठहरे रहते। हैं।
- 10:27उसके ज़ोर। से अगर वह ना हो तो सरजना बिखर
- 10:35जाए। इसी को प्रलय।
- 10:37कहते हैं, वह है। तो सारी।
- 10:42सजना होगी। इसी को कहते हैं इसी को उत्पत्ति
- 10:49कहते हैं इसी को। आरंभ।
- 10:51कहते हैं। परमात्मा का संकल्प।
- 10:57कि मैं एक से अनेक हो जाऊं। और वह हो गया।
- 11:03और परमात्मा जब संकल्प करेगा मैं अनेक से एक।
- 11:06हो जाऊं। तो वह हो जाएगा।
- 11:11उसका संकल्प ही काम करता है। तुम तो सिर्फ दावा।
- 11:15करने वाले। तुम्हारे पले और कुछ नहीं।
- 11:21मैं है जे दाव ये मेरा, ये तेरा ये तेरा।
- 11:26ये मेरा। और मैं है जे दावों करना से।
- 11:36अल्पाजों से, कल्पनाओं से। सत्य का कोई भी तो संबंध नहीं है,
- 11:47तुम कल्पनाओं, कल्पनाओं में चित्र बना।
- 11:50लेते हो? ये परमात्मा है।
- 11:55तो? फिर चित्र के सिवा।
- 11:56परमात्मा नहीं है क्या? जो चित्र तुमने बनाया।
- 12:02किसी का भी बनाया अगर वह परमात्मा है।
- 12:09तो उस। चित्र के इलावे।
- 12:10जो है। वह क्या है?
- 12:16वह भी तो परमात्मा है, तू चित्र बनाना सही।
- 12:23मायने में परमात्मा से। बेलगाव करना है तुम्हारे?
- 12:29सभी चित्र। वेद पैदा करते हैं।
- 12:34तुम्हारे सभी। आकार।
- 12:38वेद पैदा करते। हैं इसलिए दुनिया आज।
- 12:43इतनी वेदवादी हो गई है ये मात्र तुम्हारे।
- 12:47चित्रों के कारण है। तुमने भगवान की मूर्तियां बना दी?
- 12:53इस अर्थ में देखा जाए। तो ये।
- 12:55सलाम धर्म बड़ा शानदार है, इस्लाम कहता है उसकी कोई मूर्ति नहीं, वह
- 13:03अमूरक है। और आनंद की और विद्युत की कभी कोई
- 13:09मूर्ति होती है। बताइए आनंद, जब घनी भूत होता है
- 13:16तो उसकी कोई मुहूर्त बना सकोगे। तुम्हारे घर में चलती हुई ये
- 13:21विद्युत के घर में तुम्हारे सारे उपकरणों को चलाती है।
- 13:26उसका कोई? रूप है।
- 13:28उसका कोई आकार है, उसका कोई चित्र है नहीं है।
- 13:35मनुष्य की बड़ी से बड़ी। गलती के उसने परमात्मा का आकार
- 13:40बना लिया। इससे भयंकरतम गलती मनुष्य नहीं
- 13:47कर। सकते?
- 13:53यह पागलपण की शुरुआत थी, आगाज था फिर पागलपण बढ़ते ही चले गए।
- 14:02आज आज पागल ही पागल है। बुद्धिमान बचा।
- 14:08ही नहीं। अगर बुद्धिमान बचा है, तो वह तुम
- 14:12पागलों से बच के। रहता है।
- 14:15कहीं उसे। पता है।
- 14:18इन पागलों की भीड़ में जाना खत्म न करें, ये पागल तुम्हें डले
- 14:26मानेंगे। नीटियां मारेंगे, पत्थर मारेंगे।
- 14:32सारी दुनिया मूर्ख पागल तुम्हारे हर शब्द से पागलपन छ लगता है और
- 14:52तुम्हें। पता भी।
- 14:53नहीं है। कि तुम पागल हो।
- 14:56पागलों? को पता।
- 14:57भी नहीं होता। पागल सदा ही कहते हैं कि नहीं?
- 15:01मैं समझदार हूँ। आप ज़रा।
- 15:04किसी पागलखाने में जाना वह कहेगा मैं तो बिल्कुल चंगा भरा हूँ।
- 15:14मुझको। उन पागलों ने यहाँ बंद कर दिया
- 15:19यहाँ जमा करवा दिया पागल तो वो है मैं थोड़ी।
- 15:30जीसको पता होता है कि मैं पागल हूँ।
- 15:34बस वही पागल नहीं होता। ये बड़ी उल्टी बात है।
- 15:40जीसको पता होता है कि। मैं सबसे सयाना हूँ सबसे बड़ा
- 15:44मूर्ख वही होता। है।
- 15:48अपने आप। को।
- 15:49सबसे बड़ा ज्ञानी समझने वाला व्यक्ति ही सबसे बड़ा मूर्ख।
- 15:52होता है। जवाहरलाल?
- 16:03यह एक बड़े पागलखाने में चले गए। थे।
- 16:08द्वार पर ही एक पागल मिल गया। बरसों पर आना था जवाहरलाल।
- 16:17को देखकर उसने नैन भराया। हाथ जोड़ें।
- 16:24जवाहरलाल ने सोचा कि शायद। मुझे पहचान।
- 16:27क्या है? उस पागल ने पूछा।
- 16:33आपका स्वागत है। आप कौन?
- 16:43जवाहरलाल बोले। मैं प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया
- 16:48आपने पहचाना नहीं, मुझे मतलब बड़े पागलों को छोटा कोकर कैसे?
- 16:56पायेगा? ये सियासी गानों से बड़े पागल
- 16:59अपने कहीं देखे। तो कहता मैंने।
- 17:02आपको पहचाना? तो मैं।
- 17:05जौहरलाल जौहरलाल प्राइम मिनिस्टर ऑफ।
- 17:11इंडिया फर्स्ट प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया।
- 17:16वह पागल सा रोने लगा, आँखों में आंसू आ गए।
- 17:24पहले आंसू। थे, उसके केक पागल आ गया।
- 17:30अब स्वागत करना हमारे कर्ज पे पागलखाने में आपका स्वागत है
- 17:37इसीलिए हाथ जोड़े आँखों में आंसू। आ गए।
- 17:43जब जवाहरलाल। बोले कि मैं जवाहरलाल इस देश का।
- 17:48प्रधानमंत्री रोने लगे। नेत्र भर आए जवाहरलाल की पीठ।
- 17:57छपछबाने। लगे कहते घबराओ मत।
- 18:04ठीक हो जाओगे। यह पागल।
- 18:08खाना। बहुत बढ़िया है यहाँ इलाज बढ़िया।
- 18:12होता है। मैं भी जब आया था।
- 18:15अपने आपको जवाहर लाल ही कहता था चिंता मत करो।
- 18:21शीघ्र ही। ठीक हो, के वापस घर चले जाओ।
- 18:30पागलों का रैन बसेरा है जिससे तुम दुनिया कहते हो।
- 18:40तुम अपने आपको कितना भी समझदार को न मानो और अपनी समझदारी दिखाने की
- 18:48भरपूर। श्रेष्ठता करते हो?
- 18:52ये इतना बड़ा पागल है। वह।
- 18:54समझदारी का प्रमाण देने का प्रयास करेगा।
- 18:57ये देखो मेरे 5,00,00,000 शीशे वेलम पागलों के कभी।
- 19:02पांच। करोड़ शीशे होते हैं।
- 19:08ये देखो मैंने। नाग टाइप।
- 19:13टोपी पहन रखी है। जी देखो मैंने मेकअप।
- 19:17कर। रखा है, वैजयंती माला डाल रखी है
- 19:20और इतने लोग मुझे सुन रहे हैं। वरना पागलों?
- 19:23को कोई इतने लोग सुनते हैं, हर एक पागल अपने आप को साबित करने में
- 19:28लगा है कि मैं पागल नहीं हूँ। मैं समझदार हूँ, यही तो पागलों।
- 19:35की ट्रेजडी है। पागल को पता नहीं होता है कि मैं
- 19:42पागल हूँ। जीस।
- 19:45दिन पता चल गया। ऐसा ही।
- 19:48अज्ञानी भी है। अज्ञानी को।
- 19:51पता नहीं। होता क्या मैं अज्ञान जीस।
- 19:54दिन अज्ञानी को ज्ञान। हो जाता है।
- 19:57उस दिन। समझ आता है को मैं कितना अज्ञानी
- 20:03था। उस दिन नेत्र झलकते हैं भीतर से।
- 20:09कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगी। तुम्हारे भीतर।
- 20:15एक ऐसा तल है जो सबकी खैर मंगत है।
- 20:19क्यों? क्योंकि?
- 20:21सबका सर्जन हरा है, सबका पिता है, परमेश्वर है।
- 20:30सबकी खैर मांगता है। जैसे कोई बड़ा बूढ़ा अपने पूरे
- 20:34परिवार की खैर। मांगता।
- 20:36है किसी। का बुरा चाहता है नहीं।
- 20:40सो, पुत्र है। धृतराष्ट्र के गांधारी के।
- 20:43लेकिन सब भी परिवार है। बड़ा।
- 20:48बूढ़ा सभी बच्चों। की खैर मांगता है, चाहे पुत्र हो
- 20:53पौत्र। हो पड़ पुत्र हो, सड़ पुत्र हो।
- 20:59ना काहु से दोस्ती ना काहु से बैर।
- 21:03उसको कोई? बेलगाव नहीं होता, कोई ज्यादा
- 21:07अच्छा नहीं। होता।
- 21:08कोई बुरा नहीं होता। सब बराबर होते हैं ना काहु।
- 21:13से दोस्ती। ना काहु से बैस।