Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Apr 25 - बाबा, क्या आप प्रवचन देते समय किसी AI का उपयोग करते हैं?
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- 0:05बाबा जी प्राण अनुभव। क्या आपके पास कोई आर्टिफीसियल
- 0:20इंटेलिजेंस फीड है? जो आप ऐसे ऐसे शब्दों का प्रयोग
- 0:32करते हैं और मैटर्स को सुलझा देते हैं, ऐसा क्या है आपके पास?
- 0:47जबकि आपने कोई बहुत ज्यादा? किताबें और शास्त्र नहीं पढ़े
- 0:58मेरे पास कोई आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस जैसी कोई यंत्र नहीं
- 1:04है। मेरे पास इंटेलिजेंस है
- 1:14आर्टिफीसियल। इंटेलिजेंस नहीं और वह सब के पास
- 1:22है, लेकिन अफ़सोस कि आप अंत तक उसे जान नहीं पाते।
- 1:40सभी के भीतर होती है इंटेलिजेंस जिसे सहभम कहते हैं स्वयं के
- 1:47प्रकाश से प्रकाशित। अगर सही से व्याख्या करूँ, तो
- 2:01जर्रे जर्रे में वह इंटेलिजेंस है स्वयंभू जो खुद से प्रकाशित है।
- 2:18मैं किसी शास्त्र का सहारा नहीं लेता, कोई किताबों का, किसी
- 2:25धार्मिक ग्रंथों का, किसी विशेष रचनाकार का।
- 2:33बस मेरे पास एक ही ढंग है और वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं,
- 2:42इंटेलिजेंस वो इंटेलिजेंस। जीसको तुम परमात्मा कहते हो जिसके
- 2:56नाम पे लड़ते हो, युद्ध करते हो, खून की नदियां बहाते हो और उस
- 3:09इन्टेलिजेन्स को मैंने देखा है। देखा है स्वयं अपनी आँखों से देखा
- 3:20है, लेकिन तुम्हें नहीं कहता कि तुम उसे मानो इतना जरूर चाहता हूँ
- 3:32कि जो भी कोई उसे मान लेता है। उसकी जिंदगी संभर जाती है कोई
- 3:43मानी ना पानी उसकी स्वतंत्रता है बहुत दूर तलक बैठे हुए लोग मुझे
- 3:52सुनते हैं। गणित में कम हो गया है, लेकिन दो
- 4:05तरफ बैठे हैं। ना कोई मेरे पास पैमाना है ना
- 4:16मेरे पास किसी तरह की कोई अन्य व्यवस्था है।
- 4:20मेरे पास सिर्फ एक इंटेलिजेंस है। और जिसके पास वो इंटेलिजेंस होती
- 4:28है, बस मिल गया सब कुछ जो उसे चाहिए था।
- 4:43फिर वो कतार से उठ जाता है। मैराथन के दौड़ से अलग हो के अलग
- 4:49बैठ जाता है, कोने में अपने होने का रस पीता है, दूसरों का लहू
- 5:03नहीं पीता। अपने होने का रस पीना ही से ही
- 5:10पीना है और अगर कोई अपने होने के रस से चूका तो फिर वह जो कुछ
- 5:23पिएगा। वह विजातीय द्रव्य होगा।
- 5:29फॉरेन मैटेरियल्स जीस दिन तुमने अपने होने का आनंद पीना शुरू कर
- 5:42दिया उस दिन तुम तरफ जाओगे। उससे पहले कंगाल तो सारी सृष्टि
- 5:54को ये सृष्टि बहुत विशाल है, कंगाली भी नहीं जाएगी।
- 6:02इतनी विराट और विशाल बनाई और इतनी सटीकता प्रदान की परमात्मा ने।
- 6:10जीसको मैं इंटेलिजेंस कहता हूँ, मनुष्य ने हर चीज़ का कॉपी कर
- 6:19लिया है, तुमने परमात्मा की इंटेलिजेंस की कॉपी भी कर ली है।
- 6:26आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। लेकिन बेकार है मनुष्य की वासनाएँ
- 6:36कभी पूरी नहीं होती और कभी पूरी नहीं होंगी प्रयोग।
- 6:45वो नए नए करता है। कभी चाँद पे निकल जाता, कभी मंगल
- 6:53पे निकल जाता बाहर की दुनिया खंगाल रहा है अपना अंतः से नहीं
- 7:04खंगाल रहा है। दुनिया कैसे धड़कती इसका पता करने
- 7:11चला। स्वयं का हृदय कैसे धड़कता इसका
- 7:17पता नहीं। इसलिए दादू कहते हैं दुनिया बाबरी
- 7:29है दादू दुनिया बाबरी कहे, चाम को राम पूछ मरोड़ी बैल की और काटे
- 7:44अपनों को? ध्यान से समझ लेना तुम जो अपने
- 7:57काम निकालते फिरते हो अंत में तुम पाओगे।
- 8:04उनका कोई प्रयोजन नहीं हुआ। लाखों धांधलियां की झूठ बोले।
- 8:15कफर तोले परेशान हुए लोगों को परेशान किया।
- 8:24खुद के शौक के लिए लोगों को भूख से मार दिया तुम्हें रस आता है,
- 8:34दूसरों का लहू पीने में खुद का रस पीना।
- 8:42जीस दिन तुम्हें आ गया जीस दिन तुमने सीख लिया तब तक तुम दूसरे
- 8:48का लहू ही पीते रहो और तब तक तुम भटकते रहोगे क्योंकि दूसरे का लहू
- 8:59तुम्हारे लहू से मिलता है। मनुष्य सारी उम्र यही काम करता
- 9:08है, सारी उम्र यही प्रयास करता है।
- 9:15कैसे दूसरों को प्रभावित कर लूँ? किसी की तमन्ना पूरी भी हो जाती
- 9:24है, किसी की अधूरी भी रह जाती है, जिसकी पूरी हो जाती है।
- 9:32उससे पूछना है क्या पूरी हुई? ईमानदारी से बताना वो कहेगा नहीं
- 9:42पूरी हुए नहीं मिला जिसकी तलाश थी क्योंकि पता ही नहीं चला कि किसकी
- 9:52तलाश है। संत कहता है मैंने देखा है और तुम
- 10:15तरह तरह के तर्क चढ़ाते हो। संत तुम्हारी भाषा में तुमसे
- 10:23कॉन्टेक्ट करने की चेष्टा करता है।
- 10:27और तुम्हारी भाषा अधूरी है। संत कहता, मैंने उसे देखा, जो इस
- 10:37सृजना का मालिक है, तुम कहते के वह तो।
- 10:44देखा ही नहीं जा सकता। फिर तुमने कैसे बस तुम बात को आई
- 10:50गई कर देते हो तुम्हें किसी भी चीज़ का तर्क चाहिए काटने के लिए।
- 11:02तुम सुई धागे का इस्तेमाल कभी नहीं करते, टूटी हुई चीजों को
- 11:05जोड़ने के लिए तुम तलवारों। का चाकुओं का।
- 11:10इस्तेमाल करते हो चीजों को तोड़ने के लिए और तुम्हारी बुद्धि यही
- 11:15काम करती है सारा दिन। आज तक तुमने कुछ नहीं जोड़ा सब
- 11:24तोड़ा ही तोड़ा यहाँ तक के परमाणु को भी तोड़ दिया, लेकिन एक बात
- 11:33ध्यान में रखना तोड़ने से विनाश हुआ करता है जोड़ने से समृद्धि
- 11:43होती है तोड़ने से विनाश होता है। सारी दुनिया एक ही तत्व की खोज
- 11:59में लगी है और वो तत्व है प्रेम आनंद रस।
- 12:14सुख नाम तो उसे कोई भी दे दो लेकिन तलाश तुम्हारे सबकी है, उसे
- 12:24ढूंढ नहीं पाती और संत कहते मैंने उसे देखा।
- 12:32मैंने उसे पिया और उसको पीना ही जीना है अन्यथा तो हमारा जीवन
- 12:42बेकार गया। तुमने सारी दुनिया के द्रव्य बोल
- 12:48दिए। जो खाना था, खा लिया जो भोगना था
- 12:53भोग लिया जहाँ जाना था वहाँ जा लिए घूम फिर लिया, लेकिन वो ही
- 13:02सूखे के सूखे रह गया। नी रस, रस ना पूजा।
- 13:11और बात तो रस की है, अगर रस न बुझा तो फिर ज़िन्दगी बेकार गयी।
- 13:32मनुष्य की एक आदत है। वह जो होता है उसके लिए धन्यवाद
- 13:43नहीं देता। जो नहीं होता उसके लिए शिकायत
- 13:50करता है। जिसके एक हाथ है, वह शिकायत करता
- 14:05है परमात्मा तुने इसे दो हाथ क्यों दे दिए?
- 14:07मुझे एक क्यों दिया? जिसके पास जो नहीं होता उसकी
- 14:18शिकायत करता है। और सारी दुनिया के सभी लोग यही कर
- 14:24रहे हैं। निगाहें देखती हैं, दूसरे को खुद
- 14:34को नहीं देखते। अगर तुम खुद को देखना शुरू करदो
- 14:44फिर तो अगर दोनों हाथ में भी हो तो मैंने देखे हैं ऐसे आदमी इनके
- 14:52दोनों हाथ नहीं होते, वो भी गुजर बसर करते हैं।
- 14:58दोनों पांव से हाथों का काम करते हैं।
- 15:07तुम प्रश्नों के हल में जुटे रहते हो सारे दिन और प्रश्न ऐसे कि
- 15:16प्रश्नों का जो जवाब नहीं मिलता हल नहीं होता।
- 15:24तो संत तुम्हे कहते हैं के वहाँ चले जाओ जहाँ प्रश्नों का जवाब
- 15:30मिल जाता है, प्रश्नों का हल हो जाता है सारी गुत्थियाँ खुल जाती
- 15:38हैं। मनुष्य सिर्फ सोचता है आगे क्या
- 15:46होगा, उसे कुछ पता नहीं। मेरे शहर में एक केमिस्ट एंड
- 16:00ड्रगिस्ट की दुकान थी। उसके ऊपर एक जवान सा लड़का बैठा
- 16:11करता था। बहुत साल की बात है जब मैं बाजार
- 16:20में आया जाया करता था। ध्यान से सुनना बड़ी प्यारी कहानी
- 16:28है, शायद तुम्हारे अंतर के पट खुल जाएं।
- 16:38मैं अक्सर उससे दवाई लेने जाता, उसके बोलने का सिलिका अच्छा था।
- 16:48कभी वीसा नहीं होता तो वो उधारी भी कर लेता है।
- 17:001 दिन मैंने उससे कोई दवा मांगे, वह उठा और दवा ले के आया।
- 17:14और उसने मुझे दबा दी, येलो जब वो पत्ता मैंने लेने लगा तो मैंने
- 17:27उसका हाथ। देखा।
- 17:30जैसे ही मैंने उससे कहा तू बहुत थोड़ी देर जिएगा, तू ज़्यादा नहीं
- 17:47जिएगा देखने में सुंदर बलवान ऋष पुष्ट सवस्थ कोई रोग नहीं, कोई
- 17:57बिमारी। और उस दिन पहले उसने मुझसे बहुत
- 18:03बातें की। मैं जापान जा के आया।
- 18:07जापान के लोग 100 वर्ष जीते हैं। उसका कारण है ये।
- 18:21सवस्थ खाना अच्छा खाना उनकी खूबियाँ गिना रहा था।
- 18:27वह बसें चलती हैं, ड्राइवर लैस बसें और मैं उनमें बैठा बड़ा
- 18:34हैरान था। अभी किसी कंपनी के खर्चे पे जापान
- 18:41जाके आया था। जब वो दवाई मुझे देने लगा तो मेरी
- 18:52नजर उसके हाथ में पड़ गई, मैंने उसी का।
- 19:00मित्रा, तू ज्यादा देर जिंदा नहीं रहेगा और तेरे संभलने से भी कुछ
- 19:08नहीं होगा। यह भी बता दो, क्योंकि अक्सर हम
- 19:14बताने लग जाते हैं। तो उसके पीछे लोग होते है ये जोशी
- 19:21लोग बताते है हमारे यहाँ के पंडित जी होते है वो रजाई में बैठे रहते
- 19:28बाहर उनके पास भगत आते की जंति होती कहते पंडित जी बधाई हो आपको।
- 19:41ये लो पहले तो मिठाई मुँह मीठा करो और पोता हुआ है ये बताओ इसके
- 19:50ग्रह नक्षत्र कैसे हैं? तो पूछता की समय क्या है?
- 20:02कितने बजकर कितने मिनट पर? जन्मा का भी जन्मा सब पूछ लेता
- 20:07हूँ, जन्त्री को देखता जो उसे देखनी आती नहीं थी कोई नहीं
- 20:19जानता, लेकिन मैं जानता हूँ इस बात को तो वो जन्त्री को देखता,
- 20:28अच्छी तरह से काफी देर लगा देता। जो व्यक्ति उसके पास आया होता वो
- 20:40कहता बड़ी गहराई से देख रहा है क्योंकि देर लगाएंगे तो इसका मतलब
- 20:48डीपली इस वाचिंग। कन्सिडरिंग कैलकुलेटिंग और उसके
- 21:00बाद करीब आध घंटा हो जाता है। व्यक्ति बैठा रहता है, उसकी तरफ
- 21:05देखता रहता है। और फिर अचानक से आँखें उठता और
- 21:16उसे कहता उसका नाम लेकर अरे भाई, यह बच्चा तो जीवंत नहीं रहेगा?
- 21:32ऐसा लगता है जैसे उसके ऊपर किसी ने पहाड़ गिरा दिया हो।
- 21:36हिमालय, पहाड़, सुमेरु, पहाड़ क्या क्या सपने नहीं संजोए?
- 21:43उसने जब घर से चला था पंडित जी से पूछ के आऊंगा?
- 21:48गणमूल नक्षत्र में तो नहीं जन्मा है?
- 21:55कुछ ऐसा वैसा तो नहीं है। पत्रिका ठीक कहती है, पर वह सब तो
- 22:03सारा घात कर देता। ऐसा घण मारता सब टूट जाता, बिखर
- 22:12जाता खंडहर हो जाता क्या हुआ पंडित जी अरे क्या बताऊँ बलबीर
- 22:25सिंह नाम काल्पना के लिए। यह तो जियेगा नहीं पंडित जी
- 22:36जियेगा नहीं वह मुश्किल मैंने तय करके मन्नतिंग करके परमात्मा के
- 22:44ये बच्चा हमें मिला। तुम कह के जियेगा नहीं नहीं बलबीर
- 22:53सिंह ये जियेगा नहीं क्या बस थोड़ी सी उम्र है उसकी वह व्यक्ति
- 23:05उसके पान पकड़ लेता पंडित जी कुछ भी करो।
- 23:08उसके लिए तो भगवान है, श्रद्धा है तो आया है कुछ अन्यथा कोई क्यों
- 23:13जाएगा? ज्योत सिंह के पास ये ज्योत सिंह
- 23:18भटकाते जाते हैं, सीधा रास्ता दिखाते कम है।
- 23:30सच में पूछो जो सीधा रास्ता दिखाता है उसी से नहीं लेता।
- 23:37मैंने बहुत बार कहा आपसे जो जानते हैं परमात्मा क्या है?
- 23:42वो शिवर नहीं लगाते, उससे बड़े शिवर वाले मेरे से नाराज हो जाते
- 23:48हैं। बाबा आपको किसने रोका?
- 23:52आप भी लगा लिया करो, मैंने कहा मेरे दिमाग में फर्क है।
- 23:59अरे वो रखे जो सेब है उसको सेब होने के लिए तरकीब बताऊँ।
- 24:07ए बेवकूफ़ी ना होगे, तुम आनंद स्वरूप हो।
- 24:16शारिक शास्त्र कहते हैं सत्यजीत, आनंद, सच्चितानंद और तुम दुखी हो।
- 24:30और तुम्हें शिवर लगाने वाले कहते हैं विपक्ष न करो, आते जाते सांस
- 24:36को देखो वह व्यक्ति पांव पकड़ लेता है वह सोचता वक्त लगा देता
- 24:49हाँ, उपाय करेंगे, हवन करेंगे। क्या चालीसा करेंगे, मंत्र जाप
- 24:58करेंगे, हवन करेंगे लेकिन थोड़ा खर्चा होगा, पंडित जी खर्चा कितना
- 25:04होगा बताओ बच्चे से ज्यादा थोड़ी प्यारा है।
- 25:12खर्चा बना देता ऐसे उसने ठगा अपनी ज़िन्दगी में लोगों को तो मैंने
- 25:30उससे कहा। मैंने कहा मित्र मैं तुम्हे ठग
- 25:34नहीं रहा हूँ, न कोई इंतजाम है इसका बस मैं तो जानता हूँ कि तुम
- 25:41ज़्यादा नहीं जी पाओगे, बस यही 35 के आस पास कोई बहुत ज़्यादा
- 25:51तुम्हारी उम्र नहीं है। कुछ नास्तिक मजाज़ भी था।
- 26:04परमात्मा व्रमात्मा को मानता न था उस अज्ञात शक्ति पर भरोसा न करता
- 26:10था। बात आई गई हो के मैं अपने कमरे
- 26:17में बैठ गया तो 1 दिन मुझसे। समाचार मिला कि उसकी मृत्यु हो
- 26:26गई। पता नहीं उस काल में उस वेला में
- 26:33उसे मैं याद आया कि नहीं आया? लेकिन मुझे वो बहुत याद आया।
- 26:44उसने बहुत कहा, मुझे तुम ऐसे तो नहीं बोलते कोई तरीका है?
- 26:52मैंने कहा कोई तरीका नहीं उसके आगे ज़ोर किसका है?
- 26:57यद्यपि हम सदा अपना ज़ोर चलाते है और ये अचार्य लोग हमें जो मूर्ख
- 27:06कहते हैं, पागल कहते हैं अगर हम ये ना कहेंगे करके दिखाएंगे तो
- 27:19हमारे पीछे कौन रखेगा? नहीं, कुछ नहीं कर सकता।
- 27:29मैं जब बोलने लगा, गहरी बातें बोलने लगा, मेरे पास कुछ लोगों के
- 27:34फ़ोन आ गए। बाबा इतनी गहरी बातें ऐसे मत
- 27:39बताया करो सार्वजनिक कुछ। मैंने कहा क्या हुआ बाबा इसकी फीस
- 27:48रख दो, ये लोग तुम्हें गालियाँ मुफ्त में निकाल जाते हैं?
- 28:00तुम इसकी भीस रख दो। मैंने कहा गाली खाने के भीस रख दो
- 28:09बाबा जैसे ही शिविर वाले लेते हैं, कोई गिनती चुनती के लोग रख
- 28:16रहे हो। सुनने वाले मैंने कहा फिर?
- 28:23उनसे फीस ले लिया करो। मैंने कहा फिर फिर क्या होगा फिर
- 28:31तुम जनाध्य हो जाओगे फिर क्या होगा?
- 28:36फिर बढ़िया सा तो महल डाल देना फिर क्या होगा फिर?
- 28:41फिर सभी सुविधाएं जुटा रही। ना फिर क्या हुआ?
- 28:47फिर बड़ा आनंद आएगा। मैंने कहा वह तो मैं पहले से ही
- 28:51हूँ जो मैं पहले से ही हूँ फिर फिर से पंगा शुरू करूँ।
- 29:09फीस लेना शुरू करूँ, सब्सक्राइबर बनाना शुरू करूँ।
- 29:13लोगों से लोगों का खून चूसूँ अगर मैंने कुछ पा दिया।
- 29:26यजुर्वेद का एक शब्द है शत हस्त। समाहर सहस्त्र हस्त शंकरा सो
- 29:35हाथों से इकट्ठा कर 1000 हाथों से बांट दे।
- 29:47और ध्यान रखें जो मेरी इस बात को मानेगा उसकी तलाश 1 दिन पूरी हो
- 30:00जाएगी। शत हस्त समाहरा सौहासों से इकट्ठा
- 30:05कर 1000 हस्त शक्कर है। 1000 आदतों से बांटते है, जो फीस
- 30:15लेते है उनके पास कमरे तो भर जाएंगे, ट्रक तो भर जाएंगे बैंक
- 30:23बैलेंस तो बहुत होंगे, जमीन अपने नाम पर रजिस्ट्रेशन करवा देंगे,
- 30:28लेकिन ध्यान रखना। ज़रा एक नहीं जाएगा तुम्हारे श्रम
- 30:32का वो वेला नहीं टलते, लेकिन वो वेला याद नहीं आती क्या करें?
- 30:52जर सिकंदर का। यहाँ ही।
- 30:58रह गया जर सिकंदर का यहाँ ही रह गया।
- 31:15मरते दम लुक मान भी ये कह गया। ये घड़ी ये।
- 31:28घड़ी खरगिज न टाली। जाएगी जब।
- 31:41तेरी डोली निकाली जाएगी। बे मोहूरत के।
- 31:51उठा ली जाएगी जब तेरी क्यों गुलों पे हो रही बुलबुल निसार?
- 32:19क्यों गुल्लों पे हो रही बुलबुल निसार?
- 32:29हे खड़ा। माली वो पीछे होशियार।
- 32:40मार कर गोली गिराली जाएगी। जब तेरी जीसको ये याद आ जाती है
- 32:57वेला। नहीं भाई सीवर नहीं लगाता, सीवर
- 33:04लगाता है तो दान नहीं लेता। इस लक्षण को याद रखें और जितना
- 33:24तुम शिविर लगा के नहीं बना सकते इकट्ठा अगर तुम बांटते हो तो काम
- 33:33उल्टा हो जाता है। अगर तुम 100 हाथो से इकट्ठा करते
- 33:39हो और 1000 हाथो से बाँट देते हो तो तुम पाओगे लाख हाथ तुम पर देने
- 33:47के लिए वर्ष पड़े बस इस अद्भुत रहस्य को तुम नहीं जान पाओगे।
- 33:59कहने वाले ऋषि बड़े समयदार थे, तुम आज जमा के देखना कब है?
- 34:08बहुत से लोगों ने मेरी ये बात मानी और वो क्या से क्या हो गया?
- 34:20शत हस्त शमन कर सहस्त्र हस्त संकर और फिर तुम पाओगे कि लाक हाथ तुम
- 34:29पर बरस पड़े लाक हाथ तुम्हें लुटाने आई।
- 34:34और वो अदृश्य हाथ थे। तुम्हें पता भी न चला, लेकिन तुम
- 34:41सिर्फ जो देखते हो उसको ही सत्य समझ लेते हो और यहीं त्रुटि हो
- 34:46जाती, यहीं तुम गलती कर जाता। तुम खुश हो क्या?
- 35:06मैंने बड़े बंगले बना लिए हैं, मैं चमचमाती कार ले आया हूँ रोज़
- 35:13रोज़ यार जो भी महंगी महंगी है वो ले आया।
- 35:19मैं उनके मार्के भी नहीं जानता। मस्क जानते होंगे जिन्होंने एआई
- 35:28का निर्माण किया, मैं नहीं जानता, लेकिन मैं तो इतना जानता हूँ।
- 35:45यह भी गुजर जाएगा क्या कहा मैंने यह भी गुजर जाएगा, मस्त भी गुजर
- 35:56जाएगा, सिकंदर भी गुजर गया बहुत ही ज्यादा।
- 36:03गुमान करने की आवश्यकता किसी को भी नहीं हो रही गुल पर क्यों
- 36:14बुलबुल है, निसार है खड़ा माली वो पिसे होशदार मार कर गोली करा ली।
- 36:24लोग प्राइम मिनिस्टर बनते हैं और ये नहीं जानते 21 तोपों की सलामी
- 36:31मिलेंगे मरने में, लेकिन काश तुम सुन नहीं पाओगे जीस 21 तोपों की
- 36:43सलामी लेने के लिए तुमने इतनी मशक्कत कर दी।
- 36:47दुनिया ने मेरा नाम याद रखेगी कितने जमींदोज हो गए लोग जो
- 37:04भाग्यशाली थे जो बलवान थे। ये जमीन, ये आसमान उन्हें निगल
- 37:11गया। नाम किसी का नहीं रहता यहाँ ये
- 37:23बादलपन जब त्याग दो तभी सयानी हुए यह एक तरह की मूडता है और कमाल की
- 37:32बात है। ये संसार आज से नहीं चल रहा है।
- 37:37आज 2082 विक्रम का आगाज बहला दिन प्रतिपदा और लाखों नहीं तो
- 37:50हज़ारों सालों से सृष्टि चल रही है।
- 37:53इसी तरह। कितने अवतरित हुए, कितने जमींदोज
- 38:01हो गए तुम सबक नहीं लेते किसी से तो मैं आज क्यों बोल रहा हूँ?
- 38:22मैं इसलिए बोल रहा हूँ। कि तुम मछली की तरह तड़प रहे हो,
- 38:33सब है तुम्हारे पास फिर भी तड़प रहे हो।
- 38:40जिसके पास है वो भी तड़प रहा नहीं है, वो भी तड़प रहा हो और एक तत्व
- 38:49ऐसा। जिससे वो मिल गया।
- 38:56उसके पास जो भी है वो बेकार हो जायेगा जब अब संतोख, धन सब धन दूध
- 39:04समान। और एक तत्व ऐसा जिसके पास नहीं है
- 39:11जिसे वो मिल गया और सहनशाहे आरंभ हो जायेगा।
- 39:17बड़ी ही अजीब सी बात है, मैं कभी कभी कह देता हूँ भूख से मरते हुए
- 39:25लोगों को आनंद दे दो। क्या करोगे ट्रंकों में जमा करके
- 39:35क्या करोगे एक नंबर का बेईमान पूंजी पति बन कर तुम ये मरते हुए
- 39:45लोग भूख से नजर नहीं होते। इससे बाँट दो।
- 39:53बाबा नानक ने हमें यही सिद्धांत दिया था, वंड इच्छा को यही इस्लाम
- 40:01में शब्द आता है। जहाँ पर जीस भी बस्ती में कोई एक
- 40:17भूखा सोता है जहाँ पर जीस भी बस्ती में कोई एक भूखा सोता है
- 40:25वहाँ बस्ती ही बस्ती से खुदा नाराज होता है।
- 40:35और हम महलों में रहने वाले ये शिकायत करते हैं कि हम दुखी क्यों
- 40:45सब हैं? तुम्हें नहीं पता कि ये शरीर पूरा
- 40:53अस्तित्व एक इकाई है? तुम अपने शरीर को इकाई समझ के मत
- 41:02बैठ जाना पूरा अस्तित्व एक इकाई है, यहाँ भी दर्द होगा चाँद तारों
- 41:14के पास। किसी अज्ञात दुनिया में दर्द
- 41:25तुम्हें भी होगा बात बड़ी अजूबी है, लेकिन तुम्हें एक बात बताता
- 41:38हूँ। आज नए साल का पहला दिन है प्रतिपद
- 41:42था और नए संबद्ध के नए दिन का। प्रतिपदा का पहला दिन बड़ा
- 41:56महत्वपूर्ण होता है कम से कम यह दिन।
- 42:06बांटकर गुजारना चाहिए। संग्रह करके तुम हर चीज़ संग्रह
- 42:17करते हो, पदार्थ भी संग्रह करते हो, मुझे सुन रहे हो।
- 42:25यह सूचना ही भी संग्रहित करते हुए यदि तुम्हें किसी बात का पता नहीं
- 42:30मैं कहता हूँ मैंने देखा है बस तुमने दिमाग के नेरोज़ में बसा
- 42:36बाबा ने देखा है सर झूठ तो नहीं बोलता?
- 42:44देखा है लेकिन मेरे देखने से तुम्हारे आनंद का ज़रा भी संबंध
- 42:51नहीं है। मेरे खाना खाने से मेरी भूख वजह
- 42:57है पानी पीने से मेरी प्यास मच। तुम्हारी नहीं, इसलिए मैं तुमसे
- 43:09कहता हूँ कि मैंने देखा है ये ककम है।
- 43:19लाख साइंटिस्ट बोलते रहे लाख नास्तिक लोग कहीं वह नहीं है सारी
- 43:31दुनिया दुष्प्रचार करनी शुरू कर दे, लेकिन सत्य कभी बदला नहीं
- 43:36जाएगा। बाबा नानि कहते हैं, सत्य तो सदा
- 43:44ही रहेगा, सभी संत कहते हैं सत्यमेव जयते।
- 43:54और हमारे तो प्रतीक चिन्ह पे भी लिखा है सत्यमेव जयते न जाने हम
- 44:01झूठ बोलना कहाँ से सीख गए हैं? सत्यमेव जयते के नारे की आड़ में
- 44:11हमने झूठे वायदे कब से करने शुरू कर दिए?
- 44:19अज्ञानता के कारण हम जानते नहीं इकट्ठा करेंगे, किसी को भूखा मार
- 44:31के इकट्ठा करेंगे, उसके मरने की कीमत पर अपना सिधू को भरेंगे,
- 44:38अपना बैंक भरेंगे। हमें क्या मिलेगा?
- 44:48हमारे हाथ में कागज़ आ जाएगा। रजिस्ट्री आ जाएगी जमीनों की
- 44:53बैंकरों की एफडी आ जाएगी कागज़। लेकिन शायर कहते हैं यह जो तुमने
- 45:08इकट्ठा किया जर। सिकंदर का यहीं पर रह गया सब।
- 45:21यहीं रह जाता है। मरते दम लुक्मान भी ये कह गया।
- 45:33बड़े से बड़े वैध हकीम जिनका तुम सहारा लेते हो वो भी मर जाते है
- 45:41ये घड़ी। ये घड़ी फरगीज़ न डाली जाएगी जब।
- 45:54तेरी जब तेरी डोली उठाई जाएगी बे मुहूर्त के निकाली जाएगी।
- 46:06इकट्ठा करते हुए इस आस में सुख मिलेगा।
- 46:14और अफसोस छोटी सी कहानी मैंने कहीं पढ़ी थी।
- 46:26लंदन के किसी बाजार में एक गली के किनारे एक भिखारी बैठा रहता है।
- 46:37जो भी उसके सामने से गुजर जाता है वो हाथ फैलता है।
- 46:43मुझे कुछ दे के जाना तो मेरे पास है कोई एक पीसा, कोई दो पीसा दे
- 46:54जाना बरसो बरसो बरसो तक उसने वहीं भीख मांगी एक जड़।
- 47:10सुबह बैठ जाता हूँ, देर रात वहीं सो जाता हूँ।
- 47:16यह उसकी रोज़ की व्यवस्था थी और 40 वर्ष तक उसने एक स्थान पे।
- 47:29फटे हाल मैले कुछैले कपड़े अस्त व्यस्त बाल कभी शायद नहाया हो
- 47:49शरीर में से बदबू मारते है। और सभी से कहता तुम्हारे पास है
- 48:00कुछ पैसा दो पैसा देके चलना और उसकी कर्ण पुकार सुनके।
- 48:10सभी कुछ न कुछ उसे देके जाते हैं। अपनी श्रद्धा समर्था के अनुसार 1
- 48:19दिन वह मर गया गली के कोर पर भरे बाज़ार के एक बार।
- 48:33जहाँ वो बैठता था उन लोगों ने सोचा कि यहीं दफन कर दे सारी उम्र
- 48:39इसने यहीं बताई स्थान के साथ भी हमारा मुँह हो जाता है।
- 48:49दफन करने के लिए सामान एकत्रित किया गया।
- 48:56इंस्ट्रूमेंट मंगाए गए वहाँ गटा खोदगा यहीं दफन कर देंगे और यहाँ
- 49:04की मिट्टी डाल देंगे। और इसके ऊपर छोटी सी, हल्की सी
- 49:14इंच दो इंच कि इसकी कवर गाह बना देंगे, बस याद रहेगा एक व्यक्ति
- 49:21यहाँ 4050 साल बैठे थे, परीक्षा मांगता रहा।
- 49:32वो सान उखाड़ा गया, पड़ा गया उसको दफन करने के लिए और मजदूर लगे थे।
- 49:43अचानक से एक आवाज आई। टन टन मजदूर बड़े हैरान हो गए।
- 49:52ये आवाज़ कहाँ से आई सबके कान खड़े हो गए हैं सब भी झाँकने लगे
- 50:03देखो तो भईया क्या है? ये आवाज़ कहाँ से आई?
- 50:08और उस जमीन को थोड़ा और गहरा ले जाया गया।
- 50:12किसी पुराने जमाने के सोने के मटके भरे पड़े थे।
- 50:18बीच में सोना था। उस वक्त का गिन्नी कह दो या सर्फी
- 50:26कह दो। और भरा पड़ा था और एक दो नहीं 50
- 50:37दूर तक भरा पड़ा था और सभी निकाले गए।
- 50:49उससे लंदन का प्रत्येक व्यक्ति रोया है।
- 50:57रोया क्यों? जीस स्थान पे बैठ के 4050 साल भीख
- 51:05मांगी, पैसा पैसा इकट्ठा किया वो भी उसकी जेब में था।
- 51:12कुछ बोरी के नीचे छुपा दिया था, लोग रोए कितना मनहूस था, कितना
- 51:31भव्यहीन था पीसा पीसा मांगता रहा। खरबों खरबों खरबों का हीरा सोने
- 51:45के रूप में यहाँ दबा पड़ा था और उसे मालूम भी नहीं था कि उस
- 51:54भिकारी की कहानी नहीं है। ये कहानी तुम्हारी है चौंक मत
- 52:05जाना, थर्रा मत जाना लेकिन मैं कहता हूँ।
- 52:16थोड़ा सा ही इस स्थान को जैसे उन्होंने बाद में मरने के बाद उसे
- 52:23खोद के देखा, तुम ज़रा खुद को खोद के देख लो, कहीं ऐसा तो नहीं।
- 52:33कि जीस स्थान पर बैठे तुम भीख मांग रहे हो, वास्तव में तुम
- 52:42सहिंसा हो, कहीं ऐसा तो नहीं है, मैं कुछ नहीं कहूंगा।
- 52:53कबीर कहते हैं जिन खोजा तन पानी ज़रा खोज के देखो खोद के देखो और
- 53:06मैं तुम्हें पक्का कहता हूँ अगर खोदोगे खोजोगे।
- 53:14तो पाओगे तुम शेहनशाहे आलम तुम्हारे भीतर की जो तार जाती है
- 53:23वो अनंत में फैल जाती है, वो विश्व व्याप्त हो जाती है।
- 53:29तुम सब कहीं समा जाते हो। जरे जरे में तुम ही हो तुम्हारा
- 53:35ही वजूद है कहाँ भुटकते फिर जाओ दर दर के भिखारी बने जब जाग जाओ
- 53:51तभी सुबह रहा। जगाने तो बहुत आया आपको सन्तों ने
- 54:05तुम्हें बोल के भी जगाया, सन्तों ने तुम्हें अपने आईचरण से भी
- 54:11जगाया। बुध तख्त तो तास छोड़कर चले जाते
- 54:19हैं फिर भी तुम नहीं जागते। महावीर तख्त तो दास और चुभ के चुभ
- 54:28तीर्थ कर्चानियों के तख्त तो तास छोड़ के चले जाते हैं और तुम?
- 54:36वही तख्त तो ताश जुटाने में लगे हो।
- 54:40कितनी झूठ भरते हो कितने कत लोग अर्थ करते हो कितने कानून लेके
- 54:46आते हो कि कोई बोल न पाए? इसी कवायद में कितने बलशाली फना
- 55:08हो गए, जमीन खा गई या आसमान निगल गया तो मैं बताइए बस मैं ही मैं
- 55:19हूँ। दूसरा कोई ना रहे, दूसरा मेरे
- 55:23विरुद्ध बोलने की चिकित्सा न करे लेकिन तुम्हें नहीं पता 1 दिन ऐसा
- 55:28आएगा जब सभी बोलेंगे और तुम चुप हो गए, वो दिन भी आता है सभी के
- 55:37ऊपर आता है। तुम्हारी सभी कोशिशों बेकार हो
- 55:41जाएँगी तुम इतना बोल रहे हो गुलराते हो तुमसे एक शब्द भी ना
- 55:48बोला जाएगा ऐसी घड़ी भी सब पे आती है क्यों?
- 55:57गुल्लू पे हो रही। बुलबुल, निसार क्यों गलों पे हो
- 56:11रही भूल भूल निसार? है खड़ा माली वो पीछे होशियार।
- 56:28है खड़ा माली वो पीछे। होशियार मारकर।
- 56:38गोली गिराली जाएगी जब तेरी। डोली निकाली जाएगी।
- 56:57बे मोहूरत फिर? तुम महूरत नहीं निकालोगे, किसी
- 57:02पंडित के पास जाके नहीं कहोगे जंत्री खोल लो तुम कभी किसी ने
- 57:08निकालो महूरत बे मुहूर्त के उठा ली जाएगी।
- 57:20यह दिन सभी पे आता है भूल में चलना लेकिन तुम भूल जाते हो बस
- 57:27यही कमी है। वाल्मीकि से ही याद कर गए और भ्रम
- 57:39में समा गया है उल्टे नाम जब वे ते जाना।
- 57:44राम राम नहीं निकला मरा मरा मृत्यु याद आ गई मरना याद आ गया
- 57:52और मरना जैसे याद आ जाता है वह राम में समज जाता है।
- 58:00यह दुनिया बड़ी उलटी है। जी नहीं तुम विरोध कहते हो, विरोध
- 58:06नहीं होते, एक ही दागे के दो सेरे होते हैं लगते हैं, विरोध हैं,
- 58:12विरोध नहीं होते। अपने कर्मों से 24 के 24 तीर्थंकर
- 58:29राजा महलों को ऐसो आराम को जीस, ऐसो आराम को तुम चाहते हो उनको
- 58:39छोड़कर चले गए। तुम डायटीशियन के पास जाते हो,
- 58:47हमें डाइट लिखो, क्या खाना चाहिए? लेकिन बुद्ध सभी प्रकार की डाइट
- 58:53को ही छोड़ के आ जाते हैं। जो मिलेगा वो खा लेंगे, नहीं
- 58:59मिलेगा, फाका रख लेंगे। बहुत दिनों तक भूखे रहते है, कोई
- 59:10नहीं आता उन्हें भोजन देने का और तुम डायटिशियन से चार्ज तैयार
- 59:25करवातें हो और डायटिशियन तुमसे ठगी खेल देते है।
- 59:38अगर सच से पूछूं बताऊँ तो डायटिशियन खुद ही नहीं जानते कि
- 59:45उन्हें क्या खाना चाहिए। तुम किसी डायटिशियन की ज़िन्दगी
- 59:50में उसकी तारीफ झांक के देखना? तो तुम्हें सच्चाई का पता चल
- 59:56जाएगा। जो चीज़ तुम्हें खाने से रोकते
- 1:00:00हैं वो खुद खाते हैं। एक शक्ति की तलाश में तुम हो, मैं
- 1:00:21जानता हूँ और तुम्हारे मार्गदर्शक कहते हैं, शक्ति को कमा लो और तुम
- 1:00:32उस भिखारी की तरह शक्ति को कमाना शुरू कर देते।
- 1:00:38तुम मरना नहीं चाहते, तुम अमर हो जाना चाहते हो कैसे कैसे तुम्हारा
- 1:00:42नाम बना रहे बच्चों को जन्म देते हो?
- 1:00:48हमारा नाम बना रहे, किसके पुत्र हैं?
- 1:00:52उसके पुत्र हैं, किसके पुत्र हैं? उसके पुत्र हैं।
- 1:00:57ये अमर होने का एक तरीका है। जब आदमी सभी तरफ से हार गया हो तो
- 1:01:03फिर बच्चे तो पैदा कर ही सकते हो न, लेकिन वह बड़ा खुशहाल है।
- 1:01:14वह चाहे तो तुम्हें बच्चा भी नहीं देता है।
- 1:01:18फिर तुम अन्यन्य ढंग से अमर होने की चेष्टा करते हो, फिर तुम
- 1:01:24अन्यन्य ढंगो से नहीं बचा हुआ तो कोई बात नहीं हम फिर राजकास से
- 1:01:34अपना नाम चलेंगे। हम फिर कैप्सूल दबवाएंगे नीचे कभी
- 1:01:40कोई राजा होता था और जब तक वो कैप्सूल उखाड़ कर पढ़ने वाला
- 1:01:50आएगा, तब तक वो लिपियों को समझने वाला कोई नहीं मिलेगा।
- 1:01:55यही हुआ है। आज तक कितनी सभ्यताएं गर्क हो गई,
- 1:02:03राख हो गई। उन लोगों ने भी ऐसा ही सोचा था
- 1:02:10छोड़ गई सिरा लेख जो उसे जमाने में उपलब्ध थे।
- 1:02:14छोड़ गए। रुपयों के लेख जो मौजूद थे, लेकिन
- 1:02:20आज सब है उसको बाँचा नहीं जाता कि लिखा क्या है इन शिलालेखों पे
- 1:02:29स्तंभों पे लिखा क्या है, ये पढ़ने वाला कोई नहीं है।
- 1:02:43तुम एक ताकत की तलाश और आज मैं तुम्हे इस वर्ष के पहले दिन बता
- 1:02:51दूँ। यू अरे ओमनी पोर्टेंट इस सनातन का
- 1:03:02एक दर्रा इस रंजना का एक दर्रा। भी तुमसे बाहर उसकी मल्कियत भी
- 1:03:12तुम्हारी मल्कियत है, यू आर ऑन इम्पोर्टेन्ट जब तुम उस स्थान पर
- 1:03:19पहुँचोगे तो तुम पाओगे ये आचार्य लोग तुम्हें मूर्ख बनाते रहे।
- 1:03:27बल इकट्ठा करो, सूचना इकट्ठी करो, ये तगमा मिल जायेगा, ये डिग्री
- 1:03:38मिल जाएगी, ये कुर्सी मिल जाएगी, ये गद्दी मिल जाएगी।
- 1:03:45तुम्हारी सैलरी इतनी होगी, तुम्हारा इतना जमा होगा तुम्हें
- 1:03:50बड़े सपने से दिखाए जाएंगे, अच्छे से आएँगे, आएँगे अच्छे दिन आएँगे।
- 1:04:08अच्छे दिन कभी नहीं आते हैं। अच्छे दिन सिर्फ एक आदमी के आते
- 1:04:18हैं जो अच्छे दिन लाने की चेष्ट समाप्त कर देता है।
- 1:04:24चेष्टाएँ सदा बुरे दिनों की जननी है।
- 1:04:30शब्द थोड़े गहरे हैं। कई बार सुनना पड़ेगा।
- 1:04:36मेरे पास रोज़ कमेंट करते हैं बाबा थोड़े से दिन ठहर जाओ ना हम
- 1:04:44तुम्हारा पुराना सहित बार बार सुनकर समझ लें आपने क्या कहा?
- 1:04:50सर के ऊपर से कोई डर जाता है, कुछ देर तुम भी विश्राम कर लो, हम भी
- 1:05:01तब तक योग्य हो जाएंगे। मैंने कहा नहीं तुम योग्य नहीं
- 1:05:06होगा। अलफाज़ों की बारीकियों में तुम
- 1:05:11जाने की चेष्टा भी मत करो। अब ये अगले शब्द सुनने वाले हैं
- 1:05:24अलफाज़ों की बारीकी में तुम जाने की चेष्टा मत करना अलफाज़ जहाँ से
- 1:05:30आ रही हैं वहाँ तक पहुंचने की। कब आए तो बना लेना, जिसे मैं
- 1:05:39इंटेलिजेंस कहता हूँ, बड़ी से बड़ी समझ उस तत्व में है।
- 1:05:52तुम कहते हो? आर्टिफिशियल मैं कहता हूँ
- 1:05:57इन्टेलिजेन्स मत सहारा लो आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स का तुम
- 1:06:05वहाँ चले जाओ, जिसने यह सृजना बनाई आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स
- 1:06:14बनाने से पहले। जो उस पर सामग्री लगी, वो जिसने
- 1:06:21बनाई उसके पास पहुंचा। वह इंटेलीजेंस है जहाँ से मैंने
- 1:06:27शुरू किया। प्रवचन थोड़ा सा गहरा है, बेतुका
- 1:06:36भी मालूम पड़ सकता है। लेकिन बड़ी गहरी तोक है।
- 1:06:43तुम वो भिखारी हो जहाँ बरसों बरसों तक क्या जन्मो जन्मो तक
- 1:06:48बैठे भीख मांगते रहते हों और तुम्हारे ही नीचे जहाँ बैठे हो,
- 1:06:55वहाँ खजाना छिपा है। अशर्फियाँ हैं, मोरू हैं, सोने के
- 1:07:00घड़े हैं और तुम पीसा पीसा मांग रहे हो।
- 1:07:05लोगों से ये सभी का हाल है मीरा की तरह।
- 1:07:17उसके बिरहा में पागल हो जाओ। गुम जुदाई का सहा जाता नहीं गुम
- 1:07:35जुदाई। काश जाता नहीं आपके बिन अब रहा
- 1:07:50जाता ने प्यार में। क्या क्या लुटाकर रो दिए आप के
- 1:08:11पहलू में आप? रोज़ 10 ताने अवम सुनाकर रो दिए।
- 1:08:30आपके। पहलू में आकर रौदी श्यामज आंसू
- 1:08:44बहाती आ गई। श्यामज।
- 1:08:53आंसू वहती आ गई। हर तरफ गम की उदासी छा गई।
- 1:09:13के जला कर रो दिए, आपके पहलू में आकर रो दिया।
- 1:09:33दास्तां सुनाकर रो दिए। आपके पहलू में।
- 1:09:49अगर रो दिए उसकी। याद में शुरू करो ये साल ये दिन
- 1:10:05ये दिन की शुरुआत। उसके पहलू में जाकर रो उसके चरणों
- 1:10:13में अपनी बख्शाएं रखो, तुम दुखी हो इसका इजहार करो।
- 1:10:27वह मालिक, वह मालिक है, हम तुम्हें इससे ज्यादा कुछ भरोसा
- 1:10:38नहीं दे सकते हैं, वह है। तुम उसके चरणों में जाके रो
- 1:10:48शब्दों की गुहार मत लगाओ, शब्दों की बात उसे समझ आती है, तरंगों की
- 1:11:00बात उसे समझ आती है। रोना उसे समझ आता है।
- 1:11:08शब्द उसे समझ नहीं आते हैं। आज का दिन उसकी याद से शुरू करा।
- 1:11:22शमण करो, उस विराट को, वह है बस कबीर सिर्फ आपको गारंटी दे सकते
- 1:11:35हैं उसके होने की। और अगर वो है तो समझ लेना कि वह
- 1:11:43ही है और शतीत नहीं हो, दरिद्र नहीं हो, कंगाल नहीं हो, बल ही
- 1:11:52नहीं हो, निर्बल नहीं हो। सर्व व्यापक हो सब शक्तिमान हो
- 1:12:02सर्वज्ञ हो, तुम सब जानते रहो लेकिन उस भिखारी की तरह हो जो
- 1:12:11बरसों बरसों जन्मो जन्मो। गली के मोड़ पे भीख मांगता रहा
- 1:12:22लोगों से खुद के खजाने का कोई पता नहीं आज तुम्हें पहले दिन याद करा
- 1:12:33दो खोजो और पालो के। पुकारो और वह आ जाएगा रो और वह
- 1:12:44सुन। लेगा।
- 1:12:48श्री कृष्ण गोविंद? हरे मुरारी हे नाथ नारायण?
- 1:13:12जन वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरार हे नाथ नारायण।
- 1:13:30वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:13:49पितुमात स्वामी सखा हमार पितुमात स्वामी सखा हमार हे नाथ?
- 1:14:09नारायण वासुदेव, श्री कृष्णबोधन हरे मुरारी हे नाथ?
- 1:14:27नारायण वा सु ते। धन्यवाद।