Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 feb 26 - भगवान ने ऐसी दुनिया बनाई ही क्यों? क्या भगवान 33 करोड़ देवताओं की पूजा से ईर्ष्या करता है?
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- 0:15शंकर दयाल शर्मा लावजे कहते हैं सब कुछ परमात्मा करता है।
- 0:31और वह जो करता है, भले के लिए करता है, मैं कहता हूँ परमात्मा
- 0:44ऐसे सृष्टि बनाता ही क्यों है? आप कहते हो कि मैं उस स्थल पर
- 0:56जाकर परमात्मा हूँ तो जब तुम उस स्थल पर जाओ तो परमात्मा से कहना
- 1:06कि ऐसी सृष्टि आप पैदा ही क्यों करते हो?
- 1:14शंकर दयाल जी कह दूंगा वहाँ, मैं रो चाहता हूँ मैं आपका संदेश।
- 1:30वहाँ तक पहुंचा दूंगा मेरी जिम्मेदारी आप प्रवचन को सुनते
- 1:37रहिए, बस मैं गया और आया लीजिए। शंकर दयाल शर्मा।
- 1:48मैं तो जाकर भी आ गया, तुम पूछना चाहोगे क्या?
- 1:56जवाब दिया परमात्मा ने, मैंने कहा ऐसी सृष्टि तुम बनाते हो तुम तो
- 2:10परमात्मा ने कहा मैं सृष्टि बनाता हूँ।
- 2:17लेकिन जीवेशन तो शंकर दयाल शर्मा खुद पैदा करता है।
- 2:27यह ईगो तो इन्होंने पैदा किया। भोगने की इच्छा तो इनके हुई।
- 2:34मैंने तो बस तुम्हे बनाई थी और मैंने शंकर दयाल शर्मा को भी
- 2:42बनाया था। फिर अजय जीवेशन तो इन्होंने पैदा
- 2:49किया। अगर इनको दुनिया रास नहीं आई,
- 2:58देखिए ये जवाब परमात्मा ने दिया है तो बाबा कहते हैं कि एक पिछले
- 3:07दरवाजे से मैंने। वहाँ से निकल सकते हैं आपकी मोज़
- 3:18है, मैंने तो बना दिया। लेकिन एक बात ध्यान में रखो ना
- 3:25मैंने पदार्थ बनाया मैंने शंकर दयाल शर्मा को भी बनाया लेकिन
- 3:32भोगने की इच्छा तो इन्होंने की वह जीवेशन मैंने नहीं बनाई जीवन
- 3:41मैंने बनाया। पदार्थ मैंने बनाया लेकिन जी
- 3:45विश्राम इन्होंने पैदा किया और फिर अगर ये सृष्टि निराश नहीं है
- 3:55तो मैंने एक पीछे वाला दरवाजा भी बना रखा है।
- 3:58वहाँ से निकल सके हैं। तो शंकर के आर शर्मा आपका जवाब तो
- 4:07पूरा हो गया, अब आप चाहो तो भोग लो, अब आप नहीं चाहो तो इनके
- 4:17दरवाजा पीछे से है, वहाँ से निकल जाओ।
- 4:21आपकी मर्जी है परमात्मा कहता, मैं नहीं रहता हूँ कि छोड़कर मत जाओ,
- 4:38क्योंकि मेरा तुम कुछ चले जा नहीं सकोगे।
- 4:46तुम पिछले दरवाजे से निकल भी गए तो शंकर दयाल शर्मा मेरा कुछ भी
- 4:55नहीं लेके जाओगे। परमात्मा ने बना दिया तुम्हें
- 5:06क्या अधिकार है टिप टिप का टिप्पणी करने का।
- 5:14लेकिन मसला मैं समझता हूँ कहाँ है तुम जीना तो चाहते हो, लेकिन अपनी
- 5:23शर्तों पे जीना चाहते हो तुम जीना चाहते हो परमात्मा को गुलाम बना
- 5:35के जीना चाहते हो? तुम जीना चाहते हो गुरुओं को
- 5:39गुराम बना के जीना चाहते हो? इसलिए तो रोज़ धब्बे भर के कमेंट
- 5:44आते हैं, जैसे कि आपने सब जान लिया हो और फिर जान लिया हो तो
- 5:56भाई लोगों को समझाने की चेष्टा करो, इतनी दुनिया व्याकुल है।
- 6:03थोड़ा आप एक आध चैनल आप भी क्रियेट कर लो,
- 6:19तुम कहीं उलझ गए हो, शंकर दयाल तुम्हारे लिए जिंदगी के लायक है
- 6:29नहीं, लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं?
- 6:36कि तुम जज बन जाओ, हमसे पूछो हम भी तो हैं आठ अरब 30,00,00,000।
- 6:52विश्व की जनसंख्या में अकेले आप ही तो नहीं फैसला करने वाले, आपके
- 7:03ढंग से तो परमात्मा नहीं चलेगा, आपको ही अपना ढंग तब्दील करना
- 7:10होगा। यू विल हैव टु बी ट्रांसफॉर्म।
- 7:17तुम्हारे ढंग से वह नहीं बदलेगा। उसने तो बना दिया जो बना दिया और
- 7:23बिना तुमसे पूछे और बिना तुम्हें बताये उसने बना दिया।
- 7:28अब तुम्हें अच्छा लगता है तो वह भली।
- 7:33अगर नहीं अच्छा लगता तो पीछे का दरवाजा बनाया है, निकल जाओ वहाँ
- 7:39से बहुत से निकले हैं एक शंकर दयाल निकल जाएगा तो क्या फर्क
- 7:49पड़ता है? अब हम दूसरे पहलू पर आ जाए।
- 7:57एक शंकर दयाल के कहने से उसने दुनिया को बनाई, वह अपना ढंग नहीं
- 8:07बदलता। और एक लौजे के कहने से भी वह अपना
- 8:13ढंग नहीं बदलता। लौजे भी एक है।
- 8:19शंकर दास भी एक है ना शंकर के कहने से वो अपनी व्यवस्था को
- 8:25बदलेगा। ना लवजे के कहने से व्यवस्था में
- 8:28बदले। लेकिन बात क्या है?
- 8:31अब दोनों का डिफरेंस क्या है कि मैं समझाता हूँ।
- 8:37शंकर दयाल शर्मा अपनी शर्तों पर जीना चाहता है।
- 8:46और लव से उसकी व्यवस्था के मुताबिक जीना चाहता है।
- 8:51दोनों में ये फर्क है। शंकर शिकायत करके जीना चाहता है,
- 9:02ऐसा क्यों नहीं किया? ऐसा क्यों नहीं किया और लव से
- 9:08शिकायत नहीं करता। लहू से उसने जैसा माहौल दे दिया,
- 9:15उसी के अनुकूल अपने आप को डालकर जीना चाहता है।
- 9:23यही जीने जीने का फर्क है। जो परमात्मा को अपनी मर्जी से
- 9:32नचाकर जीना चाहेगा उसका अंतिम असर होगा।
- 9:38आत्मघात सुशायु और जो परमात्मा की इच्छा को सर्वोपरि रखकर जीना
- 9:45चाहेगा। उसका अंतिम परिणाम होगा।
- 9:50मोक्ष, आनंद कोई ज़ंजीर न रहेंगी तुम पर कोई बंधन तुम्हें बांधेगा
- 10:00नहीं। उसने तो जो बना दिया बना दिया।
- 10:08तुम कौन होते हो कि तुम से पूछ के बनाता तुम कौन होते हो?
- 10:14तुम्हारे पास का ऑथोराइज्ड सेकनेटरी है कि तुम से पूछ के
- 10:21बनाता नहीं उसने बनाता। क्योंकि वह बना सकता था ये ठीक कि
- 10:33आपके अनुसार नहीं बनाये, आपके अनुकूल नहीं बनाये तो फिर अगर
- 10:41आपको व्यवस्थाएँ उसकी ठीक नहीं लगती।
- 10:45उसके नियम, उसके कायदे, कानून आपको अच्छे नहीं लगते तो परमात्मा
- 10:52ने ये कहा है मुझसे मैंने अभी अभी पूछा है।
- 11:02कि अगर नहीं अच्छा लगता तो दूसरी व्यवस्था मैंने उन्हीं लोगों के
- 11:07लिए रखी है जिनको ज़िन्दगी अच्छी लगती नहीं, जिनको मेरी बनाई
- 11:15सर्जना नहीं। भारती तो वह इस सृजना से पिछले
- 11:22दरवाजे से निकल सकते हैं। यह व्यवस्था भी मैंने की है।
- 11:32अब तुम देख लो तुमने कौन सा ढंग चुनना है?
- 11:36यहाँ तो ऐसे भी लोग हैं। जो मान सम्मान के लिए गद्दी के
- 11:41लिए धन पदार्थ को इकट्ठा करने में परमात्मा की सृजनों को बड़ा सुंदर
- 11:57बताते हैं भोगते हैं रोज़ तसबीरे आते हैं।
- 12:04झूठ भी बोलते है और जिए भी चले जाते है और बड़े मज़े से किये
- 12:11जाते है। फिर परमात्मा तुम्हारी बात को
- 12:20माने शंकर दयाल कि इन लोगों को माने।
- 12:25इनको तो दुनिया बड़ी अच्छी लगती है।
- 12:30इनको तो दुनिया में जैसी कृति परमात्मा ने बना दी, ये तो पागल
- 12:35हो जाते हैं उसके पीछे ये तो भूखों की तरह लप्पड़ पड़ते हैं।
- 12:46और तुम कहते हो कि इस दुनिया में रखा ही क्या है?
- 12:57परमात्मा ने ऐसी सृष्टि गुण बनाई तो मैं गया था भाई।
- 13:10परमात्मा कहते मैंने तो बना दिया, अब शंकर दयाल को नहीं अच्छी लगती
- 13:20तो बिल्कुल उसकी मर्जी है। वह स्वतंत्र है, वह जीना चाहे जी
- 13:28सकता है। नहीं जीना चाहे तो बहुत से केस
- 13:31हैं। लोग मुझे कहते हैं जहर क्यों बना
- 13:33दिया उसको मत भाई, ऐसे भी तो लोग हैं शंकर दयाल जैसे।
- 13:48लोग कहते हैं ये दिन तो किसी तरह बीत जाता है।
- 13:52चाचा जान रात क्यों आ जाती है? लेकिन बहुत से लोग चोर, उचक्के,
- 14:05डाकू? रात का ही इंतजार करते हैं।
- 14:08उन्हें रात बिहारी लगती है इसलिए वो ना तो चोर से पूछता है ना साधु
- 14:15से पूछता है वह अपनी मर्जी से बना देता है, जो वह बना सकता है, उसने
- 14:21तो बना दिया। अब तुम्हें अच्छा नहीं लगता, ये
- 14:26अच्छा लगता है ये तुम देखो यह मुसीबत तुम्हारी यह सिरदर्दी उसकी
- 14:35नहीं, तुम चाहो अपनी मर्जी से जी सकते हो।
- 14:44तुम चाहो तो दूसरा रास्ता भी है। एक दरवाजा पिछले पार भी निकलता
- 14:52है, वह गंगा पार जाता है। तुम्हारी मुसीबत में सुनता हूँ
- 15:06पुत्र तुम जीना तो चाहते हो यह सस्ती, बड़ी प्यारी है, लेकिन
- 15:16जीना चाहते हो अपनी शर्तों पे और तुम्हें पता नहीं।
- 15:27ओल्ड टेस्टमेंट में लिखा है एम जेलस गोट, मैं बड़ा गिरशालू
- 15:35परमात्मा हूँ, मैं बड़ा क्रोथी। क्या करोगे ऐसे ईश्वर का डंडे से
- 15:49मिलता नहीं अब ये खेती करने वाले जमींदार हमेशा उससे तंग ही रहते
- 16:00है। मैं सैर करने जाया करता था।
- 16:06नहर की बचड़ी पर एक जमींदार में रोज़ मिल जाता बड़ा तंग होता
- 16:16बेचारा मैंने कहा बिल्लू सिंह। हाँ पंडित जी, तुम्हारा काम तो
- 16:27बहुत मेहनत का है परले कुछ पड़ता लगता ना कैसे बस पंडित जी पेट भर
- 16:37जाता है इतना सा ही परले पड़ता है।
- 16:44लेकिन मुझे परमात्मा से शिकायत बहुत है।
- 16:49मैंने कहा अगर तुम्हें परमात्मा मिल जाए तो मैं थोड़ी कह सकता हूँ
- 16:56कि मैं परमात्मा हूँ। उससे पहले कभी कभी बोल दिया करता
- 17:02था। उस दिन के बाद मैंने बंद कर दिया
- 17:08वो कितना पंडित जी, अगर कहीं वो मुझे मिल जाएगा, मैं उसको घसा घसा
- 17:15के इतना सा कर दूंगा। मैंने कहा ये लो 123, मैं नहीं
- 17:25कहूंगा घसे के मैं परमात्मा अरे इनका क्या पसंद है?
- 17:31घसा घसा के इतना से कर दे? कैन यू से मैं परमात्मा हूँ इसमें
- 17:40कुशल ओल्ड टेस्टमेंट में कहा क्या एम जेलस गोट मैं बड़ा ही शालू?
- 17:53ओल्ड टेस्टमेंट के बुक ऑफ एक्सो डैश में धारा 20 के पांच में ये
- 18:01शब्द आता है एम जेलस स्कॉट, मैं इर्शालु परमात्मा हूँ।
- 18:15लेकिन मैंने बहुत बार कहा गुरु गलत नहीं होता।
- 18:23शिष्य गुरु के शब्दों का अर्थ गलत कर देते है।
- 18:31फिर चलता है शास्त्रार्थ। यानी की बुद्धि की बकवास जिसमें न
- 18:40कोई जीतता है, न कोई हर्ता है। एमजी स्कॉट मुझे बड़ी घृणा है,
- 18:52ऐसा फरमात्मा हूँ। आइए मैंने एक शब्द कहता सभी पहुँच
- 19:00जाएंगे, हिंदू कभी नहीं पहुंचेगा। क्यों परमात्मा कहता मैं तुम्हारे
- 19:10देवी देवताओं से नकली परमात्माओं से तुम्हारी मन ग्रंथ?
- 19:15परमात्मा की तस्वीरों से मुझे बड़ी वर्षा मैं बड़ा क्रोध हूँ
- 19:26इसलिए इस मुल्क के अंदर जितनी गरीबी है, जितनी भुखमरी है जीतने
- 19:37दुखी हैं लोग यहाँ बाहर के लोगों को धुरधुरी आती है।
- 19:45अरे बाबा आप कैसे रहते हो? वहाँ?
- 19:49वायु दूषित है, पानी दूषित है, धरती दूषित है, फिर आप कैसे बने
- 19:56हो? मैंने कहा मैं।
- 20:03वायु से पानी से धरती से पार बहुत तत्व हैं जो इन विकृत चीजों के
- 20:10संपर्क में आते हैं। इसलिए मैं सूखी हूँ तो फिर क्या
- 20:18होगा? गौरी शंकर?
- 20:21मैं तो सुखी हूँ, उसी घर में हूँ आज तुम भी हो आज मैं भी हूँ तो
- 20:31चले गए छोड़ दो उनसे क्या मुकाबला करना?
- 20:38अब मैं तो कहता हूँ, ज़िन्दगी बड़ी शानदार है, तो कहाँ गलती रह
- 20:45गई जीने का सिलिका वे ऑफ लीविंग तुम अपनी शर्तों पे जीना चाहते
- 21:03हो? बाबा नानक भी जीते हैं, बड़े मज़े
- 21:07से जीते हैं और मैं भी जीता हूँ बड़े मज़े से जीता हूँ, लेकिन हम
- 21:12उसकी शर्तों पे जीते हैं तुम कहते हो वही कर जो मैं चाहता हूँ।
- 21:23हम कहते हैं वो ही कर जो तू चाहता है, राजी हैं हम उसी में जिसमें
- 21:33तेरी राजा है अपनी तो यूँ भी बहाववा है और यूँ भी बहाववा है
- 21:41अपना क्या? जब जन्मे तो कुछ नहीं ले के आये
- 21:46और जब जाएंगे हाथ झाड़ के जाएंगे, पक्का है ये तुम्हारा कितना भी
- 21:52अनुभवी व्यक्ति इस बात को झुठला नहीं सकता कि कोई यहाँ से कभी कोई
- 21:59रेत का एक कण भी ले के गया। और कोई यहाँ पर एक रेत का कण भी
- 22:04ले के आया हो, लेकिन हम तो ऐसे जीते हैं भाई जीने का सलीका
- 22:22तुम्हें है नहीं। गौरी शंकर तुम अपनी शर्तों पे
- 22:28जीते हो और तुम अपनी शर्तों पर जीने की चाहत रखते हो और तुम
- 22:33परमात्मा को कठपुतली की तरह नचाना चाहते हो?
- 22:37हम हम उसकी रजा में नाचना चाहते हैं।
- 22:42हुक्म में अंदर सब को बाहर हुक्म ना कोई ना ना कह हुक्म में ये वजह
- 22:51कहूँ मैं कहे ना कोई हम उसकी रजा में जीते हैं और नहीं कहते कि मैं
- 23:00हूँ। मेरी रजा से तू चल नहीं, हम कहते
- 23:05हैं तुम हुकुम हम हुकुम को मानने वाले हैं वो ही कर जो तेरी मर्ज़ी
- 23:12हमारी तो यही अर्जी कर वो ही जो तेरी मर्ज़ी और तुम कहते हो।
- 23:24तेरे झल फँसे जुदाई। रिहाई तो नहीं मांगी थी तेरी
- 23:52जलकों से। जुदाई
- 24:11थी। तेरी जुल्फों से।
- 24:20तुम शर्तों पर जीत जाओ तुम कहते हो हमने तो तेरी जुल्फों में फिर
- 24:27समाना चाहत। हमने तो कैद मांगी थी तेरी
- 24:33जुल्फों की अरे हाय तो नहीं मांगी थी हम कहते हैं कैद रख चाहे रिहा
- 24:41कर तेरा पाणा मीठा लग हर हाल में राजी।
- 24:51तो मार क्या ही छोड़ दो क्यों? क्योंकि लव ने सत्य को जान दिया
- 25:03और क्यों तुम रोते पीटते हो? क्यों तुम शर्तें लगाते हो?
- 25:07क्योंकि तुमने सत्य को जाना यह कारण है।
- 25:13बेसिक फंडामेंटल रीज़न हमने जान लिया कि हम है नहीं, हमारा बनाया
- 25:25हुआ में क्रीत्रम है आर्टिफीसियल है।
- 25:30वे परमात्मा ने नहीं बनाया। परमात्मा ने तो ढांचा बनाया,
- 25:37परमात्मा ने भोग बनाए, पदार्थ बनाए, इन्द्रियां बनाईं लेकिन
- 25:44भोगने की कामना तो तुम करते हो। भगवान ने तुम मुझे नहीं कहा कि
- 25:59तुम अन्य त्याग दो नहीं, भगवान ने तो मुझे नहीं कहा कि एक स्थान पे
- 26:07बैठ जाओ नहीं और भगवान ने तुम्हें भी नहीं कहा कि तुम भोगो।
- 26:16भगवान ने तुम्हें भी नहीं कहा कि तुम सारे विषयों के दर्शन कर लो,
- 26:22अपना ही जहाज खरीद लो, चाहे लोगों के टैक्स से खरीद लो लेकिन सुखी
- 26:35कौन लाओ से बहुत सुखी हैं। ओल्ड टेस्टमेंट में परमात्मा कहता
- 26:46है यहूतियों का यहूदी और ईसाईयों की पराणी किताब है ओल्ड टेस्टमेंट
- 26:55परमात्मा कहता है मैं बड़ा तेजस मैं से डिस्कार्ड।
- 27:02किस्से करता हूँ घृणा मैन मेड गॉड्स तुमने बनाई तुम्हारी भगवान
- 27:15दुर्गा तुमने बनाई काली तुमने बनाई।
- 27:20सरस्वती तुमने बनायी गणेश तो ने बनाये शंकर तो ने बनाये ब्रह्मा
- 27:25तुमने बनाये विष्णु तो ने बनाये इनके लिए कहता है ओल्ड टेस्टमेंट
- 27:30का परमात्मा एमजे स्कार्प वजह बड़ी सख्त नफरत है।
- 27:39उसका स्वभाव नफरत करना नहीं है ये समझ लेना बात को इस नॉट ए जीलियस
- 27:48इन दी नेचर उसके स्वभाव में इर्शा ईर्शा नहीं है तुम्हारे कामों से
- 27:57ईर्शा करता है। तुम्हारे 33,00,00,000 तो देवी
- 28:04देवता हैं, इसलिए जितना कहर बरसता है तुम पर बरसता है।
- 28:17समझदार थे यहुदी समझदार थे ईसाई समझदार थे इस्लाम जिन्होंने एक ही
- 28:26परमात्मा को रखा। ल इलाहा इलाहा।
- 28:35बस वो एक ही परमात्मा है और वो ही भूजने योग्य तुम कहते हो परमात्मा
- 28:45तो 33,00,00,000 तुम हर किसी की शरण में चले जाते हो।
- 28:51तुम पत्थर को भी शरण नवा देते हो। तुम्हारे लिए पूरा ओल्ड टेस्टमेंट
- 29:00में परमात्मा एम एज़ ए स्कॉट मैं बड़ा ही विशालू परमात्मा मैं नकली
- 29:08परमात्माओं को बर्दाश्त नहीं करता।
- 29:13और बल्कि मैं दंडित करता हूँ। यही तो किया तोतापुरी ने,
- 29:23रामकृष्णा परमहंस से विकल्प समाधि में पहुंचे और तोतापुरी कहते है,
- 29:28काट दे गर्दन। राम किशन कहते हैं, माँ आ गई
- 29:38तोतापुरी कहते हैं तू गर्दन काट दे, तलवार उठा, खड़क उठा और फिर
- 29:43धड़ से रखकर दे। तोतापुरी की ये बात सुनकर
- 29:55रामकृष्णा कहते है तलवार कहाँ से लेके आऊं तोतापुरी कहते हैं जहाँ
- 30:02से तू काली लेके आया था। कल्पना से काली को लेके आया
- 30:08कल्पना से गड को गड़ ले और उठा और इसका शीश दर्द से रख कर पहली बार
- 30:19समझाई। पहली बार मूर्ख से समझदार हुए
- 30:24सभ्य से आने एकमत मूर्ख अपने अपने पहली बार राम किशन पर मानस
- 30:32मूर्खता से स्याने हुए उन्होंने कल्पना की तलवार उठाई।
- 30:40और कल्पना की काली का सिर जड़ से अलग कर दिया।
- 30:48बस इसी के सहारे पे खड़े थे। इसी के सहारे को ही उन्होंने मान
- 30:59रखा था। आखिरी अवलंबन भी तुम्हें रोक सकता
- 31:03है। आखिरी अवलंबन कौन सा है, इसको
- 31:07खंगाल में कई बार ऐसा होता है। एक ही अवलंबन तुम्हें बांधे रखता
- 31:16है। राम किशन परमहंस।
- 31:21कि जीवेशणा हो गयी। रामकृष्णा ने एक ही अविलंबन के
- 31:28साथ अपनी जीवेशणा को बांध लिया और वो है खाना।
- 31:35शारदा कहती कि तुम ब्रह्म चर्चा करते करते।
- 31:40अन्न चर्चा करनी शुरू कर देते हो। रामकृष्णा फर्मांस कहते हैं शारदे
- 31:50प्रिय जीस दिन तुम थाली लेकर आए और मैंने ना के दूसरी तरफ कर ली
- 31:57बस तुम समझना। कि उस दिन मेरे जीवन के 72 घंटे
- 32:02शीश रह गए और आप किन शर्तों जानते हैं कि हमने एक बड़ा महीन धागा
- 32:13उससे अपनी जीवेशन को बांध रखा है, लेकिन शारदा से जानते हैं।
- 32:22और 1 दिन ऐसा भी आया खाने के लिए रामकृष्णा गए नहीं।
- 32:36खाना ले के आई शारदा राम किशन पर मनुष्य ने मुख मोड़ लिया।
- 32:45याद आई वो पुरानी बात। वो भूली
- 33:06वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गई। नजर के सामने हाथ से थाली गिर गई।
- 33:32याद आई बात रामकृष्णा की। जीस तन मैंने नाक मोड़ लिया।
- 33:3772 घंटे से धागा टूट गया। बड़ा कच्चा धागा होता है इस
- 33:43युवेशणा का जो संत उस स्तर पर पहुँचकर बांध लिया करते हैं।
- 33:55मेरी भी ज़िन्दगी के 72 घंटे ही समझ रहा है क्योंकि मैं उस
- 34:05प्वाइंट से वापस आया जहाँ जीवश्रण हो गयी थी और त्रिवेणी संगम में
- 34:12जाने का पूरा प्लांट। लेकिन एक आवाज आई और मैंने छोटे
- 34:21से कच्चे दावे से अपनी जीव है। जीस दिन वो टूट जाएगा।
- 34:31तो समझ लेना के 72 घंटे शेष हैं। बस तुम यही समझ लो कि उसका पता
- 34:36कोई नहीं तो जब भी कोई पूछता है कि तुम्हारा जीवन कितना शेष है,
- 34:45मैं कहता हूँ 72 घंटा। उजाले अपनी यादों के हमारे शंक
- 34:57रहने दो, न जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाए इसलिए
- 35:07उसके गीत गुनगुनाता ही रहता। न जानी न जानी किस घड़ी उस जंदगी
- 35:18की शान हो जाए? 72 घंटे का जीवन है बस।
- 35:29सदा ही कहता हूँ क्योंकि ऐसे कच्चे धागे का कोई उम्र थोड़ी
- 35:33होता है। किसी भी वक्त ये धागा टूट सकता
- 35:38है। इसकी अवधि तो मैं खुद ही नहीं
- 35:46जानता। अगले पल भी टूट जाये टूट जाये और
- 35:51उसके बाद 72 बनता है। बस ये जीवन है उसे लोग मारने के
- 36:05लिए आ जाते हैं। मैंने कहा भाई तुम मार दो।
- 36:12लेकिन अगर मारना ही चाहते हो तो ये हथियार मुझे दे दो, मैं खुद ही
- 36:15मर जाता हूँ, तुम क्यों लटकते हो मूर्ख?
- 36:20यही गलती तो पिछले जन्म में गोरसे नहीं बता देता मुझे कि बापू
- 36:26तुम्हें मारने आया, मैं कह देता ला।
- 36:31ये पिस्टल मुझे दे दे और तू भाग यहाँ से तू क्यों लटके अभी तेरी
- 36:39उम्र ही क्या है? अभी 40 भी पूरा नहीं हुआ।
- 36:4439। मैं अठ्यंतर का बूढ़ा तुम से डबल
- 36:51एज मैंने भोग लिया कर लिया जो करना था अब तू जा पुत्र और जब तू
- 37:02बाउंड्री पार कर दे, मुझे ऊंचे से आवाज दे देना।
- 37:09और तुरंत ही तू पाएगा एक धमाका और बापू गया कनपटी पे रख लूँगा और
- 37:21ड्राइवर को। देखी हैं मैंने हिटलर की मौतें
- 37:33मुसोलनी की मौतें स्टालिन की मौतें, चंगेज की मौतें कौन?
- 37:39कौन? मेरे सामने से नहीं निकला है
- 37:43सिकंदर जैसे। महाबली मेरे सामने से निकल गयी
- 37:51नकार इतना तकबवर जहाँ एक रोज़ पानी है तेरे से आला हो गुजरे न
- 38:00कुछ बाप की निशानी। जीने वाले तुझे जीने का सिका ही
- 38:11नहीं जीने वाले तुझे जीने का सिका ही नहीं अस्क पीने के लिए है की
- 38:23बहाने के लिए। ये बड़ी कीमती उपहार होता है पर
- 38:30सलीका नहीं आया। शंकर पुत्रक हमें सिलिका आ गया
- 38:42लावजे को सिलिका आ गया। जांच।
- 39:02में नू आ गई गम खान, होले होले रोके जी।
- 39:19पर चौण दी रोकेगी पर चौण दी। संग।
- 39:34होया तुम। परायी हो गयो चंगा मुख गई चिंता
- 39:54तेनो। अप नोण दी मुक गई नोण दी।
- 40:13जांच। में नो आ गई।
- 40:17गमखा। मुझे जीने का सलेका गया।
- 40:23धीरे धीरे रोकर मन पर जाने का तरीका आ गया।
- 40:30मुझे जीने का सलेका आ गया धीरे धीरे रोकर दिल पर जाने का तरीका।
- 40:39तुम्हें जीने का सिलिका नहीं बेटा, तुम जीने का सिलिका हमसे
- 40:45सीख लो जीने का सिलिका लावजे से सीख लो यही ज़िन्दगी जो आज।
- 40:54शमशान नजर आती है तुम देख लेना यही जिंदगी तुम्हें गुल स्थान नजर
- 41:02है, बस कोई ज्यादा फर्क नहीं रबदा
- 41:15कीपणा है ओह द्रोपुट ना देव दर्द। जीने का सलीका सीखना हो तो भगवान
- 41:29राम से सीखो, मरने का सलीका सीखना हो तो भी भगवान राम से सलीकों।
- 41:39वो दोनों बातें तो मैं बताते होंगे।
- 41:47विध नाते रे लेख किसी के। समझ
- 42:15लेख किसी। समझ।
- 42:21न। बैठने वाले।
- 42:39में जाते हैं। हो वेदनाते लेख किसी?
- 42:57समझ न वाले ओण को।
- 43:16जा ते। सीखना हो सलिका जंदरी को जीने गा
- 43:33तो मर्यादा परशु तुम। पल भर में उलट पुलट हो गया, लेकिन
- 43:42माथे पर शिकन की कोई लकीर न ये होता है चिन्ह।
- 43:59तुम तो कहते हो कैद मांगी थी रिहाई तो नहीं मांगी थी तेरी
- 44:06जुल्फों से जो दाई तो नहीं मांगी थी जिसने ये शिकायत की समझो?
- 44:17उसे जीने का सिलिकन में जीने का श्री का सीखना तो बाबा नानक से
- 44:24सीखो, परितू से सीखो हुकुम रजाई चलना नानक लिखया।
- 44:39उसके हुक्म की रजाम में रहकर चलो मध्य बुद्धि से बाय फरक करो, यह
- 44:53अच्छा यह है बुरा सब उसके खेल। वह जैसा चाहता है वैसा करता है और
- 45:11तुम्हारे उस पर कोई ज़ोर इश्क में ज़ोर नहीं।
- 45:18इश्क पे ज़ोर नहीं इश्क परमात्मा को कहते हैं इश्क पे ज़ोर नहीं ये
- 45:24वो आतिश है गालिब जो लगाए ना लगे और बझाय ना बने किसी का ज़ोर चलता
- 45:35है परमात्मा। तो ओल्ड टेस्ट पेमेंट में लिखा
- 45:44हूँ एमए जीलियस स्कॉट किसके लिए जीलियस क्या शेभाव है उसका अपने
- 45:52नौ? स्वभाव नहीं है तो हिंदुओं के लिए
- 45:59वो जीलियस है, परमात्मा कहता है मैं एक हूँ।
- 46:14ला ला ला मैं ही पूजने योग्य हूँ मेरी ही पूजा कर यह मिट्टी के
- 46:30बंदर क्यों बना रखे? इसीलिए मैं तुमसे नफरत हूँ।
- 46:38तुम्हारे लिए मैं ई चालू हूँ, मेरी मेरी ईशाला बड़ी भारी है
- 46:45तुम्हारे प्रति क्यों तुम तुमने तो इतने रोग बना लिए मेरे।
- 46:56जबकि मैं किसी आकार में आता नहीं, मैं निराका तुम तो आकार बना लिए
- 47:07और मेरी पूजा किए, इसलिए मैं तुम्हारे लिए।
- 47:14बस तुम्हें सिर्फ ओल्ड टेस्टमेंट तो तुमने पढ़ ली, लेकिन तुम अर्थ
- 47:24नहीं कर सके अर्थ तुमने मैं कर दिया अर्थ है यह हद्दियों के लिए।
- 47:35अर्थ है सलामियत के लिए अर्थ है सिक्खी के लिए एकों का मैं एक
- 47:54हूँ। अर्थ है उन ऋषियों के लिए जो कभी
- 48:01हुआ करते थे। सनातन में हमारी अग्रणी हमारे
- 48:07पूर्वज जो कहते थे अहम ब्रह्मास्म जो कहते थे एको अहमदृतीय नास्त जो
- 48:17कहते थे। ईशा आवास में एकदम सर्वम जत किन
- 48:20चीज़ जगत यहाँ जगत अगर तुम आज भूल गए तो इसमें ईश्वर का क्या दोष
- 48:29है? तुम जीवन का सलीका भूल गए?
- 48:36तुमने अपने आप को मल्टीफ्लिकेट कर दिया मल्टीडायमेंशनल कर दिया, फिर
- 48:43तुम आनंद की तमन्ना रखो भी मत तुमने ऐसे बबूल के वृक्ष को दिए
- 48:51और फिर अगर तुम्हारे को वो चीर दें।
- 48:56तो गिला मत करो, दोनों में से कोई काम कर लो या तो बबूल का पेड़ मत
- 49:03बुआ या फिर बबूल के पेड़ के कांटे चुभेंगे तो शिकायत मत करो।
- 49:14तुम दोनों ही नहीं करते तुम बोते भी बबूल हो और कांटे चुभते हैं
- 49:20स्वभाव के चुभेंगे और तुम शिकायत भी करते हो इसलिए मैं कहता हूँ
- 49:28हिंदू कभी नहीं पहुंचेगा, सभी पहुँच जाएंगे।
- 49:33क्योंकि उनका थोड़ा सा अर्थ का नृत्य हुआ है।
- 49:38बस तुमने तो पूरा ही कर दिया तुमने तो निराकार को साकार कर
- 49:47दिया, तुमने तो इतने रूप बना दिए और चिपक गए।
- 49:53और देखो आज तुम्हारे अगर कन्या पूजनीय क्या क्या गोल खलाई कोई
- 50:02दाढ़ी रंगे बैठा कोई पांच नाम दे रहा।
- 50:09कोई राधे राधे देरहा मूर्खों की कतार लगी है और तुम ढूंढ़ते हो
- 50:16उसे जो रस रूप उपनिषद में पढ़ तो दिया तुमने रसोग ऐसा।
- 50:32वहरा रूप है, लेकिन गुनाह कहाँ? सोना गुनाह कहाँ?
- 50:44गुने में तो तुम्हारे लाखों मूर्तियां आ गई।
- 50:51जल तो सभी जगह पवित्र है, कहीं भी स्नान कर लो फिर तुमने ये भेद
- 51:00क्यों खिला रहे? और इन्हीं भेदों के कारण आज तुम
- 51:06दुखी हो। ये भेदभुतियां कहती हैं बड़ा शुभ
- 51:12मौका आ जाओ, ये कुंभ का मेला है। तुम मोक्ष को प्राप्त हो के नहीं
- 51:24तुम्हें मोक्ष की परिभाषा ही नहीं पता पुत्र।
- 51:33काश तुम्हें मोक्ष की परिभाषा पता है, मोक्ष की परिभाषा है जिसके सब
- 51:42बंधन टूट गए हैं तुम तो रोज़ नए बंधन मनाते हो 33,00,00,000 देवता
- 51:47तुम्हारे बंधन ही तो हैं? ये तुम्हें आजादी देते हैं, ये
- 51:55तुम्हारे बंधन हैं और प्रत्येक देवता तुम्हारा बंधन है और तुम
- 52:04रोज़ नए नए देवता पैदा करते रहते हो, नए नए बंधन पैदा करते रहते
- 52:09हो। या तो जीने का सलीका बदल लो या
- 52:21पिछले दरवाजे से निकल जाओ, दो ही तरीके जिंदगी को हमारी तरह जीना
- 52:31चाहते हो? तो जीने का सिलिका सिख लो लाउजे
- 52:40से पूछो हाओ तो सेट माजूदे से मत पूछो, वह तो मूर्खों का राजा है।
- 52:52उसे क्या पता उसे तो खुद ही जीवन की परभाषा नहीं पता वो क्या
- 52:57बताएगा जीने का सिलिका पूछना तो पूछे लाओ से पूछो कृष्ण।
- 53:10पूछो नानक से कबीर से जो हर हालत में मंत्री लब पर रख कर मुरली
- 53:23बजाते हैं तुम तो मुरली भी अक्षरों की इजाद कर ली हो आज।
- 53:30घनघोर व्यथा है, बुद्धि ने अपना प्रसारा इतना खिलार लिया है इसलिए
- 53:44तुम इतने नरक में हो आज। उस रस का एक बूंद तक तुम चक नहीं
- 53:51सके तो मैं तुम्हें क्या कहूंगा? अब आगे ही तो कहूंगा तुम्हें
- 54:01भाग्यवान नहीं कह सकता, मैं क्यों क्योंकि तुम भाग्यवान हो?
- 54:05नहीं तुम भगवान नहीं हो। तुम अभागे हो जो अभी तक हर जगह के
- 54:14ऊपर जो मौजूद है ईशा अवश्य मैडम से वो उसकी एक बूँद आज तक नहीं और
- 54:25खुद को भाग्यशाली करता है। सही मायने में भाग्यशाली बनो
- 54:34कागजी भाग्यशाली मत बनो, कागजी शेर।
- 54:43तो खुद ही पाट दिए जाते हैं कागज़ के शेर कितनी शेर बचे हैं तुमने
- 54:53कागजी शेर पैदा कर लिए असली शेर पैदा करो, लुत्फ उठाओ कागजों का
- 55:07नहीं, शास्त्रों का नहीं। लुथफ उठाओ अपने अंत में बैठे हुए
- 55:15उस गुरु महाराज का ये बाहर नकली नकली गुरुओं का लुथफ मत उठाओ असली
- 55:23गुरु तुम्हारे भीतर बैठा। इसलिए माखन शाह लुगाना को
- 55:34प्रत्येक गुरु कहता मैं गुरु हूँ टेक जाओ जो तुमने सुख सुखी बताते
- 55:42नहीं के कितनी सुख सुखी तो माखन शाह लुगाना भीड़ को देखकर दो दो
- 55:48सबको टेक देते हैं। जो असली होगा बोल पड़ेगा।
- 55:56तकनीक काम कर गई किसने कहा सर्फियां बचीं हाँ सर्फियां तो
- 56:05बचीं। कहते एक वो सॉन्ग ने देखते हो ना
- 56:13छोटी सी कोठड़ी उसमें तेगु नाम का एक संत रहता है।
- 56:20बस दरवाजा कभी कभार ही खोलता है। उसको भी टेक दो चला दरवाजा हलके
- 56:32से पुश किया ऊपर गया गुरु तेग। वह अपनी मस्ती में बैठे थे लेव
- 56:41लगी थी उस दुश्म द्वार में। उस मस्ती का रस पीते हुए जहाँ
- 56:53राधा नष्टती है मधुअन में। राधिका
- 57:14गिरधर की मुरली। या बाजे रे मधुहन में राधिका
- 57:27नाचेरे। मस्ती के आलम में खोए बैठे हैं
- 57:38गुरु तेग बात। जब नूरानी चेहरा देखा तो माखनशाह
- 57:49लोवाना की आँखें ठहर गए। अरे इतना तेज?
- 57:58इतना शांत उसकी आत्मा ने कहा यही है गुरु, मैंने धीरे से जाकर
- 58:10प्रणाम किया, थोड़ी सी आहट हुई। गुरु तेग बहादुर ने आँखें खोली।
- 58:24उसने दो अशरफियाँ टेक दी महाराज प्रमाण करो गुरु तेग बहादर कहते
- 58:36हैं। जब गुरु ने प्रकट होना होता है तो
- 58:41खुद ही अपनी लीला रच लेता है। कोई लोग थोड़े था जीस व्यक्ति ने
- 58:55अपना सिर ही को वार्न कर दिया, वो द्रव्य का लोग करेगा।
- 59:01नहीं नहीं, कोई लोग नहीं थे। सिर्फ अपने आप को प्रकट करने के
- 59:08लिए उसने देखा कि ये बहुत भोंक के आये।
- 59:10बेचारा नवम गुरु मिल नहीं रहा तो मस्त सा लुभाना को कहते हैं।
- 59:19ये देख मेरा धंधा लहू लोहान जहाज को मैंने धोया सुखें सो ते दे में
- 59:27दो बस ये सिर्फ बताने का ढंग। माँ कंचा लगवाने का रोम रोम कपने
- 59:41लग गया दंडवत प्रणाम उसके चरणों में कर गया गुरुदेव मैं ऊपर जाके
- 59:50चिल्ला चिल्ला के कहूँगा लोगों से मत भटको ये नकली है।
- 59:57ये जो पंडाल लगाए बैठे हैं ये नकली हैं।
- 1:00:02इधर आ जाओ सा धोरे, गुरु, ला धोरे और संगत भाग के आई मंत्र मुग्ध हो
- 1:00:17गई। गुरु तेग बहादर को देखा।
- 1:00:22सा दो रे परमात्मा का स्वभाव नहीं है, इशा करना किस्से करेगा इशा
- 1:00:36दूसरा कोई है ही नहीं। इशा उसका स्वभाव नहीं है?
- 1:00:47परमात्मा तुमसे नफरत करता है परमात्मा तुमसे इज़ जी एस गॉट कभी
- 1:00:56तुमने देवी देवता कितनों की पूजा कर रहे हो तुम?
- 1:01:07इसलिए वह तुमसे ईर्ष्या करता है, तुम्हारी भेद बुद्धि से ईर्ष्या
- 1:01:16करता है तुमने एक के नाम पर बंटवारा कर दिया।
- 1:01:29ना यहूदी से, ना ईसाईयत से, ना इस्लामियत से, ना सिख।
- 1:01:35जिम से वह ईर्ष्या नहीं करता क्योंकि सबका परमात्मा एक है।
- 1:01:40तुम्हारे तो परमात्मा ही वी भक्त है।
- 1:01:44तुम्हारा परमात्मा ही विभक्त है, बटा हुआ है और विभक्त व्यक्ति
- 1:01:51पागल हो जाया करता है इसलिए तुम्हारा परमात्मा भी पागल है।
- 1:02:24काहेरे बन को जन जा। कर।
- 1:02:42अलेपा। सरबबयापी सदा अलेपा तोहे संग समा
- 1:02:59काहे रे? बन।
- 1:03:04खोजन जाए सर व्यापी, सदा अली पा तोहे संग समा।
- 1:03:22कहाँ? है रे बन को जन जाए।
- 1:03:44धन्यवाद।