Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Apr 25 - प्रारब्ध कर्म कैसे फलित होते हैं? क्या प्रारब्ध कर्मों से बचा जा सकता है? New Karma Theory
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- 0:03बाबा जी, मैं आपके पास कुछ वर्ष पहले आया था, मैं एक लड़की से
- 0:16प्रेम करता था। वह भी मुझे प्रेम करते थे।
- 0:31उससे पहले मैं आपके पास एक बार आया था नहीं सारी बात बताई।
- 0:47आपने 2 मिनट के लिए मौन साधा। और फिर आप बोले की ठीक है, आपकी
- 1:05बॉन्डिंग अच्छी रहेंगी, लेकिन ध्यान रखना।
- 1:23इस लड़की से आपको तीन बच्चियां प्राप्त होंगी, बेटर नहीं होगा।
- 1:43मेरे मन पे बोस आ गया लेकिन अपने प्यार किया गया और उसके प्यार
- 1:58किया गया। बेबसी का आलम इतना गहरा हो गया।
- 2:05कि मैंने उससे शादी करवा ली। मेरा प्रश्न ये है बाबा अभी तक
- 2:18मेरे दो बेटियां हो गईं। क्या तीसरी बेटी होगी ही होगी या
- 2:37के कुछ उपाय है? मैं बहुत दुविधा में हूँ कृपया।
- 2:53मुझे इस दुविधा से बाहर निकाली है फाइनेंशियली इतना स्ट्रांग नहीं
- 3:05हूँ, यद्यपि कमाता खाता हूँ। गुजर प्रश्न हो रहा है किसी तरह
- 3:23मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल प्रश्न आज आया है, इससे मुश्किल
- 3:38प्रश्न कभी नहीं आया। जीवन में तो बहुत आया है लेकिन जब
- 3:51से मैंने यूट्यूब पे बोलना शुरू किया तब से पहला प्रश्न है तो
- 4:02इतना पेंचीदा है। पचीदा इस शर्त में तुम्हारे लिए
- 4:09विजीता मेरे लिए नहीं विजीता तुमने पूछा निर्मल मुझे क्या करना
- 4:25चाहिए? मार्गदर्शन कीजिए।
- 4:35क्या तीसरी बेटी आएगी ही आएगी? घरेलू हालात ऐसे नहीं हैं।
- 4:53यहाँ दो ऑप्शन हैं, दो रास्ते जाते हैं या तो जहाँ दो बच्चियां
- 5:10पैदा कर ली, तीसरे भी कर लो जहाँ दो बच्चियां पैदा कर ली, तीसरे भी
- 5:19कर लो। नहीं नहीं, सूक्ष्म बालो तुम ऐसे
- 5:25विषय मत किया करो, कहते हैं शायद तीसरा लड़का हो जाए होगी तो लड़की
- 5:36एक था लहसा आता है, मैं रोज़ समझाता हूँ।
- 5:42एक तल ऐसा आता है, प्रत्येक व्यक्ति के भीतर जिसे जंक्चर कहते
- 5:48हैं, वहाँ परमात्मा की फरमान व्हाट विल हैपन तुम्हें क्या करना
- 6:00चाहिए क्या होगा? यह फरमान आते हैं।
- 6:07अब यहाँ थोड़ा सा ठहर जाएं। चल वह फरमान आते हैं परमात्मा की
- 6:17के चेहरे से। अब तक आपने जो कर्म कर दिया है,
- 6:26इस वीडियो को एक एक शब्द हृदय में उतार लेना और पूरी सुनना बेहतर
- 6:31है। उस तन पर जाकर जैसे जंक्चर पार्ट
- 6:47कहता हूँ वहाँ परमात्मा के आदेश आना शुरू होते हैं और ये आदेश आते
- 6:55ही कैसे हैं? वो भी आपको बता दूँ।
- 6:58गहरी बात है जो आपने बीज वो दिया। आपके संसार में बीज बोया हुआ न
- 7:11फले ये संभव है लेकिन परमात्मा के दरबार में बीज न फले नेक्स्ट टू
- 7:20इम्पॉसिबल यह असंभव है। फलेगा फलेगा निश्चित फलेगा तो
- 7:30वहाँ से जो फरमान आते हैं, वह हो चुका होता है।
- 7:40इसको तुम प्रारब्ध हुई कह सकते हो?
- 7:47बाबनानी कहते हैं, जीस ए लिखे, तिस सरहना जीव फरमाए, तिबते पापा
- 8:01जो लिख रहा है। उसकी समझ नहीं है ये ये उसकी
- 8:08सुरना से जो आया वह मैं लिख रहा हूँ तो वह सुरना देता है तुम्हारे
- 8:19ही कामों का प्रतिफलन आँख के ऐसा होगा?
- 8:25और वह होगा पहलू आ गया बड़ा मुश्किल सवाल है, मैं पहले ही कहा
- 8:39थोड़ा सा गहराई से आराम से। आनंद दाई क्षणों में कोलह से दूर
- 8:52बहुत दूर निकल जाना शांत माहौल में से सुनना।
- 9:07अब आपने पूछा मैंने बाबा से पूछा, बाबा ने कहा तीन बेटियां होंगी,
- 9:15बॉन्डिंग अच्छी रहेंगी, तुमने कहा प्यार तो बहुत है, ज़रा भी किसी
- 9:22बात पर, कभी। तो तलाक नहीं हुई टोटली एक दूसरे
- 9:32के पास, लेकिन तीन बेटियां होंगी, इनमें से दो हो गई तीसरी मैं क्या
- 9:45करूँ? अब यहाँ आती है आपकी चॉइस करमन की
- 9:57गति न्यारी रसा दो करमन की गति न्यारी।
- 10:06निर्मल नीर दिये नदियन को सागर की न खारी मीरा भाई के शब्द हैं बड़े
- 10:18प्यार से भरे हुए। ऐसा मत समझना कि भक्त मुर्ख होता
- 10:25है नहीं, भक्त वर्म समझदार होता है, मूर्ख होता तो समर्पण न करता।
- 10:44कहते हैं नदिया को उज्वल जल दिया तुमने, निर्मल दरिया के नी खारे
- 10:57और दरिया से खरा बना देता है। उज्वल वरुण थीयो बगुला को कोयल कर
- 11:12दी नी कारी बगुला को तुमने सफेद रंग दिया उज्वल उज्वल रंग थीयो
- 11:22बगुला को। कोयल कर दी नी खारी खारी, कोयल को
- 11:28तुमने काला बना दिया, मूर्ख को तुम ताज दिए हो पंडित फिरोभखारी।
- 11:41मूर्ख को तुम ताज दियत हो पंडित भयो भिखारी सुंदर नैन दिए मृगण को
- 11:55मृग को तुमने बड़े सुंदर नैन दिए बन बन फिर।
- 12:01उजारी लेकिन जंगल जंगल भटकता करता है, कितने सुंदर नैन है मृगनानी
- 12:14सूर शान मिलने की आशा छिन छिन करती भारी।
- 12:24मीरा के शब्द बड़े प्यारे हैं, करमन की गति न्यारी कितने सुंदर
- 12:39नैन है, मृग के धक्के खा रहा है। जंगलों में कोयल कितनी प्यारी
- 12:53आवाज़ देती है कागा कासों लेते हैं कोयल काको दे मीठा वचन सुनाई
- 13:06कर। जग अपना कर ले, कोइल को तुमने
- 13:14काली कर दिया, इतनी मधुर ध्वनि उसकी कोहु कोहु?
- 13:28और बगला के तुमने श्वेत रंग दे दिया और श्वेत रंग कोई अच्छा नहीं
- 13:36होता और काला रंग कोई बुरा नहीं होता, लेकिन हमारी धारणाएँ बहुत
- 13:42कुछ बदल देती है। भगवान कृष्ण भगवान राम श्यामवरन
- 13:51के चल आगे चले बड़े शिशु पंच में तुम भी हो, लेकिन मैं नहीं हूँ।
- 14:07अब यहाँ दो ऑप्शन हैं आपके पास। पहला ऑप्शन है कि जहाँ दो पैदा कर
- 14:15रहे हो, तीसरी भी देखा जाए, बात तो ठीक है।
- 14:21मनीष की मनीष कहता, शायद हँसने की आदत है, उसके ये बोलता ही रहता
- 14:27है। इसलिए तो मुक्त नहीं हुआ।
- 14:32अभी तक ठीक ठीक पहले करना शुरू कर देता है।
- 14:43शायद लड़का हो जाए ये नहीं होगा। नेक्स्ट इम्पॉसिबल क्योंकि उस पर
- 14:50जाकर जो वह बोल देता है वह हो चुका होता है, समझाई बात है और जो
- 15:00हो चुका होता है, टला नहीं जा सकता।
- 15:05इसलिए बहुत सी। ज़िन्दगी में ऐसी बातें होती हैं
- 15:09जो प्रीडेक्टमेंट है, प्रीडेस्टेंट है, लेकिन दार्शनिक
- 15:19लोग कहेंगे हमें तो एक बात बता दो भी यहाँ।
- 15:28सृष्टि में विरोधाभास है। तुम्हें एक बात कैसे बताऊँ कोई
- 15:39क्या बस ये बता दो कि सभी कुछ पूर्व निश्चित है या कुछ हमारे
- 15:44हाथ में भी है भाई बात तो समझो। ऐसा थोड़ी ज़िन्दगी चले के
- 16:00तुम्हें रेलवे लाइन को पार करना है उदाहरण दे रहा हूँ ध्यान से
- 16:09समझना चित्र बना रहा हूँ। समझने की चिष्टा कर रहे हो समझ
- 16:16जाओ हमारे यहाँ गिद्दड़बहा में अर्ली पार गिद्दड़बहा गांव है बस
- 16:24बीच में रेलवे लाइन्स है सिर्फ। मैं आज की बात नहीं कर रहा,
- 16:35क्योंकि आज तो मैं क्या ही नहीं हूँ।
- 16:40शायद ढांचा बदल के आओ तो आपने परले पर जाना है।
- 16:47गीतलबहा गांव में जहाँ गुरुदास मान का घर है।
- 16:52पुराना घर और आप देख रहे हो के सामने से गाड़ी आ रही है।
- 17:05आपको नहीं पता कितनी रफ्तार से आ रही है वहाँ आपके पास के ऑप्शन
- 17:12है। दो ऑप्शन है।
- 17:18तुम सदा जल्दबाजी में रहते हो। गाड़ी आ रही है।
- 17:26तुम्हें पता नहीं किस रफ्तार से आ रही है या तो क्रॉस कर जाओ।
- 17:34अब आगे जो भी हो, परिणाम देखा जाएगा।
- 17:37खुदा तराश किया और बंद की कर ले या फिर ठहर जाओ वहाँ चॉइस काम
- 17:50करेगा तुम्हारे। समझाई बात बिलकुल सामने देखता है।
- 18:02ज्यादा दूर भी नहीं है गाड़ी लेकिन किस गति से आ रही है
- 18:07तुम्हें भी नहीं पता। महा तुम्हारी चॉइस काम आएगी, कहीं
- 18:22तुमने गलती खा ली लाइन्स को पार करते हुए तुम्हारा पैंट कब
- 18:31पहुंचा? फंस गया तो क्या होगा?
- 18:37राम नाम सत्य है और तुम वहाँ ये भी फैसला ले सकते हो की मैं शांति
- 18:51रखूं, देरी रखूं, गाड़ी को गुजर जाने को जब गाड़ी गुजर जाएगी।
- 19:00तो लाइन्स को फिर मैं क्रॉस कर दूंगा।
- 19:03ये दो ऑप्शन हैं। पहला ऑप्शन सर्टेन नहीं, उस ऑप्शन
- 19:14में दो परिणाम हैं। आप कट भी सकते हो, आप बच भी सकते
- 19:21हो। लेकिन दूसरे दूसरे ऑप्शन में आप
- 19:28कट नहीं सकते। पक्का मैंने हजारों बार रेलवे
- 19:35लाइन्स क्रॉस की है। लेकिन परमात्मा ने आँखें क्यों दी
- 19:43हैं? आँखें भी तो दी हैं वहाँ तुम्हें।
- 19:57डिसिसिव होना पड़ेगा, निर्णय लेना पड़ेगा क्या किया जाए?
- 20:08और यह तो मैंने साधारण से ही आपको उदाहरण दे दी।
- 20:13नहीं तो बड़े मज़े से आपको ठहर जाते हो।
- 20:15आप पता ही है आपको लेकिन मैंने एक उदाहरण दिया कि
- 20:30अगर ऐसा है तो आप क्या करोगे? आँखें हैं, आपके पास बुद्धि है,
- 20:36सब दिख रहा है लेकिन आपका लक्ष्य क्या है?
- 20:42उस पार चले जाना रास्ते में बाधा क्या है?
- 20:49ट्रैन का आना ज्यादा बेटर क्या होगा?
- 20:57रुक के देख लिया जाए। 2 मिनट में गाड़ी गुजर जाएगी।
- 21:01बिलकुल करीब ही तो है, गोदाम के पास है।
- 21:04गोदाम बिलकुल करीब है। रेलवे गोडाऊन।
- 21:16वहाँ तुम्हें निर्णय लेना पड़ेगा। देखिये यहाँ।
- 21:25लड्डू गोपाल की कहानियों काम नहीं करेंगी।
- 21:30कल मुझे किसी भी त्ररण को भेजा लड्डू गोपाल ले आए कहानी सुना रहा
- 21:38है खुद मूर्ख है, दूसरों को मूर्ख बना रहा है।
- 21:49जो हृदय में खुद ने उतारा नहीं, दूसरों को रोकर समझा रहा है।
- 21:56ये भावनाएँ हैं, सिर्फ भावनाएँ हैं, यह अनुभव नहीं है, मैंने
- 22:05देखा। वह कहानी का कथा का सुनाने वाला
- 22:09व्यक्ति लड्डू का पाल कृष्ण आटा भी पिसाल आते हैं।
- 22:21कृष्ण पानी के बाल्टी भी ले आते हैं।
- 22:24कृष्ण सारा सामान भी खरीद ले आते हैं।
- 22:27तुम्हारे बाप के गोले लगे मीरा यही कह रही है सुन्दर नैन दिये
- 22:43मृगनों को बन बन फिर उजारी वनों में भटकता फिर रहा है।
- 22:54उजड़ रहा है तो ऐसे लड्डू गोपाल की कहानियों कह के।
- 23:07ऐसा नहीं कि ये इसी मुल्क में चलता है।
- 23:14ऐसे लगता है तमाम बिस्वा पागल हो गया है।
- 23:19कहीं किसी रूप में, कहीं किसी रूप में, लेकिन एक दल ऐसा जो समझदारी
- 23:30से भरा पड़ा है और मैं रोज़ उस स्थल का विवरण देता हूँ आपको।
- 23:42तुमने पूछा पुत्र व्हाट शुड आई डू ऐट थिस जंक्शन इट इस क्रूशियल
- 23:53फर्म इस निर्णय समय में मुझे क्या करना चाहिए?
- 24:02आपकी भविष्यवाणी सत्य हुई, लेकिन अब मुझे क्या करना चाहिए?
- 24:10क्या मैं कुछ कर सकता हूँ? हाँ कर सकते हूँ चौंकिया नहीं।
- 24:22एक काम मत करना अगर करो तो उसका फल भोगने को तैयार रहना ऐसा ना हो
- 24:39कि गर्भ में बच्चा ठहर जाए। और तुम उसको गिरा दो ये पाप मत
- 24:45करना, फिर उस रूह को बड़ी देरी कर दोगे आप जन्म लेने में तुमने बड़ी
- 24:53वादा डाली, तुम अगर न घर में ठहराते तो प्रकृति उसे अन्य
- 24:59उपलब्ध करवा देती। ये लेने देने के संबंध ऐसा नहीं
- 25:05होता। ये नाथूराम गोडसे ने महात्मा
- 25:10गाँधी को गोली मार दी और इस जन्म में महात्मा गाँधी नाथूराम गोडसे
- 25:15को गोली मारेंगे तो मुक्त हो जाएंगे।
- 25:16नहीं नहीं, फिर तो नाथूराम गोडसे से मरे भी।
- 25:21और नाथूराम गोडसे से बंधे नहीं। ऐसा नहीं होता।
- 25:30परमात्मा फल देता है। सुख और दुख के हिसाब से जैसे तुम
- 25:37करेंसी में लेन देन करते हो। यहाँ मूंगे के बदले आटा नहीं
- 25:47मिलता। यहाँ दूध के बदले दाले नहीं मिलती
- 25:55एक्स्चेंज नहीं होता परमात्मा के कर्म।
- 26:04में दो हैं इसको अगर तो परीक्षा लेनी हो के बाबा ने जो कहा ठीक है
- 26:19या गलत है वो तुम्हे तीसरा बच्चा पैदा करना चाहिए।
- 26:26बाबा झूठा है। तो पता चल जाए, लड़का हो गया तो
- 26:32बाबा झूठा है। लड़की ही हुई तो बाबा तो सच्चा हो
- 26:39गया, बात तुम्हारी रह गयी। यहाँ कर्म करने के दो पहलू भी
- 26:46हैं। एक शब्द को बड़े ढंग से सुनना
- 26:51तुम्हारे जीवन की अहम भूमिका है। व्यक्ति 100 वर्ष का हो जाए लेकिन
- 26:56ये कर्म फिलॉसफी इसको समझ नहीं आती।
- 27:01गुरु वशिष्ठ ने भगवान राम का राय तिलक निकाला था।
- 27:06कहाँ चूक हो गई राय तिलक के बदले वनवास मिल गया इतना महाज्ञान कहीं
- 27:18तो कुछ हुआ होगा ना? लोग मुझसे पूछ लेते हैं सीधा सा
- 27:28उत्तर है, कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है।
- 27:33वशिष्ट ने राजतिलक का वक्त उस तत्व से नहीं पूछा जीसको मैं
- 27:39जंक्चर पॉइंट परमात्मा कहता हूँ, जहाँ परमात्मा के आदेश आते है।
- 27:43खुद अपनी बुद्धि से सोचकर फैसला ले लिया होगा, गणित बैठाया होगा,
- 27:49एस्ट्रोलॉजिकल ग्रह, नक्षत्र तारे देखे होंगे, उनके अंश वक्री
- 27:56मार्गी सब देखा होगा। और बुद्धि से निर्णय ले लिया होगा
- 28:03कि ये शुभ रहेगा। एक तो ये तल भी है, यह तल गलत भी
- 28:13हो सकता है। कैलकुलेशन्स कैन बी।
- 28:22एक दूसरा तल है जो गलत नहीं होता, कभी गलत नहीं होता, वो तल है के
- 28:38विशिष्ट ज्ञानी थे, एनलाइटन थे। अपने भीतर जाते हैं, उस जंक्चर
- 28:46पॉइंट पर परमात्मा से पूछते हैं महत्त्व कार्य है, बताइए मैं क्या
- 28:56करू? जैसे आप ए आई से प्रश्न पूछ रही
- 29:01हो? आज तक कि जैसी भी उपलब्धि है, मैं
- 29:05बता देता हूँ लेकिन परमात्मा ए आई नहीं है, परमात्मा इंटेलिजेंस है।
- 29:14मैंने पहले भी बोला आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस नहीं है, परमात्मा
- 29:19पूर्ण इंटेलिजेंस है। तो वशिष्ठ भीतर गए होंगे।
- 29:25बहुत ज्यादा होते, बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं था जब तेरा गर्दन
- 29:31झुकाई देख ले दिल के आईने में थी तस्वीरें यार।
- 29:43इस प्रश्न को ले के भीतर चले जाते और जवाब ले के बाहर आ जाते।
- 29:53पुरातन जमाने में राजा लोग गुरु बनाते थे।
- 30:04किस लिए? जब कोई ऐसा वक्त आ जाए जो उनकी
- 30:15समझ में न आए, ऐसे तंग नहीं करते तो हर बात मेरे।
- 30:25हम उससे पूछते, बाबा हम चंडीगढ़ चले हैं, थोड़ा सा पिच वगैरह का
- 30:31ख्याल रखना, गाड़ी के टायर वगैरह पंक्चर ना हो जाए ऐसे काम संतो से
- 30:37नहीं लेनी चाहिए यह बाप। गाड़ी 120 पे चला रहा हूँ, तुम
- 30:47ध्यान रखना मैं तुम्हारे बाप का बोला हूँ, क्या तुम परमात्मा से
- 30:56बिल्कुल ऐसे काम लेते हो? फरियाद के नाम पर इतना प्राप्त
- 31:03तुमने कमाया ना तुम्हें पता लगा ना किसी ने बताया साईं।
- 31:16और 1000 बातें करातीं आगे पीछे फेरे लाईं मेनू रास्ता दिखाएं
- 31:29ओकडा संभाली मेरी आँख पार तुम उठाईं एक कुली है क्या भाई?
- 31:40तुम परमात्मा से ऐसे ऐसे काम लेते हो, ऐसे ऐसे काम भी वो दे देता
- 31:48है। निश्चित ये तो ए आई से भी तुम
- 31:54सवाल पूछोगे तो वो बता देगा। लेकिन इंटेलिजेंस से ऐसे नहीं
- 32:00सवाल पूछने चाहिए। परमात्मा से बिल्कुल क्रिटिकल
- 32:05जंक्चर के ऊपर क्रूशल प्वाइंट के ऊपर आकर पूछने चाहिए तो कोई
- 32:11मुश्किल नहीं था। अपशिष्ट के लिए अपने भीतर जाते।
- 32:15ये प्रश्न को लेकर ये आपको थोड़ा सा विदाना बता दूँ शायद कोई आगे
- 32:22बता पाए ना बता पाए वो राजा जा का, संत के पास प्रभु जी आपदा पढ़
- 32:31के अब क्या करें? अब उसकी बुद्धि जब आप देखिए राजा
- 32:36है जनता में सर्वश्रेष्ठ है लेकिन वह भी थक गया, अब किसके पास जाए?
- 32:45अब उसके पास जाए जो सर्वाज्ञ है। जो सर्वज्ञ के पास जाता है तो
- 33:00राजा गुरु के पास जाता था, अपनी वैसा रखता था और गुरु तत्क क्षण
- 33:05उसका हल बताते थे। कैसे कर रहा वह क्या करता था?
- 33:10अब मैं सारी चीजें उधेड़ देता हूँ।
- 33:17वह उस पॉइंट पे जाता अपने अंतर ध्यान में गहरे जाकर वह पांच 1
- 33:23दिन आ जाएगा। मैं कितनी बार आपको बोला और बोलता
- 33:26रहूँगा? जहाँ परमात्मा के आदेश आते हैं।
- 33:38बस तुम सिर्फ ठहर जाओ गंदला पानी ठहर जाने से माटी नीचे बैठ जाती
- 33:51है, शुद्ध पानी ऊपर आ जाता है, लेकिन तुम छेड़छाड़ करते रहते हो।
- 33:57तुम फिर गजौर डाल देते हो उस पानी में वह फिर गंदा हो जाता है ऐसा
- 34:03मत करना जब तुम जंक्चर पॉइंट पे पहुँच जाओ, पता चल जाएगा तुम्हें
- 34:12मुझसे मत पूछना। भीतर की चीजें पूछी नहीं जातीं,
- 34:22जैसे आँखों वाला व्यक्ति जब अंधेरे में जाएगा तो पूछना नहीं
- 34:31पड़ेगा, क्या ये अँधेरा है? वो जब रोशनाई में जाएगा तो कहना
- 34:39नहीं पड़ेगा, पूछना नहीं पड़ेगा कि क्या यह रोशनाई है?
- 34:46नहीं, वह जानता है बस आँखें होना पर्याप्त है।
- 34:55तो वशिष्ठ ने को क्या करना चाहिए था?
- 35:02वशिष्ठ उस ऑपरेशन को विदर्भ लेके जाते बड़ा सहस था।
- 35:12उस सर्जन हरे को पूजता है, उस सर्वज्ञ को पूजता है ये सर्वज्ञ
- 35:22शब्द मैंने नहीं दिया सर्व व्यापक और सर्वशक्तिमान शब्द मैंने नहीं
- 35:28दिया। आदि काल से सनातन में हमारे
- 35:31ऋषियों ने दिया इसका कोई अर्थ है? वह सब जानता है, फिर तुम्हें
- 35:41तकलीफ क्या? क्यों मारे मारे फिरते हो?
- 35:52क्यों छटपटा रहे हो? सारी दुनिया दुखी है कारण करण
- 35:59मार्गदर्शन का अभाव इन लोगों के प्रभाव में तुम आ गए हो जो
- 36:09तुम्हारी। अस्तित्व से करते हैं, तुम्हारी
- 36:18एक जैसी खलवाड़ करते हैं, गुफाएं बनाई जाती हैं और फिर भी तुम्हें
- 36:25पता नहीं चलता कि ये जाली है। जीस व्यक्ति को परम आनंद का रस
- 36:30नहीं आया। वह संभोग करस लेगा और वह भी
- 36:34बलात्कार के जरिये या फुसलाकर या सबज के खिलाकर सीधा सा लक्षण
- 36:45भगवान कृष्णन बताया। पहुंचने के बाद जो चाहे करते जाओ
- 36:51पहुंचने से पहले कुछ नियम तो में रखने होंगे जैसे देखो छोटे क्लास
- 37:01के बच्चे एक ड्रेस में होते हैं नियम में।
- 37:06लेकिन जब तुम बड़े क्लासेज में पहुँच जाते हो तो तुम कोई भी
- 37:10पहरावा पहन सकते हो, छोटे कपड़े पहनो, बड़े कपड़े पहनो, किसी रंग
- 37:16के पहनो, कोई वर्दी जरूरी नहीं है।
- 37:26ये लोग पूछ लेते हैं बाबा ये आरएसएस वाले की जो वर्दी है,
- 37:31इसमें निक्कर क्यों बनाई? मैंने कहा भागने में आसानी हो
- 37:36जाती है, अगर पेंट बना देते तो पहुंचा किसी वक्त अड़ सकता है।
- 37:47और भागने में हम दक्ष हैं। जहाँ जान बचती हो, वहाँ चरण बिंदा
- 37:56हो जाते हैं। हम खतरा उठाने का जोखिम लेते ही
- 38:12वशिष्ट अपने भीतर जाते है। ये गुरुजन इसीलिए बनित है, जो
- 38:20व्यक्ति उस स्तर पर पहुँच गया। जहाँ परमात्मा के नहीं समझाता
- 38:30उससे पूछलो वह बता करुणा बान है और इतना करुणा बान के तुम से उसका
- 38:42मुआवजा नहीं मांगेगा। और दूर बैठा होगा।
- 38:47एकांत में शोर शराबे से दूर बस उसका शरीर चलता रहे, इतना सा उसको
- 38:57मिल जाए ये मिल जाता है। पूछा बेटा अब मैं क्या करूँ?
- 39:10क्या मुझे तीसरा बच्चा जनमाना चाहिए?
- 39:14अब यहाँ आकर तुम चॉइस कर सकते हो। देखिए चॉइस तो तुम पहले दफा भी कर
- 39:21सकते थे। ये तुम्हारे हाथों में थी जब तुम
- 39:26मेरे पास आए जब मैंने कहा कि बॉन्डिंग बड़ी अच्छी रहेंगी।
- 39:38लेकिन पुत्र तीन बेटियां हो गई और बेटियों का बोझा कार्य होता है।
- 39:47बेटियों की निगाह गीत की तरह रखनी होती है और बड़ा मुश्किल काम है
- 39:56आज के जमाने में जहाँ गुफाओंवाले बाबा बैठे हैं शैतानो से तो बचा
- 40:06लो। बाबाओं से कैसे बचा होगा?
- 40:18पहली बार जब मैंने कहा पूछ कर कहा था कोई एस्ट्रोलॉजी लगा के नहीं
- 40:26कहा था कोई गणना नहीं की थी ग्रह नक्षत्र तारों की, हालांकि मैं
- 40:33जानता हूँ। लेकिन मेरे पास बेटर ऑप्शन है,
- 40:43क्यूँ ना मैं उस बेटर बेस्ट ऑप्शन का इस्तेमाल करूँ, लेकिन उस वक्त
- 40:54भी तुम फैसला लेने में स्वतंत्र थे, मैंने तुम्हें कब कहा कि यहाँ
- 41:00करवाना ही पड़ेगा पुत्र? इट इस प्री डेस्टाइन्ड नहीं,
- 41:11मैंने नहीं कहा आज हुई तुम फैसला अभी ले सकते हो अब तीसरा बच्चा
- 41:23वही गाड़ी वाली बात। होगी तो लड़की ही कन्फर्म,
- 41:32क्योंकि उस तर से जो बैगाम आया वह झूठा तो होता नहीं।
- 41:45अब तुम्हारी चॉइस पर डिपेंड करता है।
- 41:50यहाँ दो रास्ते हैं। पहला चॉइस फुलनेस तुम पूर्णतया
- 42:01स्वतंत्र हो जाओ चॉइस लेने के लिए।
- 42:06चाहे पैदा करो, चाहे ना करो, जैसे मनीष कहता है शायद लड़का हो जाये
- 42:11तो चांस देख लो क्या फर्क पड़ता होगा?
- 42:13नहीं, नहीं तो मैंने स्टाम्प लगा दिया, अब और चाहे तो आप रोक दो।
- 42:25लेकिन ध्यान रखना, मैंने कहा परमात्मा जीस करेंसी में आपके फल
- 42:30भुक्ताता है वो है सुख और दुख। अब महात्मा गाँधी परम अहिंसा के
- 42:39व्यक्ति उसको तो कोई मारने आ जाए वो कहेगा भाई तुम क्यों मरते हो?
- 42:43हैलो मुझे ही दो। अरे जवानी भरी तेरी उम्र तू क्यों
- 42:52मरता है ले मैं खुद ही मर जाता हूँ मैंने खा पी लिया, भौंक लिया
- 42:58और जीने की तमन्ना भी तो नहीं? अगर नाथूराम गोडसे को गोली मारकर
- 43:11ही गाँधी मुक्त होंगे तो फिर ये भी वंदन हो गया एक तो कतल हुआ,
- 43:16बेचारा सीने में गोलियां झेली और फिर परमात्मा का ये।
- 43:28नियम उसको बड़ा भारी पड़ेगा, वह तो मुफ्त भी न हो सकेगा नहीं इट
- 43:35डिपेंड्स अपॉन यू परमात्मा जीस करेन्सी में फल देता है।
- 43:45मैं बार बार समझा रहा हूँ आपको ये समझ लेना।
- 43:48यहाँ ऐसा नहीं कि तुमने किसी के तमाचा मार दिया वो तुम्हारे तमाचा
- 43:52मारेगा। जहाँ कोई बैलेंसिंग नहीं होती
- 43:55कर्मों की जहाँ कर्म का प्रभाव गिना जाता है कितना सुख कितना दुख
- 44:07ये है उसकी क्रमसी। जो भुगतान करती है आपको तुम सदा
- 44:13स्वतंत्र हो। परमात्मा ने तुम्हें कभी भी
- 44:18पराधीन नहीं किया, हालांकि सब कुछ परमात्मा ने बनाया लेकिन परमात्मा
- 44:26ने तुम्हें स्वतंत्रता। ज्यादा समझदार है।
- 44:35इतनी विराट संरचना को देख कर तुम मिल जाओगे तुमने उसे खुली आँखों
- 44:40से कभी निहारा ही नहीं है, यह बड़ा है।
- 44:57पहले दिन भी तुम फैसला ले सकते थे नहीं लिया, कोई बात नहीं, तुम
- 45:04अपने मन के अधीन थे, वह लड़की भी अपने मन के अधीन थी।
- 45:08बॉन्डिंग अच्छी थी, ज़िन्दगी अब तक अच्छी गुजर गई और अच्छे से
- 45:13गुजर गई। लेकिन तुमने मैंने कहा, आज तक का
- 45:23सबसे मुश्किल प्रश्न जीस प्रश्न से मुझे सब परते खोलनी पड़ेंगी
- 45:30कर्म के अगर तुमने तीसरा बच्चा पैदा न किया, उसके जरिए आपको सुख
- 45:41और दुख जो मिलना चाहिए था। वो परमात्मा आपके अकाउंट में लिख
- 45:48देगा, उसको कहीं और जन्म दे देगा, क्योंकि एक ही व्यक्ति के एक ही
- 45:58व्यक्ति के साथ संबंध नहीं होते हैं।
- 46:00बहुत सी रोहों से बहुत सी देही से हमारे संबंध होते हैं कहीं और
- 46:05आपको जन्म उसका घर असीम है, तीसरा बच्चा तुम चाहो पैदा करो ना करो।
- 46:24अब ये डिसीसेस पहुँच जाएगा निर्णायक मोड़ तुम यहाँ ऐसा भी चल
- 46:36सकते हो के सब उस पर छोड़ दो। और अगर बुद्ध पुरुष होता तो ये
- 46:46प्रश्न नहीं पूछता। वो कहता मेरी तो यही मर्जी मेरी
- 46:54तो यही अर्जी कर वो ही जो तेरी मर्जी।
- 47:06तुमने सवाल पूछ लिया तो मैं कर्मों की परतें उगाड़ने में लग
- 47:10गया तुम परतन्त्र तो हो ही नहीं, यह समझो तुम परतन्त्र सिर्फ तब हो
- 47:19जाते हो जब तुम कोई कर्म कर बैठते हो।
- 47:24और उसको प्रारूप भी कह सकते हैं। तुमने कतल कर ही दिया तब भाई
- 47:31मुकदमा चलेगा, जो भी फैसला होगा तुम्हें भुगतना होगा।
- 47:37यू विल हैव टु एक्सेप्ट दट। यह जो प्रारब्ध का मतलब तुमने कतल
- 47:46कर दिया है, बस उसका फल मिलेगा तुम्हें इसी को प्रारब्ध कहा संतो
- 47:57ने लेकिन इसका मतलब ये नहीं। कि तुम आगे से भी वही काम करने का
- 48:02प्रतिबद्ध हो और कतल करो। इसका मतलब ये नहीं आगे से तुम
- 48:09शिष्ट भी हो सकते हो। साधु भी हो सकते हो, फिर तुम्हें
- 48:14साधुता का स्वाद मिलेगा। बालम की डाकू हैं।
- 48:20बाल के हो जाते हैं। डाकू थे तो डाकू होने का दुख
- 48:27होगा, पीड़ा होगा, ऋषि हो गए तो ऋषि होने का सुख होगा, सीधी सी
- 48:32बात है। यू कैन चेंज यूरसेल्फ़ ऐट एनी
- 48:39पॉइंट। तुम अपने आपको किसी भी पॉइंट पर
- 48:43बदल सकते हो, कोई बात नहीं, कर्म का प्रति कर्म नहीं होता,
- 48:51परमात्मा की सृष्टि में अब जन्या सिद्धांत दे।
- 49:00कर्म का फल आता है उसकी करेंसी में तुमने किसी को दुख दिया, किसी
- 49:08का मन दुखाया? यह कर्म हो गया, इसका मतलब नहीं
- 49:12वह तुम्हारा मन दुखायेगा समझ लेना बात को।
- 49:20एक न्यायिक व्यवस्था तो परमात्मा ने बनाई वो तुमने जितना दुख दिया
- 49:29दोरों को वह तुम्हें वापस दे देगा।
- 49:35तुम्हारा वीजा हुआ तुम्हारे ऊपर गिरेगा, तुम्हें काटना पड़ेगा।
- 49:43जिसके साथ तुमने अन्याय किया उसका कोई समझ नहीं रहा तुमने कर्म कर
- 49:49दिया खत्म उसने कर्म सहरिया खत्म। अब कोई मसला वाकी न रहा।
- 49:59अब मसला किसका वाकी रहा? न्यायाधीश का न्यायाधीश कौन?
- 50:04अब प्रकृति प्रकृति का नियम न्यायाधीश है।
- 50:19पुत्र सवाल बड़ा प्यारा हो जाए अब यहाँ तुम्हारी डिसीजन की क्षमता
- 50:32काम करेगा। तुम किस स्थल पर जाकर डिसीजन लेते
- 50:37हो? व्हेदर यू एक्सेप्ट कि ठीक है,
- 50:41होने दो। इसे ही समर्पण कहते हैं।
- 50:52यह तुम कहोगे नहीं, तीसरी लड़की होगी।
- 50:59मुझे पता है। तो तुम रुक जाओगे फिर क्या होगा?
- 51:07फिर उसे जीवने जिसने आके तुम्हे सुख देना था या दुख देना था और
- 51:11तुम्हे प्रकृति देगी, क्योंकि दंड या पुरस्कार व्यक्ति नहीं देता।
- 51:19प्रतिकृति देती है किसी व्यक्ति के द्वारा आज इस सिद्धांत को मैं
- 51:27काट रहा हूँ एव्री रिएक्शन देर इस इन कुल एंड अपोज़िट रिएक्शन,
- 51:33लेकिन कर्म प्रतिक्रम के रूप में वापस नहीं आता।
- 51:44कर्म प्रतिफलन के रूप में वापस आता है?
- 51:48अब यहाँ समझना गहरी बात है, कर्म प्रति कर्म के रूप में वापस नहीं
- 51:55आता, जैसे गेंद वापस आ गयी, अपने द्वार को मारा।
- 52:03कर्म प्रतिफलन के रूप में वापस आता है, फल मिलता है आपको उस कर्म
- 52:10करने में तुमने उसकी सृष्टि को कितना दुखी किया या कितना सुखी
- 52:21किया ये काउंट करेगा। यही विधान है।
- 52:36प्रतिफलन आप किसी को मार देते हो? उसको मार दिया उसको जितना दर्द
- 52:47हुआ, दुख हुआ उसका परिवार बाद में जैसे ही झेलेगा।
- 52:52जो जो लोग प्रभावित हुए जो मित्र, मित्र, परिवार के सदस्यगण, जो जो
- 53:01जैसे प्रभावित हुए उनकी दुआएं बददुआएं सब निकलेंगी परमात्मा
- 53:08बड़ा महीन। सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर उसके भीतर
- 53:13हो जाएंगे, वह देगा फल और फल कैसा देगा?
- 53:25आपको पता है, करंसी के हिसाब से उसके पास दो ही करंसी है या सुख
- 53:31या दुख? ये मैं कर्मों की बात कर रहा हूँ।
- 53:37तीसरी बात अलग है कर्मों से पार हो जाना उसका फल सुख और दुख में
- 53:43नहीं आता, उसका फल आता है आनंद में इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ
- 53:49सुख और आनंद में बड़ा फर्क है, तुम समझते नहीं?
- 53:57किसी भी कर्म से सुख नहीं मिलता और किसी भी कर्म से क्षमा करना
- 54:03किसी भी कर्म से आनंद नहीं मिलता। आनंद मिलता है, कर्म से पार जा के
- 54:15बहुत तीसरा डाइमेंशन है, उसको छोड़ दो।
- 54:18इस वक्त उसका जरूरत नहीं है। तुमने जो पूछा उसको मैं संक्षिप्त
- 54:28रूप से फिर कहता हूँ, ये ऐसी सिचुएशन है।
- 54:32यह तुम्हारा डिसीजन काम करेगा। डिसीजन तो पहले दफा भी तुम्हारा
- 54:37ही करता हूँ, तुम कह देते ठीक कोई बात नहीं, मुझे उससे प्रेम है,
- 54:43उसको मेरे से प्रेम है, बस हम प्रेमी के रूप में रहते हैं।
- 54:53किसी और के साथ शादी कर लेता हूँ, तुम्हारी चॉइस पर निर्भर करता था।
- 55:00उस वक्त भी आज भी तुम्हारी चॉइस पर निर्भर करता है।
- 55:05हर वक्त तुम्हारी चॉइस पर निर्भर करता है।
- 55:09बशर्ते का वो तुम्हारे प्रारब्ध के कर्मना बन गए हैं।
- 55:14जब कोई चीज़ प्रारब्ध की तरह प्रतिफलन में आती है तो फिर तुम
- 55:22उसे नहीं रोक सकते कोई पूजा? कोई प्रतिष्ठा, कोई दान, कुछ भी
- 55:35नहीं रोक पाएगा। वो हो क्या?
- 55:43अगर कोई प्रारब्ध फलीभूत हो गया? कोई बीज फलीत हो गया, वृक्ष बन
- 55:48गया। फल लग गए अब तो फल लग गए भाई फल
- 55:52गिरेंगे तो तुम क्या कर सकते थे? तुम बीज बोने से रुक सकते थे, ये
- 56:01तुम्हारे हाथ में था वहाँ तक तुम्हारे हाथ में था।
- 56:07लेकिन उसके बाद एक ऐसा मुकाम आया कि तुम्हारे हाथ में वो न रहा तो
- 56:13पहले दिन मैंने तुम्हें कहा कि जोड़ी तो अच्छी रहेंगी लेकिन अगर
- 56:20संतान पैदा करोगे तो तीन बेटियां हैं।
- 56:23तुम चाहते हो पहले भी न पैदा करते।
- 56:29फिर यह मसला तुम्हारा और प्रकृति का था, प्रकृति ने जो तुम्हें दुख
- 56:35और सुख देना था, तीन बेटियों के द्वारा वो किसी अन्य ढंग से देती
- 56:41थी, उसके पास लाख हो पाए हैं उसकी।
- 56:44संग रचना बड़ी विराट है। तुम सिर्फ प्रेमिका के साथ रह
- 56:56सकते थे, लिव इन में बच्चा ना पहले कोई नहीं रोकता था।
- 57:06देखिए। हर जगह तुम स्वतंत्र हो मुझसे लोग
- 57:10पूछ लेते हैं क्या हम पराधीन हैं? फिर जीने का मतलब क्या है?
- 57:17नहीं नहीं, तुम कभी पराधीन नहीं हो, तुम सदा स्वाधीन हो, भुगतने
- 57:21के लिए भी करने के लिए भी है मेरी दृष्टि से।
- 57:26तुम्हें तुम्हारे प्रश्न का जवाब मिल का हो गया मैंने मैं तुम्हें
- 57:30अलग से भी समझा सकता था। निर्मल वृहदवाद थी इसलिए मैंने
- 57:42सामूहिक रूप से बताना ठीक समझा। एक एक व्यक्ति को कहाँ कहाँ
- 57:46बताऊँगा और फिर रिकॉर्ड नहीं हो पाएगा।
- 57:51और फिर मैं आने वाली जनरेशन्स के लिए यह कैन्टेंट बचा के रखना
- 57:57चाहता हूँ। फिर अगर तुम्हें बता दिया सिर्फ
- 58:02तो कैन्टेंट बचेगा नहीं नेक्स्ट वीडियो के लिए तो ये बेटर वे है।
- 58:08कि मैं तुम्हें भी बता दूँ, औरों को भी बता दूँ।
- 58:10बहुतों का प्रश्न होगा। ये बहुतों का हल मिल जाएगा और ये
- 58:19सेफ भी हो जाएगा आने वाले पीढ़ियों के लिए।
- 58:28सुनिए वहाँ से जो वो कम आता है वो इस तरह आता है कि जोड़ी अच्छी
- 58:36रहेंगी, तीन बेटियां होंगी। अगर तुम पैदा करोगे तो अगर नहीं
- 58:44पैदा करोगे। फिर कहाँ से होंगे?
- 58:47लेकिन उन बेटियों ने तुम्हारे पास आके जो सुख और दुख तुम्हें देना
- 58:52है, वह तुम्हें प्रकृति दे देगी अपने से उसको तुम नहीं डाल सकते
- 59:03इसलिए। करमन की कति नारि रसाध इसको समझ
- 59:12नहीं सकता, तुम समझने की चेष्टा करते हो, लेकिन करीब करीब समझ में
- 59:18आती भी है। बात इतना तो समझ में आता है।
- 59:24कि गाड़ी के आते हुए मैं रेलवे लाइन क्रॉस ना करूँ स्कूल चीजें
- 59:29तुम्हारी समझ में आ जाती है। पुत्र तुमने पूछ लिया निर्णय सदा
- 59:40ही तुम सदा ही स्वतंत्र हो, कौन तुम्हें कहता है पराधीन हो?
- 59:45मुझसे लोग कह देते हैं बाबा मुक्त होना है, मैंने कहा बंधे कहाँ हो?
- 59:50बताओ मुझे वो बंधन दिखाओ, वो जंजीरें दिखाओ, प्रसिद्ध दिखाओ
- 59:59जिससे तुम बंधे हुए हो। किसने बांधा है तुमको?
- 1:00:04नहीं दिखा पाते। मुझे होता है तो आज के प्रश्न का
- 1:00:12सार तुम कभी भी परतंत्र नहीं हो। परमात्मा की सृष्टि में तुम सदा
- 1:00:20स्वतंत्र हो, जो चाहे कर सकते हो। और उसका परिणाम जब आए तो जीस ढंग
- 1:00:32से आए। वो तुम चाहो तो बिल्कुल वैसे ढंग
- 1:00:38से न भुगतो। कोई जरूरी नहीं है क्योंकि
- 1:00:42परमात्मा ने जीस तरह से आपको दंड देना या पारितोषिक का अनाम देना
- 1:00:49उसकी करेन्सी अलग है। वो सुख और दुख है नहीं, शादी
- 1:00:54कराओगे, वो डांगड़ी तोड़ देगा, दुख देना है, कैंसर आई टेस्ट कर
- 1:01:03देगा। हाय हाय करोगे पड़े पड़े खाचड़ी
- 1:01:06के वो भी तुम्हारे हाथ में आएगा इतना सा समझलो मैं ये समझता हूँ
- 1:01:22कि इससे आगे। बताने को बहुत कुछ है क्योंकि
- 1:01:27आपने वो रग छू दी। अब इसको मैं सम्पूर्ण करके ही
- 1:01:36हटूंगा। ऐसा ही एक प्रश्न मेरे पास।
- 1:01:43समस्या के रूप में बहुत साल पहले आया था वक्त ज्यादा हो गया है,
- 1:01:52मैं इस वीडियो को दो भागों में कर देता हूँ क्योंकि एक घंटा हो गया
- 1:02:00और इससे ज्यादा मैं समझता हूँ कि तुम सुन नहीं पाते।
- 1:02:05कितना ही तुम कहो अगर 10,000 लोगों में से कोई 2000 व्यक्ति
- 1:02:15सुनता है तो फिर 8000 लोगों के पास पूरी बात जाती है।
- 1:02:24किसी भी कारण से किसी के पास वक्त नहीं है।
- 1:02:29किसी के पास शक्ति नहीं होती, इसलिए मैं समझता हूँ कि इतनी
- 1:02:34वीडियो काफी है। लोग तो आठ 8 मिनट की वीडियो अपना
- 1:02:38देते हैं लेकिन उनका। निहित कारण कुछ और होता है।
- 1:02:44मेरा वो कारण नहीं है, मैं तुम्हें सत्य बतलाना चाहता हूँ और
- 1:02:52बिना कीमत के बताना चाहता हूँ मैं तुम्हें सुखी करना चाहता हूँ, मैं
- 1:02:57चाहता हूँ। एम् ईश सब सूखी हूँ और मैं अपनी
- 1:03:06तरफ से प्रयास करूँगा कर रहा हूँ दूसरी बात मैं अगली वीडियो में
- 1:03:17बोलेंगे बड़ी प्यारी है वो भी बात है, बिल्कुल इससे मिलती जुलती है
- 1:03:23तो यह तो तुम्हें समझा गया। तुम नवी करोगे तो प्रकृति तुम्हें
- 1:03:29सुख और दुख के रूप में किसी तरह दंड दे देगी।
- 1:03:32टांगड़ी तोड़ देगी तुम्हारी फिर क्या करोगे वो तो तुम्हारे बस में
- 1:03:37है मेरा चुकना टूट गया। बाबा पहले बता गए थे।
- 1:03:42की देखो विपत्ति काल आने जा रहा है और वर्ष बरसे आज भी मुझे दर्द
- 1:03:48होता है, चुकना टूटा है कोई ऑपरेशन बिना ऑपरेशन के ठीक हो
- 1:03:58गया। बाबा से पूछा कहते कोई जरूरत
- 1:04:00नहीं, डॉक्टर से पूछा कहते कोई जरूरत नहीं।
- 1:04:08तुम स्वतंत्र हो, कभी भी मत सोचना कि हम परतंत्र हैं या स्वतंत्र
- 1:04:14नहीं, तुम स्वतंत्र हो। पहली तो बात निजोड़ के रूप में ये
- 1:04:18समझ लेना। कर्म करने में तुम स्वतंत्र हो और
- 1:04:26जो भी तुमने वो दिया और उसके फल लग गए, पेड़ हो गया, फल लग गए और
- 1:04:31फल पक गए गहरने को फिर तुम कुछ नहीं कर सकते उनको हम प्रारम्भ
- 1:04:39कहते हैं, अब यहाँ तक तुम समझ गए हो।
- 1:04:43और आगे को भी तुम कर्म करने को स्वतंत्र हो और ध्यान रखना तुम
- 1:04:50भोगने को भी स्वतंत्र हो। ये नई बात मिलेंगे आपको अब इस
- 1:04:55पॉइंट पे आकर जो फ्लसिफिकल लोग है चौंक जाती है बाबा।
- 1:05:03फल भुगतने को हम कैसे स्वतंत्र हैं?
- 1:05:05बिल्कुल स्वतंत्र क्योंकि फल वो देता है करंसी के रूप में सुख और
- 1:05:13सुख सुख तुमने या दुख तुमने बेटियां पैदा करके लेना है।
- 1:05:22या फिर उससे कह दो अपने अपने ढंग से जो भी है सुख दुख देते, वह
- 1:05:30आपको सुख दुख देता? फिर वो इस तरह नहीं भुगत आएगा।
- 1:05:34उसके 1000 हाथ हैं, उसके 1000 रंग हैं।
- 1:05:39वह किसी और दिशा से तुम्हें दुख दे देगा।
- 1:05:42अगर लड़कियों ने तुम्हें दुख देना है, वह किसी और दृष्टि से तुम्हें
- 1:05:46किसी और ढंग से वह सीमित नहीं है। वह असीम है, उसके ढंग भी असीम है,
- 1:05:53उसके पास समग्री भी असीम है। उसके पास रास्ते और डाइमेंशन भी
- 1:05:58असीम है। वो किसी भी ढंग से तुम्हें दुखी
- 1:06:01कर देगा। तुम बच नहीं सकोगे।
- 1:06:07दूसरी बात इसको ले लेना। यहाँ कर्म का फल प्रति कर्म के
- 1:06:17रूप में नहीं मिलता। किसी ने तुम्हें मार दिया और तुम
- 1:06:20उसको मारो फिर तो तुम वो तुम्हें मार भी गया और तुम बने भी गए
- 1:06:24मुक्त नहीं हो सकता क्या ऐसा नहीं है?
- 1:06:29बस उसको मिलेगा सिर्फ दंडा और वो देगा न्यायाधीश न्यायाधीश कौन?
- 1:06:38परमात्मा ने जो न्याय व्यवस्था बनाई, अब यह संविधान बनाया।
- 1:06:42यह आदमी ने बनाया, परमात्मा ने अपने लिए नहीं बनाया, परमात्मा ने
- 1:06:51प्रकृति के लिए बनाया, खुद तो नियमों से पार है, वह बाद की बात
- 1:06:57है। किसी और वीडियो में बोला भी हूँ
- 1:06:59और कभी बहुत भी दूंगा क्योंकि आप भूल जाते हो तो सुख और दुख के
- 1:07:10हिसाब से वो आपको फल दे देगा। जरूरी नहीं कि उस अक्शॅन का
- 1:07:16बिल्कुल स्वाभाविक उसी प्रतिरूप में रिएक्शन हो।
- 1:07:22प्रकृति आपको दंड देती है या पारितोषिक इनाम देती है?
- 1:07:28वह सुख और दुख के रूप में देती है।
- 1:07:30तीसरा कोई ढांग नहीं। इस अव्यवस्था को समझ लेना एव
- 1:07:40रिएक्शन देर इज़ एन इक्वल एंड अपोज़िट रिएक्शन, लेकिन रिएक्शन
- 1:07:44के रूप में नहीं सोख और दुख के रूप में आपको रिएक्शन का प्रतिफलन
- 1:07:49मिलता है? बहुत गहरी बात है, समझ में आ जाए
- 1:07:53तो जिंदगी सुधर जाएगी। अब तुम फैसला लेने को स्वतंत्र
- 1:07:58हो। उस दिन भी तुम फैसला लेने को
- 1:08:01स्वतंत्र थे, न लेते न लेते, लेकिन ये बात नहीं, तुम समझ सकते
- 1:08:09ये थोड़ी सी गहरी बात है अगर तुम सिर्फ शादी करवा लेते।
- 1:08:17कोई बच्चा ना पैदा करता है तो परमात्मा का एक हाथ तो है नहीं,
- 1:08:24वो ही के किसी ने किसी को मार दिया फिर वो उसको गोली मारे।
- 1:08:30उसके पास एक ही है फल देने को क्या करण से?
- 1:08:36आपने दुख दिया दुख मिलेगा आपने सुख दिया, सुख मिलेगा बस इस बात
- 1:08:43को नोट कर लेना। चार वेद आखिरी शब्द बोल रहा हूँ।
- 1:08:49चार वेद छेत्र शस्त्र में। बात मिला तो है दोहे कौन कौन से
- 1:09:01सुख दीने सुख होता है दुख दीने दुख हो गया है बस ये उसकी करेन्सी
- 1:09:09है इसको प्रतिक्रम कह लो रिएक्शन कह लो।
- 1:09:13प्रतिफलन कहते तुम सही शब्द प्रतिफलन है?
- 1:09:22चारों वेदों को पढ़ लो, शेष शास्त्र को पढ़ लो अब तो सात में
- 1:09:29शास्त्र की आँखें। बाबा का सशस्त्र
- 1:09:44ब्रह्म सत्यम जगत सत्यम ब्रह्म मिथ्या ये नया क्लेश बीज दिया अब
- 1:09:52ये आज नया क्लेश बीज चला। के कर्म का फल मिलता है, प्रति
- 1:10:00कर्म के रूप में नहीं। प्रतिफलन के रूप में राधे राधे
- 1:10:12श्याम, मिलाधे राधे, राधे श्याम, मिला दे गोविंदा, गोपाल हर राधे
- 1:10:30राधे। शाम मिला दे गोबिंदा गोपाल हर
- 1:10:42मेरी नैया पार लगा दे। मेरी नैय्या पार लगा दे गोविंदा
- 1:10:56गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा।
- 1:11:11गोपाल हर हे राधे राधे धन्यवाद।