Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Jun 25 - शक्ति (XX) vs (XY) चेतना | पुरुष और स्त्री के Chromosome में छिपा है आध्यात्मिक रहस्य!
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- 0:00कल के प्रवचन से आगे कल हमने समाप्त किया था क्रोमोसोम फीमेल
- 0:18में 23 पीयर्स जो कि सभी एक्स होते हैं।
- 0:26और मेल में 23 पेयर्स जिसमें से 22 पेयर्स एक्स के होते हैं ध्यान
- 0:35से सुनना तुम्हारे काम की चीज़ है।
- 0:3922 पेयर्स होते हैं एक्स के। और एक पैर होता है जो तय करता है
- 0:49यह स्त्री बनेगा या पुरुष? पुरुष में होता है एक पैर एक्स
- 0:57व्हाई ऐसा समझ लीजिए? कि आधा एक्स आधा वाइज परसेंटेज के
- 1:05हिसाब से अब थोड़ा सा डीप चले स्त्री को शक्ति स्वरूपा कहा गया।
- 1:19क्यों? अब मैं आधुनिक विज्ञान को या समझो
- 1:25आध्यात्मिक विज्ञान को बाहरी विज्ञान से शारीरिक विज्ञान से
- 1:33मिलाने की चेष्टा करूँगा। आप समझने की चेष्टा कर।
- 1:38एक्स क्रोमोसोम में ऊर्जा होती है पर क्योंकि स्त्री में सभी 23 पैर
- 1:47यानी 46 क्रोमोसोम एक्स होते हैं तो स्त्री शक्ति स्वरूप।
- 1:59पुरुष पे आ गए। पुरुष के पास 22 क्रोमोसोम होते
- 2:03हैं जो शक्ति स्वरूपा होते हैं लेकिन एक क्रोमोसोम होता है जो
- 2:09एक्स और वाय आधा एक्स और दूसरा वाय।
- 2:15ये क्या होता है? बस यही वाय क्रोमोसोम है जो कि
- 2:25लिंग निर्धारण के काम आता है। अगर हमने सिनाथन में।
- 2:36पुरुष प्रधान समाज रखा तो उसका कारण ही यही क्रोमोस्मिक व्यवस्था
- 2:45थी और मज़े की बात है। हम तो आज जान पाए है, लेकिन हमारे
- 2:51ऋषिमुनि। हजारों साल पहले जानते थे पिता तय
- 3:00करता है कि आने वाला बच्चा पुरुष होगा या स्त्री क्यों?
- 3:09क्योंकि अगर पुरुष का एक्स। स्त्री केक से मिला तो स्त्री
- 3:15पैदा होगी पुरुष का बाय स्त्री केक से मिला स्त्री में तो एक से
- 3:21है और दूसरा कुछ है, वह होगा पुरुष तो कौन जिम्मेदार हुआ?
- 3:30किसने निर्धारण किया? पुरुष तत्व का किसने निर्धारण
- 3:35किया पुरुष ने, क्योंकि पुरुष का ही एक्स स्त्री के एक्स से मिलेगा
- 3:44स्त्री के पास तो और कुछ है भी नहीं एक्स ईयर इसलिए उसको शुद्ध।
- 3:50शक्ति स्वरूपा कहा गया है और पुरुष को बड़े मज़े की बात है।
- 3:58अर्ध नारीश्वर का रूप भगवान शंकर का होना यह दर्शाता है कि हमारी
- 4:05साइंस कितने विकसित थी, आधा वर्ष आदि से।
- 4:10यानी पुरुष का जो छियालीसवां और पैंतालीसवां प्रमोशन है।
- 4:17पैंतालीसवां 100 छियालीसवां वा अर्ध नारीक्षण की घटना यह है इसकी
- 4:24व्याख्या ऐसी हो गई। बाई स्क्वायर तो हो गए एक्स के
- 4:28जैसे स्त्री में 23 के 23 लेकिन तेईसवां प्यार उसमें आधा एक्स आधा
- 4:38वाय ये अर्ध नार ईश्वर की धारणा थी।
- 4:40समझाने का प्रयत्न था सिम्बोलिकरी प्रेजेंटेशन थी कि पुरुष में।
- 4:47आधा पुरुष हो रहा दी स्त्री बनाने की क्षमता है, अब हम थोड़ा सा डीप
- 4:58चलते जाएंगे। तुम भी थोड़ा सा शांत होते जाओ।
- 5:04शांति से ही स्वर निकलेंगे। समाधान में शांति समाधान का मुख्य
- 5:17अंश। जो स्त्री बच्चों को जन्म देती
- 5:26है, अगर लड़कियां ही होती हैं, हमारी बहन थी, उसको छह बेटियां
- 5:32हुईं और उसकी साथ रोज़ लगती बाठा जाम के गिर दिया।
- 5:44और बेचारी स्त्री को पता भी नहीं कि मेरा कसूरी नहीं, क्योंकि लिंग
- 5:51निर्धारण में मेरा ज़रा भी तो योगदान नहीं है।
- 5:56लिंग निर्धारण में सिर्फ और सिर्फ पुरुष का ही योगदान है।
- 6:03क्योंकि पुरुष का निर्धारण लिंग निर्धारण होता है, वह क्रोमासूम
- 6:08से प्रभाव मिलता है हमें पुरुष के क्रोमासूम से स्पर्म से।
- 6:20अब आइए हम थोड़ा सा अध्यात्म में कस के जाएं।
- 6:29स्त्री शक्ति स्वरूपा 46 के 46 गुणसूत्र एक्स यानी शक्ति।
- 6:42और पुरुष शक्ति और चेतना स्वरूप 45 एक्स और एक बार अब समझना क्यों
- 6:58इनकार किया गया था कि स्त्री नहीं पहुँच सक क्योंकि स्त्री में
- 7:03सिर्फ़ एक्स है। वाय की चेतना नहीं है और चेतना को
- 7:08ही चर्म ऊंचाइयों पे ले जाना अध्यात्म है, विकास वही तो करेगा
- 7:18अगर बीज होगा पुरुष में बीज है, वाय प्रमोशन शायद।
- 7:25साइंस बड़ी बचकाना है जो हमारे ऋषियों ने खोज कर ली।
- 7:30ये जो बाबा हमें बताते हैं वह आज के साइंटिस्टों के बस की बात है।
- 7:40यह जो तेईसवां पैर है। यह शक्ति और ऊर्जा का मिश्रण है।
- 7:48इसमें एक एक्स होता है एक वाय होता है, और वाय जो है दट इस
- 7:52कान्शस्नस, इसलिए आप ध्यान करना कि वाय करो मौसम हमेशा आकार में
- 8:01छोटा होगा। यही निर्धारण होता है अगर जीस दिन
- 8:11साइंस इतनी ज्यादा प्रगाढ़ परिपक्व हो गई कि वाय क्रोमोसोम
- 8:17के आकार को मेज़रमेंट कर सके। तो वह आसानी से देख सकती है कि यह
- 8:25व्यक्ति प्रबुद्ध हो गया है या नहीं।
- 8:29क्या होता है ये बड़ी गहरी बातें हैं ध्यान से सुन लेना और इनको
- 8:34रिकॉर्ड में बचा के रख लेना। बहुत सी संभावनाओं हैं कि
- 8:44तुम्हारे रिकॉर्ड समाप्त हो जाए, सब खाक हो जाए, कोई बड़ी बात
- 8:51नहीं, क्योंकि आज हमने शक्ति के स्रोत तो पैदा कर लिए।
- 8:59लेकिन शक्ति के स्त्रोतों को प्रयोग करने के लिए ऐसे मूर्ख
- 9:05मानव हमने खोज लिए गद्दी पर बैठा दिया जो शक्ति का इस्तेमाल
- 9:12डिस्ट्रक्शन के लिए करना चाहता है।
- 9:16और रोज़ नित कोई नया पागल खड़ा हो जाता है।
- 9:22पहले पुतिन थे, नेतन्याहू आ गए, फिर अब ईरान और इनका आपस में हो
- 9:30गया। पहले फिलस्तीनों को मार दिया।
- 9:38इन्हें कहने का मतलब अगर मेरे से पूछोगे तो मैं अंतर दृष्टि से और
- 9:43सभी प्रकार की पूछ्ताछ से जो संतों और सिद्धों ने मुझे बताया
- 9:49कि इस सारे विवाद के संसार में इस सारे विवाद का जो मूल स्रोत है।
- 9:56वह भड़कना मत भटकना मत। अंधभक्तों अमेरिका है क्योंकि जो
- 10:12व्यक्ति। खाली होता है।
- 10:15खाली एक एक शब्द को पढ़ें आराम से सुन और उसके महत्त्व को समझना और
- 10:24उसके दीप में उतर जाना। हमारे ऋषियों ने कहा खाली मनुष्य
- 10:30खान का कुछ। इसलिए अगर हम किसी को प्राइम
- 10:36मिनिस्टर बना देंगे और वह सारा छोड़ देगा।
- 10:43किस पर जो संभाल रहे हैं मैनेज ब्यूरोक्रेसी?
- 10:49ब्यूरोक्रेसी पे सब छोड़ दिया और खुद वो हो गया एम्प्टी माइंडेड
- 10:57उसने कुछ नहीं करना उसने फिर क्या करना फिर उसने करना प्लान बनाना,
- 11:05प्लान बनाना। कि मध्यप्रदेश सीत लिया राजस्थान
- 11:09कैसे जीते हैं। राजस्थान जीत लिया तो हरियाणा
- 11:12कैसे जीते हैं हरियाणा जीत लिया तो बॉम्बे कैसे जीते हैं,
- 11:16महाराष्ट्र कैसे जीते हैं और वो जीत लिया तो बिहार कैसे जीते हैं?
- 11:23खाली मन शैतान का यह विकास कब करेगा?
- 11:28और अगर कोई मूड देश के अंधवक्त सिर्फ शब्दों से ही बहलाए जा सके
- 11:35तो काम करने की जरूरत भी क्या है? बस एक व्यक्ति काम करता रहे,
- 11:44सड़कें बनाता रहे और यही विकास। बाकी खाने को रोटी, रोजगार, बाल
- 11:53बच्चे पैदा करने, माँ बाप वृद्धावस्था, बिमारी शुमारी और सो
- 12:00जरूरतें इसका मतलब हवस। सिर्फ राजनीतिक लोगों में ही तो
- 12:06नहीं होती, अवश्य साधारण व्यक्तियों में होती है भी होती
- 12:12है और ये राजनीतिज्ञ 1 दिन साधारण व्यक्ति ही थे।
- 12:18राजनीतिक गोपर से तो नहीं करते यहीं के माहौल में परिपक्व हो?
- 12:24होते होते राजनीतिज्ञ हो जाते हैं खाली मन शैतान का ऐसा व्यक्ति
- 12:35खोजना जो बीज़ी रहे कहने को ये कहेंगे हम 24 के 24 घंटे काम करते
- 12:42हैं। लेकिन यह संभव नहीं है।
- 12:45अगर कोई व्यक्ति 18 घंटे काम करेगा, काम करेगा, निश्चित ही वह
- 12:52पागल हो जाएगा। कुछ सालों के लिए अगर ऐसा है तो
- 12:59हमारे तख्त नसीम लोगों का मानसिक। डायग्राम से सोनी से कहीं ऐसा फनी
- 13:10जगह से हिल गया। सबसे बड़े मज़े की बात है कि
- 13:16इन्हें ये भी नहीं पता होता कि हम ये सब कुछ कर के ले रहे हैं।
- 13:24इसलिए मैंने तुम्हें कहा इतना बड़े से बड़ा राजनीतिक पध्वी ले
- 13:30लेगा। वह अगर मुर्ख हुआ तो यह उस पध्वी
- 13:33से भी कुछ नहीं कमाएगा। जैसे बुद्ध ने राजा हुए बिना भी
- 13:43लेकिन राजपुत्र था पता था मैंने राज़ गद्दी संभाल ली है।
- 13:48राजा हुए बिना भी राजा का अनुभव ले लिया।
- 14:00कोई प्रत्यक्ष की जरूरत नहीं होती।
- 14:01बैठने की गति में प्रमाण से भी अनुमान से भी मिल जाया करते हैं।
- 14:07सुबोध बुध ने बिना मरे मृत्यु को जी लिया।
- 14:16बुद्ध मरे नहीं जा रहे थे। खोज में बूढ़ा देखा, बीमार देखा,
- 14:22झुकी कमर देखी, खास था, व्यक्ति देखा टेबरक्लो से और फिर मुर्दा
- 14:28देखा अर्थी देखी और मरा नहीं था अभी सुंदर नौजवान था।
- 14:3528 वर्ष का लेकिन मरे भी नहीं मर गया, प्रत्यक्ष मृत्यु नहीं आई
- 14:46लेकिन प्रमाणिक रूप से मृत्यु हो गयी।
- 14:51मैं कहता हूँ ये राजनीतिक लोग। खूब तो मरते हैं हम तो डूबेंगे
- 14:58आपको भी ले डूबेंगे सनम सनम को भी साथ ही ले डूबेंगे तो मैं कहता
- 15:08हूँ शक्ति अपने आप में बड़ी शोभ है शक्ति ना होती।
- 15:16तो फिर आप परमात्मा को मानते होगे नहीं।
- 15:21परमात्मा का गुणगान ही सिर्फ इसलिए होता है कि उसके पास शक्ति
- 15:25की चीजें हैं, पदार्थ हैं, शरीर है, संरचना है, नियम है, कानून
- 15:32है, कायदे है। सब है उसके पास इसलिए उसको पूजा
- 15:37जाता है। शक्ति की ही उपासना होती है इसलिए
- 15:42तुम नवरात्रों में शक्ति की उपासना तुमने कभी चेतना मांगी
- 15:49नहीं मान। तुम शक्ति मांगते हो, जब भी
- 15:52मांगते हो और तुम्हारे आचार्य भी समझा रहे हैं तो शक्ति बल ही
- 15:57इकठ्ठा करो, बस और कुछ न हो। बल चाहे किसी रूप में हो, धन के
- 16:02रूप में हो, संस्थान के रूप में हो, सूचनाओं के रूप में हो।
- 16:11पावर किसी तरह भी आ जाए उसको ले लो।
- 16:15अगर तुम ज्यादा सूचनाओं को संग्रहीत करके दूसरों पे इफेक्ट
- 16:21डाल सकते हो तो वो भी एक तरह का बल तो आचार्य तुम्हें समझाएंगे बल
- 16:29इकट्ठा कर। ओह शांत तुम्हें समझाएगा, बल
- 16:35इकट्ठा करो, बल को जी लो और बल में से तुम्हें मिलेगा नहीं।
- 16:42देखिए कितने? ये सटीक प्रमाण बताते हैं आपको
- 16:48अपना अनुभव क्योंकि इन्होंने जिया है इन्होंने जिया है शक्ति को भोग
- 16:55है शक्ति को और शक्ति का रस निचोड़ दिया है इन्होंने कि
- 17:00मिलेगा कुछ तो शक्ति को भोगो। पदार्थों को भोगो, सभी चीजों को
- 17:07भोगो लेकिन भोगने के बाद उस का रस जरूर देख लो।
- 17:13क्या इसमें कुछ मिला? क्या इसको पीकर मैं तृप्त हूँ और
- 17:19तुम पाओगे के मैं तृप्त नहीं हुआ, मैं तृप्त नहीं हुई।
- 17:24दोनों ही चीजें इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ यह जो शक्ति को कमाने की
- 17:35बात करते हैं, आपको इनकी बातें जचेगी बहुत कबीर की बात आपको
- 17:42जचेगी नहीं। कृष्ण की बात आपको जचेगी नहीं,
- 17:48इसलिए आप सिर्फ महज औपचारिकता निभा दो छोर से उपचार पूजन कर
- 17:54दोगे, कृष्ण के आगे तुम उसकी ज्योत बत्ती कर दो, पूजा आरती कर
- 17:59दोगे, बस इससे पीछा छुड़ा दो। काम वो ही कर दो जो आचार्य कहेंगे
- 18:08शक्ति कमाओ, पदवी कमाओ, सूचनाएं कमाओ और तुम्हें दिखेगा भी इसका
- 18:14फल साफ टिकट तो आचार्य तुमसे वो बात बोलता है जो तुम यू कैन सी इन
- 18:20दी वर्ल्ड। तुम संसार में प्रत्यक्ष देख सकते
- 18:25हो और तुम आकर्षित भी इसी चीजों से होते हो।
- 18:29तुम रहस्य की बात से न तो प्रभावित होते हो, न ही तुम्हारा
- 18:35मन करता है वहाँ जाने का कारण क्या है?
- 18:39कारण है कि तुमने। शक्ति से नीचे तल पे उतर के कभी
- 18:47भी आज तक एक रस उस बूंद की नहीं पी जिसे हम आनंद कहते हैं।
- 18:55मैं यह क्यों कहता हूँ? अगर पीली होती तो आज संसार में न
- 18:59होती? जिसने रस पिया वह मुक्त हो गया,
- 19:05एक बूंद भी जिसने पिया एक बूंद इवन ए सिंगल ड्रॉप इसलिए तुमने
- 19:12अभी तक आज तक इतने जन्मो से तुम? इस संसार के भीतर मौजूद हो और तुम
- 19:19आज तक इस भ्रम से मुक्त नहीं हो पाए हूँ।
- 19:23एमआइ तो उसका कारण सिर्फ यही है कि उस आनंद की एक बूँद को तुमने
- 19:30कभी भी नहीं पिया, किसी जन्म में भी नहीं पिया।
- 19:37मैंने बात की ऊर्जा और क्षेत्र में मैं श्रद्धा से ही कहता हूँ
- 19:45एनर्जी एंड कैन्सेस्नेस अरे सेपरेट।
- 19:50अलग अलग चीजों के नाम हैं ऊर्जा और चेतना एक्स में होता है ऊर्जा,
- 20:00इसलिए हमने उसको पूजा नवरात्रों के अंदर शक्ति स्वरूप।
- 20:12और चैत धर्म अगर जैन धर्म के भीतर दो संप्रदाय हो गए तो छोटी बातों
- 20:22से संप्रदाय नहीं मानते, कोई वृहद कारण रहा होगा।
- 20:27इतनी मामूली बातों के ऊपर थोड़ी ही इतना शानदार, इतना पुरातन जैन
- 20:34धर्म भी भक्त हो सकता है तो क्यों हो गया?
- 20:41क्योंकि बुनियादी कार्य? बुनियादी कारण श्वेतंबर और
- 20:47दिगंबरों के बीच में से ही कोण है ज्यादा सही है दिगंबर और देखिए
- 20:58दिगंबर वैसे आज पीले वस्त्र पहन लेकिन दिगंबर का मतलब होता है।
- 21:05बिना वस्त्र के नग्न सही अर्थ दिगंबर का यही होता है।
- 21:11आज हम समाज के कारण लाज के कारण वस्त्र पहन लेते हैं, लेकिन श्वेत
- 21:18नहीं पहनते, क्योंकि श्वेत अंबर श्वेत अंबर।
- 21:22और दिगंबर हमने नाम रख दिया, लेकिन दिगंबर थे, वास्तव में
- 21:27महावीर नग्न हो गए थे। महावीर का सही धर्म था, मेल खाता
- 21:32दिगंबर के साथ श्वेताम्बर के साथ श्वेताम्बर वालो।
- 21:43नाराज हूँ मैं और हो भी जाओगे तो मेरा भी पकड़ोगे मैं सत्य को
- 21:51बोलने मैं ज़रा भी कुत्ता ही नहीं हूँ।
- 21:56अभी आज सुबह मेरे चैनल कंट्रोलर ने मुझे एक कमेंट भेजा।
- 22:04बड़ा शांतर मंच था बाबा आपकी कृपा से मेरा दुश्मन तड़प तड़प के मर
- 22:11गया और मैंने आपसे तांत्रिक क्रिया करवाई थी।
- 22:17उन्हें बेशक है। मेरी सभी दुकानें खाली हो जाएंगी,
- 22:26चाबी मेरे पास पहुँच ही जाएगी। क्या मुझे उसकी शव यात्रा में
- 22:31जाना चाहिए? मैं उन साहेब से कहूँगा।
- 22:35नाम पी साहेब सिंह ही है। पीएम साहेब सिंह।
- 22:43क्यों शहीद होने की तमन्ना होगी है क्या मैंने छोड़ दिया है भूला
- 22:52नहीं इसकी विधियों सब मेरे भीतर हैं और बता दी गई हैं आगे।
- 23:00छोड़ दी हैं। क्यों?
- 23:02क्योंकि मूर्ख आदमी ही ऐसी चीजों से चिपका रहता है जिसका कोई शत्रु
- 23:09ही ना हुआ। जो विश्वामित्र हो गया वह ऐसी
- 23:14शत्रुता भरे काम करेगा क्या? और जो अपने ही जीवन से नहीं बंधा
- 23:22हुआ है, इतना सा दूध लेता है वो किसी को क्यों मारेगा?
- 23:27इसका मतलब उसे अभी भ्रम से मुक्ति नहीं मिली, लेकिन एक बात और भी
- 23:35ध्यान में रखें। अगर मूर्खों का ज्यादा मूर्खता का
- 23:43लेवल ज्यादा बढ़ जाता है तो कृष्ण सब कुछ जानते हुए भी महाभारत में
- 23:51गीता का उपदेश भी दे सकते हैं। और ये भी ध्यान में रखना कि शिशु
- 23:55पालिका वध भी कर सकते हैं। भोले नहीं लेकिन वक्त आने पर कि
- 24:03वक्त आने पर भगवान कृष्ण शिशु पालिका वध करने से ज़रा भी नहीं
- 24:10चुभते तब तो वह जवान थे। उन्होंने रुक्मणी को अपहृत कर
- 24:19दिया था, सही मायने में अपहृत नहीं था, यह अपहृत हुई थी।
- 24:24रुक्मणी एक प्रेमपत्र भेजा था कृष्ण के पास।
- 24:33हे प्रिय, मैं तुमसे प्रेम करती हूँ, अगर कहीं शिशु पर आपकी बुआ
- 24:38के बैठे हैं, मुझसे शादी करवा ली तो मुझे आपकी मुझे आपकी आँखें
- 24:47जीवित न देख पाएं, मैं आपको मुर्दा मिलूँगी।
- 24:53इसलिए हो सके तो आप मुझे अपहृत कर लो।
- 24:57ये कहा था रुकमणि पत्रों से अपहरण, कृष्ण ने नहीं किया अपहृत
- 25:06हुई रूपमणि और उसने पत्र भेजा कृष्ण को तो पता ही नहीं था।
- 25:13कि ऐसा सर्दी में जाना है। बुलाया भी नहीं गया था, अभी गए भी
- 25:19नहीं थे और उससे पहले कृष्ण प्रेम का संदेश लेकर पहुंचा और रुक्मणी
- 25:27को अपहृत कर दिया। रुक्मणी कहने से भी।
- 25:32जब उस रथ के पीछे रुक मी भागा हुआ आया रुक्मणी का भाई तो कहने लगी,
- 25:44रुक्मणी के प्रिय तुम ये। जो इसके गोणों की लगाव है मुझे
- 25:52सौंप दो क्योंकि देखने वाले ये कहेंगे कि कृष्ण अपहृत हुए हैं ना
- 25:59कि रुकमणि और रुकमणि ने कृष्ण को अपहृत किया है, रुकमणि ने कृष्ण
- 26:05का अपहृत। और मैं जो सत्य है वो दुनिया को
- 26:13साक्षात नग्न आँखों से दिखाना भी चाहती हूँ।
- 26:17आपके ऊपर कोई ब्लेम ना लगे। आपके ऊपर किसी तरह का इलज़ाम न
- 26:21लगे हो हुआ भी है शायद। और वह होने वाली धर्मपत्नी थी
- 26:30शिशु पाल की शिशु पाल बुआ का बेटा था कृष्ण का, लेकिन बचपन में वह
- 26:40महा अत्याचारी कंस का भी वध कर देते हैं।
- 26:43तब तो बच्चे थे। 12 वर्ष के तो 12 वर्ष का बच्चा
- 26:50भी वध करता है। वह भी जानता है मैं कौन?
- 26:55क्योंकि ज्ञान उसे पिछले जन्म में ही हो गया था।
- 27:02बखूबी सब कलाओं को भी जानता। 64 कलाओं में संपूर्ण किसी चीज़
- 27:12को बोला नहीं अभी गुरुकुल में जाकर वो अपनी सारी कलाओं को फिर
- 27:21से रिपीट करते हैं। ये कलाएं के हैं।
- 27:24भीतर जाने के लिए तो कोई कला चाहिए ही नहीं।
- 27:26भीतर जाने में तो सिर्फ छलांग लगानी होती है या कोई कला थोड़ी
- 27:33लेकिन 64 कलाएं यही थीं ये संधारणी ये जीवन दे देना।
- 27:42ये संजीवनी वगैरह वगैरह वगैरह। 164 पढ़ाई नहीं हुई थी जैसे इशू
- 27:51के बारे में कहा जाता है अन्तों को आँखें दे दी लंगड़ों को पांव
- 27:55दे दिए बहरो को सुनने लगा था। मृत व्यक्तियों को जिंदा कर दिया।
- 28:06ये मात्र कहानियों हैं बिल्कुल ठीक हैं लेकिन ईसा में ये शक्ति
- 28:11है, इस बात से भी मुकर नहीं हुआ जा सकता।
- 28:18उस सतत्त्व के पास क्यों पहुँच गया?
- 28:21वह जीवन देने में समर्थ है और कृष्ण और ईसा उस तत्व के पास
- 28:29पहुंचे उस तत्व के पास पहुंचे बिना इतनी सहनशीलता आती ही नहीं।
- 28:39सहनशीलता एक मेजरमेंट है। तुम्हारी चैत मन, वचन कर्म से अगर
- 28:47तुम कोई भी किसी किस्म की प्रतिक्रिया नहीं करोगे तो तुम
- 28:52बहुत सिरे के। सहनशील व्यक्ति हो और सहनशील
- 29:00व्यक्ति का मतलब तुम परम कॉन्शसनेस में हो, उस अपार चेतना
- 29:08के उच्चतम शिखर को तुमने छू लिया है।
- 29:11यह एक मेरी गवर्नमेंट है। मुझे लोग कह देते हैं बाबा आपके
- 29:15पास इतनी शक्तियां हैं। तो फिर इन युद्ध के जो मुख्य
- 29:19व्यक्ति हैं, इनको खत्म कर दो, बस यही तुम्हारी मोड़ता है।
- 29:25ऐसा ही मैं भी सोचता था कोई अलग थोड़ी लेकिन बात तो ये है वो।
- 29:36वो दिल कहाँ से लाऊँ तेरी याद जो बोला वो दिल कहाँ से ला?
- 29:56हम्म तेरी यार कि जो बोला वो दूर जाने वाले कोई रास्ता।
- 30:15बता दे वो दिल कहाँ से ला हूँ फिर याद आती जो बोला दे अज्ञानी से तो
- 30:31ज्ञानी हुआ जा सकता है। अब इन बातों को आप अंडरलाइन कर
- 30:36लेना, लेकिन ज्ञानी से अज्ञानी नहीं हुआ जा सकता।
- 30:42एक बार उस चेतना के समित्र में अगर तुमने छलांग लगा दी तो सच में
- 30:50तुम्हें कोई ढूंढ़ नहीं सकेगा। जो बूंद समुद्र में खो गई, तुम
- 30:56उसको ढूंढ कर दिखा दो नहीं ढूंढ पाओगे क्योंकि बूंद समुद्र ही हो
- 31:02गई, इसलिए बूंद यह कहने में बिल्कुल भी सब कुछ चाहती नहीं और
- 31:08ज़रा भी झूठ नहीं है के अहम ब्रह्मास्म।
- 31:12मैं भ्रम हूँ, मैं समुद्र हूँ मैं शादी उसने अपना फैलाव देख लिया,
- 31:18मैं सारी समुद्र में फैल गई और यही तुम्हारी आखिरी परिणीति है यह
- 31:29नीती है तुम्हारी। तुम्हें यही होना है ऐसे फेम डी
- 31:36फेम इनसे क्या मुझे कुछ नहीं मिलेगा ऐसे प्रयास ना करो मुझे
- 31:46सुनो सुन के गुणों गुण के तुम अपने भीतर उतरो।
- 31:53और वहाँ चले जाओ जहाँ इन लफ्ज़ों का कोई मायना नहीं रह जाता जहाँ
- 32:05आनंद ही आनंद है स्वर्ग ही स्वर्ग है।
- 32:10कौन किसको मारेगा, कौन किसको विनिष्ट करेगा?
- 32:17जब कोई वनिष्ट हुई तो ज्ञानी से अज्ञानी नहीं हुआ जा सकता।
- 32:28ये बात आप नोट कर। अज्ञानी से अज्ञानी तो सभी होते
- 32:32हैं लेकिन एक बार आप ज्ञान के उच्च चरम शिखर को सुन छू गए तो आप
- 32:42अज्ञान में नहीं जा सकोगे। कभी पीएचडी करने वाला व्यक्ति
- 32:46प्रथम कक्षा में बैठकर। 1234 गिनती लिखने बैठा है, बैठा
- 32:53है, कभी नहीं बैठा हूँ। बस ऐसा ही छेत्र का सर छेत्र की
- 33:00ऊर्जा हम चल रहे थे। क्रोम मौसम में सेन साहब का बता
- 33:04दूँ की अगर तुम ज्यादा ऐसा कुछ करोगे।
- 33:12तो भूला नहीं हूँ जान तो सब कुछ हूँ लेकिन मजबूर हूँ ज्ञान के
- 33:18हाथों में मारू तो कैसे मारू कृष्ण अच्छी तरह से जानते हैं
- 33:24कृष्ण चाहे तो इतनी देर। मगज खपाई करते हैं अर्जुन पे क्या
- 33:29खुद नहीं अपना सुदर्शी चक्कर निकाल पाते?
- 33:33सिर्फ 3 मिनट के बाद इतनी सेनाओं का वध करके सुदर्शी चक्र 3 मिनट
- 33:39में वापस आ जाता। 18 शून्य सेना और बाकी के।
- 33:48सब रिश्तेदार सब रगड़े दिए जाते, लेकिन क्यों नहीं आया?
- 33:52कृष्ण ने क्यों नहीं किया? क्योंकि कृष्ण की निजी शत्रुता
- 33:56नहीं है। उनके साथ निजी शत्रुता है।
- 34:00अर्जुन के और भगवान कृष्ण नियमों के हिसाब से सकते हैं।
- 34:05भाई तेरे दुश्मन हैं मैं तेरे को योग्य बनाऊंगा शस्त्र उठाने के
- 34:10लिए तू हिम्मत मत हार, तू उनके लिए शोक कर रहा है, जिनके लिए शोक
- 34:17नहीं करना चाहिए, मैं इनको बता दूँ साहेब।
- 34:26अगर तो शहीद होने की तमन्ना है तो शायद कोई दिल पैदा ही करे।
- 34:31बाबा से आशीर्वाद लेना पड़ेगा। मेरे मन में तो ऐसा कुछ होता नहीं
- 34:36है जिसने अपना विस्तार देख लिया, जिसने अपना अखंड विस्तार देख
- 34:42लिया। भला मैं अपना अंगूठा काट सकता हूँ
- 34:47तभी काट सकता हूँ अगर मैं अज्ञान हूँ, मेरे को भोग नहीं, मैं
- 34:52मूर्छा में हूँ, मैं बेहोशी में के परम आदम में हूँ, तो मैं अपना
- 34:57अंगूठा काट सकता हूँ। लेकिन जब मैं जागृति में हूँ गौरव
- 35:02मुझे पता है यह अंगूठा भी मैं हूँ, मैं इसको नहीं काट पाऊंगा।
- 35:10सिर्फ मोर्चा के गहन अंधकार में ही मैं इसको काट पाऊंगा।
- 35:16इसलिए मूड व्यक्ति अज्ञानी व्यक्ति अपना नुकसान करता है।
- 35:20कर सकता है और मैं वहीं से फिर आ जाऊं कि आपने इन मूड व्यक्तियों
- 35:25के हाथ में जो बच्चे हैं, जिनकी प्रज्ञा बच्चों जैसी है, इनके हाथ
- 35:32में रिवॉल्वर दे दोगे तो इनका कोई पता नहीं।
- 35:35ये अपना भी नुकसान कर देंगे या किसका नुकसान करेंगे कोई पता
- 35:39नहीं। तो वैज्ञानिक ने इस चीज़ को
- 35:45सामूहिक रूप से सरकारों को दे दिया और सरकारों में कोई
- 35:51बुद्धिमान व्यक्ति नहीं होता। सरकारों में राजनीति में कोई
- 35:57बुद्धिमान व्यक्ति जाते हैं। लोभ से भरे वासनाओं से भरे
- 36:02वासनाओं की पूर्ति के लिए जाते हैं।
- 36:04सभी कोई राजनीति में गया है परमात्मा को प्राप्ति के लिए
- 36:11बल्कि प्राप्ति के लिए ही जाते हो न तुम?
- 36:14राजनीति में कोई व्यक्ति परमात्मा की प्राप्ति हेतु आनंद की
- 36:18प्राप्ति हेतु जाता है, नहीं जाता साधन सुख के साधन कमाने के लिए
- 36:24जाता है सुख और आनंद देर इस ए लॉट ऑफ डिफरेंस बिटवीन दैट टू इसमें
- 36:30क्वांटिटेटिव फर्क नहीं है। क्वालिटेटिव डिफरेंस है दोनों के
- 36:34बीच में सुख तो आप महज बाहरी चीजों से पा सकते हो।
- 36:38तुम्हारी इंद्रियों का विषय है ये, लेकिन आनंद तुम्हारी
- 36:43इंद्रियों का विषय नहीं है। आनंद तुम्हारी इंद्रियों से पार
- 36:48है, इसलिए उसे इंद्रियातीत अनुभव कहते हैं।
- 36:58मैं कहता था कि ऊर्जा शक्ति आपने मूर्खों के हाथों में देखी और
- 37:03बड़े से बड़ा मूर्ख मैं शुरू से ही जब से मैंने अकाल संभाली है,
- 37:08मैं देख रहा हूँ अमेरिका की शरारत इसकी गद्दी के ऊपर जो भी व्यक्ति
- 37:14आया। उसने महज संसार को भ्रमित ही किया
- 37:19क्योंकि इसके पास शक्ति थी, धन संपन्नता थी और ये बिल्कुल खाली
- 37:26दिमाग था इसलिए कुछ नहीं करना था और खाली मन शैतान का तक्ष।
- 37:33ये कभी किसी को पीछे से ऊँगली लगा सकता है, कभी किसी के ऊपर जाके
- 37:39कंधे के ऊपर फिस्टल रख देता है तुम्हें पता हो ना पता हो।
- 37:47अमेरिका है तो नमकीन है। अमेरिका है तो मुमकिन है बस इसी
- 37:53बात से हम समझ ले। संसार में जो भी कुछ होता है
- 37:58अमेरिका की शय के बिना नहीं वहाँ से आता है फ़ोन क्यों?
- 38:06क्योंकि वह शैतान का बाप है। वह खाली है, बिल्कुल खाली है, सब
- 38:11है उसके पास, उसने कुछ कमाना नहीं है उसने अपने बच्चों के लिए रोटी
- 38:17नहीं कमानी सब है उसके पास, इसलिए वह बिल्कुल खाली है।
- 38:22फिर खाली मन दो काम कर सकता है या तो शैतानियत।
- 38:29या भगवानियत अपने भीतर जाएगा तो भगवान हो जाएगा, अपने बाहर जाएगा
- 38:36तो शैतान हो जाएगा। अमेरिका भीतर की बात जानता नहीं।
- 38:40पश्चिम का देश भीतर की बात नहीं जानता, कुछ ही एक दिए हैं जो जल
- 38:45गए पश्चिम। लेकिन वो लड़कियां बह रही हैं जो
- 38:50पूर्व में उदय हुईं। वह पश्चिम में नहीं पाओगे तुम
- 38:59क्योंकि पश्चिम में बहर्मुखी जनता और उसकी रेंज भी बहर्मुखी है,
- 39:06जहाँ भी जाओगे। बैरमुखी ही मिलेंगे तुम्हें
- 39:10अंतर्मुखी की किरणें वहाँ हैं ही मुझे मेरी बहन भाई जब यहाँ आते है
- 39:19तो कहते है यहाँ आनंद बहुत है, यहाँ शांति बड़ी है, वहाँ भाग
- 39:26दौड़ बहुत है। थक जाते हैं वहाँ के थके हारे चूर
- 39:35चूर होकर हम जब इंडिया में आते हैं तो हमें सांस मिलता है हमारे
- 39:42सारे मसल्स। रिलैक्स हो जाती है वहाँ हमारे
- 39:49पास सब है जिन्हें तुम कहते हो सब है, लेकिन वह नहीं जिससे
- 39:55रिलैक्सेशन मिलती है, असली रिलैक्सेशन दिमाग की नहीं असली
- 40:02रिलैक्सेशन। जिसे भगवान कृष्ण कहते हैं
- 40:06तुम्हारी स्थिति है प्रज्ञा की स्थिति प्रज्ञा हो जा निवृत्त हो
- 40:13जा तुम वृत्तियों से निवृत्ति ही निर्वाण है, अकेला हो जा नहीं
- 40:18केबल है महावीर कहते हैं। अब इनकी भाषा अलग है।
- 40:24कोई प्राकृति में बोला, कोई पाली में बोला, कोई संस्कृत में बोला
- 40:30कोई हिंदी में बोला, कोई बागड़ी में बोला, कोई राजस्थानी में
- 40:35बोला, अलग अलग भाषा में, कोई तमिल में बोला, बेंगाली में बोला।
- 40:42हमारे देश में ही बहुत सी भाषाएँ हैं लेकिन हमने लड़ना थोड़ी है।
- 40:47भाषाओं के अलग होने के बावजूद भी हम भीतर से हमारे प्राण एक हैं।
- 40:57सारा विश्व एक है जब तुम उस तल पर जाओगे तो पाओगे।
- 41:03यह सारा ब्राह्मण एक शरीर है और ये बात मैंने हजारों दफातों में
- 41:07कही है। मेरे पास एक मूड मती आ गया।
- 41:11मुझे पूछने लगे, मांसाहारी गर्त है ये ठीक है, मैं बड़ा हिंसा ठह
- 41:19के मर मर के। कृपया क्यों रहे हो मेरी बात का
- 41:23जवाब क्यों नजर मैंने कहा तुम्हारी बात का जवाब यही है मैं
- 41:27मजाक उड़ा रहा हूँ तुम्हारा, मैं तुम्हारा मजाक उड़ा रहा हूँ ये
- 41:33प्रश्न पूछने योग्य है कैसे? मूड़मती ज्यादा ही था?
- 41:40मैंने कहा मैं तुम्हें कहूं कि तुम तुम्हारा अंगूठा काट लो, यह
- 41:45पुण्य है के पाप कहते ही तो पाप है तो मैंने कहा जब ये सारा
- 41:52ब्राह्मण एक शरीर है तो तुम मुर्गे को काटोगे तो मुर्गा भी
- 41:56तुम्हारा शरीर। बकरे को काटोगे, बकरा भी तुम्हारा
- 42:00शरीर ये जो मूड लोग बकरीद के ऊपर बकरे की बलि देते हैं या भैंसों
- 42:05की बलि देते हैं, कोलकाता के अंदर ये अपने स्वाद के लिए देते हैं।
- 42:11कोई काली वाली नहीं है। अगर है तो मेरे पास भेज देना।
- 42:15मैं उसकी करन ठिकाने कर दूंगा। मैंने बहुत बार कोटा है।
- 42:21तुम तुम्हारे जिन्हों को प्रेतों को ये जो तुम्हारे बने बैठे हैं
- 42:28सिर हिलाते हैं इनको एक बार मेरे पास भेजो ना इनको मैं इनका दिमाग
- 42:32के कारण रहु लेकिन कोई मेरे जैसी बात सुनी एंड सुन।
- 42:38जब मूर्ख होता है व्यक्ति और जो लोभ ही होता है वह बात को सुनी न
- 42:42सुनी कर देता है। मैं तुम्हें कहता हूँ तुम भेजो
- 42:47भाई, मेरे पास तुम्हारे जिन्न प्रेत किसी ने आज तक एक भी नहीं
- 42:51भेजा, किसी के पास हो तो भेजो, पूछा कि मांस?
- 42:57हाँ पुण्य है यह पाप और तुम तुम्हारे अंगूठे को काट लो, यह
- 43:04पुण्य है यह पाप तर्द होगा ना होगा ऐसे ही सारा ब्राह्मण एक शिर
- 43:13और यह ब्रह्मण के शरीरों में ही बकरा।
- 43:17मुर्गा मछली ये दूर से नहीं आते। लोग बड़े बड़े तर्क देते हैं जेते
- 43:24दरणी अनके जी वहाँ भाई जी ना खोज मैंने कहते बिल्कुल ठीक सब में
- 43:28दर्द होता है, अंगूठा घाटों में दर्द नहीं होता।
- 43:34कनाद ऋषि हुए। जो पका हुआ दाना खाते थे, जो गिर
- 43:40गया, झड़ गया जो फल गिर गया पक के अब उसमें कोई समझ नहीं, तने के
- 43:48साथ वृक्ष के साथ कोई जुड़ाव नहीं, लगाव नहीं, वह खानी योग्य
- 43:53है। ऐसे पका फल खाता था।
- 44:02अब उससे पूछना पड़ेगा कि तुम पका क्यों खाते हो, कच्चा क्यों नहीं
- 44:07खाते हो? उसने जान लिया है जो सतह से
- 44:13प्राकृतिक रूप से झड़के नीचे गिर गया।
- 44:17प्रकृति कहती है, अब ये खली योग हुआ और जो प्रकृति तुम्हें इजाजत
- 44:23देती है वह शुद्ध तुम रूप से सही होता है।
- 44:28तुम मुझसे मत पूछो माँसाहत ठीक है, गलत है, तुम देखो तुम
- 44:32तुम्हारे पांव का गुंठा काटो या पांव काटो।
- 44:36डॉक्टर काट देता है। गैंग ग्रीन हो गई ये कुछ हो गया।
- 44:41वह पाप होता है, पुण्य होता है लेकिन इस बात के ऊपर इन्हें समझ
- 44:50आती है लेकिन क्योंकि मांस खाने का अपना स्वास्थ्य।
- 44:58ये धमाके वही जे मैं नहीं जाती आंधी दुनिया मांस कहती है तो
- 45:01मैंने कहा ये दुनिया फिर पागल है ना तुम कहते हो आंधी दुनिया मैं
- 45:06कहता हूँ सारी दुनिया ये पागल है रोहित तो मैं बोलता हूँ ये
- 45:10परमात्मा को मैंने कहा कि तुमने पागल खाना अलग बना क्यों नहीं
- 45:13लिया? इतनी सारी पागल हैं तो मैं बोला
- 45:17कि सभी पागल हैं भाई सभी के लिए पागलखाना बना दिया है।
- 45:24मैंने संसार पागलखाना ही तो है। एकाध व्यक्ति कोई पहुंचेगा, वह
- 45:30अपनी कुटिया के भीतर ताला जड़ के बैठ जाएगा क्योंकि उसने वो
- 45:57हम सपायों, मानसरोवर, ताल तलैया। क्यों दो ले मन मस्त हुआ?
- 46:19हाँ फिर क्यों वो ले मन मस्त हुआ फिर क्या बोल?
- 46:35तेरा साहब है तुझ माँ ही तेरा साहब?
- 46:48है तुझ माँ बन बन मिगवा क्यों डोले बन बन मिगवा क्यों डोले मन
- 47:07मस्त हुआ? फिर क्यों बोले मन मस्त हुआ तो
- 47:16क्यों बोल? जरूरत क्या?
- 47:23दुनिया पागल खाना है। जब सारी दुनिया पागल खाना हो जाए
- 47:27तो अलग से पागल खाना बनाने की जरूरत नहीं।
- 47:31अगर कोई एक आध व्यक्ति इस पागल खाने से निकलेगा, वह अपना एक
- 47:37मुकाम छोटा सा कमरा चुन लेगा। वह बैठ से कुंडील का।
- 47:45जब सारे एक जैसे हो गए तो क्या व्यवस्था करनी है?
- 47:50अलग से जो व्यक्ति होगा अलग से दीवा जलेगा वह अलग से अपना एक
- 47:56छोटा कमरा चाहिए, उसके ज्यादा बस नहीं।
- 48:01ज्यादा इच्छाएं भी नहीं है। इच्छाएं ज्यादा इच्छाएं हैं ही
- 48:06नहीं। जीने तक की भी तमन्ना जिसमें ना
- 48:10हो वो फकीर होता है। हम क्रो मौसम पे आ जाएं एक्स क्रो
- 48:26मौसम स्त्री में होते हैं और पूरे प्यार से होते हैं देश के देश।
- 48:3346 एक्स क्रोमसम इट मीन्स स्त्री एनर्जी का स्वरूप होता है।
- 48:42इसी कारण से दिगम्बरों ने अगर कहा कि स्त्री नहीं, परमात्मा तक
- 48:47पहुँच सकती क्योंकि कान्शस्नस का कुछ अंश होगा किसी क्रमों में।
- 48:53वो ही तो अपनी पीर को चुनेगा। जब है ही नहीं तो पीर को क्या
- 49:00चुनेगा? ये धारणा किसी हद तक ठीक थी लेकिन
- 49:09क्योंकि स्त्री भी पहुंचती है। एक मल्लीबाई पहुंची तो इन्होंने
- 49:15मल्लीबाई का नाम बदल के मल्लीनाथ रख दी।
- 49:22धर्मों में अगर विभाजन होता है तो किसी बहुत बड़ी चीज़ के लिए लगता
- 49:27है। जैन धर्म अगर विभाजित हुआ तो इस
- 49:33मल्ली बाई और मल्लीनाथ कोई नाथ कह देता है, कोई बाई कह देता है।
- 49:41असल में उसका नाम मल्ली देवी था तो शिवतांबर कहते हैं कि वह।
- 49:49मली देवी थी और स्त्री थी और स्त्री पहुँच सकती है, इसलिए आप
- 49:55देखोगे? श्वेतांबरों में स्त्रियों को
- 49:59दीक्षा दी जाती है, सजाया जाता है, दुल्हन की तरह जलूस निकाला
- 50:03जाता है, नाचा कूदा जाता है, वैसे ही भवा की तरह समारोह होता है।
- 50:10लेकिन दिगंबर कहते हैं कि स्त्री नहीं पहुँच सकती भाई, लेकिन उनका
- 50:16गहरा नियम मैंने आपको बता दिया क्योंकि उसके भीतर वाय क्रोमोसोम
- 50:21है। वाय।
- 50:22क्रोमोसोम नहीं एनर्जी लेवल को बढ़ाना होता है।
- 50:27और स्त्री में बाइक्रोम ज़ोन नहीं है और आय तो विज्ञान इस चीज़ की
- 50:31पुष्टि भी करता है तो दिगंबर कहते हैं कि स्त्री नहीं पहुँच सकती,
- 50:40स्त्री तीर्थंकर नहीं बन सकता है, लेकिन स्वीत अंबर कहते हैं।
- 50:47कि उन्नीसवें तीर्थंकर 24 थे सारे वह मलि नात थीं।
- 50:53मलि देवी नहीं थी क्षमा करना मलि देवी तीसवें नंबर कहते हैं।
- 51:02दिगंबर कहते हैं कि वह मलि नात थी।
- 51:06और से ही पहुँच सकते हैं और उनका जो पहलू है सटीक वैज्ञानिक है,
- 51:17क्योंकि जैसा मुझे बाबा ने बताया, मैं यही बताया कि जब तक वायक रो
- 51:23मौसम नहीं होगा। वह क्रोमोसोम चेतना, तब तक वह
- 51:31चेतना का विस्तार कैसे होगा? बात से ठीक भी है, लेकिन अगर आप
- 51:41पूछो के श्वेताम्बर दिगंबर को छोड़ो।
- 51:45आपकी कह रहा है अगर मैं अपने अनुभव से बताऊँ तो मैंने अपने
- 51:54जीवन की यात्रा में अपने प्राण अनुभव में मैं जब उतरा देखूं।
- 52:05कोई स्त्री अब तक उस चर्म को पहुँच पाई के नहीं पहुँच पाई।
- 52:17मैंने सिर्फ थोड़े से क्लू उपाय। क्योंकि अनुभव के नाम के ऊपर मैं
- 52:27झूठ नहीं बोल सकता। आपसे जो देखा वैसा ही सत्य होगा।
- 52:33सत्य रूप से एक स्त्री की बजाय मुझे कोई और अन्य स्त्री।
- 52:41ईश्वर तक को छूते हुए दिखी नहीं और वो स्त्री कौन थी उसका नाम
- 52:50जानकर आप हैरान रहोगे। होती कुन्ती सिर्फ कुन्ती ही थी।
- 53:01जिसने वो चरम पहलू छू लिया था। जब मैं अपनी स्मृतियों के अतीत
- 53:08में झरोखे में जाता हूँ, अच्छी तरह से कंगालता हूँ और इस चीज़ को
- 53:13खंगाले में मुझे बहुत वक्त लगा है क्योंकि अहम प्रश्न था ये जय धर्म
- 53:17का? लेकिन फिर भी मैं किसी निष्कर्ष
- 53:21पे बकायदा नहीं पहुँच सका। मैं ये कह दूँ कि हाँ बिलकुल आई
- 53:29कैन सेव विथ फुल शॉर्ट ये तो नहीं मैं कह सकती हूँ मैंने कुंती के
- 53:35कोरा को? पूरे एक तत्व तक जाते हुए देखा
- 53:39है, वही श्वेत होरा। वही सारे लक्षण, वही सारी
- 53:48सहनशीलता, बस कुंती के भीतरी आती है सभी स्त्रियों में जब मैंने
- 53:54कंगाला। अगर मेरे से पूछोगे तो मैं सिर्फ
- 54:00कुंती का ही आपको नाम ले सकूँ। मेरे अनुभव में जो स्त्री आई तो
- 54:07इस हिसाब से अगर एक स्त्री पहुँच जाती है जैसे कि श्वेताम्बर ने
- 54:11कहा अगर देखा जाए। तो श्वेताम्बर भी मानते तो यही है
- 54:16ना कि 24 में तो एक ही पहुंची। बहुत गौर से अगर छानपीन किया जाए
- 54:24तो श्वेताम्बर यही तो मानते हैं ना कि 24 में से एक पहुंचे 2300।
- 54:30वे भी मानते हैं के पुरुष ही पहुंचे।
- 54:3424 मई के ऊपर विवाद है। उनके भी आज लेकिन आज क्योंकि
- 54:40बाइफरकेट हो रहे हैं दोनों तरफ और अगर तुम मुझे मेरा अनुभव पूछते हो
- 54:46तो मैं तुझे स्पष्ट आपको स्पष्ट स्पष्ट नहीं बता सकू।
- 54:51बस इतना सा कह सकूंगा। कि मेरे जो पैमाने हैं मेज़रमेंट
- 54:56के पैमाने हैं, उन पर सिर्फ एक स्त्री खरी उतरती है।
- 55:01मैं नहीं कुछ कह सकता ये तो उनका मसला है।
- 55:09कुंती के बारे में मैं जरूर कह सकता हूँ।
- 55:14मुझे लगता है करीब 90% मुझे लगता है कि पहुँच गई थी 10% कुछ
- 55:21संभावनाओं ऐसी रहती हैं जैसा कि शायद बस मैं शायद कह सकता हूँ अब
- 55:28ये शायद से आप कुछ भी समझ रहे हो। लेकिन मैं तत्विक रूप से आ जाऊं
- 55:33वैज्ञानिक रूप से जब मैं कह दूँ, सनातन रूप से सनातन शुद्ध विज्ञान
- 55:38है। सनातन ने जो खोजे क्यों वो हमारे
- 55:44बख्तियार खिलजी ने सब चलाते? नालंदा।
- 55:54सब खाक कर दिया। उसने ऐसी शानदार व्यवस्थाएँ थी।
- 55:59हमारे पास एक बिगड़ी हुई खोपड़ी ने सब ध्वस्त कर दिया।
- 56:05इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ वक्त आते ही समझ जाओ।
- 56:08ये जो विज्ञान आज इन मूर्ख राजनैतिकों के हाथ में ऐट्बॉम की
- 56:17चाबी दे रहा है इससे बड़ी मूर्खता, कोई मनुष्यता विनाश के
- 56:26कगार पर ज्वालामुखी को। और तुम ही हो जो इसे बचा सकते हो।
- 56:36अब जिन मुल्कों में लोकतंत्र है, कम से कम उन मुल्कों को तो बचाओ,
- 56:42फिर वो मुल्क इकट्ठे हो गए इन तानाशाहों को घेरे।
- 56:49जैसे हिटलर को गहरा गया था। किम जोंग उन हो या कुछ ऐसे हो,
- 56:57पुतिन हो अब देखिए इनका पागलपन तो हम दूर नहीं कर सकते।
- 57:02जो आदमी पागल हो गया उसकी कोई दवाई थोड़ा होती है।
- 57:06और अहंकार में पागल हुए व्यक्ति की तो कोई भी दवाई नहीं होती।
- 57:11मैं तो बड़ा लंबा प्रोसेसर है, जन्मा बीत जाते हैं, फिर कहीं
- 57:14जाके उसका इलाज होता है। ये अध्यात्मिक रोग बड़ा गहरा है,
- 57:24लेकिन आप जो लोकतंत्र में हैं। और हमारा हिंदुस्तान तो शुक्र है।
- 57:34किसी ने अपनी आध्यात्मिकता बचा के रख ली और रख ली चाहे किसी भी सारे
- 57:40चाहे वो मूर्ति रूप में बचा के रख ली, चाहे वो फॉर्मूला के रूप में
- 57:47बचा के रख ली। चाहे वो संस्कारों के रूप में बचा
- 57:51के रख दिया लेकिन हिंदुस्तान ने अपनी आध्यात्मिक खोजों को बचा के
- 57:56रख दिया जिनको आज ही ये मूड व्यख्यायित कर रहे हैं अपने अपने
- 58:02ढंग से लेकिन मैं कहता हूँ ये भी शुक्र है।
- 58:06शुक्र इसलिए है। कि इन्होंने वो जो चीजें छोड़ दी
- 58:13जो संस्कार की तरह अपनाई गई उन में से जब भी कोई जाग्रता आएगा
- 58:18व्यक्ति वह ढूंढ निकालेगा। सत्य कथ उसके लिए कोई परेशान है,
- 58:24बस उसे सिर्फ एक मंत्र का मूल। पहला अक्षर जाइए, पूरी लिपि समझ
- 58:30जाएगा। यही चेतन मनुष्य की निशानी होती
- 58:35है। जागृत व्यक्ति के अगर मैं अपने
- 58:40अनुभव से कुछ कहूं तो मुझे इतना समझता है।
- 58:45कि जो तेईसवां पैर है वो ठीक स्त्री के पास तो नहीं होता लेकिन
- 58:53स्त्री अगर पुरुष के नजदीक रहे, उसके संगत में रहे।
- 59:04इसलिए आपने देखा होगा यह ने सर्गिक भी है।
- 59:09प्रकृति इसको अंजाम भी देती है, लेकिन स्त्रियों को पता नहीं होता
- 59:13क्यों सत्संग में क्यों खींची चली जाती है ये खुद स्त्रियों को पता
- 59:18नहीं पुरुषों को ये मूर्खता लगती है।
- 59:22हालांकि पुरुष भी खींचते हैं। लेकिन स्त्रियों की बहुत मात्रा
- 59:27खिचती है, उसका कारण क्या है? नेचुरल नैसर्गिक स्त्री बायक
- 59:34रूम्सम के क्रीप आना चाहती है। स्त्री का एक्स क्रोमसोम वाय
- 59:43क्रोमसोम के सांनिध्य में आना जाता है।
- 59:48बस यही कारण कशिश हो जाता है। इसी कारण से तुम पाओगे अगर कोई भी
- 59:54व्यक्ति जाए कितना ही मूड हो टोपीधारी हो, कोई बात नहीं।
- 1:00:00मालाएँ डाल रही हो, त्रिपुंड सजा लिया और दाढ़ी पीली कर रही हो,
- 1:00:03लेकिन स्त्री का झुंड वहाँ पाओगे तुम कारण क्या स्त्री को कोई काम
- 1:00:11नहीं? इस स्त्री को भर के ज्यादा काम है
- 1:00:16और से जितना खाली तो कोई है ही नहीं।
- 1:00:20असली काम ही स्त्री के पास है सारा और तुम्हें पता नहीं हमारे
- 1:00:25हरियाणा में तो खेत खलिहान की स्त्रियाँ ही बीजती हैं, फ्लो वे
- 1:00:30करती हैं, बीज बोती हैं, रोपण वह करती हैं, खाद वह बिखेरती हैं।
- 1:00:37सारा काम ही स्त्री करते है, चूल्हा चौका भी करते है और पुराने
- 1:00:42वक्त में मैंने देखे पनघट पे जाती हुई स्त्रियाँ गीत गाती है और
- 1:00:47अपने सर पे तीन तीन मटकियाँ ले के जाती है, सुबह सुबह चट्टी पीसती
- 1:00:52है और तो कभी मैंने चट्टी पीसते देखे है झेलों के सिवा।
- 1:00:58पर सिर्फ जेलों में ही चक्की कसती है, लेकिन पन घाट पे जाती
- 1:01:03स्त्रियां सुबह उठ के जब ये चक्कियां नहीं थीं तो आज के दिन
- 1:01:09भर का कोई मेहमान आ जाए, वो भी देखना है तो सारा आटा भी पीसना
- 1:01:14है। पनघट से पानी भी ले लिया था आज तो
- 1:01:17हम घर बैठे है बटन को बस रिमोट से और चल पानी शुरू हो गया।
- 1:01:25आज बड़ी सूक्ष्म और आरामदेह विज्ञान ने कर दी है जिंदगानी
- 1:01:31विज्ञान का धन्यवाद है इस मसले में।
- 1:01:34लेकिन ये खोजें सब परमात्मा की हैं, ये ध्यान रख लो विज्ञान से
- 1:01:39चिपट मत जाना इस विज्ञान का लाभ उठा ले ये पंखा चल रहा है ये एसी
- 1:01:44चल रहा है ये सब विज्ञान की देन है दवाइयां हमने खोज ली हमारी
- 1:01:51नेचुरल आयु का जो। एवरेज है वो बढ़ गया।
- 1:01:57किसी वक्त हमारा जो एवरेज उम्र थी हिंदुस्तान की वो 3335 साल हुआ
- 1:02:04करती थी। आज करीब मेरे ख्याल में 65 के
- 1:02:09करीब है, शायद अक्चवल डेटा मैं नहीं जानता।
- 1:02:13लेकिन है ज्यादा आजादी के वक्त हमारी 3335 के करीब थी।
- 1:02:20आज 65 से करीब हो गई। 70 भी हो सकती है ये क्यों बढ़ गई
- 1:02:26उम्र उम्र बढ़ गई के इस विज्ञान के कारण हमारी उम्र बढ़ गई।
- 1:02:32और कल जो कहा मैंने कर के प्रवचन में क्योंकि आज का प्रवचन पूरा हो
- 1:02:36गया है, समझ लेना। आज के प्रवचन में मैंने साथ साथ
- 1:02:39समझा दिया कि अगर स्त्री पहुंचना चाहती है तो पुरुष के संग में
- 1:02:45उसका वायक मौसम का सन्निधि उसे लेना होगा।
- 1:02:55समझती बात इसलिए स्त्रियाँ पुरुष जब वक्त हो जब वो अध्यात्म की
- 1:03:02चर्चा कर रहा हो स्त्रियाँ खिची चली जाती हो, एक पुरुष का होना
- 1:03:10कृष्ण का। और हजारों गोपियों का होना क्या
- 1:03:16बताता है? तुम्हें क्या संकेत देता है?
- 1:03:21कुछ संकेत है ना? इसमें एक पुरुष हजारों स्त्रियों
- 1:03:25को खींच रहा है। कारण क्या है तुमने देखा चार
- 1:03:30स्त्रियों? में एक पुरुष रह सकता है।
- 1:03:35चार पुरुषों में एक स्त्री जैसे काटी होगी।
- 1:03:38द्रोपदी वो द्रोपदी ही जानती है। पांचों में जो एक काठ लेकिन ये
- 1:03:43चार स्त्रियों में एक पुरुष बड़े आराम से रह सकता है, ये हजरत जी
- 1:03:48ने तो सिद्धांत ही देती है। हजरत ने खुद 11।
- 1:03:53लेकिन उनका कारण कुछ और था। प्रसंग बड़े लंबे हो रहे हैं।
- 1:03:56वो बड़े अन्य कारणों से किए गए थे और मैं आपको सारे डीटेल्स से
- 1:04:04समझाऊंगा कि वो 11 साथियाँ क्योंकि सात बच्चे पैदा होंगे
- 1:04:09उसके। उनका क्या हुआ?
- 1:04:13यह इस्लामिक की जो बातें हैं ये मैं किसी अन्य प्रदर्शन में मुझे
- 1:04:16याद करा देना। मैं आपको बताऊँ व्हाय क्रोमोसोम
- 1:04:21जो है वो है चेतना कान्शस्नस। और मनुष्य तक पहुंचने की यात्रा
- 1:04:30जड़ से शक्ति का संवर्धन नहीं है, चेतन का संवर्धन है, शक्ति
- 1:04:40सम्पूर्ण नहीं होती, चेतना सम्पूर्ण होती है।
- 1:04:44अब इसको आप अच्छी तरह से सम्मिलना आखिरी बात है ये।
- 1:04:48जड़ से लेकर परम तत्व तक पुरुष के रूप में जामे में आ जाना पुरुष और
- 1:04:56स्त्री के जामे में आ जाना यह ऊर्जा का घणित नहीं है पूर्णता
- 1:05:02नहीं है वर्ण चेतनता की पूर्णता है।
- 1:05:07ये शब्द गहरे हैं थोड़े से लेकिन इससे स्त्रियाँ लाचार न हों,
- 1:05:15स्त्रियाँ लाचार न हों आपके पास जो व्यवस्था है इसलिए मैं तुमसे
- 1:05:19कहता हूँ ये जो आजकल आचार्य साचार्य जो हैं, इनको कुछ पता
- 1:05:25नहीं है आंतरिक व्यवस्था। ये आपको लिव इन की बात करेंगे,
- 1:05:29उसकी बात करेंगे, उसकी बात करेंगे।
- 1:05:31अगर आध्यात्मिक रूप से देखा जाए तो स्त्री के लिए पुरुष तत्व
- 1:05:37अनिवार्य है। पुरुष के लिए स्त्री तत्व
- 1:05:41अनिवार्य नहीं है। अभिषेक स्त्रियां छः रूप में न आए
- 1:05:51यह प्राकृतिक व्यवस्था है, इसमें कुछ किया नहीं जा सकता, लेकिन
- 1:05:57मैंने आपको खोल कर समझा दिया और हमारे ऋषिगण बड़े श्रेणी थे,
- 1:06:02उन्हें पता था। कि स्त्री को पुरुष का सांनिध्य
- 1:06:05चाहिए ही चाहिए, इसलिए छोटी उम्र में ही उसकी शादी करते थे।
- 1:06:10आप अन्य कारण भी बता सकते हैं, लेकिन इसका अध्यात्म के कारण मैं
- 1:06:14अच्छी तरह से जानता हूँ। इसका अध्यात्मिक कारण सिर्फ यही
- 1:06:17था। हमारे सनातन के ऋषि जानते थे।
- 1:06:21और कोई सनातन का ऋषि ऐसा नहीं जिसने शादी में की, बता दो मुझे
- 1:06:25कोई प्रश्न बता दो विशामित्र बता दो या हमारे?
- 1:06:41भगवान राम के गुरु जीतने भी हमारे गुरु लोग हुए, उन में से कोई गैर
- 1:06:48शादी शुदा हो कोई भी एक हो शायद ही ढूंढ पाओ तुम मेरे हिसाब से।
- 1:07:00लेकिन आज राजनीति में सब छड़े लोग ही बैठे हैं।
- 1:07:05ये क्या करेंगे, विनाश ही करेंगे। जब इनको पता नहीं घर गृहस्थी का
- 1:07:08चूल्हा चलना कैसे? इनको भावना भी नहीं, मैं तुमसे
- 1:07:13कहता हूँ। किसी भी व्यक्ति जो संसारिक है,
- 1:07:19उसके बच्चे चाहे एक बच्चे वह दायित्व कर्तव्य निभाना जानता है।
- 1:07:25बहोड़ा नहीं हो गया उसको आप उच्चतम गद्दी पर बिठा देना वह
- 1:07:32योग्य। क्योंकि वह गृहस्थियों की भाषा को
- 1:07:36समझता है। उसने ग्रस्त जाना है और मैं और भी
- 1:07:41बात बता दूँ। ठीक है, मैंने ये संकल्प लिया था
- 1:07:46शादी में बाद में करूँगा पहले मैं एनलाइटनमेंट देखूंगा, होती भी है
- 1:07:51कि नहीं होती? और होती है।
- 1:07:55उसके बाद ही मैंने शादी करवाई। अनुभव ये आवश्यक है क्योंकि जब
- 1:08:00मास्टर ऑफ मास्टर्स को सारे ही प्रश्न पूछने होते, तुम कोई भी
- 1:08:06प्रश्न पूछोगे शंकर इसलिए तो बचकाना सिद्ध हुए।
- 1:08:09जब भारती ने पूछ लिया शंकर से संभव के बारे में तो शंकर क्या
- 1:08:14बता पाए? कुछ भी तो नहीं बता पाए टाइम टाइम
- 1:08:18फिश हो गए अनुभव के लिए और स्त्री की उच्चतम अध्यात्म की चेतना के
- 1:08:26लिए ये पुरुष का दायित्व भी बनता है।
- 1:08:30के एक स्त्री के साथ वर्षों वर्ष गुजारे।
- 1:08:35स्त्री को तो जरूरत है, ये पुरुष का दायित्व है।
- 1:08:40बात कुछ थोड़ी सी पलट गई है, लेकिन मैं इस बात को यहीं विश्राम
- 1:08:45दूंगा। कल की बात थोड़ा सा पूछ रहे है
- 1:08:49ये। क्या आपने कहा कि अमृता के कारण
- 1:08:53हाँ अमृता के कारण देखिए कुछ उपद्रव अगर ये खोज हो जाती है तो
- 1:09:02फिर तुम्हारी उत्सुकता मरने में होगी।
- 1:09:04तुम ये खोजोगे कि आदमी मरे कैसे? आज तुम ये खोज रहे हो कि आदमी अमर
- 1:09:11कैसे हो? फिर तुम साइंटिस्टों को विचारों
- 1:09:13को दूसरी प्रणाली खोजनी पड़ेगी। तुम मरो कैसे देखिए मेरी एक
- 1:09:20मूलभूत बात को समझ लेना तुम उम्र को बढ़ा सकते हो।
- 1:09:26मृत्यु को जीत सकते हो, लेकिन तुम्हें बेसिक चीज़ का ज्ञान नहीं
- 1:09:31है। तुम अपने भीतर खंगालो क्या तुम
- 1:09:35मुँह से डरते हो? नहीं डरते हो मुँह से कोई नहीं
- 1:09:39डरते हो किस्से डरते हो तुम डरते हो दर्द से?
- 1:09:47शरीर बीमार हो जाता है, कैंसराइटिस हो जाता है हाय है,
- 1:09:51करते हो हाय है करते हो बहुत दर्द से गबराते हो तुम उम्र तो तुम
- 1:09:58लंबी कर लोगे तो फिर उतने साल तो तुम कराते रहोगे।
- 1:10:03मेरे पास रोज़ ऐसे केस आते हैं बाबा और दास कर दो, मैंने कहा
- 1:10:07काहे की करूँ, जीवन की करूँ या मरने की करूँ?
- 1:10:11कहते नहीं बाबा मरने की कर। ऐसे में तो जीने का कोई अर्थ ही
- 1:10:16नहीं है तो आप डरते हो, दर्द से सत्यता तो है ही ये।
- 1:10:24बखान कुछ भी करते रहो आप डरते हो दर्द से मौत से नहीं डरते हो मौत
- 1:10:30तो तुम चाहते हो रात को सोए पड़े आ जाये, रात को मैं सोऊं और सुबह
- 1:10:35मैं ना उठूं मैं सदा ही ये कह के सोता रहूँ के हे भगवान ऐसी कृपा
- 1:10:40कर दे। के रात को मैं सोया हूँ, सुबह मैं
- 1:10:43उठू ही ना, लेकिन सुबह उठ जाता। मैं क्या कहूं मेरे पास मैं थोड़ा
- 1:10:49ही है, मैं इसको पकड़ के थोड़ी बंद कर सकता हूँ के बार 2000 ये
- 1:10:53मेरा हुकम नहीं मानता भी ये स्वेच्छा से ही चलता है।
- 1:10:56उसकी कृपा से ही चलता है, उसके हुकम से ही चलता है।
- 1:11:01तुम डरते हो दर्द से और नाम लेते हो तुम मृत्यु का मृत्यु के ऊपर
- 1:11:09तो लांछन लगाना बिल्कुल बेबुनियाद है।
- 1:11:15तुम किस राइट से डरते हो और अगर तुमने कैंसर को ठीक कर लिया?
- 1:11:20उन गले हुए सारे टिश्यूज़ को तुमने बदल दिया और तुमने नए सारे
- 1:11:26प्रत्यारोपण कर दिए तो ध्यान रख ले।
- 1:11:29परमात्मा की सृष्टि में कोरोना जैसे और भी बड़ी बीमारियां हैं तो
- 1:11:36तुम्हें जीने कैसे देंगे? हम्म।
- 1:11:40तुम्हें जीने कैसे देंगी? तुम परमात्मा को जीत पाओगे कभी
- 1:11:45जिसने मौत बनाई अगर तुम मौत को जीत लोगे, ठीक है, जीत लोगे, लंबी
- 1:11:49लाइफ कर दोगे? मैंने कहा जो चीजें उसने 100
- 1:11:53जन्मों में भुगतानी थी, 100 घरों में वो एक घर में भुगता लेगा उसका
- 1:11:57क्या बिगड़ता है? प्रकृति का काम मल्का हो जाएगा।
- 1:12:00लेकिन बात तो ये है तुम मृत्यु से डरते गांव तुम डरते हो दर्द से
- 1:12:07हाय हाय न करनी पड़े ओह ये पेट दुख रहा है ये ये कैंसर हो गया है
- 1:12:14ये गले का कैंसर है राम किशन पर मंस को।
- 1:12:20ये पैंकरेड कैंसर है। कृष्णमूर्ति जी को तुम डरते हो
- 1:12:28दर्द से दर्द का क्या इलाज है ये बताओ मुझे बिमारी।
- 1:12:39कितनी बीमारियां और कल को जो नई बीमारियां पैदा हो जाएंगी उनका
- 1:12:43तुम्हें पता है कभी करो ना इससे पहले आया था नई नई पैन्डेमिक होती
- 1:12:51रहती हैं। और ईश्वर की सृष्टि में किसी चीज़
- 1:12:55की कमी नहीं है। उसको जीत के तुम कैसे जा सकते हो?
- 1:12:58उसकी सृष्टि में ही रहो। आखिर में हमें संतों का कहना ही
- 1:13:06मानना पड़ेगा। तुम देख लो, अमर हो जाओ, कोई बड़ी
- 1:13:11बात नहीं हो सकते। लंबी उम्र कर लोगे ब्रुकट लेकिन
- 1:13:16महाभारत पापा 4000 5000 साल जीते हैं और उनके होते हुए धरती के ऊपर
- 1:13:21कितना भनाश होता है या वो चले गए थे छोड़ के?
- 1:13:27प्रथम विश्व युद्ध हुआ, द्वितीय विश्व युद्ध हुआ और कितने हजारों
- 1:13:31हजारों मामूली युद्ध हो गए? कितनी बीमारियां फैली तुम
- 1:13:36महाविध्यालय बाबा कहीं गए थे नहीं, ये तुम्हारी कल्पना है भाई
- 1:13:41वो कुछ साल जीवित रह के चले गए। लेकिन ये बात तुम्हारे समझ में
- 1:13:50नहीं आती। आज कोई योगा आनंद का प्रसार कर
- 1:13:53रहा है, कोई उसका प्रसार कर रहा है, कोई उसका प्रसार कर रहा है,
- 1:13:56कितने यूट्यूब चैनल भरे पड़े हैं, मैं कहता हूँ सबको देखना बंद कर
- 1:14:00दो, मुझको भी देखना बंद कर दो। मेरी एक बात सुन लो और मुझको
- 1:14:04देखना भी बंद कर दो क्या कि तुम अपने आप को प्रचार करना है अपने
- 1:14:11आप को देखना है, न तो किसी को सुनना है, न किसी को देखना है,
- 1:14:17समय की और शक्ति की बर्बादी। वही शक्ति जो तुम बाहर तस्वीरों
- 1:14:23को देखने में लगा देते हो, फिल्मों को देखने में लगा देते,
- 1:14:27ताशों को देखने में लगा देते, भोगों को भोगने में लगा देते सैर
- 1:14:31सपट में लगा देते वही शक्ति तुम अंतर्मुखी करके अपने आप को देख
- 1:14:35सकते हो, मैं तुम्हें यही समझाना चाहता हूँ।
- 1:14:41फिर जब तुम अंदर जाके पाओगे, तो तुम पाओगे जो मैं बाहर ढूंढ रहा
- 1:14:45था वो मेरे भीतर बैठे थे यही मज़े की बात है जीसको ढूंढ रहे थे
- 1:14:56बाहर। वो बैठा तो तेरे अंदर तुम खोजो
- 1:15:03उसे अंतर्मुखी हो के खोजो, ये साइंटिफिक बातें अच्छी हैं, लेकिन
- 1:15:10इनका दुरुपयोग मत करो। इनको कंस्ट्रक्टिव में से इनका
- 1:15:16उपयोग करो। इनका सुख लो परमात्मा ने बनाई है
- 1:15:20सारी परमात्मा से बाहर हो के कोई कभी कुछ एजाज नहीं कर पाया दीज़
- 1:15:26अरे ऑल दी क्रिएशन्स ऑफ दट अलमाइटी बनाया उसने है तुमने खोजा
- 1:15:33है। जब पंखा हो, एसी हो, हीटर हो या
- 1:15:36जो भी कुछ उसका उसकी खोज करो, वो कहाँ बैठा है और कहाँ बैठे हैं।
- 1:15:52मा लिख तेरे अंदर वसला मा लिख तेरे अंदर वसला ते न नजर ना आवे।
- 1:16:1010 की किता जावे? 10 की किता जावे?
- 1:16:18मालिक तेरे अंदर वसदा तेनु नजर ना आवे 10 की किता?
- 1:16:29क्या करे सुत्ते नूतन लिए जगाते मछले नू कोण जगावे?
- 1:16:3810 की की तो जो सच में सोए पड़े उसको तो जगा लेंगे जो मचल के पड़ा
- 1:16:45है, उठना ही नहीं चाहता उसको हम कैसे जगाए?
- 1:16:49तुम मचले हुए पड़े हो तुम जान बूझ के बहाने पहुँच इस मिथ्या भ्रम को
- 1:16:56तोड़ो, कुछ नहीं मिलेगा ठीक है तुम और गुजार लो 100 500 जन्म कोई
- 1:17:01बात नहीं, लेकिन आना वही ही पड़ेगा अपने ही तर पर जो तुम्हारा
- 1:17:07अपना घर है। अपने घर पर वापसी करनी पड़ेगी।
- 1:17:11आखिर में उससे पहले तुमने जितना भटकना है, भटक लो भाई।
- 1:17:17आखिर में छज्जू को अपना चुबारा ही अच्छा लगता है।
- 1:17:21दोस्तों को छज्जू दे चुबारे ना बल्क ना बुखार।
- 1:17:35धन्यवाद।